samacharsecretary.com

गरीब देशों से भी पीछे भारत का पासपोर्ट — जानें क्या हैं गिरावट के बड़े कारण

नई दिल्ली दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार भारत का पासपोर्ट आज वैश्विक मंच पर एक कटु सत्य का सामना कर रहा है। इस साल की शुरुआत में एक भारतीय ट्रैवल इन्फ्लुएंसर का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने भारत के 'कमजोर पासपोर्ट' को लेकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि भूटान और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देश भारतीय पर्यटकों का स्वागत अधिक खुले दिल से करते हैं, लेकिन पश्चिमी और यूरोपीय देशों की यात्रा के लिए वीजा पाना अब भी बेहद कठिन है। दरअसल हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2025 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट 85वें स्थान पर खिसक गया है, जो पिछले साल के 80वें स्थान से पूरे पांच पायदान नीचे है। इसका मतलब है कि भारतीय नागरिक अब केवल 57 देशों में वीजा-मुक्त या वीजा-ऑन-अराइवल यात्रा कर सकते हैं, जो 2024 के 62 देशों से कम है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश के पासपोर्ट की स्थिति कई छोटे देशों से खराब है। उदाहरण के लिए, रवांडा (78वां), घाना (74वां) और अजरबैजान (72वां) – ये सभी भारत से आगे हैं, जबकि भारत विश्व की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। पिछले एक दशक में भारत की रैंक अक्सर 80 के आसपास ही रही है और 2021 में तो यह 90वें स्थान तक फिसल गई थी। वहीं एशियाई देश जैसे जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर लगातार शीर्ष स्थानों पर बने हुए हैं। सिंगापुर फिर शीर्ष पर, भारत 57 वीजा-फ्री देशों तक सीमित इस साल भी सिंगापुर शीर्ष स्थान पर है, जिसके नागरिक 193 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। दक्षिण कोरिया 190 देशों और जापान 189 देशों में वीज़ा-फ्री पहुंच रखते हैं। इसके मुकाबले भारतीय पासपोर्ट धारक केवल 57 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं – जो अफ्रीकी देश मॉरिटानिया के बराबर है। दोनों देशों को 85वां स्थान मिला है। पासपोर्ट ताकत का मतलब क्या है पासपोर्ट रैंकिंग का मतलब सिर्फ यात्रा की सुविधा नहीं, बल्कि एक देश की सॉफ्ट पावर का आईना है। हेनली एंड पार्टनर्स द्वारा जारी यह इंडेक्स इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के आंकड़ों पर आधारित है, जो 199 देशों के 227 गंतव्यों तक वीजा-मुक्त पहुंच मापता है। पासपोर्ट की ताकत किसी देश की सॉफ्ट पावर, कूटनीतिक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाती है। एक मजबूत पासपोर्ट का अर्थ है कि उसके नागरिकों को अधिक यात्रा स्वतंत्रता, बेहतर व्यापारिक अवसर और आसान वैश्विक गतिशीलता मिलती है। कमजोर पासपोर्ट का सीधा मतलब है ज्यादा कागजी प्रक्रिया, ऊंचे वीजा शुल्क, कम यात्रा सुविधाएं और लंबा इंतजार। देश बढ़ा रहे हैं आपसी वीजा साझेदारी दिलचस्प बात यह है कि भारत की रैंक गिरने के बावजूद वीजा-फ्री देशों की संख्या बढ़ी है। 2014 में, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता में आई थी, भारत के लिए 52 देश वीजा-फ्री थे। 2023 तक यह संख्या बढ़कर 60 और 2024 में 62 हो गई थी। हालांकि 2025 में यह घटकर फिर 57 रह गई। फिर भी, 2015 और 2025 दोनों में भारत की रैंक समान (85वीं) है। ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया भर में वैश्विक गतिशीलता तेजी से बढ़ रही है। हेनली एंड पार्टनर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2006 में औसत यात्री 58 देशों में बिना वीजा जा सकता था, जबकि 2025 में यह औसत 109 देशों तक पहुंच गया है। दुनिया के देश अब अपनी अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए द्विपक्षीय यात्रा समझौतों पर जोर दे रहे हैं। चीन इसका बेहतरीन उदाहरण है- 2015 में 94वें स्थान से 2025 में 60वें पर पहुंचा, क्योंकि उसने 50 से 85 देशों तक वीजा-मुक्त पहुंच बढ़ाई। भारत ने 2015 के 52 देशों से 2025 तक 57 तक पहुंच बढ़ाई, लेकिन अन्य देशों की तेज प्रगति ने रैंकिंग को नीचे धकेल दिया। भारत की रैंकिंग में गिरावट के कारण भारत की रैंक जुलाई 2025 में 77वीं थी, जब भारतीय नागरिकों को 59 देशों में वीजा-फ्री एंट्री मिल रही थी। लेकिन अक्टूबर तक दो देशों ने यह सुविधा वापस ले ली, जिससे रैंक गिरकर 85वीं पर पहुंच गई। बीबीसी के मुताबिक, भारत के पूर्व राजदूत अचल मल्होत्रा ने कहा कि पासपोर्ट की ताकत पर कई अन्य कारक भी असर डालते हैं- जैसे आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता, और देश की प्रवासन नीति। उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में भारतीयों को कई पश्चिमी देशों में बिना वीजा यात्रा की अनुमति थी, लेकिन 1980 के दशक में खालिस्तान आंदोलन और आंतरिक उथल-पुथल के बाद स्थिति बदल गई। अब कई देश आव्रजन (इमिग्रेशन) को लेकर अधिक सतर्क हैं। भारत से बड़ी संख्या में लोग विदेश जाकर बस जाते हैं या वीजा अवधि से अधिक रुकते हैं, जिससे देश की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है। वीजा नीतियों में सख्ती भी एक कारण है। पश्चिमी देशों जैसे यूएस, यूके और कनाडा ने अवैध प्रवास, ओवरस्टे और फर्जी आवेदनों के डर से भारतीय यात्रियों पर कड़े नियम थोपे हैं। रेडिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर चर्चाओं में कई यूजर्स का कहना है कि भारतीय पर्यटक अक्सर स्थानीय संस्कृति का सम्मान नहीं करते या बारगेनिंग की आदतें साथ ले जाते हैं, जिससे देश वीजा छूट देने से हिचकते हैं।  

