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IAS अधिकारियों के हुए तबादले, पदस्थापना आदेश जारी, देखें लिस्ट

भोपाल. मध्य प्रदेश शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों (IAS Transfer) के तबादला आदेश जारी किये हैं, सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिकारियों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किये हैं। GAD MP द्वारा जारी तबादला आदेश में 5 अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी गई है वहीं तीन IAS अधिकारियों से अतिरिक्त प्रभाव वापस लिया है और अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। इन IAS अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव  राज्य शासन ने मंत्रालय में पदस्थ पदस्थापना की प्रतीक्षा कर रहे सीनियर IAS अधिकारी मनीष सिंह को प्रमुख सचिव, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग की जिम्मेदारी दी है इसके अलावा उन्हें प्रमुख सचिव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग (अतिरिक्त प्रभार) सौंपा है। शासन ने पदस्थापना की प्रतीक्षा कर रहीं IAS जी व्ही रश्मि को सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी दी है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश में प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश बीज एवं फार्म विकास निगम तथा उप सचिव, , किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग (अतिरिक्त प्रभार) अनुराग सक्सेना को अपर प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड, भोपाल पदस्थ किया है। IAS अभिलाष मिश्रा को राज्य शासन ने अपर आयुक्त, नगर पालिक निगम, इन्दौर के पद से ट्रांसफर करते हुए आयुक्त नगर पालिक निगम उज्जैन पदस्थ किया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी श्रीमती अर्चना सोलंकी मुख्य महाप्रबंधक (प्रशासन), मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, भोपाल की पदस्थापना में बदलाव करते हुए शासन ने उप सचिव, “कार्मिक”, सामान्य प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी दी है। 

दीवार गिरने से मचा कोहराम: भारजा गांव में तीन मजदूरों की मौत, पांच अस्पताल में भर्ती

सिरोही सिरोही जिले के रोहिड़ा थाना क्षेत्र के भारजा गांव में सोमवार को एक निर्माणाधीन मकान की दीवार गिरने से दर्दनाक हादसा हो गया। दोपहर करीब सवा बारह बजे हुए इस हादसे में वहां काम कर रहे आठ श्रमिक दीवार और मलबे के नीचे दब गए। स्थानीय लोगों और पुलिस की तत्परता से उन्हें तुरंत बाहर निकाला गया और आबूरोड अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान तीन श्रमिकों को मृत घोषित कर दिया गया। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए पांच अन्य श्रमिकों का इलाज जारी है, जिनमें से तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है।   जानकारी के अनुसार, भारजा गांव निवासी भूराराम पुत्र भूबाराम के मकान का निर्माण कार्य चल रहा था। इस दौरान बन रही नई दीवार अचानक भरभरा कर गिर गई और उसके नीचे काम कर रहे आठ मजदूर दब गए। जोरदार आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही रोहिड़ा थानाधिकारी माया पंडित और सरूपगंज थानाधिकारी कमलसिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मदद से मलबे में दबे श्रमिकों को बाहर निकाला गया। तीन श्रमिकों की मौके पर ही मौत, पांच अस्पताल में भर्ती घायलों को आबूरोड अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने भारजा निवासी पिपली उर्फ दीपली (40) पत्नी मोयलाराम भील, काली पत्नी चुन्नीलाल और वाटेरा निवासी दिनेश (18) पुत्र ओरसिया को मृत घोषित कर दिया। वहीं, गंभीर रूप से घायल श्रमिकों में वाटेरा निवासी मोगली (21) पत्नी सवाराम, राजू (27) पुत्र देशराम निवासी पावटा फली, भारजा निवासी शैतान (20) पुत्र ओरसिया सहित दो अन्य शामिल हैं। सभी को अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया है।   जिला कलेक्टर अल्पा चौधरी ने किया घटनास्थल का दौरा जैसे ही हादसे की सूचना प्रशासन तक पहुंची, जिला कलेक्टर अल्पा चौधरी तत्काल घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर उपस्थित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। घटना के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, निर्माण में लापरवाही या तकनीकी खामी के चलते दीवार अचानक गिर गई। प्रशासन की ओर से हादसे के हर पहलू की जांच की जा रही है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।   ग्रामीणों में शोक और आक्रोश का माहौल हादसे के बाद पूरे भारजा गांव में शोक की लहर दौड़ गई। मृतकों के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है, वहीं ग्रामीणों में निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही को लेकर आक्रोश भी देखा गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि पीड़ित परिवारों को शीघ्र मुआवजा दिया जाए और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियमन लागू किया जाए।    

