samacharsecretary.com

खरबूजे के बीज नहीं कचरा, जानें ‘मगज’ के फायदे और कीमत

अक्सर ज्यादातर लोग फल खाते समय उसके छिलकों और बीजों को कचरा समझकर फेंक देते हैं. चाहे कोई तरबूज खा रहा हो या फिर खरबूजा उसके छिलकों और बीजों को फेंक ही देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि खरबूजे के जिन बीजों को आप डस्टबिन के हवाले कर देते हैं, वे असल में वाइट गोल्ड हैं? जी हां, बाजार में यही बीज 'खरबूजे के मगज' के नाम से 600 से 800 रुपये किलो तक बिकते हैं. इन बीजों को मिठाइयों से लेकर ग्रेवी बनाने तक में इस्तेमाल किया जाता है. इनका इस्तेमाल करके मिठाइयों और सब्जी की ग्रेवी में एक रॉयल टेक्शचर आता है, जो स्वाद को दोगुना कर देता है. ऐसे में खरबूजे के मगज को मिठाइयों और ग्रेवी की शान कहा जाता है. जिन बीजों को आप साफ करना झंझट भरा काम समझते हैं, उन्हें घर पर साफ करना बेहद आसान है. चलिए जानते हैं कि आप कैसे बेकार समझे जाने वाले इन बीजों से मगज बनाकर आप अपनी रसोई के खर्च को कम कर सकते हैं और पकवानों का स्वाद बढ़ा सकते हैं.   खरबूजे के बीजों से मगज निकालने का आसान तरीका घर पर मगज तैयार करने का तरीका बहुत आसान है, बस आपको इन स्टेप्स को फॉलो करना होगा: 1. बीजों को इकट्ठा करें: खरबूजा काटते समय चम्मच की मदद से बीजों वाले हिस्से को एक अलग कटोरे में निकाल लें. इसमें थोड़ा गूदा लगा रहे तो घबराएं नहीं, जब आप इन्हें साफ करेंगे तो वो आसानी से निकल जाएगा. 2. पानी से चिपचिपाहट दूर करें: बीजों वाले बर्तन में पानी भरें और हल्के हाथों से मसलकर उन्हें धोएं. हाथों से मसलने पर गूदा पानी के ऊपर तैरने लगेगा और बीज नीचे बैठ जाएंगे. इसके बाद बीजों को एक बारीक छलनी में डालकर नल के नीचे अच्छी तरह धोएं ताकि उनकी पूरी चिपचिपाहट खत्म हो जाए. 3. धूप में सुखाना है सबसे जरूरी: धुले हुए बीजों को एक सूती कपड़े या बड़ी प्लेट पर फैला दें. इन्हें कम से कम 1 से 2 दिन तक तेज धूप में सुखाएं. बीज जितने अच्छे से सूखेंगे, उनका छिलका उतनी ही आसानी से उतरेगा. 4. छिलका उतारने की जादुई ट्रिक: जब बीज सूखकर एकदम कड़क हो जाएंगे, तो उन्हें एक साफ कपड़े के बीच में रख लें. अब बेलन की मदद से बहुत हल्का दबाव देते हुए उन पर बेलन चलाएं. ध्यान रहे कि जोर नहीं लगाना है, वरना अंदर का मगज चूरा हो जाएगा. बस इतना दबाव दें कि ऊपर का छिलका चटक जाए. 5. मगज को करें स्टोर: छिलके हटाने के बाद उन्हें थाली में लेकर फटक लें. हल्का छिलका उड़ जाएगा और आपके पास सफेद मगज बच जाएंगे. इसे लंबे समय तक स्टोर करने के लिए हल्का सा ड्राई रोस्ट कर लें और एयरटाइट डिब्बे में भर कर रखें. मगज को इस तरह करें इस्तेमाल शाही ग्रेवी: अगर आप होटल जैसी गाढ़ी और क्रीमी ग्रेवी तैयार करना चाहते हैं, तो काजू के साथ इन बीजों को पीसकर डालें. ये शाही पनीर और मलाई कोफ्ता का स्वाद दोगुना कर देती है. हलवाई जैसी मिठाइयां: बेसन के लड्डू हों या गाजर का हलवा, अगर आप ऊपर से खरबूजे के बीज डालें तो उसे देखने और खाने दोनों में लाजवाब बना देते हैं. देसी एनर्जी ड्रिंक: गर्मियों में ठंडाई या शेक बनाते समय इसमें मगज पीसकर डालें, ये शरीर को ठंडक और ताकत देता है. रोस्टेड स्नैक्स: हल्का नमक और काली मिर्च डालकर भुने हुए मगज एक बेहतरीन और हेल्दी स्नैक का काम करते हैं.

