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ब्लू रिवोल्यूशन की ओर बढ़ते कदम: मछली उत्पादन बढ़ा, झींगा पालन पर फोकस

रोहतास. रोहतास जिले में मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में एक नए नीली क्रांति की ओर अग्रसर है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में मछली उत्पादन में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जिला मत्स्य कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्पादन का ग्राफ 10.65 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर अब 15.5 हजार मीट्रिक टन के करीब पहुंच रहा है। जिला मत्स्य पदाधिकारी सतेन्द्र राम ने बताया कि जिले में वर्तमान में कुल 1,265 तालाब हैं। विभाग की सक्रियता के कारण इनमें से लगभग 1,150 तालाबों की बंदोबस्ती सफलतापूर्वक की जा चुकी है। इन जल निकायों के प्रबंधन के लिए जिले के सभी प्रखंडों में कुल 19 मत्स्यजीवी सहयोग समितियां सक्रिय हैं। ये समितियां न केवल सरकारी जलकर की बंदोबस्ती कर रही हैं, बल्कि राजस्व प्रबंधन और स्थानीय मछुआरों के हितों की रक्षा भी कर रही हैं। उत्पादन के बढ़ते कदम: एक नजर में जिले में मछली उत्पादन का सालाना डेटा यह दर्शाता है कि आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंच रहा है:- वित्तीय वर्ष     उत्पादन (हजार मीट्रिक टन) 2021-22     10.65 2022-23     12.85 2023-24     13.50 2024-25     14.65 2025-26 (अनुमानित)     15.50 झींगा पालन की नई राह: भुवनेश्वर में प्रशिक्षित हुए किसान मछली के साथ-साथ अब जिले में झींगा पालन की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। इसके लिए प्रायोगिक तौर पर करहगर प्रखंड के सोनवर्षा निवासी किसान गोपाल सिंह का चयन किया गया। उन्हें भुवनेश्वर स्थित केंद्रीय मीठा जल जीवपालन संस्थान में विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया है। विभाग की योजना है कि गोपाल सिंह की सफलता के बाद जिले के अन्य प्रगतिशील किसानों को भी झींगा पालन के लिए प्रोत्साहित और प्रशिक्षित किया जाए। सरकारी योजनाओं का मिल रहा लाभ – मत्स्यपालकों को सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत विभिन्न प्रकार की सहायता दी जा रही है। बताया कि मछली विक्रेताओं और पालकों के बीच किट का वितरण किया जा रहा है व बाजार तक पहुंच आसान बनाने के लिए रियायती दरों पर वाहनों का वितरण हुआ है। वहीं आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों के लिए समय-समय पर कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। किसानों की आय में काफी वृद्धि होगी – जिले में मत्स्य पालन को एक लाभदायक उद्योग के रूप में विकसित करना हमारा लक्ष्य है। तालाबों की समय पर बंदोबस्ती और झींगा पालन जैसे नए प्रयोगों से किसानों की आय में काफी वृद्धि होगी। – सतेन्द्र राम, जिला मत्स्य पदाधिकारी, सासाराम रोहतास

बिहारशरीफ शीतला मंदिर में बड़ा बदलाव, भगदड़ रोकने के लिए हटा अतिक्रमण और बनाई जा रही ढलान

