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पंजाब में यात्री परेशान, कर्मचारियों की हड़ताल से दोपहर बाद बंद हुईं सरकारी बस सेवाएं

चंडीगढ़  सरकारी बसों में सफर करने वाले यात्रियों को आज बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कांट्रैक्ट कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। यूनियन के आह्वान पर बुधवार दोपहर 12 बजे से बस सेवाओं को प्रभावित करते हुए प्रदेशभर में रोष प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि हड़ताल में करीब आठ हजार कर्मचारी शामिल हैं। इसके चलते प्रदेश के लगभग 80 प्रतिशत सरकारी बस रूट प्रभावित हुआ है। ऐसे में यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले बसों की उपलब्धता की जानकारी लेने की सलाह दी जा रही है। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब के वरिष्ठ उपप्रधान हरकेश कुमार विक्की ने बताया कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही। निजीकरण का हो रहा विरोध उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न विभागों का लगातार निजीकरण किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो रहा है। यूनियन नेताओं का कहना है कि आंदोलन कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं और उन्हें जेल भेजने जैसी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। बसों की पर्याप्त खरीद नहीं हुई कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि पिछले चार वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद परिवहन विभाग में नई सरकारी बसों की पर्याप्त खरीद नहीं की गई। साथ ही लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी पूरी नहीं हुई है। इन मुद्दों को लेकर कर्मचारियों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। आंदोलन के अगले चरण में 11 जून को मुख्यमंत्री के चंडीगढ़ स्थित आवास के बाहर धरना देने की भी घोषणा की गई है। लोग हो रहे परेशान हड़ताल के कारण दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ सकती है। परिवहन सेवाओं पर निर्भर हजारों लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की संभावना है। वहीं, सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत को लेकर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके और विवाद का समाधान निकल सके।  

