samacharsecretary.com

अगले साल तक उपलब्ध होंगी गेहूं की 14 और जौ की 4 नई किस्में

ग्वालियर देश में अगले वर्ष तक किसानों को 18 नई किस्में उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें 14 किस्में गेहूं की और चार किस्में जौ की शामिल हैं। इन किस्मों की खास बात यह है कि ये न केवल उच्च उत्पादन क्षमता वाली हैं, बल्कि पोषण की दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध हैं। हाल ही में देश में कृषि विज्ञानियों द्वारा अनुसंधान से विकसित की गईं इन किस्मों में जिंक और आयरन की मात्रा 45 पीपीएम और प्रोटीन की मात्रा 13.5 प्रतिशत तक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन किस्मों के अनाज से खासकर कुपोषण से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वालों में पोषण संबंधी कमी को दूर किया जा सकेगा। सेंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी को भेजेंगे जौ की चारों किस्में भी उत्पादन और पोषण के लिहाज से अहम हैं। इनमें डीडब्ल्यूआरबी-223 एक विशेष किस्म है, जो छिलका रहित है। इसे गेहूं में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है, जिससे पोषण में और भी वृद्धि होगी। ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय 64वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता गोष्ठी के समापन अवसर बुधवार को इन नई किस्मों को अंतिम परीक्षण और मंजूरी के लिए सेंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी को भेजने की सहमति दी गई। समापन समारोह की अध्यक्षता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक डॉ. एसके प्रधान ने की, जबकि सह-अध्यक्षता भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने की। डॉ. तिवारी ने जौ की छिलका रहित किस्म को किसानों के लिए उपयोगी बताया। गोष्ठी के समापन सत्र में फसल सुधार, फसल सुरक्षा, गुणवत्ता, मूलभूत और सामाजिक विज्ञान, एवं जौ नेटवर्क की प्रमुख अनुशंसाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। दलहन-तिलहन को मिलेगा बढ़ावा गोष्ठी में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन राज्यों में गेहूं का उत्पादन सीमित है, वहां के किसानों को दलहन और तिलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे न केवल पोषण सुरक्षा में वृद्धि होगी बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी। जल्द ही किसानों को उपलब्ध होंगी ये किस्में गेहूं की किस्में     एनआइएडब्ल्यू – 4114 (निफाड)     डब्ल्यूएच – 1306 (हिसार)     केबी – 2031 (कानपुर)     यूपीबी – 1106 (पंतनगर)     एचडी – 3428 (नई दिल्ली)     डीबीडब्ल्यू – 386, डीबीडब्ल्यू – 443 (करनाल)     पीबीडब्ल्यू – 891 (लुधियाना)     लोक – 79 (सनोसरा)     एनडब्ल्यूएस – 2222 (नुजिवीडु)     एकेएडब्ल्यू – 5100 (अकोला)     जीडब्ल्यू – 543 (विजापुर) जौ की किस्में     डीडब्ल्यूआरबी – 219     डीडब्ल्यूआरबी – 223 (करनाल) इन राज्यों को मिलेगा सीधा लाभ महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल, पूर्वी व पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड के किसानों को इन नई किस्मों से पोषण और उत्पादन दोनों के स्तर पर लाभ मिलेगा।