 नालंदा बिहार के बिहारशरीफ के मघड़ा में मां शीतला मंदिर में 31 मार्च को हुई दर्दनाक भगदड़ के बाद अब प्रशासन पूरी तरह एक्शन में आ गया है. इस हादसे में 8 महिलाओं की जान चली गई थी. इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और मंदिर प्रबंधन पर कई सवाल उठे थे. अब ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए बड़े स्तर पर बदलाव शुरू किए गए हैं. सुधार काम शुरू शनिवार को नगर निगम और जिला प्रशासन की टीम ने मंदिर परिसर में सुधार काम की शुरुआत कर दी. सबसे पहले उन कारणों को ठीक करने पर ध्यान दिया जा रहा है, जिनकी वजह से हादसा हुआ था. जांच में पाया गया कि भीड़ ज्यादा थी और रास्ते बहुत संकरे थे. इससे भगदड़ मच गई. इसी को देखते हुए प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया. मंदिर के आसपास बने अवैध कब्जों को बुलडोजर से हटाया गया ताकि आने-जाने का रास्ता खुला और चौड़ा हो सके. अधिकारियों का कहना है कि आगे भी यह अभियान जारी रहेगा और मंदिर तक जाने वाली सड़कों को चौड़ा किया जाएगा. बनाया जा स्लोप जिस जगह पर भगदड़ हुई थी, वहां की सीढ़ियां भी खतरे का कारण बनी थीं. अब उन संकरी और फिसलन भरी सीढ़ियों को तोड़कर उनकी जगह ढलान यानी स्लोप बनाया जा रहा है. इससे भीड़ आसानी से आ-जा सकेगी और गिरने या दबने का खतरा कम होगा. लाइन में लगने के लिए अब मजबूत स्टील बैरिकेड लगाए जा रहे हैं. इससे भीड़ को व्यवस्थित रखा जा सकेगा. साफ सफाई का रखा जा रहा ध्यान मंदिर परिसर में साफ-सफाई पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है. पहले जहां गंदगी और पानी जमा रहता था, अब उसे हटाया जा रहा है. तालाब और आसपास के इलाके की सफाई कर साफ पानी भरने का काम शुरू हो चुका है. प्रशासन अब पूरी कोशिश कर रहा है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और साफ माहौल मिले और भविष्य में ऐसी कोई दुखद घटना दोबारा न हो.

नीलामी वाहन मामले में झारखंड हाईकोर्ट की नाराजगी, भुगतान में देरी को बताया जानबूझकर की गई गड़बड़ी

रांची  झारखंड हाईकोर्ट ने लातेहार जिले में नीलामी के जरिये बेचे गये वाहन की राशि भुगतान से जुड़े मामले में कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) को इस मामले के याचिकाकर्ता को तत्काल 28 लाख रुपये भुगतान करने का निर्देश दिया है. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए, भुगतान की प्रक्रिया में हुई तकनीकी देरी पर गहरी नाराजगी जताई. अदालत ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि भुगतान में जानबूझकर गड़बड़ी की गई, ताकि राशि सही व्यक्ति तक समय पर न पहुंच सके. ब्याज चेक से तो मूल राशि एनईएफटी से क्यों? सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने इस बात पर हैरानी जताई कि जब ब्याज की राशि कंपनी के नाम से चेक द्वारा दी गई थी, तो मूल राशि के लिए अलग तरीका क्यों अपनाया गया. याचिकाकर्ता ‘जेके मिनरल एंड डेवलपर्स’ की ओर से बताया गया कि, मूल 28 लाख रुपये एनईएफटी के जरिये ट्रांसफर किए गए, लेकिन इस दौरान कंपनी के बजाय प्रोपराइटर का नाम दर्ज कर दिया गया, जिससे राशि प्राप्त नहीं हो सकी. कोर्ट ने डीएमओ के इस आचरण को अस्वीकार्य बताते हुए, इसे भुगतान लटकाने की एक साजिश के रूप में देखा है. लोन वाले वाहन की नीलामी और कोर्ट का डंडा यह पूरा विवाद लातेहार प्रशासन द्वारा अवैध ढुलाई के आरोप में जब्त किए गए एक वाहन की नीलामी से शुरू हुआ था. याचिकाकर्ता जाफर अली ने वाहन तो खरीद लिया, लेकिन रजिस्ट्रेशन के समय पता चला कि वह वाहन पहले से लोन पर है और एनओसी (NOC) के बिना उसका पंजीकरण संभव नहीं है. पूर्व में भी हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि यदि समस्या का समाधान नहीं हो रहा है, तो नीलामी राशि लौटाकर वाहन वापस लिया जाए. अब कोर्ट ने 6 अप्रैल की अगली तारीख तय करते हुए निर्देश दिया है कि यदि भुगतान नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा.

