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प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट ने उठाया कदम, बांधवगढ़ वाटर पार्क मामले में केंद्र-राज्य सरकार से जवाब तलब

 जबलपुर  हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में वाटर पार्क के संचालन को लेकर जवाब-तलब किया है। इस सिलसिले में केंद्र व राज्य सरकार, एनटीसीए, मुख्य वन संरक्षक बांधवगढ़ सहित अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। सभी को एक सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई नौ फरवरी को होगी। जनहित याचिकाकर्ता शास्त्री नगर, जबलपुर निवासी पर्यावरण प्रेमी अभिषेक पाठक की ओर से अधिवक्ता प्रभात कुमार यादव ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील एवं प्रचुर संख्या में वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। विगत दो-तीन सालों से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की मौत की घटनाएं खतरनाक ढंग से बढ़ी हैं। इस दौरान 12 हाथी, कई बाघ, तेंदुए, हिरण, सांभर, नीलगाय व बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत हुई है। इसके बावजूद टाइगर रिजर्व के पर्यावरण संवेदी कोर एरिया से लगे प्रतिबंधित जोन में कैलाशजी वाटर पार्क नाम से जल आधारित मनोरंजन सुविधा का संचालन आरंभ किया गया है। जहां स्विमिंग पूल हैं तथा कई वाटर स्पोर्ट्स होते हैं। वाटर पार्क से हजारों लीटर केमिकल युक्त खराब पानी समीपी वन भूमि में छोड़ा जाता है। यह पानी वन्य भूमि व भूजल को प्रदूषित कर रहा है। वन्य जीवों, पेड़ों व वनस्पतियों को भी इससे नुकसान पहुंच रहा है। आसपास के परंपरागत जल स्रोत भी प्रदूषित हो गए हैं। दुर्गंध आने के कारण वन्यजीव दूर भाग रहे हैं। ग्राम पंचायत, प्रदूषण नियंत्रण मंडल व राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से वाटर पार्क के निर्माण के पूर्व एनओसी नहीं ली गई। उक्त वाटर पार्क के संचालक पर रोक लगाने की मांग की गई। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद महानिदेशक फॉरेस्ट सर्वे आफ इंडिया, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, मध्य प्रदेश वन विभाग के प्रमुख सचिव, बांधवगढ़ मुख्य वन संरक्षक, बायोडायवर्सिटी बोर्ड मध्य प्रदेश, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर फील्ड बायोलॉजिस्ट, रेंजर एवं कैलाशजी बालाजी वाटर पार्क के संचालक कैलाश छतवानी से जवाब मांगा गया है।

अद्भुत मंदिर की कहानी: चंबल के बीहड़ों का 1000 साल पुराना शिव मंदिर, रहस्यमयी खंभे और भूतिया कनेक्शन

