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होली की छुट्टी 3 या 4 मार्च को? जानें किस दिन बंद रहेंगे देशभर के बैंक

नई दिल्ली इस बार होली (Holi) 3 मार्च को है, या 4 को… इसे लेकर लोगों में कंफ्यूजन है. लेकिन होली की सरकारी छुट्टी को लेकर तस्वीर साफ हो गई है, होली के मौके पर किस दिन बैंक समेत तमाम सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे, इसकी घोषणा कर दी गई है.  भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मार्च 2026 के लिए बैंक छुट्टियों (Bank Holidays) की आधिकारिक सूची जारी कर दी है, जिसमें राष्ट्रीय और क्षेत्रीय त्योहारों के कारण अलग-अलग तारीखों पर बैंक की शाखाएं बंद रहेंगी. यह सूची इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सभी राज्य में छुट्टियां एक समान नहीं होती हैं, कुछ त्योहार कुछ हिस्सों में ही बंदी के रूप में मनाए जाते हैं.  अगर आपको भी इस हफ्ते बैंक से जुड़ा कोई काम है, तो अपने शहर/राज्य के हिसाब से सही तारीख देख सकते हैं कि किस दिन होली की छुट्टी रहेगी, और कब-कब बैंक खुले रहेंगे.  होली के आसपास बैंक छुट्टियां होली 2026 रंगों का प्रमुख त्योहार 4 मार्च (बुधवार) को पड़ रहा है, लेकिन RBI की सूची के अनुसार होली से जुड़े अलग-अलग दिन कई शहरों/राज्यों में छुट्टी के रूप में घोषित हैं.  इस बीच 2 मार्च 2026 (सोमवार) को होलिका दहन के मौके पर कुछ शहरों जैसे कानपुर और लखनऊ में बैंक बंद रहेंगे. बाकी अधिकांश स्थानों पर बैंक सामान्य रूप से काम करेंगे.  वहीं मंगलवार 3 मार्च 2026 को होली/धुलंडी के अवसर पर कई बड़े शहरों में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी. इन शहरों में मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, पटना, रांची, भोपाल, देहरादून, गुवाहाटी, हैदराबाद, नागपुर, पणजी, बेलापुर और विजयवाड़ा शामिल हैं. वहां के लोगों को बैंक सेवाओं के लिए पहले से योजना बनानी चाहिए.  जबकि 4 मार्च 2026 (बुधवार) को मुख्यौतर पर देश में होली मनाई जाएगी. इस दिन उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में बैंक बंद हैं. नई दिल्ली, अहमदाबाद, लखनऊ, कानपुर, पटना, रांची, चंडीगढ़, शिमला, जम्मू, रायपुर, भुवनेश्वर, अगरतला, ईटानगर, शिलॉन्ग और इंफाल में इस दिन बैंक बंद रहेंगे. होली के बाद भी मार्च में कई दिन छुट्टी- 13 मार्च- Chapchar Kut (कुछ राज्यों में) 17 मार्च- Shab-i-Qadr (जम्मू/कश्मीर) 19 मार्च- गुड़ी पड़वा, उगादी प्रकार के त्योहार 20-21 मार्च- ईद-उल-फितर / ईद 26-27 मार्च- राम नवमी 31 मार्च- कुछ स्थानों पर स्थानीय छुट्टी (हालांकि कुछ राज्यों में RBI ने इसे रद्द भी किया है.) इन दिनों छुट्टियों रहने का मतलब यह नहीं है कि सभी बैंकिंग सेवाएं बंद हो जाएंगी. ऑनलाइन बैंकिंग (UPI, मोबाइल/नेट बैंकिंग, एटीएम) सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी. यह डिजिटल लेन-देन करने वालों के लिए सुविधाजनक रहेगा. हालांकि अगर आपको फिजिकल सेवाएं (जैसे चेक जमा, KYC अपडेट, ड्राफ्ट वगैरह) चाहिए, तो छुट्टियों से पहले अपनी योजना बनाकर काम निपटा लें.

PMGKAY के तहत फोर्टिफाइड चावल वितरण पर केंद्र सरकार ने लगाई रोक, स्टोरेज में न्यूट्रिशन कम होने का दावा

