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22 लाख 60 हजार रुपए नगद, लूट की रकम से खरीदी गई कार एवं अन्य सामग्री जप्त

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में संगठित अपराधों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कार्रवाई के अंतर्गत इंदौर पुलिस ने स्क्रैप व्यापारी के कर्मचारी से हुई 29 लाख 65 हजार रुपए की लूट की वारदात का त्वरित खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटी गई राशि में से 22 लाख 60 हजार रुपए नगद, लूट की रकम से खरीदी गई एक आई-20 कार तथा घटना में प्रयुक्त अन्य सामग्री जब्त की है। फरियादी मुकुल अग्रवाल, निवासी रामचंद्र नगर एक्सटेंशन, इंदौर द्वारा थाना पंढरीनाथ में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि 11 जून को वह अपने स्क्रैप व्यवसाय से संबंधित विभिन्न प्रतिष्ठानों से भुगतान राशि एकत्रित कर लगभग 29 लाख 65 हजार रुपए नगद लेकर दोपहिया वाहन से जा रहा था। इसी दौरान रात्रि में जायसवाल धर्मशाला के समीप दो अज्ञात व्यक्तियों ने उसे रोककर मारपीट की तथा नकदी से भरा बैग छीनकर फरार हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त इंदौर  संतोष कुमार सिंह के निर्देशन में आठ विशेष पुलिस टीमों का गठन कर आरोपियों की तलाश प्रारंभ की गई। जांच के दौरान पुलिस टीमों ने घटना स्थल एवं संभावित मार्गों के 800 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का सूक्ष्म विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर तंत्र एवं सतत पुलिसिंग के आधार पर एक संदिग्ध एक्टिवा वाहन की पहचान की गई, जिस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी। इसके बाद इंदौर सहित आसपास के जिलों एवं अन्य राज्यों में संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी गई। अनुसंधान में यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों ने वारदात को पूरी योजना के साथ अंजाम दिया था। आरोपियों द्वारा फरियादी की पूर्व से रेकी की जा रही थी तथा भुगतान संग्रहण के प्रथम स्थान से ही उसका पीछा किया जा रहा था। उपयुक्त अवसर मिलते ही उन्होंने लूट की घटना को अंजाम दिया। पूछताछ में मुख्य आरोपी ने बताया कि क्रिप्टोकरेंसी में हुए आर्थिक नुकसान एवं बढ़ते कर्ज के कारण उसने लूट की योजना बनाई थी। उसने अपने दो साथियों को फरियादी की गतिविधियों पर नजर रखने तथा रेकी करने का जिम्मा सौंपा था। पुलिस टीमों द्वारा लगातार दबिश एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर सह-आरोपी को भी अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस द्वारा शेष लूटी गई राशि की बरामदगी तथा प्रकरण से जुड़े अन्य तथ्यों के संबंध में आरोपियों का पुलिस रिमांड प्राप्त किया गया है। मामले में विस्तृत विवेचना जारी है। मध्यप्रदेशपुलिस संगठित अपराधों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है तथा अपराधियों के विरुद्ध इस प्रकार की प्रभावी कार्यवाही निरंतर जारी रहेगा।  

प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल, राज्य सरकार ने जारी की 29 IAS अधिकारियों की ट्रांसफर सूची

