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मध्यप्रदेश में सर्दी बढ़ी, 25 शहरों में पारा 10° से नीचे, खजुराहो में सबसे ठंडा; 15 जिलों में कोहरा, उत्तर की बर्फीली हवाओं ने बढ़ाई कंपकंपी

भोपाल  मध्यप्रदेश में ठंड का असर एक बार फिर तेज हो गया है। उत्तर भारत से आ रही सर्द और बर्फीली हवाओं के चलते प्रदेश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में कंपकंपी बढ़ गई है। ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां शुक्रवार को कई जिलों में दिनभर धूप के बावजूद ठंड से राहत नहीं मिली और कोल्ड डे जैसी स्थिति बनी रही।ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया। मौसम विभाग का कहना है कि शनिवार को भी हालात लगभग ऐसे ही रहेंगे, जबकि दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में दिन ठंडा रहने का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार सुबह ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में घना कोहरा छाया रहा। भोपाल, इंदौर, रायसेन, शाजापुर, विदिशा समेत कई जिलों में भी कोहरे का असर देखने को मिला है। इससे पहले शुक्रवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना में कोल्ड डे जैसी स्थिति बनी रही। ऐसा ही मौसम आज शनिवार को भी बना रहेगा। सुबह 15 से ज्यादा जिलों में घना कोहरा रहा। वहीं, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में कोल्ड डे यानी, दिन ठंडा रहने का अलर्ट है। उत्तर से बर्फीली हवा आने से एमपी के ऊपरी हिस्से में ठंड का असर बढ़ा है। इन जिलों में 10 डिग्री से नीचे तापमान मध्यप्रदेश में शुक्रवार-शनिवार की रात में शिवपुरी में 4 डिग्री, राजगढ़ में 4.4 डिग्री, दतिया में 4.6 डिग्री, नौगांव में 5 डिग्री, रीवा में 5.5 डिग्री, मंडला में 6 डिग्री, पचमढ़ी में 6.4 डिग्री और उमरिया में तापमान 6.9 डिग्री दर्ज किया गया। बड़े 5 शहरों में ग्वालियर में सबसे कम 5.9 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 7.2 डिग्री, इंदौर में 6.9 डिग्री, उज्जैन में 9 डिग्री और जबलपुर में तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस रहा। इस बार कड़ाके की ठंड का दौर इस बार मध्यप्रदेश में नवंबर-दिसंबर की सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी तो दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। नवंबर-दिसंबर की तरह ही जनवरी में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे भोपाल में ठंड का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। एक्सपर्ट की माने तो जनवरी में प्रदेश में माइनस वाली ठंड गिर चुकी है। अबकी बार भी तेज सर्दी, घना कोहरा छाने के साथ शीतलहर भी चल रही है। ठंड के लिए इसलिए खास जनवरी मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से जनवरी में मावठा भी गिरता है। पिछले साल कई जिलों में बारिश हुई थी। इस बार साल के पहले ही दिन बादल भी छाए रहे। सुबह घने कोहरे की चादर, 15 से ज्यादा जिलों में दृश्यता घटी शनिवार सुबह प्रदेश के बड़े हिस्से में कोहरे की मोटी परत छाई रही। ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में घना कोहरा दर्ज किया गया। भोपाल, इंदौर, रायसेन, शाजापुर और विदिशा समेत अन्य जिलों में भी कोहरे का असर देखने को मिला। दिन-रात दोनों में ठंड, तापमान में तेज गिरावट भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में जहां रातें बेहद सर्द हो गई हैं, वहीं ग्वालियर-चंबल अंचल में दिन का तापमान भी सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है। इसी वजह से अधिकतम तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले दो दिनों तक ठंड का यह दौर जारी रहने की संभावना है। खजुराहो सबसे ठंडा, पारा 3.4 डिग्री तक लुढ़का गुरुवार-शुक्रवार की रात छतरपुर जिले का खजुराहो प्रदेश में सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दतिया में 3.9 डिग्री, शिवपुरी में 4 डिग्री और राजगढ़ में 5 डिग्री तापमान रहा। पचमढ़ी, मंडला, रीवा, उमरिया, सीधी और टीकमगढ़ में भी पारा 7 डिग्री से नीचे बना रहा।बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे सर्द रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 8 डिग्री, इंदौर में 9.4, उज्जैन में 8.3 और जबलपुर में 8.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। कोहरे का असर रेल यातायात पर, एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनें लेट घने कोहरे के चलते रेल संचालन भी प्रभावित हुआ है। दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली एक दर्जन से अधिक ट्रेनें देरी से चल रही हैं। मालवा एक्सप्रेस सबसे ज्यादा प्रभावित रही, जबकि पंजाब मेल, जनशताब्दी और सचखंड एक्सप्रेस भी अपने निर्धारित समय से पीछे चल रही हैं। 

कॉपरेटिव पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप में जैविक खेती को बढ़ावा देने का कार्य किया जाए

