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माओवादी ऑपरेशन के दौरान संवेदनशील जानकारी लीक न हो इसके लिए उठाए सख्त कदम

जगदलपुर माओवादी मोर्चे पर तैनात सुरक्षा बलों की रणनीतिक गोपनीयता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए एक सख्त कदम उठाया गया है। माओवाद प्रभावित जिलों में तैनात सुरक्षा बल के जवानों को इंटरनेट और सोशल मीडिया से दूर रहने के लिए निर्देशित किया गया है। जिससे की किसी भी प्रकार की ऑपरेशन जानकारी लीक न हो सके। बता दें कि बस्तर संभाग के सातों माओवादी प्रभावित जिलों – दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा, कोंडागांव, कांकेर और बस्तर में तैनात डीआरजी (जिला रिजर्व गार्ड), एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) और सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स) के जवानों के सभी इंटरनेट मीडिया अकाउंट अब डिलीट करा दिए गए हैं। जवानों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब जैसे किसी भी प्लेटफार्म से दूरी बनाए रखें और भविष्य में कोई भी ऑपरेशनल जानकारी साझा न करें। इस निर्णय के पीछे मुख्य वजह पिछले दिनों हुए ऑपरेशन से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों का इंटरनेट मीडिया के ज़रिए लीक होना, बताया जा रहा है। माओवादी कमांडर बसव राजू के मारे जाने के बाद जवानों द्वारा पोस्ट किए गए आपरेशनल वीडियो मिलियन्स में व्यूज बटोर रहे थे, जिनमें हथियार, जंगल मार्ग, मुठभेड़ स्थल और यहां तक कि घायल या मारे गए माओवादियों की तस्वीरें भी शामिल थीं। इससे मिशन की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा था। जवानों को दी जा रही काउंसलिंग जवानों को साइबर सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर विशेष काउंसलिंग भी दी जा रही है ताकि वे अनजाने में भी कोई संवेदनशील जानकारी साझा न करें। यह कदम माओवादी विरोधी अभियानों की सफलता सुनिश्चित करने और जवानों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में लिया गया निर्णायक निर्णय है। ऑपरेशन में सीमित होगा मोबाइल उपयोग ऑपरेशन के दौरान मोबाइल उपयोग भी सीमित कर दिया गया है। जवान केवल आपातकालीन या आधिकारिक संपर्क के लिए ही फोन का प्रयोग कर सकेंगे। वीडियो बनाना, फोटो लेना और रिकार्डिंग पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है।आपरेशन के बाद मोबाइल की जांच भी अनिवार्य कर दी गई है।

जंगल, अदाणी और ED पर गरमाई सियासत: प्रियंका गांधी ने साय सरकार को घेरा, भूपेश बघेल को बताया संघर्षशील नेता

रायपुर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार सुबह एक्स पर पोस्ट साझा कर छत्तीगढ़ की भाजपा सरकार पर निशाना साधा और लिखा कि भाजपा सरकार ने छत्तीसगढ़ के सारे जंगल अदाणी को दे दिए हैं। पेसा कानून और एनजीटी के निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जंगलों को बर्बाद किया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल विधानसभा में यह मुद्दा उठाने वाले थे। लेकिन उन्हें रोकने के लिए सुबह-सुबह ईडी ने छापा मार दिया। इतना ही नहीं उनके बेटे को भी गिरफ्तार कर लिया। आगे लिखा कि बीते 11 वर्षों में देश अच्छी तरह समझ चुका है कि ये जनता की आवाज को कुचलने और विपक्ष को दबाने के तरीके हैं। लेकिन ऐसे हथकंडों से सच को दबाना और विपक्ष को डराना नामुमकिन है। कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता बघेल के साथ मजबूती से खड़ा है।  भूपेश बघेल ना टूटेगा ना झुकेगा- पूर्व सीएम इससे पहले भूपेश बघेल ने एक्स पर ईडी की कार्रवाई के बीच एक पोस्ट लिखा था कि 6 बजकर 20 मिनट पर ईडी के अधिकारी उनके घर पहुंचे हैं। अदाणी का मामला जब-जब उठाया जाता है, तब-तब मोदी और शाह ईडी की कार्रवाई करते हैं। भूपेश बघेल ना टूटेगा ना झुकेगा, हम लड़ाई लड़ेंगे। बघेल ने कहा कि पूरे देश में विपक्ष के नेताओं पर कार्रवाई हो रही है। बघेल के बेटे को पांच दिन की रिमांड जानकारी के लिए बता दें कि बीते शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के घर छापा मारा था। ईडी ने भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को कार्रवाई के बीच गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद विशेष न्यायाधीश डमरूधर चौहान की विशेष कोर्ट में पेश किया और पांच दिन की रिमांड मिल गई। अब ईडी चैतन्य से पूछताछ करेगी। विपक्ष के इन नेताओं पर हो चुकी है ईडी की कार्रवाई ईडी के निशाने पर आने वाले विपक्षी नेताओं में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, लालू प्रसाद यादव और राकांपा संस्थापक शरद पवार जैसे कई दिग्गज नेता रहे हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने एक ट्वीट में रॉबर्ट वाड्रा का बचाव करते हुए कहा था कि उनके बहनोई को पिछले एक दशक से नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा परेशान किया जा रहा है और सत्य की जीत होगी। वाड्रा को पूर्ण समर्थन देते हुए राहुल ने लिखा था कि मैं रॉबर्ट, प्रियंका और उनके बच्चों के साथ खड़ा हूं, क्योंकि उन्हें दुर्भावनापूर्ण, राजनीतिक रूप से प्रेरित बदनामी और उत्पीड़न के एक और हमले का सामना करना पड़ रहा है। मुझे पता है कि वे सभी, किसी भी तरह के उत्पीड़न का सामना करने के लिए पर्याप्त साहसी हैं। वे गरिमा के साथ ऐसा करते रहेंगे। अंततः सत्य की जीत होगी।

