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बिहान से बदली ममता की जिंदगी सब्जी की खेती से ममता बनी आत्मनिर्भर

रायपुर महिलाओं को अवसर और सहयोग मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी अपने परिश्रम से आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं और समाज में एक नई पहचान बना सकती हैं। सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत सिलफिली की निवासी ममता विश्वास आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। कभी सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों से जूझने वाली ममता ने अपनी मेहनत, लगन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान‘ से मिली सहायता के बल पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। ममता विश्वास एकता महिला स्वंय सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत और स्वावलंबन के महत्व को समझा तथा अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का संकल्प लिया। बिहान योजना के अंतर्गत बैंक लिंकेज के माध्यम से उन्हें 30,000 रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि का उपयोग करते हुए ममता ने अपने खेत में सब्जी की खेती शुरू की। आज ममता विश्वास सब्जी उत्पादन और बिक्री से प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख से 3 लाख 50 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि वे अपने बच्चों की शिक्षा और घर की जरूरतों को भी आसानी से पूरा कर पा रही हैं। ममता का कहना है कि ‘बिहान योजना और समूह से मिली सहायता ने उनके जीवन में नया आत्मविश्वास पैदा किया है। अगर महिलाएं समूह से जुड़कर मेहनत करें तो वे भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं।‘ आज ममता विश्वास की सफलता से प्रेरित होकर गांव की अन्य महिलाएं भी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर स्व-रोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।

सड़क सुरक्षा प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

रायपुर सड़क सुरक्षा प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर को सुगम एवं सुरक्षित बनाने के लिए आज 'सड़क सुरक्षा प्रबंधन' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला को संबोधित करते हुए एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी  प्रदीप कुमार लाल ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रोड इंजीनियरिंग में सुधार, नियमों का कड़ाई से पालन और जन-जागरूकता का समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करने पर जोर दिया।  कार्यशाला के तकनीकी सत्र में सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ  विक्रम तुशिर ने जंक्शन सुधार, ब्लैक-स्पॉट की पहचान, ट्रैफिक साइन, रोड मार्किंग और सेफ्टी ऑडिट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि केवल बेहतर इंजीनियरिंग और सही साइनेज  के माध्यम से ही सड़क दुर्घटनाओं को 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। ब्लैक-स्पॉट्स की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करना और वहां समयबद्ध सुधारात्मक उपाय लागू करना सबसे प्रभावी रणनीति है। उन्होंने बताया कि सड़क डिजाइन में छोटे-छोटे तकनीकी सुधार भी बड़े हादसों को रोकने में सक्षम हैं, जिससे राजमार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को नया आयाम दिया जा सकता है। कार्यशाला में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के ईई  रणबीर यादव विशेष रूप से उपस्थित थे। एनएचएआई की विभिन्न परियोजना कार्यान्वयन इकाईयों के परियोजना निदेशक सर्व डीडी पार्लावर (कोरबा), मुकेश कुमार (बिलासपुर), शमशेर सिंह (अभनपुर) और दिग्विजय सिंह (रायपुर) सहित अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी भी कार्यशाला में मौजूद थे।  

