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कर्मचारियों को बड़ी राहत: अब हरियाणा के बोर्ड, निगम व सहकारी संस्थाओं में भी लागू होगी DCRG सुविधा

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने एक जनवरी, 2006 के बाद सेवा में आए और न्यू डिफाइंड कॉन्ट्रिब्यूटरी पेंशन स्कीम (एनपीएस) के अंतर्गत आने वाले बोर्डों, निगमों, कम्पनियों और सहकारी संस्थाओं के कर्मचारियों को भी मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति उपादान (डैथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्यूटी) का लाभ देने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी, जिनके पास वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का दायित्व भी है, द्वारा राज्य के सभी बोर्डों, निगमों, कम्पनियों और सहकारी संस्थाओं के प्रबंध निदेशकों, मुख्य प्रशासकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को एक पत्र जारी किया गया है। पत्र में वित्त विभाग के 19 जनवरी, 2017 का हवाला देते हुए बताया गया है कि एनपीएस के अंतर्गत आने वाले राज्य सरकार के कर्मचारी उसी तरह रिटायरमेंट ग्रेच्यूटी तथा डैथ ग्रेच्यूटी प्राप्त करने के पात्र होंगे, जो सीएसआर वॉल्यूम-2 के अंतर्गत कर्मचारियों को प्रदान किए जाते हैं। सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मामलों की पूरी जांच और सत्यापन के बाद ही रिटायरमेंट/डैथ ग्रेच्यूटी प्रदान की जाए। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन उपादानों के कारण बढ़ने वाले वित्तीय दायित्वों को सम्बन्धित बोर्ड या निगम द्वारा स्वयं के संसाधनों से पूरा किया जाएगा।

एंटी करप्शन की कार्रवाई: किसान से घूस मांग रहा पटवारी गिरफ्तार

हांसी  हांसी में विजिलेंस विभाग ने मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पटवारी अजीत को 5 हजार रूपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई भाटला गांव के एक किसान की शिकायत पर की गई, जिसने नक्शा और बदर बनवाने के लिए पटवारी से संपर्क किया था। किसान ने बताया कि पटवारी ने कुल 9,500 रूपये की रिश्वत मांगी थी, जिसमें से वह पहले ही 4,500 रूपये दे चुका था। बाकि 5 हजार रूपये की राशि लेते समय विजिलेंस टीम ने मौके पर छापा मारा।  सूत्रों के अनुसार, पटवारी अजीत ने गोविंद नामक व्यक्ति को अपना सहयोगी बना रखा था, जिसने किसान से यह 5 हजार रूपये की रिश्वत ली थी। विजिलेंस टीम ने पूर्व योजना के तहत गोविंद के माध्यम से रिश्वत की रकम दिलवाई। जैसे ही गोविंद ने पैसे लिए, रासायनिक जांच में उसके हाथ रंगीन हो गए, जिसके बाद टीम ने पटवारी अजीत और उसके सहयोगी गोविंद दोनों को हिरासत में ले लिया।   इस कार्रवाई के दौरान हांसी के SDM राजेश खोथ को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था और वे पूरी प्रक्रिया के समय मौके पर मौजूद रहे। विजिलेंस टीम ने घटनास्थल से आवश्यक सबूत जुटाए हैं। विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, मामले की विस्तृत जांच जारी है।

चंडीगढ़ अधिकार पर गरमायी राजनीति: अभय चौटाला बोले—सरकार रक्षा करने में पूरी तरह नाकाम