26 कॉलोनियां होंगी वैध, इस जिले में मिलेंगी बढ़ी हुई सुविधाएं

चंडीगढ़  करनाल शहर की 26 अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। विधानसभा सत्र के दौरान निकाय मंत्री विपुल गोयल ने जानकारी दी कि इन कॉलोनियों से संबंधित प्रस्ताव विभाग के पास विचाराधीन हैं और सरकार जल्द ही इस पर निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि दो महीने के भीतर इस मामले में अंतिम फैसला लेकर अधिसूचना जारी की जाएगी। वहीं, करनाल विधायक जगमोहन आनंद ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि पहले से वैध घोषित कॉलोनियों के बीच कुछ खसरा नंबर और 28 नई कॉलोनियां अब भी वैधीकरण से बाहर हैं, जिससे स्थानीय निवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और लोगों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। कॉलोनी वैध होने के ये होते हैं फायदे कानूनी सुरक्षा: वैध होने के बाद प्लॉट/मकान की रजिस्ट्री, म्यूटेशन आदि कानूनी रूप से मान्य हो जाते हैं। किसी विवाद की स्थिति में मालिकाना हक मज़बूत होता है।   बैंक से लोन सुविधा: वैध कॉलोनी में बने मकानों पर बैंक या वित्तीय संस्थानों से आसानी से होम लोन और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। सरकारी सुविधाएं: बिजली, पानी, सीवर, सड़क, स्ट्रीट लाइट जैसी नगर निगम या सरकारी मूलभूत सुविधाएं आसानी से मिलती हैं। जमीन का मूल्य बढ़ना: अनियमित कॉलोनी में संपत्ति का दाम कम होता है, लेकिन वैध होने के बाद प्लॉट और मकान का मार्केट वैल्यू बढ़ जाता है। भविष्य में विकास कार्य: नगर निगम या विकास प्राधिकरण कॉलोनी में पार्क, स्कूल, सामुदायिक केंद्र और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करते हैं।

महिला समूह को मिली जिम्मेदारी, 23 लाख पौधों का संरक्षण संभालेंगी ‘अमृत मित्र

भोपाल प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छ पर्यावरण के लिये इस वर्ष नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने अमृत हरित महाअभियान चलाया है। अभियान में अब तक 10 संभागों में 23 लाख पौधों का सफलतापूर्वक रोपण किया जा चुका है। नगरीय क्षेत्रों में जन भागीदारी से सामुहिक पौधरोपण के कार्यक्रम अभी भी निरंतर आयोजित किये जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक यह पौधरोपण जबलपुर, शहडोल, भोपाल, नर्मदापुरम्, ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, इंदौर, सागर एवं रीवा संभाग के नगरीय क्षेत्रो में व्यापक स्तर पर किया गया है। शहरी क्षेत्रों में लगाये गये पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी “वूमेन्स फॉर ट्री” अमृत मित्र महिला समूह को सौंपी गयी है। प्रदेश में करीब 7 हजार 800 महिलाएं लगाये गये पौधों की 2 वर्ष तक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाएंगी। अमृत महिला मित्रों को नगरीय निकायों द्वारा प्रशिक्षण के साथ आवश्यक किट भी उपलब्ध कराया गया है। प्रदेश के कुछ नगरीय निकायों ने उनके नगरीय क्षेत्रों के पार्कों के रखरखाव की जिम्मेदारी अमृत मित्र महिला समूह को सौंपी है। प्रदेश में अमृत हरित महाअभियान 5 जून 2025 को पर्यावरण दिवस से नगरीय निकायों की मदद से व्यापक स्तर पर शुरू किया गया था। राज्य में यह अभियान 30 सितंबर तक लगातार जारी रहेगा। सामुहिक पौधरोपण में जनभागीदारी में छात्र-छात्राओं, युवाओं, जनप्रतिनिधियों, विशेषकर महिला जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को शामिल किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में भी पौधरोपण प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन के लिये नगरीय निकायों ने सामूहिक‍पौधरोपण के व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। प्रदेश को हराभरा बनाने तथा शहरी पर्यावरण को संरक्षित करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। पौधरोपण में मुख्य रूप से छायादार और फलदार वृक्षों का चयन किया गया है। आयुक्त की अपील नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने सभी नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों से अपील है कि वृक्षारोपण को जन-अभियान का स्वरूप देते हुए अपने-अपने क्षेत्र में अधिक से अधिक पौधों का रोपण और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी का निर्वहन निष्ठा के साथ करें। ऐसा करके ही हम सब पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा सकते है।  

