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शाही विरासत पर सुलगा विवाद: भोपाल में 15000 करोड़ की संपत्ति पर 20+ दावेदारों का दावा

भोपाल  शाही परिवार की संपत्ति का विवाद फिर से सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट ने MP हाई कोर्ट के एक आदेश पर रोक लगा दी है। यह आदेश भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्लाह खान की संपत्ति से जुड़ा है। नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान को 1962 में एकमात्र वारिस घोषित किया गया था। साजिदा सुल्तान, फिल्म अभिनेता सैफ अली खान की दादी हैं। अब नवाब के भाइयों और अन्य रिश्तेदारों के वंशज इस दावे का विरोध कर रहे हैं। नवाब ओबैदुल्लाह खान के वंशजों ने दी याचिका सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पी एस नरसिम्हा और अतुल चन्दुरकर की बेंच ने 8 अगस्त को यह फैसला सुनाया। उन्होंने उमर फारूक अली और राशिद अली की याचिका पर नोटिस जारी किया। ये दोनों नवाब ओबैदुल्लाह खान के वंशज हैं। उनके वकील आदिल सिंह बोपराई ने बताया कि MP हाई कोर्ट ने 30 जून को फैसला सुनाया था। इसमें कहा गया था कि नवाब की संपत्ति का बंटवारा मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से होना चाहिए। यह फैसला 'तलत फातिमा (रामपुर) केस' पर आधारित था। हालांकि, हाई कोर्ट ने मामले को फिर से विचार करने के लिए ट्रायल कोर्ट को भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट में इसी फैसले को चुनौती दी गई है। ट्रायल कोर्ट ने सैफ की फैमिली के पक्ष में दिया था फैसला 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने 'तलत फातिमा रामपुर केस' में फैसला दिया था कि शाही संपत्ति का बंटवारा पर्सनल लॉ के हिसाब से होना चाहिए। MP हाई कोर्ट ने 2000 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान, उनके बेटे मंसूर अली खान (दिवंगत क्रिकेटर) और उनके कानूनी वारिसों (सैफ अली खान, सोहा अली खान, सबा सुल्तान और शर्मिला टैगोर) के अधिकारों को सही माना था। हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला 1997 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर आधारित था, जिसे 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था। और भी हैं इस मामले में पेंच इस संपत्ति विवाद में एक और पेच है। 2015 में सरकार ने आबिदा सुल्तान की संपत्ति को जब्त कर लिया था। आबिदा सुल्तान, हमीदुल्लाह खान की सबसे बड़ी बेटी थीं। वह पाकिस्तान चली गई थीं। भारत में उनकी संपत्ति को 'शत्रु संपत्ति' घोषित कर दिया गया है। जबलपुर के वकील राजेश कुमार पंचोली के अनुसार, आबिदा सुल्तान 1972 के मूल मामले में शामिल थीं। इस मामले में भोपाल की शाही संपत्ति के लिए 20 से अधिक दावेदार थे। रामपुर केस की चर्चा क्यों हो रही है? 2019 का रामपुर केस इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इसमें कहा गया था कि सभी वारिसों को, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, संपत्ति में हिस्सा मिलना चाहिए। लेकिन पंचोली का कहना है कि यह मामला भोपाल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो सकता। 1972 से नवाब की कई संपत्तियां, जो भोपाल, सीहोर और रायसेन में फैली हुई हैं, वो या तो बेची जा चुकी हैं या दूसरों के कब्जे में हैं। फिलहाल हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान किसी भी नई बिक्री या हस्तांतरण पर रोक लगा दी है।  

