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सोने की आड़ में करोड़ों की ठगी! रान्या राव की हैरान कर देने वाली कहानी

नई दिल्ली बेंगलुरु एयरपोर्ट पर राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) द्वारा गिरफ्तार की गई कन्नड़ अभिनेत्री रान्या राव को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच अधिकारियों के अनुसार, बड़े पैमाने पर सोने की तस्करी के इस काले कारोबार में उतरने से पहले रान्या और उनके साथियों को एक युगांडा के एजेंट ने 2 करोड़ रुपये का चूना लगाया था। इसी ठगी के बाद अभिनेत्री ने घाटे की भरपाई के लिए तस्करी का रास्ता चुना। पिछले महीने दाखिल की गई चार्जशीट में DRI ने बताया कि मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच रान्या राव और उनके सहयोगियों ने भारत में 127.28 किलोग्राम सोना तस्करी के जरिए पहुंचाया, जिसकी कीमत लगभग 102.55 करोड़ रुपये है। रान्या को मार्च 2025 में दुबई से लौटते समय 14 किलो सोने के साथ गिरफ्तार किया गया था, जिसे उन्होंने अपने शरीर में छिपाकर रखा था। युगांडा और केन्या के एजेंटों ने की ठगी अधिकारियों के मुताबिक, रान्या और उनके सहयोगी तरुण कोंडुरु राजू ने शुरुआत में अफ्रीका (युगांडा, केन्या और तंजानिया) से सीधे सोना खरीदने की कोशिश की थी। उन्होंने इसके लिए दुबई में 'वीरा डायमंड्स ट्रेडिंग LLC' नाम की एक कंपनी भी खोली। पहला धोखा: युगांडा के एक एजेंट बेन के साथ 5 किलो सोने का सौदा हुआ। राजू ने युगांडा के कंपाला जाकर एजेंट से मुलाकात की। वहां सोने की खेप छुड़ाने के नाम पर उनसे 1.7 करोड़ रुपये और ऐंठ लिए गए। कुल मिलाकर उन्हें 2 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हुआ। दूसरा प्रयास: युगांडा में ठगे जाने के बाद उन्होंने केन्या में कोशिश की, लेकिन वहां भी उनके साथ इसी तरह की धोखाधड़ी हुई। केन्याई अधिकारियों से मदद न मिलने पर उन्होंने अफ्रीका से सीधा व्यापार बंद कर दिया। अफ्रीका में बार-बार ठगे जाने के बाद, इस गुट ने दुबई के स्थानीय बाजार देइरा गोल्ड सूक से सोना खरीदना शुरू किया। यहां वे अफ्रीकी डीलरों से नकद में सोना खरीदते थे और फिर उसे अवैध तरीके से भारत भेजते थे। जांच में पाया गया कि यह एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें विदेश से सोना खरीदना, भारत में अवैध आयात करना और फिर हवाला के जरिए पैसों की हेराफेरी करना शामिल था। ईडी की रडार पर व्हाट्सएप चैट प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इनके व्हाट्सऐप चैट बरामद किए हैं, जो पैसों के लेनदेन के सबूत के रूप में देखे जा रहे हैं। हालांकि, एक अधिकारी ने बताया कि अफ्रीका में हुई ठगी को पूरी तरह साबित करने के लिए अभी पर्याप्त भौतिक साक्ष्य नहीं मिले हैं। जांच के दौरान अब तक 34 करोड़ की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है।  

राजनीति में बड़ा फेरबदल: केसी त्यागी ने थामा RLD का दामन, जयंत चौधरी के साथ नई पारी

