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पीपल-बरगद काटना माना गया अशुभ, जानिए वास्तु में क्या कहते हैं नियम

घर के आसपास या किसी प्लॉट पर लगे पेड़-पौधों को कई बार काटना मजबूरी हो जाता है। वैसे तो हम बिना सोचे-समझे पुराने पेड़ को काट देते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, पेड़ काटना कोई साधारण काम नहीं है। गलत तरीके से पेड़ काटने से वास्तु दोष पैदा होता है, जिसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। इससे मानसिक तनाव, आर्थिक हानि, स्वास्थ्य समस्या और पारिवारिक कलह बढ़ सकती है। सही नियमों का पालन करके हम प्रकृति का सम्मान कर सकते हैं और घर की सकारात्मक ऊर्जा को बचाए रख सकते हैं। पेड़ का अपना आभामंडल और ऊर्जा वास्तु शास्त्र के अनुसार, हर पेड़ का अपना आभामंडल होता है। जब हम बिना किसी नियमों का ध्यान रखे पेड़ काटते हैं, तो वह स्थान शोक और नकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर घर के मुखिया पर पड़ता है। ऐसे में पेड़ काटने से पहले वास्तु नियमों को समझना बहुत जरूरी है। देव वृक्षों को काटने का महापाप पीपल, बरगद और गूलर को देव वृक्ष माना गया है। इनमें देवताओं और पितरों का वास होता है। इन्हें काटने से भारी वास्तु दोष, पितृ दोष और संतान संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। अगर इन पेड़ों की शाखाएं दीवार या तारों को नुकसान पहुंचा रही हों, तब भी इन्हें काटने से पहले विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। बिना पूजा के इन पेड़ों को काटना बहुत अशुभ माना जाता है। पेड़ काटने से पहले माफी और पूजा पेड़ काटने से पहले उसकी पूजा जरूर करें। पूजा के दौरान पेड़ को गंध, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें। तने को सफेद कपड़े से ढककर उस पर सफेद सूत लपेटें। इसके बाद पेड़ से प्रार्थना करें कि उस पर रहने वाले सूक्ष्म जीव दूसरे स्थान पर चले जाएं। पूजा के बाद ही काटने का कार्य शुरू करें। कहा जाता है कि ऐसा करने से वास्तु दोष की संभावना काफी कम हो जाती है। शुभ समय और निषिद्ध दिन पेड़ काटने के लिए कुछ दिन और नक्षत्र विशेष रूप से शुभ माने गए हैं। चतुर्थी, नवमी या चतुर्दशी तिथि अच्छी मानी जाती है। शुभ नक्षत्रों में मृगशिरा, पुनर्वसु, अनुराधा, हस्त, मूल, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, स्वाति और श्रवण शामिल हैं। पेड़ काटने के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा होता है। निषिद्ध दिन: भूलकर भी मंगलवार, शनिवार या अमावस्या को पेड़ ना काटें। गुरुवार और रविवार को भी बचना चाहिए। दोपहर में पेड़ काटने से बचें। दिशाओं का महत्व और क्षतिपूर्ति ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में स्थित पेड़ काटना सबसे हानिकारक माना जाता है। यह सात्विक ऊर्जा का द्वार है, इसलिए यहां का पेड़ काटने से किस्मत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। दक्षिण दिशा में पेड़ हटाना अपेक्षाकृत कम हानिकारक होता है। पेड़ को हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर से काटना शुरू करें। वास्तु शास्त्र में प्रकृति के ऋण का भुगतान का नियम है। अगर एक पेड़ काटना पड़े, तो उसके बदले कम से कम 10 नए पौधे लगाएं। जब ये पौधे फलने-फूलने लगें, तब क्षतिपूर्ति पूरी मानी जाती है। सही विधि और शुभ मुहूर्त में पेड़ काटने से वास्तु दोष नहीं लगता। इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार पर संकट के बादल नहीं मंडराते हैं। वास्तु विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पेड़ काटने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।

