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चीन की अदालत का बड़ा फैसला: AI के नाम पर नौकरी नहीं जाएगी

AI आएगा तो नौकरी जाएगी. ये डर अब तक सिर्फ बहस में था, लेकिन अब इस पर एक बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. चीन की एक अदालत के फैसले ने साफ कर दिया है कि सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आ जाने से किसी कर्मचारी को नौकरी से निकाला नहीं जा सकता है. इस फैसले के बाद टेक कंपनियों की स्ट्रैटिजी और कर्मचारियों की सुरक्षा, दोनों पर नई चर्चा शुरू हो गई है. पूरा मामला चीन के हांगझोउ शहर की एक कंपनी से जुड़ा है. गौरतलब है कि हांगझोउ चीन का वही शहर है जहां से दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां निकली हैं. अली बाबा और डीपसीक जैसी कंपनियां भी इसी शहर से निकली हैं. परेशान हो कर इंप्लॉइ ने किया मुकदमा इसी शहर में एक कर्मचारी का काम धीरे-धीरे AI टूल्स और बड़े लैंग्वेज मॉडल्स की वजह से कम हो गया. कंपनी ने सोचा कि अब इंसान की जगह मशीन से काम लिया जा सकता है. इसके बाद उस कर्मचारी को दूसरी पोस्ट ऑफर की गई, लेकिन उस नए रोल में सैलरी काफी कम थी और काम की शर्तें भी अलग थीं. कर्मचारी ने इसे मानने से इनकार कर दिया. इसके बाद कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया. मामला कोर्ट पहुंचा और यहीं से कहानी पलट गई. अदालत ने साफ कहा कि कंपनी का ये कदम सही नहीं था. सिर्फ इस आधार पर कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब वही काम कर सकता है, किसी को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया जा सकता. AI के नाम पर ना हों जॉब कट कोर्ट ने अपने फैसले में एक अहम बात कही, टेक्नोलॉजी बदलना कंपनी का हक है, लेकिन कर्मचारियों के अधिकार उससे खत्म नहीं हो जाते. अगर कंपनी ऑटोमेशन या AI अपना रही है, तो उसे लेबर कानूनों का भी पालन करना होगा. यानी कंपनी सीधे-सीधे ये नहीं कह सकती कि 'अब AI आ गया है, तुम्हारी जरूरत नहीं है' इस फैसले का मतलब ये भी है कि कंपनियों को कर्मचारियों के साथ सही तरीके से व्यवहार करना होगा. अगर रोल बदलना है, तो जायज सैलरी और शर्तें देनी होंगी. अगर नौकरी खत्म करनी है, तो उसके लिए वैलिड वजह और प्रक्रिया जरूरी होगी. सिर्फ AI सस्ता है ये वजह काफी नहीं मानी जाएगी. दिलचस्प बात ये है कि अदालत ने कर्मचारियों के लिए भी एक संदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि बदलती टेक्नोलॉजी के साथ खुद को अपडेट करना जरूरी है. यानी AI को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं कि इंसानों को बिना वजह बाहर कर दिया जाए. गौरतलब है कि ये पहला मामला नहीं है. इससे पहले 2024 में गुआंझु की एक अदालत ने इसी तरह के एक केस में कहा था टेक्नोलॉजी अपग्रेड किसी की जॉब खत्म करने की वजह नहीं बन सकता है. चीन फिलहाल कई अलग अलग फ्रंट पर प्लान कर रहा है. इसमें अलग प्रोविजन बनाए जा रहे हैं जिससे AI बूम के बावजूद लोगों की जॉब्स पर ज्यादा असर नहीं पड़़ेगा. इस फैसले की चर्चा अब चीन तक सीमित नहीं है. दुनिया भर में Microsoft, Google, Amazon जैसी कंपनियां AI पर तेजी से काम कर रही हैं. कई जगहों पर लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटाई जा रही है. ऐसे में चीन की अदालत का ये रुख कर्मचारियों के लिए राहत की खबर माना जा रहा है. अब बड़ा सवाल ये है कि क्या दूसरे देशों में भी ऐसा ही रुख देखने को मिलेगा? क्या भविष्य में AI और नौकरियों को लेकर नए कानून बनेंगे? क्योंकि आने वाले समय में AI का असर हर सेक्टर, मीडिया, टेक, कस्टमर सपोर्ट, यहां तक कि क्रिएटिव फील्ड्स पर पड़ने वाला है. AI बनाम नौकरी की ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. लेकिन चीन के इस फैसले ने इतना जरूर तय कर दिया है कि टेक्नोलॉजी की दौड़ में इंसानों के अधिकारों को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.