लखनऊ/नई दिल्‍ली. पूर्व जदयू नेता केसी त्‍यागी ने अब राष्‍ट्रीय लोकदल का दामन थाम लिया है। नई दिल्‍ली में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में उन्‍होंने पार्टी की सदस्‍यता ग्रहण की। इस मौके पर रालोद अध्‍यक्ष जयंत चौधरी भी मौजूद रहे। इस मौके पर केसी त्‍यागी ने कहा कि चौधरी चरण सिंह ने बहुत कम उम्र में उनको हापुड़ से लड़ने के लिए टिकट दिया था। केसी त्‍यागी ने कहा कि अब वह सांसद और विधायक बनने के लिए नहीं बल्कि जयंत चौधरी को चौधरी चरण सिंह की तरह देखने के लिए रालोद आए हैं। 52 साल पहले जब चौधरी चरण सिंह राष्‍ट्रीय लोकदल का निर्माण कर रहे थे तब वह उस मंच पर मौजूद थे। आपको बता दें कि पिछले दिनों केसी त्‍यागी ने जदयू छोड़ दिया था। रालोद से शुरू किया था राजनीतिक जीवन – मैंने अपना राजनीतिक जीवन ही रालोद से शुरू किया था। यह उसी का स्‍वरूप है। कुछ नया नहीं है। चौधरी चरण सिंह के बचे हुए सपने को पूरा करने में हम मदद करेंगे। जदयू और रालोद में कोई फर्क नहीं है। एक दिन ऐसा भी था जब नीतीश कुमार और चौधरी अजित सिंह मिलकर नई पार्टी बनाने वाले थे। केसी त्‍यागी जयंत ने किया था त्‍यागी की पुस्‍तक का विमोचन गौरतलब है कि पिछले हफ्ते केसी त्‍यागी की एक पुस्‍तक का विमोचन समारोह हुआ था। उसमें जयंत चौधरी को मुख्‍य अतिथि बनाया गया था। उसी समय से अटकलें लग रही थीं कि केसी त्‍यागी जल्‍द राष्‍ट्रीय लोकदल में शामिल हो सकते हैं। जदयू में निभाई बड़े पदों की जिम्‍मेदारियां आपको बता दें कि केसी त्‍यागी 2003 से जदयू से जुड़े हुए थे। उस समय समता पार्टी और जनता दल के मिलकर जदयू बनने के बाद वह पार्टी में लगातार सक्रिय रहे। उन्‍होंने मुख्‍य महासचिव, राजीतिक सलाहकार औश्र प्रवक्‍ता जैसे पदों की जिम्‍मेदारी निभाई। त्‍यागी का कहना था कि नीतीश कुमार के साथ उनका 5 साल पुराना नाता है। उन्‍होंने इस्‍तीफा नहीं दिया है। बस अपनी सदस्‍यता का रिन्‍यूअल नहीं कराया है। नीतीश संग रिश्‍ते में दरार आने के चर्चा केसी त्‍यागी ने कहा था कि लगभग आधी सदी तक उनके साथी रहे नीतीश कुमार के प्रति उनका व्‍यक्तिगत सम्‍मान अब भी पहले जैसा है। केसी त्‍यागी को नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में शामिल माना था जाता था। हालांकि चर्चा है कि पिछले कुछ महीने से दोनों के रिश्‍तों में दरार आई है। वैभव पांडे

