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विरासत और विज्ञान का संगम डॉ. मोहन यादव के विजन में कृष्ण पाथेय-राम पथ से स्पेस टेक तक का सफर

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस वर्ष 25 मार्च को जब अपना जन्मदिन मना रहे होंगे, तो यह उनके वर्तमान कार्यकाल में एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन लेकर आएगा। 13 दिसंबर, 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद इस वर्ष का जन्मदिन उनके वर्तमान कार्यकाल का आधा पड़ाव माना जा सकता है। इन बीते दिनों में विभिन्न तरह की राजनैतिक अटकलबाजियों को गलत साबित करते हुए ना सिर्फ डॉ. मोहन यादव ने अभी तक का कार्यकाल सहजता से पूरा किया है बल्कि इस दौरान उनकी बॉडी लैंग्वेज दिन प्रतिदिन और भी मजबूत होती दिखी. देश के केंद्रीय नेतृत्व के साथ भी उनके सहज रिश्ते दिखते हैं। जन्मदिन हम सबको अवसर देता है अपनी पिछली उपलब्धियों को देखने का और एक नए संकल्प और ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्य प्राप्ति में जुट जाने का. पर जब बात मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री की हो तो जाहिर है जन्मदिन पर उनके संकल्पों में पूरे प्रदेश के 8-8.50 करोड़ लोगों का भविष्य और प्रदेश के असीम विकास की संभावनायें भी निहित होंगी। अच्छी बात यह है कि इस जन्मदिन के कई महीनों पूर्व डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा के विशेष सत्र के आयोजन के जरिए प्रदेश की जनता को प्रदेश के विकास हेतु अपने विजन और रोडमैप से अवगत करा दिया। यह विशेष सत्र 17 दिसंबर, 2025 को आहूत किया गया था, जिसकी एक और विशेषता यह थी कि मुख्यमंत्री ने विपक्ष को भी इस विकास यात्रा में साथ चलने के लिए प्रेरित और आमंत्रित किया। यह देखने और सुनने में सुखद था कि इस विशेष सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से कोई भी आरोप-प्रत्यारोप नहीं हुआ बल्कि ठीक उलट दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की सराहना करते हुए इस विकास यात्रा में अपनी भागीदारी की बात की। किसी भी अन्य राज्य में विकास के लिए पक्ष और विपक्ष के बीच इस तरह की सामूहिकता एक अजीब वाकया लग सकती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि इस तरह का पॉजिटिव माहौल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से संभव हुआ। मध्यप्रदेश में विकास की असीम संभावनाओं को देखते हुए तथा इसकी महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री के विज़न और विकास के रोडमैप में वह सब कुछ है, जो प्रदेश की आर्थिक उन्नति की दिशा दिखा रहा है। अगर राज्य का प्रशासनिक ढांचा मुख्यमंत्री की राजनीतिक इच्छाशक्ति के अनुरूप इस रोडमैप के क्रियान्वयन के लिए एक संकल्प के साथ आगे बढ़े, तो मध्यप्रदेश आने वाले समय में उद्योग, व्यापार, रोजगार, अध्यात्म, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और टूरिज्म के साथ 21वीं सदी के स्पेस टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पूरे देश में एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। इस रोडमैप में सबसे विशेष बात यह है कि प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजते और संरक्षित करते हुए 21वीं शताब्दी के विकसित भारत के उन आयामों पर काम करने का संकल्प है जो इस शताब्दी में हमारे जीवन को बड़े स्तर पर प्रभावित करने जा रहे हैं। जहां तक समृद्ध विरासत और आधुनिकता के संगम की बात है तो अगर प्रदेश में पहली बार कृष्ण पाथेय पर काम हो रहा है, राम वन गमन पथ को गति दी जा रही है, सिंहस्थ की जोर शोर से तैयारी चल रही है तो साथ में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एमपी स्पेस-टेक पॉलिसी, 2026 और स्टेट एआई मिशन पर भी काम हो रहा है. यह पहली बार है जब प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट डेटा के उद्योग से खेती को बड़े पैमाने पर उन्नत बनाने की बात हो रही है. इसी वर्ष 23 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि स्पेस टेक नीति-2026 से मध्यप्रदेश भारत का नया ‘स्पेस टेक’ हब बनेगा और इसी तरह भारत की नई अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में मध्यप्रदेश एक सशक्त भूमिका निभाएगा. इसके पहले 15 जनवरी, 2026 को भोपाल में क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें सरकार ने शासन, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, ग्रामीण विकास, शहरी प्रबंधन और औद्योगिक स्वचालन में एआई के व्यावहारिक और प्रभावशाली उपयोग को प्रदर्शित किया था. इस एआई इम्पैक्ट सम्मेलन का महत्व इसलिए भी था क्योंकि नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट, 2026 जो फरवरी में आयोजित किया गया और जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया, में मध्यप्रदेश ने भी भाग लिया और इस एआई इम्पैक्ट समिट का पूरा जोर ही इस बात पर था कि कैसे एआई हमारे जीवन के हर क्षेत्र में बहुत बड़े स्तर पर इम्पैक्ट डालने वाला है। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश में सही समय पर एआई पर कार्य होना आरंभ हुआ है। उज्जैन में आयोजित होने वाले आगामी सिंहस्थ में भी एआई का उपयोग इस आयोजन को सफलतापूर्वक आयोजित करने में दिख सकता है। डॉ. मोहन यादव के रोडमैप का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्रदेश की आर्थिक आत्मनिर्भरता है. मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अगले पांच वर्षों में राज्य के बजट को दोगुना करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है. वर्तमान में राज्य की विकास दर 14-15 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है. इस गति को बनाए रखने के लिए एमएसएमई (MSME) और औद्योगिक क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि मध्यप्रदेश देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बन सके। अपने भाषण में डॉ. मोहन यादव ने कहा, “अध्यक्ष महोदय, जब हम आपसे विजन डॉक्यूमेंट 2047 की बात कर रहे हैं, तो यह विजन डॉक्यूमेंट कोई कागज का टुकड़ा नहीं है। यह हमारा व्यक्तिगत संकल्प भी है. 2047 तक मध्यप्रदेश का युवा, महिला, सभी वर्गों का इस प्रकार का माहौल बनेगा कि हमारे युवा और महिला नेतृत्व नौकरी देने वाले बनें, नौकरी लेने वाले नहीं, इस प्रकार के संकल्प से हम आगे बढ़ रहे हैं. मध्यप्रदेश 2047 का विजन डॉक्यूमेंट राज्य को आर्थिक रूप से सशक्त, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और नागरिक जीवन की गुणवत्ता को उच्चतम स्तर तक ले जाने के लिए हम संकल्पबद्ध हैं। हम अपनी इस सरकार के गठन के 2 वर्षों में लगभग 14-15% की ग्रोथ रेट से आगे बढ़ रहे हैं।” प्रदेश की आर्थिक तरक्की के बारे में अपने विजन को बजट के उल्लेख के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, “…सवा तीन लाख करोड़ से हम बजट को 5 साल में … Read more

