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परीक्षा में हाईटेक नकल का प्रयास फेल! चप्पल में मोबाइल लेकर आया छात्र धराया

दुर्ग. जेईई मेंस की परीक्षा में नकल कर रहे मुन्नाभाई को दुर्ग पुलिस ने पकड़ा है। पुरानी भिलाई क्षेत्र स्थित पार्थिवी इंजीनियरिंग मैनेजमेंट कॉलेज का मामला है। यहां एग्जाम के दौरान एक छात्र अपनी चप्पल के अंदर मोबाइल छिपाकर परीक्षा केंद्र के अंदर ले गया था। गार्ड की सावधानी से आरोपी पकड़ा गया। परीक्षा प्रबंधक ने आरोपी छात्र को पुलिस के हवाले कर दिया। दरअसल गुरुवार को जेईई मेंस की परीक्षा 9 बजे से आयोजित की गई थी। पहली पाली की परीक्षा में आरोपी परीक्षार्थी आदित्य परीक्षा केन्द्र पहुंचा। मुख्य गेट पर चेकिंग के दौरान उसने चालाकी दिखाते हुए अपनी चप्पलें पहले ही उतार दीं, ताकि मेटल डिटेक्टर की जांच में वह न पकड़ा जाए। इसके बाद वह लैब में जाकर अपनी सीट पर बैठ गया। परीक्षा के दौरान सुबह करीब 11:08 बजे आदित्य ने वॉशरूम जाने की अनुमति मांगी। वह लगभग 20 मिनट तक बाहर रहा। जब वह वॉशरूम से वापस आया तो सुरक्षा गार्ड ओमेंद्र कुमार ने उसकी दोबारा जांच की। इस बार भी आदित्य ने चालाकी दिखाई और जांच से पहले ही अपनी चप्पलें दूर उतार दीं। गार्ड की पैनी नजर से पकड़ा गया आरोपी छात्र जांच के बाद जैसे ही आदित्य ने चप्पल पहनी और लैब की तरफ बढ़ने लगा तो गार्ड की नजर उसकी चाल पर पड़ी। वह अपनी चप्पलों को जमीन पर घसीटकर अजीब तरीके से चल रहा था। गार्ड को उसकी हरकत संदिग्ध लगी, जिसके बाद उसने छात्र को रोककर उसकी चप्पलों की बारीकी से जांच की तो चप्पल के अंदर मोबाइल मिला। मोबाइल रखने चप्पल में बनाई थी खास जगह छात्र ने चप्पल के तलवे को बीच से काटकर उसमें मोबाइल रखने के लिए एक खास जगह बनाई थी। चप्पल के अंदर मोबाइल फोन पूरी तरह छिपा हुआ था। इसकी सूचना तुरंत कॉलेज के वेन्यू कमांडिंग ऑफिसर अजीत वर्मा और एनटीए के अधिकारियों को सूचना दी गई और आरोपी छात्र को पुलिस के हवाले किया गया। उसके खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की गई।

