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दिल्ली में 37 साल बाद फिर से शुरू होंगी डबल डेकर बसें, जानें यात्रा के रूट और किराया

  नई दिल्ली राजधानी दिल्ली की सड़कों पर एक बार फिर इतिहास अंगड़ाई लेने जा रहा है. करीब तीन दशक पहले दिल्ली की पहचान रही दो-मंजिला यानी डबल डेकर बसें एक बार फिर अपनी रफ्तार भरने के लिए तैयार हैं. 1989 के बाद ओझल हुई ये बसें अब बिल्कुल नए रंग-रूप और आधुनिक सुविधाओं के साथ वापसी कर रही हैं. दिल्ली सरकार ने पर्यटन को नई ऊंचाई देने के लिए इस प्रतिष्ठित बस सेवा को फिर से जीवित करने का फैसला किया है.  37 साल बाद पुरानी यादों के साथ नई शुरुआत दिल्ली के परिवहन इतिहास में डबल डेकर बसों का एक सुनहरा दौर रहा है. 1989 से पहले ये बसें दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के बेड़े का अहम हिस्सा हुआ करती थीं, लेकिन तकनीकी कारणों और पुराने बेड़े की वजह से इनका संचालन बंद कर दिया गया था. अब लगभग 37 साल बाद, ये प्रतिष्ठित बसें एक बार फिर दिल्ली की शान बढ़ाने आ रही हैं. इस नई शुरुआत के साथ पुरानी यादें तो ताजा होंगी ही, साथ ही दिल्ली दर्शन का अनुभव भी और रोमांचक हो जाएगा. फरवरी से शुरू होगी खास पर्यटन बस सेवा सैलानियों के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई यह बस सेवा फरवरी के तीसरे हफ्ते यानी करीब 20 फरवरी से सड़कों पर उतरने के लिए तैयार है. यह बस सेवा न केवल पुराने ऐतिहासिक स्मारकों को कवर करेगी, बल्कि भारत मंडपम, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और प्रधानमंत्री संग्रहालय जैसे नए टूरिस्ट स्पॉट्स को भी जोड़ेगी. इतना ही नहीं, जो लोग दिन की भीड़भाड़ से बचना चाहते हैं, उनके लिए शाम के समय भी स्पेशल टूर चलाने की योजना है ताकि लोग ढलती शाम में दिल्ली की खूबसूरती निहार सकें. इन बसों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पूरी तरह से इलेक्ट्रिक हैं. इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि यात्रियों को शोर-शराबे से मुक्त एक आरामदायक सफर भी मिलेगा. यही नहीं, बस के भीतर एक गाइड भी मौजूद रहेगा जो यात्रियों को लाल किला, कुतुब मीनार और जामा मस्जिद जैसी जगहों के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी देगा. बस में एक साथ 63 यात्री बैठकर सफर का आनंद ले सकेंगे. बच्चों के लिए किराए में विशेष छूट सफर के किराये को बेहद संतुलित रखा गया है ताकि हर कोई इस शाही सवारी का लुत्फ उठा सके. बड़ों के लिए इसका टिकट 500 रुपये तय किया गया है, इसके अलावा 6 से 12 साल तक के बच्चों के लिए 300 रुपये का किराया निर्धारित है. डबल डेकर बसों को प्रमुख पर्यटन स्थलों की आकर्षक तस्वीरों से सजाया गया है, जो इन्हें देखने में और भी भव्य बनाता है. यह सेवा उन पर्यटकों के लिए वरदान साबित होगी जो कम समय में दिल्ली के प्रमुख केंद्रों को सुविधा के साथ घूमना चाहते हैं.  

