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IAS अशोक खेमका को राहत: हाई कोर्ट ने समानता के आधार पर दिया बड़ा निर्णय

चंडीगढ़  हरियाणा कैडर के चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के उन आदेशों को निरस्त कर दिया, जिनके जरिये खेमका को भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर एंपैनल किए जाने का लाभ देने से इनकार कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने समान परिस्थितियों वाले कई अन्य आईएएस अधिकारियों को नियमों में छूट देकर यह लाभ दिया है तो अशोक खेमका को इससे वंचित रखना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने 29 मई 2026 को यह फैसला सुनाया। अशोक खेमका 1991 बैच के आईएएस अधिकारी थे। वर्ष 2010 में उन्हें भारत सरकार में संयुक्त सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। वर्ष 2019 में उनके बैच के कई अधिकारियों को अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर एंपैनल कर दिया गया, लेकिन खेमका को यह लाभ नहीं मिला। केंद्र सरकार ने कहा था कि उन्होंने भारत सरकार में उप सचिव या उससे ऊपर के पद पर कम से कम तीन वर्ष की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पूरी नहीं की है, इसलिए वे पात्र नहीं हैं। खेमका ने इस निर्णय को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में चुनौती दी। उनका तर्क था कि केंद्र सरकार ने पहले भी कई आईएएस अधिकारियों को इस शर्त में छूट देकर अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एंपैनल किया है, जबकि उनके पास भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का आवश्यक अनुभव नहीं था। उन्होंने 20 ऐसे अधिकारियों की सूची पेश की, जिनमें पंजाब, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, राजस्थान और अन्य राज्यों के आईएएस अधिकारी शामिल थे। इनमें से कई अधिकारियों को शून्य केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अनुभव के बावजूद अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। हाई कोर्ट ने पाया कि केंद्र सरकार ने याचिका में उठाए गए इन तथ्यों का कोई प्रभावी खंडन नहीं किया। अदालत ने कहा कि यदि नियमों में छूट देने की शक्ति मौजूद है और उसका उपयोग अन्य समान अधिकारियों के पक्ष में किया गया है, तो अशोक खेमका को वही लाभ नहीं देना स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि खेमका का दावा खारिज होने के बाद भी तमिलनाडु कैडर के 1992 बैच के आईएएस अधिकारी जे राधाकृष्णन को इसी प्रकार की छूट देकर अतिरिक्त सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। हालांकि, अदालत ने माना कि खेमका अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उन्हें केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति का वास्तविक लाभ नहीं दिया जा सकता। फिर भी हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि भविष्य में जिन आयोगों, प्राधिकरणों, ट्रिब्यूनलों या अन्य पदों पर नियुक्ति के लिए अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एंपैनल होना वांछनीय या प्राथमिक योग्यता माना जाता है, वहां अशोक खेमका को भी उसी स्तर का अधिकारी माना जाएगा और उन्हें एंपैनल अतिरिक्त सचिव/सचिव के समान दर्जा दिया जाएगा। इस प्रकार अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें भविष्य की नियुक्तियों और अवसरों के लिए समान अधिकार प्रदान कर दिए।

बारिश ने दी गर्मी से राहत, हरियाणा के 16 जिलों में बरसे बादल, 7 में आज भी चेतावनी

