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दिल दहला देने वाला दृश्य: हादसे में नवजोत सिंह की मौत, पत्नी स्ट्रेचर पर घायल

नई दिल्ली काश वो घर से निकले ही न होते। काश कुछ सेकंड पहले उनकी बाइक वहां से निकल गई होती। काश ये सब एक बुरा सपना हो, और आंखें खोलते ही नवजोत सिंह अपने परिवार के पास हों। यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक परिवार का दर्द है जो दिल्ली की सड़कों पर बिखर गया। धौला कुआं के पास, एक बीएमडब्ल्यू की तेज रफ्तार ने 52 साल के नवजोत सिंह की जिंदगी छीन ली और उनकी पत्नी संदीप की दुनिया को एक झटके में उजाड़ दिया। गुरुद्वारा बंगला साहिब से लौटते समय उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि उनकी जिंदगी का सफर कुछ ही किलोमीटर में खत्म हो जाएगा। परिवार का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर पास के अस्पताल की बजाय दूर ले जाया गया और एक छोटे से अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। अगर समय पर इलाज मिल जाता, तो शायद आज नवजोत सिंह जिंदा होते। लेकिन सबसे दर्दनाक दृश्य वो था, जब संदीप ने अपने बेजान पति को आखिरी बार देखा। वह खुद स्ट्रेचर पर थीं और उनके बगल में उनके पति का शव था। उस पल जब उन्होंने अपने पति को आखिरी बार छूने की कोशिश की, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। यह सिर्फ संदीप का दर्द नहीं था, बल्कि हर उस व्यक्ति का दर्द था जो यह समझ सकता है कि एक पल में कैसे किसी की दुनिया तबाह हो सकती है। यह तस्वीर हर किसी के दिल को झकझोर देती है। पत्नी बार-बार लगाती रही गुहार, फिर भी नहीं मानी बात संदीप ने अपनी शिकायत में कहा है कि हादसे के बाद उनके पति बेहोश हो गए थे। वह बार-बार गाड़ी चलाने वालों से गुहार लगाती रहीं कि उन्हें पास के किसी अस्पताल ले जाया जाए। उन्हें इलाज की तुरंत जरूरत है। लेकिन वह लोग नहीं माने और कई किलोमीटर दूर एक छोटे से अस्पताल ले गए। नवजोत सिंह वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी थे। मंगलवार को उनके परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। नवजोत सिंह के पार्थिव शरीर को पहले द्वारका के वेंकटेश्वर अस्पताल ले जाया गया, जहां दुर्घटना में घायल उनकी पत्नी का इलाज किया जा रहा है। परिवार के सदस्यों द्वारा अस्पताल में श्रद्धांजलि देने के बाद, पार्थिव शरीर को उनके हरि नगर स्थित आवास पर लाया गया और बाद में अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग में उप सचिव सिंह की मोटरसाइकिल को रविवार दोपहर एक बीएमडब्ल्यू कार ने टक्कर मार दी थी। वह अपनी पत्नी के साथ गुरुद्वारा बंगला साहिब से घर लौट रहे थे। शराब के नशे में नहीं थी आरोपी महिला इस घटना में सिंह की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस ने बताया कि घटना के दौरान कार चला रही गगनप्रीत के साथ उसके पति, दो बच्चे और एक घरेलू सहायिका भी थी। गुरुग्राम में रहने वाला यह परिवार विनिर्माण का कारोबार करता है। पुलिस के अनुसार, गगनप्रीत की रक्त जांच रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि हादसे के दौरान वह शराब के नशे में नहीं थी। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उसे सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में शहर की एक अदालत ने दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

