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भवन में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम नहीं करने पर मकान मालिक पर 10 हजार रुपए तक जुर्माना और सजा का भी प्रावधान

भोपाल  विधानसभा के मानसून सत्र में नगरीय विकास विभाग ने फायर सेफ्टी विधेयक पेश करने की तैयारी कर ली है। ड्राफ्ट सतपुड़ा भवन में आग लगने के बाद तैयार किया गया था, लेकिन दो साल में भी लागू नहीं हो पाया। इसमें अलग से अग्नि सुरक्षा संचालनालय का गठन प्रस्तावित है। 10 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान और सजा भी इससे अग्नि सुरक्षा के बेहतर इंतजाम हो पाएंगे। भवन में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम नहीं करने पर मकान मालिक पर 10 हजार रुपए तक जुर्माना और सजा का भी प्रावधान किया गया है। इस एक्ट के लागू होने से अग्नि सुरक्षा की स्थिति सुधरने की संभावना है। विभाग ने ड्राफ्ट पर सभी स्तर पर डिस्कशन पूरे कर लिए हैं। इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। अग्नि सुरक्षा के इंतजाम बढ़ाने के लिए सख्त प्रावधान किए जा रहे हैं। अलग अग्नि सुरक्षा संचालनालय के साथ ही प्रदेश में सेटअप भी प्रस्तावित किया गया है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने दिए हैं एक्ट बनाने के निर्देश प्रदेश में फायर सेफ्टी एक्ट के लिए ड्राफ्ट पहले भी बन चुका है, लेकिन लागू नहीं किया गया। राज्य अग्नि सुरक्षा नियमों के लिए राष्ट्रीय भवन संहिता, ननि अधिनियम 1956 तथा नपा अधिनियम 1961 पर ही निर्भर है। राज्य सरकार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अग्नि सुरक्षा कानून बनाने के निर्देश दिए हैं। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे के अनुसार मानसून सत्र में विधेयक पेश करने की तैयारी हो गई है। पारित होने के बाद प्रदेश में लागू किया जाएगा। ये होंगे मुख्य प्रावधान –अग्निशमन सेवा का नया कैडर बनाया जाएगा, इससे उनकी अलग भर्ती और प्रशिक्षण हो सकेगा। –सभी जिलों में नए फायर स्टेशनखोले जाएंगे। –भवनों में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम सती से लागू किए जाएंगे। ऐसा नहीं करने वालों पर 10 हजार तक का जुर्माना और सजा का प्रावधान किया गया है। –प्रदेश में फायर ब्रिगेड की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसके लिए कर्मचारियों से लेकर उपकरणों के इंतजाम होंगे। –पुलिस फायर स्टेशनके कर्मचारियों का भी विलय किया जाएगा। केंद्र से भी मदद नए सेटअप के लिए 5 हजार करोड़ से अधिक का बजट की जरूरत होगी। हालांकि यह बजट पांच साल में खर्च किया जाएगा और केंद्र सरकार से भी इसके लिए राशि मांगी जाएगी। अग्नि सुरक्षा के पुराने उपकरणों और फायर ब्रिगेड को बदला जाएगा। अत्याधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे। भविष्य को देखते हुए बहुमंजिला भवनों की आग बुझाने के लिए भी विशेष उपकरण खरीदे जाएंगे।

घी की शुद्धता को लेकर मध्यप्रदेश में एक बड़ा कदम, अधिकारी द्वारा लिए जाएंगे सैंपल, ब्यूटाइरो-रिफ्रैक्टोमीटर से गुणवत्ता को परखा जाएगा

