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सीमा पर बढ़ी सख्ती: घुसपैठियों की वापसी को लेकर BSF-BGB के बीच विवाद की स्थिति

कलकत्ता भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ सख्ती के बाद सीमा पर टकराव की नौबत है. बांग्लादेश गार्ड बॉर्डर (BGB) अपने ही नागरिकों को अपने देश में एंट्री नहीं दे रहा है. भारत-बांग्लादेश सीमा पर कई दिनों से सैकड़ों बांग्लादेशी घर वापसी के लिए इंतजार कर रहे हैं. लेकिन BGB इन्हें बांग्लादेशी मानती ही नहीं है।  BGB ने लालमोनिरहाट में तीन बॉर्डर पॉइंट्स पर अपने 33 लोगों को बांग्लादेश में घुसने नहीं दिया. बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि BGB ने लालमोनिरहाट में तीन बार्डर पॉइंट्स से 33 लोगों को अंदर भेजने की बीएसएफ की कोशिश को सफल नहीं होने दिया।  अखबार ने लिखा है, "BGB अधिकारियों के अनुसार आज सुबह-सुबह भारत के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ने लालमोनिरहाट में तीन बॉर्डर पॉइंट्स से 33 लोगों को बांग्लादेश में भेजने की कोशिश की, जिसे बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने रोक दिया. BGB-16 और 61 बटालियन के अधिकारियों ने बताया कि ये घटनाएं सुबह करीब 5:00 बजे बॉर्डर पर अलग-अलग जगहों पर हुईं।  BGB-15 लालमोनिरहाट बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल मेहदी इमाम ने दावा किया कि सभी लोगों को ज़ीरो लाइन पर रोक दिया गया. उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर कड़ी नज़र रखी जा रही है और BGB हाई अलर्ट पर है; साथ ही इस घटना को लेकर BSF के साथ बातचीत भी चल रही है।  BGB मीडिया सेल ने दावा किया कि सबसे पहले BGB-61 तीस्ता बटालियन के तहत बाराखाटा बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) इलाके से 11 लोगों को बांग्लादेश की तरफ पुश-इन करते हुए देखा गया. आगे BGB ने दावा किया कि फिर उसी समय पैशात्तीबारी BOP इलाके से भी 10 और लोगों को अंदर धकेला जा रहा था।  जानकारी मिलने के बाद BGB की पेट्रोलिंग टीमें तुरंत दोनों जगहों पर पहुंचीं और स्थिति को काबू में किया. BGB ने उन लोगों को बॉर्डर पर ही रोक दिया गया और वे भारतीय सीमा में ही रहे।  पश्चिम बंगाल में अवैध रुप से घुसे बांग्लादेशियों के खिलाफ जबर्दस्त अभियान चलाया जा रहा है. इसके बाद देश में अवैध रूप से घुसे कई बांग्लादेशी स्वेच्छा से वापस बांग्लादेश जाना चाहते हैं, लेकिन बांग्लादेश सरकार और सेना इन लोगों को अपना नागरिक मानने से ही इनकार कर रही है।  अखबार के अनुसार दुर्गापुर और दिघलतारी BOP की BGB KR पेट्रोलिंग टीमों ने भारतीय सीमा की तरफ से बॉर्डर पिलर 925 और 927 के पास 12 लोगों बांग्लादेश में घुसने से रोक दिया।  बांग्लादेश के अखबार प्रथम आलो ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने बंगाबाडी बॉर्डर इलाके में 28 लोगों बांग्लादेश घुसने रोक दिया।  इस मामले को लेकर गुरुवार दोपहर BGB और BSF के बीच एक फ्लैग मीटिंग हुई. बंगाबाड़ी बॉर्डर पर हुई इस मीटिंग में BSF ने BGB को बताया कि वे इस मुद्दे पर अपने सीनियर अधिकारियों से बात करेंगे और इसका समाधान निकालेंगे।  भारत में इस समय सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि दिल्ली, अहमदाबाद, गुरुग्राम बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ पुलिस/प्रशासनिक अभियान चलाये जा रहे हैं. ये अभियान अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों और सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित हैं। 

बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, दूसरे राज्यों में भी बढ़ाई गई निगरानी

