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हरियाणा में बड़ा हेल्थ स्कैम: Panipat ESI रेफरल घोटाले की जांच ACB को, CM सैनी का एक्शन

चंडीगढ़. पानीपत के ईएसआइ अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करने का खेल उजागर होने के बाद प्रदेश सरकार सख्त हो गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पूरे मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंपने का निर्देश दिया है। अनियमितताओं में संलिप्त पानीपत ईएसआइ अस्पताल के तीन कर्मचारियों को निलंबित करते हुए पांच चिकित्सा अधीक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही छह निजी अस्पतालों को तुरंत पैनल से बाहर करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को समीक्षा बैठक में ईएसआइ हेल्थ केयर सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश जारी करते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को सहन नहीं किया जाएगा। इन अस्पतालों ने वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान अत्यधिक रेफरल किए थे और रेफरल प्रपत्रों पर चिकित्सकों के हस्ताक्षरों में गड़बड़ी पाई गई। इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। प्रदेश भर में ईएसआइ के पैनल पर शामिल अन्य 133 निजी अस्पतालों के रिकार्ड की भी एसीबी द्वारा जांच कराई जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता का समय रहते पता लगाया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पानीपत ईएसआइ अस्पताल की क्षमता को 75 बेड से बढ़ाकर 100 बेड किया जाए तथा वहां आपरेशन थिएटर का विस्तार किया जाए। इसी प्रकार जगाधरी ईएसआइ अस्पताल को 80 से 100 बेड और हिसार ईएसआइ डिस्पेंसरी को 12 से बढ़ाकर 50 बेड करने के निर्देश दिए गए। सभी अस्पतालों में आधुनिक तकनीक से युक्त उपकरण भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा बावल और बहादुरगढ़ में निर्माणाधीन 100-100 बेड के ईएसआइ अस्पतालों का कार्य शीघ्र पूरा किया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश के श्रमिकों और आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि ईएसआइ हेल्थ केयर में डाक्टरों और पैरा-मेडिकल स्टाफ की किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। आवश्यकतानुसार स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, और इस दिशा में कोई भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, श्रम विभाग के प्रधान सचिव राजीव रंजन ने भी अपनी बात रखी।