जींद  इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने कहा कि हरियाणा को चंडीगढ़ पर अपना पूरा अधिकार किसी भी स्थिति में नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग विधानसभा की मांग को केंद्र द्वारा खारिज किया जाना प्रदेश सरकार की कमजोरी दिखाता है। मंगलवार को जींद स्थित इनेलो कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अभय सिंह चौटाला ने कहा कि जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, तब शाह आयोग ने चंडीगढ़ को हरियाणा को सौंपने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर केंद्र से चंडीगढ़ पर हरियाणा के पूर्ण अधिकार देने की औपचारिक मांग रखनी चाहिए और शाह आयोग की रिपोर्ट की प्रति भी केंद्र को भेजनी चाहिए। 'भाजपा शासन में कानून व्यवस्था कमजोर' अभय सिंह चौटाला ने कहा कि भाजपा शासनकाल में प्रदेश में कानून व्यवस्था बेहद कमजोर हुई है। लोगों से फिरौती मांगे जाने की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें भी धमकी दी गई है और इसके बाद उन्होंने केंद्रीय सुरक्षा बलों की सुरक्षा मांग की है। चौटाला ने कहा कि उनकी सुरक्षा तो प्रदेश के युवा कर लेंगे, पर जनता की सुरक्षा कौन करेगा। उन्होंने कहा कि जिस मोबाइल नंबर से धमकी दी गई, वह आज भी सक्रिय है, जिससे स्पष्ट है कि सरकार ने इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इनेलो नेता ने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के उस बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि हर व्यक्ति को सुरक्षा नहीं दी जा सकती। चौटाला ने इनेलो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नफे सिंह राठी की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि सीबीआई जांच के बावजूद आज तक नामजद आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए हैं। पूर्व डीजीपी शत्रुजीत कपूर की संभावित दोबारा नियुक्ति पर उन्होंने कहा कि अगर वह निर्दोष थे, तो उन्हें हटाया क्यों गया था। इससे साफ होता है कि सरकार आईपीएस अधिकारी वाई पूर्ण कुमार की आत्महत्या मामले में सिर्फ लीपापोती करना चाहती थी। साजिश करने वालों से मंगवाएंगे माफी अपनी आलोचना करने वालों पर तंज करते हुए अभय सिंह चौटाला ने कहा कि उनकी छवि खराब करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर आईपीएस आरएस यादव को चौटाला पुलिस चौकी में जूते मारे गए थे, तो उन्होंने उसी समय शिकायत क्यों नहीं की।महम कांड पर आज जो लोग अनर्गल  बयानबाजी कर रहे हैं, वह जब सत्ता में थे, तब उन्होंने जांच क्यों नहीं करवाई। चौटाला ने कहा कि इनेलो की लोकप्रियता से बौखलाए लोग उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, और ऐसे सभी लोगों से वह अदालत में माफी मंगवाएंगे। कांग्रेस को बताया कमजोर विपक्ष इनेलो नेता ने कहा कि कांग्रेस जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि रोहतक की एमडीयू जो ए ग्रेड यूनिवर्सिटी थी, वह अब ग्यारहवें पायदान पर पहुंच गई है। यहां से पीएचडी सहित दूसरी डिग्रियां लेने वाले युवाओं की नौकरी अब संदेह में पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जींद की चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी में स्कूल कैडर के एक अध्यापक को महत्वपूर्ण पद दिया गया है, जो आरएसएस के अपने कैडर को आगे बढ़ाने का प्रयास है। इससे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इस दौरान जिला प्रधान बिजेंद्र रेढू और प्रदीप गिल भी मौजूद रहे।

