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मुंबई में यात्रियों की मुसीबतें बढ़ीं: Ola-Uber ड्राइवरों की ये हैं प्रमुख मांगें

मुंबई मुंबई में ओला  और उबर ड्राइवरों की हड़ताल आज लगातार चौथे दिन भी जारी रही, जिससे शहर के लाखों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र गिग वर्क्स मंच के नेतृत्व में चल रहे इस विरोध प्रदर्शन के कारण लगभग 90% ऐप-आधारित कैब सड़कों से नदारद हैं। इस हड़ताल से जूझ रहे ड्राइवर आज शुक्रवार, 18 जुलाई को सुबह 10 बजे मुंबई के ऐतिहासिक आज़ाद मैदान में धरना प्रदर्शन करने वाले हैं। मुंबई एयरपोर्ट पर यात्रियों की सबसे ज़्यादा मुश्किल इस हड़ताल का सबसे बुरा असर मुंबई एयरपोर्ट पर देखने को मिल रहा है। यहां यात्रियों को अपनी फ्लाइट पकड़ने या घर पहुंचने के लिए लंबे इंतज़ार और बहुत ज़्यादा किराए का सामना करना पड़ रहा है। हालात को देखते हुए, एयरपोर्ट अथॉरिटी ने सोशल मीडिया पर एक यात्रा सलाह (Travel Advisory) जारी की है। इसमें यात्रियों से अपील की गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें और परिवहन के लिए कोई दूसरा इंतज़ाम करें। हड़ताल के कारण शहर भर में बसों, ऑटो-रिक्शा और मेट्रो सेवाओं में भीड़ बढ़ गई है। ओला-उबर ड्राइवर क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन? जानें उनकी मुख्य मांगें मुंबई और महाराष्ट्र में ओला-उबर ड्राइवर उचित वेतन और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगें ये हैं: ➤ किराए में बराबरी: ड्राइवर चाहते हैं कि उनका किराया पारंपरिक काली-पीली टैक्सियों के बराबर हो। ➤ बाइक टैक्सियों पर प्रतिबंध: वे बाइक टैक्सी सेवाओं (जैसे रैपिडो) पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। ➤ परमिट की सीमा: ऑटो और टैक्सी परमिट की संख्या सीमित की जाए। ➤ कम कमीशन: कैब एग्रीगेटर (ओला-उबर) उनसे जो कमीशन लेते हैं, उसे कम किया जाए। ➤ कल्याण बोर्ड और एक्ट: वे ऐप-आधारित ड्राइवरों के लिए एक कल्याण बोर्ड बनाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए 'महाराष्ट्र गिग वर्कर्स एक्ट' लागू करने की भी मांग कर रहे हैं। सरकार से बातचीत विफल, हड़ताल जारी रहने के आसार राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के साथ हाल ही में हुई बैठक के बावजूद, अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। टाइम्स नाउ न्यूज के अनुसार, सरनाईक ने कहा, "हमने सब कुछ समझाया, लेकिन विरोध अभी भी जारी है। यह सही नहीं है।"  

राजनीतिक भूचाल: संजय राउत बोले- महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था खत्म, लगे राष्ट्रपति शासन

