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पौष पूर्णिमा 2025: 2 या 3 जनवरी—कब मनाई जाएगी, शुभ समय और पूजा का पूरा विधान

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है, लेकिन पौष मास की पूर्णिमा का स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा के दिन दान, स्नान और सूर्य देव की उपासना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. साल 2026 की शुरुआत में ही पौष पूर्णिमा का महापर्व पड़ रहा है, जिसे लेकर लोगों में तिथि को लेकर कुछ उलझन है. आइए जानते हैं कि साल 2026 में पौष पूर्णिमा 2 जनवरी को है या 3 जनवरी को, और पूजा का शुभ मुहूर्त कब है. पौष पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत और समाप्ति के समय के कारण उदयातिथि का महत्व होता है.     पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 02 जनवरी 2026 को शाम 06 बजकर 53 मिनट से.     पूर्णिमा तिथि समापन: 03 जनवरी 2026 को दोपहर 03 बजकर 32 मिनट पर. शास्त्रों के अनुसार, स्नान-दान और व्रत के लिए उदयातिथि को प्रधानता दी जाती है. चूंकि 3 जनवरी को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए पौष पूर्णिमा 3 जनवरी 2026, शनिवार को मनाई जाएगी. पौष पूर्णिमा की पूजा विधि ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें. सूर्य को अर्घ्य: स्नान के बाद “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें. व्रत का संकल्प: भगवान विष्णु जी के सामने व्रत का संकल्प लें. सत्यनारायण कथा: इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना या पढ़ना बहुत ही फलदायी होता है. चंद्र देव की पूजा: रात के समय चंद्रमा को दूध और जल का अर्घ्य दें. दान-पुण्य: पूजा के बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को तिल, गुड़, कंबल या ऊनी वस्त्रों का दान करें. पौष पूर्णिमा के दिन तामसिक भोजन प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा से परहेज करना चाहिए और और सात्विक जीवन का पालन करना चाहिए. इन मंत्रों का करें जाप पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है.     विष्णु मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय     लक्ष्मी मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद पौष पूर्णिमा का महत्व पौष का महीना सूर्य देव का महीना माना जाता है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है. इसलिए इस दिन सूर्य और चंद्रमा का अद्भुत संगम होता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है. इसी दिन से प्रयागराज में माघ मेले के दौरान ‘कल्पवास’ की शुरुआत होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है. इस दिन किए गए स्नान, दान और व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है.

सफलता नहीं मिल रही? आचार्य चाणक्य के 5 सिद्धांत अपनाते ही करियर में आएगा बड़ा मोड़

अगर कड़ी मेहनत के बावजूद आपको करियर, बिजनेस या किसी इंटव्यू में सफलता नहीं मिल पा रही है तो आपको आचार्य चाणक्य की 5 खास बातों पर जरूर गौर करना चाहिए। आचार्य चाणक्य ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'चाणक्य नीति' में करियर में सफलता दिलाने वाले ऐसे ही 5 गुणों का जिक्र किया है। जिन्हें फॉलो करने से व्यक्ति के जीवन की दिशा बदलने के साथ उसे एक नई राह भी मिल सकती है। बता दें, चाणक्य नीति में बहुत सी ऐसी बातें दर्ज हैं जिन्हें अपने जीवन में उतारकर व्यक्ति खुशहाल सफल जीवन जी सकता है। बिना लक्ष्य के श्रम, मंजिल नहीं सिर्फ थकान देता है आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस व्यक्ति के पास सफलता हासिल करने के लिए स्पष्ट लक्ष्य नहीं होता है, उसकी मेहनत हमेशा बेकार हो जाती है। अगर आप एक ही तरह की नौकरी में बार-बार असफल हो रहे हैं, तो आपको रूक कर जरूर सोचना चाहिए कि क्या आप वाकई नौकरी के उसी क्षेत्र के बने हैं या आपकी मंजिल कुछ और है? गुस्से पर काबू रखें​ बात-बात पर गुस्सा करने वाले व्यक्ति को समाज में कोई भी पसंद नहीं करता है। ऐसे व्यक्ति की करियर ग्रोथ भी रूक जाती है। जरूरत से ज्यादा गुस्सा समाज में आपकी छवि खराब करता है। चाणक्य नीति में कहा गया है कि क्रोध इंसान की बुद्धि और मान-सम्मान दोनों को नष्ट कर देता है। समय खराब करने वाला व्यक्ति चाणक्य नीति के अनुसार समय व्यक्ति की सबसे बड़ी संपत्ति है। जो लोग करियर में सही समय पर सही निर्णय नहीं लेते, वो मौका चूक जाते हैं। असफलता मिलने पर ब्रेक लेकर एक ठोस रणनीति बनाएं कि आप कैसे लक्ष्य हासिल करने में सफल हो सकते हैं। मुश्किल समय में घबराने वाले लोग आचार्य चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति संकट के समय में धैर्य के साथ आगे बढ़ता रहता है वही जीवन में सफलता हासिल कर पाता है। करियर में मिली असफलता एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन उसके बाद खुद पर संदेह करना, आत्मविश्वास खो देना और दूसरों से अपनी तुलना करना व्यक्ति की सबसे बड़ी भूल है। निराश होने की जगह विश्लेषण करें कि सफलता की राह हासिल करने में आपकी तरफ से कहां कमी रह गई है। सम्मान करें​ चाणक्य नीति के अनुसार बड़ों का आशीर्वाद व्यक्ति के लिए सफलता की राह आसान बना देता है। ऑफिस में भी खुद से सीनियर व्यक्ति का दिल से सम्मान करें। सम्मान देने वाला व्यक्ति हर किसी का प्रिय बन जाता है। जो उसे सफलता हासिल करने में मदद करता है।

