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दिल्ली-जयपुर हाईवे पर थार की तेज़ रफ्तार दुर्घटना, गुरुग्राम में 5 लोगों की मौत

गुरुग्राम गुरुग्राम में शनिवार सुबह दिल्ली-जयपुर हाईवे पर झाड़सा चौक के पास तेज रफ्तार काले रंग की थार गाड़ी डिवाइडर से टकरा गई। इस दर्दनाक हादसे में 3 लड़कियों सहित 5 लोगों की मौत हो गई। वहीं, एक की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है, जिसे इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गुरुग्राम में शनिवार 27 सितंबर 2025 की सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर झाड़सा चौक के पास NH-48 के एग्जिट 9 पर यूपी नंबर वाली- UP81 CS 2319 तेज रफ्तार काले रंग की थार गाड़ी के डिवाइडर से टकरा गई। पुलिस के अनुसार, हादसा सुबह करीब 4:30 बजे हुआ, जब थार कार का ड्राइवर तेज गति के कारण नियंत्रण खो बैठा और गाड़ी डिवाइडर से टकराकर कई बार पलट गई। यह हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए। दिल्ली से गुरुग्राम की ओर जा रही थी कार जानकारी के अनुसार, हादसे के वक्त कार दिल्ली से गुरुग्राम की ओर जा रही थी। गाड़ी में कुल छह लोग सवार थे, जिनमें तीन युवक और तीन युवतियां शामिल थीं। हादसे में दो युवतियों और दो युवकों समेत 4 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, एक लड़की ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, एक युवक गंभीर रूप से घायल है और निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया और क्षतिग्रस्त वाहन को मुख्य मार्ग से हटाया। हादसे की जांच जारी है। पुलिस मृतकों की पहचान करने की कोशिश में जुटी है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, गुरुग्राम पुलिस के पीआरओ संदीप कुमार ने बताया कि घायलों और मृतकों के परिवारों को सूचना दे दी गई है। आगे की जांच जारी है। मृतक और घायलों के नाम पते 1. प्रतिष्ठा (मृतक), निवासी उत्तर प्रदेश 2. आदित्य (30 वर्ष, मृतक), निवासी उत्तर प्रदेश 3. गौतम (मृतक), निवासी सोनीपत, हरियाणा 4. लावण्या (26 वर्ष, मृतक), निवासी उत्तर प्रदेश 5. सोनी (मृतक) , निवासी उत्तर प्रदेश 6. कपिल शर्मा (28 वर्ष, घायल), निवासी बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश 

भाजपा को लाडो लक्ष्मी योजना से मिलेगी बढ़त? हरियाणा में बेटियों को मिलेंगे सबसे ज्यादा रुपये