नारी शक्ति से औद्योगिक प्रगतिः पूनम जायसवाल ने 20 महिलाओं को दिया रोजगार, बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज उन महिला उद्यमियों की सफलता की कहानियां सामने आ रही हैं, जिन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है। अम्बिकापुर की  पूनम जायसवाल ऐसी ही एक प्रेरणापुंज हैं, जिन्होंने न केवल अपनी पारिवारिक स्थिति को सुदृढ़ किया, बल्कि आज 20 से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर ’नारी सशक्तिकरण’ के संकल्प को धरातल पर उतारा है। संघर्ष से सफलता तकः निजी संसाधनों से रखी नींव  पूनम जायसवाल ने बताया कि उनके उद्यमिता के सफर की शुरुआत वर्ष 2000 में एक छोटे से किराये के भवन और सीमित निजी संसाधनों से हुई थी। आर्थिक चुनौतियां बड़ी थीं, लेकिन हौसला कम नहीं हुआ। वर्ष 2013-14 में छत्तीसगढ़ शासन की नीतियों के फलस्वरूप उन्हें 99 वर्ष की लीज पर औद्योगिक भूमि प्राप्त हुई। बैंक से ऋण लेकर उन्होंने अपने कार्य को गति दी और आज उनका यह लघु उद्योग एक सफल इकाई के रूप में स्थापित हो चुका है। 20 से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार  पूनम का उद्देश्य केवल स्वयं का विकास नहीं, बल्कि समाज की जरूरतमंद महिलाओं को साथ लेकर चलना रहा है। उन्होंने बताया कि, मेरे उद्योग में आज 20-22 बहनें कार्य कर रही हैं, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण सुचारू रूप से कर पा रही हैं।“ अब उनका लक्ष्य अपने इस उद्यम को ’प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी के रूप में विकसित करना है, ताकि अधिक से अधिक महिला उद्यमियों को जोड़ा जा सके। अपनी सफलता का श्रेय छत्तीसगढ़ शासन और जिला उद्योग केंद्र को देते हुए  जायसवाल ने कहा कि शासन द्वारा प्रदान की गई भूमि और समय-समय पर मिले मार्गदर्शन ने उनके मार्ग को प्रशस्त किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की ’नई उद्योग नीति’ की सराहना करते हुए कहा कि लागत पूँजी पर मिलने वाले प्रोत्साहन और सब्सिडी के कारण महिलाओं के लिए उद्यमिता के द्वार खुले हैं। आधी आबादी की शक्ति से बढ़ेगा देश प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि, “देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या महिलाओं की है। जब महिलाएँ आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी बनेंगी, तभी देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री जी के ’विकसित भारत’ के विजन और छत्तीसगढ़ शासन के ’रोजगार प्रोत्साहन’ कार्यक्रमों को महिला सशक्तिकरण का मुख्य आधार बताया।  पूनम अन्य महिलाओं से अपील की कि वे शासन की योजनाओं, सब्सिडी और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक बनें और रोजगार के अवसरों का लाभ उठाकर स्वयं उद्यमी बनें।  

ग्राम समोदा में हटाया गया अवैध कब्जा

रायपुर ग्राम समोदा में हटाया गया अवैध कब्जा दुर्ग जिले के जनपद पंचायत दुर्ग के अतंर्गत ग्राम समोदा में जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की गई है। जेसीबी चला कर शासकीय भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराई गई है।    कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त तहसीलदारमती क्षमा यदु द्वारा राजस्व अमले और पुलिस विभाग के सहयोग से ग्राम समोदा राजस्व निरीक्षक मंडल जेवरा सिरसा तहसील व जिला दुर्ग के अतंर्गत शासकीय घास भूमि खसरा नम्बर 778 रकबा 0.13 हेक्टेयर भूमि पर किये गये अवैध पक्का दुकान निर्माण, टीन सेड लगाकर दुकान निर्माण को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। इसी प्रकार सीमेंट पोल लगाकर किया गया तार घेरा को हटाने की कार्रवाई कर अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। ग्राम के ही ब्रजेश ताम्रकार पिता गिरजाशंकर ताम्रकार द्वारा उक्त शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य किया गया था। अतिक्रमण हटाने के दौरान राजस्व निरीक्षक रेखा शुक्ला, पटवारी चन्द्रिका प्रसाद खरें, शत्रुहन मिश्रा, अनिता साहू, संदीप देशमुख और पुलिस विभाग के अधिकारी तथा पंचायत जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय ग्रामीणजन मौजूद थे। 

9556 श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के तहत 10 करोड़ 42 लाख रुपये से अधिक की सहायता

