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विवाह निमंत्रण पत्र की ये चूक बन सकती है वैवाहिक जीवन में बाधा

शादी का कार्ड सिर्फ एक निमंत्रण पत्र नहीं होता, बल्कि यह आपके नए जीवन की शुरुआत का पहला औपचारिक संदेश होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, विवाह पत्रिका में रंग, शब्द और प्रतीकों का सही चयन घर में सुख-समृद्धि लाता है। अगर कार्ड बनवाते समय वास्तु के नियमों की अनदेखी की जाए, तो यह वैवाहिक जीवन में अनचाही बाधाएं पैदा कर सकता है। वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, आइए जानते हैं कि शादी के कार्ड में क्या चीजें होनी चाहिए और क्या नहीं- रंगों का चुनाव वास्तु के अनुसार, शादी के कार्ड के लिए लाल, पीला, केसरिया या क्रीम रंग सबसे शुभ माने जाते हैं। लाल रंग: प्रेम और ऊर्जा का प्रतीक है। पीला रंग: ज्ञान और नई शुरुआत का सूचक है। क्या न करें: शादी के कार्ड में कभी भी काले या गहरे भूरे (Dark Brown) रंग का इस्तेमाल मुख्य रंग के तौर पर नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन्हें नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। शुभ प्रतीकों का महत्व कार्ड पर देवी-देवताओं और मंगल प्रतीकों का होना सकारात्मक ऊर्जा फैलाता है। गणेश जी की प्रतिमा: किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से होती है, इसलिए कार्ड पर उनकी छवि अनिवार्य है। स्वास्तिक और कलश: ये चिन्ह सुख और वैभव का प्रतिनिधित्व करते हैं। ध्यान दें: आजकल मॉडर्न दिखने के चक्कर में लोग अजीबोगरीब आकृतियां बनवाते हैं, जिनसे बचना चाहिए। शब्दों और भाषा की शुद्धता 1. कार्ड पर लिखे शब्दों का प्रभाव गहरा होता है। 2. निमंत्रण की भाषा सौम्य और आदरपूर्ण होनी चाहिए। 3. ध्यान रखें कि कार्ड पर अपशब्द या भारी-भरकम शब्द न हों जो पढ़ने में नकारात्मक लगें। किन चीजों से बचें? नुकीले किनारे: वास्तु के अनुसार, कार्ड के कोने बहुत ज्यादा नुकीले नहीं होने चाहिए। गोलाई वाले या चौकोर किनारे बेहतर माने जाते हैं। अधूरी जानकारी: कार्ड पर शुभ मुहूर्त और तिथि साफ-साफ लिखें। अधूरी जानकारी भ्रम और वास्तु दोष पैदा करती है। चित्रों का चयन: कार्ड पर युद्ध, सूखे पेड़ या किसी भी उदास कर देने वाले चित्र का प्रयोग भूलकर भी न करें। वितरण का सही समय वास्तु शास्त्र कहता है कि शादी का पहला कार्ड हमेशा अपने कुलदेवता या भगवान गणेश को अर्पित करना चाहिए। इसके बाद ही सगे-संबंधियों को बांटना शुरू करें। शादी का कार्ड आपके खुशहाल भविष्य की नींव है। वास्तु के इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनाकर आप अपने विवाह उत्सव को और भी मंगलमय बना सकते हैं।

सूर्यास्त के बाद मकर संक्रांति का महत्व: ये काम करें शुभ, इन गलतियों से बचें

मकर संक्रांति का पर्व हर साल माघ माह में सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है. आज मकर संंक्रांति का पावन पर्व मनाया जा रहा है. मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं. उत्तरायण का काल देवताओं का माना जाता है, इसलिए मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान का बहुत विशेष महत्व माना गया है. इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान, पूजा-पाठ और जप-तप करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होते हैं. मकर संक्रांति के दिन उत्तर भारत के अधिकतर राज्यों में खिचड़ी खाई जाती है, इसलिए इसे खिचड़ी भी कहा जाता है. मकर संक्रांति के दिन सूर्यास्त के बाद का समय भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. धर्म शास्त्रों में बताया गया है मकर संक्रांति के दिन सूर्यास्त के समय कुछ काम करने बहुत शुभ होते हैं. साथ ही कुछ गलतियों से बचने के लिए भी कहा गया है. आइए इसके बारे में जानते हैं. मकर संक्रांति पर सूर्यास्त के बाद क्या करना होता है शुभ? मकर संक्रांति के दिन सूर्यास्त के बाद शाम के समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. इस दिन शाम के समय मंदिर या पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना चाहिए. इस दिन सूर्यास्त के बाद शाम को लड्डू गोपाल के सामने घी का एक अखंड दापक जलाना चाहिए. ऐसा करने से परिवार में सुख-शांति आती है. इस दिन घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन शाम को तुलसी के पास भी दीपक अवश्य जलाएं. इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है. मकर संक्रांति पर न करें ये गलतियां मकर संक्रांति के दिन दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए. इस दिन भूलकर भी बड़ों का अपमान नहीं करना चाहिए. इस दिन मांस-मछली, शराब और लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन के सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन झूठ, क्रोध और कटु वाणी बोलने से बचना चाहिए. व्यवहार में सयंम रखना चाहिए.