संवाद से सुलझेगा संकट? मणिपुर में सरकार और कुकी समुदाय आमने-सामने

इम्फाल. मई 2023 में भड़की हिंसा के बाद यह पहला मौका है जब मणिपुर सरकार के मुखिया और कुकी-जो समुदाय के शीर्ष नेतृत्व के बीच आमने-सामने बैठकर बातचीत हुई है। लगभग पौने दो घंटे तक चली इस बातचीत ने अशांति की जमी हुई बर्फ को पिघलाने का काम किया है।   शांति की ओर पहला कदम रविवार को कुकी समुदाय की ओर से जारी बयान में इस बात की पुष्टि हुई है। काउंसिल ने इसे औपचारिक संवाद की शुरुआत बताया है। हालांकि, बैठक में किसी ठोस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए। फिर भी मणिपुर की राजनीति को करीब से समझने वाले लोगों का मानना है कि दोनों पक्षों का एक मेज पर बैठना ही अपने आप में एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। कुकी समुदाय की शर्तें बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के साथ बैठक के दौरान कुकी-जो प्रतिनिधिमंडल ने बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने कुछ प्रमुख मांगें रखीं। कुकी समुदाय के नेताओं ने मुख्यमंत्री से कहा कि संघर्ष के दौरान जान-माल गंवाने वाले पीड़ितों को न्याय मिलना किसी भी शांति प्रक्रिया की पहली अनिवार्य शर्त है। इसके अलावा कुकी नेताओं ने कहा कि हाल के दिनों में  कुकी और तांगखुल समुदायों के बीच बढ़े तनाव को तत्काल कम करने की आवश्यकता है। जब तक कोई अंतिम राजनीतिक समाधान नहीं निकल जाता, तब तक दोनों समुदायों के बीच बने 'बफर ज़ोन' की यथास्थिति बरकरार रखी जाए। उग्रवादी समूहों के साथ जारी सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस वार्ता को जल्द तार्किक अंजाम तक पहुंचाया जाए ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने क्या कहा? सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने प्रतिनिधि मंडल की बातों को बेहद धैर्यपूर्वक सुना। उन्होंने अपनी सरकार की ओर से शांति बहाली के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। सीएम ने इस बात की सराहना की कि चुनौतीपूर्ण समय के बावजूद कुकी-जो काउंसिल संवाद के लिए आगे आई। बताते चलें कि मई 2023 से अब तक मणिपुर में 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं, हजारों की संख्या में लोग आज भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। उम्मीद है कि गुवाहाटी में हुई इस बैठक का नतीजा सिर्फ शांति ही हो।

जहरीले दूध से बढ़ता मौत का आंकड़ा: आंध्र में 16 की जान गई, 3 अब भी गंभीर

राजा महेंद्रवरम. राजामहेंद्रवरम में मिलावटी दूध पीने के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है. कई पीड़ितों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है. इस घटना से पूरे आंध्र प्रदेश में चिंता फैल गई है. यह मामला पिछले महीने की 16 तारीख को सामने आया था. इस घटना के बाद अब भी शहर के लोग गहरे सदमे में हैं. अधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार को दो और लोगों की मौत हो गई. डॉक्टर अभी भी उन लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं जिन्होंने वह जहरीला दूध पिया था. वर्तमान में, एक पांच महीने के शिशु और दो साल के बच्चे सहित पांच मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है. बताया जा रहा है कि सभी मरीज वेंटिलेटर पर हैं. उनका डायलिसिस किया जा रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि जहरीले रसायन ने शरीर के जरूरी अंगों को पहले ही काफी नुकसान पहुंचा दिया था, जिससे इलाज करना बेहद मुश्किल हो गया. मरने वालों में दो बच्चे, मनोहर (6 साल) और जयकृत राज (3 साल) भी शामिल हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि दूध में 'इथाइलीन ग्लाइकॉल' नाम का एक बेहद जहरीला रसायन मिला था. आरोप है कि यह दूध कोरुकोंडा मंडल के नरसापुरम के रहने वाले गणेश्वर राव नाम के विक्रेता ने सप्लाई किया था. इस घटना का पता तब चला जब एक ही परिवार के चार सदस्यों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने इसकी जांच शुरू की. मेडिकल जांच में मरीजों के सीरम क्रिएटिनिन का स्तर 8 से 11 के बीच पाया गया, जो किडनी के गंभीर नुकसान को दर्शाता है. मरीजों का इलाज मशहूर किडनी विशेषज्ञ डॉ. रविराज की देखरेख में किया गया, वहीं हैदराबाद के विशेषज्ञों ने भी अस्पताल आकर स्थिति का जायजा लिया और जरूरी सलाह दी. अधिकारियों ने बताया कि आसपास के इलाकों के लगभग 65 दूध विक्रेता राजमहेंद्रवरम शहर में दूध की सप्लाई करते हैं, और इस मिलावट कांड ने पूरे कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है. अधिकारी अब ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत निगरानी प्रणाली और सख्त खाद्य सुरक्षा जांच की जरूरत पर जोर दे रहे हैं. विशेषज्ञों ने भी जनता के बीच जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है ताकि उपभोक्ताओं को मिलावटी दूध की पहचान करने और संदिग्ध उत्पादों की सूचना देने के लिए शिक्षित किया जा सके. उनका कहना है कि भविष्य में इस तरह की त्रासदियों से बचने के लिए दूध की सप्लाई चेन का नियमित निरीक्षण और खाद्य सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है. इस घटना ने स्थानीय निवासियों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, जो इतने मासूम लोगों की जान लेने वाली इस मिलावट के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

