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लोकसभा अध्यक्ष ने सस्ते पक्के घरों सहित 67 करोड़ के विकास कार्यों की दी सौगात

कोटा. शहर के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार सुबह 11 बजे जगपुरा क्षेत्र में 832 अफोर्डेबल आवासों के निर्माण का शिलान्यास किया। ये आवास मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जाएंगे। इस योजना से शहर के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को सस्ते दामों में पक्का घर मिलने का सपना पूरा होगा। कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) की ओर से जगपुरा क्षेत्र में लगभग 38 करोड़ रुपए की लागत से इन 832 अफोर्डेबल आवासों का निर्माण किया जाएगा। योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, जो आर्थिक कारणों से अब तक अपने घर का सपना पूरा नहीं कर सके हैं। इन घरों में बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। अफोर्डेबल आवासों के साथ-साथ लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र में भी बड़े विकास कार्यों की शुरुआत की गई। करीब 27 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण, खेल मैदान और सामुदायिक भवन जैसे विकास कार्य किए जाएंगे। इस तरह कुल 67 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की आधारशिला रखी गई। शहर के विकास को मिलेगी नई गति इन विकास कार्यों से न केवल आवास समस्या का समाधान होगा, बल्कि शहर के बुनियादी ढांचे को भी मजबूती मिलेगी। बेहतर सड़कें, खेल मैदान और सामुदायिक भवन बनने से स्थानीय लोगों को सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी इस अवसर पर लाडपुरा विधायक कल्पना देवी भी मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर मिले और शहर के हर क्षेत्र में समान रूप से विकास हो। कार्यक्रम में केडीए के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल हुए। गरीब और मध्यम वर्ग को मिलेगा सीधा लाभ सरकार की इस पहल से हजारों परिवारों को राहत मिलेगी। सस्ते आवास और बेहतर सुविधाओं के साथ ये योजना कोटा शहर के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। जिससे शहर के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को पक्के घर का लाभ मिलेगा। अफोर्डेबल हाउस के साथ 27 करोड़ रुपए की लागत से लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण, खेल मैदान, सामुदायिक भवन सहित कुल 67 करोड़ के विभिन्न विकास कार्यों की भी आधारशिला रखी जाएगी। इस अवसर पर लाडपुरा विधायक कल्पना देवी भी उपस्थित रहीं।

एसओजी ने फर्जीवाड़े में 3 बड़ी भर्तियों में नौकरी लगे अभ्यर्थियों की मांगी OMR शीट्स

जयपुर. राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों बेरोजगारों के भविष्य से जुड़े सबसे बड़े दस्तावेज, यानी ओएमआर शीट्स पर ही अब सवाल खड़े हो गए हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड पर गंभीर आरोप है कि उसने 3 बड़ी भर्ती परीक्षाओं की मूल ओएमआर शीट्स या तो नष्ट कर दी हैं या फिर जानबूझकर एसओजी को उपलब्ध नहीं करवा रहा। सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता) सीधी भर्ती परीक्षा–2018, प्रयोगशाला सहायक भर्ती परीक्षा–2018 और कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा–2018 में ओएमआर शीट्स में छेड़छाड़ कर नंबर बढ़ाने के मामले की जांच कर रही स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बोर्ड से अब तक करीब 8 से अधिक पत्र लिखकर मूल OMR शीट्स मांगी हैं, लेकिन इसके बावजूद बोर्ड ने जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। सबकी नहीं, नौकरी लगने वालों की ही दे दें ओएमआर शीट्स एसओजी सूत्रों के मुताबिक, अब तक जो गड़बड़ियां सामने आई हैं, वे सिर्फ शुरुआत हैं। यदि बोर्ड मूल OMR शीट्स उपलब्ध करवा देता है तो और भी कई मामलों में छेड़छाड़, फर्जीवाड़ा और अंक बढ़ाने के ठोस प्रमाण मिल सकते हैं। इससे यह भी स्पष्ट हो सकता है कि कितने और अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ और कितनों को गलत तरीके से नौकरी दिलाई गई। बोर्ड सबकी ओएमआर शीट्स उपलब्ध नहीं करवाना चाहता तो केवल नौकरी में लगने वाले अभ्यर्थियों की ही मूल ओएमआर शीट्स उपलब्ध करवा दें। ओएमआर शीट्स में हेरफेर एसओजी की जांच में सामने आया है कि इन तीन परीक्षाओं में कम से कम 42 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट्स में हेरफेर कर उनके नंबर बढ़ाए गए। इनमें से 38 अभ्यर्थियों के अंकों में भारी बढ़ोतरी की गई। सबसे चौंकाने वाला मामला उस अभ्यर्थी का है, जिसके वास्तविक रूप से माइनस 6 नंबर आ रहे थे, लेकिन उसकी ओएमआर शीट में सीधे 259 नंबर दर्ज कर दिए गए। यह आंकड़ा खुद इस बात का सबूत है कि गड़बड़ी मामूली नहीं, बल्कि सुनियोजित और संगठित तरीके से की गई। जब भी मांगी…जवाब मिला, नहीं मिल रही एसओजी सूत्रों के मुताबिक जब भी बोर्ड अधिकारियों से ओएमआर शीट्स मांगी, लेकिन बोर्ड में वर्षों से तैनात कर्मचारी अधिकारियों को नहीं मिलने का जवाब देकर गुमराह देते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एसओजी जैसी जांच एजेंसी बार-बार दस्तावेज मांग रही है, तो बोर्ड उन्हें उपलब्ध क्यों नहीं करवा रहा? क्या ओएमआर शीट्स नष्ट कर दी गई हैं या फिर इसलिए रोकी जा रही हैं ताकि और बड़े खुलासे न हो सकें?

