samacharsecretary.com

सूरजपुर को सड़कों का तोहफा, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयास लाए रंग

मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयास से सूरजपुर को मिली सड़कों की सौगात मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की पहल से सूरजपुर को मिली सड़कों की सौगात सूरजपुर को सड़कों का तोहफा, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयास लाए रंग तीन सड़कों के निर्माण के लिए 14.28 करोड़ रुपए की मंजूरी रायपुर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के विशेष प्रयासों से सूरजपुर जिले की तीन महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को राज्य शासन द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं की कुल लागत 14.28 करोड़ रुपये है, जिनमें लगभग 9.80 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा। यह मंजूरी वित्त विभाग की सहमति के उपरांत जारी की गई है, जिसका उद्देश्य जिले की आवागमन व्यवस्था को सुगम बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को गति देना है।  स्वीकृत परियोजनाओं में बीरपुर अटल चौक से करमपुर सीमा एवम कसलगिरी सीमा तक सड़क निर्माण (लंबाई 3.40 किमी) के लिए 4.43 करोड़ रुपए,  कसलगिरी से शिवसागरपुर तक 1.40 किमी के लिए 2.19 करोड़ रुपए,प्रतापपुर-भैयाथान मुख्य मार्ग ( राज्य मार्ग क्र.12)  से झिलमिली होते हुए परसापारा तक मार्ग निर्माण (लंबाई 5.00 किमी) के लिए 7.66 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है।  महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा, वर्तमान सरकार ग्रामीण संपर्क और बुनियादी ढांचे के विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। सूरजपुर की इन सड़कों से न केवल आवागमन बेहतर होगा, बल्कि यह सामाजिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगी।इन परियोजनाओं से सूरजपुर जिले के कई ग्रामों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचेगा और यह कार्य क्षेत्रीय विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

विगत डेढ़ वर्षों में 1.80 लाख से अधिक सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन संपन्न, डेढ़ वर्षों में हुए 351 नेत्रदान

