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राष्ट्रपति और पीएम का AI वीडियो बनाने वाले युवक को मुजफ्फरपुर पुलिस ने भेजा जेल

पटना. बिहार के मुजफ्फरपुर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एआई जनेरेटेड फेक वीडियो बनाकर वायरल करने वाले युवक पर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के आरोप में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी ने एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था जिसे काफी शेयर किया गया। आरोपी जिले के बोचहां का रहने वाला है और जन सुराज पार्टी से जुड़ा है। वह जसुपा के लिए वीडियो बनाता था। ग्रामीण एसपी राजेश कुमार प्रभाकर ने बताया कि एसएसपी सुशील कुमार के निर्देश पर बोचहां थाना के भगवानपुर निवासी प्रमोद कुमार राज को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 197 डी, 351(4), 352, 353, 356 और आईटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज किया गया है। उस पर आपराधिक धमकी, अपमान करना, सार्वजनिक अव्यवस्था और राष्ट्र विरोधी गतिविधि का आरोप है। साइबर थाने में इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तार करने के बाद उसे साइबर थाने पर लाया गया जहां एसएसपी सुशील कुमार और सिटी एसपी कोटा किरण कुमार ने लंबी पूछताछ की। आरोपी ने अपना दोष स्वीकार कर लिया है। सोशल मीडिया पर उस वीडियो को हजारों लोगों ने शेयर किया है और हजारों की संख्या में रिएक्शन दिए गए हैं। एसएसपी सुशील कुमार ने इस मामले में कहा है कि साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार के नेतृ्त्व में टेक्नकिकल टीम गठित कर दी गई है। टीम मामले की जांच की जा रही है। जो तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बिहार के मुख्यमंत्री नितीश और अधिकारीयों ने विभिन्न इलाकों का किया भ्रमण

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नववर्ष पटना शहर के विभिन्न इलाकों का भ्रमण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जे0पी0 गंगा पथ तथा ईको पार्क का भ्रमण कर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया तथा उन्हें नववर्ष की बधाई एवं शुभकामनायें दी। नववर्ष के अवसर पर ईको पार्क में बड़ी संख्या में परिवार के साथ पहुंचे लोग मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर काफी प्रफुल्लित हुये। मुख्यमंत्री के ईको पार्क पहुंचने की सूचना मिलते ही वहां मौजूद लोग इकट्ठा हो गये। मुख्यमंत्री को अपने करीब पाकर हर कोई इस अवसर को तस्वीर और वीडियो के जरिये अपने कैमरे में कैद किया। सभी लोगों ने हाथ हिलाकर मुख्यमंत्री का अभिवादन किया तथा उन्हें नववर्ष की हार्दिक बधाई भी दी। मुख्यमंत्री ने लोगों को अभिवादन स्वीकार किया तथा उन्हें भी नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें दी। भ्रमण के दौरान जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चैधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के सचिव डाॅ0 चन्द्रषेखर सिंह, मुख्यमंत्री के विषेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, पटना प्रमण्डल के आयुक्त अनिमेष परासर, जिलाधिकारी डाॅ. त्यागराजन एस0एम0 सहित पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

झारखंड में आभा नंबर के जरिए मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री होगी ऑनलाइन

रांची. झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य में इलाज कराने वाले हर मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री अब ऑनलाइन दर्ज होगी, जिसे किसी भी अस्पताल के डॉक्टर आसानी से एक्सेस कर देख सकेंगे। मरीज को पहले कौन-सी बीमारी थी, कहां और कब इलाज हुआ, कौन-सी दवाएं चल रही हैं या पहले दी गई थीं। ब्लड, यूरिन, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच की पूरी जानकारी सब कुछ एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। यह पूरी व्यवस्था आभा आईडी के माध्यम से संचालित की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग इसे जल्द ही राज्य के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में लागू करने की तैयारी में है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले एक साल से सभी सरकारी अस्पतालों में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू की गई थी। इसके बाद अबतक राज्य भर में 50 लाख से ज्यादा लोगों का आभा नंबर जेनरेट हो चुका है। बीते करीब एक साल से सरकारी अस्पतालों में मरीज आभा ऐप और ड्रिफकेस ऐप के जरिए खुद ही अपना रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं। आने वाले समय में शेष मरीजों को भी इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। यह सिस्टम कैसे करेगा काम आभा आईडी मरीज की डिजिटल हेल्थ पहचान होगी। यह आधार से वेरिफाइड होगी। अस्पतालों में ई-सुश्रुत पोर्टल पर डॉक्टर मरीज का पूरा डेटा दर्ज करेंगे। मेडिकल हिस्ट्री, ट्रीटमेंट और सभी रिपोर्ट्स अपलोड की जाएंगी। यह डेटा आभा पोर्टल से लिंक रहेगा। देश के किसी भी सरकारी अस्पताल में डॉक्टर इसे एक्सेस कर सकेंगे। इस नई डिजिटल व्यवस्था से मरीजों को बार-बार पुरानी रिपोर्ट साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं होगी। इमरजेंसी में डॉक्टर तुरंत मरीज की बीमारी की पूरी जानकारी देख सकेंगे। मरीज जहां चाहे, वहां इलाज करा सकेंगे। सदर अस्पताल रांची में लागू रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल में यह व्यवस्था पहले से लागू कर दी गई है। यहां पिछले कई महीनों से मरीजों का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड ऑनलाइन अपडेट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल में इलाज करा चुके किसी भी मरीज की आभा आईडी यदि देश के किसी भी सरकारी अस्पताल में डॉक्टर एक्सेस करेंगे, तो मरीज की पूरी रिपोर्ट, इलाज का विवरण और मेडिकल हिस्ट्री स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएगी। मरीज खुद कैसे बनवा सकेंगे आभा आईडी मरीज आसानी से अपना आभा आईडी बना सकते हैं। मोबाइल में आभा या ड्रिफकेस ऐप डाउनलोड करें। आधार नंबर या मोबाइल नंबर से लॉग-इन करें। ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद आईडी जनरेट होगी। यह आईडी आजीवन मान्य रहेगी।

