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Apple का बड़ा झटका: iPad और MacBook हुए 42% तक महंगे, iPhone की कीमत क्यों नहीं बदली?

अमेरिकी टेक कंपनी ऐपल ने भारत समेत दुनियाभर में अपने कस्टमर को बड़ा झटका दिया है. कंपनी ने अपने प्रोडक्ट की कीमत में 42 परसेंट तक का इजाफा कर दिया है, जिसकी वजह iPad से लेकर मैकबुक आदि खरीदने वालों को ज्यादा रकम खर्च करनी होगी. कंपनी ने iPhone की कीमत में कोई  बदलाव नहीं किया है. आइए जानते हैं क्यों? Apple ने एक खास रणनीति के तहत अभी आईफोन की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया है. कंपनी अपने सबसे ज्यादा रेवेन्यू कमाने वाले प्रोडक्ट की कीमत में कोई छेड़छाड़ नहीं करना चाहती है. हालांकि आगे कीमत में बदलाव होगा या नहीं, उसके बारे में अभी कहना मुश्किल है. कीमत बढ़ाने के पीछे मुख्य वजह महंगे होते कंपोनेंट हैं. चिप, मेमोरी और अन्य कंपोनेंट के दाम में इजाफा हो रहा है, जिसकी वजह से कंपनी ने आईपैड से लेकर मैकबुक तक की कीमत में इजाफा किया है. ऐसा करके कंपनी अपने प्रोफिट को बरकरार रखना चाहती है. बीते दो क्वार्टर में कीमत में इजाफा नहीं ऐपल बीते करीब दो क्वार्टर से महंगे कंपोनेंट और अन्य प्रोडक्ट की बढ़ी हुई कीमत का सामना कर रहा था. कंपनी ने इसका बोझ कस्टमर पर नहीं पड़ने दिया. अब कंपनी ने iPad और मैकबुक की कीमत में इजाफा कर दिया है. AI डेटा सेंटर्स के लिए भी कंपोनेंट तैयार हो रहे दरअसल, चिप उत्पादन करने वाली कंपनियां अब AI डेटा सेंटर्स के लिए भी कंपोनेंट तैयार कर रही हैं, जिसकी वजह से उनपर दबाव बढ़ गया है. ऐसे में वे मोबाइल, लैपटॉप आदि के लिए पूरी तरह से सप्लाई नहीं दे पा रहे हैं और उन्होंने कीमत में भी इजाफा कर दिया है.

अंडा vs सोया चंक्स: प्रोटीन के मामले में कौन है ज्यादा फायदेमंद, जानिए एक्सपर्ट्स की राय

प्रोटीन की बात जब भी आती है, तो अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं कि आखिर सबसे बेस्ट ऑप्शन क्या है. हाल ही में पश्चिम बंगाल के मिड-डे मील प्रोग्राम में अंडे की जगह सोया चंक्स को शामिल करने के फैसले ने एक नई बहस छेड़ दी है. यह विवाद सिर्फ डाइट तक सीमित नहीं, बल्कि पोषण की क्वालिटी और शाकाहार VS मांसाहार के बीच भी सिमट गया है. अंडे को जहां हाई क्वालिटी एनिमल प्रोटीन का बेस्ट सोर्स माना जाता है, वहीं सोया चंक्स वेजीटेरियन लोगों के लिए एक किफायती और दमदार विकल्प के रूप में देखे जाते हैं. तो आखिर क्या वाकई सोया चंक्स अंडे की कमी पूरी कर सकते हैं? दोनों ही प्रोटीन के पावरहाउस माने जाते हैं लेकिन फिर भी यह बहस काफी पहले से चली आ रही है. अंडे को जहां हाई क्वालिटी एनिमल प्रोटीन का बेस्ट सोर्स कहा जाता है वहीं सोया चंक्स वेजीटेरियन लोगों के लिए प्रोटीन का सबसे सस्ता और बेहतरीन विकल्प है. कई लोग वजन घटाने या मसल्स बनाने के लिए भी डाइट में इन्हें शामिल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी फिटनेस गोल्स के हिसाब से इनमें से क्या चुनना ज्यादा फायदेमंद है? आइए जानते हैं क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स. अंडे और सोया चंक्स प्रोटीन क्वालिटी और एब्जॉर्प्शन के मामले में अंडे को हमेशा नंबर वन माना जाता है. हेल्थलाइन का कहना है, अंडे में सभी 9 जरूरी अमीनो एसिड्स भरपूर मात्रा में होते हैं जो मसल्स रिपेयर और ओवरऑल हेल्थ के लिए जरूरी हैं. 1 अंडे में करीब 6-7 ग्राम प्रोटीन होता है. इसकी बायो-अवेलेबिलिटी बहुत ज्यादा होती है जिसका मतलब है कि आपका शरीर इसे बहुत आसानी से इस्तेमाल कर लेता है. दूसरी तरफ सोया चंक्स प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का एक शानदार सोर्स हैं. इसमें भी सभी अमीनो एसिड्स होते हैं लेकिन इसकी क्वालिटी और एब्जॉर्प्शन रेट अंडे के मुकाबले थोड़ी कम हो सकती है. हालांकि, फाइबर की बात करें तो सोया चंक्स इस मामले में बाजी मार ले जाते हैं. 50 ग्राम सोया चंक में करीब 25 ग्राम प्रोटीन होता है. कौन है आपके लिए बेस्ट? यदि आप मसल बिल्डिंग पर फोकस कर रहे हैं तो अंडा एक कंप्लीट और सुपीरियर प्रोटीन सोर्स है. इसकी डाइजेस्टिबिलिटी अंडे की तुलना में ज्यादा मानी जाती है. हालांकि यदि आप शुद्ध शाकाहारी हैं या बजट फ्रेंडली ऑप्शन ढूंढ रहे हैं तो सोया चंक्स एक बेस्ट ऑल्टरनेटिव है. वेबएमडी की रिपोर्ट के अनुसार, सोया जैसे प्लांट-बेस्ड सोर्स न सिर्फ प्रोटीन देते हैं बल्कि हार्ट हेल्थ में भी सुधार कर सकते हैं. बस ध्यान रखें कि सोया चंक्स को अगर आप अनाज जैसे चावल या रोटी के साथ मिलाकर खाएं, तो यह इसकी प्रोटीन प्रोफाइल को और बेहतर बना देता है. अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले हमेशा अपनी बॉडी की जरूरतों को समझना जरूरी है.