ट्राइबल गेम्स में सिद्दी पहलवानों का दबदबा, कुश्ती में दिखाया दमखम

रायपुर. 'प्रतिभा को किसी परिचय की जरूरत नहीं होती'- यह कहावत 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स- 2026' में सच साबित हुई, जहां कर्नाटक के 'सिद्दी समुदाय' के पहलवानों ने मैट पर अपनी जबरदस्त छाप छोड़ी है। उनकी यह सफलता अब सिर्फ़ पदकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समुदाय के कुश्ती के क्षेत्र में एक ताकत के तौर पर उभरने का प्रतीक है। अफ़्रीकी मूल के भारत में लगभग 50,000 सिद्दी लोग रहते हैं, जिनमें से एक-तिहाई कर्नाटक में निवास करते हैं। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में कर्नाटक के 9 पहलवानों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 4 सिद्दी समुदाय से थे। इन चार पहलवानों में से तीन ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि एक को रजत पदक मिला। स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवानों में मनीषा जुआवा सिद्दी (76 किग्रा), रोहन एम डोड़ामणि (ग्रीको रोमन 60 किग्रा) और प्रिंसिता पेदरू फर्नांडिस सिद्दी   (68 किग्रा) शामिल हैं जबकि शालिना सेयर सिद्दी (57 किग्रा) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इन पहलवानों की सफलता न सिर्फ उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी कहती है, बल्कि कुश्ती जैसे खेलो में सिद्दी समुदाय के बढ़ते वर्चस्व को भी दिखाता है। कर्नाटक के इन चारों पहलवानों का दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ट्रायल हुआ था और वहां भी ये पहले नंबर पर रहे थे।  सिद्दी समुदाय के प्रदर्शन से कर्नाटक कुश्ती टीम की कोच ममता बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। ममता ने कहा, ''जैसे हमारे देश में कुश्ती में हरियाणा का दबदबा है तो ठीक वैसे ही हमारे राज्य में अहलियाल क्षेत्र का कुश्ती में वर्चस्व रहता है। राज्य में डिपार्टमेंट ऑफ यूथ एंड डेवलपमेंट एंड सेंटर मुख्य रूप से इन्हीं सिद्दी समुदाय के लिए है। इनके बच्चे यहीं पर ट्रेनिंग करते  हैं। पिछले कुछ समय से इस समुदाय के लोगों के अंदर कुश्ती का क्रेज बढ़ा है और वे अब अपने बच्चों को कुश्ती में भेजने लगे हैं। उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले से आने वाले पुरुष पहलवान रोहन एम. डोड़ामणि भी इसी समुदाय से आते हैं। डोड़ामणि की मां सरकारी स्कूल में खाना पकाती हैं जबकि पिता का छह साल पहले ही देहांत हो चुका है। रोहन ने कहा, “सिद्दी समुदाय के अंदर समय-समय पर छोटे दंगल होते रहते हैं और जो इनमें जीतता है, उन्हें ज्यादा से ज्यादा पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया जाता है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में स्वर्ण जीतने से पहले मैं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, नेशनल गेम्स और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी भाग ले चुका हूं।'' देश में खिलाड़ियों के अंदर छिपी प्रतिभा की पहचान करने और उन्हें एक बेहतर मंच देने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल मंत्रालय ने मिलकर 2018 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स की शुरुआत की थी। उसके बाद खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स और अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत हुई है। साई के टैलेंट डेवलपमेंट कमेटी के सदस्य महा सिंह राव कहते हैं, '' साई और खेल मंत्रालय की तरफ से हम कम उम्र के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करते हैं ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जो सपना है कि 2036 ओलंपिक खेल भारत में हो, उस सपने को साकार करने के लिए ये सरकार की रणनीति का एक हिस्सा है। प्रधानमंत्री के अलावा खेल मंत्री, साई और हम इस सपने को साकार करने में लगे हुए हैं कि आगे आने वाले ओलंपिक खेलों में हम ज्यादा से ज्यादा मेडल जीते।'' उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से आने वाली शालिना सेयर सिद्दी ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने के बाद कहा, ''हमारे समुदाय में कुश्ती को लेकर अब लोग दिलचस्पी लेने लगे हैं। मैंने अपने अंकल के कहने पर कुश्ती शुरू की थी और शुरू से ही वह मुझे ट्रेनिंग देते आ रहे हैं। मैंने इस प्रतियोगिता के लिए मेहनत तो पूरी की थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और मैं स्वर्ण जीतने से चूक गई।'' कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से ही आने वाली प्रिंसिता सिद्दी ने कहा, ''शुरुआत में मुझे कुश्ती में दिलचस्पी नहीं थी और मैं बहुत रोई थी। लेकिन फिर धीरे-धीरे जब हमारे समुदाय के बच्चे इसमें भाग लेने लगे तो उन्हें देखकर मैं भी प्रैक्टिस करने लगी। यहां तक पहुंचने के लिए मैं शाम-सुबह दो-दो घंटे प्रैक्टिस करती हूं। मुझे इंटरनेशनल लेवल पर मेडल लाना है और इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं।'' इन पहलवानों की सफलता इस बात को सिद्ध करती है कि जब सही मंच, ट्रेनिंग और सपोर्ट मिलता है, तो दूरदराज के समुदायों से भी प्रतिभाएं शिखर तक पहुंच सकती हैं और भारत के खेल भविष्य को आकार दे सकती हैं।

