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सीमा हैदर-सचिन के घर गूंजी किलकारी, परिवार में बढ़ी खुशियाँ — नया सदस्य हुआ शामिल

ग्रेटर नोएडा ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा में रह रही पाकिस्तान से आई महिला सीमा हैदर छठी बार मां बनी हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्रेटर नोएडा के निजी अस्पताल में सीमा ने बेटे को जन्म दिया। डिलीवरी के बाद जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी होने के बाद रबूपुरा पहुंचने पर सचिन के परिजनों ने बेटे के जन्म की खुशी में मिठाई बांटी। पिछले साल सीमा ने बेटी को जन्म दिया था। जोकि करीब ग्यारह महीने की हो चुकी है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान की रहने वाली सीमा हैदर पबजी गेम खेलने के दौरान कस्बा रबूपुरा के रहने वाले सचिन मीणा के संपर्क में आई थी। उसके बाद दोनों में प्यार हो गया और तीन साल पहले सीमा अपने चार बच्चों को लेकर नेपाल के रास्ते भारत आ गए। वह रबूपुरा में सचिन मीणा के साथ रह रही थी। इसका खुलासा होने पर सीमा हैदर के साथ सचिन मीणा व उसके पिता को भी जेल जाना पड़ा था। मामला महीनों तक मीडिया की सुर्खियों में रहा था। पिछले साल 18 मार्च को सीमा ने सचिन मीणा की बेटी को जन्म दिया था। इसके करीब ग्यारह माह बाद अब उसके बेटा पैदा हुआ है। हालांकि सचिन मीणा और उसके परिजनों ने इस संबंध में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया। यूट्यूब पर हैं दो मिलियन सब्सक्राइबर सीमा और सचिन मीणा सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय हैं। दोनों यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर ब्लॉग व तरह तरह की वीडियो बनाकर डालते रहते हैं। दोनों के यूट्यूब चैनल पर दो मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर हैं। वहीं उनके इंस्टाग्राम पर भी फॉलोवर की संख्या एक मिलियन है।

2027 में उत्तर प्रदेश में फिर बनेगी भाजपा नेतृत्व की डबल इंजन सरकारः योगी आदित्यनाथ

