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जडेजा-सुंदर को क्यों घसीटा?’ बेन स्टोक्स पर सचिन ने तोड़ी चुप्पी

नई दिल्ली भारत और इंग्लैंड के बीच 5 टेस्ट मैच की सीरीज का चौथा मुकाबला ही इकलौता ऐसा मैच रहा जिसका कोई परिणाम नहीं निकला। मैनचेस्टर में खेला गया टेस्ट ड्रॉ हुआ था और उसके आखिरी सेशन में 'हैंडशेक कंट्रोवर्सी' की काफी चर्चा रही। इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने उस समय मैच को ड्रॉ मानकर जल्दी समाप्त करने की पैंतरेबाजी चली जब रविंद्र जडेजा और वॉशिंगटन सुंदर दोनों ही अपने-अपने शतक के करीब थे। स्टोक्स ने मैच ड्रॉ की पेशकश करते हुए जडेजा की तरफ हाथ बढ़ाया लेकिन भारतीय ऑलराउंडर ने इससे साफ इनकार कर दिया। इससे चिढ़े स्टोक्स और इंग्लैंड के बाकी खिलाड़ियों ने मजाक उड़ाने के अंदाज में जडेजा पर खूब टिप्पणियां भी की थी और ताना मारे थे। इस मुद्दे पर क्रिकेट जगत की राय बंटी हुई दिखी थी। ज्यादातर पूर्व क्रिकेटरों और एक्सपर्ट्स ने बेन स्टोक्स की हरकत की आलोचना की थी लेकिन डेल स्टेन जैसे कुछ पूर्व क्रिकेटरों ने स्टोक्स का समर्थन किया था। सीरीज खत्म होने पर महान सचिन तेंदुलकर ने भी हैंडशेक कंट्रोवर्सी पर खुलकर अपनी बात रखी है। बेन स्टोक्स ने जिस अंदाज में जडेजा और सुंदर के सामने पेशकश रखी, उसकी तेंदुलकर ने आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह सुंदर और जडेजा का सिरदर्द थोड़े है कि वे इसे सुनिश्चित करें कि पांचवें टेस्ट के लिए इंग्लैंड के गेंदबाजों को भरपूर आराम मिले। सचिन ने भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज का रिव्यू किया है। उन्होंने इससे जुड़ा वीडियो रेडिट पर पोस्ट किया है। उसमें वह हैंडशेक कंट्रोवर्सी पर कहते हैं, ‘वॉशिंगटन ने शतक बनाया और जडेजा ने शतक बनाया। यह सही भावना क्यों नहीं है? वे ड्रॉ के लिए खेल रहे थे।’ उन्होंने आगे कहा, ‘सीरीज जीवंत था तो उन्हें क्यों मानना चाहिए (और हाथ मिलाना चाहिए) और इंग्लैंड के गेंदबाजों और फील्डरों को आराम देना चाहिए? अगर इंग्लैंड हैरी ब्रूक को गेंद थमाना चाहता था तो यह बेन स्टोक्स का फैसला था। यह भारत की समस्या नहीं थी। मेरे लिए, यह ठीक था। वे ड्रॉ के लिए खेल रहे थे, अपने शतकों के लिए नहीं। जब वे बल्लेबाजी के लिए आए तब अगर वे आउट हो गए होते तो हम हार सकते थे। जब वे बल्लेबाजी करने आए तब हैरी ब्रूक बोलिंग नहीं कर रहे थे, क्या वह कर रहे थे? इसलिए, पांचवें टेस्ट के लिए इंग्लैंड के गेंदबाज क्यों तरोताजा रहने चाहिए? क्या आपके पास इसका जवाब है? नहीं!’ सचिन तेंदुलकर ने कहा, 'मैं पूरी तरह भारतीय टीम के साथ हूं। चाहे गंबीर हों या शुभमन या जडेजा या वॉशिंगटन, जिसने भी फैसला लिया। मैं शत प्रतिशत उनके साथ हूं। आखिरी टेस्ट में जब रनों को रफ्तार की जरूरत थी, सुंदर ने शानदार ढंग से उसे अंजाम दिया। क्या उन्होंने नहीं किया? जब क्रीज पर डटे रहने की जरूरत थी, उसने चौथे टेस्ट में यह किया। और जब बेरहमी से और तेजी से रन की जरूरत थी, उसने पांचवें टेस्ट में ऐसा ही किया। शानदार।'  