खांसी-जुकाम बढ़ा रही है आपकी डाइट?

सर्दियों का मौसम आते ही सर्दी-खांसी, जुकाम, कंजेशन और कमजोर इम्युनिटी की शिकायत आम हो जाती है। ऐसे में सिर्फ गर्म कपड़े पहनना ही काफी नहीं होता, बल्कि सही डाइट चुनना भी बेहद जरूरी है। कई ऐसे फूड्स हैं जो गर्मियों में बेहद फायदेमंद होते हैं लेकिन सर्दियों में शरीर को ठंडा करके नुकसान पहुंचा सकते हैं। न्यूट्रिशनिस्ट खुशी छाबड़ा के अनुसार, सर्दियों में सिर्फ 'हेल्दी' खाना ही काफी नहीं, बल्कि 'मौसम के अनुकूल' खाना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं वे 4 आम फूड्स जिन्हें सर्दियों में खाने से बचना चाहिए और क्यों। 1. सत्तू (Sattu): सत्तू की तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के लिए बेहतरीन माना जाता है। लेकिन सर्दियों में इसका सेवन शरीर की अंदरूनी गर्मी को कम कर सकता है। इससे सर्दी-खांसी, गले में खराश और कफ बढ़ने की संभावना रहती है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को सर्दियों में सत्तू से खासतौर पर बचना चाहिए। 2. सौंफ का पानी (Fennel Water): सौंफ का पानी पाचन के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन इसकी तासीर भी ठंडी होती है। सर्द मौसम में इसका नियमित सेवन शरीर में ठंडक बढ़ाकर नाक बहने, कंजेशन और साइनस जैसी समस्याओं को ट्रिगर कर सकता है। सर्दियों में इसकी जगह अदरक या जीरा पानी बेहतर विकल्प हो सकता है। 3. दही के साथ ठंडी स्मूदी: दही और ठंडी स्मूदी का कॉम्बिनेशन सर्दियों में सबसे ज्यादा नुकसानदायक माना जाता है। न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, यह कफ बढ़ाता है और पाचन को धीमा करता है। इससे छाती में भारीपन, बलगम और बार-बार खांसी की समस्या हो सकती है, खासतौर पर ठंडे मौसम में। 4. नारियल पानी (Coconut Water): नारियल पानी एक नेचुरल कूलेंट है जो शरीर का तापमान कम करता है। सर्दियों में इसका ज्यादा सेवन इम्युन सिस्टम को कमजोर कर सकता है और सर्दी-जुकाम की समस्या बढ़ा सकता है। ठंडे मौसम में नारियल पानी को सीमित मात्रा में या पूरी तरह अवॉइड करना बेहतर रहता है। क्या करें? सर्दियों में शरीर को गर्म रखने वाले फूड्स जैसे अदरक, हल्दी, घी, गर्म सूप और हर्बल ड्रिंक्स को डाइट में शामिल करें। सही खानपान से ना सिर्फ इम्युनिटी मजबूत होगी, बल्कि सर्दी-खांसी से भी बचाव होगा। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए अन्य डॉक्टर से उचित सलाह ले सकते हैं।

भारत के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक हेयर केयर टिप्स: लंबे और घने बालों का राज