मौत के एक महीने बाद आया मैसेज! जबलपुर में डॉक्टर के फोन से ‘श्राप’ की चेतावनी

जबलपुर. राइट टाउन निवासी डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की करोड़ों की संपत्ति हड़पने के प्रयासों के विवाद के बीच नया घटनाक्रम सामने आया है। डॉ. हेमलता की मृत्यु के बाद उनके मोबाइल फोन से शुक्रवार को सुबह 10:30 बजे आईएमए की स्थानीय शाखा की अध्यक्ष को अनर्गल संदेश भेजा गया है। मामले में अध्यक्ष डॉ. ऋचा शर्मा ने साइबर पुलिस में शिकायत की गई है। संदेश को गंभीर बताते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। साइबर पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। मालूम हो कि स्व: डॉ. हेमलता के अस्वस्थ्य रहने के दौरान जब उनकी संपत्ति को हड़पने के प्रयास हुए थे, तो आईएमए ने हस्तक्षेप किया था। जिसके बाद उनकी संपत्ति के संदिग्ध दान पत्र सहित अन्य प्रक्रिया की प्रशासनिक स्तर पर जांच हुई थी। मामला पुलिस तक पहुंचा था। इसलिए आईएमए अध्यक्ष के फोन पर पहुंचे संदेश को गंभीर माना जा रहा है। मैसेज में आखिर क्या स्व. डॉ. हेमलता श्रीवास्तव के मोबाइल से जो संदेश भेजा गया है वह अंग्रेजी में है- जिसमें कहा है कि 'क्षमा करें, मोबाइल कानूनी तौर पर मेरे पास है। डॉ. हेमलता के परिवार की ओर से उन सभी को श्राप है, जिनका हश्र उनके जैसा हुआ। अपहरण, भूख से तड़पना, फिर पीएम और अंत में मुर्दाघर, मानवता को धिक्कार है।' आईएमए अध्यक्ष ने प्रशासन और पुलिस को दिया था संदेश आईएमए अध्यक्ष की ओर से प्रशासन और पुलिस को जानकारी दी गई थी कि डॉ. हेमलता श्रीवास्तव लंबे समय से अस्वस्थ हैं। उनके पति एवं पुत्र का देहांत हो चुका है। वह शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं। इस मौके का फायदा उठाते हुए कुछ लोग राइट टाउन की उनकी करोड़ों रुपये की संपत्ति को हड़पना चाहते हैं। शिकायत पर प्रशासन ने जांच की तो पता चला कि डॉ. श्रीवास्तव की संपत्ति में से 5512.5 वर्गफीट जमीन डॉ. सुमित जैन और 5512.5 वर्गफीट जमीन उनकी पत्नी डॉ. प्राची जैन ने धोखे से दानपत्र के जरिए हड़प ली है। हड़पी गई जमीन पर डॉक्टर दंपती ने चारदीवारी भी खड़ी कर दी थी। बाद में प्रशासनिक जांच के बाद डॉक्टर दंपती के पक्ष में जारी दानपत्र निरस्त कर दिया गया। डॉ. दंपती के विरुद्ध मदन महल थाना में एफआईआर दर्ज की गई। संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है। कौन चला रहा डॉक्टर का मोबाइल संपत्ति विवाद के बीच डॉ. हेमलता की 15 फवरी को मेडिकल अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। उनका अंतिम संस्कार भी प्रशासन की निगरानी में हुआ था। उनसे संबंधित सामग्रियों को जब्त कर लिया गया था। उनकी राइट टाउन स्थित विवादित संपत्ति को नगर निगम ने अपने कब्जे में लिया है। आईएमए अध्यक्ष को पहुंचे संदेश के बाद सवाल उठ रहे हैं कि उनका मोबाइल फोन किसके पास है। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि उनका मोबाइल अभी कौन चला रहा है। अनर्गल संदेश भेजने की उसकी मंशा के बारे में जानने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मोदी के नाम नई उपलब्धि: लंबे कार्यकाल के साथ बनाया खास रिकॉर्ड