LG ने लॉन्च की 2026 होम अप्लायंसेस रेंज, जानें नए फीचर्स और कीमतें

LG ने 2026 के लिए अपनी नई होम अप्लायंसेस रेंज लॉन्च कर दी है. कंपनी ने इस बार फोकस सिर्फ प्रीमियम सेगमेंट पर नहीं रखा, बल्कि अफोर्डेबल-प्रीमियम सेगमेंट को भी काफी मजबूत किया है. इस लॉन्च में कंपनी ने Essential Series में कुछ नए प्रोडक्ट्स ऐड किए हैं, जिसे अक्टूबर 2025 में शुरू किया गया था. अब इसमें ज्यादा डिजाइन, अलग-अलग कैपेसिटी और अलग प्राइस रेंज जोड़ी गई है ताकि ज्यादा लोग इसे खरीद सकें. इसके साथ ही प्रीमियम कैटेगरी में भी कई नए प्रोडक्ट्स लाए गए हैं, जो बड़े घरों और एडवांस फीचर्स चाहने वाले यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं. LG का कहना है कि यह पूरा पोर्टफोलियो भारतीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. यानी ऐसे फीचर्स जो रोजमर्रा की जिंदगी में काम आएं और लंबे समय तक भरोसेमंद रहें. भारत में से एक्सपोर्ट करेगी कंपनी कंपनी अब भारत से बाहर भी इन प्रोडक्ट्स को भेजने की तैयारी में है. 2026 में Essential Series को एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के 22 देशों में एक्सपोर्ट करने का लक्ष्य रखा गया है. रेफ्रिजरेटर की बात करें तो Essential Series में 225 लीटर, 251 लीटर और 276 लीटर के नए ऑप्शन जोड़े गए हैं. इनमें स्मार्ट इनवर्टर कंप्रेसर दिया गया है, जिससे बिजली की खपत कम होती है और आवाज भी कम आती है. स्मार्ट मोड खुद ही यूजर के इस्तेमाल के हिसाब से कूलिंग को एडजस्ट करता है. इसके अलावा कनवर्टिबल फीचर के साथ डेयरी मोड भी दिया गया है, जिससे फ्रीजर को जरूरत के हिसाब से फ्रिज में बदला जा सकता है. टर्बो फ्रेश जोन खाने को ज्यादा समय तक ताजा रखने में मदद करता है. इनकी शुरुआती कीमत करीब ₹25,500 रखी गई है. नए फीचर्स के साथ वॉशिंग मशीन वॉशिंग मशीन में भी कंपनी ने काफी बदलाव किए हैं. Essential Series में 8 किलो से 10 किलो तक की नई टॉप लोड मशीनें आई हैं. लो प्रेशर फिल फीचर कम पानी में भी कपड़े धोने में मदद करता है, जबकि इंटेलिजेंट ऑटो स्टार्ट बिजली जाने के बाद भी मशीन को वहीं से चालू कर देता है. इको वॉश और साड़ी मोड जैसे ऑप्शन भारतीय जरूरतों को ध्यान में रखकर दिए गए हैं. इस रेंज की कीमत ₹20,900 से शुरू होती है. इसके अलावा AX सीरीज की सेमी ऑटोमेटिक मशीनें भी लाई गई हैं, जिनकी कैपेसिटी 8 किलो से 12 किलो तक है. इसमें डुअल स्पिन शावर और रोलर जेट प्लसेटर जैसे फीचर्स दिए गए हैं, जो कपड़ों की गहरी सफाई में मदद करते हैं. इनकी शुरुआती कीमत ₹17,300 है. कुकिंग अप्लायंसेस में LG ने 28 लीटर के कनवर्टिबल कन्वेक्शन ओवन पेश किए हैं. इसमें एयर फ्राइ फीचर दिया गया है, जिससे कम तेल में खाना बनाया जा सकता है. चारकोल लाइटिंग हीटर टेक्नोलॉजी खाने का स्वाद बेहतर बनाती है. इसमें 330 से ज्यादा ऑटो कुक मेन्यू दिए गए हैं, जिनमें 28 भारतीय ब्रेड मेन्यू भी शामिल हैं. इसकी कीमत करीब ₹28,700 से शुरू होती है. 1.18 लाख रुपये का फ्रिज प्रीमियम सेगमेंट में कंपनी ने फ्रेंच डोर रेफ्रिज्रेटर लॉन्च किया है, जिसकी सबसे खास बात ऑटो आइस मेकर है, जो बिना पाइप कनेक्शन के बर्फ बना सकता है. इसकी कैपेसिटी 574 लीटर से 610 लीटर तक है और इसमें InstaView Door-in-Door, Hygiene Fresh+ और AI ThinQ जैसे स्मार्ट फीचर्स दिए गए हैं. इसकी शुरुआती कीमत ₹1.18 लाख है. इसके साथ साइड बाइ साइड फ्रिज भी आए हैं, जिनकी कैपेसिटी 790 लीटर तक जाती है. इनकी कीमत ₹1.09 लाख से शुरू होती है. प्रीमियम वॉशिंग मशीन में AI DD 2.0 टेक्नोलॉजी दी गई है, जो कपड़े के फैब्रिक और गंदगी को पहचानकर खुद ही सही वॉश सेटिंग चुनती है. इसमें Steam+ और माइक्रोप्लास्टि केयर जैसे फीचर्स भी हैं. इस रेंज की कीमत ₹62,900 से शुरू होती है. मिड सेगमेंट में TX सीरीज की टॉप लोड मशीनें आई हैं, जिनमें हार्ड वॉटर वॉश और स्टेन क्लीन जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इनकी शुरुआती कीमत ₹32,400 है. डिशवॉशर सेगमेंट में LG ने 15 प्लेस सेटिंग वाला ट्रू स्टीम डिशवॉशर लॉन्च किया है, जो भारतीय बर्तनों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इसमें QuadWash टेक्नोलॉजी दी गई है, जिससे हर एंगल से सफाई होती है. इसकी कीमत ₹73,500 है. इसके अलावा कंपनी ने नए वॉटर प्यूरीफायर भी पेश किए हैं, जिनमें UV स्टेरिलाइजेशन और 7+ pH बैलेंस्ड पानी जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इसकी शुरुआती कीमत ₹16,600 है.