असम में सियासी संग्राम! हिमंता बोले – ‘गौरव गोगोई पाकिस्तानी एजेंट’, दी खुली चुनौती

असम  असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर कांग्रेस सांसद पर उन्हें पाकिस्तानी एजेंट बताते हुए करारा हमला बोला है। सरमा ने कहा कि विदेशी ताकतों ने उन्हें अपने फायदे के लिए भारत में प्लांट किया है। सरमा ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर गोगोई के अंदर दम है तो मानहानि का मुकदमा करके दिखाएं। उन्होंने कहा कि गायक जुबिन गर्ग के परिवार को न्याय दिलवाने के बाद वह अपने इन आरोपों को भी साबित करके दिखाएंगे। सरमा ने कहा, गौरव गोगोई पाकिस्तानी एजेंट हैं। मेरे पास इसके सबूत हैं। उन्हें हमारे देश में विदेशी ताकतों ने प्लांट किया है। मैं तथ्यों के साथ यह बात कह रहा हूं। मैं एक दिन इसे साबित कर दूंगा। बता दें कि गौरव गोगोई परउनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न की वजह से पहले भी आरोप लग चुके हैं। आरोप है कि एलिजाबेथ के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएआई से लिंक हैं। कौन हैं एलिजाबेथ कोलबर्न यूके में जन्मीं एलिजाबेथ ने लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था में स्नातकोत्तर डिग्री पार्पत की है। 2013 में उनकी गौरव गोगोई से शादी हुई थी। गौरव गोगोई असम के पूर्व सीएम तरुण गेगोई के बेटे हैं। एलिजाबेथ जलवायु नीति को लेकर काम करती हैं। बीजेपी का आरोप है कि पाकिस्तान में योजना आयोग के सलाहकार रहे अली तौकीर शेख और कोलबर्न का लिंक है। अली तौकीर सीडीकेएन एशिया के डायरेक्टर भी रह चुके हैं जिसे आईएसआई का मुखौटा माना जाता है। सरमा ने कहा, एसआईटी ने जांच के बाद असम कैबिनेट के पास रिपोर्ट सौंप दी है। संवेदनशील जानकारी होने की वजह से अभी इसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। वहीं लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई ने इन आरोपों को शिरे से खारिज गिया है। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए यह अजेंडा चलाया जा रहा है।  

