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विक्रम भट्ट को बड़ा झटका: 30 करोड़ की ठगी केस में दूसरी बार भी नहीं मिली जमानत

उदयपुर 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में जेल में बंद बॉलीवुड डायरेक्टर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को एक बार फिर अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। उदयपुर की महिला उत्पीड़न कोर्ट ने बुधवार को भट्ट दंपती की दूसरी जमानत याचिका भी खारिज कर दी। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि मामले में अभी अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और उनसे अहम पूछताछ बाकी है। ऐसे में इस स्तर पर आरोपियों को जमानत देना उचित नहीं होगा। कोर्ट का यह आदेश बुधवार को जारी किया गया। उदयपुर की दोनों निचली अदालतों से राहत न मिलने के बाद अब भट्ट दंपती को जमानत के लिए राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर बेंच का रुख करना पड़ेगा। हालांकि, हाईकोर्ट में अवकाश के चलते उन्हें नए साल के बाद तक भी जेल में रहना पड़ सकता है। भट्ट दंपती के अधिवक्ता कमलेश दवे ने बताया कि इससे पहले एसीजेएम कोर्ट-4 ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद सत्र न्यायालय में याचिका दायर की गई, लेकिन जज के अवकाश पर होने के कारण लगातार तीन बार सुनवाई टलती रही। अंततः मंगलवार को महिला उत्पीड़न कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसके बाद याचिका खारिज कर दी गई। एसीजेएम कोर्ट-4 ने अपने आदेश में कहा था कि यदि जमानत दी जाती है तो गवाहों के प्रभावित होने की आशंका है। साथ ही, मामला बीएनएस की धारा 338 के तहत गैर-जमानती होने के कारण भी जमानत देने से इनकार किया गया। 42 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट में धोखाधड़ी का आरोप मामले में इंदिरा ग्रुप कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने आरोप लगाया है कि उन्होंने फिल्म निर्माण के लिए विक्रम भट्ट से 42 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट किया था। बाद में उन्हें धोखाधड़ी का अहसास हुआ, जिसके बाद 17 नवंबर को विक्रम भट्ट सहित 8 लोगों के खिलाफ उदयपुर में एफआईआर दर्ज कराई गई। इस केस में उदयपुर पुलिस पहले ही भट्ट के को-प्रोड्यूसर महबूब अंसारी और फर्जी वेंडर संदीप को मुंबई से गिरफ्तार कर चुकी है। 7 दिसंबर को मुंबई से हुई थी गिरफ्तारी विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को 7 दिसंबर को मुंबई स्थित उनके फ्लैट से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 9 दिसंबर को दोनों को उदयपुर कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इससे पहले 9 दिसंबर को राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर बेंच) में विक्रम भट्ट की गिरफ्तारी पर रोक से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई थी। उस दौरान हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी में जल्दबाजी को लेकर आईजी, एसपी और जांच अधिकारी को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए थे। फिलहाल, दूसरी जमानत याचिका भी खारिज होने के बाद भट्ट दंपती की मुश्किलें और बढ़ गई हैं, और अब उनकी उम्मीदें राजस्थान हाईकोर्ट पर टिकी हुई हैं।

