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जींद के पिंडारा तीर्थ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़, सोमवती अमावस्या पर किया पवित्र स्नान

जींद. साल की पहली सोमवती अमावस्या पर सोमवार को भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और डुबकी लगाकर पिंडदान किया। इस दिन मृगशिरा नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग इस दिन को अत्यंत विशेष बना रहे हैं, है जो शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने स्पेशल पुलिसकर्मियों की डयूटी लगाई। पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्याए विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग श्रद्धालु आते हैं। जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि सुबह जल्दी उठ कर स्नान करें। इस दिन पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करने का विशेष महत्व रहता है। अगर सरोवर या नदी में स्नान नहीं किया जा सकता है तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगा जल डाल कर स्नान कर सकते हैं। स्नान करने के पश्चात घर के मंदिर में दीप प्रज्जवलि करें। सूर्य देव को अध्र्य दें। अगर उपवास रख सकते हैं तो अवश्य रखें। पितरों के निमित्त तर्पण और दान अवश्य करें। अपने ईष्ट देव का अधिक से अधिक ध्यान करें।

डी-पार्क आग हादसा: सीएम ने किया निरीक्षण, पीड़ितों को आर्थिक सहायता की घोषणा

 रोहतक मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को रोहतक के डी-पार्क क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड स्थल का निरीक्षण किया और प्रभावित दुकानदारों से मुलाकात कर घटना की पूरी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अग्निकांड में जान गंवाने वाले कपिल, सौरभ और अमन के परिजनों से भी मिलकर गहरी संवेदना व्यक्त की तथा उन्हें हर संभव सरकारी सहायता का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और पीड़ादायक है। सरकार इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों और व्यापारियों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत एवं सहायता कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो। मुख्यमंत्री ने राहत कोष से पूर्ण रूप से नष्ट हुई दुकानों के लिए 5-5 लाख रुपये और आंशिक रूप से प्रभावित दुकानों के लिए 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। इसके अलावा आग की चपेट में आकर नष्ट हुई रेहड़ियों के मालिकों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा उन्होंने बताया कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग की रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित दुकानदारों के नुकसान का आकलन कर अलग से मुआवजा भी दिया जाएगा, ताकि व्यापारियों को अपने कारोबार को दोबारा खड़ा करने में मदद मिल सके। बता दें कि 9 जून को माडल टाउन स्थित डी-पार्क के निकट भीषण आग लगने से करीब एक दर्जन दुकानें जलकर राख हो गई थीं। हादसे में तीन लोगों की जिंदा जलने से मौत हो गई थी, जबकि लाखों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ था। घटना के बाद से व्यापारी संगठनों की ओर से पीड़ितों के लिए उचित मुआवजे और राहत की मांग की जा रही थी। मुख्यमंत्री के दौरे और मुआवजे की घोषणा के बाद प्रभावित परिवारों और व्यापारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

अग्निकांड से प्रभावित व्यापारियों को राहत, रोहतक दौरे पर सीएम सैनी ने घोषित किया मुआवजा

रोहतक. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को रोहतक के डी-पार्क क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड स्थल का निरीक्षण किया और प्रभावित दुकानदारों से मुलाकात कर घटना की पूरी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अग्निकांड में जान गंवाने वाले कपिल, सौरभ और अमन के परिजनों से भी मिलकर गहरी संवेदना व्यक्त की तथा उन्हें हर संभव सरकारी सहायता का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और पीड़ादायक है। सरकार इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों और व्यापारियों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत एवं सहायता कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो। मुख्यमंत्री ने राहत कोष से पूर्ण रूप से नष्ट हुई दुकानों के लिए 5-5 लाख रुपये और आंशिक रूप से प्रभावित दुकानों के लिए 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। इसके अलावा आग की चपेट में आकर नष्ट हुई रेहड़ियों के मालिकों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा उन्होंने बताया कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग की रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित दुकानदारों के नुकसान का आकलन कर अलग से मुआवजा भी दिया जाएगा, ताकि व्यापारियों को अपने कारोबार को दोबारा खड़ा करने में मदद मिल सके। बता दें कि 9 जून को माडल टाउन स्थित डी-पार्क के निकट भीषण आग लगने से करीब एक दर्जन दुकानें जलकर राख हो गई थीं। हादसे में तीन लोगों की जिंदा जलने से मौत हो गई थी, जबकि लाखों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ था। घटना के बाद से व्यापारी संगठनों की ओर से पीड़ितों के लिए उचित मुआवजे और राहत की मांग की जा रही थी। मुख्यमंत्री के दौरे और मुआवजे की घोषणा के बाद प्रभावित परिवारों और व्यापारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