सोने की चोरी का पर्दाफाश! सबरीमाला मंदिर के पूर्व अधिकारी सहित तीन की गिरफ्तारी

तिरुवनंतपुरम सबरीमला मंदिर से कथित तौर पर सोना गायब होने की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) ने पूर्व कार्यकारी अधिकारी सुधीश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि कुमार 2019 में सबरीमला मंदिर के कार्यकारी अधिकारी थे। उन्हें तिरुवनंतपुरम स्थित अपराध शाखा कार्यालय में पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया।   कुमार पर मंदिर के आधिकारिक दस्तावेजों में द्वारपालक (संरक्षक देवता) की मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ने की बात छिपाने और उन्हें तांबे की चादरों के रूप में दर्ज करने का आरोप है। सूत्रों ने बताया कि कुमार 1990 के दशक से सबरीमाला से जुड़े थे और उन्हें पता था कि 1998 से 1999 के दौरान द्वारपालक की मूर्तियों सहित गर्भगृह पर सोने की परत चढ़ाई गई थी। एक अधिकारी ने बताया कि जब 2019 में द्वारपालक की प्लेट सोने की परत चढ़ाने के लिए मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को सौंपी गईं तो कुमार ने कथित तौर पर उन्हें तांबे की प्लेट के रूप में दर्ज किया जिससे आरोपी बाद में मौजूदा सोने की परत को हटा सका। कुमार इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीसरे व्यक्ति हैं। उनसे पहले पोट्टी और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी बी. मुरारी बाबू को गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि कुमार को बाद में न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाएगा। इस बीच, एसआईटी ने पोट्टी के करीबी सहयोगी वासुदेवन से भी पूछताछ की। जांच अधिकारियों ने बताया कि वासुदेवन ने द्वारपालक की मूर्तियों के अलावा स्वर्ण की परत चढ़े आसन को अपने पास रखा था, जिसे बाद में पिछले महीने तिरुवनंतपुरम में पोट्टी के एक रिश्तेदार के घर से जब्त किया गया था। एसआईटी द्वारपालक की उन मूर्तियों और श्रीकोविल (गर्भगृह) की चौखटों से सोने की चोरी से संबंधित दो मामलों की जांच कर रही है, जिन्हें 2019 में इलेक्ट्रोप्लेटिंग के लिए पोट्टी को सौंपा गया था।  