कड़ाके की सर्दी से कांपा राजस्थान, सिरोही सबसे ठंडा; शीतलहर को लेकर अलर्ट जारी

 जयपुर  राजस्थान में एक बार फिर कड़ाके की सर्दी का असर तेज हो गया है। उत्तर भारत से पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के खत्म होने के बाद ठंडी उत्तरी हवाओं के चलने से प्रदेश के कई जिलों में तापमान तेजी से गिरा है। बुधवार को शेखावाटी क्षेत्र सहित कई जिलों में सुबह-शाम तेज ठंड महसूस की गई। चार शहरों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया, जबकि सिरोही प्रदेश का सबसे ठंडा जिला रहा। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक चूरू, झुंझुनूं, सीकर और नागौर जिलों में शीतलहर (कोल्ड-वेव) का अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि, बुधवार को घने कोहरे से कुछ राहत रही और अधिकांश जिलों में आसमान साफ रहा, जिससे दिन में तेज धूप देखने को मिली। शेखावाटी अंचल में कड़ाके की ठंड के चलते खेतों में ओस की बूंदें जम गईं। कोटा सहित कई जिलों में फसलों पर जमी ओस साफ नजर आई। सबसे कम तापमान दर्जपिछले 24 घंटों में फतेहपुर में न्यूनतम तापमान 2.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा—नागौर: 3.4°C, माउंट आबू: 4.0°C, सीकर: 5.0°C, लूणकरणसर: 5.4°C, चूरू: 5.8°C, झुंझुनूं व पाली: 6.8°C, करौली: 6.9°C, पिलानी: 7.2°C, दौसा: 8.1°C, बीकानेर व जैसलमेर: 8.8°C, अलवर: 8.6°C, सिरोही: 9.3°C। दिन का तापमान भी गिरा : बुधवार को प्रदेश के सभी शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। सबसे ठंडा दिन सिरोही में रहा, जहां अधिकतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।अन्य शहरों में अधिकतम तापमान इस प्रकार रहा— बारां 22.6, करौली 22.7, जयपुर 22.3, अलवर 22, झुंझुनूं 22.8, दौसा 23.8, गंगानगर 23.5, चूरू 23.6, बीकानेर 23.8, कोटा 23.3, अजमेर 24.3, भीलवाड़ा 24.4, पिलानी 24.8, नागौर 24.4 और पाली 24.9 डिग्री सेल्सियस। आगे कैसा रहेगा मौसम मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार, अगले दो दिन प्रदेश में सर्द हवाओं का असर और बढ़ेगा, जिससे तापमान में 2 से 4 डिग्री तक और गिरावट आ सकती है। हालांकि, अगले एक सप्ताह तक मौसम शुष्क रहने की संभावना है।

पतंगबाजी पर सख्ती: मकर संक्रांति पर झालावाड़ में चाइनीज मांझा बैन, आदेश 2026 तक लागू

झालावाड़ मकर संक्रांति पर्व के दौरान जिले में पतंगबाजी के लिए चाइनीज मांझे के उपयोग पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गई है। जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए धातु, नायलोन एवं प्लास्टिक से निर्मित मांझे के निर्माण, विपणन और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है। जिला कलेक्टर ने बताया कि इस प्रकार का मांझा विभिन्न धातुओं के मिश्रण से तैयार किया जाता है, जो अत्यंत धारदार होने के साथ-साथ विद्युत का सुचालक भी होता है। इससे दुपहिया वाहन चालकों, आम नागरिकों और पक्षियों को गंभीर चोट लगने के साथ जान-माल का नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने कहा कि चाइनीज मांझा यदि विद्युत तारों के संपर्क में आ जाए तो करंट फैलने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे पतंग उड़ाने वाले व्यक्ति को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ विद्युत आपूर्ति बाधित होने की संभावना रहती है। लोक स्वास्थ्य, निर्बाध विद्युत संचालन और पक्षियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए धातु निर्मित मांझा, पक्का धागा, नायलोन, प्लास्टिक एवं सिंथेटिक या टॉक्सिक सामग्री जैसे आयरन पाउडर और ग्लास पाउडर से बने चाइनीज मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा पक्षियों को होने वाले नुकसान से बचाने के उद्देश्य से प्रातः 6 बजे से 8 बजे तक तथा सायं 5 बजे से 7 बजे तक पतंगबाजी पर भी रोक रहेगी। यह आदेश आज मध्यरात्रि से प्रभावी होकर 31 जनवरी 2026 तक लागू रहेगा। आदेश की अवहेलना या उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व डीएफओ का खुलासा: अरावली में 50 हजार करोड़ का अवैध खनन, माफिया राज 15 सालों से जारी