धर्म परिवर्तन विवाद में बड़ा एक्शन: रईस खान की संपत्ति पर चला बुलडोजर

बुरहानपुर/नेपानगर नावरा निवासी भाग्यश्री धानुक की लव जिहाद में गला रेत कर हत्या करने वाले आरोपित शेख रईस के अवैध निर्माण पर सोमवार दोपहर प्रशासन का बुलडोजर चला। एसडीएम भागीरथ वाखला, थाना प्रभारी ज्ञानू जायसवाल, नगर पालिका के अधिकारी और नेपा मिल के संपदा विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से दोपहर तीन बजे के आसपास पुलिस बल के साथ पहुंचे थे। साथ ले जाए गए बुलडोजरों के माध्यम से रेलवे ओवरब्रिज के पास किए गए अतिक्रमण और अवैध रूप से बनाए गए टीनशेड को ध्वस्त कर दिया। इसके अलावा संजय नगर के मकान में किया गया अवैध निर्माण और आंगनबाड़ी के पीछे किया गया अतिक्रमण भी गिराया गया है। मातापुर स्थित दुकान किराए की होने के कारण उस पर कार्रवाई नहीं की जा सकी। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में आसपास के लोग भी मौजूद थे। शाम पांच बजे के आसपास कार्रवाई समाप्त हुई। ज्ञात हो कि भाग्यश्री की हत्या के बाद स्वजन और हिंदूवादी संगठनों ने रईस के अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग की थी। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने भी इसे लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए थे। प्रशासन की इस कार्रवाई पर लोगों ने संतोष जताया है। निकाह और मतांतरण से किया था इनकार     उल्लेखनीय है कि शुक्रवार देर रात आरोपित शेख रईस ने भाग्यश्री धानुक पर फिर से निकाह करने और मतांतरण के लिए दबाव बनाया था।     उसके द्वारा स्पष्ट रूप से इनकार करने पर वह भड़क गया। चाकू से गला रेत कर उसकी हत्या कर दी थी।     जिसे लेकर हिंदू संगठन भड़क गए थे और नावरा में शव रखकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था।     साथ ही बाजार भी बंद करा दिया था। करीब चार घंटे बाद अधिकारियों के आश्वासन पर प्रदर्शन समाप्त कर भाग्यश्री का अंतिम संस्कार किया था।     आरोपित शेख रईस पेशे से दूध का व्यापारी है। पुलिस ने उसे सोमवार को न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। ज्ञापन सौंपकर की फांसी देने की मांग     सोमवार को हिंदू महासभा और संत रविदास समिति के पदाधिकारियों ने भी कलेक्टर व एसपी के नाम ज्ञापन सौंपा है।     इसमें यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने और आरोपित रईस को फांसी की सजा दिलाने की मांग की गई है।     इसके अलावा भीम आर्मी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दत्तू मेढ़े ने भी पीड़ित परिवार से भेंट कर सांत्वना दी है। उन्होंने कहा कि अपराधी का कोई धर्म और जाति नहीं होती।     अखिल भारत हिंदू महासभा के जिलाध्यक्ष आंनद मेहता ने ज्ञापन सौंपते हुए जल्द फांसी देने की मांग की है।     इस दौरान इंद्रजीत सोनी, शैलेष निंभोरे, ओमप्रकाश सिंह, मुकेश डालमिया, प्रवीण देवताले, दीपा अठवाल, सीमा तायड़े सहित युवतियां मौजूद थीं।  