 भारत की महिलाएं सदियों से अपने खूबसूरत बालों के लिए जानी जाती हैं, लंबे घने बाल महिलाओं की सुंदरता से जोड़ा जाता है और इसलिए हर महिला चाहती है कि उसका बाल काले, घने और लंबे हो. हालांकि भारत में हर राज्य की क्लाइमेट और खानपान अलग है, लेकिन बालों की देखभाल के उनके ट्रेडिशनल तरीके आज भी उतने ही असरदार हैं. अगर आप भी नेचुरल तरीके से अपने बालों को हेल्दी बनाना चाहती हैं, तो देशभर के इन आसान हेयर केयर टिप्स को जरूर अपनाएं. क्योंकि एक तो यह केमिकल फ्री होते हैं और इनसे बालों को कोई नुकसान भी नहीं होता है. आप भारत के जिस राज्य से हैं अब आपको अपने बालों की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आप अपने प्रदेश की जलवायु के मुताबिक सही हेयर केयर चुन सकते हैं. वैसे भी ज्यादातर गलती लोग गलत हेयरकेयर चुनने में ही करते हैं. केरल: नारियल तेल और हर्बल मास्क केरल की महिलाएं अपने घने और लंबे बालों के लिए मशहूर हैं. अगर आप भी उनकी तरह बाल चाहती हैं तो उनका सबसे बड़ा राज है नारियल तेल से नियमित मालिश. नारियल तेल के अलावा वो थाली नाम का एक खास हेयर मास्क लगाती हैं, जो गुड़हल (हिबिस्कस), खसखस, मूंग दाल और भृंगराज से मिलकर बनता है. यह बालों को पोषण देता है और उन्हें मजबूत बनाता है. आप इसमें मेथी दाना भी मिलाकर इस्तेमाल कर सकती हैं. राजस्थान: गर्मी में ठंडक देने वाले उपाय राजस्थान की तेज गर्मी के बावजूद वहां की महिलाओं के बाल लंबे और हेल्दी भी होते हैं, क्योंकि वो लोग अपने बालों का खास ख्याल रखती हैं. राजस्थानी महिलाएं लौकी यानी घिया को पीसकर स्कैल्प पर लगाती हैं, जो ठंडक देता है. इसके अलावा वे मुल्तानी मिट्टी, शिकाकाई और रीठा से बाल धोती हैं, जिससे बाल साफ और मुलायम रहते हैं. उत्तर प्रदेश: लकड़ी की कंघी का फायदा उत्तर प्रदेश में महिलाएं पीढ़ियों से लकड़ी की कंघी का इस्तेमाल करती आ रही हैं. यह कंघी बालों में फ्रिज कम करती है, स्कैल्प की हल्की मसाज करती है और बालों में नेचुरल ऑयल को समान रूप से फैलाती है. लकड़ी की कंघी से बालों को सुलझाने से बाल कम टूटते हैं और आसानी से सुलझ जाते हैं. पश्चिम बंगाल सरसों तेल और मुलायम कपड़ा बंगाल की महिलाएं अपने बालों में सरसों का तेल लगाना पसंद करती हैं, यह बालों को मजबूती और चमक देता है. बाल धोने के बाद वो मुलमल के कपड़े से बाल सुखाती हैं, जिससे बाल उलझते नहीं और फ्रिज भी कम होता है. तमिलनाडु: गुड़हल और नारियल तेल केरल की तरह तमिलनाडु की महिलाएं भी लंबे और मजबूत बालों के लिए जानी जाती हैं. तमिलनाडु की महिलाएं नारियल तेल में गुड़हल मिलाकर लगाती हैं, यह मिक्सर बालों की ग्रोथ को बढ़ाता है और उन्हें घना बनाता है. अगर आप तेजी से बाल बढ़ाना चाहती हैं, तो आप भी यह देसी नुस्खा आजमा कर देख सकते हैं. पंजाब: घी से मिलती है चमक और सॉफ्टनेस पंजाबी महिलाओं के घने और चमकदार बालों का एक राज घी भी है, वे इसे खाने के साथ-साथ बालों में भी लगाती हैं. देसी घी बालों को कंडीशन करता है, उन्हें सॉफ्ट बनाता है और उलझने से बचाता है.