भारत से अमेरिका तक फैला मानव तस्करी नेटवर्क! विक्रांत-इंदु दंपति पर गिरी गाज

वाशिंगटन  भारत में जन्मे एक दंपति विक्रांत भारद्वाज और उनकी पत्नी इंदु रानी अब अमेरिकी वित्त मंत्रालय की जांच के घेरे में हैं। अमेरिका के ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने गुरुवार को इन दोनों को एक बड़े मानव तस्करी नेटवर्क का मास्टरमाइंड घोषित किया है। यह कार्रवाई उस समय सामने आई जब अमेरिका ने 'भारद्वाज ह्यूमन स्मगलिंग ऑर्गनाइजेशन' (HSO) के खिलाफ व्यापक प्रतिबंध लगाए। यह गिरोह कथित तौर पर हजारों अवैध प्रवासियों को अमेरिका में दाखिल कराने का काम करता था। इनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, OFAC ने बताया कि विक्रांत और इंदु रानी नई दिल्ली में जन्मे भारतीय नागरिक हैं, जो अब मेक्सिको के कैनकुन में एक आलीशान जीवन जी रहे थे। उनका नेटवर्क तीन देशों में फैला हुआ था, जिसमें कम से कम चार भारतीय कंपनियां और 16 फ्रंट एंटिटीज शामिल थीं। इनकी मदद से गिरोह मेक्सिको से अमेरिका तक क्रॉस-कॉन्टिनेंटल स्मगलिंग रूट संचालित करता था। अमेरिका ने अब इन दोनों के सभी अमेरिकी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है और अमेरिकी नागरिकों व कंपनियों को इनके साथ किसी भी वित्तीय लेनदेन से प्रतिबंधित किया गया है। तस्करी का खाका अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार, गिरोह का कामकाज बेहद संगठित था। प्रवासी यात्रियों को पहले मेक्सिको के कैनकुन इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचाया जाता था, जहां एयरपोर्ट के कुछ अधिकारियों को रिश्वत देकर प्रक्रिया आसान की जाती थी। इसके बाद उन्हें होटलों और हॉस्टलों में ठहराया जाता, जो स्वयं भारद्वाज गिरोह के नियंत्रण में थे। फिर इन प्रवासियों को लक्जरी यॉट्स और जमीनी रास्तों से सिनालोआ कार्टेल की मदद से अमेरिका-मेक्सिको सीमा तक पहुंचाया जाता था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह नेटवर्क विशेष रूप से हाई-वैल्यू क्लाइंट्स पर केंद्रित था- यानी एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण अमेरिका के ऐसे लोग जो अमेरिका में दाखिल होने के लिए हजारों डॉलर तक देने को तैयार रहते थे। भारत में बनी कंपनियां बनी मनी लॉन्ड्रिंग का जरिया OFAC की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में स्थित कई कंपनियां इस नेटवर्क की मनी लॉन्ड्रिंग मशीन के रूप में काम कर रही थीं। इनमें वीणा शिवानी एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी रियल एस्टेट कंपनियां शामिल हैं, जिनके जरिए गैरकानूनी कमाई को प्रॉपर्टी डील्स के जरिए साफ दिखाया जाता था। इसी तरह, यूएई में स्थित ब्लैक गोल्ड प्लस एनर्जीज ट्रेडिंग एलएलसी नाम की कंपनी ऊर्जा कारोबार के नाम पर तस्करी की कमाई को छिपाने का काम करती थी। मेक्सिको में सहयोगी और सुरक्षा नेटवर्क मेक्सिकन अधिकारियों ने खुलासा किया है कि भारद्वाज दंपति ने स्थानीय सहयोगियों की एक मजबूत टीम बना रखी थी। इसमें जोसे जर्मन वलादेज फ्लोरेस, कैनकुन के एक व्यापारी शामिल थे। पूर्व क्विंटाना रू पुलिस अधिकारी जॉर्ज अलेजांद्रो मेंडोजा विललेगास के एयरपोर्ट और सुरक्षा विभागों में गहरे संपर्क बताए गए हैं। गिरोह का मेक्सिको मुख्यालय बाहरी तौर पर एक कानूनी व्यापारिक साम्राज्य जैसा दिखता था- जिसमें यॉट सेवाएं, सुपरमार्केट, रेस्टोरेंट और ऊर्जा व्यापार जैसे कारोबार चल रहे थे। मगर अधिकारियों के मुताबिक, यह सब नकदी के प्रवाह और मादक पदार्थों की तस्करी को छिपाने का तरीका था। अमेरिका की सख्त कार्रवाई अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अंडरसेक्रेटरी फॉर टेररिज्म एंड फाइनेंशियल इंटेलिजेंस, जॉन के. हर्ली, ने कहा कि यह फैसला इस नेटवर्क की क्षमता को बाधित करता है, जो अवैध रूप से प्रवासियों को अमेरिका लाने का काम कर रहा था। ट्रंप प्रशासन अमेरिकी लोगों की सुरक्षा के लिए ऐसे ट्रांसनेशनल अपराध संगठनों को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, अभी तक किसी गिरफ्तारी या औपचारिक आपराधिक मुकदमे की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यह कार्रवाई अमेरिका, मेक्सिको और भारत की एजेंसियों के संयुक्त अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। क्या होगा आगे? OFAC की इस घोषणा के बाद, भारद्वाज दंपति की सभी अमेरिकी संपत्तियां तुरंत फ्रीज हो गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बैंकों को चेतावनी दी गई है कि अगर वे इनसे जुड़े लेनदेन करेंगे तो उन्हें भी सेकेंडरी सैंक्शंस का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला भारतीय नागरिकों से जुड़ी अब तक की सबसे बड़ी मानव तस्करी जांचों में से एक माना जा रहा है- जो यह दिखाता है कि किस तरह भारतीय कंपनियों का दुरुपयोग कर अंतरराष्ट्रीय तस्करी रैकेट संचालित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री विजयन की घोषणा: केरल में अब नहीं है कोई ‘अत्यंत गरीब’, सरकार ने मिटाई गरीबी की रेखा