7 दिन तक बंधक बनी रहीं जुड़वा बहनें: सिरसा पुलिस ने ऐसे छुड़ाया अपहरणकर्ताओं से

सिरसा  सिरसा जिले में जुड़वा बहनों का अपहरण का मामला सामने आया है। दोनों नाबालिग हैं। वह दोनों लकड़ी बीनने गई थी तब कार सवार महिला व उसके साथियों ने उनका अपहरण कर लिया।  दोनों बहनों ने बताया कि उनको सात दिन तक पानीपत में बंद कमरे में बंधक बनाया था। दोनों वहां से रविवार को किसी तरह से निकल गईं और रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर जीआरपी थाना से मदद मांगी। जीआरपी ने मामले की जांच की और सिरसा पुलिस व उनके परिजनों को सूचना दी जिसके बाद परिजन रात को पानीपत पहुंच गए। सोमवार सुबह दोनों बहनों को परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया। उधर, सिरसा पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।  बता दें कि रविवार देर शाम को रेलवे स्टेशन पर करीब 12 साल की जुड़वा बहनें पहुंची और पुलिसकर्मियों को देखकर रोने लगी। एक ने बताया कि वह सिरसा जिले के सदर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली है। वह 24 नवंबर को घर से जंगल में लकड़ियां लेने गई थीं। तभी एक कार उनके पास आई। जिसमें से एक महिला व युवक उतरा और उनके पास आ गए। इसी बीच उन्होंने उनके मुंह पर रूमाल रख दिया दिया जिससे वह बेसुध हो गईं। जब उन्हें होश आया तो वह एक कमरे में बंद थे। जहां पर सात दिन तक उन्हें बंधक बनाकर रखा गया। जब भी उन्हें होश आता तो उनके मुंह पर रूमाल रख दिया जाता था।  रविवार शाम को किसी तरह से वह दोनों कमरे से निकल गईं। 

गौरव का पल: हरियाणा के युवा ने भारत की दिव्यांग क्रिकेट टीम में बनाई जगह, पूरे जिले में खुशी की लहर

गोहाना  ICC दिव्यांग इंडो नेपाल क्रिकेट अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगियों के लिए गोहाना के दौदवा गांव के विनोद का भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम में सिलेक्शन हुआ है। विनोद के सलेक्शन को लेकर आसपास के लोगों में खुशी का माहौल है। विनोद एक बहुत ही गरीब परिवार से संबंध रखता है। विनोद गोहाना आहुलाना शुगर मिल में माली का काम भी करता है। विनोद भिवानी में होने वाली तीन दिवसीय इंडो नेपाल क्रिकेट अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए आज गोहाना से रवाना हुए। यह क्रिकेट प्रतियोगिता तीन दिसम्बर से पांच दिसंबर तक भिवानी में आयोजित होनी है। विनोद ने बताया कि खुद दिव्यांग होने के कारण उसने बहुत कठिन परिश्रम किया है। वह एक गरीब परिवार से आता है। उसके पिता  मजदूरी करते थे। उसने भी पढ़ाई के साथ साथ मजदूरी की है। उसका क्रिकेट के प्रति बहुत लगाव था। पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट भी खेलता था। मैं दिव्यांग भी हूं और परिवार की गरीबी के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी, लेकिन क्रिकेट नहीं छोड़ा। सभी अपने फील्ड में आगे बढ़ते है। मैंने अपने क्रिकेट को लेकर काफी लगन रखते हुए क्रिकेट खेलना जारी रखा। आज मेरा इंडो नेपाल क्रिकेट प्रतियोगिता के लिए सलेक्शन हुआ है। यह प्रतियोगिता भिवानी में आयोजित हो रही है। भारत और नेपाल की क्रिकेट टीमों के बीच मैच होगा। वहीं उसके बाद कुछ देशों की वर्ल्ड स्तरीय क्रिकेट सीरीज होगी। उसके लिए भी मैं अपनी तैयारी कर रहा हूं। वहीं स्थानीय लोगों ने कहा कि विनोद बहुत ही मेहनतशील है। उसका क्रिकेट के प्रति जुनून अलग है। आज भारतीय टीम में सलेक्शन हुआ उसके लिए बहुत खुशी हो रही है।