झारखंड में पेसा नियमावली की अधिसूचना जारी

रांची. झारखंड में अब गांव की मर्जी चलेगी। राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में अब तक जो फैसले कागजों और दफ्तरों में होते थे, वह अब चौपाल में होंगे। शुक्रवार देर शाम पेसा नियमावली की अधिसूचना जारी होते ही आदिवासी इलाकों की राजनीति और प्रशासन का चेहरा बदल गया। जिस स्वशासन की बात आदिवासी समाज दशकों से करता रहा, वह पहली बार नियमों की शक्ल में जमीन पर उतरता दिख रहा है। अब गांव की बैठक सिर्फ औपचारिकता नहीं होगी। हर महीने ग्राम सभा की बैठक होगी। इसमें महिलाओं की मौजूदगी अनिवार्य होगी और फैसले खुले में होंगे। गांव के छोटे-मोटे विवाद सुलझाने का अधिकार भी अब ग्राम सभा के पास होगा। सरकार का दावा है कि यह नियमावली आदिवासी इलाकों में सत्ता का संतुलन बदल देगी। जहां अब तक बाहरी एजेंसियों और ठेकेदारों का दबदबा था, वहां गांव खुद अपने संसाधनों का मालिक बनेगा। कैबिनेट ने इस नियमावली को 23 दिसंबर को कुछ बदलावों के साथ मंजूरी दी थी। अब इसकी अधिसूचना जारी होने के बाद झारखंड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जहां पेसा सिर्फ कानून नहीं, नियमों के साथ लागू हुआ है। पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि राज्य में पेसा नियमावली लागू हो गई है। स्वशासन लागू करना सरकार की प्राथमिकता है। ग्राम सभा स्थाई होगी, इसे भंग नहीं कर सकते ग्राम सभा को अ​ब वास्तविक अधिकार मिल जाएंगे। जल-जंगल और जमीन का अधिकार। ग्राम सभा के पारंपरिक अधिकार अब वैधानिक अधिकार के तौर पर लागू करने के लिए प्रशासन बाध्य होगा। ग्राम सभा के गठन का अधिकार सरकार और प्रशासन को नहीं दिया गया है। जो परंपरागत ग्राम सभा की मान्यता है, वही लागू होगी। इनमें जनसंख्या का कोई मतलब नहीं है। अनुसूचित क्षेत्रों में विकास भी ग्राम सभा के अधीन होगा। खास बात यह है कि ग्राम सभा स्थाई होगी, क्योंकि यह पारंपरिक ग्राम सभा है। इसे कभी भंग नहीं किया जा सकेगा। एक-एक योजना ग्राम सभा की अनुमति से ही उस राजस्व ग्राम में लाया जाएगा। यहां तक कि कोई भी छोटी-बड़ी कंपनियां बिना ग्राम सभा के जमीन तक नहीं ले सकती है। पेसा का मूल उद्देश्य ग्रामीणों को अधिकार देना पेसा का मूल उद्देश्य ही पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में निवास करने वाले ग्रामीणों को अधिकार देना और ग्राम सभा को सशक्त करना है। ग्राम कोष का गठन होगा। जो भी आय होगी, पंचायत समिति उसका 80 प्रतिशत ग्राम कोष में डालेगी और 20 प्रतिशत पंचायत समिति के पास होगा। तीन व्यक्ति तीन साल के लिए मनोनीत होंगे, जो ग्राम कोष का संचालन करेंगे। मिट्‌टी, पत्थर, बालू और मोरम सहित उस क्षेत्र में पाए जाने वाले लघु खनिज का उपयोग पूरी तरह इसके अधीन होगा। सिंचाई का प्रबंधन, ग्राम स्तर पर होने वाले वनोत्पाद एवं अन्य उत्पाद पर इनका अधिकार होगा। वन्य जीव के संरक्षण का काम भी ग्राम सभा को ही मिलेगा। पेसा नियमावली क्या है? -पेसा कानून अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा को प्रशासन, संसाधन और परंपराओं पर निर्णय लेने का अधिकार देता है। झारखंड में इसके लागू होने से अब ग्राम सभा सबसे ताकतवर इकाई बन गई है। ग्राम सभा की बैठक कैसे होगी? -हर महीने कम से कम एक बैठक अनिवार्य होगी। इसके लिए एक तिहाई का कोरम जरूरी होगा। इनमें भी एक तिहाई महिलाओं की उपस्थिति अनिवार्य होगी। बैठक सार्वजनिक रूप से करनी होगी। अगर बंद भवन में करनी है तो दरवाजा खुला रखना होगा। किसी को भी प्रवेश से नहीं रोक सकेंगे। इसकी अध्यक्षता उसी ग्राम सभा के अनुसूचित जनजाति के कोई ऐसे सदस्य होंगे, जो रीति-रिवाजों के साथ मान्यता प्राप्त व्यक्ति हो। अब बालू घाट कौन चलाएगा? -कैटेगरी-1 (पांच हेक्टेयर से कम) के बालू घाट का संचालन ग्राम सभा करेगी। बालू से मिलने वाला शुल्क ग्राम सभा के कोष में जाएगा। यहां जेसीबी से खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। एनजीटी के निर्देश के अनुरूप मानसून में बालू के उठाव पर पूरी तरह से रोक रहेगी। शराब दुकानों पर क्या होगा? -ग्राम सभा की अनुमति के बिन न शराब की दुकान खुलेगी, न ही फैक्ट्री। महुआ, हड़िया जैसी पारंपरिक पेय सिर्फ घरेलू और सामाजिक उपयोग के लिए होगा। शराब नियंत्रण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका होगी। गांव के विवाद कैसे सुलझेंगे? -पारिवारिक और जमीन विवाद ग्राम सभा में सुलझाए जाएंगे। ग्राम सभा अधिकतम 2000 रुपए तक जुर्माना लगा सकेगा। लेकिन उसे जेल भेजने का अधिकार नहीं होगा। लेकिन अगर कोई आरोपी अपनी भूल स्वीकार कर क्षमा मांगता है और दोबारा गलती न करने का प्रण लेता है तो उसे ही दंड मान लिया जाएगा। पुलिस-प्रशासन पर क्या असर होगा? -पुलिस अगर किसी मामले में किसी को तत्काल गिरफ्तार करती है तो 7 दिन के भीतर सूचना ग्राम सभा को देनी होगी। सीएनटी जमीन ट्रांसफर में क्या बदलेगा? -सीएनटी-एसपीटी एक्ट से जुड़े मामलों में ग्राम सभा की सहमति जरूरी होगी आदिवासी जमीन पर सीएनटी की धारा 71 का उल्लंघन कर कोई कब्जा कर लेता है या धारा 46 या धारा 48 या 239 का उल्लंघन करके कपट पूर्ण तरीके से ले लेता है तो ऐसी जमीन से उसे बेदखल किया जा सकेगा। इसके बदले कब्जाधारी को किसी भी तरह का मुआवजा नहीं मिलेगा। संबंधित जमीन मूल रैयत या उसके वारिस को सौंपा जाएगा। अगर कोई वारिस न हो तो वह जमीन दूसरे आदिवासी रैयत के नाम बंदोबस्त किया जाएगा। हर साल 15 अप्रैल तक रजिस्टर-2 की कॉपी ग्राम सभा को उपलब्ध करानी होगी।  