देश की सुरक्षा पर खतरा? अंबाला हाईवे पर संदिग्ध कैमरे, पुलिस ने दर्ज किया मामला

अंबाला. राष्ट्रीय राजमार्ग 152- डी पर पुलिस को दो सीसीटीवी कैमरों से देश से जुड़ी जानकारी पाकिस्तान पहुंचाई जा रही थी। यह दोनों सीसीटीवी सोलर सिस्टम से आपरेट किए जा रहे थे जबकि इनमें से एक में सिम भी चल रहा था। इन्हीं संदिग्ध सीसीटीवी कैमरों ने अब सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। करीब 50 दिन बाद अब इस मामले में सदर थाना पुलिस ने देश की एकता, अखंडता, संप्रभुता व सुरक्षा को खतरे में डालने का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला 26 फरवरी को सामने आया था तब तक पुलिस को यह लग रहा था कि शायद यह कैमरे किसी विभाग ने लगाए होंगे। लेकिन करीब डेढ़ महीने की जांच और पूछताछ के बाद जब किसी भी विभाग द्वारा इन कैमरों की जिम्मेदारी नहीं ली गई तो पुलिस ने इसे गंभीर मानते हुए केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बता दें कि इससे पहले मार्च माह में गांव मलौर में बिजली के खंभे पर सोलर और सिम से आपरेट होने वाले सीसीटीवी कैमरे बरामद हुए थे जिनसे एयरफोर्स स्टेशन बकनौर से जुड़ी जानकारी लीक करने का संदेह जताया गया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने करीब आठ दिन पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ द्वारा संचालित एक बड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 11 सदस्यों को गिरफ्तार किया था। अंबाला में भी इसी गैंग ने इन दोनों कैमरों को इंस्टाल किया था। जांच में खुलासा हुआ था कि गिरोह के सदस्य सैन्य ठिकानों, रेलवे स्टेशनों समेत अन्य संवेदनशील स्थानों की लोकेशन, फोटो, वीडियो पाकिस्तान भेज रहे थे। इन लोगों ने दिल्ली कैंट, अंबाला और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर सोलर बेस्ड कैमरे भी लगाए थे। इन कैमरों की फीड पाकिस्तान दी गई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस अभी तक 26 से अधिक आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। ऐसे हुआ खुलासा जानकारी के अनुसार एएसआइ रविश कुमार, जो उस समय थाना सदर थाने में जांच अधिकारी के तौर पर तैनात थे, 26 फरवरी को एक सड़क हादसे के केस जोकि 15 फरवरी को दर्ज हुआ था की जांच के सिलसिले में गांव देवीनगर के पास नेशनल हाईवे-44 पर पहुंचे। इसी दौरान उन्होंने हाईवे-152 के ओवरब्रिज पर दो कैमरे लगे हुए देखे, जो सामान्य निगरानी सिस्टम से अलग और संदिग्ध लगे। यह लकड़ी के तख्ते के सहारे अटैच किए गए थे। प्राथमिक स्तर पर इन कैमरों की पहचान के लिए उन्होंने टोल प्लाजा प्रबंधन से संपर्क किया। टोल मैनेजर विनोद कुमार ने साफ कहा कि ये कैमरे टोल के नहीं हैं। इसके बाद ट्रैफिक थाना मोहड़ा के एसएचओ जोगिंद्र से बात की गई, उन्होंने भी ऐसे किसी कैमरे से इनकार कर दिया। मामला और गहराया जब नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) के अधिकारी ललित ने भी इन कैमरों से अपना कोई संबंध होने से इनकार कर दिया। इसके बाद हाईवे पर निर्माण कार्य कर रही एजेंसी के कर्मचारियों और उनके अधिकारी तेजेंद्र पांडे से भी पूछताछ की गई, लेकिन वहां से भी कोई जानकारी नहीं मिली। कैमरों के बारे में यहां भी पुलिस ने की पूछताछ पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सैनीमाजरा टोल प्लाजा, आइटी सिस्टम, सर्विलांस, डेटा मैनेजमेंट और तकनीकी सपोर्ट और कंप्यूटर ब्रांच तक में अलग-अलग दिन जांच की, लेकिन सभी जगह से एक ही जवाब मिला कैमरे उनके नहीं हैं। कई दिनों तक कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा के बाद दोनों कैमरों को मौके से उतरवाकर थाना सदर अंबाला शहर में सुरक्षित रख लिया। सोलर प्लेट और सिम के साथ जुड़े हुए थे कैमरे जांच के दौरान एक कैमरे में सोलर प्लेट के साथ वोडाफोन कंपनी का सिम कार्ड मिला, जबकि दूसरे कैमरे में कोई सिम नहीं था। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि ये कैमरे किसी खुफिया निगरानी या फिर असामाजिक/देशद्रोही गतिविधियों के लिए लगाए गए हो सकते हैं। इसी आधार पर पुलिस ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला मानते हुए धारा 152 और 61 बीनएस के वीरवार रात केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस ने कैमरों को कब्जे में लेकर उनकी तकनीकी जांच शुरू कर दी है। सिम कार्ड के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन कैमरों का संचालन कौन कर रहा था और इसका डेटा कहां जा रहा था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय एजेंसियों की भी मदद ली जा सकती है। यह मामला हाईवे सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। दिल्ली पुलिस के पकड़े गए आरोपितों से कनेक्शन दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा पकड़े गए आरोपितों से ही अंबाला में लगे सीसीटीवी कैमरों का कनेक्शन जुड़ा है। दिल्ली पुलिस की पूछताछ खत्म होने के बाद आरोपितों को जल्द ही प्रोडक्शन वारंट पर अंबाला पुलिस लाएगी ताकि आरोपितों से पूछताछ की जा सके। -अजीत सिंह शेखावत, एसपी अंबाला।

यूक्रेन युद्ध में मारा गया अंशु, रूस से ताबूत में वर्दी और जूते के साथ भारत लाया गया

