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राजगीर के कुंडों में फिर लौटेगी जलधारा: मुख्यमंत्री नीतीश

नालंदा/राजगीर. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज नालंदा जिले के राजगीर पहुंचे, जहां उन्होंने सबसे पहले गिरीयक के घोड़ा कटोरा स्थित गंगा जी जलाशय का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने राजगीर में रोप-वे, वैतरणी नदी और ब्रह्मकुंड का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। जानकारी के अनुसार, राजगीर कुंड परिसर में विकास कार्यों और कम बारिश के कारण गंगा-जमुना कुंड समेत कई कुंडों की जलधारा इन दिनों बंद हो गई है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री स्वयं हालात का आकलन करने पहुंचे। कुंडों में जलप्रवाह बहाल करने के निर्देश बैठक में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए, ताकि कुंडों में जलप्रवाह बहाल करने और श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो, इसकी व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। गौरतलब है कि मई महीने में राजगीर में पुरुषोत्तम मास मेला आयोजित होना है। मुख्यमंत्री ने मेले की तैयारियों की भी विस्तार से समीक्षा की और समयबद्ध तरीके से सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। राजगीर में आगामी पुरुषोत्तम मास मेले को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड में है।

सड़क किनारे खड़े ट्रक से कार टकराने से सेना के 4 जवानों की गई जान

जगदलपुर/मेदिनी नगर/पलामू. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में शनिवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे में 201 कोबरा बटालियन के चार जवानों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा अर्जुनी थाना क्षेत्र के ग्राम खपरी बाईपास के समीप हुआ। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि कार ट्रक के नीचे जा घुसी और उसकी छत पूरी तरह उखड़ गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोबरा बटालियन के जवान जगदलपुर से लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी तेज रफ्तार डिजायर कार खपरी बाईपास पर सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार सीधे ट्रक के नीचे फंस गई और उसमें सवार जवान बुरी तरह अंदर जकड़ गए। कार को काटकर जवानों को बाहर निकाला प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और राहत दल ने गैस कटर की मदद से कार को काटकर जवानों को बाहर निकाला। चार जवानों को घटनास्थल पर ही मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक गंभीर रूप से घायल जवान को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू मृतकों में झारखंड के पलामू जिले के हैदरनगर प्रखंड अंतर्गत रानीदेवा गांव निवासी मुकेश कुमार भी शामिल हैं। जैसे ही गांव में उनके निधन की सूचना पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों के अनुसार, मुकेश मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ स्वभाव के थे। उनके असमय निधन से गांव में मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक आशंका है कि तेज रफ्तार और सड़क किनारे खड़े ट्रक से अचानक टकराव हादसे का कारण बना। इस हृदयविदारक घटना से सुरक्षाबलों के साथ-साथ पलामू जिले में भी गहरा शोक व्याप्त है।

झारखंड में बदली सदियों पुरानी रीति! 400 साल में पहली बार पंचायत की जगह पुलिस तक पहुंचा विवाद