उद्योग संचालन की निरंतरता के लिए त्वरित समन्वय

भोपाल  एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक  विशाल सिंह चौहान ने मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र में एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था के संबंध में उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में 80 से अधिक औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि, गैस एजेंसी संचालक तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यकारी संचालक  चौहान ने औद्योगिक इकाइयों से वर्तमान आपूर्ति व्यवस्था, उत्पादन की निरंतरता और भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तृत संवाद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्योगों की संचालन व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन और संबंधित एजेंसियां समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं। पीएनजी कनेक्शन को प्रोत्साहन बैठक में गैस प्राधिकरण भारत लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने मंडीदीप क्षेत्र में उपलब्ध पाइप्ड नेचुरल गैस सुविधा की जानकारी दी। औद्योगिक इकाइयों को पीएनजी कनेक्शन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह अवगत कराया गया कि 31 मार्च 2026 तक बिना सुरक्षा जमा राशि के पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उद्योगों को 23 मार्च 2026 के परिपत्र की जानकारी दी गई, जिसके अनुसार कुल एलपीजी आपूर्ति का 5 प्रतिशत भाग औद्योगिक उपयोग के लिए आरक्षित किया गया है। प्रवासी श्रमिकों की सुविधा के लिए 5 किलोग्राम और 2 किलोग्राम गैस सिलेंडर कनेक्शन की उपलब्धता पर भी चर्चा की गई। उत्पादन की निरंतरता पर बल कार्यकारी संचालक  चौहान ने कहा कि उद्योग प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार हैं और उत्पादन की निरंतरता सर्वोच्च प्राथमिकता है। आवश्यकता अनुसार वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग पर भी सकारात्मक विचार रखने का सुझाव दिया गया, जिससे संचालन प्रभावित न हो। गैस सिलेंडर वितरण की सुव्यवस्थित योजना तैयार करने, पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया को प्राथमिकता से पूर्ण करने तथा आवश्यक उद्योग इकाइयों को वरीयता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। औद्योगिक संघों से समन्वय बनाए रखने पर भी बल दिया गया। अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी सक्रिय संवाद कार्यकारी संचालक  चौहान ने बगरौदा इंडस्ट्री एसोसिएशन भोपाल तथा अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों से भी इसी विषय पर विस्तृत चर्चा की। एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था के संबंध में बढ़ियाखेड़ी, सीहोर के उद्योगपतियों से भी संवाद किया।  