भुवनेश्वर ओडिशा सरकार ने पश्चिम बंगाल के साथ सीमा साझा करने वाले अपने जिलों को बांग्लादेशी घुसपैठियों के संभावित प्रवेश को लेकर सतर्क किया है। ओडिशा सरकार ने यह कदम पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी प्रशासन द्वारा बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ 'पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो' की नीति अपनाए जाने के बाद उठाया है। पश्चिम बंगाल से सटे बालासोर और मयूरभंज जिलों के अधिकारियों को ओडिशा सरकार ने यह निर्देश तब जारी किए गए, जब उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट उप-मंडल स्थित हाकिमपुर जांच चौकी पर बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिकों के एकत्र होने की खबर सामने आई। सीमा पर अलर्ट पुलिस उपमहानिरीक्षक (पूर्वी परिक्षेत्र) पिनाक मिश्रा ने कहा, 'चूंकि संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठियों ने पश्चिम बंगाल के भीतर आवाजाही शुरू कर दी है, इसलिए उनके ओडिशा में प्रवेश की आशंका है। इसी कारण हम सतर्क हैं और ऐसी किसी भी गतिविधि को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं।' ओडिशा-पश्चिम बंगाल सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि राज्य में किसी भी प्रकार की अवैध आवाजाही को रोका जा सके। मिश्रा ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से घुसपैठियों का पता लगाकर उन्हें कानून के तहत भारत से निर्वासित करने का स्थायी निर्देश है और हम उसी के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। राज्य सरकार ने सभी जिलों विशेषकर सीमावर्ती जिलों में विशेष अभियान चलाया है। घुसपैठियों के जलमार्गों से प्रवेश की संभावना को लेकर मिश्रा ने बताया कि इसके लिए संबंधित पुलिस थानों को सतर्क कर दिया गया हैं। दो जिलों में ज्यादा सतर्कता बालासोर और मयूरभंज ओडिशा के दो ऐसे जिले हैं, जिनकी सीमा पश्चिम बंगाल से लगती है। बालासोर जिले के भोगराई और जलेश्वर ब्लॉक पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम जिलों से सटे हुए हैं, जबकि मयूरभंज जिले की पूर्वी सीमा का एक हिस्सा पश्चिम मेदिनीपुर जिले से लगता है। राजनीतिक बयानबाजी शुरू इस बीच, ओडिशा में बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया। ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि घुसपैठिये राज्य के लिए एक बड़ी समस्या हैं और राज्य सरकार उनकी पहचान तथा निर्वासन के लिए अभियान पहले ही शुरू कर चुकी है, जबकि बीजद नेता गणेश्वर बेहरा ने इस दावे को खारिज कर दिया। बेहरा ने कहा, 'ओडिशा में घुसपैठिये ही केवल बड़ी समस्या नहीं हैं। पश्चिम बंगाल में स्थिति अलग है, वहां उनकी संख्या लाखों में है। ओडिशा में उनकी संख्या 150 से भी कम है। साढ़े चार करोड़ की आबादी वाले राज्य में घुसपैठियों की संख्या करीब 150 हो सकती है। यह बहुत छोटा मुद्दा है, लेकिन राज्य सरकार प्रचार पाने के लिए राई का पहाड़ बना रही है।' हालांकि, हरिचंदन ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि ओडिशा में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों 'बच नहीं सकते'। उन्होंने कहा कि हम राज्य में रह रहे अवैध विदेशी नागरिकों को निर्वासित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