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत दिए जाने वाले 'फोर्टिफाइड चावल' के वितरण को फिलहाल रोक दिया है. सरकार ने यह कदम चावल के लंबे समय तक भंडारण के दौरान पोषक तत्वों के खराब होने की चिंताओं के बीच उठाया है. क्यों लिया गया यह फैसला? खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आईआईटी खड़गपुर को एक विशेष अध्ययन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इस स्टडी में यह जांचना था कि अलग-अलग मौसम और परिस्थितियों में फोर्टिफाइड चावल के दाने कितने समय तक अपनी गुणवत्ता बनाए रखते हैं. रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. अध्ययन के अनुसार, नमी, तापमान और गोदामों में रखने के तरीके का चावल की क्वालिटी पर बुरा असर पड़ रहा है. रिपोर्ट में कहा गया कि लंबे समय तक रखे रहने और सामान्य रखरखाव के दौरान इन चावलों में मौजूद जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व कम हो जाते हैं. इससे जिस मकसद के लिए चावल में पोषण मिलाया गया था, वह पूरा नहीं हो पा रहा है. भंडारण की समस्या सबसे बड़ी चुनौती भारत के सरकारी गोदामों में चावल की उपलब्धता जरूरत से कहीं ज्यादा है. आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय पूल में लगभग 674 लाख मीट्रिक टन चावल उपलब्ध है, जबकि सालाना जरूरत सिर्फ 372 लाख मीट्रिक टन की है. इस कारण चावल को गोदामों में 2 से 3 साल तक रखा जाता है. इतने लंबे समय तक फोर्टिफाइड चावल में मिलाए गए विटामिन और आयरन अपनी शक्ति खो देते हैं. आम जनता पर क्या होगा असर? सरकार ने साफ किया है कि इस फैसले से राशन कार्ड धारकों को मिलने वाले अनाज की मात्रा में कोई कमी नहीं आएगी.     राशन मिलता रहेगा: लाभार्थियों को उनके हक का पूरा चावल मिलेगा, बस वह अब फोर्टिफाइड (मिश्रित) नहीं होगा.     इन योजनाओं पर असर: यह फैसला PDS (राशन दुकान), आंगनवाड़ी (ICDS) और स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील (PM POSHAN) पर लागू होगा.     राज्यों को छूट: खरीफ सीजन 2025-26 के लिए राज्यों को छूट दी गई है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार फोर्टिफाइड या सामान्य चावल बांट सकते हैं. क्या है फोर्टिफाइड चावल? बता दें कि कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने के लिए सामान्य चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्व मिलाए जाते हैं. इसे 2019 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था और मार्च 2024 तक इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया था. आगे क्या? खाद्य मंत्रालय के अनुसार, यह रोक स्थायी नहीं है. सरकार अब एक ऐसी नई तकनीक या सिस्टम पर काम कर रही है जिससे चावल के पोषक तत्व लंबे समय तक खराब न हों. जैसे ही कोई बेहतर तरीका मिल जाएगा, इस योजना को फिर से शुरू किया जा सकता है.

8वें वेतन आयोग में बड़ा बदलाव, फैमिली यूनिट बढ़ने से 66% तक बढ़ सकती है सैलरी, जानें पूरी जानकारी