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के राजनीतिक इतिहास में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। वे भारत में सरकार के प्रमुख (मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री मिलाकर) के रूप में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले राजनेता बन गए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए प्रधानमंत्री को बधाई दी। आज प्रधानमंत्री मोदी ने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। सरकार के प्रमुख के रूप में सार्वजनिक कार्यालय में 8,931 दिन पूरे कर पीएम मोदी ने यह नया मील का पत्थर स्थापित किया है। राजनाथ सिंह ने इसे देश के प्रति उनके अटूट समर्पण और 'राष्ट्र प्रथम' की नीति का परिणाम बताया। रक्षा मंत्री ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री के अब तक के सफर को रेखांकित करते हुए कहा कि पीएम मोदी का जीवन देश और उसके लोगों के प्रति पूर्ण भक्ति का उदाहरण है। उनके कार्यकाल की शुरुआत गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में हुई, जहां उन्होंने विकास के नए मानक स्थापित किए। मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक का उनका सफर निरंतर सेवा और जनकल्याण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन में ईमानदारी और प्रत्येक नागरिक के प्रति उनके अथक परिश्रम का प्रतिबिंब है। उन्होंने लिखा, "हृदय की गहराइयों से मोदी जी को इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर बधाई। उनका नेतृत्व सत्यनिष्ठा और सेवा की भावना से ओत-प्रोत है।"

विदेश में भारत की झलक: इजरायल में ‘लिटल इंडिया’, जहां मिलती हैं देसी मिठाइयां और हिंदी बोलते लोग