सरयू राय का बड़ा दांव! हेमंत सोरेन को दिया बिना BJP-कांग्रेस सरकार बनाने का प्रस्ताव

रांची. जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस सरकार बनाने का प्रस्ताव दिया है। जेएमएम और कांग्रेस के बीच बढ़ती तल्खियों के बीच सरयू राय का यह बयान राज्य की सियासत में नए समीकरणों की संभावनाओं को जन्म दे रहा है। सरयू राय ने दावा किया कि झारखंड में ऐसी राजनीतिक स्थिति बन सकती है, जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा को न तो कांग्रेस के सहारे की जरूरत होगी और न ही भाजपा के समर्थन की। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राजनीतिक साहस दिखाते हैं तो वे स्वयं बाहर से बिना किसी शर्त के समर्थन देने को तैयार हैं। बहुमत का गणित भी बताया सरयू राय ने अपने दावे को केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विधानसभा का पूरा गणित भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि झारखंड विधानसभा में बहुमत के लिए 41 विधायकों का आंकड़ा जरूरी है। जेएमएम के पास 34 विधायक हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय जनता दल के चार विधायक, भाकपा माले के दो विधायक और जयराम महतो का एक वोट मिलाकर यह संख्या 41 तक पहुंचती है। राय ने जोर देकर कहा कि इस स्थिति में सरकार चलाने के लिए कांग्रेस या भाजपा की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने इसे व्यवहारिक और संभव विकल्प बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए। कांग्रेस-JMM रिश्तों पर उठाए सवाल सरयू राय ने मौजूदा राजनीतिक तनाव की जड़ में कांग्रेस और जेएमएम के रिश्तों को बताया। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव में कांग्रेस ने जेएमएम को उचित भागीदारी नहीं दी और अब असम चुनाव में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। उनके मुताबिक कांग्रेस केवल अपने हितों के अनुसार गठबंधन करती है, जिससे सहयोगी दलों में असंतोष बढ़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी और बाद में साथ आ जाना गठबंधन की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। राय के अनुसार, यह राजनीतिक अवसरवाद का संकेत है, जो दीर्घकाल में नुकसानदेह साबित हो सकता है। असम चुनाव के बाद बदल सकते हैं समीकरण सरयू राय ने संकेत दिया कि असम विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद झारखंड की राजनीति में बड़े बदलाव संभव हैं। उनका मानना है कि इन परिणामों का असर राज्य के गठबंधन समीकरणों पर पड़ेगा और नए राजनीतिक विकल्पों के लिए रास्ता खुल सकता है।

फर्जी प्रमाण पत्रों का खेल उजागर! BPSC पास शिक्षकों पर कार्रवाई, सैकड़ों की नौकरी पर संकट

सहरसा. बिहार के सहरसा जिले में बीपीएससी उत्तीर्ण शिक्षक भी फर्जी साबित होने लगे हैं। जिले में पिछले तीन-चार वर्षों में बिहार लोक सेवा आयोग के द्वारा ली जा रही प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर शिक्षकों का चयन किया जा रहा है। ऐसी हालत में जिले में टीआरई एक से तीन तक करीब चार हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की गयी। इन नियुक्त शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन में कई अनियमितता सामने आयी है। कई फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर संकट उत्पन्न हो गया है। बीपीएससी उत्तीर्ण शिक्षकों के प्रमाण पत्रों में मिली गड़बड़ी के आधार पर यह तो तय हो गया कि शिक्षा माफिया का तंत्र व तकनीक उच्च शिक्षा आयोग तक फैला हुआ है। इससे पूर्व वर्ष 2012-15 के बीच प्रमाण पत्र के आधार पर पहले आओ पहले पाओ के तर्ज पर शिक्षक की नौकरी हासिल की थी। उस समय में फर्जी शिक्षक चिह्नित किए गए। इधर, अब बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा परीक्षा आयोजित करनेवाले विद्यालय अध्यापकों में भी फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नैया पार करने वालों की खोज विभाग ने अब शुरू कर दी है। लगातार प्रमाण पत्रों के सत्यापन का कार्य चल रहा है। BPSC से बहाल हुए 3895 विद्यालय अध्यापक बिहार लोक सेवा आयेाग द्वारा प्रतियोगी परीक्षा आयोजित कर विद्यालयों में 3895 शिक्षकों की नियुक्ति की गयी। जिले में टीआरई 1, टीआरई 2 और टीआरई 3 में कुल मिलाकर शिक्षकों की नियुक्ति हुई, जिसमें टीआरई 1 में 1758, टीआरई 2 में 1169 एवं टीआरई 3 में 968 विद्यालय अध्यापक नियुक्त किए गए। इन सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कार्य शुरू होने से शिक्षकों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। अभी हाल ही में कंप्यूटर विज्ञान विद्यालय अध्यापकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन में करीब दो दर्जन से अधिक विद्यालय अध्यापकों की नौकरी पर तलवार लटक रही है। सबों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अब विभाग इन शिक्षकों के विरूद्ध कार्रवाई करने के मूड में है। जांचोपरांत विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी – बीपीएससी से उत्तीर्ण शिक्षकों के प्रमाण पत्रों में अनियमितता बरतने की शिकायत मिल रही है जिसकी जांच कराई जा रही है। जांचोपरांत विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। -हेमचंद्र, जिला शिक्षा पदाधिकारी, सहरसा