विदिशा के डायल 112 हीरोज: सड़क दुर्घटना में घायल हुए लोगों को समय पर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  विदिशा जिले के थाना सिरोंज क्षेत्र में ट्रैक्टर और कार की टक्कर में घायल हुए लोगों को डायल-112 जवानों की त्वरित कार्रवाई से समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। डायल-112 टीम की तत्परता से घायलों को शीघ्र चिकित्सीय सहायता मिल सकी। दिनांक 24 मार्च को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना सिरोंज क्षेत्र अंतर्गत दीनदयाल पार्क के पास ट्रैक्टर और कार की टक्कर हो गई है, जिससे कई लोग घायल हो गए हैं। सूचना प्राप्त होते ही सिरोंज थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर आरक्षक  रामनरेश एवं पायलट  प्रेमनारायण ने पाया कि दुर्घटना में 05 व्यक्ति घायल हो गए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए सभी घायलों को एफआरव्ही वाहन की सहायता से सिविल अस्पताल सिरोंज पहुँचाकर भर्ती कराया। डायल-112 जवानों की त्वरित कार्रवाई के कारण घायलों को समय पर चिकित्सीय सहायता मिल सकी। डायल 112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा हर आपात स्थिति में आमजन की सहायता और जीवन रक्षा के लिए सदैव सजग और प्रतिबद्ध है।  

45 लाख रूपये की लागत के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध-घुमंतु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने मंगलवार को 45 लाख रुपये से अधिक की लागत के विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। राज्यमंत्री गौर ने कहा कि जनता की सेवा और क्षेत्र का समग्र विकास ही हमारा मूल मंत्र है। यही कारण है कि क्षेत्र में विकास के कार्य अनवरत जारी हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हमारी सरकार विकास कार्यों और जन-कल्याण के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। राज्यमंत्री गौर ने 23 लाख रुपये की लागत से विवेकानंद कॉलोनी के पार्क में बाउंड्री वॉल एवं पाथवे का निर्माण और रजत नगर में सड़क के डामरीकरण कार्य का भूमि-पूजन किया। वहीं राजीव नगर 'ए' सेक्टर में 22 लाख रुपये की लागत से सीसी सड़क निर्माण, शेड निर्माण और पेवर ब्लॉक लगाने के कार्यों का भी भूमि-पूजन किया गया। भूमि-पूजन के इस भव्य कार्यक्रम में पार्षद ममता विश्वकर्मा, छाया ठाकुर, श्री संतोष ग्वाला, श्री मनोज विश्वकर्मा, श्री बृजेश व्यास, श्री प्रदीप लोधी, श्री दलजीत सिंह, श्री संजय जी, श्री प्रतीक पाराशर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

सरोजिनी नायडू महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव में हुए शामिल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव समारोह स्वयंप्रभा-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देते हुए उन्होंने कहा, "ट्राय फॉर द बेस्ट, प्रीपेयर फॉर द वर्स्ट " और समझाया कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता का मूल मंत्र है। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं के उदाहरण देते हुए बताया कि निरंतर प्रयास, आत्मविश्लेषण और धैर्य से ही लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि भारत तेजी से आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है और विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि इस ऊँचाई को बनाए रखने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है, क्योंकि यही किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास का आधार होते हैं। उन्होंने कहा कि देश की अधिकांश आबादी युवा है, जो भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं की ऊर्जा, शिक्षा और सही दिशा का समन्वय हो जाए, तो भारत विश्व गुरु बनकर विश्व में शांति और स्थिरता स्थापित कर सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी से 21वीं सदी भारत की सदी होगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की प्रतिष्ठा वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण से बनती है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. श्याम बिहारी गोस्वामी के कार्यों और उनके प्रभावशाली वक्तृत्व कौशल की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि टीम वर्क और योग्य कर्मचारियों का सम्मान करना संस्थान की सफलता की कुंजी है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाली मेधावी छात्राओं को पुरस्कृत किया। पं. शंकरदयाल शर्मा स्मृति पुरस्कार के अंतर्गत कु. हिमानी पांडेय को ऑल राउंडर पुरस्कार एवं कु. अर्पणा चौबे को बेस्ट डिबेटर पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त 10 विशिष्ट पुरस्कार भी दिए गए। प्रावीण्य सूची की छात्राओं को पारितोषिक वितरण किया गया एवं एनसीसी व एनएसएस की छात्राओं को भी पुरस्कृत किया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने सम्मानित छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षित, आत्मविश्वासी और संस्कारित युवा ही देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आयोजन के लिए कॉलेज प्रबंधन को शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों, प्राध्यापकों, एनसीसी कैडेट्स एवं छात्राओं की उपस्थिति रही।  