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (भाप्रसे) के 29 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी इस सूची में भोपाल और रीवा संभाग के कमिश्नरों को बदलने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुख सचिवों, सचिवों और निदेशकों के प्रभार में भी बदलाव किया गया है। भोपाल और रीवा संभाग को मिले नए कमिश्नर आदेश के मुताबिक, भोपाल संभाग के वर्तमान कमिश्नर श्री संजीव सिंह (2005) को अब सचिव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह श्री कर्मवीर शर्मा (2010), जो वर्तमान में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के आयुक्त व सचिव थे, उन्हें भोपाल संभाग का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया है। वहीं, रीवा संभाग के कमिश्नर बाबू सिंह जामोद (2006) को भोपाल मंत्रालय में नगरीय विकास एवं आवास विभाग का सचिव बनाया गया है । उनकी जगह अब शीलेन्द्र सिंह (2010) रीवा संभाग के नए कमिश्नर होंगे । इन वरिष्ठ अधिकारियों के विभागों में हुआ बदलाव  मुकेश चन्द गुप्ता (1998): सचिव, मानव अधिकार आयोग से अब प्रमुख सचिव, जेल विभाग बनाए गए हैं।  डॉ. ई. रमेश कुमार (1999): प्रमुख सचिव, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग से अब प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग तथा राहत एवं पुनर्वास आयुक्त नियुक्त किए गए हैं।     विवेक कुमार पोरवाल (2000): प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग से अब प्रमुख सचिव, खनिज साधन विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे।     दीपक सिंह (2007): आयुक्त-सह-पंजीयक, सहकारी संस्थाएं से अब मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव बनाए गए हैं।     अमित तोमर (2009): पंजीयन महानिरीक्षक से अब प्रबंध संचालक, ऊर्जा विकास निगम तथा आयुक्त, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। अपर मुख्य सचिवों को सौंपे गए अतिरिक्त प्रभार तबादला सूची के साथ ही शासन ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं:     के.सी. गुप्ता (1992): अपर मुख्य सचिव, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग को अपने वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ कृषि उत्पादन आयुक्त (APC) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।     अनिरूद्ध मुकर्जी (1993): अध्यक्ष, राजस्व मण्डल ग्वालियर को पर्यावरण आयुक्त तथा महानिदेशक, एप्को का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।     गुलशन बामरा (1997): प्रमुख सचिव, जनजातीय कार्य विभाग को प्रमुख सचिव, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है।     सोनिया मीना (2013): अपर सचिव, वित्त विभाग को आयुक्त-सह-संचालक, संस्थागत वित्त का अतिरिक्त प्रभार मिला है। इसके साथ ही, नई नियुक्तियों के बाद अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल और मनु वास्तव सहित वरिष्ठ अधिकारी मनीष सिंह और अरविन्द कुमार दुबे कुछ अतिरिक्त प्रभारों से मुक्त होंगे। ये अधिकारी भी बदले गए मंत्रालय द्वारा जारी सूची में कई अन्य जिलों और विभागों के अपर सचिव, उप सचिव और निदेशकों के स्तर पर भी बदलाव हुए हैं:     नेहा मारव्या सिंह (2011) को उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण का आयुक्त-सह-संचालक बनाया गया है।     मनोज पुष्प (2011) को लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण का संचालक नियुक्त किया गया है।     रोहित सिंह (2012) अब बजट संचालक की जिम्मेदारी संभालेंगे।     हर्षिका सिंह (2012) को अपर सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग बनाया गया है।     भारती जाटव ओगरे (2012) को कोष एवं लेखा का आयुक्त नियुक्त किया गया है।   आदेश की आधिकारिक पुष्टि यह बड़ा प्रशासनिक आदेश राज्य के राज्यपाल के नाम से मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा जारी किया गया है , जिसकी प्रतिलिपियाँ भारत सरकार के कार्मिक विभाग सहित राज्य के सभी संबंधित विभागों और कोषालयों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं।  

पीएम सेतु के तहत आईटीआई होंगी अपग्रेड पीएम सेतु योजना की राज्य स्टीयरिंग कमेटी की बैठक सम्पन्न