15 जनवरी राशिफल: इस दिन की ग्रहों की चाल से जानें आपके लिए क्या लेकर आई है किस्मत

मेष-15 जनवरी के दिन सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत है। व्यापारियों को मनचाहा लाभ होगा। आपको मेहनत का पूरा फल मिलेगा। मान-सम्मान बढ़ेगा। दिन के अंत में पैसों के लेन-देन से बचें। शादीशुदा लोगों की जिंदगी में खुशियां रहेंगी। वृषभ-15 जनवरी का दिन मिला-जुला रहने वाला है। दिन की शुरुआत में नौकरी करने वाले जातकों पर काम का दवाब रहेगा। आपको सफल होने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। मिथुन-15 जनवरी का दिन शुभ समाचार लेकर आ सकता है। आज आपके आय के साधन में वृद्धि होगी। व्यापारियों को मनचाहा लाभ होगा। परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। दिन के बीच में नौकरी पेशा करने वाले जातकों को नए अवसर मिलेंगे। कर्क-15 जनवरी के दिन आप संतान की किसी बात से परेशान रहेंगे। दिन के मध्य में किसी विशेष काम में आपको सफलता मिल सकती है। दिन की शुरुआत में खर्चों का सामना करना पड़ सकता है। सिंह-15 जनवरी के दिन परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद हो सकते हैं। सुख-सुविधा से जुड़ी किसी चीज में पैसे खर्च हो सकते हैं। मन में नकारात्मक विचारों का प्रभाव भी हो सकता है। जिसके कारण आपका आर्थिक बजट बिगड़ सकता है। तुला-15 जनवरी के दिन आपको कुछ बड़े खर्चों का सामना करना पड़ सकता है। दिन की शुरुआत में कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान छात्रों का मन पढ़ाई से उचट सकता है। धनु-15 जनवरी का दिन उतार-चढ़ाव भरा साबित हो सकता है। नौकरी पेशा करने वाले जातकों को नौकरी के नए अवसर मिल सकते हैं। कार्यस्थल पर प्रमोशन मिल सकता है। हालांकि दिन के मध्य में गुप्त शत्रुओं से बचकर रहने की जरूरत है। मकर-15 जनवरी का दिन कुछ बड़े खर्चे लेकर आ सकता है। जिससे आपका आर्थिक बजट हिल सकता है। इस दिन समय और धन दोनों को सोच-समझकर खर्च करें। कुछ लोग शारीरिक व मानसिक रूप से परेशान हो सकते हैं। कुम्भ-15 जनवरी के दिन आपकी किस्मत चमक सकती है। इस दौरान आपको मनचाही सफलता हासिल होगी। रुके हुए कार्य पूरे होंगे। आज के दिन दोपहर में किसी विशेष व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। कन्या-15 जनवरी के दिन नौकरी पेशा करने वाले जातकों को गुप्त शत्रुओं से बचना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले जातकों के लिए आज का दिन शुभ साबित हो सकता है। स्ट्रेस मत लें। वृश्चिक-15 जनवरी के दिन गुस्से और वाणी पर काबू रखें। दिन आपके लिए मिले-जुले परिणाम लेकर आया है। हालांकि, दिन खत्म होते-होते आपको मनचाहा लाभ मिल सकता है। किसी भी काम में लापरवाही करने से बचना चाहिए। मीन-15 जनवरी के दिन काम के सिलसिले में ट्रैवल करना पड़ सकता है। दिन की शुरुआत में कुछ चुनौतियों आएंगी, जिनका सामना करना पड़ सकता है। आपको सेल्फ लव पर फोकस करना चाहिए।