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा में गुरुवार को भाजपा के विधायक गोपीचंद पडलकर और शरद पवार की एनसीपी के नेता जितेंद्र अव्हाड के समर्थकों में झड़प गई थी। इस हिंसक झड़प का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें दिखता है कि कई नेता मुक्के चला रहे हैं और दूसरे का कॉलर पकड़ा हुआ है। विधानसभा के अंदर इस तरह के बवाल से सवाल खड़े हुए हैं। आमतौर पर महाराष्ट्र की राजनीति को समन्वय और सद्भाव के लिए जाना जाता है। दूसरे दलों के नेताओं से भी लोग यहां बहुत सद्भाव से मिलते रहे हैं। ऐसे में इस तरह की झड़प की खूब चर्चा है। इस बीच विपक्ष ने राष्ट्रपति शासन की ही मांग कर दी है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नेता संजय राउत का कहना है कि प्रदेश में कानून और व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है। ऐसे में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए। संजय राउत ने शुक्रवार को कहा, 'महाविकास अघाड़ी के नेता आज राज्यपाल से मिलेंगे और बताएंगे कि विधानसभा में क्या हुआ है। राज्य में राष्ट्रपति शासन ही लग जाना चाहिए। राज्यपाल को विधानसभा में हुई गैंगवार की रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजनी चाहिए।' बता दें कि इस मामले में असेंबली के स्पीकर राहुल नार्वेकर फैसला सुनाने वाले हैं। उन्हें इस घटना की रिपोर्ट दी गई थी और अब वह दोपहर को 1:30 बजे फैसला देंगे। यही नहीं संजय राउत ने तो यहां तक कहा कि लोग हथियारों के साथ विधानसभा में घुसे और उनका इरादा गैंगवार का था। इस घटना से पूरी साजिश खुलकर आ गई है, जिसके तहत एनसीपी के विधायक जितेंद्र अव्हाड को ये लोग मार डालना चाहते थे। आखिर किन लोगों की मंजूरी से ये लोग विधानसभा के अंदर चले गए। राज्य में राष्ट्रपति शासन के लिए यह मामला काफी है। उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस के शासन में महाराष्ट्र विधानसभा की स्थिति बेहद खराब हो गई है। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा में झड़प की देश भर में चर्चा हो रही है और इसका वीडियो वायरल है। इस मामले में पुलिस अब तक दोनों विधायकों के एक-एक समर्थक को अरेस्ट कर चुकी है।  

महाराष्ट्र विधानसभा में हंगामे पर कुणाल कामरा का कटाक्ष, बोले- “करेंगे दंगे चारों ओर”

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा में हुए हंगामे और हाथापाई की घटना पर स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने चुटकी ली है। इसका मजाक उड़ाते हुए सोशल मीडिया पर उन्होंने एक वीडियो पोस्ट किया और इसके कैप्शन में 'लॉब्रेकर्स' लिखा। वीडियो में उन्होंने विधानसभा में हुई झड़प के क्लिप्स का इस्तेमाल किया और अपने विवादास्पद गाने 'हम होंगे कामयाब' को बैकग्राउंड में रखा। वीडियो में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के फुटेज भी शामिल किए गए हैं, जो सत्ताधारी महायुति गठबंधन पर कटाक्ष मालूम पड़ता है। कुणाल कामरा ने बीते मार्च में अपने स्टैंडअप शो 'हम होंगे कामयाब' वाला गाना गाया था, जिसमें एकनाथ शिंदे को 'गद्दार' कहा गया था। इस शो के बाद भारी हंगामा मच गया। शिवसेना की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं ने मुंबई के खार इलाके में हेबिटेट कॉमेडी क्लब में तोड़फोड़ की, जहां कामरा का शो आयोजित हुआ था। मालूम हो कि भारी हंगामे के बावजूद उन्होंने माफी मांगने से इनकार किया था और हिंसा की निंदा की थी। अब कामरा का यह नया वीडियो उनकी राजनीतिक टिप्पणियों का ही हिस्सा माना जा रहा है। हाथापाई मामले में आव्हाड और पडलकर के समर्थक गिरफ्तार महाराष्ट्र विधान भवन परिसर हाथापाई मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड और भाजपा के विधायक गोपीचंद पडलकर के एक-एक समर्थक को गिरफ्तार किया गया है। गुरुवार को विधान भवन के अंदर आव्हाड और पडलकर के समर्थकों के बीच विवाद हो गया था। इससे एक दिन पहले दोनों विधायकों के बीच तीखी बहस हुई थी। अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने आव्हाड के समर्थक नितिन देशमुख और पडलकर के समर्थक ऋषिकेश टाकले को गिरफ्तार कर उनका बयान दर्ज कर लिया है। दोनों को दक्षिण मुंबई के मरीन ड्राइव पुलिस थाने ले जाया गया, जहां उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि दोनों को बाद में अदालत में पेश किया जाएगा। दोनों आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।  