रायपुर श्रमिक सम्मेलन का हुआ आयोजन, विभिन्न योजनाओं के माध्यम से श्रमिक परिवारों को मिल रही आर्थिक सहायता -स्कूल शिक्षा मंत्री  यादव स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव के मुख्य आतिथ्य में श्रम विभाग द्वारा श्रमिक सम्मेलन का आयोजन आज महात्मा गांधी कला मंदिर सिविक सेंटर भिलाई में किया गया। सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत लाभान्वित श्रमिकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 9 हजार 556 श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 10 करोड़ 42 लाख 7 हजार 343 रूपए की राशि अंतरित की गई। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  यादव ने छ.ग. भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल अंतर्गत संचालित योजनाओं के हितग्राहियों को प्रतीकात्मक चेक प्रदान किए। इनमें मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना और मुख्यमंत्री सायकल सहायता योजना शामिल हैं। श्रमिक सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के कल्याण के लिए सरकार द्वारा लगातार योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मजदूरों द्वारा विभिन्न प्रकार के काम करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। ऐसे में यदि किसी श्रमिक के साथ कोई दुर्घटना हो जाती थी तो उसके परिवार को जीवन भर आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती थी। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल का गठन किया गया। मंडल के माध्यम से प्रदेश के मजदूर भाई-बहनों का श्रम विभाग में पंजीयन शुरू किया गया और श्रमिक कार्ड बनाए गए, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। साथ ही महिला श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई मशीन उपलब्ध कराई गई, जिससे वे घर बैठे काम कर सकें। राज्य में गरीबों के लिए दो रुपये किलो चावल की योजना भी शुरू की गई थी। पहले यह सुविधा केवल गरीबी रेखा के अंतर्गत आने वाले परिवारों को मिलती थी, लेकिन बाद में श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिक कार्ड धारकों को भी इसका लाभ मिलने लगा। इस तरह श्रमिकों को राशन कार्ड और श्रम कार्ड के माध्यम से खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई। वर्तमान में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में दिया जा रहा है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से श्रमिक परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। मंत्री  यादव ने श्रमिकों से अपील की है कि वे श्रम विभाग में पंजीयन कराकर इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इस अवसर पर अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल ने भी मंडल द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष  सरस्वती बंजारे ने भी संक्षिप्त उद्बोधन दिया। इस अवसर पर तेलघानी बोर्ड अध्यक्ष  जितेन्द्र साहू,  भोजराम सिन्हा,  तुलसी साहू,  ललेश्वरी साहू, पार्षद  मनीष कोठारी, पार्षद  गुलराम साहू, अध्यक्ष महिला मोर्चा  स्वीटी कौशिक, अध्यक्ष जनपद पंचायत पाटन  कीर्ति नायक, श्रम अधिकारी  विकास सरोडे, श्रम निरीक्षक  बसंत वर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित थे।

महतारी वंदन योजना बनी महिलाओं की आत्मनिर्भरता का आधार, लाभान्वित महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री साय को कहा धन्यवाद

रायपुर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च को बस्तर में आयोजित वृहद महतारी वंदन कार्यक्रम के दौरान  अनीता साहू और  मिथलेश चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से वर्चुअल संवाद कर महतारी वंदन योजना से अपने जीवन में आए बदलाव के बारे में बताया और इसके लिए उनका आभार व्यक्त किया। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखण्ड के ग्राम खोडरी की  अनीता साहू ने बताया कि महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह मिलने वाली राशि से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और सिलाई कार्य शुरू किया। पहले उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, क्योंकि उनके पति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण परिवार की जिम्मेदारी उन्हें ही उठानी पड़ती थी। अब खेती, मजदूरी और सिलाई कार्य से आय के साथ उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है। उन्होंने “अनीता सिलाई सेंटर” के नाम से उद्यम पंजीयन भी कराया है और महिला एवं बाल विकास विभाग की सक्षम योजना के तहत एक लाख रुपये का ऋण भी प्राप्त किया है। इसी तरह मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिले की  मिथलेश चतुर्वेदी ने बताया कि पति के निधन के बाद परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया था। शासन से मिली सहायता राशि और महतारी वंदन योजना के सहयोग से उन्होंने ई-रिक्शा खरीदकर आजीविका का नया साधन शुरू किया। अब वे आत्मसम्मान के साथ अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। दोनों महिलाओं ने कहा कि महतारी वंदन योजना ने उन्हें आर्थिक संबल देने के साथ आत्मविश्वास भी दिया है। उन्होंने इस जनकल्याणकारी योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नारी शक्ति सम्मान समारोह का आयोजन

