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9 जुलाई को 10 बड़े ट्रेड यूनियनों ने पूरे देश में हड़ताल का ऐलान किया, 25 करोड़ से ज़्यादा कर्मचारी होंगे शामिल

नई दिल्ली  देशभर में कल 9 जुलाई को भारत बंद का ऐलान किया गया है। यह बंद 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मिलकर बुलाया है। इनमें बैंक, बीमा, डाक, कोयला खदान, हाईवे और कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टरों के 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों के शामिल होने की उम्मीद है। इस विरोध प्रदर्शन को ' भारत बंद ' नाम दिया गया है। यूनियनों का कहना है कि सरकार की नीतियां कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाली और मजदूरों के खिलाफ हैं। ग्रामीण भारत से किसान और खेतिहर मजदूर भी इस बंद में शामिल होंगे। अडानी ने किसे दिया बिना शर्त 12600 करोड़ रुपये का ऑफर? इस कंपनी को खरीदने का है प्लान बंद में इन ट्रेड यूनियनों का समर्थन इस हड़ताल में कई प्रमुख राष्ट्रीय संगठन शामिल हैं। इनमें ये शामिल हैं:     इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC)     ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC)     हिंद मजदूर सभा (HMS)     सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU)     ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC)     ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (TUCC)     सेल्फ एम्प्लॉयड वीमेंस एसोसिएशन (SEWA)     ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU)     लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF)     यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC) क्या खुला है, क्या बंद रहेगा? इस हड़ताल से कई क्षेत्रों पर असर पड़ने की उम्मीद है। इनमें बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, डाक विभाग, कोयला खनन और कारखाने, राज्य परिवहन सेवाएं, सरकारी कार्यालय शामिल हैं। एनएमडीसी और स्टील व खनिज क्षेत्रों की कई सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों ने भी हड़ताल में शामिल होने की पुष्टि की है। हिंद मजदूर सभा के हरभजन सिंह सिद्धू ने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के उद्योगों और सेवाओं में मजबूत भागीदारी देखने को मिलेगी। क्या बैंक बंद रहेंगे? बैंकिंग यूनियनों ने अलग से बंद के कारण सेवाओं में व्यवधान की पुष्टि नहीं की है। लेकिन, बंद आयोजकों के अनुसार वित्तीय सेवाएं प्रभावित होंगी। बंद आयोजकों ने कहा कि हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सहकारी बैंकिंग क्षेत्रों के कर्मचारी शामिल हैं। इससे कई क्षेत्रों में शाखा सेवाएं, चेक क्लीयरेंस और ग्राहक सहायता जैसी बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। स्कूल, कॉलेज, ऑफिस का क्या होगा? 9 जुलाई को स्कूल, कॉलेज और प्राइवेट ऑफिस खुले रहने की उम्मीद है। हालांकि, परिवहन संबंधी समस्याओं के कारण कुछ क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हो सकता है। ट्रेड यूनियनों और सहयोगी ग्रुप की ओर से कई शहरों में विरोध मार्च और सड़क प्रदर्शन किए जाने से सार्वजनिक बसें, टैक्सियां और ऐप-आधारित कैब सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इससे स्थानीय यात्रा और लॉजिस्टिक्स संचालन में देरी या रद्द होने की संभावना है। क्या रेल सेवाएं प्रभावित होंगी? 9 जुलाई को देशव्यापी रेलवे हड़ताल की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम की आशंका है, जिससे कुछ क्षेत्रों में ट्रेन सेवाएं बाधित हो सकती हैं या उनमें देरी हो सकती है। रेलवे यूनियनों ने औपचारिक रूप से भारत बंद में भाग नहीं लिया है। लेकिन, पहले हुईं इस तरह की हड़तालों में देखा गया है कि प्रदर्शनकारी रेलवे स्टेशनों के पास या पटरियों पर प्रदर्शन करते हैं, खासकर उन राज्यों में जहां यूनियन की मजबूत उपस्थिति है। इससे स्थानीय स्तर पर ट्रेनों में देरी हो सकती है या अधिकारियों द्वारा सुरक्षा उपाय बढ़ाए जा सकते हैं। हड़ताल का कारण क्या है? ट्रेड यूनियनों का दावा है कि उनकी चिंताओं को लगातार नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने पिछले साल श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया को 17 सूत्रीय मांगों का एक चार्टर सौंपा था, लेकिन उनका कहना है कि इस पर कोई गंभीर प्रतिक्रिया नहीं हुई है। यूनियन फोरम ने कहा कि सरकार ने देश की कल्याणकारी राज्य की स्थिति को त्याग दिया है। यह विदेशी और भारतीय कंपनियों के हित में काम कर रही है। यह उन नीतियों से स्पष्ट है जिनका सख्ती से पालन किया जा रहा है। यूनियन ने ये लगाए सरकार पर आरोप     पिछले दस वर्षों में भारतीय श्रम सम्मेलन आयोजित नहीं किया है।     चार नए श्रम कानूनों को आगे बढ़ा रही है जो यूनियनों को कमजोर करते हैं और काम के घंटे बढ़ाते हैं।     संविदात्मक नौकरियों और निजीकरण को बढ़ावा दे रही है।     अधिक सार्वजनिक क्षेत्र की भर्ती और वेतन वृद्धि की मांगों को नजरअंदाज कर रही है।     युवा बेरोजगारी से निपटने के बिना नियोक्ताओं को प्रोत्साहन दे रही है। किसान और ग्रामीण मजदूर क्यों शामिल? किसानों के ग्रुप और ग्रामीण श्रमिक संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि श्रमिक संघ ग्रामीणों को जुटाने और उन आर्थिक फैसलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे ग्रामीण संकट को बढ़ा रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकारी कामों के कारण बेरोजगारी बढ़ रही है। वहीं आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याणकारी खर्चों में कटौती की जा रही है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने 14 देशों पर लगाया टैरिफ, भारत को लेकर क्या बोले ? पास में बैठे थे नेतन्याहू