स्वास्थ्य विभाग में डिजिटल संकट: एमपीएचडब्ल्यू के बहिष्कार से ऑनलाइन सेवाएं ठप

चंडीगढ़  हरियाणा में बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मचारी (एमपीएचडब्ल्यू) वर्ग द्वारा ऑनलाइन स्वास्थ्य पोर्टल का बहिष्कार जारी है। एसोसिएशन के आह्वान के बाद यह आंदोलन गत 25 अक्टूबर से चल रहा है, जिसके कारण प्रदेश की बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं की डिजिटल मॉनिटरिंग लगभग ठप पड़ी हुई है। अब सिर्फ ऑफलाइन कार्य ही किए जा रहे हैं। इस डिजिटल बंदी का असर गर्भवती महिलाओं के आरसीएच नंबर आधारित अल्ट्रासाउंड, टीकाकरण का रिकॉर्ड, आशा वर्कर का भुगतान, टीबी मरीजों का निक्षय पोर्टल, निरोगी हरियाणा और आयुष्मान भारत जैसे कई कार्यक्रमों पर पड़ा है। एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष शर्मिला देवी, उप प्रधान सुदेश रानी व वित्त सचिव धर्मवीर ने बताया कि उनकी मांगों पर सरकार द्वारा लगातार अनदेखी के कारण यह कदम मजबूरी में उठाया गया है। उन्होंने कहा कि आम लोगों को हो रही असुविधा का हमें खेद है, लेकिन हमारी जायज मांगों के बिना ऑनलाइन काम संभव नहीं। राज्य प्रेस सचिव संदीप कुंडू के अनुसार, अनमोल, एनसीडी, डिजीज सर्विलांस, सुरक्षित नारी-सुरक्षित परिवार, एनीमिया मुक्त भारत सहित कुल 11 डिजिटल पोर्टलों पर लगभग 88 प्रतिशत तक कार्य बंद हो चुका है, जिससे डिजिटल मॉनिटरिंग लगभग निष्क्रिय हो गई है। आज काले बिल्ले लगाकर टीकाकरण राज्य महासचिव सहदेव आर्य ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार जारी रहेगा। उनकी ओर से पदनाम संशोधन, प्रमोशन व कन्फर्मेशन सूची जारी करना, एनएचएम महिला कर्मचारियों को एफपीएल-6 वेतनमान, ड्रेस, ट्रैवलिंग व एमसीएच भत्ता, रिटायरमेंट लाभ व ग्रेच्युटी तथा खाली पदों पर नियमित भर्ती की मांग उठाई जा रही है। आंदोलन के तहत कर्मचारी बुधवार को टीकाकरण दिवस पर काले बिल्ले लगाकर विरोध जताएंगे। इसके बाद 29 जनवरी को पंचकूला में मिशन निदेशक कार्यालय के बाहर राज्य व जिला पदाधिकारी सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक उपवास रखकर मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे।

स्कूल बस सुरक्षा पर बड़ा एक्शन: हरियाणा में 5200 प्राइवेट बसें मानकों पर फेल, जांच अभियान तेज