ग्वालियर  घी की शुद्धता को लेकर मध्यप्रदेश में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के निर्देश पर जुलाई माह में पूरे प्रदेश में घी की गुणवत्ता की जांच का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। खास बात यह है कि यह सैंपल सीधे भोपाल और इंदौर की जांच प्रयोगशालाओं में भेजे जाएंगे। हर जिले से लिए जाएंगे पैक्ड और लूज घी के सैंपल प्रदेश के हर जिले में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बाजार में बिक रहे घी के सैंपल लें। हर अधिकारी को कुल 5 सैंपल लेने हैं, जिनमें से दो पैक्ड घी यानी ब्रांडेड कंपनियों के और तीन लूज (बिना ब्रांड वाले) घी के होंगे। इन सैंपलों को भोपाल की CES लैब और इंदौर की चौकसी लैब में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। घी की जांच के लिए ब्यूटाइरो-रिफ्रैक्टोमीटर तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे यह पता लगाया जाएगा कि उसमें रिफाइंड ऑयल, पाम ऑयल या किसी अन्य सस्ती सामग्री की मिलावट तो नहीं की गई है। ग्वालियर-चंबल संभाग नकली घी के लिए बदनाम ग्वालियर-चंबल अंचल नकली घी, मावा और पनीर जैसी खाद्य सामग्रियों में मिलावट के लिए कुख्यात है। भिंड, मुरैना जैसे जिलों में सक्रिय मिलावट माफिया ना सिर्फ प्रदेश बल्कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों में भी माल सप्लाई करता है। त्योहारों के मौसम में यह मिलावट चरम पर होती है, जिससे आमजन की सेहत पर गंभीर खतरा मंडराता है। इसके बावजूद ग्वालियर में प्रस्तावित फूड टेस्टिंग लैब अब तक शुरू नहीं हो पाई है। ग्वालियर में अब तक शुरू नहीं हो सकी लैब ग्वालियर के हुरावली इलाके में फूड लैब के लिए 2019 में भूमिपूजन किया गया था। लेकिन छह साल बीतने के बाद भी यह प्रयोगशाला शुरू नहीं हो सकी है। अब जबकि ढाई करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल गई है, उम्मीद जताई जा रही है कि लैब जल्द शुरू होगी और अंचल के जिलों को भोपाल या इंदौर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जुलाई भर चलेगा घी की जांच का अभियान ग्वालियर के खाद्य सुरक्षा अधिकारी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि यह अभियान पूरे जुलाई माह तक चलेगा। सैंपलिंग के बाद जैसे ही लैब रिपोर्ट आएगी, एफएसएसएआइ गुणवत्ता मानकों के आधार पर कार्रवाई करेगा। जिन घी उत्पादकों में मिलावट पाई जाएगी, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. मुरूगन से की भेंट

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन में आकाशवाणी केंद्र प्रारंभ किए जाने की सैद्धांतिक सहमति हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल मुरूगन से भेंट में सिंहस्थ 2028 के दृष्टिगत उज्जैन में शीघ्र आकाशवाणी केंद्र प्रारंभ करवाने का अनुरोध किया। केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. मुरूगन ने इसकी सहमति एवं आवश्यक प्रक्रिया प्रारंभ करवाने के लिए आश्वस्त किया। आकाशवाणी स्टूडियो का निर्माण होने तक उज्जैन केंद्र के प्रसारण की व्यवस्था आकाशवाणी केन्द्र इंदौर के माध्यम से किए जाने के प्रयास भी किए जाएंगे। केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह को शिलान्यास के लिए किया आमंत्रित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में मंत्रीगण से भेंट के बाद मीडिया प्रतिनिधियों को जानकारी दी कि भारत सरकार के उपक्रम बंगलौर के बीईएमएल लिमिटेड के अत्याधुनिक रेल कोच विनिर्माण संयंत्र का शिलान्यास प्रदेश के रायसेन जिले में शीघ्र किया जाएगा। इसके लिए लगभग 1800 करोड़ रूपए का निवेश किया जा रहा है। संयंत्र में मध्यप्रदेश सरकार, रेल मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की भागीदारी रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह से इस संयंत्र के शिलान्यास का अनुरोध किया गया है। साथ ही संयंत्र के महत्व पर विस्तार से चर्चा हुई है। केंद्रीय मंत्री श्री राजनाथ सिंह को जानकारी दी गई कि मध्यप्रदेश शासन ने रायसेन जिले में इस संयंत्र की स्थापना के लिए लगभग 60 हेक्टयर भूमि का आवंटन कर दिया है। यह संयंत्र लगभग डेढ़ हजार लोगों को रोजगार दिलवाने में भी सहायक होगा साथ ही देश के रेल कोच संयंत्रों के मानचित्र में विशेष स्थान बनाएगा। केन्द्रीय नवकरणीय ऊर्जा मंत्री से की भेंट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की भावना के अनुरूप नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा काम किया जा रहा है। सभी प्रकार की नवकरणीय ऊर्जा जैसे सौर, पवन और पंप स्टोरेज सभी पर काम कर रहे हैं। पूरे देश में मध्यप्रदेश ही ऐसा राज्य है जो सबसे सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध करवा रहा है, जिससे नई दिल्ली में मेट्रो ट्रेन चल रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के 32 लाख किसानों के लिए सोलर पैनल लगाकर देंगे जिससे भविष्य में किसान स्वयं की बिजली उत्पन्न कर सकें। इससे लगभग 18 हजार करोड़ की सब्सिडी के भार से राज्य सरकार मुक्त हो सकेगी। प्रधानमंत्री कुसुमश्री योजना में ए-बी-सी- तीनों श्रेणियों में मध्यप्रदेश सरकार काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी से चर्चा हुई और उम्मीद है कि नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में और अच्छी प्रगति होने वाली है। भविष्य में स्थापित होने वाले सोलर पार्क, जो लगभग 4200 मेगावाट क्षमता के होंगे, नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि बनेंगे। इसके अलावा उत्तरप्रदेश के साथ 2 हजार मेगावाट से सोलर एनर्जी के स्रोत विकसित होंगे जिससे दोनों राज्य 6-6 महीने आपस में बिजली का बंटवारा भी करेंगे।  