अमरनाथ यात्रा के दौरान बड़ा हादसा: ट्रक की टक्कर से यात्री गंभीर रूप से घायल

ऊधमपुर ऊधमपुर से करीब 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित बट्टल बालियां चैक के समीप एक तेज गति से चल रहे ट्रक द्वारा अनियंत्रित होकर एक अमरनाथ यात्रा पर जा रही इनोवा गाड़ी को हिट कर देने से गाड़ी में सवार 5 श्रद्धालु घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए जीएमसी ऊधमपुर में भर्ती करवाया गया है। जानकारी के अनुसार ऊधमपुर से तेज गति जा रहा एक ट्रक जैसे ही बट्टल बालियां चैक पर पहुंचा कि चालक द्वारा उस पर से नियंत्रण खो दिया, जिससे ट्रक दूसरे साइड से अमरनाथ यात्रा पर जा रही एक इनोवा गाड़ी नंबर (यू.पी,81,वी.एन-3701) को हिट कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया तथा खुद एक साथ लगते घर का गेट तोड़ घर में घुस गया। गनीमत यह रही उस समय घर के बाहर कोई नहीं था। वहीं इनोवा गाड़ी में सवार 08 श्रद्धालुओं में से 05 श्रद्धालुओं को गंभीर चोटें आईं जोकि उत्तर प्रदेश के रहने वाले बताए जा रहे हैं। जिन्हें तुरंत पुलिस व सीआरपीएफ की मदद से जीएमसी में भर्ती करवाया गया, जहां पर घायलों का उपचार जारी था। वहीं पुलिस ने ट्रक चालक को गिरफ्तार कर लिया है तथा इस संबंध में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई आरंभ कर दी है। 

शमी की पत्नी और बेटी पर केस दर्ज, हत्या की साजिश में दोनों पर लगे आरोप

 बीरभूम भारतीय स्टार गेंदबाज मोहम्मद शमी की अलग हो चुकीं पत्नी हसीन जहां नए विवाद में फंसती नजर आ रही हैं। खबरें हैं कि उनके और बेटी अर्शी जहां के खिलाफ हत्या की प्रयास का केस दर्ज कराया गया है। हालांकि, इस पर हसीन की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। उनपर पड़ोसी पर हमला करने के आरोप हैं। एक वीडियो के जरिए ऐसा दावा किया जा रहा है। एक वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि हसीन जहां अपने पड़ोसियों से झगड़ा कर रही हैं। वीडियो पश्चिम बंगाल के बीरभूम का बताया जा रहा है। खबरें हैं कि हसीन जहां और उनकी बेटी अर्शी जहां ने एक जमीन विवाद में पड़ोसियों के साथ मारपीट भी की। दावा किया जा रहा है कि हसीन जहां गैर कानूनी ढंग से जमीन पर कब्जा करना चाहती हैं, जिसका पड़ोसी विरोध कर रहे थे। NCMIndiaa की तरफ से एक्स पर वीडियो शेयर किया गया है। इसमें कहा गया है, 'BNS की धाराओं 126(2), 115(2), 117(2), 109, 351(3) और 3(5) के तहत मोहम्मद शमी की अलग हो चुकीं पत्नी हसीन जहां और उनकी पहली शादी से हुई बेटी अर्शी जहां के खिलाफ पड़ोसी डालिया खातून ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के सूरी टाउन में केस दर्ज कराया है।' आगे कहा गया, 'झगड़ा तब शुरू हुआ, जब हसीन जहां ने सूरी के 5 नवंबर वार्ड में विवादित प्लॉट पर निर्माण शुरू किया। यह कथित तौर प उनकी बेटी के नाम पर है। आरोप हैं कि हसीन और उनकी बेटी ने डालिया खातून के साथ बेरहमी से मारपीट की है।' मोहम्मद शमी से विवाद कलकत्ता उच्च न्यायालय ने क्रिकेटर मोहम्मद शमी को मंगलवार को निर्देश दिया कि वह अपनी अलग रह रही पत्नी हसीन जहां और बेटी को कानूनी लड़ाई के दौरान हर महीने चार लाख रुपये गुजारा भत्ता दें। जहां ने जिला सत्र अदालत के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसमें क्रिकेटर को 2023 में अपनी पत्नी को 50,000 रुपये और अपनी बेटी को 80,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।

