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40 पार मां बनना चाहती हैं, तो रखें इन बातों का ध्यान

एक अध्यकयन से पता चला है कि 95 फीसदी महिलाएं करियर और परिवार के बीच में परिवार को ही चुनती हैं। करियर के पीक की तरफ बढने के दौरान, महिलाओं पर मां बनने का भी दबाव होता है क्योंकि इसमें देरी करने पर उम्र बढ़ने से मां बनने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से वे अपने करियर में सहयोगियों से बेहतर होते हुए भी पिछड़ती जाती हैं।   लेकिन कुछ महिलाएं अपना करियर बीच मे नहीं छोड़तीं और 40 पार कर जाने के बाद भी मां बनने के सपने को साकार करना चाहती हैं। लेकिन महिलाओं की प्रजनन क्षमता 35 की उम्र आते-आते कम होनी शुरू हो जाती है। ऐसा नहीं है कि वे इस उम्र के बाद प्रेगनेंट नहीं हो सकतीं। आप अगर 40 पार भी मां बनने की इच्छा रखती हैं, तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आपकी प्रजनन क्षमता बरकरार रहे…   -उम्र बढने के साथ एग की क्वांटिटी और क्वालिटी दोनों कम होती जाती है। 25 से 30 वर्ष की उम्र में अपना एग फ्रीज कराकर अपने मां बनने के सपने को 40 साल की उम्र में भी पूरा कर सकती हैं।   -सही प्रकार के प्रोटीन प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैंय टोफू, चिकन, अंडे, और कुछ सी-फूड्स में उच्च स्तर पर ओमेगा-3 फैटी एसिड, लोह-तत्व, सेलेनियम इत्यादि पाए जाते हैं।   -आपके विटामिन में फोलिक एसिड, कैल्शियम और लोह-तत्व मौजूद हों। इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, साबुत अनाज और दालें खाएं।   -किसी भी तरह के यौन रोग न हों, इसके लिए सेफ सेक्स पर गौर करें।   -वजन कम करें। अध्ययन बताते हैं की मोटापे से ग्रस्त महिलाओं को गर्भधारण करने में ज्यादा कठिनाई आती है और उन्हें गर्भावस्था के दौरान अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि आपका बॉडी मास इंडेक्स (बी.एम.आई.) थोड़ा अधिक है, तो डाइट ठीक करें और साथ ही एक्सरसाइज भी करें या फिर योगाभ्यास शुरू करें।   -धूम्रपान त्यागें। यह न सिर्फ गर्भावस्था के लिए हानिकारक है अपितु यह गर्भ धारण करने में भी बाधा पैदा कर सकता है।   -एक कहावत है कि हंसी सबसे अच्छी दवा है। अधिकांश डॉंक्टर भी मानते हैं कि यह 100 प्रतिशत सही है। तो फिर दिल से क्यों न हंसा जाए। अगर आप जोर से हंसती हैं या मुस्कराती भी हैं तो आपके शरीर में फील गुड हारमोन्स का स्रव होता है, जो तनाव पैदा करने वाले कोर्टीसोल नामक हार्मोन को नष्ट करता है। इससे आप ज्यादा सेहतमंद रह पाएंगी। हंसने से चेहरे की माशपेशियों का भी व्यायाम हो जाता है।   -35 की उम्र के बाद समय-समय पर रैगुलर टैस्ट्स के अलावा फर्टिलिटी जांच करवाती रहें। गोनोरिया और कैलामाइडिया नामक यौन संचारित रोग हो तो जल्दी ट्रीटमेंट करवाना जरूरी है। वरना पेडू में सूजन की बीमारी हो सकती है जिससे फैलोपियन ट्यूब में घाव हो जाता है, जिससे बांझपन की संभावना बढ़ती है।  

महिलाओं के लिए बड़ी खबर: सर्वाइकल कैंसर से बचाव को सरकारी अस्पतालों में जल्द मिलेगी HPV वैक्सीन