राष्ट्रीय सब जूनियर मुक्केबाजी चैंपियनशिप सात अगस्त से ग्रेटर नोएडा में

नई दिल्ली भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) ने मंगलवार को कहा कि ग्रेटर नोएडा में सात से 13 अगस्त तक होने वाली सब-जूनियर (अंडर-15) राष्ट्रीय चैंपियनशिप में 400 लड़के और 300 लड़कियों सहित 700 से अधिक मुक्केबाज भाग लेंगे। इस प्रतियोगिता का आयोजन 15 भार वर्ग में किया जाएगा। हरियाणा लड़कियों के वर्ग में जबकि चंडीगढ़ लड़कों के वर्ग में गत विजेता है। राष्ट्रीय सब जूनियर चैंपियनशिप से पहले इस साल के शुरू में पुरुष, महिला और जूनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। मुक्केबाज विश्व मुक्केबाजी के तकनीकी नियमों के तहत प्रतिस्पर्धा करेंगे, जिसमें 1.5 मिनट के तीन राउंड होंगे तथा राउंड के बीच में एक मिनट का विश्राम होगा। प्रतियोगिता में 10 अंकों की स्कोरिंग प्रणाली अपनाई जाएगी।  

शतरंज: चेन्नई में शह और मात के खेल में उतरेंगे 19 ग्रैंड मास्टर्स

चेन्नई भारत के प्रमुख क्लासिकल शतरंज टूर्नामेंट क्वांटबॉक्स चेन्नई ग्रैंडमास्टर्स का तीसरा संस्करण बुधवार से शुरू हो रहा है। देश के सबसे मजबूत क्लासिकल इवेंट माने जाने वाले इस टूर्नामेंट में विश्व स्तरीय खिलाड़ी शामिल होंगे। इनमें अर्जुन एरिगेसी, अनीश गिरी, विदित गुजराती, निहाल सरीन, हरिका द्रोणावल्ली और वैशाली रामबाबू जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। इस टूर्नामेंट से फिडे सर्किट पॉइंट मिलेंगे जो 2026 कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में जगह पक्की करने के लिए जरूरी हैं। 15 अगस्त तक चलने वाले टूर्नामेंट में 19 शीर्ष ग्रैंडमास्टर शामिल होंगे जो अब तक की सर्वाधिक एक करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि और महत्वपूर्ण फिडे सर्किट पॉइंट्स के लिए चुनौती पेश करेंगे। मास्टर्स चैंपियन को 25 लाख रुपये जबकि चैलेंजर्स चैंपियन को 7 लाख रुपये और 2026 मास्टर्स में जगह मिलेगी। गुकेश, अरविंद बने थे चैंपियन : 2023 का पहला संस्करण ग्रैंडमास्टर गुकेश डी के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। उन्हें जीत से फिडे सर्किट पॉइंट्स मिले जिससे उन्हें कैंडीडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई करने में मदद मिली और उन्होंने अंततः विश्व चैंपियन बन गए। 2024 में अरविंद चिदंबरम ने रोमांचक टाईब्रेक में का खिताबी जीत हासिल की। जिन खिलाड़ियों के साथ उन्होंने बराबरी की, उनमें से एक, अर्जुन एरिगेसी, इस साल शीर्ष दावेदार के रूप में वापसी कर रहे हैं।  कुल 20 खिलाड़ी : इस संस्करण में 20 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं जो 10-10 खिलाड़ियों वाले दो वर्गों में बांटे गए हैं : मास्टर्स और चैलेंजर्स। मास्टर्स वर्ग में दस में पांच भारतीय ग्रैंडमास्टर्स हैं। चैलेंजर्स में भी आठ भारतीय ग्रैंड मास्टर्स शामिल हैं। पिछले संस्करणों में सात-सात दौर के मुकाबले खेले गए थे क्योंकि उनमें आठ-आठ खिलाड़ी थे। इस बार नौ दौर के मुकाबले खेले जाएंगे। दोनों वर्गों 10-खिलाड़ियों के राउंड-रॉबिन टूर्नामेंट के रूप में खेले जाएंगे जो क्लासिकल समय नियंत्रण के तहत होंगे।  