बुध का मीन राशि में गोचर: सभी 12 राशियों पर असर, कुछ को मिलेगा नीचभंग राजयोग का लाभ

 बुध ग्रह कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे और 30 अप्रैल तक यहीं रहेंगे. इस दौरान बुध का गोचर सभी 12 राशियों पर असर डालेगा. ज्योतिष के अनुसार, मीन राशि में बुध कमजोर स्थिति (नीच) में होते हैं, लेकिन खास बात यह है कि यह राशि बृहस्पति की है. ऐसे में कई लोगों के लिए नीचभंग राजयोग बनने की संभावना रहती है, जिससे अच्छे परिणाम भी मिल सकते हैं. बुध को बुद्धि, तर्क, व्यापार, गणना और कम्युनिकेशन का ग्रह माना जाता है. वहीं, बृहस्पति ज्ञान, धर्म और सकारात्मक सोच के कारक हैं. जब बुध मीन राशि में आता है, तो लोगों की सोच में आध्यात्मिकता और सकारात्मकता बढ़ सकती है. आइए पंडित प्रवीण मिश्र से जानते हैं कि सभी राशियों पर बुध का क्या असर पड़ेगा. मेष राशि- आपको काम में जल्दबाजी से बचना होगा. सोच-समझकर फैसले लें. विदेश से जुड़े कामों में फायदा मिल सकता है. दुश्मनों पर जीत मिलेगी. अचानक धन लाभ भी हो सकता है. वृषभ राशि– आपके रुके हुए काम पूरे होंगे. मेहनत का फल मिलेगा. आमदनी बढ़ सकती है. मानसिक तनाव कम होगा. सेहत में सुधार आएगा. मिथुन राशि– करियर के लिए अच्छा समय है. नौकरी या प्रमोशन के मौके मिल सकते हैं. बिजनेस में भी फायदा होगा. बस बेकार के विवाद से दूर रहें. कर्क राशि– शांत मन से काम करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा. आपकी किस्मत साथ देगी. बिना सोचे कुछ भी बोलने से बचें. नेगेटिव सोच से दूर रहें. सिंह राशि– काम में सावधानी जरूरी है. बड़े फैसले सोच-समझकर लें. परिवार में रिश्तों को संभालकर रखें. अचानक धन लाभ के मौके मिल सकते हैं. कन्या राशि– मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा. अपने काम पर फोकस रखें. दूसरों पर निर्भर न रहें. जल्दबाजी से बचें. तुला राशि- इस समय आपको थोड़ा संभलकर चलना होगा. झगड़े और उधार लेन-देन से बचें. सेहत का ध्यान रखें. पढ़ाई करने वालों को सफलता मिल सकती है. वृश्चिक राशि– धन लाभ के मौके मिलेंगे. सही प्लानिंग से काम करेंगे तो सफलता मिलेगी. परिवार का साथ मिलेगा. धनु राशि- घर-परिवार से जुड़े काम पूरे होंगे. प्रॉपर्टी खरीदने के लिए समय अच्छा है. करियर में भी प्रगति होगी. नेगेटिव सोच से दूर रहें. मकर राशि- रुके हुए काम पूरे होंगे और धन की स्थिति सुधरेगी. दोस्तों की सलाह फायदेमंद रहेगी. जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें. कुंभ राशि– मान-सम्मान बढ़ेगा और धन लाभ के योग बनेंगे. रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है. बोलचाल में संयम रखें. मीन राशि– आपके लिए यह समय खास रहेगा. रुके हुए काम पूरे होंगे और करियर में सफलता मिलेगी. मन की चिंता दूर होगी और आर्थिक स्थिति बेहतर होगी.

