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एग्जाम में गड़बड़ी पर कार्रवाई: दुर्ग में इंग्लिश पेपर रद्द, नई तारीख घोषित

दुर्ग. हेमचंद यादव विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित बीकॉम फाइनल इंग्लिश लैंग्वेज के प्रश्न पत्र को लेकर उठे विवाद का पटाक्षेप कर लिया गया है। वार्षिक परीक्षा 2025-26 बीकॉम भाग 3 की 28 मार्च को हुई परीक्षा निरस्त कर दी गई है। इस आशय की अधिसूचना विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा 7 अप्रैल को जारी किया गया है। यह परीक्षा फिर से आयोजित की जाएगी। 30 अप्रैल को यह परीक्षा दोबारा ली जाएगी। दरअसल, इंग्लिश लैंग्वेज के प्रश्न पत्र के पैटर्न को लेकर विवाद उठा था। इससे प्रभावित छात्र छात्राओं ने विश्वविद्यालय परिसर में खूब प्रदर्शन भी किया था। छात्रों को प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मामले को परीक्षा समिति में रखे जाने का आश्वासन दिया था। समिति की अनुशंसा के बाद प्रबंधन द्वारा दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। प्रश्न पत्र को लेकर स्कूल शिक्षा तथा उच्च शिक्षा विभाग के छात्र- छात्राओं को लेकर परेशानी उठानी पड़ रही है। इन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ रही है। एक ओर जहां सीजी 12वीं बोर्ड हिंदी विषय के प्रश्न पत्र दोबारा दिए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। दरअसल यह प्रश्न पत्र लीक होने की जानकारी दी गई। वहीं बीकॉम फाइनल के छात्र इंग्लिश लैंग्वेज के प्रश्न पत्र दोबारा देंगे। इसके बारे में छात्र-छात्राओं ने कहा कि कई प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस पूछे गए प्रश्न पत्र सिलेबस के अनुसार नहीं था। यही वजह सामने आया कि ज्यादातर छात्र-छात्राओं के पेपर अच्छे नहीं बने, उनमें आक्रोश पनप गया। ये छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय परिसर में प्रश्न पत्र की कमियों को लेकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी किए। बहरहाल बीकॉम फाइनल इंग्लिश लैंग्वेज के प्रश्न पत्र को निरस्त कर छात्र हित में विश्वविद्यालय प्रबंधन ने एक बड़ा कदम उठाया है। सातवीं के प्रश्नपत्र में प्रश्न अधूरा, पूर्णांक भी गायब भिलाई नगर. स्कूली परीक्षा में गड़बड़ियों का सिलसिला जारी है। मंगलवार को सातवीं गणित के प्रश्नपत्र में फिर गड़बड़ी मिली। वहीं कुछ केन्द्रों में सातवीं के प्रश्नपत्र के पैकेट में कक्षा छठवीं का प्रश्नपत्र भी निकलने की खबर है। जानकारी के अनुसार, कुछ परीक्षा केन्द्रों में लिफाफा खोलने पर गणित के प्रश्नपत्र की कटिंग कुछ इस तरह मिली कि जिससे एक तरफ प्रश्नपत्र अधूरा था तो दूसरी ओर पूर्णांक का पता नहीं चल रहा था। जहां पूर्णांक लिखा होता है, वह हिस्सा कट गया था। इससे काफी परेशानी हुई। शिक्षक और बच्चे दोनों परेशान हुए। अधूरे प्रश्नपत्रों को किसी तरह पूरा लिखवाया गया। इसी तरह जहां पूर्णांक कट गया था, वहां पूर्णांक लिखवाया गया। 