किसानों को उपार्जन एवं खाद की उपलब्धता में दिक्कत न आए कॉपरेटिव पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप में जैविक खेती को बढ़ावा देने का कार्य किया जाए प्रत्येक विभाग का पब्लिक फेशियो उत्तम श्रेणी का हो : मंत्री सारंग हरदा में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक आयोजित भोपाल सहकारिता व खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सांरग ने हरदा में शुक्रवार को आयोजित जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक में कहा कि जिले में अनाज उपार्जन एवं खाद की उपलब्धता में किसानों को कोई अड़चन न आये। खनिज के अवैध उत्खनन व परिवहन को रोकने के लिये संयुक्त दल गठित कर अभियान चलाया जाए। सारंग ने कहा कि जिले में निर्मित हो रही सड़कों के निर्माण में अतिक्रमण आड़े न आये ऐसे अतिक्रमण को सख्ती से हटाया जाए। उन्होने जिले में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश देते हुए कहा कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, सहकारिता एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वाधान में जैविक खेती के विकास के लिये कार्य किया जाए। साथ ही सहकारिता एवं पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप के तहत भी जिले में जैविक खेती के विकास का कार्य हो। मंत्री ने कहा कि जिला विकास सलाहकार समिति के गठन के पीछे शासन की मंशा विकास एवं कल्याण की योजनाओं में सेचुरेशन लाना, प्रशासकीय व्यवस्था का सुचारू संचालन के साथ-साथ विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। समिति का उद्देश्य है कि सरकार की योजनाओं का सभी पात्र व्यक्तियों को लाभ मिले। साथ ही समिति के निर्णयों का अक्षरशः पालन हो। प्रत्येक विभाग का आमजन से जुड़े कार्य करने का प्रयास अच्छा होना चाहिए। बैठक में लोक निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान मंत्री द्वारा कहा गया कि जिले में स्वीकृत सड़कों के शेष निर्माण कार्यों को शीघ्रता से पूर्ण किया जाए। वनक्षेत्रों में निर्माणाधीन सड़कें भी समय सीमा में पूर्ण हो। उन्होने कहा कि जिला अस्पताल के नवीन भवन प्रारम्भ होने के पूर्व वहां आवश्यक उपकरणों एवं संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की पेयजल योजनाएं सुचारू रूप से संचालित हों। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत में देरी न हो। खाद्य विभाग अंतर्गत राशन प्राप्त करने वाले हितग्राहियों को राशन प्राप्त करने में असुविधा न हो। 80 वर्ष से उपर के हितग्राहियों को ई-केवायसी से मुक्त रखा जाए। इस दौरान जिले में जैविक खेती एवं जैविक हाट की समीक्षा करते हुए उन्होने कहा कि जैविक खेती को सहकारिता एवं कार्पोरेट के साथ जोड़कर जिले में जैविक खेती के विकास के क्षेत्र में नवाचार किया जाए। मंत्री ने कहा कि जिले के ज्यादा से ज्यादा किसानों को जैविक खेती से जोड़ने के लिये जनजागरण अभियान चलाया जाए। मंत्री सारंग ने यह भी कहा कि सरकार की योजनाओं को आमजन तक पहुँचाने में जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाए एवं उनके आमजन के बीच सम्पर्कों का लाभ लिया जाए। मंत्री द्वारा शिक्षा, परिवहन एवं वेयरहाउसिंग विभाग की भी समीक्षा की गई। जल संसाधन विभाग की समीक्षा के दौरान टेल क्षेत्र के ग्रामों में सिंचाई जल की उपलब्धता की भी जानकारी ली गई। सारंग ने कहा कि संबल योजना में पात्र हितग्राहियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के मामले लंबित न रहें। इस दौरान पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल ने हरदा जिले को शतप्रतिशत सिंचित बनाने के लिये किये गये कार्यों की प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होने हरदा लिफ्ट इरिगेशन परियोजना का नाम शहीद दीप सिंह चौहान रखने का बैठक में प्रस्ताव भी रखा, जिसको अनुमोदित किया गया। उद्योग विभाग की समीक्षा के दौरान प्रभारी मंत्री द्वारा ऐसे उद्यमियों को ही जमीन आवंटित कराने के निर्देश दिये गये जो वास्तव में उद्योग चलायेंगे। उन्होने कहा कि स्थानीय उत्पादकता पर आधारित उद्यमों की स्थापना को प्राथमिकता दी जाए। आदिम जाति कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान सभी पात्र हितग्राहियों को छात्रवृत्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये। साथ ही कहा गया कि छात्रावासों में रह रहे विद्यार्थियों को कोई असुविधा न हो, यह ध्यान रखा जाए। वन विभाग की समीक्षा के दौरान वन क्षेत्रों में हुए पौधरोपण का भौतिक सत्यापन करने के लिये निर्देशित किया गया। पशुपालन विभाग के अधिकारी को निर्देश दिये गये कि दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान में जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। नये मिल्क रूट विकसित किये जायें एवं अधिक से अधिक दुग्ध समितियों का गठन हो। किसानों को ज्यादा से ज्यादा गौवंश के पालन के लिये प्रोत्साहित किया जाए। विद्युत विभाग के अधिकारी को विद्युत की सुचारू आपूर्ति के लिये निर्देशित किया गया। यातायात व्यवस्था सुव्यवस्थित करने, रोड़ एक्सिडेन्ट रोकने तथा दुपहिया वाहन चालकों हेल्मेट लगाने के लिये जागरूक करने के भी प्रभारी मंत्री द्वारा निर्देश दिये गये। कलेक्टर सिद्धार्थ जैन द्वारा जिले में जैविक खेती के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों की बिन्दुवार जानकारी दी गई। इसके अलावा विभाग प्रमुखों द्वारा दो वर्ष में जिले में हुए विकास एवं उपलब्धियों से मंत्री को अवगत कराया गया। कमल खेल महोत्सव में शामिल हुए प्रभारी मंत्री जिले के नेहरू स्टेडियम में आयोजित हो रहे कमल खेल महोत्सव में भी प्रभारी मंत्री ने भाग लिया। उन्होने कहा कि खेल जीवन का महत्वपूर्ण आयाम है। इससे जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। युवा खेल महोत्सव का आयोजन खेल प्रतिभाओं को तराशने का सराहनीय कार्य है। खेलों से युवाओं का शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है एवं उन्हें अनुशासित एवं संयमित जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। इस दौरान उन्होने खेल प्रतिभाओं को पुरूस्कृत भी किया। स्वदेशी मेले में पहुँचे प्रभारी मंत्री सारंग हरदा जिले के प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग हरदा के मिडिल स्कूल ग्राउण्ड में आयोजित स्वदेशी मेले में पहुँचे। मंत्री सारंग ने कहा कि स्वदेशी को बढ़ावा देने के उद्देश्य स्वेदशी मेले का आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आहवान किया है कि हमें लोकल व स्वेदशी पर जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम स्वदेशी उत्पादों और डिजिटल लेनदेन के प्रचार-प्रसार पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने पूर्व में भी व्यापारियों और नागरिकों से आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए स्वदेशी अपनाने की अपील की है।  