अक्षय तृतीया 2026: जानें शुभ मुहूर्त, सोना खरीदने का सही समय और 5 खास दान

अक्षय तृतीया का मतलब है वह तिथि जिसका कभी क्षय (नाश) न हो.  इस दिन आप जो भी अच्छा काम करते हैं या निवेश करते हैं, उसका फल आपको जीवनभर मिलता है. साल 2026 में 19 अप्रैल को यह पर्व मनाया जाएगा. अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना परंपरा है, लेकिन इसे सही समय पर खरीदना ही फायदेमंद होता है. अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से लेकर 20 अप्रैल को सुबह 05:40 से दोपहर 12:20 तक का समय सबसे उत्तम माना जा रहा है. इस दिन दान करना भी बेहद लाभकारी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन किया गया दान जन्म-जन्मान्तर के लिए आपके पुण्य के खाते में जुड़ जाता है. भीषण गर्मी के समय जल, मिट्टी के घड़े, सत्तू और पंखे का दान करने से न केवल पितृ तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं, बल्कि इससे कुंडली के ग्रह दोष भी शांत होते हैं. धार्मिक दृष्टि से यह दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने और अपने धन की शुद्धि का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि हमेशा बनी रहती है. जानते हैं उन पांच चीजों के दान के बारे में जिन्हें अक्षय तृतीया के दिन करना उत्तम माना गया है. जौ का दान: सोने के बराबर फल हिंदू शास्त्रों में जौ (Barley) को कनक यानी सोना माना गया है. अक्षय तृतीया के दिन जौ खरीदना और उसे भगवान विष्णु को अर्पित करना दरिद्रता दूर करता है. पूजा के बाद इस जौ को लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रखें, इससे साल भर धन की आवक बनी रहती है. मिट्टी के घड़े का खास महत्व वैशाख की गर्मी में शीतल जल का दान सबसे बड़ा पुण्य है. इस दिन मिट्टी का नया घड़ा (मटका) खरीदकर उसमें पानी भरकर दान करने से न केवल पितृ तृप्त होते हैं, बल्कि कुंडली में चंद्रमा और मंगल की स्थिति भी शुभ होती है. घर के लिए भी नया मटका लाना सुख-समृद्धि का प्रतीक है. दक्षिणावर्ती शंख और कौड़ियां माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस दिन घर में दक्षिणावर्ती शंख या सफेद कौड़ियां जरूर लाएं. कौड़ियों की केसर और हल्दी से पूजा करने के बाद उन्हें धन रखने के स्थान पर रखने से व्यापार और नौकरी में आ रही रुकावटें खत्म होती हैं. सत्तू और गुड़ का सेवन इस दिन सत्तू खाने और दान करने की भी पुरानी परंपरा है. इसे अक्षय भोजन माना जाता है. नईगुड़ के साथ सत्तू का दान करने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है. इससे ग्रहों के दोष शांत होते हैं. अक्षय तृतीया पर क्या न करें?     इस दिन घर में अंधेरा न रखें, शाम को घी का दीपक जरूर जलाएं.     किसी को उधार न दें, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन लक्ष्मी घर से बाहर नहीं भेजनी चाहिए.     घर के मुख्य द्वार पर गंदगी न रहने दें, क्योंकि माँ लक्ष्मी का आगमन वहीं से होता है.  

वास्तु शास्त्र: पेड़ों को काटते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना घर में बढ़ सकता है वास्तु दोष