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने लाडो लक्ष्मी योजना की शुरुआत कर देश की राजनीति में नया अध्याय लिख दिया है। यह योजना न सिर्फ हरियाणा सरकार के लिए गेम चेंजर साबित होगी बल्कि भाजपा बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब और यूपी के विधानसभा चुनाव में भी इस योजना को भुनाने की कोशिश करेगी। इस योजना की सबसे बड़ी यूएसपी यही है कि जो राशि पात्र महिलाओं व लाभार्थियों को दी जा रही है, वह देश में सबसे ज्यादा है। पूरे देश में इस समय आठ योजनाएं चल रही हैं जिनके माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उनके बैंक खाते में हर माह वित्तीय मदद दी जाती है। राज्य सरकार की लाडो लक्ष्मी योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये दिए जाएंगे। बाकी किसी योजना में इतने पैसे नहीं मिलते हैं। मध्य प्रदेश में 1250 रुपये, ओडिशा में 800 रुपये, महाराष्ट्र में 1500 रुपये, पश्चिम बंगाल में 1200 रुपये, झारखंड में 1000 रुपये, कर्नाटक में दो हजार रुपये, तेलगांना में दो हजार रुपये और हिमाचल प्रदेश में 11 सौ रुपये दिए जा रहे हैं। दिल्ली और पंजाब में भी योजना प्रस्तावित हैं, जहां एक-एक हजार रुपये दिए जाने हैं। भाजपा सरकार अब यही भुनाने की कोशिश करेगी कि उसने जो वादा किया था, उसे वह समय पर पूरा कर रही है। हालांकि विपक्ष सवाल उठा रहा है कि पहले सभी महिलाओं को वित्तीय मदद देने की घोषणा की गई थी, मगर अब सिर्फ कुछ ही महिलाओं को दी जा रही है। विपक्ष को जवाब देते हुए सीएम ने कहा- अभी तो सरकार को एक साल पूरा नहीं हुआ है। इस योजना को चार चरणों में पूरा जाना है। बाकी तीन चरणों की घोषणा भी बहुत जल्द किया जाएगा। सबसे ज्यादा हरियाणा में महिलाओं को दिए जाएंगे पैसे प्रदेश                       योजना        लाभ (राशि) मध्यप्रदेश             लाडली बहना      1250 ओडिशा               सुभद्रा                800 महाराष्ट्र         माझी लाडकी बहीण   1500 पश्चिम बंगाल     लक्ष्मी भंडार    1200 झारखंड          मैया सम्मान       1000 कर्नाटक       गृह लक्ष्मी योजना    2000 तेलगांना       गृह लक्ष्मी योजना    2000 योजना को लेकर महिलाओं में था गजब उत्साह लाडो लक्ष्मी योजना के लॉचिंग के मौके पर ताऊ देवी लाल स्टेडियम महिलाओं से पूरा खचाखच भरा हुआ था। योजना को लेकर महिलाओं के चेहरे पर एक अलग ही खुशी देखने को मिल रही थी। महिलाओं को इस बात का अहसास था कि जब उनके खाते में रुपये आएंगे तो वे उन रुपयों से अपनी ख्वाहिशों को पूरा कर पाएंगी। अंबाला से पहुंची पल्लवी ने बताया, ये पैसे उनकी जिंदगी के लिए काफी अहम रखते हैं। उनके पति एक दुकान में नौकरी करते हैं। उन पैसों से जैसे-तैसे खर्चा चल रहा है। इससे उन्हें काफी बल मिल पाएगा। वहीं, पंचकूला की सखी ने बताया, सरकार से मिलने वाली यह मदद उनके परिवार के लिए काफी मायने रखती हैं। इस महंगाई के दौर में ये पैसे उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में मदद करेगी। अब प्रतियोगी परीक्षाओं की कर पाउंगी तैयारी : पुष्पेंद्र रायपुररानी की पुष्पेंद्र ने बताया, उसे इस योजना का बेसब्री से इंतजार था। इस योजना से आने वाले रुपयों से मैं अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर पाउंगी। मेरा सपना सरकारी नौकरी करने का है। इस वित्तीय मदद से मैं अब सीईटी की कोचिंग की तैयारी कर पाउंगी। मेरे मम्मी पापा नहीं है, इस योजना से मिलेगा सहारा : रजनी मंच से लाडो लक्ष्मी योजना में आवेदन करने वाली रजनी ने बताया, उसके मम्मी-पापा नहीं है। राज्य सरकार की इस योजना से मुझे काफी लाभ मिलेगा। इन रुपयों की मदद से मेरी आगे की पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रह सकेगी। मैं नर्सरी टीचर बनना चाहती हूं। पैसे होंगे तो कुछ कर पाउंगी : कामना रायपुररानी की कामना ने बताया, वह अभी ग्रेजुएशन कर रही हैं। ग्रेजुएशन के बाद कुछ सोचा नहीं है। इतने पैसे नहीं हैं कि कोई तैयारी कर पाउं। अब यदि पैसे आते हैं तो मैं कुछ आगे सोच पाउंगी। मेरे पास प्रशासन की ओर से कॉल आई थी कि आपको इस योजना में आवेदन कर सकती हैं। यह सुनते ही मैं खुश हो गई थी।

मिग-21 का गौरवपूर्ण अंत, एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने भरी आखिरी उड़ान