इजराइल के दक्षिणी डिमोना शहर पर ईरान के एक मिसाइल हमले में शनिवार को कम से कम 47 लोग घायल हो गए। बचाव सेवाओं ने यह जानकारी दी। यह शहर अपने परमाणु केंद्र के गुंबदनुमा ढांचे के लिए प्रसिद्ध है और इसे 'लिटिल इंडिया' के नाम से भी जाना जाता है। मेगन डेविड अदोम (एमडीए) बचाव सेवाओं और स्थानीय निवासियों ने बताया कि घायलों में 12 वर्षीय एक लड़का भी शामिल है, जो छर्रे लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। उन्होंने बताया कि 30 वर्ष की आयु के आसपास की एक महिला कांच के टुकड़े लगने से घायल हो गयी है जबकि 31 अन्य लोग छर्रों से हल्की चोट लगने या आश्रय स्थल की ओर भागते समय गिरने से घायल हो गए। इसके अलावा 14 लोगों का बेर्शेबा के सोरोका अस्पताल में बेचैनी के लिए इलाज किया गया। क्यों कहा जाता है 'लिटल इंडिया' इस शहर में लगभग 7500 भारतीय-यहूदी रहते हैं। इनकी आबादी शहर की कुल आबादी की 30 फीसदी की करीब है। यहां लोग बड़े आराम से मराठी और हिंदी बोलते हैं। लोगों में क्रिकेट लोकप्रिय हैं। खाने-पीने के शौक भी एकदम भारतीय हैं। यहां दुकानों पर आपको आसानी से सोनपापड़ी, गुलाब जामुन, पापड़ी चाट, जलेबी और भेलपूरी मिल जाएगी। जानकारी के मुताबिक 1950 और 60 के दशक में भारतीय यहूदी बड़ी संख्या में इजरायल पहुंचे थे और यहीं बस गए। हालांकि उनपर भारतीय संस्कृति का रंग अब भी चढ़ा हुआ है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, ''मिसाइल एक सामुदायिक भवन पर गिरी और उसके प्रभाव से आसपास के पुराने मकान ढह गए। अधिकांश लोग आश्रय स्थलों में थे, इसलिए उन्हें ज्यादा चोट नहीं आयी, सिवाय उस लड़के के जो बाहर रह गया था।' इजराइल डिफेंस फोर्सेज' (आईडीएफ) ने बताया कि वह इस बात की जांच कर रहा है कि ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को रोका क्यों नहीं जा सका। सेना के अनुसार, वायु रक्षा प्रणाली ने मिसाइल को रोकने की कोशिश की, लेकिन 'इंटरसेप्टर' उसे मार गिराने में सफल नहीं हो सके। उसने कहा, ''इस घटना की जांच की जाएगी।'' संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने हमले के बाद ''अधिकतम सैन्य संयम'' बरतने की अपील की। उसने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आईएईए को इजराइल के डिमोना शहर में मिसाइल गिरने की जानकारी है, लेकिन नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र को नुकसान होने के कोई संकेत नहीं मिले हैं।'' वहीं, ईरान ने कहा कि उसने डिमोना को नतांज परमाणु संवर्धन केंद्र पर पहले हुए हमले के जवाब में निशाना बनाया। हालांकि, आईडीएफ ने इस बात से इनकार किया कि उसने उसी दिन पहले नतांज पर हमला किया था।

कमांडो कैंप बना निशाना: असम में उग्रवादी हमले में 4 जवान जख्मी

तिनसुकिया. असम के तिनसुकिया जिले में रविवार को बड़ा उग्रवादी हमला हुआ है। इसमें पुलिस कमांडो कैंप में ग्रेनेड फेंका गया। अधिकारियों ने बताया कि हमले में चार जवान घायल हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक अल्फा उग्रवादियों ने इस हमले को अंजाम दिया है। असम के तिनसुकिया जिले में रविवार को बड़ा उग्रवादी हमला हुआ है। इसमें पुलिस कमांडो कैंप में ग्रेनेड फेंका गया। अधिकारियों ने बताया कि हमले में चार जवान घायल हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक अल्फा उग्रवादियों ने इस हमले को अंजाम दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यह हमला शनिवार देर रात करीब दो बजे हुआ और 20 मिनट तक चला। कैंप में मौजूद एक अधिकारी ने बताया कि करीब दो बजकर एक मिनट पर हमने पहला धमाका सुना। इसके बाद लगातार धमाकों की आवाज आती रही। संदेह है कि यह धमाके मोर्टार से हो रहे थे। असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा पर है कैंप हमला लेखापानी पुलिस थाना के जगुन चौकी के अंतर्गत 10 मील क्षेत्र के पास स्थित शिविर में हुआ। यह असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा के करीब एक संवेदनशील क्षेत्र है। अधिकारियों ने बताया कि कम से कम पांच आरपीजी गोले शिविर पर दागे गए, जिनमें से चार कथित रूप से शिविर के अंदर फटे। उन्होंने आगे बताया कि धमाकों के बाद फायरिंग हुई। फिलहाल कैंप में ही इलाज घायल कमांडोज का फिलहाल कैंप में ही इलाज किया जा रहा है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी चोट कितनी गंभीर है। अधिकारियों ने अभी तक हुई नुकसान को लेकर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। तिनसुकिया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मयंक कुमार झा के नेतृत्व में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक टीम घटना के तुरंत बाद वहां पहुंची। अधिकारियों ने कहाकि इस हमले के बाद तिनसुकिया जिले और ऊपरी असम के अन्य हिस्सों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पिछले साल अक्टूबर में भी हुई थी घटना गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में एक इसी प्रकार की घटना हुई थी। तब संदिग्ध आतंकवादियों ने तिनसुकिया के ककोपाठार में भारतीय सेना कैंप पर गोलीबारी की थी, जिसमें तीन सैनिक घायल हो गए थे। उस समय एक सेना बयान के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने रात के लगभग मध्यरात्रि में चलती हुई गाड़ी से कैंप पर गोलीबारी की। सेना ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और पास के आवासीय क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की। अधिकारियों ने बताया था कि गोलीबारी के आदान-प्रदान के बाद हमलावर घटनास्थल से भाग गए। सेना ने बाद में पुष्टि की कि घायल कर्मियों को मामूली चोटें आई थीं और क्षेत्र को शीघ्र ही सुरक्षित कर लिया गया। प्रतिबंधित आतंकवादी समूह यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट ने उस हमले की जिम्मेदारी ली थी। अब ताजा मामले की टाइमलाइन और विधानसभा चुनावों से पहले की रणनीति को देखकर अधिकारियों को संदेह है कि हाल की हमले के पीछे भी वही संगठन हो सकता है।