मुरैना देश का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में ऐसे कई स्मारक, महल और किले हैं, जो अपनी अद्भुद वास्तुकला के लिए विश्वविख्यात हैं। इनके अलावा भी अभी बहुत कुछ है, जो देखने के लिए बचा हुआ है। ऐसा ही एक मंदिर, जिसे भूतों का मंदिर भी कहते हैं, मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सिहोनिया में स्थित है। इस मंदिर का प्रचलित नाम ककनमठ है और यह अपनी रहस्यमयी किवदंतियों और अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है। क्यों खास है यह मंदिर? ककनमठ मंदिर की स्थापत्य कला 10वीं शताब्दी के समकक्ष मानी जाती है। इसलिए माना जा सकता है कि यह लगभग एक हजार साल पुराना है। यह गुर्जर-प्रतिहार शैली का उत्कृष्ट नमूना है। मंदिर विशालकाय पत्थरों से बना है और इसका शिखर हवा में तैरता हुआ प्रतीत होता है। भले ही मंदिर आज भग्नावस्था में है, लेकिन यहां की मूर्तियां आज भी मंत्रमुग्ध कर देती हैं। दीवारों और छतों पर देवी-देवताओं और पौराणिक जीवों की नक्काशी की गई है। मंदिर में गर्भगृह, स्तंभयुक्त मंडप और आकर्षक मुखमंडप है, जिसमें चूना, मिट्टी या सीमेंट का इस्तेमाल नहीं हुआ है। किसने बनवाया यह मंदिर? इतिहासकारों का मानना है कि मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में कच्छपघात राजवंश की रानी ककनवती के आदेश पर हुआ था और उन्हीं के नाम पर इसका नाम ककनमठ पड़ा। स्थानीय लोगों और आस पास के इलाकों में एक किवदंती यह भी प्रचलित है कि इसे भूतों ने एक रात में बनाया। एक और कहानी के अनुसार, भूत मंदिर बना रहे थे तभी एक महिला ने चक्की चलाना शुरू कर दिया, जिससे डरकर भूत अधूरा काम छोड़कर भाग गए। तभी से यह मंदिर आज तक अधूरा पड़ा हुआ है। पुरातत्व विभाग के अधिकारी इन कहानियों को कल्पना और लोककथाएं बताते हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। मंदिर से जुड़ी हैं दिलचस्प किवदंतियां स्थानीय लोगों का मानना है कि सूरज ढलने के बाद इस मंदिर पर भूतों का कब्जा हो जाता है और यहां अजीबोगरीब आवाजें सुनाई देती हैं। एक और किवदंती के अनुसार, जिस दिन इस मंदिर के सामने से नाई जाति के नौ काने दूल्हे बारात लेकर निकलेंगे, उस दिन यह मंदिर गिर जाएगा। हालांकि, ये किंवदंतियां स्थानीय मान्यताओं और अंधविश्वासों पर आधारित हैं। इस मंदिर को लेकर एक अजीबोगरीब किवदंती है कि सूर्यास्त के बाद यहां रुकने वाले को भयानक दृश्य दिखाई देते हैं, जिससे रूह कांप जाती है। इसी डर से लोग रात में यहां नहीं रुकते। मंदिर के खंभों को गिनना रहस्य मंदिर की बनावट में पत्थरों को बिना किसी मसाले के जोड़ा गया है और इसके खंभों की गिनती करना भी एक रहस्य है। स्थानीय लोग कहते हैं कि इस मंदिर में मौजूद खंभों की आज तक कोई गिनती नहीं कर पाया। हर बार गिनती करने पर या तो संख्या बढ़ जाती है या घट जाती है। मंदिर में कई शिवलिंग और मूर्तियां भी मौजूद हैं, जो खंडित अवस्था में हैं। कैसे पहुंचते हैं ककनमठ मंदिर? यहां पहुंचने के लिए हवाई यात्रा करने वाले ग्वालियर आ सकते हैं, जो मंदिर से करीब 65-70 किलोमीटर दूर है। रेल और सड़क मार्ग से भी मुरैना पहुंचना आसान है। दिल्ली से यमुना एक्सप्रेसवे से होते हुए 325 किलोमीटर दूर मुरैना पहुंचा जा सकता है। मुरैना से बस या टैक्सी द्वारा करीब 35 किलोमीटर का सफर तय कर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

धीरेंद्र शास्त्री का संदेश: संतों में विवाद धर्म की मजबूती के खिलाफ

छतरपुर  मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि संतों के विवाद पर बोलने की हैसियत हमारी नहीं है, लेकिन साधु आपस में लड़कर जो निंदा कर रहे हैं, वह सनातन के लिए घातक है। सोमवार को इंदौर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि हम अब तक संत नहीं बन पाए हैं क्योंकि हम आचरण से संत बनना चाहते हैं। ऐसी बात से हमारी ही हंसी होती है। दूसरों की निंदा करने की बजाय सनातनियों को स्वयं में सुधार करने की आवश्यकता है। सनातन परंपरा अमिट रहेगी और इसे कोई मिटा नहीं सकता है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री एक दिवसीय प्रवचन में शामिल होने के लिए मोहनखेड़ा जैन तीर्थ पहुंचे थे। इंदौर में मीडिया के सवालों का जवाब देते कहा कि आज नए मंदिर तो खूब बनाए जा रहे, लेकिन पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार नहीं किया जा रहा। पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार कर इनका वैभव लौटाए जाने की जरूरत है। उन्होंने बलि प्रथा को दूर करने की आवश्यकता बताई। साथ ही कहा कि हमारे तीर्थ, देवालय आस्था का केंद्र बनने के बजाये पिकनिक स्पॉट बन रहे हैं। यह उचित नहीं है।