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए आगे आएं अखिलेशः मुख्यमंत्री  2027 में उत्तर प्रदेश में फिर बनेगी भाजपा नेतृत्व की डबल इंजन सरकारः योगी आदित्यनाथ  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए आगे आने की सलाह दी है। इटावा में निर्माणाधीन केदारेश्वर मंदिर के संभावित निमंत्रण पर उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव शुद्ध नीयत से यह मंदिर बनवाते तो मैं अवश्य जाता, लेकिन नीयत साफ नहीं है। फिर भी मैं उनको बधाई दूंगा कि देर आए-दुरुस्त आए, आखिर मंदिर बनवा रहे हैं। अब वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए भी आगे आएं, लोग प्रशंसा करेंगे। मुख्यमंत्री मंगलवार को एक निजी चैनल के कॉन्क्लेव में बोल रहे थे। इस मौके पर सीएम योगी ने साफ शब्दों में ऐलान किया कि 2022 से अधिक सीटें पाकर 2027 में डबल इंजन की भाजपा सरकार फिर सत्ता में आएगी। 2027 में फिर बनेगी भाजपा नेतृत्व की सरकार   सीएम योगी ने कहा कि 2027 को लेकर कोई शक नहीं है। 2022 से अधिक सीट मिलेंगी और 2027 में फिर भाजपा नेतृत्व की डबल इंजन सरकार बनेगी। डबल इंजन सरकार ने यूपी को ट्रिपल-टी (टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट व ट्रांसफॉर्मेशन) से जोड़ा है और वह 2027 में धूम-धड़ाके के साथ फिर से आएगी। कांग्रेस व राजद की जो दुर्गति बिहार में हुई है, 2027 में वही दुर्गति कांग्रेस व सपा की उत्तर प्रदेश में तय है। सीएम ने मीडियाकर्मियों से कहा कि आप सभी 75 जनपदों, 403 विधानसभा क्षेत्रों में जाइए, आम जनता वर्तमान सरकार की वकालत करती नजर आएगी।  राममंदिर के साथ रामराज्य की वास्तविक अवधारणा को धरातल पर उतारा एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी को उसकी पहचान वापस दिलाना सबसे बड़ा अचीवमेंट है। यूपी का नौजवान अब पहचान का मोहताज नहीं। किसान खुशहाल है और श्रमिक स्वावलंबन के साथ अपने जनपद-क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर रहा है। महिलाएं सुरक्षित हैं और  यूपी आर्थिक उन्नति के नित नए सोपान प्राप्त कर रहा है। यही रामराज्य है। बिना भेदभाव हर तबके को उसका हक प्राप्त हो रहा है। भगवान राम की जन्मभूमि पर राममंदिर का निर्माण रामराज्य की अवधारणा पर ही आधारित है। हम केवल मंदिर बना देते और यह बदलाव करके नहीं दिखाते तो यह भगवान राम की अवज्ञा होती। हम लोगों ने रामराज्य की वास्तविक अवधारणा को धरातल पर उतारने का कार्य किया। यह डबल इंजन सरकार की ताकत है, जो कहा है, वह करके दिखाया है। आगे भी जो कहेंगे, करके दिखाएंगे। महाराज सुहेलदेव का विरोध और गाजी का मेला लगाते हैं सपाई सीएम योगी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर को अपवित्र करने वाले और अयोध्या में श्रीराम मंदिर पर पहला आतंकी हमला करने वाले गाजी को उसके पापों की सजा महाराज सुहेलदेव ने दी थी। लेकिन सपा के लोग महाराज सुहेलदेव का गुणगान करने के बजाय गाजी का नाम लेते हैं, उसका मेला लगाते हैं। ये लोग महाराज सुहेलदेव के स्मारक का विरोध करते हैं। हमें गर्व है कि भाजपा सरकार ने बहराइच में महाराज सुहेलदेव का भव्य स्मारक और आजमगढ़ में महाराज सुहेलदेव विश्वविद्यालय का निर्माण किया। परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीडीए) के चेयरमैन हैं अखिलेश  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा के पीडीए को अवसरवाद का दूसरा नमूना बताया। बोले कि पीडीए मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी। यह एक परिवार के विकास के लिए गठित अवसरवादी अथॉरिटी है जिसके चेयरमैन अखिलेश, शिवपाल सीईओ और रामगोपाल यादव वाइस चेयरमैन होंगे। उनके पास महाभारत के सारे रिश्ते हैं, बाकी अन्य भाई-भतीजों को भी इसमें स्थान मिलेगा।  देश राहुल गांधी को और प्रदेश अखिलेश यादव को गंभीरता से नहीं लेता  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिसकी जैसी दृष्टि, वैसी सृष्टि। इन लोगों को कोई नहीं समझा सकता, इनकी दृष्टि देश व प्रदेश के लिए हमेशा नकारात्मक रही है। राहुल गांधी को देश और अखिलेश यादव को यूपी गंभीरता से नहीं लेता। कांग्रेस किसी को भी नेता प्रतिपक्ष बना सकती थी। सोनिया जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इसलिए परिवारवादी पार्टी ने राहुल जी को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी। जब जहाज डूबता है तो कैप्टन भी वही व्यक्ति बनता है, जो उसे आसानी से डुबो सके, इसलिए राहुल जी को कैप्टन बनाया गया।  अखिलेश संघ की शाखाओं में जाएंगे तो जल्दी जागना सीख जाएंगे मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव को संघ की शाखाओं में जाकर सामान्य आचार व नियमों की जानकारी लेनी चाहिए। अखिलेश यादव 12 बजे सोकर उठते हैं, वे संघ की शाखा में जाएंगे तो जल्दी जगने की आदत हो जाएगी। समय पर जागेंगे तो यह उनके हित में होगा और जिस पारिवारिक पार्टी को लेकर चल रहे हैं, उसका भी नाम बना रहेगा। सीएम योगी ने वंदे मातरम के जिक्र पर कहा कि यह राष्ट्रगीत है, यह आजादी का मंत्र रहा है। इस गीत को गाते-गाते क्रांतिकारियों ने फांसी के फंदे को चूमने में संकोच नहीं किया। राष्ट्र प्रतीकों का अपमान संविधान निर्माताओं, बाबा साहेब व क्रांतिकारियों का अपमान है। राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान व तिरंगा का अपमान राष्ट्रद्रोह है, जिसे भारत स्वीकार नहीं करेगा।  बुलडोजर व ब्रह्मोस एक-दूसरे के पूरक  सीएम योगी ने कहा कि बुलडोजर और ब्रह्मोस एक-दूसरे के पूरक हैं। बुलडोजर यूपी की स्ट्रेंथ का प्रतीक है। हम इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ देश के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे के नेटवर्क को यूपी में स्थापित कर सकते हैं। यूपी की जनता जिसकी अपेक्षा कर रही थी, बुलडोजर उस माफिया प्रवृत्ति को कुचल सकता है। ब्रह्मोस जैसे सेक्टर में भी यूपी में बड़े निवेश हो रहे हैं। यह भारत की सामरिक शक्ति का प्रतीक है। किसी ने भारत की आन, बान और शान को लेकर गुस्ताखी करने का प्रयास किया तो दुश्मन को उसके ठिकाने पर जाकर मारेंगे। ‘भाग्य नगर’ से भयभीत होकर अनर्गल प्रलाप कर रहे ओवैसी  सीएम योगी ने ओवैसी को भी आड़े हाथ लिया। बोले कि यूपी की जनता व डबल इंजन सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि के माध्यम से संदेश दे दिया है। यूपी के बाद भाजपा अब हैदराबाद की तरफ ही रुख करेगी। ओवैसी की पीड़ा इस बात को लेकर है कि कहीं हैदराबाद को भाग्य नगर न बना दिया जाए। भाग्य नगर से भयभीत होकर वे अनर्गल प्रलाप कर रहे … Read more

81 मेडिकल कॉलेजों के साथ ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज’ विजन को दी गति