मंत्री सारंग ने किया राजा भोज मल्टी क्लास सेलिंग चैंपियनशिप का शुभारंभ

2036 ओलंपिक की मेजबानी भारत को मिलने पर भोपाल और मध्यप्रदेश में वॉटर स्पोर्ट्स इवेंट्स के लिये बेहतर अवसर : मंत्री श्री सारंग भोपाल  खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने मंगलवार को अपर लेक खानूगांव में राजा भोज मल्टी क्लास सेलिंग चैंपियनशिप 2025 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मंत्री श्री सारंग ने कहा कि भोपाल सिर्फ ताल-तलैयों की नगरी ही नहीं, बल्कि वॉटर स्पोर्ट्स का एक उभरता हुआ वैश्विक गंतव्य है। मध्यप्रदेश वॉटर स्पोर्ट्स में देश का अग्रणी राज्य है। इसका प्रमाण श्रीनगर में आयोजित देश के पहले खेलो इंडिया वॉटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल में हमारे खिलाड़ियों द्वारा अर्जित की गई सफलता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने अनेक पदक जीतकर राज्य का मान बढ़ाया है। कार्यक्रम में जीओसी पीएम सब एरिया, मेजर जनरल श्री सुमित काब्थियाल, कमोडोर ईएमई ईसी ब्रिगेडियर श्री अनिल दास, एसएम (सेवानिवृत्त) वाइस प्रेसिडेंट वायएआई मेजर जनरल सोमा पिल्लई, ब्रिगेडियर जी.एस. जुलका (सेवानिवृत्त) सहित सेना एवं खेल विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे। 2036 ओलंपिक आयोजन में मध्यप्रदेश की संभावनाएं मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों के लिए एक सकारात्मक और सशक्त वातावरण बना है। भारत 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। यदि भारत को यह अवसर मिलता है, तो मध्यप्रदेश में शूटिंग, घुड़सवारी और विशेषत: वॉटर स्पोर्ट्स के आयोजन के लिये उत्कृष्ट अधोसंरचना उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि भोपाल का बड़ा तालाब और मां नर्मदा का तट अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान हैं। इस दिशा में उन्होंने केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से भी आग्रह किया है कि मध्यप्रदेश को वॉटर स्पोर्ट्स के आयोजन का प्रमुख केंद्र बनाया जाए। सेना और खेल विभाग मिलकर करेंगे वॉटर स्पोर्ट्स का विकास मंत्री श्री सारंग ने कहा कि खानूगांव अपर लेक पर आर्मी ने वॉटर स्पोर्ट्स की आधुनिक अधोसंरचना विकसित की है। इसे और बेहतर बनाने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग, भारतीय नौकायन संघ (Yachting Association of India) और आर्मी मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि इस संयुक्त प्रयास से भोपाल को देश का वॉटर स्पोर्ट्स हब बनाने की दिशा में कार्य करेंगे। युवाओं को मिलेगा मंच : नई प्रतिभाओं का होगा विकास मंत्री श्री सारंग ने कहा कि खेल युवाओं के व्यक्तित्व विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। खेलों से न केवल शारीरिक दक्षता और अनुशासन बढ़ता है बल्कि जीवन में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता भी विकसित होती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं युवाओं को अनेक अवसर प्रदान करती है और भविष्य के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने में सहायक होती है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ भी दीं। प्रतियोगिता की विशेषताएँ यह प्रतियोगिता भारतीय नौकायन संघ की रैंकिंग प्रतियोगिता है। प्रतियोगिता 21 सितम्बर तक चलेगी और इसमें भोपाल, शिलॉन्ग, चेन्नई, सिकंदराबाद, कोच्चिन और मुंबई सहित 13 प्रमुख शहरों के खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ी ओप्टिमिस्ट (अंडर 16), टेक्नो (अंडर 15), आईएलसीए4 (अंडर 18), आईक्यू फोइल (अंडर 19), 420 मिक्स्ड (अंडर 19) और 29 ईआर (अंडर 19) वर्गों में अपने खेल कौशल का प्रदर्शन करेंगे। 