पहला स्वदेशी ऑटोनॉमस रोबोट ‘डैगर’ जयपुर में बना, दिल्ली में परेड में दिखेंगे मेड इन इंडिया के 3 रोबोट

 जयपुर  भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध कौशल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों के खिलाफ हुए सफल ऑपरेशन में मानवरहित रोबोट ‘जीना’ ने मुख्य भूमिका निभाई। करीब 30 डिग्री की ढलान और घने जंगलों के बीच छिपे भारी हथियारों से लैस तीन आतंकियों का पता लगाने और उन्हें ढेर करने में इस एआई-लेस रोबोट का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक की मदद से बिना किसी मानवीय क्षति के ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। स्वदेशी ‘डैगर’ भारतीय सेना की 50 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) में शामिल किया गया ‘डैगर’ देश का पहला पूरी तरह से स्वदेशी और नेक्स्ट-जेन ऑटोनॉमस रोबोट है। यह रोबोट न केवल युद्ध क्षेत्र में रीयल-टाइम निगरानी करता है, बल्कि भीषण गोलीबारी के बीच घायलों को सुरक्षित स्थान तक निकालने में भी सक्षम है। ‘डैगर’ को राइफल, लाइट मशीन गन (LMG) और ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर जैसे हथियारों से लैस किया जा सकता है। यह 450 किलो तक वजन उठाकर उबड़-खाबड़ रास्तों पर 10 घंटे तक लगातार काम कर सकता है। ‘मेक इन इंडिया’ का गौरव इन अत्याधुनिक रोबोट्स को जयपुर की कंपनी क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स द्वारा ‘सीतापुरा’ क्षेत्र में डिजाइन और तैयार किया गया है। कंपनी के प्रबंध निदेशक भुवनेश मिश्रा और डायरेक्टर डॉ. नीलिमा मिश्रा के अनुसार, डैगर को पूरी तरह से भारत में विकसित करना ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक मील का पत्थर है। रक्षा रोबोटिक्स के अलावा, कंपनी ने ‘कृष्णा’ नामक रोबोट भी बनाया है जो खतरनाक आग बुझाने और केमिकल प्लांट्स जैसी जोखिम भरी जगहों पर काम करने में सक्षम है। राजपथ पर दिखेगा पराक्रम आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान देश की राजधानी दिल्ली में इन स्वदेशी रोबोट्स का वैभव पूरी दुनिया देखेगी। सेना की तकनीकी निगरानी, पैरामीटर सुरक्षा और कॉम्बैट सपोर्ट के लिए डिजाइन किए गए ये रोबोट अब ऊंचे पहाड़ी इलाकों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सैनिकों के लिए ‘कवच’ का काम करेंगे। इनकी मदद से सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए मिलिट्री ऑपरेशन करना संभव होगा, जिससे सैनिकों की जान का जोखिम न्यूनतम हो जाएगा। इन खूबियों से लैस हैं ये व्हीकल यूजीवी डैगर : नाइट विजन के साथ अत्याधुनिक फीचर इसे जमीन पर सहायता के लिए ह्यूमन कंट्रोल से लैस किया गया है। मल्टी यूजीवी कॉर्डिनेट मूवमेंट के लिए कॉन्वॉय फॉलोइंग मोड का विकल्प भी है। मजबूत मिलिट्री-ग्रेड ऑल-टेरेन मोबिलिटी यूजीवी डैगर दूसरे रोबोट्स की तुलना में अधिक मजबूत है। इसमें नाइट विजन के साथ रीयल टाइम आईएसआर जैसे अत्याधुनिक फीचर भी हैं। डैगर युद्ध क्षेत्र में घायलों को निकालकर सुरक्षित स्थान तक लाने की खूबी रखता है। यह आईएसआर मिशन के लिए टेथर्ड ड्रोन को सपोर्ट करता है। इस अत्याधुनिक रोबोट को आरसीडब्ल्यूएस के अनुकूल किया गया है। इससे यह राइफल, लाइट मशीन गन (एलएमजी), मीडियम मशीन गन (एमएमजी) और ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर (एजीएल) के साथ काम करने में भी सक्षम है। इसकी खासियत से सैनिकों को उबड़-खाबड़ रास्तों व खतरे वाले स्थानों पर जाने की जरूरत नहीं होगी और जान का खतरा नहीं होगा। जीना : ऊंचाई और मुश्किल इलाकों के लिए बनाया यह एक मिनी वेपनाइज्ड मानवरहित ग्राउंड व्हीकल (यूजीवी) है। इसे विशेष तौर पर ऊंचाई और मुश्किल इलाकों में टेक्निकल निगरानी, पैरामीटर सुरक्षा और कॉम्बैट सपोर्ट के लिए डिजाइन किया है। यह दिन के साथ रात में भी कैमरा पेलोड और रिमोट वेपन स्टेशन इंटीग्रेशन को सपोर्ट करता है। इससे सुरक्षित दूरी से बिना किसी खतरे के मिलिट्री ऑपरेशन किए जा सकते हैं। इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन रक्षा मिशन के लिए तेज डिप्लॉयमेंट, उच्च स्थिरता और मजबूत मोबिलिटी सुनिश्चित करता है। अखनूर में आतंकवादियों के खिलाफ इस्तेमाल हुआ जीना रोबोट अक्टूबर 2024 में जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में सेना की ओर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस मानव रहित रोबोट 'जीना' का इस्तेमाल किया गया था। वहां करीब 30 डिग्री की ढलान और घने जंगल में आतंकवादियों का पता लगाने और उन तक पहुंचने के लिए इनका इस्तेमाल किया था। इस आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन में भारी हथियारों से लैस तीनों आतंकवादी मारे गए थे। कृष्णा : आग लगने की जगह पानी-फोम फेंककर बुझाने में सक्षम यह एडवांस्ड एआई लैस फायर फाइटिंग यूजीवी है। इसे औद्योगिक और तेल व गैस, केमिकल प्लांट, आयुध और विस्फोटक क्षेत्रों जैसे उच्च जोखिम वाले आग वाले वातावरण के लिए बनाया गया है। यह ऑनबोर्ड कैमरों और सेंसर से रियल-टाइम निगरानी के साथ रिमोट फायर सप्रेशन को सक्षम बनाता है। आपातकालीन टीमों के लिए डिजाइन किया गया कृष्णा रोबोट खतरनाक स्थितियों में इंसान की जान के जोखिम को कम करते हुए अत्यधिक प्रेशर से पानी/फोम फेंकने में सक्षम है। अत्यधिक गर्मी या धुएं वाला वातावरण भी इसको नुकसान नहीं पहुंचा सकते। यूजीवी डैगर 450 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स की डायरेक्टर डॉ. नीलिमा मिश्रा ने बताया- यूजीवी डैगर 450 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम है। इसे 30 किलोमीटर की रेंज में ऑटोनॉमस नेविगेशन से ऑपरेट किया जा सकता है। गोला-बारूद और अन्य लॉजिस्टिक्स को युद्ध क्षेत्र में ले जाने के लिए यह लगातार 10 घंटे तक ऑपरेशन करने की काबिलियत रखता है। भारत में डिजाइन, डेवलप हैं ये रोबोट क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स के प्रबंध निदेशक भुवनेश मिश्रा ने कहा- हमें गर्व है कि हमने यूजीवी डैगर को पूरी तरह से भारत में डिजाइन, डवलप और निर्मित किया है। इससे यह सही मायने में पूरी तरह से स्वदेशी रोबोट है। टीम ने 'मेक इन इंडिया' अभियान में योगदान देने की कोशिश की है। यह कदम भारतीय सेना के रक्षा रोबोटिक्स में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में माइलस्टोन है। उल्लेखनीय है कि क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स भारत की रक्षा और अग्निशमन रोबोटिक्स इनोवेटर कंपनी है। इसके द्वारा राइजिंग राजस्थान में किए एमओयू के तहत देश की एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट जयपुर में स्थापित की जा रही है।  