प्रदेश के 8 नगर निगमों में 972 पीएम ई-बस चलाने की हरी झंडी, शहरों में बढ़ेगा हरित परिवहन

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब पीएम ई-बस सेवा का संचालन नगरीय विकास विभाग की बजाय सुगम परिवहन सेवा के लिए गठित कंपनियां करेंगी। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए प्रदेश में एक राज्य स्तरीय कंपनी के साथ 7 सहायक कंपनियां गठित की गई हैं। केन्द्र से प्रदेश के आठ शहरों के मिली 972 ई-बसों का संचालन भी यही कंपनियां करेंगी। पहले यह काम नगरीय विकास विभाग द्वारा किया जा रहा था। लेकिन सरकार ने तय किया है कि प्रदेश में अंतरशहरी बस सेवा के साथ नगर वाहन सेवा का संचालन भी इन्हीं कंपनियों द्वारा किया जाएगा। 7 सहायक कंपनी बनाई गई प्रदेश में अगस्त 2025 में राज्य स्तरीय मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड कंपनी का पंजीयन हो गया है। मुख्यमंत्री इस राज्य स्तरीय कंपनी के अध्यक्ष हैं। परिवहन मंत्री एवं मुख्य सचिव उपाध्यक्ष हैं। राज्य स्तरीय कंपनी के अधीन 7 सहायक कंपनी बनाई गई हैं। वर्तमान में इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा और ग्वालियर में कार्य कर रही सिटी बस कंपनी के शेयर होल्डिंग में परिवर्तन करते हुए इन सातों शहरों की नवगठित कंपनियां बनाई गई हैं। कंपनियों ने ट्रैफिक सर्वे करते हुए नए सिरे से नए बस रूट निर्धारण और इन रूट्स पर बस फ्रिक्वेंसी के निर्धारण का काम शुरू कर दिया है। भोपाल में 195, इंदौर में चलेंगी 270 बसें केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के 8 नगर निगमों में 972 पीएम ई-बस चलाने की मंजूरी दी है। इसमें सबसे ज्यादा 270 ई-बसें इंदौर को मिली हैं, जबकि राजधानी भोपाल को केवल 195 बसें मिली हैं। जबलपुर में 200, ग्वालियर में 100, उज्जैन में 100, सागर में 32, देवास में 55 और सतना में 20 ई-बसें संचालित की जाएंगी।  इन शहरों में बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन से जुड़े अधोसंरचना के सभी काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में चार्जिंग पाइंट अधोसंरचना निर्माण के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत राशि दी जा रही है। गौरतलब है कि इस परियोजना के अंतर्गत ग्वालियर, इंदौर में कुछ बसें भेजी भी जा चुकी हैं। ई-बसों के संचालन यात्री सुविधाओं के साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।

होली पर बिहारवासी अब बिना ट्रेन के धक्के खाए पहुंचेंगे घर, लग्जरी बसें होंगी उपलब्ध!

पटना  होली के मौके पर बिहार से बाहर काम या पढ़ाई करने वाले लाखों प्रवासी बिहारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. ट्रेन में भारी भीड़ और कन्फर्म टिकट न मिलने की परेशानी से जूझ रहे लोगों को इस बार बिहार सरकार ने सीधा और सुरक्षित विकल्प दिया है. होली के त्योहारी सीजन में यात्रियों को घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी अब राज्य सरकार भी उठाएगी. दरअसल, बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) ने होली के अवसर पर अलग-अलग राज्यों से बिहार के लिए होली स्पेशल बसों के संचालन की तैयारी शुरू कर दी है. 15 फरवरी से 15 मार्च तक कुल लगभग 200 अंतरराज्यीय बसें चलाई जाएंगी. इन बसों के लिए टिकटों की बुकिंग ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन भी होगी. तीन कैटेगरी की बस बीएसआरटीसी की ओर से चलाई जाने वाली ये फेस्टिवल स्पेशल बसें एसी डीलक्स और नॉन-एसी डीलक्स श्रेणी की होंगी. हर बस में 50 से 60 सीटों की क्षमता होगी, ताकि यात्रियों को आरामदायक सफर मिल सके. यात्रियों को अतिरिक्त राहत देने के लिए राज्य सरकार इन बसों के किराये पर विशेष छूट भी देगी. टिकट बुकिंग की शुरुआत एक फरवरी से हो जाएगी. ये विशेष बसें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर चलाई जाएंगी. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड के प्रमुख रूटों पर इनका संचालन किया जाएगा. फिलहाल विभाग रूट निर्धारण और किराये को अंतिम रूप देने में जुटा है. इनमें से सबसे अधिक बसें दिल्ली के लिए होंगी. यहां से कर सकेंगे टिकट बुक यात्री बीएसआरटीसी की आधिकारिक वेबसाइट https://bsrtc.bihar.gov.in/ पर जाकर आसानी से टिकट बुक कर सकेंगे. भुगतान के लिए यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी. यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चिन्हित बस पड़ावों पर महिला और पुरुष यात्रियों के लिए स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था भी की जाएगी. पहले भी हुई थी पहल बीएसआरटीसी ने पिछले साल भी त्योहारी सीजन में इसी तरह की पहल की थी. 20 सितंबर से 19 नवंबर 2025 तक करीब 220 अंतरराज्यीय फेस्टिवल बसों का संचालन किया गया था. इससे लगभग 2.50 लाख यात्रियों को लाभ मिला. उस दौरान औसतन रोजाना 107 बसें एकतरफा चलीं, जिनमें 81 प्रतिशत सीटें भरी रहीं और आठ हजार से अधिक टिकट ऑनलाइन बुक हुए थे. होली के बाद बिहार से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के लिए सीधी सरकारी बस सेवा शुरू करने की भी तैयारी है. बिहार के अलग-अलग जिलों से कुल 150 नई अंतरराज्यीय बसों का परिचालन किया जाएगा. इसके लिए संबंधित राज्यों की सरकारों के साथ अंतरराज्यीय परिवहन समझौते की प्रक्रिया चल रही है. यह अगले महीने तक पूरी होने की उम्मीद है.