रायपुर उप मुख्यमंत्री अरुण साव महिलाएं ईश्वर की अनुपम कृति हैं। ईश्वर ने उन्हें विशेष शक्तियां और क्षमताएं दी हैं। महिलाओं ने अपनी लगन, मेहनत और काबिलियत से हर क्षेत्र में अपना स्थान बनाया है। हर क्षेत्र में उपलब्धियां और ऊंचाईयां हासिल की हैं। माताओं व बहनों का सम्मान एवं विशेष स्थान प्राचीन काल से हमारी संस्कृति और परंपरा में है। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने नारी शक्ति सम्मान समारोह में ये विचार व्यक्त किए। उन्होंने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा आज रायपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में स्वच्छता, स्वावलंबन और सशक्तीकरण के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्वच्छता दीदियों, महिला हितग्राहियों एवं स्वसहायता समूहों की महिलाओं को सम्मानित किया। उप मुख्यमंत्री साव ने समारोह में नगरीय निकायों में हर महीने स्वच्छता के आंकलन के लिए छत्तीसगढ़ स्वच्छता लीग का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में स्वच्छता दीदियों के स्वास्थ्य की जांच के लिए 15 दिनों के विशेष शिविर आयोजित करने की घोषणा की। ये शिविर आगामी 14 मार्च से लगाए जाएंगे। नारी शक्ति सम्मान समारोह में प्रदेशभर की स्वच्छता दीदियां, महिला हितग्राही एवं स्वसहायता समूहों की महिलाएं जोश और उत्साह से शामिल हुईं। वे इस दौरान प्रसिद्ध लोक गायिका सुश्री गरिमा दिवाकर और स्वर्णा दिवाकर द्वारा प्रस्तुत फाग गीत पर जमकर झूमीं। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नारी शक्ति सम्मान समारोह में महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में कभी निराश होने की जरूरत नहीं है। महिलाएं संघर्ष और करूणा की प्रतिमूर्ति हैं। आप में जो क्षमता और ताकत है, वो किसी और में नहीं है। देश में ऐसी अनेक घटनाएं और प्रसंग हैं जहां नारी शक्ति ने अपनी ममता, तपस्या, त्याग और बलिदान की अनूठी मिसालें पेश की हैं। साव ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद महिलाओं के सम्मान और सशक्तीकरण के लिए कई योजनाएं शुरू हुई हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर में शौचालय बनाए गए हैं, उज्जवला योजना से रसोई गैस दिए गए हैं, जल जीवन मिशन ने महिलाओं की दिनचर्या पूरी तरह बदल दी है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘वीमेन फॉर ट्री’ जैसी योजनाओं ने महिलाओं की प्रतिष्ठा और सम्मान बढ़ाया है।  श्री साव ने बताया कि छत्तीसगढ़ के शहरों में स्वीकृत दो लाख 44 हजार प्रधानमंत्री आवासों में से एक लाख 77 हजार आवास महिलाओं के नाम से स्वीकृत हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना से यह संभव हुआ है कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के पास खुद के नाम पर पक्का घर है। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत राज्य के 70 हजार महिला स्ट्रीट वेंडर्स को 88 करोड़ रुपए से अधिक का ऋण बैंकों के माध्यम से दिलाया गया है। उन्होंने कहा कि माता बच्चे की प्रथम शिक्षक होती है। इस नाते भावी पीढ़ी को अच्छे संस्कार, अच्छी शिक्षा, अच्छी सोच और अच्छी दिशा देने की महती जिम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर है। रायपुर की महापौर मीनल चौबे ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर हमारे राज्य को और हमारे शहरों को जो प्रतिष्ठा मिलती है, वह आप लोगों के कार्यों की वजह से मिलती है। उन्होंने समारोह के आयोजन के लिए उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विधानसभा सत्र के बीच इसका आयोजन किया गया है। तमाम व्यस्तताओं के बावजूद आप लोगों का हौसला बढ़ाने और सम्मानित करने उप मुख्यमंत्री यहां मौजूद हैं। चौबे ने कहा कि आप लोगों की प्रेरणा और सहयोग से हम आगे बढ़ते हैं। आपकी सहभागिता से योजनाओं को हम धरातल पर उतारते हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. ने कार्यक्रम में अपने स्वागत भाषण में कहा कि विभाग के कार्यों में महिलाएं महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। स्वच्छता दीदियों और स्वसहायता समूहों के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में वे बड़ी भूमिका निभा रही हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक आर. एक्का, रायपुर नगर निगम के आयुक्त विश्वदीप, राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय, रायपुर नगर निगम में स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्ष गायत्री सुनील चंद्राकर, संस्कृति विभाग के अध्यक्ष अमर गिदवानी, राजस्व विभाग के अध्यक्ष अवतार भारती बागल और पार्षद स्वप्निल मिश्रा सहित नगरीय प्रशासन एवं सूडा के अनेक अधिकारी भी समारोह में मौजूद थे। इनका किया गया सम्मान, चेक भी सौंपे गए समारोह में स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नगरीय निकायों के स्वच्छता दीदियों के प्रतिनिधि के रूप में बिलासपुर की रामेश्वरी सागर, कुम्हारी की मंजू देवांगन, बिल्हा की संपति यादव, अंबिकापुर की संगीता गुप्ता, विश्रामपुर की भारती गुप्ता और पाटन की लता मंडलेश को सम्मानित किया गया। विपरीत परिस्थितियों के बीच नगर निगम के सहयोग से प्रधानमंत्री आवास का निर्माण करने वाली रायपुर की मांडवी कौशिक, बीरगांव की बिमला साहू, कुम्हारी की त्रिवेणी साहू, राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित बगीचा की महिला हितग्राही सुमन तिर्की तथा वीमेन फॉर ट्री में उत्कृष्ट कार्य करने वाली बिलासपुर की पल्लवी विजय क्षत्री, लोरमी की दुर्गा राजपूत और बगीचा की प्रभा यादव का भी सम्मान किया गया।  उप मुख्यमंत्री साव ने निर्धारित समयावधि में प्रधानमंत्री आवास का निर्माण पूर्ण कर मुख्यमंत्री गृहप्रवेश सम्मान का हकदार बनीं रायपुर की रजनी ध्रुव, कुम्हारी की गीता पाल और बीरगांव की पलक देवांगन को (प्रत्येक को) 32 हजार 850 रुपए का चेक प्रदान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत रायपुर नगर निगम की तीन स्ट्रीट वेंडर्स लक्ष्मी साहू, रत्ना दीप और बी. लावण्या को 50-50 हजार रुपए के चेक सौंपे।     