  घर बनवाना हो, बिजली की तारें टकरा रही हों, या बस आंगन में धूप कम आ रही हो हम अक्सर बिना सोचे-समझे कुल्हाड़ी उठा लेते हैं और बरसों पुराने पेड़ को काट गिराते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि नियमों को नजरअंदाज करना आपके घर की सकारात्मक ऊर्जा को खत्म कर सकता है. वास्तु दोष का साया पूरे परिवार की सुख-शांति को प्रभावित कर सकता है. आभामंडल (Aura) और ऊर्जा का संतुलन वास्तु के अनुसार, हर जीवित वृक्ष का अपना एक आभामंडल होता है. जब आप बिना नियम के उसे काटते हैं, तो वह स्थान शोक की स्थिति में आ जाता है.  इसका सीधा असर घर के मुखिया के मानसिक स्वास्थ्य और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ता है. देव वृक्षों को काटने का महापाप पीपल, बरगद और गूलर को देव वृक्ष माना गया है. अगर ये दीवार या तारों को नुकसान पहुंचा रहे हों, तो भी इन्हें काटना भारी वास्तु दोष, पितृ दोष और संतान कष्ट का कारण बन सकता है.  अगर इन्हें हटाना जरुरी हो, तो विधि-विधान से पूजा के बाद ही यह कदम उठाएं. माफी और शुभ समय का चयन काटने से पहले पेड़ की गंध, पुष्प और नैवेद्य से पूजा करें.  तने को सफेद कपड़े से ढककर उस पर सफेद सूत लपेटें. पेड़ से प्रार्थना करें कि उस पर निवास करने वाले सूक्ष्म जीव दूसरे स्थान में शरण ले लें.  विशेष परिस्थितियों में पीपल काटना हो, तो चतुर्थी, नवमी या चतुर्दशी चुनें, लेकिन शनिवार, गुरुवार या रविवार से बचें. निषिद्ध दिन: भूलकर भी मंगलवार, शनिवार या अमावस्या को पेड़ न काटें. शुभ नक्षत्र: मृगशिरा, पुनर्वसु, अनुराधा, हस्त, मूल, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, स्वाति और श्रवण नक्षत्र पेड़ काटने के लिए उत्तम हैं. समय: सुबह का समय सबसे उपयुक्त है, दोपहर में पेड़ काटने से बचें. क्षतिपूर्ति: एक के बदले दस का नियम वास्तु शास्त्र में प्रकृति के ऋण का भुगतान अनिवार्य है.  यदि मजबूरी में एक पेड़ काटना पड़े, तो उस ऊर्जा के शून्य को भरने के लिए 10 नए पौधे लगाने होंगे. नियम तब पूरा माना जाता है जब वे पौधे फलने-फूलने लगें. दिशाओं का विशेष ध्यान ईशान कोण (North-East): यहां का पेड़ काटना अपनी किस्मत का दरवाजा बंद करने जैसा है. यह सात्विक ऊर्जा का द्वार है. दक्षिण दिशा (South): यहां के पेड़ हटाना तुलनात्मक रूप से सुरक्षित है. काटने की दिशा: पेड़ को हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर से काटना शुरू करना चाहिए.

शनि के नक्षत्र परिवर्तन से बढ़ेगी चुनौतियां, इन 3 राशियों को रहना होगा सावधान

अप्रैल 2026 में शनि एक अहम ज्योतिषीय बदलाव करने जा रहे हैं, जिसे नक्षत्र पद परिवर्तन कहा जाता है.17 अप्रैल को शाम करीब 4 बजे शनि उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश करेंगे. शनि पूरे 1 महीने इसी नक्षत्र में रेहेंगे. ज्योतिष में शनि को कर्म और न्याय का ग्रह माना जाता है, जो धीरे-धीरे चलते हुए लंबे समय तक असर डालते हैं. ऐसे में उनका यह बदलाव कई राशियों के जीवन में उतार-चढ़ाव ला सकता है, खासकर करियर, सेहत और रिश्तों पर. जानते हैं वो राशियां कौन सी हैं. मेष राशि मेष राशि के लोगों को इस समय संयम से काम लेने की जरूरत होगी. छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़ सकते हैं, जिससे रिश्तों में खटास आ सकती है. जल्दबाजी में कोई भी फैसला लेना नुकसानदायक हो सकता है, खासकर कानूनी या व्यापार से जुड़े मामलों में. स्वास्थ्य को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह है. कन्या राशि कन्या राशि के जातकों के लिए यह समय मेहनत और धैर्य की परीक्षा लेने वाला रहेगा. कार्यक्षेत्र में उम्मीद के मुताबिक सहयोग नहीं मिलेगा, जिससे निराशा हो सकती है. सीनियर और जूनियर दोनों के साथ तालमेल बिगड़ सकता है. आर्थिक मामलों में भी सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत होगी. मीन राशि मीन राशि वालों के लिए यह समय भावनात्मक रूप से थोड़ा भारी रह सकता है. बेवजह की चिंताएं और मानसिक दबाव बढ़ सकते हैं.रिश्तों में जल्दबाजी या गलतफहमी नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए संयम जरूरी है. सेहत के मामले में लापरवाही न करें. क्यों खास है यह गोचर शनि का नक्षत्र पद परिवर्तन साधारण घटना नहीं माना जाता, क्योंकि इसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है. यह बदलाव व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल देता है. इस दौरान धैर्य, संयम और सोच-समझकर फैसले लेना बेहद जरूरी है. बिना सोचे समझे कदम उठाने से नुकसान बढ़ सकता है, जबकि शांत रहकर काम करने से स्थितियां धीरे-धीरे बेहतर हो सकती हैं.