राज्य में 100 नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर लाने का लक्ष्य, निवेश को मिलेगा बढ़ावा

 चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने राज्य को वैश्विक सेवा एवं अनुसंधान केंद्रों का प्रमुख स्थल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) नीति-2026 तैयार की है। इस नीति का उद्देश्य गुरुग्राम को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की “ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर कैपिटल” के रूप में स्थापित करना है। नई नीति के तहत अगले कुछ वर्षों में 100 से अधिक नए वैश्विक क्षमता केंद्रों को हरियाणा में आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा दूसरे देशों में स्थापित की गई अपनी ही पूर्ण स्वामित्व वाली रणनीतिक इकाइयां या केंद्र हैं। ये मुख्य रूप से तकनीकी सहायता, अनुसंधान एवं विकास, डेटा एनालिटिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य वैश्विक परिचालन कार्यों का प्रबंधन करते हैं। वैश्विक कंपनियां अब केवल बैक-आफिस संचालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, वित्तीय सेवाओं और उत्पाद विकास जैसे उच्च मूल्य वाले कार्य भी भारत स्थित जीसीसी के माध्यम से संचालित कर रही हैं। ऐसे में हरियाणा की यह नीति राज्य को वैश्विक निवेश मानचित्र पर और मजबूत स्थिति दिला सकती है। नई नीति मौजूदा ताकत को और विस्तार देने का प्रयास भारत में वर्तमान में करीब 1,700 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर संचालित हो रहे हैं, जिनमें लगभग 19 लाख पेशेवर कार्यरत हैं। हरियाणा विशेष रूप से गुरुग्राम, इस क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बन चुका है और राज्य में पहले से 270 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) काम कर रहे हैं। नई नीति इस मौजूदा ताकत को और विस्तार देने का प्रयास है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में हाल ही में इस नीति को मंजूरी प्रदान की गई है। उद्योग विभाग के आयुक्त एवं सचिव डा. अमित कुमार अग्रवाल की देखरेख में तैयार हुई इस नीति के तहत गुरुग्राम में समर्पित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर मिशन स्थापित किया जाएगा। इसके अंतर्गत निवेशकों को सभी अनुमतियों और सेवाओं के लिए सिंगल विंडो डेस्क उपलब्ध होगी। साथ ही इन्वेस्टर मैचमेकिंग प्लेटफार्म और एडवाइजरी काउंसिल का गठन किया जाएगा, जिससे उद्योग, सरकार और विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। निवेश प्रक्रिया को सरल बनाना मुख्य उद्येश्य हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़ाव, उत्कृष्ट सड़क एवं हवाई संपर्क, कारपोरेट इकोसिस्टम, उच्च गुणवत्ता वाली कार्यालय सुविधाएं और कुशल मानव संसाधन हरियाणा को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) निवेश के लिए स्वाभाविक विकल्प बनाने के लिए पर्याप्त हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य निवेश प्रक्रिया को सरल बनाना और कंपनियों को त्वरित निर्णय एवं सहायता प्रदान करना है। हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) नीति-2026 की विशेषता यह है कि इसमें केवल गुरुग्राम ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य जिलों में भी जीसीसी निवेश को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन प्रविधान किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य आर्थिक गतिविधियों को कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित रखने की बजाय पूरे राज्य में फैलाना है। इससे फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत, करनाल, हिसार और अन्य उभरते शहरी केंद्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों और निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। पांच से नौ वर्ष तक अधिकत 15 करोड़ की वित्तीय सहायता नई नीति के तहत कंपनियों को पांच से नौ वर्षों तक परिचालन सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता अधिकतम 15 करोड़ रुपये प्रति वर्ष तक हो सकती है। सरकार का मानना है कि शुरुआती वर्षों में मिलने वाला यह सहयोग कंपनियों को हरियाणा में दीर्घकालिक निवेश के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसके अतिरिक्त डीएसआइआर/सीएसआइआर मान्यता प्राप्त अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) केंद्रों को भी पूंजीगत और परिचालन सहायता देने का प्रविधान रखा गया है। इससे राज्य में नवाचार, शोध और तकनीकी विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। जीसीसी क्षेत्र में होने वाला निवेश केवल कार्यालय खोलने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे उच्च वेतन वाली नौकरियां, स्टार्टअप सहयोग, तकनीकी प्रशिक्षण और स्थानीय सेवा क्षेत्र का विस्तार भी होता है। नई नीति के जरिए आइटी, इंजीनियरिंग, वित्त, डेटा साइंस, एआइ और अनुसंधान क्षेत्रों में युवाओं के लिए बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं। हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) नीति-2026 की प्रमुख बातें     – गुरुग्राम को वैश्विक क्षमता केंद्रों की राजधानी बनाने का लक्ष्य     – हरियाणा में 100 से अधिक नए जीसीसी आकर्षित करने की योजना     – राज्य में पहले से 270 से अधिक जीसीसी संचालित     – सिंगल विंडो डेस्क, निवेशक मंच और सलाहकार परिषद का गठन     – पांच से नौ वर्ष तक परिचालन सहायता में अधिकतम 15 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष तक सहायता     – डीएसआइआर/सीएसआइआर मान्यता प्राप्त आरएंडडी केंद्रों को विशेष प्रोत्साहन     – उच्च कौशल रोजगार और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा     – गुरुग्राम के साथ अन्य जिलों में भी निवेश विस्तार पर जोर।  

