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खरीफ फसल बीमा का अलर्ट: 31 जुलाई के बाद पछताने से अच्छा है अभी करा लें बीमा

संभल जनपद के किसानों के लिए खरीफ 2025-26 के अंतर्गत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने का अवसर 31 जुलाई, 2025 तक उपलब्ध है। उप कृषि निदेशक ने बताया कि इस योजना के तहत जनपद में धान, मक्का, बाजरा और उर्द फसलों को अधिसूचित किया गया है। मौसम में हो रहे लगातार बदलाव और आपदाओं को देखते हुए किसानों के लिए फसल बीमा आवश्यक है, जिससे प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आय की सुरक्षा हो सके। ऋणी और गैर ऋणी दोनों तरह के किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। 'फसल बीमा कराओ-सुरक्षा कवच पाओ' के संदेश के साथ कृषि विभाग अधिक से अधिक किसानों को योजना से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। उप कृषि निदेशक अरुण कुमार त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान में इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड इस योजना की कार्यान्वयन एजेंसी है। फसल खराब होने या अन्य आपदा की स्थिति में किसान टोल फ्री नंबर 14447 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि से पहले बीमा करा लें ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में राहत मिल सके।

नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश शुरू? योगी और शीर्ष नेताओं की बैठक में हुई अहम चर्चा

लखनऊ उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर संगठन के भीतर बैठकों का दौर लगातार जारी है। इसी कड़ी में पार्टी की एक अहम बैठक मुख्यमंत्री आवास पर हुई जिसमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह मौजूद थे। भाजपा के सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री आवास पर यह बैठक सोमवार दोपहर में हुई, जिसमें ये दोनों वरिष्ठ नेता मौजूद थे। तीनों अहम व्यक्तियों की यह मुलाक़ात कई मायनों में अहम मानी जा रही है।   नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की अटकलें तेज उत्तर प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की अटकलें लगातार तेज हो गई हैं। बीजेपी के सूत्र बता रहे हैं कि इस बैठक में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति और उसके बाद होने वाले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री आवास पर यह बैठक करीब आधे घंटे तक चली और फिर धरमपाल सिंह और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वापस पार्टी कार्यालय आ गए। सूत्रों के मुताबिक़, इस अहम बैठक के बाद मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी दिल्ली जाएंगे। माना जा रहा है कि उनके साथ संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह भी दिल्ली जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से ये सप्ताह काफ़ी अहम होने वाला है। पीएम मोदी और अमित शाह से भी मिले योगी  गौरतलब है कि एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री योगी ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा से मुलाकात की थी। इसके बाद वह लखनऊ लौट आए थे। उनके दौरे के बाद अब मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक और उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष का दिल्ली दौरा काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की कवायद चल रही है। इसी कड़ी में कई बड़े नाम शामिल हैं लेकिन इस दौड़ में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य की दावेदारी सबसे ज़्यादा तगड़ी मानी जा रही है।       