इंफ्रास्ट्रक्चर, मेडिकल शिक्षा और सेवाओं के विस्तार से तंदरुस्त हुआ प्रदेश 81 मेडिकल कॉलेजों के साथ ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज’ विजन को दी गति एमबीबीएस और पीजी सीटों में ऐतिहासिक वृद्धि, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता में हुआ सुधार जिला अस्पतालों का आधुनिकीकरण और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का किया विस्तार लखनऊ  प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में पिछले नौ वर्षों के दौरान व्यापक और संरचनात्मक परिवर्तन आया है। योगी सरकार ने स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने, मेडिकल शिक्षा का विस्तार करने और ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने को प्राथमिकता दी है। नये अस्पतालों के निर्माण, पुराने अस्पतालों के कायाकल्प और मेडिकल कॉलेजों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि ने तस्वीर को बदल दिया है। अब 81 मेडिकल कॉलेज हो रहे संचालित वर्ष 2017 तक प्रदेश में कुल 36 सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित थे। वर्तमान में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 81 हो चुकी है। योगी सरकार वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज के विजन के अनुरूप मेडिकल कॉलेज की स्थापना कर रही है। वहीं एमबीबीएस सीटों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2017 में जहां लगभग 4,690 एमबीबीएस सीटें थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 12,700 हो चुकी है। पीजी सीटों में भी दोगुने से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है जिससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता में सुधार हुआ है। प्रदेश के 75 जिलों में जिला अस्पतालों का आधुनिकीकरण किया गया है। कई अस्पतालों में आईसीयू, एनआईसीयू, डायलिसिस यूनिट, ट्रॉमा सेंटर और आधुनिक पैथोलॉजी लैब की स्थापना की गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। योगी सरकार 1,500 से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों को क्रियाशील चुकी है। इनमें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, जांच और गैरसंचारी रोगों की स्क्रीनिंग जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और टेलीमेडिसिन सेवाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों को विशेषज्ञ परामर्श से जोड़ा गया है। 200 से अधिक नई पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक यूनिट स्थापित प्रदेश में ‘आरोग्य मंदिर’ की अवधारणा के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को समग्र रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत आयुष पद्धति, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और एलोपैथिक सेवाओं का समन्वय किया जा रहा है। कई जिलों में आयुष अस्पतालों और वेलनेस सेंटर का निर्माण कराया गया है। योगी सरकार ने आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं, जिससे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को संस्थागत मजबूती मिल रही है। वर्ष 2017 में जहां सीमित जिलों में ही अत्याधुनिक लैब की सुविधा उपलब्ध थी, वहीं अब सभी जिलों में आरटी-पीसीआर लैब, ब्लड बैंक और डिजिटल एक्स-रे जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। कोविड-19 काल में विकसित की गई लैब क्षमता को स्थायी रूप से सुदृढ़ किया गया है। पिछले नौ वर्षों में 200 से अधिक नई पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक यूनिट स्थापित की गई है। इससे जांच की संख्या और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है, और मरीजों को निजी लैब पर निर्भरता कम करनी पड़ी है। चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और आयुष विभाग को दिए लगभग 55 हजार करोड़ योगी सरकार ने 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं के बेड़े में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्तमान में प्रदेश में 4,000 से अधिक एम्बुलेंस संचालित हैं, जिनमें एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस भी शामिल हैं। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए विशेष एम्बुलेंस सेवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट आवंटन में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में चिकित्सा शिक्षा, आयुष एवं स्वास्थ्य विभाग के लिए 55 ,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। इसमें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए 37,956 करोड़ रुपये, चिकित्सा शिक्षा के लिए 14997 करोड़ रुपये और आयुष विभाग को 2867 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका बड़ा हिस्सा ढांचागत विकास, चिकित्सा उपकरणों की खरीद, मानव संसाधन की भर्ती और मेडिकल कॉलेजों के निर्माण पर व्यय किया जाएगा।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य क्षेत्र को ‘सेवा और सुशासन’ का प्रमुख आधार बताया है। उन्होंने नियमित रूप से निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों की समीक्षा की है और समयबद्ध कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान ऑक्सीजन प्लांट, बेड क्षमता और आईसीयू सुविधाओं में जो बढ़ोत्तरी की गई, उसे स्थायी रूप से मजबूत किया गया है। मुख्यमंत्री का लक्ष्य है कि प्रदेश को मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि मरीजों को इलाज के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े। विशेषज्ञ की राय बीते नौ सालों में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में जो संरचनात्मक बदलाव हुए हैं, वे केवल संख्या वृद्धि तक सीमित नहीं हैं। यह गुणवत्ता और पहुंच दोनों स्तरों पर प्रभावी हैं। मेडिकल कॉलेजों और एमबीबीएस सीटों में बढ़ोत्तरी से आने वाले वर्षों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता मजबूत होगी। जिला अस्पतालों के आधुनिकीकरण, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और डिजिटल हेल्थ सेवाओं ने ग्रामीण और शहरी अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डायग्नोस्टिक सुविधाओं और एम्बुलेंस नेटवर्क के विस्तार से समयबद्ध उपचार संभव हुआ है। निरंतर बढ़ते बजट प्रावधान से स्पष्ट है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को दीर्घकालिक निवेश और आत्मनिर्भरता के मॉडल के रूप में विकसित कर रही है। अनुराग पटेल, पूर्व आईएएस, उत्तर प्रदेश

कड़े इंतजामों के बीच यूपी बोर्ड एग्जाम की शुरुआत, शिक्षा मंत्री ने किया पारंपरिक स्वागत

