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CIMS में अस्वच्छ भोजन पर बवाल, कोर्ट ने मांगा डीन का स्पष्टीकरण

 बिलासपुर  बिलासपुर के मेडिकल कालेज सिम्स के रेजिडेंट डॉक्टर व भविष्य के डॉक्टर का खाना प्रतिबंधित पालीथीन पैकेट में अस्वच्छ जगह में रखे जाने की खबर पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है. मामले में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने मामले में डीन से जवाब तलब किया है. दरअसल, मीडिया में आई खबरों में बताया गया, कि सिम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों और एमबीबीएस छात्रों, जो सिम्स में अपनी पढ़ाई कर रहे हैं, उनके लिए लाए जाने वाले खाद्य पदार्थों को पॉलीथीन बैग में बाहर रखा जाता है और वह भी अस्वच्छ स्थिति में. हाईकोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लेकर सुनवाई की. डीलीवरी बॉय का हॉस्टल में प्रवेश बैन, पार्किंग शेड में छोड़ते हैं पैकेट्स खबरों के मुताबिक प्रत्येक खाद्य पैकेट में एक चिट होती है जिस पर संबंधित रेजिडेंट डॉक्टर/छात्र का नाम लिखा होता है. उक्त खाद्य पैकेट बाहर इसलिए रखे जाते हैं क्योंकि डिलीवरी बॉय को हॉस्टल परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है. हालांकि CIMS में पढ़ने वाले छात्रों के लिए मेस में खाने की व्यवस्था है, लेकिन ज़्यादातर छात्र बाहर से खाना मंगवाना पसंद करते हैं, जो लोग बाहर से खाना पहुंचाते हैं. उन्हें हॉस्टल परिसर में आने की अनुमति नहीं है, इसलिए खाने के पैकेट हॉस्टल के बाहर बने वाहन पार्किंग शेड में छोड़कर चले जाते है. सिम्स के मेस में रोज़ाना खाना बनता है, लेकिन खाने की गुणवत्ता घटिया पाए जाने के बाद ज्यादातर स्टूडेंट्स बाहर से खाना मंगाकर खाते हैं. सिम्स के मुख्य वार्डन के मुताबिक मेस का संचालन सिम्स प्रबंधन द्वारा नहीं किया जा रहा है, बल्कि एक समिति गठित की गई है. रेजिडेंट डॉक्टर और एमबीबीएस छात्र CIMS के मेस/हॉस्टल में उपलब्ध कराए जा रहे भोजन को ले सकते हैं. मामले को लेकर सिम्स बिलासपुर के डीन अगली सुनवाई से पहले अपना व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने कहा गया है. जिसमें यह बताया जाएगा कि इस संबंध में क्या वैकल्पिक व्यवस्थाएँ की गई हैं.

टेमपर-प्रूफ नंबर प्लेट अनिवार्य, अब वाहन मालिकों को हाई-सिक्योरिटी प्लेट लगवाने का सख्त अभियान

भोपाल प्रदेश के पंजीकृत वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) अनिवार्य रूप से लगाए जाने के लिए विशेष अभियान चलाया जायेगा। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को इस आशय के आदेश दिये है। प्रदेश में एक अप्रैल 2019 के बाद पंजीकृत वाहनों में एचएसआरपी नंबर प्लेट लगाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए है। केन्द्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राज्यमार्ग मंत्रालय की अधिसूचना 4 दिसम्बर 2018 के अनुसार एक अप्रैल 2019 के बाद सभी पंजीकृत वाहनों में एचएसआरपी प्लेट लगाई जाना अनिवार्य है। वाहन पोर्टल में डाटा अपडेट करने के काम में तेजी लाई जा रही है। परिवहन विभाग ने परिवहन आयुक्त को इस कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए है। प्रदेश भर में दल गठित कर संबंधित वाहन डीलर के माध्यम से एनआईसी वाहन पोर्टल पर अद्यतन स्थिति दर्ज की जायेगी। इसके लिये एक विशेष अभियान चलाया जायेगा। तीन माह में हो नम्बर प्लेट बदलने का कार्य परिवहन विभाग ने एचएसआरपी प्लेट बदलने का कार्य आगामी 3 माह में पूर्ण करने के निर्देश जिला परिवहन अधिकारियों को दिए है। निर्देश में कहा गया है कि अपने जिले के समस्त डीलरों से निरंतर सम्पर्क में रहते हुए वाहनों में एचएसआरपी नम्बर प्लेट लगाई जाए। जिन वाहनों में एचएसआरपी नहीं है उन्हें पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सेंटर द्वारा प्रमाण पत्र, डुप्लीकेट पंजीकरण प्रमाण पत्र (आरसी) जारी करने, पंजीकरण प्रमाण पत्र में पता बदलना, शुल्क देकर आरसी विवरण देखना संभव नहीं हो सकेगा। साथ ही वाहनों के स्वामित्व बदलने, हाइपोथिकेशन जोड़ना और हटाना, नवीन-डुप्लीकेट परमिट जारी करना, परमिट का हस्तांतरण और नवीनीकरण, कराधान प्राधिकार के साथ अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करना और वाहन का पंजीयन निरस्तीकरण करना संभव नहीं हो सकेगा। निर्देश में कहा गया है कि वाहन की स्थाई-अस्थायी अनुज्ञाएं जारी करने, डुप्लीकेट फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने, वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करना, वाहनों के पंजीयन नवीनीकरण करने के साथ ही वाहन पोर्टल के माध्यम से दी जाने वाली सभी सुविधाएं मोटर मालिकों को नहीं मिल सकेंगी। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि एचएसआरपी नंबर प्लेट होने से इन्फोर्समेंट के तहत लगाए गए कैमरे में दर्ज हो पायेंगी। इससे रोड सेफ्टी का भी पालन हो पायेगा। जिला परिवहन अधिकारियों को इस कार्य की नियमित मॉनिटरिंग के लिये भी कहा गया है।  