दुकानों पर लगाएं QR कोड, कांवड़ मार्ग पर योगी -धामी सरकार का आदेश SC ने माना सही

लखनऊ / देहरादून  कांवड़ यात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत का कहना है कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित दुकानों में क्यूआर कोड लगाने के फैसले के सही करार दिया है। योगी आदित्यनाथ सरकार की तरफ से यह आदेश दिया गया था, जिसे प्रोफेसर अपूर्वानंद समेत कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसी पर अदालत का कहना है कि दुकानदारों को क्यूआर कोड और अपना लाइसेंस लगाना चाहिए। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। इस तरह यूपी सरकार की ओर से जारी आदेश जारी रहेगा। हालांकि इस फैसले का अब कोई खास असर नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि बुधवार को कांवड़ यात्रा का महाशिवरात्रि के साथ समापन होना है। फिर भी अदालत का यह फैसला आने वाले सालों के लिए लागू हो सकता है। योगी सरकार ने बीते साल भी एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि दुकानदारों को अपना नाम बोर्ड पर लिखना होगा। इसे लेकर भी अदालत का रुख किया गया था और तब सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को गलत करार दिया था। हालांकि तब भी फैसला आते-आते कांवड़ यात्रा का समापन हो गया था। फिर भी अदालत का आदेश ऐसे मामलों में भविष्य के लिए एक नजीर होता है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा, ‘हमें बताया गया है कि आज यात्रा का अंतिम दिन है. बहरहाल, निकट भविष्य में इसके समाप्त होने की संभावना है. इसलिए इस समय हम केवल यह आदेश पारित करेंगे कि सभी संबंधित होटल मालिक वैधानिक आवश्यकताओं के अनुसार लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदर्शित करने के आदेश का पालन करें. हम स्पष्ट करते हैं कि हम अन्य विवादित मुद्दों पर विचार नहीं कर रहे हैं. आवेदन समाप्त किया जाता है. पिछली सुनवाई में उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा 25 जून को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति का हवाला देते हुए झा ने कहा था, ‘नए उपायों में कांवड़ मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों पर क्यूआर कोड प्रदर्शित करना अनिवार्य है जिससे मालिकों के नाम और पहचान का पता चलता हो। इस तरह उसी भेदभावपूर्ण तरीके से पहचान की बात हो रही है जिस पर पहले इस अदालत ने रोक लगा दी थी.’ याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार का निर्देश, जिसमें दुकान मालिकों को ‘‘कानूनी लाइसेंस आवश्यकताओं’’ के तहत धार्मिक और जातिगत पहचान बताने के लिए कहा गया है, दुकान, ढाबा और रेस्टोरेंट मालिकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रावण महीने में शिवलिंगों का जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगा और अन्य नदियों से जल लेकर आते हैं. कई श्रद्धालु इस महीने में मांसाहार से परहेज करते हैं. कई लोग तो प्याज और लहसुन युक्त भोजन भी नहीं खाते.

यमुनानगर में सड़क हादसा, पिकअप ने बाइक को मारी टक्कर, 2 कांवड़ियों की मौत

यमुनानगर  यमुनानगर के गांव गुमथला में करंट लगने से दो कांवड़ियों की मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब गांव खंडवा के पास एक सड़क हादसे में दो और कांवड़ियों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, अजय और उसका साथी देवेंद्र बाइक पर सवार होकर कैथल से हरिद्वार गंगाजल लेने के लिए निकले थे। जब वे यमुनानगर के गांव खंडवा के पास पहुंचे, तभी सामने से आ रही एक पिकअप ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसा इतना जबरदस्त था कि अजय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि देवेंद्र ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पिकअप को कब्जे में ले लिया है। दोनों कांवड़ियों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल यमुनानगर की मोर्चरी में रखा गया है। परिजनों के आने के बाद शवों का पोस्टमार्टम कराया गया और उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने बताया कि इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। 