मध्यप्रदेश: जल जीवन मिशन के तहत नल जल मेंटेनेंस में PHE लगेगा, लागत करीब 1200 करोड़

भोपाल  मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत एकल नल जल योजनाओं के मेंटेनेंस का काम अब लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) द्वारा किया जाएगा। इस काम में सालाना करीब 1200 करोड़ रूपए का खर्च आएगा। जिसको लेकर पीएचई के अधिकारियों द्वारा पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को आगामी कैबिनेट बैठक में पेश करने की तैयारी है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बता दें, एकल नल जल योजना उन गांवों के लिए है जहां छोटे जल स्रोत है और जहां स्थानीय स्तर पर पानी की आपूर्ति की जा सकती है। सरकार ने ऐसे 27990 गांवों के लिए एकल नल जल योजनाएं स्वीकृत की हैं। फैक्ट फाइल     27,990 ऐसे गांव जहां एकल नल जल योजनाओं की दी गई स्वीकृति     20,000 करोड़ खर्च कर गांव-गांव सुगम करेंगे पेयजल व्यवस्था जिम्मेदारी को लेकर कई माह से था पेंच एकल नल जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण की जिम्मेदारी को लेकर पिछले कई माह से पेंच फंसा हुआ था। पहले मुख्य सचिव और मंत्री स्तर पर कई मर्तबा वार्ता हुई लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले पर विस्तार से चर्चा करने के बाद यह फैसला लिया गया कि इसके मेंटेनेंस का काम पीएचई विभाग द्वारा ही देखा जाएगा। 2027 तक प्रदेश में काम पूरा करने का लक्ष्य जल जीवन मिशन के एकल नल जल योजना पर करीब 20 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे है। ताकि गांवों में आने वाले सालों में सुगम रूप से पानी की सप्लाई हो सके। लेकिन मेटेंनेस की जिम्मेदारी तय नहीं होने से यह योजना खटाई में पड़ सकती थी। इसलिए सरकार द्वारा इस मामले को प्राथमिकता पर लेते हुए जिम्मेदारी तय की गई है। बता दें प्रदेश में जल जीवन मिशन का काम पूरा करने का लक्ष्य मार्च 2027 तक का रखा गया है। इमरजेंसी सेवा सेवा के लिए तैनात होंगे वाहन मेंटेनेंस की जिम्मेदारी मिलने के बाद पीएचई विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा आगे की तैयारी शुरू कर दी गई है। विभाग के मुताबिक प्रत्येक गांवों में इमरजेंसी वाहन तैनात किए जाएंगे। जो सभी जरूरी मशीनरी जैसे ट्राईपॉड, चैन-पुल्ली सहित अन्य संयंत्रों से लेस होंगे। किसी इमरजेंसी में फोन आते ही गांवों की तरफ मूवमेंट करेंगे।