Apple प्रोडक्ट्स हुए 42% तक महंगे: MacBook Pro और iPad Air की कीमतों में भारी बढ़ोतरी

ऐपल ने भारत समेत दुनियाभर में अपने प्रोडक्ट के दाम बढ़ा दिए हैं, जिसमें मैकबुक से लेकर iPad तक का नाम शामिल है. कंपनी ने प्रोडक्ट की शुरुआती कीमत में 20 से 42 परसेंट तक का इजाफा किया है. यहां तक कि MacBook Pro के शुरुआती वेरिएंट की कीमत में 1 लाख रुपये का इजाफा हुआ है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं. कंपनी का कहना है कि कीमत बढ़ने के पीछे की मुख्य वजह मेमोरी चिप्स और अन्य कंपोनेंट की बढ़ती लागत है. Apple India पोर्टल पर नई प्राइस लिस्ट आ चुकी है. पीटीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि M5 सीरीज चिप वाले MacBook Pro की कीमत में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा चुकी है. MacBook Pro M5 Pro की नई कीमत 14-इंच MacBook Pro M5 Pro चिप वाले की कीमत अब 2,99,900 रुपये हो चुकी है. वहीं, लॉन्चिंग के दौरान इसकी शुरुआती कीमत 2,49,900 रुपये थी.   MacBook Pro 14-inch (M5 Max variant) की कीमत में करीब 1 लाख रुपये तक का इजाफा हुआ है. ये जानकारी इंडियाटुडे की रिपोर्ट से मिली है. iPad Air की कीमत में भारी इजाफा हुआ है. 13-इंच iPad Air के बेस मॉडल की कीमत 84,900 रुपये से बढ़ाकर 1,19,900 रुपये कर दी जा चुकी है, जो करीब 42 परसेंट तक का इजाफा है. कीमत बढ़ाने की वजह काउंटर रिसर्च के को-फाउंडर और रिसर्च वीपी नील शाह ने बताया है कि मैकबुक नियो, मैकबुक एयर, मैकबुक प्रो, आईपैड एयर और आईपैड प्रो वाईफाई की कीमत लागत में आए बड़े बदलाव को दर्शाती है. मेमोरी से सेमीकंडक्टर चिप्स की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है. चिप मेकर AI डेटा सेंटर के लिए भी कर रही हैं काम मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियां अब अपने मैन्युफैक्चरर का बड़ा हिस्सा AI डेटा सेंटरों को दे रही हैं. ऐसे में कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए मेमोरी चिप्स की कमी हो चुकी है और उनकी लागत बढ़ रही है. नील शाह ने बताया है कि ऐपल ने करीब दो तिमाहियों तक कीमतें नहीं बढ़ाईं और महंगाई का असर ग्राहकों तक नहीं पहुंचने दिया. अब कंपनी के लिए बढ़ी हुई लागत का बोझ उठाना मुश्किल हो गया है, जिसकी वजह ये कीमत में इजाफा हुआ है. Apple इस साल अपने नए ऑन-डिवाइस Apple Intelligence जैसा फीचर लॉन्च कर सकती है. इसके लिए डिवाइस को और ज्यादा मेमोरी और रैम की जरूरत पड़ सकती है.