राष्ट्र, समाज की चुनौतियों को दूर करने के प्रयासों में ही जीवन की सार्थकता: राज्यपाल

भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि निरंतर सीखने और सेवा भाव के साथ कार्य करने का प्रयास विगत चार वर्षों में किया है। आगे भी इसी भाव और लक्ष्य के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि अपने सामर्थ्य अनुसार राष्ट्र की चुनौतियों को दूर करने के प्रयासों में ही जीवन की सार्थकता है। समाज में व्याप्त गरीबी, अशिक्षा, अज्ञानता आदि की चुनौतियों को दूर करने के लिए अधिक से अधिक योगदान का प्रयास प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए। राज्यपाल श्री पटेल ने यह बात राजभवन में उनके चार वर्षों के कार्यकाल की पूर्णता पर आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम का आयोजन राजभवन के ऑडिटोरियम सांदीपनि में किया गया था। इस अवसर पर जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री दीपक खांडेकर, अपर मुख्य सचिव श्री के.सी. गुप्ता, अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव, सचिव जनजातीय प्रकोष्ठ श्रीमती जमुना भिड़े सहित राजभवन के समस्त अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित थे। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कार्यक्रम में “राजभवन पचमढ़ी” पुस्तक लोकार्पित की। जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार लघु फिल्म “संकल्प सिद्ध कर्म सिद्ध राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल” का प्रदर्शन भी किया गया। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि सृष्टि की कृतियों में एकमात्र मानव ही ऐसी रचना है जिसको वाणी, बुद्धि सहित समस्त शक्तियां मिली है। किसी और को यह सब एक साथ नहीं मिली है। यह सभी शक्तियां मानव की सेवा के लिए है। उन्होंने कहा कि स्वार्थी जीवन निरर्थक है। उन्होंने एक भव्य भवन वाले विश्वविद्यालय के भ्रमण प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में सर्वत्र, समृद्धता दिखाई दे रही थी। पार्किंग में दोपहिया वाहनों से कहीं अधिक फोर व्हीलर खड़े थे। इस शान-औ-शौकत में निकट ही गरीबों की बस्ती थी, जो अलग-थलग दिख रही थी। श्री पटेल ने कहा कि वह समृद्धता निरर्थक है, जो वंचितों, गरीबों की अनदेखी करे। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि उनके परिश्रम का एकमात्र लक्ष्य जरूरतमंद, वंचितों की मदद करना है। उनके प्रयासों से जब उनकी मदद होती है वह उनमें नया उत्साह और अथक परिश्रम की उर्जा प्रदान करती है। उन्होंने विकसित भारत यात्रा के प्रथम कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि कार्यक्रम में उन्हें दिखा कि आगे आने वाले ही लाभ लेने पहुंच रहे हैं जबकि योजना की मंशा लाभ से वंचितों को लाभान्वित करना था। प्रशासन के समक्ष वस्तुस्थिति को बताकर लाभ से छूट गए पात्र व्यक्तियों को योजनाओं के लाभ देने में प्राथमिकता सुनिश्चित की। इसी लिए शेष जिलों में 43 दिनों में 21 जिलों की यात्रा की थी। उन्होंने इस प्रसंग के संदर्भ में बताया कि योजना के पात्र वंचितों को लाभान्वित कराने की मंशा से ही व्यापक भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान वंचितों लाभार्थियों के चेहरे पर लाभान्वित होने की खुशी को देखना ही उनके परिश्रम की उर्जा का स्त्रोत है। राज्यपाल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण बाधाओं चुनौतियों को पार कर कुछ कर गुजरने का जज्बा है। उन्होंने पचमढ़ी राजभवन के कर्मचारी की पत्नी श्रीमती शीला कुमारी कुम्हरे द्वारा अशिक्षित होते हुए पचमढ़ी के पर्यटकों को टेलीस्कोप से अंतरिक्ष से रू-ब-रू कराने को सशक्तिकरण का वास्तविक स्वरूप बताया। राज्यपाल के समक्ष कार्यक्रम में राजभवन से जुड़ी महिलाओं ने अपने संघर्षों, सफलताओं और राज्यपाल श्री पटेल के द्वारा महिला सशक्तिकरण प्रयासों के संबंध में जानकारी दी। राजभवन भोपाल में बागवानी कार्य में संलग्न श्रीमती गोमती, कर्मचारी सफाई जमादार श्रीमती रुमा, सचिवालय में पदस्थ भृत्य श्रीमती निशा कौल, सहायक ग्रेड तीन श्रीमती कल्पना अतुलकर, नर्सिग ऑफीसर श्रीमती राधामणि, पी.एस.ओ. श्रीमती भारती चौबे जनजातीय प्रकोष्ठ की विषय विशेषज्ञ श्रीमती दीपमाला रावत ने अपने जीवन के संघर्षों और उन पर सफलता प्राप्त करने के बारे में बताया। कार्यक्रम में प्रस्तुतिकरण के माध्यम से राज्यपाल की कार्यशैली की संवेदनशीलता के प्रसंगों का जिक्र किया। सभी महिला वक्ताओं ने राज्यपाल द्वारा उनकी बिना बोले कर्मचारियों की समस्याओं को दूर करने एवं कार्य दशाओं को बेहतर बनाने के कार्यों और उनकी व्यक्तिगत आत्मीयता, उदारता के प्रसंगों का उल्लेख किया। राजभवन सचिवालय की महिला अधिकारियों-कर्मचारियों ने समवेत स्वर में “जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा” और “सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्ता हमारा” की प्रस्तुति दी। आभार प्रदर्शन जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती जमुना भिड़े ने किया। संचालन कंट्रोलर हॉऊस होल्ड श्रीमती शिल्पी दिवाकर ने किया।  

