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नगर निगम की बड़ी पहल, ड्रेन और नालों की सफाई पर 1.5 करोड़ रुपये खर्च

पानीपत  आगामी दिनों में मानसून को देखते हुए नगर निगम पानीपत और जिला प्रशासन ने शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। नगर निगम ने वार्ड-1 से 26 तक बरसात के दौरान जमा होने वाले पानी की निकासी के लिए डीजल इंजन और माउंटेड पंप उपलब्ध कराने, उनके संचालन और रखरखाव के लिए 55.28 लाख रुपये का टेंडर जारी किया है। इसके तहत आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न क्षेत्रों में पंप लगाकर जलभराव वाले स्थानों से पानी निकाला जाएगा। नगर निगम ने ऐसे 20 से अधिक स्थान चिन्हित किए हैं। इसके अलावा निगम ने मानसून से पहले शहर की प्रमुख ड्रेनों, नालों और जल निकासी तंत्र की सफाई का विशेष अभियान चलाया है। ड्रेन नंबर-1, नोहरा ड्रेन तथा अन्य बड़े नालों से सिल्ट और कचरा निकालने के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये की लागत से सफाई कार्य कराया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बारिश शुरू होने से पहले सभी प्रमुख ड्रेनों की सफाई पूरी कर ली जाए ताकि पानी का प्रवाह बाधित न हो। इन 3 पाइंट पर ध्यान देने की बड़ी जरूरत है 1. ड्रेन-1 व नालों की सफाई : शहर की जीवन रेखा ड्रेन-1 को माना जाता है। इसकी सफाई अब तक शुरू नहीं हुई है। जगह-जगह कचरा भरा पड़ा है। हालांकि इसकी सफाई समेत अन्य के लिए नगर निगम ने टेंडर जारी किया है, लेकिन सफाई का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। 2. मुख्य सीवर लाइन की सफाई और मरम्मत आधे से ज्यादा शहर की सीवर निकासी संजय चौक से बबैल नाका और यहां से सेक्टर-29 पार्ट-2 से होते हुए मुख्य लाइन पर निर्भर है। इसकी सफाई और मरम्मत का काम अभी चल रहा है। बरसतों से पहले काम पूरा नहीं हुआ तो शहर में जलभराव होगा। 3. संवेदनशील इलाकों में निर्माणाधीन नालों के कार्य नगर निगम कमिश्नर डा. पंकज ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठकें भी आयोजित की हैं। जिनमें जलभराव संभावित क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। हाइवे और शहर के संवेदनशील इलाकों में निर्माणाधीन नालों के कार्य को भी जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया है। इन कामों में ढील रही तो बरसात के दौरान लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। – निगम और प्रशसान के बेहतर काम करने के दावे नगर निगम और जिला प्रशासन ने आगामी मानसून सीजन में शहर को जलभराव की गंभीर समस्या से बचाने के लिए इस बार व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू करने का दावा किया हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है मुख्य फोकस ड्रेनों की सफाई, नेशनल हाइवे के अधूरे नालों की कनेक्टिविटी और वैज्ञानिक तरीके से गाद के निस्तारण पर है।  प्रशासन द्वारा की गई मुख्य तैयारियां 1. प्रमुख ड्रेनों और नालों की सफाई : नगर निगम ने मानसून से पहले शहर की जीवन रेखा माने जाने वाले प्रमुख ड्रेनों की सफाई के लिए 1.5 करोड़ का बजट आवंटित कर टेंडर जारी किए हैं। इसके तहत ड्रेन नंबर-1, ड्रेन नंबर-2 और नोहरा ड्रेन की जेसीबी मशीनों और विशेष उपकरणों से युद्ध स्तर पर सफाई कराई जाएगी। 2. वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण : इस बार के टेंडर में प्रशासन ने एक विशेष और नया प्रावधान जोड़ा है। ड्रेनों से निकाले जाने वाले कचरे और सिल्ट को सड़कों के किनारे छोड़ने के बजाय स्वच्छ भारत मिशन के नियमों के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है। इसके लिए सरकार द्वारा निर्धारित 550 प्रति टन की दर से कचरा उठान की व्यवस्था की गई है। निकाले गए कचरे को तुरंत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए शहर से दूर भैंसवाल रोड की तरफ डंप किया जा रहा है ताकि बारिश में यह गाद दोबारा बहकर नालों में न चली जाए। 3. एनएचएआई के साथ समन्वय और हाइवे वाटरलॉगिंग पर फोकस शहर से गुजरने वाले नेशनल हाइवे जीटी रोड पर जलभराव एक बड़ी समस्या रहा है। इसे लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम कमिश्नर डा. पंकज यादव ने एनएचएआई को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि हाइवे के साथ बन रहे सभी निर्माणाधीन और अधूरे नालों का काम मानसून से पहले अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। – प्रशासनिक स्तर पर निगरानी व नोडल अधिकारी : मेयर नगर निगम और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार फील्ड में उतरकर ड्रेन सफाई कार्य का निरीक्षण करेंगे। संवेदनशील और निचले इलाकों की सूची तैयार कर वहां अतिरिक्त मोबाइल पंप और डीजल जनरेटर सेट तैनात करने की योजना बनाई गई है। – कोमल सैनी, मेयर नगर निगम।  