5 अगस्त को मध्यप्रदेश शिखर खेल अलंकरण एवं 38वें नेशनल गेम्स के पदक विजेता होंगे सम्मानित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में मध्यप्रदेश शिखर खेल अलंकरण एवं 38वें नेशनल गेम्स 2025 के पदक विजेता खिलाड़ियों का सम्मान समारोह मंगलवार 5 अगस्त को होगा। रवीन्द्र भवन में शाम 5 बजे शुरू होने वाले सम्मान समारोह की अध्यक्षता खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग करेंगे। समारोह में संचालक खेल एवं युवा कल्याण राकेश गुप्ता भी शामिल होंगे। 11 खिलाड़ियों को एकलव्य पुरस्कार समारोह में शूटिंग खिलाड़ी रितुराज बुंदेला, क्याकिंग-कैनोइंग (स्लॉलम) खिलाड़ी भूमि बघेल, स्क्वैश खिलाड़ी कृष्णा मिश्रा, फेंसिंग खिलाड़ी पूजा दांगी, रोइंग खिलाड़ी प्रभाकर सिंह राजावत, सेलिंग खिलाड़ी नेहा ठाकुर, तैराकी खिलाड़ी प्रखर जोशी, एथलेटिक्स खिलाड़ी अर्जुन वास्कले, कुश्ती खिलाड़ी प्रियांशी प्रजापत, हॉकी खिलाड़ी अंकित पाल और पावरलिफ्टिंग खिलाड़ी गौरव पचौरी को एकलव्‍य पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। 12 खिलाड़ियों को विक्रम पुरस्कार शूटिंग खिलाड़ी ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर, क्याकिंग-कैनोइंग (स्लॉलम) खिलाड़ी जान्हवी श्रीवास्तव, तीरंदाजी खिलाड़ी रागिनी मार्को, कुश्ती खिलाड़ी शिवानी पवार, बॉक्सिंग खिलाड़ी श्रुति यादव, जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य, खोखो खिलाड़ी सचिन भार्गो, हॉकी खिलाड़ी नीलू डाडिया, सॉफ्टबाल खिलाड़ी प्रवीण कुमार दवे, शूटिंग (दिव्यांग श्रेणी) रूबिना फ्रांसिस, पावरलिफ्टिंग खिलाड़ी अपूर्व दुबे और एडवेंचर स्पोर्टस् के लिये भावना डेहरिया को विक्रम पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। विश्वामित्र/लाइफटाइम एचीवमेंट पुरस्कार सम्मान समारोह में क्याकिंग-कैनोइंग प्रशिक्षक पीजूष कांती बारोई, तीरंदाजी प्रशिक्षक अशोक कुमार यादव और हॉकी प्रशिक्षक लोकेन्द्र शर्मा को विश्वामित्र पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। जिम्नास्टिक के रतनलाल वर्मा को लाइफटाइम एचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। सम्मान समारोह में 38वें नेशनल गेम्स 2025 के 34 स्वर्ण पदक विजेता, 25 रजत और 23 कास्य पदक विजेता, कुल 82 पदक विजेताओं को भी सम्मानित किया जायेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया ‘माटी गणेश- सिद्ध गणेश’ अभियान का शुभारंभ