श्रम स्टाट रेटिंग की परिकल्पना, सुरक्षा प्रावधानों के अनुपालन को मिलेगी मजबूती

श्रम स्टाट रेटिंग की परिकल्पना के साथ श्रम सुरक्षा प्रावधानों का होगा बेहतर परिपालन श्रम स्टाट रेटिंग की परिकल्पना, सुरक्षा प्रावधानों के अनुपालन को मिलेगी मजबूती कर्मचारी सुरक्षा पर फोकस, श्रम स्टाट रेटिंग से बढ़ेगा नियमों का पालन भोपाल राज्य के उद्योग तथा व्यवसायों के लिए श्रम कानूनों के प्रमुख प्रावधानों एवं औद्योगिक स्वास्थ्य व सुरक्षा संबंधी प्रावधानों के परिपालन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन करने वाले प्रबंधन हेतु श्रम स्टार रेटिंग की परिकल्पना की गई है। गत दिवस राज्य के उद्योग तथा व्यवसायों के प्रतिष्ठित संगठनों तथा प्रबंधकों से वीडियों कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस संबंध में चर्चा की गयी। श्रम विभाग के सचिव रघुराम एम राजेन्द्रन ने इस अवसर पर कहा कि सभी के सहयोग से श्रम सुरक्षा प्रावधानों का बेहतर परिपालन किया जायेगा। चर्चा के प्रारंभ में सचिव श्रम राजेन्द्रन द्वारा प्रस्ताव की प्रारंभिक रूप रेखा प्रस्तुत की और श्रम आयुक्त ने इसकी आवश्यकता और उपयोगिता पर प्रकाश डाला। श्रम स्टार रेटिंग की प्रस्तुति अपर श्रम आयुक्त प्रभात दुबे द्वारा की गयी। इस दौरान विभिन्न संगठनों तथा प्रबंधकों द्वारा एकमत से इस प्रस्ताव की सराहना करते हुए महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किये। कहा गया कि सेल्फ असेसमेंट की प्रणाली में स्व-प्रबंधन को प्रस्तावित वेटेज अधिक प्रतीत होता है। यह प्रणाली अधिक युक्तियुक्त होना चाहिये। महिला सहभागिता के संबंध में उद्योग-वार पृथक-पृथक मापदण्ड होना चाहिए। कई उद्योगों में महिलाएँ अधिक और कहीं अत्यन्त न्यून हैं अतः इसके अनुरूप वेटेज होना चाहिए। दिव्यांग श्रमिकों की नियुक्ति पर भी वेटेज हो। रेटिंग के घटक उद्योगों की श्रेणी (वृहद/मध्यम/लघु/सूक्ष्म/खतरनाक/ गैर खतरनाक आदि), श्रमिक संख्या तथा उत्पादों की प्रकृति आदि के अनुसार तय होना चाहिए। वेटेज भी उद्योग/ व्यवसाय की प्रकृति के अनुसार हो। लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों हेतु यह अनिवार्य नहीं होना चाहिए। स्वतंत्र इम्पेनल्ड एजेंसियों का चयन उद्योगों तथा विभाग की सहमति से तय किया जाना उचित होगा। उच्च रेटिंग के आधार पर शासकीय क्रय में प्राथमिकता तथा शासन से सब्सिडी और अन्य इन्सेंटिव मिलना चाहिए। श्रम कानूनों के किन प्रावधानों को सम्मिलित किया जायेगा, यह स्पष्ट होना चाहिए। अन्य प्रस्तावित मापदण्डों में भी सुस्पष्ट विवरण हो। रेटिंग जारी होने के बाद प्रभावशील होने की समय-सीमा नियत हो और रेटिंग कितनी समय अवधि में होगी इसकी फ्रीक्वेंसी तय हो। समस्त प्रणाली पारदर्शी हो तथा ऑन लाइन हो और अंतिम रूप दिये जाने के पूर्व नियमित रूप से स्टेक होल्डर्स से चर्चा की जावे। सचिव श्रम ने प्राप्त सुझावों पर विचार करने तथा नियमित चर्चा किये जाने हेतु आश्वस्त करते हुए स्पष्ट किया कि इसके पश्चात ही अंतिम योजना जारी की जायेगी। सुझाव e mail id – commlab@nic.in पर भेजे जा सकते हैं। साथ ही व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का भी सुझाव दिया। उन्होंने योजना प्रारंभ करने आगामी 02 अक्टूबर, 2025 का लक्ष्य प्रस्तावित किया। उन्होंने जिलों में होने वाले युवा संगम, प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) तथा दुर्घटना रहित दिवस संबंधी योजनाओं की जानकारी देते हुए इनसे जुडने का आग्रह किया। उन्होंने Reducing the compliance burden, Decriminalization and Ease of Doing Business के प्रयासों की जानकारी देने और अन्य कार्यक्रम, योजनाओं की जानकारी ग्रुप पर देने का सुझाव दिया। श्रम आयुक्त् द्वारा सभी से ठेका श्रमिकों को निर्धारित वेतन, समय पर वेतन भुगतान तथा अन्य हितलाभ जैसे ईएसआइ तथा पीएफ आदि प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने ‘’एक पेड मां के नाम’’अभियान में भागीदारी का भी आग्रह किया। चर्चा में सचिव श्रम रघुराज एम. राजेन्द्रन, श्रम आयुक्त श्रीमती रजनी सिंह, विभागीय अधिकारी तथा राज्य के विभिन्न क्षेत्र के वृहद, मध्यम तथा लघु उद्योगों के विभिन्न प्रतिष्ठित औद्योगिक संगठन जैसे एसोसिएशन ऑफ इण्डस्ट्रीज, पीथमपुर, इंदौर, देवास, मालनपुर, ग्वालियर,सी.आइ.आइ., मध्यप्रदेश एसोसिएशन ऑफ टेक्सटाइल मिल्स आदि के पदाधिकारी तथा विभिन्न उद्योग तथा व्यवसायों के वरिष्ठ प्रबंधक शामिल हुए।  