रेलवे का ग्रीन कदम: फल-सब्जियों के छिलकों से बनी थाली में मिलेगा खाना, मार्च से लागू बदलाव

इंदौर रेल यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल सुविधा देने की दिशा में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आइआरसीटीसी) ने एक अहम पहल करने का निर्णय लिया है। मार्च से वंदे भारत एक्सप्रेस सहित कुछ प्रीमियम ट्रेनों में यात्रियों को भोजन पारंपरिक प्लास्टिक की थालियों की बजाए बायोडिग्रेडेबल थालियों में परोसा जाएगा। थाली फल-सब्जियों के छिलकों, कागज और अन्य प्राकृतिक तत्वों से तैयार की जाती है। पहले चरण की सफलता के बाद इसे अन्य प्रीमियम और लंबी दूरी की ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा। आइआरसीटीसी पश्चिम क्षेत्र के जनसंपर्क अधिकारी ए.के. सिंह के अनुसार यह व्यवस्था उन ट्रेनों में भी लागू होगी, जो इंदौर से चलती हैं। रेलवे और आइआरसीटीसी लंबे समय से रेल परिसरों को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह कदम उसी अभियान को और मजबूती देगा।   रेलवे में हर दिन हजारों यात्रियों को भोजन परोसा जाता है। इससे हर महीने बड़ी मात्रा में डिस्पोजेबल प्लास्टिक थालियों का कचरा निकलता है। इसके निपटान में समय, पैसा और संसाधन खर्च होते हैं। बायोडिग्रेडेबल थालियों के उपयोग से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इससे न केवल कचरे का बोझ घटेगा, बल्कि कार्बन डाइआक्साइड के उत्सर्जन में भी कमी आएगी। तीन से छह महीने में मिट्टी में मिल जाती है थाली बायोडिग्रेडेबल थाली की खास बात यह है कि उपयोग के बाद यह तीन से छह महीने में गल-सड़कर मिट्टी में मिल जाती है। इसके विपरीत प्लास्टिक की थाली को खत्म होने में कई वर्षों लग जाते हैं। प्लास्टिक टूटकर माइक्रोप्लास्टिक बनाता है, जो मिट्टी, पानी और भोजन श्रृंखला में प्रवेश कर मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। बायोडिग्रेडेबल थाली से न तो माइक्रोप्लास्टिक निकलता है और न ही जहरीले रसायन। प्लास्टिक की थालियों में गर्म भोजन परोसने से हानिकारक रसायन निकलने का खतरा रहता है। बायोडिग्रेडेबल थालियों के उपयोग से यह जोखिम पूरी तरह खत्म हो जाएगा। यात्रियों को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर भोजन मिलेगा। पहले से प्लास्टिक कप-थैलियों पर रोक पहले रेलवे ने प्लास्टिक कप और थैलियों पर रोक लगाकर कागज के विकल्प अपनाए थे। अब बायोडिग्रेडेबल थालियों के उपयोग से यह प्रयास और मजबूत होगा। आईआरसीटीसी ने जन आहार और फूड प्लाजा संचालकों को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे केवल पर्यावरण-अनुकूल सामग्री का ही इस्तेमाल करें। टेंडर प्रक्रिया जारीआइआरसीटीसी अधिकारियों के मुताबिक इस योजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही टेंडर पूरे होने के बाद मार्च से चुनिंदा ट्रेनों में इसकी शुरुआत होगी। फिर इसे सभी लंबी दूरी की ट्रेनों में लागू किया जाएगा। एक ओर प्लास्टिक कचरे की समस्या खत्म होगी, तो दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ निःशुल्क दवाइयां और जांच: मंत्री परमार