सोलर संयंत्र स्‍थापना में लापरवाही बरतने वाले वेंडरों को चयन सूची से हटाया गया

भोपाल मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत सोलर संयंत्र स्‍थापना में लापरवाही करने वाले वेंडरों को चयन सूची से हटाने की कार्रवाई की गई है। कंपनी द्वारा विगत 2 वर्षों से लगातार वेंडरों को उनके द्वारा स्‍थापित किये गये सोलर संयंत्र के सभी प्रोजेक्ट्स का मध्‍यक्षेत्र कंपनी के सर्वर के साथ 100 प्रतिशत कम्युनिकेशन कराये जाने के लिये पत्राचार करने के बावजूद कतिपय वेंडरों द्वारा कंपनी के दिशा-निर्देशों की अवेहलना की जाने पर उनका पंजीयन निष्क्रिय किया गया है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के सोलर संयंत्र स्थापित होने के उपरांत सोलर वेंडरों की लापरवाही से मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सर्वर के साथ कम्युनिकेशन नहीं होने के कारण कंपनी के मीटर रीडर द्वारा उपभोक्ताओं के परिसर में जाकर मीटर की ऑफलाइन रीडिंग लेने से उपभोक्ताओं में असंतोष के साथ ही रीडिंग में त्रुटि होने की संभावना बनी रहती है। साथ ही योजना के उदेश्‍यपूर्ण परिणाम नहीं मिल रहे हैं। इसी के दृष्टिगत कंपनी द्वारा ऐसे वेंडरों को पीएम सूर्य घर योजना के पोर्टल पर प्रदर्शित हो रही सूची से हटाये जाने की कार्यवाही की जा रही है। कंपनी ने सभी विद्युत उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत नवीन आवेदन करने के दौरान निष्क्रिय पंजीयन वाले वेंडरों का चयन न करें। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा लापरवाही बरतने वाले जिन सोलर वेंडरों का पंजीयन निष्क्रिय किया गया है, उनमें सूर्याय नमः एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, प्रतिष्ठा एंटरप्राइजेज, भगवती कृपा सोलर पावर प्राइवेट लिमिटेड, इक्विपोलेंट एनर्जी सॉल्यूशंस कंसल्टेंसी ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड, लाभ ग्रीन एनर्जी, सेंटौर पॉवर्स एंड सोलर एनर्जी, स्पार्कल एनर्जी सॉल्यूशन, माँ रीवा एंटरप्राइजेज, बटेश्वर सोलर प्राइवेट लिमिटेड, लाइटहाउस एनर्जी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, नायक सोलर सॉल्यूशन, एन्हांस मल्टी ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड, एकेएन पावर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सर्वोटेक पावर सिस्टम्स लिमिटेड, एसयू-विट्र टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, आदित्य सोलर सॉल्यूशंस, अस्तित्व एनर्जीज़, एनर्जी सॉल्यूशन सर्विसेज़, हेडस्ट्रीम इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड ओपीसी, के के इंजीनियर्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स, सोलरसेंस इको एनर्जी सॉल्यूशंस, साउदर्नलाइट सोलर एलएलपी एवं तिरुहरि इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का क्रियान्वयन मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा नोडल एजेंसी के रूप में किया जा रहा है। योजना में कंपनी अंतर्गत पंजीकृत वेंडरों के माध्यम से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है।  