पंजाब की शाही पेड़े वाली लस्सी, गर्मी में देती है ठंडक और ऊर्जा

पंजाब अपनी मेहमाननवाजी और खानपान के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. यहां की पेड़े वाली लस्सी साधारण लस्सी से थोड़ी अलग और शाही होती है. यह लस्सी न केवल गाढ़ी और मलाईदार होती है बल्कि इसमें घुले हुए दूध के पेड़े इसका स्वाद कई गुना बढ़ा देते हैं. चिलचिलाती गर्मी में एक गिलास पेड़े वाली लस्सी पीते ही शरीर को गजब की ठंडक और ऊर्जा मिलती है. पंजाब में लस्सी को सिर्फ एक ड्रिंक नहीं बल्कि खुराक माना जाता है. पेड़े वाली लस्सी की शुरुआत अमृतसर और पटियाला जैसे शहरों से हुई. इसमें ताजे दही के साथ दूध को जलाकर बनाए गए खोया के पेड़े को मसलकर डाला जाता है. यह लस्सी आम लस्सी के मुकाबले काफी भारी और पौष्टिक होती है. इसमें ऊपर से डाली गई गाढ़ी मलाई की परत और सूखे मेवे इसे एक डेजर्ट जैसा अहसास देते हैं. पेड़े वाली लस्सी के लिए तैयार कर लें ये चीजें ताजा दही: 2 कप (गाढ़ा) दूध के पेड़े: 3-4 (मैश किए हुए) चीनी: 2 बड़े चम्मच (स्वादानुसार, क्योंकि पेड़ों में भी मिठास होती है) इलायची पाउडर: आधा छोटा चम्मच ठंडा दूध: आधा कप मलाई: ऊपर से डालने के लिए (ताजी) गार्निशिंग के लिए: बारीक कटे बादाम, पिस्ता और केसर के धागे बनाने का तरीका एक बड़े बर्तन या मिक्सी जार में गाढ़ा दही और मैश किए हुए पेड़े डालें. पारंपरिक स्वाद के लिए इसे मथनी से मथें. अगर मिक्सी का उपयोग कर रहे हैं, तो बहुत कम चलाएं ताकि दही से मक्खन अलग न हो. अब इसमें चीनी, इलायची पाउडर और थोड़ा ठंडा दूध मिलाएं. इसे तब तक मथें जब तक कि पेड़े दही के साथ अच्छी तरह मिल न जाएं और झाग न बन जाए. लस्सी को मिट्टी के कुल्हड़ या लंबे स्टील के गिलास में निकालें. ऊपर से एक बड़ी चम्मच ताजी मलाई डालें, फिर कटे हुए सूखे मेवे और केसर से इसे सजाएं.