पश्चिम बंगाल सरकार की नई पहल, अब महिलाएं सरकारी बसों में करेंगी फ्री सफर

कोलकत्ता   पश्चिम बंगाल में सोमवार से महिलाओं के लिए पूरे राज्य में मुफ्त बस यात्रा योजना लागू हो गई है। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सत्ता में आने से पहले किया गया एक प्रमुख चुनावी वादा पूरा कर दिया है।पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सरकार गठन के बाद यह घोषणा की थी कि इस योजना को एक जून से लागू कर दिया जायेगा। राज्य में सरकारी बसों में यात्रा करने वाली महिला यात्रियों को अब किराया देने की आवश्यकता नहीं है। इस नयी व्यवस्था के तहत, सरकारी बसों में यात्रा करने वाली महिलाओं को आज से नियमित किराये के टिकट के बजाय 'शून्य-मूल्य' के टिकट जारी किये जा रहे हैं। ये सुविधा उत्तरी जिलों से लेकर दक्षिणी क्षेत्रों तक पूरे राज्य में उपलब्ध है। इसमें कम दूरी तथा लंबी दूरी दोनों तरह के मार्ग शामिल हैं। इन 12 दस्तावेजों की मदद से महिलाएं कर सकेंगी फ्री सफर लंबी दूरी की बसों में यात्रा करने के लिए, महिला यात्रियों को मुफ्त टिकट प्राप्त करने से पहले 12 स्वीकृत पहचान दस्तावेजों में से कोई भी एक दस्तावेज दिखाना अनिवार्य होगा। इन दस्तावेजों में आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, मनरेगा जॉब कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, तस्वीर लगा हुआ पेंशन दस्तावेज, राज्य या केंद्र सरकार के कर्मचारी पहचान पत्र, विद्यालयों, महा विद्यालयों या विश्वविद्यालयों की ओर से जारी छात्र पहचान पत्र और सरकार की ओर से जारी कोई अन्य पहचान दस्तावेज शामिल हैं। महिलाओं की प्रतिक्रिया राज्य सरकार के इस फैसले से महिलाएं बेहद खुश हैं. उनका कहना है- इस सरकार ने हमारी लड़कियों के बारे में सोचा है. अब तक हमें अपने पिता या पति से मदद मांगनी पड़ती थी, इस नियम के लागू होने से हम बहुत खुश हैं. एक अन्य महिला यात्री ने कहा- मैं काउंटर पर टिकट खरीदने आई थी, उन्होंने कहा कि महिलाओं को टिकट की जरूरत नहीं है. एक कार्ड दिया जाएगा. चूंकि अभी तक ऐसा नहीं हुआ है, इसलिए फिलहाल आप अपना आधार कार्ड दिखाकर मुफ्त में यात्रा कर सकती हैं. हालांकि, एक युवती ने कहा कि यह पहल बहुत अच्छी है, लेकिन जो लोग इसका खर्च उठा सकते हैं उन्हें बस का किराया देना चाहिए।  शुभेंदु अधिकारी ने की घोषणा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी राज्यभर की महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा शुरू करने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने राज्य द्वारा संचालित सभी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा के अपने चुनावी वादे को पूरा किया है. मुख्यमंत्री ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा कि पहाड़ों से लेकर मैदानों तक महिलाएं अब मुफ्त यात्रा के लाभों का आनंद ले रही हैं. महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने के क्षेत्र में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना एक और बड़ा कदम आगे बढ़ गया है।  जो वादा किया था वो पूरा किया उन्होंने आगे कहा कि राज्य की माताओं और बहनों ने हम पर भरोसा जताया है. चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा का वादा किया था. उस वादे को पूरा करते हुए, आज से राज्य भर की सभी महिलाएं- पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक सभी सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा कर सकती हैं. राज्य सरकार पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा, सामाजिक गरिमा, आर्थिक सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।  इन दस्तावेजों की हो रही जरुरत बसों में मुफ्त यात्रा के लिए महिलाओं को गुलाबी कार्ड या स्मार्ट कार्ड तैयार रखना होगा. यदि आप वह कार्ड कंडक्टर को देंगी, तो वह आपको मुफ्त में यात्रा करने की अनुमति देगा. शून्य मूल्य का टिकट जारी करने के लिए ई-पीओएस मशीन को स्वाइप करना होगा. चूंकि यह कार्ड अभी तक लॉन्च नहीं हुआ है, इसलिए महिलाएं आधार कार्ड, वोटर कार्ड या राशन कार्ड जैसे सरकारी पहचान पत्र दिखाकर मुफ्त यात्रा कर सकेंगी।  लंबी दूरी की बसों के लिए भी मुफ्त टिकट छोटी दूरी की बस में चढ़ते समय हर कोई टिकट खरीदता है. इसलिए पहचान पत्र दिखाकर मुफ्त टिकट प्राप्त करने का विचार सभी को समझ में आता है, लेकिन लंबी दूरी की बस यात्रा के बारे में फ्री यात्रा के लिए क्या करना होगा. यदि कोई महिला यात्री सरकारी बस से दीघा या दार्जिलिंग जाना चाहती है, तो उसे सरकारी बस डिपो जाना होगा. वहां आपको अपना पहचान पत्र दिखाकर शून्य मूल्य का टिकट प्राप्त करना होगा।  महिलाओं को मिलेगा जीरो रुपये का टिकट सोमवार सुबह से ही सरकारी बसों के भीतर इस योजना की जानकारी देने वाले पत्रक प्रदर्शित कर दिये गये हैं। इसके साथ ही, बस कंडक्टरों और ड्राइवरों को भी इस कार्यक्रम को लागू करने तथा योग्य यात्रियों को शून्य-मूल्य टिकट जारी करने के संबंध में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, महिला यात्रियों को बस में चढ़ते ही मुफ्त टिकट मिलेंगे। इस योजना के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार महिलाओं के लिए एक यात्रा कार्ड शुरू करने की योजना बना रही है। इस प्रस्तावित कार्ड प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल पात्र लाभार्थी ही इस सुविधा का लाभ उठा सकें। इस कार्ड को जारी किये जाने के संबंध में विस्तृत विवरण की घोषणा अभी नहीं की गयी है। इस योजना के शुभारंभ का कई महिला यात्रियों ने स्वागत किया है। सोमवार सुबह बस में यात्रा कर रही एक महिला यात्री ने कहा कि वह इस पहल से बेहद खुश हैं, क्योंकि इससे उनके दैनिक परिवहन खर्च में कमी आयेगी। सरकार ने कहा है कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं पर वित्तीय बोझ को कम करना और पूरे राज्य में किफायती सार्वजनिक परिवहन तक उनकी पहुंच में सुधार करना है।