कतर हेलीकॉप्टर क्रैश: छह लोगों की गई जान, एक की तलाश जारी

दोहा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच कतर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कतर के क्षेत्रीय जल में रविवार तड़के हेलीकॉप्टर दुर्घटना हुई, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई। इस बात की पुष्टि कतर के आंतरिक मंत्रालय की। मंत्रालय ने बताया कि हादसे में एक व्यक्ति अभी भी लापता है और उसकी तलाश जारी है। दुर्घटना के बाद बचाव और खोज अभियान तेज कर दिया गया है। आंतरिक मंत्रालय ने बताया कि बचाव और खोज अभियान जारी है और अधिकारी अभी एक लापता व्यक्ति को ढूंढने में जुटे हैं। हादसे के बाद तटीय सुरक्षा और रेस्क्यू टीमों ने तेजी से काम शुरू किया, लेकिन समुद्री हालात बचाव कार्य को चुनौती दे रहे हैं। अधिकारी हर संभव संसाधन लगा कर इस मिशन को सफल बनाने की कोशिश में हैं। बता दें कि इस हादसे की जानकारी पहले कतर के रक्षा मंत्रालय ने दी थी। बचाव कार्य में लगे कई यूनिट्स कतर सरकार की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि इस हादसे के बाद लापता व्यक्ति की खोज और हालात का आकलन करने के लिए कई यूनिट्स को लगाया गया है। रेस्क्यू जहाज, निगरानी उपकरण और प्रशिक्षित कर्मी खोज क्षेत्र में तैनात हैं ताकि बचाव के मौके बढ़ सकें। मौसम और समुद्री हालात पर भी नजर जहां एक ओर समुद्री हालात बचाव कार्य में बाधा डार रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कतर सरकार मौसम और समुद्री हालात पर भी नजर रखी जा रही है, क्योंकि ये बचाव कार्य की सुरक्षा और गति को प्रभावित कर सकते हैं। कतर सरकार ने कहा है कि सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर खोज और बचाव कार्य को सुरक्षित और प्रभावी तरीके से जारी रखा जाएगा।  

अमेरिका में उठी आवाज: ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ को लेकर नरसंहार घोषित करने की मांग तेज