रायपुर पीएम-सेतु (PM-SETU) योजना के तहत सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक और उद्योग-अनुकूल बनाया जा रहा है । इस योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन जैसी नई तकनीकों में प्रशिक्षित कर रोजगार के काबिल बनाना है। पुरानी मशीनों को बदलकर नई तकनीक वाली मशीनें लगाई जाएंगी और डिजिटल कंटेंट व स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा दी जाएगी।                मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य में पीएम सेतु योजना के तहत गठित राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने योजना के तहत राज्य की चयनित औद्यागिक प्रशिक्षण संस्थानों को अपग्रेड करने की जा रही कार्यवाही की प्रगति की समीक्षा की।               बैठक में पीएम सेतु के तहत राज्य के विभिन्न औद्योगिक संस्थानों की सलाह से स्थानीय रोजगार उपलब्ध कराने के लिए आईटीआई अपग्रेड करने और उद्योग नेतृत्व वाले एंकर इंडस्ट्रियल पार्टनर्स के चयन हेतु जारी किए जाने वाले पात्रता मापदण्डों के संबंध में विस्तार से चर्चा हुई। इसी तरह से ईओआई में भाग लेने वाले उद्योगों सहित समस्त पात्र उद्योगों एवं सार्वजनिक उपक्रमों को प्रस्ताव के लिए अनुरोध के बारे में प्रक्रिया में सहभागिता हेतु अवसर प्रदान करने पर भी चर्चा हुई।             इसी तरह से प्रधानमंत्री सेतु योजना अंतर्गत एंकर इंडस्ट्रियल पार्टनर्स के ऑनबोर्डिंग हेतु जारी किए जाने वाले ड्राफ्ट के प्रस्ताव के अनुरोध के बारे में भी चर्चा हुई। बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव  रजत कुमार, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव  बसवराजु एस. सहित वित्त विभाग, श्रम, स्कूल शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, छत्तीसगढ़ स्टेट काउंसिल, रोजगार एवं प्रशिक्षण, सीआईआई एवं भारत सरकार कौशल विकास और उद्यम शीलता महानिदेशालय छत्तीसगढ़ क्षेत्र के अधिकारियों ने भाग लिया।

सतपुड़ा और पेंच टाइगर रिजर्व में वन संरक्षण एवं आवास प्रबंधन कार्यों को मिलेगा बढ़ावा

भोपाल वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन को बढ़ावा देने की दिशा में मध्यप्रदेश टाइगर फाउंडेशन और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) के बीच 2 महत्वपूर्ण एमओयू हुए हैं। इनका उद्देश्य नर्मदापुरम स्थित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व तथा सिवनी स्थित पेंच टाइगर रिजर्व में पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण को समर्थन प्रदान करना है। समझौतों के अंतर्गत सतपुड़ा एवं पेंच टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और आवास प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न कार्य किए जाएंगे। इनमें वॉच टावरों का निर्माण, वन गश्ती अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण, सौर ऊर्जा आधारित जल प्रणालियों की स्थापना, आक्रामक वनस्पति प्रजातियों का उन्मूलन तथा देशज घास भूमियों का पुनर्स्थापन शामिल है। ये समझौते दोनों टाइगर रिजर्व में जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन की स्थितियां बेहतर करने सहायक होंगे। इस अवसर पर डब्ल्यूसीएल प्रबंधन ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कंपनी अपनी सीएसआर के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण तथा भारत की समृद्ध प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में निरंतर सार्थक योगदान दे रही है। डब्ल्यूसीएल के प्रतिनिधियों ने कहा कि अपने अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक तथा कार्यात्मक निदेशकों के दूरदर्शी नेतृत्व में कंपनी सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण एवं समुदाय-केंद्रित प्रभावी पहलों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे उसके परिचालन क्षेत्रों में संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में पेंच टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक  देवा प्रसाद, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक सु राखी नंदा सहित डब्ल्यूसीएल एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, डब्ल्यूसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक  एच.एस. पांडे, डब्ल्यूसीएल के  बिक्रम घोष (निदेशक, वित्त/मानव संसाधन),  आनंदजी प्रसाद (निदेशक, तकनीकी/संचालन) और  संदीप परांजपे (निदेशक, परियोजना एवं नियोजन) उपस्थित रहे।  

Bhopal Metro Update: जुलाई से दोनों ट्रैक पर शुरू होगा संचालन, CMRS निरीक्षण की तैयारी