सड़क दुर्घटना में घायल तो घबराएं नहीं, अस्पताल करेगा फौरन इलाज, खर्च उठाएगा प्रशासन

भोपाल  सड़क दुर्घटना में घायल (road accident patients) व्यक्ति को तत्काल अस्पताल को उपचार देना होगा फिर भले ही पीड़ित की ओर से राशि जमा हुई हो या नहीं। उपचार शुल्क जमा होने या परिजनों के आने के इंतजार में अस्पताल पीड़ित का इलाज करने से इंकार नहीं कर सकता है। घायल के उपचार के एवज में उज्जैन कलेक्टर डेढ़ लाख रुपए तक अस्पताल को स्वीकृत कर सकेंगे।  कलेक्टर ने बुलाई बैठक सडक़ हादसे में घायलों की जान उपचार की कमी से न जाए, इसके लिए शासन ने दो महत्वपूर्ण योजना नकद रहित उपचार और राहवीर योजना शुरु की है। जीवन रक्षक उक्त योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रचार-प्रसार के लिए शुक्रवार को कलेक्टर रौशनकुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने स्वास्थ्य व अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। कलेक्टर ने आपात स्थिति, ट्रॉमा सेंटर, एम्बुलेंस सेवा 108 के संचालकों, डायल 100 सेवा में कार्य करने वाले कर्मचारियों को संवेदनशीलता से कार्य करने और उक्त कार्य करने वाले कर्मचारियों को राहवीर योजना संबंधित जागरुक करने के निर्देश दिए। बैठक में सीएमएचओ डॉ. अशोक कुमार पटेल, आरटीओ संतोष मालवीय, सभी बीएमओ, निजी चिकित्सालयों के प्रबंधक मौजूद थे। ई-डार पोर्टल से संचालित होती है योजना ई-डार पोर्टल बनाया गया है। इस पर सभी आवश्यक जानकारियां अपलोड करना होती है। कलेक्टर सिंह ने स्वास्थ्य विभाग को सभी अस्पतालों की ई-डार पोर्टल की लॉग इन आईडी निर्मित बनाने, साथ ही पोर्टल के उपयोग के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला करने के निर्देश दिए।   राहबीर योजना इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर (पहले 1 घंटे) में तुरंत अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने वाले सज्जन नागरिकों को प्रोत्साहन राशि 25 हजार रुपए व प्रशंसा पत्र प्रदान करना है। योजना अंतर्गत टॉप 10 राहवीरों को राष्ट्रीय स्तर पर 1 लाख रुपए, इनाम, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र से भी सम्मानित किया जाएगा।  नकदरहित उपचार इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को तुरंत और नकदरहित (कैशलेस) इलाज की सुविधा, गंभीर घायलों को शुरुआती गोल्डन ऑवर के दौरान समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। योजना में प्रारंभिक उपचार के लिए 1.5 लाख रुपए तक की राशि का नकदरहित उपचार प्रदान किया जाएगा। तत्काल इलाज के लिए दस्तावेज जरुरी नहीं।