जीतनराम मांझी का बड़ा बयान: एनडीए से मांगी 15 सीटें, चुनाव को बताया करो या मरो

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए में सीट शेयरिंग पर घमासान छिड़ा हुआ है। केंद्रीय मंत्री एवं हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) के सुप्रीमो जीतनराम मांझी कम से कम 15 सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं। मांझी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नेताओं को यह तक कह दिया है कि वह 15 सीटों के लिए भीख मांग रहे हैं, क्योंकि उनके लिए इस बार करो या मरो की स्थिति है। मांझी ने सहयोगियों पर दबाव बढ़ाते हुए यह भी कहा कि अगर उनकी मांग के अनुसार सीटें नहीं मिली तो हम पार्टी आगामी बिहार चुनाव में 100 सीटों पर अकेले लड़ जाएगी। हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) के संरक्षक जीतनराम मांझी ने सोमवार को पटना में मीडिया से बातचीत में कहा कि वह अपनी पार्टी के लिए एनडीए में 15 से 20 सीटों की मांग कर रहे हैं। इस मांग के पीछे पार्टी की मान्यता बड़ी वजह है। हम पार्टी बीते 10 सालों से निबंधित पार्टी है, अभी तक उसे प्रदेश स्तरीय राजनीतिक दल की मान्यता नहीं मिल पाई है। उसे मान्यता दिलाने के लिए कम से कम 7-8 विधायक या 6 प्रतिशत वोट होना जरूरी है। मांझी ने एनडीए के नेताओं से कहा कि कम से कम हम पार्टी को इतनी सीटें दें कि बिहार विधानसभा में मान्यता प्राप्त पार्टी का दर्जा मिल जाए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह अपनी पार्टी की मान्यता के लिए एनडीए के नेताओं से भीख मांग रहे हैं, इन सीटों पर उनका कोई दावा नहीं है। अगर कम से कम 15 सीटें लड़ने के लिए मिलेंगी, तभी 8-10 सीटें जीतकर हम मान्यता प्राप्त पार्टी बन सकेगी। गौरतलब है कि हिंदुस्तान आवाम मोर्चा ने 2020 विधान सभा चुनाव में एनडीए के साथ मिलकर 7 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। उनमें से मांझी की पार्टी ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की थी। पार्टी को 0.89 फीसदी वोट मिले थे। जीतनराम मांझी 2024 में गया से लोकसभा सांसद चुने गए और नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री भी हैं। हालांकि, उनकी पार्टी अभी तक बिहार में 6 प्रतिशत वोट हासिल करने में कामयाब नहीं हो पाई है। दरअसल, चुनाव आयोग से मान्यता मिलने के बाद राजनीतिक दल को कई तरह की सुविधाएं मिल जाती हैं। मान्यता प्राप्त पार्टी का चुनाव चिह्न स्थायी हो जाता है। साथ ही चुनाव में अधिकतम 40 स्टार प्रचारक रखने की मंजूरी मिल जाती है। इसके अलावा टीवी और रेडियो पर राजनीतिक प्रसारण का टाइम स्लॉट और वोटर लिस्ट हासिल करने जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।

नगरीय प्रशासन संचालनालय में योग शिविर का आयोजन

भोपाल  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालनालय पालिका भवन में एक विशेष योग प्रशिक्षण शिविर का आयोजन मंगलवार को किया गया। यह कार्यक्रम विभाग के आयुक्त श्री संकेत भोंडवे की पहल पर आयोजित किया गया। इनका उद्देश्य कर्मचारियों एवं अधिकारियों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखने की दिशा में जागरूक करना था। इस योग शिविर का संचालन सुप्रसिद्ध योग प्रशिक्षिका सुश्री अंजना श्रीवास्तव द्वारा किया गया। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों व कर्मचारियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम तथा ध्यान की तकनीकों का अभ्यास कराया और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने योग अभ्यास में उत्साहपूर्वक भाग लिया और नियमित योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। यह निःशुल्क योग शिविर "मिशन कर्मयोगी" के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य शासन के कर्मियों को न केवल दक्ष बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की दिशा में प्रेरित करना है। आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने योग प्रशिक्षिका सुश्री अंजना श्रीवास्तव का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी इस प्रकार के स्वास्थ्यवर्धक आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने की बात कही।  

निर्वाचक नामावली को त्रुटिरहित बनाये रखने के साथ समावेशी पंजीकरण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक: मुख्य निर्वाचन अधिकारी