शादी, धोखा और धर्मांतरण: इंस्पेक्टर की तीन शादियों का चौंकाने वाला खुलासा

लखनऊ लखनऊ नगर निगम जोन तीन में तैनात कर इंस्पेक्टर मो. इमरान खान पर उनकी दूसरी पत्नी ने पहली को बिना तलाक दिए धोखे में रखकर निकाह करने का आरोप लगाया है। यह भी आरोप लगाया है कि पति ने तीसरी शादी हिंदू महिला का धर्मांतरण कराकर की है। इस संबंध में उसने पति, ससुर, ननद समेत सात के खिलाफ दहेज प्रताड़ना, जान से मारने का प्रयास और गर्भपात कराने का आरोप लगाते हुए चौक कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। इंस्पेक्टर चौक नागेश उपाध्याय ने बताया कि पीड़िता नेहा रिजवी ने कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराया है। जांच की जा रही है। एक अगस्त 2021 को उसका निकाह नवल किशोर रोड चौपड़ अस्पताल के पास रहने वाले मो. इमरान के साथ हुआ था। निकाह में 1.11 लाख की मेहर दी गई थी। इसके अलावा अन्य तमाम सामान दिया गया था। करीब 10 लाख रुपये का खर्च हुआ। निकाह के बाद पति, सौतेली ननद रफत खान, फरहते खान, फिरदौस जाफरी, जेठ आदिल और ससुर दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करने लगे। स्कार्पियो की मांग की। मारपीट करने लगे। इस बीच गर्भवती हो गई। धोखे से दवा खिलाकर गर्भपात करा दिया। दहेज की मांग लगातार करते रहे। दबाव बनाने पर तीन लाख रुपये की व्यवस्था करके मायकेपक्ष ने दी। 24 जनवरी की रात ससुरालीजनों ने बेल्ट और डंडों से जमकर पीटा। गला दबाकर मारने की कोशिश की। भगा दिया बोले कि 20 लाख रुपये लेकर आओ नहीं तो मायके में ही रहना। भगाने से पहले एक सादे पेपर पर हस्ताक्षर भी करवा लिया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि पति की पहली पत्नी कायनात थीं। उनसे भी कोर्ट में विवाद चल रहा है। निकाह से पहले कहा था कि कायनात से तलाक हो चुका है। झूठ बोलकर निकाह किया। बाद में पता चला कि तलाक हुआ ही नहीं है। उधर, पति ने एक हिन्दू महिला का धर्मांतरण कराकर उससे तीसरा निकाह कर लिया। विरोध किया तो उल्टा चोरी के झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी। इसकी लिखित शिकायत चौक कोतवाली में की थी पर पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। इसके बाद उच्चाधिकारियों को 26 दिसंबर 2024 को डाक से पत्र भेजा। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद कोर्ट में अपील की। कोर्ट के आदेश पर शनिवार को चौक कोतवाली में आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। इंस्पेक्टर ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वीडियो वायरल करने और घर पर बुलडोजर चलवाने की धमकी पीड़िता ने बताया कि इमरान हमारे कुछ निजी वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देते है। ससुराल में रहने के कुछ आपत्तिजनक वीडियो भी अपने मोबाइल पर बना लिया था। व्हाट्सएप पर धमकी के साक्ष्य भी हैं। पीड़िता ने बताया कि चूंकि वह नगर निगम में अधिकारी हैं, इसलिए आए दिन मायके वाले घर के खिलाफ नोटिस जारी करवाकर बुल्डोजर चलवाने की धमकी देते हैं। इससे पूरे परिवारीजन परेशान हैं। कर निरीक्षक बोले आरोप निराधार, कर रही है ब्लैकमेल कर निरीक्षक मो. इमरान खान ने बताया कि उनके ऊपर लगे सारे आरोप निराधार हैं। किसी तीसरी महिला से निकाह अथवा शादी नहीं की है। किसी महिला का धर्मांतरण भी नहीं कराया है। नेहा रिजवी से भी मेरे या परिवार के द्वारा कभी कोई दहेज की मांग नहीं की गई। तीन साल पहले नेहा रिजवी से कोर्ट से नियमत: तलाक हुआ था। वह 20 लाख रुपये की मांग कर ब्लैकमेल कर रही थी। रुपयों की मांग पूरी न होने पर उन्होंने कोर्ट के आदेश पर निराधार और झूठे तथ्यों के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया है।  

उन्नाव में धमाका बना काल, बस्ती में गड्ढे में मिली तीन बच्चों की लाशें – इलाके में सनसनी

उन्नाव  यूपी के उन्नाव के मौरावां थाना क्षेत्र के पारा गांव के बाहर मंगलवार सुबह पटाखा बनाते समय अचानक हुए विस्फोट में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही मौरावां थाना पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचायतनामा की कार्रवाई पूरी की और शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पारा गांव के बाहर पटाखा बनाने का काम लंबे समय से किया जा रहा था। इसी गांव निवासी नफीस पुत्र रज्जन के नाम से जारी पटाखा लाइसेंस अंतर्गत पटाखा निर्माण किया जाता था। पारा गांव के रहने वाले शिवचरण (55) पुत्र विजय सुबह पटाखा बना रहा है। इसी दरमियान विस्फोट होने से चपेट में आए शिव चरण की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। उधर, बस्ती जिले के पुराने बस्ती थानाक्षेत्र के लोहरौली गांव में मंगलवार की सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब गांव के पास एक ईंट भट्टे के गड्ढे में तीन बच्चों की लाश उतराती मिली। घटनास्थल के पास खून के निशान भी देखे गए। मौके पर पहुंचे परिजनों ने हत्या की आशंका जताई। घटना की सूचना पर एसपी अभिनंदन, एएसपी, सीओ सिटी के साथ पुरानी बस्ती पुलिस मौके पर पहुंच गई। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से सबूत जुटाए। एसपी ने बताया कि गड्ढा करीब सात फीट गहरा है। इसी में डूबने के कारण तीनों लड़कों की मौत हुई है। शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं मिले है। अब तक की जांच में डूबने से मौत की बात सामने आई है।