तेज हवाओं के साथ बारिश की चेतावनी, झारखंड में 6 अप्रैल तक खराब रहेगा मौसम, जानें अपने जिले का हाल

 रांची झारखंड में मौसम लगातार करवट ले रहा है. शुक्रवार को दिनभर आंशिक बादल छाए रहे और शाम होते-होते रांची और कोडरमा में तेज हवा के साथ बारिश हुई. इससे लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन आने वाले दिनों में मौसम और बदलने वाला है. 4 से 6 अप्रैल तक येलो अलर्ट मौसम विभाग ने 4 अप्रैल से 6 अप्रैल तक राज्य में बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है. इस दौरान कई जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना है. इन जिलों में बारिश और तेज हवा की चेतावनी शनिवार को पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, कोडरमा और धनबाद में कहीं-कहीं गर्जन के साथ बारिश हो सकती है. इसके साथ ही 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने और वज्रपात की भी संभावना जताई गई है. रविवार-सोमवार को और तेज होगा असर मौसम विभाग के अनुसार, रविवार और सोमवार को भी कई इलाकों में बारिश और गरज के साथ बादल छाए रहेंगे. इस दौरान हवा की रफ्तार बढ़कर 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. अप्रैल में टूट सकता है गर्मी का रिकॉर्ड मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, अप्रैल में मौसम का उतार-चढ़ाव जारी रहेगा. पिछले 10 वर्षों में 2016 में अधिकतम तापमान 42 डिग्री दर्ज किया गया था, जो इस बार टूट सकता है. इस महीने के पहले सप्ताह में बारिश से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन दूसरे और तीसरे सप्ताह में तापमान तेजी से बढ़ेगा और महीने के अंत तक हीट वेव की स्थिति बन सकती है. तापमान का हाल पिछले 24 घंटे में राज्य के कई हिस्सों में हल्की बारिश दर्ज की गई. सबसे अधिक 5 मिमी बारिश रामगढ़ में हुई. वहीं, सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 38.8 डिग्री सरायकेला में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री गुमला में रिकॉर्ड किया गया.

नवागढ़ की गुफाओं से फोर्ट विलियम तक, जानें शहीद बख्तर साय और मुंडल सिंह के बलिदान की गौरवशाली कहानी