परसदा में सरकारी जमीन पर फ्लर्टिंग की परंपरा हुई तेज

बिलासपुर   प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दोनों शहर से लगे ग्राम पंचायत परसदा में इन दिनों भूमाफियाओं द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध प्लाटिंग किए जाने का मामला सामने आ रहा है, जिसने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। कई लोगों ने बताया किआरोप है ग्राम परसदा पटवारी हल्का क्रमांक 47र. म.पेंडारी के खसरा क्रमांक  1।  262/2/10 ,2।  258/3 3।  258/11,4।  257/2 5।  329/16,6।  330/2 7।  333/3,8।  321/5/1 9।  336/1/2,10।  335/1/4 11।  249/8 अलग-अलग खसरों को जोड़कर योजनाबद्ध तरीके से प्लॉट काटे जा रहे हैं, वहीं कई स्थानों पर सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसे भी प्लाटिंग के रूप में बेचा जा रहा है। इस गंभीर मामले ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी पर जमीन कब्जा स्थानीय लोगों के मुताबिक, भूमाफिया पहले कृषि भूमि को अपने कब्जे में लेते हैं, फिर बिना किसी वैधानिक अनुमति के उसे छोटे-छोटे प्लॉट में विभाजित कर देते हैं। इसके लिए न तो भूमि का डायवर्शन कराया जाता है, न ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसी) की अनुमति ली जाती है और न ही RERA के तहत पंजीयन कराया जाता है। इसके बावजूद खुलेआम प्लॉटों की बिक्री जारी है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस अवैध प्लाटिंग के लिए सरकारी जमीन तक को नहीं छोड़ा जा रहा। आरोप है कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर उसे भी प्लॉटिंग में शामिल किया जा रहा है, जिससे शासन को सीधे तौर पर राजस्व की हानि हो रही है। अलग-अलग खसरों को मिलाकर एक कॉलोनी का स्वरूप तैयार किया जा रहा है, जिससे आम लोगों को भ्रमित कर उन्हें निवेश के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है  कि इन अवैध कॉलोनियों में न तो बुनियादी सुविधाएं हैं और न ही भविष्य की कोई कानूनी सुरक्षा। सड़क, नाली, पानी, बिजली जैसी व्यवस्थाएं पूरी तरह से नदारद हैं, जिससे यहां प्लॉट खरीदने वाले लोगों को भविष्य में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कार्यवाही कब प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल इस पूरे मामले में प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों को इसकी जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे भूमाफियाओं के हौसले और बढ़ते जा रहे हैं। जनता की मांग – सख्त कार्रवाई हो ग्रामवासियों और जनप्रतिनिधियों ने शासन से मांग की है कि परसदा में चल रहे इस अवैध प्लाटिंग के खेल की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले और अवैध प्लाटिंग करने वाले भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। राजस्व की चोरी यदि जल्द ही इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह अवैध कारोबार और भी फैल सकता है, जिससे शासन को भारी नुकसान और आम जनता को धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब और कितनी सख्ती से कदम उठाता है।

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: RTE के तहत एडमिशन नहीं देने पर मान्यता रद्द

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि RTE के तहत बच्चों को प्रवेश नहीं देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। बता दें कि प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाने पर RTE के तहत बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं देने का ऐलान किया था, जिसके बाद सरकार ने कड़ा फैसला लिया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट कहा है कि यदि कोई भी स्कूल RTE के तहत निर्धारित सीटों पर बच्चों को प्रवेश देने से इंकार करता है, तो उसकी मान्यता तक रद्द की जा सकती है। यह फैसला तब सामने आया है जब प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर RTE के तहत प्रवेश नहीं देने की बात कही थी। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि RTE कानून का पालन करना सभी निजी स्कूलों की कानूनी जिम्मेदारी है। नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें स्कूल की मान्यता खत्म करना भी शामिल है। शिक्षा विभाग ने यह भी कहा है कि बच्चों के अधिकारों से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। 25% सीटें आरक्षित, गरीब बच्चों को मिलेगा लाभ RTE के तहत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों में प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिया जाता है, जिससे उन्हें बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सके। प्रतिपूर्ति राशि को लेकर सरकार का पक्ष सरकार का कहना है कि छत्तीसगढ़ में दी जा रही प्रतिपूर्ति राशि अन्य कई राज्यों के मुकाबले बेहतर या उनके बराबर है। कक्षा 1 से 5 तक: ₹7,000 प्रतिवर्ष, कक्षा 6 से 8 तक: ₹11,400 प्रतिवर्ष, यह राशि प्रति छात्र सरकारी खर्च या निजी स्कूल की फीस (जो कम हो) के आधार पर तय की जाती है और पारदर्शी तरीके से स्कूलों को दी जाती है। अन्य राज्यों से तुलना सरकार के अनुसार, छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति राशि कई राज्यों से अधिक है: मध्य प्रदेश: ₹4,419, बिहार: ₹6,569, झारखंड: ₹5,100, उत्तर प्रदेश: ₹5,400, हालांकि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक है, लेकिन कुल मिलाकर राज्य की व्यवस्था संतुलित मानी जा रही है। लाखों बच्चों को मिल रहा फायदा प्रदेश के 6,862 निजी स्कूलों में वर्तमान में लगभग 3,63,515 बच्चे RTE के तहत पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं इस साल कक्षा पहली में करीब 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है, जिससे और अधिक बच्चों को इसका लाभ मिलने वाला है। शिक्षा के अधिकार को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, अप्रैल 2010 से लागू है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का कहना है कि वह हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और गरीब व वंचित वर्ग के बच्चों के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई सरकार ने स्पष्ट किया है कि RTE के तहत प्रवेश देने से मना करने या प्रक्रिया में बाधा डालने वाले स्कूलों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें मान्यता समाप्त करना भी शामिल है। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