अलवर  राजस्थान के अलवर जिले में स्थित अरावली की पहाड़ियों में सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद भिवाड़ी, टपूकड़ा, तिजारा और किशनगढ़बास क्षेत्र में अवैध खनन जारी है. लगातार हो रहे अवैध खनन से कई पहाड़ियों का नामो-निशान मिट चुका है. खनन माफिया इतने हावी हो गए हैं कि डीएफओ, पुलिस और प्रशासन की टीम पर पथराव और फायरिंग तक कर देते हैं. पूर्व में अलवर में डीएफओ रहे पी. काथिरवेल ने अपने द्वारा किए गए अवैध खनन के आकलन में बताया कि भिवाड़ी क्षेत्र में खनन माफियाओं ने पिछले 15 वर्षों में करीब 50 हजार करोड़ रुपये का अवैध खनन कर लिया है. उनके खिलाफ आज तक कोई सख्त कार्य योजना नहीं बनी है. तत्कालीन डीएफओ ने अलवर में पदस्थ रहते हुए राज्य सरकार और वन विभाग को पत्र लिखा था, जिसमें बताया गया कि जिले के टपूकड़ा क्षेत्र के चूहड़पुर, उधनवास, उलावट, ग्वालदा, इंदौर, सारे कलां, सारे खुर्द, खोहरी कलां, मायापुर, छापुर, नाखनौल, कहरानी, बनबन, झिवाणा और निंबाड़ी में हरियाणा के माफिया भी व्यापक स्तर पर फैले हुए हैं. विभागीय रिपोर्ट के अनुसार इस इलाके के करीब एक हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पहाड़ समाप्त हो चुके हैं. यहां पहाड़ खत्म होने के कगार पर पहुंचने के बाद माफियाओं ने तिजारा और किशनगढ़बास में अपना कारोबार फैलाया और नीमली, बाघोर, देवता, मांछा सहित अन्य क्षेत्रों की पहाड़ियों में दिन-रात खनन शुरू कर दिया. डीएफओ अलवर वानिकी पद पर रहते हुए पी. काथिरवेल ने दिसंबर 2013 और जनवरी 2014 में राजस्थान सरकार के वन विभाग के पीसीसीएफ और सीसीएफ को पत्र लिखकर मांग की थी कि अवैध खनन से हुए नुकसान की जांच के लिए एक हाई एम्पावर्ड कमेटी का गठन किया जाए. उन्होंने कहा था कि अवैध खनन से जिले की पहाड़ियों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. उनके व्यक्तिगत आकलन के अनुसार, भिवाड़ी क्षेत्र में ही पिछले 15 वर्षों में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की संपदा लूटी जा चुकी है. यदि यही हाल रहा तो अगले तीन वर्षों में इस क्षेत्र की पहाड़ियां पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी और इसके बाद अलवर शहर के आसपास की पहाड़ियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी. डीएफओ ने कार्य योजना भी तैयार की थी तत्कालीन डीएफओ के अनुसार वर्ष 1998 से 2003 के बीच प्रतिदिन करीब एक हजार वाहनों की आवाजाही के आधार पर लगभग 6 हजार करोड़ रुपये का अवैध खनन हुआ. इसी तरह 2003 से 2008 के बीच दो हजार वाहनों से करीब 12 हजार करोड़ और 2008 से 2013 के बीच पांच हजार वाहन प्रतिदिन के हिसाब से लगभग 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान किया गया. अरावली की पहाड़ियों को बचाने के लिए डीएफओ ने एक कार्य योजना भी बनाई थी, जिसके तहत उन्होंने उच्च अधिकारियों को लिखे पत्र में खनन माफियाओं से निपटने के लिए 11 करोड़ रुपये स्वीकृत करने की मांग की थी. नकेल कसने के लिए कड़े फैसले लेने की जरूरत इस राशि से वन विभाग की स्वतंत्र पुलिस फोर्स, वाहन, नई चेक पोस्ट, तथा पहाड़ी और खनन क्षेत्रों में पक्की दीवारें बनाने का प्रस्ताव था. तत्कालीन डीएफओ के अनुसार, अवैध खनन से जुड़े लोगों के पास भारी मात्रा में विस्फोटक, अवैध हथियार और बड़ी संख्या में मैनपावर है, जिनसे निपटना वर्तमान संसाधनों से लगभग नामुमकिन है. उन्होंने इस पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल प्रभाव से कड़े फैसले और ठोस रणनीति अपनाने की मांग करते हुए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखे थे.

