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मधुमक्खी हमले से बचने के चक्कर में पिता-पुत्र की तालाब में डूबकर मौत

जगदलपुर करपावंड थाना क्षेत्र के ग्राम चोकनार में पिता-पुत्र की तालाब में डूबने से मौत हो गई. दोनों जंगल में शहद निकालने गए थे. इस दौरान मधुमक्खियों ने उनपर हमला कर दिया. मधुमक्खियों से बचने के लिए दोनों ने तालाब में छलांग लगा दी. तालाब में काफी देर तक डूबे रहने से उनकी मौत हो गई. काफी देर बाद भी उनके बाहर न निकलने पर ग्रामीणों ने तालाब में खोजबीन की और उनके शव को तालाब से बाहर निकाला. घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने मर्ग कायम कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और आगे की कार्रवाई में जुट गई है.

मध्य प्रदेश में श्रमिकों की आयु गणना के लिए जारी किए नए निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना अंतर्गत श्रमिक की आयु गणना के लिये श्रम विभाग द्वारा नवीन निर्देश जारी किये गये हैं। अब आयु गणना के लिये "आधार कार्ड के आधारपर" शब्द विलोपित किया गया है। आयु के प्रमाण के लिये परीक्षा लेने वाले बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान किया गया प्रमाण पत्र या अंकसूची या उस अंतिम विद्यालय द्वारा, जिसमें उसने अध्ययन किया, जारी किया गया विद्यालय छोड़ने का प्रमाण पत्र मान्य होगा। इसी तरह जन्म तथा मृत्यु के रजिस्ट्रार से प्रमाण पत्र एवं ग्राम पंचायत या मुख्य नगर पालिका अधिकारी से प्रमाण पत्र मान्य होगा। श्रम विभाग के अतिरिक्त सचिव श्री बसंत कुर्रे ने बताया है कि उपरोक्त प्रमाण-पत्रों के न होने पर उस चिकित्‌सा अधिकारी का प्रमाण पत्र, जो शासकीय सेवा में सहायक शल्य चिकित्सक की पदश्रेणी से निम्न पद श्रेणी का न हो का प्रमाण पत्र मान्य होगा। उक्त चारों दस्‌तावेजों अथवा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अन्य आयु संबंधी दस्तावेजों के परीक्षण उपरांत गुण-दोष के आधार पर आयु संबंधी निर्णय लिया जायेगा।  

दिल्ली-एनसीआर की हवा हुई खतरनाक, AQI 421 तक पहुंचा, खाप ने किसानों के खिलाफ केस पर उठाए सवाल