रेवाड़ी गुरुग्राम से सटे हरियाणा के रेवाड़ी के काठुवास गांव में शुक्रवार उस समय मातम छा गया, जब एमबीए की पढ़ाई करने रूस गए 22 वर्षीय अंशु का शव ताबूत में लिपटकर घर पहुंचा। गांव के श्मशान घाट पर कटर मशीन से ताबूत को खोला गया। उसमें में अंशु के शव के साथ-साथ उसकी रूसी सेना की वर्दी और जूते भी साथ भेजे गए। पिता का कहना है कि दलालों ने छात्र को धोखे से रूसी सेना में भर्ती कराकर मौत के मोर्चे (रूस-यूक्रेन युद्ध) पर झोंक दिया। पिता ने अपनी आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने सजाकर जिस बेटे को पढ़ने के लिए विदेश भेजा था, उसकी अर्थी उठते देख पूरे गांव का कलेजा फट गया। अंशु के बड़े भाई मोहित ने नम आंखों से अंशु की चिता को मुखाग्नि दी। लोगों का कहना था कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उन दलालों की साजिश का नतीजा है, जिन्होंने शिक्षा के नाम पर एक होनहार छात्र को धोखे से रूसी सेना में भर्ती कराकर मौत के मोर्चे पर झोंक दिया। दलालों ने पढ़ाई छुड़वाकर युद्ध में भेजा परिवहन विभाग में कार्यरत पिता राकेश कुमार ने बताया कि अंशु बीए करने के बाद एमबीए का सपना लेकर 30 अप्रैल 2025 में स्टडी वीजा पर रूस गया था। कुछ महीने कॉलेज में पढ़ाई भी की, लेकिन फिर दलालों के जाल में फंस गया। दलालों ने बेटे अंशु को जबर्दस्ती सितंबर 2025 में रूसी सेना में भर्ती करा दिया। अंशु ने आखिरी बार 18 अक्टूबर 2025 को घर बात की थी। अंशु ने बताया था कि सितंबर में वह रूस की सेना में भर्ती हुआ है। अब युद्ध के लिए उसे यूक्रेन की फर्स्ट लाइन में जा रहा है और अब कुछ दिनों के बाद ही बातचीत हो पाएगी। सबका लाडला था अंशु काठुवास निवासी राकेश कुमार की पत्नी का देहांत पहले ही हो चुका था। तीन भाई-बहनों में अंशु सबसे छोटा और सबका लाडला था। पिता ने अपनी जमा-पूंजी लगाकर उसे पढ़ने के लिए रूस भेजा था ताकि वह बड़ा आदमी बन सके, लेकिन घर लौटी तो सिर्फ उसकी यादें और ताबूत। गांव वालों का कहना है कि सरकार को उन दलालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जो मासूम युवाओं को पढ़ाई के नाम पर मौत के मुंह में धकेल रहे हैं। रूस गए हरियाणा के सात बेटे अब भी लापता बताए जा रहे हैं। अनजान रहा परिवार ● जानकारी के अनुसार फोन पर बातचीत के कुछ समय बाद ही अंशु की मौत को हो चुकी थी, लेकिन परिवार छह महीने तक अनजान रहा। 2 अप्रैल को देश के विदेश मंत्री से मुलाकात हुई। ● 4 अप्रैल 2026 को पिता राकेश कुमार के पास रूस के मॉस्को से फोन आया। उन्हें बताया गया कि अंशु की मौत हो चुकी है और उसका शव मिल चुका है और भारत में भेजने में 10 से 15 दिन लगेंगे। ● 16 अप्रैल को सूचना मिली कि शव शुक्रवार को दिल्ली एयरपोर्ट आ रहा है। शुक्रवार सुबह दिल्ली से शव लेने के बाद परिवार 10 बजे गांव के श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार किया गया।

हरियाणा में HCS परीक्षा का बड़ा आयोजन: 337 सेंटर, 93 हजार से ज्यादा उम्मीदवार शामिल