नई दिल्ली  आठवें वेतन आयोग में फैमिली यूनिट बढ़ाने की मांग से केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में 66% तक उछाल आ सकता है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर परिवार की गणना 3 की जगह 5 यूनिट पर की जाए, तो न्यूनतम वेतन, फिटमेंट फैक्टर और पेंशन (8th Pay Commission salary and pension hike) तीनों में बड़ा बदलाव संभव है। दरअसल, नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की ड्राफ्टिंग कमेटी ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए एक साझा मांग पत्र तैयार करने को राष्ट्रीय राजधानी में हफ्ते भर की बैठक बुलाई है। यह मांग देश के 50 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनर्स से जुड़ी है। चर्चा का सबसे अहम मुद्दा है- फैमिली यूनिट (8th Pay Commission family unit) का विस्तार। सातवें वेतन आयोग में कैसे काउंट हुआ था वेतन? 7वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन की गणना 3 कंजम्प्शन यूनिट के आधार पर की गई थी। इसमें कर्मचारी, जीवनसाथी और दो बच्चों को शामिल किया गया। यह गणना डॉ. वालेस एक्रोयड के फॉर्मूले पर आधारित थी, जिसमें 2,700 कैलोरी प्रति वयस्क, सालाना 72 गज कपड़ा और मकान का खर्च जैसे मानक तय किए गए थे। मकसद था- एक परिवार को सम्मानजनक जीवन के लिए कितनी आय चाहिए, इसका अंदाजा लगाना। फैमिली यूनिट में माता-पिता भी हों शामिल! ऑल इंडिया एनपीएस एप्लॉईज फेजरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल (Dr Manjeet Singh Patel) का कहना है कि असल में कई कर्मचारी अपने आश्रित माता-पिता का खर्च भी उठाते हैं। इसलिए फैमिली यूनिट 3 से बढ़ाकर 5 की जाए। चूंकि न्यूनतम वेतन सीधा-सीधा यूनिट की संख्या से जुड़ा होता है, इसलिए 3 से 5 यूनिट होने पर बेस कैलकुलेशन वैल्यू में गणितीय रूप से 66.67% की बढ़ोतरी हो सकती है। यूनियनों का दावा है कि इससे न्यूनतम बेसिक सैलरी में करीब 66% तक उछाल आ सकता है। फैमिली यूनिट फॉर्मूला क्या है? 7वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन की गणना 3 यूनिट के आधार पर हुई थी. कर्मचारी, जीवनसाथी और दो बच्चे. यह गणना डॉ. वॉलेस अयक्रॉयड के फॉर्मूले पर आधारित थी, जिसमें परिवार की बुनियादी जरूरतें शामिल थीं.     रोजाना 2700 कैलोरी भोजन     सालाना कपड़ों की जरूरत     रहने का खर्च     इसका मकसद था सम्मानजनक जीवन के लिए जरूरी न्यूनतम आय तय करना.     अब क्या मांग की जा रही है?     कर्मचारी यूनियन चाहती हैं कि फैमिली यूनिट 3 से बढ़ाकर 5 की जाए, जिसमें आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाए. सीधे शब्दों में     पहले गणना = 3 यूनिट     नया प्रस्ताव = 5 यूनिट गणित के हिसाब से     5 ÷ 3 = 1.66     यानी बेसिक गणना में लगभग 66.67% बढ़ोतरी.     न्यूनतम वेतन पर असर     अभी 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 है. कर्मचारी संगठन मांग कर रहे हैं.     फिटमेंट फैक्टर 3.25 तक (पहले 2.57)     हर साल 7% वेतन वृद्धि     पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली     अगर बेस सैलरी बढ़ती है, तो पूरी सैलरी स्ट्रक्चर ऊपर चला जाएगा. फिटमेंट फैक्टर क्यों बढ़ सकता है? फिटमेंट फैक्टर वही गुणांक है जिससे पुरानी सैलरी नई सैलरी में बदली जाती है. फैमिली यूनिट बढ़ने से न्यूनतम वेतन की गणना बड़ी हो जाएगी, जिससे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग मजबूत हो जाती है. पेंशनर्स पर क्या असर? पेंशन आखिरी बेसिक सैलरी का 50% होती है. इसलिए अगर नई बेसिक सैलरी बढ़ती है, तो पेंशन भी उसी अनुपात में बढ़ेगी. यही वजह है कि पेंशनर्स संगठन भी इस पर नजर बनाए हुए हैं. कर्मचारी संगठन क्यों जरूरी बता रहे बदलाव?     यूनियनों का कहना है:     महंगाई तेजी से बढ़ी है     कई कर्मचारी माता-पिता की जिम्मेदारी उठाते हैं     3 यूनिट मॉडल आज के परिवार की हकीकत नहीं दिखाता     उनका मानना है कि सिर्फ छोटी बढ़ोतरी नहीं, बल्कि सैलरी ढांचे में बड़ा बदलाव जरूरी है. अभी स्थिति क्या है? NC-JCM अलग-अलग विभागों की मांगों को जोड़कर सरकार को अंतिम प्रस्ताव देगा. इसमें फैमिली यूनिट विस्तार, न्यूनतम वेतन, पेंशन समानता और भत्तों से जुड़े सुझाव शामिल होंगे. सरकार 5-यूनिट प्रस्ताव मानती है या नहीं, यह अभी साफ नहीं है. लेकिन अगर मंजूरी मिलती है, तो सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. कर्मचारियों के लिए सबसे अहम बात 66% बढ़ोतरी का आंकड़ा कोई अनुमान नहीं, बल्कि वेतन गणना के फॉर्मूले में बदलाव से जुड़ा गणित है.अगर फैमिली यूनिट 3 से 5 हुई तो बेस सैलरी लगभग 66.67% बढ़ेगी. फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने का आधार मजबूत होगा. न्यूनतम वेतन ₹54,000 तक मांग की जा सकती है. पेंशन भी उसी अनुपात में बढ़ेगी अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या सरकार फैमिली यूनिट फॉर्मूला बदलने को मंजूरी देगी? तो ऊपर खिसक जाएगी सैलरी मैट्रिक्स? फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक वेतन 18,000 रुपए है। अगर बेसिक पे बढ़ता है, तो पूरी सैलरी मैट्रिक्स ऊपर खिसक जाएगी। यूनियनें 3.25 या उससे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की भी मांग कर रही हैं। साथ ही सालाना इंक्रीमेंट दर 3% से बढ़ाकर 7% करने की मांग है। पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूरी बहाली, NPS और UPS को खत्म करने की मांग भी उठ रही है। यह मांग पेंशनर्स के लिए भी अहम है, क्योंकि बेसिक पेंशन आखिरी बेसिक सैलरी का 50% होती है। अगर 5 यूनिट फॉर्मूला लागू होता है, तो पेंशन में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी होगी। अब नजर सरकार के फैसले पर है कि क्या आठवां वेतन आयोग सिर्फ इंक्रीमेंट देगा या ढांचा बदलकर बड़ी सैलरी हाइक? खैर, ये आने वाले दिनों में क्लियर हो सकता है।  