वाशिंगटन. अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने प्रतिनिधि सभा में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें मांग की गई है कि पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगी संगठन जमात-ए-इस्लामी द्वारा 25 मार्च 1971 को बंगाली हिंदुओं के खिलाफ किए गए अत्याचारों को 'युद्ध अपराध और नरसंहार' माना जाए। ओहायो से डेमोक्रेट सांसद लैंड्समैन ने शुक्रवार को यह प्रस्ताव पेश किया, जिसे अब विदेश मामलों की समिति को भेज दिया गया है। क्या था ऑपरेशन सर्चलाइट प्रस्ताव में कहा गया है कि 25 मार्च 1971 की रात पाकिस्तान सरकार ने शेख मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया और उसकी सेना ने जमात-ए-इस्लामी की विचारधारा से प्रेरित उग्र इस्लामी समूहों के साथ मिलकर पूर्वी पाकिस्तान में 'ऑपरेशन सर्चलाइट' नाम से एक व्यापक दमन अभियान शुरू किया, जिसमें नागरिकों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया गया। इसमें यह भी कहा गया है कि 28 मार्च 1971 को ढाका में अमेरिका के महावाणिज्य दूत आर्चर ब्लड ने वाशिंगटन को ''चुनिंदा नरसंहार'' शीर्षक से एक टेलीग्राम भेजा था, जिसमें उन्होंने लिखा था, ''पाकिस्तानी सेना के समर्थन से गैर-बंगाली मुसलमान गरीब बस्तियों पर संगठित हमले कर रहे हैं और बंगालियों तथा हिंदुओं की हत्या कर रहे हैं।'' जब बांग्लादेश पाकिस्तान का ही हिस्सा था तब 1970 में पहली बार पूर्वी पाकिस्तान में चुनाव हुए। इसमें शेख मुजीबुर्रहमान की जीत हुई। याह्या खान और जुल्फिकार अली भुट्टो इसके खिलाफ थे। 25 मार्च 1971 को पाकिस्तानी फौज लोगों पर टूट पड़ी। आवामी लीग के लोगों को ढूंढ ढूंढकर मारा जाने लगा। जल्द ही यह हिंसा अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढने लगी। आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के इस ऑपरेशन सर्चलाइट में 30 लाख लोग मारे गए थे और 4 लाख महिलाओं के साथ रेप हुआ था। ब्लड टेलिग्राम लैंड्समैन ने बताया कि छह अप्रैल 1971 को आर्चर ब्लड ने अमेरिकी सरकार की चुप्पी पर आपत्ति जताते हुए एक संदेश भेजा था, जिस पर ढाका वाणिज्य दूतावास के 20 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे। इसे बाद में ''ब्लड टेलीग्राम'' के नाम से जाना गया। उस टेलीग्राम में कहा गया था, ''लेकिन हमने इस आधार पर हस्तक्षेप न करने का फैसला किया है कि अवामी संघर्ष, जिसमें दुर्भाग्यवश नरसंहार शब्द लागू होता है, एक संप्रभु देश का आंतरिक मामला है।'' लैंड्समैन द्वारा लाए गए प्रस्ताव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से आग्रह किया गया है कि वह 25 मार्च 1971 को बांग्लादेश के लोगों के खिलाफ पाकिस्तानी सशस्त्र बलों द्वारा किए गए अत्याचारों की निंदा करे। प्रस्ताव में कहा गया है कि ''पाकिस्तानी सेना और उसके इस्लामी सहयोगियों ने धर्म और लिंग की परवाह किए बिना जातीय बंगालियों की हत्या की, उनके नेताओं, बुद्धिजीवियों, पेशेवरों और छात्रों को मार डाला और हजारों महिलाओं को यौन दासता के लिए मजबूर किया।'' इसमें यह भी कहा गया है कि ''उन्होंने विशेष रूप से धार्मिक अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया, जिनके खिलाफ सामूहिक हत्याएं, सामूहिक बलात्कार, जबरन धर्मांतरण और जबरन निष्कासन जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया।' प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि किसी भी जातीय या धार्मिक समुदाय को उसके सदस्यों द्वारा किए गए अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि वह 1971 में पाकिस्तानी सशस्त्र बलों और उसके सहयोगी जमात-ए-इस्लामी द्वारा बंगाली हिंदुओं के खिलाफ किए गए अत्याचारों को मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और नरसंहार के रूप में मान्यता दें।