मुख्यमंत्री साय बोले – नई औद्योगिक नीति के माध्यम से विकास और रोजगार सृजन कर रही है हमारी सरकार

फार्मास्यूटिकल इकाई का शुभारंभ प्रदेश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण कदम रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर के सेक्टर-05 स्थित एस्पायर फार्मास्यूटिकल्स की नवनिर्मित इकाई का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रबंधन को शुभकामनाएं दीं और उत्पादन इकाई का भ्रमण कर दवा निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री शसाय ने कहा कि कोविड के कठिन दौर में दवाइयों की किल्लत को देखते हुए इस इकाई के निर्माण का सपना देखा गया था और आज वह साकार हुआ है। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया कोविड के संकट से जूझ रही थी, तब भारत ने स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर एक मिसाल कायम की। श्री साय ने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स की  इकाई का शुभारंभ प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति निवेशकों को आकर्षित कर रही है और पिछले सात-आठ महीनों में 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से कई परियोजनाओं पर कार्य आरंभ हो चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से अधिक से अधिक रोजगार सृजन का कार्य कर रही है और ऐसी इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है, और इन 25 वर्षों में जो विकास हुआ है, उसमें पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह ने न केवल प्रदेश से भूखमरी को दूर किया, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी ठोस नींव रखी। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य गठन के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के जरिए लोगों को निःशुल्क इलाज मिल रहा है। श्री साय ने बताया कि पिछले डेढ़ वर्ष की अवधि में छह से अधिक विशेषज्ञ अस्पतालों के शुभारंभ का मैं साक्षी रहा हूं, जो दर्शाता है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री श्री मोदी का मानना है कि लोग बीमार न पड़ें, निरोगी रहें, और उनकी इसी संकल्पना के अनुरूप वेलनेस सेंटर के माध्यम से लोगों को आरोग्य प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार ने “विकसित छत्तीसगढ़ 2047” की परिकल्पना के तहत विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश की सकल राज्यीय उत्पाद (GSDP) 5 लाख करोड़ है, जिसे 2030 तक ₹10 लाख करोड़ और 2047 तक ₹75 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, और यह प्रदेशवासियों के सहयोग से ही संभव होगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर एस्पायर फार्मास्यूटिकल्स का भ्रमण कर उन्नत तकनीकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह इकाई पूरी तरह ऑटोमेटेड है, जहाँ टैबलेट, सिरप, ऑइंटमेंट और क्रीम जैसे विभिन्न प्रकार की दवाइयों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस इकाई के विस्तार से बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश के फार्मास्यूटिकल सेक्टर में यह एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक शुरुआत है। उन्होंने कहा कि भारत ने इस क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बनाई है और कोविड काल के दौरान पूरी दुनिया को यह एहसास हुआ कि दवाइयों और चिकित्सा संसाधनों का क्या महत्व है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों ने भी उस दौर में भारत की फार्मा क्षमता पर विश्वास जताया। उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में विकसित छत्तीसगढ़ की संकल्पना को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए विजन डॉक्यूमेंट जारी किया गया है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के औद्योगिक विकास में नवा रायपुर की केंद्रीय भूमिका है। यह क्षेत्र न केवल औद्योगिक निवेश के लिए उपयुक्त है, बल्कि सभी प्रमुख मार्गों से जुड़ाव के कारण लॉजिस्टिक्स की दृष्टि से भी अत्यंत सुविधाजनक है। डॉ. सिंह ने एस्पायर फार्मास्यूटिकल्स की टीम को इस नई शुरुआत के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह इकाई नवा रायपुर के विकास को नई गति देगी। इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, पवन साय, विधायक गुरु खुशवंत साहेब, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक ललित चंद्राकर, विधायक संपत अग्रवाल, विधायक अनुज शर्मा, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्षसंजय श्रीवास्तव, एस्पायर फार्मास्यूटिकल्स से कोमलचंद चोपड़ा, अनिल देशलहरा और उज्ज्वल दीपक सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