स्थानांतरण आदेश की अनदेखी, आठ पुलिसकर्मी हुए निलंबित

भोपाल राजधानी में कई वर्षों से एक ही थाने में जमे पुलिसकर्मियों को हटाने लिए पिछले दिनों स्थानांतरण आदेश जारी किए गए। डीजीपी के निर्देश के बाद यह फेरबदल किया गया था। आदेश के बाद कई थानों से खबरें आ रही थीं कि सालों से तैनात पुलिसकर्मी नई पदस्थापना पर जाने को तैयार नहीं हैं। वे इधर-उधर से तबादला निरस्त करने के प्रयास कर रहे हैं कि किसी तरह दूसरे थाने में जाने से बच जाएं। जब पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी को यह जानकारी हुई कि कुछ पुलिसकर्मियों ने तबादला होने के बाद भी निर्धारित समय- सीमा में नवीन पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं दी है तो उन्होंने डीसीपी मुख्यालय श्रद्धा तिवारी को तबादला आदेश न मानने वाले पुलिसकर्मियों को निलंबित करने के निर्देश दिए। इसके चलते डीसीपी मुख्यालय ने तत्काल प्रभाव से उपनिरीक्षक साबिर खान,एएसआई राम अवतार, प्रधान आरक्षक नरेश कुमार शर्मा, मनोहर लाल, चंद्रमौल मिश्रा, वीरेन्द्र यादव तथा आरक्षक कपिल चंद्रवंशी और प्रशांत शर्मा शामिल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय महापरिषद की बैठक में दिए निर्देश