गुमला आज 4 अप्रैल को बख्तर साय व मुंडल सिंह का शहादत दिवस है. देश की आजादी में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है. ऐसे तो गुमला में कई वीर पैदा हुए, जिन्होंने इस्ट इंडिया कंपनी (अंग्रेज) से लोहा लिया. इतना ही नहीं, वो अपनी साहस, शक्ति, सूझबूझ से अंग्रेजों को पराजित भी किया. इन्हीं वीर सपूतों में गुमला जिला स्थित रायडीह प्रखंड के बख्तर साय व मुंडल सिंह हैं. जिन्होंने ना इस्ट इंडिया कंपनी का विरोध किया, बल्कि उन्हें छोटानागपुर क्षेत्र में घुसने का सबक भी सिखाया. इस लड़ाई में दोनों शहीद हो गए, लेकिन आज भी गुमला जिले में इन दोनों वीर सपूतों को याद किया जाता है. इन दोनों वीरों की वीरता की कहानी आज भी रायडीह प्रखंड के वादियों में गूंजती है और लोगों के जुबान से इन सपूतों का वीरभाव सुनने को मिलता है. इन दोनों ने जिस बहादुरी से अंग्रेजों को खदेड़ा है. यह इस क्षेत्र के लिए गर्व की बात है. आज वे हमारे बीच नहीं है, लेकिन बख्तर साय व मुंडल सिंह की पूजा आज भी गुमला जिले में होती है. अंग्रेजों से लड़ाई के दौरान बख्तर व मुंडल ने नवागढ़ क्षेत्र की गुफाओं को अपना घर बनाया. यह गुफा आज भी इस क्षेत्र में साक्षात है. जहां दोनों सेनानी रहते थे. जिस तालाब का पानी पीते थे. वह तालाब भी है. युद्ध के दौरान यह तालाब रक्त से भर गया था. इसलिए इसे रक्त तालाब भी कहा जाता है.  शिवलिंग जहां दोनों पूजा करते थे. वह भी नवागढ़ में है. गढ़पहाड़ जहां युद्ध हुआ था. वह पहाड़ आज भी युद्ध की कहानी कह रही है. वीर सेनानियों की यह भूमि आज भी अंग्रेजों के पराजय की कहानी बयां करती है. बख्तर साय ने हीरा राम का सिर काट कर अंग्रेजों को भेजा था बख्तर साय नवागढ़ परगना (वर्तमान में रायडीह प्रखंड) के जागीरदार थे. उन्होंने इस्ट इंडिया कंपनी को खुली चुनौती दी. उनसे लोहा ले उसे पराजय का मुंह दिखाया. इस्ट इंडिया कंपनी की टुकड़ी बख्तर साय के सामने टिक नहीं सकी और उन्हें हार का सामना करना पड़ा. पराजय के बाद अंग्रेज छोटानागपुर के महाराजा ह्रदयनाथ शाहदेव से संधि किये. उसके बाद अंग्रेज 12 हजार रुपये टैक्स वसूली करने लगे. उस समय अंग्रेज टैक्स वसूली के लिए कड़ा रूख अपना लिये थे. जागीरदार व रैयत पैसा दे देकर परेशान हो गये थे. अंग्रेजों से संधि के बाद महाराजा ह्रदयनाथ शाहदेव ने हीरा राम को टैक्स वसूली के लिए नवागढ़ भेजा. बख्तर साय ने हीरा राम का सिर काट कर महाराजा को भेजवा दिया. महाराजा इससे अत्यंत क्रोधित हुए. इस्ट इंडिया कंपनी को इसकी सूचना दी गयी. 11 फरवरी 1812 को रामगढ़ मजिस्ट्रेट ने लेफ्टीनेंट एचओ डोनेल के नेतृत्व में हजारीबाग के सैन्य टुकड़ी को नवागढ़ के जागीरदार को पकड़ने के लिए भेजा. इसी बीच रामगढ़ बटालियन के कमांडेंट आर गार्ट ने छोटानागपुर के बारवे (वर्तमान में रायडीह, चैनपुर व डुमरी), जशपुर व सरगुजा के राजा को पकड़ने के लिए एक पत्र लिखा. साथ ही पूरे क्षेत्र की नाकेबंदी करने की सहायता मांगी. जशपुर राजा के साथ आर गार्ट का अच्छा संबंध था. इसका फायदा उठाते हुए लेफ्टीनेंट एचओ डोनेल ने हजारों सैनिकों के साथ मिलकर नवागढ़ को घेर लिया. अंग्रेजों के मंसूबों की जानकारी पनारी परगना के जागीरदार मुंडल सिंह को हो गयी थी. वे बख्तर साय की सहायता के लिए नवागढ़ पहुंच गए. दोनों ने मिलकर अंग्रेजों से लोहा लिया. अंग्रेजों की कूटनीति में दोनों वीर फंसकर शहीद हुए थे नवागढ़ में 1812 के आसपास घना जंगल था. ऊंचे ऊंचे पहाड़ थे. अंग्रेजों को मुंडल सिंह व बख्तर साय तक पहुंचने में परेशानी होने लगी. अंग्रेजों ने एक विशेष रणनीति के तहत नवागढ़ को चारों ओर से घेर लिया. बख्तर साय व मुंडल सिंह जगह बदल कर आरागढ़ा के गुफा में रहने लगे. अंग्रेजों को जब इसकी जानकारी हुई, तो वे गुफा तक जाने वाली नदी की धारा के पानी को गंदा कर दिया. जिससे बख्तर साय व मुंडल सिंह अपने सैनिकों के साथ पानी पी न सके. अंग्रेजों की इस कूटनीति चाल के बाद बख्तर व मुंडल जशपुर (छत्तीसगढ़ राज्य) के राजा रणजीत सिंह के यहां गए. जहां से दूसरे स्थान पर निकलने के कारण दोनों 23 मार्च 1812 को पकड़े गए. 4 अप्रैल 1812 को दोनों को कलकत्ता के फोर्ट विलियम में फांसी की सजा दे दी गई थी.