चंडीगढ़. हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने 26 अप्रैल को होने वाली हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) एवं संबद्ध सेवाओं की प्रारंभिक परीक्षा 2025 के लिए तैयारियों की समीक्षा की। यह परीक्षा दो सत्रों में आयोजित की जाएगी। पहला सत्र सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक (सामान्य अध्ययन) तथा दूसरा सत्र दोपहर बाद तीन बजे से शाम पांच बजे तक (सीसैट) होगा। इस परीक्षा के लिए कुल 93 हजार 696 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं, जो राज्य के आठ जिलों में बनाए गए 337 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देंगे। परीक्षा केंद्र अंबाला (31 केंद्र), फरीदाबाद (80 केंद्र), गुरुग्राम (56 केंद्र), करनाल (48 केंद्र), कुरुक्षेत्र (37 केंद्र), पानीपत (19 केंद्र), यमुनानगर (23 केंद्र) और पंचकूला (43 केंद्र) में बनाए गए हैं। समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी आठ जिलों के उपायुक्तों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने, ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात करने तथा स्ट्रांग रूम और परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 144 लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही, किसी भी चिकित्सा आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक जिला मुख्यालय पर एंबुलेंस रखने को कहा गया है। IAS और HCS अधिकारी करेंगे निगरानी प्रत्येक जिले में स्ट्रांग रूम प्रबंधन, प्रश्न पत्र वितरण तथा परीक्षा के बाद सामग्री को हरियाणा लोक सेवा आयोग पंचकूला भेजने की निगरानी के लिए आइएएस और एचसीएस कैडर के नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करने की बात कही गई है। पुलिस आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को 24 अप्रैल से स्ट्रांग रूम पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने, होटलों, कोचिंग संस्थानों और फोटो स्टेट की दुकानों की जांच करने तथा परीक्षा ड्यूटी में लगे निजी एजेंसियों के कर्मचारियों का सत्यापन करने के सख्त निर्देश दिए हैं। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की की गई व्यवस्था परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की कड़ी तलाशी, सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निरंतर निगरानी और आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की व्यवस्था की गई है। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने तीन मई रविवार को होने वाली नीट परीक्षा की तैयारियों की भी समीक्षा की और सभी उपायुक्तों को इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षा के लिए भी पुख्ता प्रबन्ध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अपूर्व कुमार सिंह, हरियाणा लोक सेवा आयोग के सचिव एमके आहूजा, उप सचिव सतीश कुमार शामिल हुए।

मेरिट लिस्ट ने उड़ाए होश: हरियाणा में EWS का कटऑफ जनरल से काफी ऊपर.

चंडीगढ़. हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) ने पुलिस कॉन्स्टेबल के 5500 पदों के लिए चल रही भर्ती परीक्षा की कटऑफ लिस्ट जारी कर दी है। विशेष बात यह कि अनारक्षित वर्ग से आरक्षित वर्गों में कटऑफ ज्यादा है। पंचकूला में 20 अप्रैल से शुरू हो रहे शारीरिक माप परीक्षण (पीएमटी) के लिए आयोग ने शुक्रवार को प्रवेश पत्र जारी कर दिए, जिन्हें अधिकृत वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। निर्धारित पदों की तुलना में 15 गुणा अभ्यर्थियों को शार्टलिस्ट किया गया है। सामान्य ड्यूटी के पदों के लिए सबसे कम कटऑफ 52.17 अनारक्षित वर्ग में रहा, जबकि ईडब्ल्यूएस कोटे में यह सबसे ज्यादा 71.93 रहा। इसी तरह रेलवे पुलिस के पदों के लिए वंचित अनुसूचित वर्ग में कटऑफ 72.97 रहा है, जबकि अनारक्षित श्रेणी का कटऑफ 75.04 और ईडब्ल्यूएस में 81.31 रहा। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने इंटरनेट मीडिया पर पीएमटी के लिए लिंक जारी करते हुए कहा कि इसके माध्यम से युवा अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। साथ ही पीएमटी के लिए साइट प्लान साझा करते हुए आह्वान किया कि स्टेडियम में आने से पहले इसे ध्यानपूर्वक देखें और एंट्री गेट, बायोमेट्रिक प्वाइंट, पीएमटी हाल और एक्जिट रूट की पूरी जानकारी प्राप्त करें। साइट प्लान के अनुसार प्रवेश एवं बाहर निकलने के लिए लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं। बायोमेट्रिक के लिए विशेष काउंटर बनाए गए हैं। बैग रखने सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जिन अभ्यर्थियों का सीईटी के दौरान बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हुआ था, उनका बायोमेट्रिक सत्यापन गेट नंबर तीन पर किया जाएगा। यह रहा कटऑफ पुलिस कॉन्स्टेबल सामान्य ड्यूटी अनारक्षित – 52.17 ईडब्ल्यूएस – 71.93 बीसी-ए – 65.06 बीसी-बी – 69.90 ओएससी – 64.04 डीएससी – 57.85 रेलवे पुलिस कटऑफ अनारक्षित – 75.04 ईडब्ल्यूएस- 81.31 बीसी-ए- 78.23 बीसी-बी- 80.32 ओएससी – 76.08 डीएससी – 72.97