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह का निर्देश: सरकारी स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों का मुद्रण हो उच्च गुणवत्ता का

भोपाल स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि शैक्षणिक सत्र वर्ष 2026-27 में पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा मुद्रित की जाने वाली किताबें उच्च गुणवत्ता की हों। उन्होंने कहा कि मुद्रण कार्य से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं तय समय-सीमा में पूरी की जायें। उन्होंने कहा कि पाठ्य पुस्तकों का वितरण शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही पूरा किया जाये। यह व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह  मंत्रालय में पाठ्य पुस्तक निगम की गवर्निंग बॉडी की बैठक ली। बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता, वित्त, माध्यमिक‍ शिक्षा मंडल के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। बैठक में पाठ्य पुस्तक निगम के एमडी विनय निगम ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में करीब 9 करोड़ पाठ्य पुस्तकों का मुद्रण होगा। इसके लिये ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के तहत निविदा की प्रक्रिया होगी। निगम शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 10 मार्च 2026 तक सभी पाठ्य पुस्तकों का मुद्रण कार्य पूरा कर लेगा। बैठक में बताया गया कि इस वर्ष अप्रैल 2025 में शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण शुरू किया गया था। इस वर्ष अब तक लगभग सभी पाठ्य पुस्तकों का वितरण विद्यार्थियों को किया जा चुका है। बैठक में बताया गया कि निगम ने कुछ सरकारी स्कूलों को खेल-कूद मैदान, अतिरिक्त कक्ष और नवीन कक्ष निर्माण के लिये अनुदान राशि मंजूर की है। किताबों की पांडुलिपि डेढ़ माह में मिलेगी बैठक में भी बताया गया कि राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा अगले शैक्षणिक सत्र के लिये एनसीईआरटी और एससीईआरटी से किताबों की पांडुलिपि सितंबर 2025 अंत तक पाठ्य पुस्तक निगम को उपलब्ध करा दी जायेंगी। मध्यप्रदेश, देश के उन चुनिंदा राज्यों में है, जहां बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें सत्र शुरू होते ही वितरित की गयीं।   स्थानीय भाषा में सामग्री विकास स्कूल शिक्षा विभाग ने 8 स्थानीय भाषाओं- बुन्देली, बघेली, मालवी, निवाड़ी, गोंडी, भीली, बारेली और कोरकू भाषाओं में सामग्री का विकास किया है। विभाग का यह प्रयास बच्चों में स्थानीय भाषा के प्रति लगाव के उद्देश्य से किया गया है।

दांतों की बीमारियों से परेशान MP: एम्स सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