लखनऊ  आज उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम), लखनऊ में उत्तर प्रदेश के समस्त 75 जनपदों में प्रत्येक जनपद से एक सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं एक बूथ लेवल अधिकारी को निर्वाचक नामावली से संबंधित विधिक प्राविधानों, ईआरओ नेट, बीएलओ ऐप, विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण की प्रक्रियाओं के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान किया गया।     मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवदीप रिणवा ने उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि हर पात्र नागरिक का नाम निर्वाचक नामावली में दर्ज हो, यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि निर्वाचक नामावली को त्रुटिरहित बनाये रखने के साथ समावेशी पंजीकरण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। प्रशिक्षण में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों एवं बूथ लेवल अधिकारियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम-1960, मैनुअल ऑन इलेक्टोरल रोल-2023 में उल्लिखित विधिक दायित्वों, बीएलओ और सुपरवाइजरों के साथ समन्वय, निर्वाचक नामावली में दावे-आपत्तियों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण, ईआरओ नेट और बीएलओ ऐप के तकनीकी पक्षों तथा फील्ड अनुश्रवण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।      मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण प्राप्त एईआरओ तथा बीएलओ मास्टर टेªनर के रूप में अपने-अपने विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में अपने समकक्ष एवं अधीनस्थ एईआरओ, बीएलओ और सुपरवाइजरों को भी छोटे-छोटे समूहों में प्रशिक्षित करें, ताकि प्रत्येक स्तर पर प्रक्रिया की गुणवत्ता बनी रहे। उन्होंने मतदाताओं की सुविधा हेतु मतदेय स्थलों में नए अनुभागों के गठन के संबंध में परीक्षण कराते हुए नियमानुसार कार्यवाही किये जाने के भी निर्देश दिए।     आगामी विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के संबंध में अवगत कराते हुए विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के दृष्टिगत वर्ष 2003 की निर्वाचक नामावली को वर्ष 2025 की निर्वाचक नामावली के साथ मैपिंग किए जाने से संबंधित प्रक्रिया से अवगत कराया गया। बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर गणना-प्रपत्र वितरित करने, भरने में सहयोग करने/एकत्रित करने/मतदाता का सत्यापन तथा उसे बीएलओ ऐप पर अपलोड करने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।      पूर्व में प्रदेश के 75 जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं समस्त 403 विधानसभाओं के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को विभिन्न चरणांे में प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। आज के प्रशिक्षण सत्र के प्रत्येक जनपद में से एक एईआरओ तथा एक बीएलओ को मास्टर टेªनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जो अपने जनपद में अन्य समस्त एईआरओ तथा बीएलओ को प्रशिक्षण प्रदान करेगें।

राष्ट्रीय पोषण माह अभियान 17 सितम्बर से 16 अक्टूबर तक

भोपाल  मिशन पोषण 2.0 के तहत मध्यप्रदेश में 17 सितम्बर से 16 अक्टूबर 2025 तक राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जाएगा। इस वर्ष का आयोजन आठवाँ पोषण माह होगा, जिसमें राज्य, जिला, परियोजना और आंगनबाड़ी स्तर तक सामुदायिक सहभागिता से थीम-आधारित गतिविधियाँ संचालित होंगी। पोषण माह की प्रमुख थीम हैं मोटापा नियंत्रण (कम नमक, कम चीनी, कम तेल), प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (पोषण भी पढ़ाई भी), शिशु एवं बाल आहार प्रथाएँ (IYCF), पुरुष सहभागिता (Men-streaming) और एक पेड़ माँ के नाम एवं स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा। पोषण माह के दौरान आईवाईसीएफ परामर्श सत्र, व्यंजन प्रतियोगिता, फिटनेस चैलेंज, योग दिवस, किचन गार्डन अभियान तथा स्थानीय उत्पादों का प्रचार जैसी गतिविधियाँ होंगी। “पोषण भी पढ़ाई भी” थीम के तहत आंगनबाड़ियों में स्टोरी टेलिंग, पपेट शो और एक्टिविटी आधारित शिक्षण कार्यक्रम आयोजित होंगे। जन-जागरूकता के लिए नुक्कड़ नाटक, रेडियो जिंगल्स, सोशल मीडिया अभियान (#PoshanMaah2025) और सामुदायिक रेडियो का उपयोग किया जाएगा। स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत, कृषि, खाद्य, आयुष, जल जीवन मिशन, खेल एवं युवा कल्याण सहित विभिन्न विभागों और स्थानीय अशासकीय संगठनों की सहभागिता से यह अभियान सुपोषित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। 