सरकारी आवास महंगे! BSP अधिकारियों से ₹10 लाख वसूली का प्रावधान तय

भिलाई नगर/दुर्ग. भिलाई स्टील प्लांट में ई. क्यू. – 1 ( केवल सी 3 टाइप) / एन क्यू-4 (रूआबांधा सेक्टर) के चिन्हित एवं सूचीबद्ध आवास लायसेंस योजना के तहत 11 माह की अवधि के लिए एक बार आवंटन के लिए नगर सेवाएं विभाग ने आवेदन आमंत्रित किया है। सुरक्षा निधि के रूप में सी -3 टाइप के लिए 10 लाख रु. एवं एनक्यू-4 श्रेणी रुआंबांधा सेक्टर के लिए 8 लाख रु. सहित 11 माह की किराया राशि एडवांस में जमा करनी होगी। अफसरों को 3600 रु. और कर्मियों को 1800 रु. प्रतिमाह किराया देना होगा। ज्ञात हो कि लाइसेंस योजना के तहत अफसरों कोसी 3 टाइप और कर्मियों को एनक्यू-4 श्रेणी के आवास आवंटित किए जाएंगे। खास बात यह है कि इन आवासों का रिनोवेशन करने के लिए मैनेजमेंट सहमत है। कारण, विगत वर्ष इस योजना को लांच किए जाने पर बहुत अच्छा रिस्पांस नहीं मिला था। अब चूंकि इन आवासों का रिनोवेशन किया जाना प्रस्तावित है और रिटेंशन स्कीम बंद कर दी गई है इसलिए इस बार लाइसेंस योजना को अच्छा रिस्पांस मिलने की संभावना है। पहले आओ पहले पाओ योजना के लिए प्रस्तावित आवास पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवंटित किया जाएगा। किसी एक आवास के विरूद्ध दो या अधिक आवेदन एक साथ प्राप्त होने पर लाटरी से चयन कर आबंटन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह लाटरी नगर सेवाएं विभाग के महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी के माध्यम से होगा। ऐसे कार्यपालक / गैर कार्यपालक जिनके स्वयं या पति/पत्नी के नाम पर भिलाई इस्पात संयंत्र के 20 किलोमीटर की परिधि क्षेत्र में आवास आबंटित है इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे एवं सभी आवेदकों को तत्संबंधी एक शपथपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। आवास आबंटी को निर्धारित प्रपत्र के अनुसार (रू.50/- का नॉन ज्यूडिशियल स्टैंप पेपर) पर अनुबंध पत्र जमा करना होगा। सुरक्षा निधि पर ब्याज नहीं मिलेगा प्रबंधन द्वारा सुरक्षानिधि पर किसी भी प्रकार का ब्याज देय नहीं होगा। आवास रिक्त करने के पश्चात आवेदन देकर सुरक्षा निधि प्राप्त की जा सकती है। बिलों के भुगतान या अन्य राशि लंबित होने की दशा में बकाया राशि के समायोजन के पश्चात ही शेष राशि लौटाई जाएगी। विस्तृत जानकारी के लिए नगर सेवा विभाग के हाउसिंग लाइसेंस सेल से संपर्क किया जा सकता है।

नवाचार का असर! खनिज से 16,625 करोड़ का राजस्व, 14% की बढ़ोतरी दर्ज

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और सुदृढ़ प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है। खनिज विभाग के सचिव पी दयानंद ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में 16,625 करोड़ रुपए का खनिज राजस्व अर्जित कर लक्ष्य का 98 प्रतिशत प्राप्त किया है, जो सुशासन, प्रभावी नीति क्रियान्वयन और मजबूत निगरानी व्यवस्था का प्रत्यक्ष परिणाम है। इस वर्ष खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले पांच वर्षों की औसत वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 6 प्रतिशत से दोगुनी से अधिक है। यह वृद्धि राज्य शासन द्वारा अपनाए गए सुधारात्मक और तकनीकी उपायों की सफलता को रेखांकित करती है। यह उपलब्धि न केवल प्रभावी प्रशासनिक रणनीति का परिणाम है, बल्कि राज्य की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी दर्शाती है खनिज राजस्व में इस वृद्धि के प्रमुख कारकों में एनएमडीसी (NMDC) तथा अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए डिस्पैच रूट्स का प्रभावी अनुकूलन शामिल है। इसके साथ ही ‘खनिज 2.0’ (Khanij 2.0) जैसे आईटी-आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता, निगरानी और संचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार का विशेष ध्यान गौण खनिजों को भी ‘खनिज 2.0’ प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर रहेगा, जिससे संपूर्ण खनन प्रणाली को डिजिटल और एकीकृत बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त, खनिज परिवहन की निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए वीटीएस (VTS), आई-चेक गेट्स (iCheck Gates) तथा ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए राजस्व में सतत वृद्धि करना है। इन प्रयासों से न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विकास कार्यों के लिए संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।