भगवान गणेश, मां दुर्गा और महालक्ष्मी की प्रतिमाएं मिट्टी से ही निर्मित हों : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भगवान गणेश सबके मनोरथ पूरे करें, कृपावंत का शुभाशीष सब पर बरसे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया ‘माटी गणेश- सिद्ध गणेश’ अभियान का शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा संचालित ‘माटी गणेश–सिद्ध गणेश’ अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भगवान गणेश के पूजन से व्यक्ति को ज्ञान, बुद्धि और रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान गणेश सबके मनोरथ पूर्ण करें। कृपावंत भगवान का शुभाशीष हम सब पर बरसे और हमारे प्रदेश में सुख-समृद्धि का सतत् संचार हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन अभियान परिषद के पदाधिकारियों से कहा कि भगवान गणेश, नवरात्रि में मां दुर्गा और दीपावली पर्व पर महालक्ष्मी की प्रतिमाएं भी मिट्टी से ही निर्मित हो। इसके लिये जागरूकता अभियान भी चलाएं। उन्होंने कहा कि मिट्टी की प्रतिमाएं मिट्टी में ही समाहित हो जाती हैं, इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और गणेश चतुर्थी पर्व पर जन-जन को पवित्र माटी और गौमाता के गोबर से निर्मित गणेश प्रतिमाओं के उपयोग को प्रोत्साहित करना है, ताकि जल स्रोतों की स्वच्छता बनी रहे और प्राकृतिक संतुलन भी अक्षुण्ण रहे। पर्यावरण संरक्षण की नवाचारी पहल है "माटी गणेश-सिद्ध गणेश अभियान" मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान में निहित संकल्पना पर केन्द्रित एक सचित्र पोस्टर का विमोचन भी किया। परिषद् द्वारा पर्यावरण संरक्षण की नवाचारी पहल करते हुए 'माटी गणेश-सिद्ध गणेश अभियान चलाया जायेगा। इस अभियान में पर्यावरण हितैषी संस्थान नर्मदा समग्र द्वारा प्रशिक्षण के माध्यम से प्रदेश के सभी 313 विकासखण्ड में परिषद् के नेटवर्क से जुड़ी नवांकुर सखियों को प्रशिक्षित किया जायेगा। प्रशिक्षित सखियों द्वारा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से अपने ग्रामों में स्थानीय महिलाओं को प्रेरित-प्रशिक्षित कर मिट्टी की 10 लाख गणेश प्रतिमाओं की घर-घर स्थापना करायी जायेगी। अभियान का लक्ष्य 10 लाख गणेश प्रतिमाओं का निर्माण कर 25 लाख लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान के संकल्पना गीत एवं पोस्टर का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर भी उपस्थित थे। सभी ने संकल्प लिया कि इस वर्ष घरों में केवल मिट्टी और गौमाता के गोबर से बनी गणेश प्रतिमाएं ही स्थापित की जाएंगी और इन प्रतिमाओं का विसर्जन भी नितांत प्राकृतिक तरीके से ही किया जाएगा। म.प्र. जन अभियान परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड़ ने बताया कि परिषद् ने नर्मदा समग्र संस्था के साथ "माटी गणेश-सिद्ध गणेश" अभियान की नई पहल की है। परिषद् के प्रशिक्षित नेटवर्क द्वारा अपने ग्राम की महिलाओं को मिट्टी के गणेश भगवान की प्रतिमा बनाने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया जायेगा, जिससे 'माटी गणेश-सिद्ध गणेश' घर-घर विराजित और विसर्जित होंगे। इससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुकता बढ़ेगी।  

जनऔषधियों की कीमतों में कटौती पर मुख्यमंत्री साय ने जताया आभार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनहितैषी निर्णय से लाखों लोगों को मिलेगा राहत – मुख्यमंत्री साय रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्र सरकार द्वारा 37 आवश्यक औषधियों के मूल्य में 10 से 15 प्रतिशत तक की कमी किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वस्थ भारत ही विकसित भारत की आधारशिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का यह निर्णय उनके दूरदर्शी और जनकल्याणकारी नेतृत्व की सशक्त अभिव्यक्ति है। यह निर्णय हृदय रोग, मधुमेह, संक्रमण, बुखार और दर्द जैसी आम लेकिन गंभीर बीमारियों से जूझ रहे नागरिकों को बड़ी राहत देगा। उन्होंने कहा कि इस मूल्य कटौती से पैरासिटामोल, एटोरवास्टेटिन, एमोक्सिसिलिन जैसी जीवनरक्षक दवाएं अब और अधिक सुलभ और सस्ती हो सकेंगी। छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी और ग्रामीण बहुल राज्य में यह निर्णय गरीबों, श्रमिकों, किसानों, महिलाओं और वृद्धजनों के स्वास्थ्य हेतु अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री साय ने यह भी उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के केंद्रों के विस्तार, आयुष्मान भारत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और प्राथमिक से लेकर उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार का निर्णय केवल औषधियों की कीमत घटाने का नहीं, बल्कि आमजन के जीवन स्तर को सशक्त बनाने का भी कदम है।