नए साल 2026 में खुशहाली चाहिए? घर की दिशा से लेकर सजावट तक जानें वास्तु टिप्स

आने वाले साल से पहले आप अपने घर में वास्तु नियमों के अनुसार, कुछ बदलाव लाकर सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ावा कर सकते हैं। इससे आपके लिए आना वाला साल खुशियों से भरा रहेगा। वास्तु के अनुसार, दिशाओं का ध्यान रखकर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाया जा सकता है। चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ टिप्स। रसोई में ध्यान रखें ये बातें वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि रसोई में अग्नि कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में भोजन पकाना चाहिए। ऐसे में आप स्टोव या गैस को इस दिशा में रख सकते हैं। अगर आप इसे उत्तर या पश्चिम दिशा में रखते हैं, तो इससे स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है। साथ ही किचन में छुरी-कांटे जैसी धारदार चीजों को कभी भी उल्टा करके नहीं रखना चाहिए। इन सभी नियमों की अनदेखी वास्तु दोष का कारण बन सकती है। इन दिशाओं का भी रखें ध्यान इसके साथ ही वास्तु शास्त्र में आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा), वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा), ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) और नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) से जुड़े नियम भी बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी है। ईशान कोण में पूजा घर, वाटर टैंक या बोरिंग रखना शुभ होता है। वहीं आग्नेय कोण में इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि रखा जा सकता है। वायव्य कोण की बात करें तो आप इस दिशा में बेडरूम या गैरेज बनवा सकते हैं। वहीं अगर नैऋत्य कोण में कैश काउंटर, या मशीनें रखने से लाभ मिलता है। घर के बाहर करें ये चीजें वास्तु शास्त्र में माना गया है कि खराब व टूटी हुई वस्तुएं नकारात्मकता को बढ़ावा देती हैं। ऐसे में जितना जल्दी हो सके इन चीजों को घर से बाहर कर देना चाहिए। ऐसे में अपने घर में टूटा या खराब पड़ा इलेक्ट्रिक सामान और बंद घड़ी बिल्कुल भी नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इनसे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे घर में लड़ाई-झगड़े बढ़ सकते हैं।  