UP में ट्रैफिक चालानों की भरमार, नहीं चुकाया जुर्माना तो 60 हजार लाइसेंस होंगे रद्द

लखनऊ उत्तर प्रदेश में ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वालों पर अब सख्ती होगी। ट्रैफिक विभाग ने 5000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के जुर्माने वसूलने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। जो लोग बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं, उनकी गाड़ियों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और ड्राइविंग लाइसेंस (DL) रद्द किए जाएंगे। जिन गाड़ियों पर पाँच या उससे ज़्यादा चालान बकाया हैं, उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई होगी। इन गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) भी रद्द किए जा सकते हैं, ताकि वे सड़कों पर ना चल सकें। अधिकारियों के अनुसार, ट्रैफिक विभाग ने 3 लाख गाड़ियों और 58,893 ड्राइविंग लाइसेंस धारकों की लिस्ट ट्रांसपोर्ट विभाग को भेजी है। इन सभी के लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब तक 1,006 ड्राइविंग लाइसेंस और 3,964 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन रद्द या सस्पेंड किए जा चुके हैं। बरेली ज़ोन में सबसे ज़्यादा ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले पाए गए हैं। यहाँ 21,000 से ज़्यादा लोगों की पहचान हुई है, जिनमें से 5,833 DL रद्द करने के लिए भेजे गए हैं और 130 RC को चिह्नित किया गया है। मेरठ ज़ोन में 1323 लोगों ने नियम तोड़े, जिनमें से 260 DL सस्पेंड कर दिए गए हैं। आगरा ज़ोन में 1585 DL सस्पेंड करने की सिफ़ारिश की गई है और 30,000 से ज़्यादा गाड़ियों के RC रद्द करने के लिए चिह्नित किए गए हैं। लखनऊ ज़ोन में 4351 गाड़ियों और 1820 DL पर कार्रवाई करने की सिफ़ारिश की गई है। इन इलाक़ों में नियमों का पालन कराने और मौतों को कम करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ट्रैफिक) के. सत्यनारायण ने कहा कि राज्य में हज़ारों करोड़ रुपये का चालान बकाया है। यह इसलिए है क्योंकि गाड़ी मालिक और ड्राइवर बार-बार नियम तोड़ते हैं और जुर्माना नहीं भरते। उन्होंने कहा, "जिन लोगों पर पाँच या उससे ज़्यादा चालान बकाया हैं, उनके RC ब्लैकलिस्ट कर दिए जाएँगे, जिससे उनकी गाड़ियाँ अवैध हो जाएँगी। ऐसे ड्राइवरों के लाइसेंस भी रद्द किए जा रहे हैं ताकि लापरवाही से गाड़ी चलाने पर रोक लगाई जा सके।" इस महीने ट्रांसपोर्ट विभाग को एक लिस्ट दी गई है, जिसमें 3,01,410 गाड़ियाँ और 58,893 लाइसेंस धारक शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि कई लोग चालान इसलिए नहीं भरते क्योंकि उन्हें लगता है कि अदालतें जुर्माने की रकम कम कर देंगी। 2021 में, कुल 67 लाख गाड़ियों का चालान किया गया था, जिससे 867 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा था। 2024 तक, चालानों की संख्या बढ़कर 1.36 करोड़ हो गई, लेकिन वसूली सिर्फ़ 105 करोड़ रुपये ही हुई। इससे पता चलता है कि कितने ज़्यादा जुर्माने बकाया हैं। ट्रैफिक विभाग ने 20 ऐसे ज़िलों की भी पहचान की है, जहाँ ट्रैफिक नियमों का सबसे ज़्यादा उल्लंघन होता है और सड़क हादसे होते हैं। लखनऊ इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। 2024 में यहाँ 1630 सड़क हादसे हुए, जिनमें 576 लोगों की मौत हो गई और 1165 लोग घायल हो गए। ज़्यादा हादसे वाले अन्य ज़िलों में कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, आगरा, बरेली, नोएडा, हरदोई, बुलंदशहर, मथुरा, ग़ाज़ियाबाद, अलीगढ़, बाराबंकी, सीतापुर, उन्नाव, मेरठ, शाहजहाँपुर, आज़मगढ़, लखीमपुर खीरी और कुशीनगर शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि पूरे राज्य में एक अभियान चल रहा है, जिसमें न सिर्फ़ बार-बार नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जा रही है, बल्कि सड़क सुरक्षा के मुद्दों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। यह अभियान उत्तर प्रदेश की सड़क सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। इसका मक़सद है कि लोग लापरवाही से गाड़ी न चलाएँ, ट्रैफिक नियमों का पालन करें और समय पर जुर्माने की वसूली हो।  