गाने के बोलों को लेकर हिसार में बवाल, पुलिस और महिला आयोग से शिकायत

 हिसार  हरियाणा में कुछ समय पहले रैपर बादशाह के चर्चित गीत टटीरी को लेकर उठा विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब हरियाणवी गीत कालेज वाली छोरी विवादों में घिर गया है। हिसार में हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने इस गाने में कंडक्टरों और कालेज जाने वाली छात्राओं को लेकर कथित आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग का आरोप लगाते हुए पुलिस और महिला आयोग से कार्रवाई की मांग की है। रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि गाने में कंडक्टरों और बसों से कालेज आने-जाने वाली छात्राओं की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है। इससे न केवल रोडवेज कर्मचारियों की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है, बल्कि छात्राओं के बारे में भी अनुचित संदेश जाता है कर्मचारियों ने हिसार सिटी थाना पुलिस को लिखित शिकायत देने के साथ-साथ हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष को भी शिकायत भेजी है। कर्मचारियों ने मांग की है कि गाने को इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म से हटाया जाए और इसके लेखक, निर्देशक व गायक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। एक्टर नवीन नारू बोले- जान बूझकर गाने को बनाया जा रहा विवादित वहीं इस गाने में अभिनय कर रहे नवीन नारू ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह गीत केवल मनोरंजन के उद्देश्य से बनाया गया है और इसमें किसी वर्ग या पेशे को निशाना नहीं बनाया गया है। उन्होंने दावा किया कि गाने की लोकप्रियता कुछ लोगों को रास नहीं आ रही, इसलिए इसे विवादित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नवीन ने बताया कि गाने की शूटिंग हिसार में हुई है और रिलीज के बाद इसे दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला है। इंटरनेट मीडिया पर इस गाने पर बड़ी संख्या में रील भी बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में भी तीन सदस्य कंडक्टर हैं, इसलिए किसी पेशे का अपमान करने का सवाल ही नहीं उठता। पुलिस कर रही जांच शिकायत मिलने के बाद मामला प्रशासन और पुलिस के संज्ञान में आया है। पुलिस का कहना है कि शिकायत की जांच की जा रही है। यदि जांच में गाने में अश्लील या आपत्तिजनक टिप्पणियां पाए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले बादशाह के टटीरी गीत को लेकर भी हरियाणा में काफी विवाद हुआ था। टटीरी गाने को लेकर रोडवेज अधिकारियों ने भी शिकायतें दी थी। वहीं अब दोबारा से रोडवेज कर्मियों ने कालेज वाली छोरी को लेकर शिकायत दी है। इस गाने के विवाद ने हरियाणवी संगीत जगत में नई बहस छेड़ दी है।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के 5 साल बाद देश को मिलेगी पहली NDA-प्रशिक्षित महिला फाइटर पायलट