स्वतंत्रता दिवस पर ‘हर घर तिरंगा’ की धूम, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 2 से 15 अगस्त तक कार्यक्रम

गौरेला पेंड्रा मरवाही भारतीय ध्वज तिरंगा राष्ट्र का प्रतीक है। इस 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर "हर घर तिरंगा" कार्यक्रम का आयोजन तीन चरणों में 2 से 15 अगस्त तक जाना है। प्रथम चरण 2 से 8 अगस्त, द्वितीय चरण 9 से 12 अगस्त और तृतीय चरण 13 से 15 अगस्त 2025 तक किया जाना है, जो "हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग थीम पर आधारित होगा। इसके अंतर्गत सभी भारतीय नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज अपने घर पर फहराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि आमजन में देश भक्ति की भावना विकसित हो तथा राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान में वृद्धि हो।           हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता कार्यक्रम अंतर्गत विभिन्न गतिविधिया संचालित करने के लिए संस्कृति विभाग द्वारा सभी जिला कलेक्टरों को दिशा-निर्देश जारी किया गया है। निर्देश में कहा गया है कि जिले के अन्तर्गत सार्वजनिक उपक्रमों, स्व-सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों आदि के समस्त कर्मचारियों एवं उनके परिवार की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। कार्पोरेट और निजी संगठनों को भी सीएसआर संसाधनों सहित भाग लेने और योगदान करने के लिए प्रोत्साहित करना। राज्य सरकार की वेबसाइटों और सोशल मीडिया का उपयोग कर जागरूकता का निर्माण करें तथा "हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग" आयोजित कार्यक्रम को वेबसाइट https://harghartiranga.com/ के माध्यम से लिंक करें। शासन स्तर पर मॉनिटरिंग कर ग्राम सरपंचों एवं नगरीय निकाय के अन्य सदस्य एवं पदाधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित कर तिरंगा कोड को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त तिरंगा की मांग अनुसार व्यवस्था सुनिश्चित करें। शासकीय स्तर पर प्रत्येक गाँव में तिरंगा वितरण और बिक्री केन्द्र स्थापित करें। स्थानीय स्व-सहायता समूहों को तिरंगा के निर्माण के लिए प्रोत्साहित करें। ग्राम पंचायतों द्वारा बड़े पैमाने पर समूह में खरीदी को प्रोत्साहित करें। राज्य के सभी जिलों में तिरंगा के वितरक, बिक्री केन्द्र के रूप में पोस्ट आफिस, उचित मूल्य की दुकान का विशाल नेटवर्क स्थापित करें। टोल नाका, चेक पोस्ट आदि में पैम्पलेट स्टीकर वितरण सुनिश्चित करें।         भारत सरकार द्वारा  चरणबद्ध दिए गए गतिविधियों जैसे समस्त शासकीय भवनों एवं संस्थानों आवासीय भवनों में तिरंगा लाईटिंग, रंगोली, सेल्फी जोन एवं तिरंगा फहराना एवं पैम्पलेट, बैनर स्टेडिज आदि के माध्यम से "हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग" कार्यक्रम को सफल बनाने स्थानीय भाषाओं में प्रमुखता से प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें। "हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग" कार्यक्रम अंतर्गत सतत् मॉनिटरिंग के लिए भारत सरकार एवं शासन के दिशा निर्देश अनुरूप अपने स्तर पर कार्यवाही करना सुनिश्चित कर तिरंगा वितरण की कार्यवाही एवं नोडल अधिकारी की जानकारी उपलब्ध कराए गए लिंक में अपलोड करावें।  स्वतंत्रता सप्ताह 2 से 15 अगस्त के दौरान "हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता : स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग" कार्यकम के सफल कियान्वयन हेतु सभी दिशा-निर्देश का कड़ाई से पालन कराया जाना सुनिश्चित करने कहा गया है।

शिवभक्ति का महासैलाब: सीहोर से निकलेगी विशाल कांवड़ यात्रा, पुष्पवर्षा से होगा स्वागत