1 मार्च से शुरू होने वाले 5 अहम बदलाव, जानिए क्या-क्या होगा बदलने वाला

नई दिल्ली 1 मार्च 2026 से भारत में कई नियम बदलने जा रहे हैं, जो आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और जेब पर सीधा असर डालेंगे. ये बदलाव ट्रेन टिकट बुकिंग से लेकर एलपीजी सिलेंडर की कीमत, सिम कार्ड, बैंक अकाउंट, यूपीआई और मैसेजिंग ऐप्स तक फैले हुए हैं. ज़ी बिजनेस और दूसरे सोर्सेज से मिली जानकारी के मुताबिक, ये नियम सुरक्षा बढ़ाने, फ्रॉड रोकने और सर्विस बेहतर बनाने के लिए लाए जा रहे हैं. भारतीय पढ़ने वालों के लिए आसान भाषा में बताता हूं कि क्या-क्या बदलाव आ रहे हैं.  रेलवे टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव भारतीय रेलवे 1 मार्च से अपनी डिजिटल सर्विस को और भी हाईटेक बना रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार पुराने यूटीएस ऐप की जगह अब नया RailOne ऐप जगह ले लेगा. इसके साथ ही जनरल और प्लेटफॉर्म टिकट बुक करने के लिए आधार बेस्ड ऑथेंटिकेशन को जरूरी किया जा सकता है, जिससे टिकट बुकिंग में क्लियरिटी आएगी. इसके अलावा सीनियर सीटीजन के लिए लोअर बर्थ प्रायोरिटी को लेकर भी नई गाइडलाइंस आ सकती हैं. सबसे बड़ा बदलाव ट्रेन टिकट बुकिंग में है. भारतीय रेलवे अब पुराना यूटीएस ऐप बंद कर रहा है. 1 मार्च से अनारक्षित टिकट, जनरल टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट बुक करने के लिए नया रेलवन ऐप इस्तेमाल करना होगा. ये ऐप पूरी तरह एक्टिव हो जाएगा और आईआरसीटीसी के अलावा ये नया विकल्प होगा. अब स्टेशन पर काउंटर से या पुराने तरीके से टिकट लेना मुश्किल हो सकता है, इसलिए यात्रा करने वाले लोग पहले से ऐप डाउनलोड कर लें. एलपीजी सिलेंडर की कीमत एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हर महीने की तरह बदलाव हो सकता है. 1 मार्च को घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के नए रेट घोषित हो सकते हैं. क्रूड ऑयल की कीमतों के आधार पर ये बढ़ या घट सकते हैं, जिससे रसोई गैस का खर्च सीधा प्रभावित होगा. आम परिवारों के लिए ये बहुत जरूरी है क्योंकि गैस की कीमतें रोज के बजट पर असर डालती हैं. सिम बाइंडिंग जरूरी सिम कार्ड और मैसेजिंग ऐप्स में बड़ा नियम आ रहा है. 1 मार्च से सिम बाइंडिंग अनिवार्य हो जाएगी. मतलब व्हाट्सऐप, टेलीग्राम जैसे ऐप्स को एक्टिव सिम से लिंक करना जरूरी होगा. अगर सिम नहीं जुड़ा तो ऐप इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. ये नियम डिजिटल फ्रॉड और फेक अकाउंट रोकने के लिए है. व्हाट्सऐप यूजर्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा क्योंकि मल्टी-डिवाइस यूज और वेब वर्जन पर नई पाबंदियां आ सकती हैं. दूरसंचार विभाग ने कहा है कि ये सुरक्षा के लिए है और कोई ढील नहीं मिलेगी. मिनिमम बैलेंस नियम में बदलाव बैंक और फाइनेंस में भी बदलाव हैं. कुछ बैंक मिनिमम बैलेंस नियम में बदलाव कर सकते हैं या सेविंग अकाउंट के रूल अपडेट हो सकते हैं. साथ ही क्रेडिट स्कोर की साप्ताहिक चेकिंग या यूपीआई ट्रांजैक्शन में ज्यादा सुरक्षा फीचर्स जैसे ओटीपी या लिमिट चेंज आ सकते हैं. ये सब फ्रॉड रोकने और यूजर को सुरक्षित रखने के लिए हैं. इसके अलावा कुछ बैंक अपने क्रेडिट कार्ड से जुड़े बदलाव भी कर सकते हैं, जिनमें रिवॉर्ड प्वाइंट्स या फिर चार्जेसेस शामिल हो सकते हैं. सीएनजी और पीएनजी के रेट्स रसोई गैस के साथ-साथ सीएनजी और पीएनजी के रेट्स भी हर महीने की शुरुआत में रिव्यू किए जाते हैं. 1 मार्च की सुबह ही नेचुरल गैस की कीमतों में बदलाव हो सकता है, जिसका सीधा असर आपकी कार के फ्यूल के खर्च पर पड़ेगा और घरेलू बजट पर भी बोझ बढ़ सकता है. अगर कीमतें बढ़ती हैं तो सीएनजी से चलने वाली कार या ऑटो रिक्शा चलाने वालों को ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे, वहीं पीएनजी से कनेक्शन वाले घरों में खाना पकाने का खर्च भी ऊपर जा सकता है. ये बदलाव आम आदमी की डिजिटल लाइफ, यात्रा और घरेलू खर्च को प्रभावित करेंगे.