राजधानी से दूरस्थ जनजातीय अंचल नागलवाड़ी तक होने लगे हैं नीतिगत निर्णय

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल प्रशासन में उनके द्वारा मंत्रि-परिषद की बैठकों के आयोजन के लिए नवाचार करते हुए विभिन्न अंचलों में इन्हें करने की पहल की गई। विकास और जनकल्याण से जुड़े नीतिगत निर्णय सिर्फ मंत्रालय, भोपाल में ही नहीं प्रदेश के सुदूर अंचलों में भी लिए जाने लगे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में गत सवा 2 वर्ष में राजधानी भोपाल के अतिरिक्त कई स्थानों पर मंत्रि-परिषद बैठक किये जाने संबंधी नवाचार हुआ है। मध्यप्रदेश में किया गया ये नवाचार आम जनता द्वारा भी काफी सराहा गया है। भोपाल के साथ ही जबलपुर, दमोह, खरगौन, नर्मदापुरम्, छतरपुर और बड़वानी जिलों में मंत्रि- परिषद की बैठकें हो चुकी है। इन बैठकों में जनकल्याण से जुड़े बहुआयामी निर्णय लिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामान्य कैबिनेट के साथ ही कृषि कैबिनेट भी प्रदेश के प्रत्येक अंचल में करने का निर्णय लिया है। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ कैबिनेट प्रस्तावित है। जबलपुर और सिंग्रामपुर से हुई पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री पद का दायित्व ग्रहण करने के पश्चात सर्वप्रथम ऐसे गौरवशाली व्यक्तित्व के जीवन से नागरिकों को परिचित करवाने की पहल की जिनके बारे में प्रदेश के जन-जन को जानकारी होना चाहिए। स्वाधीनता संग्राम से लेकर प्रदेश के विकास में संलग्न रही ऐसी हस्तियों के जीवन और कार्यों से युवा पीढ़ी को परिचित करवाया जा रहा है जिससे वे प्रेरणा ग्रहण कर सकें। ऐसे प्रयासों में विभिन्न गौरवशाली व्यक्तित्व की स्मृति में कार्यक्रमों के आयोजन के साथ, भोपाल के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर मंत्रि-परिषद की बैठकों का आयोजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सबसे पहले जबलपुर में हुई मंत्रि-परिषद बैठक से यह पहल प्रारंभ की। राजधानी भोपाल के अलावा इन स्थानों पर हुईं बैठकें मंत्रि-परिषद बैठक के आयोजन के लिए रानी दुर्गावती और देवी अहिल्याबाई की स्मृति से जुड़े स्थानों का भी ध्यान रखा गया। प्रदेश में ऐसे व्यक्तित्व चयनित किए गए जिनके शासन क्षेत्र और सेवा क्षेत्र के स्थानों पर बैठकों के आयोजन हों। इस कड़ी में ऐसे स्थानों में दमोह जिले का सिंग्रामपुर, खरगौन जिले का महेश्वर, नर्मदापुरम जिले के पचमढ़ी, छतरपुर जिले का खजुराहो और इंदौर का राजवाड़ा स्मारक आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में जनजातीय संस्कृति के प्रमुख केंद्र बड़वानी जिले में मंत्रि-परिषद की बैठक का आयोजन किया। यह इस वर्ष की प्रथम कृषि कैबिनेट भी थी। प्रदेश के विभिन्न स्थानों से जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क का कार्य भी इससे आसान हुआ है। राजधानी में ही जन हित से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते रहे हैं, इस नवाचार से अब प्रदेश के छोटे से ग्राम नागलवाड़ी से भी जन कल्याण के महत्वपूर्ण फैसले लिए जा रहे हैं। स्थानों पर हुई मंत्रि-परिषद की बैठकों में लिए गए प्रमुख निर्णय 3 जनवरी 2024 : जबलपुर के शक्ति भवन में मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी और रानी दुर्गावती के सम्मान में पुरस्कार शुरु करने का निर्णय। यह पुरस्कार विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष कर सफल होने वाली समाजसेवी महिलाओं को दिया जाता है। रानी अवंती बाई लोधी और रानी दुर्गावती के प्रेरणादायी विषय