ट्रैफिक सुधार के तहत भोपाल-इंदौर बसें चलेंगी नए रूट पर, 8 मई से बदलाव

 सागर शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए प्रशासन ने अहम कदम उठाया है। भोपाल और इंदौर जाने वाली बसों के रूट में बदलाव करते हुए नई व्यवस्था लागू की गई है, जो 8 मई से प्रभावी होगी। नए रूट के तहत बसें अब शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से नहीं गुजरेंगी, जिससे मोतीनगर और आसपास के इलाकों में लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। क्या हुआ बदलाव? नई व्यवस्था के अनुसार, भोपाल और इंदौर जाने वाली बसें अब राहतगढ़ बस स्टैंड नहीं जाएंगी। ये बसें पुराने मुख्य बस स्टैंड से रवाना होकर मोतीनगर चौराहे पहुंचेंगी और वहां से सीधे लेहदरा नाका स्थित नए बस स्टैंड होते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ेंगी। जाम से मिलेगी राहत: वर्तमान में ये बसें रेलवे पुल के नीचे और राहतगढ़ बस स्टैंड तक जाकर वापस मुड़ती थीं, जिससे मोतीनगर थाना, बड़ी माता मंदिर और विजय टाकीज क्षेत्र में भारी जाम की स्थिति बनती थी। नए रूट से शहर के अंदरूनी इलाकों में यातायात का दबाव कम होगा और बसों का अनावश्यक घुमाव खत्म होने से यात्रा के समय में भी बचत होगी। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और जनसुविधा: उल्लेखनीय है कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर के बाहर लेहदरा नाका और मेनपानी में करीब 20 करोड़ की लागत से नए बस स्टैंड बनाए गए थे। यात्रियों और बस ऑपरेटर्स की असुविधा को देखते हुए प्रशासन ने शहर के भीतर ट्रैफिक सुधार और नए बस स्टैंडों के उपयोग के बीच यह संतुलित रास्ता निकाला है।

खोंगापानी बस स्टॉप पर सभी बसों का ठहराव अनिवार्य, सांसद ज्योत्सना महंत की पहल से मिली बड़ी राहत

खोंगापानी बस स्टॉप पर सभी बसों का ठहराव अनिवार्य, सांसद ज्योत्सना महंत की पहल से मिली बड़ी राहत मो. कासिम जिला प्रतिनिधि एमसीबी मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही जनसमस्या का समाधान आखिरकार हो गया है। कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत के हस्तक्षेप के बाद खोंगापानी बस स्टॉप पर अब सभी बसों का रुकना अनिवार्य कर दिया गया है। इस फैसले से क्षेत्र के हजारों यात्रियों, विशेषकर छात्रों, कर्मचारियों और दैनिक आवागमन करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है। हाल ही में आयोजित दिशा (जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति) की बैठक में सांसद महंत ने खोंगापानी नगर पंचायत क्षेत्र के बस स्टॉप पर बसों के नियमित ठहराव नहीं होने की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने इस मुद्दे को जनहित से जुड़ा बताते हुए अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट किया और यात्रियों को हो रही असुविधाओं पर गंभीर चिंता जताई। सांसद के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जिला परिवहन अधिकारी कोरिया द्वारा आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार खोंगापानी के निर्धारित बस स्टॉप पर सभी स्टेज कैरिज बसों का रुकना अब अनिवार्य होगा। साथ ही यात्रियों के सुरक्षित चढ़ने-उतरने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई बस ऑपरेटर या परमिट धारक इस आदेश की अवहेलना करता है, तो उसके खिलाफ मोटरयान अधिनियम 1988 के तहत सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इससे परिवहन व्यवस्था में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित होने की उम्मीद है। इस महत्वपूर्ण निर्णय से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अब उन्हें सुरक्षित, नियमित और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा। वर्षों से चली आ रही इस समस्या के समाधान को लोग बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने इसे जनहित में अहम कदम बताया, वहीं जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने इसे जनता की आवाज़ की जीत बताया। खोंगापानी नगर पंचायत अध्यक्ष ललिता रामा यादव ने कहा कि इस फैसले से रोजमर्रा की परेशानी समाप्त होगी। एनएसयूआई जिला अध्यक्ष कासिम अंसारी ने इसे छात्रों और युवाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी बताया। कुल मिलाकर, यह निर्णय न केवल आम नागरिकों को राहत देने वाला है, बल्कि क्षेत्र की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित होगा।