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में वर्तमान आवश्यकताओं के अनुसार साइबर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर केंद्रित पाठ्यक्रम आरंभ किए जाएं साथ ही विश्वविद्यालय, मीडिया के क्षेत्र में एडवांस्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट के रूप में अपनी पहचान बनाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य शासन द्वारा संचालित जन कल्याणकारी योजनाओं के संप्रेषण और उनकी प्रभावशीलता के सर्वेक्षण संबंधी गतिविधियां भी विश्वविद्यालय में आरंभ करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में विश्वविद्यालय की महापरिषद की बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार, इंदौर सांसद श्री शंकर लालवानी, विश्वविद्यालय के कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी, सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े सहित महापरिषद के सदस्यगण उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय के रीवा और खंडवा परिसरों में रोजगार परक पाठ्यक्रम संचालित करने संबंधी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम आरंभ करने को स्वीकृति प्रदान की गई। स्वीकृति के बाद एम.ए. (जर्नलिज्म एंड क्रिएटिव एंड राइटिंग), एम.ए. (मास कम्युनिकेशन), एम.ए.( एडवरटाइजिंग एंड पब्लिक रिलेशंस), एम.एससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) और एम.एसी.ए. के एक वर्षीय पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किए जाएंगे। बैठक में विश्वविद्यालय के पी.एचडी. अधिनियम को यू.जी.सी. पीएचडी अधिनियम 2022 के अनुसार अद्यतन कर इस आधार पर पी. एचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया आरंभ करने की स्वीकृति भी प्रदान की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा परिसर के सभागार का नाम लाल बलदेव सिंह सभागार रखने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। महापरिषद ने वित्त विभाग के 14 अगस्त 2023 के आदेश अनुसार चतुर्थ समयमान उच्चतर वेतन मान को विश्वविद्यालय में लागू करने के प्रस्ताव को स्वीकृत किया। विश्वविद्यालय में फेस डिटेक्शन मशीन के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था पर भी सहमति प्रदान की गई। विश्वविद्यालय के नवीन मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग में अध्ययनरत विद्यार्थियों को प्रिंटिंग एवं पैकेजिंग विषय का व्यवसायिक प्रशिक्षण देने के लिए प्रिंटिंग प्रेस व लैब तथा पैकेजिंग लैब की स्थापना का प्रस्ताव भी स्वीकृत हुआ। बैठक में अन्य कार्यालयीन तथा प्रबंधकीय विषयों पर भी निर्णय लिए गए। 

‘कमाल का भोपाल’ को भाजपा का जनसमर्थन, जिला अध्यक्ष से मुलाकात

भोपाल आज राजधानी भोपाल में भाजपा के जिला अध्यक्ष रवीन्द्र यति से क्रेडाई भोपाल अध्यक्ष मनोज मीक ने औपचारिक भेंट की। इस अवसर पर ‘कमाल का भोपाल’ अभियान से संबंधित पुस्तकों की प्रतियाँ सौंपते हुए अभियान की हालिया प्रगति से उन्हें अवगत कराया गया। यह उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित ‘प्रोफेशनल मीट’ के दौरान, भाजपा जिला संगठन ने ‘कमाल का भोपाल’ अभियान को पूर्ण राजनीतिक समर्थन देने का पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा था। आज की भेंट उस समर्थन के लिए आभार प्रकट करने और आगामी योजनाओं पर समन्वय हेतु हुई। जिला अध्यक्ष रवीन्द्र यति ने राजधानी के नागरिकों की आकांक्षाओं, युवाओं के भविष्य और भोपाल को एआई-लाइटहाउस और लॉजिस्टिक सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में चल रहे अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा: “‘कमाल का भोपाल’ अभियान राजधानी की सकारात्मक ब्रांडिंग के साथ-साथ उसका खोया हुआ नेतृत्व दिलाने की ऐतिहासिक पहल है। यह राजधानी की आकांक्षाओं से जुड़ा प्रेरक अभियान है, जिसमें हम पूरी निष्ठा से साथ हैं।” मनोज मीक ने इस अवसर पर कहा: “यह अभियान एकजुट प्रयासों की माँग करता है। राजनीतिक, प्रशासनिक और नागरिक सहभागिता ही भोपाल को वैश्विक पहचान दिला सकती है। भाजपा का यह समर्थन हमारे लिए संबल और दिशा दोनों है। राजनीतिक समर्थन से यह अभियान अब राजधानी का जन-अभियान बनने की ओर बढ़ चला है।” यह संवाद सिर्फ भेंट तक सीमित नहीं रहा इसमें ‘एमपी ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025’ के पूर्व आयोजन, आमंत्रित डेलीगेशन और राज्य सरकार के साथ प्रस्तावित नीति संवाद पर भी विमर्श हुआ। ‘कमाल का भोपाल’ अब एक साझा अभियान बन चुका है।