सूर्य–चंद्र ग्रहण की पूरी गाइड: पंचांग की मान्यताएं और वैज्ञानिक तथ्य

हिंदू धर्म, शास्त्र और खगोल विज्ञान तीनों में ग्रहण का विशेष महत्व बताया गया है। सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को न केवल खगोलीय घटना माना जाता है, बल्कि इसका आध्यात्मिक और वैज्ञानिक प्रभाव भी स्वीकार किया गया है। वर्ष 2026 में कुल चार ग्रहण लगेंगे, जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं। आइए, हिंदू पंचांग, शास्त्र और आधुनिक विज्ञान के अनुसार 2026 के सभी ग्रहणों की सरल और प्रमाणिक जानकारी जानते हैं। साल 2026 में कितने ग्रहण लगेंगे? हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में कुल 4 ग्रहण होंगे। 2 सूर्य ग्रहण 2 चंद्र ग्रहण। इनमें से केवल एक चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए उसी ग्रहण में सूतक काल मान्य होगा। शास्त्रों के अनुसार सूतक काल सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है। सूर्य ग्रहण 2026 की तिथि और समय पहला सूर्य ग्रहण – 17 फरवरी 2026 समय: दोपहर 3:26 बजे से शाम 7:57 बजे तक भारत में दृश्य: नहीं सूतक काल: मान्य नहीं दृश्य क्षेत्र: अफ्रीका, अंटार्कटिका, दक्षिण अमेरिका आदि यह ग्रहण भारत में न दिखने के कारण धार्मिक कार्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। दूसरा सूर्य ग्रहण – 12 अगस्त 2026 समय: रात 9:04 बजे से 13 अगस्त सुबह 4:25 बजे तक भारत में दृश्य: नहीं सूतक काल: मान्य नहीं दृश्य क्षेत्र: यूरोप, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, कनाडा आदि चंद्र ग्रहण 2026 की तिथि और समय पहला चंद्र ग्रहण – 3 मार्च 2026 प्रकार: खंडग्रास चंद्र ग्रहण समय: दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक भारत में दृश्य: हां (कुछ भागों में) सूतक काल: मान्य शास्त्रों के अनुसार इस दौरान मंत्र जाप, ध्यान और दान करना शुभ माना गया है। दूसरा चंद्र ग्रहण – 28 अगस्त 2026 समय: सुबह 8:04 बजे से दोपहर 11:22 बजे तक भारत में दृश्य: नहीं सूतक काल: मान्य नहीं ग्रहण काल में क्या करें और क्या न करें? शास्त्र और विज्ञान दोनों के अनुसार मंत्र जाप, ध्यान, नाम स्मरण, भोजन बनाना व ग्रहण करना, मूर्ति स्पर्श और शुभ कार्य। ग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और साधना का समय भी है। सही जानकारी के साथ ग्रहण काल को समझना हर आयु वर्ग के लिए उपयोगी है।

आज का राशिफल 23 दिसंबर 2025: हनुमान जी की विशेष कृपा इन राशियों पर, किसकी चमकेगी किस्मत?