आयुष्मान आरोग्य मंदिर में हो आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ निःशुल्क दवाइयां एवं जांच की व्यवस्था : मंत्री परमार मंत्री परमार ने मंगलाज में किया आयुष्मान आरोग्य मंदिर का लोकार्पण एवं गौलाना व कैथलाय के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का भूमिपूजन भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार के मुख्य आतिथ्य एवं सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी की अध्यक्षता में आज शाजापुर जिले के अंतर्गत ग्राम पंचायत मंगलाज में लगभग 30 लाख रुपये की लागत से निर्मित आयुष्मान आरोग्य मंदिर का लोकार्पण फीता काटकर किया गया। वही गौलाना एवं कैथलाय में 30-30 लाख रूपये लागत से निर्मित होने वाले आयुष्मान आरोग्य मंदिर का भूमिपूजन भी किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या पूजन एवं भगवान धनवंतरी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। मंत्री परमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर शासन की एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सुलभ, सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के प्रारंभ होने से ग्रामीणजनों को प्राथमिक उपचार, आवश्यक जांच एवं परामर्श की सुविधा उनके घर के पास ही प्राप्त होगी, जिससे उन्हें दूर शहरों में इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही आयुर्वेदिक पद्धति से ईलाज भी करा सकेंगे। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे प्राचीन पद्धति आयुर्वेद पद्धति हैं। मंत्री परमार ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ निःशुल्क दवाइयां एवं जांच की व्यवस्था की गई है। मंत्री परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से हर वर्ग के कल्याण एवं निरंतर विकास के कार्य किये जा रहे हैं। जिससे गांवों की तस्‍वीर एवं लोगों की तकदीर बदल रही हैं। उन्होंने बताया कि 08 आयुर्वेदिक महाविद्यालय खोले जायेंगे, जिसमें एक आयुर्वेदिक महाविद्यालय शाजापुर जिले के शुजालपुर में बनाया जायेगा। इसमें 50 बिस्तरीय सर्वसुविधायुक्त वेलनेस सेंटर एवं 50 बिस्तरीय अस्पताल भी बनाया जायेगा। मंत्री परमार ने बताया कि पूरे मध्यप्रदेश में लगभग 358 सांदीपनि विद्यालय बनाये जा रहे हैं। इसमें शाजापुर जिले में 19 सांदीपनि विद्यालय स्वीकृत हैं, जिनमें से 06 सांदीपनि विद्यालयों का निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका हैं। साथ ही प्रदेश का सर्वप्रथम सांदीपनि विद्यालय शाजापुर जिले के गौलाना तहसील में स्थापित हुआ है। इन सभी विद्यालयों में भी शीघ्र ही कक्षाएं प्रारंभ की जायेगी। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाएं, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, कला और संगीत कक्ष जैसी विश्व-स्तरीय सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति से शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शाजापुर जिले के शतप्रतिशत गांवों में पेयजल एवं खेतों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी दिया जायेगा। सांसद सोलंकी ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि देवास-शाजापुर संसदीय क्षेत्र में लगभग 50 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वीकृत किये गये हैं, जिनका निर्माण किया जा रहा हैं। इन आयुष्मान आरोग्य मंदिर से ग्रामीणों को मुफ्त ईलाज की सुविधा एवं समय पर उपचार मिलेगा। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों से आरोग्य मंदिरों में ईलाज कराने के लिए भी कहा। इस दौरान उन्होंने उपस्थित जनों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर लोकार्पण के लिए शुभकामनाएं भी दी। जिला पंचायत अध्यक्ष हेमराज सिंह सिसोदिया ने संबोधित करते हुए कहा कि भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अनेकों जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा इन योजनाओं के माध्यम से लोगों के जीवन स्तर में परिवर्तन हो रहा है। सरकार की मंशा है कि प्रत्येक पात्र हितग्राही को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले। इसके लिए उन्होंने सभी पात्र हितग्राहियों से जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए कहा।  

जबलपुर हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, प्रोबेशन पीरियड के कर्मचारियों को मिलेगा पूरा वेतन

  जबलपुर जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट के द्वारा प्रोबेशन पीरियड में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन में कटौती को अवैध बताते हुए आदेश जारी किया है कि जिन कर्मचारियों का वेतन काटा गया है। उस राशि को एरियर सहित वापस किया जाए। GAD के सर्कुलर को रद्द किया हाईकोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के द्वारा 12 दिसंबर 2019 को जारी सर्कुलर को रद्द कर दिया है। GAD के द्वारा पहले नई भर्तियों में 70%, दूसरे वर्ष 80 प्रतिशत और तीसरे साल 90 प्रतिशत वेतन देने का प्रावधान किया गया था। दरअसल, गुरुवार को जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोट की डिवीजन बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार के द्वारा जब कर्मचारियों से 100 प्रतिशत काम लिया जा रहा है, तो प्रोबेशन के नाम पर सैलरी में कटौती ठीक नहीं है। कोर्ट के द्वारा स्पष्ट किया गया कि प्रोबेशन पीरियड में समान रूप से काम के लिए समान वेतन का सिद्दांत है। जो कि पूरी तरह लागू होगा और काम पूरा करने पर पूरा वेतन देना अनिवार्य है। पैसा लौटाने के आदेश जारी कोर्ट की ओर से स्पष्ट किया गया कि प्रोबेशन पीरियड में वेतन की गई रिकवरी पूरी तरह अवैध है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों को इस अवधि में पूरा वेतन नहीं दिया गया। कर्मचारियों को शत-प्रतिशत वेतन का लाभ दिया जाएगा और कटी हुई राशि को एरियर के रूप में लौटाया जाएगा। 

उपभोक्ता संरक्षण क्षेत्र में काम करने वालों को मिलेगा सम्मान, 31 जनवरी तक कर सकते हैं आवेदन

उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संगठन/व्यक्तियों को किया जायेगा पुरस्कृत 31 जनवरी तक कर सकते हैं आवेदन भोपाल  विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 15 मार्च 2026 के अवसर पर उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों /व्यक्तियों को प्रोत्साहित करने के लिये राज्य एवं संभाग स्तरीय पुरस्कार दिये जायेंगे। आयुक्त, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण कर्मवीर शर्मा ने जानकारी दी है कि पुरस्कारों के लिये संगठनों/व्यक्तियों का चयन एक जनवरी से 31 दिसंबर 2025 तक की अवधि में की गई गतिविधियों के आधार पर किया जायेगा। राज्य स्तरीय तीन पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिये जायेंगे। प्रथम पुरस्कार 1,11,000 रूपये, द्वितीय पुरस्कार 51,000 रूपये और तृतीय पुरस्कार 25,000 रूपये का दिया जायेगा। संभागों में भी तीन पुरस्कार दिये जायेंगे। इसमें प्रथम पुरस्कार 21,000 रूपये, द्वितीय पुरस्कार 11,000 रूपये और तृतीय पुरस्कार 5000 रूपये का होगा। राज्य स्तरीय एवं संभाग स्तरीय आवेदन पृथक-पृथक स्वीकार किये जावेंगे। राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिये आवेदन के मुख्य पृष्ठ पर 'राज्य स्तरीय पुरस्कार वर्ष 2025-26 हेतु' एवं 'संभाग स्तरीय पुरस्कार वर्ष 2025-26 हेतु सुस्पष्ट रूप से लिखा जाये। आवेदन का प्रारूप 'क' खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की वेबसाईट www.food.mp.gov.in पर उपलब्ध है। आवेदन 31 जनवरी 2028 तक संबंधित कार्यालय जिला कलेक्टर (खाद्य) में स्वीकार किये जायेंगे। इस संबंध में अतिरिक्त जानकारी के लिये संबंधित कार्यालय जिला कलेक्टर (खाट्य) से संपर्क किया जा सकता है। विगत वर्ष राज्य स्तरीय प्रथम, द्वितीय, तृतीय पुरस्कार प्राप्त संस्थाओं के आवेदन पर चयन समिति द्वारा विचार नहीं किया जायेगा।  

पूर्व मंत्री बिना पात्रता के बंगलों में डटे, सरकार ने 13 जनवरी तक खाली करने का दिया नोटिस