सुबह खाली पेट भीगी मेथी के 5 जबरदस्त फायदे, सेहत के लिए वरदान

हमारे इंडियन किचन में मेथी दाना एक बहुत ही आम मसाला है. तड़के से लेकर अचार तक, यह हर चीज का स्वाद बढ़ाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटा सा पीला दाना सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि आपकी सेहत के लिए एक वरदान है. खासकर जब आप मेथी को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाते हैं, तो इसके गुण कई गुना बढ़ जाते हैं. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़े लाइफस्टाइल में भीगी हुई मेथी को अपनी डाइट में शामिल करना एक बेहद समझदारी भरा फैसला हो सकता है. आइए जानते हैं सुबह खाली पेट भीगी हुई मेथी खाने के 5 बड़े फायदों (Benefits of Soaked Fenugreek Seeds) के बारे में. 1. डायबिटीज को कंट्रोल करने में मददगार आज के समय में शुगर या डायबिटीज की समस्या बहुत आम हो चुकी है. भीगी हुई मेथी ब्लड शुगर लेवल को काबू में रखने के लिए एक रामबाण इलाज मानी जाती है. मेथी के दानों में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट और शुगर के सोखने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है. इससे खून में अचानक शुगर का लेवल नहीं बढ़ता. अगर आप रोज सुबह इसका पानी पीते हैं और इसके दाने चबाकर खाते हैं, तो इंसुलिन का सिक्रीशन भी बेहतर होता है. 2. पेट की दिक्कतों और कब्ज से छुटकारा गलत खानपान की वजह से आजकल हर दूसरा व्यक्ति गैस, एसिडिटी और कब्ज से परेशान रहता है. भीगी हुई मेथी में घुलनशील फाइबर होता है, जो हमारे पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है. रातभर भीगने के कारण मेथी थोड़ी सॉफ्ट हो जाती है और इसे पचाना आसान होता है. यह पेट को साफ करने में मदद (Benefits of Soaked Fenugreek Seeds) करती है और पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या को भी धीरे-धीरे खत्म कर देती है. 3. वजन घटाने में मिलती है मदद अगर आप अपने बढ़ते वजन या पेट की चर्बी से परेशान हैं, तो भीगी हुई मेथी आपकी इस मुश्किल को आसान कर सकती है. सुबह खाली पेट इसे खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है, जिससे कैलरी तेजी से बर्न होती है. इसके अलावा, मेथी में मौजूद फाइबर के कारण इसे खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा-भरा महसूस होता है. इससे आपको असमय भूख नहीं लगती और आप ओवरईटिंग यानी ज्यादा खाने से बच जाते हैं. 4. खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करे (Benefits of Soaked Fenugreek Seeds) दिल की सेहत के लिए भीगी हुई मेथी बहुत फायदेमंद होती है. यह शरीर में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल को कम करने में मदद करती है. जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है, तो नसों में ब्लॉकेज का खतरा कम हो जाता है, जिससे दिल की बीमारियाँ और हार्ट अटैक आने की संभावना काफी हद तक घट जाती है. 5. त्वचा और बालों के लिए वरदान भीगी हुई मेथी सिर्फ अंदरूनी सेहत ही नहीं, बल्कि आपकी बाहरी खूबसूरती को भी निखारती है. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और विटामिन्स चेहरे के कील-मुंहासों को दूर करते हैं और स्किन पर एक नेचुरल ग्लो लाते हैं. इसके साथ ही, अगर आपके बाल बहुत ज्यादा झड़ रहे हैं या उनमें डैंड्रफ की समस्या है, तो भीगी हुई मेथी खाने (Benefits of Soaked Fenugreek Seeds) से बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और बाल चमकदार बनते हैं.

वजन घटाने के लिए बेस्ट हैं ये 5 हेल्दी इवनिंग स्नैक्स, भूख भी मिटेगी और कैलोरी भी कम रहेगी