सरकारी नौकरी का मौका: असिस्टेंट डायरेक्टर व सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर पदों पर निकली भर्ती

जयपुर  राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने असिस्टेंट डायरेक्टर और सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 29 दिसंबर से शुरू होगी। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 27 जनवरी 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। इस भर्ती के तहत कुल 28 पदों को भरा जाएगा। कौन कर सकता है आवेदन? इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास ज़ूलॉजी, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी सहित संबंधित विषयों में एमएससी (M.Sc.) की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही आयोग द्वारा निर्धारित अन्य पात्रताएं भी पूरी करनी होंगी।  उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को आयु-सीमा में छूट दी जाएगी। एससी और एसटी वर्ग को 5 वर्ष, ओबीसी वर्ग को 3 वर्ष तथा दिव्यांग उम्मीदवारों को 10 वर्ष की छूट का प्रावधान है। आवेदन शुल्क इन पदों पर आवेदन करने के लिए सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों को निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान करना होगा। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए एप्लीकेशन फीस 600 रुपये तय की गई है, जबकि एससी और एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह शुल्क 400 रुपये रखा गया है। कैसा रहेगा परीक्षा पैटर्न? लिखित परीक्षा में संबंधित विषय से कुल 150 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनका कुल अंक भार 150 होगा। परीक्षा की अवधि 2 घंटे 30 मिनट निर्धारित की गई है। प्रत्येक गलत उत्तर पर एक-तिहाई अंक की नेगेटिव मार्किंग लागू होगी। लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इतना मिलेगा वेतन असिस्टेंट डायरेक्टर पद पर चयनित उम्मीदवारों को पे-मैट्रिक्स लेवल L-16 के तहत वेतन दिया जाएगा, जबकि सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर पद के लिए पे-मैट्रिक्स लेवल L-15 लागू होगा। हालांकि, राज्य सरकार के नियमों के अनुसार नियुक्ति के बाद परिवीक्षाकाल के दौरान उम्मीदवारों को नियत मासिक वेतन यानी फिक्स पे ही देय होगा। कैसे कर सकेंगे आवेदन?     सबसे पहले राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करें।     यदि आप नए उम्मीदवार हैं, तो पहले OTR (One Time Registration) पूरा करें। पहले से रजिस्टर्ड उम्मीदवार सीधे लॉगिन कर सकते हैं।     रजिस्ट्रेशन आईडी और पासवर्ड की मदद से पोर्टल में लॉगिन करें।     असिस्टेंट डायरेक्टर/सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर भर्ती लिंक पर क्लिक करें।     मांगी गई व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता और अन्य विवरण सही-सही भरें।     फोटो, सिग्नेचर और आवश्यक प्रमाण पत्र निर्धारित फॉर्मेट में अपलोड करें।     अपनी श्रेणी के अनुसार ऑनलाइन माध्यम से आवेदन शुल्क का भुगतान करें।     सभी विवरण जांचने के बाद आवेदन फॉर्म सबमिट करें।  

अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति से बढ़कर संस्कार और विचार का प्रतीक: सीएम भजनलाल शर्मा

जयपुर राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य पर बिरला ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। उन्होंने स्व. वाजपेयी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि वाजपेयी ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से गांवों को जोड़ा, जिससे गांवों में खुशहाली आई तथा गांव तक पहुंच आसान हुई। उन्होंने कहा कि आज पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह की जयंती है। वाजपेयी और चौधरी चरण सिंह ने किसानों और मजदूरों के लिए काम किया। सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि अटल जी केवल एक राजनेता नहीं, एक युग, एक विचार और एक संस्कार थे। वे तार्किक दृष्टिकोण के धनी थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें भी वाजपेयी के सानिध्य में रहकर करीब से जानने का मौका मिला। मां भारती को लेकर उनकी भावनाओं में राष्ट्रप्रेम और विचारक की दृष्टि समाहित थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे राष्ट्र और हमारे विचारों को मजबूत करने में श्री वाजपेयी ने बड़ा काम किया है। आज भारतीय जनता पार्टी देश ही नहीं, दुनिया का सबसे बड़ा राजनैतिक दल बन चुका है। यह उन्हीं की देन है। इस अवसर पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी और डॉ प्रेमचंद बैरवा, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, सांसद घनश्याम तिवाड़ी, मंजू शर्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख अरुण जैन, भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अशोक परनामी, विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण और श्रोतागण उपस्थित रहे।  