 लखनऊ यूपी बोर्ड परीक्षा बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच आरंभ हुई। माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी ने जियामऊ स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में आयोजित परीक्षा उत्सव में छात्राओं को चंदन टीका लगाकर स्वागत किया। यूपी बोर्ड परीक्षा बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच आरंभ हुई। माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी ने जियामऊ स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में आयोजित परीक्षा उत्सव में छात्राओं को चंदन टीका लगाकर स्वागत किया। उन्होंने परीक्षार्थियों को मिठाई खिलाई और गुलाब के फूल देकर परीक्षा अच्छे अंक लाने की शुभकामनायें दी और कक्षाओं में प्रवेश दिया गया। शिक्षा मंत्री परीक्षार्थियों से बोली निडर और तनाव मुक्त होकर परीक्षा दें। उन्होंने कहा पूरी तैयारियों की साथ परीक्षा शुरू हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बोर्ड परीक्षा नकल मुक्त हुई है। बाहर के विद्यार्थी यहां आकर परीक्षा देते थे। अब नकल पर अंकुश लगा है। इस मौके पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव अपर शिक्षा निदेशक सुरेंद्र तिवारी, जीडी डॉ.प्रदीप कुमार और डीआईओएस राकेश कुमार समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। परीक्षार्थियों में दिखा उत्सव बोर्ड परीक्षा केंद पर पहुंचे परीक्षार्थियों ने गजब का उत्साह दिखा। परीक्षार्थियों ने बताया कि उनकी तैयारी पूरी है। परीक्षा केंद्र के मुख्य गेट पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने सघन तलाशी के बाद बोर्ड परीक्षार्थियों को केंद्र के भीतर प्रवेश दिया भीतर पहुंचे परीक्षार्थियों को शिक्षक और शिक्षिकाओं ने कक्षाओं में दाखिल किया।सभी परीक्षार्थियों को रोल नंबर के हिसाब से कक्षाओं में बैठाया गया। सीट पर पहले से ही रोल नंबर चस्पा कर दिए गए थे। पुलिस बल तैनात रायबरेली जनपद के 107 परीक्षा केंद्रों पर यूपी बोर्ड परीक्षा की शुरू हो गई है। परीक्षार्थियों को प्रवेश के पहले गेट पर ही स्कूल के शिक्षकों ने चेक किया। सभी स्कूलों में प्रश्न पत्र पहुंच गए हैं। केंद्रों पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। निगरानी में रहेंगे प्रश्नपत्र डीआईओएस ने केन्द्र व्यवस्थापकों से कहा कि स्टैटिक मजिस्ट्रेट और वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक की मौजूदगी में सीसी कैमरे की निगरानी में स्ट्रांग रूम में रखी अलमारी खोलेंगे। अलमारी से विषय वार प्रश्न पत्र निकालेंगे। इन्हें अलमारी खोलने व बंद करने का समय और तारीख भी रजिस्टर में दर्ज करनी होगी। रात में प्रत्येक केन्द्र की निगरानी के लिए टीमें गठित शिक्षा विभाग के छह सचल दल केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर नकलचियों पर नजर रखेंगे। रात में प्रत्येक केन्द्र की निगरानी के लिए टीमें गठित की गई हैं। केन्द्रों पर मंगलवार शाम से ही पुलिस बल तैनात हो गया है। स्ट्रांग रूम में रखे प्रश्न पत्रों की कड़ी निगरानी की जा रही है। साथ ही सचल दल परीक्षा केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर स्ट्रांग रूम समेत अन्य व्यवस्थाएं परखी। परीक्षा केन्द्रों की हर गतिविधि की लाइव निगरानी होगी राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज में बने कंट्रोल रूम से परीक्षा केन्द्रों की हर गतिविधि की लाइव निगरानी होगी। डीआईओएस राकेश कुमार ने मंगलवार को सभी केन्द्र व्यवस्थापकों को नकल अध्यादेश के तहत सुचिता और पारदर्शिता के साथ नकलविहीन परीक्षा कराने के निर्देश दिए। परीक्षा के दौरान बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।