नूंह को मिलेगा स्टेडियम और आधुनिक सुविधाओं का तोहफा

नूंह हरियाणा के नूंह जिले को अब विकास के पंख लगेंगे। जिले की चार विकास परियोजनाओं के लिए बजट मंजूर किया गया है। करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से ये योजनाएं लागू होंगी। इनमें स्टेडियम निर्माण सहित कई महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। जिला प्रशासन के प्रवक्ता ने बताया कि नगर परिषद क्षेत्र में जिन योजनाओं को स्वीकृति मिली है, उनमें एक भव्य सभागार और संग्रहालय परिसर का निर्माण प्रमुख है। यह परिसर पुराने कार्यालयों वाली सड़क पर विकसित किया जाएगा, जिससे सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को एक आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी। खेल सुविधाओं को मजबूत करने के लिए पलवल टी-पॉइंट के पास मेवात मॉडल स्कूल के नजदीक उपलब्ध भूमि पर स्टेडियम बनाया जाएगा। इससे युवाओं को अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा। शहर की सड़कों के सौंदर्यीकरण के तहत पलवल टी-पॉइंट से झंडा चौक तक बीच की पट्टी को विकसित किया जाएगा। नगर परिषद कार्यालय भवन के विस्तार की योजना भी शामिल है। मौजूदा भवन के साथ नई इमारत बनाई जाएगी, जिससे प्रशासनिक कामकाज को अधिक सुचारु ढंग से संचालित किया जा सकेगा और लोगों को सेवाएं आसानी से मिलेंगी। सोहना में जलभराव से राहत मिलेगी नगर परिषद ने शहर में बरसात के दौरान होने वाली जलभराव की समस्या से निपटने के लिए नई योजना लागू करनी शुरू कर दी है। नई योजना के तहत अब विकास कार्यों के दौरान सड़कों को पक्का करने या दोबारा कंक्रीट डालने के साथ-साथ बरसाती पानी की निकासी के लिए अलग से लाइन बिछाई जा रही है। यह लाइन सीवर सिस्टम की तर्ज पर गटर के रूप में तैयार की जा रही है, जिससे बारिश के पानी के साथ बहकर आने वाला कूड़ा-कचरा भी आसानी से निकल सके। इस व्यवस्था से पानी बिना रुके ढाल की दिशा में बह सकेगा और सड़कों पर जमा नहीं होगा। वार्ड-16 के पार्षद हरिश नंदा का कहना है कि इस योजना से भविष्य में जलभराव की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। वहीं वार्ड-6 के पार्षद राकेश रोहिल्ला ने बताया कि नई निकासी लाइन बनने से सीवर पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा और पानी की निकासी तेजी से हो सकेगी। अधिकारियों के अनुसार, अभी तक बारिश के बाद जलभराव कम होने में एक से डेढ़ घंटे का समय लग जाता था। एसडीओ राजपाल खटाना ने कहा कि नई व्यवस्था के बाद बारिश रुकने के कुछ ही मिनटों में पानी की निकासी हो जाएगी।