ग्रामीण महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल, गृह उद्योग और हस्तशिल्प से संवर रहा भविष्य

आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं ग्रामीण महिलाएं गृह उद्योग और हस्तशिल्प से संवर रहा भविष्य रायपुर  राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के प्रभावी क्रियान्वयन से रायगढ़ जिले की ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। यह योजना महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, कौशल और सामाजिक पहचान भी प्रदान कर रही है। रायगढ़ जिले के ग्राम बड़ेभंडार की निवासी श्रीमती मथुरा कुर्रे इसकी उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के पश्चात उन्हें रिवॉल्विंग फंड एवं कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के तहत आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। इस सहयोग से उन्होंने घर पर ही अचार, पापड़, बड़ी एवं मसाला निर्माण का कार्य प्रारंभ किया। आज वे अपने उत्पादों का बाजार में विक्रय कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और वे आत्मनिर्भर बन सकी हैं। इसी क्रम में ग्राम रूमकेरा, तहसील घरघोड़ा की श्रीमती जमुना सिदार की कहानी भी प्रेरणादायक है। पूर्व में वे एक गृहिणी थीं, किन्तु बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्होंने बांस शिल्प का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण उपरांत उन्होंने टोकरी, सूपा एवं अन्य हस्तशिल्प उत्पादों का निर्माण प्रारंभ किया। उन्हें विभिन्न मेलों, विशेषकर ‘सरस मेला’ में अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विक्रय का अवसर प्राप्त हुआ, जिससे वे अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि कौशल विकास, उद्यमिता और आत्मगौरव का अवसर भी प्रदान कर रहा है। जिले में अनेक महिलाएं इस योजना से जुड़कर स्वरोजगार के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा दे रही हैं। शासन के मंशानुरूप जिला प्रशासन रायगढ़ द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न योजनाओं से जोड़कर महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जा रहा है, जिससे वे न केवल अपने परिवार की आय में वृद्धि कर रही हैं, बल्कि समाज में एक सशक्त भूमिका भी निभा रही हैं। बिहान योजना आज जिले में महिला सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनी है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हुए आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

