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छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा क्रांति: हर घर बनेगा बिजलीघर

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को प्रदेश के कोने-कोने तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। उनकी यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन और सतत विकास के बड़े लक्ष्यों को भी हासिल करेगी। साथ ही जीरो कार्बन एमिशन लक्ष्यों में योगदान सुनिश्चित होगा। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में घर-घर रूफटॉप सोलर पॉवर प्लांट स्थापित कर लोगों को प्रदूषण मुक्त, मुफ्त और निरंतर बिजली देने की परिकल्पना की गई है। इसके माध्यम से प्रत्येक उपभोक्ता को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाकर उनके मासिक खर्चों में भी उल्लेखनीय कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। हर नागरिक की होगी भागीदारी प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत पात्रता रखने वाले सभी नागरिक जिनके पास वैध बिजली कनेक्शन और उपयुक्त छत है, वे इस योजना में आवेदन कर सकते हैं। खास बात यह है कि योजना के अंतर्गत एक बार सोलर पैनल स्थापित होने के बाद उपभोक्ता को हर माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी। इससे न सिर्फ बिजली बिलों का झंझट समाप्त होगा, बल्कि यदि आवश्यकता से अधिक बिजली का उत्पादन होता है, तो उसे ग्रिड को बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी ली जा सकती है। मिलेगी डबल सब्सिडी  प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 1 किलोवॉट से 3 किलोवॉट तक के सौर संयंत्र लगाने पर प्रति वॉट 45 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 1 लाख 8 हजार रुपये तक की सब्सिडी केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दी जा रही है। इसमें राज्य सरकार ने भी अपनी हिस्सेदारी जोड़ दी है, जिससे उपभोक्ताओं को डबल सब्सिडी का सीधा लाभ मिलेगा। स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण छत्तीसगढ़ सरकार जीरो कार्बन एमिशन नीति को साकार रूप देने के लिए स्वच्छ ऊर्जा को प्राथमिकता दे रही है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 15 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी का उत्पादन हो रहा है। इसे बढ़ाकर सरकार ने वर्ष 2047 तक 45 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। यह नीति न केवल वर्तमान, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी हरित और सतत भविष्य सुनिश्चित करेगी। बढ़ेंगे रोजगार के अवसर छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा क्रांति से रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेगें। इससे सोलर पैनल के निर्माण, स्थापना, रखरखाव आदि जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर बढ़ेगें। वहीं राज्य की आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। योजना के फायदे- केंद्र एवं राज्य सरकार की ओर से डबल सब्सिडी सीधे बैंक खाते में मिलेगा। एक बार सौर पैनल की स्थापना के बाद 20-25 वर्षों तक मुफ्त बिजली मिल सकेगी। लोगों को निरंतर विद्युत की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। बार-बार बिजली गुल होने की समस्या से मुक्ति मिलेगी। इसके अलावा बिजली बेचने से अतिरिक्त आमदनी होगी। साथ ही स्वच्छ, हरित और पर्यावरण हितैषी जीवनशैली को बढ़ावा मिलेगा।

01 लाख 24 हजार 701 स्‍मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिला 20 प्रतिशत छूट का लाभ