रायपुर : राज्य के 11 जिलों को भारत सरकार से मिला कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस (सीबीबीएफएस) स्वास्थ्य विभाग द्वारा दृष्टिहीनता को रोकने के लिए वृहद स्तर पर किया जा रहा है कार्य विगत डेढ़ वर्षों में 1.80 लाख से अधिक सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन संपन्न, डेढ़ वर्षों में हुए 351 नेत्रदान नेत्रदान को लेकर बढ़ रही है जागरूकता, डेढ़ वर्षों में हुए 351 नेत्रदान रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा दृष्टिहीनता की रोकथाम हेतु वृहद स्तर पर कार्य किया जा रहा है। दृष्टिहीनता के प्रमुख कारणों में से एक मोतियाबिंद है, जो सामान्यतः एक आयुजन्य नेत्र रोग है। एक निश्चित आयु के पश्चात इसका होना सामान्य माना जाता है, किन्तु इसका ऑपरेशन कर दृष्टि पुनः प्राप्त की जा सकती है। इसके उपचार हेतु गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क नेत्र ऑपरेशन की सुविधा राज्य के 25 जिला चिकित्सालयों एवं 10 चिकित्सा महाविद्यालयों सहित कुल 43 स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है, जहाँ नियमित रूप से नेत्र ऑपरेशन किए जा रहे हैं। राज्य में अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 1,45,580 तथा अप्रैल 2025 से जून 2025 तक 27,245 मोतियाबिंद ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए गए हैं। प्रदेश में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी "राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना" संचालित है, जिसके अंतर्गत सभी जिलों को ‘‘कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस’’ (सीबीबीएफएस) प्रदान किया जाना है। इस योजना के अंतर्गत दोनों आंखों में मोतियाबिंद से दृष्टिहीन रोगियों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर ऑपरेशन द्वारा उन्हें दृष्टिहीनता से मुक्त किया जाता है। अब तक राज्य के 11 जिलों — कबीरधाम, रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार, बालोद, दुर्ग, राजनांदगांव, खैरागढ़, रायगढ़, कोरबा एवं बस्तर — को दृष्टिहीनता मुक्त घोषित किए जाने हेतु दावा भारत सरकार को प्रेषित किया गया है। वहीं कांकेर एवं बेमेतरा जिलों के दावों का सत्यापन कार्य प्रगति पर है, जिसके उपरांत प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाएगा। दृष्टिहीनता के एक अन्य प्रमुख कारण "ग्लॉकोमा" की भी पहचान और उपचार हेतु विभाग सजग है। यह आंख की एक जटिल बीमारी है, जिसकी प्रारंभिक अवस्था में रोगी को जानकारी नहीं होती और जब पता चलता है, तब तक दृष्टि का ह्रास हो चुका होता है। इसकी गई दृष्टि वापस नहीं लाई जा सकती। इसकी पहचान केवल नियमित नेत्र परीक्षण से ही संभव है। अतः 40 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक 6 माह में नेत्र परीक्षण कराने की सलाह दी जाती है। राज्य के सभी विकासखंड केन्द्रों में इसकी जांच की सुविधा उपलब्ध है। कॉर्नियल दृष्टिहीनता की रोकथाम के लिए "कॉर्नियल दृष्टिहीनता मुक्त राज्य योजना" भी संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत सभी जिलों में कॉर्नियल दृष्टिहीन रोगियों की पहचान कर, नेत्र प्रत्यारोपण केन्द्रों से उनका सत्यापन कराते हुए नेत्र बैंक में पंजीयन कराया गया है। नेत्रदान प्राप्त होते ही प्राथमिकता के आधार पर इनका प्रत्यारोपण किया जाता है। जनजागरूकता के माध्यम से नेत्रदान को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 263 और अप्रैल 2025 से जून 2025 तक 88 नेत्रदान संपन्न हुए हैं। अन्य सामान्य नेत्र रोगों के उपचार की सुविधा राज्य के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में निःशुल्क उपलब्ध है। सभी जिला चिकित्सालयों में निर्धारित दिवसों पर स्पेशल क्लीनिक आयोजित किए जाते हैं, जिनके अंतर्गत ग्लॉकोमा, रेटिना, डायबिटिक रेटिनोपैथी, पीडियाट्रिक ऑप्थैल्मोलॉजी सहित अन्य नेत्र रोगों का उपचार किया जाता है। अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक ऐसे 81,000 से अधिक तथा अप्रैल 2025 से जून 2025 तक 25,000 से अधिक रोगियों का उपचार किया गया है। गुणवत्तापूर्ण नेत्र स्वास्थ्य सेवाएं, नियमित स्क्रीनिंग शिविर, आधुनिक उपकरणों से जांच तथा तत्काल सर्जरी की सुविधा के माध्यम से प्रदेशवासी निरंतर लाभान्वित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग, छत्तीसगढ़ प्रदेश की जनता को बेहतर, प्रभावी और सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

कोतबा स्वास्थ्य केंद्र को मिलेगा सामुदायिक स्तर का दर्जा, 4.37 करोड़ स्वीकृत

कोतबा के स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के उन्नयन के लिए 4.37 करोड़ रूपए की स्वीकृति कोतबा स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ा बढ़ावा, CHC अपग्रेड के लिए 4.37 करोड़ मंजूर कोतबा स्वास्थ्य केंद्र को मिलेगा सामुदायिक स्तर का दर्जा, 4.37 करोड़ स्वीकृत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल  रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल से जशपुर जिले के कोतबा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को अब 50 बिस्तरीय  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन और वहाँ आवश्यक अधोसंरचना निर्माण के लिए 4 करोड़ 37 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। इस राशि से भवन निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। कोतबा क्षेत्र के लिए यह एक बड़ी सौगात है। इससे पूर्व जशपुर जिले को 220 बिस्तर वाले आधुनिक अस्पताल की स्वीकृति मिल चुकी है, जो जिले की स्वास्थ्य सुविधा को एक नई मजबूती देगा। वहीं कुनकुरी विकास खंड के ग्राम गिना बहार में 8 करोड़ की लागत से 50 बिस्तरीय मातृत्व और शिशु अस्पताल बनाने की भी स्वीकृत दी जा चुकी है। जिससे मां और बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कोतबा समेत आस-पास के ग्रामीण अंचलों के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा की इससे कोतबा  क्षेत्र के लोगों को इलाज की बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर सौगातें मिल रही हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के नागरिकों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