गुलाब जल आइस क्यूब से स्किन को मिलता है नेचुरल ग्लो और ठंडक

गुलाब जल सदियों से भारतीय स्किन केयर का अहम हिस्सा रहा है. लोग इसे फेस पैक में मिलाकर, टोनर के रूप में या क्लींजर की तरह इस्तेमाल करते हैं.  यह स्किन से जुड़ी समस्याओं को कम करने, उसे हाइड्रेट रखने और चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने में मदद करता है. आज हम आपको घर पर गुलाब जल आइस क्यूब्स बनाने का आसान तरीका बताएंगे. ये क्यूब्स स्किन को ठंडक देने के साथ-साथ उसे फ्रेश और ग्लोइंग बनाने में भी मदद करते हैं. आइए जानते हैं घर पर गुलाब जल आइस क्यूब्स कैसे बना सकते हैं और इसे चेहरे पर लगाने का सही तरीका क्या है. इंग्रेडिएंट्स (ingredients) 2-3 चम्मच गुलाब जल 4-5 गुलाब के पत्तियां आइस ट्रे गुलाब जल आइस क्यूब्स बनाएं कैसे?     गुलाब जल आइस क्यूब बनाने के लिए गुलाब की पंखुड़ियों को तोड़कर अच्छे से धो लें.     इसके बाद एक बाउल लें और इसमें गुलाब जल डालें.     अब इसमें गुलाब की पंखुड़ियों को डालिए और अच्छे से मिलाएं. जरूरत हो तो थोड़ा पानी भी मिला लें.     अब इस मिश्रण को आइस ट्रे में डालें और जमाने के लिए फ्रिज में रख दें.     जब क्यूब्स अच्छी तरह जम जाएं तो आपका गुलाब जल आइस क्यूब तैयार है.     इस आइस क्यूब्स को साफ चेहरे पर लगाकर मसाज करें. गुलाब जल आइस क्यूब्स  चेहरे पर कैसे लगाएं ? गुलाब जल आइस क्यूब्स चेहरे पर लगाने से पहले फेस को अच्छे से साफ कर सुखा लें. अब एक आइस क्यूब लेकर उसे हल्के-हल्के गोल घुमाते हुए पूरे चेहरे पर मसाज करें. मसाज के बाद चेहरे को वैसे ही छोड़ दें. थोड़ी देर बाद चेहरे पर मॉइश्चराइजर लगा लें. बेहतर रिजल्ट के लिए इसे हफ्ते में दो से तीन बार इस्तेमाल कर सकते हैं. इन बातों का रखें ध्यान इन आइस क्यूब्स को आप 10-15 दिन तक फ्रिज में रखकर इस्तेमाल कर सकते हैं. वैसे तो घर पर बने गुलाब जल आइस क्यूब्स बिल्कुल सेफ होते हैं. लेकिन बहुत ज्यादा सेंसिटिव स्किन वाले लोगों को इसका इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. इसके अलावा, जिन लोगों को चेहरे पर पहले से पिंपल्स, एक्ने या स्किन इंफेक्शन की समस्या है, उन्हें भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

बाजार में मिलने वाले घी की शुद्धता पर बढ़ी चिंता, मिलावट से सेहत को खतरा

 भारत में घी सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं बल्कि रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा है. लेकिन हाल में आई कुछ रिपोर्ट्स में कुछ देसी घी ब्रांड्स में मिलावट सामने आने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है. ऐसे में अक्सर मन में सवाल आता है कि बाजार में मिलने वाला घी कितना शुद्ध है और इसे पहचानने का सही तरीका क्या है? एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुछ ऐसे घरेलू तरीके भी हैं जिससे आप असली और नकली घी में फर्क कर सकते हैं. तो आइए उन तरीकों के बारे में जान लीजिए. शुद्ध घी की पहचान क्यों जरूरी? हेल्थलाइन के मुताबिक, मिलावटी या नकली घी में अक्सर वेजिटेबल ऑयल या सस्ते फैट मिलाए जाते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. लंबे समय तक ऐसे घी का सेवन दिल और पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकता है. इसके अलावा शुद्ध घी में हेल्दी फैट के साथ-साथ जरूरी विटामिन भी होते हैं लेकिन मिलावट कर देने पर इनके फायदे कम हो जाते हैं और नुकसान बढ़ जाते हैं. स्मेल और स्वाद (Smell and Taste) असली घी की खुशबू हल्की और प्राकृतिक होती है जबकि मिलावटी घी में तेज या अजीब सी गंध आ सकती है. स्वाद भी शुद्ध घी का हल्का मीठा और स्मूद होता है. अगर घी का स्वाद कड़वा या अटपटा लगे तो उसमें मिलावट की संभावना हो सकती है. हाथ पर पिघल जाता है (It melts on the hand) एक्सपर्ट्स के मुताबिक, असली घी की कुछ बूंदें हथेली पर रखकर रगड़ें. शुद्ध घी शरीर की गर्मी से तुरंत पिघल जाता है जबकि मिलावटी घी को पिघलने में समय लगता है या फिर वह चिपचिपा महसूस होता है. आयोडीन टेस्ट (Iodine Test) अगर घी में स्टाच या अन्य मिलावट का शक हो तो आयोडीन टेस्ट किया जा सकता है. घी में थोड़ा आयोडीन डालने पर अगर रंग नीला पड़ता है तो उसमें मिलावट मौजूद हो सकती है. यह तरीका घर पर भी आसानी से किया जा सकता है. जमने के तरीके से भी पहचान (Freezing method) घी को फ्रिज में रखकर देखें. शुद्ध घी समान रूप से जमता है, जबकि मिलावटी घी अलग-अलग लेयर में या दानेदार तरीके से जम सकता है. यह संकेत देता है कि उसमें अन्य तेल या फैट मिलाए गए हैं.