झारखंड में फरवरी-मार्च में होंगे नगर निकाय चुनाव

रांची. राज्य में नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसकी उलटी गिनती शुरू मानी जा रही है। राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियों से संकेत मिल रहे हैं कि जनवरी के अंत तक चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी 8 जनवरी को सभी जिलों में तैयारियों के समीक्षा बैठक करेंगी। जहां भी कमी पाई जाएगी, वहां 5 से 7 दिनों के भीतर सुधार कराने का निर्देश दिया जाएगा। इसके बाद मुख्य सचिव के माध्यम से राज्यपाल को चुनाव तिथि का प्रस्ताव भेजा जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि जनवरी के दूसरे या तीसरे सप्ताह में राज्यपाल की मंजूरी मिल जाएगी। इसके तुरंत बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया जाएगा। एक चरण में चुनाव, बैलेट पेपर से होगा मतदान अधिसूचना जारी होते ही अगले दिन से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नामांकन के लिए उम्मीदवारों को लगभग एक सप्ताह का समय मिलेगा। इस बार नगर निकाय चुनाव एक ही चरण में कराए जाएंगे। मतदान ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से होगा। आयोग का लक्ष्य है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया 28 मार्च तक समाप्त कर दी जाए। हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार 30 मार्च तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है, इसी वजह से आयोग ने समय-सारिणी को कड़ा रखा है। उम्मीदवारों को इस बार प्रचार के लिए केवल 32 से 36 दिन का समय मिलेगा, जबकि पहले आमतौर पर 40 से 45 दिन का समय मिलता था। होली के आसपास हो सकता है मतदान होली पर्व 4 मार्च को है। आयोग की योजना है कि इसी के आसपास मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। मतदान की संभावित तिथि 26 फरवरी से 2 मार्च के बीच मानी जा रही है। मतदान के अगले दिन को री-पोल के लिए सुरक्षित रखा जाएगा, जबकि 2 से 3 दिन के भीतर मतगणना कराई जाएगी। मतदान के दौरान एक ही बैलेट बॉक्स में मेयर-अध्यक्ष और वार्ड पार्षद के लिए वोट डाले जाएंगे। मेयर और अध्यक्ष का बैलेट पेपर गुलाबी रंग का होगा, जबकि वार्ड पार्षद का मतपत्र सफेद रंग का रहेगा। मतगणना के समय पहले दोनों तरह के वोट अलग-अलग छांटे जाएंगे, इसके बाद गिनती की प्रक्रिया शुरू होगी। मतगणना के 15 से 22 दिन के भीतर नगर निगम के मेयर और नगर परिषद-नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा, जिसमें केवल निर्वाचित वार्ड पार्षद ही मतदान करेंगे। यहां होने हैं नगर निकाय चुनाव रांची, हजारीबाग, धनबाद, मेदनीनगर, गिरिडीह, देवघर, चास, आदित्यपुर और मानगो में होगा। वहीं नगर परिषद का चुनाव गढ़वा, विश्रामपुर, चाईबासा, झुमरी तिलैया, चक्रधरपुर, चतरा, चिरकुंडा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा, गुमला, जुगसलाई, कपाली, लोहरदगा, सिमडेगा, मधुपुर, रामगढ़, साहिबगंज, फुसरो और मिहिजाम में होगा। जबकि नगर पंचायत का चुनाव बंशीधर नगर, मझिआंव, हुसैनाबाद, हरिहरगंज, छतरपुर, लातेहार, कोडरमा, डोमचांच, बड़की सरैया, धनवार, महगामा, राजमहल, बरहरवा, बासुकीनाथ, जामताड़ा, बुंडू, खूंटी, सरायकेला और चाकुलिया।  

बिहार के CM नीतीश कुमार देंगे बुजुर्गों को घर बैठे इलाज से लेकर इमरजेंसी तक की सुविधाएं

पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उम्रदराज और बुजुर्ग लोगों को नए साल पर बड़ा तोहफा दिया है. ऐसे लोगों को अब घर बैठे ही स्वास्थ्य जांच और इलाज मिल सकेगा. मुख्यमंत्री ने सात निश्चय पार्ट-3 के तहत ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए यह निर्णय लिया है. राज्य सरकार के फैसले के तहत अब बुजुर्गों को घर पर ही पैथोलॉजी जांच, ब्लड प्रेशर मापने और ईसीजी जैसी जरूरी जांच की सुविधा मिलेगी. यही नहीं इमरजेंसी के हालात में भी डॉक्टर घर पहुंचकर इलाज भी करेंगे. फिजियोथेरेपी की भी सुविधा मुहैया करवाई जायेगी. मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही आम जनता से सुझाव भी मांगे हैं. सात निश्चय के तहत लोगों के जीवन को और आसान बनाने के लिए सरकार ने एक क्यूआर कोड जारी किया है. इसे स्कैन कर आम लोग सरकार तक अपने सुझाव और विचार सीधे पहुंचा सकते हैं.  क्यूआर कोड जारी कर लोगों से मांगे सुझाव सीएम नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स के जरिए जानकारी साझा करते हुए लिखा- '24 नवंबर 2005 को राज्य में जब से हमलोगों की सरकार बनी तब से न्याय के साथ विकास के सिद्धांत पर चलते हुए हमलोगों ने समाज के सभी वर्ग के लोगों के उत्थान एवं हर क्षेत्र के विकास के लिए काम किया है. हम लोगों ने पूरे बिहार को अपना परिवार माना है और सबके मान और सम्मान का पूरा ख्याल रखा है. अब राज्य में समाज के हर वर्ग के लोग सम्मान के साथ आसानी से जीवन व्यतीत कर सकें इसे लेकर हमलोगों ने गंभीरता से कार्य प्रारंभ कर दिया है. हमलोगों ने वर्ष 2025 से 2030 के लिए राज्य को देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करने हेतु सात निश्चय-3 के कार्यक्रमों को लागू किया है. सात निश्चय-3 के सातवें निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ (Ease of Living) का उद्देश्य राज्य के सभी नागरिकों के जीवन में आने वाली कठिनाइयों को कम करना तथा उनके जीवन को और भी आसान बनाना है. सबसे पहले हमलोगों की कोशिश है कि राज्य के जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को जरूरत के समय उनके घर पर ही अत्यावश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें. 1. नर्सिंग सहायता की सुविधा 2. घर पर ही पैथोलॉजी जांच की सुविधा 3. ब्लड प्रेशर जांच और ई॰सी॰जी॰ जांच की सुविधा 4. फिजियोथेरेपी की सुविधा 5. आपातकालीन स्थिति में सभी प्रकार की चिकित्सकीय सहायता राज्य के वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधित उपरोक्त सभी सुविधाएं उन्हें घर पर ही मिल सकें, इसे लेकर हमलोगों ने स्वास्थ्य विभाग को तेजी से काम करने का निर्देश दिया है. राज्य के वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को आसान बनाने हेतु और क्या-क्या सुविधाएं दी जा सकती हैं, इसे चिह्नित किया जाना भी आवश्यक है. इस संबंध में अगर आप कोई विशिष्ट सुझाव देना चाहते हैं तो अपने बहुमूल्य सुझाव निम्न में से किसी एक माध्यम से दे सकते हैं.'  लोगों को अपने सुझाव देने के लिए एक क्यूआर कोड भी जारी किया गया है. जिसके माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुंचाई जा सकती है.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत बोले- खरसावां के वीर शहीदों के वंशजों को सम्मानित करने बनेगा विशेष आयोग