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को 14 देशों पर टैरिफ लागू करने का फैसला किया है। उन्होंने इस संबंध इन सभी देशों को लेटर भी भेजा है जिसमें अमेरिकी सरकार के टैरिफ वाले फैसले के बारे में अवगत कराया गया है। अमेरिका ने एशिया में अपने दो महत्वपूर्ण सहयोगियों जापान और दक्षिण कोरिया से आयातित वस्तुओं पर भी 25 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया। हालांकि भारत पर अभी नए टैरिफ को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि भारत के साथ डील जल्द हो सकती है। भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मेजबानी के दौरान बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ एक व्यापारिक समझौते को अंतिम रूप देने के करीब है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ट्रंप ने 14 देशों को नई टैरिफ दरों से संबंधित पत्र भेजे हैं, जो 1 अगस्त 2025 से लागू होंगी। ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "हमने यूनाइटेड किंगडम और चीन के साथ समझौते किए हैं। हम भारत के साथ भी डील करने के बहुत करीब हैं।" उन्होंने आगे बताया कि जिन देशों के साथ समझौता संभव नहीं लग रहा, उन्हें पत्र भेजकर टैरिफ दरों की जानकारी दी जा रही है। ट्रंप ने कहा, "हमने अन्य देशों से मुलाकात की और हमें नहीं लगता कि हम कोई सौदा कर पाएंगे, इसलिए हम उन्हें एक पत्र भेज रहे हैं। हम विभिन्न देशों को पत्र भेज रहे हैं, जिसमें उन्हें बताया जा रहा है कि उन्हें कितना टैरिफ देना होगा।" ट्रंप ने जोर देकर कहा, "हम निष्पक्षता के साथ काम कर रहे हैं। कुछ देशों को थोड़ी छूट मिल सकती है, अगर उनके पास कोई उचित कारण होगा।" ट्रंप ने सुझाव दिया कि प्रमुख साझेदारों के साथ प्रगति हुई है, लेकिन जो देश अमेरिकी शर्तों को पूरा करने के लिए तैयार नहीं हैं, उन्हें नए टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। 14 देशों को टैरिफ पत्र, 25% से 40% तक की दरें ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर 14 देशों को भेजे गए पत्रों के स्क्रीनशॉट साझा किए। इन देशों में जापान, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, थाइलैंड, म्यांमार, कम्बोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, कजाकिस्तान, लाओस, दक्षिण अफ्रीका, ट्यूनीशिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, और सर्बिया शामिल हैं। इन पत्रों में टैरिफ दरें 25% से लेकर 40% तक निर्धारित की गई हैं। उदाहरण के लिए, जापान और दक्षिण कोरिया पर 25%, म्यांमार और लाओस पर 40%, और बांग्लादेश व सर्बिया पर 35% टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप ने इन पत्रों में चेतावनी भी दी कि अगर ये देश अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाते हैं, तो अमेरिका भी बदले में टैरिफ बढ़ा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर ये देश अपनी व्यापार नीतियों में बदलाव करते हैं, तो टैरिफ दरों में कमी की जा सकती है। 1 अगस्त तक टैरिफ की No Tension… अमेरिका ने सभी देशों को दी राहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर दुनियाभर के देशों को राहत दी है. ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ बढ़ाने की आखिरी तारीख बढ़ा दी है. ट्रंप ने टैरिफ की आखिरी तारीख नौ जुलाई से बढ़ाकर एक अगस्त कर दी है. इसके साथ ही ट्रंप ने ये भी कहा कि भारत के साथ ट्रेड डील जल्द ही हो सकती है.  व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि रेसिप्रोकल टैरिफ पर छूट की अंतिम तारीख नौ जुलाई से बढ़ाकर एक अगस्त करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे. बता दें कि ट्रंप ने दो अप्रैल को भारत सहित कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया था लेकिन बाद में विरोध बढ़ने पर इसमें 90 दिनों की छूट दी थी. इस तरह टैरिफ पर यह छूट नौ जुलाई थी.  वहीं, अमेरिका ने बांग्लादेश और जापान समेत 14 देशों पर टैरिफ बढ़ाने का ऐलान भी किया है. ट्रंप सरकार के इस फैसले के तहत कुछ देशों पर 25 फीसदी टैक्स लगाया गया है, जबकि कुछ पर 30 से 40 फीसदी तक का भारी शुल्क लगाया गया है. ट्रंप सरकार ने म्यांमार और लाओस पर सबसे अधिक 40 फीसदी टैरिफ लगाया है. थाईलैंड और कंबोडिया पर 36 फीसदी टैरिफ, बांग्लादेश और सर्बिया पर 35 फीसदी टैरिफ, इंडोनेशिया को 32 फीलदी टैरिफ लगाया गया है. साउथ अफ्रीका और बोस्निया एंड हर्जेगोविना पर 30 फीसदी टैरिफ लगाया है. वहीं, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिसाय, कजाकिस्तान और ट्यूनीशिया पर 25 फीसदी टैक्स लगाया गया है. इसके साथ ही अमेरिका ने अभी तक ब्रिटेन और वियतनाम के साथ ही डील की है.  भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में प्रगति भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौते को लेकर पिछले कुछ महीनों से गहन वार्ता चल रही है। पिछले महीने भारतीय अधिकारी वाशिंगटन में अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ समझौते को अंतिम रूप देने के लिए चर्चा में जुटे थे। ट्रंप ने अप्रैल में भारतीय सामानों पर 26% का जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर 10% कर दिया गया और 90 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया, जो 9 जुलाई को समाप्त हो रहा है। भारत के लगभग 53 बिलियन डॉलर के निर्यात क्षेत्र को नुकसान से बचाने के लिए दोनों देशों के बीच तीव्र गति से बातचीत चल रही है। ट्रंप ने पहले ही वियतनाम और चीन के साथ समझौते किए हैं, जबकि यूरोपीय संघ और अन्य देशों के साथ भी बातचीत चल रही है। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप स्वयं टैरिफ दरें निर्धारित कर रहे हैं और प्रत्येक देश के लिए "विशेष रूप से तैयार किए गए व्यापार प्लान" बना रहे हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि जिन देशों का अमेरिका के साथ व्यापार घाटा है, उनके लिए टैरिफ जरूरी हैं। उन्होंने दावा किया, "हमारा देश पहले से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। हमारे पास पहले कभी इतना निवेश नहीं था।" नेतन्याहू के साथ मुलाकात के दौरान बयान ट्रंप का यह बयान उस समय आया जब वह वाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ निजी रात्रिभोज के दौरान पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस मुलाकात के दौरान ट्रंप ने वैश्विक व्यापार और अपनी … Read more