गढ़वा झारखंड के गढ़वा जिले के भवनाथपुर प्रखंड का लरहरा गांव अपनी अनोखी परंपरा को लेकर चर्चा में है। यहां पिछले करीब 400 वर्षों से किसी भी विवाद का मामला थाने तक नहीं पहुंचा। गांव के लोग आज भी आपसी मामलों को पंचायत के जरिए ही सुलझाते हैं। पिछले 400 सालों से एक भी केस थाने में नहीं पहुंचा दरअसल, जिले के गढ़वा जिला अंतर्गत भवनाथपुर प्रखंड के लरहरा गांव में आज भी परंपरागत पंचायत व्यवस्था कायम है। इस गांव में कोरवा जनजाति के करीब 40 परिवार रहते हैं, जिन्हें आदिम जनजाति की श्रेणी में रखा जाता है। हाल ही में गांव में एक संवेदनशील मामला सामने आया। बताया जाता है कि गांव के एक चार बच्चों के पिता और चार बच्चों की मां को आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया। दोनों रिश्ते में चाची-भतीजा बताए जा रहे हैं। मामला सामाजिक मर्यादा से जुड़ा होने के कारण गांव में हलचल मच गई और तुरंत पंचायत बुलाई गई। पंचायत ने कड़ी चेतावनी और माफी के साथ मामला सुलझाया इसी दौरान महिला ने गांव वालों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दर्ज करा दी। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई। थाने से बुलावा आने पर गांव के सभी लोग एकजुट होकर वहां पहुंचे। पुलिस पूछताछ में ग्रामीणों ने कहा कि पिछले 400 सालों से एक भी केस थाने में नहीं पहुंचा। यहां हर मामला पंचायत स्तर पर ही सुलझा गया है और आगे भी पंचायत स्तर पर ही सुलझाया जाएगा। आखिरकार पुलिस ने बिना हस्तक्षेप किए मामला पंचायत पर छोड़ दिया। पंचायत ने दोनों पक्षों को कड़ी चेतावनी और माफी के साथ मामला सुलझा दिया। गांव के बुजुर्ग रामपृत कोरबा, बिठल कोरबा, मुंद्रिका कोरबा, मणि कोरबा और सुरेंद्र कोरबा का कहना है कि उनके पूर्वजों के समय से ही गांव में यही नियम चला आ रहा है कि हर विवाद पंचायत में ही सुलझाया जाएगा। इससे गांव में आपसी भाईचारा बना रहता है। लरहरा गांव के लोगों का मुख्य पेशा जंगल से लकड़ी काटकर उसे भवनाथपुर बाजार में बेचना है। आधुनिक दौर में भी यह गांव अपनी परंपरा और सामाजिक व्यवस्था को कायम रखे हुए है।  

बिहार विधानसभा में हंगामा, छात्रा की मौत पर राबड़ी देवी का हमला—सम्राट चौधरी पर इस्तीफे का दबाव

पटना राबड़ी देवी ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस बयान पर भी तीखा हमला बोला जिसमें उन्होंने कहा था कि 24 घंटे के भीतर आरोपी पकड़ा जाएगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे इस्तीफा देंगे। राबड़ी देवी ने सवाल उठाया कि अब तक इस्तीफा क्यों नहीं दिया गया। पटना के फुलवारीशरीफ इलाके में एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला विधान परिषद में गूंजा। शुन्यकाल में इसे उर्मिला ठाकुर ने उठाया। इस घटना पर पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि छात्रा को एक युवक ने छत से नीचे फेंक दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था की नाकामी का ताजा उदाहरण है और सरकार को तुरंत आरोपी को गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। इधर एम्स गोलम्बर के पास घटना के विरोध में सड़क पर आगजनी कर प्रदर्शन किया गया। राबड़ी देवी ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस बयान पर भी तीखा हमला बोला जिसमें उन्होंने कहा था कि 24 घंटे के भीतर आरोपी पकड़ा जाएगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे इस्तीफा देंगे। राबड़ी देवी ने सवाल उठाया कि अब तक इस्तीफा क्यों नहीं दिया गया और अपराध पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है। सरकार के दावे सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गए हैं, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है। घटना गुरुवार फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र के हरिनगर स्थित सुमित्रा हाइट अपार्टमेंट में हुई। 16 वर्षीय छात्रा फुलवारीशरीफ के चकमुसा की रहनेवाली थी। वह 12वीं में पढ़ती थी और अपार्टमेंट के पहले तल्ले पर संचालित कोचिंग में पढ़ने जाती थी। छात्रा के परिजनों ने बालकनी से फेंक कर हत्या करने का आरोप लगाया है। सीसीटीवी फुटेज में अपार्टमेंट की सीढ़ी पर लड़की के पीछे जाते दो युवक समेत चार लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इनमें वहां का गार्ड और उस फ्लैट में काम कर रहा बढ़ई भी शामिल है। पुलिस के अनुसार गुरुवार की सुबह छात्रा कोचिंग आई थी। अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से उसके नीचे गिरने की बात कही जा रही है। घटना के बाद कोचिंग संचालक ने पुलिस को सूचना नहीं दी। छात्रा को इलाज के लिए एम्स ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए घर लेकर चले गए। जब घरवालों ने देखा कि उसके शरीर पर चोट के निशान हैं तो परिवार वाले सीसीटीवी कैमरा देखने पहुंचे। सीसीटीवी में दो युवक छात्रा के पीछे जाते दिखे। इसके बाद परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। पुलिस भी मौके पर पहुंची और छानबीन में जुटी। उधर, घर से वापस शव को पोस्टमार्टम के लिए एम्स ले जाया गया। शाम सात बजे एफएसएल टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। साक्ष्य एकत्रित किए गए। जिस बालकनी से गिरने से यह घटना हुई वहां कोई नहीं रहता है। उस फ्लैट में काम चल रहा है। घटनास्थल के पास ही छात्रा की चप्पल पड़ी मिली  