तीन साल की बच्ची द्वारा संथारा लेने पर कोर्ट सख्त, वैधता पर उठाए सवाल

इंदौर मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने केंद्र शासन और राज्य सरकार के साथ सभी संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर पूछा है कि ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित साढ़े तीन साल की बच्ची वियाना 'जो कि समझने की स्थिति में नहीं थी' ने संथारा की सहमति कैसे दी थी। मामले को लेकर हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिका में मंगलवार को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि अब तक तीन नाबालिग का संथारा हुआ है। ये तीनों ही बालिकाएं हैं। इनमें हैदराबाद की 13 वर्षीय, मैसूर की 10 वर्षीय और इंदौर की साढ़े तीन वर्षीय बालिका शामिल हैं।   मामले में सुनवाई अब 25 अगस्त को याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई कि याचिका का अंतिम निराकरण होने तक नाबालिग के संथारा पर रोक लगाई जाए, लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए इससे इंकार कर दिया कि यह जैन समाज से जुड़ा मामला है। उनका पक्ष सुने बगैर कोई आदेश नहीं दे सकते। मामले में अब 25 अगस्त को सुनवाई होगी। याचिका में अब वियाना के माता-पिता भी पक्षकार होंगे। कोर्ट ने मंगलवार उन्हें पक्षकार बनाने के आवेदन को स्वीकार कर लिया। हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता प्रांशु जैन ने एडवोकेट शुभम शर्मा के माध्यम से यह जनहित याचिका दायर की है। इसमें कहा है कि इतनी कम उम्र की बच्ची संथारा जैसे गंभीर निर्णय की सहमति कैसे दे सकती है। साढ़े तीन वर्षीय बेटी वियाना को 21 मार्च को संथारा मंगलवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील ने गुहार लगाई कि नाबालिग के संथारा दिलाए जाने पर रोक लगाई जाए, लेकिन कोर्ट ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि संबंधित पक्षकारों को सुनने के बाद ही कोई आदेश दिया जा सकता है। यह है मामला इंदौर के पीयूष और वर्षा जैन की लगभग साढ़े तीन वर्षीय बेटी वियाना को 21 मार्च को संथारा दिलवाया गया था। मई के पहले सप्ताह में वियाना की मां वर्षा ने यह बात खुद मीडिया को बताई थी। उन्होंने बताया था कि जनवरी 2025 में पता चला था कि वियाना को ब्रेन ट्यूमर है। एक रात निकालना भी मुश्किल 9 जनवरी को उसे मुंबई ले जाया गया था। वहां उसका ट्यूमर का आपरेशन हुआ जिसके बाद वह ठीक भी होने लगी थी, लेकिन मार्च 2025 के तीसरे सप्ताह में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। ऐसी स्थिति में हम वियाना को 21 मार्च को राजेश मुनि महाराज के पास ले गए। उन्होंने कहा कि इसका एक रात निकालना भी मुश्किल है। इसे संथारा करा देना चाहिए। हमने संथारा की सहमति दे दी। गुरुदेव ने संथारा की प्रक्रिया पूरी कराई। संथारा लेने के मात्र 10 मिनट बाद ही वियाना का निधन हो गया।