निमिषा प्रिया मामला: बचाव के प्रयासों पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का जवाब

नई दिल्ली यमन में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद से भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के परिजन उनके बचाव में जुटे हैं। अब तक इसे लेकर कोई गुड न्यूज नहीं मिल सकी है, जबकि कई सामाजिक संस्थाएं भी इसमें ऐक्टिव हैं। इस बीच शुक्रवार को एक बार फिर से इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई। अदालत में केंद्र सरकार ने कहा है कि फिलहाल निमिषा की सजा को स्थगित कर दिया गया है। उन्हें बचाने के लिए प्रयास जारी हैं। केंद्र सरकार ने कहा कि हम चाहते हैं कि निमिषा प्रिया सकुशल भारत लौट आएं। इस बीच याचिकाकर्ता ने ब्लडमनी के सवाल पर कहा कि पहले तो उन्हें माफी मिल जाए। उसके बाद ही ब्लडमनी की बात होगी। केंद्र सरकार के प्रयासों और उसके जवाब से अदालत भी संतुष्ट दिखी। बेंच ने अब इस केस की अगली सुनवाई 14 अगस्त को करने का फैसला लिया है। कोर्ट ने कहा कि यमन में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स की सरकार हर संभव मदद कर रही है। बता दें कि निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को यमन में सजा-ए-मौत दी जानी थी। केरल के एक ग्रैंड मुफ्ती अबू बकर मुसलियार के माध्यम से सरकार ने मध्यस्थता का एक प्रयास किया था। इसके चलते फिलहाल सजा को टाला गया है। पीड़ित परिवार और निमिषा के परिजनों के बीच डील का मौका इससे मिला है। लेकिन अब तक राहत की खबर का इंतजार ही है। निमिषा प्रिया को उनके बिजनेस पार्टनर रहे तलाल आबदो मेहदी की हत्या का दोषी ठहराया गया है। वहीं निमिषा का पक्ष है कि तलाल आबदो मेहदी उनका उत्पीड़न कर रहा था और उनसे शादी के फर्जी दस्तावेज तक बनवा लिए थे। उनसे बिजनेस में बेजा हक मांग रहा था और उत्पीड़न करते हुए पासपोर्ट तक जब्त कर लिया था। वह पासपोर्ट लेने के लिए ही उससे मिली थीं और उसे ड्रग्स दिया था ताकि मौका पाकर पासपोर्ट ले लें। हालांकि ड्रग्स की ओवरडोज से तलाल की मौत ही हो गई। इसी मामले में निमिषा प्रिया को सजा-ए-मौत दी गई है। हालांकि यमन में ब्लड मनी का एक नियम है, जिसके भरोसे उम्मीद की जा रही है कि उन्हें बचा लिया जाएगा।  

निमिषा प्रिया मामला: बचाव के प्रयासों पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का जवाब