एमपी ट्रांसको के आगर 132 के.वी. सब स्टेशन में तकनीकी नवाचार

पुराने फाउंडेशन पर स्थापित किया गया अधिक क्षमता का कैपेसिटर बैंक एमपी ट्रांसको के आगर 132 के.वी. सब स्टेशन में तकनीकी नवाचार उपभोक्ताओं को मिल रही गुणवत्तापूर्ण एवं स्थिर वोल्टेज की बिजली भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने आगर स्थित 132 के.वी. सब स्टेशन में तकनीकी नवाचार करते हुए पुराने कैपेसिटर बैंक के फाउंडेशन पर ही अधिक क्षमता का नया कैपेसिटर बैंक सफलतापूर्वक स्थापित कर ऊर्जीकृत किया है। क्षेत्र में इंडक्टिव लोड बढ़ने के कारण पूर्व में स्थापित 5 एमवीएआर क्षमता का कैपेसिटर बैंक लोड वहन नहीं कर पा रहा था। इससे वोल्टेज प्रोफाइल प्रभावित हो रही था। सीमित स्थान के कारण नए फाउंडेशन का निर्माण संभव नहीं था। तकनीकी नवाचार से निकला समाधान वोल्टेज प्रबंधन की चुनौती का समाधान करते हुए एमपी ट्रांसको के सहायक अभियंता श्री योगेश राठौर ने तत्कालीन कार्यपालन अभियंता श्री शेखर फटाले के मार्गदर्शन में पुराने फाउंडेशन का ही उपयोग कर आवश्यक तकनीकी संशोधन किए और उसी फांउडेशन पर 12 एमवीएआर क्षमता का नया कैपेसिटर बैंक स्थापित किया। इससे समय और लागत कम होने के साथ ही क्षमता संवर्धन के लिये अतिरिक्त भूमि की जरूरत नहीं पड़ी। इन क्षेत्रों को मिल रहा है लाभ कैपेसिटर बैंक की क्षमता बढ़ने से आगर 132 के.वी. सब स्टेशन से जुड़े 33 के.वी. के 9 फीडरों के हजारों उपभोक्ताओं को बेहतर, स्थिर और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति मिल रही है। लाभान्वित क्षेत्रों में मोया खेड़ा, कानड़, नलखेड़ा, निपानिया बैजनाथ, मडकोटा, थानोदला, आगर, झरड़ा एवं आगर टाउन शामिल हैं।  

मध्य प्रदेश का बजट 2026-27 जल्द, 18 फरवरी को पेश होगा; यहां जानें मुख्य बिंदु

भोपाल मध्यप्रदेश सरकार 18 फरवरी 2026 को विधानसभा में अपना तीसरा बजट पेश करेगी, जिसे वित्त मंत्री और उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा पेश करेंगे। यह बजट रिकॉर्ड रकम और समावेशी विकास के एजेंडा के साथ तैयार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि राज्य का अनुमानित बजट 4.63 लाख करोड़ रुपए के आसपास हो सकता है। जो पिछले बजट से करीब 10 फीसदी अधिक होगा। बताते चलें कि एमपी विधानसभा बजट सत्र 16 फरवरी को शुरू होने जा रहा है और 18 फरवरी को एमपी बजट पेश किया जाएगा। बता दें कि कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम मोहन यादव ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ये तो 18 फरवरी को MP Budget 2026-27 में पता चल जाएगा। MP Budget 2026-27 का फोकस क्या या क्या हो सकता है खास?     कृषि और ग्रामीण विकास- किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समृद्ध बनाने वालीे योजनाओं पर     रोजगार सृजन- अनुमान जताया जा रहा है कि लगभग 50 हजार सरकारी नौकरियां निकाली जाएंगी।     युवा और कौशल- तकनीकी कौशल, उद्यमिता और नौकरियों के अन्य अवसरों पर जोर     महिला सशक्तिकरण के लिए योजनाएं- महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं में वृद्धि की जा सकती है। केंद्रीय बजट 2026-27 – एमपी को क्या मिला? बता दें कि हाल ही पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 का असर एमपी के बजट की तैयारियों को प्रभावित कर सकता है। माना जा रहा है कि वित्त आयोग के करों को लेकर नये फॉर्मूले के कारण एमपी को केंद्रीय कर हिस्से से करीब 7,500 करोड़ का नुकसान होने की उम्मीद है। रेलवे और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए एमपी को करीब 15,188 करोड़ का आवंटन किया गया है। नगर निगमों के लिए हरित बॉन्ड प्रोत्साहन में कमी कुछ शहरी वित्तीय प्रोत्साहन में एमपी नगर निकाय लाभ से वंचित रह सकते हैं।  उम्मीदें! विश्लेषकों का कहना है कि MP Budget 2026-27 राज्य की विकास यात्रा को तेज करने वाला बजट हो सकता है। यदि इसमें रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और शिक्षा पर पर्याप्त निवेश होता है, खासकर उस स्थिति में जब राज्य की कर हिस्सेदारी घट चुकी है। तीसरा और अंतिम अनुपूरक बजट भी रहेगा खास बताया जा रहा है कि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तीसरा और अंतिम अनुपूरक बजट भी सदन में रखा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक ये अनुपूरक बजट करीब 10 हजार करोड़ का हो सकता है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अनुपूरक बटज में न तो किसी नई योजना के लिए प्रावधान होगा और न ही किसी विभाग को नये वाहन खरीदने के लिए राशि दी जाएगी। ऐसा कोई भी वित्तीय प्रावधान नहीं किया जाएगा। इससे राज्य के राजकोष पर अतिरिक्त बोझ पड़े।