लोग पहली नजर में क्या नोटिस करते हैं? एटिकेट कोच की 5 अहम टिप्स

कभी ना कभी आपने ये तो जरूर सुना होगा कि 'फर्स्ट इंप्रेशन इज योर लास्ट इंप्रेशन'। कुछ हद तक ये बात सही भी है। अब कोई कितना भी कहे कि बाहरी लुक्स मैटर नहीं करते हैं, लेकिन प्रैक्टिकल लाइफ में लोग आपको इसी के बेसिस पर जज करते हैं। यहां लुक्स का मतलब आपके नैन-नक्श से नहीं है, बल्कि आपकी पर्सनेलिटी से है। आप कैसे खुद को कैरी करते हैं, कैसे ड्रेसअप करते हैं; ये छोटी-छोटी चीजें काफी मायने रखती हैं। एटिकेट कोच माणिक कौर एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बताती हैं कि जब भी आप किसी रूम में एंटर करते हैं, किसी से मिलते हैं, तो आपके मुंह खोलने से पहले ही लोग कुछ चीजें नोटिस करते हैं और अपने दिमाग में आपको ले कर एक इंप्रेशन बना लेते हैं। आइए जानते हैं वो क्या चीजें हैं। आपके पैर नोटिस करते हैं लोग एटिकेट कोच कहती हैं कि आमतौर पर लोग सबसे पहले आपके पैरों को नोटिस करते हैं। अगर आप गंदे-फटे जूते या फुटवियर पहनते हैं, पैरों का ध्यान नहीं रखते हैं; तो इसका सामने वाले पर खराब इंप्रेशन पड़ता है। ये छोटी-छोटी चीजें आपकी पर्सनेलिटी पर काफी असर डालती हैं। आपके चेहरे के एक्सप्रेशन आपको कुछ कहने की भी जरूरत नहीं है, क्योंकि आपके फेशियल एक्सप्रेशन यानी चेहरे के भाव आपके बारे में काफी कुछ बयां कर देते हैं। अगर आप इरिटेट हैं या गुस्से में किसी से मिल रहे हैं, तो जाहिर है इसका अच्छा इंप्रेशन बिल्कुल नहीं पड़ेगा। आपको हर समय हंसने की जरूरत नहीं है, लेकिन चेहरे पर एक सॉफ्ट स्माइल रखें। इससे लोग आपके साथ जल्दी कनेक्ट कर पाते हैं और सेफ महसूस करते हैं। आपकी खुशबू माणिक कौर कहती हैं कि लोगों को आपका पहनावा बेशक याद ना रहे, लेकिन वो आपकी स्मेल को जरूर याद रखते हैं। अगर आप अच्छा स्मेल करते हैं, तो लोगों के माइंड पर एक अच्छा इंप्रेशन पड़ता है। ये छोटी सी ट्रिक आपको ज्यादा पॉलिश्ड और हाइजीनिक दिखाती है। आपका बॉडी पोस्चर आप खुद को किस तरह कैरी करते हैं, ये भी लोग पहली नजर में नोटिस करते हैं। किसी रूम में अगर आप कॉन्फिडेंस के साथ वॉक करते हैं, तो अपने आप एक स्ट्रांग और पॉजिटिव इंप्रेशन जाता है। वहीं खराब बॉडी पोस्चर आपके लुक्स और पर्सनेलिटी दोनों को नेगेटिव दिखा सकता है। आपका पहनावा कोच कहती हैं कि आपका पहनावा आपके बारे में बहुत कुछ बताता है। इसका मतलब ये नहीं है कि आपको हमेशा महंगे और डिजाइनर कपड़े ही पहनने चाहिए। बल्कि हमेशा साफ सुथरी, आयरन किए हुए कपड़े वियर करें। इससे सामने वाले पर ये इंप्रेशन जाता है कि आप खुद की रिस्पेक्ट करते हैं। आप खुद भी और ज्यादा कॉन्फिडेंट और बेहतर महसूस करते हैं।