अक्षय तृतीया पर प्रेमानंद महाराज ने बताया एक चीज का दान करने से भाग्य बदलने का उपाय

हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को एक ऐसा दिन माना जाता है जिसका फल अक्षय (जिसका कभी क्षय न हो) होता है. इस साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाई जाएगी. लोग इस दिन भारी मात्रा में सोना-चांदी और कीमती सामान खरीदते हैं, लेकिन वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज का नजरिया इससे बिल्कुल अलग है. महाराज जी कहते हैं कि संसार की वस्तुएं तो नश्वर हैं, लेकिन इस पावन तिथि पर किया गया एक विशेष कार्य आपके लोक और परलोक दोनों को सुधार सकता है।  क्या है महाराज जी के अनुसार सबसे बड़ा दान? सत्संग के दौरान महाराज जी ने कहा कि अक्षय तृतीया पर हम अन्न, जल या धन का दान तो करते ही हैं, लेकिन नामजप का दान इन सबसे ऊपर है. अगर आपकी जिह्वा से निरंतर राधा-राधा या प्रभु का नाम निकल रहा है और वह ध्वनि किसी दुखी व्यक्ति के कान में पड़ती है, तो वह उसके जीवन का अंधेरा दूर कर सकती है.  यही सबसे बड़ा दान है।  महाराज जी के बताए 3 खास उपाय.  1. मौन का सहारा लें प्रेमानंद महाराज के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन व्यर्थ की बातों और विवादों से दूर रहकर मौन धारण करना बेहद उत्तम है.  मौन रहने से ऊर्जा इकट्ठा होती है, जिसे आप भगवान की भक्ति में लगा सकते हैं।  2. बाहर के जल और भोजन का त्याग महाराज जी एक विशेष सावधानी बताते हैं, इस दिन कोशिश करें कि बाहर का पानी भी ग्रहण न करें. अपने घर में ठाकुर जी को भोग लगाएं और वही प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें.  इससे आपकी बुद्धि और विचार शुद्ध रहते हैं।  3. नामजप की निरंतरता इस दिन आप जो भी मंत्र जपते हैं, उसका फल करोड़ों गुना होकर मिलता है. महाराज जी कहते हैं कि इस दिन जितना हो सके भगवान के नाम का कीर्तन करें, ताकि आपके आसपास का वातावरण भी सकारात्मक और भक्तिमय हो जाए।  सोना नहीं खरीद पा रहे? तो यह करें अगर आप आर्थिक कारणों से सोना या चांदी नहीं खरीद पा रहे हैं, तो महाराज जी के अनुसार निराश होने की जरूरत नहीं है. इस दिन जौ खरीदना या दान करना भी सोने के समान फल देता है.  साथ ही, मिट्टी के घड़े में जल भरकर किसी प्यासे को पिलाना भी अक्षय पुण्य की श्रेणी में आता है। .