हिसार. प्रदेश में तेजी से मौसम बदल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से वीरवार शाम के बाद 16 जिलों में वर्षा हुई। शुक्रवार को भी जींद में वर्षा से मौसम सुहावना हो गया। मौसम विज्ञानियों ने शनिवार को भी सात जिलों में वर्षा का अलर्ट जारी किया है। वीरवार को हुई वर्षा के चलते तापमान में तीन से चार डिग्री तक कमी आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार छह जून तक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। उसके बाद सात से 10 जून तक मौसम साफ रहने की उम्मीद है। 11 जून से फिर से नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण वर्षा की संभावना बन रही है। विज्ञानियों के अनुसार वीरवार और शुक्रवार को हुई वर्षा के कारण तापमान में कमी आई है। तापमान तीन से चार डिग्री तक कम हुआ है। साथ ही कुछ जिलों में वीरवार को आए रेत के तूफान के कारण बिजली के खंभे भी टूट गए थे। इससे बिजली सप्लाई बाधित हुई जिसे रात तक ठीक किया गया है। वर्षा का यलो अलर्ट : हिसार, फरीदाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़ व रेवाड़ी। वर्षा (मिलीमीटर में)     अंबाला : 0.8     हिसार : 1.7     करनाल : 7.6     नारनौल : 6.5     भिवानी : 4     चरखी दादरी : 0.5     गुरुग्राम : 10     जींद : 1.7     महेंद्रगढ़ : 7     पलवल : 34     रोहतक : 1.5     सोनीपत : 15.5     यमुनानगर : 7.5     मेवात : 3.5 तापमान (डिग्री सेल्सियस में)      जिला न्यूनतम  अधिकतम अंबाला                     24.8       37.3 भिवानी                     20.5       41.5 फरीदाबाद                   26.7       37.4 गुरुग्राम                     26.1       35.5 हिसार                      25.8       39 करनाल                     22.5       36.2 नारनौल                     20.5       40 रोहतक                     22.8       43.6

हरियाणा की बेटी का विश्व मंच पर जलवा, मीनाक्षी हुड्डा ने लगातार दूसरी बार हासिल की नंबर-1 रैंकिंग

रोहतक. कहते हैं कि यदि इरादे मजबूत हों और लक्ष्य के प्रति समर्पण अटूट हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। हरियाणा के छोटे से गांव रूड़की की बेटी मीनाक्षी हुड्डा ने अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष के दम पर इस बात को सच साबित कर दिखाया है। गांव रुड़की की बेटी मीनाक्षी हुड्डा ने आज विदेशी धरती पर गोल्डन पंच मारकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन कर रही है। कभी समाज और रिश्तेदारों के ताने सुनने वाली मीनाक्षी हुड्डा ने लगातार दूसरी बार विश्व की नंबर-1 बॉक्सर बनने का गौरव हासिल किया है। वर्ल्ड बाक्सिंग फेडरेशन द्वारा हाल ही में जारी रैंकिंग में 48 किलोग्राम भार वर्ग में मीनाक्षी को दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी घोषित किया गया है। इससे पहले भी मीनाक्षी विश्व रैंकिंग में नंबर-1 स्थान हासिल कर चुकी है और अब दोबारा उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। बता दें कि मीनाक्षी हुड्डा ने पिछले एक वर्ष में लगातार चार अंतरराष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेकर शानदार प्रदर्शन किया है। जिसके आधार पर ही मीनाक्षी दुनिया की नबंर वन की खिलाड़ी बनी है। हाल ही में आयोजित एशियन बाक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा में आयोजित विश्व मुक्केबाजी कप में गोल्ड मेडल अपने नाम किया, जबकि वर्ल्ड बाक्सिंग कप में सिल्वर मेडल हासिल किया। मीनाक्षी की सबसे बड़ी उपलब्धि इंग्लैंड में आयोजित वर्ल्ड बाक्सिंग चैंपियनशिप में देखने को मिली। प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में उन्होंने कजाकिस्तान की अनुभवी मुक्केबाज और चार बार की विश्व चैंपियन व ओलिंपिक रजत पदक विजेता नाजिम काइजेबे को हराकर गोल्ड मेडल जीता था। मीनाक्षी कई बार बन चुकी है नेशनल चैंपियन साधारण परिवार से आने वाली मीनाक्षी के पिता कृष्ण हुड्डा आटो चालक व मां सुनीता गृहिणी है। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी के सपनों को उड़ान देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वर्ष 2013 में मीनाक्षी ने अपने गांव में कोच विजय हुड्डा के मार्गदर्शन में मुक्केबाजी की शुरुआत की थी। कठिन परिस्थितियों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इससे पहले वह वर्ष 2023 और 2024 में लगातार दो बार राष्ट्रीय चैंपियन बनीं। इसके अलावा ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में दो बार स्वर्ण पदक जीत चुकी है। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2023 की एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक, इलरोडा कप और ब्रिक्स प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।

ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंस फंड से हरित विकास को बढ़ावा, हरियाणा सरकार की नई पहल