रांची. श्झारखंड की मिट्टी शहादत की गाथाओं से भरी है। जितना समृद्ध इतिहास हमारे राज्य का हैए उतना किसी अन्य प्रदेश का नहीं।श् अनगिनत लोगों ने जलए जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी अस्मिता के लिए अपनी जानें न्योछावर कीं। श्हम लड़े हैंए तभी बचे हैं। हमारे वीर सपूतों ने कभी हार नहीं मानी। उक्त बातें खरसावां गोलीकांड की 78वीं शहादत दिवस पर आज सरायकेला.खरसावां जिले के खरसावां स्थित शहीद पार्क में मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहीं। मौके पर मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक ;शहीद बेदीद्ध तथा वीर शहीद केरसे मुंडा चौक स्थित शहीद स्मृति.चिह्न पर श्रद्धांजलि अर्पित कर अमर वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मंत्री दीपक बिरुवा, सांसद जोबा मांझी, विधायक दशरथ गगराई, विधायक सुखराम उरांव, विधायक सविता महतो, विधायक जगत मांझी तथा पूर्व विधायक लक्ष्मण टुडू सहित अनेक जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने भी शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर खरसावां के अमर वीरों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। खरसावां के वीर शहीदों के वंशजों को सम्मानित करने हेतु विशेष आयोग का होगा गठन झारखंड की धरती शौर्य और बलिदान की प्रतीक रही है। इस मिट्टी की हर कण में आदिवासियों और मूलनिवासियों के संघर्ष की गाथा समाई हुई है। इसी गौरवशाली परंपरा को नमन करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने खरसावां गोलीकांड की 78वीं शहादत दिवस पर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है कि खरसावां के वीर शहीदों के वंशजों की पहचान कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में निर्णायक कदम की घोषणा करते हुए कहा कि एक विशेष आयोग का गठन किया जाएगाए जिसमें रिटायर्ड जजए स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाएगा। यह आयोग सभी दस्तावेजोंए ऐतिहासिक अभिलेखों और स्थानीय परंपराओं के आधार पर शहीद परिवारों की पहचान करेगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य उन परिवारों को उचित सम्मानए मान्यता और आर्थिक सहायता सुनिश्चित करना हैए जिन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किए। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य सरकार की प्राथमिकता के रूप में रेखांकित करते हुए कहाए श्हमारा यह नैतिक दायित्व है कि जिनकी कुर्बानी से झारखंड की अस्मिता और स्वतंत्र पहचान बचीए उनके वंशजों को गर्व और सम्मान के साथ जीने का अवसर मिले।श् उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष तक सभी शहीद परिवारों की शिनाख्त कर समारोहपूर्वक सम्मानित किया जाएगा।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह पहल केवल श्रद्धांजलि मात्र नहींए बल्कि एक इतिहास.संरक्षण अभियान है। इस अभियान से युवा पीढ़ी को अपने पूर्वजों के संघर्ष और बलिदान की जानकारी मिलेगी तथा उनमें राज्य के प्रति आत्मसम्मान की भावना प्रबल होगी। राज्य सरकार ने पहले भी स्वतंत्रता सेनानियोंए आंदोलनकारियों एवं शहीदों के परिजनों के कल्याण के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। अब खरसावां के वीरों के प्रति यह संवेदनशील कदम झारखंड की पहचान को और सशक्त करेगा। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि श्हमारा संघर्ष जीवित रहेगाए जब तक हर शहीद के परिवार को उसका सम्मान नहीं मिल जाता। यही हमारे राज्य की असली दिशा और पहचान है।श् आदिवासियों की अस्मिता के रक्षक, हमारे पथप्रदर्शक बाबा शिबू सोरेन को विनम्र नमन मुख्यमंत्री ने कहा कृ श्आज हमारे बीच झारखंड आंदोलन के दिशा.