चंडीगढ़  हरियाणा में स्कूल बसों की मॉनिटरिंग अब कागजों में नहीं, बल्कि सीधे सड़कों पर दिखाई दे रही है। लंबे समय से मिल रही शिकायतों, सोशल मीडिया पर उठ रही आवाजों और लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद राज्य पुलिस ने स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच शुरू की, जिसने एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने रख दी। हरियाणा की सड़कों पर दौड़ रही 25 हजार से अधिक स्कूल बसों में से 5200 सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरीं। कई बसें बिना फिटनेस, बिना जीपीएस, बिना फायर एक्सटिंग्विशर और कई मामलों में बिना प्रशिक्षित ड्राइवरों के बच्चों को लेकर चल रही थीं। इन हालात में हरियाणा पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि अब समझाओ या चेतावनी देकर छोड़ दो वाली नीति खत्म हो चुकी है।   हरियाणा पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि हालिया जांच सिर्फ औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसे मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। तीन नवंबर से दस नवंबर के बीच चलाए गए विशेष अभियान में पांच हजार पांच सौ सोलह बसों की जांच की गई और एक हजार तीन बसों के चालान किए गए। इसी अवधि में सिरसा और डबवाली में मिली चार बसों को मौके पर ही जब्त कर लिया गया। इससे पहले जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच की गई जांच में 19 हजार दो सौ अड़सठ बसों में से चार हजार दो सौ पांच नियम तोड़ती पाई गईं। सूत्रों के अनुसार यह चेकिंग अब रुकने वाली नहीं है। अभियान को निरंतर निगरानी व्यवस्था में बदला जा रहा है। जिलों को निर्देश हैं कि स्कूल बसों का डेटा नियमित रूप से अपडेट रखें और दस्तावेजों का समय पर सत्यापन करें। हरियाणा में पहली बार स्कूल परिवहन को लेकर इतना व्यापक, सख्त और परिणाम आधारित एक्शन देखने को मिल रहा है। संदेश साफ है कि बसें चलेंगी, लेकिन नियमों के साथ। बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता है और अब कानून कागज पर ही नहीं, सड़क पर भी दिखाई देगा। किन जिलों में मिले सबसे अधिक उल्लंघन गुरुग्राम, पंचकूला, सोनीपत, सिरसा, जींद, फरीदाबाद और पलवल में सबसे ज्यादा अनियमितताएं सामने आईं। अकेले गुरुग्राम में जनवरी से अक्तूबर के दौरान हुई जांच में पांच हजार नौ सौ चौरासी बसों में से एक हजार आठ सौ इक्यावन बसें नियमों को तोड़ती हुई मिलीं। बाकी जिलों में भी स्थिति चिंताजनक है। सबसे कम उल्लंघन रेवाड़ी में दो, डबवाली में नौ और चरखी दादरी में छह बसों में दर्ज किए गए। सिरसा और डबवाली में हालात इतने खराब मिले कि पुलिस ने मौके पर ही चार बसें इम्पाउंड कर दीं। कई बसों में सुरक्षा उपकरण तक नहीं लगे थे और वे स्कूल बसों के लिए तय राष्ट्रीय मानकों पर भी खरी नहीं उतरती थीं। DGP ने दिए सख्त आदेश हरियाणा पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट के माध्यम से स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वाली स्कूल बसों को तुरंत इम्पाउंड किया जाए। उन्होंने लिखा कि असुरक्षित बसों को सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बच्चों की सुरक्षा के साथ समझौता अस्वीकार्य है। उनकी यह पोस्ट सीधे चेतावनी मानी जा रही है और इसे स्कूलों, बस ऑपरेटरों तथा प्रशासनिक स्तर पर एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि अब कोई नरमी नहीं मिलेगी।   स्कूल बस में क्या-क्या होना जरूरी नियमों के अनुसार हर स्कूल बस में होना जरूरी है • वैध फिटनेस सर्टिफिकेट • जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम • फायर एक्सटिंग्विशर • फर्स्ट एड बॉक्स • कैमरा जहां लागू हो • आपातकालीन निकास • प्रशिक्षित चालक और परिचालक • सीट बेल्ट और स्कूल बस के लिए निर्धारित पहचान मार्किंग। इनमें से किसी भी बिंदु का पालन नहीं होने पर चालान, बस इम्पाउंड और कानूनी कार्रवाई तय है। अभिभावकों को भी दी गई जिम्मेदारी हरियाणा पुलिस ने केवल स्कूलों और बस मालिकों के प्रति ही निर्देश जारी नहीं किए हैं, बल्कि अभिभावकों को भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि अभिभावक अपने बच्चे की बस की स्थिति जानें, सवाल पूछें और गड़बड़ी दिखने पर तुरंत पुलिस या जिला प्रशासन को सूचित करें। सरकार चाहती है कि यह अभियान सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि सामुदायिक जागरूकता का हिस्सा बने।

राज्य का सबसे बड़ा एnti-Drug अभियान: सिरसा–फतेहाबाद बेल्ट में 45 दिन की कार्रवाई से माफिया में हड़कंप