भोपाल  अपनी धीमी रफ्तार को लेकर सुर्खियों में आई भोपाल मेट्रो जल्द ही नए कलेवर में नजर आएगी। इसकी न सिर्फ स्पीड बढ़ेगी, बल्कि फेरे भी बढ़ जाएंगे। जुलाई में सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया शेड्यूल जारी होगा। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम को निरीक्षण के लिए बुलाया है, जो अगले सप्ताह आ सकती है। यही टीम 'ओके' रिपोर्ट देगी। असिस्टेंट कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी की टीम पहले ही निरीक्षण कर चुकी है। बता दें कि सुभाष नगर से एम्स के बीच करीब 7 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो गया है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑरेंज-येलो लाइन के 2 रूट 30 किलोमीटर लंबे हैं। फिलहाल 12 किमी में ही मेट्रो दौड़ रही है, लेकिन इसकी रफ्तार काफी धीमी है। इस वजह से सवाल उठने लगे हैं। भोपाल मेट्रो तो साइकिल से भी धीमी रफ्तार से दौड़ रही है। भोपाल मेट्रो की सुस्त रफ्तार भोपाल में मेट्रो संचालन की सुस्त रफ्तार को तेज करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो गया। करीब 30 किमी के लिए हुए करीब 800 करोड़ रुपए के टेंडर का यह पहला चरण है। सिस्टम नहीं होने से एक ही ट्रैक पर दौड़ रही जानकारी के अनुसार, भोपाल और इंदौर में अभी सिग्नलिंग सिस्टम नहीं है। इस वजह से मेट्रो प्रबंधन को केवल एक ही ट्रैक (डाउन ट्रैक) पर ट्रेन चलानी पड़ रही हैं। यही वजह है कि भोपाल में ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी 75 मिनट रखी गई है, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। यहां दोपहर 12 से शाम 4 बजे के बाद ही मेट्रो दौड़ रही है। जिस ट्रैक पर दौड़ती, उसी पर वापसी सुभाष नगर से एम्स के बीच डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में चलाई जा रही हैं। यानी जो जा रही है, वह उसी ट्रैक पर लौट रही है। जबकि अप ट्रैक (एम्स से सुभाष नगर) पर ट्रेन नहीं दौड़ती। नए सिस्टम के बाद दोनों तरफ से ट्रेन चलेगी। मेट्रो की रीढ़ होता है सिग्नलिंग सिस्टम जानकारों के मुताबिक सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क का सबसे अहम हिस्सा होता है। यही तय करता है कि ट्रेन कितनी दूरी पर चलेगी। ट्रेन की अधिकतम और न्यूनतम गति नियंत्रित करता है। ट्रेनों के बीच सुरक्षित गैप बनाए रखता है। ऑटोमेटेड ऑपरेशन और इमरजेंसी कंट्रोल संभालता है। सिस्टम के बिना मल्टी-ट्रैक ऑपरेशन संभव नहीं होता, जिससे पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता। दिल्ली मेट्रो जैसी तकनीक लगेगी भोपाल मेट्रो में वही आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जो दिल्ली मेट्रो में इस्तेमाल होती है। इस तकनीक के लागू होने के बाद ट्रेन दोनों ट्रैक पर चल सकेंगी। ट्रेनों के बीच का अंतर (हेडवे) कम होगा और फ्रिक्वेंसी तेजी से बढ़ाई जा सकेगी। नए सिस्टम से यह फायदा नए सिस्टम के शुरू होने के बाद मेट्रो दोनों ओर से चलेगी। इससे 75 मिनट की टाइमिंग कम होगी। इससे लोगों को आसानी से मेट्रो मिल सकेगी। फेरे भी बढ़ जाएंगे। ऐसे में सुबह और शाम को ऑफिस टाइमिंग पर भी मेट्रो मिल सकेगी।