एमपी में 100 ई-बसें चलेंगी, केंद्रीय शहरी कार्य मंत्रालय का बड़ा फैसला, डीजल के बजाय पर्यावरण-friendly यात्रा

ग्वालियर केंद्रीय शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा ग्वालियर शहर में पीएम ई-बस योजना के तहत 100 बसें चलाई जाएंगी। प्रथम चरण में जल्द ही 60 ई बस (E-Buses) शहर में आने की उम्मीद है, लेकिन अफसर अब तक सुस्त रवैया अपनाए हुए है। योजना के तहत बस संचालन और कलेक्शन सिस्टम समझने के लिए अफसरों को नासिक, दिल्ली, भोपाल और इंदौर का निरीक्षण करना था, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी कोई दौरा नहीं किया। हालांकि कलेक्शन एजेंसी राज्य सरकार व केंद्र सरकार से तय होना है अथवा नगर निगम ग्वालियर से इसको लेकर अफसर कन्फ्यूज थे, ऐसे में अफसर भी निरीक्षण में रुचि नहीं दिखा रहे थे, लेकिन अब क्लियर हो गया है कि बसों के कलेक्शन के लिए एजेंसी राज्य सरकार के नगरीय प्रशासन द्वारा ही ग्वालियर सहित सभी नगर निगम में तय की जाएगी। इस तरफ वहन होगा खर्च बसों के संचालन से नगर निगम को उम्मीद है कि बस संचालन से 36.14 पैसे प्रति किलोमीटर कलेक्शन मिलेगा, जबकि 22 रुपए केंद्र सरकार की ओर से मिलेंगे। वहीं 58.14 पैसे प्रति किलोमीटर का भुगतान पीएम ई-बस संचालक को किया जाना है। लेकिन इंदौर भोपाल में अभी 22 व 23 रुपए प्रति किलोमीटर कलेक्शन ही मिल रहा है, ऐसे में निगम को बाकी के 14 से 15 रुपए खुद ही वहन करने होंगे और निगम में इसका अतिरिक्त खर्चा बढ़ेगा। डिपो का निर्माण शुरू पीएम ई बस संचालन के लिए रमौआ में डिपो निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। निगमायुक्त संघप्रिय ने बताया कि बसों के कलेक्शन के लिए एजेंसी अब राज्य सरकार द्वारा ही तय की जाएगी। पीएम ई बस सेवा को लेकर रमौआ पर डिपो निर्माण भी शुरू हो चुका है। शहरी कार्य मंत्रालय ने 100 बसों को दी मंजूरी केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय (Union Urban Affairs Ministry) ने प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में डीजल ईंधन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए प्रदेश के 8 नगर निगम में 972 पीएम ई बस सेवा को मंजूरी दी है। यह बसें शीघ्र संचालित हो इसके लिए नगरीय निकायों द्वारा बस डिपो और चार्जिंग से जुड़े सभी अधोसंरचना कार्य तेजी से करने के लिए गया है। इसमें ग्वालियर के लिए 100 ई-बसों को मंजूरी दी है। इसमें प्रथम चरण में 60 बसें नौ मीटर और दूसरे चरण में 40 बसें सात मीटर की आएंगी। बसों के लिए केन्द्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार द्वारा 40 प्रतिशत राशि प्रदान करेगी। बसें एक बार में चार्ज होने पर 180 किलोमीटर तक आ-जा सकती है। 