    चंडीगढ़ भारतीय वायुसेना में शामिल पहले सुपरसोनिक फाइटर जेट मिग-21 का आज चंडीगढ़ एयरबेस पर भव्य विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस जेट में आखिरी उड़ान एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने भरी। अब यह ऐतिहासिक विमान आसमान के बजाय म्यूजियम में स्थायी रूप से रखा जाएगा। इस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने कहा कि मिग-21 विमान ने 62 वर्षों तक भारत और रूस के बीच गहरे सैन्य सहयोग को दर्शाया है। उन्होंने बताया कि यह जेट 1971 के युद्ध से लेकर कारगिल संघर्ष, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर तक भारत की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा। मिग-21 की पहली लैंडिंग 1963 में चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर हुई थी और उसी वर्ष अम्बाला में इसकी पहली स्क्वॉड्रन भी बनी थी। इसका निकनेम 'पैंथर' या 'तेंदुआ' था।  25 अगस्त 2025 को बीकानेर से भरी थी आखिरी उड़ान  रूसी मूल के इस विमान ने 25 अगस्त को राजस्थान के बीकानेर स्थित वायुसैनिक अड्डे से अपनी आखिरी उड़ान भरी। छह दशकों तक भारतीय वायुसेना का अभिन्न हिस्सा रहे मिग-21 का ‘बाइसन संस्करण’ आधुनिक तकनीक से लैस था। मिग-21 के हादसों का काला इतिहास: ‘उड़ता ताबूत’ के नाम से विख्यात मिग-21 के आखिरी वर्षों में हुए 300 से अधिक हादसों में 170 से अधिक भारतीय पायलट और 40 नागरिक मारे गए। इसे ‘फ्लाइंग कॉफिन’ यानी ‘उड़ता ताबूत’ भी कहा गया। 1966 से 1984 के बीच बने 840 विमानों में से आधे से अधिक हादसों में खो गए। पिछले चार वर्षों में भी सात मिग-21 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें कई पायलटों की जान गई। प्रमुख दुर्घटनाएं     5 जनवरी 2021, सूरतगढ़ (राजस्थान) – पायलट सुरक्षित     17 मार्च 2021, ग्वालियर (मध्य प्रदेश) – ग्रुप कैप्टन की मौत     20 मई 2021, मोगा (पंजाब) – पायलट की मृत्यु     25 अगस्त 2021, बाड़मेर (राजस्थान) – पायलट सुरक्षित     25 दिसंबर 2021, राजस्थान – पायलट की मृत्यु     28 जुलाई 2022, बाड़मेर (राजस्थान) – दो पायलटों की मौत     8 मई 2023, हनुमानगढ़ (राजस्थान) – पायलट सुरक्षित मिग-21 की विदाई भारतीय वायुसेना के एक युग के समापन का प्रतीक है और यह विमान हमेशा वीरता, साहस और देशभक्ति का प्रतीक बना रहेगा।

वंदे भारत एक्सप्रेस का हरियाणा को तोहफा, अब महेंद्रगढ़ स्टेशन पर भी रुकेगी ट्रेन

 महेंद्रगढ़   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के बांसवाड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाकर इस ट्रेन को बीकानेर से रवाना किया। यह वंदे भारत एक्सप्रेस बीकानेर से दिल्ली तक 448 किलोमीटर की दूरी मात्र 6 घंटे 15 मिनट में तय करेगी। वंदे भारत एक्सप्रेस हरियाणा के महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन पर भी रुकेगी, जिससे हरियाणा के लोगों के लिए दिल्ली और राजस्थान जाना और भी आसान हो जाएगा। इसके अलावा, यह ट्रेन हरियाणा से राजस्थान के प्रमुख शहरों और पर्यटन स्थलों तक सीधी, तेज और आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराएगी। महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत एक्सप्रेस का जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर, लोहारू से ट्रेन में सवार होकर आए महेंद्रगढ़-भिवानी लोकसभा क्षेत्र से सांसद चौधरी धर्मवीर सिंह ने स्टेशन पर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर दिल्ली के लिए रवाना किया। हरियाणा में महेंद्रगढ़ सहित कुल चार रेलवे स्टेशनों पर इस ट्रेन के ठहराव की मंजूरी दी गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस नई सुविधा से क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी। खासकर दिल्ली और बीकानेर तक छात्रों और कारोबारियों की आवाजाही तेज और सुगम होगी। महेंद्रगढ़ स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में कई राज्यों से छात्र अध्ययन करते हैं, जिन्हें अब यात्रा में बड़ी सुविधा मिलेगी। वंदे भारत एक्सप्रेस में कुल 608 सीटों की व्यवस्था वंदे भारत एक्सप्रेस पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से लैस है। सभी कोच वातानुकूलित हैं और इनमें इलेक्ट्रिक आउटलेट, रीडिंग लाइट, सीसीटीवी कैमरे, स्वचालित दरवाजे, बायो-वैक्यूम शौचालय, सेंसर आधारित पानी के नल और यात्री सूचना प्रणाली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। ट्रेन में दो टीटी, दो क्रू मेंबर और एक गार्ड यात्रियों की सेवा के लिए तैनात रहेंगे। 608 सीटों में से 52 सीटें एग्जीक्यूटिव क्लास के लिए और बाकी चेयर कार कोच में 44 से 78 सीटें होंगी।