निर्देशकए हमारे बाबाए हमारे पथप्रदर्शक गुरुजी शिबू सोरेन नहीं हैं। हमने एक ऐसा वृक्ष खो दिया जिसकी छांव में राज्य के आदिवासियों और मूलवासी समाज ने अपना मार्ग पाया। गुरुजी हमारे लिए सदैव प्रेरणास्त्रोत रहेंगे।श् मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि  झारखंड के हर आंदोलनकारीए हर आदिवासीए हर ग्रामीण के दिल में गुरुजी का स्थान अमिट है। उन्होंने झारखंड की राजनीति में मानवीयताए सरलता और संघर्षशीलता की मिसाल कायम की। श्गुरुजी केवल एक व्यक्ति नहींए एक विचारधारा हैं कृ जो न्यायए समानता और आत्मसम्मान की राह दिखाती है।श् उन्होंने आगे कहा कि गुरुजी के सान्निध्य में झारखंड के आदिवासी समाज ने अपनी पहचान को पहचाना और उसे संविधान के दायरे में दर्ज कराया। हमने उनका मार्गदर्शन हमेशा अपने लिए ऊर्जा की तरह महसूस किया। उनका संघर्ष ही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। गुरुजी अब हमारे बीच भले नहीं हैंए लेकिन उनकी छांवए उनका आशीर्वाद और उनका मार्गदर्शन हमेशा रहेगा। पेसा कानून से सशक्त होगा ग्राम स्वराज मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार ने झारखंड में पेसा कानून को लागू कर दिया हैए जिससे अब ग्रामसभा और ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्रामीणों को उनके अधिकार प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि श्यह कानून हमारे जलए जंगल और जमीन की सुरक्षा का आधार है। इसके माध्यम से ग्रामीण अपने संसाधनों पर स्वयं निर्णय ले सकेंगे और स्वशासन की भावना सशक्त होगी।श् मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकार का प्रयास रहेगा कि पेसा अधिनियम से संबंधित जानकारी प्रत्येक गांव तक पहुंचे। इसके लिए राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि हर ग्रामीण अपने अधिकारों को जान सके और उनका उपयोग कर सके। उन्होंने कहा कि पेसा कानून हमारे पूर्वजों के संघर्ष और अधिकार भावना का प्रतीक हैए जो ग्राम स्वराज के वास्तविक स्वरूप को साकार करेगा। झारखंड का 25वां वर्षए नए विकास और सशक्तिकरण का प्रतीक मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड राज्य को बने 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं और अब यह युवा झारखंड विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहाए श्हमारा संकल्प है कि आने वाले वर्षों में झारखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाए। श्मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही हैए क्योंकि श्एक शिक्षित पीढ़ी ही मजबूत राज्य की नींव होती है।श् उन्होंने बताया कि गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना के तहत छात्र 15 लाख रुपये तक का ऋण 4ः ब्याज दर पर लेकर पढ़ाई कर सकते हैंए जिसकी वापसी नौकरी लगने के बाद ही करनी होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना को महिला सशक्तिकरण की मिसाल बताते हुए कहा कि इससे राज्य की बेटियां शिक्षितए आत्मनिर्भर और समाज में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री ने युवाओं से शहीदों के आदर्शों पर चलकर झारखंड के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। इस अवसर पर मंत्री दीपक बिरुवाए सांसद जोबा मांझी, विधायक दशरथ गगराई, विधायक सुखराम उरांव, विधायक समीर मोहंती, विधायक सविता महतो, विधायक जगत मांझी एवं पूर्व विधायक लक्ष्मण टुडू सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जिला के उपायुक्तए पुलिस अधीक्षकए सभी विभागों के पदाधिकारी तथा … Read more