छत्तीसगढ़ में 24 नई बसों का आगाज, 180 गांवों को मिला सीधा परिवहन कनेक्शन

रायपुर  छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों में परिवहन सुविधा को मजबूत बनाने वाली मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने आज एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास से योजना के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया और वर्चुअली बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 10 जिलों की 23 रूटों पर 24 नई बसें, 180 गांव सीधे जुड़े दूसरे चरण के तहत बस्तर और सरगुजा संभाग के 10 जिलों में 23 मार्गों पर 24 नई बसें संचालित होने लगीं। इससे 180 गांव पहली बार सीधे बस सेवा से जुड़ गए हैं, जो क्षेत्र के ग्रामीण परिवहन नेटवर्क के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है। कार्यक्रम में कई ग्रामीण उसी बस में सवार होकर पहुंचे, जो योजना के प्रथम चरण में शुरू की गई थी। ग्रामीणों ने बताया कि अब ब्लॉक मुख्यालयों तक पहुंचना पहले की तुलना में बहुत आसान हो गया है। पहले मुश्किल था सफर, अब सड़क से संभव सुकमा–दोरनापाल–कोंटा मार्ग से आए ग्रामीणों ने बताया कि वे 110 किलोमीटर की यात्रा बस से कर कार्यक्रम तक पहुंचे। पहले यह सफर बेहद कठिन, असुविधाजनक और समय लेने वाला था। कोई गांव विकास से अछूता न रहे- मुख्यमंत्री साय  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी गांव विकास की मुख्यधारा से अलग न रहे     योजना से परिवहन सुविधा में वृद्धि हो रही ह     गांवों को शहरों, सेवाओं और अवसरों से जोड़कर सामाजिक–आर्थिक समानता को मजबूत किया जा रहा है उन्होंने 180 गांवों के लोगों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि अब उनकी यात्रा सुरक्षित, समयबद्ध और सुविधाजनक होगी, जिससे विकास के नए रास्ते खुलेंगे। परिवहन मंत्री बोले- वनांचलों में बसें पहुंचाना ऐतिहासिक कदम परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जिन पहाड़ी, वनांचल और दूरस्थ गांवों तक कभी सार्वजनिक परिवहन नहीं पहुंचा था, वहाँ भी अब बस सेवाएँ चालू हो गई हैं। यह योजना विशेष रूप से जनजातीय बहुल क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो रही है। पहले चरण में 250 गांव जुड़े थे मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का प्रथम चरण 4 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुरू किया था। तब 250 गांव बस सेवा से जुड़े थे। अब दूसरे चरण में 180 और गांव जुड़ने से यह संख्या और बढ़ गई है। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, परिवहन सचिव एस. प्रकाश समेत वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

MP की लोक परिवहन सेवा 7 चरणों में सड़कों पर लौटेगी, इंदौर में 50 किमी क्षेत्र में पहले चरण की बसें