हरियाणा के सरकारी स्कूलों के समय में बदलाव, 30 सितंबर को लेट खुलेगा स्कूल – छुट्टी और फैसले की वजह जानें

चंडीगढ़ विद्यालय शिक्षा निदेशालय हरियाणा ने 30 सितंबर 2025 (मंगलवार) दुर्गा अष्टमी को सभी राजकीय विद्यालयों के समय में बदलाव करने के आदेश जारी किए हैं। जारी परिपत्र के अनुसार उस दिन स्कूल का समय सुबह 10:00 से दोपहर 2:30 बजे तक रहेगा। यह समय विद्यार्थियों और अध्यापकों दोनों पर समान रूप से लागू होगा। निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधीनस्थ विद्यालयों तक यह सूचना पहुंचाकर अनुपालना सुनिश्चित करें। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अपने स्तर पर विद्यालय समय में कोई परिवर्तन न किया जाए। साथ ही, जिन विद्यालयों में दोहरी शिफ्ट संचालित होती है, वहां पहली शिफ्ट का समय केवल 30 सितंबर को सुबह 10:00 बजे से 12:30 बजे तक रहेगा। जबकि दूसरी शिफ्ट का समय अन्य दिनों की तरह यथावत रहेगा, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। विद्यालय शिक्षा विभाग ने यह आदेश दुर्गा अष्टमी के अवसर पर विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जारी किए हैं। अधिकारी स्तर पर संबंधित सभी शाखाओं को भी इसकी सूचना भेज दी गई है।  

1984 दंगा पीड़ितों को सरकार का सहारा, CM सैनी ने 121 परिवारों को नौकरी देने की घोषणा की

चंडीगढ़  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों से प्रभावित सिख परिवारों का सम्मान करेंगे। इसे लेकर मुख्यमंत्री आवास के कैंप ऑफिस में एक कार्यक्रम भी रखा गया है। इन परिवारों के सदस्य सिख विरोधी दंगों में मारे गए थे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा के मानसून सत्र में यह घोषणा करते हुए कहा था कि पीड़ित परिवार के सदस्यों को आपसी सहमति से तय करना होगा कि किस सदस्य को नौकरी दी जानी है। दंगों में हरियाणा को बहुत नुकसान हुआ नौकरी के लिए जिला उपायुक्त के माध्यम से हरियाणा सरकार के पास नाम भेजा जाएगा, ताकि राज्य सरकार संबंधित सदस्य को उसकी योग्यता के हिसाब से यथोचित नौकरी प्रदान कर सके।नायब सैनी ने इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद कहा कि जब वे भी हरियाणा के दौरे पर निकले तो सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवार के सदस्यों ने मिलकर अपनी व्यथा सुनाई। 1984 में सिख विरोधी दंगों में प्रदेश में लगभग 20 गुरुद्वारों, 221 मकानों, 154 दुकानों, 67 फैक्ट्रियों, तीन रेल डिब्बों और 85 वाहनों को जला दिया गया था। सरकार ने लिया पुनर्वास का जिम्मा हरियाणा में इन दंगों में 58 व्यक्ति घायल हुए थे और 121 लोगों की मृत्यु हुई थी। पीड़ित परिवारों की व्यथा सुनने के बाद हरियाणा सरकार ने ऐसे परिवारों के पुनर्वास का जिम्मा लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीड़ित परिवारों को आपसी सहमति से परिवार के एक सदस्य का नाम तय करना होगा, जिसे उपायुक्त मुख्य सचिव के पास भिजवाएंगे। पंजाब चुनाव पर पड़ेगा असर नौकरियां देने के प्रारूप, नियम और शर्तों के बारे में जल्दी ही अधिसूचना जारी की जाएगी। बता दें कि, दिल्ली सरकार ने हाल ही में 125 पीड़ित परिवारों के सदस्यों को सरकारी नौकरियों के लिए लेटर जारी किए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की इस घोषणा को निकटवर्ती राज्य पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