खरमास का समापन आज, शादी और नए कामों की शुरुआत संभव

पंचांग के अनुसार, आज से एक बार फिर शुभ कार्यों की शुरुआत होने जा रही है. करीब एक महीने तक चले खरमास की अवधि अब समाप्त होने वाली है. पंचांग के मुताबिक, खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर 2025 से हुई थी, जो सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश करते ही खत्म हो जाएगी. सूर्य 14 जनवरी की रात धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे और इसी के साथ खरमास का समापन हो जाएगा. किस समय खत्म हो रहा है खरमास? पंचांग और ज्योतिष गणना के अनुसार, पिछले साल 16 दिसंबर से खरमास की अवधि शुरू हुई थी. अब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं. समाप्ति का समय: 14 जनवरी 2026, रात 9 बजकर 19 मिनट होगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जैसे ही सूर्य मकर राशि में कदम रखेंगे, खरमास खत्म हो जाएगा और मकर संक्रांति का पुण्यकाल शुरू हो जाएगा. अब शुरू होंगे ये मांगलिक कार्य हिंदू धर्म में खरमास के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य करने की मनाही होती है. लेकिन अब सूर्य के उत्तरायण होते ही ये सभी काम फिर से शुरू किए जा सकेंगे. विवाह संस्कार: शादियों के लिए शहनाइयां बजनी शुरू हो जाएंगी. गृह प्रवेश: नए घर में शिफ्ट होने के लिए यह समय उत्तम है. मुंडन और जनेऊ: बच्चों के मुंडन और उपनयन संस्कार किए जा सकेंगे. नया बिजनेस: नई दुकान खोलना या व्यापार की शुरुआत करना शुभ रहेगा. गाड़ी और प्रॉपर्टी की खरीदारी: निवेश और खरीदारी के लिए अब रास्ते खुल गए हैं. क्यों अशुभ माना जाता है खरमास? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि यानी धनु या मीन में होते हैं, तो उनका प्रभाव थोड़ा कम हो जाता है. इसे ही खरमास या लोहड़ी मास कहा जाता है. मान्यता है कि इस समय किए गए कामों का पूरा फल नहीं मिलता. लेकिन जैसे ही सूर्य मकर राशि में आते हैं, वे शक्तिशाली हो जाते हैं और यहीं से देवताओं का दिन शुरू होता है जिसे उत्तरायण कहते हैं. धार्मिक दृष्टि से भी खास है यह समय मकर संक्रांति के दिन दान, स्नान और सूर्य उपासना का विशेष महत्व होता है. माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान, तिल और गुड़ का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. सूर्यदेव की पूजा से स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.

पोंगल क्यों है खास? जानिए दक्षिण भारत की परंपराएं

हर वर्ष जनवरी माह में मनाया जाने वाला पोंगल पर्व दक्षिण भारत की संस्कृति और कृषि परंपरा का प्रमुख उत्सव माना जाता है. वर्ष 2026 में पोंगल 14 जनवरी से 17 जनवरी तक मनाया जाएगा. यह पर्व केवल नई फसल के स्वागत तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति, सूर्य और धरती के प्रति आभार प्रकट करने का अवसर भी माना जाता है. पोंगल के दौरान की जाने वाली पूजा, अनुष्ठान और पारंपरिक विधियां जीवन में समृद्धि, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती हैं. यही कारण है कि पोंगल को दक्षिण भारत का सबसे महत्वपूर्ण कृषि पर्व कहा जाता है. पोंगल पर्व का मुख्य उद्देश्य नई फसल के प्रति आभार व्यक्त करना है. इस दिन किसान अपनी पहली उपज को सूर्यदेव और धरती माता को अर्पित करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नई फसल की पूजा करने से अन्न की शुद्धता बनी रहती है और आने वाला वर्ष समृद्धि लेकर आता है. पोंगल शब्द का अर्थ ही उफनना या भरपूर होना है, जो समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. नई फसल की पूजा यह संदेश देती है कि मनुष्य और प्रकृति का संबंध संतुलन और सम्मान पर आधारित होना चाहिए. सूर्य उपासना और पोंगल का ज्योतिषीय पक्ष पोंगल का पर्व सूर्यदेव से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है. यह त्योहार सूर्य के उत्तरायण होने और मकर राशि में प्रवेश के समय मनाया जाता है. ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय सकारात्मक ऊर्जा, नई शुरुआत और स्थिर प्रगति का प्रतीक माना गया है. सूर्यदेव को अन्न, ऊर्जा और जीवन का आधार माना जाता है, इसलिए पोंगल पर सूर्य उपासना का विशेष महत्व है. इस दिन सूर्य को अर्घ्य देना, दीप जलाना और पोंगल अर्पित करना शुभ माना जाता है, जिससे जीवन में स्पष्टता और आत्मबल बढ़ने के संकेत माने जाते हैं. पोंगल पर दक्षिण भारत की विशेष परंपराएं दक्षिण भारत में पोंगल चार दिनों तक अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है. पहले दिन भोगी पोंगल पर पुराने सामान का त्याग और नए जीवन की शुरुआत का संदेश दिया जाता है. दूसरे दिन थाई पोंगल पर नए चावल, दूध और गुड़ से पोंगल बनाकर सूर्यदेव को अर्पित किया जाता है. तीसरे दिन मट्टू पोंगल पर पशुधन की पूजा की जाती है, क्योंकि कृषि जीवन में उनका विशेष योगदान माना जाता है. चौथे दिन कानूम पोंगल पर परिवार और सामाजिक मेल-मिलाप को महत्व दिया जाता है. खान-पान, रंगोली और सामूहिक उत्सव पोंगल पर्व पर खान-पान और सजावट का विशेष महत्व होता है. घरों के सामने रंगोली या कोलम बनाई जाती है, जो शुभता और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है. पोंगल प्रसाद, गन्ना, नारियल और ताजे फल इस पर्व की पहचान होते हैं. लोग पारंपरिक वस्त्र पहनते हैं और सामूहिक रूप से उत्सव मनाते हैं. यह पर्व सामाजिक एकता, परिवारिक संबंधों और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का माध्यम माना जाता है. जीवन पर प्रभाव और संदेश पोंगल केवल एक कृषि पर्व नहीं, बल्कि जीवन दर्शन से जुड़ा उत्सव माना जाता है. नई फसल की पूजा यह सिखाती है कि परिश्रम, धैर्य और कृतज्ञता से ही जीवन में स्थायी सुख मिलता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पोंगल के समय किए गए संकल्प और पूजा जीवन में सकारात्मक दिशा देने वाले माने जाते हैं. कुल मिलाकर, पोंगल 2026 प्रकृति के साथ सामंजस्य, परंपरा के सम्मान और नए आरंभ का पर्व है, जो समृद्धि और संतुलन का संदेश देता है.