मेष राशि- आज मन में उतार-चढ़ाव रह सकता है। किसी बात को लेकर जल्दी रिएक्शन देने से बचें। कामकाज में जिम्मेदारी बढ़ सकती है, लेकिन आप उसे संभाल लेंगे। पैसों के मामले में आज जोखिम न लें। घर के किसी बड़े की सलाह काम आ सकती है। शाम के समय मन थोड़ा हल्का होगा। वृषभ राशि- आज का दिन सामान्य लेकिन सुकून देने वाला रहेगा। घर-परिवार से जुड़ी कोई छोटी खुशी मिल सकती है। काम में धीमी लेकिन स्थिर प्रगति होगी। खर्च करने से पहले ज़रूरत और शौक में फर्क समझ लें। सेहत ठीक रहेगी, बस खानपान पर ध्यान रखें। मिथुन राशि- आज बातचीत में सावधानी ज़रूरी है। किसी की बात गलत तरीके से समझी जा सकती है। काम में दौड़भाग रहेगी, लेकिन दिन के अंत तक राहत मिलेगी। पुराने काम निपटाने का अच्छा मौका है। मोबाइल या स्क्रीन से थोड़ी दूरी बनाना फायदेमंद रहेगा। कर्क राशि- आज भावनाएं थोड़ी ज्यादा हावी रह सकती हैं। परिवार या रिश्तों से जुड़ा कोई फैसला सोच-समझकर लें। काम के मामले में आपकी मेहनत नजर आएगी। किसी करीबी का सहयोग मनोबल बढ़ाएगा। नींद पूरी लेने की कोशिश करें। सिंह राशि- आज दिन थोड़ा चुनौती वाला हो सकता है। हर बात अपने मन के मुताबिक नहीं चलेगी। काम में धैर्य और समझदारी दिखाने की ज़रूरत है। किसी से टकराव से बचें। शाम के समय हालात बेहतर होंगे और आत्मविश्वास लौटेगा। कन्या राशि- आज आपके लिए अच्छा दिन है। अटके हुए काम पूरे होने के संकेत हैं। पैसों से जुड़ी कोई राहत मिल सकती है। काम में फोकस बना रहेगा। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन लापरवाही न करें। कोई अच्छी खबर मन खुश कर सकती है। तुला राशि- आज मन असमंजस में रह सकता है। किसी फैसले को लेकर दो राय हो सकती है। जल्दबाज़ी से नुकसान हो सकता है, इसलिए समय लें। रिश्तों में साफ़ और सीधी बात करना बेहतर रहेगा। खर्च पर नियंत्रण रखें। वृश्चिक राशि- आज मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी। काम का दबाव रहेगा, लेकिन आप संभाल लेंगे। किसी पुराने विवाद का हल निकल सकता है। गुस्से में कुछ भी कहने से बचें। शाम को थोड़ा आराम जरूरी रहेगा। धनु राशि- आज नई सोच और नए प्लान बन सकते हैं। काम या पढ़ाई में बदलाव की इच्छा जागेगी। किसी दोस्त या करीबी से मदद मिल सकती है। खर्च बढ़ सकता है, लेकिन ज़रूरी होगा। बाहर जाने या छोटी यात्रा का योग बन सकता है। मकर राशि- आज जिम्मेदारियां बढ़ी हुई रहेंगी। काम को टालने से बचें, वरना दबाव और बढ़ेगा। परिवार में आपकी राय को महत्व मिलेगा। सेहत में हल्की थकान रह सकती है, खुद को आराम दें। कुंभ राशि- आज दिन मिलाजुला रहेगा। काम में मन भटक सकता है, लेकिन कोशिश करें कि फोकस बनाए रखें। किसी दोस्त की परेशानी में मदद करनी पड़ सकती है। पैसों के मामले में सोच-समझकर कदम उठाएं। मीन राशि- आज मन शांत और संतुलित रहेगा। जो है, उसी में संतोष महसूस होगा। रिश्तों में अपनापन बढ़ेगा। काम में धीरे-धीरे सुधार दिखेगा। कोई छोटी-सी खुशी दिन को खास बना सकती है।

वास्तु शास्त्र: अलमारी के ऊपर रखा यह सामान बन सकता है परेशानी की वजह

वास्तु शास्त्र में घर की हर दिशा और हर कोने का अपना महत्व होता है। अक्सर हम अपने घरों में जगह की कमी के कारण या आलस में आकर अलमारी के ऊपर खाली जगह का इस्तेमाल फालतू सामान रखने के लिए करने लगते हैं। पुराने बक्से, सूटकेस, कबाड़ या धूल जमा सामान अलमारी के ऊपर रख दिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह एक छोटी सी आदत आपके घर की सुख-शांति और आर्थिक उन्नति को रोक सकती है ? वास्तु के अनुसार, अलमारी के ऊपर सामान रखना न केवल नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है, बल्कि यह आपकी खुशियों को नजर लगाने जैसा काम करता है। भारी सामान और मानसिक तनाव का संबंध वास्तु शास्त्र के अनुसार, अलमारी का ऊपरी हिस्सा खाली और साफ होना चाहिए। जब आप अलमारी के ऊपर भारी सामान या अनावश्यक चीजें रखते हैं तो यह उस कमरे की सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को रोक देता है। इसका सीधा असर घर के मुखिया और सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। यह अनजाने में आपके दिमाग पर 'बोझ' की तरह काम करता है, जिससे बेवजह का तनाव, चिड़चिड़ापन और नींद न आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। नकारात्मक ऊर्जा का जमाव अलमारी के ऊपर रखा सामान अक्सर महीनों तक साफ नहीं किया जाता। वहां धूल-मिट्टी जमा होने लगती है। वास्तु में धूल और कबाड़ को राहु का प्रतीक माना जाता है। अलमारी के ऊपर जमा गंदगी और कबाड़ घर में नकारात्मक ऊर्जा का चक्र  बना देते हैं। इससे घर में अक्सर बीमारियां बनी रहती हैं और बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता। आर्थिक तरक्की में बाधा ज्यादातर घरों में अलमारी का उपयोग गहने, पैसे और कीमती दस्तावेज रखने के लिए किया जाता है। अलमारी को लक्ष्मी का स्थान माना जाता है।  यदि लक्ष्मी के स्थान के ऊपर ही गंदगी या फालतू सामान रखा हो, तो माँ लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। इससे घर में धन का आगमन रुक जाता है और बचत कम होने लगती है। मेहनत करने के बावजूद आपको उसका फल नहीं मिलता। रिश्तों में बढ़ती है कड़वाहट अलमारी के ऊपर सामान रखने से घर के वास्तु पुरुष के सिर पर दबाव पड़ता है । इसका परिणाम घर के सदस्यों के आपसी रिश्तों पर दिखता है। छोटी-छोटी बातों पर पति-पत्नी के बीच झगड़े होना या परिवार में मतभेद बढ़ना इसी वास्तु दोष का लक्षण हो सकता है।