भोपाल  मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत 01 लाख 24 हजार 701 स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को उनके मासिक विद्युत बिल में सोलर ऑवर (टाइम ऑफ डे) छूट का लाभ देते हुए जुलाई 2025 में कुल 1 करोड़ 8 लाख 59 हजार 082 रूपये की रियायत दी है। दिन के टैरिफ में स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए यह सभी छूट अथवा प्रोत्साहन की गणना सरकारी सब्सिडी (यदि कोई हो) को छोड़कर की जा रही है। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं, जिनमें घरेलू, गैर घरेलू, सार्वजनिक जल कार्य और स्ट्रीट लाइट और निम्‍नदाब औद्योगिक उपभोक्‍ता शामिल हैं, के लिए 'सोलर ऑवर' सुबह 9  बजे से शाम 5  बजे तक की अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर  20 प्रतिशत की छूट, 10  किलोवाट तक स्वीकृत लोड/अनुबंध मांग वाले उपभोक्‍ताओं को, दी जा रही है। कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने बताया है कि कंपनी ने स्मार्ट मीटरिंग पहल में माह जुलाई 2025 के दौरान 1 लाख 24 हजार 701 उपभोक्ताओं को यह छूट दी है। कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल में कुल 1 लाख 16 हजार 736 स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं ने 1 करोड़ 44 हजार तथा ग्‍वालियर में कुल 7 हजार 965  स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं ने कुल 8 लाख 14 हजार रूपये की बिजली बिल में छूट का लाभ उठाया है। कंपनी द्वारा स्‍मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनकी खपत के आधार पर सोलर ऑवर छूट के तहत 50 रूपये से लेकर 12 हजार 160 रूपये तक की छूट दी गई है। प्रबंध संचालक ने आमजन एवं उपभोक्‍ताओं से अपील की है कि वे अपने परिसर में स्‍मार्ट मीटर लगाने में सहयोग करें और स्‍मार्ट मीटर लगवाने से न घबराएं। स्‍मार्ट मीटर उनके लिए हर तरह से फायदेमंद है और स्‍मार्ट मीटर की सटीक रीडिंग और बिलिंग के साथ ही कार्यप्रणाली में भी किसी प्रकार की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। कंपनी ने भोपाल क्षेत्रांतर्गत कुल 1 लाख 16 हजार 736 उपभोक्ताओं में हरदा सर्किल के कुल 7 उपभोक्‍ताओं को 2 हजार 174 रूपए, राजगढ़ के 26 उपभोक्‍ताओं को 4 हजार 706 रूपए, भोपाल ग्रामीण के 6 हजार 970 उपभोक्‍ताओं को 5 लाख 11 हजार 994 रूपए, रायसेन के 15 उपभोक्‍ताओं को 12 हजार 074 रूपए, बैतूल के 63 उपभोक्‍ताओं को 21 हजार 312 रूपए, विदिशा के 966 उपभोक्‍ताओं को 58 हजार 532 रूपए, सीहोर के 2 हजार 418 उपभोक्‍ताओं को 1 लाख 50 हजार 892 रूपए, नर्मदापुरम के 18 हजार 091 उपभोक्‍ताओं को 14 लाख 17 हजार 160 रूपए और भोपाल शहर वृत्‍त के 88 हजार 180 उपभोक्‍ताओं को 78 लाख 65 हजार 444 रूपए की दिन के टैरिफ में छूट दी है। इसी प्रकार कंपनी ने ग्‍वालियर क्षेत्रांतर्गत कुल 7 हजार 965 स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं में शिवपुरी सर्किल के कुल 3 उपभोक्‍ताओं को 644 रूपए, मुरैना के 2 उपभोक्‍ताओं को 1,095 रूपए, अशोक नगर के 4 उपभोक्‍ताओं को 1,906 रूपए, दतिया के 6 उपभोक्‍ताओं को 2,152 रूपए, गुना के 90 उपभोक्‍ताओं को 6,738 रूपए, ग्‍वालियर ग्रामीण के 2,208 उपभोक्‍ताओं को 1 लाख 92 हजार 432 रूपए और ग्‍वालियर शहर वृत्‍त के 5,652 उपभोक्‍ताओं को 6 लाख 9 हजार 819 रूपए की दिन के टैरिफ में छूट दी है।  उल्‍लेखनीय है कि स्मार्ट मीटर से बिजली उपभोक्‍ताओं को ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद मिलती है। स्‍मार्ट मीटर बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती। ऐप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित किया जा सकता है। उपभोक्‍ताओं को ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, जिससे ऊर्जा की खपत को बेहतर बनाया जा सकता है। उपभोक्‍ता ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन मोबाइल एप के द्वारा किसी भी समय कहीं से भी देख सकते हैं। स्‍मार्ट मीटर ऊर्जा की खपत को कम करने में सहायक होकर पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव को भी कम करता है। 