भोपाल   प्रदेश में 20 साल से बंद सरकारी लोक परिवहन सेवा नए सिरे से 7 चरणों में सड़कों पर उतरेगी। पहले चरण में इंदौर और आसपास के 50 किमी क्षेत्र में अनुबंधित बसें चलेंगी। दूसरे चरण में इंदौर संभाग के सभी जिलों तक विस्तार होगा। भोपाल व उज्जैन शहर के 50 किमी के दायरे में आने वाले सभी शहर व अंतर शहरी रूट पर बसें दौडे़ंगी। 7वें चरण में ग्वालियर-चंबल संभाग के जिले कवर होंगे। परिवहन विभाग के सचिव व मप्र यात्री परिवहन और इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के एमडी मनीष सिंह ने संचालक मंडल की पहली बैठक में सीएम डॉ. मोहन यादव(CM Mohan Yadav) के सामने पूरी कार्ययोजना पेश की। परिवहन सचिव ने सीएम को बताई योजना     इंदौर शहर से 50 किमी के दायरे में आने वाले सभी शहरी व अंतर शहरी रूट पर बसें चलेंगी।     इंदौर संभाग के सभी जिलों तक विस्तार। उज्जैन व भोपाल शहर से 50 किमी दायरे में आने वाले शहरी व अंतर शहरी रूट पर बसें दौड़ेंगी।     उज्जैन संभाग के सभी जिले कवर होंगे।     सागर व जबलपुर संभाग के जिलों में शुरुआत, रूट चिह्नित।     भोपाल-नर्मदापुरम संभाग के सभी जिलों में लोक परिवहन सेवा जमीन पर उतरेगी।     रीवा व शहडोल संभाग के जिले कवर होंगे।     ग्वालियर व चंबल संभाग के सभी जिलों तक सेवा का विस्तार। देश में पहली बार परिवहन सचिव मनीष सिंह ने सीएम को बताया कि लोक परिवहन सेवा के लिए इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम बना रहे हैं। यह देश का पहला सिस्टम होगा, जिसमें बस लोकेशन ट्रैकिंग, ऑटोमेटिक किराया संकलन, अलर्ट, शिकायत निवारण जैसे 18 मॉड्यूल होंगे। मुख्यमंत्री: फायदे वाले रूट पर ही दौड़कर न रह जाएं बसें मुख्यमंत्री ने पूरी कार्ययोजना देखी और परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन समेत अन्य अफसरों से राय ली। बोले-यह सरकार का सबसे बड़ा महत्वाकांक्षी और जनकल्याण से जुड़ा काम है। ध्यान रहे, बसें सिर्फ फायदे वाले रूटों तक ही न चलाएं। लोगों की जरूरत वाले रूट भी चिह्नित कर बसें दौड़ाएं। सीएम के ये सुझाव 15 साल या उससे पुरानी बसें नहीं चलाई जाएं। राज्यों के मॉडलों का एक बार और अध्ययन कराएं। जो अच्छा हो, उसे भी कार्ययोजना में शामिल करें। मप्र यात्री परिवहन व इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी का लोगो प्रतियोगिता के आधार पर तय करें। ऐसे तय होगा किराया यात्री किराए का निर्धारण थोक मूल्य सूचकांक, श्रम दर, ईंधन दर, पूंजीगत लागत और वर्तमान किराये के आधार पर किया जाएगा। इसके अलावा अन्य मापदंड भी देखे जाएंगे।

ई-बस सेवा: नए बस स्टॉप शहीदों के नाम पर, मध्यप्रदेश में तेजी से शुरू होगा इलेक्ट्रिक बस संचालन

भोपाल  राजधानी भोपाल में प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत 195 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की दिशा में तेजी से काम शुरू हो गया है। इसके लिए कस्तूरबा नगर और संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) में अत्याधुनिक बस डिपो का निर्माण अंतिम चरण में है। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) को पहले चरण में 100 बसें मिली हैं, जबकि आरएसवीपी योजना के तहत 95 अतिरिक्त बसों की भी स्वीकृति मिल चुकी है। इस तरह शहर के बेड़े में जल्द ही कुल 195 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी। महापौर मालती राय ने दिए निर्देश महापौर ने डिपो स्थलों का निरीक्षण किया और कार्यों को शीघ्रता से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने डिपो पर सोलर पैनल लगाने और सभी बस स्टॉप पर उच्च स्तरीय साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। दोनों डिपो में बसों की पार्किंग, चार्जिंग और संधारण की व्यवस्थाएं की जा रही हैं। 50-50 बसों के लिए दोनों स्थलों पर डिपो बन रहे हैं। लोककला से सजेंगे बस स्टॉप ● डिपो स्थल: कस्तूरबा नगर (आइएसबीटी) और संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़)। ● मॉडल: जीसीसी (ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट) मॉडल पर संचालन। ● नामकरण: नए बस स्टॉप शहीदों के नाम पर होंगे। ● आर्ट वर्क: बस स्पॉट में स्वच्छता, सौंदर्यीकरण के साथ लोककला भी दिखेगी।