11 अप्रैल 2026 का राशिफल: मेष राशि में बढ़ेगी भागदौड़, सिंह और मकर को मिल सकता है मेहनत का पुरस्कार

मेष 11 अप्रैल के दिन कारोबार में तरक्‍की के योग हैं। मन में शांति एवं प्रसन्नता रहेगी। आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। तरक्की के नए मार्ग खुलेंगे लेकिन आत्मविश्वास में कमी आ सकती है। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए वॉक पर जाएं। वृषभ 11 अप्रैल के दिन कुछ लोगों के चिकित्सीय खर्च बढ़ सकते हैं। आत्मविश्वास से परिपूर्ण तो रहेंगे, परन्तु स्वभाव में चिड़चिडेपन का भाव आ सकता है। नौकरी में कार्यभार बढ़ेगा। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। मिथुन 11 अप्रैल के दिन माता के सहयोग से धन की प्राप्‍ति‍ होगी। स्वास्थ्‍य के प्रति सचेत रहें। खुद के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। आकस्मिक धन की प्राप्‍ति‍ हो सकती है। आज आपके लिए ऑयली फूड्स से दूरी बनाना बेहतर रहेगा। कर्क 11 अप्रैल के दिन हाइड्रेटेड रहें। मन में शांति रहेगी। शिक्षा से जुड़े कामों में कठिनाइयां आ सकती हैं। वाहन के रख-रखाव पर खर्च बढ़ेंगे। घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। सिंह 11 अप्रैल के दिन धैर्य बनाये रखने के प्रयास करें। कारोबार में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। नौकरी में स्थान परिवर्तन के योग बन रहे हैं। तुला 11 अप्रैल के दिन जीवनसाथी के स्वास्थ्‍य को लेकर परेशान हो सकते हैं। व‍िवादों से दूर रहें। आज खुद को स्ट्रेस से दूर रखें। मन में निराशा एवं असंतोष के भाव जाग सकते हैं। नौकरी में पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। धनु 11 अप्रैल के दिन कला या संगीत के प्रति रुझान बढ़ सकता है। अपने एमोशन्स को काबू में रखें। धर्म-कर्म में आपका मन लगेगा। मीठे खानपान में रुचि बढ़ेगी। फालतू के खर्च बढ़ेंगे। स्वास्थ्य की परेशानी अभी बनी रहेगी। मकर 11 अप्रैल के दिन वाणी में मधुरता बनी रहेगी। घर-परिवार की सुविधाओं के लिए खर्च बढ़ सकते हैं। आय में वृद्धि होगी। वाहन एवं वस्त्रों के रख-रखाव पर खर्च बढ़ेंगे। परिवार का भरपूर साथ मिलेगा। कुम्भ 11 अप्रैल के दिन लग्जरी में बेफिजूल खर्च न करें। आज क्रोध से दूर रहें। व्यापारियों के लिए विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। इंकम में वृद्धि होगी। हेल्थ पर फोकस करें। कन्या 11 अप्रैल के दिन नौकरी में तरक्की के योग बन रहे हैं। किसी अतिथि का आगमन हो सकता है। तनाव से दूर रहें। भाइयों के सहयोग से कोई नया कारोबार शुरू कर सकते हैं। वृश्चिक 11 अप्रैल के दिन आज आपका कॉन्फिडेंस अलग ही लेवल पर रहेगा। आय में वृद्धि होगी, परन्तु कार्यभार बढ़ सकता है। गुस्सा करना आज ठीक नहीं है। दोस्तों का सहयोग मिलेगा। ध्यान रखें, परिवार में आपसी मतभेद हो सकते हैं। मीन 11 अप्रैल के दिन अपनी भावनाओं को वश में रखें। वाणी में मधुरता रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। लाइफ पार्टनर का साथ मिलेगा। आय में सुधार होगा। लाभ के नए अवसर मिल सकते हैं।

रात को किचन में जूठे बर्तन छोड़ना बढ़ा सकता है आर्थिक तंगी, मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए सोने से पहले अपनाएं ये 3 वास्तु नियम