सुहागरात से पहले दुल्हन का बड़ा फैसला, फौजी पति को छोड़ प्रेमी के साथ भागी

  कौशांबी उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है. जहां मंझनपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में विवाह के तुरंत बाद दुल्हन फुर्र हो गई. आरोप है कि दुल्हन ने सुहागरात से पहले ही फौजी दूल्हे को ठुकरा दिया और घर में रखे 5 नकद और 15 लाख के जेवरात लेकर अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई. घटना के बाद ससुराल पक्ष सदमे में है, वहीं पुलिस मामले में केस दर्ज कर जांच में जुटी है. पूरा मामला करीब एक सप्ताह पहले सराय अकिल थाना क्षेत्र के एक गांव की है. युवती की शादी 8 फरवरी को मंझनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव के युवक के साथ हुई थी. युवक भारतीय थल सेना में है. बहरहाल बरात लेकर गेस्ट हाउस पहुंचे दूल्हे के साथ युवती ने दुल्हन बनकर पूरे रीति-रिवाज से सात फेरे लिए. फिर मां-बाप समेत अन्य परिजन व रिश्तेदारों ने बेटी की विदाई की. लेकिन शायद दुल्हन किसी और को ही अपना दूल्हा मान बैठी थी. आरोप है कि दुल्हन सुहागरात से पहले ही ससुराल से 5 लाख नकद और लगभग 15 लाख के गहने लेकर फरार हो गई. दुल्हन ने दूल्हे के सांवले रंग पर जताई थी आपत्ति देर रात जब ससुराल के लोगों को जानकारी हुई तो सभी के होश उड़ गए. बताया जा रहा है कि दुल्हन ने दूल्हे के सांवले रंग को लेकर आपत्ति जताई थी. हालांकि, परिजनों ने इसे नजर अंदाज कर दिया. आरोप है कि दुल्हन पहले से ही किसी अन्य युवक के संपर्क में थी और उसी के साथ जाने की योजना बना चुकी थी. पीड़ित पति ने एफआईआर दर्ज कराई है. जिसमें कहा गया है कि मेरी पत्नी जब रात में सो रही थी, तभी सराय अकिल थाना क्षेत्र का रहने वाला निकेश कुमार बहला फुसलाकर भगा ले गया.  सीओ सदर शिवांक सिंह का कहना है कि परिजनों की तहरीर पर आरोपी युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर नवविवाहिता की तलाश की जा रही है.

समीर के साथ रहने की जिद पर अड़ी युवती, माता-पिता ने उठाया चौंकाने वाला कदम

अजमेर राजस्थान के अजमेर में  जो कुछ हुआ, उसने पूरे शहर को कई घंटों तक थामे रखा. सड़कों पर भीड़, थाने के बाहर जमा लोग, पुलिस की समझाइश, आंसुओं और नारों के बीच जिद पर अड़ी एक लड़की यह सब किसी फिल्मी दृश्य जैसा लग रहा था, लेकिन यह हकीकत थी. मामला एक हिंदू लड़की का मुस्लिम लड़के से शादी की जिद से शुरू होकर पारिवारिक टकराव तक जा पहुंचा. बाबूगढ़ इलाके की रहने वाली तान्या यादव (परिवर्तित नाम) की मुलाकात इंस्टाग्राम पर सुजानगढ़ नया बाजार चौक निवासी समीर दमामी से हुई थी. पहले सामान्य बातचीत, फिर रोज मुलाकात, और देखते ही देखते यह बातचीत रिश्ते में बदल गई. परिजनों के अनुसार दोनों पिछले कुछ समय से संपर्क में थे. कहानी का मोड़ तब आया जब 2 फरवरी को तान्या बिना किसी को बताए घर से चली गई. परिवार ने पहले अपने स्तर पर तलाश की, रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क किया, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो चिंता गहराने लगी. कुछ ही घंटों में मामला गुमशुदगी से बढ़कर संवेदनशील बन गया. प्रेम, धर्म और फैसला परिवार का दावा है कि समीर ने तान्या को अपने साथ रहने के लिए राजी किया. वहीं स्थानीय सूत्रों के मुताबिक युवक ने युवती से विवाह की इच्छा जताते हुए धर्म परिवर्तन तक की बात कही थी. हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इधर तान्या का कहना है कि वह अपनी मर्जी से समीर के साथ गई है और किसी के दबाव में नहीं है. उसने स्पष्ट शब्दों में कहा मैं मर जाऊंगी, मगर समीर के साथ ही रहूंगी.  घर पर मिली बेटी, भड़क उठा माहौल परिजनों को सूचना मिली कि तान्या समीर के घर पर है. जब वे वहां पहुंचे तो दोनों साथ मिले. इसके बाद देखते ही देखते बड़ी संख्या में परिवारजन, स्थानीय लोग और विभिन्न संगठनों के सदस्य वहां जुटने लगे. माहौल गर्म होने लगा. लड़की को समझाने की कोशिशें हुईं, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग रही. परिजनों का आरोप है कि उसे बहला-फुसलाकर साथ ले जाया गया. दूसरी ओर युवती का कहना है कि उसने अपनी इच्छा से यह कदम उठाया है. युवक समीर ने भी गंभीर आरोप लगाए कि लड़की के परिजनों ने उसके साथ मारपीट की. हालांकि पुलिस ने इस पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है और जांच जारी है. 45 हजार का ‘लिव-इन कार्ड’? परिवार का कहना है कि दोनों ने करीब 45 हजार रुपए खर्च कर लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ा एक कार्ड बनवाया है, जिसे कोर्ट प्रक्रिया से तैयार कराने का दावा किया जा रहा है. दस्तावेजों की वैधता को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों की जांच की जा रही है और कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा. घटनाक्रम के बीच सबसे भावुक और तनावपूर्ण क्षण तब आया जब युवती के पिता ने कथित तौर पर खुद पर केरोसिन डाल लिया और आग लगाने की कोशिश की. मौके पर मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें रोक लिया. पिता का कहना था कि उनकी बेटी को गुमराह किया गया है और वे किसी भी कीमत पर उसे वापस घर लाना चाहते हैं. दूसरी ओर युवती बार-बार यही दोहराती रही कि वह बालिग है और अपने फैसले लेने का अधिकार रखती है. सड़कों पर हंगामा, दुकानों में तोड़फोड़ मामला बढ़ता गया और भीड़ का गुस्सा कुछ जगहों पर फूट पड़ा. थाने के पास एक कचोरी की दुकान में तोड़फोड़ की गई. वहीं पास की एक शराब की दुकान में भी अज्ञात लोगों द्वारा नुकसान पहुंचाने की सूचना मिली. पुलिस ने तुरंत अतिरिक्त बल बुलाकर हालात संभालने की कोशिश की. कई घंटों तक अजमेर की सड़कों पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही. गंज थाने के बाहर भी परिजन और कुछ संगठनों के लोग जमा रहे. युवती को समझाने का प्रयास चलता रहा, लेकिन वह अपने निर्णय पर कायम रही. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि युवती बालिग है, इसलिए उसके बयान और इच्छा को कानूनी रूप से महत्व दिया जाएगा.  फिलहाल दोनों पक्षों की काउंसलिंग कराई जा रही है. पुलिस दस्तावेजों की जांच, कथित मारपीट के आरोपों और तोड़फोड़ की घटनाओं की भी पड़ताल कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी को भी माहौल बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी.  