महिदपुर को मिला सामाकोटा बैराज और 13 उप स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन सहित आसपास के क्षेत्र को मोक्षदायिनी मां क्षिप्रा का आशीर्वाद प्राप्त है। माँ क्षिप्रा इस क्षेत्र के किसानों को अन्न उत्पादन के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराकर आशीर्वाद प्रदान करती है। महिदपुर भाग्यशाली है कि क्षिप्रा नदी पर बने लगभग सभी बांध और जलाशय महिदपुर में ही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ: 2028 के भव्य आयोजन के लिए इन दिनों उज्जैन और इसके आसपास हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्य जारी हैं। डोंगला से गुजरने वाला नया फोरलेन महिदपुर की नई तकदीर लिखेगा। महिदपुर शहर ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में भी अपनी अलग पहचान रखता है, इसमें भी और गति आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को उज्जैन के महिदपुर में विकास कार्यों के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से कुल 207 करोड़ 57 लाख रुपए की लागत के 19 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इसमें करीब 188 करोड़ 42 लाख रुपए की लागत के सामाकोटा बैराज के लोकार्पण सहित क्षेत्र के 13 उप-स्वास्थ्य केंद्र के नए भवनों, महाविद्यालय एवं स्कूलों के नवीन भवनों तथा नवीन विद्युत उपकेंद्र का लोकार्पण भी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सामाकोटा बैराज उज्जैन जिले में जल संरक्षण को नई ऊर्जा देगा। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा, जिससे हमारे अन्नदाता किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल और खेतों को नई संजीवनी मिलेगी। इतना ही नहीं, पानी की हरेक बूंद को सहेजने का यह भागीरथ प्रयास आने वाले सिंहस्थ और उज्जैन के भविष्य के लिए कवच का कार्य करेगा।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिदपुर की मावा-बाटी और गुलाटी दोनों ही प्रसिद्ध है। यहां आने का अलग ही आनंद है। भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का स्थान महिदपुर में है। काल गणना में भी यहां के डोंगला का योगदान अतुलनीय है। राजा जयसिंह ने 300 साल पहले उज्जैन, बनारस, जयपुर, मथुरा और दिल्ली में वेधशालाओं (जंतर-मंतर) का निर्माण कराया। सम्राट विक्रमादित्य और आर्यभट्ट की विरासत को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने डोंगला में आधुनिक ऑब्जर्वेटरी का निर्माण कराया है। दुनिया अपनी घड़ी में डोंगला से स्टैंडर्ड टाइम तय करे, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में विश्व में भारत ने अपनी अलग छवि बनाई है। प्रधानमंत्री  मोदी देश में सबसे लंबे समय तक लगातार सरकार चलाने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने देशवासियों को नि:शुल्क आवास, गरीबों को रसोई गैस और 5 लाख तक के नि:शुल्क इलाज की बड़ी सौगातें दी हैं। राज्य सरकार ने भी नवाचार करते हुए एयर एंबुलेंस की शुरुआत की है। सरकार राहवीर योजना अंतर्गत सड़क पर घायलों की मदद करने वालों को 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दे रही है। हमारी सरकार गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों को सम्मान निधि और लाड़ली बहनों को निरंतर राशि दी जा रही है। अब तक लाड़ली बहनों को 60 हजार करोड़ की राशि अंतरित कर चुकी है। हमारी सरकार प्रदेश के अन्नदाताओं और बहनों के सम्मान के लिए कृत संकल्पित होकर आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार ने पिछला वर्ष उद्योग और रोजगार को और यह वर्ष किसान कल्याण को समर्पित किया है। पहले सिंचित रकबा मात्र 7.5 लाख हेक्टेयर था। वर्ष 2002-03 से प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने की शुरुआत हुई। वर्ष 2023 में हमारी सरकार बनने तक प्रदेश की 44 लाख हैक्टेयर कृषि भूमि सिंचित थी। अब ढाई साल में ही यह आंकड़ा बढ़कर 65 लाख हैक्टेयर हो गया है। राज्य सरकार ने आगामी ढाई वर्ष में सिंचाई का रकबा बढ़ाकर 100 लाख हैक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है। किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिया जा रहा है। किसानों को एमएसपी की गारंटी देकर सरकार ने 2652 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा है। सोयाबीन पर भी किसानों को भावांतर योजना का लाभ दिया है। प्रदेश में किसानों के लिए सड़क, बिजली, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। किसानों को सिंचाई के लिए अब दिन में भी बिजली प्रदाय की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुराने जमाने में जब उज्जैन में परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं, तब लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर के वंशज और तत्कालीन महाराज ने महिदपुर में सिंहस्थ का आयोजन कराया था। महिदपुर में महारानी गंगाबाई के नाम पर एक घाट भी बना है। उनकी वीरता और 1857 की क्रांति के सूर्यवीरों के अदम्य साहस, पुरुषार्थ एवं पराक्रम का गौरवशाली संग्राम महिदपुर की ऐतिहासिक धरा पर लड़ा गया, जिसने स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास में अमिट छाप छोड़ी थी। कार्यक्रम को जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, स्थानीय सांसद  अनिल फिरोजिया, महिदपुर विधायक  दिनेश जैन (बोस) सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक  बहादुर सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।  

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निजीकरण की पहल जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय : जन स्वास्थ्य अभियान म. प्र.