चंडीगढ़  भारतीय सैन्य इतिहास में 13 जून 2026 का दिन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज होने जा रहा है। वर्ष 2021 में महिलाओं को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश देने संबंधी ऐतिहासिक फैसले के पांच वर्ष बाद देश को एनडीए रूट से पहली महिला फाइटर पायलट मिलने जा रही है। चरखी दादरी जिले के गांव छपार की बेटी ईशिता सांगवान आज भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में स्थायी कमीशन प्राप्त कर नया इतिहास रचेंगी। हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी डुंडीगल में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान ईशिता को स्थायी कमीशन प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही वह एनडीए के पहले महिला बैच से फाइटर पायलट बनने वाली देश की पहली अधिकारी बन जाएंगी। देशभर में थीं केवल दो सीटें,पहली महिला फाइटर पायलट बनेंगी ईशिता ईशिता की सफलता उनकी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प की कहानी है। वर्ष 2021 में जब महिलाओं के लिए एनडीए के द्वार खुले, तब वह 12वीं कक्षा की छात्रा थीं। पिता से इस अवसर की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने फाइटर पायलट बनने का लक्ष्य तय कर लिया। राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के लिए वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में केवल दो सीटें उपलब्ध थीं। ईशिता ने लिखित परीक्षा और एसएसबी साक्षात्कार में सफलता प्राप्त करने के साथ-साथ फाइटर पायलट बनने के लिए अनिवार्य कंप्यूटरीकृत पायलट चयन प्रणाली (सीपीएसएस) परीक्षा भी पहली ही कोशिश में उत्तीर्ण कर ली। खड़कवासला से डुंडीगल तक तय किया गौरवपूर्ण सफर पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में तीन वर्ष की कठिन सैन्य प्रशिक्षण अवधि के दौरान ईशिता ने हर चुनौती का सामना किया। इसके बाद उन्होंने एयर फोर्स अकादमी, डुंडीगल में उन्नत उड़ान प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। पासिंग आउट परेड के बाद वह भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम का हिस्सा बनकर देश की वायु सुरक्षा में अपनी भूमिका निभाएंगी। ईशिता एक शिक्षित परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता चरण सिंह सांगवान विद्यालय प्राचार्य हैं, जबकि माता अनीता सांगवान शिक्षिका हैं। परिवार के अनुसार उनकी सफलता में स्वर्गीय दादी लिछमा देवी के आशीर्वाद और परिवार के निरंतर सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जुड़वां बहन आस्था एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं, जबकि भाई आर्यन पुणे से बीटेक कर रहे हैं। ईशिता सांगवान की यह उपलब्धि न केवल चरखी दादरी और हरियाणा, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। यह बदलते भारत की उस नई तस्वीर को भी रेखांकित करती है, जहां बेटियां अब हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं और आसमान भी उनकी उड़ान को सीमित नहीं कर पा रहा।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट राहत: श्रीलंका ऑपरेशन पवन सैनिक को पूर्ण पेंशन लाभ