जींद दिवाली की रौनक अभी ठंडी भी न हुई थी कि जींद की हवा जहरीली हो चुकी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, मंगलवार शाम तक शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 421 तक पहुँच गया, जो 'गंभीर' श्रेणी में है। यह देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया, जबकि रेवाड़ी के धारूहेड़ा में AQI 412 दर्ज किया गया।  विशेषज्ञों का कहना है कि पटाखों का धुआँ और हवा में ठहराव मुख्य कारण हैं। हरियाणा के 22 शहरों में AQI 'खराब' से 'गंभीर' स्तर पर पहुँच गया, जिससे ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP-2) लागू हो गया। निर्माण कार्य सीमित हो गए हैं और प्रदूषण स्रोतों पर निगरानी तेज कर दी गई है। बिना लाइसेंस के 4 करोड़ के जले पटाखें  दिवाली से पहले जींद जिले में अवैध पटाखों की बिक्री चरम पर थी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बिना लाइसेंस के बिना लाइसेंस के 4 करोड़ के पटाखें जले हैं, जो मुख्य रूप से पड़ोसी राज्यों से लाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद 'ग्रीन पटाखों' की सीमित अनुमति का उल्लंघन हुआ। जिला प्रशासन ने कई दुकानों पर छापेमारी की, लेकिन अवैध व्यापारियों ने सड़कों और फुटपाथों पर बिक्री जारी रखी। इससे न केवल प्रदूषण बढ़ा, बल्कि आगजनी का खतरा भी मंडराया। पुलिस ने चेतावनी दी है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, जिसमें सामान जब्ती और जुर्माना शामिल है। किसानों पर पराली जलाने के 3 मुकदमे  जींद जिले में फसल अवशेष जलाने के 3 मामले सामने आए हैं। सफीदों सदर थाना पुलिस ने मुआना गांव के साहब सिंह के खिलाफ 19 अक्तूबर को फसल अवशेष जलाने का मामला कृषि अधिकारी अमित वर्मा की शिकायत पर दर्ज किया है। जींद सदर थाना पुलिस ने बड़ौदी गांव के रविंद्र के खिलाफ 20 अक्तूबर को फसल अवशेष जलाने का मामला कृषि विभाग में सहायक तकनीकी प्रबंधक ऋषि पाल की शिकायत पर दर्ज किया है जबकि नरवाना सदर थाना पुलिस ने दनौदा कलां गांव के किसान पवन के खिलाफ 11 अक्तूबर को फसल अवशेष जलाने का मामला दर्ज किया है। माजरा खाप का तीखा प्रहार: 'सरकार किसानों को बदनाम कर रही, पटाखों पर क्यों चुप? 'इस कार्रवाई पर माजरा खाप के प्रेस प्रवक्ता ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, "सरकार किसानों को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। जब सरकार पटाखे जलाने की इजाजत दे सकती है, तो किसानों को भी पराली जलाने की इजाजत देनी चाहिए।" प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि सैटेलाइट से किसानों की जलती पराली तो दिखाई देती है, लेकिन कंपनियों का धुआँ या दिवाली के पटाखों का धुआँ ट्रैक करने के लिए कोई सैटेलाइट क्यों नहीं? "अब कोई किसान पराली नहीं जलाता, लेकिन सरकार केवल किसानों को निशाना बना रही है।"  क्या कहते हैं विशेषज्ञ? वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों का मानना है कि पटाखों से PM2.5 का स्तर 675 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुँच गया, जो 2021 के बाद सबसे अधिक है।  पराली जलाने का योगदान 20-30% है, जबकि वाहन उत्सर्जन और उद्योग 50% से अधिक। सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्यों को चेतावनी दी है कि किसानों पर सख्ती के साथ वैकल्पिक प्रबंधन (जैसे सुपर एसएमएस मशीन) को बढ़ावा दें। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मास्क पहनें, बाहर कम निकलें और प्रदूषण स्रोतों से दूर रहें। अगले 48 घंटों में हवा की स्थिति और बिगड़ सकती है, इसलिए सतर्क रहें।  