नई दिल्ली यमन में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद से भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के परिजन उनके बचाव में जुटे हैं। अब तक इसे लेकर कोई गुड न्यूज नहीं मिल सकी है, जबकि कई सामाजिक संस्थाएं भी इसमें ऐक्टिव हैं। इस बीच शुक्रवार को एक बार फिर से इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई। अदालत में केंद्र सरकार ने कहा है कि फिलहाल निमिषा की सजा को स्थगित कर दिया गया है। उन्हें बचाने के लिए प्रयास जारी हैं। केंद्र सरकार ने कहा कि हम चाहते हैं कि निमिषा प्रिया सकुशल भारत लौट आएं। इस बीच याचिकाकर्ता ने ब्लडमनी के सवाल पर कहा कि पहले तो उन्हें माफी मिल जाए। उसके बाद ही ब्लडमनी की बात होगी। केंद्र सरकार के प्रयासों और उसके जवाब से अदालत भी संतुष्ट दिखी। बेंच ने अब इस केस की अगली सुनवाई 14 अगस्त को करने का फैसला लिया है। कोर्ट ने कहा कि यमन में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स की सरकार हर संभव मदद कर रही है। बता दें कि निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को यमन में सजा-ए-मौत दी जानी थी। केरल के एक ग्रैंड मुफ्ती अबू बकर मुसलियार के माध्यम से सरकार ने मध्यस्थता का एक प्रयास किया था। इसके चलते फिलहाल सजा को टाला गया है। पीड़ित परिवार और निमिषा के परिजनों के बीच डील का मौका इससे मिला है। लेकिन अब तक राहत की खबर का इंतजार ही है। निमिषा प्रिया को उनके बिजनेस पार्टनर रहे तलाल आबदो मेहदी की हत्या का दोषी ठहराया गया है। वहीं निमिषा का पक्ष है कि तलाल आबदो मेहदी उनका उत्पीड़न कर रहा था और उनसे शादी के फर्जी दस्तावेज तक बनवा लिए थे। उनसे बिजनेस में बेजा हक मांग रहा था और उत्पीड़न करते हुए पासपोर्ट तक जब्त कर लिया था। वह पासपोर्ट लेने के लिए ही उससे मिली थीं और उसे ड्रग्स दिया था ताकि मौका पाकर पासपोर्ट ले लें। हालांकि ड्रग्स की ओवरडोज से तलाल की मौत ही हो गई। इसी मामले में निमिषा प्रिया को सजा-ए-मौत दी गई है। हालांकि यमन में ब्लड मनी का एक नियम है, जिसके भरोसे उम्मीद की जा रही है कि उन्हें बचा लिया जाएगा।  

एक दिन के निलंबन के बाद अमरनाथ यात्रा फिर से शुरू, 7908 श्रद्धालु हुए रवाना

पहलगाम एक दिन के लिए स्थगित होने के बाद अमरनाथ यात्रा शुक्रवार को पहलगाम और गंदेरबल बालटाल दोनों मार्गों पर फिर से शुरू हो गई. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 7908 श्रद्धालुओं का 16वां जत्था आज सुबह जम्मू से रवाना हुआ. ये जत्था उधमपुर जिले से गुजरा. अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़ी सतर्कता बरतते हुए निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की. 7908 श्रद्धालुओं में से 5029 तीर्थयात्री पहलगाम और 2879 तीर्थयात्री बालटाल के लिए 261 वाहनों के काफिले में रवाना हुए, जिनमें हल्के मोटर वाहन और भारी मोटर वाहन शामिल थे. जम्मू- कश्मीर में समुद्र तल से 3888 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ तीर्थस्थल हर साल हजारों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है. तीर्थयात्री लंबी दूरी या तो दक्षिण कश्मीर में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग से या उत्तरी कश्मीर में अधिक सीधे लेकिन ज्यादा खड़ी चढ़ाई वाले 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से यात्रा करते हैं. गुरुवार को भारी बारिश सहित खराब मौसम के कारण यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई थी. लेकिन स्थिति में सुधार होने पर तीर्थयात्रा जारी रखने की अनुमति दे दी गई. जम्मू-कश्मीर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इस बार पंद्रह दिनों की इस यात्रा में अब तक कुल 2.51 लाख तीर्थयात्रियों ने भगवान शंकर के दर्शन किए. यात्रा शुरू होने के बाद से ही देश-विदेश के सभी हिस्सों से श्रद्धालु इस तीर्थस्थल पर आ रहे हैं और आस्था की इस यात्रा के लिए भारी उत्साह व्यक्त कर रहे हैं. साथ ही वे यात्रा की सेवाओं और कुशल प्रबंधन की भी सराहना कर रहे हैं. हालांकि, पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण एहतियात के तौर पर गुरुवार को पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों से तीर्थयात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई थी. बुधवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमरनाथ यात्रा में रिकॉर्ड भीड़ आने की उम्मीद जताई. उन्होंने अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर चिंता जताई, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. मुख्यमंत्री ने कहा कि ये पवित्र यात्रा निर्धारित समय 9 अगस्त तक जारी रहेगी. उन्होंने इस दौरान भक्तों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई. अमरनाथ यात्रा अमरनाथ गुफा की वार्षिक तीर्थयात्रा है, जहां भक्त भगवान शिव की पूजा करते हैं. दक्षिण कश्मीर में 3880 मीटर ऊंचे पवित्र गुफा मंदिर के लिए 38 दिवसीय वार्षिक अमरनाथ तीर्थयात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई और 9 अगस्त को समाप्त होगी.