 जब बात वजन घटाने की आती है, तो यह एक ऐसा सफर है, जिसमें सबसे बड़ी चुनौती जिम जाना नहीं, बल्कि अपनी भूख को कंट्रोल करना होता है. अक्सर देखा जाता है कि लोग सुबह का ब्रेकफास्ट और दोपहर का लंच तो हेल्दी तरीके से मैनेज कर लेते हैं, लेकिन शाम को भूख लगते ही कचौरी, समोसा या फिर बिस्कुट खाने के लिए निकल पड़ते हैं. शाम के समय होने वाली यही क्रेविंग्स अक्सर पूरे डाइट प्लान को खराब कर देती हैं. अगर आप भी हर शाम लगने वाली भूख से परेशान हैं, लेकिन अपना वजन बढ़ने नहीं देना चाहते, तो आपको भूखे रहने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. आपको सिर्फ अपने अनहेल्दी स्नैक्स को कुछ टेस्टी और लो-कैलोरी ऑप्शंस से रिप्लेस करना होगा. आज हम आपको कुछ ऐसे इवनिंग स्नैक्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें आप अपने शाम के नाश्ते में शामिल कर सकते हैं. इन स्नैक्स की खासियत यह है कि ये स्वादिष्ट होने के साथ-साथ लो-कैलोरी भी होते हैं, इसलिए इन्हें खाने से शरीर को एक्स्ट्रा कैलोरी नहीं मिलती और आपकी वेट लॉस जर्नी भी पटरी पर बनी रहती है. टेस्ट और हेल्थ का कॉम्बिनेशन हैं भुने हुए मखाने जब शाम को कुछ क्रंची या क्रिस्पी खाने का मन करे, तो मखाने सबसे अच्छा ऑप्शन हैं. मखाने में कैलोरी बहुत कम होती है और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. जब आप इन्हें खाते हैं तो आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है. भुने हुए मखानों को तैयार करने के लिए सबसे पहले एक कढ़ाई में थोड़ा सा घी या बिना घी के भी मखानों को सेंक लें. अब इसमें थोड़ा सा सेंधा नमक, हल्दी और काली मिर्च पाउडर मिलाएं. यह लाइट और टेस्टी स्नैक आपकी शाम की चाय के साथ एक बेहतरीन जुगलबंदी बनाएगा. प्रोटीन का पावरहाउस है स्प्राउट्स चाट अगर आपको शाम के वक्त कुछ चटपटा और तीखा खाने की आदत है, तो स्प्राउट्स चाट आपके लिए बेस्ट है. इसे तैयार करने के लिए मूंग और चने को स्प्राउटेड करके उसमें बारीक कटा हुआ प्याज, टमाटर, खीरा और हरी मिर्च मिलाएं. अब इसके ऊपर से थोड़ा सा नींबू का रस और चाट मसाला डाल लें. यह स्नैक न केवल लो-कैलोरी है, बल्कि इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो वजन घटाने में और आपके मसल्स को स्ट्रॉन्ग रखने में मदद कर सकता है. भुना हुआ चना शरीर को देगा इंस्टेंट एनर्जी ऑफिस में काम करते समय या फिर कहीं ट्रैवल करते समय भुने हुए चने खाना सबसे आसान और हेल्दी उपाय है. बता दें चने में फाइबर और प्रोटीन दोनों भरपूर मात्रा में होते हैं, जो ब्लड में शुगर के लेवल को अचानक बढ़ने नहीं देते. इसे खाने से आपको इंस्टेंट एनर्जी मिलती है और बार-बार कुछ मीठा या फ्राइड खाने की इच्छा शांत हो जाती है. इस बात का ख्याल रखें कि बिना छिलके वाले चनों की जगह छिलके सहित भुने चने खाएं, क्योंकि छिलके में फाइबर ज्यादा होता है. रिफ्रेशिंग और लाइट खीरे और गाजर की स्टिक्स गर्मियों के मौसम में या जब आपको बहुत ही हल्की भूख लगी हुई हो, तो इसे शांत करने के लिए खीरे, गाजर या चुकंदर को पतली स्टिक्स के रूप में काट लें. आप अगर चाहें तो इन्हें पुदीने और दही से बनी घर की चटनी के साथ भी शाम के नाश्ते में खा सकते हैं. बता दें इनमें पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिससे आपका शरीर हाइड्रेटेड रहता है और आपको बिल्कुल भी एक्स्ट्रा कैलोरी नहीं मिलती. बिना गिल्ट के खाएं पॉपकॉर्न बहुत से लोगों को लगता है कि पॉपकॉर्न खाने से वजन बढ़ता है, लेकिन ऐसा उसी समय होता है जब आप उसमें बहुत ज्यादा बटर या चीज मिला देते हैं. अगर आप घर पर बिना बटर या कम तेल में प्लेन पॉपकॉर्न बनाते हैं, तो यह एक बेहतरीन लो-कैलोरी स्नैक बन जाता है. बता दें तीन कप पॉपकॉर्न में बहुत ही कम कैलोरी होती है और यह फाइबर से भी लोडेड होता है, जिससे आपका पेट आसानी से भर जाता है.

iPhone 17 Pro पर भारी डिस्काउंट, प्रीमियम फीचर्स के साथ कीमत में बड़ी कटौती

अगर आप लंबे समय से ऐपल के प्रीमियम स्मार्टफोन iPhone 17 Pro को खरीदने का इंतजार कर रहे थे, तो यह आपके लिए अच्छी खबर हो सकती है. कंपनी के इस फ्लैगशिप डिवाइस पर फिलहाल बड़ा डिस्काउंट मिल रहा है, जिससे इसकी कीमत लॉन्च प्राइस के मुकाबले काफी कम हो गई है. प्रीमियम डिजाइन, दमदार कैमरा सिस्टम और लेटेस्ट प्रोसेसर के साथ आने वाला यह स्मार्टफोन अब पहले की तुलना में ज्यादा आकर्षक डील बन गया है. लॉन्च के मुकाबले कितनी कम हुई कीमत? iPhone 17 Pro के 256GB वेरिएंट को भारत में ₹1,34,900 की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था. अब यह स्मार्टफोन ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म पर कम कीमत में उपलब्ध है. मौजूदा ऑफर के तहत फोन की लिस्टेड कीमत ₹1,22,900 तक पहुंच गई है. इसके अलावा चुनिंदा बैंक कार्ड ऑफर का फायदा लेने पर खरीदारों को अतिरिक्त छूट भी मिल रही है. कुल मिलाकर इस डिवाइस पर करीब ₹18,000 तक की बचत की जा सकती है, जिससे इसकी प्रभावी कीमत लगभग ₹1,16,900 रह जाती है. डिस्प्ले और डिजाइन में क्या है खास? iPhone 17 Pro में 6.3 इंच का सुपर रेटिना XDR डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. OLED पैनल के साथ आने वाला यह डिस्प्ले बेहद ब्राइट और शार्प विजुअल एक्सपीरियंस देता है. फोन की पीक ब्राइटनेस 3,000 निट्स तक पहुंच सकती है, जिससे तेज धूप में भी स्क्रीन आसानी से दिखाई देती है. डिस्प्ले की सुरक्षा के लिए कंपनी ने Ceramic Shield 2 का इस्तेमाल किया है. वहीं इसका प्रीमियम एल्युमिनियम बॉडी डिजाइन इसे मजबूत और आकर्षक लुक देता है. परफॉर्मेंस के लिए मिला नया A19 Pro Bionic चिप ऐपल ने इस फोन में अपना लेटेस्ट A19 Pro Bionic प्रॉसेसर दिया है. 3nm तकनीक पर आधारित यह चिपसेट बेहतर स्पीड, पावर एफिशिएंसी और एआई प्रॉसेसिंग ऑफर करता है. फोन में वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम भी दिया गया है, जो लंबे समय तक गेमिंग या हेवी टास्क के दौरान तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है. कैमरा लवर्स के लिए शानदार पैकेज फोटोग्राफी के लिए iPhone 17 Pro में ट्रिपल 48MP कैमरा सेटअप मिलता है. इसमें 48MP का प्राइमरी सेंसर, 48MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 48MP का टेलीफोटो लेंस शामिल है. यह सेटअप अलग-अलग परिस्थितियों में बेहतर फोटो और वीडियो कैप्चर करने में सक्षम है. सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 18MP सेंटर स्टेज कैमरा दिया गया है, जो ऑटो फ्रेमिंग जैसी सुविधाएं भी सपोर्ट करता है. क्या यह खरीदने का सही समय है? प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे यूजर्स के लिए मौजूदा डिस्काउंट ऑफर काफी आकर्षक माना जा सकता है. लॉन्च के कुछ महीनों बाद मिलने वाली यह कीमत उन ग्राहकों को फायदा दे सकती है जो फ्लैगशिप अनुभव चाहते हैं लेकिन थोड़ा कम खर्च करना पसंद करते हैं. मजबूत कैमरा, हाई-एंड प्रॉसेसर और iOS 26 जैसे फीचर्स इसे प्रीमियम सेगमेंट में एक मजबूत विकल्प बनाते हैं.