रांची में छठ पूजा की धूम, DC ने घाटों पर की तैयारियों की समीक्षा

रांची झारखंड की राजधानी रांची में आगामी छठ पर्व को लेकर उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री ने जिला प्रशासन की पूरी टीम के साथ शहर के प्रमुख छठ घाटों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने घाटों पर सफाई व्यवस्था, सुरक्षा, प्रकाश, पेयजल, बैरिकेडिंग, यातायात प्रबंधन आदि की विस्तृत समीक्षा की। प्रशासनिक टीम ने कांके डैम, हटनिया तालाब, चडरी तालाब, बड़ा तालाब (रांची झील) और धुर्वा डैम जैसे प्रमुख छठ घाटों का स्थलीय निरीक्षण किया। उपायुक्त ने मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखने पर बल दिया। श्रद्धालु केवल सुरक्षित गहराई तक ही जल में प्रवेश करें भजंत्री ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए निर्देश दिया कि सभी प्रमुख घाटों पर पुलिस बल, एनडीआरएफ एवं एनडीआरएफ की टीमें तैनात रहें। उन्होंने घाटों पर सुरक्षा बैरिकेडिंग, गोताखोरों की मौजूदगी और कंट्रोल रूम की सक्रियता सुनिश्चित करने को कहा। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर भजंत्री ने अपील की है कि श्रद्धालु केवल सुरक्षित गहराई तक ही जल में प्रवेश करें। उन्होंने कहा है कि प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक सुरक्षा प्रबंध किए जा रहे हैं, परंतु सतर्कता और संयम भी उतने ही आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि वे छठ पर्व के दौरान प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, घाटों पर स्वच्छता बनाए रखें और सुरक्षा नियमों का पालन करें। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास से यह पर्व सुरक्षित, स्वच्छ और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न होगा। भजन्त्री ने नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी घाटों की साफ-सफाई, कचरा निस्तारण, एवं कीचड़ हटाने का कार्य पूर्ण किया जाए। साथ ही बिजली विभाग को सभी घाटों पर स्थायी व अस्थायी लाइट की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि अर्घ्य के समय श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो। निरीक्षण के क्रम में भजन्त्री ने विभिन्न घाटों पर उपस्थित पूजा समिति के सदस्यों से संवाद किया। उन्होंने घाटों पर स्थानीय प्रबंधों की जानकारी ली और सभी समितियों से कहा कि वे प्रशासन के साथ पूर्ण सहयोग करें। उन्होंने कहा कि आस्था का यह महापर्व जिला प्रशासन और स्थानीय समितियों के सहयोग से स्वच्छ, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराया जाएगा। भजन्त्री ने सिविल सर्जन को प्रत्येक प्रमुख घाट पर एम्बुलेंस और मेडिकल टीम की तैनाती करने के आदेश दिए हैं, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तुरंत चिकित्सीय सहायता मिल सके। निरीक्षण के दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची राकेश रंजन, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) राजेश्वरनाथ आलोक, अनुमंडल पदाधिकारी, सदर उत्कर्ष कुमार, पुलिस अधीक्षक, यातायात राकेश सिंह, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी उर्वशी पांडेय, नगर निगम, पथ निर्माण, बिजली, पीएचईडी तथा अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।  

बस्तर ओलिंपिक 2025: खेलों से शांति और समरसता का संदेश

रायपुर, छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातीय बाहुल्य बस्तर संभाग में युवाओं की ऊर्जा, उत्साह और प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से ‘बस्तर ओलंपिक 2025’ का आयोजन किया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में गृह (पुलिस) विभाग और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में होने वाला यह आयोजन प्रदेश के रजत जयंती वर्ष में बस्तर की नई पहचान बनेगा। बस्तर ओलंपिक 2025 के प्रति लोगों में उत्साह का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक बस्तर संभाग के 7 जिलों से 3 लाख 91 हजार 289 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। इनमें 1 लाख 63 हजार 668 पुरुष और 2 लाख 27 हजार 621 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। यह  संख्या न केवल बस्तर के युवाओं का खेलों के प्रति बढ़ते उत्साह को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि बस्तर की धरती पर अब खेल एक नई सामाजिक चेतना और समान भागीदारी का प्रतीक बन चुके हैं। बस्तर की खेल प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर लाने की पहल इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बस्तर के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना और उनके भीतर निहित नैसर्गिक खेल प्रतिभा को पहचानना है। यह पहल केवल खेल आयोजन नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास व संवाद का सेतु बनेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा था – “बस्तर ओलंपिक केवल एक खेल आयोजन नहीं है, यह ऐसा मंच है जहां विकास और खेल का संगम हो रहा है, जहां हमारे युवा अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं और एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं।"यह मॉडल पूरे देश में ‘खेल के माध्यम से शांति और विश्वास’ की अनूठी पहल के रूप में देखा जा रहा है। प्रतियोगिता में एथलेटिक्स, तीरंदाजी, फुटबॉल, बैडमिंटन, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, कराते, वेटलिफ्टिंग और हॉकी जैसे खेल शामिल हैं। इसमें न केवल आधुनिक खेलों को बढ़ावा दिया जाएगा, बल्कि स्थानीय परंपरा से जुड़े खिलाड़ियों को भी मंच मिलेगा। बस्तर ओलंपिक में जूनियर (14-17 वर्ष) और सीनियर वर्ग के अलावा विशेष श्रेणी के प्रतिभागियों—नक्सल हिंसा से दिव्यांग हुए व्यक्ति और आत्मसमर्पित नक्सलियों—को भी सम्मिलित किया जा रहा है। यह पहल खेल के माध्यम से पुनर्वास, पुनर्जीवन और सामाजिक एकीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। प्रतियोगिताएं तीन स्तरों—विकासखण्ड, जिला और संभाग स्तर—पर आयोजित हो रही हैं।  विकासखण्ड स्तर पर प्रतियोगिता 25 अक्टूबर से, जिला स्तर पर 5 नवम्बर से और संभाग स्तर पर 24 नवम्बर से आयोजित की जाएगी। विजेताओं को जिला और संभाग स्तर पर नगद पुरस्कार, मेडल, ट्रॉफी और शील्ड प्रदान की जाएगी। नगद राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से खिलाड़ियों के बैंक खाते में जमा की जाएगी। संभागीय स्तर के विजेता खिलाड़ियों को “बस्तर यूथ आइकॉन” के रूप में प्रचारित किया जाएगा। यह ‘स्पोर्ट्स फॉर पीस’ मॉडल बस्तर में नई सामाजिक चेतना का प्रतीक बनेगा। ‘बस्तर ओलंपिक 2025’ के लिए वन भैंसा और पहाड़ी मैना को शुभंकर (Mascot) बनाया गया है, जो बस्तर की जीवंतता और सामुदायिक शक्ति का प्रतीक हैं। यह आयोजन न केवल खेलों का, बल्कि बस्तर की संस्कृति, सौहार्द और विकास के नए युग का उत्सव बनेगा।