सीहोर  सावन मास के पावन अवसर पर सीहोर का कुबेरेश्वरधाम देश की सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा का साक्षी बनने जा रहा है। सीवन नदी से लेकर कुबेरेश्वरधाम तक का संपूर्ण मार्ग 'बोल बम' के नारों और शिवभक्तों के जयघोष से गूंज उठा है। पं. प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित इस यात्रा के दौरान इस बार विशेष आकर्षण के रूप में हेलिकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की जाएगी। हर कदम पर सेवा, श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा से स्वागत यात्रा मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर सेवा पंडाल लगाए गए हैं, जहां भक्तों को चाय, नाश्ता और पेयजल की सुविधा दी जा रही है। स्थानीय निवासी भी श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर स्वागत कर रहे हैं। इस बार यात्रा में देशभर से दो दर्जन से अधिक हाई-टेक डीजे शामिल किए गए हैं। इनमें सीहोर का बाबा डीजे, झारखंड का सार्जन डीजे, उत्तर प्रदेश का रावण डीजे, दिल्ली का कसाना डीजे, महाराष्ट्र का प्रशांत डीजे और इंदौर का श्याम बैंड प्रमुख हैं। ये डीजे भक्ति संगीत और धमाकेदार धुनों से भक्तों को झूमने पर मजबूर कर देंगे। भारत की सबसे बड़ी भोजनशाला से बंटेगी प्रसादी विठलेश सेवा समिति के व्यवस्थापक समीर शुक्ला ने बताया कि लाखों की संख्या में कांवड़िये देश के विभिन्न राज्यों से यहां पहुंच रहे हैं। इनके लिए देश की सबसे बड़ी भोजनशाला से प्रसादी वितरित की जाएगी। यह आयोजन शिवभक्ति के महाकुंभ का स्वरूप ले चुका है। विठलेश सेवा समिति के संयोजक मनोज दीक्षित ने कहा कि यह आयोजन कलियुग में शिव युग की वापसी जैसा प्रतीत हो रहा है। बीते 20-25 दिनों में 10 लाख से अधिक श्रद्धालु सीवन नदी से जल लेकर कुबेरेश्वरधाम पहुंच चुके हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर चुके हैं। हर आयु वर्ग में उमंग, लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल हो रहे हैं। पूरे क्षेत्र में भगवान शंकर के भजन, ढोल-नगाड़ों, डमरू और डीजे की धुनें गूंज रही हैं। 6 अगस्त को सुबह 9 बजे मुख्य यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। जिला कलेक्टर बालागुरु के. और पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला ने सीवन नदी घाट और यात्रा मार्ग का निरीक्षण किया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता बनाने के लिए होमगार्ड, मोटरबोट, फायर ब्रिगेड और सफाई व्यवस्था को लेकर विशेष निर्देश जारी किए हैं। यातायात सुचारु रखने के लिए पुलिस अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।  

हाथियों से बचाव के लिए तकनीक का सहारा, MP सरकार ने लॉन्च किया ‘गजरक्षक’ ऐप