चंडीगढ़ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने ऑपरेशन पवन के दौरान श्रीलंका में तैनात एक सैनिक को बड़ी राहत देते हुए सशस्त्र बल अधिकरण (एएफटी) के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सैनिक को सामान्य विकलांगता पेंशन के बजाय वॉर इंजरी पेंशन देने और उसकी 50 प्रतिशत विकलांगता को 75 प्रतिशत मानकर पेंशन का लाभ प्रदान करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऑपरेशनल एरिया में आतंकवादियों की तलाश के दौरान लगी चोट को सैन्य सेवा से असंबद्ध नहीं माना जा सकता। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ केंद्र सरकार द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। केंद्र सरकार ने एएफटी के 29 मार्च 2022 के आदेश को चुनौती दी थी। मामला भारतीय सेना की पैरा रेजीमेंट में तैनात रहे नायक नाहर सिंह से जुड़ा है जो ऑपरेशन पवन के दौरान श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के हिस्से के रूप में तैनात थे।केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सैनिक की बाईं आंख में लगी चोट पेड़ों की झाड़ियों और शाखाओं के टकराने से हुई थी। सरकार का तर्क था कि सैनिक को डयूटी के दौरान अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी, इसलिए इस चोट को युद्धजनित या सैन्य सेवा से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी चोट नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार एक ऐसे सैनिक की चोट को सैन्य सेवा से जोड़ने से इंकार कर रही है, जो ऑपरेशनल एरिया के जंगलों में आतंकवादियों की तलाश कर रहा था। अदालत ने कहा कि सैनिक को “परफोरेटिंग इंजरी लेफ्ट आई” नामक गंभीर चोट उसी दौरान लगी, जब वह सरकार के आदेश पर ऑपरेशन पवन के तहत सैन्य दायित्व निभा रहा था। ऐसे में यह चोट न केवल सैन्य सेवा से संबंधित है, बल्कि वास्तविक सैन्य कर्तव्य के निर्वहन के दौरान हुई है।खंडपीठ ने केंद्र सरकार की 31 जनवरी 2001 की नीति का हवाला देते हुए कहा कि सरकार द्वारा अधिसूचित विशेष सैन्य अभियानों के दौरान होने वाली मृत्यु या विकलांगता श्रेणी-ई के अंतर्गत आती है और ऐसे मामलों में वॉर इंजरी पेंशन देय होती है। कोर्ट ने एएफटी के फैसले को सही ठहराया ऑपरेशन पवन इसी श्रेणी में शामिल है।अदालत ने विकलांगता के प्रतिशत को 50 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत मानने के एएफटी के फैसले को भी सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि नाहर सिंह भर्ती के समय पूरी तरह स्वस्थ थे और सेवा के दौरान ही उन्हें यह विकलांगता हुई, इसलिए वॉर इंजरी पेंशन तथा 75 प्रतिशत विकलांगता के आधार पर लाभ देने में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। परिणामस्वरूप केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी गई।  

भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा चुनाव अपडेट: 11 हजार चिकित्सक डालेंगे वोट