मुख्यमंत्री साय दिव्य शिव महापुराण कथा के समापन समारोह में वर्चुअली हुए शामिल

  भगवान मधेश्वर की पावन धरा के विकास हेतु मिलेंगे 10 करोड़ रुपये, तीर्थ पर्यटन को मिलेगा नया आयाम श्रीरामलला दर्शन योजना और तीर्थदर्शन योजना से श्रद्धालुओं को मिल रहा आध्यात्मिक लाभ रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पवित्र श्रावण मास के चौथे सोमवार के शुभ अवसर पर रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत मयाली में विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़ के समीप आयोजित दिव्य शिव महापुराण कथा के समापन समारोह को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित किया। श्रावण मास की इस सात दिवसीय दिव्य कथा श्रृंखला का आयोजन 28 जुलाई से 4 अगस्त 2025 तक महामधेश्वर धाम समिति द्वारा किया गया, जिसमें अयोध्या के प्रसिद्ध कथावाचक पूज्य श्री देवकीनंदन जी महाराज ने शिव महापुराण की अमृतमयी वाणी से हजारों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ से जुड़े सभी संतजनों को प्रणाम करते हुए समिति को भव्य आयोजन के लिए बधाई एवं आभार प्रकट किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिव और शक्ति छत्तीसगढ़ के कण-कण में समाए हैं और प्रदेश को आध्यात्मिक ऊर्जा इन्हीं  देवस्थलों से प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि मधेश्वर महादेव धाम के विकास के लिए केंद्र सरकार से ₹10 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है, तथा राज्य सरकार तीव्र गति से अधोसंरचना विकास और श्रद्धालु सुविधाओं के लिए कार्य कर रही  है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में विराजित भगवान शिव के प्रमुख स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि मयाली में मधेश्वर पहाड़, कवर्धा में बाबा भोरमदेव, राजिम में कुलेश्वर महादेव, गरियाबंद में भूतेश्वर महादेव और जांजगीर-चांपा के खरौद में लक्ष्मणेश्वर महादेव के रूप में भगवान शिव विभिन्न रूपों में श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्पूर्ण प्रदेश शिवमय है। श्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ में पाँच प्रमुख शक्तिपीठों के विकास के लिए शक्ति कॉरिडोर योजना प्रारंभ की गई है। इसमें डोंगरगढ़ की बमलेश्वरी देवी, रतनपुर की महामाया देवी, चंद्रपुर की चंद्रहासिनी माता, दंतेवाड़ा की दंतेश्वरी देवी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में तीर्थ पर्यटन को नई दिशा दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने श्री रामलला दर्शन योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि अब तक 22 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के दर्शन का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के प्रति श्रद्धा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनी है। इसी क्रम में पुनः प्रारंभ की गई मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत राज्य के वृद्ध श्रद्धालुओं को देश के 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन कराए जा रहे हैं, जिससे उन्हें जीवन में आध्यात्मिक संतोष और आस्था का अनुभव हो रहा है। समापन अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए प्रार्थना की कि बाबा भोलेनाथ की कृपा सदैव सभी श्रद्धालुओं पर बनी रहे। उन्होंने महामधेश्वर धाम समिति को आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दी और कहा कि प्रदेश सरकार श्रद्धा, संस्कृति और विकास के समन्वय से छत्तीसगढ़ को नया धार्मिक एवं पर्यटन गंतव्य बनाएगी।