बिहार के बड़े शहरों में बसाने नेपाल रूट से घुसाये जा रहे बांग्लादेशी

पटना/रक्सौल. भारत–नेपाल सीमा पर तीन बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर उस अदृश्य नेटवर्क की ओर इशारा किया है, जो वर्षों से नेपाल को ट्रांजिट रूट बनाकर विदेशी नागरिकों को भारत में अवैध रूप से प्रवेश कराता रहा है। यह गिरफ्तारी महज संयोग नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय मानव तस्करी और घुसपैठ तंत्र का संकेत मानी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बांग्लादेशी नागरिकों के लिए नेपाल सबसे आसान प्रवेश द्वार बन चुका है। नेपाल की वीजा नीति अपेक्षाकृत सरल होने के कारण विदेशी नागरिक पहले वहां टूरिस्ट वीजा पर पहुंचते हैं। इसके बाद सीमावर्ती भारतीय जिलों में सक्रिय एजेंट उन्हें बिना भारतीय वीजा के सीमा पार कराते हैं। स्थानीय गाइड नेटवर्क की पहली कड़ी गिरफ्तार सरफराज अंसारी को इस नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है। पुलिस को संदेह है कि वह सिर्फ एक गाइड नहीं, बल्कि ऐसे कई लोग हैं, जो सीमावर्ती गांवों में रहकर विदेशी नागरिकों को सुरक्षित रास्तों से भारत में दाखिल कराते हैं। बदले में मोटी रकम वसूली जाती है। सूत्रों का दावा है कि अवैध रूप से भारत में प्रवेश कराने के बाद इन विदेशी नागरिकों को पटना, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था पहले से तय रहती है। वहां उनके ठहरने, काम और पहचान छिपाने तक की योजना बनाई जाती है। सीमा सुरक्षा पर गंभीर सवाल इस घटना ने सीमा सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि एसएसबी द्वारा नए वर्ष को लेकर विशेष अलर्ट जारी नहीं किया गया होता, तो यह समूह भी आसानी से सीमा पार कर जाता। यह दर्शाता है कि सामान्य दिनों में नेटवर्क कितनी सहजता से सक्रिय रहता है। भारत–नेपाल सीमा से पहले भी घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज और मानव तस्करी से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद नेटवर्क का पूरी तरह भंडाफोड़ न होना प्रशासनिक चुनौतियों को उजागर करता है। एसएसबी और पुलिस कर रही गहन जांच एसएसबी और जिला पुलिस की संयुक्त टीम मोबाइल डेटा, काल डिटेल, नेपाल में ठहरने के रिकार्ड और भारत में संपर्क सूत्रों की गहन जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि नेटवर्क से जुड़े कितने एजेंट अब भी सक्रिय हैं और किन-किन रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है। यह मामला केवल चार लोगों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते इस नेटवर्क की जड़ तक नहीं पहुंचा गया, तो सीमावर्ती इलाकों के रास्ते अवैध गतिविधियों का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।

नए साल का जश्न प्रकृति के बीच: लोध फॉल में उमड़ी सैलानियों की भीड़, झरने का नजारा बना आकर्षण