कमीशन मांगने का मामला गरमाया, तीनों विधायक 6 जनवरी को विधानसभा में होंगे पेश

जयपुर एमएलए फंड में कमीशन मांगने वाले तीनों विधायकों को विधानसभा की सदाचार कमेटी ने एक बार फिर पूछताछ के लिए बुलाया है। सदाचार कमेटी ने तीनों विधायकों को नोटिस जारी कर 6 जनवरी को फिर पूछताछ के लिए पेश होने को कहा है। खींवसर से बीजेपी विधायक रेवंतराम डांगा,हिंडौन से कांग्रेस विधायक अनिता जाटव और बयाना से निर्दलीय ऋतु बनावत को एक ही दिन पूछताछ के लिए बुलाया है।  मई में रिश्वत लेते एसीबी में पकड़े गए बीएपी विधायक जयकृष्ण पटेल को भी सदाचार कमेटी ने नोटिस जारी कर 7 जनवरी को पूछताछ के लिए तलब किया है। पटेल के केस की जांच करने वाले एसीबी के जांच अधिकारी को भी बुलाया है। 19 दिसंबर को भी की थी  पूछताछ   तीनों विधायकों को सदाचार कमेटी ने 19 दिसंबर को भी विधानसभा तलब करके वन टू वन पूछताछ की थी। तीनों विधायकों से कमेटी ने कमीशन मांगने से जुड़े सवाल किए थे। तीनों विधायक उस दिन बेगुनाही के सबूत नहीं दे पाए थे। उस वक्त तीनों ने बेगुनाही के सबूज पेश करने के लिए समय मांगा था। रेवंतराम डांगा ने 15 दिन, अनीता ने 7 दिन और ऋतु ने 10 दिन का समय मांगा था, जिसे कमेटी ने मंजूर कर लिया था।  अब तीनों विधायकों को अलग-अलग दिन पूछताछ के लिए बुलाने की जगह एक ही दिन 6 जनवरी को पूछताछ के लिए तलब किया है। कमेटी के सभापति बोले- स्टिंग का वीडियो एफएसएल जांच के लिए भी भेज सकते हैं सदाचार कमेटी के सभापति कैलाश वर्मा ने कहा कि कमेटी की बैठकें लगातार चल रही है।  इन मामलों में  जितने अच्छे तरीके से अनुसंधान हो सकता है, तथ्यात्मक रिपोर्ट आ सकती है उसके बारे में निरंतर कमेटी काम कर रही है। आज भी बैठक हुई है। कल भी बैठक की थी। कल हमने तीनों विधायकों को नोटिस जारी करने का फैसला किया और तीनों को 6 जनवरी को तलब किया है। वर्मा ने कहा कि  तीनों विधायकों ने अलग अलग समय मांगा था। उसके हिसाब से वक्त देते हुए कमेटी ने नोटिस जारी कर पूरे सबूतों, दस्तावेजों और आॅडियो वीडियो के साथ तैयारी से आने को कहा है। विधायकों के पास जो रिपोर्ट्स और लिखित में जो देना चाहते हों, जो वीडियो या अन्य चीज पेश करना चाहते हैं वे दे सकते हैं। जरूरत पड़ी तो स्टिंग का वीडियो एफएसएल जांच के लिए भी भेज सकते हैं वर्मा ने कहा कि स्टिंग करने वाले पत्रकार से हमें वीडियो मिला है। विधायक अगर यह दावा करते हैं कि वीडियो में उनकी आवाज नहीं है या काट छांट है तो हम जरूरत पड़ने पर स्टिंग के वीडियो को एफएसएल जांच के लिए भी भेज सकते हैं। अभी इस पर निर्णय नहीं हुआ।  तीनों विधायकों  की बची हुई रिपोर्ट आने के बाद समिति सभी तथ्यों का अध्ययन करेगी, इसके बाद ही आगे फैसला करेगी। बजट सत्र से पहले रिपोर्ट तैयार कर सकती है समिति विधानसभा का बजट सत्र जनवरी के आखिर में शुरू होगा। सदाचार कमेटी बजट सत्र तक  कमीशन मांगने वाले विधायकों और बीएपी विधायक रिश्वत मामले में  रिपोर्ट तैयार कर सकती है। 6 जनवरी को तीनों विधायकों से पूछताछ के बाद कमेटी अगर संतुष्ट नहीं होती है तो उन्हें फिर नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। उसके बाद फाइनल रिपोर्ट तैयार होगी।