मिशन हॉस्पिटल मामला: कोर्ट ने याचिका खारिज कर सरकार को दी बड़ी जीत

बिलासपुर मिशन हॉस्पिटल मामले में हाईकोर्ट ने शासन के पक्ष में बड़ा से फैसला सुनाया है. मामले में सुनवाई के बाद 24 अप्रैल 2025 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया गया था. कोर्ट ने आज फैसला सुनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया है. 1885 में लीज पर मिली थी 11 एकड़ जमीन दरअसल, मिशन अस्पताल की स्थापना वर्ष 1885 में हुई थी. मिशन अस्पताल के लिए सेवा के नाम से 11 एकड़ जमीन लीज पर दी गई थी. इसके लिए क्रिश्चियन वुमन बोर्ड ऑफ मिशन हॉस्पिटल बिलासपुर, तहसील व जिला बिलासपुर छत्तीसगढ़ को जमीन आवंटित की थी. यह मोहल्ला चांटापारा शीट नंबर 17, प्लाट नंबर 20/1 एवं रकबा 382711 एवं 40500 वर्गफीट है. 1966 में लीज का नवीनीकरण कर साल 1994 तक लीज बढ़ाई गई थी. जिसकी अवधि 31 अप्रैल 1994 तक के लिए थी. जिसमें मुख्य रूप से निर्माण में बदलाव एवं व्यवसायिक गतिविधियां बिना कलेक्टर की अनुमति के न किए जाने की शर्त थी. डायरेक्टर का कारनामा, शर्तों के विरुद्ध बनाई चौपाटी लीज पर जमीन लेकर डायरेक्टर रमन जोगी ने इसे चौपाटी बनाकर किराए पर चढ़ा दिया था. एक रेस्टोरेंट का कैम्पस में संचालन किया जा रहा था. लीज की शर्तों का उल्लंघन कर व्यावसायिक उपयोग करने पर तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण की नजर पड़ी. लीज की अवधि बढ़ाने के समय इसमें कई शर्तें भी लागू की गई थी. पर शर्तों का उल्लंघन कर न केवल इसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था. साथ ही किराए पर अन्य प्रतिष्ठानों को देकर इसे कमाई का माध्यम बना लिया गया था. 1994 को लीज खत्म होने के बाद 30 वर्षों तक लीज का नवीनीकरण नहीं करवाया गया था. मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पैरवी कर रहे महाधिवक्ता ने कहा था कि नितिन लॉरेंस प्रत्येक याचिका में अपना पद बदल रहे हैं और विभिन्न संस्थाओं की पॉवर ऑफ अटॉर्नी प्रस्तुत कर रहे है. अदालत को गुमराह किया जा रहा है. यह कानूनी रूप से गलत है. जस्टिस प्रसाद ने अपने फैसले में लिखा है कि अधिकारियों ने पट्टे को नवीनीकृत करने से इनकार करके और पट्टे को वापस लेने में अपने अधिकारों और अधिकार क्षेत्र के भीतर काम किया. भूमि पर पुनः कब्ज़ा प्राप्त करने के लिए कदम उठाएँ. उनके निर्णय में कोई त्रुटि या अवैधता नहीं है, जिसके लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 या 227 के अंतर्गत इस न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप की आवश्यकता हो.