संतों का संवाद, विवाद नहीं: ऋतेश्वर महाराज ने योगी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं

सतना  प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु संत ऋतेश्वर धारकुंडी आश्रम जाने से पूर्व सतना जिले की धर्मनगरी चित्रकूट पहुंचे है। उनके साथ भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी मौजूद रहे। चित्रकूट प्रवास के दौरान उन्होंने मीडिया से खुलकर बातचीत की और उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था, संतों के बीच चल रहे वैचारिक मतभेदों और देश के सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। वे यहां से सतना जिले के धारकुंडी आश्रम के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने ब्रह्मलीन परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। जमकर की CM योगी की तारीफ उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बोलते हुए ऋतेश्वर महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा योगी आदित्यनाथ एक संत-महंत भी हैं और एक कुशल प्रशासक भी। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को भयमुक्त वातावरण मिला है, इस सच से कोई इनकार नहीं कर सकता। एक सन्यासी जब सत्ता संभालता है, तो वह राजधर्म का पालन पूरी निष्ठा से करता है। 'वादे वादे जायते बोध:' हाल के दिनों में संतों के बीच विभिन्न मुद्दों पर चल रही बयानबाजी और मतभिन्नता पर ऋतेश्वर महाराज ने बहुत ही संतुलित और शास्त्र सम्मत जवाब दिया। उन्होंने संस्कृत के सूत्र 'वादे वादे जायते बोध:' का उदाहरण देते हुए कहा कि मैं इसे विवाद के रूप में नहीं, बल्कि वाद के रूप में देखता हूं। संवाद और चर्चा से ही तत्व का बोध होता है। अगर संतों के बीच किसी बात को लेकर मतभिन्नता है, तो उस मंथन से सनातन धर्म के लिए सुखद और सकारात्मक परिणाम ही निकलेंगे। यूजीसी को क्या बोले संत रितेश्वर यूजीसी के संदर्भ में पूछे गए सवाल और सामाजिक कानूनों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश का बहुसंख्यक समाज शांतिप्रिय है और एक गांव की तरह मिलजुल कर रहना चाहता है। उन्होंने कहा कि मैंने देखा है कि अगर कोई गलत फैसला आता है, तो समाज सामूहिक रूप से उसका विरोध करता है। मुझे विश्वास है कि जो लोग नीति-निर्धारक हैं, वे पुनर्विचार करेंगे। देश में ऐसा कोई कानून नहीं बनना चाहिए, जिससे समाज में विद्वेष पैदा हो या आपसी भाईचारा खंडित हो। धारकुंडी पहुंचकर दी श्रद्धांजलि चित्रकूट में अल्प प्रवास और दर्शन-पूजन के बाद संत ऋतेश्वर महाराज और बृजभूषण शरण सिंह का काफिला सतना के धारकुंडी आश्रम के लिए रवाना हो गया। वहां वे आश्रम के संस्थापक परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज के अंतिम दर्शन कर उनकी समाधि स्थल पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।  

सीमा-सचिन बने छठी बार माता-पिता, घर में आई खुशियों की बहार

रबूपुरा रबूपुरा में रह रही पाकिस्तान से आई महिला सीमा हैदर ने मंगलवार को दूसरे बच्चे को जन्म दिया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्रेटर नोएडा के निजी अस्पताल में सीमा ने बेटे को जन्म दिया। डिलीवरी के बाद जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। सीमा हैदर और सचिन के घर फिर गूंजी किलकारी, छठे बच्चे को दिया जन्म ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा में रह रही पाकिस्तान से आई महिला सीमा हैदर छठी बार मां बनी हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्रेटर नोएडा के निजी अस्पताल में सीमा ने बेटे को जन्म दिया। डिलीवरी के बाद जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी होने के बाद रबूपुरा पहुंचने पर सचिन के परिजनों ने बेटे के जन्म की खुशी में मिठाई बांटी। पिछले साल सीमा ने बेटी को जन्म दिया था। जोकि करीब ग्यारह महीने की हो चुकी है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान की रहने वाली सीमा हैदर पबजी गेम खेलने के दौरान कस्बा रबूपुरा के रहने वाले सचिन मीणा के संपर्क में आई थी। उसके बाद दोनों में प्यार हो गया और तीन साल पहले सीमा अपने चार बच्चों को लेकर नेपाल के रास्ते भारत आ गए। वह रबूपुरा में सचिन मीणा के साथ रह रही थी। इसका खुलासा होने पर सीमा हैदर के साथ सचिन मीणा व उसके पिता को भी जेल जाना पड़ा था। मामला महीनों तक मीडिया की सुर्खियों में रहा था। पिछले साल 18 मार्च को सीमा ने सचिन मीणा की बेटी को जन्म दिया था। इसके करीब ग्यारह माह बाद अब उसके बेटा पैदा हुआ है। हालांकि सचिन मीणा और उसके परिजनों ने इस संबंध में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया। यूट्यूब पर हैं दो मिलियन सब्सक्राइबर सीमा और सचिन मीणा सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय हैं। दोनों यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर ब्लॉग व तरह तरह की वीडियो बनाकर डालते रहते हैं। दोनों के यूट्यूब चैनल पर दो मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर हैं। वहीं उनके इंस्टाग्राम पर भी फॉलोवर की संख्या एक मिलियन है।