Instagram DM से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन हटने का दावा, प्राइवेसी पर उठे सवाल

अगर आप Instagram पर दोस्तों या किसी खास से चैट करते हैं, तो यह खबर आपको चौंका सकती है. आज यानी 8 मई से इंस्टाग्राम के मैसेज में एन्क्रिप्शन खत्म होने वाला है. कंपनी ने पहले ही ऐलान किया था कि 8 मई से इंस्टाग्राम के डायरेक्ट मैसेज यानी DM से एंड टु एंड एन्क्रिप्शन खत्म कर दिया जाएगा. अब तक इंस्टाग्राम के DM में एंड टु एंड एन्क्रिप्शन दिया जाता था, जिसे यूजर खुद ऑन कर सकता था. इस फीचर के चालू होने पर चैट पूरी तरह एन्क्रिप्टेड रहती थी, यानी सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही मैसेज पढ़ सकता था. यहां तक कि कंपनी भी उस कंटेंट को नहीं देख सकती थी. अब एंड टु एंड एन्क्रिप्शन खत्म होने का मतलब ये है कि कंपनी यूजर्स की बातचीत देख और पढ़ सकती है. कंपनी ने दलील दी है कि लोगों को अब इंस्टाग्राम में दिए जाने वाले एन्क्रिप्शन में दिलचस्पी नहीं रही और लोग इसे कम यूज कर रहे हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनी यूजर्स डेटा पर AI को ट्रेन करने के लिए ऐसा कर रही है. यूजर्स के प्राइवेट चैटे से Meta करेगा AI को ट्रेन? यही वजह है कि इस फैसले को लेकर प्राइवेसी को लेकर बड़ी बहस शुरू हो गई है. कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि एन्क्रिप्शन हटने से यूजर्स की निजी बातचीत पहले जितनी सुरक्षित नहीं रहेगी. हालांकि, इस फैसले के पीछे Meta का अपना तर्क भी है. टेक कंपनियां अक्सर यह कहती हैं कि एन्क्रिप्शन की वजह से गलत गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है. हालांकि ये कंपनी का दोहरापन दिखाता है, क्योंकि जब कंपनी ने इंस्टाग्राम में एंड टु एंड एन्क्रिप्शन लाया था तो कहा था कि यूजर्स की प्राइवेसी कंपनी के लिए टॉप पर है, लेकिन अब उसका उल्टा होता हुआ दिख रहा है. रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि कंपनी AI को ट्रेन करने के लिए ऐसा कर रही है. एंड टु एंड एन्क्रिप्शन हटने के बाद अब कंपनी के लिए यूजर्स के चैट पढ़ने और उससे AI को ट्रेन करना आसान होगा. एंड टु एंड एन्क्रिप्शन की वजह से कंपनी खुद भी यूजर्स के चैट्स ऐक्सेस नहीं कर सकती थी. अब इंस्टाग्राम के चैट्स पढ़ेंगी कंपनी? कई बार अपराध या गलत कंटेंट को ट्रैक करना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कंपनियां बैलेंस बनाने की कोशिश करती हैं, जहां सिक्योरिटी भी बनी रहे और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को भी मदद मिल सके. लेकिन दूसरी तरफ यूजर्स का डर भी जायज है. आज के समय में लोग सोशल मीडिया पर सिर्फ कैजुअल चैट ही नहीं करते, बल्कि कई बार निजी बातें, फोटो, वीडियो और जरूरी जानकारी भी शेयर करते हैं. ऐसे में एन्क्रिप्शन का हटना सीधे तौर पर प्राइवेसी पर असर डाल सकता है. दिलचस्प बात यह है कि WhatsApp, जो कि Meta की ही कंपनी है, वहां एंड टु एंड एन्क्रिप्शन डिफॉल्ट रूप से ऑन रहता है और कंपनी इसे अपनी सबसे बड़ी ताकत बताती है. वहीं इंस्टाग्राम पर यह फीचर पहले ऑप्शनल था और अब उसे हटा दिया गया है. इंस्टाग्राम पर चैटिंग खतरे से खाली नहीं! इससे एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है कि क्या अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर Meta की प्राइवेसी पॉलिसी अलग-अलग दिशा में जा रही है? टेक इंडस्ट्री में पिछले कुछ सालों से एन्क्रिप्शन को लेकर लगातार बहस चल रही है. एक तरफ यूजर्स अपनी प्राइवेसी चाहते हैं, तो दूसरी तरफ सरकारें और कंपनियां सिक्योरिटी के नाम पर कुछ एक्सेस चाहती हैं. इंस्टाग्राम का यह कदम उसी बहस को और तेज कर सकता है. खासकर उन यूजर्स के लिए जो अपनी चैट को पूरी तरह निजी रखना चाहते हैं, यह फैसला चिंता बढ़ाने वाला है. एंड टु एंड एन्क्रिप्शन हटने के बाद अब हैकर्स के लिए भी इंस्टाग्राम यूजर्स की चैट पढ़ना आसान हो जाएगा. क्योंकि बिना इस गोल्ड स्टैंडर्ड वाले एन्क्रिप्शन के इन दिनों हैकिंग आसानी से हो सकती है.