 कुरुक्षेत्र  भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा चुनाव की प्रक्रिया जहां बंद हुई थी, वहीं से अब दोबारा शुरू हो गई। पानीपत के जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. राज कपूर को चुनाव करवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें रिटर्निंग ऑफिसर बनाया। चुनाव में प्रदेशभर के 11 हजार से ज्यादा आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथी और सिद्धा चिकित्सक अपने मत का प्रयोग करेंगे। डॉ. कपूर ने दैनिक जागरण को बताया कि पहले इस प्रक्रिया में 15 अक्टूबर 2024 तक के पंजीकृत चिकित्सक भाग ले रहे थे, जिसे अब अपडेट कर 15 अक्टूबर 2025 तक के चिकित्सकों को भी इसमें शामिल किया है। ऐसे में सात सदस्यों के चुनाव के लिए प्रदेश के जिन 20 चिकित्सकों ने नामांकन भरा था वह तो इसमें बने ही रहेंगे। साथ ही जो नए पंजीकृत चिकित्सक हैं, उन्हें भी नामांकन करने का मौका दिया जाएगा। इसकी रूपरेखा बनाकर अतिरिक्त मुख्य सचिव आयुष विभाग को भेज दी है, जहां से स्वीकृति मिलते ही इसे पुन: शुरू कर दिया जाएगा। 21 जून के बाद चुनाव की प्रक्रिया जोर पकड़ लेगी। भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा की कार्यकारिणी में सात सदस्य एक चेयरमैन और एक वाइस चेयरमैन बनता है। सरकार की ओर से चेयरमैन को नामिनेट किया जाता है। परिषद का चुनाव हर पांच साल में होना चाहिए लेकिन कोरोना के चलते 2020-21 में यह चुनाव नहीं हो पाया था। अब यह चुनाव 12 साल बाद होगा। फरवरी में प्रशासनिक कारणों से चुनाव कर दिए थे स्थगित गौर हो कि भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा के सात सदस्यों को चुनने की चुनाव प्रक्रिया इसी साल जनवरी में शुरू हो गई थी। मगर प्रशासनिक कारणों के चलते इस प्रक्रिया को फरवरी में रोक दिया था, जबकि उस दौरान नामांकन प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी। पहले परिषद के तत्कालीन चेयरमैन डॉ. दिनेश अग्रवाल की अध्यक्षता में यह प्रक्रिया चल रही थी। अब उनकी जगह रिटर्निंग आफिसर डॉ. राज कपूर को बनाया गया है। नई कार्यकारिणी से मिलेगा नया बल: डॉ. शुभम गर्ग आयुर्वेदिक चिकित्सक डाक्टर शुभम गर्ग ने कहा कि नई कार्यकारिणी चुनकर परिषद में जाएगी इससे आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को बल मिलेगा। साथ ही पंजीकृत चिकित्सकों के लिए नई नीतियां बन पाएंगी, जिससे चिकित्सकों को फायदा मिलेगा। 21 जून के बाद चुनाव की प्रक्रिया तेज होगी: डॉ. राज जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डाक्टर राज कपूर ने बताया कि 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के बाद चुनाव की प्रक्रिया तेज होगी। जिला आयुर्वेदिक अधिकारियों को चुनाव के नोटिस को बोर्ड पर प्रदर्शित करने के लिए पत्र भेजा गया है।  

CBI ने कसी शिकंजा: IDFC बैंक घोटाले में 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, हरियाणा-चंडीगढ़ कनेक्शन