जैसलमेर टूरिस्ट्स के लिए नई व्यवस्था, एंट्री पर 50-200 रुपए यात्री कर देना होगा, 2 टोल नाके बनाए जाएंगे

 जैसलमेर  स्वर्ण नगरी जैसलमेर की खूबसूरती निहारने आने वाले पर्यटकों को अब शहर में प्रवेश के लिए 'यात्री कर' (Entry Tax) देना होगा। जैसलमेर नगर परिषद ने 22 साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से पर्यटक वाहनों पर टैक्स लगाने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और गजट नोटिफिकेशन जारी होते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। जैसलमेर एक छोटा शहर है, लेकिन पर्यटन सीजन (अक्टूबर से मार्च) के दौरान यहां लाखों सैलानी और हजारों वाहन पहुँचते हैं। इससे शहर की सफाई व्यवस्था, सड़कों के रखरखाव और ट्रैफिक प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। नगर परिषद के अनुसार, इस कर से मिलने वाले राजस्व का उपयोग शहर के विकास और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए किया जाएगा। कहां लगेंगे टोल नाके और कितना होगा शुल्क? शहर में प्रवेश के मुख्य रास्तों पर दो टोल नाके बनाए जाएंगे। जोधपुर रोड, यहां से जयपुर, जोधपुर और बीकानेर की ओर से आने वाले पर्यटक वाहन प्रवेश करते हैं। बाड़मेर रोड : यहाँ से गुजरात और दक्षिण राजस्थान की ओर से आने वाले वाहनों का प्रवेश होता है। निर्धारित शुल्क : वाहनों की श्रेणी के अनुसार पर्यटकों को 50 रुपये से लेकर 200 रुपये तक की रसीद कटवानी होगी। किसे मिलेगी छूट और किस पर लगेगा टैक्स? स्थानीय निजी वाहन : जैसलमेर के स्थानीय निवासियों की निजी कारों/गाड़ियों को इस टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई है। टैक्सी वाहन : जैसलमेर नंबर की लोकल टैक्सियों और बाहर से आने वाली टैक्सियों, दोनों को यह शुल्क देना होगा। यह टैक्स मुख्य रूप से कमर्शियल और पर्यटक वाहनों पर केंद्रित है। नगर परिषद का पक्ष : नगर परिषद आयुक्त लजपाल सिंह सोढा ने बताया कि पर्यटन सीजन में शहर पर बढ़ते आर्थिक भार को कम करने के लिए यह आवश्यक था। उन्होंने कहा:यात्री कर से सालाना लाखों रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है। इस राशि का सही इस्तेमाल पर्यटन स्थलों की सार-संभाल, शहर की सफाई और विकास कार्यों में किया जाएगा। जैसलमेर में टूरिस्ट सीजन में सैलानियों की बम्पर आवक होती है। इसके चलते नगर परिषद ने शहर में प्रवेश करने वाले पर्यटक वाहनों पर यात्री कर लगाने का फैसला किया है। पर्यटन सीजन में बढ़ता दबाव बना वजह जैसलमेर एक छोटा शहर है, लेकिन अक्टूबर से मार्च के पर्यटन सीजन में यहां लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही से शहर की सड़कों पर दबाव बढ़ता है, जाम की स्थिति बनती है और प्रदूषण में भी इजाफा होता है। इन्हीं कारणों से अतिरिक्त बजट की जरूरत महसूस की गई। कहां कटानी होगी रसीद? नगर परिषद ने 2 प्रमुख रास्तों पर एंट्री पॉइंट बनाने का फैसला