नीतीश का इस्तीफा कब आएगा? नई सरकार के गठन की तारीख तय, बीजेपी का सीएम उम्मीदवार कौन होगा?

पटना  बिहार में सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ होती दिख रही है. नीतीश कुमार के विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद अब उनका दिल्ली जाना पक्का हो गया. सीएम पद से इस्तीफा देने के साथ ही नीतीश को Z प्लस कैटेगरी की सुरक्षा भी मिल जाएगी, जिसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है.बिहार में अब नई सरकार के गठन का फाइनल शेड्यूल भी तय हो गया है, लेकिन सवाल यही है कि बीजेपी किसे मुख्यमंत्री बनाएगी?  नीतीश कुमार मीडिया के साथ बातचीत का सिलसिला बंद कर चुके हैं. ऐसे में लोगों के मन सवाल है कि नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्यता की कब शपथ लेंगे और सीएम पद कब छोड़ेंगे. इसके अलावा नई सरकार का गठन कब तब हो जाएगा, इन सभी सवाल से अब तस्वीर साफ होने जा रही है।  सीएम पद से नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के साथ ही सरकार गठन की औपचारिकता अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक पूरी हो जाएगी. ऐसे में नई सरकार के गठन का शेड्यूल फाइनल हो गया है. कौन मुख्यमंत्री बनेगा और कौन कुर्सी पर होगा विराजमान, ये बीजेपी को तय करना?  नीतीश कुमार सीएम पद से कब देंगे इस्तीफा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला हुआ है. इसी बीच नीतीश कुमार के दिल्ली जान का शेड्यूल सामने आ गया है. सीएम नीतीश के आवास पर 6 अप्रैल को जेडीयू के कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है. माना जा रहा है कि 6 अप्रैल को नीतीश कुमार के साथ होने वाली बैठक में जेडीयू के दिग्गज नेता कोई अहम फैसला लेंगे।  पटना में जेडीयू नेताओं के साथ बैठक के बाद नीतीश कुमार दिल्ली आएंगे. नीतीश 9 अप्रैल को दिल्ली में जेडीयू राष्ट्रीय परिषद और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेंगे. इस दौरान कई अहम फैसले ले सकते हैं. इसके अलावा बीजेपी नेताओं के साथ भी उनकी मुलाकात का कार्यक्रम में है।  मोदी-शाह के मुलाकात के बाद क्या छोड़ेंगे पद नीतीश कुमार दिल्ली प्रवास के दौरान पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात कर सकते हैं. 10 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य के रूप में सदस्यता ग्रहण करेंगे. माना जा रहा है कि 10 अप्रैल की ही नीतीश कुमार दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. पीएम से नीतीश कुमार बिहार की नई सरकार के गठन पर चर्चा कर सकते हैं।  राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना फाइनल हो जाएगा. हालांकि, राज्यसभा सदस्य रहते हुए भी नीतीश छह माह तक मुख्यमंत्री रह सकते हैं, लेकिन माना जा रहा है कि दिल्ली से लौटने के बाद नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान कर सकते हैं. खरमास खत्म होने के साथ ही राज्यपाल को नीतीश कुमार अपना मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौंप सकते हैं।  