आगरा  उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विभाग की प्रो. डॉ. रुचिका गर्ग ने चौंकाने वाले आंकड़े बताये हैं. भारत में तेज़ी से फ़ैल रहा सर्वाइकल कैंसर बेहद जानलेवा साबित हो रहा है. पूरे विश्व की तुलना में भारत अकेला 25% तक इस बीमारी को झेल रहा है. सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाली एक बीमारी है. सर्वाइकल कैंसर को  बच्चेदानी के मुंह के कैंसर से भी जाना जाता है. सर्वाइकल कैंसर बच्चेदानी के निचले हिस्से गर्भाशय ग्रीवा में होता है. डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि यह सर्वाइकल कैंसर आम तौर पर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के संक्रमण की वजह से होता है, जो यौन संपर्क के दौरान फैलता है. उन्होंने यह भी बताया कि अब इससे बचाव के लिए बाजार में  वैक्सीन  उपलब्ध हो चुकी है. यह टिका महिलाओं को समय रहते लगवा लेना चाहिए. बच्चेदानी के बचाव के लिए इस टीके को लगवाना बहुत जरुरी हो गया है. सर्वाइकल कैंसर से हर 7 मिनट में 1 महिला की हो रही है मौत सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विभाग की प्रो. डॉ. रुचिका गर्ग ने चौकाने वाले आंकड़े बताये. उन्होंने कहा कि यह कैंसर इतना खतरनाक है कि प्रत्येक 7 मिनट के अंदर 1 महिला अपनी जान गंवा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि हर साल बच्चेदानी के मुंह का कैंसर ( सर्वाइकल कैंसर ) से लगभग 1 लाख से अधिक महिलाओं को मृत्यु हो रही है. डॉ. गर्ग ने कहा कि पूरे विश्व में सर्वाइकल कैंसर के केस में 25 प्रतिशत की भागीदारी भारत की महिलाओं की है. सर्वाइकल कैंसर को कोई भी महिला हल्के में ना लें. समय रहते इसका टिका लगवाने से इससे बचा जा सकता है. सर्वाइकल कैंसर आखिर महिलाओं में क्यों फ़ैल रहा है… डॉ. रुचिका गर्ग ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर (बच्चे दानी के मुँह का कैंसर) आम तौर पर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के संक्रमण की वजह से होता है, जो यौन संपर्क के दौरान फैलता है. डॉ ने यह भी बताया कि यौन संचारित संक्रमणों के संपर्क में आने की संभावना अधिक होना जैसे उदाहरण के तौर पर, कम उम्र में पहली बार यौन क्रिया करना, एक से अधिक यौन साथी के साथ संबध बनाना. डॉ. रुचिका ने कहा कि अत्यधिक मात्रा में मौखिक गर्भ निरोधकों जैसे जन्म नियंत्रण की दवाएं का सेवन करना भी एक मुख्य कारण है. सर्वाइकल कैंसर के बचाव… डॉ. रुचिका गर्ग बताती है कि यह केवल ऐसा कैंसर है जिसे वैक्सीन के माध्यम से खत्म किया जा सकता है.  उन्होंने यह भी कहा कि जितनी कम उम्र की बच्चियों को यह वैक्सीन लगावाया जाये उतना ही बेहतर यह काम करेगी. डॉ. रुचिका ने बताया कि इस वैक्सीन को लेकर जो गाइडलाइन बनी हुई उसके तहत जैसे 9 से 14 वर्ष तक की बच्चियों को यह टिका लगवाना चाहिए. यह उम्र इस टिके के लिए सबसे उत्तम मानी गई है. इसके अतिरिक्त 26 साल तक की महिला भी इस वैक्सीन को लगवा सकती है. डॉ. गर्ग ने कहा कि यदि 26 तक उम्र की महिलाएं इस टिके को नही लगवा पाईं हैं तो वह 45 साल तक की उम्र तक इसे लगवा सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा की 26 से अधिक उम्र की महिलाएं टिका लगवाने से पहले अपनी डॉ. से सलाह लेकर ही इसको लगवा सकती है. सर्वाइकल कैंसर के लक्षण क्या हैं, कैसे इससे बचा जा सकता है… डॉ. रुचिका गर्ग ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर के लक्षण बेहद सामान्य है, जिस कारण शुरुआत में इसे आसानी से पहचाना नहीं जा सकता है. डॉ. रुचिका ने कहा कि कुछ कारणों से इसकी पहचान कि जा सकती है जैसे, सफ़ेद पानी आना, गंदा बदबूदार पानी आना, पति से संबध के बाद ब्लडिंग होना यह लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें. डॉ. ने बताया कि इसे जाँच के माध्यम से भी पहचाना जा सकता है. उन्होंने कहा कि पांच पांच साल के अंतराल में HPV टेस्ट करा सकते है. उन्होंने बताया किपपनिकोलाउ (Pap) परीक्षण से भी महिला अपना टेस्ट करवा सकती है. डॉ. रुचिका ने बताया कि यह टेस्ट एस एन मेडिकल कॉलेज में निशुल्क किया जा रहा है. जल्द सरकारी अस्पतालों में भी उपलब्ध होगी सर्वाइकल वैक्सीन… डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि सर्वाइकल वैक्सीन अभी एसएन मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध नहीं है. सर्वाइकल वैक्सीन बाज़ारो में उपलब्ध है. डॉ. ने कहा कि इस वैक्सीन को सरकारी अस्पतालों में आने के लिए बातचीत चल रही है. उन्होंने कहा कि यह वैक्सीन सरकार जल्द सरकारी अस्पतालों में छोटी बच्चियों को लिए निशुल्क उपलब्ध करवा सकती है.