केरल  केरल की चर्चा शिक्षा के क्षेत्र में अक्सर होती रही है। अब यह राज्य गरीबी दूर करने के लिए जाना जाने लगा है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने शनिवार को राज्य विधानसभा में घोषणा की कि केरल ने चरम गरीबी (Extreme Poverty) को समाप्त कर दिया है। वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार का दावा है कि ऐसा करने वाला केरल देश का पहला राज्य है। मुख्यमंत्री ने यह ऐलान राज्य गठन दिवस के अवसर पर विधानसभा के विशेष सत्र में किया।   2021 में शुरू की गई चरम गरीबी उन्मूलन परियोजना के तहत राज्य सरकार ने 64,006 परिवारों को अत्यंत गरीब के रूप में चिन्हित किया था। इन परिवारों को चार वर्ष तक चलने वाली इस योजना के अंतर्गत आवास, भोजन, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी सहायता दी गई। स्थानीय स्वशासन मंत्री एम. बी. राजेश ने बताया कि नीति आयोग के अध्ययन में पहले ही यह पाया गया था कि केरल की गरीबी दर देश में सबसे कम 0.7% है। उन्होंने कहा, “हमने सर्वेक्षणों के जरिए 64,006 परिवारों के 1,03,099 व्यक्तियों को चरम गरीबी में पाया और उन्हें योजनाओं से जोड़ा।” विपक्षी कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने सरकार के दावे को पूर्ण धोखाधड़ी बताते हुए सदन से वॉकआउट किया। विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान संसदीय नियमों का उल्लंघन है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री विजयन ने कहा, “यूडीएफ जब धोखाधड़ी कहता है, तो वह अपने आचरण की बात कर रहा है। हमने वही किया है जो हमने कहा था।”  

अजीत डोभाल ने कहा— अब नहीं बची आतंक की जमीन, नक्सलवाद भी ढलान पर

नई दिल्ली  राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने कहा कि भारत में आतंकवाद पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है और जम्मू-कश्मीर को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों में अंतिम बड़ा आतंकी हमला वर्ष 2013 में हुआ था। सरदार पटेल स्मृति व्याख्यान में बोलते हुए डोभाल ने कहा, “तथ्य स्पष्ट हैं और उनसे इनकार नहीं किया जा सकता। देश में आतंकवाद को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया गया है। 1 जुलाई 2005 को बड़ा हमला हुआ था और अंतिम घटना 2013 में। इसके बाद, जम्मू-कश्मीर को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों में कोई आतंकी हमला नहीं हुआ।”   उन्होंने कहा कि इस दौरान दुश्मनों की गतिविधियां जारी रहीं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने कई प्रयासों को नाकाम किया, लोगों को गिरफ्तार किया और विस्फोटक बरामद किए। डोभाल ने बताया कि वामपंथी उग्रवाद भी 2014 की तुलना में अब घटकर सिर्फ 11% क्षेत्रों तक सीमित रह गया है। उन्होंने कहा, “ज्यादातर जिले, जिन्हें पहले उग्रवाद प्रभावित घोषित किया गया था। अब सुरक्षित हैं।” एनएसए ने कहा कि भारत ने एक ऐसी ‘डिटरेंस क्षमता’ विकसित की है जो किसी भी राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे का उचित जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा कि सुशासन के लिए महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले वर्गों की सुरक्षा व सशक्तिकरण बेहद आवश्यक है। डोभाल ने कहा, “महिलाओं की सुरक्षा, समानता और सशक्तिकरण आधुनिक शासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।”  

24 कैरेट गोल्ड से बना टॉयलेट जल्द होगा नीलाम, कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश!