चंडीगढ़  हरियाणा पुलिस ने ड्रग तस्करी के खिलाफ अब तक का सबसे जोरदार और खुफिया-आधारित अभियान चलाते हुए सिरसा, फतेहाबाद और डबवाली में ड्रग ट्रेड की रीढ़ पर सीधा प्रहार किया है। 15 अक्टूबर से शुरू हुए इस अभियान ने सिर्फ केस दर्ज नहीं किए, बल्कि सप्लाई चेन के हर स्तर, सप्लायर से लेकर मेडिकल नेटवर्क और फाइनेशियल चैनल तक को निशाने पर लिया। ये ऑपरेशन ज्यादातर रात में, खासतौर पर बॉर्डर बेल्ट, ढाबों, खेतों और ट्रांजिट पॉइंट्स पर चलाए गए। पुलिस की नई रणनीति का असर दोनों अवधियों की तुलना में साफ दिखता है और यह स्पष्ट करता है कि यह सिर्फ अलग-अलग छापे नहीं बल्कि संगठित नेटवर्क-डिसरप्शन वार था। पहली अवधि में जहां 105 मामले दर्ज हुए थे, वहीं दूसरी अवधि (16 अक्टूबर से 30 नवंबर) में यह संख्या बढ़कर 153 हो गई। केस ज्यादा होने का मतलब अपराध बढ़ना नहीं, बल्कि नेटवर्क का खुलना है। पुलिस पहली बार उन जगहों तक पहुंची, जहां से ड्रग कोर सप्लाई होती है। गिरफ्तारियां बढ़ीं, गैंग की कमर टूटने लगी पहले 45 दिनों में 257 गिरफ्तारियां हुई थीं, जबकि दूसरी अवधि में 342 आरोपी पकड़े गए। सिर्फ सिरसा में ही 83 और फतेहाबाद में 18 अतिरिक्त गिरफ्तारियां हुईं। इससे साफ है कि इस बार टारगेट सिर्फ यूजर नहीं, बल्कि कोर सप्लायर और मिड-रूट एजेंट थे। सबसे बड़ा झटका तस्करी नेटवर्क को इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि सप्लायरों की पहचान और गिरफ्तारी को अंजाम दिया गया। पहले चरण में 91 सप्लायर पकड़े गए थे, जबकि दूसरे चरण में यह संख्या 160 पर जा पहुंची। इनमें से 86 सप्लायर गिरफ्त में आए। पुलिस की बरामदगी अब पाउच लेवल नहीं, बल्कि हाई-वैल्यू ड्रग लेवल पर दिख रही है। एक किलो 271 ग्राम हेराेइन और 13 किलो 714 ग्राम फीम बरामद की गई। ड्रग माफिया की प्रॉपर्टी पर बड़ा प्रहार आर्थिक स्तर पर कार्रवाई में भी रिकॉर्ड उछाल देखा गया। पहले 15 मामलों में कुर्की हुई थी, अब यह आंकड़ा पहुंचा 27 पर। यह मॉडल बताता है कि पुलिस अब सिर्फ पकड़ने तक नहीं बल्कि इकोनॉमिक लाइफलाइन काटने वाली रणनीति पर चल रही है। पहले केवल तीन मेडिकल स्टोर सील हुए थे, जबकि इस बार यह संख्या 23 पहुंच गई। जिन पर कोडीन सिरप, ट्रामाडोल और ओवर-द-काउंटर ड्रग्स की अवैध सप्लाई का संदेह था।   हिस्ट्रीशीट खुली, अब लगातार निगरानी पहली अवधि में 12 हिस्ट्रीशीट खोली गई थीं, जबकि इस बार 36 खुलीं। इसका मतलब है कि पुलिस इन तस्करों का डिजिटल, बैंकिंग और मूवमेंट ट्रैकिंग कर रही है। डीजीपी ओपी सिंह का कहना है कि इस अभियान में पुलिस ने 375 अधिक युवाओं को नशा मुक्ती सिस्टम में शामिल किया। यह बताता है कि ऑपरेशन सिर्फ दमन नहीं बल्कि रिफॉर्म + इंटेलिजेंट एनफोर्समेंट मॉडल है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पुलिस ऑपरेशन नहीं, समाज की सुरक्षा का युद्ध है। हमारा लक्ष्य सप्लाई चेन का खात्मा और युवाओं को नशे से दूर करना है।