बिजली संकट पर सख्त हुए योगी, अफसरों को दी सुधार की अंतिम चेतावनी

लखनऊ बिजली की आंख मिचौली से खफा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजली अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ट्रिपिंग, ओवरबिलिंग और अनावश्यक कटौती किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। विद्युत आपूर्ति के लिए व्यवस्था में सुधार करना ही होगा वरना कार्रवाई के लिए तैयार रहें। मुख्यमंत्री योगी ने यहां ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश में बिजली व्यवस्था अब केवल तकनीकी या प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और शासन की संवेदनशीलता का पैमाना बन चुकी है। सीएम ने शिकायतों पर जताई नाराजगी  बैठक में मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि जून 2025 में उत्तर प्रदेश ने रिकॉर्ड 31,486 मेगावाट की अधिकतम बिजली मांग सफलतापूर्वक पूरी की। इस अवधि में 16,930 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति की गई। लगातार बढ़ रही उमस (ह्यूमिडिटी) और तापमान ने खपत को अप्रत्याशित रूप से बढ़ाया, इसके बावजूद शहरी क्षेत्रों में औसतन 24 घंटे, तहसील स्तर पर 21.5 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे तक बिजली उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने ट्रिपिंग की लगातार आ रही शिकायतों पर गहरी नाराजगी जताई और निर्देश दिया कि प्रत्येक फीडर की तकनीकी जांच हो, कमजोर स्थानों की पहचान कर तुरंत सुधार कराया जाए।  ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता तुरंत बढ़ाई जाएः योगी  सीएम ने कहा कि जहाँ ज़रूरत हो, वहां ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता तुरंत बढ़ाई जाए ताकि ओवरलोडिंग की स्थिति न बने। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि फील्ड से प्राप्त वास्तविक शिकायतों का समाधान समयबद्ध ढंग से हो, ताकि जनता को राहत मिले। उन्होंने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से कहा कि संसाधनों की कोई कमी नहीं है, सरकार ने बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण को मजबूत करने के लिए रिकॉर्ड बजट उपलब्ध कराया है। ऐसे में किसी स्तर पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों से उनके क्षेत्रों की आपूर्ति की स्थिति जानने के बाद मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाए।  बिलिंग व्यवस्था पर ये बोले सीएम योगी  बिलिंग व्यवस्था पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘‘हर उपभोक्ता को हर महीने सही समय पर स्पष्ट और सटीक बिल मिलना चाहिए। फॉल्स या ओवरबिलिंग जैसी शिकायतें जन विश्वास को तोड़ती हैं और विभाग की साख को नुकसान पहुंचाती हैं। यह किसी भी स्थिति में नहीं होना चाहिए। बिलिंग एफिशिएंसी बढ़ाई जाए। उन्हें जानकारी दी गई कि अब तक 31 लाख उपभोक्ता स्माटर् मीटर से जोड़े जा चुके हैं और इस प्रक्रिया को ब्लॉक स्तर तक ले जाने का कार्य तेज़ी से जारी है। योगी ने तकनीकी और वाणिज्यिक हानियों (लाइन लॉस) को चरणबद्ध रूप से नीचे लाने का लक्ष्य तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर डिस्कॉम को अपने स्तर पर ठोस रणनीति बनाकर काम करना होगा। साथ ही, जहां आवश्यक हो, पारेषण व वितरण प्रणाली के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया भी गति पकड़े।  

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ बन रहा टेक्नोलॉजी हब : नवा रायपुर में कामन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना को मिली मंजूरी

इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में आत्मनिर्भर बनेगा राज्य, युवाओं को मिलेगा नवाचार और रोजगार का नया मंच रायपुर छत्तीसगढ़ को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ी  उपलब्धि मिली है। अब राज्य को इलेक्ट्रॉनिक्स टेस्टिंग या प्रोटोटाइपिंग के लिए बेंगलुरु, पुणे या नोएडा जैसे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने नवा रायपुर में कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) की स्थापना को मंजूरी प्रदान की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरदृष्टि और आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में तैयार इस परियोजना से राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री, स्टार्टअप और युवाओं के लिए नया युग प्रारंभ होगा। यह परियोजना छत्तीसगढ़ की उद्योग नीति के अनुरूप निवेशकों को आकर्षक प्रोत्साहन भी प्रदान करेगी। कॉमन फैसिलिटी सेंटर नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-22 में 3.23 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत 108.43 करोड़ रुपये है, जिसमें से 75.00 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भारत सरकार के MeitY मंत्रालय द्वारा EMC 2.0 योजना के अंतर्गत स्वीकृत की गई है। शेष 33.43 करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे तथा भूमि की उपलब्धता नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRANVP) द्वारा सुनिश्चित की जा रही है। यह कॉमन फैसिलिटी सेंटर इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को बढ़ावा देने हेतु एक साझा एवं अनुकूल वातावरण निर्मित करेगा, जहां प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) प्रोटोटाइपिंग, 3D प्रिंटिंग, EMC परीक्षण और वुड वर्कशॉप जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह केंद्र अर्धचालक (सेमीकंडक्टर), माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, एलईडी लैंप, सोलर चार्ज कंट्रोलर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) समाधान, ऑटोमेशन समाधान और SCADA पैनल जैसी इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित उत्पादन इकाइयों को विशेष लैब और परीक्षण सुविधाएं प्रदान करेगा। यह सेंटर क्षेत्र के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करेगा। उदाहरण के तौर पर, एक छोटी एलईडी लाइट निर्माण इकाई अपने उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच के लिए CFC की परीक्षण लैब का उपयोग कर सकेगी। इसी प्रकार, एक स्टार्टअप जो सोलर चार्ज कंट्रोलर डिज़ाइन कर रहा है, वह बड़े पैमाने पर उत्पादन से पूर्व अपने डिज़ाइन को इस केंद्र की प्रोटोटाइपिंग सुविधा में परख सकेगा। एक इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) घटक निर्माता अपने उत्पादों की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक संगतता (EMC) का परीक्षण कर सकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी प्रणालियाँ सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं। साथ ही, 3D प्रिंटिंग सुविधा कंपनियों को विशेष जिग्स या कस्टम एन्क्लोज़र बनाने में सहायता करेगी, जबकि PCB प्रोटोटाइपिंग सेवा सर्किट बोर्डों के त्वरित विकास और परीक्षण में मदद करेगी, जिससे उत्पाद निर्माण की गति तेज होगी। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पहले से ही कई आकर्षक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इस कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना को राज्य की उद्योग नीति के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों से और भी बल मिलेगा, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बाहरी और स्थानीय निवेश को गति मिलेगी। नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRANVP) द्वारा संचालित यह परियोजना राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण एवं निवेश को प्रोत्साहित करेगी। इसके माध्यम से राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस परियोजना को टेक्नोलॉजी क्रांति की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह पहल राज्य को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से समृद्ध बनाएगी। उन्होंने कहा कि इससे न केवल नवाचार और स्टार्टअप को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि उद्योगों को विश्वस्तरीय परीक्षण और प्रोटोटाइपिंग सुविधाएं भी सुलभ होंगी, जिससे छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक पावरहाउस बनकर उभरेगा। आवास और पर्यावरण मंत्री श्री ओपी चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि कॉमन फैसिलिटी सेंटर जैसी परियोजनाएं छत्तीसगढ़ के तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगी। इससे स्थानीय स्टार्टअप्स, युवाओं और उद्यमियों को अत्याधुनिक संसाधन मिलेंगे, जो पहले बड़े शहरों तक ही सीमित थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह पहल डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को अग्रणी बनाएगी।

निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता से पूर्ण करने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिए निर्देश

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग की विभिन्न लंबित परियोजनाओं की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में प्रगति लाने हेतु ठोस रणनीति अपनाई जाए और निर्माण की गति में तेजी लाई जाए। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशभर में निर्माणाधीन जल परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने विशेष रूप से वर्ष 2015 से पूर्व की अपूर्ण जल परियोजनाओं सहित सभी लंबित निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य किसानों का राज्य है, और जल परियोजनाओं के अधूरे रहने से सिंचाई क्षमता प्रभावित होती है, जिससे कृषकों को योजनाओं का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए, तो प्रदेश का सिंचित रकबा बढ़ेगा और किसानों को पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी रेखांकित किया कि सिंचाई व्यवस्था बेहतर होने से कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे किसानों की आय में बढ़ोत्तरी संभव होगी और उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इन परियोजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण करना अनिवार्य है ताकि किसान लाभान्वित हो सकें। बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने एक पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रदेश में संचालित विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी मुख्यमंत्री को दी। उन्होंने लंबित परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति से भी सभी अधिकारियों को अवगत कराया। बैठक के दौरान जल संसाधन मंत्री श्री केदार कश्यप, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, संयुक्त सचिव डॉ. रवि मित्तल, जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता श्री इंद्रजीत उईके सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया प्रदेश के सबसे बड़े वाटर पार्क का वर्चुअल उद्घाटन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मनुष्य का जल से गहरा संबंध है। पृथ्वी की उत्पत्ति से ही जीव जन्तु और मनुष्य जल के साथ जीवन व्यतीत करते हैं। स्नान से भी वही सुख मिलता है, जो माता-पिता के सानिध्य से प्राप्त होता है। हताशा और निराशा या कष्ट की स्थिति में मनुष्य के दु:ख जल के संपर्क से दूर हो जाते हैं। आज वाटर पार्क न केवल मनोरंजन का माध्यम है, अपितु फिटनेस और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह लोगों को उमंग और ऊर्जा से भर देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को  इंदौर में  220 करोड़ रुपए  की लागत से 25 एकड़ क्षेत्र में निर्मित प्रदेश के सबसे बड़े वाटर पार्क 'इमेजिका एक्वा' का वर्चुअल उद्घाटन किया। इस अवसर पर मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, पूर्व मंत्री सुश्री उषा ठाकुर, श्री ओमप्रकाश सकलेचा आदि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर स्वच्छता की राजधानी है। इंदौर में यह वृहद् वाटर पार्क बदलते दौर में अनुपम उपहार होगा। इंदौर अद्वितीय और आदर्श नगर है। वॉटर पार्क यहां की नई पहचान बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वॉटर पार्क प्रारंभ करने के लिए मालपानी समूह को बधाई दी। श्री राजेश संजय और मालपानी समूह के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कार्यक्रम में भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया।  