मकर संक्रांति दो दिन क्यों? जानें सही वजह

मकर संक्रांति को लेकर इस साल लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह पर्व आज यानी 14 जनवरी 2026 को मनाया जाए या फिर 15 जनवरी 2026 को. यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मकर संक्रांति आज और कल दोनों दिन मनाई जा रही है. इसके पीछे ज्योतिष, पंचांग, परंपरा और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े कई कारण हैं. आइए आसान भाषा में पूरे मामले को समझते हैं. क्यों है तारीखों को लेकर कंफ्यूजन? मकर संक्रांति तब मनाई जाती है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. ज्योतिषियों के बीच मतभेद सूर्य के प्रवेश के समय को लेकर है. अधिकांश पंचांगों के अनुसार, सूर्य आज यानी 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. वहीं, बनारस के कुछ पंचांगों का मानना है कि यह प्रवेश रात 9:19 बजे होगा. इसी समय के अंतर के कारण त्योहार दो दिन मनाया जा रहा है. आज 14 जनवरी कहां-कहां है धूम? चूंकि अधिकांश पंचांगों के अनुसार, सूर्य का गोचर आज दोपहर में हो रहा है, इसलिए देश के कुछ हिस्सों में ये उत्सव आज भी मनाया जा रहा है. गुजरात और राजस्थान: यहां उत्तरायण और पतंगबाजी का मुख्य जश्न आज ही मनाया जा रहा है. तमिलनाडु: दक्षिण भारत में थाई पोंगल का मुख्य दिन आज 14 जनवरी ही है. शुभ मुहूर्त: द्रिक पंचांग के अनुसार, संक्रांति का पुण्य काल आज दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक रहेगा. कल (15 जनवरी) क्यों मनाई जाएगी संक्रांति? उत्तर प्रदेश, बिहार और वाराणसी के विद्वान 15 जनवरी को त्योहार मनाना अधिक उचित मान रहे हैं. इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं. उदया तिथि और स्थानीय परंपरा शास्त्रों में माना जाता है कि जो तिथि सूर्योदय के समय होती है, उसी का महत्व पूरे दिन रहता है. चूंकि आज सूर्य का प्रवेश दोपहर या रात में हो रहा है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार कल 15 जनवरी को मुख्य स्नान और दान होगा. षटतिला एकादशी और चावल का धर्मसंकट इस बार 14 जनवरी को षटतिला एकादशी भी है. हिंदू धर्म में एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है. मकर संक्रांति का मुख्य प्रसाद ‘खिचड़ी’ है, जो बिना चावल के नहीं बन सकती. ऐसे में व्रत रखने वाले लोग 14 जनवरी को खिचड़ी नहीं खा सकते, इसलिए वे 15 जनवरी को यह पर्व मनाएंगे. दोपहर के स्नान को लेकर शास्त्र क्या कहते हैं? प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य पंडित दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, शास्त्रों में दोपहर के स्नान को अच्छा नहीं माना गया है. धर्म सिंधु और नारद पुराण के अनुसार, संक्रांति का पुण्यकाल अगले दिन के मध्याह्न तक रहता है. इसलिए 15 जनवरी की सुबह स्नान और दान करना सबसे उत्तम है. आपके लिए क्या है सही? अगर आप परंपरा और पंचांग को मानते हैं, तो दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान के लिए 15 जनवरी की सुबह का समय सबसे श्रेष्ठ है. वहीं, अगर आप केवल उत्सव और पतंगबाजी का आनंद लेना चाहते हैं, तो 14 जनवरी को इसकी शुरुआत हो चुकी है.