 चंडीगढ़  हरियाणा के वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि हरियाणा सरकार पर्यावरण संरक्षण, हरित ऊर्जा और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। उन्होंने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में 1000 इलेक्ट्रिक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित 100 करोड़ रुपये का ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंस फंड हरियाणा में शून्य-उत्सर्जन वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, शहरी हरितीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि और प्रकृति-आधारित समाधानों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण होगी। राव नरबीर ने बताया कि राज्य सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर रही है। रेवाड़ी और पंचकूला में हरियाणा परिवहन के लिए अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बस चार्जिंग डिपो स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन विकसित किए गए हैं। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के ''विकसित भारत-2047'' के विजन को साकार करने में हरियाणा अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदेशभर में हुए कार्यक्रमों और ''एक पेड़ मां के नाम'' अभियान में व्यापक जनभागीदारी ने यह स्पष्ट किया है कि हरियाणा अब केवल विकास की नहीं, बल्कि हरित और सतत विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, 30 क्लर्क पद पदोन्नति से और 65 पद सीधी भर्ती से भरेंगे

चंडीगढ़. हरियाणा में लिपिक के 30 प्रतिशत पदों पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पदोन्नत होंगे। 65 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। पांच प्रतिशत पद अनुकंपा नियुक्ति के लिए रखे गए हैं। जरूरत पड़ने पर ट्रांसफर या डेपुटेशन का भी विकल्प रखा गया है। प्रदेश सरकार ने बदले नियम लागू कर दिये हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जो लिपिक बनना चाहते हैं, उन्हें कम से कम 10+2 पास होना जरूरी रहेगा। ग्रुप-डी में न्यूनतम पांच साल सेवा जरूरी है। 70 प्रतिशत या उससे अधिक वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट अच्छी या बहुत अच्छी होनी चाहिए। कोई विभागीय या न्यायिक मामला लंबित न हो। न ही कोई प्रतिकूल टिप्पणी हो। लिपिकों की भर्ती, प्रमोशन, सेवा शर्तें, वरिष्ठता, प्रोबेशन और कंप्यूटर योग्यता एक समान नियमों के तहत तय होंगी। विभागों में नियुक्त होने वाले सभी लिपिक कामन काडर का हिस्सा होंगे। इसमें केवल नई नियमित नियुक्तियां शामिल होंगी। पहले से कार्यरत लिपिकों पर यह कानून लागू विभागों में नियुक्त होने वाले सभी लिपिक कॉमन काडर का हिस्सा होंगे, पहले से कार्यरत लिपिकों पर नया कानून लागू नहीं होगा। संवैधानिक संस्थाएं, राजभवन और कानून लागू होने से पहले नियुक्त कर्मचारी भी इससे बाहर रहेंगे। अब क्लर्क-कम-टाइपिस्ट, टाइपिस्ट, डाटा एंट्री आपरेटर, कंप्यूटर आपरेटर, डिस्पेचर, रिकार्ड कीपर, कैशियर, केयर टेकर, स्टोर कीपर और पीबीएक्स क्लर्क जैसे पद भी लिपिक की श्रेणी में शामिल होंगे। कंप्यूटर ज्ञान एवं अनुप्रयोग की राज्य पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य है। परीक्षा दो हिस्सों में होगी। पहले पार्ट में बेसिक कंप्यूटर नॉलेज टेस्ट और दूसरे पार्ट में कंप्यूटर आधारित टाइपिंग टेस्ट होगा। दोनों टेस्ट पास नहीं किए तो वार्षिक वेतन वृद्धि और पदोन्नति नहीं मिलेगी। सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम उम्र 18 और अधिकतम उम्र 42 वर्ष तय की गई है।

हरित क्रांति के बाद अब एग्री-बिजनेस क्रांति की बारी, हरियाणा करेगा देश का नेतृत्व: सीएम सैनी