त्योहार से पहले खुशखबरी! लाड़ली बहनों के खातों में जल्द आएंगे ₹1500

भोपाल   मध्यप्रदेश की करोड़ों लाड़ली बहनों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जहां रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव बहनों के खाते में 1500 सौ रुपए ट्रांसफर करेंगे। सीएम ने कहा कि मैं उज्जैन में इस परंपरा का पालन करता रहा हूं। अब लाड़ली बहन के माध्यम से हम पूरे प्रदेश में यह कार्यक्रम कर रहे हैं। नरसिंहगढ़ में जारी होगी 27वीं किस्त सीएम डॉ मोहन यादव ने बताया कि इस साल नरसिंहगढ़ में हमारी बहनों के लिए इस महीने की रक्षाबंधन की किश्त वहीं से जारी होगी। हम इस साल अपनी लाडली बहनों की राशि बढ़ाकर 1500 रुपये करने जा रहे हैं, और खासकर रक्षाबंधन पर हम 250 रुपये अलग से दे रहे हैं।  7 अगस्त को शगुन के रूप में मिलेंगे 250 रुपए सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं मेरी बहने हैं यह मेरा मान है, सम्मान है, बहनों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आए इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार कृत संकल्पित है। आने वाले 7 अगस्त को लाड़ली बहनों के खातों में 250 रुपए की अतिरिक्त राशि रक्षाबंधन के शगुन के रूप में दी जाएगी। जो रक्षाबंधन पर भाई की तरफ से छोटा सा उपहार है। यह राशि प्रतिमाह मिलने वाली 1250 रुपए से अतिरिक्त होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन की बेस्ट लाइफ स्टाइल कंपनी में वर्तमान में 1500 बहनों को रोजगार मिल रहा है। आने वाले समय में 4 हजार बहनों को रोजगार मिलेगा। भाईदूज पर मिलेंगे 1500 रुपए सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार बहनों के जीवन में समृध्दि लाने के लिए कार्य कर रही है। राज्य सरकार बहनों के उत्थान के लिए सदैव कार्य करती रहेगी। लाड़ली बहनों को वर्तमान में 1250 रुपए की राशि दी जा रही है। आगे उसे बढ़ाकर भाईदूज से 1500 रूपए कर दिए जाएंगे।  सीएम ने सैकड़ों महिलाओं से बंधवाई राखी नागझिरी क्षेत्र की बेस्ट लाइफस्टाइल अपैरल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी परिसर, रघुनंदन गार्डन, राधाकृष्ण गार्डन और होटल अथर्व में रखे रक्षाबंधन कार्यक्रम में उन्होंने सैकड़ों महिलाओं से राखी बंधवाई और यह संदेश दिया कि बहनों के सशक्तिकरण में सरकार पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने जबलपुर-रायपुर, रीवा-पुणे (हड़पसर) और भावनगर टर्मिनस-अयोध्या एक्सप्रेस ट्रेनों को यहीं से वीडियो कॉंफ्रेंसिंग कर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रेल दो स्टेशनों के साथ-साथ दो संस्कृतियों और जीवन शैलियों को जोड़ने का कार्य करती है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करती है। सीएम मोहन योदव ने अपने एक बयान में कहा कि रक्षाबंधन पर 1 करोड़ 27 लाख लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1500 रुपये की किस्त भेजे जाएंगे. इससे पहले लाड़ली बहना योजना के तहत राज्य की लाभार्थी महिलाओं को योजना की 26वीं किस्त 12 जुलाई 2025 को जारी की गई थी. उज्जैन के नलवा गांव में आयोजित ‘लाड़ली बहना सम्मेलन’ में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1543.16 करोड़ रुपये की राशि सीधे 1.27 करोड़ बहनों के बैंक खातों में ट्रांसफर की थी. जुलाई की इस किस्त में हर पात्र महिला को 1250 रुपये की मासिक सहायता दी गई थी, जो योजना की नियमित मंथली पेमेंट का हिस्सा है. इस दौरान मुख्यमंत्री ने 56.74 लाख वृद्ध, विधवा, दिव्यांग और अन्य पात्र नागरिकों को 340 करोड़ रुपये की राशि पेंशन के रूप में ट्रांसफर की थी. रसोई गैस की बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए 30 लाख से अधिक उज्ज्वला योजना लाभार्थी बहनों को 46.34 करोड़ रुपये की राशि रिफिलिंग के लिए सीधे खातों में दी गई थी. क्या है लाड़ली बहना योजना? शुरुआत: जून 2023 में, महिलाओं की आर्थिक मदद और सम्मान बढ़ाने के लिए लाभार्थी: 21 से 60 वर्ष की विवाहित, तलाकशुदा या विधवा महिलाएं वर्तमान लाभ: मंथली 1250 रुपये नई घोषणा: अक्टूबर से मंथली 1500 रुपये सहायता राशि इस बार: 9 अगस्त को 1250 रुपये और 250 रुपये का रक्षाबंधन शगुन यह योजना क्यों है खास? 'लाड़ली बहना योजना' केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. हर महीने की राशि से महिलाएं अपने छोटे-छोटे फैसले खुद ले सकती हैं, परिवार में उनकी भागीदारी बढ़ती है और आत्मसम्मान भी.  