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी दूर करने के नाम पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को निजी संस्थाओं के हाथों सौंपने की पहल एक बार फिर से एक ऐसे मॉडल को लागू करने का प्रयास है जो देश और दुनिया में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में विफल साबित हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार रीवा, देवास और गुना जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों शुरुआती चरण में निजी संस्थाओं को देने जा रह है और प्रयोग सफल होने पर इस पूरे प्रदेश में लागू करने का विचार है।  ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश में यह पहली बार नहीं है जब सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को निजी हाथों में देने का प्रयास किया गया है। इससे पहले 3 नवंबर 2015 को अलीराजपुर जिला अस्पताल और जोबट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को राज्य स्वास्थ्य समिति ने दीपक फ़ाउंडेशन के साथ नियमो की अनदेखी करते हुये अनुबंध किया था, जिसमे चिकित्सकों की नियुक्ति संबन्धित संस्था द्वारा कि जाना थी, लेकिन यह मॉडल सफल नहीं हो पाया और क्षेत्र के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं देखा गया नतीजतन सरकार को इसे वापस लेना पड़ा था।   वर्ष 2020-21 में नीति आयोग द्वारा जिला अस्पतालों को निजी संस्थाओं को देने का सुझाव दिया गया था, जिसे तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने विरोध करते हुये मानने से इंकार कर दिया था।  लेकिन 2024-25 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 13 जिला अस्पतालों को निजी क्षेत्र को सौंपने का फिर से प्रयास किया जिसके खिलाफ मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन, शासकीय स्वायत्ताशसी चिकित्सा अधिकारी संघ, एमपी मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन, शासकीय स्वायत्ताशसी चिकित्सा महासंघ, ईएसआई चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी चिकित्सा शिक्षा,  मद्यप्रदेश जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन, मनोरमा, मध्यप्रदेश नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन, संविदा चिकित्सक संघ, आशा / आशा सहयोगिनी श्रमिक संघ, जन स्वास्थ्य अभियान (JSAI), अस्पताल बचाओ-जीव बचाओ” नेटवर्क, वकीलों और आम नागरिकों ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरन के खिलाफ एकजुट आवाज उठाई थी। इसके बाद सरकार ने जिला अस्पतालों के निजीकरण की योजना से पीछे हटने की घोषणा की थी। परंतु बाद में सार्वजनिक निजी भागीदारी के नाम पर प्रदेश सरकार ने नाममात्र की दर से निजी संस्थानो को जमीन आवंटित करने की बात कही थी।  अब पुनः सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी क्षेत्र के हवाले करने की पहल राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य जिम्मेदारी से पीछे हटने का संकेत है। निजी स्वास्थ्य संस्थानो का मात्र एक ही उद्देश्य होता है मुनाफा कमाना और हम सभी ने कोविड महामारी के दौरान निजी अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों की मुनाफाखोरी के अनुभवों को बहुत नजदीक से देखा है। पिछले कुछ सालों से प्रदेश सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं और संस्थाओं के निजीकरण का प्रयास कर रही है, जिससे सरकार की मंशा और प्राथमिकताएँ स्पष्ट होती है ।  हम सभी का यह मानना है कि  कल्याणकारी राज्य होने के नाते जनता को मौलिक अधिकारों के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, भोजन, आवास के अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना सरकार की प्राथमिक ज़िम्मेदारी और कर्तव्य है। सरकार का यह कदम जनता के मौलिक अधिकार "राइट टू लाइफ के अनुच्छेद 21" का उल्लंघन हैं और संविधान के नीति निदेशक सिद्धांतों और अनुच्छेद 47 का उल्लंघन भी है।  अभियान के राष्ट्रीय कन्वेनर अमूल्य निधि ने कहा कि हाल की SRS रिपोर्ट सहित विभिन्न स्वास्थ्य आंकड़े यह दर्शाते हैं कि राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए डॉक्टरों की उपलब्धता, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, जवाबदेही और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत है, न कि सरकारी संस्थानों को कमजोर कर निजीकरण को बढ़ावा देने की। ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2021-22 के अनुसार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 4134 उप स्वास्थ्य केंद्र, 1045 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 245 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रो की कमी है इसी प्रकार की कमी आदिवासी और शहरी क्षेत्रों में भी है। साथ ही इन स्वास्थ्य केन्द्रो में चिकित्सक और अन्य मेडिकल और पेरा मेडिकल स्टाफ की कमी भी है। जन स्वास्थ्य अभियान मध्यप्रदेश का मानना है कि सरकार का प्रयास प्राथमिक स्वास्थ्य…