हाईवे पर स्पीड लेजर गन बढ़ाकर गाड़ियों की रफ्तार पर लगेगी लगाम

रांची. राज्य में सड़क दुर्घटना रोकने के लिए झारखंड पुलिस लगातार कोशिश में जुटी है। सड़क दुर्घटना के कारणों में वाहनों के रफ्तार को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। वाहनों के रफ्तार पर लगाम कसने के लिए हाइवे पर स्पीड लेजर गन की संख्या बढ़ाने पर विचार हुआ है। इसकी खरीदारी होने जा रही है। वहीं, शहरों में बेहतर गुणवत्ता के कैमरे भी जहां-तहां चौक-चौराहों पर लगेंगे, जो नंबर प्लेट की पहचान कर नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान जेनरेट करके भेजेंगे। दूसरे राज्यों में हाइवे पर वर्तमान में ऐसे कैमरे लग रहे हैं, जो स्पीड लेजर गन की तरह काम कर रहे हैं। कैमरे में स्पीड लिमिट तय है। उस स्पीड लिमिट को जैसे ही उक्त वाहन क्रास करता है, उसका स्वत: कट जाता है। राजधानी के भीतर वाहनों की रफ्तार पर लगाम कसने के लिए विशेष वाहन इंटरसेप्टर को भी उतारा गया था, लेकिन उक्त वाहन खराब पड़ा है। सड़क सुरक्षा कोषांग ने नए विशेष वाहन, इंटरसेप्टर खरीदने के लिए राज्य सरकार से अनुशंसा की थी। इसपर भी काम चल रहा है। राज्य में नए कैमरे, नए विशेष वाहन इंटरसेप्टर सहित सड़क सुरक्षा के लिए नए-नए उपकरणों की खरीदारी होनी है। कोषांग ने सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम कसने के लिए मोटर वाहन अधिनियम का सौ प्रतिशत अनुपालन पर जोर दिया है, जिसके लिए उपरोक्त उपकरणों की आवश्यकता पड़ेगी। करीब 30-31 तरह के उपकरण से राज्य की यातायात पुलिस लैस होगी। इनमें स्पीड लेजर गन, विशेष वाहन इंटरसेप्टर, ब्रेद एनालाइजर, स्ट्रेचर, हाई रेजोल्यूशन कैमरे, बटन कैमरे, व्हील लाक, बाडी वोर्न कैमरे आदि शामिल हैं। ये पुलिस को कानून के अनुपालन में मदद भी करेंगे और बदनामी से भी बचाएंगे। बॉडी ओर्न कैमरे चौक-चौराहों पर तैनात यातायात पुलिस को लगाने होंगे, ताकि आम नागरिक से उनके किए गए बर्ताव उसमें रिकार्ड हो सकें। इससे यह होगा कि पुलिस पर लगने वाले दुर्व्यवहार के आरोपों से उक्त पुलिसकर्मी, पदाधिकारी बच सके। बेहतर स्वास्थ सुविधा पर भी जोर सड़क दुर्घटना में अधिक से अधिक घायलों की जान बच सके, इसके लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पर भी जोर दिया गया है। अब सभी जिलों में वहां के सिविल सर्जन व वहां की पुलिस के बीच आपसी समन्वय और मजबूत होगी। घायलों को अस्पताल ले जाने पर बेहतर समन्वय से घायलों को त्वरित स्वास्थ्य सुविधा पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए भी सभी सिविल सर्जन को राज्य सरकार की ओर से सतर्क किया गया है। सरकार की ओर से जारी पत्र में सड़क सुरक्षा कोषांग की समीक्षा बैठक में आए तथ्यों को भी शामिल किया गया है।