बदलियों को लेकर शिक्षा विभाग के आदेशों ने मचाई हलचल

लुधियाना डायरेक्टोरेट ऑफ स्कूल एजुकेशन (सैकेंडरी), पंजाब द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पत्र सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और सभी स्कूल प्रमुखों को जारी किया गया है जिसमें अध्यापक, कम्प्यूटर फेकल्टीज और नॉन-टीचिंग स्टाफ के ट्रांसफर आवेदनों की वेरिफिकेशन को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र के अनुसार, टीचर ट्रान्सफर पॉलिसी-2019 के तहत तबादलों की प्रक्रिया चल रही है और समय-समय पर इसमें संशोधन किए गए हैं। इसी तरह पंजाब आई.सी.टी. एजुकेशन सोसाइटी (पी.आई.सी.टी.ई.एस.) के अधीन कार्यरत कम्प्यूटर फैकल्टीज के लिए भी अलग ट्रांसफर पॉलिसी लागू की गई है। शिक्षा विभाग की अधिसूचना के अनुसार छूट प्राप्त श्रेणी के अंतर्गत आने वाले अध्यापक, कम्प्यूटर फेकल्टीज और नॉन-टीचिंग स्टाफ को अपनी जनरल डिटेल्स, रिजल्ट्स और सर्विस रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी भरने के लिए 8 अक्तूबर से 17 अक्तूबर तक का समय दिया गया था। तारीख की गलती ने करवाई किरकिरी हालांकि पत्र में वैरिफिकेशन की तारीख 21 अक्तूबर 2024 से 24 अक्तूबर 2024 लिखी गई है जबकि वर्तमान वर्ष 2025 चल रहा है। यह गलती इस बात का संकेत देती है कि विभाग अपने आधिकारिक दस्तावेजों की जांच और प्रूफ रीडिंग को लेकर कितना लापरवाह है। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्कूल प्रमुखों/ डी.डी.ओज को ईपंजाब पोर्टल पर स्टाफ मेन्यू में दिए गए ट्रांसफर एंड वैरिफिकेशन लिंक पर जाकर आवेदक द्वारा भरे गए डाटा की जांच करनी होगी। किसी भी त्रुटि की स्थिति में डाटा को सही कर एप्रूव बटन दबाना आवश्यक है। जिन स्कूलों या दफ्तरों में स्कूल प्रमुख/डी.डी.ओ. नहीं हैं, वहां कार्यरत सीनियर अध्यापक या कर्मचारी केवल ट्रांसफर प्रक्रिया के उद्देश्य से आवेदक का डाटा वैरिफाई करेंगे, ताकि समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा हो सके।