उमरिया जंगली हाथियों से जंगलों के नजदीकी गांवों की सुरक्षा के लिए मध्य प्रदेश वन विभाग ने गजरक्षक एप तैयार कराया है। इसे लांच कर दिया गया है। एप बताएगा कि हाथियों की लोकेशन कहां है। इससे मानव-हाथी द्वंद्व टाला जा सकेगा। बाघ दिवस (29 जुलाई) पर जारी एप को ग्रामीणों के साथ ही विभागीय अमले के मोबाइल फोन में डाउनलोड कराया जा रहा है। एप से आम लोगों को भी हर पल हाथियों की लाइव लोकेशन के साथ ही नोटिफिकेशन मिलेंगे। इससे उस क्षेत्र के लोग सतर्क हो सकेंगे। बता दें कि नवंबर 2024 में मप्र में पहली बार दो जंगली हाथियों को रेडियो कालर पहनाई गई थी। ये हाथी दल में शामिल रहते हैं। वन विभाग का दल इनकी लाइव लोकेशन भेजेगा। ग्रामीणों पर हमले की हो चुकी हैं घटनाएं यह भी बता दें कि पिछले कुछ दिनों में गांवों और ग्रामीणों पर हमले की तमाम घटनाएं हो चुकी हैं। हाथियों के हमले में कई लोग जान गंवा चुके हैं। इससे लोगों में हाथियों के प्रति गुस्सा है। अक्टूबर 2024 में उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में तीन दिनों के अंदर दस हाथियों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत का मामला देशभर में सुर्खियों में रहा था। तब इस घटना को मानव-हाथी द्वंद्व का परिणाम कहा गया था। बाद में जांच में पता चला था कि हाथियों की मौत विषाक्त कोदो खाने से हुई थी। यही कारण है कि वन विभाग चाहता है कि द्वंद्व न हो। ग्रामीण और हाथी दोनों सुरक्षित रहें। इसके लिए अब एप का सहारा लिया जा रहा है। सात साल पहले झारखंड और छग से आया था 60 हाथियों का दल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अगस्त 2018 में झारखंड और छत्तीसगढ़ से आया 60 हाथियों का दल अब यहीं का हो गया है। दल के यहीं बसने से उमरिया, अनूपपुर, शहडोल, मंडला, डिंडौरी और बालाघाट जिलों के जंगली क्षेत्र से लगे गांवों में आए दिन इनकी दहशत की खबरें आती रहती हैं। खासकर कच्चे घरों में रहने वाले ग्रामीणों को हर समय बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। जब हाथी घर के पास पहुंच जाते हैं तब इनकी मौजूदगी पता चलती है। हाथी दल अनाज खाने के साथ ही घरों को तोड़कर भी चले जाते हैं। अब एप में आए नोटिफिकेशन के मिलते ही खतरे का आकलन हो सकेगा और बचाव के उपाय किए जा सकेंगे। इससे मानव-हाथी द्वंद्व की स्थिति से बचा जा सकेगा। मप्र के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वाइल्ड लाइफ) सुभरंजन सेन का कहना है कि गजरक्षक एप न सिर्फ उन क्षेत्रों में रहने वालों की सुरक्षा के लिए है जहां जंगली हाथियों का ज्यादा प्रभाव है, बल्कि हाथी-मानव द्वंद्व में कमी लाने और हाथी-मानव सुरक्षा के लिए भी है। अब तक हुए यह प्रयास सोलर पावर फेंसिंग, सेंसर अलार्म, हाथी मित्र दलों का गठन, वॉट्सएप ग्रुप बनाकर मॉनीटरिंग, जागरूकता के लिए स्थानीय स्तर और राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाएं की जा चुकी हैं।