किया है। एक एंट्री गेट जोधपुर रोड पर बनेगा, जहां से जयपुर, जोधपुर और बीकानेर की ओर से आने वाले अधिकतर पर्यटक प्रवेश करते हैं। दूसरा एंट्री गेट बाड़मेर रोड पर बनाया जाएगा, जहां से गुजरात और दक्षिण राजस्थान की ओर से आने वाले वाहनों का दबाव रहता है। इन नाकों को पार करते समय पर्यटक वाहनों को निर्धारित शुल्क जमा कर रसीद लेनी होगी। स्थानीय निजी गाडियों को छूट, टैक्सी पर लगेगा टैक्स नगर परिषद ने साफ किया है कि स्थानीय निवासियों की निजी गाडियों पर यह यात्री कर लागू नहीं होगा। हालांकि, जैसलमेर नंबर की टैक्सी भी इस टैक्स के दायरे में आएगी। यानी शहर की स्थानीय टैक्सी और बाहर से आने वाली टैक्सी दोनों को एंट्री शुल्क देना होगा। यह टैक्स केवल पर्यटकों और कॉमर्शियल उपयोग में आने वाले वाहनों पर लागू रहेगा। जैसलमेर नगर परिषद को होगी कमाई इस पूरे प्रोजेक्ट से नगर परिषद को भारी राजस्व मिलने की उम्मीद है। नगरपरिषद कमिश्नर लजपाल सिंह सोढा ने बताया- यात्री कर से लाखों रुपए सालाना मिलने की उम्मीद है। इससे सीजन में बढ़ने वाले यात्री भार से शहर की सफाई पर व अन्य भार बढ़ जाता है जिसको लेकर हम उस पैसों का सही इस्तेमाल कर सकेंगे। उस पैसों का खर्च हम पर्यटन स्थलों की सार संभाल व विकास आदि पर कर सकेंगे।नगर परिषद जल्द ही इन नाकों का निर्माण शुरू करेगी और सीजन के चरम पर पहुंचने से पहले इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने भर्ती परीक्षाओं के OMR शीट के लिए की नई व्यवस्था का ऐलान

जयपुर  राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं के OMR शीट को लेकर घमासान मचा हुआ है। भर्ती परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने एक नया फैसला लिया है। नए फैसले के तहत अब राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं की OMR शीट को ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष आलोक राज के अनुसार चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ओएमआर शीट को ऑनलाइन अपलोड करने का फैसला लिया गया है। चपरासी भर्ती परीक्षा से इस नई व्यवस्था की शुरुआत की जाएगी। ओएमआर शीट में धांधली की मिलीं कई शिकायतें उल्लेखनीय है कि चयन बोर्ड के अफसरों और एक प्राइवेट फर्म के कर्मचारियों पर अभ्यर्थियों से पैसे लेकर ओएमआर शीट में नंबर बढ़ाने का आरोप है। ओएमआर शीट घोटाले के बाद अभ्यर्थियों की ओर से इस धांधली की कई शिकायतें मिलीं। शिकायतों पर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड गंभीर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया है। जिसके बाद राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष आलोक राज ने चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का नया फैसला लिया।

राजस्थान पुलिस ने लिया कड़ा कदम, अपराधियों की फोटो मीडिया और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने पर रोक