गर्मी में पावर कट से बचने की बिजली कंपनियों ने की खास तैयारी

पटना. बिहार में इस बार लोगों को गर्मी के दौरान बिजली से जुड़ी परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी. बढ़ती गर्मी और संभावित बिजली की मांग को देखते हुए ऊर्जा विभाग ने आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त रखने की खास रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. ऊर्जा सचिव एवं बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में साउथ और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों की संचालन और रखरखाव समीक्षा बैठक हुई. ऊर्जा सचिव ने क्या आदेश दिया? जानकारी के मुताबिक, बैठक में गर्मियों के लिए बिजली प्रबंधन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए. बैठक में ऊर्जा सचिव ने कहा कि पीक लोड के दौरान भी उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिले, इसके लिए ट्रांसफॉर्मरों, फीडरों और ग्रिड उपकेंद्रों की पूर्व-रखरखाव योजना पर सख्ती से अमल किया जाए. हॉट-लाइन मेंटेनेंस की गति तेज करने, कमजोर और दोषपूर्ण लाइनों की पहचान कर तत्काल मरम्मत और स्टैंडर्ड संचालन प्रक्रिया के शत-प्रतिशत पालन करने का आदेश दिया गया. इन्हें किया गया अलर्ट इसके साथ ही उन्होंने यह क्लियर किया कि गर्मी में फॉल्ट और ब्रेकडाउन की स्थिति न्यूनतम रखने के लिए फील्ड लेवल पर टीमें अलर्ट मोड में रहें. ऊर्जा सचिव ने बिजली लाइनों पर कार्य के दौरान सुरक्षा उपकरणों के अनिवार्य उपयोग पर भी जोर दिया. बैठक में साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक महेंद्र कुमार और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक राहुल कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने गर्मियों के लिए तैयारियों की जानकारी दी. बढ़ सकता है बिजली का बोझ जानकारी के मुताबिक, बिहार में लोगों पर बिजली बिल का बोझ बढ़ सकता है. 1 अप्रैल 2026 से बिजली की नई दरें लागू हो सकती हैं. बिहार विद्युत विनियामक आयोग को राज्य की दोनों बिजली कंपनियों (साउथ और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन) की तरफ से टैरिफ प्रस्ताव भेजा गया है. इसके साथ ही बिजली के रेट में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं.