ब्रिटिश महिला की नस्लभेदी टिप्पणी वायरल, भारतीयों को देश छोड़ने को कहा

लंदन ब्रिटेन की एक महिला के बयान ने सोशल मीडिया पर बवाल मचा दिया है। इस महिला ने भारतीयों और एशियाई समुदाय के ऊपर टिप्पणी की है। महिला का कहना है कि यह लोग अंग्रेजी नहीं बोलते, इन्हें इनके देश वापस भेज देना चाहिए। जानकारी के मुताबिक यह घटना हीथ्रो एयरपोर्ट की है। महिला का नाम लूसी व्हाइट है। उसने एक्स पर इस बारे में पोस्ट लिखी है। महिला की इस पोस्ट पर लोग उसे जमकर खरी-खोटी सुना रहे हैं। महिला ने लिखा है ऐसा लूसी ने एक्स पर लिखा है कि अभी लंदन के हीथ्रो विमान पर लैंड किया है। यहां पर बड़ी संख्या में भारतीय और एशियाई स्टाफ है। यह लोग इंग्लिश का एक शब्द तक नहीं बोलते हैं। जब मैंने उनसे कहाकि अंग्रेजी बोलिए। इस पर उन्होंने मुझे रेसिस्ट कहा। महिला आगे लिखती है कि उन्हें भी पता है कि मैं सही हूं। इसके बावजूद उन्होंने इस रेसिस्ट कार्ड का इस्तेमाल किया। पोस्ट में आगे लूसी लिखती है कि इन सभी को वापस उनके देश भेज देना चाहिए। लोगों ने कैसे किया रिएक्ट इस पोस्ट पर लोगों के रिएक्शन भी आए। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने व्हाइट की बात का समर्थन किया है। उनका कहना है कि इस वजह से एयरपोर्ट पर पर दिक्कत होती है। वहीं कुछ लोगों ने लूसी की पोस्ट को रेसिस्ट बताया है। एक यूजर ने लिखा है कि आप हिंदी बोलती हैं? अगर एयरपोर्ट स्टाफ ने एक शब्द भी अंग्रेजी में नहीं कहा तो आपको पता कैसे चला कि उनकी प्रतिक्रिया का क्या मतलब था? एक अन्य यूजर ने लिखा कि मैं शर्त लगा सकता हूं कि वहां ऐसा नहीं हुआ होगा। एक अन्य यूजर ने लिखा कि यह पूरी तरह से फैब्रिकेटेड है। हां, हीथ्रो पर बहुत सारा स्टाफ एशियाई है। हालांकि यह सभी अंग्रेजी बोलते हैं। इस यूजर ने आगे लिख कि यह लोग वास्तव में बहुत मददगार और दोस्ताना हैं। हाल ही में एक अन्य वीडियो आया था। इस वीडियो में एक अमेरिकी शख्स भारतीय मूल के व्यक्ति से बहस कर रहा था। वह लोगों के सामने ही उसे ब्राउन मैन कह रहा था और देश वापस जाने के लिए बोल रहा था।  

ऑपरेशन सिंदूर का सच आया सामने, राफेल को लेकर कंपनी ने बताई असली बात

नई दिल्ली  राफेल को मार गिराने के पाकिस्तान के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। अब लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनी ने भी साफ कर दिया है कि पाकिस्तान ने भारत का कोई राफेल नहीं गिराया है। इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान भारत के रक्षा सचिव भी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं। पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसके तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। एक राफेल का नुकसान पर पाकिस्तान ने नहीं गिराया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रांस की वेबसाइट Avion De Chasse को दसॉ एविएशन के अध्यक्ष और सीईओ एरिक ट्रैपियर ने बताया है कि एक राफेल जेट ऊंचाई पर जाकर तकनीकी खामी आ गई थी, जिसके चलते वह क्रैश हुआ। संघर्ष के दौरान कोई जेट नहीं गिरा था। भारत ने क्या कहा मीडिया से खास बातचीत में रक्षा सचिव आरके सिंह ने कहा कि यह कहना गलत है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के राफेल विमान गिराए गए थे। उन्होंने कहा, 'आपने राफेल्स का इस्तेमाल बहुवचन में किया है। मैं आपको भरोसा दिला सकता हूं कि यह सच नहीं है। भारत के मुकाबले पाकिस्तान को जान और माल के मामले कई गुना नुकसान हुआ है।' उन्होंने कहा कि 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए। उन्होंने कहा है कि भारतीय बलों को ऑपरेशन के दौरान पूरी छूट दी गई थी। उन्होंने कहा, 'हमारे सशस्त्र बलों पर कोई राजनीतिक रोक नहीं थी और उनके पास पूरी स्वतंत्रता थी।' चीन पर भड़के फ्रांस के अधिकारी चीन ने मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष के बाद फ्रांस निर्मित राफेल लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन के बारे में भ्रम की स्थिति पैदा करने की जिम्मेदारी अपने दूतावासों को दी थी, ताकि इस विमान की प्रतिष्ठा और बिक्री को नुकसान पहुंचाया जा सके। फ्रांसीसी सैन्य और खुफिया अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला है। एसोसिएटेड प्रेस द्वारा देखी गई फ्रांसीसी खुफिया सेवा की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के दूतावासों में रक्षा अधिकारियों (डिफेंस अताशे) ने राफेल की बिक्री को प्रभावित करने के लिए अभियान चलाया, जिसका उद्देश्य उन देशों को राजी करना था, जिन्होंने पहले से ही फ्रांस निर्मित लड़ाकू विमान का ऑर्डर दे दिया है – विशेष रूप से इंडोनेशिया- कि वे राफेल विमान न खरीदें तथा अन्य संभावित खरीदारों को चीन निर्मित विमान चुनने के लिए प्रोत्साहित किया। फ्रांसीसी सेना के अधिकारी ने पहचान गुप्त रखते हुए रिपोर्ट एपी के साथ साझा की। पाकिस्तान ने दावा किया कि उसकी वायुसेना ने सैन्य संघर्ष के दौरान पांच भारतीय विमानों को मार गिराया, जिनमें तीन राफेल भी शामिल थे। फ्रांसीसी अधिकारियों का कहना है कि इससे उन देशों की ओर से राफेल के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे, जिन्होंने फ्रांसीसी निर्माता दसॉ एविएशन से लड़ाकू विमान खरीदे हैं।  