आंखों में जलन और ड्राईनेस को न करें नजरअंदाज, जानें इसके बड़े कारण

आज की डिजिटल लाइफस्टाइल और बढ़ते प्रदूषण के बीच आंखों में जलन, खुजली और पानी आने की समस्या एक आम बात हो गई है। स्क्रीन के इस्तेमाल के बाद हल्की जलन कभी-कभी नॉर्मल लग सकती है, लेकिन अगर आपकी आंखों में बार-बार रेडनेस, ड्राईनेस या ऐसा महसूस होता है जैसे आंखों में कुछ चला गया है, तो यह गंभीर समस्या हो सकती है। आइए डॉ. रश्मि मित्तल (सीनियर कंसल्टेंट, ऑप्थैलमोलॉजी, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानें कि आंखों में इरिटेशन के पीछे क्या कारण जिम्मेदार हैं। आंसू की परत पतली होना हमारी आंखों की सतह पानी, ऑयल और म्यूकस की एक पतली परत से सुरक्षित रहती है, जिसे टियर फिल्म कहा जाता है। यह परत आंखों को नम रखने और बाहरी इन्फेक्शन से बचाने का काम करती है। जब यह सुरक्षात्मक परत अस्थिर हो जाती है, तो आंखें सीधे हवा के कॉन्टेक्ट में आती हैं, जिससे ड्राईनेस और जलन शुरू हो जाती है। डिजिटल आई स्ट्रेन और पलकें झपकाने में कमी आजकल आंखों की जलन का सबसे बड़ा कारण कंप्यूटर विजन सिंड्रोम है। जब हम लंबे समय तक स्क्रीन को देखते हैं, तो हमारी पलकें झपकाने की दर 50-60% तक कम हो जाती है। कम पलकें झपकाने से आंसू जल्दी सूख जाते हैं, जिससे आंखों में ड्राईनेस और चुभन महसूस होने लगती है। इसके कारण मीबोमियन ग्लैंड डिसफंक्शन की समस्या भी हो सकती है। इसमें पलकों क ऑयल ग्लैंड्स भी ठीक से काम करना बंद कर देते हैं। प्रदूषण और पर्यावरण से जुड़े कारण भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। हवा में मौजूद प्रदूषण, धुआं और केमिकल सीधे हमारी आंखों की पुतली को प्रभावित करते हैं। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से आंखों की सतह पर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन पैदा होती है। एलर्जी और बीमारियां धूल, पोलन, पालतू जानवरों के बाल या मोल्ड अक्सर एलर्जी का कारण बनते हैं। इसे एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस कहा जाता है, जिसमें शरीर हिस्टामाइन रिलीज करता है, जिससे आंखों में तेज खुजली, सूजन और पानी आने लगता है। इसके अलावा, विटामिन-ए की कमी, डायबिटीज, साइनस एलर्जी और ऑटोइम्यून डिसऑर्डर भी आंखों की जलन के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। बचाव के उपाय ज्यादातर लोग राहत के लिए बिना डॉक्टरी सलाह के आई-ड्रॉप्स का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। स्टेरॉयड-बेस्ड आई-ड्रॉप्स डॉक्टर की सलाह के बिना इस्तेमाल करना मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी खतरनाक स्थितियों को जन्म दे सकता है। स्वस्थ आंखों के लिए कुछ जरूरी टिप्स     20-20-20 नियम- हर 20 मिनट के स्क्रीन समय के बाद, 20 फीट दूर रखी किसी चीज को 20 सेकंड के लिए देखें।     हाइड्रेशन और नींद- शरीर में पानी की कमी न होने दें और पूरी नींद लें।     पलकें झपकाएं- काम के दौरान जानबूझकर पलकें झपकाने की कोशिश करें।     डॉक्टरी सलाह- अगर जलन हफ्तों तक बनी रहे या आंखों में दर्द हो, तो घरेलू इलाज के बजाय किसी आई स्पेशेलिस्ट से पूरी जांच कराएं।  

खाली पेट चाय पीने से किडनी पर क्या असर पड़ता है? जानें रिस्क और सच्चाई

सुबह उठते ही एक कप गरमा-गरम चाय मिल जाए तो दिन बन जाता है. भारत में 'बेड टी' का कल्चर काफी पुराना है लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाली पेट चाय पीने की यह आदत से धीरे-धीरे किडनी पर भी असर हो सकता है? रिसर्च बताती है कि चाय में मौजूद कैफीन और ऑक्सालेट्स खाली पेट शरीर में जाने पर डिहाइड्रेशन और किडनी स्टोन जैसी समस्याओं का रिस्क बढ़ा देते हैं इसलिए हमेशा चाय खाली पेट पीने की सलाह नहीं दी जाती. इस बारे में मेडिकल रिपोर्ट्स क्या कहती हैं, ये भी जान लीजिए. किडनी पर कैसे पड़ता है असर? चाय में प्राकृतिक रूप से ऑक्सालेट्स (Oxalates) पाए जाते हैं. ऐसे में जब कोई खाली पेट चाय पीता है तो ये कंपाउंड्स सीधे किडनी तक पहुंच जाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, ऑक्सालेट्स कैल्शियम के साथ मिलकर क्रिस्टल बनाते हैं जो बाद में किडनी स्टोन का रूप ले लेते हैं. इसके अलावा, चाय एक डिउरेटिक है यानी कि चाय ऐसी चीज है जो शरीर से पानी बाहर निकालती है. यदि कोई खाली पेट चाय पीता है तो उससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है जिससे किडनी को ब्लड फिल्टर करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है. कैफीन और एसिडिटी हेल्थलाइन का कहना है, चाय में मौजूद कैफीन खाली पेट पीने पर ब्लड प्रेशर को अचानक बढ़ा सकता है जो लंबे समय में किडनी की छोटी ब्लड वेसिल्स को नुकसान पहुंचाता है. इसके साथ ही चाय एसिडिक होती है और खाली पेट इसका सेवन पेट में पित्त जूस को डिस्टर्ब हो जाता है जिससे डाइजेशन पर नेगेटिव असर होता है. चाय में मौजूद टैनिन्स खाली पेट मतली और जलन पैदा कर सकते हैं जो इनडायरेक्टली किडनी के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करते हैं. ब्लैक टी या मिल्क टी, क्या अधिक खतरनाक? रिसर्च के मुताबिक, अगर आप पहले से ही किडनी की किसी बीमारी (CKD) से जूझ रहे हैं तो चाय का समय बहुत मायने रखता है. किडनी न्यूट्रिशन इंस्टीट्यूट का कहना है, किडनी के मामले में दूध वाली चाय थोड़ी कम रिस्की हो जाती है. इसका कारण यह है कि दूध में मौजूद कैल्शियम, चाय के ऑक्सालेट्स के साथ पेट और आंतों में ही जुड़ जाता है. इससे ऑक्सालेट्स किडनी तक पहुंचने से पहले ही शरीर के टॉक्सिन्स के साथ बाहर निकल जाते हैं. भोजन या डेयरी प्रोडक्ट्स के साथ ऑक्सालेट वाली चीजें लेना किडनी स्टोन के खतरे को कम करता है.  