बिहार में नई सरकार गठन का शेड्यूल फाइनल नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के साथ ही नई सरकार के गठन की प्रक्रिया बीजेपी शुरू कर देगी. माना जा रहा है कि राजधानी पटना में 12 और 13 अप्रैल में से किसी दिन एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाई जा सकती है. इस बैठक में एनडीए विधायक दल का नेता चुना जाएगा, क्योंकि नए मुख्यमंत्री के चुनने में नीतीश कुमार के पसंद का भी ख्याल रखा जाना है. यह बात बीजेपी और जेडीयू दोनों ही तरफ से कही जा चुकी है. नीतीश के इस्तीफा देने के साथ ही बीजेपी नई सरकार के लिए अपनी एक्सरसाइज शुरू कर देगी।  मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ते ही बीजेपी नई सरकार के गठन के लिए सबसे पहले मुख्यमंत्री के चेहरे को चुनाव करना होगा. नए मुख्यमंत्री को चुनने में बीजेपी के साथ नीतीश कुमार का भी रोल होगा. ऐसे में मान जा रहा है कि खरमास के बाद नई सरकार के गठन की कवायद होगी, जिसके लिए एक्सरसाइज शुरू हो चुकी है. अब गेंद बीजेपी के पाले में है।  बीजेपी किसे बनाएगी बिहार का नया सीएम बिहार में यह तय है कि मुख्यमंत्री बीजेपी का ही बनेगा. लेकिन, कौन बनेगा, इसे लेकर पार्टी अभी अपने पत्ते नहीं खोल रही है जेडीयू के बड़े नेता लगातार कहते रहे हैं कि सीएम बीजेपी से ही बनेगा, लेकिन वह नीतीश के मन मुताबिक होगा. बीजेपी किसे मुख्यमंत्री बनाती है, ये बात सभी के लिए एक पहेली बनी हुई है. ऐसे में कई नामों पर चर्चा है, लेकिन किसी पर अभी तक फाइनल मुहर नहीं लगी है।  हालांकि, बिहार के नए सीएम के लिए नीतीश कुमार की पसंद की बात करें तो उन्होंने अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान इशारों-इशारों में अपने संकेत दे चुके हैं. समृद्धि यात्रा में जनसंवाद के दौरान नीतीश कुमार ने मंच पर सम्राट चौधरी के के कंधे पर हाथ रखकर सियासी संदेश देते रहे हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने कई जगह कहा भी कि अब ये ही सब काम देखेंगे. अब इससे बड़ा संकेत क्या हो सकता है।  बीजेपी क्या बिहार में भी चौंकाएगी यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी नीतीश के चयन पर मुहर लगाती है या पुरानी परिपाटी निभाते हुए कोई चौंकाने वाला नाम घोषित करती है.बीजेपी ने 2014 से अपने फैसले से चौंकाती रही है. देखा गया है कि जिसके नाम की चर्चा रहती है, उसे पार्टी सीएम नहीं बनती।  हरियाणा में मनोहर खट्टर और झारखंड में रघुवर दास के नाम चौंकाने वाले थे.मध्य प्रदेश में मोहन यादव, राजस्थान में भजन लाल शर्मा और दिल्ली में रेखा गुप्ता को बीजेपी ने सीएम बनाकर चौंका दिया था. ऐसे में अब देखना है कि बिहार में किसे सत्ता की कमान सौंपती है। 

भीषण गर्मी और लू को देखते हुए शिक्षा विभाग का फैसला, अब सुबह 6:30 बजे से शुरू होंगी कक्षाएं