मुख्य सचिव अनुराग जैन का कार्यकाल अंतिम दौर में, विस्तार को लेकर हलचल

भोपाल  प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या उन्हें सेवा विस्तार मिलेगा या किसी नए वरिष्ठ अधिकारी को शीर्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। प्रशासनिक हलकों में इसे लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। 1989 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनुराग जैन को पिछले वर्ष सितंबर में उस समय मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था, जब वे केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर थे।  उनकी नियुक्ति को केंद्र की प्राथमिकता माना गया था। यही वजह है कि अब उनके संभावित सेवा विस्तार को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को सेवानिवृत्ति के दिन ही एक साल का सेवा विस्तार दिया, जबकि छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव अमिताभ जैन को तीन माह का विस्तार मिला। हालांकि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को सेवा विस्तार नहीं दिया गया। ऐसे में मध्यप्रदेश में मुख्य सचिव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।  यदि अनुराग जैन को सेवा विस्तार नहीं मिलता है, तो नए मुख्य सचिव के रूप में डॉ. राजेश राजौरा और अलका उपाध्याय के नामों की चर्चा है। जानकारों के मुताबिक, डॉ. राजेश राजौरा को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। राजौरा वर्तमान में नर्मदा घाटी विकास विभाग में अपर मुख्य सचिव और उपाध्यक्ष के पद पर पदस्थ है। वहीं अलका उपाध्याय केंद्र सरकार के मंत्रालय में कार्यरत हैं। जब अनुराग जैन को मुख्य सचिव बनाया गया था, तब राज्य में नई सरकार बनी ही थी और उन्हें मुख्यमंत्री की पसंद के बजाय केंद्र से आए निर्देश के आधार पर चुना गया था।  अब जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगभग 20 माह से पद पर हैं और प्रशासनिक ढांचे से पूरी तरह परिचित हो चुके हैं, ऐसे में वे अपनी प्राथमिकता के अनुसार निर्णय ले सकते हैं। पिछले वर्षों में प्रदेश में कई मुख्य सचिवों को सेवा विस्तार मिल चुका है। इनमें आर  परशुराम, बीपी सिंह, इकबाल सिंह बैन्स और वीरा राणा शामिल हैं। वीरा राणा की सेवानिवृत्ति के अंतिम दिन ही केंद्र से निर्देश आने के बाद अनुराग जैन की नियुक्ति की गई थी। कुछ घटनाएं बन सकती हैं बाधा जल जीवन मिशन में कथित अनियमितताओं के मामले को संभालने को लेकर भी मौजूदा मुख्य सचिव कार्यालय की भूमिका पर सवाल उठे थे। हालांकि, सरकार ने बाद में मंत्री को क्लीन चिट दे दी, लेकिन यह माना गया कि पूरे प्रकरण को सही ढंग से नहीं संभाला गया।   जेएन कंसोटिया भी हो जाएंगे सेवानिवृत्त  अनुराग जैन के साथ अगस्त में जेएन कंसोटिया भी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। कंसोटिया 12 अगस्त को 60 साल के हो जाएंगे। जैन और कंसोटिया दोेनों ही अधिकारियों ने 21 अगस्त 1989 को एक साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा ज्वाइंन की थी और अब दोनों ही सेवा नियमों के अनुसार 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। हालांकि मुख्य सचिव के लिए प्रदेश में पदस्थ और केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत अन्य आईएएस अधिकारी भी दावेदारों में शामिल है। अब तक केंद्र सरकार की तरफ से सीएस के नाम को लेकर चौंकाने वाले निर्णय लिए गए है। यहीं वजह है कि प्रदेश में अनुराग जैन के सेवा विस्तार को लेकर फिलहाल अभी स्थिति साफ नहीं है।   