एंड्रायड व आईओएस के लिए ये हैं बेहतर एप्स

यदि आप बोरिंग एप्स की लिस्ट से अलग कुछ चाहते हैं तो पेश है कुछ ऐसे ही शानदार एप्स, इनमें सें कुछ गेम्स के लिए हैं और बाकि के आपके मनोरंजन के लिए। एंड्रायड के लिए चीजबर्गर चीजबर्गर एप के साथ आप फनी इमेज, जिफ, वीडियोज को फॉलो कर सकते हैं। ये कूल और फनी इमेज डिवाइस में सेव भी किए जा सकते हैं और दोस्तों के साथ शेयर भी कर सकते हैं। रिंगड्रोईड एंड्रायड के लिए रिंगड्रोईड एक ओपन सोर्स रिंगटोन एडिटर है, इसकी मदद से आप डिवाइस में मौजूद मयुजिकध्ऑडियो फाइल्स और नया रिकार्ड कर पर्सनल रिंगटोंस, अलार्म और नोटिफिकेशन साउंट बना सकते हैं। स्काई मैप अपने एंड्रायड फोन का उपयोग कर गूगल स्काई मैप की मदद से आप यूनिवर्स को खंगाल सकते हैं। इस एप की मदद से आप तारों, ग्रहों और अन्य खगोलिय पिंडों के सटीक स्थिति का पजा लगा पाएंगे। इसके लिए बस आपको आसमान की तरफ अपने फोन को प्वाइंट करना होगा और इसके बाद आसमान में मौजूद सभी चीजों को आप गूगल स्काई मैप पर आसानी से देख सकेंगे। मोविज बाय फ्लिक्स्टर मोविज बाय फ्लिक्स्टर एक सरल और शानदार एप है जिससे कौन सी मूवी चल रही है इसका पता लग जाएगा। इसमें मीडिया स्ट्रीमिंग और न्यूज जैसे कई रोचक टूल्स भी हैं, जो काफी शिक्षाप्रद है। ड्रोप कांटैक्स्ट एंड डिलर्स यह एप आपके पुराने फोनबुक एप की जगह ले सकता है। यह एप कंटैक्ट्स व कम्युनिकेशन एप्स को एक साथ लाता है, जो आपके स्क्रीन से एक्सेस किया जा सकता है। अब आईओएस एप्स फिश फूड फ्रैंजी फन यह काफी साधारण गेम है और कभी कभी यह चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। इस गेम में ज्यादा से ज्यादा बराबर या अपने से छोटी मछलियों को खाना है। जितनी अधिक मछलियों को खाएंगे आप बड़े होते जाएंगे। हाॅरिजोन कैमरा वीडियो लवर्स के लिए यह पसंदीदा एप साबित होगा। हाॅरिजोन कैमरा हमेशा पोट्रेट रिकार्डिंग लेता है। एप में आयताकार इंडिकेटर है जो हमेशा स्क्रीन के केंद्र में होता है और रिकार्ड वीडियोज को क्लिक करना आसान बनाता है। अमेरिकन इंटीरियर अमेरिकन इंटीरियर एप को पेंगुइन ने बनाया है। यह एक ऐसा एप है जो कहानी सुनाता है। इस एप में 100 अलग अलग एंट्री हैं, इसमें आर्टवर्क, एनिमेशन, कहानियां, फिल्म क्लिप और ऑरिजिनल म्युजिक है। हेज कई वेदर एप्स में से हेज भी एक है। इस एप के साथ आप अपने फोरकास्ट में कुछ रंग डाल सकते हैं। आप इसमें तापमान, बारिश आदि देख सकते हैं और मौसम के विवरण का हाल भी ले सकते हैं। स्लीप बैटर स्लीप बैटर एप के साथ आप अपनी नींद को ट्रैक कर सकते हैं, सपनों को मॉनिटर कर सकते हैं, अपने बेडटाइम आदतों को और अच्छा बना सकते हैं।  