भोपाल  एम्स भोपाल ने मध्यप्रदेश में दांत और मुंह की बीमारियों पर अब तक का सबसे बड़ा राज्यव्यापी सर्वेक्षण पूरा किया है। 2002-03 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर मौखिक स्वास्थ्य की स्थिति दर्ज की गई है। इस रिपोर्ट को हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साउथ-ईस्ट एशिया जर्नल आफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित किया है। यह सर्वेक्षण एम्स भोपाल के दंत विभाग और रीजनल ट्रेनिंग सेंटर फार ओरल हेल्थ प्रमोशन एंड डेंटल पब्लिक हेल्थ के नोडल अधिकारी डा. अभिनव सिंह के नेतृत्व में किया गया। इसमें मध्यप्रदेश शासन के स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय ने सहयोग दिया। अध्ययन में प्रदेश के 41 जिलों के शहरी और ग्रामीण इलाकों से करीब 48 हजार लोगों को शामिल किया गया। नतीजे चौंकाने वाले सर्वे के मुताबिक, प्रदेश में दांतों में कीड़े लगना 40 से 70 प्रतिशत लोगों में पाया गया। मसूड़ों की बीमारी 50 से 87 प्रतिशत और मुंह के कैंसर दो से 17 प्रतिशत तक देखी गईं। सबसे गंभीर स्थिति यह रही कि 70 प्रतिशत से अधिक बुजुर्ग और लगभग 50 फीसद 5 साल के बच्चे दांतों की सड़न यानी कैविटी से जूझ रहे हैं। देश का पहला मौखिक स्वास्थ्य डेटा बैंक एम्स भोपाल ने केवल सर्वे ही नहीं किया, बल्कि इसके आधार पर देश का पहला मौखिक स्वास्थ्य डेटा बैंक भी बनाया है। डब्ल्यूएचओ माडल पर आधारित इस डेटा बैंक में जिलेवार मौखिक स्वास्थ्य की स्थिति और सेवाओं का ब्योरा दर्ज है। सरकार और नीति-निर्माता अब इस आधार पर नई योजनाएं बना सकेंगे। तकनीक से आई पारदर्शिता सर्वेक्षण को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए मोबाइल एप और जीपीएस तकनीक का उपयोग किया गया। साथ ही एम्स भोपाल ने अपने ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से डॉक्टरों, शिक्षकों और काउंसलरों को विशेष प्रशिक्षण देने की भी शुरुआत की है, ताकि रोकथाम और उपचार की सुविधाएं सीधे समाज तक पहुंच सकें। विशेषज्ञों की राय डॉ. अभिनव सिंह का कहना है कि अब जब मौखिक स्वास्थ्य की वास्तविक तस्वीर सामने आ चुकी है तो जनजागरुकता बढ़ाने, बचाव और उपचार के लिए ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। यह सर्वे मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में मौखिक स्वास्थ्य को नई दिशा देगा।     दांतों में कीड़े (कैविटी) – 40% से 70%     मसूड़ों की बीमारी (गम डिजीज) – 50% से 87%     मुंह के कैंसर से पहले की अवस्थाएं – 2% से 17%     बुजुर्गों में दांतों की सड़न – 70% से अधिक     5 साल के बच्चों में कैविटी – लगभग 50%  

रेलवे बोर्ड का फैसला: टीटीई लॉबी में बायोमेट्रिक सिस्टम लागू, अब आधार से दर्ज होगी हाजिरी

भोपाल  रेलवे बोर्ड (Railway Board) ने टीटीइ लॉबी में बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन सिस्टम लागू करने की मंजूरी दे दी है। रेलवे की ओर से अपने टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE) की ड्यूटी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में ये महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब टीटीइ ड्यूटी शुरू करने के लिए आधार बेस्ड बायोमेट्रिक पर साइन इन करेंगे और ड्यूटी एंड होने पर साइन आउट कर सकेंगे। दर्ज होगा उपस्थिति का रियल टाइम रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से न केवल कर्मचारियों की रियल टाइम अटेंडेंस दर्ज होगी, बल्कि ड्यूटी रिकॉर्ड में पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे ड्यूटी साइन-इन और साइन-आउट की प्रक्रिया तेज, सरल और सुरक्षित हो जाएगी। तीन फिंगरप्रिंट डिवाइस का सफल परीक्षण बता दें कि टीटीई लॉबी एप्लिकेशन (TTE Lobby Application) को सी-डैक (केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की वैज्ञानिक संस्था) के पोर्टल से जोड़ा गया है। इस प्रणाली का परीक्षण नई दिल्ली में किया गया, जहां मंतरा, एक्सेस और आइडीएमआइए के तीन प्रमुख ओईएम फिंगरप्रिंट डिवाइस का सफल प्रयोग किया गया। ये सभी डिवाइस यूआईडीएआई-एसटीक्यूसी प्रमाणित हैं। अगस्त के अंतिम सप्ताह से देशभर में होगी लागू रेलवे का लक्ष्य है कि अगस्त के अंतिम सप्ताह से इस बायोमेट्रिक फीचर को एमपी समेत देशभर की सभी टीटीई लॉबी सर्वरों पर लागू कर दिया जाएगा। इसके लिए सभी जोनल रेलवे को बायोमेट्रिक डिवाइस की खरीद, स्थापना और कॉन्फिगरेशन के निर्देश भी जारी किए गए हैं। पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम मामले में रेलवे बोर्ड जनरल मैनेजर पीएमएस सीएल सह के मुताबिक बायोमेट्रिक प्रणाली लागू होने से कर्मचारियों की उपस्थिति पर निगरानी संभव होगी। इससे ड्यूटी रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी को रोका जा सकेगा। यह कदम रेलवे की डिजिटल इंडिया और स्मार्ट रेलवे पहल को मजबूती देगा और प्रशासनिक कामकाज में भी सुधार लाने में मददगार साबित होगा।