आखिरी 60 दिन में न करें ये गलतियां, पैरेंट्स भी रहें सतर्क

बोर्ड एग्जाम नजदीक आ रहे हैं। लगभग हर बोर्ड से जुड़े एग्जाम फरवरी महीने में शुरू हो जाएंगे। ऐसे में स्टूडेंट्स और पेरेंट्स दोनों को ही एक अलग तरह का प्रेशर महसूस होने लगा है। समय कम है और सिलेबस इतना ज्यादा, ऐसे में घबराहट की वजह से कई स्टूडेंट्स कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो उनकी तैयारी को नुकसान पहुंचाती हैं। एक्सपर्ट मेघना मिश्रा का कहना है कि बोर्ड एग्जाम में बैठने वाले स्टूडेंट्स के लिए आखिरी के लगभग तीन महीने बहुत कीमती होते हैं। अगर इस समय सही दिशा में मेहनत की जाए, तो अच्छे नंबर लाना पूरी तरह संभव है। वहीं इस दौरान की गई कुछ गलतियां काफी भारी भी साबित हो सकती हैं। एक्सपर्ट ने ऐसी ही गलतियां बताई हैं, जो आपको हर हाल में अवॉइड करनी चाहिए। नई किताबें शुरू करने की गलती कई छात्र परीक्षा के नजदीक आते ही नई-नई किताबें खरीद लेते हैं। उन्हें लगता है कि जितनी ज्यादा किताबें पढ़ेंगे, उतना ज्यादा सीखेंगे। लेकिन मेघना के मुताबिक आपकी यह सोच गलत है। ज्यादा किताबें पढ़ने से अक्सर कन्फ्यूजन बढ़ती है। बेहतर यही है कि छात्र NCERT की किताबों पर पूरा ध्यान दें और साथ में सिर्फ एक अच्छी प्रैक्टिस बुक रखें। जो किताबें आपके पास पहले से हैं, उन्हीं को अच्छे से समझें और बार-बार रिवाइज करें। गहराई से पढ़ाई करना, ऊपर-ऊपर सब कुछ देखने से कहीं बेहतर होता है। पूरी रात जागकर पढ़ने से बचें कुछ बच्चे एग्जाम आते ही पूरी-पूरी रात जागकर पढ़ाई करने लगते हैं, उन्हें लगता है रात भर जागकर पढ़ने से ज्यादा सिलेबस पूरा हो जाएगा। लेकिन स्टूडेंट्स की ये आदत सही नहीं है। उनका कहना है कि नींद की कमी याददाश्त को कमजोर कर देती है। नींद दिमाग को मजबूत बनाती है और पढ़ी हुई चीजों को याद रखने में मदद करती है। दिमाग को एक्टिव रखने के लिए कम से कम सात घंटे की नींद बहुत जरूरी है। इसे किसी भी हालत में नजरअंदाज ना करें। जब आप पूरी नींद लेते हैं, तो पढ़ाई में मन भी लगता है और समझ भी बेहतर होती है। सोशल मीडिया से दूरी बनाएं एक्सपर्ट का कहना है कि आज के समय में सोशल मीडिया पढ़ाई का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका है। स्टूडेंट्स सिर्फ पंद्रह मिनट के लिए फोन उठाते हैं, वही कब दो घंटे बर्बाद कर देते हैं, उन्हें पता भी नहीं चलता। अगर सच में पढ़ाई पर ध्यान देना है, तो सोशल मीडिया एप्स को कुछ समय के लिए हटा देना ही बेहतर है। वेबसाइट ब्लॉकर का इस्तेमाल करें और खुद पर कंट्रोल रखें। याद रखें, यह समय दोबारा नहीं आएगा। टॉपर्स से तुलना करना छोड़ें अक्सर छात्र खुद की तुलना टॉपर्स से करने लगते हैं। इससे सिर्फ तनाव और डर बढ़ता है। मेघना मिश्रा के मुताबिक हर छात्र की क्षमता अलग होती है। किसी और की तैयारी देखकर खुद को कम आंकना सही नहीं है। आपको सिर्फ अपनी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। जो आप कर सकते हैं, वही आपके लिए सबसे जरूरी है। तुलना से दूर रहकर शांत मन से पढ़ाई करना ही सफलता पाने का सही रास्ता है। कमजोर विषयों से भागने की आदत कई स्टूडेंट्स कमजोर विषयों को बाद के लिए छोड़ देते हैं, यह बहुत बड़ी गलती है। हर विषय को संतुलन के साथ पढ़ना जरूरी है। कमजोर विषयों पर थोड़ा-थोड़ा रोज ध्यान दें। 80-20 नियम को याद रखें और जहां कमी है, वहां अभ्यास बढ़ाएं। कमजोर विषय ही अक्सर अच्छे नंबरों का रास्ता बनते हैं। परफेक्ट समय का इंतजार ना करें कई स्टूडेंट्स सोचते हैं कि जब सब कुछ सही होगा, तभी पढ़ाई शुरू करेंगे। लेकिन सच ये है कि पढ़ाई के लिए कभी परफेक्ट हालात नहीं होते। आपको खुद की दिनचर्या बनानी होगी और उसी में पढ़ाई को जगह देनी होगी। शुरुआत करना सबसे जरूरी है, परफेक्ट होना नहीं। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ेंगे, चीज़ें अपने आप बेहतर होती जाएंगी।  