पुराणों में अधिकमास का महत्व क्या है? जानिए क्यों माना जाता है यह पुण्यकाल

हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 एक विशेष साल होने वाला है. इस साल कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना जुड़ेगा, जिसे हम अधिकमास या ‘पुरुषोत्तम मास’ के नाम से जानते हैं. सनातन धर्म में इस महीने को आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना गया है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर तीन साल में आने वाला यह महीना इतना खास क्यों है और पुराणों में इसे ‘मलमास’ के बजाय ‘पुरुषोत्तम मास’ क्यों कहा गया? आइए जानते हैं. क्यों आता है अधिकमास? हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्रमा की गणना पर आधारित है. चंद्र वर्ष: 354 दिनों का होता है. सौर वर्ष: 365 दिन और लगभग 6 घंटे का होता है. इन दोनों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है. तीन साल में यह अंतर लगभग एक महीने (33 दिन) का हो जाता है. इसी अंतर को पाटने और ऋतुओं का संतुलन बनाए रखने के लिए हर तीसरे साल पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहते हैं. मान्यता के अनुसार, इस दौरान तीर्थ यात्रा और पवित्र नदियों में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है. पुराणों की कथा, मलमास से पुरुषोत्तम मास बनने का सफर पौराणिक कथाओं के अनुसार, अधिकमास को शुरू में ‘मलमास‘ कहा जाता था और इसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया था. इस कारण इस महीने के अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार नहीं थे.अपनी उपेक्षा से दुखी होकर यह महीना भगवान विष्णु के पास गया. तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम ‘पुरुषोत्तम’ दिया और वरदान दिया कि जो भी इस महीने में मेरी भक्ति करेगा, उसे अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होगा. तब से इस महीने को पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा और यह भगवान विष्णु को बहुत प्रिय हो गया. अधिकमास का धार्मिक महत्व और लाभ पुण्य की प्राप्ति: माना जाता है कि अधिकमास में किया गया एक दिन का पूजन सामान्य दिनों के 100 दिनों के बराबर फल देता है. दोषों की निवृत्ति: इस दौरान व्रत और आत्म-चिंतन करने से कुंडली के दोष और मानसिक तनाव कम होते हैं. विष्णु कृपा: चूंकि यह भगवान विष्णु का महीना है, इसलिए ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप मोक्ष प्रदायक माना जाता है. इस महीने में क्या करें और क्या न करें? दान-पुण्य: दीप दान, वस्त्र दान और अन्न दान का विशेष महत्व है. मांगलिक कार्य: विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत और गृह प्रवेश वर्जित होते हैं. मंत्र जाप: विष्णु सहस्रनाम और श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण. नया व्यापार: नई संपत्ति की खरीद या नए व्यापार की शुरुआत से बचना चाहिए. व्रत और संयम: सात्विक भोजन और ब्रह्मचर्य का पालन. तामसिक भोजन: मांस, मदिरा और नशीले पदार्थों का सेवन वर्जित है. साल 2026 में कब है अधिकमास? साल 2026 में अधिकमास की शुरुआत 17 मई 2026 रविवार को होगी, वहीं इसका समापन 15 जून 2026 सोमवार को होगा.