चीन ने 6G रेस में बढ़ाई रफ्तार, 6GHz बैंड ट्रायल को मिली मंजूरी

रोबोट और एआई के बाद अब चीन 6G की रेस में सबसे आगे निकलने की तैयारी में है। ऐसा हम इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि चीन के टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर ने एक अहम कदम उठाया है। चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 6G के मोबाइल संचार सिस्टम के लिए टेस्ट फ्रीक्वेंसी के इस्तेमाल को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। MIIT के अनुसार, उसने IMT-2030 (6G) प्रमोशन ग्रुप को 6GHz बैंड के लिए ट्रायल फ्रीक्वेंसी इस्तेमाल करने का परमिट दे दिया है। इससे चीन के चुनिंदा इलाकों में तकनीकी ट्रायल किए जा सकेंगे। इस मंजूरी का मकसद चीन में 6G टेक्नोलॉजी पर रिसर्च और औद्योगिक लेवल पर उसके इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। 6G डेवलपमेंट को मिलेगा बढ़ावा Xinhua न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह टेस्टिंग उन खास कामों पर आधारित होगी, जिन्हें इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) ने 6G नेटवर्क के लिए जरूरी माना है। इनमें बहुत हाई डेटा स्पीड, बहुत कम लेटेंसी (देरी), बड़े पैमाने पर कनेक्टिविटी और इंटीग्रेटेड सेंसिंग शामिल हैं। इस फेज में डेवलपर्स तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए R&D (रिसर्च और डेवलपमेंट) और वेरिफिकेशन टेस्टिंग करेंगे। MIIT ने एक बयान में कहा कि इन टेस्ट फ्रीक्वेंसी को मिली मंजूरी से चीन में 6G के हाई क्वालिटी वाले डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा। तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश यह टेस्टिंग उन खास कामों पर आधारित होगी, जिन्हें इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) ने 6G नेटवर्क के लिए जरूरी माना है। चीन IMT-2030 प्रमोशन ग्रुप के जरिए 6G रिसर्च को तेजी से आगे बढ़ाने में लगा हुआ है। IMT-2030 प्रमोशन ग्रुप एक खास इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म है, जिसमें बड़े टेलीकॉम ऑपरेटर, इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियां, शिक्षण संस्थान और रिसर्च इंस्टीट्यूट शामिल हैं। ये नए ट्रायल लाइसेंस चीन द्वारा पहले 5G लॉन्च करने और अभी चल रहे 5G एडवांस्ड डिप्लॉयमेंट के बाद एक अहम पड़ाव हैं। 6G का मतलब सिर्फ हाई स्पीड इंटरनेट नहीं- ज्योतिरादित्य सिंधिया भारत की बात करें तो मार्च में टेलीकॉम मानकीकरण पर एक इंटरनेशनल वर्कशॉप में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि 6G सिर्फ तेज स्पीड और कम लेटेंसी तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इमर्सिव टेक्नोलॉजी और रियल-टाइम कनेक्टिविटी से पावर्ड "इंटेलिजेंट इंटरनेट ऑफ एवरीथिंग" को संभव बनाएगा उनका कहना था कि 6G का मतलब सिर्फ स्पीड और लेटेंसी में जबरदस्त बढ़ोतरी करना ही नहीं है। यह इंटेलिजेंस, इमर्सिवनेस और असीमित संभावनाओं की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। भारत में किस बात का इंतजार मंत्री ने कहा कि भारत 6G के विकास में खुद को सबसे आगे रखने के लिए एक्टिव होकर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत 6G IPR में सबसे आगे है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि 6G स्पेक्ट्रम के आवंटन का फैसला ITU और 3GPP करेंगे। यह फैसला अभी बाकी है और मानकीकरण की प्रोसेस पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।  