24 परगना से मालदा तक कार्रवाई, बकरीद से पहले घुसपैठियों पर शिकंजा

कलकत्ता एक ओर जहां पूरे देश में बकरीद की तैयारियां जोरों पर हैं तो दूसरी ओर बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों में हलचल मची हुई है. कई स्टेट बॉर्डर के पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े ग्रुप इकट्ठा होने लगे हैं जो अपने वतन वापस जा रहे हैं।  अपने वतन लौट रहे अवैध बांग्लादेशी प्रवासी            एक बांग्लादेशी प्रवासी महिला रोजीना बीबी ने बताया कि वो डरी हुई हैं. उन्हें कहा, 'हम सात साल पहले अपने पति सैदुल के कैंसर के इलाज के लिए भारत आए थे, क्योंकि इलाज की प्रक्रिया लंबी चली, इसलिए परिवार गैर-कानूनी तौर पर यहीं रह गया. लेकिन नए कानूनी आदेश ने पूरी स्थिति ही बदल दी है. नए निर्देशों के तहत सरकारी कार्रवाई के डर से उनके मकान मालिक ने हाल ही में उनसे घर खाली करने को कहा जिससे उनके पास वापस जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।    बंगाल सरकार का सख्त एक्शन पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'बांग्लादेशी यहां क्यों रहें? वो केंद्र सरकार द्वारा दी गई हर सुविधा का लाभ उठा रहे हैं. वो गरीबों के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं से फायदा उठा रहे हैं. उन्हें नागरिकता देकर, वोटर आईडी और आधार कार्ड जारी करके और मतदाता के रूप में पंजीकृत करके, यहां उनके वोट मांगे जा रहे थे… ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें अलग किया जाएगा. गृह मंत्री पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उन्हें वापस भेज दिया जाएगा. बेहतर होगा यदि वो स्वेच्छा से अपने देश लौट जाएं… अन्यथा सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।  हकीमपुर चेक पॉइंट पर प्रवासियों की भीड़                     उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर, मंगलवार सुबह सौ से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हुए. ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते है।  दलाल की मदद से आए भारत              हकीमपुर चेकपॉइंट के पास अपने दो बच्चों के साथ बैठीं 36 वर्षीय सबीना खातून ने बताया कि सालों पहले वह दलालों के जरिए गैर-कानूनी तौर पर भारत में दाखिल हुई थी और बाद में एक भारतीय नागरिक से शादी कर ली. और उसने अपने पति के पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके RG कर अस्पताल में अपने बच्चों को जन्म दिया था. अब नए कानून ने उन्हें एक दिल तोड़ने वाले मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है. क्योंकि उसका पति एक भारतीय नागरिक है, इसलिए वह उनके साथ नहीं जा सकता. सबीना और उसके बेबस बच्चे सीमा पर अकेले इंतजार कर रहे हैं. "सतखिरा में मेरा परिवार तो है, लेकिन मुझे नहीं पता कि हम दोबारा कैसे मिल पाएंगे," सबीना अपने बच्चों की ओर देखते हुए आंखों में आंसू भरकर कहती है. उसका सवाल है, 'क्या मेरे बच्चे कभी अपने पिता को दोबारा देख पाएंगे?' बॉर्डर चेकपॉइंट के पास जमा हुई भारी भीड़ बंगाल में जैसे-जैसे सीमा चौकियों के पास भीड़ जमा होती जा रही है. इसके साथ ही होल्डिंग सेंटर कड़ी सुरक्षा के बीच काम करना शुरू कर रहे हैं, पश्चिम बंगाल का घुसपैठ-रोधी अभियान अब सख़्त कार्रवाई वाले चरण में पहुंचती नजर आ रही है. आने वाले हफ्तों में और भी लोगों को हिरासत में लिए जाने, उनकी पहचान की जांच और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।  1. अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों पर सख्त कार्रवाई: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़े निर्देश दिए हैं. मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में 'होल्डिंग सेंटर' बनाए गए हैं. पकड़े गए संदिग्ध घुसपैठियों को जेल भेजने के बजाय 30 दिनों तक इन सेंटर्स में रखकर उनकी पहचान और बायोमेट्रिक जांच की जाएगी. इसके बाद उन्हें बीएसएफ (BSF) को सौंपकर उनके देश वापस भेजा जाएगा. डर के कारण कई घुसपैठिए वापस बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे हैं।  2. सीएए (CAA) के तहत नागरिकता: बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों के लिए सीएए (CAA) सेंटर बनाए गए हैं, जहाँ बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं. इन सेंटर्स के माध्यम से उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी।  3. 5 रुपये में 'माछ-भात' योजना और नई पाबंदियां: चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करते हुए, नई सरकार ने पूरे राज्य में 400 कैंटीन खोलने का फैसला किया है, जहाँ 5 रुपये में मछली-चावल (माछ-भात) मिलेगा. इसके अलावा, स्कूल, कॉलेज और मंदिरों के 1 किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।  4. टीएमसी (TMC) नेताओं पर जनता का आक्रोश: वसूली, भ्रष्टाचार और बाहुबल के आरोपों के चलते टीएमसी नेताओं के खिलाफ आम लोगों में भारी गुस्सा है. कुछ नेताओं के घरों से भारी मात्रा में कैश मिला है, तो कई नेताओं को जनता द्वारा पीटे जाने और कोर्ट में 'चोर-चोर' के नारे लगने की खबरें हैं।  5. टीएमसी में भारी टूट और बगावत की अटकलें: टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार और पार्टी के दो विधायक मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की समीक्षा बैठक में शामिल हुए, जिससे टीएमसी में बड़ी बगावत की अटकलें तेज हो गई हैं. बताया जा रहा है कि 60 से ज्यादा पार्षद इस्तीफा दे चुके हैं और टीएमसी के 12 से 20 सांसद एक साथ बीजेपी में जाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) से बचा जा सके।  जो CAA के दायरे से बाहर हैं, उन्हें माना जाएगा घुसपैठिया     बीएसएफ के सीनियर अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई एक मीटिंग में बोलते हुए सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जो लोग नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के दायरे से बाहर हैं, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा. उन्हें पुलिस गिरफ्तार करके बीएसएफ को सौंप देगी.  इसके साथ ही राज्य सरकार ने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने की पहल शुरू कर दी है, जिससे संदिग्ध अवैध प्रवासियों को कुछ वक्त के लिए वहां रखा जा सके और उन विदेशी कैदियों को रिहा किया जा सके, जो देश-निकाला या अपने देश वापसी का इंतजार कर रहे हैं। 