Samsung की नई स्मार्टवॉच टेक्नोलॉजी, बेहोशी का संकेत 5 मिनट पहले दे सकती है

स्मार्टवॉच अब सिर्फ कदम गिनने, हार्ट रेट देखने या कॉल उठाने का डिवाइस नहीं रह गई है. धीरे-धीरे ये छोटी सी घड़ी हेल्थ मॉनिटरिंग मशीन में बदलती जा रही है. साउथ कोरियन टेक कंपनी Samsung ने एक ऐसी टेक्नोलॉजी दिखाई है जो आने वाले समय में बड़ी हेल्थ इमरजेंसी को पहले ही पकड़ सकती है. सैमसंग का दावा है कि उसकी Galaxy Watch बेहोश होने यानी फेंटिंग एपिसोड का संकेत पहले ही पहचान सकती है. Samsung ने साउथ कोरिया के Chung-Ang University ग्वांगम्योंग हॉस्पिटल के साथ मिलकर एक स्टडी की है. बेहोश होने से 5 मिनट पहले बता देगी घड़ी इस रिसर्च में Galaxy Watch6 का इस्तेमाल किया गया और दावा किया गया कि यह घड़ी बेहोश होने की स्थिति को करीब 5 मिनट पहले तक पहचान सकती है. असल में यह टेक्नोलॉजी Vasovagal Syncope यानी VVS पर काम करती है. यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें अचानक हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर तेजी से गिर जाता है और इंसान बेहोश हो सकता है. कई बार यह तनाव, दर्द, डर या लंबे समय तक खड़े रहने की वजह से भी होता है. आमतौर पर लोग कुछ सेकंड या मिनट में ठीक हो जाते हैं, लेकिन अचानक गिरने से सिर में चोट, फ्रैक्चर या दूसरी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं. सैमसंग की इस स्टडी में 132 मरीजों को शामिल किया गया. इन लोगों पर क्लीनिकल टेस्ट किए गए और Galaxy Watch6 ने उनके शरीर के बायोसिग्नल्स को ट्रैक किया. इसके बाद AI मॉडल ने हार्ट रेट और बॉडी पैटर्न को समझकर फेंटिंग के संकेत पहचानने की कोशिश की. कंपनी का दावा है कि सिस्टम ने करीब 84.6 प्रतिशत सटीकता के साथ बेहोश होने की स्थिति का अनुमान लगाया. घड़ी को कैसे पता चलता है कि इंसान बेहोश होने वाला है? काम करने का तरीका भी दिलचस्प है. Galaxy Watch में PPG सेंसर लगा होता है. यह सेंसर बॉडी में ब्लड फ्लो और हार्ट रिदम को ट्रैक करता है. इसके साथ HRV यानी Heart Rate Variability डेटा भी लिया जाता है. आसान भाषा में समझें तो यह आपके दिल की धड़कनों के बीच होने वाले छोटे-छोटे बदलाव को पढ़ता है. फिर AI एल्गोरिद्म इन पैटर्न्स को समझकर खतरे का अंदाजा लगाता है. अगर यह टेक्नोलॉजी असली दुनिया में बड़े स्तर पर काम करती है, तो इसका फायदा उन लोगों को सबसे ज्यादा हो सकता है जिन्हें बार-बार चक्कर आने या अचानक बेहोश होने की समस्या होती है. मान लीजिए कोई इंसान सड़क पर चल रहा है, गाड़ी चला रहा है या सीढ़ियों के पास खड़ा है और घड़ी पहले ही अलर्ट दे दे कि शरीर में कुछ गड़बड़ हो रही है, तो वह खुद को सुरक्षित जगह पर ले जा सकता है या मदद मांग सकता है. प्रिवेंटिव हेल्थकेयर में बेहद फायदेमंद होगा ये फीचर Samsung इस टेक्नोलॉजी को प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की दिशा में बड़ा कदम बता रही है. यानी बीमारी या हादसे के बाद इलाज करने के बजाय पहले ही चेतावनी देना. यही वजह है कि अब वियरेबल डिवाइसेज सिर्फ फिटनेस गैजेट नहीं, बल्कि हेल्थ कोच बनते जा रहे हैं. Galaxy Watch में पहले से कई हेल्थ फीचर्स मौजूद हैं. इसमें हार्ट रेट मॉनिटरिंग, बल्ड ऑक्सीजन ट्रैकिंग, स्लीप एपनिया और इरेगुलर हार्टबीट डिटेक्शन जैसे फीचर्स मिलते हैं. कुछ मार्केट्स में ECG और बल्ड प्रेशर मॉनिटरिंग भी दिया जाता है. अब फेंटिंग प्रेडिक्शन जैसी टेक्नोलॉजी जुड़ने से स्मार्टवॉच का रोल और बड़ा हो सकता है. हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. अभी यह फीचर आम यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है. फिलहाल यह रिसर्च स्टेज में है और सैमसंग ने यह नहीं बताया है कि इसे कब तक Galaxy Watch में रोलआउट किया जाएगा. कंपनी अभी मेडिकल संस्थानों के साथ और रिसर्च करना चाहती है. इसके अलावा स्मार्टवॉच हेल्थ फीचर्स को लेकर हमेशा एक बहस भी रहती है. कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि वियरेबल डिवाइस मददगार जरूर हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टर का विकल्प नहीं माना जा सकता. हाल की कुछ स्टडी में यह भी सामने आया कि कई स्मार्टवॉच कुछ हेल्थ डेटा में गलती कर सकती हैं, खासकर अलग-अलग बॉडी टाइप्स और स्किन टोन्स में एक्यूरेसी बदल सकती है.  