हरित क्रांति की तरह बागवानी एवं एग्री-बिजनेस क्रांति का अब नेतृत्व करेगा हरियाणा: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री ने 2,738 करोड़ रुपये की सतत बागवानी संवर्धन परियोजना का किया शुभारंभ, हरियाणा एग्री बिजनेस एंड कोल्ड चेन सेंटर की रखी आधारशिला हरियाणा में 402 पैक हाउस, 4 लीड पैक हाउस बनेंगे, बागवानी के किसान होंगे मालामाल जापान के कोची विश्वविद्यालय से हरियाणा के किसानों को मिलेगी अनुसंधान की विश्वस्तरीय तकनीक विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधारोपण चंडीगढ़, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में किसान, युवा, महिलाएं और आधुनिक तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। हरियाणा को बागवानी, एग्री-बिजनेस, कोल्ड चेन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि निर्यात के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी मिलकर कृषि को अधिक टिकाऊ, आधुनिक और लाभकारी बनाने, जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने का संकल्प लें। मुख्यमंत्री शुक्रवार को पंचकूला में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 2,738 करोड़ रुपये की लागत से जाईका वित्तपोषित सतत बागवानी संवर्धन परियोजना का शुभारंभ तथा हरियाणा एग्री बिजनेस एंड कोल्ड चेन सेंटर का शिलान्यास के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ये दोनों परियोजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, बल्कि हरियाणा की कृषि व्यवस्था को आधुनिक, टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ इस दौरान प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा भी मौजूद थे। दोनों ने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण भी किया, साथ ही बागवानी विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जीआईसीए के मुख्य प्रतिनिधि टाकेची टकूरो, फर्स्ट सेकेरट्री फूड एंड एग्रीकल्चर टाकेहिको हयासे तथा ब्रिटिश डिप्टी हाईकमीश्नर ऐलबा स्मीरिग्लयो मौजूद थे। तीनों ने अपने संबोधन में हरियाणा सरकार द्वारा किसान हित में उठाये गये कदमों की तारीफ की। उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज का दिन केवल दो परियोजनाओं के शुभारंभ का नहीं, बल्कि हरियाणा के कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक नई दिशा तय करने का दिन है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हरियाणा एक बार फिर देश को नई राह दिखाएगा और हरित क्रांति की तरह बागवानी एवं एग्री-बिजनेस क्रांति का नेतृत्व भी करेगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने देश को हरित क्रांति दी थी, लेकिन बदलती जलवायु, गिरते भूजल स्तर, बढ़ती कृषि लागत और छोटी जोत जैसी चुनौतियों को देखते हुए अब कृषि क्षेत्र में नए विकल्प अपनाने की आवश्यकता है। बागवानी, फल, सब्जियां, मसाले, औषधीय पौधे, फूल, मशरूम और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों में किसानों के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के कई जिलों में जलभराव एवं सेम की समस्या के समाधान के लिए बायोड्रेनेज तकनीक का उपयोग करते हुए इस वर्ष 1,000 हेक्टेयर जलभराव प्रभावित भूमि पर पौधारोपण किया जाएगा, जिससे भूमि पुनः कृषि योग्य बन सकेगी। इसके साथ ही भूमिगत जल संरक्षण के लिए शिवालिक एवं अरावली क्षेत्रों में 25 नए जल भंडारण बांध बनाए जाएंगे तथा 25 पुराने बांधों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। हरियाणा में 402 पैक हाउस, 4 लीड पैक हाउस बनेंगे मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में फलों और सब्जियों का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा खेत से बाजार तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाता है। इस चुनौती का समाधान सतत बागवानी संवर्धन परियोजना के माध्यम से किया जाएगा। परियोजना के तहत 400 बागवानी क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, 500 उत्पादक समूहों को संगठित एवं सशक्त बनाया जाएगा, 402 पैक हाउस, 4 लीड पैक हाउस, 3 फुलफिलमेंट सेंटर तथा 44 रिटेल आउटलेट स्थापित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1,000 वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा तथा 65,000 एकड़ क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के अंतर्गत लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना खेत से बाजार तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेगी तथा आधुनिक कोल्ड चेन नेटवर्क किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक होगा। परियोजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वास्तविक समय निगरानी प्रणाली, मिट्टी एवं जल विश्लेषण, डिजिटल कृषि सलाह, इंटरनेट ऑफ प्लांट्स, भू-स्थानिक तकनीक, ई-मार्केटिंग और आधुनिक पैकेजिंग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल तथा जापान के कोची विश्वविद्यालय के बीच ज्ञान एवं अनुसंधान के आदान-प्रदान से किसानों को विश्वस्तरीय तकनीकी सहायता उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि कृषि अब केवल खेती तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक बड़ा व्यवसाय बन चुकी है, जिसमें ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, स्मार्ट सेंसर, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स जैसी तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। नौकरी देने वाले बने युवां उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे नौकरी मांगने के बजाय एग्री-बिजनेस, कृषि प्रसंस्करण, खाद्य उद्योग और निर्यात आधारित उद्यमों के माध्यम से रोजगार सृजनकर्ता बनें। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बागवानी, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर हरियाणा के निर्माण में महत्वपूर्ण होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा एग्री बिजनेस एंड कोल्ड चेन सेंटर किसानों, एफपीओ, उद्यमियों, स्टार्टअप्स और कृषि विशेषज्ञों के लिए विश्वस्तरीय प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे 3 लाख से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता में 75 प्रतिशत से अधिक सुधार होगा तथा कटाई के बाद होने वाले नुकसान में 10 से 15 प्रतिशत तक कमी आएगी। जीएपी, जीएमपी, जीएचपी तथा एचएसीसीपी जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाकर कृषि निर्यात को भी नई गति मिलेगी। जापान और भारत के संबंधों का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने भारत-जापान संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध सदियों पुराने हैं। हरियाणा में वर्तमान में 394 जापानी उद्योग एवं 600 से अधिक जापानी व्यावसायिक प्रतिष्ठान कार्यरत हैं, जो दोनों देशों की मजबूत मित्रता का प्रमाण हैं। उन्होंने जापान सरकार और जीआईसीए का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।  पर्यावरण दिवस को लेकर दिया विशेष … Read more