अच्छी नौकरी, मोटी सैलरी फिर भी डिप्रेशन! ‘बोरआउट’ ने बढ़ाई कर्मचारियों की चिंता

नई दिल्ली  अब तक आपने सुना होगा कि ऑफिस में काम का दबाव ज्यादा होने के कारण लोग बर्नआउट का शिकार हो रहे हैं। यानी काम का प्रेशर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से थका रहा है, लेकिन अब एक दूसरी समस्या सामने आ रही है।  अब कर्मचारी ऑफिस में बर्नआउट से ज्यादा बोरियत का शिकार हो रहे हैं, जिसे बोरआउट कहते हैं। इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि दफ्तरों में करने के लिए काम नहीं बचा है, बल्कि लोगों को अब उस काम का कोई मकसद नजर नहीं आ रहा है। जब काम में कोई नया चैलेंज नहीं मिलता या वो दिनभर खाली बैठे रहते हैं, तो ये खालीपन उन्हें अंदर से तोड़ने लगता है।  बाहर से देखने पर सबकुछ बिल्कुल ठीक दिखाई देता है। अच्छी नौकरी, सैलेरी, एसी की हवा और आरामदायक कुर्सी, लेकिन भारी बोरियत की वजह से अंदर ही अंदर कर्मचारियों का आत्मविश्वास डगमगा जाता है।  बोरआउट कर्मचारियों को कैसे प्रभावित कर रहा है? इस शब्द का सबसे पहली बार इस्तेमाल यूरोप के एक वर्कप्लेस रिसर्च में किया गया था। इस रिसर्च के अनुसार, लगातार काम कम मिलना, एक ही तरह का काम रोज-रोज करना या अपने स्किन का इस्तेमाल न कर पाना, कर्मचारियों को स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन की तरफ धकेल रहा है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने बर्नआउट को काम से जुड़े सिंड्रोम के रूप में डिफाइन किया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑफिस में कोई मकसद न होने की वजह से पैदा होने वाला स्ट्रेस मेंटल हेल्थ के लिए काफी नुकसानेह है।  बिजी दिखने की मजबूरी एक रिपोर्ट के अनुसार, कॉर्पोरेट ऑफिसेज में ऐसे कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिन्हें सैलेरी तो अच्छी मिल रही है, लेकिन उनका काम बहुत कम है या काफी बिखरा हुआ है। ऐसे कर्मचारी दिनभर सिर्फ बिजी दिखने की कोशिश करते हैं। मीटिंग्स, ई-मेल और स्क्रीन के सामने खुद को बेकार महसूस करना ही बोरआउट की असली वजह है।  वर्कप्लेस से जुड़ी रिपोर्ट्स बताती हैं कि कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा अपने काम से कनेक्टेड महसूस नहीं करता। काम में कोई चैलेंज न होने से स्ट्रेस, आत्मसम्मान में कमी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं पैदा होती है, क्योंकि कर्मचारियों को अपनी प्रोडक्टिविटी और काबिलियत पर शक होने लगता है।  आईटी, बैंकिंग और सरकारी दफ्तरों पर सबसे ज्यादा असर ग्लोबल सर्वे और एचआर ट्रेंड्स के मुताबिक, दुनिया भर के करीब 15 से 20 प्रतिशत कर्मचारी किसी न किसी स्तर पर इस बोरियत का सामना कर रहे हैं। खासतौर से आईटी, बैंकिंग और सरकारी दफ्तरों में यह समस्या बहुत ज्यादा देखी जा रही है, क्योंकि इन जगहों पर एक ही काम को बार-बार दोहराने का चलन ज्यादा है। क्यों बढ़ रहा है यह खतरा? हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू के अनुसार, काम के मशीनीकरण के कारण नयापन खत्म हो रहा है। साथ ही, योग्यता के अनुसार जिम्मेदार न मिलना, जरूरत से ज्यादा स्टाफ होना, काम का गलत डिस्क्रिप्शन भी बोरआउट की वजह है। इसके पीछे मैनेजर का रवैया भी जिम्मेदार है कि वे केवल इस बात का ध्यान रखते हैं कि कर्मचारी काम करते हुए दिखे।   