भोपाल  मध्यप्रदेश में कई पूर्व मंत्री और अधिकारी सरकारी आवास खाली करने को तैयार नहीं हैं। इसे देखते हुए संपदा संचालनालय ने अब सख्ती शुरू कर दी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि नियम सबके लिए बराबर हैं, चाहे वे अपनी ही पार्टी के बड़े नेता क्यों न हों। बिना पात्रता के सरकारी बंगलों का आनंद ले रहे पूर्व मंत्रियों, पूर्व सांसदों और आईएएस अधिकारियों को अब 'बेदखली' का डर सताने लगा है। अब सरकार ने पात्रता खत्म होने के बावजूद सरकारी बंगलों में जमे पूर्व मंत्रियों और आईएएस अफसरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 13 जनवरी तक बंगला खाली करने का आखिरी अल्टीमेटम दिया गया है, अन्यथा बलपूर्वक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही 4 आईएएस और कई पूर्व मंत्रियों को भी नोटिस जारी कर भारी जुर्माने की चेतावनी दी गई है। पद नहीं लेकिन बंगला बरकरार पूर्व राजस्व मंत्री रामपाल सिंह, पूर्व गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा, पूर्व सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया 2023 का विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। इसके बावजूद वे बंगले में दो साल से डटे हुए हैं। वहीं, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया भी वर्तमान में विधायक न होने के बावजूद मंत्री रहते मिले बंगले को खाली नहीं कर रहीं हैं। ऐसी ही स्थिति भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की है। सांसद न होने के बाद भी वे सरकारी बंगले में डटी हुई हैं। संपदा संचालनालय से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रभात झा के परिवार को पहले ही 6 जनवरी को नोटिस दिया गया था, जबकि रामपाल को इससे पहले नोटिस दिया जा चुका है। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि पात्रता समाप्त होने के बाद किसी भी स्थिति में सरकारी आवास पर कब्जा नहीं रहने दिया जाएगा। मंत्रियों वाले बंगलों में रह रहे विधायक     डॉ. प्रभुराम चौधरी (विधायक सांची)     भूपेन्द्र सिंह(विधायक खुरई)     गोपाल भार्गव (विधायक रहली)     मीना सिंह (विधायक मानपुर) भारी-भरकम किराया वसूली होगी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि तय समय सीमा के बाद भी बंगला खाली नहीं किया गया तो भारी भरकम किराया वसूला जाएगा। नियमों के मुताबिक, पहले तीन महीने तक सामान्य किराया, इसके बाद अगले तीन महीनों के लिए 10 गुना किराया और इसके बाद भी आवास खाली नहीं होने पर 30 गुना तक किराया वसूलने का प्रावधान है। विधि विभाग ने इस तरह की वसूली को मंजूरी दे दी है।   सरकारी बंगलों से कब्जा हटाने के लिए एक्शन  राजधानी भोपाल के पॉश इलाकों में स्थित सरकारी बंगलों पर अवैध रूप से काबिज रसूखदारों के खिलाफ मोहन सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। 2023 के विधानसभा चुनाव में हारने वाले पूर्व मंत्रियों और कार्यकाल पूरा कर चुके पूर्व सांसदों ने अभी तक अपने सरकारी आवास नहीं छोड़े हैं। अब सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय पर बंगले खाली नहीं हुए, तो पुलिस बल का प्रयोग कर सामान बाहर कर दिया जाएगा। प्रभात झा के परिवार को 13 जनवरी तक का अल्टीमेटम बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 74 बंगले स्थित बी-टाइप आवास खाली करने के लिए 13 जनवरी तक का समय दिया गया है। नोटिस में साफ कहा गया है कि इस तारीख के बाद प्रशासन 'बल प्रयोग' करेगा। हालांकि, उनके बेटे तुशमुल झा का कहना है कि वे खुद ही बंगला खाली करने की प्रक्रिया में हैं और यह एक सहज प्रक्रिया है। पूर्व मंत्री रामपाल सिंह को नोटिस इधर, पूर्व मंत्री रामपाल सिंह 2023 में चुनाव हार गए थे, लेकिन 2 साल बाद भी उन्होंने लिंक रोड-1 स्थित अपना सरकारी बंगला (C-15) खाली नहीं किया है। इस मामले में उनका कहना है कि उन्होंने सरकार से थोड़ा समय और मांगा है। पद नहीं फिर भी सरकारी आवास पर डेरा मध्यप्रदेश में नेताओं की कुर्सी तो चली गई, लेकिन नेता सरकारी बंगलों का मोह नहीं त्याग पा रहे हैं। पूर्व राजस्व मंत्री रामपाल सिंह, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और पूर्व सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया जैसे दिग्गज नेता 2023 का विधानसभा चुनाव हार चुके हैं, लेकिन करीब दो साल बीत जाने के बाद भी इन्होंने सरकारी बंगलों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। यही हाल पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया का है, जो वर्तमान में विधायक भी नहीं हैं, फिर भी मंत्री रहते आवंटित हुए आवास में रह रही हैं। भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की स्थिति भी अलग नहीं है; संसद की सदस्यता खत्म होने के बाद भी उन्होंने सरकारी बंगला खाली नहीं किया है। सरकार सख्त, कब्जेदारों को नोटिस संपदा संचालनालय के मुताबिक, कार्रवाई की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 6 जनवरी को ही नोटिस थमाया जा चुका है, वहीं रामपाल सिंह को भी पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है। मोहन सरकार ने अब कड़ा रुख अख्तियार करते हुए साफ कर दिया है कि पात्रता खत्म होने के बाद सरकारी आवास पर किसी भी तरह का 'अवैध कब्जा' बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियम स्पष्ट हैं—पद गया, तो बंगला भी छोड़ना होगा। 30 गुना तक किराया वसूलने को मंजूरी विधि विभाग ने सख्त नियम लागू करते हुए भारी-भरकम किराए की वसूली को मंजूरी दे दी है। नियमों के मुताबिक, पात्रता खत्म होने के शुरुआती तीन महीनों तक तो सामान्य किराया लगेगा, लेकिन इसके बाद भी बंगला खाली नहीं हुआ तो अगले तीन महीनों के लिए 10 गुना किराया वसूला जाएगा। जब छह महीने बाद भी कब्जा बरकरार रहा, ऐसी स्थिति में रसूखदारों को 30 गुना ज्यादा हर्जाना भरना होगा। सरकार के मकसद साफ है—या तो समय से बंगला खाली कर दें, वरना लाखों के जुर्माने के लिए तैयार रहें। IAS अफसरों पर भी गिरी गाज प्रशासन ने सुधीर कोचर, अदिति गर्ग, रत्नाकर झा और निधि सिंह समेत 4 आईएएस और 3 अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी बेदखली का नोटिस थमाया है। विधायक रह रहे मंत्रियों वाले बंगलों में सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी, भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव और मीना सिंह जैसे विधायक पात्रता से ऊपर की श्रेणी (B और C टाइप) के बंगलों में रह रहे हैं। 7 अफसरों को भी बंगला खाली करने … Read more

मध्य प्रदेश में कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक, एस्मा एक्ट लागू, 2 महीने तक अवकाश नहीं ले सकेंगे सरकारी कर्मचारी