कुंभ को देखते हुए उज्जैन के 5 स्टेशनों में बड़े बदलाव, कलेक्टर ने दिए निर्देश

उज्जैन  सिंहस्थ 2028 महाकुंभ के आयोजन को लेकर तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं। इसी क्रम में शनिवार को कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उज्जैन सहित आसपास के प्रमुख रेलवे स्टेशनों का निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और रेलवे स्टेशन से मेला क्षेत्र तक आवागमन को सुगम बनाना रहा। निरीक्षण की शुरुआत उज्जैन के मुख्य रेलवे स्टेशन से की गई। इसके बाद कलेक्टर ने निरीक्षण यान के माध्यम से विक्रमनगर, नईखेड़ी, पिंगलेश्वर, चिंतामण गणेश सहित अन्य स्टेशनों का दौरा किया। उन्होंने सभी स्टेशनों पर श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप पर्याप्त होल्डिंग एरिया विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही यात्रियों के लिए आगमन और निर्गमन के मार्ग अलग-अलग रखने और स्टेशनों से सीधे मेला क्षेत्र तक आवागमन के लिए विशेष व्यवस्था करने को कहा। निरीक्षण के दौरान चिंतामण गणेश स्टेशन पर एक अतिरिक्त प्लेटफॉर्म का विस्तार करने तथा चिंतामण से शनि मंदिर तक जाने वाले मार्ग पर स्थित लेवल क्रॉसिंग पर नया रेलवे ओवरब्रिज (ROB) बनाए जाने पर चर्चा हुई। पिंगलेश्वर स्टेशन को दोनों ओर से जोड़ने के लिए 10 मीटर चौड़ी कनेक्टिविटी रोड का निर्माण किया जाएगा। वहीं, वर्तमान में निर्माणाधीन अंडरपास के पास एक और अंडरपास बनाए जाने का प्रस्ताव भी रखा गया। पंवासा फ्लैग स्टेशन को एनएचएआई मार्ग से जोड़ने के लिए स्टेशन तक सर्विस रोड बनवाई जाएगी। प्लेटफार्म क्रमांक 2 से मक्सी मार्ग तक सर्विस लेन का विस्तार भी किया जाएगा। नईखेड़ी स्टेशन पर प्लेटफॉर्म का विस्तार करने के साथ यात्रियों के लिए अलग-अलग एंट्री और एग्जिट मार्ग बनाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त दोनों ओर एप्रोच रोड और एक रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण भी प्रस्तावित है। वहीं मोहनपुरा रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहे ROB के दोनों ओर सर्विस रोड के निर्माण की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई। निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ जयति सिंह, नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक, ईई पीडब्ल्यूडी गौतम अहिरवार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे। रेलवे विभाग से सिंहस्थ मेला अधिकारी कुंजीलाल मीना, पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल की वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रीमती हीना वी. केवलरामानी, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (समन्वय) पीयूष पांडे, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक आलोक चतुर्वेदी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी निरीक्षण में शामिल रहे। सिंहस्थ कुम्भ को लेकर कलेक्टर सिंह के साथ जिला पंचायत सीईओ जयती सिंह, नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक, रेलवे विभाग से सिंहस्थ मेला अधिकारी कुंजीलाल मीना, पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल की वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक हीना वी. केवलरामानी और अन्य अधिकारी मौजूद थे। कलेक्टर रोशन सिंह सभी अधिकारियों के साथ उज्जैन के मुख्य रेलवे स्टेशन पहुंचे। उन्होंने निरीक्षण यान से विक्रमनगर, नईखेड़ी, पिंगलेश्वर, चिंतामण गणेश एवं अन्य स्टेशनों का निरीक्षण किया गया। उन्होंने कुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने संभावना को देखते हुए सभी स्टेशन पर यात्रियों की क्षमता वाले होल्डिंग एरिया बनाने, यात्रियों की सुविधा के लिए एंट्री और एग्जिट मार्ग को अलग-अलग रखने तथा स्टेशन से सीधे मेला क्षेत्र तक सुगम अवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं। निरीक्षण के कलेक्टर में ये निर्देश भी दिए     चिंतामण गणेश स्टेशन पर एक अतिरिक्त प्लेटफॉर्म का विस्तार किए जाने साथ ही, चिंतामण से शनि मंदिर जाने वाले मार्ग पर स्थित लेवल क्रॉसिंग पर एक नया रेलवे ओवरब्रिज (ROB) बनाने।     पिंगलेश्वर स्टेशन को दोनों ओर से जोड़ने के लिए 10 मीटर चौड़ी कनेक्टिविटी रोड।     निर्माणाधीन अंडरपास के पास एक और अंडरपास का निर्माण किया जाने।     पंवासा फ्लैग स्टेशन को NHAI मार्ग से जोड़ने के लिए स्टेशन तक सर्विस रोड का निर्माण।     प्लेटफार्म क्रमांक 2 से मक्सी मार्ग तक सर्विस लेन का विस्तार किए जाने हैं।     नईखेड़ी स्टेशन पर प्लेटफार्म का विस्तार किए जाने हैं।     यात्रियों की सुविधा के लिए एंट्री और एग्जिट मार्ग अलग-अलग करने तथा दोनों ओर एप्रोच रोड और एक ROB भी बनाए जाने और मोहनपुरा रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहे ROB के दोनों ओर सर्विस रोड का निर्माण सुनिश्चित किए जाने पर चर्चा की गई।  