धीरेंद्र शास्त्री के निर्देशन में बागेश्वरधाम में 300 युवतियों के लिए विशेष अनुष्ठान, शर्तों के साथ होगा आयोजन

छतरपुर  हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बागेश्वर धाम में कन्या विवाह महोत्सव आयोजित होने जा रहा है। इस बार का महोत्सव इसलिए खास है क्योंकि यह सिर्फ राष्ट्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय हो गया है। नेपाल की भी एक बेटी का विवाह धाम से हो रहा है। रविवार को बागेश्वर धाम के पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वर-वधु को लहंगा, चुनरी, शेरवानी, टोपी, वरमाला आदि सामग्री भेंट की। वहीं उन्हें समझ्या कि अंतरराष्ट्रीय विवाह सम्मेलन में उन्हें कैसे आना है, क्या पहनकर आना है। क्या सुविधाएं मिलेंगी और क्या घर से करना होगा? सामूहिक विवाह का खर्च बागेश्वर धाम की दानपेटी से पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया "यह 7वां सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव होगा. आयोजन में पूरा खर्च धाम की दानपेटी से करते हैं. बागेश्वर धाम पर आयोजित होने वाला सामूहिक विवाह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन बेटियों के लिए जीवन बदल देने वाला अवसर होता है, जिनके परिवार आर्थिक कारणों से विवाह नहीं कर पाते. इस बार बागेश्वर धाम की ओर से 300 बेटियों के हाथ पीले कर विदाई कराने का लक्ष्य रखा गया है. आयोजन में देशभर के वर-वधु शामिल होते हैं." बाबा बागेश्वर ने लिस्ट जारी की इस बार होने वाले सामूहिक आयोजन में बेटियों की बाबा बागेश्वर ने लिस्ट जारी कर नामों की घोषणा की. बाबा बागेश्वर खुद आयोजन की देखरेख करते है. लिस्ट बनाने में समिति को करीब 2 माह का समय लगा है. फार्म जमा होना, टीम का घर-घर जाना, परीक्षण होना, 30 हजार किलामीटर 40 से ज्यादा लोगों ने यात्रा कर सूची बनाई है. इस आयोजन में देशभर की बेटियों के हाथ पीली किये जा रहे हैं. मध्य प्रदेश, यूपी, बंगाल, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित देशभर की गरीब निर्धन बेटियों के विवाह होंगे.  समधियों को दी समझाइश उन्होंने सभी समधियों को समझाइश दी कि वे बहू को बेटी की तरह रखें, किसी भी प्रकार की कोई शिकायत न आए। शास्त्री ने कुछ समधियों को बुलाकर उनसे हंसी मजाक करते उन्हें गुलाल भी लगाया। धीरेंद्र शास्त्री ने ट्वीट कर दी विवाह महोत्सव की पूरी जानकारी। यहां सुन लें आप भी… वर-वधू के नाम से होगी संयुक्त एफडी पं. शास्त्री ने बताया, इस बार वर-वधू के नाम से संयुक्त रूप से 30 हजार की एफडी कराई जाएगी। यह एफडी 5 वर्ष से पहले नहीं तोड़ी जा सकेगी। बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि को सप्तम कन्या विवाह महोत्सव आयोजित हो रहा है।  300 बेटियों का गठबंधन मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में होने वाले इस सामूहिक विवाह महोत्सव में 300 बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा जाएगा। पं. शास्त्री ने कहा जो बेटियां दूर से आने वाली हैं, वे 14 फरवरी को आ जाएं। रविवार को वर और वधू पक्ष को बुलाकर शुरुआती सामग्री भेंट की गई। पं. धीरेंद्र शास्त्री ने विवाह महोत्सव में शामिल होने वाले वर वधू पक्ष को बताया क्या होंगी व्यवस्थाएं, क्या हैं नियम… वर-वधु पक्ष के लिए यह रहेगी व्यवस्था वर एवं वधू पक्ष को जो महत्वपूर्ण पास दिए गए हैं, उनमें वधू पक्ष के वाहनों के लिए दो पास एवं वधू के लिए एक कार्ड दिया गया है। इसी तरह वर पक्ष के वाहनों के लिए दो पास एवं उपहार ले जाने के लिए एक उपहार वाहन पास दिया गया है। साथ ही वर के लिए कार्ड दिया गया है। वर तथा वधु पक्ष के 25-25 सदस्यों के लिए भोजन के कूपन भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे आसानी से भोजन प्राप्त कर सकें। महाराज ने वरवधु मंडप भोजन हेतु अलग से भोजन की व्यवस्था की है। पिछले साल 251 विवाह हुए थे साल 2025 में हुए कन्या विवाह में 108 आदिवासी बेटियों सहित 251 बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा गया था. राष्ट्रपति महामहिम द्रोपदी मुर्मू ने बागेश्वर धाम आकर न केवल बेटियों को आशीर्वाद दिया था बल्कि अपनी ओर से उपहार भी भेंट किये थे. इसके अलावा देशभर से साधु-संतों ने भी वर-वधू को शीर्वाद दिया था. शास्त्री बोले- बहू को अपनी बेटी की तरह रखें सामग्री वितरण के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वर पक्ष के अभिभावकों से विशेष अपील की। उन्होंने कहा, "घर आने वाली बहू को अपनी बेटी की तरह रखें। समाज में ऐसी कोई शिकायत नहीं मिलनी चाहिए जिससे धाम की मर्यादा पर आंच आए।" उन्होंने बताया कि 500 से अधिक आवेदनों में से सर्वे टीम ने उन बेटियों को चुना है जो अत्यंत गरीब हैं या जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। मेहमानों और व्यवस्थाओं की खास तैयारी आयोजन को सुचारू बनाने के लिए प्रशासन और धाम के सेवादारों ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। वाहनों के लिए पास: वर और वधू पक्ष को अलग-अलग वाहन पास जारी किए गए हैं ताकि यातायात में परेशानी न हो। भोजन व्यवस्था: दोनों पक्षों के 25-25 सदस्यों के लिए भोजन कूपन दिए गए हैं। साथ ही वर-वधू और मंडप में मौजूद लोगों के लिए अलग से विशेष भोजन की व्यवस्था की गई है। विशिष्ट अतिथि: इस भव्य महोत्सव में देशभर के बड़े संत, महात्मा और राजनैतिक जगत की हस्तियां शामिल होंगी। 14 फरवरी तक पहुंचेंगी बेटियां दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली बेटियों को 14 फरवरी तक धाम पहुंचने का निर्देश दिया गया है। महाराज ने इस आयोजन को सफल बनाने में जुटी सर्वे टीम और सेवादारों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि धाम की वर्तमान क्षमता के अनुसार श्रेष्ठ व्यवस्थाएं की जा रही हैं।  