MNS के मार्च से मचा सियासी घमासान, एकनाथ शिंदे ने भाजपा पर भी साधा निशाना

मुंबई मराठी भाषा पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की एकता के चलते शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे को अपना जनाधार खिसकता दिख रहा है। ऐसे में अब उनका दल भी ऐक्टिव हो गया है और मराठी भाषा को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के लोगों पर सख्ती का विरोध किया है। मीरा भायंदर पुलिस ने आज सुबह ही बड़ी संख्या में मनसे के लोगों को हिरासत में लिया है। इसके अलावा विरोध मार्च पर भी रोक लगा दी है। इस पर मनसे और उद्धव सेना के समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा है। इन लोगों का कहना है कि सरकार ने कारोबारियों के विरोध प्रदर्शन पर तो नहीं रोक लगाई, लेकिन हमारे खिलाफ सख्ती दिखाई जा रही है। आखिर मराठी लोगों से सरकार को क्या दिक्कत है। मनसे कार्य़कर्ताओं ने कहा, 'यह सरकार महाराष्ट्र और मराठी लोगों के लिए है या फिर दूसरे राज्य की है? आखिर इन लोगों को मराठी लोगों के मार्च से क्या दिक्कत है?' मराठी बनाम हिंदी विवाद में अपनी जमीन खिसकने के डर से अब एकनाथ शिंदे गुट भी ऐक्टिव हो गया है। भले ही वह सरकार में शामिल है, लेकिन उसने मनसे के लोगों पर सख्ती को लेकर ऐतराज जताया है। फडणवीस सरकार में मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा कि आखिर मराठी लोगों को मार्च की परमिशन क्यों नहीं है। यही नहीं इशारों में ही उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साध दिया। सरनाइक ने कहा कि आखिर पुलिस की मंशा क्या है। मराठी लोगों पर ऐसा अत्याचार किस राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा,'मैं मराठी लोगों पर ऐक्शन की निंदा करता हूं। पुलिस को मार्च की परमिशन देनी चाहिए थी। इसके चलते शहर में बेवजह बवाल हो रहा है। गृह मंत्रालय ने ऐसा कोई आदेश भी नहीं दिया है कि आंदोलन की परमिशन नहीं है। फिर लोगों की गिरफ्तारी क्यों की जा रही है। ऐसा लग रहा है कि किसी एक राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा हो रहा है।' दरअसल मराठा कार्ड पर राजनीति करने वाले अब तीन दल हो गए हैं। उद्धव सेना, मनसे और एकनाश शिंदे की शिवसेना। अब दो गुट एक हो गए हैं तो एकनाथ शिंदे सेना को लग रहा है कि इससे उसके आधार को नुकसान पहुंचेगा। यही कारण है कि उसने अब मनसे के लोगों पर ऐक्शन का विरोध किया है। महाराष्ट्र में भाजपा को बाहरी वोटरों की पार्टी भी माना जाता है। वजह यह है कि वह हिंदु्त्व की राजनीति पर फोकस करती है, जिसके दायरे में दूसरे राज्यों के हिंदू भी आते हैं। भाजपा नेता नितेश राणे ने गैर-मराठी लोगों को पीटने पर ऐतराज भी जताया था और कहा था कि यह गरीब हिंदुओं पर हमला है।  

पीएम नेतन्याहू के साथ डिनर के दौरान ट्रंप ने तीखे शब्दों में ममदानी को दी चेतावनी