अमरबेल पर भोपाल में रिसर्च, पीलिया रोकने के गुणों को मिलेगा वैज्ञानिक आधार

भोपाल  मध्य भारत के वनों और गांवों में बहुतायत से पाई जाने वाली लता अमरबेल पीलिया के इलाज में भी कारगर हो सकती है। भोपाल के पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक संस्थान ने अपने शुरुआती अध्ययन में इसमें पीलियारोधी गुण पाया है। इसको वैज्ञानिक आधार देने के लिए संस्थान ने विस्तृत शोध की योजना तैयार की है। अमरबेल का वनस्पति विज्ञानी नाम कस्कूटा रिफ्लेक्सा है। यह बिना पत्तियों वाली परजीवी लता है जो दूसरे पेड़ों के ऊपर पनपती है। उन्हीं के तने से पोषण लेती है, इसकी वजह से इसमें उस पेड़ से संबंधित रसगुण आ जाते हैं। प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, भावप्रकाश निघंटु आदि में इसके गुणों का विस्तृत वर्णन है। मधुमेह, खांसी, पाचन संबंधी विकारों, व त्वचा रोगों और रक्त दोष के उपचार के लिए इस लता को औषधि के तौर पर उपयोग किया जाता रहा है। कुछ समुदाय इसके काढ़े का उपयोग करते हैं आयुर्वेद संस्थान के अध्ययन में यह बात सामने आई कि कुछ समुदाय पीलिया के उपचार के लिए इसके काढ़े का प्रयोग करते हैं। इसकी पुष्टि के बाद इसके पीलियारोधी गुणों को वैज्ञानिक आधार देने के लिए विस्तृत शोध की योजना बनी है। इनमें इसकी एंटी इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने की क्षमता), एंटी-वायरल (वायरस से लड़ने वाली) और लीवर प्रोटेक्टिव (जिगर की रक्षा करने वाली) क्षमताओं को परखा जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि अमरबेल रक्त शुद्धिकरण में किस हद तक मददगार है। संस्थान में द्रव्यगुण विभाग की प्रमुख डॉ. अंजली जैन ने बताया कि रिसर्च की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणिक करना है उद्देश्य     हमारा उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करना है। शोध के नतीजे सामने आने के बाद अमरबेल आधारित दवाओं को आधुनिक चिकित्सा पद्धति में भी शामिल करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। – डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज।  

मेट्रो कॉर्पोरेशन ने जारी किए 1200 नोटिस, ब्लू लाइन निर्माण से प्रभावित होंगे मकान-दुकान

भोपाल   भोपाल में मेट्रो की ब्लू लाइन के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर का जमीनी काम शुरू हो गया है। जेके रोड क्षेत्र में पीयर्स के लिए लोहे के जाल बिछने लगे है। पीयर्स पर ही स्लैब बिछेगी और यहां पटरियों का काम होगा। ब्लू लाइन में करीब 13 किमी लंबाई की एलिवेटेड लाइन बनना है। 14 किमी लंबाई की लाइन एम्स से करोद तक की है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से ब्लू लाइन से जुड़े निर्माणों के लिए 1200 नोटिस तैयार किए गए है। एक सप्ताह में ये नोटिस दे दिए जाएंगे। यदि कोई नहीं हटेगा(Demolishe) तो पुलिस और प्रशासनिक क्षरा कार्रवाई की जाएगी। 700 मामलों में चल रही सुनवाई मेट्रो रेल की लाइन में आ रहे निर्माणों में से 700 की प्रशासन ने नियमित सुनवाई शुरू की है। तहसीलदार-एसडीएम कोर्ट में इन्हें सुना जा रहा है। मुआवजे के राशि व विस्थापन की नीति से ये सहमत नहीं है। ब्लू लाइन में तो जहांगीराबाद का बाजार ही पूरा आ रहा है और लगभग सभी दुकानदार इसके विरोध में है। गौरतलब है कि ब्लू लाइन भदभदा से शुरू होकर रत्नागिरी तिराहा तक है। जबकि ओरेंज लाइन एम्स से करोद तक है। ओरेंज लाइन में सुभाष ब्रिज तक 6.22 किमी का काम पूरा हो चुका है और यहां अक्टूबर में कमर्शियल रन शुरू करने की तैयारी है।

ग्वालियर में दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव, पर्यटन को मिलेगी नई दिशा: CM यादव