अब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बन सकेंगे क्लर्क, सरकार ने लागू किए नए सेवा नियम

 चंडीगढ़ हरियाणा में लिपिक के 30 प्रतिशत पदों पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पदोन्नत होंगे। 65 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। पांच प्रतिशत पद अनुकंपा नियुक्ति के लिए रखे गए हैं। जरूरत पड़ने पर ट्रांसफर या डेपुटेशन का भी विकल्प रखा गया है। प्रदेश सरकार ने बदले नियम लागू कर दिये हैं। जो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लिपिक बनना चाहते हैं, उन्हें कम से कम 10+2 पास होना जरूरी रहेगा। ग्रुप-डी में न्यूनतम पांच साल सेवा जरूरी है। 70 प्रतिशत या उससे अधिक वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट अच्छी या बहुत अच्छी होनी चाहिए। कोई विभागीय या न्यायिक मामला लंबित न हो। न ही कोई प्रतिकूल टिप्पणी हो। लिपिकों की भर्ती, प्रमोशन, सेवा शर्तें, वरिष्ठता, प्रोबेशन और कंप्यूटर योग्यता एक समान नियमों के तहत तय होंगी। विभागों में नियुक्त होने वाले सभी लिपिक कामन काडर का हिस्सा होंगे। इसमें केवल नई नियमित नियुक्तियां शामिल होंगी। पहले से कार्यरत लिपिकों पर यह कानून लागू विभागों में नियुक्त होने वाले सभी लिपिक कॉमन काडर का हिस्सा होंगे, पहले से कार्यरत लिपिकों पर नया कानून लागू नहीं होगा। संवैधानिक संस्थाएं, राजभवन और कानून लागू होने से पहले नियुक्त कर्मचारी भी इससे बाहर रहेंगे। अब क्लर्क-कम-टाइपिस्ट, टाइपिस्ट, डाटा एंट्री आपरेटर, कंप्यूटर आपरेटर, डिस्पेचर, रिकार्ड कीपर, कैशियर, केयर टेकर, स्टोर कीपर और पीबीएक्स क्लर्क जैसे पद भी लिपिक की श्रेणी में शामिल होंगे। कंप्यूटर ज्ञान एवं अनुप्रयोग की राज्य पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य है। परीक्षा दो हिस्सों में होगी। पहले पार्ट में बेसिक कंप्यूटर नॉलेज टेस्ट और दूसरे पार्ट में कंप्यूटर आधारित टाइपिंग टेस्ट होगा। दोनों टेस्ट पास नहीं किए तो वार्षिक वेतन वृद्धि और पदोन्नति नहीं मिलेगी। सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम उम्र 18 और अधिकतम उम्र 42 वर्ष तय की गई है।