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी शिक्षक अगले दो महीने तक छुट्टियां नहीं ले सकेंगे. मोहन यादव सरकार ने शासकीय शिक्षकों की छुट्टी पर अब रोक लगा दी है. सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर सरकारी स्कूलों में कार्यरत साढ़े तीन लाख से अधिक शिक्षकों पर अतिआवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) लागू कर दिया है. ऐसे में माध्यमिक शिक्षा मंडल के निर्देशों के तहत 7 फरवरी से 13 मार्च 2026 तक चलने वाली परीक्षाओं के दौरान शिक्षकों की छुट्टियों पर पूर्ण रोक रहेगी. इस अवधि में शिक्षक धरना-प्रदर्शन या किसी भी तरह के आंदोलन में भी शामिल नहीं हो सकेंगे. बोर्ड परीक्षा के दौरान इसलिए लगाई गई एस्मा माध्यमिक शिक्षा मंडल के रजिस्ट्रार मुकेश मालवीय ने बताया, '' हर बार की तरह इस बार भी बोर्ड परीक्षाओं के दौरान एस्मा के निर्देश जारी किए गए हैं. इस दौरान शिक्षकों की छुट्टियों पर रोक रहेगी. वहीं बोर्ड परीक्षा संपन्न होने तक शिक्षक धरना प्रदर्शन भी नहीं कर सकेंगे. हालांकि, स्वास्थ्य और आपातकालीन परिस्थितियों में शिक्षकों की छुट्टियों पर विचार किया जा सकेगा.'' उन्होंने आगे कहा, '' बोर्ड परीक्षा के दौरान सभी परीक्षा केंद्रों पर पर्यवेक्षक, केंद्राध्यक्ष, उप केंद्राध्यक्ष समेत स्टाफ की ड्यूटी रहेगी. ऐसे में अनावश्यक छुट्टियों और धरना प्रदर्शन के कारण परीक्षाएं प्रभावित न हों. इसके लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बोर्ड परीक्षाओं के दौरान एसेंशियल सर्विस मेंटेनेंस एक्ट यानी एस्मा लागू किया है.'' 25 फरवरी से शुरू होंगी एमपी बोर्ड की 10-12वीं परीक्षाएं मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 25 फरवरी 2026 से शुरू होंगी. इसके लिए प्रदेशभर में कुल 3,856 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. इस वर्ष दोनों ही परीक्षाओं में करीब 16 लाख परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे. माध्यमिक शिक्षा मंडल (एमपी बोर्ड) ने परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और अनुशासित बनाने के लिए केंद्रों की सूची पहले ही जारी कर दी है. बोर्ड ने परीक्षा संचालन में किसी भी तरह की लापरवाही रोकने के लिए नई तकनीक का सहारा भी लिया है. इसके तहत सभी परीक्षा केंद्रों की निगरानी मोबाइल एप के माध्यम से की जाएगी, जिससे रियल टाइम रिपोर्टिंग और तत्काल कार्रवाई संभव हो सकेगी. संवेदनशील केंद्रों पर कड़ी निगरानी, संख्या में आई कमी एमपी बोर्ड परीक्षा में इस बार 488 परीक्षा केंद्रों को संवेदनशील और अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया है, जहां विशेष निगरानी की जाएगी. पिछले वर्ष 562 केंद्र संवेदनशील श्रेणी में थे, जो इस बार घटकर 488 रह गए हैं. परीक्षा केंद्रों की संख्या भी पिछले साल के 3,887 से घटकर 3,856 हो गई है. बोर्ड का कहना है कि बेहतर प्रबंधन और सख्त निगरानी व्यवस्था के कारण संवेदनशील केंद्रों की संख्या में कमी आई है. इन केंद्रों पर अतिरिक्त निगरानी दल और प्रशासनिक सतर्कता सुनिश्चित की जाएगी.

36 हजार करोड़ की लागत से एमपी में बनेंगे 6 एक्सप्रेस-वे और प्रगतिपथ, 3368 किलोमीटर लंबी परियोजना

भोपाल   मध्यप्रदेश में आने वाले समय में छह प्रमुख एक्सप्रेस वे और प्रगतिपथ का निर्माण किया जाएगा। 36 हजार 483 करोड़ रुपए से इनका निर्माण किया जाएगा। इनके निर्माण से आने वाले समय में शहरों के बीच की दूरियां घटेंगी और आवागमन का समय कम हो जाएगा। बढ़ते यातायात से भी निजात मिलेगी। इन सभी परियोजनाओं का निर्माण जून 2028 तक किया जाएगा। प्रदेश में 3368 किलोमीटर लंबी इन विकास पथ और एक्सप्रेस वे का निर्माण किया जाएगा।     विंध्य में 676 किलोमीटर लंबा विंध्य एक्सप्रेस-वे बनाया जाएगा। इसके निर्माण पर 3809 करोड़ रुपए की लागत आएगी। यह एक्सप्रेस वे जून 2028 तक पूरा होगा।     नर्मदा प्रगतिपथ 867 किलोमीटर लंबाई में बनेगा। इसके निर्माण पर 5299 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। नर्मदा प्रगतिपथ को जून 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य दिया गया है।     मालवा-निमाड़ विकासपथ साढ़े चार सौ किलोमीटर लंबाई का होगा और इसके निर्माण पर 7972 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसे दिसंबर 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा।     अटल प्रगतिपथ 12 हजार 227 करोड़ रुपए खर्च कर 299 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में तैयार किया जाएगा। इसका काम शुरु हो गया है और इसे शीघ्रता से पूरा किया जाएगा।     बुंदेलखंड विकासपथ में 330 किलोमीटर लंबे मार्ग का निर्माण 3357 करोड़ से किया जाएगा। इसे जून 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।     मध्य भारत विकास पथ के निर्माण पर 3819 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें 746 किलोमीटर लंबी सड़क तैयार की जाएगी। इसका निर्माण जून 2028 तक पूरा होगा। कम होगा यातायात का दबाव इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश में तेज, सुरक्षित और आधुनिक कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी साथ ही औद्योगिक, कृषि और सामाजिक गतिविधियों को भी गति मिल सकेगी। लंबी-चौड़ी सड़कों के निर्माण से यातायात का दबाव कम होगा। कई गांव और शहरों को जोड़कर उनके बीच लगने वाली दूरियां कम की जाएंगी। सड़कों की कनेक्टिविटी से प्रदेश में औद्योगिक विकास तेजी से होगा। निवेशक रुचि लेंगे और नई औद्योगिक परियोजनाओं का भी इन एक्सप्रेस वे के आसपास शुरु किया जा सकेगा जिससे पर्याप्त मात्रा में रोजगार भी मिलेगा और निवेश भी बढ़ेगा।