पटना  बिहार में बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए शिक्षा विभाग ने छात्रों को बड़ी राहत दी है. माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने आदेश जारी किया है कि राज्य के सभी सरकारी स्कूल अब मॉर्निंग शिफ्ट में चलेंगे. यह नया नियम 6 अप्रैल से लागू होकर 31 मई तक लागू रहेगा. क्या है नया टाइम-टेबल? नए शेड्यूल के मुताबिक, अब स्कूल सुबह 6:30 बजे शुरू हो जाएंगे. आधे घंटे की प्रार्थना के बाद सुबह 7:00 बजे से पढ़ाई शुरू होगी. बच्चों को दोपहर 12:20 बजे छुट्टी दे दी जाएगी. मिड-डे मील के लिए सुबह 9:00 से 9:40 बजे तक का समय तय किया गया है. विभाग ने यह भी कहा है कि जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या ज्यादा है, वहां हेडमास्टर दो शिफ्टों में खाना खिला सकते हैं ताकि भीड़ न हो. डीएम को स्पेशल पावर गर्मी की स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने डीएम को भी स्पेशल अधिकार दिए हैं. अगर किसी जिले में गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है या लू का प्रकोप बढ़ता है, तो डीएम अपने स्तर से स्कूल के समय में और भी बदलाव कर सकते हैं. छुट्टियों के बाद फिर बदलेगा समय फिलहाल यह मॉर्निंग शिफ्ट केवल गर्मी की छुट्टियों शुरू होने तक ही लागू रहेगी. जैसे ही गर्मी की छुट्टियां खत्म होंगी और स्कूल दोबारा खुलेंगे, समय वापस पुराना वाला हो जाएगा. यानी तब स्कूल सुबह 9:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक चलेंगे. इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को जरूरी निर्देश भेज दिए गए हैं.

ऑनलाइन हाजिरी में ‘ऑन ड्यूटी’ का खेल पड़ा भारी, शिक्षा विभाग ने दी वेतन कटौती और सख्त कार्रवाई की चेतावनी

नवादा  जिले में ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति में बड़ी लापरवाही सामने आई है। इस मामले में जिला शिक्षा विभाग ने 386 शिक्षक-शिक्षिकाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिससे शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। डीपीओ स्थापना शिव कुमार वर्मा द्वारा जारी पत्र के अनुसार, 30 मार्च को कई शिक्षकों ने अटेंडेंस स्टेटस कॉलम में 'प्रेजेंट' और अटेंडेंस टाइप में 'मार्क ऑन ड्यूटी' दिखाया। हालांकि, 'मार्क ऑन ड्यूटी रीजन' कॉलम में या तो खाली छोड़ा गया था या 'डेपुटेशन' और 'ऑफिस वर्क' दर्ज किया गया था। कटेगा शिक्षकों का वेतन विभाग ने इसे विभागीय निर्देशों का उल्लंघन और मनमानी माना है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर सही उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता है, तो 'काम नहीं तो वेतन नहीं' के सिद्धांत पर वेतन कटौती की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद शिक्षकों में काफी खलबली मच गई है। कारण बताओ नोटिस जारी शिक्षा विभाग को जैसे ही या जानकारी मिली उनके द्वारा तुरंत ही सभी लोगों को कारण बताओं नोटिस थमा दिया गया है। गुरुवार को नोटिस भेज कर लोगों को या कहा गया है कि तीन दिन के अंदर सभी लोग नोटिस का जवाब भी दे। इससे पूर्व भी शिक्षा विभाग में 500 से अधिक शिक्षकों पर कार्रवाई कर चुके थे और एक बार फिर से नवादा में शिक्षकों की गजब की कारनामा देखने को मिला है। शिक्षा विभाग अलर्ट ध्यान रहे कि हाल के दिनों में शिक्षकों की ओर से हाजिरी बनाने को लेकर कुछ छेड़छाड़ का मामला बांका में अंजाम दिया गया था। ऐसी ही एक घटना पूर्व में जमुई में हुई थी। उसके बाद शिक्षा विभाग ने इस पर त्वरित एक्शन लेते हुए शिक्षकों पर कार्रवाई की है। हालांकि, बिहार के अन्य स्कूलों में शिक्षक ऑनलाइन अपनी हाजिरी बना रहे हैं। उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो रही है। हालांकि, इंटरनेट कनेक्शन कई स्कूलों में ठीक नहीं रहने की वजह से शिक्षक कभी छत पर जाकर और कभी पेड़ का सहारा लेकर हाजिरी बनाते हैं। वैसी स्थिति को भी शिक्षा विभाग को समझना होगा। ई- शिक्षाकोष से छेड़छाड़ के मामले को गंभीरता से लिया गया है। आशुतोष कुमार पांडेय