  रसोईघर (Kitchen) को केवल भोजन पकाने का स्थान नहीं, बल्कि घर का सबसे पवित्र हिस्सा माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई का सीधा संबंध हमारी सेहत, सौभाग्य और आर्थिक स्थिति से होता है. कहते हैं कि जिस घर की रसोई में वास्तु के नियमों को माना जाता है, वहां मां लक्ष्मी और मां अन्नपूर्णा का हमेशा वास रहता है. अक्सर हम दिनभर की थकान के बाद रात को किचन को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही छोटी सी लापरवाही आपके घर की सुख-शांति को भंग कर सकती है. अगर आप चाहते हैं कि आपके घर में कभी धन-धान्य की कमी न हो, तो सोने से पहले अपनी दिनचर्या में ये 3 छोटे लेकिन चमत्कारी बदलाव जरूर अपनाएं. 1. जूठे बर्तन अक्सर आलस के कारण लोग रात के जूठे बर्तन सिंक में ही छोड़ देते हैं, रात भर यूं ही गंदे पड़े रहने के बाद सुबह उन्हें साफ किया जाता है. वास्तु शास्त्र में इसे बहुत बड़ा दोष माना गया है. रात भर सिंक में पड़े जूठे बर्तन नकारात्मक ऊर्जा पैदा करते हैं, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच तनाव और बीमारियां बढ़ती हैं. शास्त्रों के अनुसार, इससे राहु का अशुभ प्रभाव भी बढ़ता है जो आर्थिक तंगी का कारण बनता है.  इसलिए, सोने से पहले बर्तनों को साफ जरूर करें. यदि संभव न हो, तो उन्हें कम से कम पानी से धोकर किचन से बाहर रखें. 2. चूल्हे की सफाई किचन का चूल्हा अग्नि का प्रतीक है और अग्नि ऊर्जा का स्रोत होती है. दिन भर खाना बनाने के बाद चूल्हे पर गिरे खाने के दाने या गंदगी नकारात्मकता को आकर्षित करती है. वास्तु के अनुसार, गंदे चूल्हे पर अगली सुबह खाना बनाने से घर की बरकत रुक जाती है. रात को सोने से पहले चूल्हे और गैस स्टोव के आसपास के प्लेटफॉर्म को अच्छी तरह पोंछकर साफ करें. एक साफ और चमकता हुआ चूल्हा इस बात का संकेत है कि आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहेगा, परिवार का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा. 3. रोशनी का महत्व वास्तु के अनुसार, घर का कोई भी हिस्सा पूरी तरह अंधेरे में नहीं होना चाहिए, खासकर रसोई. बहुत से लोग काम खत्म होते ही किचन की लाइट बंद कर देते हैं. लेकिन, पूरी तरह अंधेरी रसोई घर में डर और नकारात्मकता का संचार करती है. सोने से पहले किचन के एक कोने में एक छोटा बल्ब (Zero Watt Bulb) जलता रहने दें. रसोई में हल्की रोशनी होने से सकारात्मक शक्तियां सक्रिय रहती हैं , इससे घर में सुख-समृद्धि के द्वार खुले रहते हैं. पानी से भरी बाल्टी का जादू वास्तु के जानकारों का यह भी मानना है कि रात को किचन की सफाई करने के बाद वहां एक बाल्टी या बर्तन में स्वच्छ पानी भरकर रखना चाहिए. यह उपाय विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो कर्ज (Debt) की समस्या से जूझ रहे हैं. माना जाता है कि रसोई में भरा हुआ पानी रखने से मानसिक शांति मिलती है, धन लाभ के नए रास्ते खुलते हैं.

सफलता पाने के लिए बगुले से सीखें ये खास गुण, स्थान और अपनी शक्ति का सही अंदाजा लगाकर ही शुरू करें कोई भी नया कार्य