30 हजार से कम में लॉन्च हुआ फ्लिप फोन! Ai+ Nova Flip 5G ने मचाई हलचल

 क्या आप काफी समय से एक फ्लिप फोन खरीदने के बारे में सोच रहे हैं? लेकिन इसकी ज्यादा कीमत की वजह से रुक रहे थे तो अब आपके पास शानदार मौका है। एक महीने के इंतजार के बाद, Ai+ Nova Flip 5G फोन अब भारत में खरीदने के लिए उपलब्ध हो गया है। जी हां, आप इसे 30 हजार रुपये से कम कीमत में खरीद सकते हैं। कंपनी ने 2025 में Ai+ के पहले फ्लिप फोन के तौर पर टीज किया था। वहीं कुछ ही वक्त पहले कंपनी ने इसे भारत में लॉन्च किया है। अब आप बेझिझक इस फोन को खरीद सकते हैं। ये डिवाइस शानदार फीचर्स से लैस है जो महंगे स्मार्टफोन को भी टक्कर दे रहा है। फोन में MediaTek प्रोसेसर, 50-मेगापिक्सल कैमरा और AMOLED डिस्प्ले है। चलिए इसकी कीमत और इसके मुख्य फीचर्स पर एक नजर डालते हैं। Ai+ Nova Flip 5G की कीमत और ऑफर कीमत की बात करें तो Ai+ Nova Flip 5G की कीमत इसके एकमात्र मॉडल के लिए 29,999 रुपये है जिसमें आपको 8GB/256GB वेरिएंट मिलता है। Ai+ ने कन्फर्म किया है कि ये कीमत एक शुरुआती लॉन्च ऑफर का हिस्सा है। डिवाइस सिर्फ Flipkart पर ही खरीदने के लिए उपलब्ध है। फोन को आप सिंगल कलर Glacier White में खरीद सकते हैं।     Ai+ Nova Flip 5G के स्पेसिफिकेशन स्पेसिफिकेशन की बात करें तो Ai+ Nova Flip 5G में अंदर की तरफ 6.9-इंच की AMOLED मेन स्क्रीन मिलती है। इसका रिफ्रेश रेट 120Hz और PPI डेंसिटी 443 है। साथ ही डिवाइस में 1,200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस मिल रही है। बाहर की तरफ फोन में 3-इंच की OLED डिस्प्ले मिल रही है। हालांकि इसका रिफ्रेश रेट 60Hz तक है और ब्राइटनेस 900 निट्स तक जा सकती है। फोन की मोटाई ओपन करने पर सिर्फ 7.2mm और वजन 193 ग्राम है। इसका बाहरी पैनल Nubia Flip 2 जैसा ही दिखाई देता है, जिसमें एक गोल कवर डिस्प्ले, डुअल-कैमरा रिंग और LED फ्लैश मिल रही है। इसका डिजाइन जाने-पहचाने, कॉम्पैक्ट और फोल्डेबल लेआउट पर बेस्ड है। साथ ही फोन का फ्रेम भी काफी पतला और हल्का है। डिवाइस को पावर देने के लिए इसमें MediaTek का 4nm Dimensity 7300X चिपसेट मिल रहा है। साथ ही इसमें ARM Cortex-A78 कोर पर बेस्ड ऑक्टा-कोर CPU है। डिवाइस 8 GB तक RAM और 256 GB इंटरनल स्टोरेज ऑफर कर रहा है। इसके अलावा फोन में 4,325mAh की बैटरी मिल रही है। Ai+ Nova Flip 5G के कैमरा स्पेक्स कैमरा की बात करें तो फोन में 50 MP का प्राइमरी रियर कैमरा और उसके साथ 2 MP का सेकेंडरी लेंस मिल रहा है। जबकि सामने की तरफ फोन में प्राइमरी डिस्प्ले पर एक होल-पंच कटआउट के अंदर 32 MP का सेल्फी कैमरा मिल रहा है। सुरक्षा के लिए फोन में साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट है, जिससे फोन को जल्दी से एक्सेस किया जा सकता है।  