रांची नववर्ष के पहले दिन झारखंड के लातेहार जिले में स्थित राज्य का सबसे ऊंचा जलप्रपात लोध फॉल पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण बना रहा। राजधानी रांची से लगभग 200 किलोमीटर और लातेहार जिला मुख्यालय से करीब 110 किलोमीटर दूर महुआडांड़ प्रखंड में स्थित इस प्राकृतिक धरोहर को देखने के लिए हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचे। लोध फॉल झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है नए साल की शुरुआत प्रकृति के बीच करने की चाह में आए सैलानियों से पूरा क्षेत्र गुलजार नजर आया। लोध फॉल झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है, जहां बूढ़ा नदी का पानी लगभग 143 मीटर की ऊंचाई से सीधे धरती पर गिरता है। पहाड़ियों से घिरा यह जलप्रपात न केवल झारखंड बल्कि आसपास के राज्यों के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। नववर्ष के अवसर पर यहां पहुंचे पर्यटक जलप्रपात की ऊंचाई, कलकल करती जलधारा और चारों ओर फैली हरियाली को देखकर मंत्रमुग्ध नजर आए। पर्यटकों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और वन विभाग की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। जलप्रपात के नीचे जहां पानी काफी गहरा है, वहां किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाव के लिए पानी में उतरने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी वन विभाग द्वारा गठित विकास समिति के माध्यम से की जाती है, क्योंकि यहां देश के साथ-साथ विदेशों से भी पर्यटक पहुंचते हैं। नवंबर महीने से यहां पर्यटकों की आमद शुरू हो जाती है घूमने आए सैलानियों ने बताया कि लोध फॉल की खूबसूरती मन को सुकून देने वाली है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी से तीन अलग-अलग दिशाओं में गिरती जलधाराएं इस स्थान की सुंदरता को और भी खास बना देती हैं। हालांकि कुछ पर्यटकों ने यह भी कहा कि यदि जलप्रपात के पास बने लकड़ी के पुल की मरम्मत कर दी जाए, तो भ्रमण का अनुभव और बेहतर हो सकता है। लोध फॉल झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के पर्यटकों के लिए पसंदीदा पर्यटन स्थल है। नवंबर महीने से यहां पर्यटकों की आमद शुरू हो जाती है, जो मार्च तक लगातार बनी रहती है। लोध फॉल तक सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। रांची, पलामू, लातेहार या छत्तीसगढ़ से सड़क मार्ग द्वारा पहले महुआडांड़ पहुंचना होता है। इसके बाद महुआडांड़ से करीब 17 किलोमीटर दूर स्थित पाकिर्ंग स्थल तक वाहन ले जाया जा सकता है। वहां से लगभग एक किलोमीटर पैदल चलकर पर्यटक जलप्रपात तक पहुंचते हैं।  

डॉ. नुसरत समेत आयुष डॉक्टरों को एक और मौका, ज्वाइनिंग डेट बढ़ाने का फैसला

पटना हिजाब विवाद से चर्चित डॉ. नुसरत परवीन को नीतीश सरकार ने नौकरी ज्वाइन करने का एक और मौका दिया है। 31 दिसम्बर को लास्ट डेट तक नुसरत ने योगदान नहीं दिया था। शुक्रवार को एक बार फिर आयुष चिकित्सकों के लिए योगदान करने की तारीख बढ़ा दी गई। अब सात जनवरी तक आयुष डॉक्टर नौकरी ले सकते हैं। 15 दिसम्बर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अंतिम रूप से चयनित डॉक्टरों के बीच नियुक्ति पत्र का वितरण किया था। वितरण समारोह का एक वीडियो विपक्षी दल राजद ने वायरल कर नीतीश कुमार की जमकर आलोचना की। इस मामले में बिहार के अलावे झारखंड और कश्मीर में भी राजनीति की गई।   मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जिन आयुष चिकित्सकों की बहाली की गई उनमें करीब 12 प्रतिशत डॉक्टरों ने योगदान नहीं किया है। इनमें डॉ.नुसरत भी शामिल हैं। इन्हें फिर से मौका दिया गया है। पहले ज्वाइनिंग के लिए 20 दिसम्बर की तारीख तय थी। बड़ी संख्या में डॉक्टरों ने ज्वाइन नहीं किया। उसके बाद 31 दिसम्बर तक तारीख बढ़ा दी गई। इंतजार किया जा रहा था कि नुसरत नौकरी पर आ जाएंगी। पर ना वह खुद पहुंची और ना ही उनके परिजनों से कोई जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी। पटना सिविल सर्जन ने यह जानकारी दी। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर डेट बढ़ा दिया। अब सात जनवरी तक आयुष डॉक्टर योगदान दे सकते हैं। बताया जा रहा है कि सरकार चाहती है कि नुसरत नौकरी करें और मरीजों की सेवा करें क्योंकि इस प्रकरण में नीतीश कुमार की काफी किड़किड़ी हुई थी। नियुक्ति पत्र लेने आई डॉ नुसरत ने नकाब पहन रखा था जिसे नीतीश कुमार ने हटा दिया। राजद ने यही वीडियो वायरल कर दिया। दरअसल डॉ नुसरत की नौकरी स्वास्थ्य विभाग से ज्यादा सियासी मामला बन गया है। पॉलिटिकल वार, प्रतिवार के बीच नुसरत और उसका पूरा परिवार खामोश है। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी उन्हें नौकरी कर लेने की सलाह दी है। उधर झारखंड में हेल्थ मिनिस्टर डॉ इरफान अंसारी ने उन्हें तीन लाख मासिक तनख्वार पर नौकरी पेशकश कर दी। बाद में सीएम हेमंत सोरेन की पार्टी ने इस पर अलग राय जाहिर कर दिया। कश्मीर में पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती की बहू बिल्किस सीएम नीतीश कुमार पर केस दर्ज कराने थाने पहुंच गईं।