एक करोड़ की रिश्वत डील: नारकोटिक्स अधिकारी और दलाल CBI के हत्थे चढ़े

चित्तौड़गढ़ सीबीआई की टीम ने चित्तौड़गढ़ जिले के एक अफीम किसान से रिश्वत के मामले में नारकोटिक्स के एक अधिकारी सहित दलाल को गिरफ्तार किया है। सीबीआई जयपुर टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। एक किसान को झूठे तथ्यों के आधार पर डोडा चूरा तस्करी में फंसाने के नाम पर एक करोड़ रुपये रिश्वत की मांग की थी। किसान की शिकायत पर नारकोटिक्स के अधिकारी और दलाल को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया क्षेत्र में अंजाम दी गई है। सीबीआई की दर्ज एफआईआर के अनुसार गत 15 जुलाई को डूंगला तहसील के आलाखेड़ी गांव के किसान मांगीलाल पुत्र ऊंकार लाल गुर्जर निवासी सांगरिया ने शिकायत दी थी। इसमें बताया कि डूंगला तहसील के आलाखेड़ी निवासी जगदीश मेनारिया ने नारकोटिक्स के अधिकारी महेन्द्र सिंह से संपर्क करने के लिए सूचित किया था। जगदीश मेनारिया से जब किसान ने संपर्क किया तो उसने बताया कि नारकोटिक्स अधिकारी महेन्द्रसिंह ने उसकी कृषि भूमि से 400 किलो डाेडा चूरा जब्त किया है। जगदीश मेनारिया के माध्यम से ही महेन्द्र सिंह ने बताया कि उसके परिवार के सदस्यों को मादक पदार्थ के मामले में नहीं फंसाने के लिए एक करोड़ रुपए देने होंगे। रिश्वत नहीं दिए जाने पर आपराधिक मामलों में फंसा कर उसे जेल भेज दिया जाएगा। नारकोटिक्स अधिकारी ने नशीले पदार्थों के मामले में प्रार्थी व उसके परिवार को न फंसाने के एवज में 9 लाख रुपए भी प्राप्त कर लिए। इसी मामले में गुरुवार रात को आलाखेड़ी निवासी दलाल जगदीश मेनारिया काे एसीबी ने गिरफ्तार किया। इसके बाद नारकोटिक्स के अधिकारी महेन्द्रसिंह को भी गिरफ्तार कर मंडफिया लेकर आए। यहां शुक्रवार को स्वास्थ्य केंद्र पर उसका मेडिकल कराया गया। इस मामले में सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 7A के साथ धारा 61 (2) के तहत एफआईआर दर्ज की है। 44 लाख दिए फिर भी नहीं पसीजा दिल प्रार्थी मांगीलाल गुर्जर ने शिकायत में बताया कि सीकर निवासी व नीमच में कार्यरत नारकोटिक्स अधिकारी महेन्द्र सिंह उसके सांगरिया स्थित निवास पर पहुंचा। 27 मार्च को जगदीश मेनारिया से सम्पर्क करने की बात कही थी। जगदीश मेनारिया ने अपने नम्बर भी दिए। इसी दिन जगदीश मेनारिया ने वाट्सएप कॉलिंग कर बताया कि महेन्द्र सिंह ने उसके खेत से 400 किलो डोडा चूरा जब्त किया है। प्रार्थी ने बताया कि उसके खेत पर कोई डोडा चूरा नहीं था। लेकिन जगदीश मेनारिया ने कहा कि एक करोड़ रुपए देने होंगे, नहीं तो जेल जाना पड़ेगा। प्रार्थी ने शिकायत में बताया कि जगदीश मेनारिया के मार्फत 44 लाख रुपए की राशि 2-3 माह में 3 किश्ताें में दी। बाद में उसे सीबीआई के शिकायत नम्बर मिले। इधर, 13 जुलाई को जगदीश मेनारिया ने गांव में आकर उससे 9 लाख रुपए की और मांग की। परेशान होकर उसने सीबीआई को पत्र लिखा और उसके बाद सीबीआई ने जाल बिछा बीती रात उसे गिरफ्तार किया है। अवैध सम्पत्तियों की होगी जांच प्रार्थी मांगीलाल गुर्जर ने शिकायत में बताया कि महेन्द्र सिंह नारकोटिक्स का भ्रष्ट अधिकारी है। इसने जयपुर, सीकर और नीमच में बहुत सम्पत्तियां बनाई है और प्रदेश में कई स्थानों पर एजेन्ट बना रखे है। इसके माध्यम से वह रिश्वत की राशि लेता है। 15 जुलाई को हुई शिकायत के बाद सीबीआई के पुलिस अधीक्षक ने अधिकारी को नियुक्त किया और उसके बाद टीम बना कार्यवाही की गई है। पुलिस उपाधीक्षक को सौंपी जांच सीबीआई ने अपनी एफआईआर में नारकोटिक्स अधिकारी महेन्द्र सिंह व दलाल जगदीश मेनारिया को गिरफ्तार करने का हवाला देते हुए मामले की जांच जयपुर सीबीआई के भ्रष्टाचार अनुभाग के पुलिस उपाधीक्षक कमलेश चन्द्र तिवारी को सौंपी है। गौरतलब है कि नारकोटिक्स विभाग में पूर्व में भी भ्रष्टाचार के मामलाें में सीबीआई कार्यवाही कर चुकी है और कई अधिकारियों को धर लिया गया है। पहले भी लगे लूट के आरोप नारकोटिक्स विभाग में फैले भ्रष्टाचार और नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों के विरूद्ध झूठी कार्यवाही करने के मामले में पहले भी कई आरोप लगे है। पिछले दिनों रूद गांव में एक किसान के खेत से एक केटली से अफीम निकाल कर मुकदमा बनाने के मामले में किसानों ने प्रदर्शन किया था और पूरा मामला झूठा बताया था। अब सीबीआई ने कार्यवाही किए जाने के बाद नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों की पोल खुल कर सामने आ गई है।  

मेरे खिलाफ हो रहा पीआर एजेंसी का इस्तेमाल, स्क्रीनशॉट शेयर कर कही ये बात : भूपेश बघेल

 रायपुर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को शुक्रवार को गिरफ्तार किया। ईडी ने उनके भिलाई स्थित निवास से गिरफ्तार कर रायपुर के ईडी के स्पेशल कोर्ट में पेश किया। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें पांच दिन की रिमांड पर ईडी को सौंप दिया। अब ईडी उनसे पूछताछ कर रही है। चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत गरमाई हुई है। इस मामले को लेकर बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे पर हमलावर है। एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाये जा रहे हैं। इस बीच भूपेश बघेल का एक ट्वीट सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस ट्वीट के जरिये उन्होंने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व सीएम बघेल ने एक्स पर ट्वीट कर लिखा कि 'कुछ लोग इतने बेचारे हैं कि मेरे खिलाफ सोशल मीडिया पर लिखवाने के लिए अब PR एजेंसी का इस्तेमाल कर रहे हैं। ट्वीट कहाँ रचे जा रहे हैं, कहाँ भेजे जा रहे हैं, कहाँ करवाए जा रहे हैं…. सब कुछ घूमकर मुझ तक भी पहुँच रहा है। आप पहले से बेनक़ाब हैं, नक़ाब पहनने की कोशिश न कीजिए। दरअसल,सोशल मीडिया पर कुछ स्क्रीनशॉट वायरल हो रहे हैं, जिसमें पूर्व सीएम बघेल के विरुद्ध ट्वीट करने की बात कही जा रही है। इसमें बघेल के खिलाफ एक के बाद एक आरोप प्वॉइंटवार लगाये गये हैं। जानें चैतन्य बघेल के वकील ने क्या कहा कोर्ट की कार्यवाही के दौरान पूर्व सीएम भूपेश बघेल भी जिला कोर्ट रायपुर पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि वे बीजेपी सरकार की इस कार्रवाई के खिलाफ न डरेंगे ना झुकेंगे लड़ाई जारी रहेगी। चैतन्य बघेल के वकील फैजल रिजवी ने बताया कि ईडी की ओर से पांच दिन की रिमांड मांगी गई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। आज तक चैतन्य बघेल को एक भी समन जारी नहीं किया गया है। लक्ष्मी उर्फ पप्पू बंसल के बयान को आधार मानते हुए आज चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि चैतन्य बघेल का 18 जुलाई को जन्मदिन था और सुबह जब वह पूजा कर रहे थे इस दौरान पूजा स्थल में जूते पहने हुए जाकर ईडी की टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया। कोर्ट के सामने सामने हमने यह बात रखी है कि इससे धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है। राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित ये गिरफ़्तारी है। ये हमने कोर्ट को बताया है।