बीएमएचआरसी में योग सप्ताह के तीसरे दिन मरीजों और विद्यार्थियों के लिए योग सत्र आयोजित

भोपाल आईसीएमआर-भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी), भोपाल में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में आयोजित योग सप्ताह के तीसरे दिन विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम पल्मोनरी मेडिसिन वॉर्ड तथा नेत्र रोग विभाग के मरीजों और उनके परिजनों को उनकी बीमारियों के अनुरूप उपयोगी योग क्रियाओं एवं प्राणायाम के बारे में जानकारी दी गई। इसके पश्चात संस्थान के नर्सिंग स्टूडेंट्स, पैरामेडिकल स्टूडेंट्स तथा पीजी मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए विशेष योग सत्र आयोजित किया गया। योग प्रशिक्षक  सुशील सिंह ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासनों, प्राणायाम एवं ध्यान की विधियों का अभ्यास कराया तथा स्वस्थ जीवनशैली में योग के महत्व से अवगत कराया।  बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा वास्तव ने बताया कि नियमित योग अभ्यास शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक है। साथ ही, रोग की प्रकृति के अनुसार अपनाई जाने वाली योग क्रियाएं उपचार प्रक्रिया को सहयोग प्रदान कर सकती हैं और जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सकती हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान में 21 जून तक योग सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न वर्गों के लिए योग एवं जागरूकता संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना तथा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों, विद्यार्थियों और मरीजों तक योग के लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

सिपेट के विद्यार्थियों ने किया आईसेक्ट इंडिया के बलशाली पाइप्स फैक्ट्री का औद्योगिक भ्रमण

भोपाल सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) के विद्यार्थियों एवं अधिकारियों ने आईसेक्ट इंडिया के बलशाली पाइप्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का औद्योगिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने उत्पादन इकाइयों का अवलोकन कर पाइप निर्माण की आधुनिक प्रक्रियाओं, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली तथा औद्योगिक संचालन के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों, उत्पादन प्रबंधन एवं उद्योगों में कौशल आधारित कार्य संस्कृति के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों ने उत्पादन प्रक्रिया को नजदीक से समझते हुए उद्योग जगत की वास्तविक कार्यप्रणाली का अनुभव प्राप्त किया। औद्योगिक भ्रमण के उपरांत सिपेट के विद्यार्थियों, अधिकारियों एवं बलशाली बलशाली पाइप आईसेक्ट इंडिया की टीम द्वारा संयुक्त रूप से वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास एवं सतत भविष्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया। इस पहल पर आईसेक्ट इंडिया के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा, “शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान एवं वास्तविक औद्योगिक अनुभव प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे औद्योगिक भ्रमण विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित ज्ञान को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर देते हैं और उन्हें उद्योगों की अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करते हैं। हमें प्रसन्नता है कि सिपेट के विद्यार्थियों ने हमारे बलशाली पाइप्स संयंत्र का भ्रमण कर उत्पादन प्रक्रियाओं को समझा। साथ ही वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित की।” कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं अधिकारियों ने आईसेक्ट इंडिया द्वारा संचालित औद्योगिक गतिविधियों की सराहना की तथा इस भ्रमण को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी अनुभव बताया।