चंडीगढ़  केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के फंड के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में बड़ी कार्रवाई की। सीबीआई ने सरकारी अधिकारियों और आईडीएफसी बैंक के कर्मचारियों सहित कुल 9 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालतों में दो अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। सीबीआई अधिकारी ने बताया कि हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में अवैध बैंक लेन-देन के कारण लगभग 504 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जबकि चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े मामले में करीब 153 करोड़ रुपए की हानि हुई। सीबीआई ने यह भी कहा कि इन मामलों में आगे और भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं। चार्जशीट में क्या? सीबीआई के बयान में कहा गया है कि चार्जशीट में आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप शामिल हैं। इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई ने बताया कि हरियाणा सरकार से जुड़े मामले की चार्जशीट पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में दाखिल की गई है। इस मामले में दो निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है, जिन्हें कथित अपराध से प्राप्त धन का लाभार्थी बताया गया है। सीबीआई की यह दूसरी चार्जशीट यह हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में दूसरी चार्जशीट है। इससे पहले सीबीआई 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें तीन सरकारी कर्मचारी, छह बैंक अधिकारी, दो कंपनियां और चार निजी व्यक्ति शामिल हैं। सीबीआई ने बताया कि चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) से जुड़े मामले की चार्जशीट चंडीगढ़ स्थित सीबीआई विशेष अदालत में दाखिल की गई है। इस मामले में कुल सात आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें पांच बैंक अधिकारी, सीएससीएल का एक अधिकारी और एक निजी व्यक्ति शामिल है। यह इस मामले में पहली चार्जशीट है। सीबीआई ने की थी छह स्थानों पर छापेमारी सीबीआई ने हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से आठ विभागों से जुड़े एक मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इसके अलावा, चंडीगढ़ के आर्थिक अपराध पुलिस स्टेशन से चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और क्रेस्ट चंडीगढ़ से जुड़े दो मामलों की जांच भी सीबीआई को सौंपी गई थी। पिछले सप्ताह सीबीआई ने इन दोनों मामलों के सिलसिले में चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में छह स्थानों पर छापेमारी की थी। किनके ठिकानों पर तलाशी? जिन परिसरों की तलाशी ली गई, उनमें हरियाणा कैडर के कुछ सरकारी अधिकारियों के आवास और विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक के ठिकाने शामिल थे। सीबीआई के अनुसार, यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और अपराध से अर्जित धन की प्राप्ति से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए की गई थी। जांच में क्या आया सामने? सीबीआई ने बताया कि जांच के दौरान यह सामने आया कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर खातों को खुलवाने, धनराशि ट्रांसफर करने और बाद में उसे दूसरी जगह भेजने में मदद की थी। एजेंसी के अनुसार, सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के जरिए धन का दुरुपयोग किया गया, जिसकी जांच अभी भी जारी है। 

यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने की तैयारी तेज, अधिकारियों को 2027 तक काम पूरा करने के निर्देश

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने यमुना नदी की स्वच्छता और जल गुणवत्ता में सुधार के लिए बड़े स्तर पर चल रहे प्रोजेक्ट्स को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने मंगलवार को संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि यमुना एक्शन प्लान के तहत चल रहे और प्रस्तावित सभी सीवेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन तथा प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाओं को 31 दिसंबर 2027 तक हर हाल में पूरा किया जाए। उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए रस्तोगी ने कहा कि राज्य सरकार यमुना और उसकी सहायक नालियों के प्रदूषण को कम करने तथा पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है। अधिकारियों को दिए निर्देश उन्होंने अधिकारियों को परियोजनाओं की समय-सीमा का सख्ती से पालन करने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 425 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) से अधिक सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता और 150 एमएलडी से अधिक औद्योगिक अपशिष्ट उपचार क्षमता बढ़ाने वाली कई परियोजनाएं मंजूरी, टेंडरिंग और निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से यमुना में प्रदूषित जल के प्रवाह को काफी हद तक रोका जा सकेगा। क्या है सरकार की योजना     31 दिसंबर 2027 तक सभी यमुना एक्शन प्लान परियोजनाएं पूरी करने का लक्ष्य।     425 एमएलडी से अधिक नई सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता जोड़ी जाएगी।     150 एमएलडी से अधिक औद्योगिक अपशिष्ट उपचार क्षमता विकसित होगी।     पानीपत, करनाल और सोनीपत में कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी।     यमुना और सहायक नालियों में प्रदूषण कम करने पर सरकार का फोकस। कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा समीक्षा के दौरान कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। इनमें पानीपत के जट्टल रोड स्थित 10 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उन्नयन, करनाल के ग्रामीण क्षेत्रों में छह माइक्रो-एसटीपी की स्थापना, सोनीपत के नाथूपुर और कुंडली में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की योजना तथा रथधना एसटीपी के विस्तार की परियोजना शामिल हैं। इसके अलावा मुंगेशपुर नाले से निकलने वाले अपशिष्ट जल के उपचार के उपायों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि यमुना की सफाई केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सतत विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने अधिकारियों से परियोजनाओं की नियमित निगरानी और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा।