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चौंकाने वाला खुलासा! हेलमेट-सीटबेल्ट की अनदेखी बनी हजारों मौतों की वजह, रिपोर्ट में बड़ा दावा

 नई दिल्ली  केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, स्टैंडर्ड हेलमेट और सीटबेल्ट से 2024 में हजारों जानें बचाई जा सकती थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में सड़क हादसों में मारे गए लोगों में से 40 हजार से अधिक जिंदगियों को केवल स्टैंडर्ड हेलमेट और सीटबेल्ट के इस्तेमाल से बचाया जा सकता था। साल 2024 में सड़क हादसों में मारे गए 81,780 टू-व्हीलर सवारों में से 40% से ज्यादा अच्छी क्वालिटी के हेलमेट पहनकर बच सकते थे, जबकि सीटबेल्ट कार में सवार लोगों की 21,988 मौतों में से लगभग आधी मौतों को रोक सकती थी। यानी दोपहिया वाहनों पर जान गंवाने वाले 40% से ज्यादा लोग और कार हादसों में मारे गए करीब आधे लोग सुरक्षा उपकरणों के अभाव का शिकार हुए। बाइक सवारों के मरने की संभावना सबसे अधिक संयुक्त राष्ट्र (UN) की मोटरसाइकिल हेलमेट स्टडी के अनुसार, कार चालकों की तुलना में मोटरसाइकिल सवारों के सड़क हादसों में मरने की संभावना 26 गुना ज्यादा होती है, और अच्छी क्वालिटी के हेलमेट पहनने से उनके बचने की संभावना 42% बढ़ जाती है और बाइक सवारों को होने वाली 69% चोटों से बचा जा सकता है।" इसी तरह, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि सीटबेल्ट उन हादसों में मौत को रोकने में लगभग 50% असरदार हैं, जिनमें सीटबेल्ट न होने पर ड्राइवर या यात्री की मौत हो सकती थी। किन-किन राज्यों में हुईं सबसे अधिक मौतें? राज्य पुलिस विभागों से मिले डेटा पर आधारित सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट से पता चलता है कि हेलमेट न पहनने के कारण तमिलनाडु में सबसे ज़्यादा 7,744 मौतें हुईं, इसके बाद महाराष्ट्र (5,946) और मध्य प्रदेश (5,543) का नंबर आता है। सीटबेल्ट न पहनने के कारण हुई मौतों के मामले में, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 2,816 मौतें हुईं, इसके बाद मध्य प्रदेश (1,929) और महाराष्ट्र (1,427) का स्थान रहा। हालांकि. सेफ्टी गियर न पहनना और तेज रफ्तार या गलत साइड से गाड़ी चलाने जैसे जानलेवा हादसों के अन्य कारण सड़क इस्तेमाल करने वालों के व्यवहार से जुड़े हैं, लेकिन सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट यह भी बताती है कि सड़क बनाने और देखरेख करने वाली एजेंसियों की बढ़ती लापरवाही ने भी कुल मौतों की संख्या बढ़ाई है। उदाहरण के लिए, 2024 में गड्ढों के कारण होने वाली मौतें बढ़कर 2,384 हो गईं, जो 2023 की तुलना में 10.4% ज़्यादा हैं, और निर्माणाधीन साइटों पर मौतों की संख्या 5,389 रही, जो पिछले साल की तुलना में 19.4% ज़्यादा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2024 में भारतीय सड़कों पर मारे गए लोगों में से लगभग 67% टू-व्हीलर सवार या पैदल चलने वाले थे। सड़क हादसों में कुल 1.28 लाख दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों की जान चली गई। टक्कर रोकने वाली तकनीक के लिए रेडियो स्पेक्ट्रम लाइसेंस-मुक्त केंद्र सरकार ने सड़क हादसों को रोकने और वाहन सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ऑटोमोटिव रडार और 'व्हीकल-टू-एवरीथिंग' (V2X) कम्युनिकेशन में इस्तेमाल होने वाले रेडियो स्पेक्ट्रम को पूरी तरह लाइसेंस-मुक्त (Delicensed) कर दिया है। इस कदम से देश में उन्नत सड़क सुरक्षा तकनीकों और टक्कर रोधी प्रणालियों को बड़े पैमाने पर लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने जारी की अधिसूचना इस संबंध में दूरसंचार विभाग (DoT) ने दो महत्वपूर्ण अधिसूचनाएं जारी की है- 77-81 GHz बैंड- इसे ऑटोमोटिव रडार सिस्टम के लिए लाइसेंस-मुक्त किया गया है। 5.9 GHz बैंड- इसे V2X कम्युनिकेशन के लिए मुक्त किया गया है। V2X (Vehicle-to-Everything) एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसकी मदद से गाड़ियां न सिर्फ आपस में संपर्क साध सकती हैं, बल्कि सड़क के किनारे मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे ट्रैफिक सिग्नल और स्मार्ट पोल्स) के साथ भी डिजिटल संवाद कर सकती हैं। इससे ड्राइवर को संभावित दुर्घटनाओं, ट्रैफिक जाम और सड़क की स्थिति की जानकारी पहले ही मिल जाएगी, जिससे सड़क हादसों में भारी कमी आने की उम्मीद है।  

सड़क सुरक्षा प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

रायपुर सड़क सुरक्षा प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर को सुगम एवं सुरक्षित बनाने के लिए आज 'सड़क सुरक्षा प्रबंधन' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला को संबोधित करते हुए एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी  प्रदीप कुमार लाल ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रोड इंजीनियरिंग में सुधार, नियमों का कड़ाई से पालन और जन-जागरूकता का समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करने पर जोर दिया।  कार्यशाला के तकनीकी सत्र में सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ  विक्रम तुशिर ने जंक्शन सुधार, ब्लैक-स्पॉट की पहचान, ट्रैफिक साइन, रोड मार्किंग और सेफ्टी ऑडिट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि केवल बेहतर इंजीनियरिंग और सही साइनेज  के माध्यम से ही सड़क दुर्घटनाओं को 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। ब्लैक-स्पॉट्स की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करना और वहां समयबद्ध सुधारात्मक उपाय लागू करना सबसे प्रभावी रणनीति है। उन्होंने बताया कि सड़क डिजाइन में छोटे-छोटे तकनीकी सुधार भी बड़े हादसों को रोकने में सक्षम हैं, जिससे राजमार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को नया आयाम दिया जा सकता है। कार्यशाला में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के ईई  रणबीर यादव विशेष रूप से उपस्थित थे। एनएचएआई की विभिन्न परियोजना कार्यान्वयन इकाईयों के परियोजना निदेशक सर्व डीडी पार्लावर (कोरबा), मुकेश कुमार (बिलासपुर), शमशेर सिंह (अभनपुर) और दिग्विजय सिंह (रायपुर) सहित अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी भी कार्यशाला में मौजूद थे।  

सड़क सुरक्षा उपायों का सबकी सहभागिता से हो बेहतर क्रियान्वयन

रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य सड़क सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा बैठक संपन्न सड़क सुरक्षा उपायों का सबकी सहभागिता से हो बेहतर क्रियान्वयन सड़क दुर्घटनाएं नही हो और यातायात को बेहतर बनायें – मुख्य सचिव विकासशील रायपुर राज्य सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव विकासशील ने राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को परस्पर समन्वय के साथ कार्य करते हुए सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के दिए निर्देश। मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कहा है कि सुनिश्चित करे कि 108 एम्बुलेंस समय पर दुर्घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिाकरियों को इसकी मॉनिटरिंग के निर्देश दिए है। दुर्घटना में घायल व्यक्ति के समुचित उपचार हेतु ट्रामा सेंटरों को सुदृढ़ किया जाए। सड़क सुरक्षा एवं स्वप्रेरणा से सुगम यातायात प्रबंधन कार्य हेतु अधिक से अधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।         मुख्य सचिव ने सभी जिलों के कलेक्टरों केा सड़क दुर्घटनाओं को रोकने तथा सड़क सुरक्षा की लगातार मानिटरिंग करने और जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक करने के निर्देश दिए है। समीक्षा बैठक के प्रारंभ में सचिव परिवहन एस. प्रकाश के प्रारंभिक विभागीय गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। संजय शर्मा अध्यक्ष अंतर्विभागीय लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा) ने संबंधित विभागों द्वारा संपादित कार्यों तथा अद्यतन स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने चिन्हाकित 152 ब्लैक स्पॉट्स में से 102 में सुधार कार्य पूर्ण होने और शेष 50 में सुधारात्मक उपाय शीघ्र किये जाने हेतु निर्देशित किया गया। यातायात के नियमों के उल्लंघनकर्ताओं के विरूद्ध पुलिस विभाग द्वारा 8 लाख 15 हजार 954 प्रकरणों पर कार्यवाही 33 करोड 22 लाख 39 हजार 300 रूपए तथा परिवहन विभाग द्वारा राशि 38.52 करोड़ शमन शुल्क वसूल किये गए।            वर्ष 2025 में विभिन्न जिलों में 150 सड़क सुरक्षा समितियां समीक्षा बैठक संपन्न हुई है। सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के उपचार हेतु 8 जिलों अस्पताल में सीटीस्कैन की जांच, समस्त जिला अस्पतालों 24X7 एक्सरे, लेबोट्री जांच, इमरजेंसी संबंधित आवश्यक दवाईयां, इन्जेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। समस्त जिलों के विशेषज्ञ, चिकित्सा, स्टाफ नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस वर्ष शाला सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण में सड़क सुरक्षा से संबंधित यातायात जागरूकता के लगभग 4 लाख 47 हजार 200 प्रशिक्षण के माध्यम से तथा 7लाख 19 हजार यूट्यूब के माध्यम से शिक्षक तथा विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं। समग्र शिक्षा द्वारा मुख्यमंत्री शाला सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण में 1200 स्त्रोत व्यक्ति, 46 हजार शिक्षक एवं 4 लाख छात्र-छात्राओं तथा राज्य साक्षरता मिशन द्वारा संपन्न वाद-विवाद प्रतियोगिता में सड़क सुरक्षा से 1 लाख 38 हजारशिक्षकगण/विद्यार्थी/समुदाय लाभान्वित हुए।           यातायात जागरूकता के 15 हजार 319 कार्यक्रम, शैक्षणिक संस्थानों में संपन्न हुए। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश के 169 नगरीय निकायों में 3 लाख 72 हजार 406 एलईडी स्ट्रीट लाईट लगाये गये, 1 लाख 02 हजार 410 अतिरिक्त लाईट्स की स्वीकृति प्रदान की गई। प्रदेश में करीब में 5388 अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। सड़क दुर्घटनाओं के प्रभावितों के धनरहित उपचार के लिये निर्दिष्ट चिकित्सालयों का आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण, घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्तियों, गुड सेमेरिटन को यथाशीघ्र सम्मान राशि प्रदाय करने के निर्देश दिये गये। राज्य में सर्वाधिक सडक दुर्घटनाओं एवं इससे होने वाली मृत्यु एवं घायलों के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार, सरगुजा, जगदलपुर (बस्तर) जिलों में दुर्घटनाओं के कारणों की समीक्षा कर कार्ययोजना तैयार प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिये गये।           मुख्य सचिव द्वारा जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में हिट एण्ड रन प्रकरणों के प्रभावितों को राहत के लिये गठित जिला दावा निपटान समिति को प्रकरणों को निर्धारित समय-सीमा में निराकरण तथा जी.आई. सी के अधिकारियों से संपर्क स्थापित कर दावा निपटान की प्रक्रिया में तेजी लाने, मालवाहक वाहनों में यात्री परिवहन को रोकने अन्य वैकल्पिक प्रबंध, बिना हेलमेट/सीट बेल्ट, शराब सेवन कर वाहन चलान के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही की जाए।       स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने अवगत कराया कि शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा पहली से लेकर दसवीं तक के पाठ्यक्रमों मे सड़क सुरक्षा विषयक पाठों के परिमार्जन का कार्य पूर्ण हो चुका है, जिसे आगामी शिक्षा सत्र से लागू करने सहित प्रत्येक शैक्षणिक संस्थानों में रोड़ क्लब गठित कर नियमित गतिविधियों से सड़क सुरक्षा का वातावरण तैयार किया जायेगा। एस. प्रकाश सचिव परिवहन ने व्हीकल ट्रेकिंग प्लेटफार्म कमाण्ड एवं कंट्रोल सेंटर, आटोमैटेड टेस्टिंग स्टेशन ड्रायविंग ट्रेनिंग एण्ड रिसर्च संस्थान, क्षेत्रीय ड्रायविंग प्रशिक्षण केन्द्र, पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा परिवहन सुविधा केन्द्र पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा प्रदूषण जांच केन्द्र, बस संगवारी ऐप, हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट, ई-ट्रैक, इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग संहित अन्य सड़क सुरक्षा प्रयासों के संबंध में जानकारी दी गई। इसी क्रम में अवगत कराया गया कि प्रदेश में दोपहर 03 बजे से लेकर रात्रि 09 बजे के मध्य शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक दुर्घटनाएं हो रही है। इन दुर्घटनाओं में सर्वाधिक दोपहिया वाहन चालक/सवारों की मृत्यु की प्रमुख वजह बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाना है। सड़क सुरक्षा माह का आयोजन बेहतर किया जाए। शहरों के निकास पर प्रभावी प्रवर्तन हो ताकि दुर्घटनाओं में कमी आ सकें। हेलमेट एवं सीटबेल्ट लगाने के लिए प्रेरित किया जाए।    ब्लैक स्पॉट्स में जांच समिति द्वारा दिये गये सुझाव अनुरूप समय सीमा पर आवश्यक सुधार का कार्य किया जाए। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि ब्लैक स्पॉट्स में सुधारात्मक उपाय उपरांत दुर्घटनाओं में कितनी कमी आई, इसका विश्लेषण होना चाहिए। ब्लैक स्पॉट्स तय होने के पश्चात् सुधार उपाय करने से बेहतर होगा कि, पहले से रोड़ डिजाईन सही हो, यह सुनिश्चित किया जावे। एनएचएआई एवं एनएच को समय पर स्वप्रेरणा से तत्परता के साथ कार्य संपादन करने के निर्देश दिए गए। बैठक में बसवराजू, सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, डॉ. कमलप्रीत सिंह सचिव लोक निर्माण विभाग, प्रदीप गुप्ता अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यातायात, श्रीमती नेहा चंपावत सचिव गृह विभाग सहित स्वास्थ्य सेवाएं, लोक निर्माण विभाग, परिवहन, जनसंपर्क, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, समस्त संभाग आयुक्त, तथा पुलिस महानिरीक्षक रेंज, सर्वाधिक सड़क दुर्घटना के जिला कलेक्टर्स एवं पुलिस अधीक्षकगण सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में सड़क सुरक्षा परिदृश्य संबंधी वर्चुअल समीक्षा बैठक मंत्रालय में संपन्न हुई।

रायपुर: राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 का उद्घाटन 01 जनवरी को

रायपुर : राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 का 01 जनवरी को होगा शुभारंभ जन-जागरूकता के लिए होंगे विविध कार्यक्रमों का होगा आयोजन 1 जनवरी को रायपुर में बाइक रैली का होगा आयोजन रायपुर लोगों को सड़क सुरक्षा की गंभीरता, चुनौतियों और नियमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सहित सम्पूर्ण देश में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 का आयोजन 1 से 31 जनवरी 2026 तक किया जा रहा है। इस दौरान राज्य के सभी जिलों में सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत जिलों में सड़क सुरक्षा पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्वास्थ्य परीक्षण एवं नेत्र जांच शिविर, स्कूल डे आयोजन, स्कूली बच्चों के लिए स्लोगन, निबंध, चित्रकला एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं, ई-रिक्शा, ऑटो व बस चालकों का प्रशिक्षण, एम्बुलेंस ड्राइविंग ट्रेनिंग, वाहनों की फिटनेस एवं रेडियम स्ट्रिप्स की जांच/संधारण, शराब सेवन कर वाहन चलाने से होने वाले नुकसान पर रैली, ग्राम चौपालों में जन-जागरूकता कार्यक्रम, गंभीर सड़क दुर्घटना स्थलों का चिन्हांकन एवं सड़क सुरक्षा मितानों का प्रशिक्षण जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त युवाओं के लिए एरोबिक्स-जुंबा के माध्यम से 'स्वस्थ शरीर – स्वस्थ मन, सुरक्षित जन' थीम पर कार्यक्रम, हेलमेट धारी वाहन चालकों को प्रोत्साहन स्वरूप टॉफी वितरण तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विविध गतिविधियां भी आयोजित होंगी। 1 जनवरी 2026 को सर्किट हाउस रायपुर के समीप शाम 5:00 बजे सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष श्री अभय मनोहर सप्रे की उपस्थिति में जनजागरूकता के लिए हेलमेट एवं बाइक रैली का आयोजन किया जाएगा। यह रैली सड़क सुरक्षा नियमों के पालन, हेलमेट उपयोग और सुरक्षित वाहन संचालन का संदेश देगी।  जनजागरूकता के लिए भिलाई में मैराथन का हुआ आयोजन इसी क्रम में रविवार को भिलाई में आयोजित मैराथन को सड़क सुरक्षा छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री संजय शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मैराथन के उपरांत सड़क सुरक्षा पर आधारित नुक्कड़ नाटक का मंचन भी किया गया, जिसकी लोगों ने सराहना की।