यमन में समुद्री त्रासदी: डूबती नाव ने छीनी 68 ज़िंदगियाँ, सैकड़ों परिजनों की उम्मीदें टूटी

यमन खाड़ी में बेस देश यमन से एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां रविवार को तड़के समुद्र तट के पास 154 प्रवासियों से भरी नाव पलटने से उसमें सवार 68 प्रवासियों की मौत हो गई। स्थानीय अधिकारी ने बताया कि सभी प्रवासी इथियोपिया से थे, जो यमन होते हुए सऊदी अरब में रोजगार की तलाश में निकले थे। वहीं संयुक्त राष्ट्र प्रवासन एजेंसी ने बताया कि इस घटना में 74 अन्य लोग लापता हैं जिनकी तलाश की जा रही है। हादसा यमन के अबयान प्रांत के अपतटीय क्षेत्र में हुआ है। हादसे के बाद अभी तक केवल 10 लोगों को बचाया जा सका है, जिनमें नौ इथियोपियाई और एक यमनी नागरिक शामिल हैं. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने इस घटना को हाल के वर्षों की सबसे भीषण त्रासदियों में से एक करार दिया है. बचावकर्मी शवों की तलाश और संभावित जिंदा बचे लोगों को खोजने में लगातार जुटे हैं. यह सवाल बार-बार उठता जा रहा है कि अफ्रीका के लोग क्यों यमन जैसे संघर्षग्रस्त देश का रास्ता चुनते हैं? इसका उत्तर केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक भी है. गरीबी और बेरोजगारी से जूझते देश इथियोपिया और सोमालिया जैसे देशों में गरीबी, बेरोजगारी और अस्थिरता लोगों को मजबूर करती है कि वे जोखिम भरा समुद्री सफर तय करें. यमन, भले ही खुद गृहयुद्ध से जूझ रहा हो, फिर भी प्रवासियों के लिए खाड़ी देशों तक पहुंचने का रास्ता बना हुआ है. अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन के अनुसार, 2024 में अब तक 60,000 से अधिक प्रवासियों ने यमन के रास्ते यात्रा की है, जबकि 2023 में यह संख्या 97,200 थी. यह गिरावट मुख्यतः समुद्री मार्गों पर सुरक्षा गश्त में बढ़ोतरी के कारण देखी जा रही है. प्रवासियों की सुरक्षा अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं. 2023 में इस रास्ते पर 558 लोगों की मौत हुई थी और पिछले दस वर्षों में 2,082 से अधिक प्रवासी लापता हो चुके हैं. इन आंकड़ों में 693 की डूबने से मौत की पुष्टि की गई है. यह आंकड़े केवल संख्याएं नहीं हैं, बल्कि उन हज़ारों परिवारों की कहानियां हैं जो अपनों की खोज में दर-दर भटकते हैं. प्रवासियों को न केवल समुद्र की लहरों का सामना करना पड़ता है, बल्कि यमन पहुंचने के बाद उन्हें नजरबंदी, दुर्व्यवहार और अमानवीय स्थितियों में रहना पड़ता है. IOM ने पहले ही चेताया था कि यमन का रास्ता दुनिया के सबसे खतरनाक प्रवासन मार्गों में से एक है. इसके बावजूद, जोखिम के बावजूद प्रवासी लगातार इस मार्ग को चुनते हैं. यमन में मानवीय संकट और राजनीतिक पृष्ठभूमि यमन 2014 से ही गृहयुद्ध की चपेट में है. हूती विद्रोहियों और यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के बीच हुए युद्ध ने देश को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है. हालांकि, अप्रैल 2022 में एक युद्धविराम समझौता हुआ था, जिससे हिंसा में कुछ कमी आई, लेकिन देश अब भी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से अस्थिर है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में यमन में लगभग 380,000 प्रवासी और शरणार्थी मौजूद हैं. इनमें से कई सुरक्षा की तलाश में हैं, जबकि कुछ खाड़ी देशों तक पहुंचने के लिए यमन का इस्तेमाल कर रहे हैं.