लिंग चयन पर रोक को लेकर गंभीर पहल, PCPNDT एक्ट पर हुई विशेष कार्यशाला

जयपुर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव (आरसीएच) मीरा श्रीवास्तव की अध्यक्षता में बुधवार को आरएएस क्लब सभागार में पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जिला समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी एवं जिला समन्वयक उपस्थित रहे। संयुक्त सचिव ने राजस्थान में पीसीपीएनडीटी के प्रभावी की क्रियान्वयन हेतु किए जा रहे प्रयासों को सराहा और कहा की यहां के अनुभव अन्य राज्यों में भी शेयर किए जाने चाहिए। उन्होंने "लडका-लड़की बराबर है, तो पूछना क्यों" स्लोगन पर आधारित अभियान के साथ ही जागरूकता अभियान को और भी प्रभावी तरीके से किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा आजकल ऑनलाइन वेबसाइटस पर बेबी ब्वॉय पैदा करने हेतु उपलब्ध विभिन्न प्रकार के वीडियो या अन्य तरह के कंटेंट जैसे पूजा करवाना आदि वाली 1000 वेबसाइट्स को ब्लॉक किया गया है। लेकिन अभी भी यह एक बड़ी चुनौती है, जिसका सामना करने के लिए राज्यों को भी पहल करनी होगी। राज्य ऐसी वेबसाइट्स को आईडेंटिफाई कर सहयोग पोर्टल के माध्यम से ब्लॉक करवाने की कार्रवाई करें।  संयुक्त सचिव ने कहा की सोनोग्राफी मशीनों के रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल के लिए एक टाइम फ्रेम तैयार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समय के साथ आमजन में बेटी बेटा एक समान की धारणा को बदलने के लिए और भी अपडेट होकर प्रयास किया जाना चाहिए। अध्यक्ष राज्य समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी एवं मिशन निदेशक एचएचएम डॉ. अमित यादव ने प्रदेश में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत किया जा रहे प्रयासों पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही उन्होंने समुदाय में जागरूकता पैदा करने के लिए नवाचार किए जाने पर आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने नागौर में बालिका वाटिका नवाचार का उदाहरण देते हुए कहा कि अन्य जिलों में भी ऐसे नवाचार किए जाएं।  केंद्रीय उपयुक्त पीसीपीएनडीटी डॉक्टर पद्मिनी कश्यप ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के वर्तमान परिपेक्ष्य, मॉनिटरिंग हेतु प्रमुख इंडीकेटर और मुख्य चुनौतियां विषय पर विस्तार से जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि राजस्थान में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत किया जा रहे प्रयासों का परिणाम एसआरएस के आंकड़ों में देखने को मिल रहा है। एसआरएस वर्ष 2021-23 के आंकड़ों के अनुसार अभी राजस्थान में लिंगानुपात 921 है। पीसीपीएनडीटी एवं जेंडर स्पेशलिस्ट इफात हमीद ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों एवं इनसे  जुड़े प्रमुख न्यायिक  फैसलों और प्रोसीजर के बारे में विस्तार से अवगत कराया। परियोजना निदेशक पीसीपीएनडीटी राकेश कुमार मीणा ने सभी अतिथियों का धन्यवाद दिया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पीसीपीएनडीटी हेमंत कुमार ने प्रदेश में पीबीआई थाना और डिकाय ऑपरेशन के बारे में विस्तार से अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला में ओएसडी संतोष गोयल सहित संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।  

राजस्थान पंचायत चुनाव अपडेट: बढ़ा चुनावी खर्च, तांगा-ऊंट और बैलगाड़ी से प्रचार नहीं होगा

