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सांसों पर संकट! दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने को GRAP में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली  दिल्ली एनसीआर और आसपास के इलाकों के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) में बड़े बदलाव किए हैं। CAQM ने प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को एक स्टेज पहले कर दिया है। यानी, जो पाबंदियां पहले सबसे खराब हवा होने पर लगती थीं, अब वे उससे थोड़ी बेहतर हवा होते ही लागू हो जाएंगी। इस आदेश के मुताबित ग्रैप IV के तहत 'गंभीर' एक्यूआई के लिए लागू किए जाने वाले उपाय ग्रैप 3 के तहत लागू किए जाएंगे।  सीएक्यूएम की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक GRAP IV के तहत उपाय अब GRAP III के तहत लागू होंगे, इसलिए एनसीआर राज्य सरकारें यह तय करेंगी कि क्या सरकारी, नगर निगम और प्राइवेट ऑफिसों में 50 फीसदी कर्मचारियों को घर से काम (Work From Home) करने को कहा जा सकता है। वहीं केंद्र सरकार, केंद्र सरकार के ऑफिसों में कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति देने पर निर्णय ले सकती है। इस बीच, GRAP की समय-सारिणी में बदलाव का निर्देश देते हुए, वर्तमान में GRAP चरण II के तहत उपाय GRAP चरण I के अंतर्गत किए जाएंगे। अब GRAP I के तहत, बिजली की सप्लाई बिना रुकावट के सुनिश्चित की जाएगी ताकि लोग जनरेटर न चलाएं। ट्रैफिक जाम कम करने के लिए सिग्नल पर ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात होंगे और पब्लिक ट्रांसपोर्ट (बस/मेट्रो) बढ़ाए जाएंगे। इसी तरह GRAP III के उपाय GRAP II के तहत लागू किए जाएंगे। नए GRAP II में, दिल्ली सरकार और एनसीआर राज्य सरकारें दिल्ली और गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जिलों में सरकारी ऑफिसों और नगर निकायों के समय में बदलाव करेंगी। राज्य सरकारें एनसीआर के अन्य क्षेत्रों में सराकरी कार्यालयों और नगर निकायों के समय में बदलाव करने का निर्णय ले सकती हैं।  

इंटरनेशनल टेरर लिंक! दिल्ली में बम के बाद सामने आई चीन-तुर्की-पाकिस्तान की नई साजिश

नई दिल्ली  पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के इशारे पर दिल्ली में अंजाम दिए गए बम धमाके के 10 दिन बाद ही अब 'बंदूक' वाली एक साजिश का खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े हथियार तस्कर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार पाकिस्तान, चीन और तुर्की से जुड़े हुए हैं। पूरे नेटवर्क के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ बताया गया है, जो तरह-तरह से भारत में खून-खराबे और तबाही की साजिश रचने में व्यस्त रहता है। दिल्ली पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान मनदीप, दलविंदर, रोहन और अजय के रूप में हुई है। इनके कब्जे से चीन और तुर्की में बने 10 अत्याधुनिक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 92 जिंदा कारतूस की बरामदगी हुई है। बरामद पिस्टल्स में तुर्की में निर्मित PX-5.7 और चीन में निर्मित PX-3 शामिल हैं। ये पिस्टल बेहद खतरनाक हैं, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर स्पेशल फोर्स में होता है। खंगाला जा रहा पूरा नेटवर्क गिरोह का सीधा संबंध आईएसआई से मिला है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुट गई है। पता लगाया जा रहा है कि इस तरह के कितने पिस्टल पहले आ चुके हैं और नई खेप किन लोगों तक पहुंचना था। ड्रोन से पंजाब भेजते थे हथियार एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तुर्की और चीन में निर्मित इन बंदूकों को भारत भेजने का काम आईएसआई की ओर से किया जा रहा था। यह भी पता चला है कि हथियारों को पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते दिल्ली तक पहुंचाया जा रहा था। तस्करी से जुड़े गुर्गे ड्रोन के जरिए पंजाब में सीमा पार गिराते थे। यहां से इन पिस्टल को दिल्ली लाया गया था। पिस्टल की सप्लाई दिल्ली और आसपास के इलाकों में अपराधियों को होनी थी।