बिना मेकअप दिखें खूबसूरत

संवरने-संवारने की कला स्त्री को जन्मजात मिली है। यह आर्ट उसे सुंदर दिखने को भी प्रेरित करती है। भागदौड़ भरी जिंदगी में रोज अच्छी तरह मेकअप करना तो संभव नहीं, मगर डाइट और लाइफस्टाइल को सही रखकर खुद को आकर्षक बनाया जा सकता है मेकअप एक कला है। कई बार इससे चेहरे पर कमाल हो सकता है। रोज आईने के सामने काफी वक्त बिताती हैं स्त्रियां ताकि वे सुंदर दिख सकें। कई स्त्रियां मानती हैं कि बिना मेकअप के वे सुंदर नहीं दिख सकतीं। हालांकि सादगी का अपना महत्व है और बिना बहुत वक्त या पैसा खर्च किए भी सुंदर बने रहा जा सकता है। एक प्याली गर्म पानी सुबह की शुरुआत के लिए इससे अच्छी कोई आदत नहीं है। सुबह उठने के बाद चाय के बजाय गर्म पानी पिएं। इसमें नींबू की कुछ बूंदें डालें। ओवरवेट होने या डाइबिटीज जैसी समस्या न हो तो थोड़ा शहद भी मिला सकती हैं। इससे ताजगी का अहसास होगा। एसपीएफ युक्त क्रीम उम्र बढन के साथ-साथ धूप, धूल और समय का प्रभाव चेहरे पर पडने लगता है। इसलिए सनक्रीम हमेशा साथ रखें। तेज धूप हो या नहीं, इसका इस्तेमाल करें। इसके प्रयोग से आप बहुत सी समस्याओं से बची रह सकती हैं। आदतें सुधारें चेहरे को सिकोड़ते हुए बात करने, माथे पर बल डालने, आखें मिचमिचाने, हथेलियों को गालों पर टिकाने, पिंपल्स नोचने, आंखें मलने जैसी आदतें त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। चेहरे की त्वचा संवेदनशील होती है, इसलिए इस पर दाग-धब्बे बहुत पड़ते हैं। ये आदतें झुर्रियों को न्यौता भी दे सकती हैं। अति से बचें नियमित फेशियल से चेहरे की मांसपेशियों में कसाव आता है, रक्त संचार ठीक होता है और चेहरा साफ व सुंदर दिखता है, मगर ब्लीच का इस्तेमाल सोच-समझकर करें। ज्यादा मसाज व ब्लीच से संवेदनशील त्वचा को नुकसान हो सकता है। स्क्रबिंग-क्लेंजिंग रोज सोने से पहले क्लेंजिंग मिल्क से चेहरा साफ करें। हफ्ते में एक बार स्क्रबिंग करें। इससे डेड स्किन हटेगी। क्लेंजर से त्वचा बैक्टीरिया रहित होगी, अतिरिक्त तेल व डेड स्किन सेल्स निकलेंगी। ड्राई स्किन के लिए मॉइश्चराइजर वाला क्लेंजर अच्छा है। पानी खूब पिएं रोज सात-आठ गिलास पानी पीना चाहिए। शरीर से हानिकारक तत्व निकालने का यह सर्वोत्तम उपाय है। यह सौंदर्य को बढ़ाता है और त्वचा को समस्या रहित रखता है। मॉइश्चराइजर मुलायम त्वचा के लिए मॉइश्चराइजर जरूरी है। प्रदूषण, मौसम, धूप और धूल से त्वचा को क्षति पहुंचती है। स्किन को सही पोषण और नमी मिले तो रिंकल्स कम पडेंगे और वह ड्राई होने से बची रहेगी। चेहरे और गर्दन के अलावा हाथों और पैरों पर भी मॉइश्चराइजर का प्रयोग करें। टोनर टोनर से न सिर्फ त्वचा में कसाव आता है, बल्किइससे रोमछिद्र भी भरते हैं और चेहरे से अतिरिक्त तेल बाहर निकल जाता है। शैंपू सप्ताह में कम से कम तीन दिन बालों को किसी अच्छे शैंपू से धोएं और कंडीशनर का इस्तेमाल करें। चिपचिपे-गंदे बाल चेहरे का लुक बिगाड़ देते हैं। दिन में दो-तीन बार और सोने से पहले बालों में कंघी करना न भूलें। -बालों की समय-समय पर ट्रिमिंग कराएं, ताकि वे दोमुंहे न हों और खराब न दिखें। -नाखून चबाने की आदत से बचें। उन्हें सही ढंग से तराशें और अच्छा शालीन नेल पेंट लगाएं। -अत्यधिक कॉफी या चाय पीने से बचें। -कम से कम सात घंटे की अच्छी नींद लें। -दांतों की सुबह-शाम सफाई करें। कई बार ब्रश करने से दांतों का इनैमल कम होता है और वे पीले दिखने लगते हैं। दिनभर में दो बार ब्रश करना काफी है। -उठने-बैठने और चलने-फिरने में अपने बॉडी पोस्चर का ध्यान रखें। -तले-भुने खाद्य पदार्थों, मैदे से बनी चीजों का इस्तेमाल कम करें। तरल पदार्र्थों का सेवन अधिक करें। -सही फिटिंग के कपड़े पहनें और ऐसे फैशन ट्रेंड्स का अनुकरण करने से बचें जो आपके व्यक्तित्व पर न फबें। जिस ड्रेस में कंफर्टेबल महसूस करती हों, वही पहनें।  

आंखों की सेहत पर बड़ा सवाल: क्या कॉन्टैक्ट लेंस चश्मे से ज्यादा सुरक्षित हैं?