सफलता की कुंजी: डॉ. कलाम के यादगार मंत्र

सफल होना तो सभी चाहते हैं लेकिन जरूरी है कि सफल होने के लिए सही दिशा में कदम उठाए जाएं। बिना सही कदम और मार्गदर्शन के अक्सर लोगों को विफलता हाथ लगती है और लोग हताश, निराश हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि महान लोगों के विचारों से मोटिवेशन लिया जाए। अगर आप सफल होना चाहते हैं तो मिसाइल मैन, भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के इन विचारों को जरूर याद रखें। अब्दुल कलाम के महान विचार 1) इससे पहले कि सपने सच हों आपको सपने देखने होंगे 2) अगर तुम सूरज की तरह चमकना चाहते हो तो पहले सूरज की तरह जलो 3) विज्ञान मानवता के लिए एक खूबसूरत तोहफा है, हमें इसे बिगाड़ना नहीं चाहिए। 4) सपने वो नहीं है जो आप नींद में देखे, सपने वो है जो आपको नींद ही नहीं आने दे। 5) महान सपने देखने वालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं। 6) युवाओं को मेरा संदेश है कि कुछ अलग तरीके से सोचें, कुछ नया करने की कोशिश करें, हमेशा अपना रास्ता खुद बनाएं और असंभव को हासिल करें। 7) हमें हार नहीं माननी चाहिए और हमें समस्याओं को खुद को हराने नहीं देना चाहिए। 8) मैं इस बात को स्वीकार करने के लिए तैयार था कि मैं कुछ चीजें नहीं बदल सकता। 9) आइये हम अपने आज का बलिदान कर दें ताकि हमारे बच्चों का कल बेहतर हो सके। 10) अपने मिशन में कामयाब होने के लिए, आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित्त निष्ठावान होना पड़ेगा।  

Vastu Shastra: शमी का पौधा कहां लगाएं? जीवन में आएगी खुशहाली और धनलाभ

हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में पौधों का विशेष महत्व बताया गया है। कुछ पौधे न केवल वातावरण को शुद्ध करते हैं, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली भी लाते हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत प्रभावशाली और पवित्र पौधा है, जिसका नाम है 'शमी'। शमी का पौधा घर में लगाने से न केवल शनि देव की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि भगवान शिव का आशीर्वाद भी मिलता है। धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है कि शास्त्रों में शमी के पौधे को बहुत ही शुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस पौधे में साक्षात शनि देव का वास होता है। इसके साथ ही, शमी के पत्ते भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं। अगर नियमित रूप से भगवान शिव पर शमी के पत्र अर्पित किए जाएं, तो जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। घर में इसे लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। किस दिशा में लगाएं शमी का पौधा? वास्तु शास्त्र के अनुसार, किसी भी पौधे का पूर्ण लाभ तभी मिलता है जब उसे सही दिशा में लगाया जाए। शमी के पौधे के लिए निम्नलिखित दिशाओं का ध्यान रखना अनिवार्य है: दक्षिण दिशा: शमी के पौधे को घर की बालकनी, आंगन या छत पर 'दक्षिण दिशा' में लगाना सबसे शुभ माना जाता है। घर के बाहर: यदि आप इसे घर के मुख्य द्वार पर लगा रहे हैं, तो इसे इस तरह लगाएं कि घर से बाहर निकलते समय यह आपके दाहिनी ओर हो। घर के अंदर वर्जित: ध्यान रखें कि शमी के पौधे को कभी भी घर के कमरों के अंदर नहीं लगाना चाहिए। इसे हमेशा खुले स्थान जैसे छत या बालकनी में ही रखें। सावधानियां और विशेष नियम शमी का पौधा लगाते समय कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी है, वरना इसके विपरीत प्रभाव भी पड़ सकते हैं- तुलसी से दूरी: भगवान शिव की पूजा में तुलसी वर्जित है, जबकि शमी उन्हें प्रिय है। इसलिए वास्तु के अनुसार, शमी और तुलसी के पौधे को कभी भी बिल्कुल पास-पास नहीं लगाना चाहिए। स्वच्छता का ध्यान: जहां शमी का पौधा लगा हो, वहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। पौधे के पास कूड़ा-कचरा, जूते-चप्पल या फटे-पुराने कपड़े न रखें। गंदगी होने से इसका सकारात्मक प्रभाव कम हो जाता है। शनि दोष से राहत: जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उन्हें नियमित रूप से शमी के पौधे के पास सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। इससे शनि देव की प्रतिकूल दशा में राहत मिलती है। शमी का पौधा केवल एक वनस्पति नहीं, बल्कि सौभाग्य का प्रतीक है। यदि इसे सही वास्तु नियमों के साथ घर में स्थापित किया जाए और श्रद्धापूर्वक इसकी देखभाल की जाए, तो यह परिवार को मानसिक शांति, आर्थिक लाभ और ईश्वरीय सुरक्षा प्रदान करता है। शनिवार के दिन इस पौधे की विशेष पूजा करना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।