Metro Project Update: भोपाल में 32 किमी की नई मेट्रो लाइन, 27 रैक होंगे शामिल

 भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में मेट्रो का काम चल रहा है। इसी बीच मेट्रो रैक की वडोदरा से आपूर्ति फिलहाल रोक दी गई है। यहां से तीन-तीन कोच के 27 रैक मिलने तय हुए हैं। आठ रैक की आपूर्ति हो चुकी है। अभी कमर्शियल रन में महज दो रैक का ही उपयोग किया जा रहा है। छह रैक अभी डिपो में ही हैं। ऐसे में जब तक प्रोजेक्ट में 32 किमी की लाइन नहीं बन जाती, तब तक नए रैक की आपूर्ति रोक दी गई है। गौरतलब है कि मेट्रो ट्रेन की रैक को बनाने का काम वडोदरा के पास स्थापित प्लांट में हो रहा है। देरी से बढ़ेगी कीमत मेट्रो रैक के लिए अनुबंध किया हुआ है। अब तब रैक भेजा जाएगा, जब लाइन पूरी होगी। उस समय की स्थिति के अनुसार कीमत होगी। 2023 में पहला रैक यहां आया था। 2024 तक आठ रैक आ गए। इस समय इनकी कीमत दस फीसदी तक बढ़ गई है। 2028 तक ये करीब 20 फीसदी महंगी होगी। यानी प्रोजेक्ट में जितनी देरी होगी, रैक उतना महंगा होगा। एमडी मेट्रो रेल चैतन्य कृष्णा के अनुसार प्रोजेक्ट की शुरुआती दो लाइनों पर फोकस किया जा रहा है। अब तेजी से इसे पूरा किया जा रहा है। देरी का असर यहां पर भी -भोपाल मेट्रो परियोजना की लागत 2017- 18 में 6,941 करोड़ रुपए तय थी -प्रति किमी 249 करोड़ रुपए की लागत आंकलित की थी वर्ष 2025 में बढ़कर ये 10,033 करोड़ रुपए हो गई -प्रति किमी खर्च 371 करोड़ रुपए पहुंच गया -ये बढ़ोतरी 43 प्रतिशत है। देरी से कीमत बढऩे और प्रोजेक्ट के वित्तीय संकट के तौर पर होगा शहर को मिलेगी बड़ी सौगात केंद्रीय बजट में भोपाल मेट्रो समेत नेशनल हाइवे और ब्रिज की उम्मीद बेहतर हुई। टियर दो- तीन शहरों के लिए 12.02 लाख करोड़ रुपए आवंटित हुए हैं, इसमें भोपाल की भागीदारी होगी। मेट्रो की मौजूदा 32 किमी की लाइन को पूरा करने 5000 करोड़ रुपए की जरूरत है। इसी तरह टियर 2 शहरों में सिटी इकोनॉमिक रीजन का प्रावधान किया है, जिसमें पांच साल में 5000 करोड़ रुपए मिलेंगे। भोपाल को लाभ मिला तो यहां लॉजिस्टिक व हाइवे कनेक्टिविटी के लिए काम शुरू हो सकता है।