आदि परब ‘परम्परा से पहचान तक’ का भव्य आयोजन 13 मार्च से

रायपुर नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में 13 और 14 मार्च को आदि परब 'परम्परा से पहचान तक' का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन आदिम जाति विभाग द्वारा किया जाएगा। आदिम जाति विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि जनजातीय समाज की रचनात्मकता, जीवन-दर्शन और सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करने के उद्देश्य  से राज्य सरकार द्वारा जनजातीय कला, संस्कृति एवं परम्पराओं को समर्पित आदि परब 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में आदि रंग के माध्यम से जनजातीय चित्रकारों की कलाकृतियों की प्रदर्शनी, आदि परिधान में जनजातीय वेशभूषा पर आधारित आकर्षक प्रस्तुतियां, आदि आख्यान के अंतर्गत जनजातीय विषयों पर सेमीनार तथा आदि हाट में जनजातीय शिल्पकारों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प एवं पारम्परिक उत्पादों को प्रस्तुत की जाएगी। वहीं जनजातीय संस्कृति एवं परम्पराओं पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमांे का आयोजन भी किया जावेगा।  

हिलाओं की आर्थिक मजबूती के लिए बढ़ेंगी योजनाएं, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का बड़ा बयान

रायपुर महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए महिला कोष की योजनाओं का विस्तार जरूरी : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ में रोजगार और स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं और महिला कोष की योजनाएं महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविरों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाओं तक इन योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि वे इसका लाभ लेकर आत्मनिर्भर बन सकें। मंत्री  राजवाड़े अटल नगर, नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में छत्तीसगढ़ महिला कोष के शासी बोर्ड एवं आमसभा की बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। बैठक में महिला कोष की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 में ऋण योजना के तहत 1500 महिला स्व-सहायता समूहों को 30 करोड़ रुपये तथा सक्षम योजना के तहत 1000 पात्र महिलाओं को 14 करोड़ रुपये के ऋण वितरण की साख योजना के कार्योत्तर अनुमोदन एवं उपलब्धियों की जानकारी दी गई। साथ ही सक्षम योजना, ऋण योजना और स्वावलंबन योजना के लक्ष्यों एवं उपलब्धियों पर भी चर्चा की गई। बैठक में यह जानकारी दी गई कि महिला स्व-सहायता समूहों को वर्तमान में द्वितीय बार अधिकतम 6 लाख रुपये तक ऋण दिए जाने का प्रावधान है। इसी प्रकार सक्षम योजना के अंतर्गत महिलाओं को अधिकतम 2 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इन प्रावधानों में आवश्यकता अनुसार संशोधन किए जाने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया। सितंबर 2025 की स्थिति में जिलों में कुल 8 लाख 2 हजार 843 रुपये की राशि ब्याज के रूप में जमा होने की जानकारी दी गई, जिसका उपयोग महिला कोष के सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए किए जाने पर विचार किया गया। बैठक में कार्यरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को भी पात्रता के आधार पर सक्षम योजना से लाभान्वित करने तथा योजना में महिलाओं की आयु सीमा 25 से 50 वर्ष करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक  शम्मी आबिदी ने बताया कि महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ महिला कोष का गठन किया गया है। इसके तहत महिलाओं को मात्र 3 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय प्रारंभ कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। बैठक में महिला एवं बाल विकास, वाणिज्य एवं उद्योग, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास, समाज कल्याण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ग्रामोद्योग, कृषि, नगरीय प्रशासन, वन तथा कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों के साथ ही नेहरू युवा केन्द्र, नाबार्ड, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, भारतीय स्टेट बैंक तथा यूनिसेफ के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

दिल की बीमारी से जूझ रही पीहू को मिला नया जीवन, ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ से हुआ सफल इलाज ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ से हुआ सफल इलाज

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन एवं जिला प्रशासन रायपुर की पहल प्रोजेक्ट धड़कन से संचालित स्वास्थ्य सेवाओं ने एक बार फिर एक बच्ची के जीवन में नई उम्मीद जगाई है। छठवीं कक्षा में पढ़ने वाली 11 वर्षीय पीहू कारके, जो हृदय संबंधी समस्या से जूझ रही थी, अब सफल उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रही है। पीहू के हृदय में समस्या होने के कारण उसे खेल-कूद और अन्य शारीरिक गतिविधियों में कठिनाई होती थी। इसी बीच जिला प्रशासन द्वारा पुलिस विभाग के कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के लिए आयोजित ‘प्रोजेक्ट छांव’ के अंतर्गत स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। इस शिविर में ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की विशेषज्ञ टीम ने पीहू के हृदय की जांच की। प्रारंभिक जांच के बाद पीहू को आगे के उपचार के लिए सत्य साईं हॉस्पिटल, नवा रायपुर भेजा गया। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विस्तृत जांच के बाद एक सप्ताह के भीतर उसका सफल ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद पीहू को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। आज पीहू पूरी तरह स्वस्थ है और पहले की तरह पढ़ाई-लिखाई में मन लगा रही है। साथ ही वह अपनी बहनों और दादी के साथ कैरम जैसे खेल भी आनंदपूर्वक खेल रही है। पीहू की माता मती इंद्राणी कारके ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और जिला प्रशासन रायपुर के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की मदद से उनकी बेटी का समय पर इलाज संभव हो सका और अब वह स्वस्थ जीवन जी पा रही है। यह पहल न केवल जरूरतमंद बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध करा रही है, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी नई उम्मीद और विश्वास का संचार कर रही है।