शुक्र का धनु में गोचर बना रहा है 100 साल बाद का दुर्लभ समसप्तक योग, इन 4 राशियों की खुलेंगी किस्मत

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के विशेष संयोग और गोचर को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी कड़ी में एक बार फिर दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है. करीब 100 वर्षों बाद समसप्तक योग का निर्माण हुआ है, जो कई राशियों के जीवन में बड़े बदलाव ला सकता है. सुख, ऐश्वर्य, प्रेम, सौंदर्य और विलासिता के कारक शुक्र ग्रह 20 दिसंबर की सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर धनु राशि में प्रवेश कर चुके हैं. इस स्थिति में शुक्र अब 13 जनवरी 2026 तक धनु राशि में ही विराजमान रहेंगे, इसके बाद वे मकर राशि में गोचर करेंगे. अब तक शुक्र मंगल की राशि वृश्चिक में गोचर कर रहे थे, जहां उनका प्रभाव अपेक्षाकृत कम था. लेकिन धनु राशि में आते ही शुक्र का प्रभाव अधिक खुले, सकारात्मक और विस्तार देने वाला माना जा रहा है. खास बात यह है कि सूर्य और मंगल पहले से ही धनु राशि में मौजूद हैं, जिससे यह गोचर और अधिक शक्तिशाली बन गया है. धनु राशि में शुक्र का महत्व ज्योतिषी शास्त के अनुसार, धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं, जिन्हें ज्ञान, धर्म, भाग्य, नीति और विस्तार का कारक माना जाता है. वहीं शुक्र ग्रह प्रेम, आकर्षण, सौंदर्य, कला, ऐश्वर्य और भौतिक सुखों का प्रतिनिधित्व करता है. जब बृहस्पति की राशि में शुक्र प्रवेश करता है, तो व्यक्ति के जीवन में संतुलन, विवेक और सुख-साधनों की वृद्धि देखी जाती है. हालांकि यह भी ध्यान देने वाली बात है कि 15 दिसंबर से शुक्र अस्त अवस्था में हैं, और वे 3 फरवरी 2026 को उदित होंगे. अस्त अवस्था के कारण शुक्र के फल में थोड़ी कमी हो सकती है, लेकिन शुभता पूरी तरह समाप्त नहीं होगी. समसप्तक योग का दुर्लभ संयोग शनिवार को शुक्र के धनु राशि में प्रवेश करते ही एक खास ज्योतिषीय स्थिति बनी है. इस समय गुरु मिथुन राशि में विराजमान हैं और शुक्र धनु में. दोनों ग्रह एक-दूसरे से सप्तम भाव में स्थित हैं, जिससे समसप्तक राज योग का निर्माण हो रहा है. यह योग अत्यंत दुर्लभ माना जाता है और लंबे समय बाद बनता है. इन 4 राशि वालों पर पड़ेगा विशेष प्रभाव! इस समसप्तक योग और शुक्र गोचर का सबसे अधिक लाभ मिथुन, धनु, वृषभ और तुला राशि के जातकों को मिलने की संभावना है. मिथुन राशि शुक्र की सीधी दृष्टि मिथुन राशि पर पड़ेगी. इससे करियर में नए अवसर, संवाद कौशल में वृद्धि और व्यापार में लाभ के योग बनेंगे. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह समय अनुकूल रहेगा. धनु राशि स्वयं की राशि में शुक्र, सूर्य और मंगल की उपस्थिति आत्मविश्वास को बढ़ाएगी. भाग्य का साथ मिलेगा, रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं और सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि होगी. वृषभ राशि आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं. आय के नए स्रोत बन सकते हैं. पारिवारिक सुख, वाहन और संपत्ति से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं. तुला राशि शुक्र की स्वामित्व वाली राशि होने के कारण तुला राशि पर इसका विशेष प्रभाव पड़ेगा. प्रेम संबंधों में मजबूती, दांपत्य जीवन में मधुरता और कला से जुड़े लोगों के लिए सफलता के योग हैं.