टीम इंडिया बनी इंग्लैंड की सबसे बड़ी चुनौती, दशक भर से जारी विजय अभियान

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम का इस दशक में इंग्लैंड के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिकेट में एकछत्र राज देखने को मिला है। भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ अंग्रेज इस दशक में यानी 2020 के बाद से एक अदद सीरीज जीतने के लिए तड़प रहे हैं। टीम इंडिया ने हर फॉर्मेट में इंग्लैंड को चारों खाने चित किया हुआ है, जबकि बिग थ्री में शामिल इंग्लैंड की टीम पिछली 10 सीरीजों में एक भी सीरीज जीत नहीं पाई है। इंग्लैंड की टीम ने दो सीरीज ड्रॉ जरूर कराई हैं, लेकिन दोनों सीरीज टेस्ट सीरीज थीं और इंग्लैंड की सरजमीं पर खेली गई थीं। वहीं, टीम इंडिया टेस्ट, वनडे और टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट को मिलाकर कुल 8 सीरीज 10 में से जीत ली हैं, जबकि दो सीरीजों का नतीजा ड्रॉ रहा है। इस तरह इंग्लैंड की टीम इस दशक में भारत के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज जीतने के मामले में खाली हाथ रही है। इंग्लैंड ने आखिरी बार भारत के खिलाफ वनडे सीरीज 2018 में जीती थी, जो इंग्लैड में खेली गई थी। 3 मैचों की सीरीज में भारत को 2-1 से हार मिली थी। भारत के खिलाफ टी20 सीरीज जीते 10 साल भी ज्यादा का समय हो गया है। आखिरी बार भारत के खिलाफ इंग्लैंड ने 2014 में टी20 सीरीज जीती थी, जो सिर्फ एक मैच था। 2018 में आखिरी टेस्ट सीरीज भारत के खिलाफ इंग्लैंड ने जीती थी। पांच मैचों की टेस्ट सीरीज की बात करें तो इंग्लैंड के खिलाफ भारत ने ओवल में 6 रनों से जीत दर्ज करके सीरीज को 2-2 से बराबर किया। इंग्लैंड की टीम 3 मैचों के बाद 2-1 से आगे थी, लेकिन भारत ने चौथे मैच को ड्रॉ कराया और आखिरी मैच में शानदार जीत दर्ज करते हुए सीरीज में बराबरी हासिल की। दोनों देशों के बीच अब अगली सीरीज इन्हीं दिनों अगले साल होगी, जो वनडे और टी20 सीरीज होगी।  