अब गांवों तक तेज इलाज: 6 नई संजीवनी एंबुलेंस सेवा का शुभारंभ

दंतेवाड़ा. जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 6 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एंबुलेंस शुरू की गई हैं। इन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस वाहनों को विभिन्न विकासखंडों के लिए रवाना किया गया, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। अब तक दुर्गम सड़कों के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी होती थी, जिससे कई बार स्थिति गंभीर हो जाती थी। नई एंबुलेंस सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी और आपातकालीन स्थिति में त्वरित सहायता सुनिश्चित करेगी। जनप्रतिनिधियों ने इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार बताया है और कहा कि इससे ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है। यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्र में जीवन रक्षा की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को अंतिम छोर तक ले जाएगी। बीजापुर में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बीजापुर. जिले में संभावित संकट की आशंकाओं के बीच प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त प्रेस वार्ता में बताया कि एलपीजी गैस, पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। जिले में 30 से 45 दिनों का खाद्यान्न स्टॉक सुरक्षित रखा जा रहा है और किसानों के लिए खाद की आपूर्ति भी सुचारू रूप से जारी है। सीमावर्ती जिला होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। यह संदेश लोगों में विश्वास बनाए रखने और अनावश्यक भय को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इंद्रावती नेशनल पार्क के अंदर विकास की एंट्री, 79 साल बाद सागमेटा गांव जुड़ा सड़क से

बीजापुर. जिले के इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र में बसे सागमेटा गाँव के लिए 2 अप्रैल 2026 का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब पहली बार बस सेवा गाँव तक पहुँची। दशकों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित इस क्षेत्र के करीब 600 परिवारों को अब बाजार, अस्पताल और प्रशासनिक सेवाओं तक सीधी पहुंच मिल सकेगी। इससे पहले ग्रामीणों को 17 किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता था, जिससे दिनचर्या और जीवन स्तर प्रभावित होता था। इस बदलाव के पीछे स्थानीय युवाओं और प्रशासन का संयुक्त प्रयास रहा, जिन्होंने बस संचालकों को सेवा विस्तार के लिए तैयार किया और सुरक्षा का भरोसा दिलाया। क्षेत्र में स्थापित सुरक्षा कैंपों और सड़क निर्माण ने इस परिवर्तन को संभव बनाया है, जिससे विकास की राह खुली है। बस सेवा शुरू होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान होगी। सागमेटा और आसपास के गाँवों में इस पहल ने उम्मीद की नई किरण जगा दी है और यह साबित किया है कि इच्छाशक्ति और समन्वय से दूरस्थ क्षेत्रों तक भी विकास पहुँच सकता है। बीजापुर का 200 किलोमीटर का लंबा सफर बीजापुर का आखिरी गांव पामेड़, जहां जाने के लिए लोगों को कभी 200 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता था, अब सीधे जिले से जुड़ गया है। यह वही इलाका है, जहां सड़कों पर वाहनों की आवाज से ज्यादा धमाकों की गूंज सुनाई देती थी। जहां विकास का सपना, नक्सलियों के साये में दम तोड़ देता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। सरकार ने इस दुर्गम क्षेत्र तक बस सेवा शुरू कर दी है, जो न सिर्फ एक सफर को आसान बना रही है, बल्कि नक्सल प्रभावित इस इलाके को मुख्यधारा से जोड़ने की एक नई उम्मीद भी जगा रही है। पामेड़ गांव अब बस सेवा से जुड़ा छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले का आखिरी गांव पामेड़ अब बस सेवा से जुड़ गया है। यह गांव अब तक सीधे जिले से नहीं जुड़ा था और वहां पहुंचने के लिए लोगों को तेलंगाना के रास्ते जाना पड़ता था। लेकिन अब राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित इस क्षेत्र में विकास को गति देने के लिए सात पंचायतों को जोड़ते हुए पामेड़ तक बस सेवा शुरू की है। यह कदम बीजापुर के तेजी से विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। बीजापुर, जो अक्सर नक्सली हमलों, आईईडी ब्लास्ट और मुठभेड़ों की वजह से सुर्खियों में रहता था, अब एक नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। 50 साल बाद बस सेवा की शुरुआत पिछले 50 सालों से इस इलाके में कोई बस सेवा उपलब्ध नहीं थी। पहले यहां सड़कें थीं, लेकिन उन पर वाहनों का संचालन नहीं होता था। धीरे-धीरे नक्सलियों ने इस पूरे क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और वहां विकास कार्य रुक गए। लेकिन अब सरकार की ओर से यहां तेजी से सड़क निर्माण, सुरक्षा कैंप और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, बीते चार महीनों में नक्सल प्रभावित इस इलाके में विकास कार्यों की रफ्तार काफी तेज हुई है। इस बस सेवा की शुरुआत से स्थानीय लोगों को काफी राहत मिलेगी और वे सीधे जिला मुख्यालय से जुड़ सकेंगे।