खाद वितरण के नियम बदले, हरियाणा के किसानों को अब आधार वैरिफिकेशन कराना होगा जरूरी

पंचकूला. पश्चिम एशिया में छाए युद्ध संकट को देखते हुए किसानों को दी जाने डीएपी और यूरिया तथा अन्य उर्वरक की वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही है। कालाबाजारी नहीं हो इसके लिए नई प्रणाली में क्यूआर कोड और आधार सत्यापन को अनिवार्य किया जा रहा है। हरियाणा में यह योजना उत्तर प्रदेश से सटे यमुना नगर तथा राजस्थान से सटे रेवाड़ी तथा महेंद्रगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है। इसके लिए किसानों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों खाद विक्रेताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले इन जिलों को इसलिए चुनाव किया गया कि डीएपी और यूरिया वितरण करनें में शिकायत अधिक आ रही थी। दस्तावेज हरियाणा के किसानों के लगाकर राजस्थान और उत्तर प्रदेश में डीएपी यूरिया बेंच दी जाती थी। प्रदेश सरकार यही व्यवस्था अगले चरण् में पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी में है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय तथा कृषि एवं कल्याण ने फ्रेम वर्क फार फर्टिलाइजर सेल के नाम से नई डिजिटल खाद प्रणाली तैयार की है। इसके ही तहत हरियाणा के तीन जिला चुने गए हैं। यह कदम युद्ध संकट के चलते उर्वरक का आयात प्रभावित होने के चलते किया गया है। नई व्यवस्था आरंभ होने पर किसानों को पहले अपने मोबाइल एप के जरिए अग्रिम बुकिंग करनी होगी। किसान को अपनी फसल और जमीन की जानकारी दर्ज करनी होगी। बुकिंग पूरी होने पर किसान को क्यूआर कोड आधारित टोकन जारी होगा। जब किसान खाद लेने जाएगा तो डीलर पीओएस मशीन से क्यूआर कोड को स्कैन करेगा। इसके बाद आधार कार्ड आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन होने पर ही खाद देगा। प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा पहले ही यह कह चुके हैं कि कालाबाजारी रोकने के लिए नया सिस्टम अपनाया जा रहा है। इस योजना के लिए भी जल्द गाइडलाइन जारी कर दी जाएगी। इस व्यवस्था से किसानों को भटकना नहीं पड़ेगा और डीलर के पास मौजूदा स्टाक की रियल टाइम मानिटरिंग भी हो जाएगी। कोड स्कैन नहीं होने पर किसान को आइडी आधार नंबर और आवेदन नंबर के जरिए भी यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नई व्यवस्था में यह विकल्प इसलिए दिया गया है कि किसानों को किसी तरह की परेशानी नही हो।

हरियाणा में यमुनानगर का ग्रीन रिकॉर्ड, 60 लाख से अधिक पौधारोपण के साथ शीर्ष पर पहुंचा