सेंचुरियन हो या मुंबई, जब टेस्ट मुकाबलों ने दिल जीत लिया

नई दिल्ली भारत और इंग्लैंड के बीच एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के लिए खेली गई पांच मैच की सीरीज 2-2 से बराबर रही जिससे कड़े मुकाबले वाली सीरीज की लंबी सूची में एक और चमकदार पन्ना जुड़ गया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ जबकि कोई टेस्ट सीरीज रोमांच के चरम पर समाप्त हुई हो। इससे पहले भी कई बार ऐसा हुआ है। पिछले डेढ़ दशक में हुए कुछ यादगार मुकाबलों का संकलन किया है, जिनमें टेस्ट क्रिकेट के उतार-चढ़ाव देखे गए। इस लिस्ट में भारत की 5 टेस्ट सीरीज शामिल है। आईए एक नजर डालते हैं पूरी लिस्ट पर- भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया, 2020-21 संभवतः यह क्रिकेट के इतिहास की सर्वश्रेष्ठ सीरीज में से एक थी, जिसमें भारत ने अपने कुछ प्रमुख खिलाड़ियों के चोटिल होने और कुछ कड़ी चुनौतियों से पार पाकर ऑस्ट्रेलिया पर 2-1 से जीत दर्ज की। एडिलेड में 36 रन के अपने न्यूनतम स्कोर पर आउट होने से लेकर गाबा में तीन विकेट की जीत तक, कार्यवाहक कप्तान अजिंक्य रहाणे के नेतृत्व में भारत ने ऑस्ट्रेलियाई टीम को उसकी धरती पर ही धूल चटा दी थी। भारत बनाम श्रीलंका, 2015 इस सीरीज से ही नए कप्तान विराट कोहली के नेतृत्व में अगले दशक के लिए टेस्ट क्रिकेट में भारत के दमदार प्रदर्शन की शुरुआत की। गॉल में श्रीलंका ने भारत को 63 रन से हरा दिया। लेकिन भारत ने कोलंबो में अगले दो मैचों (पी सारा ओवल और एसएससी) में कोहली के कभी हार न मानने वाले रवैये को अपनाया तथा 278 और 117 रन से जीत हासिल करके सीरीज 2-1 से अपने नाम कर दी। भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका 2010-11 यह आखिरी टेस्ट सीरीज थी जिसमें सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की मशहूर तिकड़ी ने अपना प्रभाव छोड़ा था। सेंचुरियन में पारी और 25 रन से मिली करारी हार के बाद भारत ने डरबन टेस्ट में जोरदार वापसी करते हुए 85 रन से जीत हासिल की, जहां लक्ष्मण ने डेल स्टेन और मोर्ने मोर्केल की आक्रामक जोड़ी के सामने 96 रन की पारी खेली थी। केपटाउन में अंतिम टेस्ट में भारत को मैच बचाने के लिए पूरे पांचवें दिन बल्लेबाजी करनी थी और वह गौतम गंभीर (184 गेंदों पर 68 रन), द्रविड़ (112 गेंदों पर 31 रन), तेंदुलकर (91 गेंदों पर नाबाद 14 रन) और लक्ष्मण (67 गेंदों पर नाबाद 32 रन) की बदौलत ऐसा करने में सफल रहा। भारत बनाम इंग्लैंड, 2011-12 अहमदाबाद में इंग्लैंड को नौ विकेट से हराने के बाद भारत चार मैचों की सीरीज में अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा था लेकिन केविन पीटरसन के शतक से प्रेरित होकर एलिस्टेयर कुक के नेतृत्व में इंग्लैंड ने मुंबई में भारत को 10 विकेट से हराया और फिर ईडन गार्डन्स में सात विकेट से जीत हासिल की। नागपुर में इंग्लैंड ने चौथा टेस्ट आसानी से ड्रॉ कराकर सीरीज 2-1 से जीत ली। जो रूट ने उस टेस्ट में डेब्यू किया था। ऑस्ट्रेलिया बनाम दक्षिण अफ्रीका, 2016-17 यह दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाजों के बीच की जंग थी। दक्षिण अफ्रीका के पास कगिसो रबाडा और वर्नोन फिलैंडर थे, जबकि ऑस्ट्रेलिया के पास मिशेल स्टार्क और जोश हेजलवुड जैसे गेंदबाज थे। दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजों ने इस मुकाबले में बाजी मारी क्योंकि उन्होंने पर्थ और होबार्ट में अपनी टीम को जीत दिलाई जबकि ऑस्ट्रेलिया ने एडिलेड में डे-नाइट टेस्ट मैच जीता था। यह 2008 के बाद ऑस्ट्रेलिया की घरेलू सीरीज में पहली हार थी। न्यूजीलैंड बनाम पाकिस्तान 2017-18 जैसे ही न्यूज़ीलैंड ने अबू धाबी में कदम रखा, पाकिस्तान की अपने मजबूत स्पिन आक्रमण के कारण 3-0 से जीत की भविष्यवाणी की जाने लगी। लेकिन कीवी टीम ने पहला टेस्ट चार रन के मामूली अंतर से जीत लिया, जबकि पाकिस्तान ने दुबई में पारी और 16 रन से जीत हासिल की। लेकिन अबू धाबी में, कीवी टीम ने ऑफ स्पिनर विलियम सोमरविले के सात विकेटों की बदौलत 123 रन से जीत हासिल की और सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। भारत बनाम इंग्लैंड 2021-22 यह सीरीज कोविड-19 महामारी के कारण खाली स्टेडियमों में खेली गई थी। नॉटिंघम में ड्रॉ के बाद लॉर्ड्स में भारत ने 151 रन से जीत हासिल की लेकिन इंग्लैंड ने लीड्स में पारी और 76 रन से जीत हासिल करके हिसाब बराबर कर दिया था। भारत ने ओवल में चौथा टेस्ट 157 रन से जीता था, लेकिन सितंबर 2021 में मेहमान टीम के सदस्यों के कोविड पॉजिटिव पाए जाने के कारण दौरे को स्थगित कर दिया गया था। उस समय भारत पांच मैचों की सीरीज में 2-1 से आगे चल रहा था, लेकिन इंग्लैंड ने जुलाई 2022 में बर्मिंघम में खेले गए पांचवें टेस्ट में 378 रन से जीत हासिल करके सीरीज को बराबर कर दिया था।  

भारत-पाकिस्तान मैच से पहले बड़ा बयान: पूर्व पाक कप्तान ने अपनी टीम पर ही उठा दिए सवाल

नई दिल्ली पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेट कप्तान राशिद लतीफ ने 14 सितंबर को होने वाले एशिया कप मुकाबले में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की संभावनाओं को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने हालिया खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि टीम के प्रदर्शन और रणनीति में सुधार की जरूरत है। IANS से बात करते हुए लतीफ ने बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के खिलाफ पाकिस्तान की हालिया हार का जिक्र किया और एक मजबूत भारतीय टीम का सामना करने की चुनौतियों पर जोर दिया। पाकिस्तान क्रिकेट टीम अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, जहां उसे उन टीमों के खिलाफ अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ रहा है जिन्हें उससे हराने की उम्मीद थी। इन असफलताओं ने 9 सितंबर से शुरू होने वाले प्रतिष्ठित एशिया कप टूर्नामेंट की उनकी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राशिद लतीफ ने कहा कि, "पाकिस्तान के लिए 14 सितंबर को एक मजबूत भारतीय टीम के खिलाफ खेलना बहुत मुश्किल होगा। एशिया कप हो जाए बस।"दरअसल, पहलगाम में हुए आतंकी हमले के चलते भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है। देश में फैले आक्रोश को देखते हुए भारत किसी भी स्तर पर पाकिस्तान से क्रिकेट नहीं खेलना चाहता। हाल ही में वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स में भी भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले का बहिष्कार किया। पूर्व कप्तान ने पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति का विस्तृत आकलन किया। उन्होंने कहा, "हमारी क्रिकेट हवा में चल रही है… हम बांग्लादेश और वेस्टइंडीज से हार गए, ऐसे मैच जो हमें कभी नहीं हारने चाहिए थे। हमारा कप्तान अच्छा हो सकता है, लेकिन तीनों फॉर्मेट में तालमेल बिठाना आसान नहीं है। हमारे पास प्रतिभा है, लेकिन हम अभी तक सही फैसले नहीं ले पा रहे हैं।" पाकिस्तान के हालिया प्रदर्शन में बांग्लादेश और दूसरी श्रेणी की वेस्टइंडीज़ टीम से हार शामिल है, जिसके नतीजों ने उनकी तैयारी के तरीकों और टीम रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