फर्जी कागजों से RTE में दाखिला, जांच में खुलासा—23 एडमिशन निरस्त

दुर्ग. फर्जी दस्तावेजों के जरिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेशित 23 बच्चों का एडमिशन निरस्त कर दिया गया है। ये वे बच्चे हैं, जिनका एडमिशन आरटीई के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 में निजी स्कूलों के केजी -1 में हुआ था। इनमें सर्वाधिक 9 बच्चे डीपीएस रिसाली के हैं। बताया जा रहा है कि एडमिशन को लेकर शिकायत हुई थी। यह शिकायत संबंधित नगरीय निकाय तथा संयुक्त संचालक कार्यालय शिक्षा संभाग दुर्ग को गई थी। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा के मार्गदर्शन में जांच कराई गई। जांच के बाद 19 मार्च को इन सभी 23 बच्चों के एडमिशन को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। वहीं 18 बच्चों के दस्तावेज सही पाए गए। इनको लेकर की गई शिकायत निराधार पाई गई। दुर्ग जिले के बड़े जिी स्कूलों में एडमिशन के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। यहां तक कि एडमिशन के लिए जरूरी दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने से नहीं चूकते। हो सकता है कि फर्जी दस्तावेज बनाने कोई गिरोह सक्रिय हो । तभी तो बीपीएल राशन कार्ड फर्जी होने के कई मामले सामने आए हैं। इस वजह से बच्चों का एडमिशन भी निरस्त हुआ है। सबसे बड़ी परेशानी उन बच्चों का है, जो साल भर की पढ़ाई कर लिए रहते हैं। उसके बाद उन्हें उस स्कूल से बेदखल किया जाता है। हालांकि जिला शिक्षा विभाग ऐसे बच्चों को स्वामी आत्मानंद तथा अनुदान प्राप्त स्कूलों में प्रवेश के लिए अवसर प्रदान करता है, ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो। उनकी शिक्षा को जारी रखने विभाग हरसंभव प्रयास करता है। पूर्व में 22 बच्चों का प्रवेश रिजेक्ट जिला शिक्षा विभाग द्वारा पिछले वर्ष दिसंबर माह में 13 बच्चों का एडमिशन रिजेक्ट किया गया था। इस आशय का आदेश 2 दिसंबर 2025 को जारी किया गया। इन 13 बच्चों में सर्वाधिक 5 बच्चे माइलस्टोन स्कूल के थे। शेष बच्चों में शंकराचार्य स्कूल हुडको 4, केपीएस नेहरूनगर तथा डीएवी हुडको के 2-2 बच्चे शामिल थे। इसके पहले 12 नवंबर 2025 को 9 बच्चों का एडमिशन निरस्त किया गया था। ये सभी माइलस्टोन स्कूल के बताए गए।