इंदौर में डेढ़ महीने में 150 E बसे, रफ्तार का नया दौर शुरू होगा

इंदौर  एमपी में बस यात्रियों को जल्द ही बड़ी सुविधा उपलब्ध होगी। इंदौर में नई ई बसों का संचालन डेढ़ महीने में शुरू हो जाएगा। प्रधानमंत्री ई सेवा योजना के तहत शहर को 150 ई-बसें मिलना है। इसमें से 40 बसें इंदौर आ भी चुकी हैं। खास बात यह है कि नई ई बसें आसपास के जिलों में भी जाएंगी। इन बसों का इंदौर के चारों ओर के बड़े शहरों के लिए रूट तैयार किया गया है। इस प्रकार प्रदेश के करीब एक दर्जन जिलों के बस यात्रियों की सुविधा बढ़ जाएगी। लोक परिवहन व्यवस्था चलाने वाली कंपनी एआइसीटीएसएल ई बस के संचालन के लिए दो डिपो तैयार कर रहा है, जिसे पूरा होने में समय लगेगा। इन बसों के टिकट कलेक्शन के लिए नई एजेंसी नियुक्त की जा रही है। अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (एआईसीटीएसएल) की बोर्ड बैठक में इंदौर संभाग के परिवहन ढांचे का कायाकल्प करने वाले कई दूरगामी निर्णय लिए गए। बोर्ड के अध्यक्ष और मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपीवायपीआईएल) के एमडी मनीष सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तय किया गया कि एआईसीटीएसएल का कार्यक्षेत्र अब केवल इंदौर शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह संभाग के सभी जिलों में बस सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण की मुख्य धुरी बनेगी। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के अंतर्गत इंदौर को प्रथम चरण में 150 इलेक्ट्रिक बसें प्राप्त होने जा रही हैं। इन बसों के वैज्ञानिक रख-रखाव और सुचारू संचालन के लिए अन्तरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) नायता मुंडला एवं देवास नाका पर दो हाईटेक इलेक्ट्रिक बस डिपो के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। बैठक में जानकारी दी गई कि द्वितीय चरण के लिए भी एक अतिरिक्त स्थल चिन्हित किया गया है। इसके साथ ही, इंदौर से उज्जैन, भोपाल, खरगोन, खंडवा और मांडव जैसे प्रमुख पर्यटन व व्यावसायिक केंद्रों के लिए 26 लग्जरी इंटरसिटी ई-बसें भी शीघ्र सड़क पर उतरेंगी। यात्रियों की सुविधा के लिए लास्ट माइल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करते हुए शहर में 500 इलेक्ट्रिक साइकिलों के संचालन हेतु निविदा प्रक्रिया को स्वीकृति दी गई है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए 64 नए ईवी चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित किए जाएंगे। यात्रियों के अनुभव को सुखद बनाने के लिए सरवटे बस स्टैंड, एआईसीटीएसएल परिसर और नायता मुंडला में स्मार्ट टॉयलेट की सुविधा भी जल्द शुरू होगी। :: सीएनजी स्टेशन से सुदृढ़ होगी आर्थिक स्थिति :: संस्था को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिटी बस डिपो में सीएनजी ईंधन सुविधा उपलब्ध कराने हेतु अवंतिका गैस लिमिटेड के साथ अनुबंध को मंजूरी दी गई। इससे कंपनी को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और संभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हुए। एमडी मनीष सिंह ने निर्देश दिए कि सभी विकास परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण कर आमजन को त्वरित राहत पहुँचाई जाए। मौजूदा सिस्टम में जितनी बसें अनुबंधित हैं उनके टिकट कलेक्शन का काम ऑपरटेर की टीम ही करती है और कंपनी की टीम निगरानी करती है एआइसीटीएसएल के मौजूदा सिस्टम में जितनी बसें अनुबंधित हैं उनके टिकट कलेक्शन का काम ऑपरटेर की टीम ही करती है और कंपनी की टीम निगरानी करती है। नई बसों के लिए नई एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया भोपाल से चल रही है। भोपाल से ही ऑपरेटर नियुक्त हुए हैं। कंंपनी के कार्यकारी निदेशक अर्थ जैन के मुताबिक, ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन की एजेंसी को 1 महीने में तय करेंगे। एजेंसी तय होने के बाद ही शुभारंभ होगा। बसों का संचालन दूसरे शहरों के लिए भी होगा प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के लिए मिल रही बसों के संचालन के लिए 32 रूट तय किए हैं। इंदौर से उज्जैन, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, सेंधवा, भोपाल, धार, मांडव, महेश्वर के बीच भी चलाया जाएगा अधिकारियों के मुताबिक, नई ई-बसों का संचालन इंदौर के साथ दूसरे शहरों के लिए भी किया जाएगा। सर्वे के बाद रूट तय किए गए हैं। जिस रूट पर बसों की कमी है, लोगों को लोक परिवहन की जरूरत है वहां बसें चलेंगी। हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इन बसों को इंदौर से उज्जैन, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, सेंधवा, भोपाल, धार, मांडव, महेश्वर के बीच भी चलाया जाएगा।