कांग्रेस ने माना तेजस्वी का लोहा — RJD को मिली बड़ी जीत, जानिए बिहार राजनीति में इसका मतलब क्या है

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव को आखिरकार सीएम फेस घोषित कर दिया है। कांग्रेस ने बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने पर विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के मुखिया मुकेश सहनी को भी डिप्टी सीएम बनाने का वादा किया है। कांग्रेस के वरीय नेता अशोक गहलोत ने गुरुवार को पटना में इंडिया अलायंस की पटना में हुई साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह ऐलान किया। बीते कुछ महीनों से कांग्रेस पार्टी तेजस्वी को मुख्यमंत्री का चेहरा मानने से परहेज कर रही थी। राहुल गांधी से लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेता तेजस्वी के सीएम फेस के सवाल को मीडिया के सामने टालते रहे। इस बीच महागठबंधन में सीट बंटवारे पर राजद, कांग्रेस और अन्य घटक दलों के बीच सहमति और असहमति का भी लंबा दौर चला। अंदरखाने से खबरें आईं कि कांग्रेस चुनाव रिजल्ट के बाद ही मुख्यमंत्री का चुनाव चाहती है। पटना में गुरुवार को महागठबंधन की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरीय नेता अशोक गहलोत ने पार्टी की ओर से बात रखी। गहलोत ने नेता प्रतिपक्ष को बिहार चुनाव में महागठबंधन का सीएम फेस घोषित करते हुए कहा, “तेजस्वी ने पिछली बार भी कमाल किया था। मगर मामूली वोटों के अंतर से उनकी सरकार बनते हुए रह गई थी।” उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एनडीए पर साम, दाम, दंड, भेद के बल पर तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनने से रोकने का भी आरोप लगाया। अशोक गहलोत ने कहा कि मीडिया की ओर से बार-बार सीएम फेस के बारे में सवाल किया जा रहा था, इसलिए आज घोषणा करनी पड़ी। कांग्रेस ने राजद के सामने डाले हथियार? दरअसल, कांग्रेस अब तक तेजस्वी यादव को महागठबंधन का सीएम फेस मानने से बचती रही। वोटर अधिकार यात्रा के दौरान पूर्णिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी से जब तेजस्वी पर सवाल किया था, तो उन्होंने गोलमोल जवाब दिया था। इससे पहले कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु समेत अन्य शीर्ष नेताओं ने भी बार-बार तेजस्वी को सीएम फेस घोषित करने के सवाल को टाला था। बिहार चुनाव के लिए पहले और दूसरे चरण के नामांकन के दौरान महागठबंधन की कलह खुलकर सामने आ गई थी। कुछ सीटों पर घटक दलों ने एक-दूसरे के सामने ही उम्मीदवार उतारकर दोस्ताना संघर्ष बना दिया। सुल्तानगंज, कहलगंव, वैशाली समेत कुछ सीटों पर कांग्रेस और राजद दोनों के उम्मीदवारों के नामांकन कर दिया। कांग्रेस ने बछवाड़ा और अन्य जगह पर लेफ्ट पार्टी सीपीआई के खिलाफ भी अपना प्रत्याशी उतारा। इस वजह से महागठबंधन में गांठ उलझती नजर आई। खासकर राजद और कांग्रेस के बीच सीटों पर तनातनी बढ़ने के बाद अशोक गहलोत को सुलह के लिए पटना भेजा गया। गहलोत ने पटना आने के बाद बुधवार को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद याजव और तेजस्वी से मुलाकात की। हालांकि, इस मुलाकात के तुरंत बाद उन्होंने कुछ खास नहीं बोला और कहा कि गुरुवार को महागठबंधन की साझा प्रेस वार्ता में स्पष्ट कर दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि महगठबंधन में उलझी हुई गांठ को अब सुलझा दिया गया है। कांग्रेस ने तेजस्वी को सीएम फेस घोषित करने के साथ ही सहनी को डिप्टी सीएम बनाने का वादा करके सारी कंफ्यूजन दूर कर दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब तक मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर टालमटोल करने वाली कांग्रेस ने आखिरकार लालू-तेजस्वी के सामने अपने हथियार डाल दिए। चुनाव में इसका क्या असर होगा यह 14 नवंबर को रिजल्ट आने के बाद साफ हो जाएगा।  