महिलाओं को ई-वाहन प्रशिक्षण और ब्याज मुक्त लोन से आत्मनिर्भरता

गुरुग्राम अपने खुद के रोजगार का सपना देख रही महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। गुरुग्राम जिले में पिंक कैब योजना से दस हजार गरीब-शिक्षित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। योजना के तहत महिलाओं को इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चलाने का विशेष प्रशिक्षण मिलेगा। प्रशिक्षण के बाद ई-कैब खरीदने के लिए उन्हें 10 लाख रुपये तक के ब्याज मुक्त ऋण दिए जाएंगे। इससे महिलाएं न केवल स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनेंगी, बल्कि परिवहन क्षेत्र में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकेंगी। पिंक कैब योजना को लखपति दीदी से जोड़ा गया गुरुग्राम में जल्द ही पिंक कैब योजना शुरू कर महिलाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा, जिससे उनमें आत्मनिर्भरता और सुरक्षा की भावना बढ़ सके। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को न सिर्फ रोजगार देना है, बल्कि उन्हें सुरक्षित और सम्मान जनक आजीविका उपलब्ध कराना भी है। महिलाओं को इलेक्ट्रिक वाहन चलाने के लिए बैंकों से ऋण मिलेंगे। ऋण पर पांच लाख तक क्रेडिट गारंटी और तीन लाख पर ब्याज में छूट होगी। पिंक कैब योजना को केंद्र सरकार की लखपति दीदी से जोड़ा गया है, ताकि महिलाएं नियमित आय स्रोत से जुड़ सकेंगी। गुरुग्राम में दस हजार से अधिक महिलाएं योजना से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी गई है बैंकों को दिए गए निर्देश एडीसी सोनू भट्ट की ओर से सभी बैंकों को इस योजना को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए है। पिंक कैब योजना के तहत महिलाएं स्वयं वाहन चलाकर आय अर्जित कर सकेंगी। इसमें वाहन चलाने का प्रशिक्षण, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए दस लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण, सुरक्षित परिवहन सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था होगी। ऋण मुहैया कराने में बैंक से मदद मिलेगी जिला अग्रणी प्रबंधन विनोद कुमार बजाज ने कहा कि पिंक कैब योजना के तहत महिलाएं स्वयं वाहन चलाकर आय अर्जित कर सकेंगी और परिवहन क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ा सकेंगी। इसमें वाहन चलाने का प्रशिक्षण, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए दस लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण, स्वरोजगार के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता, सुरक्षित परिवहन सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था होगी। इसमें बैंकों की ओर से ऋण मुहैया कराकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग रहेगा। एक साल में दस हजार महिलाओं को जोड़ा जाएगा। इसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जोड़ने की योजना है। रोजगार को बढ़ावा योजना के अंतर्गत महिलाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। इससे उनमें आत्मनिर्भरता की भावना बढ़ सके। इसका उद्देश्य महिलाओं को न सिर्फ रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। बल्कि उन्हें सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना भी है।

बड़े लोगों को निशाना बनाकर फर्जी सोना बेचने वाला गिरोह पकड़ा गया

गुरुग्राम गुरुग्राम पुलिस ने सस्ते दाम पर सोने के सिक्के बेचने का झांसा देकर देशभर में ठगी करने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. यह वही गिरोह है जिसने बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के पिता सलीम खान और अभिनेता आदित्य पंचोली जैसे नामचीन लोगों को भी अपना शिकार बनाया था. पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके कब्जे से करोड़ों रुपये नकद और भारी मात्रा में सोना बरामद किया गया है. यह गिरोह पढ़े‑लिखे और आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को बड़े ही शातिराना तरीके से जाल में फंसाता था. गुरुग्राम पुलिस ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार गुरुग्राम पुलिस के अनुसार, सस्ते सोने के सिक्के बेचने के नाम पर ठगी करने वाले इस अंतरराज्यीय गिरोह के चार सदस्यों को गुजरात और गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 2 करोड़ 30 लाख 5 हजार 700 रुपये नकद और 678 ग्राम सोना बरामद किया है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ने नकली सोने के सिक्कों के जरिए करीब 2.49 करोड़ रुपये नकद और 50 तोला सोने की ठगी को अंजाम दिया था. ऐसे जीतते थे भरोसा, फिर करते थे वारदात पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से वारदातों को अंजाम देते थे. सबसे पहले वे पीड़ित को कुछ असली सोने और चांदी के सिक्के दिखाते थे, जिससे उसका भरोसा जीत लिया जाता था. जब पीड़ित को यह यकीन हो जाता कि सिक्के असली हैं, तो आरोपी उसे अधिक मात्रा में सस्ते दाम पर सोना बेचने का झांसा देते थे. इसी लालच में आकर लोग बड़ी रकम दे देते थे और बदले में उन्हें पीतल के नकली सिक्के थमा दिए जाते थे. हाईवे पर करते थे रेकी, बड़ी गाड़ियों को बनाते थे निशाना आरोपी पहले बड़े एक्सप्रेसवे और हाईवे पर रेकी करते थे. जहां से बड़ी और लग्जरी गाड़ियां गुजरती थीं, वहां ये गिरोह सक्रिय रहता था. जैसे ही उन्हें कोई बड़ी गाड़ी नजर आती, वे उसे किसी बहाने से रोक लेते और फिर अपने ठगी के जाल में फंसा लेते थे. पुलिस के मुताबिक, गिरोह खासतौर पर अमीर, पढ़े‑लिखे और प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाता था. मजदूर बनकर सुनाते थे ‘खुदाई में सोना मिलने' की कहानी पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गिरोह के सदस्य खुद को गरीब मजदूर के रूप में पेश करते थे. वे यह कहानी गढ़ते थे कि खुदाई के दौरान उन्हें सोना मिला है और वे उसे सस्ते में बेचना चाहते हैं. इस कहानी से लोगों में लालच पैदा कर वे ठगी को अंजाम देते और फिर मौके से फरार हो जाते थे. 25 साल से ठगी कर रहा था सरगना प्रभुभाई इस गिरोह का सरगना प्रभुभाई बताया जा रहा है, जो पिछले 25 वर्षों से इस तरह की ठगी की वारदातों में शामिल रहा है. उसके खिलाफ देश के कई राज्यों में आपराधिक मामले दर्ज हैं. इतना ही नहीं, ठगी के पैसों से उसने एक होटल खरीदा और “लव यू” नाम की एक गुजराती फिल्म का निर्माण भी किया. गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला पुलिस के अनुसार, गिरोह का नेटवर्क देश के अलग‑अलग राज्यों में फैला हुआ था. इस मामले में अन्य आरोपियों की तलाश अभी जारी है और पुलिस का दावा है कि जल्द ही और भी गिरफ्तारियां की जाएंगी. गुरुग्राम पुलिस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है, ताकि इस तरह की ठगी पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके.