आयुष विभाग को उत्कृष्ट कार्यों के लिए मिलेगा प्रतिष्ठित स्कॉच अवॉर्ड – 2025

भोपाल आयुष विभाग को प्रतिष्ठित "स्कॉच अवार्ड-2025" सम्मान आयुष ई-मॉनिटरिंग सिस्टम' परियोजना के सफल क्रियान्वयन एवं उत्कृष्ट परिणाम के लिए प्रदान किया गया है। यह अवार्ड तीन चरणों की विस्तृत प्रस्तुतियाँ और दो चरणों की सार्वजनिक डिजिटल वोटिंग के बाद प्रदान किया गया, जो इस उपलब्धि की पारदर्शिता और गुणवत्ता की और अधिक प्रमाणित करता है। "स्कॉच अवॉर्ड-2025" का वितरण नई दिल्ली में आयोजित होने वाले स्कॉच समिट में मिलेगा। आयुष विभाग, राज्य सरकार की मंशानुरूप परंपरागत चिकित्सा पद्धति को मुख्य धारा में लाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ क्रियाशील है। आयुष विभाग, आयुर्वेद जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धति को आधुनिक चिकित्सा पद्धति के समकक्ष स्थापित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। आयुष विभाग को देश के प्रतिष्ठित स्कॉच अवॉर्ड 2025 से नवाजा जाना, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। यह अवॉर्ड, टीम भावना, नवाचार और उत्कृष्ट कार्यों सहित विविध मानको पर खरा उतरने पर दिया जाता है। आयुष ई-मॉनिटरिंग के मुख्य उद्देश्य आयुष ई-मॉनिटरिंग के मुख्य उद्देश्य प्रदेश के आयुष चिकित्सालयों और चिकित्सा महावि‌द्यालयों में OPD में अधिकतम वृद्धि करना, अधिक से अधिक नागरिकों की आयुष सुविधा कवरेज में लाना, लोगों को स्वस्थ एवं रोगमुक्त बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण आयुष सेवाएं उपलब्ध कराना है। आयुष विभाग में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक माह में दो बार वीडियो कॉन्फ्रेसिंग (VC) कर सभी आयुष चिकित्सा अधिकारियों एवं आयुष मेडिकल कॉलेज के साथ अनुभव साझा करना एवं समस्याओं का समाधान, कठोर निगरानी और मूल्यांकन हर केंद्र के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा अनुभव करना एवं श्रेष्ठ प्रथाओं को बढ़ावा देना, प्रत्येक आयुष सुविधा की रैंकिंग प्रकाशित करना, प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण तैयार कर गुणवत्ता बढ़ाना, आयुष अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना, अस्पतालों और कॉलेजों में आधुनिक सुविधाओं का विकास करना जैसे अनेक नवाचार अपनाए है। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने आयुष विभाग को प्रतिष्ठित स्कॉच अवाई- 2025 मिलने पर हर्ष व्यक्त करते आयुष विभाग को स्कॉप अवॉर्ड 2025" मिलना, प्रदेश के लिए गौरव की बात बताई है। मंत्री श्री परमार ने विभाग की इस उपलब्धि के पीछे टीम भावना नवाचार और उत्कृष्ट कार्यों का क्रियान्वयन बताया है, जिससे नागरिकों को समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्राप्त हो रही है। प्रमुख सचिव आयुष श्री डी.पी. आहूजा ने बताया कि "आयुष ई-मॉनिटरिंग ने पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है तथा राज्य के स्वास्थ्य तंत्र में आयुष चिकित्सा की सुलभता और गुणवत्ता को नई ऊंचाईयों तक पहुंचाया है। श्री आहूजा ने बताया कि अपर सचिव आयुष श्री संजय मिश्रा की सतत निगरानी एवं समन्वय ने विभाग की इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से ई-मानिटरिंग सिस्टम के सभी घटकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ जिससे राज्यभर में आयुष सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ हैं।  