प्रदूषण की भारी मार: दिल्ली-एनसीआर का AQI 600+, लोगों का बाहर निकलना मुश्किल

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के कई हिस्सों में आज सुबह वायु गुणवत्ता (Air Quality) एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि यह गंभीर प्लस (Severe Plus) की श्रेणी में दर्ज किया जा रहा है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है। 600 के पार पहुंचा AQI कई जगहों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 600 के आंकड़े को भी पार कर गया है। यह बताता है कि हवा में प्रदूषक कणों (Pollutants) की मात्रा बेहद अधिक हो गई है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज़्यादा प्रदूषित क्षेत्रों की स्थिति कुछ इस प्रकार है: इलाका     दर्ज AQI     श्रेणी वज़ीरपुर     691     गंभीर प्लस (सबसे प्रदूषित) आनंद विहार     620     गंभीर प्लस जहांगीरपुरी     583     गंभीर प्लस बहादुरगढ़     550     गंभीर प्लस इन इलाकों के अलावा लोनी, रोहिणी और नोएडा सेक्टर-116 में भी प्रदूषण का स्तर 'गंभीर' श्रेणी में बना हुआ है। यह खतरनाक स्तर लोगों को सांस लेने में भारी परेशानी दे रहा है खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से ही श्वसन संबंधी बीमारियों (Respiratory Ailments) से जूझ रहे लोगों के लिए स्थिति बहुत गंभीर है। अधिकारियों को तत्काल इस पर काबू पाने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।  

खराब वायु गुणवत्ता के कारण दिल्ली स्कूलों में खेलकूद रोकी गई

नई दिल्ली दिल्ली में हवा की हालत बेहद खराब हो चुकी है और अब यह दमघोंटू होती जा रही है। एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) के लगातार बहुत खराब श्रेणी में होने की वजह से दिल्ली सरकार ने स्कूलों में स्पोर्ट्स और आउटडोर एक्टिविटीज को रद्द करने का आदेश दिया है। यह आदेश ऐसे समय पर आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले ही कमीशन फॉर एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट (CAQM) से कहा था कि दिल्ली के स्कूलों में नवंबर और दिसंबर में खेल गतिवधियों को रोकने के लिए निर्देश जारी करने पर विचार किया जाए। सीएक्यूएम ने अपनी अडवाजरी में कहा है कि सभी तरह की केल प्रतियोगिताओं को टाल दिया जाए। यह भी कहा गया है कि दिल्ली में हवा की मौजूदा गुणवत्ता बच्चों की सेहत के लिए जोखिम भरा है। सीएक्यूएम की सलाह दिल्ली-एनसीआर के सभी स्कूल, कॉलेज यूनिवर्सिटीज और मान्यता प्राप्त खेल संघों के लिए है। राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार को हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ रही और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) मामूली गिरावट के साथ 370 दर्ज किया गया, जो बृहस्पतिवार को 391 था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने पहले यह अनुमान लगाया था कि वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में जा सकती है। सीपीसीबी के अनुसार, एक्यूआई 0 से 50 के बीच ‘अच्छा’, 51 से 100 ‘संतोषजनक’, 101 से 200 ‘मध्यम’, 201 से 300 ‘खराब’, 301 से 400 ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 ‘गंभीर’ माना जाता है। सीपीसीबी के ‘समीर’ ऐप के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कुल 23 निगरानी स्टेशनों ने ‘बेहद खराब’ वायु गुणवत्ता दर्ज की, जबकि 13 स्थानों पर प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ देखा गया। वजीरपुर में एक्यूआई सबसे अधिक 442 दर्ज किया गया। आर के पुरम, बवाना, आनंद विहार, जहांगीर पुरी और रोहिणी में भी यह 400 से ऊपर ही रहा।

सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश: लग्ज़री पेट्रोल-डीजल वाहनों पर पाबंदी, EV नीति होगी सख्ती से लागू