 जयपुर  राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों की निजता और उनके मानवीय अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध शाखा), डॉ. हवा सिंह घुमरिया ने एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करते हुए प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नर और जिला पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी अभियुक्त की फोटो या वीडियो अब सार्वजनिक नहीं करेंगे। यह निर्णय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा  दिए गए एक आदेश की अनुपालना में लिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। पुलिस के अनुसार, "अभियुक्त केवल आरोपित होता है, दोषी नहीं", इसलिए गिरफ्तारी के बाद उसकी निजता को भंग करना कानून सम्मत नहीं है। नए दिशा-निर्देशों की मुख्य बातें : सोशल मीडिया पर पाबंदी : पुलिस अब किसी भी आरोपी की फोटो या वीडियो अपने आधिकारिक या अनौपचारिक सोशल मीडिया हैंडल पर अपलोड नहीं कर सकेगी। मीडिया ट्रायल पर रोक : प्रेस ब्रीफिंग के दौरान आरोपी को अपमानजनक स्थिति में पेश नहीं किया जाएगा। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसी किसी भी गतिविधि को बढ़ावा न दें जिससे 'मीडिया ट्रायल' की स्थिति पैदा हो। मर्यादित शब्दावली : पुलिस ब्रीफिंग के दौरान अभियुक्तों के लिए उपयोग किए जाने वाले शब्दों में गरिमा और सावधानी बरतनी होगी। विशेष संवेदनशीलता : महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के आरोपितों के साथ व्यवहार के दौरान विशेष संवेदनशीलता रखने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षित हिरासत और सभ्य व्यवहार SOP में यह भी कहा गया है कि अभियुक्त को बैठाने, ले जाने और हिरासत में रखने की व्यवस्था सुरक्षित और सभ्य होनी चाहिए। पुलिस अब किसी भी आरोपी को सार्वजनिक रूप से अपमानित या अपराधी की तरह प्रदर्शित नहीं कर पाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे राजस्थान में लागू कर दिया गया है। इसकी प्रतियां महानिदेशक पुलिस (DGP) सहित सभी महत्वपूर्ण विभागों को भेज दी गई हैं ताकि इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

राजस्थान के मशहूर टूरिस्ट स्पॉट पर लगेगा पर्यटक टैक्स

जोधपुर/जैसलमेर. नगर परिषद जैसलमेर क्षेत्र में अब पर्यटक वाहनों से यात्रीकर वसूल किया जाएगा। स्वायत शासन विभाग ने नगर परिषद को अधिकृत किया है। इसके लिए बाड़मेर रोड और जोधपुर रोड पर दो टोल नाके स्थापित किए जाएंगे। वसूली से होने वाली आय शहर विकास कार्यों में खर्च की जाएगी। स्वायत शासन विभाग ने विभिन्न वाहनों पर वसूली की दरें निर्धारित की हैं। 35 सीटर बस से 200 रुपए, 25 सीटर बस से 150 रुपए, बड़ी कारों से 100 रुपए, पर्यटक टैक्सी कार या जीप से 50 रुपए तथा अन्य कारों से 50 रुपए लिए जाएंगे। सभी प्रकार के सरकारी वाहन, एंबुलेंस और स्थानीय निजी वाहन (टैक्सी को छोड़कर) कर से मुक्त रहेंगे। सोनार दुर्ग क्षेत्र में गोल्फ कार्ट सेवा शुरू होगी, जिससे पर्यटकों को नीरज बस स्टैंड से दुर्ग तक आवागमन की सुविधा मिलेगी। 10 से 40 गोल्फ कार्ट इलेक्ट्रिक प्रणाली पर संचालित होंगे। सेवा का किराया प्रति यात्री 30 रुपए तय हुआ है। इन कार्टों से दुर्ग क्षेत्र में वाहनों का दबाव कम होगा और प्रदूषण में कमी आएगी। इस व्यवस्था से नगर परिषद को प्रतिवर्ष 4,66,100 रुपए मिलेंगे, जिस पर 10 प्रतिशत सालाना वृद्धि लागू होगी। नगर परिषद ने शहर में भीड़भाड़ और दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए 10 चौराहों पर ट्रैफिक लाइट लगाने का निर्णय किया है। संबंधित फर्म सिग्नल सिस्टम का निर्माण और संचालन करेगी। जबकि आय के रूप में परिषद को प्रतिवर्ष 4,14,180 रुपए प्राप्त होंगे, जिस पर 10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि लागू होगी। इन तीनों नवाचारों से नगर परिषद को राजस्व में वृद्धि होगी। साथ ही पर्यटक सुविधाओं और यातायात प्रबंधन में सुधार से शहर को राहत मिलेगी।