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर उम्मीदवार जोहरान ममदानी पर फिर से निशाना साधा है। उन्होंने जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि वह एक सोशलिस्ट नहीं बल्कि कम्युनिस्ट हैं। पहले वह डेमोक्रेट नेताओं को सोशलिस्ट कहते थे, लेकिन अब कम्युनिस्ट ही कह रहे हैं। अमेरिका में कम्युनिस्ट विचारधारा के लोगों को बहुत सकारात्मक तरीके से नहीं देखा जाता। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ डिनर के दौरान ट्रंप ने तीखे शब्दों में ममदानी को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ममदानी को अपने व्यवहार में सुधार लाना होगा वरना बड़ी परेशानियों में घिर जाएंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'ममदानी सोशलिस्ट नहीं है बल्कि कम्युनिस्ट है। उसने यहूदी लोगों के बारे में बहुत सी गलत बातें कही हैं। इसके अलावा बहुत से लोगों के बारे में कई गलत बातें कही हैं। मुझे लगता है कि अभी उसका हनीमून चल रहा है।' इसके आगे ट्रंप ने कहा कि ऐसा हमेशा नहीं चल सकता। उन्हें अपने व्यवहार में सुधार करना होगा या फिर वह कुछ बड़ी परेशानियों में घिर सकते हैं। ऐसा पहली बार नहीं है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने जोहरान ममदानी पर हमला बोला है। वह पहले भी कह चुके हैं कि ममदानी को अपने रुख में सुधार लाना होगा। इस बार नेतन्याहू के साथ बैठकर एक मेयर कैंडिडेट पर इस तरह निजी हमला करना और महत्वपूर्ण है। इससे पहले ट्रंप ने यह भी कहा था कि यदि जोहरान ममदानी मेयर बने और अपने रवैये में सुधार नहीं किया तो फिर न्यूयॉर्क सिटी के फंड में कटौती कर दी जाएगी। न्यूयॉर्क में नवंबर में मेयर का चुनाव होना है। यही नहीं ट्रंप ने तो यहां तक कहा था कि जोहरान ममदानी के पास शायद अमेरिका की नागरिकता भी नहीं है। वह देखेंगे कि अमेरिका में वह कानूनी रूप से हैं या फिर अवैध तौर पर यहां रह रहे हैं। ट्रंप ने कहा, 'ऐसे काफी लोग हैं, जो कहते हैं कि वह अवैध रूप से यहां हैं। हम हर चीज देख रहे हैं। उन्हें खुद को कम्युनिस्ट पहचान से अलग होना होगा, लेकिन फिलहाल वह एक कम्युनिस्ट हैं।' बता दें कि 1 जुलाई को जोहरान ममदानी ने मेयर चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव में जीत हासिल की है। अब उनका मुकाबला एरिक एडम्स से होगा। नवंबर में न्यूयॉर्क सिटी का चुनाव होगा और जोहरान ममदानी पहले ऐसे मुस्लिम नेता हैं, जो मेयर चुनाव में उतरे हैं।  

जनगणना के लिए घर-घर जाने वाले कर्मचारी भी मोबाइल से ही डेटा जुटाएंगे और उसे रियलटाइम अपलोड करेँगे

नई दिल्ली भारत में हर 10 साल पर जनगणना की परंपरा रही है, लेकिन इस बार 16 साल के लंबे गैप के बाद 2027 में जनगणना शुरू होगी। यह जनगणना भले ही देर से आई है, लेकिन इसके प्रावधान पहले के मुकाबले काफी दुरुस्त हैं। इनमें से एक प्रावधान यह है कि लोग अपने घर से ही ऑनलाइन माध्यम से जनगणना पोर्टल पर अपनी जानकारी दे सकेंगे। इस संबंध में जल्दी ही एक पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। इस पोर्टल पर लोग अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। फिर अपने और परिवार के बारे में पूरी जानकारी दे सकेंगे। यहीं पर लोग जनगणना में शामिल सभी सवालों के जवाब भर के सबमिट कर देंगे तो यह जानकारी दर्ज हो जाएगी। इसके माध्यम से ऐसे लोगों की शिकायतें दूर हो जाएंगी, जो अकसर कहते हैं कि जनगणना वाले तो उनके घर तक आए ही नहीं। ऐसे में जनगणना में शामिल कर्मचारियों का इंतजार किए बिना ही लोग अपने बारे में जानकारी भर सकेंगे। यही नहीं जनगणना के लिए घर-घर जाने वाले कर्मचारी भी मोबाइल से ही डेटा जुटाएंगे और उसे रियलटाइम अपलोड कर देंगे। सरकार का कहना है कि इससे डेटा हासिल करने में आसानी होगी और उसका विश्लेषण भी जल्दी ही किया जा सकेगा। जनगणना का पूरा डेटा जल्दी उपलब्ध होगा। इसके अलावा अलग-अलग मानकों पर उसका विश्लेषण भी किया जा सकेगा। सूत्रों का कहना है कि जनगणना के लिए रजिस्ट्रेशन कमोबेश ऐसे ही होगा, जैसे वोटर आईडी बनवाने के लिए ऑनलाइन सुविधा है। संभावना है कि इसे आधार कार्ड से भी जोड़ा जा सकता है। पोर्टल पर पहले लोगों को रजिस्ट्रेशन करके प्रोफाइल बनानी होगी। इसके बाद जनगणना के लिए दिए गए फॉर्म में पूरी डिटेल भरकर सबमिट करना होगा। यही नहीं यह सुविधा भी दो चरणों में मिलेगी। दोनों राउंड में जानकारी देने का रहेगा विकल्प पहले राउंड में हाउस लिस्टिंग होगी। पहले उसके संबंध में लोग जानकारी दे सकेंगे। इसके बाद दोबारा जनगणना के दौरान अपने और परिवार के बारे में डिटेल दे सकेंगे। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब देश भर में जाति जनगणना कराई जाएगी।