राज्यपाल पटेल को दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम की कप्तान राधा बढ़गुज्जर ने ‘उमंग कप’ में जीती गई ट्रॉफी भेंट की

भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल से मंगलवार को मध्यप्रदेश व्हीलचैयर क्रिकेट और दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम के सदस्यों ने राजभवन में  मुलाक़ात की। राज्यपाल श्री पटेल को दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम की कप्तान राधा बढ़गुज्जर ने ‘उमंग कप’ में जीती गई ट्रॉफी भेंट की। राज्यपाल श्री पटेल ने टीम के सदस्यों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। राज्यपाल श्री  पटेल ने मध्यप्रदेश व्हीचैयर क्रिकेट और दिव्यांग महिला टीम के खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और उनकी उपलब्धियां जानी। उन्होंने दोनों टीम के सदस्यों का उत्साहवर्धन करते हुए उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। खिलाड़ियों के साथ सामूहिक चित्र भी खिंचवाया। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद रहे। 

मौसम बदलने के संकेत: छत्तीसगढ़ में उमस के बाद अब बारिश और वज्रपात की चेतावनी

रायपुर अगस्त की शुरुआत में छत्तीसगढ़ में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से प्रदेश भर में उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया है। तापमान में बढ़ोतरी होने से कूलर और एसी की मांग फिर से बढ़ गई है। हालांकि इस बीच राहत की खबर है कि प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी है और 7 अगस्त से पूरे छत्तीसगढ़ में मानसूनी गतिविधियों में तेजी आने के आसार हैं। मौसम विभाग ने राजधानी रायपुर में बादल गरजने, बिजली गिरने और बारिश की संभावना जताई है। दिनभर आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। तापमान 27 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। मानसून ब्रेक की स्थिति मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा के अनुसार, मानसून द्रोणिका का पूर्वी छोर अब अरुणाचल प्रदेश की ओर चला गया है, जिससे 'मानसून ब्रेक' की स्थिति बनी हुई है। इसी कारण प्रदेश में केवल कुछ स्थानों पर ही हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, आने वाले दिनों में वर्षा की गतिविधि में तेजी आने की संभावना है। पिछले 24 घंटों में बारिश का हाल प्रदेश के सभी संभागों में बीते 24 घंटों के दौरान कहीं-कहीं हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है। बिलासपुर और राजनांदगांव में सबसे अधिक तापमान 35 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। ऑरेंज अलर्ट (तेज बारिश, वज्रपात और आंधी की चेतावनी – अगले 3 घंटे) जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, सुरगुजा और सूरजपुर यलो अलर्ट (बिजली गिरने और तेज हवा की संभावना) सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, महासमुंद, बलौदा बाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा मरवाही, कबीरधाम, मुंगेली, सुरगुजा, सूरजपुर और कोरिया