25311 पदों की बिहार इंटर लेवल भर्ती, 2023 में जारी विज्ञापन की आज लास्ट डेट

बिहार कर्मचारी चयन आयोग की बीएसएससी सेकेंड इंटर लेवल भर्ती 2023 के लिए आवेदन की आज लास्ट डेट है। इस भर्ती के तहत 25311 पदों पर भर्ती होगी। रजिस्ट्रेशन करने व फीस जमा कराने की अंतिम तिथि आज 13 फरवरी 2026 है। फॉर्म भरकर पूरी तरह सब्मिट करने की अंतिम तिथि 16 फरवरी 2026 कर दी गई है। आपको बता दें कि यह भर्ती 2023 में निकली थी। तब से इस भर्ती में कई बार पद बढ़ चुके हैं। आवेदन की अंतिम तिथि भी कई बार बढ़ाई जा चुकी है। इस भर्ती में करीब 33 लाख से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। बार बार आवेदन की तिथि बढ़ाए जाने से परीक्षा तिथि का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थी भड़क गए हैं। उनका कहना है कि बार बार फॉर्म रीओपन करके डेट बढ़ाई जा रही है। इस भर्ती का सरकार ने मजाक बना दिया है। आपको बता दें कि पहली इंटरस्तरीय परीक्षा के लिए 2014 में विज्ञापन निकाला था। इसका फाइनल रिजल्ट सात साल में पूरा हुआ था। क्या है योग्यता – 12वीं (इंटर)पास। कुछ पदों के लिए इंटर के साथ कंप्यूटर पर टाइपिंग की योग्यता भी मांगी गई है। कैसे होगा इस भर्ती में चयन अभ्यर्थियों का चयन प्रारंभिक लिखित परीक्षा, मुख्य परीक्षा, स्किल टेस्ट से होगा। परीक्षा ऑनलाइन मोड में होगी। एग्जाम पैटर्न – प्रीलिम्स एग्जाम ऑब्जेक्टिव टाइप होगा। प्रीलिम्स में सामान्य अध्ययन, सामान्य विज्ञान, गणित, मानसिक क्षमता से प्रश्न पूछे जाएंगे। कुल 150 प्रश्न होंगे। प्रत्येक गलत उत्तर के लिए एक अंक कटेगा। पेपर 2 घंटा 15 मिनट की होगी। इंटर लेवल प्रीलिम्स एग्जाम पासिंग मार्क्स- सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स 40 फीसदी, बीसी के लिए 36.5 फीसदी, एमबीसी के लिए 34 फीसदी, एससी एसटी के लिए 32 फीसदी हैं। नॉर्मलाइज्ड पद्धति से जारी होगा रिजल्ट विभिन्न शिफ्टों में परीक्षा होने की स्थिति में रिजल्ट नॉर्मलाइज्ड पद्धति से जारी होगा। वैकेंसी से पांच गुना उम्मीदवारों को पीटी में पास किया जाएगा। ये अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में बैठेंगे। सभी वर्गों के लिए आवेदन फीस- 100 रुपये बीएसएससी द्वितीय इंटर स्तरीय परीक्षा के आवेदन की स्थिति मुख्य रजिस्ट्रेशन अवधि (2023) – पहली बार आवेदन 27 सितंबर 2023 से शुरू हुई। – पहली विस्तारित तिथि- 11 नवंबर 2023 तक – अंतिम विस्तारित तिथि- 11 दिसंबर 2023 (यह पहली बार की प्रक्रिया का अंतिम समय था) – डॉक्यूमेंट अपलोड और सुधार (सुधार विंडो-2024) – फॉर्म भरने के बाद, आयोग ने सभी अभ्यर्थियों के लिए डॉक्यूमेंट अपलोड करना अनिवार्य कर दिया। सुधार का मौका दिया। इसे तीन बार बढ़ाया गया। – पहली बार- 18 जनवरी से 18 फरवरी 2024 तक किया गया। – दूसरी बार- इसे बढ़ाकर 18 मार्च 2024 किया गया। – तीसरी बार- इसे फिर से बढ़ाकर 11 जून 2024 तक किया गया। फॉर्म का फिर से खुलना (रिओपन- 2025-26) – हाल ही में आयोग ने पदों की संख्या बढ़ाकर 24,492 कर दी है। नए अभ्यर्थियों के लिए फॉर्म भरने का पोर्टल फिर से खोल दिया है। – रिओपन तिथि- 15 अक्टूबर 2025 – अंतिम तिथि (वर्तमान): अब इसे बढ़ाकर 31 जनवरी 2026 तक कर दिया गया है। आवेदन तिथि में विस्तार – प्रारंभिक आवेदन तिथि (संशोधित)- 15 अक्टूबर 2025 – पहली बार विस्तार (शुल्क)- 25 नवंबर 2025 से 15 दिसंबर 2025 तक – (आवेदन)- 27 नवंबर 2025 से 18 दिसंबर 2025 तक – दूसरी बार विस्तार (शुल्क)- 15 दिसंबर 2025 से 13 जनवरी 2026 तक – (आवेदन) 18 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक- नवीनतम विस्तार (शुल्क और आवेदन) : 13 जनवरी 2026 से बढ़ाकर 31 जनवरी 2026 तक-(शुल्क) और 15 जनवरी 2026 से बढ़ाकर 31 जनवरी 2026 (आवेदन) – पदों की संख्या में वृद्धि : शुरुआत में 11,098 पद थे, जिन्हें बढ़ाकर 12,199, फिर 23,175 और अंततः 24,492 कर दिया गया है।  