अगर बुमराह होते तो जीत बन जाती यादगार, सिराज ने जताई भावनाएं

नई दिल्ली यह जगजाहिर है कि मोहम्मद सिराज के लिए जसप्रीत बुमराह प्रेरणा स्रोत रहे हैं। हैदराबाद के इस गेंदबाज ने स्वीकार किया कि इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें टेस्ट मैच में भारत की जीत के बाद उन्हें अपने गौरवशाली क्षणों में अपने सीनियर साथी तेज गेंदबाज की कमी खल रही थी। सिराज ने ओवल में पांचवें टेस्ट की दूसरी पारी में पांच विकेट लिए, जिससे भारत ने सोमवार को रोमांचक मुकाबले में इंग्लैंड को छह रन से हराकर श्रृंखला 2-2 से बराबर कर ली। सिराज ने मैच में नौ विकेट लेकर न केवल 'मैन ऑफ द मैच' का पुरस्कार जीता, बल्कि अपने प्रशंसकों से भी खूब प्रशंसा बटोरी। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में भावुक सिराज ने कहा, ‘‘हर बल्लेबाज, हर गेंदबाज (जिसने टेस्ट खेला), उसे मैं सलाम करता हूं। जिस तरह से हमने वापसी की वह शानदार थी। मुझे जस्सी (बुमराह) भाई की याद आती है क्योंकि अगर वह वहां होते तो यह खास होता। मुझे जस्सी भाई और खुद पर विश्वास है।’’ बुमराह वर्कलोड मैनेजमेंट के कारण पांचवें और अंतिम टेस्ट मैच में नहीं खेल पाए थे। उन्हें चौथे टेस्ट मैच के बाद टीम से रिलीज कर दिया गया था। रविवार को हैरी ब्रुक का कैच छोड़ने के बाद सिराज आखिरी दिन पूरी तरह से प्रतिबद्ध नज़र आए। सोमवार को सुबह के सत्र में उन्होंने जो भी गेंद फेंकी, उसने इंग्लैंड के बल्लेबाजों को परेशान किया। उन्होंने कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो, इस समय (जीत के बाद) जो भावनाएं मेरे अंदर हैं, मैं उन्हें शब्दों में बयां नहीं कर सकता, क्योंकि कल (रविवार को) मैंने कैच छोड़ दिया था। जब मैं (चौथे दिन के बाद) सोने जा रहा था, तो मैं बस यही सोच रहा था कि मैंने ऐसा कैसे कर दिया।’’ सिराज ने कहा, ‘‘अगर मैंने वह कैच ले लिया होता, तो हमें सोमवार को मैदान पर आकर खेलने की ज़रूरत नहीं पड़ती। हम आराम कर रहे होते। लेकिन ऊपर वाले ने हमारे लिए कुछ और ही सोच रखा था। वह हमें सोमवार को स्टेडियम तक ले आए और नतीजा सबके सामने है।’  