ग्वालियर की दो दिवसीय ‘रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव’, पर्यटन को देगी नई दिशा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव केंद्रीय मंत्री सिंधिया और विधानसभा अध्यक्ष तोमर भी होंगे शामिल प्रसिद्ध अभिनेता पीयूष मिश्रा और फ़ैसल मलिक करेंगे संवाद निवेशक, पर्यटन व्यवसायी, टूर ऑपरेटर्स, होटल इंडस्ट्री के हितधारक होंगे शामिल दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव ग्वालियर में ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा 29 एवं 30 अगस्त को ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में  रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि केंद्रीय संचार मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर तथा पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी होंगे। प्रसिद्ध अभिनेता पीयूष मिश्रा और फैसल मलिक विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। ग्वालियर–चंबल एवं सागर क्षेत्र की पर्यटन क्षमताओं को पहचानते हुए प्रदेश में पर्यटन निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव आयोजित की जा रहा है। “टाइमलेस ग्वालियर: इकोज़ ऑफ़ कल्चर, स्पिरिट ऑफ़ लेगेसी” थीम पर केन्द्रित कॉन्क्लेव पर्यटन निवेश, सांस्कृतिक धरोहर, अनुभवात्मक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा 11 से 13 अक्टूबर-2025 तक भोपाल में मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट का आयोजन किया जाएगा।   अनुबंध और साझेदारियों से होगा पर्यटन का विकास कॉन्क्लेव में पर्यटन विकास को गति देने के लिए कई अहम करार होंगे।  होटल, रिसोर्ट, वेलनेस और ईको-टूरिज्म क्षेत्र के निवेशकों को लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) प्रदान किए जाएंगे। पारंपरिक संगीतज्ञों, लोक कलाकारों और पर्यटक ग्रामों के कलाकारों की क्षमता निर्माण के लिए ग्वालियर की मान सिंह तोमर यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू होगा। इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और प्रचार-प्रसार के लिए याप डिजिटल, क्रायोन्स एडवरटाइजिंग, ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजे़स लिमिटेड, कॉन्सेप्ट कम्युनिकेशन्स साथ अनुबंध होंगे। इन समझौतों से न केवल निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय समुदाय और कलाकार भी प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। नई परियोजनाओं का होगा शुभारंभ कॉन्क्लेव में नई परियोजनाओं की शुरुआत भी होगी। इनमें हस्तशिल्पों की मार्केटिंग में संस्था डेलबर्टो महत्वपूर्ण साझेदारी होगी। इस साझेदारी से हस्तशिल्प प्रेमी एक विशेष ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म के जरिए सीधे हमारे कारीगरों से जुड़कर उनके द्वारा तैयार किए गए उत्कृष्ट और प्रामाणिक उत्पाद घर बैठे ही खरीद सकेंगे। इंडिगो और आगा खां फाउंडेशन के सहयोग से सीएसआर के अंतर्गत ग्वालियर किले में संरक्षण, लैंडस्केपिंग और इल्युमिनेशन कार्यों का शिलान्यास होगा। स्वदेश दर्शन 2.0 के अंतर्गत ग्वालियर के फूल बाग में अनुभवात्मक पर्यटन परियोजनाओं का शिलान्यास होगा। साथ ही मान सिंह तोमर म्यूजिक यूनिवर्सिटी में विकास कार्यों का शिलान्यास किया जायेगा।   