खेल प्रतिभाओं के लिए खुशखबरी! मुख्यमंत्री की पहल पर पुलिस विभाग में सीधी भर्ती बहाल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की खिलाड़ी हितैषी पहल पुलिस में उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी भर्ती होगी पुनः प्रारंभ ‘मध्यप्रदेश पुलिस (उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति) नियम, 2021’ में किया गया महत्वपूर्ण संशोधन प्रतिवर्ष सीधी भर्ती से 60 पद भरें जायेंगे भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सतत प्रयासों एवं मार्गदर्शन से वर्ष 2021 के बाद उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी भर्ती प्रक्रिया पुनः प्रारंभ की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह पहल खिलाड़ियों के लिए सम्मानजनक रोजगार सुनिश्चित करने के साथ उन्हें अपने खेल प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धात्मक तैयारी को निरंतर जारी रखने में भी सहायक सिद्ध होगी। गृह विभाग ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार ‘मध्यप्रदेश पुलिस (उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति) नियम, 2021’में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। शासकीय राजपत्र में 15 जून 2026 को अधिसूचना प्रकाशित कर दी गई है। संशोधित नियमों में उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन, पात्रता एवं मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाया गया है। अब मध्यप्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में अवसर प्राप्त होंगे। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पुलिस में उप निरीक्षक के 10 एवं आरक्षक के 50 पदों पर सीधी नियुक्ति का अवसर मिलेगा। नए प्रावधानों में खेल कोटे से भर्ती प्रक्रिया नियमित रूप से प्रत्येक वर्ष आयोजित की जाएगी। इससे खिलाड़ियों को स्थायी अवसर उपलब्ध होंगे। खेल संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम है। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मुख्यमंत्री यादव की इस खिलाड़ी-हितैषी पहल के लिए उनका आभार माना है। संशोधित नियमों की प्रमुख विशेषताएं वार्षिक भर्ती प्रक्रिया में पुलिस मुख्यालय की चयन एवं भर्ती शाखा द्वारा प्रतिवर्ष आरक्षक एवं उप निरीक्षक पदों की रिक्तियां विज्ञापित की जाएंगी। पदक विजेताओं के साथ अब ओलम्पिक, एशियाई एवं राष्ट्रमण्डल खेलों में सहभागिता करने वाले खिलाड़ी भी सीधी भर्ती के लिए पात्र होंगे। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता एवं शारीरिक मापदंड (ऊंचाई) में पूरी छूट दी जाएगी। साथ ही उन्हें लिखित परीक्षा एवं शारीरिक दक्षता परीक्षण (PET) से भी छूट मिलेगी। उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्तियां अनारक्षित (सामान्य) श्रेणी में शामिल की जाएंगी। खेल विधाएं केवल वे मान्य होंगी, जो पिछले तीन ओलम्पिक खेलों में शामिल रही हों। मेरिट अंक समान होने की स्थिति में वरिष्ठता का निर्धारण ओलम्पिक, एशियाई खेल, विश्व कप आदि की प्राथमिकता और खिलाड़ी की आयु के आधार पर किया जाएगा। संशोधित नियम, 2026 के अंतर्गत पात्रता मानदंड उप निरीक्षक पद पर केवल उन उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति दी जाएगी, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता ओलम्पिक खेल, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व कप/विश्व चैम्पियनशिप में पदक अर्जित किया हो अथवा सहभागिता की हो। इन प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत अथवा कांस्य पदक विजेता एवं सहभागिता करने वाले खिलाड़ी पात्र होंगे। आरक्षक पद के लिये राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेता और अधिकृत राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के पदक विजेता सीधी भर्ती के लिए पात्र होंगे। खिलाड़ी जो उप निरीक्षक पद के लिए निर्धारित पात्रता पूरी करते हैं, वे आरक्षक पद के लिए भी स्वतः पात्र माने जाएंगे। राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ी और अधिकृत राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक अर्जित करने वाले खिलाड़ी आरक्षक पद पर सीधी भर्ती के लिए पात्र होंगे।