एग्जाम सेंटर पर बड़ी चूक: 4 शिक्षकों की ड्यूटी, मौजूद रहा सिर्फ एक- SDM सख्त

बिलासपुर. शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खोंगसरा में वार्षिक परीक्षा के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आई है। 9 वीं और 11वीं कक्षा की परीक्षा के लिए विद्यालय में कुल 4 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन परीक्षा प्रारंभ होने के बाद केवल एक शिक्षक ही केंद्र पर मौजूद रहे. बाकी के शिक्षकों के विद्यालय नहीं पहुंचने से व्यवस्था प्रभावित हुई। कोटा विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खोगसरा में 9वीं और 11वीं का वार्षिक परीक्षा हो रही हैं, सोमवार को परीक्षा के लिए विद्यालय में कुल चार शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन परीक्षा प्रारंभ होने के बाद भी सुबह 9:30 बजे तक केवल एक शिक्षक कौशल कुरें ही केंद्र पर मौजूद रहे। बाकी के तीन शिक्षक विद्यालय में उपस्थित नहीं थे, जिससे परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होती नजर आई। ऐसे में पूरी परीक्षा व्यवस्था एक ही शिक्षक कौशल कुर्रे के भरोसे संचालित होती रही। इनके द्वारा अकेले ही बच्चों को प्रश्न उत्तर पुस्तिका का वितरण कर सभी बच्चों के कक्षाओं की देखरेख भी कर रहे थे। अभिभावकों और ग्रामीणों में इसे लेकर नाराजगी देखी जा रही है। ट्रेन से आना-जाना करते हैं शिक्षक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खोंगसरा में पदस्थ अधिकतर शिक्षक बिलासपुर में निवास करते हैं, जिससे शिक्षक रोजाना ट्रेन के माध्यम से खोंगसरा तक आते-जाते हैं। समय पर ट्रेन न मिलना या देरी होना सीधे तौर पर स्कूल की व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। यही वजह है कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण दिन पर भी शिक्षक समय पर केंद्र तक नहीं पहुंच सके। इस मामले पर कोटा एसडीएम अरविंद कुमार का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी, जानकारी सत्य पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

अब AI पढ़ाएगा बच्चों को: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्रांति शुरू

रायपुर. छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग शुरू होने जा रहा है। शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की पठन क्षमता, लेखन और स्मरण शक्ति को बेहतर बनाने के लिए AI आधारित एप्लीकेशन लागू करने की तैयारी की है। इसके जरिए बच्चों का स्तर समझने के बाद उनके समस्या के समाधान के लिए रणनीति बनाई जाएगी। इस पहल को लेकर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें योजना की रूपरेखा तय की गई। शुरुआत में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दो जिलों में लागू किया जाएगा। सफल होने के बाद इसे पूरे छत्तीसगढ़ में लागू किया जाएगा। इसके लिए 15 जिलों से करीब 200 घंटे का कंटेंट तैयार किया गया है। SCERT के प्रभारी संचालक जेपी रथ ने कहा कि स्कूली बच्चों की पठन क्षमता और समझ के साथ पढ़ने की क्षमता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद लेने जा रहा है। वाधवानी एआई के सहयोग से विकसित ‘मौखिक धाराप्रवाह पठन (ORF) टूल’ के माध्यम से राज्य के प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की पठन दक्षता का सटीक आकलन और उपचारात्मक सुधार किया जाएगा। क्या है ORF टूल और इसकी तकनीक? मनीष सिंह स्ट्रीट कोऑर्डिनेटर ने कहा ORF टूल एक वॉयस एआई मॉडल ASR (Automatic Speech Recognition) पर आधारित है। यह तकनीक बच्चों की आवाज को रिकॉर्ड कर उसे लिखित शब्दों (ट्रांसक्रिप्ट) में बदल देती है, जिससे शिक्षक केवल 2–3 मिनट में ही प्रत्येक बच्चे की पढ़ने की सटीकता और गति का आकलन कर सकते हैं। इस मॉडल को राज्य की भाषा और बच्चों की स्थानीय बोली के अनुसार प्रशिक्षित करने के लिए प्रदेश के 15 जिलों के 300 से अधिक स्कूलों से 200 घंटों का वॉयस डेटा एकत्रित किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पठन दक्षता : यह सुनिश्चित करना कि कक्षा 3-5 और 6-8 के सभी बच्चे धाराप्रवाह और समझ के साथ पढ़ सकें। बुनियादी साक्षरता : निपुण भारत मिशन के तहत तय किए गए पठन लक्ष्यों को प्राप्त करना। शिक्षकों का सहयोग : आकलन के समय को कम करना और सटीक परिणामों के आधार पर बच्चों के पठन स्तर की पहचान कर उपचारात्मक शिक्षण प्रदान करना। कार्यान्वयन की चरणबद्ध योजना छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्तावित इस योजना को अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा। प्रशिक्षण- शिक्षकों को एआई टूल और सुधारात्मक विधियों का प्रशिक्षण देना। एकीकरण- इसे राज्य के मौजूदा डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि अलग से कोई ऐप डाउनलोड न करना पड़े। बेसलाइन आकलन- सत्र की शुरुआत में बच्चों के वर्तमान स्तर का मूल्यांकन। आकलन परिणाम- बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार चार समूहों में बांटना। सुधार के लिए सहयोग रिमेडिएशन- परिणामों के आधार पर शिक्षा विभाग विशेष शिक्षण कार्यक्रम चला सकता है। एंडलाइन आकलन- कार्यक्रम के अंत में प्रगति का मूल्यांकन करना। इस मॉडल को अन्य दो राज्यों राजस्थान और गुजरात में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। इसे सभी जिलों और सभी स्कूलों में संचालित किया गया था, और इस टूल के माध्यम से 6.7 मिलियन बच्चों तक पहुंच बनाई गई थी। इसी सफलता के आधार पर अब छत्तीसगढ़ के स्कूलों में इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी है।