डिजिटल पंचायतों से गांवों में विकास की नई राह, 2100 सेवाओं का मोबाइल पर लाभ शुरू

भोपाल  पंचायतों में ई-सेवा ऐप व पोर्टल लागू होगा। इसके तहत पंचायत स्तर की सेवाओं की कम से कम समय में डिलीवरी होगी। अभी लोगों को इन सुविधाओं के लिए जनपद से लेकर जिला पंचायत तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस ऐप पर 2100 तरह की सेवाएं उपलपध कराई जानी हैं, इनमें से करीब 600 सेवाओं को उपलब्ध कराया जाने लगा है। इनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सेवाएं भी शामिल हैं। इन सभी सेवाओं की नियमित डिलीवरी हो, पंचायतों के स्तर पर किए जाने वाले कामों में गति आए और पंचायत स्तर पर पर गड़बडिय़ां का स्तर जीरो हो जाए, इसके लिए सरकार ई-ऑफिस की तरह ई-पंचायत मॉडल लागू करने जा रही है। अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने की कवायद असल में केंद्र व राज्य सरकार का बड़ा फोकस शहरों पर रहा है। अब ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को भी मजबूत करने की कवायद की जा रही है। इसका रास्ता पंचायतों से ही होकर गुजरता है। ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में ही रहती है। इन सभी बातों को देखते हुए पंचायतों को सशक्त बनाने के प्रयास तेज किए हैं। इसके साथ ही ऐप के जरिए पंचायत से मिलने वाली सेवाओं को और अधिक पारदर्शी भी बनाया जा सकेगा। खाली जमीनों से हटाया जाएगा अतिक्रमण मध्यप्रदेश में ज्यादातर पंचायतों के पास खाली जमीनों का एक बड़ा लैंडबैंक है, जिसका उपयोग नहीं हो रहा है। कई पंचायतों में तो अतिक्रमण करने वालों बेशकीमती जमीनों पर कव्जा कर रखा है। अब सरकार उक्त खाली जमीन का उपयोग पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए करने जा रही है। इसके तहत पंचायतों की जमीनों के एक हिस्से का भविष्य में व्यावसायिक उपयोग हो सकता है। खाली जमीन पर सभी तरह की प्लानिंग से पहले लैंडबैंक तैयार किया जा रहा है, जो यह बताएगा कि किस पंचायत में कुल कितनी जमीन हैं, उसमें से कितनी का उपयोग हो रहा है, कितनी खाली है और कितने क्षेत्र में अतिक्रमण है और उसको हटाने की कार्रवाई किस स्तर पर है। एक बगिया मां के नाम… बनेगी आय का जरिया पंचायतों में बड़े स्तर पर एक बगिया मां के नाम विकसित की जा रही हैं। इनका मकसद पंचायतों में फलदार व छायादार पेड़ों वाला ह्रश्वलांटेशन विकसित करना है, ताकि पंचायतों के लिए आय का जरिया बन सके और पंचायतें आत्मनिर्भर बनने के साथ पर्यावरण को भी लाभ हो। इन पर भी फोकस आपदाओं से बचाने की पहल: अभी पंचायत स्तर पर प्राकृतिक आपदा से बचने और उससे होने वाले नुकसानों की वैज्ञानिक आधार पर गणना करने के कोई विकल्प नहीं है। पहली बार सरकार ने पंचायतों में मौसम केंद्र व वर्षामापी यंत्र लगाने की पहल की है। इसके लिए 23 हजार पंचायतों पर 350 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रावधान किया है। इससे स्थानीय स्तर पर मौसम में बदलाव की जानकारी समय पूर्व मिलेगी। इससे  किसानों व ग्रामीणों को बचाव करने में लाभ होंगे। वर्षामापी यंत्र: बारिश को रेकॉर्ड करने में मदद मिलेगी। अभी यह काम जिला स्तर पर होता है लेकिन कई मौके ऐसे आ चुके हैं जब एक या कुछ पंचायतों में ही अतिवृष्टि हो जाती है, पूरा जिला प्रभावित नहीं होता। इसके कारण संबंधित अफसर और एजेंसियां नुकसान नहीं मानती। इस तरह संबंधित पंचायतों के लोगों को नुकसान की भरपाई नहीं होती।

उज्जैन में शिव-विवाह उत्सव की शुरुआत, बाबा महाकाल नौ स्वरूपों में देंगे दर्शन, तैयारियां अंतिम चरण में