मकर संक्रांति: स्नान न करने पर मिलने वाले दंड क्या हैं?

मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में शुभ प्रवेश का प्रतीक है, जो उसकी उत्तर दिशा की यात्रा का संकेत देता है. हिंदू परंपरा में सूर्य की इस गति को बढ़ती रोशनी, गर्मी और नई ऊर्जा से जोड़ा जाता है इसलिए इस त्योहार को शारीरिक शुद्धि, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक उत्थान के लिए एक शक्तिशाली समय माना जाता है. मकर संक्रांति का त्योहार को लेकर इस बार कंफ्यूजन की स्थिति हुई. कई जगह आज मनाया जा रहा और कई जगह कल मनाया जाएगा. ऐसे में जानते हैं कि इस त्योहार पर स्नान न करने पर श्रद्धालु के जीवन में किस तरह का प्रभाव पड़ता है? सबसे पहले बात करते हैं कि मकर संक्रांति को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति क्यों हुई? दरअसल, कई पंचांगों में कहा गया है कि ये त्योहार 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा, लेकिन काशी के पंचांग में दावा किया गया है कि सूर्यदेव मकर राशि में 14 जनवरी रात 9 बजकर 19 मिनट पर प्रवेश करेंगे. यही कारण है कि अगले दिन उदया तिथि में त्योहार मनाया जाएगा. इसके अलावा एक तर्क ये भी दिया जा रहा था कि 14 जनवरी को षटतिला एकादशी है, जिसके चलते चालव या अन्न दान नहीं किया जा सकता है. इसे अगले दिन ही मनाना शुभ रहेगा. आखिरकार 15 जनवरी को त्योहार को मनाना शुभ माना गया है. मकर संक्रांति पर स्नान, ध्यान, दान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है. इस दिन स्नान करने से पापों का नाश होता है. अगर कोई श्रद्धालु मकर संक्रांति पर स्नान नहीं करता है तो उसे सजा के तौर पर उसके जीवन में कई चीजें घटित हो सकती हैं. मान्यता है कि इस त्योहार पर पवित्र नदियों में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान किया जाता है. खासकर गंगा में स्नान करने का अपना एक महत्व है. इससे पिछले पापों का विनाश होता है, जो भी व्यक्ति घर पर और पवित्र नदी में स्नान नहीं करता है वो विशेष पुण्य लाभ से वंचित रह सकता है. मकर संक्रांति पर स्नान न करने से मनुष्य बनता है दरिद्र? मान्यता ये भी है कि सूर्यदेव के उत्तरायण होने की वजह से प्रकृति में पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह बढ़ता है. कहा गया है कि स्नान न करने से शरीर में तामसिक ऊर्जा और आलस्य बना रहता है. इसकी वजह से सुबह का स्नान करने से शरीर शुद्ध होता है, जोकि नई ऊर्जा के संचार के लिए बहुत जरूरी होता है. कुछ पौराणिक कथाओं में जिक्र किया गया है कि जो व्यक्ति मकर संक्रांति जैसे पर्व पर स्नान और दान नहीं करता, वह अगले जन्म में दरिद्र या रोगों से ग्रसित हो सकता है. शनिदेव हो जाते हैं नाराज! मान्यता के मुताबिक, मकर संक्रांति पर स्नान और दान करने से सूर्य और शनि देव की कृपा बरसती है क्योंकि सूर्य देव के बेटे शनि अपने पिता का स्वागत इस दिन करते हैं. स्नान की अनदेखी करने से इन ग्रहों के शुभ प्रभाव में कमी आ सकती है. अगर कोई श्रद्धालु स्वास्थ्य कारणों या अन्य मजबूरी से नदी में पवित्र स्नान नहीं कर पार रहा है तो उसके लिए एक अलग तरह का विधान है. वह श्रद्धालु घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल डाले और काले तिल मिलाकर स्नान करे. इससे संक्रांति का पूरा पुण्य मिलेगा.