अब गांव से शहर तक आसान हुआ सफर, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना बनी ग्रामीणों के लिए वरदान

नक्सलवाद के खात्मे के बाद बदली तस्वीर, अब गांव से शहर तक आसान हुआ सफर अब गांव से शहर तक आसान हुआ सफर, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना बनी ग्रामीणों के लिए वरदान नक्सलवाद के खात्मे के बाद बदली तस्वीर, अब गांव से शहर तक पहुँचना हुआ आसान रायपुर कभी नक्सल प्रभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जिन गांवों के लोग अपने ही क्षेत्र में सीमित रहने को विवश थे, आज वही ग्रामीण निर्भय होकर शहरों तक आवागमन कर रहे हैं। माओवाद के खात्में और सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने के साथ-साथ शासन की जनहितकारी योजनाओं ने सुकमा जिले के दूरस्थ अंचलों में विकास की नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है। इसी परिवर्तन का सशक्त उदाहरण मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के रूप में सामने आया है, जिसने वनांचल और अंदरूनी क्षेत्रों के जनजीवन को नई गति प्रदान की है। सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के दूरस्थ ग्राम लखापाल, केरलापेंदा और नागाराम सहित आसपास के गांवों के लिए अब दोरनापाल तक पहुंचना सहज और सुरक्षित हो गया है। पूर्व में ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए 8 से 10 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था। ग्राम लखापाल के निवासी श्री कूड़ाम जोगा बताते हैं कि बस सेवा प्रारंभ होने से पहले चिंतलनार तक पैदल जाना उनकी मजबूरी थी। कई बार बस छूट जाने के कारण पूरा दिन व्यर्थ चला जाता था और आवश्यक कार्य अधूरे रह जाते थे। अब दोरनापाल-नागाराम मार्ग पर नियमित बस सेवा प्रारंभ होने से यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के अंतर्गत संचालित बस सेवा अब पोलमपल्ली, कांकेरलंका, चिंतागुफा, चिंतलनार, लखापाल, केरलापेंदा और नागाराम जैसे गांवों के समीप से गुजर रही है। इससे ग्रामीण अब आसानी से बस के माध्यम से दोरनापाल पहुंचकर अपने दैनिक कार्य समय पर पूर्ण कर रहे हैं और उसी दिन सुरक्षित वापस भी लौट पा रहे हैं। यह सुविधा विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों, विद्यार्थियों एवं श्रमिकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। जहां पहले नक्सलियों के भय के कारण ग्रामीणों का बाहर निकलना भी कठिन था, वहीं अब सुरक्षा वातावरण में सुधार के चलते वे निर्भय होकर रोजगार, व्यापार, शिक्षा और उपचार के लिए शहरों की ओर अग्रसर हो रहे हैं। बस सुविधा ने न केवल आवागमन को सुगम बनाया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान की है। इरकमपल्ली निवासी श्री मोहनरंजन ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है। इससे न केवल कनेक्टिविटी बढ़ी है, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिला है। कलेक्टर श्री अमित कुमार के अनुसार, पूर्व में नक्सल प्रभावित एवं दूरस्थ क्षेत्रों में वर्तमान में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 10 बसों का संचालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 5 ‘हक्कुम मेल’ बसें भी नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। बस संचालन को प्रोत्साहित करने हेतु शासन द्वारा सब्सिडी प्रदान की जा रही है तथा तीन वर्षों के लिए रोड टैक्स में छूट भी दी गई है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना अब केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि सुकमा जिले के ग्रामीण अंचलों में विश्वास, सुरक्षा और विकास का प्रतीक बन चुकी है। नक्सलवाद के अंधकार से निकलकर यह क्षेत्र अब प्रगति और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर अग्रसर है, जहां हर सफर अब नई संभावनाओं की ओर ले जा रहा है।