विरासतों, धरोहरों और अनुभवात्मक पर्यटन की संभावनाओं पर होगा मंथन रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में दो महत्वपूर्ण सत्र होंगे। “टूरिज़्म ऐज़ अ कल्चरल ब्रिज – ब्रांडिंग ग्वालियर एंड हार्टलैंड ऑफ़ एमपी” विषय पैनल डिस्कशन होगा, जिसमें ग्वालियर की सांस्कृतिक धरोहर, शास्त्रीय संगीत और स्थापत्य कला को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की रणनीतियों पर विचार होगा। दूसरा पैनल डिस्कशन “ग्वालियर एंड चंबल राइजिंग – इनबाउंड अपील थ्रू हेरिटेज, लग्ज़री एंड एक्सपीरियंस” विषय पर केंद्रित होगा, जिसमें विरासत, लग्ज़री स्टे, डेस्टिनेशन वेडिंग और अनुभवात्मक पर्यटन जैसे नए आयामों पर संवाद होगा। हितधारक पर्यटन व्यवसाय में निवेश की संभावनाओं पर करेंगे चर्चा रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में ट्रैवल ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के बीच द्विपक्षीय संवाद और पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होगी। यह सत्र न केवल क्षेत्रीय पर्यटन के विकास के लिए, बल्कि राष्ट्रीय पर्यटन समृद्धि के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। सांस्कृतिक संध्या में दिखेगा मध्य प्रदेश का गौरव रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव के प्रथम दिवस सांस्कृतिक संध्या में मध्यप्रदेश का गौरव देखने को मिलेगा। इस दौरान कलाकारों द्वारा लोककला की प्रस्तुति दी जाएगी। इसी प्रकार मैहर बैंड समां बांधेगा। इस कॉन्क्लेव में विशेष पर्यटन प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश के विविध पर्यटन स्थलों, पर्यटन इकाइयों, होस्पिटैलिटी ब्रांड्स, होमस्टे, रिसॉर्ट्स, हैंडलूम/हैंडिक्राफ्ट, साहसिक गतिविधियों और सांस्कृतिक धरोहरों को समर्पित स्टॉल लगाए जाएंगे। यह प्रदर्शनी निवेशकों, ट्रैवल एजेंट्स, टूर ऑपरेटर्स, स्थानीय उद्यमियों और आगंतुकों को एक मंच पर लाकर पर्यटन क्षेत्र में संभावनाओं को प्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत करने का अवसर देगी।   जुटेंगे इंफ्लुएंसर्स, हितधारक जानेंगे समृद्ध विरासत कॉन्क्लेव में इंफ्लुएंसर्स मीट भी होगी। इसमें ग्वालियर–चंबल क्षेत्र के इंफ्लुएंसर्स शामिल होंगे और उन्हें अभिनेता फैसल मलिक के साथ रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इसी तरह ग्वालियर किले पर 30 एवं 31 अगस्त को सुबह 6:30 बजे से योग सत्र का आयोजन किया जाएगा। चयनित अतिथियों एवं प्रतिनिधियों के लिए फैमिलियाराइज़ेशन टूर (FAM Tour) का आयोजन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य ग्वालियर एवं आसपास के पर्यटन स्थलों की संभावनाओं से प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है। इस विशेष भ्रमण के माध्यम से प्रतिनिधियों को क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक महत्व आदि का अनुभव कराया जाएगा, जिससे वे निवेश, प्रचार-प्रसार और पर्यटन विकास की दृष्टि से गहराई से जुड़ सकें।  