अब गांव से शहर तक आसान हुआ सफर, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना बनी ग्रामीणों के लिए वरदान

नक्सलवाद के खात्मे के बाद बदली तस्वीर, अब गांव से शहर तक आसान हुआ सफर अब गांव से शहर तक आसान हुआ सफर, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना बनी ग्रामीणों के लिए वरदान नक्सलवाद के खात्मे के बाद बदली तस्वीर, अब गांव से शहर तक पहुँचना हुआ आसान रायपुर कभी नक्सल प्रभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जिन गांवों के लोग अपने ही क्षेत्र में सीमित रहने को विवश थे, आज वही ग्रामीण निर्भय होकर शहरों तक आवागमन कर रहे हैं। माओवाद के खात्में और सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने के साथ-साथ शासन की जनहितकारी योजनाओं ने सुकमा जिले के दूरस्थ अंचलों में विकास की नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है। इसी परिवर्तन का सशक्त उदाहरण मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के रूप में सामने आया है, जिसने वनांचल और अंदरूनी क्षेत्रों के जनजीवन को नई गति प्रदान की है। सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के दूरस्थ ग्राम लखापाल, केरलापेंदा और नागाराम सहित आसपास के गांवों के लिए अब दोरनापाल तक पहुंचना सहज और सुरक्षित हो गया है। पूर्व में ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए 8 से 10 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था। ग्राम लखापाल के निवासी श्री कूड़ाम जोगा बताते हैं कि बस सेवा प्रारंभ होने से पहले चिंतलनार तक पैदल जाना उनकी मजबूरी थी। कई बार बस छूट जाने के कारण पूरा दिन व्यर्थ चला जाता था और आवश्यक कार्य अधूरे रह जाते थे। अब दोरनापाल-नागाराम मार्ग पर नियमित बस सेवा प्रारंभ होने से यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के अंतर्गत संचालित बस सेवा अब पोलमपल्ली, कांकेरलंका, चिंतागुफा, चिंतलनार, लखापाल, केरलापेंदा और नागाराम जैसे गांवों के समीप से गुजर रही है। इससे ग्रामीण अब आसानी से बस के माध्यम से दोरनापाल पहुंचकर अपने दैनिक कार्य समय पर पूर्ण कर रहे हैं और उसी दिन सुरक्षित वापस भी लौट पा रहे हैं। यह सुविधा विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों, विद्यार्थियों एवं श्रमिकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। जहां पहले नक्सलियों के भय के कारण ग्रामीणों का बाहर निकलना भी कठिन था, वहीं अब सुरक्षा वातावरण में सुधार के चलते वे निर्भय होकर रोजगार, व्यापार, शिक्षा और उपचार के लिए शहरों की ओर अग्रसर हो रहे हैं। बस सुविधा ने न केवल आवागमन को सुगम बनाया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान की है। इरकमपल्ली निवासी श्री मोहनरंजन ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है। इससे न केवल कनेक्टिविटी बढ़ी है, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिला है। कलेक्टर श्री अमित कुमार के अनुसार, पूर्व में नक्सल प्रभावित एवं दूरस्थ क्षेत्रों में वर्तमान में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 10 बसों का संचालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 5 ‘हक्कुम मेल’ बसें भी नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। बस संचालन को प्रोत्साहित करने हेतु शासन द्वारा सब्सिडी प्रदान की जा रही है तथा तीन वर्षों के लिए रोड टैक्स में छूट भी दी गई है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना अब केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि सुकमा जिले के ग्रामीण अंचलों में विश्वास, सुरक्षा और विकास का प्रतीक बन चुकी है। नक्सलवाद के अंधकार से निकलकर यह क्षेत्र अब प्रगति और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर अग्रसर है, जहां हर सफर अब नई संभावनाओं की ओर ले जा रहा है।

विकसित भारत की कल्पना साकार हो रही है, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से सफर हुआ आसान