शासन की योजनाओं से बदला जीवन, पीएम आवास और उज्ज्वला से मिला ग्रामीणों को सहारा

शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से संवरा जीवन,पीएम आवास, उज्ज्वला और महतारी वंदन से मिला संबल रायपुर शासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण अंचलों में न केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं, बल्कि आमजन के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय भी जोड़ रही हैं। इसी कड़ी में जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड पामगढ़ के ग्राम लोहर्सी की निवासी श्रीमती ज्योति कश्यप की जीवन यात्रा परिवर्तन की एक प्रेरक मिसाल है। कभी अभाव और कठिनाइयों से जूझ रही श्रीमती ज्योति कश्यप का जीवन आज शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से पूरी तरह बदल चुका है। पूर्व में उनका कच्चा मकान हर मौसम में चुनौती बन जाता था। वर्षा के दौरान छत टपकना, घर में पानी भरना और असुरक्षित वातावरण में रहना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। इसके साथ ही लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाते समय उठने वाले धुएं से आंखों में जलन और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं उनके स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रही थीं। परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव तब आया, जब उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिली। उन्होंने आशा और विश्वास के साथ आवेदन किया और आवास स्वीकृत होने के बाद उनके जीवन में जैसे नई रोशनी का संचार हुआ। पक्के मकान के निर्माण से अब उनका परिवार सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण में निवास कर रहा है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन प्राप्त होने से उनकी रसोई धुएं से मुक्त हो गई है, जिससे स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ समय और श्रम की भी बचत हो रही है। श्रीमती ज्योति कश्यप के जीवन में आत्मनिर्भरता का एक नया आयाम महतारी वंदन योजना से जुड़ा है। इस योजना के तहत प्रतिमाह प्राप्त होने वाली 1000 रुपये की सहायता राशि से वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं कर पा रही हैं। जहां पहले उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब वे आत्मसम्मान के साथ अपने निर्णय लेने में सक्षम हुई हैं। आज श्रीमती ज्योति कश्यप का जीवन इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाएं यदि सही पात्र तक पहुंचें, तो वे न केवल जीवन स्तर को सुधारती हैं, बल्कि आत्मविश्वास और स्वाभिमान को भी नई ऊंचाई प्रदान करती हैं।

एक जिला एक उत्पाद योजना से आई नई उम्मीद, अदरक की खेती से दोगुना मुनाफा

एक जिला एक उत्पाद योजना से बदली तस्वीर अदरक की खेती से दोगुना मुनाफा कमाया रायपुर  सरकार की “एक जिला एक उत्पाद” योजना अब धरातल पर किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इसी क्रम में बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम बघमरा के युवा प्रगतिशील किसान श्री आकाश चंद्राकर ने अदरक की खेती के माध्यम से सफलता की एक नई मिसाल प्रस्तुत की है। पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ते हुए आकाश चंद्राकर ने “एक जिला एक उत्पाद” योजना से प्रेरित होकर अपने लगभग ढाई एकड़ खेत में अदरक की खेती की शुरुआत की। वैज्ञानिक पद्धतियों और बेहतर प्रबंधन के साथ की गई इस खेती से उन्हें उत्कृष्ट उत्पादन प्राप्त हुआ। साथ ही बाजार में अदरक की अच्छी मांग के कारण उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिला, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। किसानों को प्रोत्साहित करने और खेती की लागत को कम करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन के उद्यानिकी विभाग द्वारा राज्य पोषित मसाला क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत आकाश चंद्राकर को लगभग 49 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। इस वित्तीय सहयोग से उन्हें आधुनिक कृषि संसाधन जुटाने, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं तकनीकों का उपयोग करने में सहायता मिली, जिसका सीधा लाभ उत्पादन और गुणवत्ता में दिखाई दिया। आकाश चंद्राकर बताते हैं कि अदरक की खेती उनके लिए समृद्धि का नया द्वार बनकर आई है। शासन से प्राप्त अनुदान ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। “एक जिला एक उत्पाद” के अंतर्गत अदरक को चयनित किए जाने के बाद जिले के अन्य किसान भी इस नगदी फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पारंपरिक फसलों की तुलना में अदरक से प्राप्त अधिक शुद्ध लाभ ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। जिला प्रशासन बालोद और उद्यानिकी विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही तकनीकी सलाह एवं अनुदान से खेती अब घाटे का सौदा नहीं, बल्कि लाभ का माध्यम बनती जा रही है। श्री चंद्राकर ने केंद्र एवं राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि शासन की इस पहल से बालोद जिला अदरक उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित करेगा।