नगर निगम की बड़ी पहल: अवैध कॉलोनियां हुईं नियमित, विकास शुल्क वसूली अभी भी चुनौती

 इंदौर  इंदौर नगर निगम शहर की अवैध कॉलोनियों को नियमित तो कर रहा है, लेकिन इन कॉलोनियों के रहवासियों से विकास शुल्क वसूलने का उसके पास कोई सिस्टम ही नहीं है। हालत यह है कि निगम अब तक 150 से ज्यादा कॉलोनियों को नियमित कर चुका है, लेकिन विकास शुल्क किसी भी कॉलोनी का जमा नहीं हुआ। दरअसल जिन कॉलोनियों को नियमित किया गया है, उनमें से ज्यादातर पहले से विकसित हैं। उनमें बिजली, पानी और सड़क की सुविधा उपलब्ध है। ज्यादातर भूखंडों पर बगैर नक्शा पास कराए निर्माण भी हो चुका है। सवाल उठ रहा है कि ऐसी स्थिति में रहवासी विकास शुल्क क्यों जमा कराएंगे जबकि उनकी कॉलोनी में कोई विकास होना ही नहीं है। नगर निगम का कहना है कि कॉलोनी नियमित होने और विकास शुल्क जमा कराने के बाद रहवासी नक्शा पास कर वैध तरीके से निर्माण कर सकेंगे, लेकिन जो पहले से निर्मित हैं, उनका क्या होगा, इस बारे में निगम मौन है। तीन चरणों में 150 कॉलोनियां हुई नियमित शहर की अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की मुहिम करीब ढाई वर्ष पहले शुरू हुई थी। नगर निगम अब तक तीन चरणों में 150 से अधिक कॉलोनियों को नियमित कर चुका है। कॉलोनियों को नियमित करने के एवज में रहवासियों को एक निश्चित विकास शुल्क नगर निगम में जमा कराना था। यह राशि पांच रुपये वर्गफीट से लेकर 150 रुपये वर्गफीट तक है। इस राशि को जमा कराने के लिए कोई सिस्टम ही नगर निगम ने नहीं बनाया। कॉलोनी नियमित करते हुए बताया गया था कि इसके बाद नक्शे पास हो सकेंगे, निर्माण के लिए बैंकों से ऋण मिल सकेगा, लेकिन समस्या यह है कि नियमित हुई ज्यादातर कॉलोनियों में पहले ही से मकान बने हुए हैं। इतना ही नहीं, इन कॉलोनियों में सड़क, पानी और बिजली की सुविधा भी पहले से उपलब्ध है। कुल मिलाकर देखें तो ये कालोनियां पहले से विकसित हैं। इन्हें अतिरिक्त विकास की कोई आवश्यकता ही नहीं है। ऐसे में इन कॉलोनियों के रहवासी निगम में विकास शुल्क क्यों जमा कराएंगे, इसका कोई जवाब निगम के पास नहीं है। अवैध से नियमित की गई किसी भी कॉलोनी के शत-प्रतिशत रहवासियों ने अब तक निगम में विकास शुल्क जमा नहीं कराया है। समझाने का प्रयास करेंगे     कॉलोनियों से विकास शुल्क जमा हो जाए, इसके लिए सिस्टम बनाएंगे। एक तय समय सीमा में विकास शुल्क जमा नहीं होने की स्थिति में कॉलोनी को नियमित करने के निर्णय पर पुनर्विचार का प्रस्ताव भी करेंगे। रहवासियों को यह बात समझाने का प्रयास करेंगे कि विकास शुल्क जमा करने का फायदा उन्हीं को मिलेगा। – राजेश उदावत, कॉलोनी सेल प्रभारी, नगर निगम इंदौर  

दीपोत्सव 2025: अयोध्या में तैयारी जोरों पर, नोडल अधिकारी घोषित

अयोध्या उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव 2025 को लेकर तैयारी जोरशोर चल रही है। इसके लिए यूपी सरकार ने अधिकारियों की टीम भी गठित कर दी है। इसे लेकर एक पत्र भी जारी किया गया है। रामनगरी अयोध्या में आयोजित होने वाले भव्य दीपोत्सव 2025 की तैयारियां अब तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने दीपोत्सव आयोजन की निगरानी और समन्वय के लिए अधिकारियों की टीम गठित कर दी है। जारी आदेश के अनुसार, अरविंद कुमार मिश्रा और डॉ. जितेंद्र प्रताप सिंह को दीपोत्सव के लिए नोडल अधिकारी नामित किया गया है। ये दोनों अधिकारी आयोजन से जुड़े सभी कार्यक्रमों, व्यवस्थाओं और मीडिया समन्वय का कार्य संभालेंगे। यह आदेश सूचना निदेशक विशाल सिंह ने जारी किया है। उत्तर प्रदेश सरकार सूचना एवं जन संपर्क विभाग द्वारा जारी संशोधित आदेश के अनुसार, अयोध्या में 19 अक्टूबर 2025 को प्रान्तीयकृत दीपोत्सव मेला का आयोजन होगा। बता दें कि पिछले साल 2024 में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार भगवान राम के आगमन पर दीपोत्सव का आयोजन हुआ था। इस दौरान 25 लाख 12 हजार 585 दीये जलाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया। इसके साथ 1 हजार 121 लोगों ने एक साथ सरयू आरती कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम का शुभारंभ पहला दीया जलाकर किया था। सरयू घाट पर लेजर और लाइट शो का आयोजन हुआ था, जिसमें दीयों और रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाता घाट, साउंड-लाइट शो के जरिए रामलीला का वर्णन किया गया। पहली बार 1,121 वेदाचार्यों ने एक साथ सरयू मैया की आरती की थी।