वाशिंगटन  आपने पेंटिंग या पुरानी कलाकृतियों की नीलामी की खबरें अकसर सुनी होंगी लेकिन शायद ही कभी टॉयलट शीट की नीलामी की बात सोची भी हो। लंदन में बना एक बेहद कीमती सोने का टॉइलट सीट नीलामी के लिए तैयार है। खास बात यह है कि यह शीट एकदम ठोस सोने से बनी हुई है। मशहूर इटैलियन कलाकार मॉरिजियो कैटेलन ने इसे बनाया है। गौर करने वाली बात है कि उन्होंने इसका नाम 'अमेरिका' रखा है। न्यूयॉर्क के सॉथबी नीलामी घर में इस गोल्ड टॉइलेट की नीलामी होगी। इसकी शुरुआती कीमत ही 10 मिलियन डॉलर यानी करीब 83 करोड़ रुपये रखी गई है। कैटेलन ना कहना है कि यह टॉइलट संदेश देता है कि अमीर लोगों, दिखावे की जिंदगी का कोई फायदा नहीं है। टॉइलेट चाहे सोने का हो या फिर मिट्टी का, उसमें काम एक ही हो सकता है। यह एक कलाकृति ही है जो कि समाज में ऊंच-नीच और गरीब-अमीर के फर्क को रेखांकित करती है। बनाने में लगा 101 किलो सोना इस टॉइलेट शीट को बनाने में करीब 101 किलो सोने का इस्तेमाल किया गया है। जानकारी के मुताबिक टॉइलट केवल डिजाइनर नहीं बल्कि पूरी तरह से फंक्शनल है। 2019 में ब्लेनहीम पैलेस में भी इसी तरह का एक टॉइलट रखा गया था जो कि चोरी हो गया था। इसके बाद इसकी काफी चर्चा हुई थी। 2016 में इसे गगनहाइम म्यूजियम में लगाया गया था और लोगों के लिए खोला गया था। तब एक लाख से ज्यादा लोगों ने इसका इस्तेमाल किया था। डोनाल्ड ट्रंप को भी ऑफर दिया गया था कि वह इसे वाइट हाउस में रख सकते हैं। हालांकि उन्होंने ऑफर ठुकरा दिया। इस टॉइलट को बनाने वाले मॉरिजियो कैटेन का नाम कई बार विाद में रहा है। उन्होंने एक बार एक केले को दीवार से टेप लगाकर चिपकाकर कमीडियन नाम से बेच दिया था। एक कलाकृति में उन्होंने घुटनों पर बैठे हुए हिटलर को दिखाया था। यह 17.2 मिलियन डॉलर में बिकी थी।  

IMD अलर्ट: नवंबर में गिरेगी झमाझम बारिश, दिन रहेंगे ठंडे लेकिन रातें रहेंगी गर्म

नई दिल्ली  भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने नवंबर महीने के लिए अपना मौसमी पूर्वानुमान जारी कर दिया है। विभाग के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से ज्यादा वर्षा होने की संभावना है, जबकि दिन के तापमान में कमी आएगी और रातें अपेक्षाकृत गर्म रहेंगी। यह पूर्वानुमान ला नीना प्रभाव, उत्तर-पश्चिमी हवाओं और समुद्री स्थितियों पर आधारित है, जो सर्दियों की शुरुआत में मौसम को प्रभावित करेगा। IMD) ने अनुमान जताया है कि तमिलनाडु, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के कुछ भागों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक, नवंबर में जारी रहने वाली वर्षा गतिविधियों के कारण दिन का तापमान सामान्य से नीचे रहेगा, जिससे दिन के समय मौसम ठंडा महसूस होगा। लेकिन बादल छाए रहने और आसमान में ओवरकास्ट स्थितियों के कारण रात का तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है, जिससे नवंबर की रातें अपेक्षाकृत गर्म रहेंगी। दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्व मॉनसून से सामान्य वर्षा की उम्मीद रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम विभाग ने बताया कि सर्दियों के महीनों में दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में उत्तर-पूर्व मॉनसून के दौरान सामान्य वर्षा की संभावना है। यह मॉनसून तमिलनाडु के लिए मुख्य वर्षा ऋतु माना जाता है। IMD ने कहा कि तमिलनाडु, कराईकल, पुडुचेरी, तटीय आंध्र प्रदेश, यानम, रायलसीमा, केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में नवंबर माह में सामान्य वर्षा होने की उम्मीद है, जो लंबी अवधि के औसत के 77 से 123 प्रतिशत के बीच रह सकती है। अक्टूबर बना हाल के वर्षों का सबसे अधिक बरसाती महीना देशभर में अक्टूबर माह इस साल हाल के वर्षों में सबसे अधिक बरसाती महीनों में से एक साबित हुआ। अक्टूबर की शुरुआत में पूर्वी भारत में बने गहरे डिप्रेशन और महीने के अंत में आए चक्रवात ‘मोंथा’ ने वर्षा को काफी बढ़ा दिया। पिछले महीने उत्तर हिंद महासागर बेसिन (जिसमें बंगाल की खाड़ी और अरब सागर शामिल हैं) में दो चक्रवात आए- ‘शक्ति’ और ‘मोंथा’। उल्लेखनीय है कि जनवरी से सितंबर 2025 तक इस बेसिन में कोई चक्रवात नहीं बना था। IMD के महानिदेशक मृत्युंजय मोहापात्रा ने बताया कि 2025 कोई अपवाद नहीं है। इससे पहले भी 1938, 1949, 1980, 1983, 1984, 1986, 1988, 1993, 1995, 2011 और 2012 में जनवरी से सितंबर के बीच कोई चक्रवात विकसित नहीं हुआ था। 24 घंटे में 350 मिमी बारिश अक्टूबर 28 से 30 के बीच चक्रवात ‘मोंथा’ के कारण तटीय आंध्र प्रदेश, यानम, ओडिशा, रायलसीमा, तेलंगाना और गंगीय पश्चिम बंगाल में 24 घंटे में करीब 350 मिमी तक अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। देशभर में अक्टूबर माह में औसतन 112.2 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य से लगभग 50% अधिक थी। यह 2001 के बाद दूसरा सबसे अधिक बरसाती अक्टूबर रहा और 1901 के बाद से 16वां सबसे अधिक वर्षा वाला अक्टूबर बना। उत्तर-पश्चिम भारत, जहां अक्टूबर तक मॉनसून पूरी तरह से वापस लौट जाता है, ने भी इस बार 160 मिमी की औसत वर्षा दर्ज की- जो 2001 के बाद तीसरी सबसे अधिक और 1901 के बाद दसवीं सबसे अधिक रही। मौसम विभाग के अनुसार, नवंबर में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है, जिससे देश के अधिकांश हिस्सों में ठंडक भरा मौसम महसूस किया जा सकता है, हालांकि रातें सामान्य से कुछ अधिक गर्म रह सकती हैं।  