एक दिन के निलंबन के बाद अमरनाथ यात्रा फिर से शुरू, 7908 श्रद्धालु हुए रवाना

पहलगाम एक दिन के लिए स्थगित होने के बाद अमरनाथ यात्रा शुक्रवार को पहलगाम और गंदेरबल बालटाल दोनों मार्गों पर फिर से शुरू हो गई. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 7908 श्रद्धालुओं का 16वां जत्था आज सुबह जम्मू से रवाना हुआ. ये जत्था उधमपुर जिले से गुजरा. अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़ी सतर्कता बरतते हुए निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की. 7908 श्रद्धालुओं में से 5029 तीर्थयात्री पहलगाम और 2879 तीर्थयात्री बालटाल के लिए 261 वाहनों के काफिले में रवाना हुए, जिनमें हल्के मोटर वाहन और भारी मोटर वाहन शामिल थे. जम्मू- कश्मीर में समुद्र तल से 3888 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ तीर्थस्थल हर साल हजारों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है. तीर्थयात्री लंबी दूरी या तो दक्षिण कश्मीर में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग से या उत्तरी कश्मीर में अधिक सीधे लेकिन ज्यादा खड़ी चढ़ाई वाले 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से यात्रा करते हैं. गुरुवार को भारी बारिश सहित खराब मौसम के कारण यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई थी. लेकिन स्थिति में सुधार होने पर तीर्थयात्रा जारी रखने की अनुमति दे दी गई. जम्मू-कश्मीर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इस बार पंद्रह दिनों की इस यात्रा में अब तक कुल 2.51 लाख तीर्थयात्रियों ने भगवान शंकर के दर्शन किए. यात्रा शुरू होने के बाद से ही देश-विदेश के सभी हिस्सों से श्रद्धालु इस तीर्थस्थल पर आ रहे हैं और आस्था की इस यात्रा के लिए भारी उत्साह व्यक्त कर रहे हैं. साथ ही वे यात्रा की सेवाओं और कुशल प्रबंधन की भी सराहना कर रहे हैं. हालांकि, पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण एहतियात के तौर पर गुरुवार को पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों से तीर्थयात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई थी. बुधवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमरनाथ यात्रा में रिकॉर्ड भीड़ आने की उम्मीद जताई. उन्होंने अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर चिंता जताई, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. मुख्यमंत्री ने कहा कि ये पवित्र यात्रा निर्धारित समय 9 अगस्त तक जारी रहेगी. उन्होंने इस दौरान भक्तों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई. अमरनाथ यात्रा अमरनाथ गुफा की वार्षिक तीर्थयात्रा है, जहां भक्त भगवान शिव की पूजा करते हैं. दक्षिण कश्मीर में 3880 मीटर ऊंचे पवित्र गुफा मंदिर के लिए 38 दिवसीय वार्षिक अमरनाथ तीर्थयात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई और 9 अगस्त को समाप्त होगी.