नई दिल्ली इन दिनों नजरों का कमजोर होना आम बात हो चुकी है। लगातार स्क्रीन का इस्तेमाल और खानपान में लापरवाही अक्सर इसकी वजह बनती है। ऐसे में आंखों की कम होती रोशनी के लिए लोग अक्सर कॉन्टैक्ट लेंस या चश्मे का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इसे लेकर अक्सर बहस होती रहती है कि इन दिनों में से क्या ज्यादा बेहतर है। कई लोग चश्मे का सपोर्ट करते हैं, तो वहीं कुछ लैंस को बेहतर मानते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर दोनों में से ज्यादा बेहतर क्या है। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने आई 7 हॉस्पिटल लाजपत नगर और विजन आई क्लिनिक, नई दिल्ली में सीनियर मोतियाबिंद एवं रेटिना सर्जन डॉ. पवन गुप्ता से बातचीत की। कॉन्टैक्ट लेंस पहनें या नहींं? डॉक्टर ने बताया कि कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करने वाले लोग लेंस को सुविधाजनक और फैशनेबल होने की वजह से पसंद करते हैं, लेकिन कुछ जोखिम भी हैं। कॉन्टैक्ट लेंस इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को सही हाइजीन के नियमों का पालन करने में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। सोने से पहले लेंस उतारना जरूरी है; अगर इन्हें पहनकर सोया जाए, तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सभी सही तरीकों के बावजूद, आंखों में कोई बाहरी चीज के जाने से कभी-कभी कुछ देर जलन या अन्य समस्याएं हो सकती हैं। कॉन्टैक्ट लेंस के नुकसान कॉन्टैक्ट लेंस के इस्तेमाल की वजह से कॉर्निया को समस्या हो सकती है। कॉर्निया एक पारदर्शी परत है, जो आंख के सामने होती है। यह आंख की एकमात्र परत है, जिसे हवा से ऑक्सीजन मिलती है और जब कॉन्टैक्ट लेंस इस पर लगाए जाते हैं, तो यह ऑक्सीजन कम हो जाती है। लंबे समय तक कॉन्टैक्ट लेंस पहनने से कॉर्निया में इस्केमिया या ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। ऑक्सीजन की इस लगातार कमी की वजह कॉर्निया के किनारों पर नई ब्लड वेसल्स विकसित हो सकती हैं, जिससे विजन कम हो जाती है और आंखों का स्वास्थ्य खराब हो जाता है। इसलिए चश्मा है बेहतर! भले ही कॉन्टैक्ट लेंस पहनने से कॉर्निया में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, लेकिन चश्मे से ब्लड वेसल्स बनने का कोई खतरा नहीं होता। कांच (और अन्य पारदर्शी लेंस) साफ विजन देते देते हैं और इससे कॉर्निया तक ऑक्सीजन पहुंचने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। भले ही अगर कुछ सावधानियां बरती जाएं, तो कॉन्टैक्ट लेंस का सुरक्षित रूप से उपयोग किया जा सकता है। कैसे करें कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल? हालांकि, लोग सावधानियों का पालन करते हुए कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सुरक्षित रूप से काम कर सकते हैं। कॉन्टैक्ट लेंस पहनने के लिए जरूरी है कि पूरी तरह से स्वच्छता बनाए रखें। उन्हें लगाने से पहले हाथ साफ करें, उन्हें अच्छी तरह से साफ करके रखें, और दूसरों को उन्हें इस्तेमाल करने से रोकें। साथ ही घर से बाहर निकलते ही कॉन्टैक्ट लेंस उतार देने चाहिए और लेंस पहनकर नहीं सोना चाहिए। कुल मिलाकर चश्मा और कॉन्टैक्ट लेंस दोनों ही विजन सुधारने के प्रभावी साधन हैं, फिर भी रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए चश्मा ही सुरक्षित विकल्प है। अगर कोई कॉन्टैक्ट लेंस पहनना पसंद करता है, तो उसे लंबे समय बाद होने वाले नुकसान से बचने के लिए स्वच्छता और उपयोग संबंधी दिशानिर्देशों का ध्यान रखते हुए जिम्मेदारी से पहनना चाहिए।  