IRCTC नियमों में बड़ा बदलाव: लोअर बर्थ पर मिलेगी प्राथमिकता, यात्रियों के लिए नया स्लीप टाइम तय

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टिकट बुकिंग प्रक्रिया को और आसान और पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इस साल की शुरुआत में रेलवे ने ‘RailOne’ ऐप लॉन्च किया था, जो एक सुपर ऐप के रूप में कार्य करता है। इस ऐप के माध्यम से यात्री न केवल आरक्षित बल्कि अनारक्षित टिकट भी बुक कर सकते हैं। इसके साथ ही यह ऐप रेलवे से जुड़ी विभिन्न यात्री सेवाओं के लिए एक वन-स्टॉप सॉल्यूशन के रूप में काम करता है।   अक्सर यात्री ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान 'लोअर बर्थ प्रेफरेंस' का विकल्प चुनने के बावजूद साइड अपर, मिडिल या अपर बर्थ पर सीट मिलने की शिकायत करते हैं। ऐसे में यात्रियों के लिए यह जरूरी है कि वे भारतीय रेलवे के नए लोअर बर्थ आरक्षण नियमों को अच्छी तरह समझें। भारतीय रेलवे के कंप्यूटरीकृत आरक्षण प्रणाली में वरिष्ठ नागरिकों, 45 वर्ष से अधिक आयु की महिला यात्रियों तथा गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ आवंटित करने की विशेष व्यवस्था की गई है। हालांकि, यह सुविधा सीट की उपलब्धता पर निर्भर करती है। टीटीई को भी मिला अधिकार रेलवे के नियमों के अनुसार, यदि बुकिंग के समय लोअर बर्थ उपलब्ध नहीं होती और किसी वरिष्ठ नागरिक या पात्र महिला को ऊपरी या मध्य बर्थ दी जाती है, तो ट्रेन में टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE) को अधिकार है कि यदि कोई लोअर बर्थ यात्रा के दौरान खाली होती है, तो उसे ऐसे यात्रियों को आवंटित कर सके। लोअर बर्थ बुकिंग के लिए विशेष विकल्प ऑनलाइन टिकट बुकिंग करते समय यात्रियों के पास यह विकल्प भी होता है कि वे 'बुक ओनली इफ लोअर बर्थ इज अवेलेबल' (केवल तभी बुक करें जब लोअर बर्थ उपलब्ध हो) को चुनें। यदि यात्री यह विकल्प चुनता है और लोअर बर्थ उपलब्ध नहीं होती, तो टिकट बुक नहीं किया जाएगा। इससे यात्रियों को अपनी सीट पसंद के अनुसार यात्रा की सुविधा मिल सकती है। लोअर बर्थ पर बैठने और सोने के नियम भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, रिजर्व्ड कोचों में रात 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक सोने का समय निर्धारित है। इस अवधि में यात्रियों को अपनी निर्धारित बर्थ पर सोने की अनुमति होती है। दिन के समय में सीट पर बैठने की व्यवस्था रहती है। विशेष रूप से, RAC टिकट वाले यात्रियों के लिए यह व्यवस्था है कि साइड लोअर बर्थ पर RAC यात्री और साइड अपर बर्थ पर बुक यात्री दोनों दिन के समय बैठने के लिए सीट शेयर करेंगे। लेकिन रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लोअर बर्थ का अधिकार केवल लोअर बर्थ वाले यात्री का होगा। अग्रिम आरक्षण अवधि (ARP) में बदलाव रेलवे ने हाल ही में आरक्षित टिकटों की अग्रिम आरक्षण अवधि (ARP) को 120 दिनों से घटाकर 60 दिन कर दिया है। यानी अब यात्री अपनी यात्रा की तारीख से 60 दिन पहले तक टिकट बुक कर सकते हैं।  