पहलगाम अटैक पर भारत की कूटनीति ने दिखाया असर, थरूर आगे, मुनीर पीछे

नई दिल्ली पाकिस्तान ने पहलगाम अटैक कराया. आतंकियों को कश्मीर भेजकर हिंदू टूरिस्टों की हत्या करवाई. सोचा कि वो बच जाएगा. मगर ऐसा हुआ नहीं. पहलगाम अटैक के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर उससे बदला लिया. इसके बाद पाकिस्तान को इंटरनेशनल लेवल पर बेइज्जत करने की ठानी. इसके लिए विदेशों में डेलिगेशन भेजा. अब उस ऑपरेशन सिंदूर वाले डेलिगेशन की कोशिशों का परिणाम सामने आया है. अमेरिका ने पाकिस्तानी आतंकी संगठन टीआरएफ यानी द रेजिस्टेंस फ्रंट पर चाबुक चलाया है. अमेरिका ने टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित किया है. अमेरिका के इस कदम से भारत की कूटनीतिक जीत हुई है. यह कदम पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक अहम जीत माना जा रहा है. इसमें सबसे बड़ा रोल शशि थरूर का है. जी हां, शशि थरूर ही पीएम मोदी के वो दूत थे, जो ऑपरेशन सिंदूर के डेलिगेशन को लीड कर रहे थे. शशि थरूर ने अमेरिका जाकर सबूत के साथ पाकिस्तान की बैंड बजाई. भारत का पक्ष मजबूती से रखा. इसका असर अब सबके सामने है कि अमेरिका को भी भारत की बात मानने पर मजबूर होना पड़ा. और आखिरकार उसने टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित कर दिया. थरूर ने मुनीर का गेम बिगाड़ा वैसे भारत की कोशिशों पर मिट्टी डालने की पाकिस्तान ने कम कोशिश नहीं की. पहलगाम अटैक के बाद आसिम मुनीर ट्रंप के दरबार पहुंचे थे. वह हलाल वाला मांस खाते ही रह गए. उधर कांग्रेस सांसद शशि थरूर भारत की झोली में बड़ी जीत डाल गए. पाकिस्तान ने आसिम मुनीर को भेजकर चतुराई दिखाई थी. उसने सोचा कि अमेरिका उसका साथ देगा, मगर भारत ने जिस मजबूती से अपना पक्ष रखा, उसके सामने पाकिस्तान की सारी चाल फेल हो गई. यहां बताना जरूरी है कि एलटीएफ लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रॉक्सी संगठन है. उसने 2019 में जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया है. अमेरिका ने अपने एक्शन में क्या कहा अमेरिका ने बयान जारी कर कहा, ‘आज विदेश विभाग ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को विदेशी आतंकवादी संगठन (फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन ) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (स्पेशल डेजिग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट) के रूप में नामित किया है. टीआरएफ, लश्कर-ए-तैयबा का एक फ्रंट और मुखौटा संगठन है. उसने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली थी. उसमें 26 नागरिक मारे गए थे. यह 2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत में नागरिकों पर सबसे घातक हमला था, जिसे लश्कर ने अंजाम दिया था. टीआरएफ ने भारतीय सुरक्षा बलों पर कई हमलों की भी जिम्मेदारी ली है.’ कैसे भारत ने पाकिस्तान को दी एक और चोट अमेरिका के इस फैसले से भारत की उस बात पर मुहर लगी है कि पहलगाम अटैक के पीछे पाकिस्तान का हाथ है. पाकिस्तान टीआरएफ को संरक्षण देता है. इससे पहले खुफिया रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई थी कि पाकिस्तानी नेता और सैन्य अफसरों ने ही पहलगाम अटैक का आदेश दिया है. बहरहाल, अमेरिका का टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित करना भारत की कूटनीति की जीत है. शशि थरूर की अगुवाई में भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन को बेनकाब किया, जबकि आसिम मुनीर की मुलाकात केवल औपचारिकता बनकर रह गई. यह भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक ऐतिहासिक कदम है. पहलगाम अटैक क्या है 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था. पहलगाम अटैक में 26 टूरिस्टों की हत्या हुई थी. टीआरएफ ने ही पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी. पाकिस्तान से आए इन आतंकियों ने बैसरन घाटी में गोलियों की बौछार की थी. मारने से पहले आतंकियों ने टूरिस्टों से धर्म पूछा था. इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर से पहलगाम अटैक का बदला लिया था.