मुहांसे हटाने का ये उपाय पड़ सकता है भारी, चेहरे को पहुंचा सकता है नुकसान

नई द‍िल्‍ली चेहरे पर पिम्पल निकलना किसी को भी परेशान कर सकता है। खासकर तब जब किसी खास मौके या मीटिंग से पहले ये मुहांसों की तरह चेहरे पर उभर जाएं। ऐसे समय में बहुत से लोग खुद से इन्हें दबाकर या फोड़कर खत्म करने की कोशिश करने लगते हैं। शायद आपके साथ भी ऐसा हुआ होगा कि शीशे में चेहरा देखते ही आपका ध्यान सीधा पिम्पल पर गया हो और मन किया हो कि इसे तुरंत हटा दिया जाए। ये एक आम समस्या है, जो उम्र, हार्मोनल बदलाव, खानपान और लाइफस्टाइल के कारण किसी को भी हो सकती है। कभी ये छोटे-छोटे दानों की तरह दिखते हैं तो कभी सूजन के साथ चेहरे पर न‍िकल आते हैं। तब लोग इन्हें हाथ से छूने या फोड़ने की गलती कर बैठते हैं। हालांकि ये कुछ ही दिनों में अपने आप भी ठीक हो जाते हैं। लेक‍िन अगर ब‍िना सोचे समझे आपने इन्‍हें फोड़ने की काेश‍िश की तो इसके गंभीर नुकसान आपको झेलने पड़ सकते हैं। आज हम आपको अपने इस लेख में इससे होने वाले नुकसानों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं व‍िस्‍तार से – इन्‍फेक्‍शन का बढ़ जाता है खतरा आपको बता दें क‍ि अगर आप प‍िम्‍पल को फोड़ने की गलती करते हैं तो इससे इन्‍फेक्‍शन का खतरा बढ़ जाता है। दरअसल, हमारे हाथों और नाखूनों में न जाने क‍ितने बैक्टीरिया होते हैं, जाे घाव में जा सकते हैं। इससे पिम्‍पल और भी बड़ा हो सकता है। चेहरे पर पड़ सकते हैं न‍िशान इन प‍िम्‍पल्‍स को फोड़ने से आपके चेहरे पर निशान भी पड़ सकते हैं। इससे आपका चेहरे का लुक भी ब‍िगड़ सकता है। इसे फोड़ने से स्‍क‍िन के नीचे की ट‍िशू को नुकसान पहुंचता है। इस कारण सूजन की समस्‍या हो सकती है। हो सकता है ब्रेकआउट अगर आप बार-बार प‍िम्‍पल्‍स को फोड़ते हैं ताे इसमें से जो ल‍िक्‍व‍िड न‍िकलता है, वो चेहरे पर कहीं भी लग सकता है। ऐसे में एक मुंहासे को फोड़ने के चक्‍कर में चेहरे पर और भी प‍िम्‍पल्‍स निकल सकते हैं। देर से भरते हैं घाव प‍िम्‍पल्‍स अपने आप से ही ठीक होता है। ऐसे में अगर आप इसे बार-बार छूते हैं या फ‍िर फोड़ने की कोशि‍श करते हैं ताे इससे हील‍िंग प्रॉसेस धीमा हो सकता है। इसे ठीक होने में ज्‍यादा समय लगेगा और सूजन की समस्या भी बढ़ सकती है। क्‍या करें?     गुनगुने पानी से चेहरे को साफ करें।     चेहरे को छूने से पहले अपने हाथों को साफ करना न भूलें।     ऐसे प्रोडक्‍ट्रस का इस्तेमाल करें जो पोर्स को क्लॉग नहीं करते हैं।     कुछ घरेलू नुस्‍खे ट्राई करें।     द‍िक्‍कतें बढ़ने पर डॉक्‍टर से सलाह लें।  

बारिश में कैसा हो पहनावा, पढ़ें 6 टिप्स

मौसम के अनुसार कपड़ों का चयन फैशन और स्वास्थ, दोनों के लिहाज से बिल्कुल फिट होता है। हर मौसम में हम पहनावा चुनते समय हम अपनी सुविधा अनुसार कुछ सावधानियां जरूर रखते हैं। उसी प्रकार बरसात के दिनों में भी कुछ सावधानियां रखकर कपड़ों का चयन किया जाए तो आपको अधकि सुविधा होती है। जानते हैं, कैसा हो बारिश में कपड़ों का चयन। जार्जेट या शिफॉन:- इन कपड़ों का एक सकारात्मक पक्ष यह है, कि ये कपड़े भीगने के बाद गर्मी या हवा में जल्दी और आसानी से सूख भी जाते हैं। इन कपड़ों में जरा भी नमी लगी या फिर भीग गए तो ये पारदर्शी हो सकते हैं, और आप गीलेपन से परेशान होंगे सो अलग। इसीलिए सोच समझ कर इस तरह के कपड़ों का चयन करें। बारिश के दिनों में कॉटन यानि सूती कपड़े पहन सकते हैं। बारिश के दिनों में मौसम में नमी बहुत होती है, और सूती कपड़े नमी को सोखने का काम करते हैं। ऐसे में आप हल्की फुल्की बारिश में भीग भी गए, तो गीलेपन के कारण होने वाली परेशानी या चिड़चिड़ाहट नहीं होगी। लेकिन भीगने के बाद ये असानी से नहीं सूखते, इस बात का ध्यान रखें।   नाइलॉन फेब्रिक:- भीगते मौसम में नाइलॉन फेब्रिक काफी आरामदायक साबित हो सकता है। यह कपड़ा पानी को टिकने नहीं देता और गर्मी पैदा करता है। इस कपड़े की भी यह खासियत है, कि यह बहुत जल्दी सूखता है, इसीलिए बारिश में आप इसे पहनने के बारे में सोच सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि ये कपड़े एकदम फिट न हों। स्किन टाइट से बचें:- इस मौसम में बहुत टाइट या स्किन फिटिंग के कपड़े पहनने से बचें, क्योंकि ये नमी लगने पर तुरंत पारदर्शी होते हैं। ऐसे में आपका शरीर या अंतर्वस्त्र भी दिखाई दे सकते हैं, और सर्दी लगने का खतरा भी होता है। स्कार्फ रखें पास:- बारिश के दिनों में आप जो भी कपड़े पहनते हैं, उसके साथ एक मैचिंग या कलरफल स्कार्फ या दुपट्टा जरूर साथ रखें, ताकि प्राथमिक तौर बाल, कान, उपरी वस्त्र की रक्षा कर सकें। कपड़ों के भीग कर पारदर्शी हो जाने पर यह स्कार्फ आपका सहयोग करेगा। चटक रंगों का चुनाव:- अन्यआ मौसम में भले ही चटक रंग बिल्कुलल न भाते हों, लेकिन बारिश के मौसम में ये खूब पसंद किए जाते हैं। आप रेट, पिंक, येलो, लइट ग्रीन के ब्राइट कलर्स को चुन सकते हैं।   फ्लोरल प्रिंट चुनें:- बारिश के मौसम में फ्लोरल प्रिंट काफी पसंद किए जाते हैं। क्योंुकि बारिश हरियाली और बहार का मौसम होता है। ऐसे में रंगीन अंदाज हर किसी को भाता है।  