छाछ और लस्सी में कौन ज्यादा फायदेमंद? गर्मी में सेहत के लिए सही विकल्प जानें

 भयंकर गर्मी और धूप में शरीर को अंदर से ठंडा रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. ऐसे में प्यास बुझाने के लिए कोल्ड ड्रिंक्स के बजाय छाछ (Buttermilk) और लस्सी (Lassi) जैसे ट्रेडिशनल ऑप्शंस हमेशा से लोगों की पहली पसंद रहे हैं. दही से बनी ये दोनों चीजें न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि सेहत के गुणों से भी भरपूर हैं. लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए इन दोनों में से ज्यादा असरदार कौन है? तो आइए इस बारे में जानते हैं. छाछ (Buttermilk) छाछ यानी मट्ठा में कैलोरी काफी कम होती है और इसमें पानी की मात्रा भी अच्छी होती है. छाछ में पोटैशियम और विटामिन B12 जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं जो पसीने के जरिए शरीर से निकले मिनरल्स की कमी को तुरंत पूरा करते हैं. छाछ में मौजूद प्रोबायोटिक्स पेट को ठंडा रखते हैं और भारी भोजन के बाद होने वाली एसिडिटी को कम करने में मदद करते हैं. गर्मी में लू से बचने के लिए छाछ एक नेचुरल रिहाइड्रेशन ड्रिंक की तरह काम करती है. लस्सी (Lassi) लस्सी छाछ के मुकाबले काफी गाढ़ी और हैवी होती है. इसमें दही की मात्रा ज्यादा होती है जो प्रोटीन और कैल्शियम का बेहतरीन सोर्स है. रिपोर्ट के मुताबिक, लस्सी शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है. अगर आप मीठी लस्सी पीते हैं तो यह ग्लूकोज लेवल को बनाए रखती है, लेकिन वजन कम करने वालों के लिए इसकी कैलोरी अधिक हो सकती है. लस्सी मांसपेशियों की रिकवरी और हड्डियों की मजबूती के लिए भी काफी अच्छी मानी जाती है. पाचन के लिए कौन है ज्यादा असरदार? अगर डाइजेशन की बात करें तो छाछ को लस्सी से अधिक फायदेमंद मानी जाती है. मेडिकल न्यूज टुडे के अनुसार, छाछ में भुना हुआ जीरा, काला नमक और पुदीना मिलाकर पीने से डाइजेशन अच्छा होता है,  शरीर के तापमान कम होता है और मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करती है. वहीं, लस्सी को पचाने में शरीर को थोड़ा अधिक समय लगता है इसलिए इसे सुबह या दोपहर के समय पीना बेहतर होता है. रात के समय लस्सी पीने से सुस्ती या भारीपन महसूस हो सकता है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट? तपती धूप में जब आपका शरीर पानी खो रहा हो, तो छाछ सबसे बेहतरीन ऑप्शंस है. फर्मेंटेड डेयरी प्रोडक्ट्स शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने और गट हेल्थ को सुधारने में मददगार होते हैं. अगर आप वेट लॉस डाइट पर हैं तो मसाला छाछ आपके लिए बेस्ट है. लेकिन अगर आप एक मील रिप्लेसमेंट या भारी वर्कआउट के बाद कुछ हेल्दी चाहते हैं तो लस्सी एक शानदार चॉइस हो सकती है. कुल मिलाकर हाइड्रेशन के लिए छाछ और पोषण के लिए लस्सी का अपना-अपना महत्व है.

मदर्स डे पर मां को दें सेहत का तोहफा, ये 5 जरूरी हेल्थ टेस्ट हैं बेहद अहम

 मदर्स डे पर मां के लिए सबसे बड़ा गिफ्ट उनकी अच्छी सेहत हो सकती है क्योंकि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल और फिजिकल बदलाव आते हैं. अक्सर हमारी मां घर की जिम्मेदारियों को छोड़ अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं लेकिन 40 और 50 की उम्र के बाद कुछ बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है. इस मदर्स डे पर आप उन्हें हेल्थ चेकअप का तोहफा दे सकते हैं. समय पर कराए गए ये 5 जरूरी टेस्ट उन्हें भविष्य की गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं और उनकी लंबी उम्र सुनिश्चित कर सकते हैं.   ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ चेकअप बढ़ती उम्र में हाई ब्लड प्रेशर एक साइलेंट किलर की तरह काम करता है. मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ जाता है. क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार, महिलाओं को रेगुलर ब्लड प्रेशर चेकअप और हार्ट हेल्थ स्क्रीनिंग करानी चाहिए ताकि स्ट्रोक या दिल के दौरे जैसी स्थिति से बचा जा सके. मैमोग्राम (ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग) महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. मोया क्लीनिक हेल्थकेयर की गाइडलाइंस कहती हैं कि 40 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को हर 1 से 3 साल में मैमोग्राम कराना चाहिए. यह टेस्ट शुरुआती स्टेज में ही गांठ का पता लगा लेता है, जिससे इलाज आसान हो जाता है. बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA Scan) उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं जिसे ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं. मेडिलाइन प्लस के मुताबिक, 65 साल की उम्र के बाद या मेनोपॉज के दौरान हड्डियों की मजबूती जांचने के लिए DEXA स्कैन बहुत जरूरी है ताकि फ्रैक्चर के खतरे को कम किया जा सके. सर्वाइकल कैंसर के लिए पैप स्मीयर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए पैप स्मीयर और HPV टेस्ट अनिवार्य हैं. सलाह है कि 30 से 65 साल की महिलाओं को हर 5 साल में HPV के साथ को-टेस्टिंग करानी चाहिए. यह टेस्ट कैंसर बनने से पहले ही सेल्स में होने वाले बदलावों को पकड़ लेता है. लिपिड प्रोफाइल खराब लाइफस्टाइल और उम्र के कारण टाइप-2 डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा बना रहता है. हेल्थलाइन के अनुसार, 45 साल की उम्र के बाद हर 3 साल में ब्लड शुगर टेस्ट और हर 5 साल में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना चाहिए ताकि शरीर में शुगर और फैट का लेवल कंट्रोल में रहे.