रसोई की काली मिर्च और भाग्य का अनोखा राज

भारतीय रसोई में मसालों के राजा के रूप में पहचानी जाने वाली काली मिर्च न केवल सेहत के लिए फायदेमंद है बल्कि ज्योतिष और तंत्र शास्त्र में भी इसे बहुत प्रभावशाली माना गया है। शनि और राहु के दोषों को दूर करने से लेकर धन आगमन के मार्ग खोलने तक काली मिर्च के उपाय रामबाण माने जाते हैं। यदि आपके जीवन में भी धन की तंगी है, व्यापार मंदा चल रहा है या बीमारियां पीछा नहीं छोड़ रहीं, तो काली मिर्च के ये उपाय आपके भाग्य की चाबी बन सकते हैं।  धन प्राप्ति और आर्थिक तंगी दूर करने के उपाय अक्सर कड़ी मेहनत के बाद भी घर में पैसा नहीं टिकता या कर्ज बढ़ता जाता है। ऐसे में काली मिर्च का यह तांत्रिक उपाय बहुत कारगर माना जाता है। काली मिर्च के 5 दाने लें और उन्हें अपने सिर के ऊपर से 7 बार वार लें। इसके बाद किसी चौराहे पर जाकर 4 दानों को चारों दिशाओं में फेंक दें और 5वें दाने को आसमान की तरफ उछाल दें। इसके बाद बिना पीछे मुड़े घर वापस आ जाएं। यह उपाय अचानक धन लाभ के योग बनाता है। यदि पैसा आता है पर टिकता नहीं, तो एक छोटे लाल कपड़े में काली मिर्च के कुछ दाने और एक सिक्का बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और धन का संचय होने लगता है।  व्यापार में उन्नति और सफलता के लिए यदि आपका बिजनेस ठप पड़ गया है या कार्यक्षेत्र में शत्रु बाधा डाल रहे हैं, तो इन उपायों को आजमाएं- कार्य सिद्धि के लिए: किसी जरूरी काम या बिजनेस मीटिंग के लिए घर से निकलते समय, घर के मुख्य दरवाजे पर थोड़ी सी काली मिर्च रखें और उस पर पैर रखकर बाहर निकलें। ध्यान रहे, इसके बाद दोबारा घर के अंदर न आएं वरना प्रभाव खत्म हो जाएगा। व्यापार में यदि गुप्त शत्रु परेशान कर रहे हों, तो शनिवार के दिन दीपक में काली मिर्च के कुछ दाने डालकर जलाएं। इससे नजर दोष दूर होता है और कार्यक्षेत्र में आपकी धाक जमती है। रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ काली मिर्च में औषधीय गुणों के साथ-साथ नकारात्मक ऊर्जा सोखने की अद्भुत क्षमता होती है। यदि घर का कोई सदस्य बार-बार बीमार पड़ रहा हो और दवाइयां असर न कर रही हों, तो काली मिर्च के 7-8 दानों को एक काले कपड़े में बांधकर रोगी के कमरे में किसी कोने में लटका दें। यह कमरे की नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है। यदि शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के कारण स्वास्थ्य खराब है, तो शनिवार के दिन काली मिर्च का दान करना चाहिए। भोजन में भी काला नमक और काली मिर्च का प्रयोग करने से शनि देव शांत होते हैं। शनि और राहु दोष के निवारण हेतु काली मिर्च मुख्य रूप से शनि ग्रह से संबंधित मानी जाती है। इसके प्रयोग से कुंडली के अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है। शनिवार के दिन एक काले कपड़े में थोड़ी सी काली मिर्च और कुछ सिक्के बांधकर किसी जरूरतमंद को दान करें। इससे शनि की पीड़ा कम होती है। यदि राहु के कारण भ्रम या अज्ञात भय बना रहता है, तो शाम के समय काली मिर्च के दाने जलाकर पूरे घर में उसका धुआं दिखाएं। इससे घर का वास्तु दोष भी ठीक होता है।