ओवल टेस्ट बना ऐतिहासिक, आंकड़ों ने बयां की भारतीय टीम की मजबूती

नई दिल्ली  लंदन के ओवल मैदान पर खेले गए पांचवें टेस्ट में टीम इंडिया ने ना सिर्फ इंग्लैंड को शिकस्त दी, बल्कि कई ऐतिहासिक कीर्तिमान भी अपने नाम किए. टेस्ट क्रिकेट का यह मुकाबला क्रिकेट प्रेमियों के लिए रोमांच और रिकॉर्ड्स का बेहतरीन संगम रहा.  ये पहली बार है जब भारत ने विदेशी जमीन पर किसी टेस्ट सीरीज का पांचवां मैच जीता है. इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ 2018 के बाद कोई टेस्ट सीरीज नहीं जीती है, उसके बाद 2 भारत ने जीतीं, 2 ड्रॉ रहीं हैं.  इस टेस्ट के साथ ही भारत और इंग्लैंड की टेस्ट सीरीज में कुल 7187 रन बने. जो किसी भी द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज में दूसरा सबसे बड़ा रन योग है. इसके अलावा सीरीज में कुल 14 बार टीमें 300 या उससे अधिक का स्कोर बना पाईं , अब तक का संयुक्त रूप से सर्वाधिक आंकड़ा है.  टीम इंडिया की ओर से 9 बल्लेबाजों ने इस सीरीज में 400 या उससे ज्यादा रन बनाए, जबकि कुल 50 अर्धशतक और 21 शतक लगे. ये भी शेयर रिकॉर्ड हैं. 19 बार शतकीय साझेदारियां भी देखने को मिलीं, जो टेस्ट इतिहास में बराबरी का सर्वश्रेष्ठ आंकड़ा है.  गेंदबाजी में भी भारत ने कमाल किया. मोहम्मद सिराज ने जसप्रीत बुमराह के इंग्लैंड में किसी सीरीज में भारत की ओर से सबसे ज्यादा विकेट (23) लेने का रिकॉर्ड दोहराया. मोहम्मद सिराज ने भी ओवल टेस्ट में 9 विकेट झटके थे. इन आंकड़ों ने ना सिर्फ सीरीज को ऐतिहासिक बना दिया, बल्कि भारतीय क्रिकेट को एक नया कॉन्फ‍िडेंस दिया.  एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी 2025 में रन और बैटिंग से जुड़े कुछ रिकॉर्ड्स  – इस सीरीज में कुल मिलाकर दूसरी सबसे ज्यादा रन की भरमार हुई (7187 रन). – सीरीज में सबसे ज्यादा 300+ स्कोर बनाए गए, 14 बार (रिकॉर्ड की बराबरी).  -9 बल्लेबाजों ने 400 से ज्यादा रन बनाए. ये भी एक रिकॉर्ड है.  – सीरीज में 50 बार कोई बल्लेबाज 50+ स्कोर पर पहुंचा, यहां भी रिकॉर्ड की बराबरी हुई. -21 शतक लगे, ये भी रिकॉर्ड की बराबरी है.  – 19 बार सौ से ज्यादा रन की पार्टनरशिप हुई, रिकॉर्ड की बराबरी इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले भारतीय 23 – जसप्रीत बुमराह (2021-22) 23 – मोहम्मद सिराज (2025)* 19 – भुवनेश्वर कुमार (2014) कम रन से हारने के मामले में इंग्लैंड का रिकॉर्ड 1 रन से हारे vs न्यूजीलैंड, 2023 3 रन से हारे vs ऑस्ट्रेलिया, 1902 6 रन से हारे vs ऑस्ट्रेलिया, 1885 6 रन से हारे vs भारत, 2025 (द ओवल) भारत के लिए सबसे कम रनों से टेस्ट जीत: 6 रन से जीत vs इंग्लैंड, 2025 (द ओवल): सबसे छोटी जीत 13 रन से जीत vs ऑस्ट्रेलिया, 2004 (वानखेड़े स्टेडियम) 28 रन से जीत vs इंग्लैंड, 1972 (कोलकाता) 31 रन से जीत vs ऑस्ट्रेलिया, 2018 (एड‍िलेड)  