ये फ्री एप करेंगे आपकी परेशानी को दूर

एंड्राइड फोन यूजर्स की परेशानी को दूर करने के लिए हम आपको बता रहे हैं। ऐसे एप्स जो बिलकुल फ्री हैं। इन एप्स को आप बिलकुल फ्री पा सकते हैं। ट्रू कॉलर: यह ऐप किसी भी अज्ञात नंबर से फोन आने पर व्यक्ति का नाम बता देता है। ट्रू कॉलर के डेटाबेस में करोड़ों ऐसे नंबर हैं जो नाम के साथ रजिस्टर्ड हैं। ऐसे में अगर आपके फोन पर आने वाला नंबर उसके डेटाबेस में उपलब्ध है तो फोन नंबर के साथ उस व्यक्ति का नाम भी यह एप्लीकेशन आपको बता देती है। इसकी सहायता से आप हर वक्त परेशान करने वाले टेली कॉलिंग कॉल्स को उठान से बच सकते हैं। साथ ही यह एप्लीकेशन आपको किसी नंबर को ब्लॉक करने की भी सुविधा प्रदान करती है। यह एप्लीकेशन न सिर्फ मोबाइल नंबर की बल्कि लैंडलाइन नंबर्स और स्पैम कॉल्स की भी जानकारी देता है। डीयू बैटरी सेवर एंड वीजेट्स: अगर आपके फोन की बैटरी बार-बार डाउन हो जाती है और इसे बार-बार चार्ज करना पड़ता है तो इस परेशानी का हल है डीयू बैटरी सेवर एंड विजेट्स एप्लीकेशन में है। यह एप्लीकेशन आपके फोन की बैटरी को 50 प्रतिशत तक बढ़ा देता। यह एप आपके फोन की चार्जिंग को बेहतर बनाता है और फोन की बैटरी कंजम्शन को सुधारता है। क्लीन मास्टर: यह एप आपके फोन को वायरस से बचाता है। इस एप की मदद से फोन मौजूद आपके प्राइवेट डेटा को पासवर्ड के माध्यम से सुरक्षित कर सकते हैं। जैसे फेसबुक, एसएमएस, कॉन्टेक्ट्स, गैलरी आदि। क्लीन मास्टर डाउनलोड करने के बाद एपलॉक नाम का फीचर आपने फोन में एक्टिवेट हो जाता है। यह सॉफ्टवेयर आपके फोन से गैर जरूरी डेटा को खुद व खुद डिलीट कर देता है। जैसे एक जैसी दो फोटो, कैशे या रेसिडुअल फाइल्स आदि। ऐसा करने से फोन की मेमोरी खाली हो जाती है और फोन की स्पीड को बढ़ाने में मदद मिलती है। इस एप में आपके फोन के सीपीयू को कूल डाउन करने का ऑप्शन भी होता है। यह ऐप आपके फोन की फंक्शीनिंग को और बेहतर कर देता है।  

कहीं आपको हाइपर एसिडिटी तो नहीं!