प्राचीन विरासत की झलक: गढ़पहाड़ की गुफाएं बयां करती हैं इतिहास के अनछुए पन्ने

रायपुर गढ़पहाड़ की गुफाओं में झलकती प्रागैतिहासिक सभ्यता की अनूठी विरासत प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध जशपुर जिला अब अपनी समृद्ध पुरातात्विक धरोहर के कारण भी विशेष पहचान बना रहा है। जिले से लगभग 30 किलोमीटर दूर मनोरा विकासखंड के ग्राम जयमरगा स्थित गढ़पहाड़ की गुफा में मिले आदिमकालीन शैलचित्र प्रागैतिहासिक मानव जीवन की महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करते हैं। यह स्थल न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत आकर्षक बनता जा रहा है। ग्राम पंचायत डड़गांव के आश्रित ग्राम जयमरगा की आबादी लगभग 1400 है और यहां तक सड़क मार्ग से सहज पहुंचा जा सकता है। गांव से लगभग 300 मीटर ऊँची पहाड़ी पर चढ़ाई करने के बाद गढ़पहाड़ की इस प्राकृतिक गुफा तक पहुंचा जाता है। घने जंगलों के बीच स्थित यह गुफा आज भी स्थानीय ग्रामीणों के लिए आस्था का केंद्र है, जहां वे पूजा-अर्चना करते हैं। पुरातत्त्ववेत्ता डॉ. अंशुमाला तिर्की एवं  बालेश्वर कुमार बेसरा के अनुसार, जयमरगा क्षेत्र प्रागैतिहासिक स्थलों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। यहां पहाड़, जंगल और नदी की उपलब्धता के कारण प्राचीन मानव के लिए भोजन, पानी और आश्रय की समुचित व्यवस्था रही होगी। इसी कारण यह क्षेत्र आदिमानवों के निवास का प्रमुख केंद्र रहा प्रतीत होता है। गुफा में प्राप्त शैलचित्र मध्य पाषाण काल से संबंधित माने जा रहे हैं। इन चित्रों में मानव आकृतियों के साथ-साथ पशु आकृतियाँ, ज्यामितीय आकृतियाँ तथा कुछ रहस्यमयी आकृतियाँ भी अंकित हैं। लाल एवं सफेद रंगों से बनाए गए ये चित्र उस समय की कलात्मक अभिव्यक्ति और जीवन शैली को दर्शाते हैं। विशेष रूप से बैल, तेंदुआ, हिरण और मानव  आकृतियों का चित्रण उस काल के शिकार एवं सामाजिक जीवन की कहानी कहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गुफा संभवतः प्राचीन काल में पहरेदारी स्थल के रूप में प्रयुक्त होती रही होगी, जहां से शिकारी वन्यजीवों पर नजर रखते थे। यहां हेमाटाइट पत्थर की उपलब्धता भी पाई गई है, जिसका उपयोग रंग बनाने में किया जाता था। इसके अतिरिक्त, स्थल से माइक्रोलिथिक उपकरण जैसे लुनैट, स्क्रैपर, पॉइंट, ट्रैपेज, साइड स्क्रैपर और ब्लेड भी प्राप्त हुए हैं, जो उस समय के मानव द्वारा शिकार एवं दैनिक कार्यों में उपयोग किए जाते थे। गढ़पहाड़ की यह गुफा जशपुर जिले की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को सहेजने का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित किए जाने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी प्रागैतिहासिक मानव सभ्यता के इस अद्भुत साक्ष्य से परिचित हो सकें।वाल लेखन कर MSW छात्रा द्वारा जल संरक्षण के लिए किया जा रहा जागरूक- जन अभियान परिषद मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार जल गंगा संवर्धन अभियान पुरे मध्यप्रदेश मे चालया जा रहा है  अभियान अंतर्गत जिला समन्वयक  रविन्द्र शुक्ला के निर्देश पर विकासखंड करकेली के सेक्टर 2 निगहरी के परामर्शदाता संतोष त्रिपाठी के मार्गदर्शन मे MSW छात्रा साक्षी जैन    द्वारा दीवार लेखन कर जल स्त्रोतो व जल संरक्षण के प्रति  समाज को जागरूक किया जा रहा है । साक्षी जैन द्वारा समस्त समाज से आग्रह किया गया कि आप सभी भी इस अभियान का हिस्सा बनें और जल संरक्षण हेतु प्रेरित करें , जब सर्व समाज एक जुट होकर आगे बढ़ेगा तो हम सभी के प्रयास से यह अभियान सफलतम रास्ते पर अग्रसर रहेगा ।