मध्य प्रदेश: संजय टाइगर रिजर्व में बिजली करंट से बाघ की दर्दनाक मौत

सीधी, मध्य प्रदेश के संजय टाइगर रिजर्व में एक बाघ की बिजली करंट की चपेट में आने से मौत हो गई, जिससे वन विभाग में हड़कंप मच गया है। मृत बाघ की पहचान टी-43 के रूप में हुई है और यह घटना दुबरी रेंज के खरबर जंगल में हुई। वन अधिकारियों के मुताबिक, जंगल में हाई-वोल्टेज बिजली के तार बिछाए थे, जिसमें बाघ फंस गया और उसकी दर्दनाक मौत हो गई। संजय टाइगर रिजर्व के एसडीओ सुधीर मिश्रा ने बताया कि रात करीब 12 बजे उन्हें सूचना मिली कि जंगल में एक बाघ मृत पाया गया है। इसके बाद पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जांच के बाद वन अपराध प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई तेज कर दी गई है। तीन डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया और टाइगर के विसरा को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। उन्होंने दावा किया कि बाघ के सभी अंग सुरक्षित थे। पोस्टमार्टम के बाद एनटीसीए प्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में शव को जला दिया गया। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला कि बाघ की मौत बिजली के तारों की चपेट में आने से हुई, जो शायद किसानों ने फसल बचाने के लिए लगाए थे। हालांकि, शिकारियों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “संजय टाइगर रिजर्व में लगातार वन्यजीवों की मौत बिजली के जाल में फंसने से हो रही है।” उन्होंने बताया कि जांच में जो साक्ष्य मिलेंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि अगर कहीं पर किसी भी प्रकार की लापरवाही है, तो तत्काल दुरुस्त किया जाए। हमारा कर्तव्य है कि हर जानवर की हिफाजत सुनिश्चित की जाए। किसी को भी कोई क्षति नहीं पहुंचे।  

मध्य प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या में इजाफा, परिसीमन से पहली सीट का नाम सामने आया