9 राज्यों की 3100 किमी दूरी प्रतिदिन तय करती है अवध असम एक्सप्रेस

जयपुर/लालगढ़. भारतीय रेलवे कमाल है। भारतीय रेलवे की अनोखी ट्रेन की एक रोचक बात जानकार आप हैरान रह जाएंगे। यह अनोखी ट्रेन एक नाम, एक नम्बर से देश में एक साथ 3 जगह नजर आती है। भारतीय रेलवे की यह अजूबा ट्रेन कुल 88 स्टेशनों और 9 राज्यों की दूरी तय करती हुई अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचती है। इस ट्रेन का नाम जानने के लिए आप में उत्सुकता जग गई होगी। जीहां, यह अवध असम एक्सप्रेस (15909/15910) ट्रेन है। यह ट्रेन राजस्थान के लालगढ़ से चलकर असम के डिब्रूगढ़ तक जाती है। करीब 3100 किमी से अधिक के सफर यह ट्रेन 9 राज्यों से गुजरती है। साथ कुल 88 स्टेशनों पर रुकती है। इस लम्बी दूरी को एकतरफा तय करने में करीब 4 दिन का वक्त लगता है। लेकिन जानकर ताज्जुब होगा कि यह ट्रेन प्रतिदिन चलती है। तो आप सोच में पड़ गए होंगे ऐसा कैसे संभव हो सकता है। अवध असम एक्सप्रेस ट्रेन की खास बात यह है कि यह ट्रेन प्रतिदिन चलती है। अवध असम एक्सप्रेस : एक ही नम्बर एक ही नाम अब रेलवे की अनोखी व्यवस्था के राज का पर्दाफाश होता है। तो बता दें कि एक रुट पर करीब तीन अवध असम एक्सप्रेस चलती हैं। एक ही नम्बर एक ही नाम की यह ट्रेन अपने एकतरफ रुट पर अलग-अलग राज्य में अलग-अलग स्थान पर दिखाई देती है। रेलवे के अनुसार लालगढ़ से रोजाना एक अवध असम एक्सप्रेस चलती है। वहीं दूसरी तरफ डिब्रूगढ़ से हर दिन एक अवध असम एक्सप्रेस रवाना होती है। इस प्रकार तीन अलग-अलग ट्रेनें हैं। यानि कुल छह ट्रेनें हैं और एक ट्रेन रिजर्व में रखी जाती है। जिसे किसी जरूरत के वक्त चलाया जाता है। 9 राज्यों से गुजरती है अवध असम एक्सप्रेस अवध असम एक्सप्रेस जिन राज्यों से गुजरती है, उनके नाम में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, नागालैंड और असम शामिल है। इस ट्रेन के 88 स्टॉपेज है। इनमें 'हॉल्ट टाइम' कहीं 2 मिनट तो कहीं 5 मिनट है। अगर सिर्फ 'हॉल्ट टाइम' को जोड़ लें तो कुल समय करीब 5 घंटे होता है। यानि इतना समय तो वह रेलवे स्टेशनों पर खड़ी रहती है। 

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड कार्यालय में ओएमआर शीट में नंबर बढ़ाकर फर्जीवाड़ा