भव्य स्वागत: असम से गुड़गांव आए शहीदी नगर के कीर्तन ने बांधा लोगों का ध्यान

गुड़गांव सिख धर्म के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत के अवसर पर असम के डुबरी साहिब गुरुद्वारे से महान शहीदी नगर कीर्तन का आयोजन किया गया। यह नगर कीर्तन देश के विभिन्न राज्यों से होता हुआ करीब एक महीने का सफर तय करते हुए देर रात गुड़गांव पहुंचा। नगर कीर्तन के गुड़गांव पहुंचने पर सिख संगत ने नगर कीर्तन का भव्य स्वागत किया। नगर कीर्तन के भव्य स्वागत के लिए गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा सिविल लाइन्स की तरफ से विशेष व्यवस्था राजीव चौक पर की गई। यहां संगत ने शबद कीर्तन करते हुए नगर कीर्तन का स्वागत किया और गुरु का आर्शीवाद प्राप्त किया। गुड़गांव में कार्यक्रम के आयोजक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा कमेटी के प्रबंधक शेरदिल सिद्धू ने कहा कि यह हमारा साैभाग्य है कि स्वयं गुरु हमें दर्शन देने के लिए गुड़गांव आए हैं। नगर कीर्तन में गुरु तेग बहादुर जी के शस्त्र भी लाए गए थे जिनके दर्शन का सौभाग्य पूरी संगत को प्राप्त हुआ।   इस अवसर पर सिख संगत ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने जो देश के लिए बलिदान दिया है उसे कोई भी भुला नहीं सकता। इस बार गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को 350 साल हो गए हैं और यह शहीदी दिवस इस बार पूरे संसार में एक मिसाल के तौर पर मनाया जा रहा है। आज महान शहीदी नगर कीर्तन के गुड़गांव पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। आपको बता दें कि नगर कीर्तन के स्वागत के लिए पिछले कई दिनों से गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सिविल लाइन्स की तरफ से तैयारी की जा रही थी। नगर कीर्तन के राजस्थान की सीमा से गुड़गांव की सीमा में प्रवेश करते ही गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की तरफ से खास व्यवस्था की गई। पायलट गाड़ी के जरिए नगर कीर्तन को गुड़गांव के राजीव चौक तक लाया गया जहां संगत ने गुरु तेग बहादुर जी के शस्त्रों के दर्शन करने के साथ ही आर्शीवाद प्राप्त किया। नगर कीर्तन की अगुवाई पंज प्यारों ने की। इसके बाद नगर कीर्तन को द्रोणाचार्य मेट्रो स्टेशन के पास तक संगत विदा करके आई जिसके बाद दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा दिल्ली ले जाया गया। यहां निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दिल्ली में ही ठहराव होगा और इसके बाद यह नगर कीर्तन आनंदपुर साहिब के लिए रवाना हो जाएगा। 24 नवंबर को गुरु तेग बहादुर जी की शहादत दिवस के अवसर पर यह नगर कीर्तन आनंदपुर साहिब में सम्पन्न हो जाएगा।  