उज्जैन  महाशिवरात्रि में कुछ ही दिन का समय शेष बचा है। लेकिन शिव और पार्वती के विवाह के इस त्योहार को लेकर उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। मंदिर की दीवारों से लेकर शिखर पर रंग-रोगन किया जा रहा है। इसी के साथ 6 फरवरी से मंदिर में 9 दिनों तक चलने वाले उत्सव की शुरुआत होगी, जिसमें बाबा भक्तों को नौ अलग-अलग रूपों में दर्शन देंगे। बाबा महाकाल की नगरी में महाशिवरात्रि का त्योहार 9 दिन तक चलता है, जो 6 फरवरी से शुरू होगा और 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें रोजाना भगवान का रुद्राभिषेक, 24 घंटे निराकार रूप में दर्शन और जलधारी, रात के समय स्नान और वस्त्र धारण का कार्यक्रम रहेगा। साथ ही अलग-अलग नौ विग्रहों की स्थापना और पूजा की जाएगी। ये नौ दिन भगवान की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों जैसी होती है। भक्तों के लिए मंदिर भी खुले रहेंगे और भक्त बाबा महाकाल पर जलधारी अर्पित कर पाएंगे। महाकाल मंदिर के पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि पहले दिन बाबा का दुशाला ओढ़ाकर श्रंगार होता है और फिर दूसरे दिन बाबा को शेषनाग धारण कराए जाते हैं। तीसरे दिन घटाघटा स्थापित किया जाता है, जो शिवलिंग के समान ही होता है। चौथे दिन प्रभु के छवि दर्शन होते हैं और पांचवें दिन बाबा को मन-महेश, उमा महेश, शिव तांडव और होलकर के रूप में सजाया जाता है। इस वर्ष 15 फरवरी को होने वाली खास पूजा और अनुष्ठान पर पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि 15 फरवरी को जलधारी के साथ चारों पहर की पूजा और आरती होगी और रात के समय स्नान के साथ बाबा को दूल्हे के रूप में श्रंगार कर सजाया जाएगा और रात को विशेष श्रंगार पूजा होगी, जिसे सेहरा दर्शन भी कहा जाता है। इस दौरान नौ दिनों तक मंदिर परिसर में भजन और कीर्तन का आयोजन होगा और भक्तों के आगमन के लिए तैयारियां की जा रही हैं क्योंकि महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भीड़ बढ़ जाती है। मंदिर में हो रही तैयारी पर उन्होंने कहा कि गर्भगृह की सफाई, मंदिर के कुंड़ों की सफाई और रंग-रोगन का काम शुरू हो चुका है, जिसे 6 फरवरी तक खत्म करने की कोशिश रहेगी। अधिकारियों ने देखी व्यवस्था महापर्व 2026 के अवसर पर ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर जी के दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं की संभावित अत्यधिक संख्या को दृष्टिगत रखते हुए दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं सुगम बनाए जाने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह द्वारा आज श्री महाकालेश्वर मंदिर परिक्षेत्र एवं श्री महाकाल लोक के आंतरिक एवं बाह्य क्षेत्रों का विस्तृत भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया।निरीक्षण के दौरान रोशन कुमार सिंह ने दर्शन मार्ग, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा व्यवस्था, मूलभूत सुविधाओं तथा भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। साथ ही मंदिर परिसर एवं श्री महाकाल लोक में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति का भी जायजा लिया गया तथा संबंधित निर्माण एजेंसियों को कार्यों को समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए, जिससे महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस अवसर पर मंदिर प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक, अतेंद्र सिंह एडीएम उज्जैन अभिलाष मिश्रा आयुक्त नगर पालिका निगम एवं संबंधित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि, मंदिर अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