नई दिल्ली Ban on Luxury Petrol-Diesel Cars: दिल्ली की हवा जब नवंबर आते-आते धुएँ की चादर ओढ़ लेती है, तब सिर्फ इंसान नहीं, नीतियों की भी सांस फूलने लगती है. ऐसे वक्त में सुप्रीम कोर्ट का एक सुझाव ने देश के लग्जरी कार के मालिकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. अदालत का कहना है अब समय आ गया है कि लग्ज़री पेट्रोल-डीजल लग्जरी कारें धीरे-धीरे सड़क से हटाई जाएं. सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव देते हुए कहा है कि, पेट्रोल और डीजल से चलने वाली लग्जरी कारों पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध लगाने पर विचार होना चाहिए. यह सुझाव उस समय आया है जब देश इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की दिशा में तेज़ी से बढ़ तो रहा है, लेकिन लग्ज़री सेगमेंट में अब भी ज़्यादातर लोग पारंपरिक इंजन वाली (पेट्रोल-डीजल) कारों को ही प्राथमिकता देते हैं. यह सुझाव सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसका प्रतिनिधित्व वकील प्रशांत भूषण कर रहे थे. याचिका में मांग की गई है कि सरकार की मौजूदा ईवी नीतियों को ज़मीन पर सख्ती से लागू किया जाए, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों को वास्तव में बढ़ावा मिल सके. क्या है कोर्ट का सुझाव? 13 नवंबर 2025 को हुई सुनवाई में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच ने कहा कि, शुरुआत लग्ज़री इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) यानी पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों पर पाबंदी से हो सकती है. अदालत के मुताबिक, बड़ी इलेक्ट्रिक कारें अब आसानी से उपलब्ध हैं और उन्हीं सुविधाओं के साथ आती हैं जिन्हें VIP और बड़े कॉरपोरेट घराने अपने वाहन चुनते समय देखते हैं. ऐसे में इन लग्जरी मॉडलों को चरणबद्ध तरीके से हटाने से आम जनता प्रभावित नहीं होगी. बेंच ने यह भी सुझाव दिया कि बड़े महानगरों में पायलट प्रोजेक्ट चलाकर लोगों को पेट्रोल-डीजल वाहनों के बजाय EV की ओर प्रोत्साहित किया जा सकता है. बेंच का कहना है कि जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ेगी वैसे ही चार्जिंग स्टेशनों की मांग भी बढ़ेगी. साथ ही चार्जिंग इंफ्रा को बेहतर होनी शुरू हो जाएगी. क्या समीक्षा लायक हो चुकी है EV पॉलिसी सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों पर केंद्र सरकार के 13 मंत्रालय काम कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सभी नीतियों, नोटिफिकेशन और डेवलपमेंट की एक विस्तृत रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी पूछा कि क्या मौजूदा EV पॉलिसी, जो 5 साल से अधिक पुरानी हैं, अब समीक्षा लायक हो चुकी हैं. अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी, जिसमें विस्तृत रिपोर्ट पेश की जानी है. लग्जरी इलेक्ट्रिक कारों की मांग भारत में लग्जरी सेगमेंट में इलेक्ट्रिक (EV) की हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जबकि आम बाजार में यह सिर्फ 2–3 प्रतिशत है. यही वजह है कि इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में BMW और Mercedes-Benz जैसी कंपनियों ने जबरदस्त इलेक्ट्रिक कार बिक्री दर्ज की है. दिलचस्प बात यह है कि 1 करोड़ रुपये से ऊपर की इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ भी अब पहले से कहीं तेज़ी से बिक रही हैं. यानी ऐसे लोग जो वाहन पर ज्यादा पैसा खर्च करने में सक्षम है वो इलेक्ट्रिक कारों को एक बेहतर विकल्प के तौर पर देख रहे हैं.  टॉप 5 लग्ज़री कार ब्रांड्स की सालाना बिक्री (यूनिट में) क्रम         ब्रांड            वित्त वर्ष 24                 वित्त वर्ष 25 1.     मर्सिडीज-बेंज        18,123                    18,928 2.       बीएमडब्ल्यू           15,420                15,995 3.     जगुआर लैंडरोवर      4,436                   6,183 4.      ऑडी                    7,049                  5,993 5.     वोल्वो                    2,150                   1,750 इन आंकड़ों से साफ दिखता है कि वित्त वर्ष 25 में मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है, जबकि ऑडी और वोल्वो की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है. जगुआर लैंडरोवर ने सबसे अधिक तेजी दिखाई है और FY24 के मुकाबले FY25 में अच्छी ग्रोथ हासिल की है. कुल मिलाकर, मार्केट में जर्मन ब्रांड्स का दबदबा कायम है और Mercedes-Benz अभी भी लग्ज़री सेगमेंट की सबसे अधिक बिकने वाली कार ब्रांड बनी हुई है. कितनी कारों पर पड़ेगा असर भारत में पैसेंजर व्हीकल सेग्मेंट में लग्ज़री कारों का मार्केट शेयर बहुत ही कम है. ये देश में बेची वाली कुल कारों का तकरीबन 1% है. जो साल 2030 तक बढ़कर 4-5% पहुंचने की उम्मीद है. लग्ज़री कारों की मार्केट प्रेजेंस का अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि, बीते अक्टूबर में टाटा नेक्सन बेस्ट सेलिंग कार बनी और इसके कुल 22,083 यूनिट बेचे गए थे. जो मर्सिडीज-बेंज की सालान बिक्री (18,928) से भी ज्यादा है. खैर, 37-38.8%. मार्केट शेयर के साथ मर्सिडीज-बेंज लग्ज़री कार सेग्मेंट की लीडर बनी हुई है. दूसरी ओर तकरीबन 32% बाजार पर बीएमडब्ल्यू का कब्ज़ा है. जगुआर और ऑडी के बीच थर्ड पोजिशन को लेकर खींचतान जारी है, जिसमें FY25 में जगुआर आगे है. वाहनों के इस बिक्री के आंकड़ों में इन ब्रांड्स के इलेक्ट्रिक वाहन भी शामिल हैं.  ये कार ब्रांड्स होंगे प्रभावित अगर यह प्रतिबंध लागू होता है तो इसका सीधा असर उन लग्ज़री कार ब्रांड्स के खरीदारों पर पड़ेगा जो इलेक्ट्रिक विकल्प होने के बावजूद पेट्रोल या डीजल वाली लग्जरी कारें चुनते हैं. भारत में कई लग्जरी ब्रांड अपने इलेक्ट्रिक मॉडल बेच रहे हैं, लेकिन ग्राहकों का बड़ा हिस्सा अब भी पुराने पावरट्रेन को ही तरजीह देता है. ऐसे में यह बदलाव पूरी तरह इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर धकेल सकता है और कंपनियों को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करने पड़ सकते हैं. इस सुझाव पर अमल किया जाता है तो, इससे मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, जगुआर लैंडरोवर और ऑडी जैसे ब्रांड्स सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. हालांकि इन ब्रांड्स ने भी इंडियन मार्केट में इलेक्ट्रिक कारों का पोर्टफोलियो बढ़ाना शुरू कर दिया है. लेकिन अभी भी महंगी और लग्ज़री कार खरीदारों के बीच पेट्रोल-डीजल … Read more