5163 करोड़ की लागत से होगा विद्युत ट्रांसमिशन सिस्टम का सुदृढ़ीकरण : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्ता पूर्ण बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विद्युत ट्रांसमिशन सिस्टम का सुदृढ़ीकरण किया जायेगा। इसके लिए वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक की कार्य योजना बनायी गयी है। इस योजना के क्रियान्वयन पर 5 हजार 163 करोड़ रूपये का व्यय अनुमानित है। ट्रांसमिशन सिस्टम के सुदृढ़ीकरण के लिए निर्माण कार्यों और संरचनाओं के उन्नयन पर 1154 करोड़, सिंहस्थ-2028 के लिए जरूरी कार्यों के लिए 185 करोड़, नवीन अति उच्चदाव उप केन्द्रों के निर्माण पर 1015 करोड़, मुरैना संभागीय मुख्यालय एवं ग्वालियर शहर के उत्तरी भाग को अनवरत विद्युत आपूर्ति के लिए नवीन अति उच्चदाब लाइनों के निर्माण पर 54 करोड़, प्रदेश में विद्यमान अति उच्चदाव ट्रांसफार्मरों की क्षमता संवर्धन पर 1280 करोड़, आरडीएसएस योजना में वितरण कंपनियों के लिए 184 नग नवीन 33 के.व्ही. में निर्माण पर 81 करोड़, डबल पोल, फोर पोल लाइन को टॉवर लाइन में रूपांतरण पर 662 करोड़ अति उच्चदब टेप लाइनों के स्थान पर लाइनों का लूप-इन, लूप-आउट किया जाना एवं एकल स्त्रोत से प्रदायित उप केन्द्रों के लिए नई लाइनों के निर्माण पर 451 करोड़ और स्काडा प्रणाली के प्रतिस्थापन सहित अन्य कार्यों पर 281 करोड़ रूपये खर्च होंगे। 

प्राईवेट स्कूलों में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग हो : स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह

भोपाल  स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि माध्यमिक शिक्षा मण्डल से संबद्ध प्राईवेट स्कूलों में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और शिक्षा की गुणवत्ता के मूल्यांकन के लिये विश्वसनीय मॉनिटरिंग की व्यवस्था होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप आधुनिक कृषि के लिए युवाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्रों को कृषि संकाय को बढ़ावा दिये जाने की आवश्यकता है। उन स्कूलों में, जिनके पास दो एकड़ से अधिक भूमि है, वहां प्राथमिकता के साथ कृषि संकाय शुरू किये जा सकते है। स्कूल शिक्षा मंत्री मंगलवार को मंत्रालय में नई शिक्षा नीति 2020 की टास्क फोर्स समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिक्षकों की आकस्मिक मृत्यु पर परिजन को नौकरी देने की व्यवस्था में सुधार के लिए उपयुक्त सुझाव देने के लिए कहा। स्कूल शिक्षा मंत्री श्र‍ी सिंह ने कहा कि आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों को पढ़ाई की तैयारी करने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिये जाने की आवश्यकता है। यह काम पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर अलीराजपुर, बालाघाट, नरसिंहपुर और उज्जैन जिले में शुरू किये जाएं। प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं के पढ़ाने से बच्चे सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा के पूर्व कक्षाओं में पढ़ाई के लिये तैयार होकर जाएंगे। उन्होंने राज्य शैक्षणिक अनुसंधान केन्द्र (एससीईआरटी) को मजबूत किये जाने के लिए संचालक की अध्यक्षता में कमेटी गठन करने के निर्देश दिए। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के मूल्याकंन के लिए शिक्षाविदो के साथ आगामी 29 जुलाई को बैठक भी की जाए। इसी दिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2020 में नई शिक्षा 2020 की घोषणा की थी। उन्होंने नई शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यालयों में त्रिभाषा फॉरमूला को सख्ती लागू करने के निर्देश दिये। बैठक में ई-अटेंडेस, "हमारे 'शिक्षक," डिजिटल प्लेटफार्म के क्रिन्यान्वन पर चर्चा की गई। मंत्री श्र‍ी सिंह ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता के लिये ‍सबको इसकी परिधि में लाना चाहिए। आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि बच्चों को परीक्षा की तैयारी के लिए स्कूल में रेमेडियल मॉडूयल भेजे गए थे। आयुक्त ने बताया कि इस शैक्षणिक सत्र में सरकारी स्कूलों में लगभग शत प्रतिशत पाठ्य पुस्तके पहुँचा दी गई थीं। टास्क फोर्स के सदस्यों ने स्कूलों और पालकों को मातृभाषा के महत्व को समझाने, पालकों की नियमित बैठक, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के संबंध उपयोगी सुझाव दिए। बैठक में टास्क फोर्स समिति के सदस्यों में प्रमुख रूप से श्री अशोक कंडेल, डॉ. राम भावसार एवं अन्य सदस्यगण मौजूद थे।