विकसित भारत की कल्पना हो रही है साकार, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से राह हुई आसान रायपुर गाँव में कभी बस की पहुँच नहीं थी, आज वहाँ बस के आते ही बच्चों के चेहरे खिल उठते हैं। सड़क पर बस दिखते ही बच्चे हाथ हिलाकर खुशी जाहिर करते हैं और हॉर्न की आवाज़ सुनते ही लोग घरों से बाहर निकल आते हैं—एक नई उम्मीद के साथ। यह उम्मीद अब शहर मुख्यालय, नगर मुख्यालय और विकासखंड मुख्यालय तक आसान पहुँच की है।             यात्री बस में बैठकर लोग उन दिनों को याद करते हैं, जब उन्हें पैदल या किसी निजी वाहन के सहारे दूसरे स्थानों तक जाना पड़ता था। अब हालात बदल चुके हैं। स्कूल के बच्चे समय पर स्कूल पहुँच रहे हैं, वहीं अधिकारी-कर्मचारी भी समय पर अपनी ड्यूटी पर पहुँच पा रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ़ सुविधा का नहीं, बल्कि उन ग्रामीण परिवारों के सपनों का है जो विकसित भारत की कल्पना को अपने जीवन में साकार होते देख रहे हैं।             यह परिवर्तन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से संभव हो पाया है। इस योजना के तहत आज बसें उन गाँवों तक पहुँच रही हैं, जहाँ पहले कभी बस नहीं पहुँची थी। पहाड़ी अंचल की महिलाओं को मिली राहत            जशपुर जिला के बगीचा विकासखंड के सन्ना निवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुनीता निकुंज बताती हैं कि पहले उन्हें पास के गाँव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुँचने के लिए किसी से लिफ्ट लेनी पड़ती थी, निजी वाहन या पैदल जाना पड़ता था। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यह बहुत कठिन था। अब ग्रामीण बस से उनकी यह समस्या दूर हो गई है। वे कहती हैं, “यह बस मेरे लिए बहुत बढ़िया साधन बन गई है।” ग्रामीणों के चेहरे पर लौटी मुस्कान          बस में सफर कर रहे ग्राम मरंगी निवासी श्री दशरथ भगत हँसते हुए बताते हैं कि पहले इस सड़क पर बस नहीं चलती थी, इसलिए पैदल ही आना-जाना करना पड़ता था। बस का नाम लेते ही उसका चेहरा खिल गया l उन्होंने बताया कि “अब मुख्यमंत्री जी की पहल से बस शुरू हो गई है। हम आसानी से बगीचा जाते हैं और समय पर वापस भी लौट आते हैं।”        यात्री श्री मंगलराम बताते हैं कि पहले वे छिछली और चंपा जैसे बाजारों तक पैदल जाया करते थे। “अब बस आने से बहुत सुविधा हो गई है। हम सब बहुत खुश हैं।”            मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से न केवल यात्रा सुगम हुई है, बल्कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों के लिए शहर तक पहुँचने में भी बड़ी सुविधा मिली है। यह योजना ग्रामीण जीवन को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रही है और जशपुर जैसे पहाड़ी व दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की नई राह खोल रही है।