यमुना नगर. विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियाणा की हरियाली की तस्वीर में यमुनानगर सबसे आगे दिखाई देता है। वन विभाग की डिजिटल वृक्ष गणना में जंगलों से बाहर हरियाणा में 60.94 लाख पेड़ दर्ज किए गए, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक हैं। प्रदेश के 4.01 करोड़ पेड़ों में 14.86 प्रतिशत पेड़ अकेले यमुना नगर में हैं, यानी प्रदेश के कुल पेडों में हर सातवां पेड़ यमुनानगर जिले का है। वन क्षेत्र मामले में भी जिला दूसरे स्थान पर है। हालांकि बढ़ता प्रदूषण, गिरता भूजल, अवैध खनन व वनों पर बढ़ती तस्करी भविष्य की चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं, पर इस बीच भी कलेसर नेशनल पार्क, वन्यजीव अभयारण्य व किसानों की कृषि वानिकी यमुनानगर को हरियाणा की हरित पहचान बना रहे हैं। कलेसर व किसानों ने दिलाई पहचान वन विभाग द्वारा कराई गई डिजिटल वृक्ष गणना के अनुसार प्रदेश में जंगलों से बाहर 4.01 करोड़ पेड़ हैं। इनमें सबसे अधिक 60 लाख 94 हजार 153 पेड़ यमुनानगर में दर्ज किए गए हैं। इसके बाद अंबाला में 34,08,972, सिरसा में 33,18,033 और फरीदाबाद में 5,72,416 पेड़ हैं। इसके बाद कुरुक्षेत्र, पलवल और गुरुग्राम का स्थान है। पेड़ों की संख्या में यमुनानगर के आगे रहने की उपलब्धि के पीछे 25 हजार एकड़ में फैला कलेसर नेशनल पार्क व वन्यजीव अभयारण्य बड़ी वजह हैं। शिवालिक की तलहटी स्थित यह क्षेत्र हरियाणा की सबसे समृद्ध जैव विविधता वाला वन क्षेत्र है। दूसरी ओर किसानों ने निजी भूमि पर पापलर, सफेदा व शीशम के बड़े स्तर पर रोपण कर कृषि वानिकी को नई ऊंचाई दी है। यही कारण है कि यमुनानगर को देश की प्लाईवुड राजधानी के रूप में पहचान मिली। किसान संघ के महामंत्री रामबीर चौहान का कहना है कि किसानों की भागीदारी के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी। 10.94% वन क्षेत्र से प्रदेश में दूसरा नंबर भारतीय वन सर्वेक्षण की इंडिया स्टेट आफ फारेस्ट रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा का कुल वन क्षेत्र 1559 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 3.53 प्रतिशत है। वन क्षेत्र के मामले में पंचकूला 47.4 प्रतिशत वन क्षेत्र के साथ पहले स्थान पर है। यमुनानगर 10.94 प्रतिशत वन क्षेत्र के साथ दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में हर वर्ष बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाए जाते हैं। विभिन्न योजनाओं के तहत हर साल 2.2 से 2.5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा जाता है। हालांकि पौधों को जीवित रखना अभी भी चुनौती बना हुआ है। औसतन 65 से 70 प्रतिशत पौधे ही जीवित रह पाते हैं। सड़कों व नहरों किनारे यह दर कई बार 50 से 55 प्रतिशत तक सिमट जाती है। इसी कारण पौधरोपण करने वाली एजेंसियों को पांच वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी दी जा रही है। बढ़ रहे वाहन और गिर रहा भूजल स्तर प्रदेश में हर साल सात से आठ लाख नए वाहन पंजीकृत हो रहे हैं। कुल वाहनों की संख्या एक करोड़ से अधिक हो चुकी है। सर्दियों में जींद, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा व गुरुग्राम जैसे शहर गंभीर वायु प्रदूषण का सामना करते हैं। दूसरी ओर प्रदेश में 19,487 तालाब होने के बावजूद भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। राज्य के 143 ब्लाकों में 85 से 88 ब्लाक ओवर एक्सप्लाइटेड श्रेणी में पहुंच चुके हैं। महेंद्रगढ़ में भूजल स्तर 52 मीटर से अधिक गहराई तक पहुंच चुका है। यमुनानगर की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। जिले में औसत भूजल स्तर 14 से 16 मीटर के बीच है, पर यहां भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञ बोले- उपलब्धि बड़ी, खतरे गंभीर पर्यावरणविद् डा. रविश चौहान ने कहा कि यमुनानगर का पेड़ों की संख्या में प्रदेश में पहले स्थान पर होना एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है। कलेसर के जंगल व किसानों की कृषि वानिकी ने जिले को विशेष पहचान दी है। लेकिन अवैध खनन, खैर कटान, भूजल दोहन व बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय हैं। यदि संरक्षण व संवर्धन साथ-साथ नहीं चले तो आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। श्रेणी / सूचक    आंकड़े और महत्वपूर्ण जानकारी प्रदेश में कुल पेड़ (जंगलों से बाहर)            4.01 करोड़ यमुना नगर में कुल पेड़ (जंगलों से बाहर)     60.94 लाख (प्रदेश के कुल पेड़ों का बड़ा हिस्सा) वन क्षेत्र (Forest Area) में पहला स्थान        पंचकूला वन क्षेत्र (Forest Area) में दूसरा स्थान        यमुनानगर यमुनानगर का कुल वन क्षेत्र प्रतिशत            10.94% हरियाणा का कुल वन क्षेत्र                           1,559 वर्ग किमी हर साल पौधारोपण का लक्ष्य                        2.2 से 2.5 करोड़ पौधे पौधों के जीवित रहने की दर                         65% से 70% प्रदेश में कुल तालाबों की संख्या                    19,487 ओवर एक्सप्लाइटेड ब्लॉक (अति-दोहित क्षेत्र)   85 – 88 ब्लॉक महेंद्रगढ़ में भूजल स्तर                                  52 मीटर से अधिक गहरा सालाना पंजीकृत होने वाले नए वाहन                7 से 8 लाख