नो-एंट्री ज़ोन में ट्रक कैसे घुसा? इंदौर हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, कमिश्नर से जवाब तलब

जबलपुर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यामूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने इंदौर एयरपोर्ट रोड पर हुए भीषण हादसे के मामले में स्वत: संज्ञान आधार पर सुनवाई प्रारंभ की है। मंगलवार को प्रारंभिक सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इंदौर के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे 23 सितंबर को वर्चुअल हाजिर होकर स्पष्टीकरण दें। उन्हें यह साफ करना होगा कि शहर में नो-एंट्री होते हुए ट्रक कैसे घुस गया और बिना किसी रोक-टोक के इतने आगे तक कैसे पहुंच गया। कोर्ट ने प्रशासन की बड़ी विफलता माना कोर्ट ने इसे कानून-व्यवस्था और प्रशासन की बड़ी विफलता माना है। अदालत ने कहा कि अगर नियमों का कड़ाई से पालन हुआ होता, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था। कोर्ट ने गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब सड़क सुरक्षा के सख्त नियम मौजूद हैं, तो इस तरह के हादसे होना बेहद चिंताजनक है। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई सुनिश्चित की हाई कोर्ट ने इंदौर के दर्दनाक हादसे को लेकर प्रकाशित समाचार पर संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई की व्यवस्था दी है। राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली खड़े हुए। उन्होंने अवगत कराया कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई सुनिश्चित की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगामी सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत कर दी जाएगी। क्या है मामला? उल्लेखनीय है कि सोमवार शाम तेज रफ्तार ट्रक ने इंदौर में एयरपोर्ट रोड पर कोहराम मचा दिया था। उसने लगभग एक किलोमीटर तक कई वाहनों को टक्कर मारी। वहीं कुचले जाने से दो लोगों की मौके पर ही मौत तक हो गई। जबकि एक युवक ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। 12 घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

चीता परियोजना के सफल तीन वर्ष: प्रोजेक्ट चीता को ‘इनोवेटिव इनिशिएटिव्स अवॉर्ड’