जडेजा ने बताया वो खिलाड़ी जो गिल से भी ज्यादा रहा कंसिस्टेंट इस सीरीज में

नई दिल्ली टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी अजय जडेजा ने बताया है कि इंडिया और इंग्लैंड के बीच खेली गई पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में भारत के लिए शुभमन गिल से भी ज्यादा कौन सा प्लेयर कंसिस्टेंट था। शुभमन गिल ने सीरीज में 700 से ज्यादा रन बनाए और वे भारत के लिए प्लेयर ऑफ द सीरीज चुने गए, लेकिन अजय जडेजा का मानना है कि ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा इस सीरीज में टीम इंडिया के लिए निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी थे। जडेजा ने पहली बार किसी टेस्ट सीरीज में 500 से ज्यादा रन बनाए। भारतीय टीम ने ओवल में खेले गए आखिरी टेस्ट मैच को 6 रन से जीता और सीरीज 2-2 से बराबर कराई। इस सीरीज में 10 पारियों में 86 के औसत से रविंद्र जडेजा ने 516 रन बनाए। सोनी स्पोर्ट्स पर अजय जडेजा से रविंद्र जडेजा की परफॉर्मेंस के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "क्या कुछ कहने की जरूरत है? इस खिलाड़ी ने आपको दिखा दिया है कि वो क्या कर सकता है। मुझे लगता है कि उसने कमाल कर दिया है। शुभमन गिल ने 754 रन बनाए हैं और आप कह रहे हैं कि वो सर्वश्रेष्ठ के करीब पहुंच गया है, लेकिन उसने भी (रविंद्र जडेजा) लगभग 550 रन बनाए हैं।" जडेजा ने आगे कहा, "उन्होंने शुभमन गिल से भी ज्यादा लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। उनकी चार पारियां ऐसी रहीं जो खत्म ही नहीं हुईं, क्योंकि दूसरे छोर से बल्लेबाजी खत्म हो गई थी। पूरी सीरीज में सिर्फ दो पारियां ऐसी रहीं, जहां वह जल्दी आउट हो गए।" अजय जडेजा ने बताया कि लॉर्ड्स और ओल्ड ट्रैफर्ड में रविंद्र जडेजा की जुझारू पारी सीरीज में ऑलराउंडर की ओर से बेस्ट बैटिंग के क्षण थे। तीसरे और चौथे टेस्ट को लेकर अजय जडेजा ने कहा, "अगर हम उनके पलों को याद करने की कोशिश करें, तो इसकी शुरुआत लॉर्ड्स से हुई, जहां आप जीत तो नहीं सकते थे, लेकिन उन्होंने और (मोहम्मद) सिराज ने वहां डटकर मुकाबला किया। वहां से एक बदलाव देखा गया। उनकी दृढ़ता वहीं से शुरू हुई। फिर अगले मैच में भी वे डटे रहे और मैच ड्रॉ करा दिया। फिर इस मैच (आखिरी टेस्ट) में भी उन्होंने रन बनाए।" लॉर्ड्स में 181 गेंदों में 61 रन जडेजा ने बनाए, लेकिन वे 22 रनों की हार को नहीं टाल पाए, क्योंकि दूसरे छोर पर कोई टिक नहीं पाया।  