75 लाख की लूट केस में बड़ा खुलासा, होटल कर्मचारी समेत 4 आरोपी पुलिस गिरफ्त में

 नरसिंहपुर.  जिला मुख्यालय के मुशरान पार्क चौराहा के समीप स्थित होटल कुसुम वैली में हुई करीब 75 से 80 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट के 4 आरोपियों को पुलिस ने चंद घंटों में गिरफ्तार कर लिया। 2-3 जनवरी की दरमियानी रात्रि करीब 2.30 बजे जिला मुख्यालय में मुशरान पार्क चौराहा के पास स्थित होटल कुसुम वैली के कर्मचारियों ने थाना में सूचना दी कि 3–4 नकाबपोश बदमाशों ने होटल में जबरन प्रवेश कर वहां रखी नकद राशि लूट ली है। सूचना मिलते ही सुबह 4 बजे पुलिस अधीक्षक डा. ऋषिकेश मीणा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया के साथ स्वयं घटनास्थल पहुंचे और मौके का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। होटल में रखी रकम बना लालच की वजह जांच के दौरान सामने आया कि होटल कर्मचारी अनुज कुमार वाल्मीकि को होटल में रखी नकदी की पूर्व जानकारी थी। लालच में आकर उसने यह जानकारी रात्रिकालीन मैनेजर चंद्रेश रजक एवं राकेश कुमार शुक्ला को दी। फिर अनुज ने अपने साथी मोनू उर्फ डइया वंशकार निवासी रिप्टापार से संपर्क कर इस राशि को हड़पने की साजिश रची। इसके तहत मोनू अपने अन्य तीन साथियों के साथ होटल में पहुंचा और वहां मौजूद अनुज, राकेश शुक्ला व चंद्रेश रजक से दिखावटी मारपीट की और ड्राज में रखी हुई रकम निकालकर वहां से फरार हो गए।     पुलिस ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण भौतिक एवं तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए गए।     सीसीटीवी फुटेज लूट की साजिश उजागर करने में अहम कड़ी साबित हुई, जिसके आधार पर पुलिस ने तेजी से आरोपियों तक पहुंच बनाई। 4 गिरफ्तार, 3 फरार पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीणा ने देर शाम पत्रकारवार्ता आयोजित कर वारदात के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मामले में आरोपी चंद्रेश रजक निवासी यादव कॉलोनी नरसिंहपुर, राकेश कुमार शुक्ला निवासी लखीमपुर खीरी उ.प्र., हाल निवास नरसिंहपुर, अनुज कुमार वाल्मीकि निवासी लखीमपुर खीरी उ.प्र., हाल निवास नरसिंहपुर एवं मोनू उर्फ डइया बंशकार निवासी रिपटा पार, नरसिंहपुर को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में संलिप्त 3 अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।