स्कूल, कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय। रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत- अन्न-कोदो-कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा आदि के उत्पादक किसानों को प्रति किलो 10 रुपये की राशि खाते में करने का निर्णय। तेन्दूपत्ता संग्राहक दर में एक हजार रुपये प्रति बोरा की वृद्धि करते हुए इसे 4 हजार रुपये प्रति बोरा किया गया। ग्वालियर व्यापार मेले में मोटरयान कर दर पर 50 प्रतिशत छूट का निर्णय। प्रदेश में बुनियादी सिंचाई सुविधाएं विकसित करने के लिए दृष्टि से 32 हजार करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति। 5 अक्टूबर 2024 : दमोह जिले के सिंग्रामपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती के सम्मान में मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना में में 3900 रुपये प्रति हैक्टेयर अतिरिक्त सहायता राशि मंजूर। जबलपुर स्थित मदन महल पहाड़ी पर 100 करोड़ रुपये की लागत से रानी दुर्गावती स्मारक एवं उद्यान विकसित करने के लिए स्वीकृति। 24 जनवरी 2025 को लोकमाता अहिल्याबाई की नगरी महेश्वर (जिला खरगौन) में मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। प्रदेश में उज्जैन, महेश्वर, मैहर, ओरछा, अमरकंटक जैसे 19 नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में मदिरा को प्रतिबंधित किए जाने की स्वीकृति। प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में वर्तमान में प्रचलित मुख्यमंत्री कृषक योजना के अंतर्गत सोलर कृषि पंप शामिल किए जाने की स्वीकृति। मध्यप्रदेश एनीमेशन, मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग कॉमिक्स और विस्तारित रियलिटी क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग कॉमिक्स और विस्तारित रियलिटी नीति-2025 जारी किए जाने की मंजूरी। भोपाल में बावड़ियाकला चौराहा से ऑशिमा मॉल तक रेलवे ओवर ब्रिज निर्माण की स्वीकृति। प्रदेश के 3 नए जिलों मऊगंज, मैहर और पांढुर्णा जिला चिकित्सालय के संचालन के लिए 424 नवीन पदों की स्वीकृति। 20 मई 2025 : लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के 300 वें जयंती वर्ष पर इंदौर के राजवाड़ा में मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में 3 हजार 867 करोड़ रुपये की योजना एवं निर्माण कार्यों की स्वीकृति। युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम योजना शुरु करने की मंजूरी। मध्यप्रदेश महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम 2025 को स्वीकृति करने का निर्णय। अधिनिय़म लागू होने के बाद महानगर योजना समिति एवं महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन हुआ। इन्दौर, उज्जैन, देवास, धार एवं भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, ब्यावरा (राजगढ़) महानगरीय क्षेत्र बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन कार्यक्रम की वित्तीय वर्ष 2028-29 तक निरंतरता की स्वीकृति। उज्जैन, पीथमपुर, मालनपुर घिरौंगी और मंडीदीप स्थित 4 औद्योगिक क्षेत्र में 249 करोड़ 66 लाख रुपये की लागत से वर्किंग वीमेन हॉस्टल के निर्माण की मंजूरी। ओंकरेश्वर में एकात्म धाम परियोजना अंतर्गत आचार्य शंकर संग्रहालय अद्वैत लोक के निर्माण के लिए 2195 करोड़ रुपये से अधिक की पुनरीक्षित स्वीकृति। महाराजा यशवंत राव चिकित्सालय परिसर इन्दौर और श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के उन्नयन के लिए 1095 करोड़ रुपये से अधिक की प्रशासकीय स्वीकृति। 3 जून 2025 : नर्मदापुरम जिले के पचमढ़ी के राजभवन में राजा भभूत सिंह के शौर्य को समर्पित मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। मध्यप्रदेश में एग्रीटेक … Read more