OBC क्रीमी लेयर पर बड़ा सवाल: शादी के बाद महिला की पहचान मायके से या ससुराल से? SC में सुनवाई

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट इस महत्वपूर्ण कानूनी सवाल की जांच करने के लिए सहमत हो गया है कि सरकारी नौकरी में आरक्षण प्राप्त करने के लिए एक विवाहित ओबीसी (OBC) महिला उम्मीदवार के 'क्रीमी लेयर' में आने का निर्धारण किस आधार पर किया जाएगा- उसके पति की आय पर या उसके माता-पिता की आय पर। पहले मामला समझिए रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला कर्नाटक की एक महिला का है, जो न्यायिक अधिकारी (सिविल जज) बनना चाहती है। वह हिंदू नामधारी समुदाय से ताल्लुक रखती है, जो कर्नाटक में आरक्षण की II-A श्रेणी के अंतर्गत आता है। अप्रैल 2018 में, महिला की शादी हो गई। महिला का पति आरक्षण की III-B श्रेणी के अंतर्गत आता है। शादी के बाद से महिला अपने माता-पिता से अलग रह रही है। उसने सिविल जज के पद के लिए आवेदन किया था। इस भर्ती में कुल 57 में से 6 पद II-A श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थे। अपने चयन के बाद, उसने अपने पति की आय के आधार पर जाति प्रमाण पत्र के सत्यापन और 'सिंधुत्व' प्रमाण पत्र जारी करने का अनुरोध किया था। विवाद का कारण जिला जाति और आय सत्यापन समिति ने महिला का आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह अपने माता-पिता की आय के कारण क्रीमी लेयर के दायरे में आती है, जिससे वह आरक्षण के लिए अयोग्य हो जाती है। महिला की मां कर्नाटक न्यायिक सेवा से जिला न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुई हैं, जबकि उसके पिता सहायक वन संरक्षक के पद से रिटायर हुए हैं। कर्नाटक हाई कोर्ट में क्या हुआ? महिला ने कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और यह तर्क दिया कि चूंकि वह शादीशुदा है, इसलिए उसकी पात्रता उसके पति की आय के आधार पर तय होनी चाहिए। उसने दलील दी कि उसके पति की वार्षिक आय उसे क्रीमी लेयर की अयोग्यता से बाहर रखती है। हालांकि, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि इस प्रक्रिया में माता-पिता की पेंशन को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सहमति जताते हुए महिला के दावे को खारिज कर दिया और फैसला सुनाया कि माता-पिता की पेंशन को भी परिवार की आय माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में अपील हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ महिला ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। बुधवार को उनकी अपील पर बहस करते हुए, वरिष्ठ अधिवक्ता संजय एम. नुली ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ के सामने कानूनी सवाल उठाए- क्या एक विवाहित महिला उम्मीदवार की क्रीमी लेयर का निर्धारण करने के लिए पति की आय पर विचार किया जाना चाहिए या माता-पिता की आय पर? यदि माता-पिता की आय पर विचार किया जाना है, तो क्या माता-पिता की पेंशन को 'आय' के रूप में गिना जाना चाहिए या नहीं? सुप्रीम कोर्ट का कदम सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस अपील पर कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके बाद, महिला (अपीलकर्ता) को एक सप्ताह के भीतर अपना प्रत्युत्तर (rejoinder) दाखिल करने की अनुमति दी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को तय की गई है।  

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: कच्चे तेल में उछाल, भारतीयों की जेब पर संकट!