जयपुर  पंचायती राज संस्थाओं (PRI) और शहरी स्थानीय निकाय (ULB) चुनावों में प्रत्याशियों के लिए खर्च सीमा बढ़ा दी गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी करते हुए चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा को दोगुना कर दिया है। साथ ही चुनाव प्रचार के दौरान वाहनों और लाउडस्पीकरों के उपयोग पर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों में प्रत्याशी बड़े वाहन या पशु-चालित गाड़ियों का उपयोग नहीं कर सकेंगे। बस, ट्रक, मिनी बस, मेटाडोर के साथ-साथ तांगा, ऊंटगाड़ी और बैलगाड़ी जैसे पशु-चालित वाहनों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। आयोग ने नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। सरपंच के लिए खर्च सीमा 1 लाख, अन्य के लिए ये… पंचायती राज चुनावों में सरपंच पद के लिए खर्च सीमा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है। पंचायत समिति सदस्य के लिए यह सीमा 75 हजार से बढ़कर 1.5 लाख रुपये और जिला परिषद सदस्य के लिए 1.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई है। शहरी निकाय चुनावों में नगर निगम पार्षदों की खर्च सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर 3.5 लाख रुपये, नगर परिषद पार्षदों की 1.5 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपये और नगर पालिका पार्षदों की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है। 15 दिन में पेश करना होगा खर्च का रिकॉर्ड प्रत्याशियों को निर्धारित सीमा से अधिक खर्च करने की अनुमति नहीं होगी। चुनाव के 15 दिन के भीतर जिला निर्वाचन अधिकारी को खर्च का पूरा विवरण देना अनिवार्य होगा, अन्यथा कार्रवाई की जा सकती है। वाहनों की संख्या भी सीमित कर दी गई है। जिला परिषद और नगर निगम प्रत्याशी अधिकतम तीन, पंचायत समिति और नगर परिषद प्रत्याशी दो, जबकि सरपंच और नगर पालिका प्रत्याशी केवल एक वाहन का उपयोग कर सकेंगे। वाहनों की जानकारी पहले रिटर्निंग ऑफिसर को देनी होगी। इसके अलावा, चुनाव कार्यालयों पर लाउडस्पीकर के उपयोग पर रोक रहेगी। अस्पतालों, स्कूलों और धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में लाउडस्पीकर पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। लाउडस्पीकर का उपयोग सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक ही, वह भी मजिस्ट्रेट की अनुमति से किया जा सकेगा। चुनावी रैलियों के लिए भी पूर्व अनुमति जरूरी होगी।

सरस राजसखी मेले में दिखा भारत–एक सूत्रधार, परंपरा और तकनीक ने रचा नया रंग

जयपुर भारत को एक सूत्र में पिरोने की भावना को साकार करती “भारत – एक सूत्रधार” की थीम पर आधारित सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला-2025 इन दिनों लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आए हस्तशिल्प, वस्त्र, व्यंजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भारतीय विविधता की एक जीवंत तस्वीर पेश कर रही हैं। मेले के दौरान एनआईएफ ग्लोबल जयपुर, कमला पोद्दार इंस्टीट्यूट एवं राजीविका के संयुक्त तत्वावधान में डिजिटल सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने हेतु एक जागरूकता नाट्य प्रस्तुति भी दी गई। इस प्रस्तुति के माध्यम से आत्मविश्वास, ग्रूमिंग तथा डिजिटल टूल्स के महत्व को सरल और प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। नाट्य दृश्यों के जरिए यह संदेश दिया गया कि कॉन्फिडेंट कम्युनिकेशन और प्रभावी प्रेज़ेंटेशन से ग्राहक जुड़ाव बेहतर होता है, वहीं ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम और कैशलेस लेन-देन आज के डिजिटल युग में व्यवसाय की आवश्यकता बन चुके हैं। इसके साथ ही वाट्सअप, वाट्सअप बिजनेस और इंस्टाग्राम  जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से घर बैठे व्यवसाय विस्तार, ऑर्डर मैनेजमेंट, डिलीवरी तथा उत्पाद प्रचार के तरीकों को भी प्रस्तुत किया गया। एनआईएफ ग्लोबल जयपुर और कमला पोद्दार इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स द्वारा मंचित इस नाट्य प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा और इसे डिजिटल साक्षरता एवं आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सार्थक पहल बताया। मेले में टेक्सटाइल सेक्शन में खास तौर पर महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली। पंजाब, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों से आए पारंपरिक वस्त्र अपनी विशिष्ट पहचान और आकर्षक बनावट के कारण खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। रंग-बिरंगे परिधान, बारीक हस्तनिर्मित डिज़ाइन, पारंपरिक कढ़ाई और क्षेत्रीय कला की झलक ने खरीदारों को अपनी ओर आकर्षित किया है। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान कलाकारों द्वारा प्रस्तुत राजस्थानी लोक नृत्य और मधुर मांड गायन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं बिहार के पारंपरिक लोक नृत्य- जजिया और जाट-जतिन- की जीवंत और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने माहौल को और भी उत्साहपूर्ण बना दिया। दर्शकगण तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन करते नजर आए और पूरा परिसर उत्सवधर्मी वातावरण में डूब गया।