750 रुपये मैच फीस सुनकर BCB चीफ को लगा झटका, बढ़ाई बांग्लादेशी खिलाड़ियों की सैलरी

ढाका  बांग्लादेश क्रिकेट में लंबे समय से उठ रहे वेतन के मुद्दे पर अब बड़ा फैसला सामने आया है. तमीम इकबाल की अगुवाई वाली बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की एड-हॉक कमेटी ने घरेलू क्रिकेटर्स की सैलरी और मैच फीस में  बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।  तमीम इकबाल जिन्हें हाल ही में 11 सदस्यीय कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है, उस वक्त हैरान रह गए जब उन्हें पता चला कि एक महिला क्रिकेटर को वनडे मैच के लिए महज 1000 बांग्लादेशी टका (करीब 8 डॉलर/ 750 भारतीय रुपए) मिलते थे।  इसके बाद बोर्ड ने महिला क्रिकेटर्स की मैच फीस में बड़ा बदलाव किया है. अब उन्हें वनडे मैच के लिए 15,000 टका, फर्स्ट-क्लास मैच के लिए 20,000 टका और टी20 मुकाबलों के लिए 10,000 टका मिलेंगे. इसके अलावा टॉप-36 महिला घरेलू खिलाड़ियों की मासिक सैलरी 30,000 टका से बढ़ाकर 40,000 टका कर दी गई है।  सैलरी आदर्श नहीं, लेकिन यह शुरुआत: तमीम इकबाल  तमीम इकबाल ने माना कि यह बढ़ोतरी अभी आदर्श नहीं है, लेकिन एक जरूरी शुरुआत जरूर है. उन्होंने कहा कि एक साथ बहुत ज्यादा बढ़ोतरी करना संभव नहीं था, लेकिन खिलाड़ियों को बेहतर भुगतान मिलना जरूरी है।  सिर्फ महिला ही नहीं, पुरुष घरेलू क्रिकेटर्स को भी राहत मिली है. कैटेगरी A के खिलाड़ियों की सैलरी 65,000 टका कर दी गई है, जबकि कैटेगरी B और C के खिलाड़ियों को क्रमशः 50,000 और 40,000 टका मिलेंगे. फर्स्ट-क्लास मैच फीस भी 70,000 टका से बढ़ाकर 100,000 टका कर दी गई है।  391 इंटरनेशनल मैच खेल चुके तमीम ने साफ कहा कि पिछले 3-4 सालों में खिलाड़ियों की सैलरी में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई थी और वे 'काफी अंडरपेड' थे. उन्होंने कहा कि क्रिकेट खिलाड़ियों की मेहनत से चलता है, इसलिए उन्हें उचित भुगतान मिलना चाहिए।  सैलरी बढ़ाने के साथ ही तमीम ने BCB की खराब होती छवि को सुधारने पर भी जोर दिया. उन्होंने माना कि पिछले डेढ़ साल में बोर्ड की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और इसे मिलकर ठीक करना होगा।  तमीम ने कहा कि क्रिकेट हमेशा देश के लिए गर्व का विषय होना चाहिए और जो लोग बोर्ड से जुड़े हैं, उन्हें इस पर गर्व महसूस करना चाहिए. उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में BCB में और भी सुधारात्मक कदम देखने को मिल सकते हैं। 