नई दिल्ली मध्य पूर्व में तनाव अब खुले युद्ध में बदल चुका है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं, जिसमें तेहरान समेत कई शहरों में विस्फोट की खबरें हैं। इस घटना ने वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा दिया है। क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और दुनिया भर के निवेशक व आम लोग इस बात से चिंतित हैं कि क्या यह आग भारत की जेब तक पहुंच जाएगी? भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, और इसमें से बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों (सऊदी अरब, UAE, इराक आदि) से आता है, जो होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। ईरान: एक प्रमुख तेल उत्पादक देश अमेरिकी प्रतिबंधों की मार झेलने के बावजूद ईरान आज भी दुनिया के शीर्ष 10 तेल उत्पादकों में शामिल है। 'ओपेक' (OPEC) के आंकड़ों के अनुसार, ईरान वर्तमान में लगभग 3.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन करता है। ग्लोबल रिस्क मैनेजमेंट के मुख्य विश्लेषक अर्ने लोहमैन रासमुसेन के अनुसार, 1974 में ईरान अमेरिका और सऊदी अरब के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक था (6 मिलियन बैरल प्रतिदिन)। ईरान के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार है। सालों के कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, इसके तेल उद्योग की स्थिति वेनेजुएला जैसे देशों से काफी बेहतर है। होर्मुज जलडमरूमध्य: सबसे बड़ा खतरा तेल बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी है, जिसे ठप करने की धमकी ईरान अक्सर देता रहा है। यह मध्य पूर्व के अमीर तेल उत्पादक देशों को शेष विश्व से जोड़ने वाला मुख्य समुद्री मार्ग है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, 2024 में इस मार्ग से प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरा, जो वैश्विक खपत का करीब 20 प्रतिशत है। यह जलमार्ग काफी संकरा (लगभग 50 किलोमीटर चौड़ा) और उथला (अधिकतम 60 मीटर गहरा) है। इस मार्ग पर सुरक्षा को लेकर जरा सा भी संदेह होने पर जहाजों के बीमा प्रीमियम में भारी उछाल आ सकता है। सैक्सो बैंक के विश्लेषक ओले हैनसेन के अनुसार, केवल सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पास ही वैकल्पिक (बाईपास) बुनियादी ढांचा है, जिसकी अधिकतम क्षमता मात्र 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। अत्यधिक लाभदायक तेल और चीन पर निर्भरता पश्चिमी देशों (कनाडा, अमेरिका) में जहां तेल निकालने की लागत $40 से $60 प्रति बैरल आती है, वहीं ईरान के लिए यह लागत मात्र $10 प्रति बैरल है। 1979 की इस्लामी क्रांति और विशेषकर डोनाल्ड ट्रंप की अधिकतम दबाव नीति के कारण ईरान के पास निर्यात के बहुत कम विकल्प बचे हैं। चीन सबसे बड़ा खरीदार ईरान वर्तमान में 1.3 से 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन निर्यात करता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसका 80% से अधिक हिस्सा बाजार मूल्य से कम कीमत पर चीनी रिफाइनरियों मुख्यतः स्वतंत्र टीपॉट रिफाइनरियों को जाता है। पड़ोसी देशों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर खाड़ी देशों से लेकर तुर्की और पाकिस्तान तक, ईरान के पड़ोसी डरे हुए हैं। चूंकि इन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, इसलिए वे ईरान के जवाबी हमले के निशाने पर आ सकते हैं। भूमध्यसागरीय सामरिक अध्ययन फाउंडेशन के निदेशक पियरे रज़ौक्स के अनुसार, ईरान के पास मध्यम दूरी की मिसाइलें हैं जो हाइड्रोकार्बन हब, बिजली संयंत्रों और समुद्री जल संयंत्रों को नष्ट कर सकती हैं। अगर कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल तक पहुंच जाती है (जो फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से नहीं हुआ है), तो इससे दुनिया भर में महंगाई फिर से बेकाबू हो सकती है। तेल की बढ़ती कीमतें इस साल के अंत में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति ट्रंप को नुकसान पहुंचा सकती हैं, क्योंकि उन्होंने अमेरिकी मतदाताओं से सस्ती ऊर्जा का वादा किया है। भारत पर असर को विस्तार से समझिए अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए इस सैन्य हमले का भारत पर बहुत गहरा और बहुआयामी असर पड़ सकता है। भारत अपनी कच्चे तेल की कुल जरूरत का लगभग 85% आयात करता है, इसलिए मध्य पूर्व में कोई भी अस्थिरता सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापक आर्थिक स्थिरता को चुनौती देती है। इस भू-राजनीतिक संकट का भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला संभावित असर- पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सीधा असर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत अगर $100 प्रति बैरल के पार जाती है, तो भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की रिफाइनिंग लागत में भारी वृद्धि होगी। यदि सरकार उत्पाद शुल्क में कटौती करके इस झटके को खुद नहीं सहती है, तो पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में प्रति लीटर ₹5 से ₹10 तक का उछाल आ सकता है। बता दें कि यह महज अनुमान है। सरकार की ओर से कुछ भी आदेश नहीं आया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने रूसी तेल का लाभ उठाया था, लेकिन यदि लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो माल ढुलाई और बीमा लागत इतनी बढ़ जाएगी कि कोई भी रियायती तेल अंततः महंगा ही पड़ेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डीजल की कीमतें बढ़ने से देश भर में माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों, एफएमसीजी (FMCG) उत्पादों, फलों और सब्जियों की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे खुदरा महंगाई दर (CPI) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर जा सकती है।  

अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का कहर, खाड़ी देशों में मचा हड़कंप

दुबई इजरायली और अमेरिकी हमलों का ईरान ने बड़ा बदला लिया है। उसने शनिवार दोपहर कम से कम आठ देशों में मौजूद अमेरिकी बेस पर हमला किया है। इसमें बहरीन के नेवल बेस, कतर, यूएई, सऊदी अरब, इजरायल, कुवैत, दुबई आदि शामिल हैं। हमलों के बाद बहरीन ने कहा है कि अमेरिकी नेवी के पांचवें फ्लीट के हेडक्वार्टर को मिसाइल हमलों से निशाना बनाया गया है। कतर में भी धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। हालांकि, किसी भी नुकसान की तुरंत कोई खबर नहीं है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अबू धाबी में भी जोरदार धमाका सुना गया है। दुबई में भी धमाकों की आवाज सुनी गई। ईरान ने खतरनाक मिसाइलों से अमेरिकी बेस को निशाना बनाया है। मिडिल ईस्ट में कई देशों में अमेरिकी मिलिट्री ने अपने बेस बनाए हुए हैं, जहां पर बड़ी संख्या में सैनिकों और हथियारों की तैनाती है। इससे पहले, अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को पूरे ईरान में टारगेट करते हुए एक बड़ा हमला किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी लोगों से अपनी सरकार पर कब्जा करने की अपील की। पहला हमला तेहरान के डाउनटाउन में ईरान के 86 साल के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के घर के कंपाउंड को टारगेट करता हुआ लगा। यह तुरंत साफ नहीं था कि वह उस समय वहां थे या नहीं। ईरानी राजधानी से धुआं उठता देखा जा सकता था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, “47 सालों से, ईरानी शासन अमेरिका को मौत का नारा लगा रहा है और खून-खराबे और बड़े पैमाने पर हत्या का एक कभी न खत्म होने वाला कैंपेन चलाया है, जिसमें यूनाइटेड स्टेट्स, हमारे सैनिकों और कई, कई देशों के बेगुनाह लोगों को टारगेट किया गया है।” उन्होंने ईरानियों से हमलों के दौरान कवर लेने की अपील की, लेकिन फिर कहा कि जब हम खत्म कर लें, तो अपनी सरकार पर कब्जा कर लें। यह आपकी होगी।” वहीं, इजरायली और अमेरिकी हमलों का ईरान ने जवाब देना शुरू कर दिया है। ईरान के पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि उसने इजरायल को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइलों की पहली लहर लॉन्च करके जवाब दिया। इस बीच, यमन में ईरान के सपोर्ट वाले हूतियों ने रेड सी शिपिंग रूट और इजरायल पर हमले फिर से शुरू करने की कसम खाई है। ऐसा दो सीनियर हूती अधिकारियों ने कहा। उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर यह बात कही क्योंकि हूती लीडरशिप की तरफ से कोई ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं हुई थी। इसके अलावा, ट्रंप ने वीडियो में कहा कि अमेरिका ने ईरान पर उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर डील के लिए दबाव बनाने की कोशिश में इस इलाके में फाइटर जेट और वॉरशिप का एक बड़ा बेड़ा इकट्ठा करने के बाद ईरान में बड़े कॉम्बैट ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं।  