टीम इंडिया का ओवल पर धमाका! गिल की अगुवाई में अंग्रेजों के जबड़े से निकाली जीत

 ओवल  वाह टेस्ट क्रिकेट, वाह टीम इंड‍िया… क्या जबरदस्त मैच रहा. क्या शानदार तरह से जीता. भारतीय टीम के ल‍िए मैच में जीत के हीरो मोहम्मद सिराज और प्रस‍िद्ध कृष्णा रहे, ज‍िन्होंने क्रमश: 5 और 4 विकेट झटककर भारतीय टीम की झोली में जीत डाल दी. भारत की यह 6 रनों की जीत टेस्ट क्रिकेट में रनों के अंतर के ल‍िहाज से सबसे कम अंतर की जीत रही.  ओवल मैच की पहली पारी में पिच पर घास ज्यादा थी, जिससे गेंदबाजों को काफी मदद मिली. भारत की ओर से करुण नायर ने संघर्ष करते हुए अर्धशतक लगाया, साथ में साई सुदर्शन और वॉशिंगटन सुंदर ने भी थोड़ा योगदान दिया जिससे भारत ने किसी तरह 200 का आंकड़ा पार किया. इस तरह टीम इंड‍िया 224 रन पर ऑलआउट हो गई. इंग्लैंड के लिए गस एटकिंसन ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 5 विकेट लिए.  जवाब में इंग्लैंड ने तेज शुरुआत की और सिर्फ 13 ओवर में 92 रन बना लिए. लेकिन फिर मोहम्मद सिराज ने दूसरी सेशन में कमाल की गेंदबाजी की और इंग्लैंड की मिडिल ऑर्डर लड़खड़ा गई. इंग्लैंड की टीम 247 रन पर सिमट गई. दूसरी पारी में पिच थोड़ी आसान हो गई और यशस्वी जायसवाल ने इस दौरे का अपना दूसरा शतक लगाया, जबकि वॉशिंगटन सुंदर ने भी तेज अर्धशतक मारा. भारत ने इस तरह इंग्लैंड को जीत के लिए 374 रन का बड़ा लक्ष्य दिया.  लेकिन इंग्लैंड ने इस लक्ष्य को आसानी से हासिल करने की कोशिश की. शुरुआत बेन डकेट ने की, फिर जो रूट ने पारी को संभाला और आखिर में हैरी ब्रूक ने धमाकेदार 111 रन (सिर्फ 98 गेंदों में) बनाए और लग रहा था कि इंग्लैंड आसानी से जीत जाएगा.  ओवल टेस्ट आख‍िरी दिन कैसे पलटा?  आखिरी दिन (4 अगस्त) को मैच रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया. भारत को जीत के ल‍िए 4 व‍िकेट चाहिए थे और इंग्लैंड को 35 रन. पांचवें द‍िन मैच की शुरुआत में इंग्लैंड ने दो चौके मारे और लगा कि वे जीत जाएंगे, लेकिन वह आत्मविश्वास झूठा निकला. सिराज ने पहले जैमी स्मिथ को आउट किया, फिर जैमी ओवरटन को LBW किया.  इसके बाद प्रसिद्ध कृष्णा ने जोश टंग को बोल्ड किया. जब इंग्लैंड को सिर्फ कुछ रन चाहिए थे, तब एटकिंसन ने एक बड़ा शॉट मारा लेकिन फील्डर आकाश दीप कैच पकड़ने में चूक गए और गेंद छक्के के लिए चली गई. अब इंग्लैंड को सिर्फ 6 रन चाहिए थे, तभी सिराज ने एक शानदार यॉर्कर फेंका और एटकिंसन का स्टंप उड़ा दिया. इंग्लैंड की टीम 6 रन से हार गई.  कुल मिलाकर, 25 दिन तक चली यह टेस्ट सीरीज का आखिरी मैच बेहद रोमांचक और यादगार रहा. भारत ने लगभग हार चुके मैच को जीत में बदल दिया. यही टेस्ट क्रिकेट की खूबसूरती है.  क्रिस वॉक्स ने टूटे कंधे के बावजूद बैटिंग की भारत और इंग्लैंड के बीच ओवल टेस्ट मैच के आखिरी दिन बेहद रोमांचक हो चुके मैच में क्रिस वॉक्स ने टूटे कंधे के बावजूद बैटिंग के लिए मैदान पर कदम रखा. अपनी टीम की डूबती लुटिया को बचाने के लिए  जो उनकी हिम्मत और जुझारूपन की इस वक्‍त हर कोई तारीफ कर रहा है. वो मैदान पर एक हाथ से बैटिंग करते नजर आए. क्रिकेट में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां खिलाड़ियों ने चोट के बावजूद खेल को प्राथमिकता दी. साउथ अफ्रीका के ग्रीम स्मिथ ने साल 2008-09 ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ में चोटिल कंधे के साथ एक हाथ से बैटिंग की थी. सिडनी टेस्ट में उनके कंधे में गंभीर चोट लगी, फिर भी उन्होंने नाबाद 36 रन बनाए. यह प्रदर्शन उनकी दृढ़ता का प्रतीक था. स्मिथ ने टीम की जरूरत को समझते हुए दर्द को नजरअंदाज किया, जिससे दक्षिण अफ्रीका ने मैच बचा लिया. यह पल क्रिकेट इतिहास में उनकी वीरता के लिए याद किया जाता है. वेस्‍टइंडीज के माल्कम मार्शल ने इंग्लैंड के खिलाफ, लीड्स 1984 टेस्‍ट मैंच में भी ऐसा ही किया था. उन्‍होंने एक हाथ से बैटिंग का अनोखा रिकॉर्ड बनाया था. उनके बाएं हाथ में प्लास्टर था, फिर भी उन्होंने नौवें विकेट के लिए लैरी गोम्स का साथ दिया. मार्शल ने एक हाथ से चार रन बनाए और गोम्स को शतक पूरा करने में मदद की. यह बलिदान वेस्टइंडीज की जीत में महत्वपूर्ण था और उनकी बहादुरी को अमर कर गया. वेस्‍टइंडीज के ब्रायन लारा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ साल 2005 में सेंट जॉन्स टेस्ट में चोटिल हाथ के साथ एक हाथ से बैटिंग की. उनकी उंगली में फ्रैक्चर था, लेकिन उन्होंने टीम को संकट से निकालने के लिए बल्ला थामा. लारा ने 20 रन बनाए, जो उनकी तकनीक और हिम्मत को दिखाता है. यह प्रदर्शन वेस्टइंडीज के लिए प्रेरणादायक था, भले ही मैच हारा गया. सचिन तेंदुलकर साल 2004 में पाकिस्तान में मुल्तान टेस्ट के दौरान टेनिस एल्बो की चोट के बावजूद एक हाथ से खेले थे. उनकी बांह में दर्द था, लेकिन उन्होंने 194 रन की ऐतिहासिक पारी खेली. हालांकि यह पूरी तरह एक हाथ से नहीं थी, लेकिन चोट के बावजूद उनका प्रदर्शन असाधारण था, जो क्रिकेट प्रेमियों के लिए यादगार है. इंजमाम-उल-हक (पाकिस्तान) – ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ, 1999: चैंपियंस ट्रॉफी में इंजमाम-उल-हक ने टूटी हुई कोहनी के साथ एक हाथ से बैटिंग की थी. उन्होंने 21 रन बनाए और टीम को संभाला. यह प्रदर्शन उनकी नेतृत्व क्षमता और जुझारूपन को दर्शाता है, जो पाकिस्तानी क्रिकेट में मील का पत्थर रहा. क्रिस वोक्स का हालिया कारनामा इन महान खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो सकता है. एक हाथ से बैटिंग न केवल शारीरिक साहस की मांग करती है, बल्कि टीम भावना का भी प्रतीक है. यह परंपरा क्रिकेट के इतिहास में हमेशा सम्मान के साथ याद की जाएगी.