MP के इस शहर में 100 ई-बसों की शुरुआत, यात्रियों के लिए नई सुविधाएं और 10 रूट तय

ग्वालियर ग्वालियर शहर में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में बड़ी तैयारी चल रही है। केंद्र सरकार की पीएम-ई बस सेवा के तहत ग्वालियर को मिलने वाली 100 इलेक्ट्रिक बसें डिपो का काम पूरा होते ही सड़कों पर दौड़ेंगी। इन बसों को इंटेलिजेंट ट्रांजिट मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएमएस) और पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (पीआईएस) से लैस किया जाएगा, जिससे उनकी हर गतिविधि स्मार्ट सिटी के कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से लाइव मॉनिटर की जा सकेगी। निगम के अधिकारियों ने धार के पीथमपुर में तैयार हो रही बसों का निरीक्षण भी कर लिया है। हालांकि जलालपुर आइएसबीटी और रमौआ डिपो पर सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्य देरी से शुरू होने के कारण परियोजना में कुछ विलंब हो सकता है। ऐसे में अब ई-बसों के मई-जून 2026 तक शहर में शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। बसों का संचालन अब नगर निगम की जगह राज्य सरकार की होल्डिंग कंपनी के माध्यम से किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। केंद्र सरकार करेगी सिस्टम का टेंडर बसों में लगाए जाने वाले आइटीएमएस और पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम के लिए टेंडर और कंपनी का चयन केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा। बसों में स्पीकर सिस्टम भी होगा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में कंट्रोल रूम से ड्राइवर और कंडक्टर को सीधे निर्देश दिए जा सकेंगे। ऐसे चलेगी ई-बस सेवा पीएम-ई बस सेवा के तहत शहर में कुल 100 बसें चलाई जाएंगी। पहले चरण में 60 बसें और दूसरे चरण में 40 बसें आएंगी। सभी बसें 9 मीटर लंबी मिडी इलेक्ट्रिक बसें होंगी। इनका संचालन जलालपुर आइएसबीटी और रमौआ डिपो से होगा और यहीं बनाए जा रहे चार्जिंग स्टेशन से बसों को चार्ज किया जाएगा। 10 रूट किए गए फाइनल शहर में बस संचालन के लिए 10 रूट तय किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने इन रूटों का निरीक्षण कर नागरिकों से सुझाव भी लिए हैं। बसें आते ही इन्हीं रूटों पर संचालन शुरू किया जाएगा। 15.50 करोड़ से बन रहे डिपो और चार्जिंग स्टेशन ई-बस सेवा के संचालन और रखरखाव के लिए रमौआ और आइएसबीटी डिपो पर करीब 15.50 करोड़ रुपए से सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्य कराए जा रहे हैं। इसमें रमौआ डिपो पर सिविल व आंतरिक इलेक्ट्रिकल कार्य 4.29 करोड़, चार्जिंग के लिए एचटी कनेक्शन 7.31 करोड़, आइएसबीटी में सिविल व आंतरिक इलेक्ट्रिकल कार्य 1.16 करोड़ और बाहरी इलेक्ट्रिकल कनेक्शन के लिए 2.73 करोड़ रुपए शामिल हैं। 58.14 रुपए प्रति किलोमीटर का भुगतान बस संचालन के लिए एजेंसी को नगर निगम 58.14 रुपए प्रति किलोमीटर का भुगतान करेगा। इसमें केंद्र सरकार 22 रुपए प्रति किलोमीटर देगी, जबकि शेष 36.14 रुपए नगर निगम को वहन करना होगा। निगम को उम्मीद है कि बसों से होने वाले कलेक्शन से इस खर्च की भरपाई हो जाएगी। बसों में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं पीएम-ई बसें पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल होंगी। इनमें सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन, डिजिटल डिस्प्ले और पैसेंजर सूचना प्रणाली जैसी सुविधाएं होंगी। बस जिस स्थान से गुजरेगी, उस क्षेत्र की जानकारी डिस्प्ले स्क्रीन पर दिखाई देगी। ये बसें एक बार चार्ज होने पर लगभग 180 किलोमीटर तक चल सकेंगी। नोडल अधिकारी मुनीष सिकरवार के अनुसार पीथमपुर में बसों का निरीक्षण किया जा चुका है और बसें तैयार हैं। रमौआ और आइएसबीटी में चार्जिंग स्टेशन का कार्य पूरा होते ही संभावित रूप से मई-जून तक बसें ग्वालियर में आ सकती हैं। पहले चरण में 60 बसें आएंगी।  

यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सर्वोपरि, उत्कृष्ट कर्मचारियों को 3600 से 4500 रुपये तक प्रोत्साहन राशि