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच कांग्रेस का वार—‘पुराने मित्र देश पर हमला, मोदी क्यों चुप?’

नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच कई दिनों से चले आ रहे तनाव के बाद आखिरकार इजरायल के साथ मिलकर यूएस ने ईरान पर हमला बोल दिया है। तेहरान के साथ-साथ इजरायल में भी कई जगह पर विस्फोटों सुने जाने की खबर है। मध्य-पूर्व में चल रहे इस संघर्ष का असर भारत की राजनीति पर भी देखने को मिल रहा है। कुछ दिन पहले ही इजरायल की यात्रा करके लौटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस ने हमला बोलते हुए पूछा है कि क्या पीएम मोदी इजरायल और ईरान के बीच में जारी इस युद्ध का समर्थन करते हैं? कांग्रेस पार्टी के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया साइट पर एक पोस्ट करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "प्रधानमंत्री मोदी के दोस्त बेंजामिन नेतन्याहू ने अब भारत के पुराने दोस्त ईरान पर हमला बोल दिया है। यह प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से लौटने के बमुश्किल दो दिन के बाद हुआ है। रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के बारे में तमाम दिखावे के बाद, मोदी ने अपनी इजराइल यात्रा का उपयोग इजराइल और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए क्यों नहीं किया? क्या वह इस युद्ध का समर्थन करते हैं?" गौरलतब है कि प्रधानमतंत्री मोदी 25 और 26 फरवरी के दिन इजरायल के दौरे पर थे। इस दौरे पर भारत और इजरायल के बीच में कई अहम समझौते हुए और पीएम मोदी ने इजरायली संसद को भी संबोधित किया था। हालांकि, पीएम मोदी के इस दौरे से ईरान पर किए जा रहे हमले को कोई लेना-देना नहीं था। क्योंकि अमेरिका और इजरायल के बीच पीएम के दौरे के बहुत पहले से ही ईरान के खिलाफ मोर्चाबंदी की जा रही थी। जिनेवा में चल रही बातचीत के बीच जब ईरान, अमेरिकी की शर्तों पर खड़ा नहीं उतरा, इसके बाद इजरायल और यूएस ने मिलकर तेहरान के ऊपर हमला बोल दिया। मध्य-पूर्व में इस संकट के बादल पिछले कई महीनों से मंडरा रहे थे। क्या चाहता है अमेरिका? पिछले महीनों ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के जरिए अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट को नष्ट करने की कोशिश की थी। विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका उसमें आंशिक रूप से ही सफल हो पाया। हालांकि, इजरायल भी लगातार ईरानी न्यूक्लियर वैज्ञानिकों, सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाकर ईरान को कमजोर करता आ रहा है, लेकिन अब अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने सीधे युद्ध में उतरने की ठान ली है। ईरान पर किए गए हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक वीडियो संदेश के जरिए ईरानी लोगों से भी सड़कों पर उतरकर अपने बेहतर भविष्य के लिए खामेनेई को सत्ता से हटाने की अपील की है। उन्होंने कहा, "अमेरिका आज वह मदद लेकर आया है, जिसका इंतजार आप पिछले कई सालों से कर रहे हैं। पिछला कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति यह नहीं कर पाया है। ऐसे में अब हमारा प्रशासन यह लेकर आया है, अब देखना है कि आप इस पर कैसे रिएक्ट करते हैं।" आपको बता दें, इजरायल द्वारा किए गए हमले के बाद ईरान की तरफ से भी इजरायल को निशाना बनाना शुरू किया जा चुका है। वहीं, दूसरी तरफ ईरान के समर्थन में यमन के हूती विद्रोहियों ने ऐलान किया है कि वह फिर से लाल सागर से जाने वाले जहाजों को निशाना बनाएंगे। इस युद्ध में अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान में सत्ता पलटना और न्यूक्लियर प्रोग्राम को नष्ट करना है। वहीं, दूसरी और खामेनेई के नेतृत्व में ईरान भी अपनी बात पर अड़ा हुआ है।  