यूपी स्कूल मर्जर विवाद: एकल पीठ के फैसले को दी चुनौती, आज डबल बेंच में होगी सुनवाई

लखनऊ प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों के विलय मामले में एकल पीठ के फैसले को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दो न्यायाधीशों की खंडपीठ में विशेष अपीलें दाखिल कर चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष आज विशेष अपीलें सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। अपीकर्ताओं के अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने बताया कि पहली विशेष अपील 5 बच्चों ने, और दूसरी 17 बच्चों ने अपने अभिभावकों के जरिए दाखिल की है। इनमें स्कूलों के विलय में एकल पीठ द्वारा बीती 7 जुलाई को दिए गए फैसले को रद्द करने का आग्रह किया गया है। इसके बाद मामले में दाखिल एक जनहित याचिका को भी खंडपीठ ने बीती 10 जुलाई को खारिज कर दिया था। एकल पीठ खारिज कर चुकी है याचिका बीती 7 जुलाई को स्कूलों के विलय मामले में राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली थी। एकल पीठ ने प्रथामिक स्कूलों के विलय आदेश को चुनौती देने वाली दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह फैसला सीतापुर के प्राथमिक व उच्च प्रथामिक स्कूलों में पढ़ने वाले 51 बच्चों समेत एक अन्य याचिका पर दिया था। इनमें बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा बीती 16 जून को जारी उस आदेश को चुनौती  देकर रद्द करने का आग्रह किया गया था, जिसके तहत प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों की संख्या के आधार पर उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूलों में विलय करने का प्रावधान किया गया है। याचियों ने इसे मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाला कहा था। साथ ही मर्जर से छोटे बच्चों के स्कूल दूर हो जाने की परेशानियों का मुद्दा भी उठाया था। याचियों की ओर से खास तौर पर दलील दी गई थी कि स्कूलों को विलय करने का सरकार का आदेश, 6 से 14 साल के बच्चों के मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन करने वाला है। सरकार स्पष्ट कर चुकी है अपना रुख राज्य सरकार की ओर से याचिकाओं के विरोध में प्रमुख दलील दी गई कि विलय की कारवाई, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए बच्चों के हित में की जा रही है। सरकार ने ऐसे 18 प्रथामिक स्कूलों का हवाला दिया था जिनमें एक भी विद्यार्थी नहीं है। कहा कि ऐसे स्कूलों का पास के स्कूलों में विलय करके शिक्षकों और अन्य सुविधाओं का बेहतर उपयोग किया जाएगा। कहा था कि सरकार ने पूरी तरह शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिहाज से ऐसे स्कूलों के विलय का निर्णय लिया है।  