जब गलत खानपान और अपच के कारण पेट में पित्त के विकृत होने पर अम्ल की अधिकता हो जाती है, तो उसे अम्लपित्त कहते हैं। यही अम्लपित्त हाईपर एसिडिटी कहलाता है। आइए जानते हैं, इसके कारण, लक्षण और इससे बचने के उपाय… हाइपर एसिडिटी के कारण:- अत्यधिक गर्म, तीखा, मसालेदार भोजन करने, अत्यधिक खट्टी चीजों का सेवन, देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन, नशीले पदार्थों का सेवन करने से हाइपर एसडिटी की समस्या पैदा होती है। भोजन को पचने के लिए पर्याप्त समय न देना और अपच के बावजूद खाते रहना, आपकी इस समस्या को बढ़ा सकता है। लक्षण:- भोजन का पाचन नहीं होना, बगैर किसी मेहनत के ज्यादा थकावट होना, कड़वी या खट्टी डकार आना, शरीर में भारीपन, हृदय के पास या पेट में जलन होना, कभी-कभी उल्टी होना, उल्टी में अम्ल या खट्टे पदार्थ का निकलना, मिचली होना और मुंह से खट्टा पानी आना, सिरदर्द, आंखों में जलन, जीभ का लाल होना जैसे लक्षण हाइपर एसिडिटी में सामने आते हैं।   हाइपर एसिडिटी की समस्या से बचने के लिए आप घर पर ही कुछ उपाय और सावधानियां अपना सकते हैं जिससे आपको यह समस्या न हो… -गेहूं या जौ के आटे की बनी चपातियां ही खाएं, क्योंकि यह पाचन संबंधी समस्या पैदा नहीं करती, ना ही इससे गैस बनने जैसी समस्या होती है। बल्कि यह आपकी पाचनक्रिया को बेहतर करेगी।   -मूंग की दाल, लौकी, तरोई, परवल, गिलकी, टिंडे, कद्दू जैसी सब्जिुयों को अनदेखा बिल्कुल न करें। यह आपके पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखती है, और हाइपर एसिडिटी से आपको बचाती है। -फलों में पपीता, मौसंबी, अनार आदि को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। इसके अलावा नारियल और नारियल पानी का भी भरपूर सेवन करें।   -मुनक्का, आंवले का मुरब्बा, कच्चा आंवला भी खाना बेहतर होगा। -अनार और आंवले के अलावा, खट्टी चीजों का अत्यधिक सेवन करने से बचें। इससे एसिडिटी बढ़ सकती है। -नींबू और टमाटर जैसी चीजों को भी नियंत्रित करें, इनके प्रयोग से आपकी यह समस्या बढ़ने में मदद मिलती है। -अत्यधिक गर्म, तीखा व मसालेदार भोजन करने से बचें। भारी खाद्य पदार्थों को भी खाने से बचें, ये आसानी से नहीं पचते जिससे आपकी समस्या कम होने के बजाए बढ़ जाती है।   -दही और छाछ का ज्यादा सेवन न करें और उड़द की दाल की बनी चीजों व शराब या अन्य नशीले पदार्थों से दूरी बनाए रखें। -हल्का व आसानी से जल्दी पचने वाला भोजन ही करें, अन्यथा आपको बहुत अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।   -गुलकंद व गुलाब से बनी चीजों का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि यह आपके पेट में जाकर ठंडक पैदा करता है, जिससे एसिडिटी में राहत मिलती है।  

इतनी सी गलती से महंगा फोन बन सकता है ‘खाली डिब्बा’

नई दिल्ली आज स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है. ये छोटे से डिवाइस हमारे कई काम आसान कर देते हैं. AI और नई तकनीक की वजह से फोन पहले से भी ज्यादा स्मार्ट हो गया है. स्मार्टफोन कंपनियां समय-समय पर नए सॉफ्टवेयर अपडेट लाती रहती हैं. इन अपडेट्स में नए फीचर्स, सुधार और सुरक्षा पैच होते हैं. लेकिन कई यूजर्स इन्हें अनदेखा कर देते हैं. ऐसा करना आपके फोन के लिए कई परेशानियां पैदा कर सकता है. आइए जानते हैं, फोन अपडेट न करने के 5 बड़े नुकसान: 1. बढ़ता है सिक्योरिटी खतरा: हर महीने कंपनियां सिक्योरिटी पैच जारी करती हैं, जो हैकर्स से बचाने में मदद करते हैं. अगर आप अपडेट नहीं करते तो आपका फोन साइबर अटैक और डेटा चोरी के लिए कमजोर हो सकता है. 2. नए फीचर्स नहीं मिलेंगे: हर अपडेट में नए फीचर्स और बेहतर यूजर एक्सपीरियंस भी आता है. अपडेट न करने पर ये सुविधाएँ आपके फोन तक नहीं पहुँच पातीं. 3. ऐप्स में दिक्कत: ज़्यादातर ऐप्स लेटेस्ट OS के हिसाब से डिजाइन किए जाते हैं. अगर आपका फोन पुराना सॉफ्टवेयर चला रहा है तो ऐप्स क्रैश कर सकते हैं या कभी काम ही करना बंद कर सकते हैं. 4. बैटरी और परफॉर्मेंस कम होना: फोन अपडेट न करने से उसकी परफॉर्मेंस और बैटरी लाइफ कम हो सकती है. नए अपडेट में बैटरी और प्रोसेसर के लिए ऑप्टिमाइजेशन भी होता है. इन्हें स्किप करना फोन को स्लो कर सकता है. 5. बग्स और डेटा लॉस का खतरा: पुराने वर्जन में बग्स की वजह से फोन हैंग करने लगता है और कभी-कभी डेटा लॉस का खतरा भी बढ़ जाता है. अपडेट करने से बग्स सही होते हैं और परफॉर्मेंस भी बेहतर हो जाती है. फोन अपडेट करना सिर्फ नए फीचर्स के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा और बेहतर प्रदर्शन के लिए भी जरूरी है. इसलिए समय पर अपने फोन को अपडेट करते रहें.