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देंगे 514 खिलाड़ियों को करोड़ों की स्कॉलरशिप

पटना. बिहार सरकार ने राज्य की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। खेल छात्रवृत्ति योजना के तहत इस वर्ष 514 खिलाड़ियों का चयन किया गया है। उत्कर्ष, सक्षम और प्रेरणा छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। चयन प्रक्रिया पूरी कर सूची जारी कर दी गई है। उत्कर्ष योजना में 18 खिलाड़ी उत्कर्ष योजना के तहत 18 उत्कृष्ट खिलाड़ियों का चयन हुआ है। इन्हें सालाना 20 लाख रुपये तक की स्कॉलरशिप दी जाएगी।सक्षम योजना के तहत 129 खिलाड़ियों को सालाना 5 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी। यह राशि उनके प्रशिक्षण और तैयारी में सहायक होगी। प्रेरणा स्कॉलरशिप के तहत 367 खिलाड़ियों का चयन किया गया है। इसमें 269 खिलाड़ी मशाल प्रतियोगिता और 98 खिलाड़ी ऑनलाइन आवेदन के जरिए चुने गए हैं। तीन लाख तक की वार्षिक सहायता प्रेरणा योजना के तहत चयनित खिलाड़ियों को सालाना 3 लाख रुपये तक मिलेंगे। यह राशि स्पोर्ट्स इक्विपमेंट, ट्रेनिंग और डाइट पर खर्च की जा सकेगी। खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए यात्रा व अन्य खर्च में भी मदद मिलेगी। इससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी। मुख्यमंत्री देंगे प्रमाण पत्र बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सभी चयनित खिलाड़ियों को पटना में आयोजित कार्यक्रम में प्रमाण पत्र प्रदान करेंगे। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रविंद्रन शंकरण ने बताया कि एक साल पहले शुरू हुई योजना का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। इस पहल से राज्य में खेल संस्कृति को मजबूती मिलेगी और उभरती प्रतिभाओं को आर्थिक चिंता से मुक्ति मिल सकेगी।