हरियाणा में टैक्स चोरी का खेल, दक्षिण भारत के वाहन फर्जी पते पर रजिस्टर्ड

अंबाला अंबाला छावनी के उप-मंडलाधिकारी कार्यालय में एक बड़े वाहन पंजीकरण घोटाले का खुलासा हुआ है। इस घोटाले के तहत बाहरी राज्यों, विशेषकर दक्षिण भारत के वाहनों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हरियाणा में पंजीकृत किया जा रहा था। जांच में अब तक 200 से अधिक ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें भारी अनियमितताएं पाई गई हैं। क्या है पूरा मामला जांच रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु और नगालैंड जैसे राज्यों के वाहनों को अंबाला के फर्जी पतों पर पंजीकृत किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य हरियाणा में कम पंजीकरण शुल्क का लाभ उठाना और टैक्स चोरी करना था। अब तक 213 वाहनों की पहचान की गई है जिनका पंजीकरण धोखाधड़ी से किया गया।अनुमान है कि प्रति वाहन 1 से 2 लाख रुपये अवैध रूप से वसूले गए, जो एक बड़े वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करते हैं। कई वाहन ऐसी कंपनियों के नाम पर दर्ज थे जो अस्तित्व में ही नहीं हैं। इस प्रकार के मामले आए सामने एक हाइड्रोलिक मोबाइल क्रेन के.पी.कंस्ट्रक्शन के नाम पर दर्ज थी, लेकिन जांच में गांव में ऐसी कोई कंपनी नहीं मिली। इसका असली मालिक तमिलनाडु का निकला। इसी प्रकार एक अन्य क्रेन  एसआर क्रेन सर्विसेज। के नाम पर थी, जिसका मालिक कोयंबटूर का निवासी पाया गया। नियमों की धज्जियां जांच समिति ने इसे राजस्व की जानबूझकर की गई हानि और दुर्भावना पूर्ण  मंशा का मामला बताया है। नियमों के अनुसार, वाहन वहीं पंजीकृत हो सकता है जहां मालिक सामान्य रूप से निवास करता हो। प्रमुख खामियां जो जांच में मिलीं     अनिवार्य फॉर्म 20, 21 और 22 गायब मिले, केवल असत्यापित फोटोकॉपी फाइल में थी     कोई वैध बीमा कागजात या मोटर वाहन निरीक्षक प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं था।     अंबाला में निवास का कोई वैध प्रमाण या आईडी जमा नहीं की गई थी।  