कार्यपालिका के पदाधिकारी की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश की भी भागीदारी होती है, क्यों देते हैं राय?: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली  भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने CBI निदेशक की नियुक्ति में CJI की भूमिका पर आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने सवाल उठाए हैं कि क्या ऐसा दुनिया में कहीं और हो रहा है? इसके अलावा उन्होंने जज के घर से नकदी मिलने पर भी खुलकर बात की। उपराष्ट्रपति ने कहा है कि हर अपराध की जांच होनी चाहिए। साथ ही कहा कि अगर पैसा मिला है, तो उसके स्त्रोत का भी पता लगाया जाना चाहिए। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, 'मैं इस बात से पूरी तरह हैरान हूं कि CBI निदेशक जैसे कार्यपालिका के पदाधिकारी की नियुक्ति में भारत के मुख्य न्यायाधीश की भी भागीदारी होती है। कार्यपालिका की नियुक्ति कार्यपालिका के अलावा किसी और की तरफ से क्यों होनी चाहिए? क्या ऐसा संविधान के तहत होता है? क्या ऐसा दुनिया में कहीं और हो रहा है?' दरअसल, DSPE एक्ट के तहत सीबीआई निदेशक की नियुक्ति एक हाई पावर कमेटी करती है, जिसके सदस्य प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनकी तरफ से नॉमिनेट किया हुआ कोई जज शामिल होते हैं। कोच्चि में कानूनी की पढ़ाई कर रहे छात्रों से बातचीत में उन्होंने न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका को अलग करने वाली सीमा कमजोर होने पर चिंता जाहिर की। नकदी मिलने पर क्या बोले नखड़ ने सोमवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नई दिल्ली में एक न्यायाधीश के आधिकारिक आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने के मामले की आपराधिक जांच शुरू की जाएगी। धनखड़ ने इस घटना की तुलना शेक्सपीयर के नाटक जूलियस सीजर के एक संदर्भ 'इडस ऑफ मार्च' से की, जिसे आने वाले संकट का प्रतीक माना जाता है। रोमन कलैंडर में इडस का अर्थ होता है, किसी महीने की बीच की तारीख। मार्च, मई, जुलाई और अक्टूबर में इडस 15 तारीख को पड़ता है। उपराष्ट्रपति ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि अब मुद्दा यह है कि यदि नकदी बरामद हुई थी तो शासन व्यवस्था को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी और पहली प्रक्रिया यह होनी चाहिए थी कि इससे आपराधिक कृत्य के रूप में निपटा जाता, दोषी लोगों का पता लगाया जाता और उन्हें कठघरे में खड़ा किया जाता। उपराष्ट्रपति ने कहा कि 14-15 मार्च की रात को न्यायपालिका को अपने खुदे के 'इडस ऑफ मार्च' का सामना करना पड़ा, जब बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार की गई थी, लेकिन अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। धनखड़ ने कहा कि इस मामले से शुरुआत से ही एक आपराधिक मामले के तौर पर निपटा जाना चाहिए था, लेकिन उच्चतम न्यायालय के 90 के दशक के एक फैसले के कारण केंद्र सरकार के हाथ बंधे हुए हैं। उन्होंने कहा, 'अगर इतना अधिक मात्रा में पैसा है, तो हमें पता लगाना होगा: क्या यह दागी पैसा है? इस पैसे का स्रोत क्या है? यह एक न्यायाधीश के आधिकारिक आवास में यह कैसे पहुंचा? यह किसका था? इस प्रक्रिया में कई दंड प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है। मुझे उम्मीद है कि प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।'  

कडलूर में रेलवे ट्रैक पार करते वक्त स्कूल बस को ट्रेन ने मारी जोरदार टक्कर, जानें कैसे हुआ बड़ा हादसा