घर में आई खुशियों की बहार, सीमा हैदर और पाकिस्तानी भाभी ने मनाया जश्न

ग्रेटर नोएडा पाकिस्तानी भाभी के नाम से मशहूर सीमा हैदर इन दिनों बहुत खुश है। वजह ही कुछ ऐसी है। दो साल पहले चार बच्चों को लेकर पड़ोसी मुल्क से भागकर आई सीमा हैदर और सचिन की जिंदगी लगातार बदलती जा रही है। दोनों की चर्चित प्रेम कहानी सोशल मीडिया पर इतनी वायरल हुई कि लाखों लोग अब भी हर दिन उनके बारे में जानना चाहते हैं। और लोगों की इसी उत्सुकता से सीमा और सचिन की बल्ले-बल्ले हो गई है। यूट्यूब की कमाई से कुछ दिन पहले एक कमरा बनवाने वाली सीमा हैदर नया शानदार घर बनवा रही है।   अपने नए घर को बनते देख सीमा हैदर और सचिन मीणा खुशी से झूम रहे हैं। अपने यूट्यूब अकाउंट पर दोनों अपने प्रशंसकों के साथ इस खुशी को साझा भी कर रहे हैं। बीच-बीच में वे वीडियो बनाकर दिखाते हैं कि कंस्ट्रक्शन का काम किस तरह चल रहा है और कितना तैयार हो चुका है। सीमा हैदर एक वीडियो में कहती है कि पुराना घर काफी छोटा था और परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक होने की वजह से बहुत दिक्कत होती थी। पांच बच्चों और पति-पत्नी के लिए एक कमरे में गुजारा करना कठिन था। सीमा हैदर ने कहा कि भगवान, प्रशंसकों और यूट्यूब के आशीर्वाद से उन्होंने ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा में ही एक नया प्लॉट खरीदा है और इस पर अब नया मकान बनाया जा रहा है। दो मंजिले में मकान को बेहद खुबसूरती के साथ बनाया जा रहा है। सीमा और सचिन ने यह तो नहीं बताया कि उन्होंने प्लॉट और इस मकान में कितना पैसा खर्च किया है, लेकिन जाहिर एनसीआर में जमीन खरीदने और मकान बनवाने का खर्च का अंदाजा यहां रहने वाले लोग आसानी से लगा सकते हैं। जाहिर है कि यूट्यूब और सोशल मीडिया के अन्य प्लैटफॉर्म से सीमा और सचिन की अच्छी कमाई हो रही है। सीमा के भारत आने के बाद से ही सचिन उस किराने की दुकान में नौकरी छोड़ चुका है जहां वह कभी दिन के 8-10 घंटे बिताकर गुजारा लायक कमा पाता था।  