पिछले नौ वर्षों में प्राथमिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुआ व्यापक विस्तार, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सीएचसी व पीएचसी की संख्या में हुई वृद्धि

प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को किया मजबूत तो बीमारू से बना उत्तम प्रदेश  पिछले नौ वर्षों में प्राथमिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुआ व्यापक विस्तार, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सीएचसी व पीएचसी की संख्या में हुई वृद्धि पीएचसी पर 24 घंटे प्रसव, पैथोलॉजी और एक्स-रे की मिल रही सुविधा, आधुनिक मशीनों, दवाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से बढ़ी संस्थागत प्रसव दर डिजिटल सर्विलांस से संचारी रोगों में आई कमी, डेंगू, मलेरिया, एईएस और जेई की रोकथाम के लिए लैब नेटवर्क को किया मजबूत लखनऊ  योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में व्यापक सुधार किए हैं। प्रदेश के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। साथ ही इन केंद्रों को आधुनिक उपकरणों, पर्याप्त दवाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों से सुसज्जित किया गया है। प्राथमिक स्वास्थ केंद्रों पर 24 घंटे मिल रही प्रसव, पैथोलॉजी, एक्स-रे की सुविधा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 में कमान संभालने के बाद प्रदेश में सैकड़ों नए स्वास्थ्य उपकेंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने के साथ उच्चीकृत भी किए हैं। जहां पहले कई पीएचसी में नाममात्र की सुविधाएं थीं, वहीं अब उनमें 24 घंटे प्रसव सुविधा, पैथोलॉजी जांच, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष प्राथमिकता देते हुए संस्थागत प्रसव दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। योगी सरकार की प्राथमिकता “सबका साथ, सबका विकास” के मूल मंत्र के साथ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग के ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत किया गया। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को तेज किया गया जिससे लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरा जा सका। साथ ही संविदा और नियमित नियुक्तियों के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता भी बढ़ाई गई। संचारी रोगों की रोकथाम के लिए मजबूत किया डिजिटल सर्विलांस सिस्टम प्रदेश में संचारी रोगों की रोकथाम के लिए डिजिटल सर्विलांस सिस्टम को मजबूत किया गया है। डेंगू, मलेरिया, एईएस और जेई जैसी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्राथमिक स्तर पर ही जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई। जांच प्रयोगशालाओं की संख्या में कई गुना वृद्धि की गई है, जिससे रोगों की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार संभव हो पाया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले वर्षों में कई जिलों में मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से लाखों पात्र परिवारों को पांच लाख रुपये तक की निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा रही है। इन योजनाओं का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्वास्थ्य कार्ड वितरण और लाभार्थियों की पहचान की प्रक्रिया को भी डिजिटल माध्यम से पारदर्शी बनाया गया है। टीकाकरण में देश में अग्रणी स्थान किया प्राप्त प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ मेडिकल शिक्षा पर भी जोर दिया है। नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और जिला अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण से विशेषज्ञ सेवाओं का दायरा बढ़ा है। इससे प्राथमिक स्तर पर मरीजों की स्क्रीनिंग के बाद उन्हें उच्च संस्थानों में रेफर करने की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में एंबुलेंस सेवाओं 102 और 108 को सशक्त किया गया है, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को शीघ्र उपचार मिल सके। कोविड-19 महामारी के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। गांव-गांव में स्वास्थ्य टीमों ने स्क्रीनिंग, जांच और टीकाकरण अभियान चलाया। प्रदेश ने टीकाकरण के मामले में देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया। इस दौरान ऑक्सीजन प्लांट, आईसीयू बेड और वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया गया, जिनका लाभ आज भी सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं में मिल रहा है। मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में गिरावट, संस्थागत प्रसव में वृद्धि, टीकाकरण कवरेज में सुधार और संचारी रोगों पर नियंत्रण जैसे संकेतक इस परिवर्तन की पुष्टि करते हैं। सरकार द्वारा स्वास्थ्य बजट में लगातार वृद्धि कर प्राथमिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से आमजन को राहत मिली स्वास्थ्य केंद्रों में टेलीमेडिसिन सेवाओं की शुरुआत से दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध हो रहा है। ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से हजारों मरीज घर बैठे चिकित्सकीय सलाह प्राप्त कर रहे हैं। इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत हुई है, बल्कि ग्रामीण आबादी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा भी सुलभ हुई है। योगी सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत कर स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने का जो संकल्प लिया गया था, वह अब धरातल पर दिखाई दे रहा है। आधुनिक मशीनों की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्टाफ, दवा आपूर्ति की बेहतर व्यवस्था और डिजिटल निगरानी प्रणाली ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नई ऊंचाई दी है। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से आमजन को राहत मिली है और प्रदेश एक सशक्त, स्वस्थ और विकसित राज्य की दिशा में अग्रसर हो रहा है। विशेषज्ञ की राय पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे में जो परिवर्तन हुए हैं, वे जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहे हैं। सीएचसी और पीएचसी को 24 घंटे प्रसव, पैथोलॉजी और एक्स-रे जैसी सुविधाओं से सुसज्जित करना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। डिजिटल सर्विलांस और लैब नेटवर्क के विस्तार से संचारी रोगों की समय पर पहचान और नियंत्रण संभव हुआ है। टेलीमेडिसिन और ई-संजीवनी जैसी पहल ने दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ा है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में गिरावट और टीकाकरण कवरेज में सुधार इस बात का संकेत है कि प्राथमिक स्वास्थ्य को दी गई प्राथमिकता सकारात्मक परिणाम दे रही है। डॉ. लिली सिंह, पूर्व डीजी, स्वास्थ्य विभाग