केजरीवाल ने दिल्ली चुनाव में हार पर कहा, ‘जो होता है, अच्छा होता है’

नई दिल्ली  दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को दिल्ली में अपने विधायकों और पार्षदों की बैठक ली। अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए दिल्ली चुनाव में पार्टी की हार का भी जिक्र किया और कहा कि उनका विश्वास ईश्वर में है और भगवान जो करता है अच्छे के लिए करता है। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली की जनता उनकी सरकार को याद करने लगी है और आज चुनाव हो जाए तो सारी सीटें जीत जाएंगे। दिल्ली में 'आप' की तीन बार की सरकार को हटाकर सत्ता में आई भाजपा के कामकाज की आलोचना करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘दिल्ली में छह महीने से…. मैं भगवान में बहुत यकीन करता हूं। मैं समझता हूं भगवान जो करता है अच्छे के लिए करता है। छह महीने में इन्होंने ऐसा कर दिया दिल्ली के अंदर, शायद भगवान यही दिखाना चाहता था कि आम आदमी पार्टी वाले कितने अच्छे थे। आज जनता याद कर रही है। मेरे पास काफी लोग आते हैं, कोई कहता है कि आज चुनाव हो जाएं तो 60 सीटें आएंगी, कोई कहता है कि 65 सीटें आएंगी, कोई कहता है कि 70 की 70 सीटें आएंगी।’ केजरीवाल ने रेखा गुप्ता सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि लुटियंस दिल्ली में भी पांच-पांच बार लाइट जाती है। उन्होंने कहा, ‘10 साल से बिजली नहीं गई थी। सारे इनवर्टर वालों की दुकानें बंद हो गई थीं। दोबारा खुलवा दी। मैं लुटियंस दिल्ली में रहता हूं, पीएम का घर और राष्ट्रपति भवन थोड़ी दूरी पर है। मेरे घर रोज 5-5 बार बिजली जाती है। कभी आधे घंटे के लिए कभी एक घंटे के लिए। बाकी दिल्ली का तो क्या हाल कर दिया, पूरी दिल्ली में बिजली जा रही है। बच्चों की फीस बढ़ गई, सड़कें टूटी पड़ी हैं। एक बारिश में दिल्ली का बुरा हाल हो जाता है। सीवर जाम पड़े हैं, पानी नहीं आ रहा है। चारों तरफ झुग्गियां तोड़ रहे हैं। गरीबों का तो जीना हराम कर दिया।’ कांग्रेस और भाजपा में समझौता: केजरीवाल आप प्रमुख ने कहा कि 15 साल में कांग्रेस का जो हाल हुआ था, वह भाजपा सरकार ने छह महीने में कर दिया। उन्होंने कहा कि जनता को पांच साल बाद मौका मिलेगा इन्हें हटाने का। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस के बीच समझौते का आरोप भी लगाया और कहा कि जनता कह रही है कि उनके इतने नेता गिरफ्तार हो गए, कांग्रेस का एक भी नेता क्यों नहीं जेल गया। मुफ्त बिजली बंद करने जा रहे हैं: केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने अपने जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को अगले चुनाव तक जनता के बीच रहकर काम करने को कहा। उन्होंने कहा, 'जनता के बीच में रहो। मुझे पता चला है कि ये बिजली की सब्सिडी खत्म करने जा रहे हैं। दिल्ली के अंदर जो फ्री बिजली मिल रही है, यह इन्हे तकलीफ दे रही है। जनता के बीच रहे, जनता के सुख दुख में काम आओ। भगवान ने संदेश दिया है कि जब तक अगला चुनाव नहीं होता, अगले चुनाव में फिर सरकार चलाने का मौका मिलेगा। तब तक जनता के बीच रहकर काम करते रहेंगे।'