नेशनल एआरटी एवं सरोगेसी बोर्ड के 4 सदस्य राज्यों में शामिल है छत्तीसगढ़

रायपुर : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में नेशनल एआरटी एवं सरोगेसी बोर्ड की बैठक संपन्न छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में हुए शामिल नेशनल एआरटी एवं सरोगेसी बोर्ड के 4 सदस्य राज्यों में शामिल है छत्तीसगढ़ रायपुर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा जी की अध्यक्षता में नेशनल एआरटी ऐंड सेरोगेसी एक्ट 2021 के तहत छठवें नेशनल एआरटी ऐंड सेरोगेसी बोर्ड की बैठक हाइब्रिड मोड में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी एवं बोर्ड के सदस्य राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बोर्ड के सदस्य के रूप में छत्तीसगढ़ , चंडीगढ़, तमिलनाडु एवं तेलगांना राज्य शामिल हैं।  छत्तीसगढ़ राज्य की तरफ से स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया तथा आयुक्त सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ प्रियंका शुक्ला बैठक में उपस्थित रहे।  बोर्ड की बैठक में तीन अहम मुद्दों को सर्व सहमति से पारित किया गया। इसके तहत देश के अंदर या बाहर भ्रूण/युग्मक के अंतरण के अनुमति हेतु 884 मामलों के प्रकरणों को स्वीकृति दी गई। इसके साथ ही भारतीय मूल के दंपत्ति (ओसीआई) के 14 मामलों में अधिनियम के तहत सरोगसी हेतु स्वीकृति दी गई। एक अन्य मामले में एक केंद्र से दूसरे केंद्र में क्रायोप्रिजर्व के सामूहिक हस्तांतरण (केंद्र के बंद होने के कारण) के तीन प्रकरणों में स्वीकृति दी गई। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बैठक में एक अहम सुझाव देते सरोगेसी के लिए अधिनियम में निर्धारित उम्र सीमा पर पुर्नविचार कर एक्ट में संशोधन किये जाने की बात कही, इसके लिये केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की सराहना की गई।  बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एआरटी एवं सेरोगेसी एक्ट को मानवता के विकास के कदम में एक आवश्यक कदम बताया। उन्होंने बैठक में कहा कि आज जो एजेंडा पारित हुए हैं उससे समाज को लाभ मिलेगा।

जशपुर में 74,000 परिवारों को मिला पक्का घर, PM आवास योजना से आई खुशहाली

जशपुर  छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन की योजनाओं का लाभ अब समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना से दूरस्थ अंचलों के लोगों को लाभान्वित किया जा रहा है और हितग्राही अपने खुद के मकान में सुकून से जीवन व्यतीत कर रहे हैं। जिला पंचायत विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जशपुर जिले में 74 हजार 346 मकान पूर्ण हो चुके हैं। जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम खटंगा के एक साधारण परिवार की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है, जहां शासन की तीन योजनाओं ने एक साथ उनकी ज़िंदगी को नई दिशा दी है।  74 हजार से अधिक आवास बन कर तैयार सुरेशराम की पत्नी सुमित्रा बाई बताती हैं पहले हम कच्चे घर में रहते थे। बरसात हो या गर्मी, हमेशा डर बना रहता था। पानी टपकता था, दीवारें गिरने का डर और रात-बिरात सांप, बिच्छू का डर अलग से। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला पक्का घर अब हमारे लिए एक नई दुनिया जैसा है। अब न डर है, न परेशानी3 घर भी साफ-सुथरा है, और बच्चों को पढ़ने-लिखने का भी अच्छा माहौल मिल गया है।  उनकी बेटी कुमारी संगीता बताती है जब कच्चा घर था, तब हम पढ़ाई भी ठीक से नहीं कर पाते थे। बरसात के दिन बहुत दिक्कत होती थी। अब जब पक्का घर मिला है, तो मन लगता है। हम अब बहुत खुश हैं। उन्होंने आगे बताया कि मुझे मुख्यमंत्री महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने 1000 मिलते हैं। उसी से हम तेल, नमक, साबुन जैसे जरूरी सामान खरीद लेते हैं। कभी बेटी को स्कूल के लिए कॉपी-किताब भी लेना हो, तो उसी से काम चल जाता है।