आतंकी कनेक्शन का दोहराव! अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर रिपोर्ट के सनसनीखेज़ खुलासे

नई दिल्ली  दिल्ली कार ब्लास्ट के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम सुर्खियों में आया. दरअसल, दिल्ली में ब्लास्ट करने वाले उमर नबी का कनेक्शन इसी यूनिवर्सिटी से था. तभी से यूनिवर्सिटी पर जांच तेज कर दी गई है. हाल ही में इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट आई, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ. बता दें कि 2008 में अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में भी एक अल-फलाह स्टूडेंट का नाम सामने आया था. अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट 2008 इंडियन मुजाहिदीन का सक्रिय सदस्य मिर्जा शादाब बेग भी अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज का ही छात्र रह चुका है. बेग ने 2007 में फरीदाबाद स्थित अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन) पूरा किया था. इसके बाद साल 2008 में अहमदाबाद में हुए सीरियल धमाकों में वह शामिल पाया गया था. यह आतंकी पिछले कई सालों से गायब है. सूत्रों के मुताबिक, इसकी लोकेशन अफगानिस्तान में बताई जाती है.   धौज स्थित यूनिवर्सिटी पर जांच दिल्ली धमाके के बाद फरीदाबाद के धौज में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर से जांच एजेंसियों के रडार पर आ गई है. अल-फलाह कॉलेज की शुरुआत अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के रूप में हुई थी. बाद में 2014 में हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज अमेंडमेंट एक्ट के तहत इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला. 2008 जयपुर ब्लास्ट में अहम भूमिका मिर्जा शादाब बेग इंडियन मुजाहिदीन के लिए एक बेहद अहम सदस्य था. 2008 के जयपुर धमाकों में विस्फोटक इकट्ठा करने के लिए मिर्जा शादाब बेग उडुपी गया था. वहीं पर मिर्जा ने रियाज और यासीन भटकल को बड़ी मात्रा में डेटोनेटर और बेयरिंग मुहैया कराए थे, जिनसे IED तैयार किए गए. इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के कारण बेग बम बनाने की तकनीक में काफी माहिर माना जाता था. अहमदाबाद-सूरत धमाकों में बड़ी भूमिका अहमदाबाद धमाकों से करीब 15 दिन पहले बेग अहमदाबाद पहुंचा था और उसने पूरे शहर की रेकी की थी. बेग ने तीन टीमों के साथ मिलकर धमाकों की प्लानिंग की और लॉजिस्टिक, IED फिटिंग और बम तैयार करने का काम किया था. इसके अलावा, गोरखपुर में हुए 2007 के बम धमाकों में भी शादाब बेग का नाम सामने आया था. इन धमाकों में 6 लोग घायल हुए थे. बाद में आईएम से लिंक जुड़ने पर गोरखपुर पुलिस ने उसकी संपत्ति कुर्क कर ली थी.

कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन आज दिल्ली में, मेजबानी करेंगे NSA अजीत डोभाल

नई दिल्ली  नई दिल्ली में हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने वाले कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की सातवीं बैठक आज होगी। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इस महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करेंगे। इस बैठक में मालदीव, मॉरीशस, श्रीलंका और बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शामिल होंगे।  सेशेल्स इस बार पर्यवेक्षक देश के तौर पर हिस्सा लेगा, जबकि मलेशिया को विशेष अतिथि के रूप में न्योता दिया गया है। इससे पहले छठी बैठक दिसंबर 2023 में मॉरीशस में हुई थी। इसके बाद अगस्त 2024 में श्रीलंका में सभी सदस्य देशों ने कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन के औपचारिक संस्थापक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। इन देशों के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी लगातार संपर्क में रहते हैं और उनकी आखिरी बैठक जुलाई 2024 में ऑनलाइन हुई थी। कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन की शुरुआत इस मकसद से हुई थी कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा के मुद्दे पर सभी देश मिलकर काम करें। इस बार की बैठक में सदस्य देश पिछले ढाई साल में किए गए कामों की समीक्षा करेंगे और आगे की दिशा तय करेंगे। चर्चा के मुख्य विषय समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद और उग्रवाद से मुकाबला, ड्रग्स और मानव तस्करी जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध पर रोक, साइबर सुरक्षा, बिजली-पानी-पोर्ट जैसे अहम ढांचे की सुरक्षा, और प्राकृतिक आपदाओं में एक-दूसरे की तुरंत मदद करना रहेंगे। साथ ही 2026 के लिए नई कार्ययोजना और रोडमैप को मंजूरी दी जाएगी। भारत इस समूह में सबसे बड़ा और सक्रिय सदस्य है और लगातार कोशिश कर रहा है कि हिंद महासागर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पड़ोसी और द्वीपीय देश एक मजबूत मंच पर साथ आएं। गुरुवार की बैठक से इस दिशा में एक और ठोस कदम बढ़ने की उम्मीद है।

निठारी हत्याकांड में नया मोड़: मकान मालिक पांधर ने खोले पुराने राज, आखिर किसने की थी हत्याएं?

नोएडा  नोएडा के निठारी इलाके में 2005-06 के बीच कई महिलाओं और बच्चों के अचानक लापता होने की घटनाओं ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच में घर के पास नालियों से मानव अस्थियां बरामद हुईं और गंभीर आरोप सामने आए – बलात्कार, हत्या और नेक्रोफिलिया तक। इस खौफनाक कहानी का केंद्र बिंदु बना बंगलो D-5, जिसके मालिक मोनिंदर सिंह पांधर और उनके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली पर आरोप लगे। हालांकि, 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को सभी मामलों में बरी कर दिया, लेकिन सवाल अब भी वही है: बच्चों की हत्या किसने की? 17 साल की जेल, अब खुला मोनिंदर पांधर का सच व्यवसायी पांधर ने भारत टुडे के साथ विशेष बातचीत में अपने 17 साल के जेल जीवन और रहस्यमयी घटनाओं के बारे में बताया। उनका कहना है कि उन्हें हमेशा मीडिया हंगामा और जांच में अनियमितताओं का सामना करना पड़ा। पांधर ने कहा, “मुझे हत्या या बलात्कार के किसी भी मामले में कभी चार्जशीट नहीं किया गया। फिर सवाल उठता है कि जिम्मेदार कौन? क्या पुलिस, क्या मैं, या कोई और?” उन्होंने दावा किया कि मीडिया दबाव के कारण जांच पूरी तरह प्रभावित हुई और कई बार जांचकर्ताओं को सही दिशा में काम करने का मौका ही नहीं मिला। लापता बच्चों की कहानी 2005-06 के दौरान निठारी इलाके से कई बच्चे, ज्यादातर लड़कियां, गायब हुईं। उनकी अस्थियां घर के पास की नाली से बरामद हुईं। पांधर का कहना है कि बच्चों के लापता होने की खबरें 2006 में केस सामने आने के बाद ही सुर्खियों में आईं। उन्होंने साफ किया कि अधिकांश बच्चे D-1 से D-6 घरों और निठारी ब्रिज के आसपास गायब हुए थे, केवल D-5 तक ही सीमित नहीं थे। पांधर ने यह भी बताया कि वह बिजनेस के चलते सप्ताह में केवल कुछ दिन ही घर में रहते थे। वहीं, घर के पास पहले से ही पुलिस की गश्त लगी हुई थी। उन्होंने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया और कहा कि जवान ज्यादा उम्र के थे, जो पर्याप्त सतर्क नहीं रह पाए। सुरेंद्र कोली पर मोनिंदर पांधर की राय पांधर ने जोर देकर कहा कि उन्होंने कभी सुरेंद्र कोली में कोई संदेहजनक गतिविधि नहीं देखी। कोली को मुख्य आरोपी मानते हुए जनता के बीच छवि बनाई गई थी। पांधर ने कहा, “अगर वह अच्छा नहीं होता, तो मैं उसे अपने घर में नहीं रखता।” हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि घर में कभी-कभार एस्कॉर्ट्स आती थीं, लेकिन लगातार पार्टी या असामान्य गतिविधियों का मुद्दा नहीं था। कुछ लड़कियां घर में इसलिए आती थीं क्योंकि वहां वातावरण शांत और आरामदायक था।   रहस्य ही रह गया सवाल यह है कि क्या एस्कॉर्ट्स की उपस्थिति ने कोली को प्रभावित किया? पांधर ने स्पष्ट किया, “मैं किसी के मन की बात नहीं जान सकता, केवल वही इसका जवाब दे सकता है।” पांधर को खुद तब पता चला जब पुलिस ने उनकी हिरासत में skeletal remains की सूचना दी। उन्होंने कहा, “सबसे पहले जनता को पता था, मुझे नहीं। मैं सबसे ज्यादा हैरान हुआ जब मेरे घर का नाम सामने आया।” 