उद्यम सारथी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से आसान हो रहा कारोबार

प्रौद्योगिकी से सशक्त एमएसएमई: योगी सरकार ने यूपी को बनाया डिजिटल औद्योगिक शक्ति केंद्र उद्यम सारथी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से आसान हो रहा कारोबार एमएसएमई चैम्पियनशिप और तकनीकी उन्नयन से बढ़ी प्रतिस्पर्धा नई एमएसएमई नीति और प्लग एंड प्ले मॉडल से निवेश को गति लखनऊ  उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को प्रौद्योगिकी से जोड़ने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बहुस्तरीय पहल की गति तेज कर दी हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी उन्नयन और नीतिगत सुधारों के माध्यम से प्रदेश के 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों को प्रतिस्पर्धी और बाजारोन्मुख बनाने का प्रयास किया गया है। योगी सरकार के इन क़दमों से उत्पादन क्षमता बढ़ी है और रोजगार सृजन को नई गति प्राप्त हुई है।  डिजिटल अवसंरचना, नीतिगत सरलता और वित्तीय सहयोग के संयोजन ने प्रदेश को अग्रणी औद्योगिक केंद्र बनाने की आधारभूमि को तैयार करने का काम किया है। एमएसएमई  सेक्टर की योजनाओं के लिए प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में 3,822 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जो वर्ष 2025-2026 की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है।  ओडीओपी को मिला डिजिटल आयाम वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के अंतर्गत मार्केटिंग डेवलपमेंट, टूलकिट वितरण और प्रशिक्षण के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। इसके माध्यम से एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के कारीगरों को तकनीक आधारित कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पारंपरिक उत्पादों को ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग से जोड़ने से स्थानीय वस्तुओं की पहुंच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बढ़ी है। तकनीकी उन्नयन और प्रतिस्पर्धा में बढ़त एमएसएमई चैम्पियनशिप इनीशिएटिव (चैंपियंस पोर्टल) के अंतर्गत चयनित इकाइयों को आधुनिक मशीनरी को अपनाने, गुणवत्ता सुधार और डिजिटल टूल्स के उपयोग के लिए तकनीकी सहायता दी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य उत्पादन लागत को घटाकर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और विकसित करना है। लाखों इकाइयों को डिजिटल उन्नयन और विपणन सहयोग का लाभ मिल रहा है। उद्यम सारथी और आरएएमपी का सहारा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 24  जनवरी, 2021 को लॉन्च की गई उद्यम सारथी ऐप के जरिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन, योजनाओं की जानकारी और संचालन मार्गदर्शन एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया है। इससे उद्यमियों की सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहनों तक त्वरित पहुंच प्राप्त हो जाती है। प्रदेश में आरएएमपी (राइजिंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफार्मेंस) योजना विश्व बैंक समर्थित एक केंद्रीय पहल है, इसके अंतर्गत वित्तीय और तकनीकी समर्थन भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे इकाइयों के विस्तार और आधुनिकीकरण को बल मिला है। नीतिगत सरलता और त्वरित संचालन वर्ष 2022 से लागू एमएसएमई नीति के माध्यम से प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। प्लग एंड प्ले मॉडल से 72 घंटे में संचालन शुरू करने की सुविधा दी गई है। क्रेडिट प्रवाह में वृद्धि और पांच लाख रुपये तक बीमा कवरेज जैसी व्यवस्थाओं ने उद्यमियों को जोखिम प्रबंधन में सहूलियत प्रदान करने का काम किया है। इन उपायों से निवेश वातावरण मजबूत हुआ है। बढ़ रहा है रोजगार और आर्थिक प्रभाव प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों का असर रोजगार सृजन पर भी पड़ा है। एमएसएमई क्षेत्र पहले से ही करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार रहा है और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से इसमें नए अवसर जुड़े हैं। ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सप्लाई चेन से जुड़ने के कारण ग्रामीण और अर्धशहरी इकाइयों को व्यापक बाजार हासिल हुआ है।