जलभराव पर लगाम लगाने की तैयारी: हरियाणा सरकार ने 528 करोड़ का विशेष एक्शन प्लान किया लागू

चंडीगढ़  हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी उपायुक्तों को 528 करोड़ रुपये की लागत वाली 328 बाढ़ नियंत्रण प्राथमिक योजनाओं की तत्काल समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर पहले आबादी क्षेत्र (आबादी देह) की सुरक्षा और उसके बाद कृषि भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा तीन दिनों के भीतर मुख्यालय को रिपोर्ट सौंपी जाए। ये निर्देश उन्होंने 55वीं "हरियाणा स्टेट टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी ऑन फ्लड्स" (HSTAC) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि सभी कार्य आगामी मानसून से पहले पूरे किए जाने चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन को फील्ड स्तर पर कार्यों की सख्त निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और समय-सीमा के पालन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वित्त आयुक्त ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे सभी डी-वॉटरिंग पंपों की सूची तैयार करें और यह सुनिश्चित करें कि वे पूरी तरह कार्यशील हों, ताकि उन्हें केंद्रीकृत और रणनीतिक तरीके से तैनात किया जा सके। इससे प्रत्येक जिले के सभी संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त पंपिंग क्षमता उपलब्ध रहेगी और भारी वर्षा तथा जलभराव की स्थिति में समय पर और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि डी-वॉटरिंग मशीनरी की पूरी सूची पहले से तैयार रखी जाए। बैठक में मौजूदा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए बैठक में बताया गया कि चालू वित्त वर्ष के दौरान 642 करोड़ रुपये की लागत वाली 378 बाढ़ सुरक्षा योजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। वर्तमान में 231 योजनाएं क्रियान्वयन की अवस्था में हैं, जबकि 48 योजनाओं का कार्य अभी शुरू होना बाकी है।   बैठक में शहरी बाढ़ नियंत्रण उपायों की भी समीक्षा की गई। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने बताया कि 525.95 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 30 स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज परियोजनाएं फिलहाल निर्माणाधीन हैं, जबकि पिछले वर्ष 23 परियोजनाएं पूरी की गई थीं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या का समाधान करना है। डॉ. मिश्रा ने पिछले वर्ष चिन्हित संवेदनशील बिंदुओं की गहन समीक्षा करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि आगामी मानसून को देखते हुए राज्य सरकार ने बाढ़ से संबंधित कार्यों के लिए, पूरक प्रावधानों सहित 460 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। चालू वर्ष में अब तक लगभग 395 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है। उपायुक्तों को विशेष रूप से नदी संरक्षण और तटबंध संबंधी कार्यों का नियमित रूप से फील्ड निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक के दौरान वित्त आयुक्त ने हरियाणा इंटीग्रेटेड फ्लड मैनेजमेंट एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम (IFMIS) के विकास की भी समीक्षा की और निर्देश दिए कि अगली बोर्ड बैठक से पहले इस प्रणाली को पूरी तरह क्रियाशील किया जाए।