धान बेचने के लिए एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य: कलेक्टर

बिलासपुर, कलेक्टर एवं जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के प्राधिकृत अधिकारी संजय अग्रवाल ने प्रार्थना सभाकक्ष में  नोडल अधिकारीयो और छ जिलों के शाखा प्रबंधक और पर्यवेक्षकों की समीक्षा बैठक ली। जिसमें बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील सोढ़ी, संयुक्त पंजीयक उदयभान राठिया, उप पंजीयक शेखर जयसवाल उपस्थित थे। प्राधिकृत अधिकारी के द्वारा  किसानों के लिए संचालित विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई। बैंक की मांग वसूली की संक्षेप में समीक्षा की गई, जिन शाखाओं के द्वारा वसूली का कार्य ठीक ढंग से नहीं किया गया है,उन शाखाओं को चेतावनी दी गई है कि अपनी कार्य प्रणाली सुधार ले और बैंक की शत प्रतिशत वसूली का कार्य पूर्ण करें। कलेक्टर ने यह भी कहा कि किसानों को ऋण वितरण में तेजी लाएं और खाद बीज वितरण में कोई समस्या ना हो, इसका भी ध्यान रखा जाए। कलेक्टर ने प्रधानमंत्री फसल बीमा अंतर्गत सभी ऋणी कृषकों का बीमा करने का निर्देश भी दिया। इस हेतु सभी समितियां में शिविर लगाकर किसानों को प्रेरित कर फसल बीमा का कार्य शत प्रतिशत पूर्ण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिया कि फसल बीमा करने से कृषकों को प्राकृतिक आपदा से होने वाली हानि से बचाया जा सकता है। इसके लिए सभी मेहनत कर ऋणी कृषकों को प्रधानमंत्री फसल बीमा से जोड़ा जाए। कलेक्टर ने सभी को निर्देशित किया की आगामी धान खरीदी में धान बेचने वाले सभी कृषकों का एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन होना अनिवार्य है। ऐसी स्थिति में सभी धान बेचने वाले कृषकों को सूचित कर एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन करने का अभियान चलाया जाए। समीक्षा बैठक में नोडल अधिकारी आशीष दुबे, सुशील जोशी, अमित साहू, संतोष ठाकुर, विनय साहू, अश्वनी पांडे कर्मचारियों में सुशील चंद्राकर, शरद शर्मा, अनुराग निर्मलकर, आशीष सोनी, देवेंद्र शुक्ला, वीरेंद्र टंडन, अभिषेक शर्मा, हितेश सलूजा आदि उपस्थित थे।