रायपुर: खनिज राजस्व में 14% की बढ़ोतरी, 25-26 में ₹16,625 करोड़ की आय

रायपुर :खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि , 25–26 में ₹16,625 करोड़ की प्राप्ति  पारदर्शी प्रबंधन और तकनीकी नवाचार से हासिल हुई सफलता  रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और सुदृढ़ प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है।  खनिज विभाग के सचिव पी दयानंद ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में ₹16,625 करोड़ का खनिज राजस्व अर्जित कर लक्ष्य का 98 प्रतिशत प्राप्त किया है, जो सुशासन, प्रभावी नीति क्रियान्वयन और मजबूत निगरानी व्यवस्था का प्रत्यक्ष परिणाम है।यह उपलब्धि न केवल प्रभावी प्रशासनिक रणनीति का परिणाम है, बल्कि राज्य की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी दर्शाती है। इस वर्ष खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले पांच वर्षों की औसत वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 6 प्रतिशत से दोगुनी से अधिक है। यह वृद्धि राज्य शासन द्वारा अपनाए गए सुधारात्मक और तकनीकी उपायों की सफलता को रेखांकित करती है। खनिज राजस्व में इस वृद्धि के प्रमुख कारकों में एनएमडीसी (NMDC) तथा अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए डिस्पैच रूट्स का प्रभावी अनुकूलन शामिल है। इसके साथ ही, ‘खनिज 2.0’ (Khanij 2.0) जैसे आईटी-आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता, निगरानी और संचालन दक्षता में उल्लेखनीय  सुधार हुआ है। आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार का विशेष ध्यान गौण खनिजों को भी ‘खनिज 2.0’ प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर रहेगा, जिससे संपूर्ण खनन प्रणाली को डिजिटल और एकीकृत बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त, खनिज परिवहन की निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए वीटीएस (VTS), आई-चेक गेट्स (iCheck Gates) तथा ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए राजस्व में सतत वृद्धि करना है। इन प्रयासों से न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विकास कार्यों के लिए संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी – विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़

दुर्ग बना जल संरक्षण का मॉडल

रायपुर दुर्ग बना जल संरक्षण का मॉडल दुर्ग जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए प्रदेश ही नहीं, देश के लिए भी एक मिसाल पेश की है। कलेक्टर  अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में संचालित “मोर गांव मोर पानी महाभियान” अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत निर्मित आवासों में मात्र 15 दिनों के भीतर 32,058 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण कर जिले ने एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नेतृत्व में यह अभियान सुनियोजित ढंग से आगे बढ़ाया गया। “एकेच गोठ, एकेच बानी, बूंद-बूंद बचाबो पानी 2.0” थीम के साथ 13 मार्च 2025 को इसकी शुरुआत हुई। अभियान के प्रथम चरण में प्रधानमंत्री आवास हितग्राहियों के घरों में मात्र दो घंटे के भीतर 1,764 सोक पिट का निर्माण कर गोल्डन बुक में नाम दर्ज कराया गया। यह उपलब्धि अपने आप में प्रशासनिक समन्वय और जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनी। द्वितीय चरण में 08 दिसंबर को 12,418 सोक पिट का निर्माण किया गया, जिससे कुल 14,182 सोक पिट स्वप्रेरणा से तैयार हुए। इसके साथ ही “मोर गांव मोर पानी” अभियान के अंतर्गत 23,889 कंटूर ट्रेंच एवं वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच का निर्माण भी पूर्ण किया गया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से इन कार्यों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की गई, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 32,058 जल संरक्षण संरचनाओं की एंट्री पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने स्वयं आगे बढ़कर श्रमदान किया। यही कारण है कि यह पहल केवल एक सरकारी योजना तक सीमित न रहकर जन आंदोलन के रूप में स्थापित हो गई है। प्रत्येक प्रधानमंत्री आवास में निर्मित रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं न केवल वर्तमान जल आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही हैं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रही हैं। अभियान के तहत विभिन्न प्रकार की जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें कम लागत के 24 कार्य, 15 बोरवेल रिचार्ज, 03 चेकडैम, 5,875 कंटूर ट्रेंच, 07 गली प्लग, 03 नाला बंड, 18 ओपन वेल रिचार्ज (डगवेल), 07 परक्यूलेशन तालाब, 537 रिचार्ज पिट, 05 रिचार्ज शाफ्ट, 817 रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 6,676 सोक पिट, 09 टैंक, 48 ग्राम तालाब तथा 18,014 वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच शामिल हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ स्थायी जल प्रबंधन को बढ़ावा मिल रहा है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और गांवों में अधिक से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाकर इस महाभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं, ताकि “हर घर जल संचय” का लक्ष्य साकार हो सके।