दिल्ली-एनसीआर में घुटन भरी हवा, ग्रेटर नोएडा का AQI खतरनाक स्तर पर पहुंचा

नोएडा  दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति पर पहुंच चुका है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ग्रेटर नोएडा देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में पहले स्थान पर दर्ज किया गया है। मंगलवार को जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 454 तक पहुंचा था, वहीं बुधवार सुबह नॉलेज पार्क–V स्टेशन पर एक्यूआई बढ़कर 473 तक जा पहुंचा, जो सीजन का सबसे भयावह स्तर है। यह स्तर ‘गंभीर श्रेणी’ से भी आगे निकल चुका है और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे जीवन के लिए अत्यंत हानिकारक बता रहे हैं। दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद की स्थिति भी कम गंभीर नहीं है।  दिल्ली के कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर एक्यूआई 400 से 450 के बीच रिकॉर्ड किया गया, जबकि नोएडा में सेक्टर-125, सेक्टर-116 और सेक्टर-1 जैसे क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर 430 से 445 के बीच बना हुआ है। गाजियाबाद में संजय नगर और लोनीमें एक्यूआई 440 से ऊपर दर्ज किया गया, जो दिन-प्रतिदिन बढ़ती प्रदूषण की भयावह तस्वीर पेश करता है। ऐसे हालत तब बने हैं जब दिल्ली-एनसीआर में ग्रेप -3 (ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान) के नियम लागू हैं। इस चरण में कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर रोक, जेनरेटर सेट पर प्रतिबंध, डीजल ट्रकों की एंट्री पर नियंत्रण और सड़क पर पानी का छिड़काव जैसे कई सख्त कदम उठाए जाते हैं। बावजूद इसके, प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लग रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ते वाहन, कचरा जलाना, निर्माण कार्य, औद्योगिक धुंआ और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने जैसी वजहें लगातार हवा की गुणवत्ता को और खराब कर रही हैं। उधर मौसम विभाग के अनुसार इस सप्ताह तेज़ हवाओं या बारिश की संभावना नहीं है, वहीं न्यूनतम तापमान लगभग 11 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 26 डिग्री सेल्सियस रहने तथा दिनभर कोहरे की स्थिति बनी रहने से प्रदूषक कण वातावरण में फंसे रहेंगे। इसका मतलब है कि आगामी दिनों में प्रदूषण से राहत की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि वर्तमान स्तर की हवा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और हृदय या श्वास संबंधी रोगियों के लिए अत्यंत खतरनाक है। उन्होंने लोगों को घर के बाहर अनावश्यक न निकलने, मास्क पहनने और सुबह-शाम की सैर टालने की सलाह दी है।