सुबह 11:30 बजे से विद्यार्थी वेब पोर्टल पर देख सकेंगे परिणाम, क्यूआर कोड के माध्यम से पोर्टल की लिंक को कर सकेंगे स्कैन

भोपाल राज्य शिक्षा केन्द्र, स्कूल शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश द्वारा बुधवार को कक्षा 5वीं एवं 8वीं का परीक्षा परिणाम घो‍षित किया जाएगा। विद्यार्थी सुबह 11.30 बजे से अपना परीक्षा परिणाम www.rskmp.in/result.aspx पोर्टल पर देख सकेंगे। राज्य शिक्षा केंद्र से मिली जानकारी अनुसार 25 मार्च को परीक्षा परिणाम घोषणा की प्रक्रिया सुबह 11 बजे से राज्य शिक्षा केन्द्र कार्यालय के सभाकक्ष में संचालित की जाएगी। इसके बाद सुबह 11:30 बजे परीक्षा परिणाम पोर्टल पर जारी किया जाएगा। विद्यार्थी, अभिभावक एवं शिक्षकगण राज्य शिक्षा केन्द्र की वेब पोर्टल www.rskmp.in/result.aspx पर अपना रोल नंबर/समग्र आईडी डालकर रिजल्ट देख सकेंगे। साथ ही इसी पोर्टल पर शिक्षक, संस्था प्रमुख अपनी शाला का विद्यार्थीवार परिणाम भी देख सकेंगे। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा वेब पोर्टल की लिंक भी क्यूआर कोड़ के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। प्रदेश में कक्षा 5वीं एवं 8वीं की परीक्षा बोर्ड पैटर्न पर कराई गई थी। यह विगत 20 से 28 फरवरी के बीच हुई थी। जिसमें प्रदेश की शासकीय, अशासकीय शालाओं एवं पंजीकृत मदरसों के कक्षा 5वीं के 12 लाख 76 हज़ार से अधिक तथा कक्षा 8वीं के 10 लाख 92 हज़ार से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए थे। प्रदेश में लगभग 23 लाख 68 हजार से अधिक विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए कुल 322 केन्द्र बनाये गए थे। इन मूल्यांकन केन्द्रों में 1 लाख 10 हज़ार से अधिक मूल्यांकनकर्ताओं के द्वारा अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि पोर्टल पर दर्ज की गई है।  

महिला सम्मान का असली अर्थ तब होगा जब महिलाओं के खिलाफ अपशब्द बंद होगा” : एआईजी सिंह

भोपाल मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग का 28वां स्थापना दिवस समारोह मंगलवार को गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। राज्य शासन द्वारा 23 मार्च 1998 को मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की स्थापना की गई थी। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई। एआईजी महिला सुरक्षा शाखा  बीना सिंह, ने कहा कि आज समाज में महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण तेजी से बदल रहा है। अब लगभग सभी विभागों में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है और वे हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी दर्ज करा रही हैं। उन्होंने कहा कि जिस दिन महिलाओं के खिलाफ बोले जाने वाले अपशब्द बंद हो जाएंगे, उसी दिन वास्तविक अर्थों में महिला सम्मान स्थापित होगा। आयोग के सचिव  सुरेश तोमर ने कहा कि लैंगिक भेदभाव, पितृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था और घरेलू हिंसा जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग तथा अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रहा है। कार्यक्रम में संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास मती नकी जहां कुरैशी, POSH की विशेषज्ञ मती भावना त्रिपाठी और शिखा छिब्बर, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, जवाहर बाल भवन के बच्चे तथा आयोग कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। समारोह में विशेष रूप से उन पुरुषों को भी सम्मानित किया गया, जो समाज में जेंडर समानता के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इस क्रम में उदय सामाजिक संस्था के  सोनू सोलंकी, आरंभ संस्था के  विजय यादव,  रोहित बेड़िया और  जितेन्द्र राजाराम को लैंगिक समानता, घरेलू हिंसा के विरुद्ध जागरूकता, सेनेटरी नैपकिन उपलब्धता तथा बेड़िया समुदाय की महिलाओं के उत्थान के लिए किए गए विशेष कार्यों के लिए महिला आयोग द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने महिला अधिकारों की सुरक्षा और समाज में समानता की भावना को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।  