मौत का बटन: ग्राइंडर मशीन से हार्डवेयर कारोबारी के बेटे ने ली जान

इटारसी मंगलवार बुधवार की दरम्यानी रात आदिवासी विकासखंड केसला के सुखतवा गांव में एक हार्डवेयर कारोबारी के युवा बेटे ने ग्राइंडर कटर से अपना गला काटकर आत्महत्या कर ली। इस हृदय विदारक घटना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई, वहीं पूरा परिवार इस घटना से स्तब्ध है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार सुखतवा निवासी हार्डवेयर व्यापारी के युवा बेटे का शव उसके कमरे में मिला है, जिसकी गर्दन पिछले हिस्से में धारदार चीज से कटी हुई है। पुलिस के अनुसार 22 वर्ष उपांशु साहू निवासी हार्डवेयर व्यवसायी अशोक साहू के बेटे थे। मंगलवार रात को उपांशु ने ग्राइंडर कटर का उपयोग कर अपनी गर्दन काट ली, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। सुबह जब दुकान नहीं खुली तो स्वजनों ने कई बार कॉल किया, बाद में पड़ोसियों से भी फोन पर जानकारी ली, जब संदेह हुआ तो छत पर चढ़कर कमरे के पिछले हिस्से से अंदर प्रवेश किया, इसके बाद उनके होश उड़ गए।   दो महीने कुंभ में रहा अकेले सोता था दुकान पर केसला थाना प्रभारी उमाशंकर यादव ने बताया कारोबारी अशोक साहू के दो बेटे हैं। उपांशु उनका छोटा बेटा था। कुछ दिन पहले बाजार में उनका नया भवन बना, जिसमें आगे दुकान और पिछले हिस्से में तीन चार कमरे बनाए गए हैं। पूरा परिवार बस्ती के पुराने मकान में रहता था। उपांशु को घर की जगह दुकान पर रात रुकना अच्छा लगता था, इसलिए वह अकेला यहीं सो जाता था।   दो महीने वह प्रयाग महाकुंभ में भी रहकर आया था     यादव ने बताया कि दो महीने वह प्रयाग महाकुंभ में भी रहकर आया। रात में उसने बड़ी ग्राइंडर कटर मशीन कमरे में रखी।     उसके एक्सटेंशन का तार अपने बेड पर लगाया। इसके बाद बटन पर अंगूठा रखकर अपनी गर्दन कटर पर रखकर बटन चला दिया।     मशीन का प्रेशर इतना ज्यादा था कि एक सेकंड में उसकी गर्दन अलग हो गई।     बेड पर लगा बिस्तर तक बुरी तरह कटकर खून से लथपथ हो गया। पूरा बिस्तर खून से सना हुआ मिला।     कमरे में किसी तरह का सुसाइड नोट नहीं मिला है। पीएम के बाद शाम को स्वजनों ने नर्मदा घाट पर अंतिम संस्कार किया।     पुलिस उसके मोबाइल को भी जांच में लेगी, आत्महत्या के पीछे किसी तरह का मानसिक दबाव, ब्लैकमेलिंग या कोई बीमारी वजह तो नहीं थी, इसकी जांच पुलिस करेगी।

राज्य सरकार का बड़ा फैसला: अरुण चतुर्वेदी को कैबिनेट मंत्री का दर्जा और विशेष अधिकार

जयपुर राजस्थान राज्य वित्त आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी को राज्य सरकार ने कैबिनेट मंत्री स्तर का दर्जा दिया है और इस बारे में मंत्रिमंडल सचिवालय ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। अब चतुर्वेदी को कैबिनेट मंत्री के समकक्ष वेतन, भत्ते और अन्य सभी सुविधाएं मिलेंगी। कैबिनेट सचिवालय के आदेश के अनुसार राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी को कैबिनेट स्तर का दर्जा दे दिया गया है। ओंकारसिंह लखावत के बाद उन्हें ही कैबिनेट स्तर का दर्जा मिला है। मंत्री का दर्जा मिलने के बाद उन्हें अब प्रतिमाह 65,000 रुपये वेतन के साथ 55,000 रुपये भत्ते के रूप में दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त उन्हें 2,000 प्रतिदिन के हिसाब से दैनिक भत्ता मिलेगा, जो अधिकतम 180 दिन के लिए देय होगा। चतुर्वेदी को सरकारी टेलीफोन, पोस्टपेड मोबाइल, ब्रॉडबैंड और इंटरनेट के लिए 10,000 प्रतिमाह की राशि दी जाएगी। हालांकि राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष को हर बार मंत्री का दर्जा दिया जाता है। पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार में ज्योति किरण को राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के तौर पर राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था। वहीं पिछले गहलोत सरकार में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के तौर पर पूर्व वित्तमंत्री प्रद्युम्न सिंह को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था। राजस्थान की मौजूदा भजनलाल सरकार को भी डेढ़ साल से ज्यादा हो गया, लेकिन अब तक 8 बोर्ड आयोगों में ही अध्यक्ष पद दिए गए हैं। पिछली सरकार में भी करीब 80 बोर्ड आयोगों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष बनाए गए थे। नियुक्तियों का सिलसिला चुनाव आचार संहिता लगने तक जारी रहा और इनमें से कई तो पदभार ही ग्रहण नहीं कर सके।