औषधीय पौधे में कैंसर का उपचार ढूंढने वाटिका पर खर्च होंगे 30 करोड़

भागलपुर. जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज सूबे का पहला मेडिकल कॉलेज होगा, जहां हर्बल वाटिका बनेगी। दो माह के अंदर हर्बल वाटिका तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। हर्बल वाटिका तैयार होने के बाद छात्र आयुर्वेद और एलोपैथी के बीच के संबंध पर शोध करेंगे। औषधीय पौधों पर अध्ययन कर कैंसर, हृदय रोग सहित अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार की संभावनाएं तलाशेंगे। कॉलेज परिसर में बनने वाली हर्बल वाटिका में बीएयू का सहयोग लिया जा रहा है। यह वाटिका बीएयू के वानिकी विभाग के अध्यक्ष की देखरेख में लगाई जा रही है। चालीस डिस्मिल जमीन पर लगेगी वाटिका मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अविलेश कुमार ने बताया कि कॉलेज के मुख्य भवन के पीछे, जहां एनिमल हाउस बनाया गया है, वहीं लगभग 40 डिस्मिल खाली जमीन है। इसी जमीन पर हर्बल वाटिका लगाने की योजना है। फार्माकोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. जीतेंद्र कुमार ने बताया कि हर्बल वाटिका में एलोवेरा, पुदीना, लेमनग्रास, लौंग, हरसिंगार, सप्तपर्णी, अजवाइन, अश्वगंधा, शतावर, तितराज, कपूर, शंखपुष्पी, शुगर क्योर, पत्थरचूर समेत 100 से अधिक औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। यहां लगाया जाने वाला प्रत्येक पौधा किसी न किसी रोग के उपचार में उपयोगी साबित होगा। आयुर्वेद एवं एलोपैथी के संबंधों पर होगा शोध इस वाटिका को बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद और एलोपैथी के संबंध को समझना है। डॉ. जीतेंद्र ने बताया कि यह वाटिका एमबीबीएस एवं फार्माकोलॉजी में पीजी कर रहे छात्रों के लिए बेहतर अनुभव लेकर आएगी। वाटिका की देखरेख की जिम्मेदारी फार्माकोलॉजी विभाग की होगी। फार्माकोलॉजी के छात्र यह अध्ययन करेंगे कि औषधीय पौधों से किस प्रकार की दवाएं बनाई जा सकती हैं। कई अंग्रेजी दवाएं भी औषधीय पौधों से बनती हैं। हृदय रोग के लिए दी जाने वाली दवा डिजिटलिस, फाक्सग्लोव नामक औषधीय पौधे की पत्तियों से बनती है। वहीं, यहां इस बात पर भी शोध होगा कि क्या औषधीय पौधों से कैंसर की दवा बनाई जा सकती है।

बिहार में लैंड बैंक बनाने सरकारी जमीन की तेज हुई रिकवरी

पटना. बिहार सरकार ने सरकारी जमीन की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर बड़ा प्रशासनिक अभियान शुरू किया है। कैडेस्ट्रल सर्वे में दर्ज ऐसी भूमि, जिन पर विधिसम्मत बंदोबस्ती नहीं हुई है और जो निजी कब्जे में है, उन्हें मुक्त कराने का निर्देश सभी जिला अधिकारियों को दिया गया है। हाल ही में उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी के बाद कार्रवाई और तेज कर दी गई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब अवैध कब्जे के मामलों में शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सख्ती एसएलपी (सी) संख्या 4337/2025, विनोद गांधी बनाम डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, मदुरई मामले में 22 जनवरी 2026 को उच्चतम न्यायालय ने अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी की थी। न्यायालय ने कहा कि राज्य के हित किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होने चाहिए। इसी के आलोक में मुख्य सचिव के निर्देश पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जिलाधिकारियों को त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया है। वाद दायर कर होगी जमीन की रिकवरी प्रधान सचिव सीके अनिल ने निर्देश दिया है कि ऐसी सभी जमीनों की पहचान कर विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत वाद दायर किए जाएं। प्राथमिकता के आधार पर अवैध कब्जा हटाकर सरकारी भूमि को मुक्त कराया जाएगा। जिला प्रशासन को नियमित निगरानी और प्रगति रिपोर्ट सुनिश्चित करने को कहा गया है। उपमुख्यमंत्री का सख्त संदेश उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकारी भूमि राज्य की अमूल्य संपत्ति है। इस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा न तो स्वीकार्य है और न ही सहनीय। अधिकारियों की चूक से राज्यहित प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन हर स्तर पर जवाबदेही तय करेगा। लैंड बैंक निर्माण क्यों अहम सरकार की प्राथमिकता अंचलवार सरकारी भूमि को सुरक्षित कर लैंड बैंक का निर्माण करना है। इससे औद्योगीकरण, आधारभूत संरचना विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन में भी यह पहल सहायक मानी जा रही है। विकास की आधारशिला मजबूत करने की पहल पिछले दो महीनों में भूमि सुरक्षा को लेकर कई परिपत्र जारी किए जा चुके हैं। अब जिला स्तर पर सख्त क्रियान्वयन शुरू हो गया है। स्पष्ट संकेत है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन सक्रिय और कठोर रुख अपनाएगा, ताकि विकास परियोजनाओं की राह में कोई बाधा न रहे।