नीति, नवाचार और निवेश से आर्थिक समृद्धि के नए कीर्तिमान रचता मध्यप्रदेश

भोपाल वैश्विक अर्थव्यवस्था के पुनर्संतुलन के इस दौर में भारत की विकास यात्रा अब केवल राष्ट्रीय नीतियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि राज्यों की क्षमता, नेतृत्व की स्पष्टता और प्रशासनिक प्रतिबद्धता उसकी गति निर्धारित कर रही है। ऐसे समय में मध्यप्रदेश ने स्वयं को एक संसाधन आधारित राज्य से आगे बढ़ाकर एक रणनीतिक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निवेश को केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्पादन, रोजगार और क्षेत्रीय संतुलन से जुड़े व्यापक परिवर्तन के रूप में देखा है। उनके स्पष्ट मार्गदर्शन में नीति सुधार, प्रशासनिक सरलीकरण, औद्योगिक आधार विस्तार और निवेश प्रस्तावों को धरातल तक पहुंचाने की प्रक्रिया को एकीकृत ढंग से आगे बढ़ाया गया है। यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि नीति की स्पष्टता, नवाचार की स्वीकृति और निवेश के प्रति सक्रिय प्रतिबद्धता के समन्वय से मध्यप्रदेश आर्थिक समृद्धि के ऐसे नए कीर्तिमान रच रहा है जो राष्ट्रीय स्तर पर एक उदाहरण के रूप में उभर रहे हैं। नीति आधारित पारदर्शिता और निवेश का विश्वास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगों के लिए भरोसे का वातावरण निर्मित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उद्योग संवर्धन नीति 2025 सहित विभिन्न सेक्टर आधारित नीतियों के माध्यम से निवेशकों को स्पष्ट प्रोत्साहन ढांचा उपलब्ध कराया गया है। श्रम प्रधान क्षेत्रों जैसे गारमेंट, फुटवियर और खिलौना निर्माण में बड़े निवेश को मेगा उद्योग का दर्जा देकर अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज प्रदान किए जा रहे हैं। मोहन सरकार ने प्रक्रियाओं की जटिलता को कम करने के लिए मध्यप्रदेश जन विश्वास संशोधन अधिनियम के माध्यम से अनेक प्रावधानों का अपराधमुक्तिकरण किया गया। इससे उद्योगों में अनावश्यक भय और दंडात्मक संस्कृति की जगह विश्वास आधारित प्रशासन को बढ़ावा मिला है। सिंगल विंडो व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त करते हुए इन्वेस्ट एमपी 3 पोर्टल प्रारंभ किया गया है, जो निवेशकों को नीति, अनुमतियां, प्रोत्साहन और व्यवहार्यता से जुड़ी जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराता है। यह पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उस सोच को दर्शाती है जिसमें सरकार स्वयं को नियंत्रक नहीं, बल्कि सहयोगी के रूप में स्थापित करती है। निवेश प्रस्तावों से उद्योग स्थापना तक राज्य में आयोजित वैश्विक निवेश मंचों और औद्योगिक संवादों के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इन प्रस्तावों को केवल समझौता पत्र तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें उद्योग स्थापना में बदलने के लिए निरंतर निगरानी और सीधी समीक्षा की व्यवस्था बनाई गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं निवेश परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा करते हैं। विभागीय समन्वय को मजबूत किया गया है ताकि भूमि आवंटन, स्वीकृतियां, आधारभूत सुविधाएं और प्रोत्साहन समयबद्ध ढंग से उपलब्ध कराए जा सकें। परिणामस्वरूप अनेक परियोजनाएं उन्नत अवस्था में पहुंच चुकी हैं और कई इकाइयां उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि मध्यप्रदेश में निवेश केवल घोषणा नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की प्रक्रिया है। औद्योगिक आधार और मजबूत अधोसंरचना राज्य में विशाल औद्योगिक भूमि बैंक उपलब्ध है और नए औद्योगिक पार्कों का विकास तीव्र गति से किया जा रहा है। मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों के उन्नयन के साथ आधुनिक आधारभूत संरचना सुनिश्चित की जा रही है। धार जिले में विकसित हो रहा पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क योजना के अंतर्गत देश के सबसे बड़े एकीकृत टेक्सटाइल पार्क के रूप में उभर रहा है। यह परियोजना फाइबर से फैशन तक पूरी मूल्य श्रृंखला को एक स्थान पर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। रतलाम में विकसित हो रहा मेगा औद्योगिक पार्क, सागर क्षेत्र में पेट्रोकेमिकल आधारित संभावनाएं, ग्वालियर में फुटवियर पार्क, नर्मदापुरम में रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण निर्माण क्षेत्र और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी पहलें औद्योगिक विविधीकरण को सुदृढ़ कर रही हैं। एशिया का प्रमुख ऑटो परीक्षण केंद्र NATRAX राज्य में स्थित है। रीवा सौर परियोजना और ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश की पहचान को मजबूत किया है। निर्यात और उत्पादन क्षमता का विस्तार मध्यप्रदेश का वार्षिक निर्यात निरंतर वृद्धि दर्ज कर रहा है। कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मा, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल और खनिज आधारित उद्योग निर्यात संरचना के प्रमुख आधार हैं। राज्य भारत के ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन में अग्रणी है, जिससे टेक्सटाइल उद्योग को वैश्विक सस्टेनेबल सप्लाई चेन में विशेष स्थान मिला है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में गेहूं, सोयाबीन, दालें और मिलेट आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग प्रदेश के लिए नए बाजार खोल रही है।स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश अधिशेष विद्युत उत्पादन वाले राज्यों में शामिल है और ऊर्जा भंडारण तथा बैटरी निर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं विकसित की जा रही हैं। समृद्ध मध्यप्रदेश 2047 की दिशा समृद्ध मध्यप्रदेश 2047 का विजन दस्तावेज प्रदेश की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति को स्पष्ट करता है। इसमें एमएसएमई, स्टार्टअप, महिला उद्यमिता और तकनीक आधारित नवाचार को विकास का प्रमुख आधार माना गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट किया है कि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। इसलिए कौशल विकास, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह विजन केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिस्पर्धात्मकता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन के संतुलित मॉडल की ओर संकेत करता है। राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान भारत आज वैश्विक आर्थिक संरचना में नई भूमिका निभाने की दिशा में अग्रसर है। इस यात्रा में राज्यों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश अपनी नीतिगत स्पष्टता, औद्योगिक विस्तार और निवेश अनुकूल वातावरण के माध्यम से राष्ट्रीय विकास में सशक्त योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश ने यह संदेश स्पष्ट किया है कि विकास घोषणाओं से नहीं, बल्कि धरातल पर स्थापित उद्योगों, सृजित रोजगार और मजबूत आर्थिक आधार से मापा जाता है। नीति, नवाचार और निवेश के सुविचारित समन्वय के साथ मध्यप्रदेश आज आर्थिक समृद्धि के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है और राष्ट्रीय औद्योगिक मानचित्र पर अपनी भूमिका को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है।  