युवाओं के लिए खुशखबरी! योगी सरकार की नई योजना से बड़ी कंपनियों में मिलेगा रोजगार

लखनऊ  यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने रोजगार के लिए एक नया प्लान बनाया है. जीरो पावर्टी अभियान के अंतर्गत योगी सरकार ने एक ऐसी योजना का खाका तैयार किया है जो न सिर्फ ट्रेनिंग देगी, बल्कि कई बड़ी नामी कंपनियों में सीधे नौकरियों से जोड़ेगी.  इस अभियान की शुरुआत के पहले चरण में 300 गरीब परिवारों के मुखियाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर की जाएगी. जिससे उन्हें 18,400 रुपए प्रति महीने सैलरी  वाली नौकरियों से जोड़ा जा सकेगा. खास बात यह है कि ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन लोगों को नौकरी के लिए परेशान नहीं होना होगा. एक न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक कंपनियां खुद इन लोगों तक पहुंचेंगी. राज्य सरकार उन्हें सीधे टॉप कंपनियों में प्लेस कराएगी. इनमें होटल ताज, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), एल एंड टी लिमिटेड, अडानी ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं. अधिकारियों के मुताबिक यह देश में पहली बार है जब कोई सरकार प्रत्यक्ष रूप से गरीबों को कॉर्पोरेट सेक्टर से जोड़ने जा रही है. अब काबिलियत होगी पहचान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि गरीबों को सिर्फ राहत की जरूरत नहीं, बल्कि अवसरों की जरूरत है. उन्हें अगर अवसर मिलें तो कोई भी परिवार आत्मनिर्भर बन सकता है. सरकार की सोच है कि दया नहीं, अवसर दें.  ताकि कमजोर वर्ग खुद पर गर्व कर सके. कौशल विकास विभाग के जिम्मे होगी ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन को इस अभियान की कमान सौंपी गई है. मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के अनुसार, पहले चरण में 300 परिवारों को चिन्हित कर लिया गया है. इसके बाद अभियान को पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जाएगा. इसके लिए एक हज़ार से अधिक ट्रेनिंग पार्टनर प्रदेश भर में चयनित किए जा रहे हैं जो व्यावसायिक प्रशिक्षण की प्रक्रिया में भाग लेंगे. नौकरी के लिए हर पहलू पर तैयारी यह योजना पारंपरिक प्रशिक्षण से एकदम अलग होगी. यहां केवल तकनीकी जानकारी नहीं दी जाएगी, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा. 360 डिग्री मॉडल के तहत जिन क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा उनमें हॉस्पिटैलिटी, बुनियादी अंग्रेजी व संवाद कौशल, कस्टमर डीलिंग, कार्यालय और शौचालय की सफाई, गेस्ट अटेंडेंट, हाउसकीपिंग के काम है. ट्रेनिंग इस तरह तैयार की गई है कि सभी प्राइवेट सेक्टर की जरूरतों के अनुरूप ढल सकें और उन्हें काम मिलने में कोई बाधा न हो. 18,400 मासिक वेतन की न्यूनतम गारंटी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि चयनित और प्रशिक्षित परिवार प्रमुख को कम से कम ₹18,400 मासिक वेतन मिलेगा. यह राशि उन्हें सिर्फ नौकरी देने के नाम पर नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन देने की नीयत से तय की गई है. उद्योग जगत ने बढ़ाया हाथ अधिकारियों ने बताया कि इस योजना को न केवल देशभर के बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय जगत का भी समर्थन मिला है. अब तक 40 से अधिक बड़ी कंपनियों ने इन प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी देने की इच्छा जताई है.  मुख्य सचिव ने स्पष्ट करते हुए कहा, हम लोगों को हक़ दे रहे हैं काम करने का, आत्मनिर्भर बनने का. यह योजना किसी भी दृष्टि से दया या रियायत नहीं है, बल्कि सम्मानपूर्वक जीवन की दिशा में उठाया गया व्यावहारिक कदम है. विकास का हिस्सा बनेगा हर नागरिक मुख्य सचिव  ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा कहते हैं  कि जब तक समाज का सबसे पिछड़ा व्यक्ति आगे नहीं बढ़ता, विकास अधूरा रहता है. इस योजना में भी वही दर्शन झलकता है. यह नारा अब नीतियों में तब्दील हो चुका है.