ईरान हमला बना बड़ा मुद्दा, रूस के करीबी नेता ने अमेरिका पर साधा निशाना

मॉस्को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी साथी और अभी रूस की सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी चेयरमैन मेदवेदेव ने टेलीग्राम पर एक पोस्ट में अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि शांति बनाने वाले ने एक बार फिर अपना असली चेहरा दिखाया है। इजरायल और अमेरिका ने मिलकर शनिवार को ईरान के कई शहरों पर बड़े मिसाइल हमले किए। इसमें कई ईरानी नेता व कई सीनियर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर के मारे जाने की आशंका जताई गई है। ईरान पर हुए इस हमले से रूस भड़क गया है। रूस के पूर्व राष्ट्रपति और प्रेसिडेंट पुतिन के करीबी दिमित्री मेदवेदेव ने इन हमलों के लिए अमेरिका की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि अमेरिका ने एक बार फिर से अपना असली चेहरा दिखा दिया है। रूसी नेता और पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने इस बात पर शक जताया कि क्या वॉशिंगटन ने अच्छी नीयत से लड़ाई टालने के लिए बातचीत शुरू की थी। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी साथी और अभी रूस की सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी चेयरमैन मेदवेदेव ने टेलीग्राम पर एक पोस्ट में कहा, “शांति बनाने वाले ने एक बार फिर अपना असली चेहरा दिखाया है। ईरान के साथ सारी बातचीत सिर्फ एक बहाना थी। इस पर कभी किसी को शक नहीं हुआ। किसी को भी किसी खास चीज पर बातचीत करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी।” वहीं, तेहरान में मॉस्को की एम्बेसी ने ईरान के प्रति 'अमेरिका और इजरायल के आक्रामक व्यवहार की निंदा की और रूसियों से कहा कि अगर हो सके तो वे इस्लामिक रिपब्लिक छोड़ दें। एम्बेसी ने एक बयान में कहा, "हम जोर देकर सलाह देते हैं कि अगर हो सके तो ईरान में रहने वाले रूसी नागरिक और उनके देश के लोग देश छोड़ दें।" साथ ही, जो लोग ईरान में रह रहे हैं उनसे सतर्क रहने और मिलिट्री और सरकारी जगहों के पास न जाने की अपील की जाती है।  

खाड़ी देशों में ईरान का हमला तेज, सऊदी-UAE-कतर में बसे भारतीयों पर क्या असर?

नई दिल्ली मध्य पूर्व में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए टारगेटेड हमलों के बाद अब ईरान ने खुली जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है. तेहरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर उस पर हमला हुआ तो खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा. अब ईरान की तरफ से सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन और जॉर्डन समेत खाड़ी मुल्कों में स्थित अमेरिकी एयरबेस और सैन्य परिसरों पर मिसाइल हमलों की खबरें सामने आ रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो खाड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अस्थिरता फैल सकती है, जिसका सीधा असर वहां काम कर रहे प्रवासी भारतीयों पर पड़ेगा. भारत सरकार की तरफ से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आपात योजनाओं पर भी विचार किया जा सकता है. इस बढ़ते सैन्य टकराव के बीच सबसे बड़ी चिंता खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों को लेकर है. ताजा अनुमानों के अनुसार खाड़ी सहयोग परिषद के देशों में लगभग 93 लाख से अधिक भारतीय रह रहे हैं. संयुक्त अरब अमीरात में करीब 38.9 लाख, सऊदी अरब में लगभग 26.5 लाख, कुवैत में करीब 10 लाख, कतर में लगभग 8.3 लाख, ओमान में 6.6 लाख और बहरीन में करीब 3.3 लाख भारतीय रह रहे हैं. ये सभी देश उन इलाकों में आते हैं जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं या हालिया हमलों की जद में हैं. ईरान ने खाड़ी के किन-किन देशों पर किया हमला? संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं. शहर के कुछ हिस्सों में धुआं उठता देखा गया. बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवीं फ्लीट के सेवा केंद्र पर भी मिसाइल हमला होने की सूचना है. बहरीन के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस हमले में ठिकाने को निशाना बनाया गया. ईरान ने कहा- अब नहीं कोई रेडलाइन कतर के रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि एक ईरानी मिसाइल को पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया गया. इससे संकेत मिलता है कि खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी और सहयोगी सैन्य तंत्र पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं. ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बयान दिया है कि मध्य पूर्व में मौजूद सभी अमेरिकी और इजरायली संपत्तियां और हित अब "वैध लक्ष्य" हैं. उन्होंने कहा, "इस आक्रामकता के बाद कोई रेड लाइन नहीं बची है और हर विकल्प मेज पर है."