भाखड़ा बांध सुरक्षा अब CISF के हाथ में, जल आपूर्ति पर पूरी निगरानी

पंजाब  नंगल में भाखड़ा डैम प्रोजेक्ट की सुरक्षा अब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) संभालेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मई में इस काम के लिए CISF के 296 सशस्त्र सुरक्षा कर्मचारियों को तैनात करने की मंजूरी दी थी। इसके तहत नंगल टाउनशिप में CISF को प्रोजेक्ट में शामिल करने के लिए एक समारोह का आयोजन किया गया। भाखड़ा डैम सतलुज नदी पर स्थित है और 261 मीटर की ऊंचाई वाले टीहरी डैम के बाद 225.55 मीटर ऊंचाई के साथ एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा डैम है। जल संग्रहण क्षमता के मामले में यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा डैम है, पहला इंदिरा सागर डैम, मध्य प्रदेश में स्थित है। ध्यान देने योग्य है कि केंद्रीय सरकार के इस फैसले के विरोध में पंजाब विधानसभा ने जुलाई में भाखड़ा-नंगल डैम प्रोजेक्ट पर CISF कर्मचारियों की तैनाती के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया था। इससे पहले डैम की सुरक्षा पंजाब पुलिस द्वारा की जा रही थी। इस कदम का उद्देश्य डैम के सुरक्षा मानकों को और मजबूत करना और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव सुनिश्चित करना बताया गया है। 

गजमार पहाड़ की नई पहचान: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया विकास कार्यों का अवलोकन

रायपुर, प्रदेश के वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी ने रायगढ़ के गजमार पहाड़ स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर परिसर में जारी सौंदर्यीकरण एवं अन्य विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। इस अवसर पर कलेक्टर रायगढ एवं डीएफओ रायगढ़ उपस्थित रहे।              पर्यटन के एक नए केंद्र के रूप में भी विकसित होगा          निरीक्षण के दौरान वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि शासन की योजनाओं का केवल निर्माण तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन ही असली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य जनसामान्य को वास्तविक लाभ पहुंचाना है और इसके लिए योजनाओं का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने कहा कि हनुमान मंदिर परिसर में हो रहे सौंदर्यीकरण कार्यों से न केवल धार्मिक पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के एक नए केंद्र के रूप में भी विकसित हो सकेगा। उन्होंने कहा कि गजमार पहाड़ी रायगढ़ की शान है। ऐसा स्थल शहर के बीच इतनी ऊँचाई और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ बहुत कम जगहों पर देखने को मिलता है। गजमार पहाड़ी इको टूरिज्म स्थल के रूप में होगा विकसित             वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी की पहल पर रायगढ़ जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक और आस्था का केंद्र गजमार पहाड़ी स्थित हनुमान धाम अब आधुनिक स्वरूप में इको पार्क और इको टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित होगा। बीते दिवस वित्त मंत्री श्री चौधरी ने 08 करोड़ रुपए की लागत से यहां होने वाले विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का भूमि पूजन किया था। गजमार पहाड़ी मंदिर विकास योजना की जानकारी देते हुए डीएफओ ने कहा कि विभागीय मार्गदर्शन और सुव्यवस्थित योजना के तहत पहाड़ मंदिर को नया स्वरूप दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां श्रद्धालु एवं पर्यटक आसानी से ऊपर तक पहुंच सकें, इसके लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। जिसके तहत स्वीकृत सीढ़ियों का विकास कार्य, अवेयरनेस एक्टिविटी के लिए ओपन प्लेटफार्म का निर्माण किया जा रहा है। वाच टॉवर, चिल्ड्रन एरिया और कैंटीन जैसी सुविधाओं से पर्यटकों और श्रद्धालुओं को मिलेगा      साथ ही वाच टॉवर, चिल्ड्रन एक्टिविटी एरिया, कैन्टीन, पैगोड़ा, पब्लिक वाशरुम, वाश एरिया निर्माण, यूटिलिटी एरिया, पार्किंग एवं प्रवेश स्थल का विकास कार्य, पाथ-वे निर्माण एवं प्रवेश द्वार निर्माण कार्य हो रहा है। इन सभी सुविधाओं के विकसित हो जाने पर गजमार पहाड़ी न केवल धार्मिक स्थल के रूप में, बल्कि पर्यटन और स्वास्थ्य गतिविधियों के दृष्टिकोण से भी एक आकर्षक गंतव्य बन जाएगा।