इंस्टाग्राम पर मेटा की बड़ी कार्रवाई, लाखों फेक अकाउंट हटाए गए

इंस्टाग्राम पर एक रात में लाखों की संख्या में अकाउंट डिलीट कर दिए हैं. इसकी वजह से सेलीब्रिटी समेत कई लोगों के फॉलोअर की संख्या अचानक घट गई. इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा ने हाल ही में फेक और कई साल से इनएक्टिव अकाउंट को बंद कर दिया है. भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली, अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, मशहूर फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो, अमेरिकी सेलिब्रिटी काइली जेनर समेत बहुत से सेलिब्रिटी के फॉलोअर की संख्या अचानक घट गई है. शुरुआत में बहुत से लोगों को लगा कि यह शायद कोई टेक्निकल ग्लिच है, जिसकी वजह से फॉलोअर्स की संख्या में गिरावट आई है. हालांकि बाद में अफवाहों के बादल हटे और पता चला कि मेटा की ऑथेंटिसिटी ड्राइव के चलते फेक अकाउंट, इनएक्टिव अकाउंट और बॉट्स अकाउंट को रिमूव किया गया है. विराट कोहली के फॉलोअर्स कम हुए क्रिकेट दुनिया के स्टार विराट कोहली के इंस्टाग्राम अकाउंट से 20 लाख फॉलोअर्ट की कटौती हुई है, जिसकी जानकारी लाइवमिंट की रिपोर्ट से मिलती है.  साथ ही प्रियंका चोपड़ा के फॉलोअर्स की संख्या में कमी आई है. K-Pop इंडस्ट्री के फैंस को भी फॉलोअर्स में भारी कटौती का सामना करना पड़ा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहां BTS के ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट्स से करीब 70 लाख और वहीं  ब्लैक पिंक के अकाउंट से 1 करोड़ फॉलोअर्स कम हो गए. इंस्टाग्राम के ऑफिशियल अकाउंट से भी 1 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स कम हो चुके हैं. ऑथेंटिसिटी बढ़ाने के लिए मेटा हटा रहा फेक अकाउंट मेटा अपने इंस्टाग्राम पर पर ऑथेंटिसिटी बढ़ाने के लिए फेक अकाउंट्स को रिमूव कर रहा है. बहुत से सेलिब्रिटी, एजेंसी और कंपनियां फर्जी एंगेजमेंट के लिए फर्जी अकाउंट का यूज करते हैं.   फर्जी अकाउंट्स या बॉट अकाउंट्स से क्या होता है? फर्जी अकाउंट्स या बॉट अकाउंट का यूज करके फॉलोअर्स, लाइक और कमेंड और एंगेजमेंट को बढ़ाया जाता है. ऐसे में लोगों की आंखों में धूल झौंकी जाती है. बहुत से इन्फ्लुएंसर्स, ब्रांड्स और फैन कम्युनिटी फेक अकाउंट और बॉट का यूज करती हैं. रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कई छोटे क्रिएटर्स के फॉलोअर्स की संख्या में 2% से 5% तक की गिरावट देखी गई. करोड़ों फॉलोअर्स वाले बड़े सेलेब्रिटीज़ के लाखों फॉलोअर्स कम हो चुके हैं.