स्व-गणना 2026 शुरू: हरियाणा में लोग खुद भर सकेंगे जनगणना विवरण

चंडीगढ़ हरियाणा में जनगणना का पहला चरण शुरू हो गया है। आज सुबह से स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू हुई। प्रदेश में 16 से 30 अप्रैल तक स्व-गणना की प्रक्रिया चलेगी। सीएम नायब सैनी ने स्व-गणना के आंकड़े दर्ज किए।   पहले चरण में मकानों की गणना और मकान से संबंधित जानकारी लोगों से पूछी जाएगी। यह जनगणना एक मई से 30 मई तक चलेगी। भारत सरकार ने इस बार एक विशेष सुविधा दी है, जिससे लोग खुद से अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे।   भारत सरकार ने स्व जनगणना के लिए एक पोर्टल https://se.census.gov.in/ लॉन्च किया है। इसके पोर्टल के जरिये लोग स्वयं भी अपना डाटा भर सकेंगे। स्वगणना से समय की बचत होगी। सटीक जानकारी भरी जा सकेगी। जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा। इसमें लोगों से उनकी जाति पूछी जाएगी। आजादी के बाद पहली बार जाति का डेटा जुटाया जाएगा। इससे पहले 1931 में ऐसा हुआ था। हरियाणा ने जनगणना की पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए अधिकारियों की ट्रेनिंग व जिम्मेदारी तय कर दी गई है। स्वगणना में सिर्फ 15 मिनट का समय लगेगा। पोर्टल से ऐसे भरनी होगी जानकारी 1. सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल पर जाना होगा। 2. अपने मोबाइल नंबर से ओटीपी द्वारा लॉगिन करें 3.अपना राज्य, जिला और स्थानीय विवरण चुनें 4. डिजिटल मानचित्र पर अपने घर का स्थान चिन्हित करें 5.मकान व परिवार से संबंधित जानकारी भरें 6. सबमिशन के बाद स्व गणना की एक आईडी मिलेगी 7. इस आईडी को संभाल रखें। फोटो खींच ले या प्रिंट आउट निकाल कर रख लें। 8. जब जनगणना कर्मी आएंगे तो उन्हें सिर्फ अपनी आई डी दे दें। स्व गणना नहीं कर पाए तो चिंता की बात नहीं चीफ प्रिंसिपल जनगणना अधिकारी डा. ललित जैन ने बताया यदि कोई स्व गणना नहीं कर पाता है तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। एक मई से जनगणना कर्मी घर आएंगे और सारी जानकारी नोट कर ले जाएंगे। हरियाणा में 70 हजार कर्मियों को जनगणना के लिए प्रशिक्षित किया गया है। यह ट्रेनिंग पिछले दो महीने से चल रही है। इसके अतिरिक्त सभी डिविजनल कमिश्नर, डीसी, सीटीएम, तहसीलदार और अन्य अधिकारियों को भी विभिन्न प्रकार की जिम्मेदारी दी गई है। आपसे क्या-क्या पूछा जाएगा मकान से संबंधित : मकान संख्या, फर्श, दीवार व छत की मुख्य सामग्री, मकान का उपयोग (आवासीय/गैर-आवासीय), मकान की स्थिति। परिवार की जानकारी : परिवार के सदस्यों की संख्या, परिवार के मुखिया का नाम, मकान का स्वामित्व, कमरों की संख्या। मूलभूत सुविधाएं : पेयजल का स्रोत, बिजली की सुविधा, शौचालय की उपलब्धता व प्रकार, स्नानघर की सुविधा, रसोई व गैस कनेक्शन, खाना पकाने का ईंधन। परिवार की सुविधाएं : रेडियो-टेलीविजन, इंटरनेट व कंप्यूटर, मोबाइल फोन, दोपहिया व चारपहिया वाहन। जनगणना कर्मी के आई कार्ड में होगा बार कोड इस जनगणना कर्मी के आई कार्ड में बार कोड भी होगा। यदि किसी को शक है कि वह कर्मी जनगणना विभाग का नहीं है तो वह मोबाइल से बार कोड को स्कैन कर उस कर्मी की पूरी जानकारी मिल जाएगी। जनगणना के लिए इस बार विशेष तौर पर सरपंचों व महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप से अपील की गई है कि वे अपनी और अपने साथ जुड़े लोगों से स्व गणना करवाएं, ताकि जनगणना का काम निर्धारित समय पर पूरा किया जा सके। मेरी लोगों से अपील है कि जो जानकारी पूछी जाए, उसकी सही जानकारी दें। जनगणना में सभी जानकारी पूरी तरह से गोपनीय और सुरक्षित होगी। लोगों से अपील की जाती है कि वह जनगणना कर्मी का सहयोग करें और स्व-गणना भी करें। – ललित जैन, चीफ प्रिंसिपल जनगणना अधिकारी