अरुण साव बोले – करोड़ों के घोटाले पर कार्रवाई जायज, कांग्रेस का विरोध बेबुनियाद

रायपुर   छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव ने शराब घोटाले मामले में ईडी की कार्रवाई पर कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं का आरोप बेबुनियाद और निराधार है। छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले मामले में ईडी की कार्यवाही भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री रहते शुरू हुई थी। इससे पहले प्रदेश में शराब घोटाले की जानकारी आम लोगों तक पहुंच चुकी थी। प्रदेश में दो काउंटर लगाकर शराब बेची जा रही थी। ईडी की वहीं जांच की कार्रवाई क्रमशः आगे बढ़ रही है जिन लोगों के खिलाफ ईडी को साक्ष्य और तथ्य मिल रहे हैं, उन लोगों के खिलाफ ईडी कार्यवाही कर रही है। डिप्टी सीएम साव ने नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में चर्चा के दौरान कहा कि प्रदेश में ईडी की लगातार जांच चल रही है। जांच एजेंसी ने कोई पहली बार कार्यवाही नहीं की है। कांग्रेस नेताओं की ओर से केवल राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है। भ्रम फैलाया जा रहा है, जो इनकी सबसे सरल पॉलिटिकल रेसिपी है । साव ने कहा कि कांग्रेस नेता केवल गंभीर आरोप से बचने के लिए उल्टा राजनीतिक आरोप लगा रहे हैं, ये कांग्रेस की आदत रही है। यह सब छत्तीसगढ़ की जनता को पता है। केवल आरोप लगाकर गंभीर अपराध के दोष से नहीं बच सकते। छत्तीसगढ़ में दो हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाले मामले में एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीम ने 20 मई 2025 को प्रदेश के कई जिलों में छापेमारी की थी। दुर्ग-भिलाई, महासमुंद, धमतरी, रायपुर समेत 20 से ज्यादा जगहों पर टीम ने दबिश दी थी। दुर्ग-भिलाई में 22 जगहों पर कार्रवाई हुई थ। एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीमें चार गाड़ियों में मंगलवार सुबह पांच बजे भिलाई पहुंची थी। महासमुंद जिले के सांकरा और बसना में भी छापेमारी हुई थी।  प्रदेश के पूर्व आबकारी मंत्री रह चुके कवासी लखमा के करीबियों के ठिकानों पर कार्रवाई की गई थी। दुर्ग-भिलाई में एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीम शराब घोटाले से जुड़े कारोबारियों के यहां पहुंची थी। भिलाई के आम्रपाली अपार्टमेंट में अशोक अग्रवाल की फेब्रीकेशन और अन्य चीजों की फैक्ट्री है। अशोक अग्रवाल पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के करीबी हैं। उन पर लखमा के साथ मिलकर शराब घोटाले को अंजाम देने का आरोप है।   इसके अलावा एसके केजरीवाल, नेहरू नगर भिलाई, विनय अग्रवाल, खुर्सीपार,संजय गोयल, डायरेक्टर स्पर्श हॉस्पिटल, नेहरू नगर,विश्वास गुप्ता बिल्डर, दुर्ग,बंसी अग्रवाल, नेहरू नगर भिलाई,आशीष गुप्ता, डायरेक्टर, आशीष इंटरनेशनल होटल सुपेला, नेहरू नगर स्थित घर में कार्रवाई हुई थी। महासमुंद जिले के सांकरा में किराना व्यवसायी कैलाश अग्रवाल और बसना में एलआईसी एजेंट जय भगवान अग्रवाल के यहां ईओडब्लू की दबिश दी थी। शराब घोटाला मामले में ईओडब्लू ने दोनों व्यवसायी के घर टीम पहुंची थी। चार वाहनों में करीब 20 सदस्यीय टीम रिकॉर्ड खंगालने के लिए पहुंची थी। जय भगवान अग्रवाल भिलाई के पप्पू बंसल के रिश्तेदार बताये जा रहे हैं। पप्पू बंसल के यहां शराब से जुड़े मामले में पहले भी छापा पड़ चुका है। धमतरी में भी छापा उधर, धमतरी जिले में अशोक अग्रवाल के दामाद सौरभ अग्रवाल के यहां भी टीम पहुंची थी। बैंक के कागजातों की छानबीन की थी। 17 मई 2025 को भी पड़ी थी रेड 17 मई 2025 को एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने छापा मारी थी। शनिवार की एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उनके करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। राजधानी रायपुर,  दंतेवाड़ा, अंबिकापुर, सुकमा, तोंगपाल और जगदलपुर समेत लगभग 15 ठिकानों पर ईओडलब्यू की टीम ने दबिश दी थी। सुकमा जिला मुख्यालय में चार  ठिकानों पर रेड कार्रवाई की गई थी। ईडी ने पेश किया था 3 हजार 841 पन्ने का चालान दो हजार करोड़ के शराब घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने 13 मार्च को रायपुर के स्पेशल कोर्ट में 3 हजार 841 पन्नों का चालान दाखिल किया है। इसमें जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा सहित 21 लोगों को आरोपियों के नाम हैं। इन आरोपियों में रायपुर के पर्व मेयर एजाज ढेबर के बड़े भाई अनवर ढेबर, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, छत्तीसगढ़ डिस्टलरी, वेलकम डिस्टलरी, टॉप सिक्योरिटी, ओम साईं ब्रेवेरेज, दिशिता वेंचर, नेस्ट जेन पावर, भाटिया वाइन मर्चेंट और सिद्धार्थ सिंघानिया सहित अन्य 21 लोगों के नाम शामिल हैं। जेल में बंद हैं कवासी लखमा ईडी ने शराब घोटाले केस में 15 जनवरी को प्रदेश के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था। इससे पूर्व  उनसे दो बार ईडी ऑफिस में बुलाकर पूछताछ हुई थी। गिरफ्तारी के सात दिन बाद पहले आबकारी मंत्री लखमा को पहले ईडी ने सात दिन कस्टोडियल रिमांड में लेकर पूछताछ की थी। फिर 21 जनवरी से 4 फरवरी तक लखमा को 14 दिन के न्यायिक रिमांड लिया था। पिछली सुनवाई के दौरान जेल में पर्याप्त सुरक्षा बल नहीं होने के कारण लखमा की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई थी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद  18 फरवरी तक लखमा की रिमांड बढ़ा दी थी।  लखमा के बेटे हरीश लखमा से भी ईडी ने पूछताछ की थी। जनवरी 2024 में हुई थी एफआईआर एसीबी और ईओडब्ल्यू ने ईडी के पत्र के आधार पर जनवरी 2024 में एफआईआर दर्ज की है। ईओडब्ल्यू के दर्ज एफआईआर में अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर को शराब घोटाला का मास्टरमाइंड बताया गया है। एफआईआर में शामिल बाकी आईएएस और अन्य सरकारी ऑफिसर और लोग सहयोग किये थे। शराब घोटाला से होने वाली आमदनी का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं तीनों को जाता था। टुटेजा आईएएस ऑफिसर हैं, जब  घोटाला हुआ तब वे वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव थे। दूरसंचार सेवा से प्रतिनियुक्ति पर आए त्रिपाठी आबकारी विभाग के विशेष सचिव और छत्तीसगढ़ मार्केटिंग कॉर्पोरेशन के एमडी थे। वहीं अनवर ढेबर रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के बड़े भाई और शराब कारोबारी है। 100 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर ईडी ने शराब और कोयला घोटाला मामले में दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों सहित 100 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई थी। इनमें भूपेश सरकार में आबकारी मंत्री रह चुके कवासी लखमा, मंत्री मरजीत भगत, पूर्व विधायक, गुलाब कमरो, शिशुपाल, बृहस्पत सिंह, चंद्रदेव प्रसाद राय, यूडी मिंज, विधायक देवेंद्र यादव के नाम शामिल हैं। इनके अलावा 2 निलंबित आईएएस (समीर विश्नोई, रानू साहू), … Read more