बिहार के बड़े शहरों में बसाने नेपाल रूट से घुसाये जा रहे बांग्लादेशी

पटना/रक्सौल. भारत–नेपाल सीमा पर तीन बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर उस अदृश्य नेटवर्क की ओर इशारा किया है, जो वर्षों से नेपाल को ट्रांजिट रूट बनाकर विदेशी नागरिकों को भारत में अवैध रूप से प्रवेश कराता रहा है। यह गिरफ्तारी महज संयोग नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय मानव तस्करी और घुसपैठ तंत्र का संकेत मानी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बांग्लादेशी नागरिकों के लिए नेपाल सबसे आसान प्रवेश द्वार बन चुका है। नेपाल की वीजा नीति अपेक्षाकृत सरल होने के कारण विदेशी नागरिक पहले वहां टूरिस्ट वीजा पर पहुंचते हैं। इसके बाद सीमावर्ती भारतीय जिलों में सक्रिय एजेंट उन्हें बिना भारतीय वीजा के सीमा पार कराते हैं। स्थानीय गाइड नेटवर्क की पहली कड़ी गिरफ्तार सरफराज अंसारी को इस नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है। पुलिस को संदेह है कि वह सिर्फ एक गाइड नहीं, बल्कि ऐसे कई लोग हैं, जो सीमावर्ती गांवों में रहकर विदेशी नागरिकों को सुरक्षित रास्तों से भारत में दाखिल कराते हैं। बदले में मोटी रकम वसूली जाती है। सूत्रों का दावा है कि अवैध रूप से भारत में प्रवेश कराने के बाद इन विदेशी नागरिकों को पटना, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था पहले से तय रहती है। वहां उनके ठहरने, काम और पहचान छिपाने तक की योजना बनाई जाती है। सीमा सुरक्षा पर गंभीर सवाल इस घटना ने सीमा सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि एसएसबी द्वारा नए वर्ष को लेकर विशेष अलर्ट जारी नहीं किया गया होता, तो यह समूह भी आसानी से सीमा पार कर जाता। यह दर्शाता है कि सामान्य दिनों में नेटवर्क कितनी सहजता से सक्रिय रहता है। भारत–नेपाल सीमा से पहले भी घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज और मानव तस्करी से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद नेटवर्क का पूरी तरह भंडाफोड़ न होना प्रशासनिक चुनौतियों को उजागर करता है। एसएसबी और पुलिस कर रही गहन जांच एसएसबी और जिला पुलिस की संयुक्त टीम मोबाइल डेटा, काल डिटेल, नेपाल में ठहरने के रिकार्ड और भारत में संपर्क सूत्रों की गहन जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि नेटवर्क से जुड़े कितने एजेंट अब भी सक्रिय हैं और किन-किन रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है। यह मामला केवल चार लोगों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते इस नेटवर्क की जड़ तक नहीं पहुंचा गया, तो सीमावर्ती इलाकों के रास्ते अवैध गतिविधियों का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।