क्रूज शिप पर हंतावायरस का कहर, 3 मौतों के बाद WHO ने जारी किया अलर्ट

 कोरोना वायरस के बाद अब एक नए वायरस हंतावायरस (Hantavirus) ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. क्रूज शिप पर हंतावायरस के प्रकोप से 3 लोगों की मौत के बाद अलर्ट जारी किया गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है. हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों से फैलता है, लेकिन इस बार इसके इंसानों से इंसानों में फैलने की आशंका ने एक्सपर्ट्स की चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि यह वायरस फेफड़ों और किडनी पर सीधा हमला करता है, जिससे मरीज की हालत कुछ ही घंटों में गंभीर हो सकती है. WHO का इस बारे में क्या कहना है और इसके लक्षण क्या हैं, इस बारे में जानना भी जरूरी है. क्रूज शिप पर हंतावायरस का कहर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार,  शिप पर अब तक कुल 8 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 3 यात्रियों की मौत हो चुकी है. यह जहाज दक्षिण अटलांटिक में था जब यात्रियों में बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसे गंभीर लक्षण देखे गए. फिलहाल जहाज स्पेन के कैनरी आइलैंड्स पर खड़ा है और संक्रमितों को आइसोलेट किया गया है. जलवायु परिवर्तन और बढ़ता खतरा द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण इंसानों का उन इलाकों में एक्सपोजर बढ़ रहा है जहां चूहे पाए जाते हैं. गर्मी बढ़ने के कारण ये जीव नए ठिकानों की तलाश में इंसानी बस्तियों या जहाजों तक पहुंच रहे हैं, जिससे संक्रमण फैलने का रिस्क बढ़ गया है. हालांकि, एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह वायरस हवा के जरिए आसानी से नहीं फैलता, लेकिन पर्यावरण में बदलाव इसकी पहुंच बढ़ा रहे हैं. कैसे पहचानें हंतावायरस के लक्षण? आमतौर पर हंतावायरस संक्रमित चूहे के मल-मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है. हालांकि, इस बार एंडिस वायरस स्ट्रेन की पुष्टि हुई है. मायो क्लीनिक के अनुसार, दक्षिण अमेरिका में पाया जाने वाला यह स्ट्रेन सीमित परिस्थितियों में एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैल सकता है. क्रूज शिप पर संक्रमण फैलने का यही मुख्य कारण माना जा रहा है. CDC और हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हंतावायरस के लक्षण शुरुआत में आम फ्लू जैसे लगते हैं, जिससे इसे पहचानना मुश्किल होता है. इसमें मसल्स से दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना और पेट की समस्याएं हो सकती हैं. संक्रमण के बढ़ने पर यह फेफड़ों को प्रभावित करता है जिससे सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगती है. इसका मृत्यु दर काफी अधिक है इसलिए समय पर अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है. क्या नई महामारी बन सकता है? WHO के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेसियस ने हंतावायरस को लेकर दुनिया के डर को कम करने की कोशिश की है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह कोरोना जैसी स्थिति नहीं है और आम लोगों के लिए इसका खतरा फिलहाल बहुत कम है डॉ. टेड्रोस ने कहा, 'लोग हंतावायरस की तुलना कोविड-19 से न करें. मैं और मेरे साथी विशेषज्ञ पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहे हैं कि इस वायरस से पब्लिक हेल्थ को होने वाला खतरा फिलहाल काफी कम है. इसे लेकर पैनिक होने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह कोरोना की तरह बड़े स्तर पर फैलने वाली महामारी नहीं है. संक्रमण को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और जहाज पर अब कोई भी यात्री लक्षण नहीं दिखा रहा है.' बचाव ही एकमात्र इलाज हंतावायरस के लिए फिलहाल कोई विशेष वैक्सीन या सटीक एंटी-वायरल इलाज उपलब्ध नहीं है. एक्सपर्ट की सलाह है कि संक्रमण का पता चलते ही मरीज को तुरंत ICU में भर्ती करना चाहिए. ऑक्सीजन सपोर्ट और हाइड्रेशन के जरिए ही मरीज की जान बचाई जा सकती है. चूहों से दूरी बनाना और साफ-सफाई रखना ही इससे बचने का सबसे कारगर तरीका है.