लो ब्लड प्रेशर के लक्षण और फर्स्ट एड: चक्कर आने पर तुरंत राहत कैसे पाएं

लो ब्लड प्रेशर या फिर हाइपोटेंशन एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें आपके शरीर का ब्लड प्रेशर नॉर्मल लेवल यानी कि 120/80 mmHg से काफी कम हो जाता है. जब शरीर में बीपी अचानक कम हो जाता है, तो इसकी वजह से आपको चक्कर आने लगते हैं, आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है, कमजोरी महसूस होने लगती है, या फिर कई बार घबराहट और बेहोशी जैसे लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं. अगर आपके या फिर आपके किसी करीबी के साथ अचानक ऐसा हो जाए, तो घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. आप अगर चाहें, तो घर पर ही कुछ आसान और असरदार उपाय अपनाकर अपने लो ब्लड प्रेशर को तुरंत कंट्रोल में कर सकते हैं. तो चलिए, इन उपायों के बारे में जानते हैं, ताकि आप जरूरत के समय खुद को और अपने परिवार वालों को सुरक्षित रख सकें. नमक और पानी के घोल का सेवन अगर बीपी अचानक कम हो जाए तो इसे कंट्रोल करने का सबसे पहला और सबसे इंस्टेंट उपाय है नमक का पानी. अगर आपको नहीं पता तो बता दें नमक में सोडियम होता है, जो ब्लड प्रेशर को इंस्टेंट बढ़ाने का काम करता है. लो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए एक ग्लास पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर धीरे-धीरे पिएं. इस बात का ख्याल रखें कि नमक का पानी केवल इमरजेंसी कंडीशन में ही लें, और अगर व्यक्ति को पहले से दिल या किडनी की कोई बीमारी है, तो डॉक्टर की सलाह के बिना ज्यादा नमक न दें. इलेक्ट्रोल, ग्लूकोज या ओआरएस का करें सेवन आपको शायद यह जानकर हैरानी हो लेकिन शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने पर भी बीपी अचानक गिर जाता है. ऐसा होने पर आपको अपने शरीर को जितनी जल्दी हो सके हाइड्रेट करने की कोशिश करनी चाहिए. शरीर को हाइड्रेशन देने के लिए आप पानी में ग्लूकोज या ओआरएस का घोल मिलाकर पी सकते हैं. अगर ये घर पर मौजूद न हों, तो पानी में नींबू, थोड़ी चीनी और एक चुटकी नमक मिलाकर नींबू पानी बना लें. इससे शरीर को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है और बीपी नॉर्मल होने लगता है. तुरंत कॉफी या चाय पिलाना भी फायदेमंद अगर आपका या फिर आपके घर पर किसी का भी बीपी अचानक ही बहुत कम हो गया है और व्यक्ति को तेज चक्कर आ रहे हैं, तो कैफीन का सेवन एक बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकता है. जिसका ब्लड प्रेशर लो है उसे एक कप कड़क ब्लैक कॉफी या कड़क चाय पिलाएं. कैफीन दिल की धड़कन को थोड़ा फ़ास्ट कर देता है और ब्लड वेसल्स को सिकोड़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर तुरंत बढ़ जाता है. हालांकि, इसे अपनी रोज की आदत न बनाएं, क्योंकि कैफीन का बहुत ही ज्यादा सेवन सेहत के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं है. पैरों को ऊपर उठाकर लिटाएं अगर बीपी लो होने के कारण व्यक्ति को चक्कर आ रहे हैं या वह बेहोश होने की कंडीशन में है, तो बैठने या खड़े रहने के बजाय उसे तुरंत सीधे लिटा देना चाहिए. इसके लिए सबसे पहले व्यक्ति को पीठ के बल सीधा लेटा दें और उनके पैरों के नीचे दो-तीन तकिए लगा दें, ताकि व्यक्ति का पैर सिर के लेवल से ऊपर हो जाएं. ऐसा करने से पैरों की तरफ बहने वाला खून तुरंत दिमाग और दिल की तरफ पहुंचने लगता है, जिससे चक्कर आना बंद हो जाता है और मरीज को राहत मिलती है. कुछ मीठा या किशमिश खाएं शरीर में ब्लड शुगर का लेवल कम होने से भी बीपी लो हो सकता है. आयुर्वेद में किशमिश को लो बीपी के लिए बहुत फायदेमंद माना गया है. अचानक बीपी गिरने पर आप मुट्ठी भर किशमिश चबाकर खा सकते हैं, या फिर घर में रखी कोई मिठाई, चॉकलेट या खजूर का सेवन भी कर सकते हैं. यह शरीर को तुरंत ग्लूकोज देता है, जिससे कमजोरी दूर होती है. ये सभी उपाय केवल इमरजेंसी कंडीशन में इंस्टेंट राहत पाने के लिए हैं. अगर इन उपायों को करने के बाद भी बीपी नॉर्मल नहीं होता है, या व्यक्ति को बार-बार लो बीपी की प्रॉब्लम होती है, तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें और तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से कॉन्टैक्ट करें.