शिकोहपुर लैंड डील केस में वाड्रा पर बढ़े दबाव, ED का दावा— ‘क्राइमिंग से हुई संपत्ति की खरीद’

नई दिल्ली दिल्ली की एक अदालत ने रॉबर्ट वाड्रा को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने वाड्रा का ये नोटिस शिकोहापुर जमीन मामले को लेकर दिया है. ईडी ने इस मामले कोर्ट को बताया था कि रॉबर्ट वाड्रा की स्काईलाइड कंपनी ने उच्च अधिकारियों के दबाव में व्यावसायिक आवास विकास के लिए लाइसेंस हासिल किया.  ईडी ने कोर्ट के सामने तर्क दिया कि लाइसेंस की फाइलों को जल्दबाजी में संसाधित किया गया और वित्तीय क्षमता की जांच नहीं की गई. लाइसेंस अनुचित प्रभाव और पूर्व-आवश्यकताओं को दरकिनार करके प्राप्त किया गया. ED ने वाणिज्यिक लाइसेंस जारी करने के लिए ज़िम्मेदार सरकारी अधिकारियों के बयान भी पेश किए.कंपनी ने चार स्तर पर पैसे लिए.  रॉबर्ट वाड्रा पर ED के गंभीर आरोप राउज एवेन्यू कोर्ट में जांच एजेंसी ED ने आरोप लगाते हुए कहा था कि इस मामले में जांच एजेंसी के पास रॉबर्ट वाड्रा को लेकर अहम सबूत हैं और यह मनी लॉन्ड्रिंग का एक मजबूत उदाहरण है, जहां अपराध की आय से अचल संपत्तियां खरीदी गईं. सबूत स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि अपराध की आय को प्राप्त किया गया, परत-दर-परत छुपाया गया और उसका फायदा उठाया गया. कोर्ट में वकील ने दलील देते हुए कहा कि यह अदालत इस मामले की सुनवाई करने के लिए सक्षम है क्योंकि अपराध की कुछ गतिविधियां दिल्ली में भी हुई थीं. यह मामला वर्ष 2008 में के गुरुग्राम स्थित शिकोहपुर गांव में जमीन खरीद से जुड़ा है, जिसे राॅबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने खरीदा था। ईडी ने 17 जुलाई 2025 को दाखिल अपनी शिकायत में वाड्रा, उनकी कंपनी स्काइलाइट हास्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, सत्यानंद याजी, केवल सिंह वीरक समेत 11 व्यक्तियों और संस्थाओं को आरोपित बनाया है। प्रारंभिक प्राथमिकी गुरुग्राम पुलिस ने दर्ज की थी, जिसमें जमीन की धोखाधड़ी से खरीद और अवैध लाइसेंस प्राप्त करने का आरोप है। ईडी ने 37.64 करोड़ रुपये की 43 अचल संपत्तियों को 16 जुलाई को अस्थायी रूप से जब्त किया था। 2008 की जमीन डील पर मनी लॉन्ड्रिंग केस ED ने 17 जुलाई 2025 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है. इस चार्जशीट में कुल 11 लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है, जिसमें रॉबर्ट वाड्रा, उनकी कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, उनके सहयोगी सत्यानंद याजी, केवल सिंह विरक और उनकी कंपनी ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल हैं. मामला गुरुग्राम के सेक्टर 83, गांव शिकोहपुर की 3.53 एकड़ ज़मीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ा है, जो साल 2008 में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ने खरीदी थी. आरोप है कि इस डील में झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ और पर्सनल इनफ्लुएंस से कमर्शियल लाइसेंस भी लिया गया. 28 अगस्त को अगली सुनवाई तय इस मामले में पहले ही FIR नंबर 288, दिनांक 01.09.2018 को गुरुग्राम पुलिस ने दर्ज की थी. अब ED ने जांच के बाद 16 जुलाई 2025 को 43 प्रॉपर्टीज (37.64 करोड़ रुपये की) अटैच की हैं और फिर चार्जशीट फाइल की गई है. फिलहाल, राउज एवेन्यू कोर्ट अब 28 अगस्त को इस मामले में सुनवाई करेगा. ED ने कोर्ट में कहा कि जांच में पता चला है कि वाड्रा की कंपनी को 42.62 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है, जो दिल्ली में स्तरीकृत थे, जिसके कारण इस न्यायालय का अधिकार क्षेत्र समाप्त हो गया. आपको बता दें कि इस इस मामले की सुनवाई 31 जुलाई को राउज़ एवेन्यू कोर्ट में संक्षिप्त रूप से हुई. मामले की सुनवाई के दौरान, ईडी ने एक बड़ा दावा किया है कि स्काईलाइट ने शीर्ष स्तर के दबाव का उपयोग करके वाणिज्यिक आवासीय विकास के लिए लाइसेंस प्राप्त किया.   

सूरजपुर जिले को पुल और सड़क निर्माण कार्यों के लिए 26.03 करोड़ की मिली स्वीकृति

रायपुर, छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में आधारभूत संरचना के विकास को नया आयाम मिलने जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा भटगांव विधायक श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के सतत् प्रयासों से लोक निर्माण विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कुल 26 करोड़ 03 लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि से जिले में महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों का निर्माण किया जाएगा, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी। प्रमुख स्वीकृत कार्यों में सूरजपुर जिले के सिलफिली एन.एच. 43 से महेशपुर-लटोरी रोड तक 5.80 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण निर्माण कार्य शामिल है, जिसकी लागत 1269.90 लाख रूपये है। इसी प्रकार भवरखोह से गंगापुर-कुम्पी तक 5.10 किलोमीटर लंबाई के पुल पुलिया सहित निर्माण कार्य को स्वीकृति दी गई है जिसकी लागत 729.51 लाख रूपए और विकासखंड ओडगी के मुख्य मार्ग चोंगा से भोडवानीपारा-मौहारीपारा तक कुल 4.20 किलोमीटर लंबाई के पुल पुलिया सहित निर्माण कार्य के लिए 604.03 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।   इन कार्यों के स्वीकृत होने पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने प्रसन्नता जताते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से सूरजपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में आवागमन सुगम होगा और स्थानीय लोगों को यातायात की बेहतर सुविधा मिलेगी। साथ ही, व्यापार और कृषि से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विकास के हर वादे को धरातल पर उतारने का कार्य कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। इन परियोजनाओं से जुड़े निर्माण कार्य शीघ्र शुरू किए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।