संघर्ष और भटकाव के बाद मनकू कड़ती की एक नई यात्रा की शुरुआत

संघर्ष और भटकाव के बाद मनकू कड़ती की नई शुरुआत रायपुर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित अंचल में बदलाव की कई कहानियां उभर रही हैं। इन्हीं में से एक कहानी है बीजापुर जिले के छोटे से गांव चेरली के युवक मनकू कड़ती की, जिनका जीवन संघर्ष, भटकाव और फिर सकारात्मक परिवर्तन का उदाहरण बनकर सामने आया है। बीजापुर जिले के चेरली गांव में जन्मे मनकू कड़ती का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। गरीबी, असुरक्षा और सीमित संसाधनों के बीच उनका परिवार लगातार चुनौतियों से जूझता रहा। पारिवारिक स्थिति उस समय और भी गंभीर हो गई, जब उनके पिता को जेल जाना पड़ा। इस घटना ने मनकू के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला और उनका बचपन अभाव और अस्थिरता के माहौल में बीता। इन्हीं परिस्थितियों और नकारात्मक माहौल के प्रभाव में मनकू धीरे-धीरे भटकाव की ओर बढ़ने लगे। उन्हें लगा कि गलत रास्ता ही उन्हें पहचान और सुरक्षा दिला सकता है। हालांकि, उनके भीतर एक द्वंद्व लगातार बना रहा। क्या यही उनका भविष्य है ? यह सवाल उनके मन में बार-बार उठता रहा। समय के साथ मनकू के भीतर आत्मचिंतन की प्रक्रिया शुरू हुई। उन्होंने महसूस किया कि हिंसा और भय के रास्ते पर चलकर वे अपने जीवन को अंधकार की ओर ले जा रहे हैं। यही एहसास उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उन्होंने ठान लिया कि अब वे अपनी दिशा बदलेंगे और एक नई शुरुआत करेंगे। अप्रैल 2025 में मनकू कड़ती ने साहसिक कदम उठाते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। यह निर्णय उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन यही उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सही फैसला साबित हुआ। इस कदम ने उनके लिए मुख्यधारा में लौटने और एक सम्मानजनक जीवन जीने के रास्ते खोल दिए। आत्मसमर्पण के बाद उन्हें पुनर्वास प्रक्रिया के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने ट्रैक्टर ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षण लिया, जहां उन्होंने न केवल भारी मशीनों का संचालन सीखा, बल्कि अनुशासन, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास को भी अपने जीवन में अपनाया। निरंतर मेहनत और सीखने की इच्छा ने उनके व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव लाया।  आज मनकू कड़ती एक बदले हुए इंसान के रूप में सामने आए हैं। वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हैं और समाज के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। जहां पहले उनके जीवन में डर और अस्थिरता थी, वहीं अब आत्मविश्वास और नई उम्मीद ने जगह ले ली है। मनकू कड़ती के जीवन की यह नई शुरूआत इस बात का प्रमाण है कि विपरीत परिस्थितियों और गलत दिशा में बढ़ते कदमों के बावजूद, यदि व्यक्ति दृढ़ निश्चय कर ले तो जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है।