भोपाल   मध्यप्रदेश के आगामी 2028 विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि धार जिले से अलग होकर औ‌द्योगिक नगरी पीथमपुर (Pithampur) को स्वतंत्र विधानसभा सीट का दर्जा मिल सकता है। बढ़‌ती आबादी और मतदाताओं की संया को देखते हुए यह फैसला लगभग तय माना जा रहा है। वर्तमान में धार जिले में सात और इंदौर जिले में नौ विधानसभा सीटें हैं। दोनों जिलों की कुल आबादी और मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। धार में बनेंगी दो नई विधानसभा सीटें राजनीतिक गलियारों में 2028 के विधानसभा चुनाव (mp assembly elections 2028) से पहले होने वाले परिसीमन और महिला आरक्षण पर निगाह टिकी हुई है। इससे जहां नए राजनीतिक समीकरण बनेंगे, वहीं दावेदारों के साथ-साथ विधायकों की संख्या में भी इजाफा होगा। औसतन एक विधानसभा में ढाई से लेकर तीन लाख मतदाता ही रहेंगे और मौजूदा विसंगतियों को दूर किया जाएगा। अभी धार सहित देश-प्रदेश में विधानसभा-लोकसभा सीटों के क्षेत्रफल और आबादी यानी मतदाताओं में भारी विसंगति है। विशेषज्ञों का कहना है कि धार में दो नई सीटें बन सकती हैं। इससे जहां मौजूदा विधायकों का गणित बिगड़ेगा, वहीं नए चेहरों को भी मौका मिलेगा। मुस्लिम वोट नहीं होंगे निर्णायक सूत्रों का कहना है कि धार जिले का परिसीमन विशेषज्ञता के साथ किया जाएगा कि किसी भी सीट पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में नहीं रह सके। कांग्रेस-भाजपा के लिए चुनौती पीथमपुर को नई विधानसभा बनने पर दोनों दलों को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। कांग्रेस को संगठन खड़ा करने की चुनौती होगी, जबकि भाजपा को औ‌द्योगिक मजदूरों और ग्रामीण वोट बैंक के बीच संतुलन साधना पड़ेगा। अनुमान है कि नई सीट में ढाई से तीन लाख मतदाता होंगे, जिनमें मजदूर, कर्मचारी और ग्रामीण समाज की भूमिका निर्णायक रहेगी। 2026 के बाद होगा परिसीमन संविधान संशोधन के तहत 2026 तक लोकसभा और विधानसभा सीटें बढ़ाने पर रोक है। लेकिन जनगणना 2026 के बाद नए आंकड़ों के आधार पर परिसीमन होगा। तब मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटें बढ़कर 280 तक हो सकती हैं, वहीं लोकसभा की 29 सीटें बढ़कर 35 से 40 तक पहुंचने का अनुमान है। पीथमपुर विधानसभा में आएंगे ये क्षेत्र इस समय पीथमपुर धार विधानसभा का हिस्सा है, लेकिन औ‌द्योगिक इकाइयों, मजदूर बस्तियों और ग्रामीण अंचल की वजह से यहां मतदाताओं की संया लगातार बढ़ रही है। प्रस्तावित परिसीमन के बाद प्रीति नगर, अकोलिया, बरदरी, खेड़ा, सागौर कुटी और इंडोरामा सहित आसपास के क्षेत्र नई पीथमपुर विधानसभा में शामिल किए जा सकते हैं। धार का क्षेत्रफल और मतदाता घटेंगे, जबकि पीथमपुर की अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनेगी।

धार में इमामबाड़ा सील, सुरक्षा के कड़े इंतजाम; शहरभर में पुलिस बल की तैनाती

धार   धार शहर के हटवाड़ा इलाके में स्थित इमामबाड़े को लेकर प्रशासन ने अहम कदम उठाते हुए मुस्लिम समाज से खाली करा लिया गया है। बुधवार तड़के 4 बजे कार्रवाई करते हुए भवन पर लोहे का गेट ओर ताला लगाकर इसे सील किया गया। साथ ही, पीडब्ल्यूडी विभाग को सुपुर्द किया गया है। एसडीएम के आदेश पर की गई इस कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक सतर्कता है। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात किये गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटा जा सके। इमामबाड़े का कब्जा दिलवाने के बाद प्रशासन ने इसकी जिम्मेदारी अब पीडब्ल्यूडी विभाग को सौंप दी है। इस कार्रवाई को लेकर शहरभर में चर्चा का माहौल है और लोग पुलिस-प्रशासन की इस सक्रियता की बातें करते नजर आ रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस-प्रशासन लगातार क्षेत्र का भ्रमण कर रहा है और हालात पर नजर बनाए हुए है। साथ ही, प्रशासन सोशल मीडिया पर भी अलर्ट है। अफवाहें या भ्रामक खबरें फैलने से रोकने के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। PWD विभाग की निगरानी में रहेगा इमामबाड़ा इस मामले में अधिकारी साफ कर चुके हैं कि, सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की गलत जानकारी साझा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब इमामबाड़ा पीडब्ल्यूडी विभाग की देखरेख में रहेगा और पुलिस-प्रशासन लगातार हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है।

धर्म परिवर्तन विवाद: इंदौर में बहू पर पति को मुस्लिम बनाने का आरोप, परिजनों ने पुलिस में दी शिकायत