नक्सलियों पर करारा प्रहार: नारायणपुर में सुरक्षाबलों ने किया बड़ा ऑपरेशन, हथियारों का जखीरा जब्त

नारायणपुर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में जवानों को बड़ी सफलता मिली है। शुक्रवार को सुरक्षाबल के जवानों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में जवानों ने 6 नक्सलियों को मार गिराया है। अभी इलाके में सर्चिंग अभियान जारी है। माना जा रहा है कि इस एनकाउंटर में नक्सलियों के कई टॉप लीडर के ढेर होने की संभावना है। सुरक्षाबल के जवान सर्चिंग अभियान के लिए निकले थे इसी दौरान नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। मुठभेड़ में छह नक्सलियों को मार जाने की पुष्टि पुलिस अधिकारियों ने की है। एनकाउंटर के बारे में जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में छह नक्सलियों को मार गिराया। हालांकि अभी मारे गए नक्सलियों की पहचान नहीं है। नक्सलियों के शव के साथ भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार भी बरामद किया गया है। क्या कहा अधिकारी ने बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में माओवादियों के मौजूदगी की सूचना मिली थी। जिसके बाद नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवानों की संयुक्त टीम को रवाना किया गया है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान शुक्रवार दोपहर माआवोदियों ने सुरक्षाबलों की टीम पर हमला किया। जिसके जवाब में जवानों ने भी फायरिंग की। अभी मिशन जारी है उन्होंने बताया कि माओवादियों और जवानों के बीच रुक-रुक कर मुठभेड़ चल रही है। अब तक तलाशी अभियान के दौरान मुठभेड़ स्थल से छह नक्सलियों के शव, एके-47 और एसएलआर राइफल, कई अन्य हथियार, विस्फोटक सामग्री तथा दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद की गई हैं। पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि अभियान अभी जारी है, इसलिए इसमें शामिल जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिक जानकारी अभी नहीं दी जा सकती है। मिशन पूरा होने के बाद देंगे जानकारी उन्होंने बताया कि अभियान पूरा होने के बाद इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मिशन में शामिल सभी जवान पूरी तरह से सुरक्षित हैं। बता दें कि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ अभियान में जवानों ने माओवादियों के कई टॉप लीडरों को ढेर किया है जिसके बाद से नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं।

अन्नदाताओं को राहत: डबल इंजन सरकार ने बढ़ाया चावल उपार्जन लक्ष्य, अब 8 लाख मीट्रिक टन अधिक खरीद

रायपुर  प्रदेश के किसानों के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए केंद्रीय पूल हेतु चावल उपार्जन के लक्ष्य को 70 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। यह निर्णय राज्य के लाखों अन्नदाताओं के परिश्रम और विश्वास को सशक्त करता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय पर  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के अन्नदाताओं की समृद्धि के लिए  डबल इंजन सरकार दृढ़संकल्पित है। मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रदेश के लिए यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि हमारे अन्नदाताओं के हितों को सर्वोपरि रखने वाली यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए केंद्रीय पूल में चावल उपार्जन के लक्ष्य को 70 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन करने की स्वीकृति प्रदान की है। हमारी सरकार के प्रयासों से केंद्र सरकार ने 08 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त चावल उपार्जन करने की स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह निर्णय छत्तीसगढ़ के किसानों की आर्थिक स्थिति को और अधिक मजबूत करेगा। साथ ही प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री साय की घोषणा: धान खरीदी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