हिंदुओं की रक्षा नहीं हुई तो आंदोलन तय, बांग्लादेशी प्रशासन को चेताया गया

कोलकाता बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचारों, विशेष रूप से हालिया लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ भारत के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन जारी हैं। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में गुरुवार को बांगिया हिंदू महामंच ने बड़ा प्रदर्शन किया, जबकि कोलकाता और गुवाहाटी में शुक्रवार को हजारों लोग सड़कों पर उतरे। इन प्रदर्शनों में बांग्लादेशी अधिकारियों पर दबाव बनाने और हिंदुओं की सुरक्षा की मांग की जा रही है। सिलीगुड़ी में बांगिया हिंदू महामंच के अध्यक्ष बिक्रमादित्य मंडल ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा- बांग्लादेश में हिंदुओं को जिस तरह लिंच किया जा रहा है, उसके खिलाफ हम प्रदर्शन कर रहे हैं। हमने पहले ही वीजा कार्यालय बंद करवा दिया है। अगर बांग्लादेश में हिंदुओं की रक्षा नहीं हुई, तो हम यहां बांग्लादेशी अधिकारियों को शांतिपूर्वक रहने नहीं देंगे। हम उन्हें प्रताड़ित नहीं करेंगे, लेकिन उनके काम नहीं करने देंगे और सुनिश्चित करेंगे कि वे अपने देश वापस चले जाएं। ये प्रदर्शन मुख्य रूप से बांग्लादेश के मायमनसिंह जिले में 18 दिसंबर को हुई दीपू चंद्र दास (27 वर्ष) की लिंचिंग से ट्रिगर हुए हैं। दीपू चंद्र दास नामक हिंदू युवक पर कथित ईशनिंदा का आरोप लगाकर भीड़ ने उन्हें पीटा, पेड़ से लटकाया और शरीर को आग लगा दी। इसके अलावा, हाल ही में एक अन्य हिंदू युवक अमृत मंडल की हत्या की खबरें भी सामने आई हैं। इन घटनाओं ने भारत में भारी राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया है। पश्चिम बंगाल और असम में प्रदर्शन तेज हो गए हैं। कोलकाता में शुक्रवार को हजारों भगवा वस्त्र धारण किए हिंदू कार्यकर्ता बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन के बाहर जमा हुए। भाजपा नेता एवं पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी कमीशन परिसर में घुस गए और अधिकारियों से बात की। उन्होंने हिंदुओं पर अत्याचार रोकने की मांग की। असम के गुवाहाटी में भी बंगाली यूनाइटेड फोरम ने बांग्लादेश असिस्टेंट हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन किया। इससे पहले दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद में भी विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों ने प्रदर्शन किए। सिलीगुड़ी में वीजा सेंटर में तोड़फोड़ की घटनाएं भी हुईं, जिसके बाद बांग्लादेश ने भारत के राजदूत को तलब किया था। भारत की ओर से प्रतिक्रिया विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हिंसा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा- भारत बांग्लादेश के लोगों से निकट और मित्रतापूर्ण संबंध चाहता है, जो मुक्ति संग्राम में जड़े हुए हैं और विकास एवं जन-जन के प्रयासों से मजबूत हुए हैं। बांग्लादेश में हो रहे राजनीतिक बदलावों, जैसे बीएनपी नेता तारिक रहमान की 17 वर्ष बाद वापसी और शेख हसीना की अवामी लीग पर प्रतिबंध के संदर्भ में जायसवाल ने कहा- हम बांग्लादेश में शांति और स्थिरता के पक्षधर हैं। हम लगातार स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी और भागीदारीपूर्ण चुनावों की मांग करते रहे हैं। बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने दीपू चंद्र दास मामले में 10 गिरफ्तारियां होने की जानकारी दी थी, लेकिन भारत में प्रदर्शनकारियों का मानना है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और कड़े कदम उठाने की जरूरत है। स्वतंत्र रिपोर्ट्स के अनुसार, यूनुस सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों पर 2,900 से अधिक हिंसा की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

दुर्ग जीआरपी की कार्रवाई: फरार बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार

रायपुर/दुर्ग मुंबई पुलिस की गोपनीय सूचना  पर कार्रवाई करते हुए दुर्ग जीआरपी ने शुक्रवार को शालीमार-कुर्ला एक्सप्रेस  के एस-1 कोच से एक बांग्लादेशी नागरिक को बिना वैध दस्तावेज के गिरफ्तार किया. आरोपी की पहचान अजमीर शेख के रूप में हुई, जो मुंबई में दर्ज मामले का फरार आरोपी था और कोलकाता होते हुए बांग्लादेश भागने की फिराक में था. 7 नवंबर को मिली सूचना के बाद जीआरपी ने दुर्ग स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर टीम तैनात कर दी. ट्रेन के पहुंचते ही एस-1 कोच में दबिश दी गई. थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह ने बताया, “आरोपी ने जनरल टिकट  खरीदा था, लेकिन टीटी से सेटिंग कर स्लीपर कोच में चढ़ गया. उसके पास पासपोर्ट, वीजा या कोई वैध पहचान पत्र  नहीं मिला.” मुंबई पुलिस की टीम फ्लाइट से रायपुर पहुंच चुकी है और सड़क मार्ग से दुर्ग आ रही है. औपचारिकताएं पूरी कर अजमीर शेख को मुंबई ले जाया जाएगा. पुलिस को शक है कि उसका नेटवर्क भारत में सक्रिय हो सकता है, इसलिए खुफिया एजेंसियों से समन्वय कर गहन जांच शुरू की गई है.