शहरों की विकास योजनाएं फोकस में: 11 दिसंबर को सरकार लेगी बड़ा रिव्यू

चंडीगढ़  हरियाणा के शहरों की विकास योजनाओं, सफाई व्यवस्था और अधूरी पड़ी परियोजनाओं को लेकर राज्य सरकार अब पूरी तरह सख्त हो गई है। इसी क्रम में 11 दिसंबर को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में एक बड़ी समीक्षा बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में राज्य के सभी नगर निगमों एवं नगर परिषदों को अपनी-अपनी प्रगति रिपोर्ट लेकर उपस्थित होना अनिवार्य किया गया है। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रधान सचिव तथा शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण कुमार गुप्ता करेंगे। बैठक को लेकर पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि अब केवल कागज़ी प्रगति नहीं, बल्कि जमीन पर हुए कार्यों की स्थिति बतानी होगी। जारी निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि सभी संबंधित विभाग और अधिकारी अपनी शाखाओं से संबंधित प्रस्तुति 10 दिसंबर सुबह 11 बजे तक जमा करें। निर्धारित समय में रिपोर्ट न देने पर विभागीय रिकॉर्ड में ‘प्रस्तुति उपलब्ध नहीं’ लिख दिया जाएगा। इसका मकसद वर्षों से चल रही ढिलाई पर पूर्ण विराम लगाना है। बैठक में कई महत्वपूर्ण और पुराने लंबित मुद्दों पर सीधे समीक्षा होगी और विभागीय जवाब मांगा जाएगा। स्मार्ट रोड योजना के तहत सभी शहरों में सड़कों की पहचान और कार्य प्रगति पर बैठक में विस्तार से चर्चा होगी। इन मुद्दों पर ली जाएगी रिपोर्ट     स्वामित्व योजना के लंबित मामलों का निपटारा     सफाई व्यवस्था, कचरा निस्तारण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन     अवैध विज्ञापनों पर नियंत्रण और नई व्यवस्था     नगर निगमों की संपत्तियों का उपयोग, किराया वसूली और राजस्व प्रबंधन     आवारा पशुओं पर नियंत्रण और जल निकासी व्यवस्था     स्ट्रॉम वाटर ड्रेनेज सिस्टम और गंदे पानी की निकासी     शहरों में पुस्तकालय, सामुदायिक भवनों और सार्वजनिक स्थलों का विकास     निगमों में फील्ड विजिट अनिवार्य करना ताकि जमीनी हकीकत का पता लगे     नगर निकायों में तैनात मशीनों और कर्मचारियों की कमी, निगरानी व्यवस्था, नागरिक शिकायतों की स्थिति और पारदर्शी टैगिंग प्रणाली पर भी सवाल उठेंगे। स्वच्छता और प्रदूषण पर विशेष निगरानी हरियाणा स्वच्छता अभियान 2025 के तहत शहरों को साफ-सुथरा बनाने की योजना बैठक का प्रमुख मुद्दा होगा। गार्बेज वल्नरेबल पॉइंट्स हटाने, कचरा संग्रहण वाहनों की संख्या, ठोस कचरा प्रबंधन इकाइयों और गंदगी से जुड़े नागरिक शिकायतों पर विभाग की कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। इसी तरह वायु प्रदूषण को लेकर एनसीआर क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) लागू करने, एंटी धुंध तोपों की व्यवस्था, पानी का छिड़काव और ईंधन से चलने वाले वाहनों पर नियंत्रण की दिशा में भी कार्यवाही रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अधिकारियों का फील्ड विजिट अनिवार्य सरकार की ओर से निकायों को जारी किए गए मीटिंग नोटिस के अनुसार, अधिकारियों को केवल दफ्तर में बैठकर फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं करने, बल्कि नियमित फील्ड विज़िट करने का आदेश दिया गया है। यह भी कहा गया है कि रिपोर्ट में यह साफ लिखा जाए कि कब कौन-सा क्षेत्र निरीक्षण किया गया और मौके पर क्या स्थिति मिली। अब सीधे कार्रवाई की तैयारी नोटिसों की भाषा और एजेंडा दोनों यह संदेश दे रहे हैं कि अब पुरानी प्रणाली नहीं चलेगी। बैठक के बाद काम में देरी, योजनाओं को अधर में छोड़ने और बार-बार एक जैसे बहाने देने वाले अधिकारी सीधे जवाबदेही के दायरे में आएंगे। हरियाणा सरकार की ओर से यह साफ संकेत है अब विकास योजनाओं की गति धीमी नहीं रहने दी जाएगी। जो काम करेगा, वही सिस्टम में टिकेगा। जिस पर लापरवाही सिद्ध होगी, उस पर कार्रवाई तय है।