अस्पतालों और मरीजों को नहीं बांटी गई खराब कैल्शियम गोलियां: अधिकारिक बयान

अस्पतालों और मरीजों को नहीं बांटी गई खराब कैल्शियम गोलियां: अधिकारिक बयान प्रारंभिक जांच में ही पकड़ी गई खराबी, तुरंत बैच पर लगाई रोक रायपुर गुणवत्ताहीन कैल्शियम की गोलियों का वितरण किसी भी मरीज या अस्पताल को नहीं किया गया है। कैल्शियम विटामिन डी 3 टैबलेट्स की खराबी वेयरहाऊस के कर्मियों ने प्रारंभिक जांच में ही पकड़ ली थी। कर्मियों ने इन टैबलेट्स के स्ट्रिप्स से बाहर निकालने पर ही टूटने की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों, सीजीएमएससी के क्वालिटी कंट्रोल विभाग और मुख्यालय को दी थी। इसी सूचना पर इन टैबलेट्स के बैच को तत्काल ब्लॉक कर दिया गया था और सप्लाईकर्ता संस्था के प्रतिनिधि को स्पष्टीकरण के लिए बुलाया गया था। स्ट्रिप्स से निकालते ही टूटने वाली कैल्शियम विटामिन डी 3 टैबलेट्स को किसी भी मरीज को नहीं दिया गया है नही इन टैबलेट्स को किसी अस्पताल में भेजा गया है।  सीजीएमएससी से मिली जानकारी के अनुसार कैल्शियम विटामिन डी 3 की 500 मिली ग्राम की टैबलेट हेल्थ लाईफ फार्म लिमिटेड द्वारा सप्लाई की गई थी। कुल 65 बॉक्सों में 65 सौ यूनिट की यह खेफ कोरबा वेयरहाऊस को प्राप्त हुई थी। टेबलेट्स के प्राप्त होते ही वेयरहाऊस में ही कर्मियों द्वारा इसका प्रारंभिक परीक्षण किया गया था। परीक्षण में पाया गया था कि टेबलेटस स्ट्रिप्स से बाहर निकालते ही टूट रही हैं। कर्मियों ने इसकी सूचना तत्काल सीजीएमएससी के क्वालिटी कंट्रोल विभाग को दी और इन गुणवत्ताहीन टैबलेट्स के पूरे बैच को ब्लॉक किया गया। सीजीएमएससी ने बताया कि इस खेप का अभी तक कोई मटेरियल प्राप्ति प्रमाण पत्र तैयार नहीं किया गया है। सीजीएमएससी की नीति के अनुसार कोई भी दवा बिना मटेरियल प्राप्ति सर्टिफिकेट के न तो इनवेंटरी में शामिल की जाती है नही किसी संस्था को वितरित की जाती है। ऐसे में गुणवत्ताहीन कैल्शियम विटामिन डी 3 टेबलेट्स को न किसी मरीज को दिया गया है न ही किसी सरकारी अस्पताल में पहुंचाया गया है। प्रदायकर्ता संस्था हेल्दी लाईफ फार्म प्राईवेट लिमिटेड को उपस्थित होकर सैंपल प्रस्तुत करने और स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही प्रदायकर्ता संस्था को खराब बैच वाली दवाओं को बदलकर नई दवाएं देने के भी निर्देश दिए गए हैं। सप्लायर द्वारा टेंडर शर्तों के अनुसार उचित कार्यवाही नहीं करने पर दंडात्मक कार्रवाई करने की चेतावनी भी सीजीएमएससी ने दी हैं। सीजीएमएससी ने छत्तीसगढ़ वासियों को आश्वस्त किया है कि राज्य में दवा आपूर्ति प्रणाली न केवल सतर्क है बल्कि गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था भी पूरी तरह से मजबूत है। दवा की सप्लाई होती ही सबसे पहले वेयर हाऊस में ही हर एक बैच का निरीक्षण-परीक्षण होता है। सभी दवाओं का परीक्षण एन.ए.बी.एल. मान्यता प्राप्त लैबों में कराया जाता है। सीजीएमएससी ने यह भी बताया कि जनता को केवल गुणवत्तायुक्त प्रमाणित दवाई ही उपलब्ध कराई जाती हैं। गुणवत्ताहीन पाए जाने पर दोषपूर्ण बैच को तुरंत रोककर इसका वितरण प्रतिबंधित किया जाता है। दोषी सप्लायर के विरूद्ध तेजी से कार्रवाई की जाती है।