बड़ी सेंध! बांग्लादेशी घुसपैठिया भारतीय सेना में भर्ती, खुफिया एजेंसियां अलर्ट

इंदौर  बांग्लादेशी नागरिक और रोहिंग्याओं की जांच कर रही मध्य प्रदेश की एसआइटी को चौंकाने वाली जानकारी मिली है। पड़ताल में न केवल कई बांग्लादेशी अवैध तरीके से इंदौर में रहते मिले, बल्कि यह भी पता चला कि ऐसी ही एक महिला का बेटा सेना में भर्ती हो गया है। आइबी सहित अन्य राष्ट्रीय एजेंसियों ने शुरू की जांच एसआइटी की रिपोर्ट के बाद आइबी सहित अन्य राष्ट्रीय एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। एसआइटी ने एक महिला को वापस बांग्लादेश भेज दिया है, जबकि दो अन्य महिलाओं को हिरासत में लिया है। बता दें कि पुलिस मुख्यालय से मिली गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर डीसीपी इंटेलिजेंस डॉ. हंसराज ने एसआइटी का गठन किया था। पिछले माह पुलिस का सात सदस्यीय दल बंगाल गया था, जहां पता चला कि इंदौर में कई बांग्लादेशी नागरिक फर्जी आधार और पैनकार्ड बनाकर रह रहे हैं। सौरभ ने इंदौर में घर बना लिया कॉकद्वीप (कोलकाता) का सौरभ दास भी उनमें एक है। वर्षों पूर्व घुसपैठ कर भारत आए उसके दादा आज भी बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में रेलवे पटरी के समीप रहते हैं। सौरभ ने इंदौर में घर बना लिया और बांग्लादेशी युवती से शादी कर ली। पुलिस ने युवती को शाजापुर से पकड़कर वापस भेज दिया, पर सौरभ गायब हो गया। इसी जांच में पता चला कि सौरभ की बहन प्रभा का एक बेटा सेना में भर्ती हो गया है। डीसीपी ने बंगाल के बड़े अफसरों से बात की बता दें कि बंगाल गई एसआइटी टीम का वहां रहवासियों ने न केवल विरोध किया, बल्कि स्थानीय पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और दिनभर थाने में बैठाकर रखा। डीसीपी ने बंगाल के बड़े अफसरों से बात की, तब कहीं एसआइटी के सदस्यों को छोड़ा गया।  

CG में रहने वाले अवैध बांग्लादेशियों को भेजा जा रहा बांग्लादेश, पुलिस प्लेन से बॉर्डर तक ले जाएगी