चेन्नई तमिलनाडु के कडलूर जिले के चेम्मनकुप्पम इलाके में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जब तेज रफ्तार से आ रही ट्रेन ने बिना फाटक वाले रेलवे क्रॉसिंग पर स्कूल वैन को जोरदार टक्कर मार दी। इस भयानक हादसे में तीन मासूम बच्चों की जान चली गई, जबकि दस बच्चे और वैन का ड्राइवर गंभीर रूप से जख्मी हो गए। यह हादसा उस वक्त हुआ जब स्कूल वैन रेलवे ट्रैक पार करने की कोशिश कर रही थी, तभी चिदंबरम जा रही एक पैसेंजर ट्रेन ने वैन को टक्कर मार दी और उसे करीब 50 मीटर तक घसीट लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वैन पूरी तरह तहस-नहस हो गई। हादसे में तीन बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि बच्चों के नाम अभी तक सामने नहीं आए हैं। चश्मदीदों के मुताबिक, वैन में स्कूल के बच्चे सवार थे। हादसे के बाद घायल बच्चों और ड्राइवर को फौरन कडलूर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि मरने वालों की तादाद बढ़ सकती है। वैन ड्राइवर की लापरवाही से हुआ हादसा स्थानीय लोगों और रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह हादसा वैन ड्राइवर की लापरवाही की वजह से हुआ। बताया जा रहा है कि ड्राइवर ने ट्रेन को देखने के बावजूद जल्दबाजी में ट्रैक पार करने की कोशिश की। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) और जिला प्रशासन ने हादसे की तहकीकात शुरू कर दी है, ताकि इसकी असल वजह का पता लगाया जा सके और जिम्मेदारों को सजा दी जाए। हादसे की खबर फैलते ही इलाके में गम और गुस्से का माहौल है। स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए और रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा इंतजामों की कमी को लेकर नाराजगी जाहिर की। लोगों का कहना है कि स्कूलों के आसपास बिना फाटक वाले क्रॉसिंग खतरनाक हैं और इन्हें तुरंत ठीक करना चाहिए। लोगों को फूटा गुस्सा हादसे की आवाज सुनकर सबसे पहले स्थानीय लोग ही मौके पर पहुंचे। उन्होंने फंसे हुए बच्चों को निकालने की कोशिश की और बचाव दल के आने तक मदद की। गुस्साए लोगों ने रेलवे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और स्कूलों के पास सुरक्षा बढ़ाने की मांग की। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जांच के नतीजों के आधार पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। हादसे की पूरी जांच की जा रही है।  

देशभर में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, आईएमडी ने इन राज्यों में होगी भारी बारिश का अलर्ट किया जारी

नई दिल्ली देशभर में मानसून ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है और अब इसका असर लगभग हर राज्य में महसूस किया जा रहा है। कहीं बादल झमाझम बरस रहे हैं तो कहीं हल्की फुहारें राहत पहुंचा रही हैं। लेकिन कई इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साफ कर दिया है कि अगले कुछ दिनों तक बारिश का यही सिलसिला जारी रहेगा। खास बात यह है कि 8 से 12 जुलाई के बीच देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी के साथ अलर्ट जारी कर दिया गया है। राजस्थान में तेज़ बारिश और आंधी का कहर संभव मौसम विभाग की मानें तो राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में अगले छह दिन बारिश से भीगने वाले हैं। खासतौर पर 9 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है। इसके साथ ही कई क्षेत्रों में तेज़ हवाएं, आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। दिल्ली को मिलेगी गर्मी से राहत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी मौसम करवट लेने वाला है। अगले छह दिनों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। इस दौरान कहीं-कहीं तेज़ हवाएं और गरज के साथ बारिश हो सकती है। इससे दिल्लीवासियों को उमस और गर्मी से राहत मिल सकती है। उत्तर भारत में लगातार बरसेंगे बादल उत्तरपश्चिम भारत के राज्यों — उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भी अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बारिश होती रहेगी। मौसम विभाग ने इन इलाकों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी है। भारत भी होगा बारिश से तरबतर दक्षिण भारत के राज्यों — केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, यनम और लक्षद्वीप में 8 और 9 जुलाई को हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं 9 से 12 जुलाई के बीच इन क्षेत्रों में कई जगहों पर मूसलधार बारिश हो सकती है। कुछ जगहों पर तेज़ हवाएं और बिजली गिरने की आशंका भी बनी हुई है। भारत में तूफानी बारिश की चेतावनी पूर्वोत्तर भारत के राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले छह दिन आंधी और तेज़ बारिश से लोग परेशान हो सकते हैं। गरज के साथ बारिश और तेज़ हवाएं इन क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं। छाए रहेंगे बादल छत्तीसगढ़, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में मानसून की पकड़ मजबूत बनी हुई है। 8 से 12 जुलाई तक इन राज्यों के विभिन्न हिस्सों में भारी से लेकर हल्की बारिश का दौर जारी रहेगा। कहीं-कहीं पर जलभराव और बिजली गिरने की आशंका है, जिससे सतर्क रहने की जरूरत है। पश्चिमी भारत में भीषण बारिश की संभावना महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कोंकण और सौराष्ट्र क्षेत्र में अगले छह दिन भारी बारिश होने के संकेत मिले हैं। मौसम विभाग ने इन इलाकों में आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। कुछ स्थानों पर बारिश इतनी तेज़ हो सकती है कि सड़कें जलमग्न हो जाएं और यातायात प्रभावित हो। IMD के मुताबिक, मॉनसून फिलहाल पूरे भारत में सक्रिय है और इसका असर आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। यह सिस्टम बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी लेकर देशभर में बारिश ला रहा है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम से जुड़ी ताज़ा अपडेट्स पर नज़र रखें और बारिश से जुड़ी चेतावनियों को हल्के में न लें।