रायपुर,  प्रदेश के किसानों के लिए आज एक अत्यंत हर्ष और गर्व का दिन है। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के अनुमान को 70 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन करने की ऐतिहासिक स्वीकृति प्रदान की है। यह निर्णय प्रदेश के लाखों अन्नदाताओं की मेहनत को नई पहचान और उनकी आर्थिक समृद्धि को नई दिशा देगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अभूतपूर्व निर्णय के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी जी के प्रति आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केंद्र और राज्य सरकार की "डबल इंजन" प्रतिबद्धता का सजीव प्रमाण है, जिसमें किसान कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा सोशल मीडिया 'एक्स' में पोस्ट करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 8 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त धान खरीदने की स्वीकृति, हमारे किसानों के परिश्रम को मान्यता देने वाला कदम है। यह न केवल उनकी आय में वृद्धि करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार किसानों के हित में काम कर रही है और केंद्र सरकार से समन्वय करते हुए उनके लिए हरसंभव सुविधा सुनिश्चित कर रही है। राज्य के धान उत्पादक किसानों को बेहतर मूल्य, समय पर भुगतान और सुगम खरीदी प्रक्रिया के लिए ठोस रणनीति बनाई जा रही है। धान खरीदी सीमा में यह वृद्धि प्रदेश के किसानों के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है। यह उनके परिश्रम और उत्पादन क्षमता में केंद्र की आस्था का संकेत है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगठित बनाए रखने के लिए पूरी तैयारी कर चुकी है। प्रदेश के अन्नदाताओं की समृद्धि के लिए सरकार लगातार नई योजनाएँ और उपाय लागू कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों के जीवन में खुशहाली और सम्मान लाना ही हमारी सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के अन्नदाता नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री साय की घोषणा: धान खरीदी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

रायपुर,  प्रदेश के किसानों के लिए आज एक अत्यंत हर्ष और गर्व का दिन है। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के अनुमान को 70 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन करने की ऐतिहासिक स्वीकृति प्रदान की है। यह निर्णय प्रदेश के लाखों अन्नदाताओं की मेहनत को नई पहचान और उनकी आर्थिक समृद्धि को नई दिशा देगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अभूतपूर्व निर्णय के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी जी के प्रति आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केंद्र और राज्य सरकार की "डबल इंजन" प्रतिबद्धता का सजीव प्रमाण है, जिसमें किसान कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा सोशल मीडिया 'एक्स' में पोस्ट करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 8 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त धान खरीदने की स्वीकृति, हमारे किसानों के परिश्रम को मान्यता देने वाला कदम है। यह न केवल उनकी आय में वृद्धि करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार किसानों के हित में काम कर रही है और केंद्र सरकार से समन्वय करते हुए उनके लिए हरसंभव सुविधा सुनिश्चित कर रही है। राज्य के धान उत्पादक किसानों को बेहतर मूल्य, समय पर भुगतान और सुगम खरीदी प्रक्रिया के लिए ठोस रणनीति बनाई जा रही है। धान खरीदी सीमा में यह वृद्धि प्रदेश के किसानों के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है। यह उनके परिश्रम और उत्पादन क्षमता में केंद्र की आस्था का संकेत है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगठित बनाए रखने के लिए पूरी तैयारी कर चुकी है। प्रदेश के अन्नदाताओं की समृद्धि के लिए सरकार लगातार नई योजनाएँ और उपाय लागू कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों के जीवन में खुशहाली और सम्मान लाना ही हमारी सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के अन्नदाता नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ेंगे।

राजस्व मंत्री का बड़ा ऐलान: 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री पर रोक, शहरी क्षेत्र बाहर

रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक-2025 पारित हो गया है. राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने विधेयक पेश किया, जिसे चर्चा के बाद पारित किया गया. इस विधेयक में वर्तमान भाजपा सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें 5 डिसमिस से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री की अनुमति थी. विधानसभा में राजस्व मंत्री वर्मा ने विधेयक पर अपनी बात रखते हुए कहा कि “धारा 70 में पूर्व में भाजपा सरकार में 5 डिसमिल के नीचे की जमीन की रजिस्ट्री नहीं होती थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद धड़ल्ले से 5 डिसमिल से नीचे की जमीन की रजिस्ट्री करवायी गई, जिसके कारण पूरे प्रदेश में अवैध प्लॉटिंग शुरू हो गई. उन्होंने कहा कि इससे जगह-जगह समस्याएं उत्पन्न हो गई.” अभी धारा में जो संशोधन किया जा रहा है, उसके अनुसार 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री नहीं होगी. मंत्री वर्मा ने स्पष्ट किया कि यह शहरों में लागू नहीं होगा, क्योंकि शहर वैसे भी कृषि भूमि से बाहर हैं. शहर में डायवर्टेड भूमि जो व्यवसायिक एवं आवासीय होता है, उसकी रजिस्ट्री हो जाती है. धारा 107 में जो संशोधन है, वह जियो रिफरेन्सिंग बेस्ड नक्शे तैयार किए जा रहे हैं. इसके आने से सीमांकन व बटांकन के सारे विवाद समाप्त हो जाएंगे. जियो रिफेरेन्सिंग से बने डिजिटल मैप को मिली कानूनी मान्यता उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में जियो रिफरेन्सिंग का काम चल रहा है, लेकिन विधिक मान्यता नहीं थी. इसलिए विधेयक लाया गया है, इस विधेयक के माध्यम से जियो रिफेरेन्सिंग का डिजिटल मैप को मान्यता मिलेगी, उसके हिसाब से काम होगा, भविष्य में नक्शा बंटाकन में कोई गड़बड़ी नहीं होगी. राजस्व मंत्री वर्मा ने विधेयक के धारा 110 की उपधारा 7 में रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया की जानकारी दी और साथ ही साथ ही दान की भूमि का नए प्रावधान बताए. अब रोड, गार्डन, मंदिर के लिए छोड़ी जमीन नहीं बेच पाएंगे बिल्डर इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि जो कॉलोनी डेवलपर बहुमंजिला भवन बनाते हैं और फ्लैट्स बेचते हैं. फ्लैट तो क्रेता के नाम पर होता है, लेकिन जमीन बिल्डर के नाम पर होती है. इसमें भी संशोधन किया गया है. अब फ्लैट मालिकों के साथ 10 हजार वर्गफुट जमीन भी सामानुपातिक रूप से उन क्रेताओं के नाम पर रहेगी. चाहे वह गार्डन हो, मनोरंजन का स्थान हो, भवन हो, उस एरिया में जितनी जमीन रहेगी, वह सभी समानुपातिक रूप से वहां पर बसने वाले क्रेताओं के नाम पर दर्ज होगी. अब तक रोड, गार्डन के लिए छोड़ी हुई जगह पर कॉम्पलेक्स बना देते थे और रोड को बेच देते थे, यह सभी समस्याएं संशोधन में ठीक हो जाएंगी. पट्टा अधिकार को लेकर हितग्राही की वार्षिक आय में वृद्धि राजस्व मंत्री वर्मा ने भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक 2025 के अलावा एक और विधेयक छत्तीसगढ़ नगरीय क्षेत्रों के आवासहीन व्यक्ति को पट्टाधृति अधिकार (संशोधन) विधेयक 2025 पेश किया, जिसे चर्चा के बाद पारित कर दिया गया. इस विधेयक के तहत बीएलसी के अंतर्गत नगरीय निकाय क्षेत्र में निवासरत पात्र हितग्राही ईडब्ल्यूएस श्रेणी की वार्षिक अधिकतम आय 3 लाख रुपए निर्धारित की गई है, जबकि छत्तीसगढ़ नगरीय क्षेत्रों के आवास व्यक्ति को पट्टाधृति अधिकार अधिनियम 2023 की कंडिका 2(ख) पात्र व्यक्ति की वार्षिक आय ढाई लाख रूपए से अधिक न हो, का प्रावधान है, इसलिए राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए का संशोधन कर रही है.