मुख्यमंत्री से मिले गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा, खेल विकास पर हुई चर्चा

छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाएं छूएंगी आकाश, आधुनिक तकनीक से होंगे खिलाड़ी पारंगत छत्तीसगढ़ में ओलंपिक वैल्यू एजुकेशन, स्पोर्ट्स इंजरी रिकवरी और स्पोर्ट्स साइंस डेवलपमेंट के लिए होगा कार्य रायपुर,  छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाएं अब आकाश को छूएंगी। राज्य के खिलाड़ी प्रारंभिक स्तर से ही आधुनिक तकनीकों के माध्यम से दक्ष बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज उनके निवास कार्यालय में ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता शूटर अभिनव बिंद्रा ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री साय ने बिंद्रा से छत्तीसगढ़ में ओलंपिक वैल्यू एजुकेशन, स्पोर्ट्स इंजरी रिकवरी एवं स्पोर्ट्स साइंस डेवलपमेंट के विषय में विस्तारपूर्वक चर्चा की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिंद्रा का पुष्पगुच्छ एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बिंद्रा से छत्तीसगढ़ में खेल गतिविधियों के विकास एवं खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने संबंधी योजनाओं पर गहन चर्चा की। मुख्यमंत्री साय ने चर्चा के दौरान कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है। प्रदेश के युवाओं में खेलों के प्रति स्वाभाविक रुचि एवं नैसर्गिक प्रतिभा है, विशेषकर आदिवासी अंचलों के युवाओं में अत्यधिक संभावनाएं हैं। इस परिप्रेक्ष्य में बिंद्रा ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि वे छत्तीसगढ़ में ओलंपिक वैल्यू एजुकेशन, स्पोर्ट्स इंजरी रिकवरी और स्पोर्ट्स साइंस कार्यक्रम प्रारंभ करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि राज्य की खेल प्रतिभाओं को निखारने में ये प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे। चर्चा के दौरान बिंद्रा ने बताया कि वे अभिनव बिंद्रा फाउंडेशन के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में खिलाड़ियों को आगे लाने के लिए विविध कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि फाउंडेशन द्वारा खेलहित में संचालित ये कार्यक्रम निःशुल्क होते हैं, जिससे खिलाड़ियों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में भी फाउंडेशन के माध्यम से ऐसे कार्यक्रम प्रारंभ किए जाने के सम्बन्ध में चर्चा की। श्री बिंद्रा ने जानकारी दी कि ओलंपिक वैल्यू एजुकेशन कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के स्कूली बच्चों में ओलंपिक मूल्यों का विकास किया जाएगा। उन्हें उत्कृष्टता, सम्मान और मैत्री जैसे मूल्यों को अपनाने हेतु प्रेरित किया जाएगा, जिससे प्रारंभिक अवस्था से ही खेल प्रतिभाओं का संवर्धन संभव हो सकेगा। मुख्यमंत्री साय को बिंद्रा ने अवगत कराया कि स्पोर्ट्स इंजरी खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। स्पोर्ट्स इंजरी रिकवरी कार्यक्रम के अंतर्गत खिलाड़ियों को निःशुल्क सर्जरी, पुनर्वास एवं उपचार उपरांत देखभाल की संपूर्ण सुविधा प्रदान की जाएगी, ताकि वे स्वस्थ होकर पुनः खेल क्षेत्र में सक्रीय हो सकें। इस हेतु फाउंडेशन के साथ देश के 30 उत्कृष्ट चिकित्सकों का नेटवर्क कार्यरत है, जिसका लाभ छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को मिलेगा। मुख्यमंत्री को बिंद्रा ने बताया कि वर्तमान खेल परिदृश्य पूर्णतः विज्ञान-आधारित हो गया है। अतः वे छत्तीसगढ़ में स्पोर्ट्स साइंस कार्यक्रम प्रारंभ करना चाहते हैं, जिससे आधुनिक एवं वैज्ञानिक पद्धति से खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया जा सके। नवीनतम तकनीकों की सहायता से प्रतिभाओं की पहचान वैज्ञानिक तरीके से की जा सकेगी तथा टेक्नोलॉजी के माध्यम से उनके कौशल को समुचित रूप से विकसित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को आवश्यक सभी सुविधाएं प्रदान कर रही है। विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि विशेष पिछड़ी जनजाति कोरवा समुदाय के युवाओं में तीरंदाजी का प्राकृतिक कौशल है। इस प्रतिभा को बढ़ावा देने हेतु रायपुर एवं जशपुर में एनटीपीसी के सहयोग से 60 करोड़ रुपये की लागत से आर्चरी अकादमी की स्थापना की जा रही है। इसी प्रकार बस्तर में आयोजित बस्तर ओलंपिक में 1.65 लाख से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया। राज्य सरकार द्वारा ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को 3 करोड़ रुपये, रजत पदक विजेता को 2 करोड़ रुपये एवं कांस्य पदक विजेता को 1 करोड़ रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में देने की घोषणा की गई है। इस अवसर पर खेल मंत्री टंकराम वर्मा, छत्तीसगढ़ युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर, खेल विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संचालक श्रीमती तनुजा सलाम, डॉ. दिगपाल राणावत सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।    