महान विद्वान चाणक्य ने अपनी किताब चाणक्य नीति में जीवन से जुड़ी कई अहम बातों का जिक्र किया है. उनकी नीतियों को आज भी लोग सफलता का रास्ता मानते हैं. कहा जाता है कि जो व्यक्ति उनकी बातों को अपनाता है, वह अपने जीवन में आगे बढ़ सकता है. चाणक्य ने सिर्फ इंसानों ही नहीं, बल्कि जानवरों और पक्षियों के गुणों के बारे में भी विस्तार से बताया है. उनका मानना था कि प्रकृति में मौजूद हर जीव से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है. उन्होंने बताया कि कुछ जानवरों के खास गुण ऐसे होते हैं, जिन्हें अगर इंसान अपनी जिंदगी में उतार ले, तो उसे सफलता हासिल करने में मदद मिल सकती है. उन्हीं में से एक बगुला. इन्द्रियाणि च संयम्य बकवत्पण्डितो नरः । देशकाल बलं ज्ञात्वा सर्वकार्याणि साधयेत् ।। आचार्य चाणक्य बगुले के जरिए एक बहुत जरूरी सीख दे रहे हैं. बगुला जब शिकार करता है, तो वह पूरी तरह शांत और एकाग्र होकर खड़ा रहता है. उसका ध्यान सिर्फ अपने लक्ष्य यानी मछली पर होता है. वह जल्दबाजी नहीं करता, बल्कि सही समय का इंतजार करता है. जैसे ही मौका मिलता है, तुरंत उसे पकड़ लेता है. इसी तरह इंसान को भी अपने काम में पूरा फोकस रखना चाहिए. कार्यों पर रखें फोकस आचार्य चाणक्य आगे कहते हैं कि इंसान को भी अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान लगाना चाहिए. अगर हम बार-बार ध्यान भटकाते हैं या बिना सोचे-समझे जल्दबाजी करते हैं, तो सफलता मिलना मुश्किल हो जाता है. धैर्य के साथ सही समय का इंतजार करना और मौके को पहचानना बहुत जरूरी होता है. काम शुरू करने से पहले इन चीजों पर दें ध्यान देश (स्थान)- जहां आप काम कर रहे हैं, वहां उसका कितना फायदा होगा और उसकी जरूरत कितनी है, यह समझना जरूरी है. काल (समय)- कौन-सा समय उस काम के लिए सही है, यह जानना चाहिए. बल (शक्ति)- अपनी क्षमता, पैसे और संसाधनों का सही अंदाजा लगाना भी जरूरी है.

परशुराम जयंती की तारीख को लेकर उलझन हुई दूर, 19 अप्रैल को प्रदोष काल में मनेगा जन्मोत्सव और यह है पूजा का शुभ मुहूर्त

 हर साल की तरह इस बार भी परशुराम जयंती की तारीख को लेकर लोगों में बना रहता है. इस बार कुछ लोग 19 अप्रैल को मनाने बात कर रहे हैं और कुछ लोग 20 अप्रैल को. क्योंकि उसी दिन अक्षय तृतीया का पर्व है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर परशुराम जयंती की सही तारीख क्या है? हिंदू पंचांग के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था, जिसे अक्षय तृतीया भी कहा जाता है. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भगवान परशुराम का जन्म संध्या काल यानी प्रदोष काल में हुआ था. द्रिक पंचांग के मुताबिक, तृतीया तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर होगा. ऐसे में परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाई जाएगी. द्रिक पंचांग के अनुसार, परशुराम जयंती पर पूजन का समय 19 अप्रैल को शाम 6 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. कैसे मनाएं परशुराम जयंती? इस पावन अवसर पर आप घर पर ही सरल तरीके से पूजा कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान परशुराम की तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद गंगाजल या साफ जल से छिड़काव कर स्थान को पवित्र करें. फिर भगवान को तिलक लगाएं, अक्षत अर्पित करें और फूल या माला चढ़ाएं. दीपक जलाकर आरती करें और फल, मिठाई या नारियल का भोग लगाएं. अंत में अपनी मनोकामनाओं के लिए भगवान से प्रार्थना करें. पूजा के बाद प्रसाद को परिवार और आसपास के लोगों में बांटना शुभ माना जाता है. परशुराम जयंती से मिलने वाले लाभ परशुराम जयंती के दिन भगवान परशुराम की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन विधि-विधान से उपासना करने पर व्यक्ति के जीवन में साहस और पराक्रम बढ़ता है. साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और मन को शांति मिलती है. मान्यता है कि इस पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कठिन से कठिन कार्यों को पूरा करने की क्षमता भी मिलती है.