गर्मी से राहत के लिए घर पर बनाएं शाही बादाम शरबत, दे अंदरूनी ठंडक और ऊर्जा

 चिलचिलाती गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच शरीर को अंदरूनी ठंडक देने के लिए शाही बादाम का शरबत बेहतर कुछ नहीं हो सकता. पुराने समय में यह शरबत राजा-महाराजाओं के दरबार की शान हुआ करता था जिसे खासतौर पर गर्मी के मौसम में ताजगी और ऊर्जा के लिए खूब पिया जाता था. अगर आपको भी यह शरबत पीना है तो आपको इसके लिए बाजार पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है. बाजार में मिलने वाला बादाम शरबत न केवल काफी महंगा होता है, बल्कि उसमें अत्यधिक चीनी और प्रिजर्वेटिव्स भी मिले होते हैं जो सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में यहां हम आपको घर पर ही शुद्ध शाही बादाम शरबत बनाने का तरीका बता रहे हैं. बादाम शरबत के लिए आपको चाहिए होंगी ये चीजें बादाम: 1 कप (रात भर भीगे हुए और छिले हुए) मिठास के लिए: आधा कप धागे वाली मिश्री या खजूर (मिश्री को चीनी का हेल्दी विकल्प माना जाता है) इलायची: 8-10 (ताजी खुशबू और ठंडक के लिए) केसर: 10-12 धागे (शाही रंग और स्वाद के लिए) खरबूजे के बीज: 2 बड़े चम्मच (ठंडक बढ़ाने के लिए) पानी/दूध: आवश्यकतानुसार बनाने का तरीका पहले पेस्ट तैयार करें छिले हुए बादाम, इलायची और खरबूजे के बीज को थोड़े से पानी या दूध के साथ मिक्सर में डालकर एक बहुत ही महीन पेस्ट बना लें. चाशनी (मिश्री का घोल) बनाएं एक बर्तन में 2 कप पानी लें और उसमें मिश्री डालकर धीमी आंच पर उबालें जब तक मिश्री पूरी तरह घुल न जाए. अगर खजूर डाल रहे हैं तो उन्हें बादाम के साथ ही पीस लें. मिश्रण को पकाएं तैयार बादाम पेस्ट को मिश्री वाले पानी में मिलाएं. इसे धीमी आंच पर 10-15 मिनट तक लगातार चलाते हुए पकाएं जब तक कि यह थोड़ा गाढ़ा न हो जाए. केसर का तड़का लगाएं केसर के धागों को थोड़े गुनगुने दूध में भिगोकर मिश्रण में डाल दें. इससे शरबत को प्राकृतिक रंग और शाही खुशबू मिलेगी. स्टोर और सर्व करने का सही तरीका मिश्रण ठंडा होने के बाद इसे कांच की बोतल में भरकर फ्रिज में रख दें. सर्व करते समय एक गिलास ठंडे दूध या पानी में 2-3 चम्मच यह सिरप मिलाएं और ठंडे-ठंडे शाही बादाम शरबत का मजा लें.

गर्मियों के लिए हेल्दी डेजर्ट, चिया पुडिंग से पाएं ठंडक और एनर्जी

 गर्मियों के मौसम में भारी और तला-भुना खाने के बजाय कुछ हल्का और ठंडा खाने की इच्छा होती है. खासतौर पर दोपहर के भोजन और डिनर के बाद कुछ ठंडा और मीठा खाने की क्रेविंग बहुत ज्यादा होती है लेकिन कैलोरी के डर से हम मन मार लेते हैं. ऐसे में आलिया भट्ट की फेवरेट चिया पुडिंग आपके लिए बहुत ही बेहतरीन डेजर्ट साबित हो सकती है. चिया पुडिंग ओमेगा-3, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होती है जो ना केवल आपके मीठी की क्रेविंग भी शांत करती है बल्कि आपको लंबे समय तक तृप्त भी रखती है. साथ ही चिलचिलाती गर्मी में शरीर को ठंडक भी पहुंचाती है. आलिया कुछ समय पहले अपने एक वीडियो में चिया पुडिंग की रेसिपी भी बताई थी. चिया पुडिंग के लिए आपको चाहिए होगी ये चीजें चिया सीड्स: 3-4 बड़े चम्मच दूध (बादाम, नारियल या सामान्य दूध): 1 कप शहद या मेपल सिरप: 1 बड़ा चम्मच (स्वादानुसार) वनीला एसेंस: 2-3 बूंदें (वैकल्पिक) ताजे फल: आम, बेरीज या केला (बारीक कटे हुए) मेवे: बादाम, पिस्ता या अखरोट बनाने का तरीका इसके लिए सबसे पहले एक कांच के जार या कटोरे में चिया सीड्स और दूध को अच्छी तरह मिला लें. इस मिश्रण को ढककर कम से कम 2-4 घंटे या रात भर के लिए फ्रिज में रख दें. जब चिया सीड्स फूलकर जेल जैसा गाढ़ा हो जाएं तो उसे फ्रिज से निकालें. अब इसमें शहद और वनीला एसेंस डालें और दोबारा चलाएं ताकि गांठें न बनें. ऊपर से कद्दू के बीज, कटे हुए अखरोट और बादाम डालें. आप चाहें तो इसमें कटे हुए फल भी मिला सकते हैं. आपकी ठंडी-ठंडी चिया पुडिंग तैयार है.