सुरक्षा के लिए बड़ा कदम: छत्तीसगढ़ में सभी स्लीपर और एसी बसों का निरीक्षण

रायपुर  राजस्थान और आंध्र प्रदेश में बसों में आग लगने की हाल में हुई घटना के बाद छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग भी सतर्क हो गया है। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। अब प्रदेश में संचालित सभी स्लीपर और एसी बसों की सुरक्षा जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य में प्रतिदिन हजारों बसें विभिन्न मार्गों पर संचालित होती हैं, जिनसे लाखों यात्री यात्रा करते हैं। हाल के हादसों को देखते हुए विभाग ने बस ऑपरेटरों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब हर बस में फायर सेफ्टी उपकरण, आपातकालीन निकास व्यवस्था और इलेक्ट्रिकल वायरिंग सिस्टम की नियमित जांच होगी। 600 से अधिक बसों को रोज संचालन राज्य से प्रतिदिन 600 से अधिक स्लीपर बसें पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश, ओड़िशा, झारखंड, बिहार, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश सहित अन्य राज्यों के लिए रोज संचालित हो रही हैं। 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपए तक की लागत वाली इन लक्जरी बसों में सेफ्टी डिवाइस लगे होने के दावे किए जाते हैं। रेल टिकट न मिलने के कारण यात्री 400 से 1200 किलोमीटर की यात्रा भी स्लीपर बसों से करने लगे हैं, लेकिन बढ़ते हादसों से लोगों में चिंता बढ़ गई है। तकनीकी खामियों को लेकर बस संचालकों को किया सर्तक परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रियर इंजन बसों में आग लगने का खतरा ज्यादा होता है, हालांकि ऐसी बसें राज्य में सीमित संख्या में हैं। ज्यादातर बसें फ्रंट इंजन वाली हैं। विभाग ने बस मालिकों व ड्राइवरों को स्पार्किंग जैसी तकनीकी खामियों को लेकर सतर्क रहने और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए हैं। जांच पूरी कर रिपोर्ट जल्द विभाग को सौंपी जाएगी। सख्त सुरक्षा जांच के निर्देश  