जाति जनगणना आज से शुरू, अब लोग खुद भर सकेंगे अपनी सामाजिक जानकारी ऑनलाइन

नई दिल्ली  भारत में पहली बार डिजिटल और जाति आधारित जनगणना की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए जनगणना 2027 के पहले चरण का प्री-टेस्ट (पूर्व परीक्षण) आज से शुरू होने वाला है। इस दौरान गणनाकर्मी (एन्यूमरेटर) अपने-अपने क्षेत्रों में प्रमुख नागरिकों के घर जाकर उन्हें ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से विवरण भरने में मदद करेंगे। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का कहना है कि यह अभ्यास स्व-गणना मॉड्यूल की प्रभावशीलता जांचने के लिए किया जा रहा है। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी और स्वतंत्र भारत में पहली बार जाति आधारित गणना भी शामिल की जाएगी। अधिकारियों के हवाले से कहा कि स्व-गणना पोर्टल और मोबाइल ऐप को 1 से 10 नवंबर और 10 से 30 नवंबर के बीच सीमित क्षेत्रों में परखा जाएगा। इनका लिंक सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया जाएगा, ताकि उपयोगिता परीक्षण बिना किसी बाधा के हो सके। इस चरण में घरों से संबंधित लगभग 30 प्रश्न पूछे जाएंगे। जैसे भवन संख्या, मकान की छत और फर्श का प्रमुख पदार्थ, परिवार प्रमुख का नाम और लिंग, घर में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या, पेयजल का मुख्य स्रोत, बिजली व्यवस्था, शौचालय की उपलब्धता, खाना पकाने में उपयोग होने वाला ईंधन, टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल, वाहन आदि की जानकारी ली जाएगी। रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त ने 16 अक्टूबर को अधिसूचना जारी कर बताया था कि हाउस लिस्टिंग एंड हाउसिंग जनगणना (HLO) का यह प्री-टेस्ट 10 से 30 नवंबर तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चयनित क्षेत्रों में किया जाएगा, जबकि स्व-गणना की सुविधा 1 से 7 नवंबर तक उपलब्ध रहेगी। अधिकारी के अनुसार, “एन्यूमरेटर पहले चयनित नागरिकों को पोर्टल का पता साझा करेंगे ताकि वे स्वयं ऑनलाइन प्रश्नावली भर सकें। इसके बाद 10 से 30 नवंबर के बीच वे उन्हीं घरों का दोबारा दौरा करेंगे और शेष घरों की जानकारी मोबाइल ऐप पर एकत्र करेंगे।” इन दोनों मॉड्यूल्स को जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली से जोड़ा गया है। कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित जनगणना 2021 को अब जनगणना 2027 के रूप में आयोजित किया जाएगा, जिसकी अंतिम गिनती 1 अप्रैल 2026 से 28 फरवरी 2027 के बीच पूरी होगी। पिछली जनगणना प्रक्रिया में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को भी अद्यतन किया गया था, लेकिन सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि इस बार NPR को अपडेट नहीं किया जाएगा। NPR का डेटा वर्ष 2015-16 में अंतिम बार संशोधित किया गया था। सूत्रों के अनुसार, जाति आधारित प्रश्नों की रूपरेखा अभी अंतिम रूप में तय नहीं की गई है, इसलिए फिलहाल केवल HLO चरण का परीक्षण किया जा रहा है। 2019 में प्रस्तावित जनगणना 2021 के लिए ऐसा परीक्षण 76 जिलों में 26 लाख लोगों को शामिल कर किया गया था।