स्कूलों में नया सिस्टम: शिक्षक नहीं आए तो बच्चे खुद बुलाएंगे, प्रिंसिपल रखेंगे लाइव नजर

बालाघाट सांदीपनि स्कूलों के खुलने के बाद अन्य शासकीय स्कूलों के संचालन पर संकट गहराता जा रहा है, इन स्कूलों में दर्ज संख्या भी कम होती जा रही है, जिससे अन्य सरकारी स्कूलों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में वर्षों पुराने बालाघाट जिला मुख्यालय में संचालित सरकारी संस्था उत्कृष्ट विद्यालय स्वयं को निजी स्कूलों की तर्ज पर संचालित करने के लिए अपडेट कर रही है, और शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए उसे बेहतर करने का प्रयास कर रही है। आडियो ब्राड कास्टिंग सिस्टम से सुधरेगी व्यवस्था जिसके तहत ही अब उत्कृष्ट विद्यालय में स्कूल लगने के बाद कोई पीरियड मिस नहीं हो सकेंगे और यदि एक पीरियड खत्म होने के बाद अगला पीरियड पढ़ाने के लिए कक्षा में कोई शिक्षक नहीं आता है, तो ऐसे में विद्यार्थी कक्षा से ही सीधे अपने कक्ष में बैठे प्राचार्य से संपर्क कर सकेंगे जिससे उनके लिए शिक्षक की व्यवस्था हो सकेगी। यह मुमकिन हो पाएगा आडियो ब्राड कास्टिंग सिस्टम की व्यवस्था से। इस व्यवस्था के तहत उत्कृष्ट विद्यालय के सभी कक्षों में सिस्टम के स्पीकर लगाए गए हैं और आवश्यकता पड़ने पर इसे फोन की तरह विद्यार्थी इस्तेमाल कर सकेंगे। निगरानी और मनोरंजन की दोहरी सुविधा वहीं प्राचार्य इस व्यवस्था से निगरानी रख सकेंगे। इतना ही नहीं, लंबी पढ़ाई के बाद मानसिक व शारीरिक थकान को दूर करने के लिए अंतिम 15 मिनटों में विद्यार्थियों का इस सिस्टम के माध्यम से मनोरंजन भी किया जा सकेगा। स्कूल स्टाफ व विद्यार्थियों पर नियमित मॉनिटरिंग करने व उनकी किसी भी समस्या के निदान के लिए आडियो ब्राड कास्टिंग सिस्टम को स्कूल परिसर में स्थापित किया गया है। सीसीटीवी से भी होगी मॉनिटरिंग मुख्य सिस्टम प्राचार्य कक्ष में रखा गया है, और सभी कक्षाओं व स्टाफ कक्षों में इसके स्पीकर लगाए गए हैं, साथ ही सीसीटीवी फुटेज से इसकी नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी। विद्यार्थी स्वस्थ महसूस कर सकें इसके लिए 15 मिनट उनके मनोरंजन के लिए म्यूजिक की व्यवस्था भी की गई है। – शरद ज्योतिषी, प्राचार्य, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बालाघाट।