सर्दी में बीमारी से बचना है जरूरी? डॉक्टर गिरीश बंसल की ये 5 सलाह रखें याद

चंडीगढ़ जाने माने एम डी मैडिसन डॉक्टर गिरीश बंसल ने कहा है कि बढ़ती सर्दी में केवल सुबह की धूप में सैर ही लाभकारी है।शाम की सैर का ठंड और प्रदूषण के बढ़ने से परहेज करना चाहिए। डॉक्टर गिरीश डी वाई मेडिकल कॉलेज पूना से एम बी बी एस व एम डी मैडिसन करने के बाद 32 मेडिकल कॉलेज में रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में पंचकूला नागरिक हॉस्पिटल में कार्यरत हैं। सर्दियों में एम डी मैडिसन डॉक्टर गिरीश बंसल की सलाह है कि ठंड से बचें, पौष्टिक भोजन करें और हाइड्रेटेड रहें। नियमित व्यायाम करें, लेकिन सुबह जल्दी सैर करने से बचें, खासकर अगर आपको दिल या फेफड़ों की बीमारी है; इसके बजाय हल्की धूप में या शाम को टहलें। यदि कोई भी बीमारी के लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें, खासकर अगर वे बढ़ जाएं।  डॉक्टर गिरीश बंसल का कहना है कि गर्म कपड़े पहनें,हाइड्रेटेड रहें और त्वचा को सूखने से बचाएं।आहार में विटामिन डी के लिए धूप का आनंद लें और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक व मौसमी खाद्य पदार्थ खाएं। सूखे मेवे जैसे बादाम, अखरोट और किशमिश फायदेमंद होते हैं।नियमित रूप से व्यायाम करें लेकिन बहुत सुबह और बहुत ठंडे समय में बाहर जाने से बचें। अगर आपको कोई बीमारी है तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही व्यायाम शुरू करें। हर रात 7-9 घंटे की पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करने के लिए ध्यान या गहरी सांस लेने जैसी तकनीकों का उपयोग करें। बीमार लोगों से दूर रहें, हाथ बार-बार धोएं और चेहरे को छूने से बचें। यदि डॉक्टर सलाह दें तो फ्लू का टीका लगवाएं।  डॉक्टर गिरीश बंसल का कहना है कि दिल के रोगी: ठंड में विशेष ध्यान रखें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें और सामान्य से ज़्यादा खाने से बचें। श्वसन संबंधी समस्या वाले मरीज़ अस्थमा, सीओपीडी, आदि सुबह बहुत जल्दी बाहर न जाएं। डॉक्टर की सलाह लें और लक्षणों पर नज़र रखें। अगर दिक्कत हो तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। खांसी, जुकाम या बुखार जैसे लक्षण दिखने पर घर पर पारंपरिक उपचार लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।