 रायपुर  छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को देश से बाहर निकालने की कार्रवाई तेज हो गई है। रायपुर पुलिस आज 30 बांग्लादेशी नागरिकों को देश की सीमा तक लेकर जाएगी। रायपुर एयर से गुवाहाटी एयरपोर्ट में छोड़ा जाएगा ।वहां उन्हें बीएसएफ के सुपुर्द किया जाएगा, जो आगे की प्रक्रिया पूरी कर बांग्लादेश भेजेगी। इन बांग्लादेशी नागरिकों को प्रदेश के रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर और रायगढ़ जिलों से पकड़ा गया था। सभी लोग अवैध तरीके से भारत में प्रवेश कर यहां वर्षों से रह रहे थे। इनकी धरपकड़ के बाद अब इन्हें डिपोर्ट किया जा रहा है। इस विशेष अभियान का नेतृत्व रायपुर के सीएसपी राजेश देवांगन कर रहे हैं। उनकी अगुवाई में गठित पुलिस टीम इन बांग्लादेशियों को लेकर आज सीमा क्षेत्र के लिए रवाना होगी। सूत्रों के मुताबिक, पकड़े गए लोगों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले हैं। राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियां लगातार इस तरह के मामलों पर निगरानी रख रही हैं और आवश्यक कार्रवाई कर रही हैं।  जानकारी के मुताबिक, घुसपैठियों को रायपुर पुलिस BSF के सौंपेगी, फिर असम से बांग्लादेश बॉर्डर पर BSF के जरिए डिपोर्ट प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह सारी प्रकिया आज ही पूरी होगी। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि, घुसपैठियों के संदर्भ में एक एसटीएफ (विशेष कार्य बल) का गठन किया गया है। एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। जहां भी घुसपैठी मिलेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। रायपुर-दुर्ग, राजनांदगांव और रायगढ़ से पकड़े गए लोगों किया गया डिपोर्ट इस डिपोर्ट प्रक्रिया में रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और रायगढ़ जिलों से पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों को गुवाहाटी ले जाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि, यह छत्तीसगढ़ राज्य की पहली औपचारिक डिपोर्ट कार्रवाई है, जो केंद्र सरकार की मंजूरी से की जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूरे राज्य में हुई छापेमारी और पहचान के बाद 30 लोगों को अभी तक पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिक होने के तौर पर चिन्हित किया है. जिन्हें बांग्लादेश भेजने की कार्रवाई शुरू की जा रही है. जानकारी के अनुसार इन सभी लोगों को रायपुर पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के हवाले करेगी. उसके बाद बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स उन्हें बांग्लादेश को सौंप देंगे. रायपुर में पुलिस सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार जो भी बांग्लादेशी अभी तक डीटेन किए गए हैं. उन सभी लोगों को भेजने की प्रक्रिया चल रही है. जानकारी के अनुसार उन्हें आज बांग्लादेश के लिए भेजा जाएगा. सभी लोगों को हवाई जहाज के माध्यम से बॉर्डर तक ले जाया जाएगा. उसके बाद उन्हें बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के हवाले कर दिया जाएगा.  भारत से बात करते हुए रायपुर पश्चिम के ASP दौलत राम पोर्ते ने बताया कि जो भी बांग्लादेशी पकड़े गए हैं, उनको बांग्लादेश भेजना है. जो भी सरकार के नियम निर्देश हैं, उसके तहत यह कार्रवाई की जा रही है. जो भी बांग्लादेशी अब तक पकड़े गए हैं, उन सभी लोगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत भेजा जा रहा है. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इन सभी लोगों को किस समय बांग्लादेश के लिए रायपुर से भेजा जाएगा.  क्यों उठाया गया ये कदम ? राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान पिछले कुछ सालों में इंटेलिजेंस इनपुट और स्थानीय शिकायतों के आधार पर की गई थी। रायपुर समेत कई जिलों में ऐसे नागरिकों को पकड़ा गया था जो बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रह रहे थे। भारत-बांग्लादेश की बॉर्डर पर बीएसएफ तैनात भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर बीएसएफ तैनात है। बॉर्डर की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी है, इसलिए केंद्र सरकार ने उन्हें ही जिम्मेदारी दी है। साथ ही बांग्लादेश दूतावास से भी चर्चा चल रही है। उन्हें इस संबंध में जानकारी भी भेजी गई है। जिन पर केस, उनको बाद में भेजा जाएगा बताया जा रहा है कि जिनके खिलाफ केस दर्ज है। उन्हें मामले की सुनवाई पूरी होने तक यहीं रहना होगा। कोर्ट के फैसले के बाद ही उन्हें बांग्लादेश भेजा जाएगा। रायपुर में 6 बांग्लादेशियों के खिलाफ केस दर्ज है। इसमें तीन भाई, एक दंपती और उसकी नाबालिग बेटी शामिल हैं। दुर्ग में भी 7 से ज्यादा लोगों पर केस दर्ज है। राजनांदगांव में चोरी के मामले में बांग्लादेशी बंद है, जबकि रायपुर में 10 बांग्लादेशियों पर केस दर्ज नहीं किया है। उन्हें प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए जेल में रखा गया है।