संस्कृत शिक्षकों की सेवा समाप्ति पर कोर्ट की नाराजगी, हरियाणा सरकार को नोटिस जारी

चंडीगढ़. हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा टीजीटी संस्कृत भर्ती के संशोधित परिणाम जारी किए जाने के बाद चयन सूची से बाहर हुई कई शिक्षकों ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सिरसा जिले की लक्ष्मी व अन्यों ने याचिका दाखिल कर मांग की है कि लगभग दो वर्ष से सेवाएं दे रहे टीचर्स को नौकरी से हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और उनको सेवा में बनाए रखने के आदेश दिए जाएं। याचिका के अनुसार लक्ष्मी व अन्यों ने वर्ष 2023 में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जारी टीजीटी संस्कृत भर्ती विज्ञापन के तहत आवेदन किया था। वह आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और एचटेट पात्रता रखती हैं। भर्ती प्रक्रिया के बाद अंतिम परिणाम भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग ने 27 जुलाई 2024 को अंतिम परिणाम घोषित किया, जिसमें उनका चयन मेवात कैडर के लिए हुआ। इसके बाद जिला शिक्षा विभाग ने उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किया और उन्होंने 14 अगस्त 2024 को नूंह जिले के एक सरकारी विद्यालय में टीजीटी संस्कृत के पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया। याचिका में कहा गया कि बाद में विभिन्न न्यायिक आदेशों के अनुपालन में आयोग ने 28 मई 2026 को संशोधित परिणाम जारी किया। इस संशोधित परिणाम में याची लक्ष्मी चयन सूची से बाहर हो गईं, जबकि वह लगभग दो वर्षों से नियमित रूप से सेवाएं दे रही हैं। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में उनकी ओर से किसी प्रकार की धोखाधड़ी, तथ्य छिपाने या गलत जानकारी देने का आरोप नहीं है। नियुक्ति के बाद केवल संशोधित परिणाम के आधार पर सेवा समाप्त करना कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा। हाईकोर्ट के सामने क्या दलील? याचिकाकर्ता वकील जसबीर मोर ने हाई कोर्ट के समक्ष दलील दी है कि सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने कई मामलों में यह माना है कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति उसकी किसी गलती के बिना हुई हो और वह लंबे समय से सेवा दे रहा हो, तो उसे अचानक नौकरी से नहीं हटाया जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य में टीजीटी संस्कृत के अनेक पद अभी भी रिक्त हैं, इसलिए सेवा में कार्यरत उम्मीदवारों को हटाने के बजाय समायोजन जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि हाल ही में इसी प्रकार के मामलों में हाई कोर्ट ने कुछ अन्य शिक्षकों को अंतरिम राहत देते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। लक्ष्मी ने भी समान आधार पर संरक्षण की मांग की है। हाईकोर्ट से आग्रह किया गया कि अंतिम सुनवाई तक उनकी सेवाएं समाप्त करने पर रोक लगाई जाए और नियुक्ति की स्थिति यथावत रखी जाए। सभी पक्षों को सुनने का बाद कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों न कोर्ट सरकार के आदेश पर रोक लगा दे।