18 मिनट की इंटरवल वॉकिंग: क्या वाकई तेजी से कम होता है वजन?

आजकल इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर एक नया ट्रेंड छाया हुआ है. हर दूसरा इन्फ्लुएंसर एक जापानी वॉकिंग मेथड की बात कर रहा है. इस तरीके से चलने पर आम वॉक के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से फैट बर्न होता है. ऐसे में मन में यह सवाल आता है कि क्या वाकई इस बात में कोई सच्चाई है, या यह भी कुछ महीनों में गायब हो जाने वाला कोई नया चोचला है. आइए जाते हैं. Japanese walking Method: क्या है यह 3-3-3 वॉकिंग फॉर्मूला? यह जापान की एक खास रिसर्च पर बेस्ड है, जिसे ‘इंटरवल वॉकिंग’ कहते हैं. इसमें आपको कुल 18 मिनट की वॉक करनी होती है. शुरुआत के 3 मिनट आपको बिल्कुल आराम से, धीरे-धीरे चलना है. इसके बाद अगले 3 मिनट आपको जितनी तेजी से हो सके, उतनी तेज वॉक करनी है. बस इसी चक्र को आपको 3 बार दोहराना है. इसके लिए आपको न तो किसी जिम की जरूरत है, न किसी महंगे सामान की और न ही किसी कड़े वर्कआउट प्लान की. जब आप धीमे चलते हैं, तो आपके शरीर को आराम मिलता है. वहीं जब आप तेज चलते हैं, तो आपके दिल की धड़कनें बढ़ती हैं. यही उतार-चढ़ाव इस वॉक को आम सैर से अलग और असरदार बनाता है. वजन घटाने में यह कैसे मदद करता है? इस तरीके (Japanese walking Method) से वॉक करने पर आपका मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है. इसका मतलब यह है कि वॉक खत्म करने के कई घंटों बाद भी, जब आप आराम से कुर्सी पर बैठे होते हैं, तब भी आपका शरीर कैलरी बर्न कर रहा होता है. इसके अलावा, यह शरीर में इंसुलिन को बेहतर बनाता है जिससे पेट के आसपास की चर्बी को पिघलाने में मदद मिलती है. चूंकि यह सिर्फ 18 मिनट का है, इसलिए लोग इसे रोज आसानी से कर पाते हैं. आम वॉक से यह कितनी अलग है? रोजाना एक ही रफ्तार में आराम से टहलना सेहत के लिए अच्छा है, इसमें कोई बुराई नहीं है. लेकिन कुछ समय बाद हमारे शरीर को उसकी आदत हो जाती है, जिससे कैलरी बर्न होना कम हो जाता है. 3-3-3 मेथड शरीर को एक ढर्रे पर नहीं आने देता. जब आप अचानक धीमे से तेज होते हैं, तो शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. 30 मिनट की सामान्य सैर के मुकाबले यह 18 मिनट की इंटरवल वॉक आपके दिल और सेहत को कहीं ज्यादा फायदा पहुंचाती है. किसे करना चाहिए और कैसे शुरू करें? यह तरीका (Japanese walking Method) हर उस इंसान के लिए बेस्ट है जो भारी-भरकम एक्सरसाइज या जिम जाने से बचता है. जो लोग लंबे समय बाद दोबारा एक्टिव हो रहे हैं या जिनकी उम्र 40 से ज्यादा है, उनके लिए यह बेहद सुरक्षित और आसान है. बस दिल की बीमारी वाले लोग इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. इसे करने के लिए सबसे पहले 3 मिनट ऐसे चलें जैसे आप बाजार में घूम रहे हों. फिर अगले 3 मिनट इतनी तेज चलें जैसे आपकी बस छूट रही हो (दौड़ना नहीं है, बस तेज चलना है). ऐसा 3 बार करें. हफ्ते में कम से कम 5 दिन इसे करने का टारगेट रखें. Japanese walking Method: कितने दिन में दिखेगा असर? शुरुआती दो हफ्तों में ही आपको अपनी एनर्जी में सुधार दिखेगा और नींद भी बेहतर आएगी. चार से छह हफ्ते होते-होते आपकी सांस फूलना बंद हो जाएगी और तेज चलना आसान लगने लगेगा. अगर आप वजन और पेट की चर्बी में साफ बदलाव देखना चाहते हैं, तो आपको 8 से 12 हफ्ते यानी दो-तीन महीने लगातार इसे करना होगा.