योगी सरकार का इंतजाम, होली पर 28 फरवरी से नौ मार्च तक चलेंगी अतिरिक्त बसें यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सर्वोपरि, उत्कृष्ट कर्मचारियों को 3600 से 4500 रुपये तक प्रोत्साहन राशि दिल्ली एवं गाजियाबाद सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसों और कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या पहले से सुनिश्चित की जाएगी लखनऊ योगी सरकार ने होली पर्व पर यात्रियों की सुगम और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की है। इसके तहत 28 फरवरी से नौ मार्च तक अतिरिक्त बसों का संचालन किया जाएगा । इसके साथ ही, उत्कृष्ट कर्मचारियों को 3600 से 4500 रुपये तक प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। अनुबंधित बसों के कर्मियों को नहीं मिलेगा अवकाश प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने कहा कि दिल्ली एवं गाजियाबाद सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश से यात्रा का दबाव अधिक रहता है। इसलिए इन क्षेत्रों में बसों और कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या पहले से सुनिश्चित की जाएगी। यदि प्रारंभिक प्वाइंट से 60 प्रतिशत यात्री लोड मिलता है तो प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी अतिरिक्त बसें चलाई जाएंगी। उन्होंने निर्देश दिए कि शत-प्रतिशत निगम बसों को ऑनरोड रखा जाए और अनुबंधित बसों के कर्मियों को पर्व अवधि में अवकाश न दिया जाए। वाहन स्वामी समय से मरम्मत कार्य पूर्ण कर बसें संचालन हेतु उपलब्ध कराएं। सुरक्षा और गुणवत्ता पर विशेष जोर योगी सरकार ने यात्रा के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। जाम या दुर्घटना की स्थिति को काबू कर संचालन सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रवर्तन दल लगातार ड्यूटी पर रहेंगे तथा चालकों और परिचालकों का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट किया जाएगा। बसों की तकनीकी स्थिति दुरुस्त रहे, सीटें ठीक हों, खिड़कियों के शीशे सही हों और फायर सेफ्टी उपकरण उपलब्ध हों, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। बस स्टेशनों और बसों में स्वच्छता व्यवस्था भी सुदृढ़ रखने को कहा गया है। कर्मचारियों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना पर्व अवधि में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चालक-परिचालकों (संविदा एवं आउटसोर्सिंग सहित) को विशेष प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। प्रतिदिन औसतन 300 किमी संचालन करने पर 360 रुपये प्रतिदिन की दर से 3600 रुपये मिलेंगे । 10 दिन की पूर्ण ड्यूटी और निर्धारित मानक पूरा करने पर 450 रुपये प्रतिदिन की दर से 4500 रुपये और निर्धारित मानक से अधिक किलोमीटर पर प्रति किमी 55 पैसे अतिरिक्त मानदेय प्रदान किया जाएगा। डिपो एवं क्षेत्रीय कार्यशालाओं में कार्यरत कर्मचारियों को भी 10 दिन लगातार ड्यूटी पर 2100 रुपये तथा नौ दिन की ड्यूटी पर 1800 रुपये एकमुश्त दिए जाएंगे। उत्कृष्ट प्रदर्शन पर अतिरिक्त सम्मान प्रोत्साहन अवधि में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों एवं अधिकारियों को क्षेत्रीय समिति की संस्तुति पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सर्वाधिक आय प्रति बस प्राप्त करने वाले तीन क्षेत्रों के क्षेत्रीय प्रबंधकों एवं सेवा प्रबंधकों तथा 10 डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।

बिना परमिट दौड़ रही बसों पर लगेगा ब्रेक, 16 फरवरी से स्पेशल ड्राइव शुरू

इंदौर मध्य प्रदेश की सड़कों पर नियमों का उल्लंघन कर मनमाने तरीके से चल रही बसों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। बिना परमिट या निर्धारित रूट का पालन न करने वाले बस ऑपरेटरों पर परिवहन विभाग शिकंजा कसने जा रहा है। नए परिवहन आयुक्त उमेश जोगा के पदभार ग्रहण करने के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया है और 16 फरवरी से प्रदेशव्यापी विशेष जांच अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे प्रमुख शहरों में परमिट उल्लंघन की बढ़ती शिकायतों ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते विस्तृत डेटा विश्लेषण भी किया जा रहा है। इंदौर में भी विशेष अभियान चलाकर बसों की जांच की जाएगी। पिछले वर्ष भी परिवहन कार्यालय इंदौर ने बसों की लगातार जांच का अभियान चलाया था, जिसमें लगभग 400 बसों पर कार्रवाई की गई थी।   नियमों का उल्लंघन जारी हालांकि, पूरे साल चले अभियान के बावजूद नियमों का उल्लंघन जारी रहा है। अब एक बार फिर बड़े पैमाने पर जांच की जाएगी। इंदौर से विभिन्न रूटों पर प्रतिदिन लगभग एक हजार बसों का संचालन होता है। इन बसों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग विशेष अभियान शुरू करेगा। जांच के दौरान बसों में कमियां पाए जाने पर जब्ती के साथ ही जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। लगातार की जा रही कार्रवाई के कारण बस संचालक अपनी बसों की कमियों को दूर कर लेते हैं, जिससे हादसों पर अंकुश लगता है। इसी को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग जांच अभियान को पुनः शुरू करने जा रहा है। स्लीपर बसों पर भी कार्रवाई की गई है, जिसमें फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम, आपातकालीन द्वार और ड्राइवर केबिन में नियमों के विरुद्ध पार्टीशन को लेकर कार्रवाई की गई है।