परीक्षण सफल तो जबलपुर में जल्द शुरू होगी सरकारी बस सेवा, होगा बड़ा विस्तार

भोपाल प्रदेश में लोक परिवहन सेवा अगले वर्ष मार्च-अप्रैल तक सबसे पहले इंदौर, इसके बाद उज्जैन और फिर जबलपुर से प्रारंभ होगी। छह माह के भीतर रीवा, सागर ग्वालियर, भोपाल आदि शहरों से सेवा प्रारंभ करने की तैयारी है। शुरू में 50 से 100 किमी दूर तक के लिए बसें चलाई जाएंगी। इसके बाद सुविधा का परीक्षण कर इसमें विस्तार किया जाएगा। कुछ जगह रूट सर्वे का काम पूरा हो गया है और कई जगह चल रहा है। नगरीय निकायों के नियंत्रण में पहले से चल रही बसों को भी संभागीय स्तर पर क्षेत्रीय सहायक कंपनियां बनाकर उसके नियंत्रण में लाया जाएगा। भोपाल शहर में भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) बसों का संचालन कर रही है। इसी तरह से इंदौर व अन्य शहरों में बसें निजी ऑपरेटरों की हैं, पर नियंत्रण स्थानीय प्रशासन का होता है। लोक परिवहन सेवा के प्रबंधन के लिए राज्य स्तर पर एक होल्डिंग कंपनी बनाई जा रही है। इसके नीचे सात संभागीय मुख्यालयों के स्तर पर सहायक कंपनियां बनाई जाएंगी। उज्जैन में रूट सर्व का काम पूरा बस संचालन के लिए उज्जैन में रूट सर्वे का काम लगभग पूरा हो गया है। इंदौर और जबलपुर में श्रेणीवार संचालित बसों की संख्या का अनुमान और रूट सर्वे भी लगभग अंतिम चरण में है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभी निजी बस ऑपरेटरों से अनुबंध कर बसें चलाई जाएंगी। आगे चलकर इलेक्ट्रिक बसें चलाने की प्राथमिकता रहेगी। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने भी इसके निर्देश दिए हैं। सीएम ने इसी महीने की मीटिंग बता दें कि मुख्यमंत्री ने इसी माह लोक परिवहन सेवा की तैयारियों को लेकर बैठक की थी। उन्होंने मार्च के पहले बसें चलाने के लिए कहा है, पर समय सीमा एक-दो माह और आगे जा सकती है। इसमें निगरानी, प्रबंधन और यात्रियों की सुविधा के लिए आईटी प्लेटफॉर्म का अधिकाधिक उपयोग किया जाएगा। बड़े शहरों के बाद सरकार की प्राथमिकता उन स्थानों के बीच बसें चलाने की हैं, जहां यात्रियों की संख्या ज्यादा है।

चलती बस में आग से मचा हड़कंप, जयपुर में हादसे के वक्त यात्रियों ने दिखाई सूझबूझ

जयपुर  जयपुर में आज बड़ा हादसा हो गया. यहां सड़क पर दौड़ती रोडवेज बस में अचानक आग लग गई. उस समय बस में करीब 30 लोग सवार थे. आग लगते ही बस में हड़कंप मच गया. यात्रियों ने बस से कूदकर अपनी जान बचाई. हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और फायर बिग्रेड को बुलाया. लेकिन फायर ब्रिगेड की टीम के पहुंचने से पहले ही आधी बस जलकर राख हो चुकी थी. गनीमत रही कि आग के कारण कोई जनहानि नहीं हुई. बस में सवार यात्रियों का सामान जलकर खाक हो गया. जानकारी के अनुसार रोडवेज बस में आग लगने की यह घटना चैनपुरा इलाके की रेलवे क्रॉसिंग पर हुई. रोडवेज की यह बस जयपुर से निवाई जा रही थी. बस यात्रियों से पूरी भरी हुई थी. उसमें करीब 30 यात्री सवार थे. रेलवे फाटक के पास अचानक बस से धुंआ उठा और फिर आग की लपटें निकलने लग गई. यह देखकर चालक ने तत्काल बस को रोक दिया. लेकिन तब तक आग बस के आगे के हिस्से को अपनी चपेट में ले चुकी थी. यात्रियों ने आनन-फानन में खिड़कियों से कूदना शुरू कर दिया आग लगते ही बस में सवार यात्रियों में चीख पुकार मच गई. यात्रियों ने आनन-फानन में खिड़कियों से कूदना शुरू कर दिया. बस में आग लगी देखकर वहां स्थानीय लोगों में भी हड़कंप मच गया. उन्होंने अपने स्तर पर पानी और मिट्टी डालकर आग बुझाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाए. बाद में तत्काल पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई. इस पर पुलिस मौके पर पहुंची. आग लगने के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है हालांकि फायर ब्रिगेड भी तत्काल ही वहां पहुंच गई थी. लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थी कि फायर ब्रिग्रेड के आने से पहले ही आधी बस जलकर खाक हो चुकी थी. बाद में फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया. आग के कारण अधिकांश यात्रियों का सामान जल गया. आग किस वजह से लगी अभी तक इसका खुलासा नहीं हो पाया है. पुलिस और रोडवेज प्रशासन इसकी जांच में जुटा हुआ है. फिर प्रभावित यात्रियों को दूसरी बसों से रवाना किया गया.