कुणाल शाह बन सकते हैं WhatsApp के नए ग्लोबल CEO, मेटा में बड़ा बदलाव

दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप का सीईओ भारतीय होगा. वॉट्सऐप के मौजूदा CEO Will Cathcart अब की जगह क्रेड के फाउंडर कुणाल शाह लेंगे. Meta इन्हें वॉट्सऐप का ग्लोबल सीईओ बना रही है. दिलचस्प ये है कि वॉट्सऐप की पेरेंट कंपनी मेटा कुणाल शाह की कंपनी क्रेड में लगभग 1 बिलियन डॉलर्स निवेश किया है. ये भारतीय रुपये में 900 करोड़ रुपये होते हैं. CRED एक फिनटेक ऐप है और इसे शुरुआत में कंपनी ने क्रेडिट कार्ड के बिल पेमेंट सल्यूशन के तौर पर पेश किया था. धीरे धीरे इस ऐप में कई सर्विसेज जुड़ीं और अब इस ऐप के जरिए पेमेंट से लेकर लोन तक मिल सकता है. कंपनी के प्रोडक्ट हेड क्रिस कॉक्स ने एक नोट में लिखा है. आप पूरा नोट पढ़ सकते हैं. कुछ जरूरी जानकारी शेयर करनी है. सात साल तक वॉट्सऐप को लीड करने के बाद विल कैथकार्ट ने फैसला किया है कि अब वह इस रोल से पीछे हटेंगे और जिम्मेदारी किसी नए लीडर को देंगे. इस बदलाव के दौरान वह Meta के साथ जुड़े रहेंगे और आगे की जानकारी हम ट्रांजिशन के बाद शेयर करेंगे. विल कैथकार्ट ने वॉट्सऐप को एक बहुत बड़े बदलाव और ग्रोथ के दौर से गुजरते हुए लीड किया है. उन्होंने एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन वाली मैसेजिंग को 3 अरब से ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाया, जिसमें अमेरिका के 10 करोड़ से ज्यादा लोग शामिल हैं. इसके साथ ही वॉट्सऐप का बिजनेस भी कई अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचा. उन्होंने दुनिया भर में लोगों के प्राइवेट बातचीत के राइट को सेफगार्ड किया. कई सरकारों का विरोध किया जो बैकडोर एक्सेस चाहते थे. स्पायवेयर कंपनियों के कई हमलों को रोका और NSO ग्रुप को कोर्ट में हराया. विल हमेशा यूजर्स की प्राइवेसी के लिए खड़े रहे हैं और उनके शानदार काम के लिए हम उनके आभारी हैं. मुझे खुशी है कि हम कुणाल शाह को वॉट्सऐप के नए लीडर के रूप में स्वागत कर रहे हैं. जब विल ने अपना फैसला किया, तो हमने ऐसे लीडर की तलाश शुरू की जो वॉट्सऐप की ग्लोबल क्षमता को समझता हो, AI से आने वाले बदलावों को संभाल सके और दुनिया की सबसे बड़ी कम्युनिकेशन सर्विस को लीड करने की क्षमता रखता हो. कुणाल इस भूमिका के लिए सबसे सही विकल्प बनकर सामने आए. वह एक सफल बिजनेसमैन हैं और भारत के सबसे सम्मानित बिजनेस लीडर्स में गिने जाते हैं. हमने अलग से CRED में भी निवेश किया है, जो भारत की एक फिनटेक कंपनी है और जहां कुणाल शाह अभी फाउंडर और CEO हैं. यह निवेश भी इस बदलाव को आसान बनाने का हिस्सा है. कुणाल का पहला दिन आज है. 25 जून को होने वाली वॉट्सऐप की मीटिंग में हम उन्हें पूरी टीम से मिलवाएंगे और विल को धन्यवाद देंगे, जब वह यह जिम्मेदारी आगे बढ़ाएंगे. Meta CEO मार्क जकरबर्ग ने क्या कहा? Mark Zuckerberg ने कहा कि विल कैथकार्ट ने 7 साल तक वॉट्सऐप को लीड करने के बाद अब अपनी भूमिका छोड़ने का फैसला किया है. विल मेटा के सबसे अहम और असरदार लीडर्स में से एक रहे हैं. उनके नेतृत्व में वॉट्सऐप 3 अरब से ज्यादा लोगों तक पहुंचा और उन्होंने यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत करने में बड़ा रोल निभाया. मार्क जकरबर्ग ने कहा कि वह विल के काम और योगदान के लिए बेहद आभारी हैं. अब विल मेटा के अंदर ही एक नई भूमिका में जाएंगे, जहां वे नए प्रोडक्ट्स पर काम करेंगे. उन्होंने कहा कि आगे भी विल के साथ काम करने को लेकर वह उत्साहित हैं. जकरबर्ग ने यह भी कहा कि कुनाल शाह अब वॉट्सऐप के नए लीडर के तौर पर मेटा से जुड़ेंगे. उन्होंने क्रेड को भारत की बड़ी टेक कंपनियों में से एक बनाया है. उनके पास एक बिल्डर की सोच और ग्लोबल नजरिया है, जो दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग ऐप को चलाने में काम आएगा. जकरबर्ग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कुनाल शाह के साथ मिलकर वॉट्सऐप को और बेहतर बनाया जाएगा, ताकि यह अरबों लोगों और लाखों बिजनेस के लिए सबसे बेहतर प्लेटफॉर्म बना रहे.