मुख्यमंत्री साय बोले – महारानी अहिल्याबाई होलकर ने समाज में प्रशासन, न्याय और जनकल्याण की अनुकरणीय व्यवस्था एवं उदाहरण प्रस्तुत किए

पुण्यश्लोक लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होलकर का संपूर्ण जीवन समाज कल्याण हेतु रहा समर्पित पुण्यश्लोक लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होलकर की जीवनी पर आधारित नाट्य मंचन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रायपुर,  पुण्यश्लोक लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होलकर का संपूर्ण जीवन समाज कल्याण हेतु समर्पित रहा। वह इंदौर की न केवल महारानी थीं, बल्कि न्यायप्रिय, धार्मिक एवं निष्पक्ष प्रशासक भी थीं। उन्होंने देशभर में धार्मिक स्थलों एवं मंदिरों के जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण के क्षेत्र में जो कार्य किए, वे आज भी हम सबके लिए प्रेरणादायक हैं। उक्त बातें मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में विश्व मांगल्य सभा द्वारा आयोजित पुण्यश्लोक लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होलकर की जीवनी पर आधारित नाट्य मंचन समारोह में कही। श्री साय ने आगे कहा कि हम सभी लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती मना रहे हैं। इस अवसर पर आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पूरे देश एवं प्रदेश में उनकी स्मृति में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। सुशासन, सनातन और संस्कृति के लिए समर्पित लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी के जीवन पर आधारित यह नाट्य प्रस्तुति लोगों तक उनके महान कृतित्व को पहुंचाने में सहायक होगी। राजमाता अहिल्याबाई होलकर हमारे गौरवशाली इतिहास की महान प्रेरणापुंज हैं। उनके जीवन चरित्र से वर्तमान एवं भावी पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने रामराज्य की अवधारणा को साकार किया। तीन दशकों तक उन्होंने होलकर राजवंश का नेतृत्व किया। उन्होंने प्रशासन, न्याय और जनकल्याण की अनुकरणीय व्यवस्था प्रदान की। दक्षिण में कांची, उत्तर में बद्रीनाथ, पूर्व में पुरी और पश्चिम में द्वारका तक, हर स्थान पर उनके पुण्य कार्यों की छाप मिलती है। वे इंदौर की महारानी थीं, परंतु उन्होंने अपने को किसी भौगोलिक सीमा में नहीं बाँधा। देश के विभिन्न हिस्सों में उन्होंने मंदिरों का निर्माण, धर्मशालाओं की स्थापना की और धर्म की पताका सदैव लहराई। वह सनातन की ध्वजवाहिका रहीं। जब महारानी अहिल्याबाई का नाम आता है तो हाथों में शिवलिंग लिए हुए उनकी तस्वीर सजीव हो उठती है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना के प्रतीक काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। जब औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को नष्ट किया, तब यह घटना हिंदू समाज के लिए अत्यंत आघातकारी थी। उस समय माता जीजाबाई ने शिवाजी महाराज से कहा था कि काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हमारा सर्वोच्च लक्ष्य होना चाहिए। पेशवा माधवराव ने भी अपनी वसीयत में लिखा था कि उनकी इच्छा है कि काशी विश्वनाथ मंदिर फिर से बने। यह यशस्वी कार्य राजमाता अहिल्याबाई होलकर के कर-कमलों से संपन्न हुआ। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कर लाखों आस्थावान हिंदुओं के सपनों को साकार किया। वे हरिद्वार से गंगाजल मंगवाकर उसे कांचीपुरम के शिव मंदिर में अर्पित करवाती थीं। उन्होंने पुरी में धर्मशाला तथा द्वारका में भी धार्मिक निर्माण कार्य करवाए। जिस प्रकार आदि शंकराचार्य जी ने सनातन परंपरा को जोड़ते हुए चार धाम की स्थापना की, उसी परंपरा में राजमाता अहिल्याबाई होलकर जी ने भारत को सांस्कृतिक रूप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर जगदलपुर विधायक श्री किरण देव साय ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। प्रस्तावना विश्व मांगल्य सभा की श्रीमती निकिता ताई द्वारा प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री श्री केदार कश्यप, प्रदेश अध्यक्ष एवं जगदलपुर विधायक श्री किरण देव साय, श्री अजय जामवाल, श्री पवन साय सहित बड़ी संख्या में विधायकगण, सांसदगण, निगम-मंडल-आयोग के अध्यक्षगण, जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।