चीता परियोजना की सफलता से मध्यप्रदेश बना एशिया का गौरव   भोपाल  पालपुर कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बढ़ते चीतों के परिवार के साथ मध्यप्रदेश एशिया का गौरव बन गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर 3 वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश को चीता परियोजना की सौगात मिली थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 17 सितम्बर 2022 को अपने जन्म दिवस पर पहले पालपुर कूनो में चीते छोड़कर प्रोजेक्ट की शुरूआत की थी। आज चीतों के परिवारों में वृद्ध‍ि हो रही है। 'प्रोजेक्ट चीता को ‘इनोवेटिव इनिशिएटिव्स अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार हाल ही में नई दिल्ली में आईएफएस एसोसिएशन और इंडियन मास्टरमाइंड्स द्वारा आयोजित तीसरे इको वॉरियर अवॉर्ड्स कार्यक्रम में प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अवॉर्ड मिलने पर चीता परियोजना से जुड़ी प्रबंधन टीम को बधाई दी है। तीन वर्षों की साहसिक पहल प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाकर हुई। इसने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तत्काल ध्यान आकर्षित किया। कई शंकाएँ भी उठीं कि भारतीय वातावरण चीता के लिए उपयुक्त नहीं है। इस अवधारणा को तोड़ते हुए कूनो पालपुर और गांधी सागर अभयारण में चीते फर्राटे भर रहे है और उनकी संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। चीतो को भायी म.प्र. की आवोहवा चीता ने भारतीय वातावरण को आश्चर्यजनक रूप से तेज़ी से अपना लिया है। पिछले तीन वर्षों में पाँच चीता मादाओं द्वारा 6 बार शावकों को जन्म देना इस परियोजना की सफलता और लचीलापन का परिचायक है। वे भारतीय शिकार जैसे चीतल के प्रति अच्छी अनुकूलता दिखा रहे हैं। शुरुआत में डर था कि तेंदुओं से संघर्ष होगा, लेकिन प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र ने खुद को संतुलित किया, और शिकारी प्रजातियाँ अपने-अपने क्षेत्र में सीमित हो गईं। नवाचार, संकल्प और आशा का प्रतीक प्रोजेक्ट चीता प्रोजेक्ट चीता की तीन वर्ष की यात्रा चुनौतीपूर्ण होने के साथ प्रेरणादायक भी रही है। यह परियोजना अब और अधिक प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। पिछले तीन वर्षों में चीता परियोजना प्रबंधन टीम ने कभी हार नहीं मानने का पाठ सीखा। चीता प्रबंधन के हर पहलू से ऐसी मूल्यवान जानकारियाँ मिलीं हैं, जिससे अनुभव रखने वाले और नए दोनों पेशेवरों की समझ में वृद्धि हुई है। किसी जीवित प्राणी के साथ काम करते समय जोखिम अनिवार्य होते हैं। पिछले तीन वर्षों में केंद्र और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों, फील्ड मैनेजर्स, पशु चिकित्सकों और फ्रंटलाइन स्टाफ का आत्मविश्वास मज़बूत हुआ। इन वर्षों में यह भी साबित हो गया कि मध्यप्रदेश आपात स्थितियों और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम है। प्रोजेक्ट चीता की सफलता टीमवर्क का प्रतीक है जहाँ सभी पेशेवर एक ही उद्देश्य के लिए प्रतिबद्धता और कौशल के साथ कार्य कर रहे हैं। तीन वर्षों की सीख और सफलता प्रोजेक्ट चीता की टीम के अथक प्रयासों के परिणाम सामने हैं। चीते न केवल जीवित रहे बल्कि सफलतापूर्वक अपना परिवार भी बढ़ाया। उनकी उपस्थिति ने घास के मैदानों और खुले जंगलों की ओर फिर से ध्यान आकर्षित किया। ऐसे परिस्थितिकी तंत्र पहले उपेक्षित थे। कूनो में घास के मैदानों में सुधार, जैव विविधता में वृद्धि और स्थानीय समुदायों को पर्यटन के माध्यम से लाभ पहुँचना इस चीता परियोजना की बड़ी उपलब्धियाँ हैं। चीतों की पुन:र्स्थापना से पारिस्थितिकी को कोई नुकसान नहीं हुआ। हर चीते की बारीकी से निगरानी, पेशेवर पशु चिकित्सकों द्वारा देखभाल, और सुरक्षित वातावरण ने चीता परियोजना को वैश्विक मानकों के बराबर खड़ा कर दिया है। चीता की लगातार बढ़ती संख्या चीता परियोजना की सबसे उत्साहजनक उपलब्धि रही है कि भारत में शावकों का जन्म हुआ। वर्तमान में 25 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हैं। दो नर गांधी सागर सेंचुरी में सफलतापूर्वक पुनर्वासित हो चुके हैं। इस प्रकार कुल 27 चीते है। कूनो के परिदृश्य में एक आत्मनिर्भर और मुक्त विचरण करने वाली चीता आबादी स्थापित करना निकट भविष्य का लक्ष्य है। तीन वर्षों की सफलता के साथ प्रोजेक्ट चीता का यह संदेश है कि यह केवल एक प्रजाति की वापसी नहीं है, बल्कि वैश्विक प्रकृति संरक्षण में भारत के समर्प‍ित नेतृत्व का प्रतीक है। चीता की वापसी यह सिद्ध करती है कि विलुप्ति अंतिम नहीं होती और दूरदृष्टि तथा संकल्प के साथ खोई विरासत को वापस लाया जा सकता है।