जयपुर. जयपुर में दुर्गापुरा कृषि अनुसंधान केन्द्र स्थित राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड कार्यालय में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है। ओएमआर (ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन) शीट्स में नंबर बढ़ाकर अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ दिलाने के महाघोटाले की जांच स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) कर रही है। यह गड़बड़ी चयन बोर्ड के तकनीकी प्रमुख संजय माथुर के कार्यकाल में हुई बताई जा रही है। एसओजी अब कंपनी की ओर से करवाई सभी परीक्षाओं की गहन जांच करेगी। एसओजी को आशंका है कि यह एक संगठित गिरोह का काम है, जिसमें तकनीकी स्तर पर छेड़छाड़ कर अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाए गए और इसके बदले मोटी रकम का लेन-देन हुआ। अनुसंधान जारी है – डीआइजी परिस देशमुख डीआइजी परिस देशमुख ने बताया कि मामले में अनुसंधान जारी है और संदेह में आए सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। 3 आरोपी जेल भेजे मामले में गिरफ्तार आउटसोर्स फर्म राभव लिमिटेड, नई दिल्ली के प्रतिनिधि विनोद कुमार गौड़, शादान खान और अभ्यर्थी पूनम को बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया। पूछताछ में आए तथ्यों के आधार पर एसओजी अब उन अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर बुलाने की तैयारी कर रही है, जिनकी ओएमआर शीट्स में नंबर बढ़ाए गए। अनुसंधान के बाद इन अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया जाएगा। एसओजी उन बिचौलियों की भी तलाश में है, जिन्होंने अभ्यर्थियों और तकनीकी टीम के बीच सेतु का काम किया। माना जा रहा है कि इन्हीं बिचौलियों के जरिये सौदे तय हुए और रकम का लेन-देन हुआ। इस संबंध में बैंक खातों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजेक्शन की पड़ताल की जा रही है। तकनीकी प्रमुख और प्रोग्रामर रिमांड पर अनुसंधान अधिकारी यशवंत सिंह ने बताया कि तकनीकी प्रमुख संजय माथुर को 23 जनवरी को और प्रोग्रामर प्रवीण गंगवाल को 22 जनवरी को कोर्ट में पेश किया जाएगा। दोनों फिलहाल एसओजी रिमांड पर हैं।

दिल्ली से अहमदाबाद वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द की जल्द मिलेगी सौगात

जयपुर. राजस्थान में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की आस लगाए बैठे रेल यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है। माना जा रहा है कि राजस्थान को जल्द ही पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की सौगात मिल सकती है। दरअसल, उत्तर-पश्चिम रेलवे ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के संचालन का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। प्रस्ताव के अनुसार यह ट्रेन दिल्ली से अहमदाबाद वाया जयपुर रूट पर चल सकती है, जिससे राजस्थान के यात्रियों को दिल्ली और अहमदाबाद के लिए बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। रेलवे सूत्रों के मुताबिक दिल्ली से अहमदाबाद के बीच जल्द ही वंदे भारत स्लीपर ट्रेन दौड़ती नजर आएगी। इस ट्रेन का ठहराव जयपुर, अजमेर और आबू रोड जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर हो सकता है। रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद जयपुर को दोहरा लाभ मिलेगा। एक ओर जयपुर से दिल्ली और दूसरी ओर जयपुर से अहमदाबाद का सफर सुविधाजनक हो जाएगा। साथ ही समय की भी काफी बचत होगी। कब चलेगी यह ट्रेन? रेलवे सूत्रों के अनुसार रेलवे बोर्ड से मंजूरी के बाद सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी कर ली जाएगी। ऐसे में माना जा रहा है कि सब कुछ सही रहा तो मार्च तक स्लीपर वंदे भारत ट्रेन राजस्थान में दौड़ती नजर आएगी। इससे रेल यात्रियों को कम समय में बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा। राजस्थान के इन स्टेशनों पर हो सकता है ठहराव प्रस्तावित रूट के अनुसार दिल्ली-अहमदाबाद के बीच चलने वाली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन राजस्थान से होकर गुजरेगी। यह ट्रेन प्रदेश के प्रमुख शहरों को जोड़ेगी। बताया जा रहा है कि जयपुर, अजमेर और आबू रोड रेलव स्टेशन पर इस ट्रेन का ठहराव हो सकता है। ऐसे में पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को काफी फायदा होगा। रेल यात्रियों को मिलेगा बेहतर विकल्प वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लंबी दूरी के यात्रियों के लिए एक आधुनिक और आरामदायक विकल्प साबित होगी। विशेष रूप से यह ट्रेन रात के सफर के लिहज से डिजाइन की गई है। ट्रेन के आधुनिक कोच, बेहतर स्लीपिंग अरेंजमेंट और उन्नत सुविधाएं यात्रियों को प्रीमियम अनुभव देंगी।