IRCTC E-Catering: अब ट्रेन में ही मिलेगा नामी ब्रांड का खाना, वेस्ट जोन का है बड़ा योगदान

भोपाल अब ट्रेन यात्रा सिर्फ मंजिल तक पहुंचने का सफर नहीं रही, बल्कि स्वाद और सुविधा का नया अनुभव बन चुकी है। पहले लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों, खासकर युवाओं को सफर के दौरान अच्छे और मनपसंद खाने की तलाश रहती थी, लेकिन उनके पास ट्रेन का तयशुदा खाना ही एकमात्र विकल्प होता था, लेकिन भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम लिमिटेड (आईआरसीटीसी) की ई-कैटरिंग सेवा ने आनबोर्ड खानपान के अनुभव को पूरी तरह बदल दिया है। अब यात्रियों को स्टेशन के स्टाल्स पर भीड़ लगाने या सीमित विकल्पों से समझौता करने की जरूरत नहीं पड़ती। वे अपनी सीट पर बैठे-बैठे विश्वसनीय ब्रांडों और अधिकृत रेस्तरां से अपनी पसंद का भोजन आर्डर कर सकते हैं। अब यह मजबूरी खत्म हो चुकी है। भोपाल मंडल में यह सेवा तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जहां शहर के 12 वेंडरों को भी ई-कैटरिंग सेवा से जोड़ा गया है। पहले आर्डर एसएमएस और कॉल सेंटर से लिए जाते थे आइआरसीटीसी ई-कैटरिंग सेवा की शुरुआत 25 सितंबर 2014 को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी। पहले आर्डर एसएमएस और काल सेंटर से लिए जाते थे, लेकिन अब यह एक पूरी तरह डिजिटल प्लेटफार्म बन चुकी है। यात्री वेबसाइट, फूड आन ट्रैक ऐप, टोल-फ्री नंबर 1323 और व्हाट्सएप के जरिए आर्डर कर सकते हैं। प्री-पेड और कैश आन डिलीवरी दोनों विकल्प हैं। ओटीपी सिस्टम से भोजन सुरक्षित रूप से सीट तक पहुंचाया जाता है। देशभर के 300 से अधिक स्टेशनों पर उपलब्ध है ई-कैटरिंग सेवाएं वर्तमान में आइआरसीटीसी की ई-कैटरिंग सेवाएं देशभर के 300 से अधिक स्टेशनों पर उपलब्ध हैं। भोपाल से गुजरने वाले प्रमुख रूट्स पर यात्रियों को भारतीय, दक्षिण भारतीय, चीनी, कान्टिनेंटल और बिरयानी जैसे लोकप्रिय व्यंजनों के कई विकल्प मिल रहे हैं। आईआरसीटीसी ने देश के 11 नामी फूड ब्रांडों और अग्रणी एग्रीगेटर्स के साथ साझेदारी की है। इसके अलावा 15 या उससे अधिक यात्रियों के लिए बल्क आर्डर सुविधा भी है, जिसमें कस्टमाइज्ड मेनू और किफायती दरों पर सीट तक डिलीवरी की जाती है। रोज 1.20 लाख भोजन हो रहे बुक देशभर में रोज करीब 1.20 लाख भोजन आईआरसीटीसी ई-कैटरिंग से बुक हो रहे हैं। इसमें वेस्ट जोन का बड़ा योगदान है, जहां से लगभग 35,000 मील रोजाना आर्डर होते हैं। भोपाल जैसे शहरों में यात्रियों को अब सीट से उठे बिना साफ और अच्छा खाना मिल जाता है, जिससे यात्रा ज्यादा आरामदायक बन गई है। आर्डर न मिलने पर मिलता है रिफंड आईआरसीटीसी की ई-कैटरिंग सेवा में यात्रियों की शिकायतों का समाधान बहुत आसान है। अगर खाना गलत आ जाए या डिलीवरी में देरी हो, तो यात्री 1323 हेल्पलाइन, मोबाइल ऐप या वॉट्सएप नंबर 91-8750001323 पर तुरंत शिकायत दर्ज कर सकते हैं। आईआरसीटीसी टीम जांच कर जल्दी समाधान करती है और जरूरत पड़ने पर रिफंड या सही आर्डर उपलब्ध कराती है। स्टेशन पर उतरकर खाना ढूंढना पड़ता था     मैं ज्यादातर सफर ट्रेन से करती हूं। मैंने देखा है कि पहले ट्रेन में साफ और पसंद का खाना मिलना मुश्किल होता था। स्टेशन पर उतरकर भीड़ में खाना ढूंढना पड़ता था। अब आईआरसीटीसी ई-कैटरिंग से सीट पर ही गर्म, ताजा और भरोसेमंद भोजन मिल जाता है, जिससे यात्रा काफी आसान और आरामदायक हो गई है। – निशा कश्यप, छात्रा     खाना सीधे सीट तक दिया जाता है     आईआरसीटीसी ई-कैटरिंग में यात्रियों की सेहत और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। सभी वेंडर्स के पास एफएसएसएआई लाइसेंस होता है और साफ-सफाई के नियमों का पालन किया जाता है। आईआरसीटीसी नियमित जांच करता है, ताकि खाना ताजा, सुरक्षित और समय पर पहुंचे। ओटीपी सिस्टम से खाना सीधे सीट तक दिया जाता है, जिससे भरोसा बना रहता है। – एके सिंह, पीआरओ, आईआरसीटीसी, रेलवे