इंदौर  इंदौर जिला न्यायालय ने एक बहू के खिलाफ घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत मंगलवार को मामला दर्ज किया है। आरोप है कि विवाह के बाद महिला ने हिंदू पति और ससुराल पक्ष पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी। शादी के कुछ दिनों बाद ही बढ़ने लगे विवाद मरीमाता क्षेत्र की एक युवती का विवाह अप्रैल 2022 में एरोड्रम इलाके के युवक से हुआ था। ससुराल पक्ष के अनुसार, महिला विवाह के बाद केवल 15–20 दिन ही घर पर रही। इस दौरान वह अपने मुस्लिम मित्रों के प्रभाव में आकर मुस्लिम धर्म की इबादत करने लगी। परिवार का आरोप है कि बहू दरगाह जाकर ताबीज, भभूत और फल लाकर जबरदस्ती पति को खिलाने लगी। जब धर्म परिवर्तन के लिए पति ने मना किया तो महिला ने हाथ की नस काटकर आत्महत्या करने की धमकी दी। पति और सास पर दबाव, 10 लाख की मांग ससुराल वालों ने बताया कि एक दिन बहू ने अपनी अलमारी से सभी जेवर निकाल लिए और कहा कि वह "अल्लाह के सजदे" में जा रही है। उसने पति से भी साथ चलने का दबाव बनाया। 17 मार्च 2024 को महिला अपने मायके वालों और दोस्तों के साथ घर आई और 10 लाख रुपए की मांग की। इसी दौरान उसने पति को धर्म बदलने का दबाव बनाकर धमकाया। ससुराल पक्ष ने पुलिस को बुलाया, लेकिन महिला और उसके साथी मौके से चले गए। पुलिस शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं परिवार ने वर्ष 2024 में ही पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी थी। एरोड्रम थाने में मामला दर्ज भी हुआ, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद भी बहू लगातार ससुराल पर दबाव बनाती रही। अदालत ने लिया संज्ञान, बहू को नोटिस थक हारकर परिवार ने एडवोकेट डॉ. रुपाली राठौर और कृष्ण कुमार कुन्हारे के माध्यम से जिला न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया। अदालत को दी गई जानकारी में पीड़ित पति और सास ने बहू की धमकियों और जबरदस्ती का पूरा ब्यौरा दिया। महिला एवं बाल विकास अधिकारी की गोपनीय जांच रिपोर्ट में भी बहू द्वारा मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की पुष्टि हुई। इसके आधार पर अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत केस दर्ज कर बहू को नोटिस जारी किया है। 

बालिकाओं के विकास पर फोकस: सुएंड्रीका ने कस्तूरबा गांधी छात्रावास का निरीक्षण किया

भोपाल संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की कंट्री हेड सुएंड्रीका ने बुधवार को भोपाल के तुलसी नगर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास का दौरा किया। उनके साथ अपर परियोजना प्रबंधक श्रीमती मनीषा सेथिया और जनसंख्या कोष के स्टेट हेड सुनील जैकब भी थे। प्रतिनिधियों ने छात्रावास में पढ़ने वाली बालिकाओं से चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष एवं स्कूल शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल से बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिये एक मॉड्यूल तैयार किया गया है, जिसका नाम “सशक्त” है। छात्रावास में आकर्षक प्रदशर्नी के माध्यम से हिंसा से बचाव, उनके अधिकारों, पॉक्सो एक्ट और शारीरिक स्वच्छता के संबंध में बालिकाओं को जानकारी दी गई है। जनसंख्या कोष बालिका छात्रावास में बालिकाओं के उन्मुखीकरण के लिये विषय-विशेषज्ञों की उपस्थिति में लगातार वर्कशॉप भी कर रहा है। कमिश्नर से मुलाकात कंट्री हेड सुएंड्रीका और स्टेट हेड सुनील जैकब ने आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता से मुलाकात कर यूथ एवं एडोलसेंट प्रोग्राम के बारे में जानकारी प्राप्त की। बैठक में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष से अपेक्षा की गई कि कार्यक्रम का विस्तार प्रदेश के अन्य सरकारी स्कूलों में भी किया जाये। इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बालिकाओं में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की भावना मजबूत होगी। वे अपने अच्छे करियर की तरफ भी बढ़ सकेंगी।