जाकिर नाईक बना अवैध धर्मांतरण का ‘आका’, जांच में SIMI और PFI की भूमिका भी उजाग

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण के एक बड़े रैकेट का खुलासा होने के बाद अब भगोड़े कट्टरपंथी इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाईक और उसकी संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) पर शिकंजा कसता नजर आ रहा है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय एजेंसियों को इस मामले में विदेशी फंडिंग के अहम सुराग मिले हैं, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), तुर्की, दुबई, कनाडा, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम (UK) और अन्य इस्लामिक देशों से धनराशि आने की बात सामने आई है. जांच में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) जैसे प्रतिबंधित संगठनों की भूमिका भी सामने आ रही है. जांच एजेंसियों के अनुसार, बलरामपुर जिले में छांगुर बाबा उर्फ जमालुद्दीन के नेतृत्व में एक संगठित गिरोह अवैध धर्मांतरण का जाल चला रहा था. छांगुर बाबा को उत्तर प्रदेश पुलिस की ATS ने हाल ही में गिरफ्तार किया था. जांच में पता चला कि इस नेटवर्क का उद्देश्य भारत-नेपाल सीमा के जिलों, विशेष रूप से बलरामपुर, को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराना था. इस रैकेट में महिलाओं और नाबालिगों को विशेष रूप से टारगेट किया गया, जिन्हें बहला-फुसलाकर या जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता था. जाकिर नाईक और विदेशी फंडिंग का कनेक्शन प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में यह खुलासा हुआ है कि इस अवैध धर्मांतरण रैकेट को विदेशों से भारी फंडिंग प्राप्त हो रही थी, जिसमें जाकिर नाईक और उनकी संस्था IRF की भूमिका संदिग्ध पाई गई है. सूत्रों के अनुसार, UAE, तुर्की, कनाडा, अमेरिका, UK और अन्य इस्लामिक देशों से 100 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग का मनी ट्रेल सामने आया है. ED ने छांगुर बाबा के पांच विदेशी बैंक खातों की पहचान की है, जो UAE में हैं, और इन खातों में संदिग्ध लेनदेन की जांच की जा रही है. इसके अलावा, आयकर विभाग ने फरवरी 2025 में अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में अवैध धर्मांतरण, मस्जिदों, मदरसों और मजारों के निर्माण के लिए विदेशी फंडिंग की आशंका जताई थी, जिसे गृह मंत्रालय को भी भेजा गया था. 2016 से फरार है जाकिर नाईक जाकिर नाईक, जो 2016 में भारत में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोपों के बाद मलेशिया फरार हो गया था, लंबे समय से अवैध धर्मांतरण और कट्टरपंथी गतिविधियों में शामिल है. उनकी संस्था IRF और पेस टीवी पर भारत, बांग्लादेश, कनाडा, श्रीलंका और UK में प्रतिबंध लगा हुआ है. ED की जांच में यह भी सामने आया है कि नाईक ने अपनी संस्था के जरिए 2003 से 2017 के बीच UAE, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और ओमान जैसे देशों से 64 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध फंडिंग प्राप्त की थी, जिसका उपयोग भारत में संपत्तियां खरीदने और कट्टरपंथी सामग्री प्रसारित करने में किया गया. सिमी और पीएफआई की भूमिका जांच में प्रतिबंधित संगठन सिमी और PFI की भूमिका भी सामने आई है. सूत्रों के अनुसार, छांगुर बाबा का नेटवर्क इन संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा था. PFI के कुछ नेताओं, जो पहले सिमी से जुड़े थे, ने मध्य पूर्व के देशों से फंडिंग जुटाने और भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. ED ने PFI के नेताओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में केरल और UAE में रियल एस्टेट और अन्य व्यवसायों के जरिए धन शोधन के सबूत भी पाए हैं. गृह मंत्रालय और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई आयकर विभाग की रिपोर्ट में भारत-नेपाल सीमा के जिलों में अवैध धर्मांतरण और कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए विदेशी फंडिंग का जिक्र किया गया था. इस रिपोर्ट के आधार पर ED और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अब इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की दिशा में काम कर रही हैं. बलरामपुर में छांगुर बाबा के ठिकानों पर ED ने हाल ही में 14 स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें मुंबई के बांद्रा और माहिम में भी कार्रवाई की गई. जांच में 2 करोड़ रुपये के एक संदिग्ध लेनदेन का पता चला, जो छांगुर के सहयोगी शहजाद शेख के खाते में ट्रांसफर किया गया था.