सोना 94% और चांदी 180% महंगी, हरियाणा के बाजार में 40% तक घटे ज्वेलरी ऑर्डर

चंडीगढ़  दो साल में सोने के दाम 94 फीसदी और चांदी के दाम 180 फीसदी की बढ़ोत्तरी होने से हरियाणा के सर्राफा बाजार में मंदी नजर आने लगी है। ज्वेलर्स के मुताबिक सोना-चांदी कारोबार में 40 फीसदी की कमी आई है। हरियाणा में धनतेरस पर सर्राफा बाजार में एक हजार करोड़ रुपये का व्यापार अनुमानित है। हरियाणा अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ के अध्यक्ष योगेंद्र वर्मा ने बताया कि इस बार कारोबार पर ऐसी मार है कि कारीगरों की नौकरी संकट में है। पहले भारी और डिजाइनर गहनें बनवाने वाले लोग पितृपक्ष से ऑर्डर करने लगते थे और नवरात्रि में ऑर्डर की धूम मच जाती थी। इस बार स्थिति एकदम उलट है, पितृपक्ष से पहले हर बार के मुकाबले मात्र 15 से 25 फीसदी ही ऑर्डर मिले थे। इसी तरह नवरात्रों में भी ऑर्डर कम मिल रहे हैं और ज्यादातर हल्के गहनों की मांग है। 2023 में धनतेरस पर सोना 55 हजार रुपये तोला था 2023 में धनतेरस के समय सोने का दाम 55 हजार से 58 हजार रुपये तोला था जबकि चांदी 50 हजार रुपये किलो थी। अक्तूबर 2024 में धनतेरस पर सोने का दाम 78 से 80 हजार रुपये तोला पहुंच गया है। चांदी एक लाख एक हजार रुपये किलो थी। 2025 के नवरात्रों तक ही सोने का दाम 1.13 लाख रुपये और चांदी की दाम 1.40 लाख रुपये किलो तक छू चुका है। 2024 में धनतेरस पर 1100 करोड़ का हुआ था कारोबार हरियाणा अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ के मुताबिक 2024 में नवरात्र से बंपर ऑर्डर मिलने लगे थे। धनतेरस पर प्रदेश में करीब 1,100 करोड़ रुपये के सोने-चांदी की बिक्री हुई थी। इनमें 11 टन से अधिक सोना और 3,500 किलो चांदी की बिक्री हुई थी। सात जिलों में सोना और चार में चांदी की बिक्री ज्यादा हरियाणा अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ के अध्यक्ष योगेंद्र वर्मा के मुताबिक राज्य के सात जिलों में सबसे ज्यादा सोने के आभूषणों की बिक्री होती है। इसमें गुरुग्राम, अंबाला, पानीपत, हिसार, सिरसा, फरीदाबाद और भिवानी हैं। वहीं, मेवात, झज्जर, नारनौल और महेंद्रगढ़ जिलों में चांदी की बिक्री ज्यादा होती हैं।

सरकार की हरी झंडी के बाद निलंबित सीबीआई जज पर केस, एसीबी कर सकती है अगला कदम

 चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित पूर्व सीबीआई जज सुधीर परमार के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। अब एसीबी अदालत में पूर्व न्यायिक अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट दायर कर सकेगी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम व दंड प्रक्रिया संहिता के मुताबिक किसी भी लोक सेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की मंजूरी लेना अनिवार्य है। राज्य चौकसी एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 18 महीने जांच करने के बाद परमार के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी थी। पूर्व जज पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े रियल एस्टेट कंपनी एम3एम के प्रमोटर्स बसंत बंसल, पंकज बंसल और आईआरईओ के मालिक व प्रबंध निदेशक ललित गोयल व भतीजे अजय परमार के मामले में नरमी बरतने और रिश्वत लेने के आरोप थे। एसीबी से पहले ईडी ने रियल एस्टेट कंपनी के मालिकों व प्रबंध निदेशकों को घर खरीदारों और अन्य लोगों के साथ कथित धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया था। ईडी में अपनी जांच कर रही थी, उसी दौरान एसीबी परमार और एक अन्य व्यक्ति के बीच व्हाट्सएप चैट के कुछ स्क्रीनशॉट मिले, जिसमें वह एम3एम मालिकों को ईडी के मामलों में मदद करने के लिए 5 से 7 करोड़ रुपये की मांग कर रहे थे।  इसी चैट में दूसरा व्यक्ति कहता है कि आईआरईओ मामले में सुधीर परमार को पहले ही 5 करोड़ रुपये दे चुका है। उसके बाद एसीबी ने सुधीर परमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। उन पर यह भी आरोप है कि रिश्वत के पैसे से उन्होंने गुरुग्राम में प्रॉपर्टी भी खरीदी थी। बाद में इस मामले की जांच ईडी ने अपने हाथ में ले ली और सुधीर परमार के घर में छापे मारकर उन्हें गिरफ्तार किया। उसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था।  

MiG-2 ने भरी आखिरी उड़ान, भारतीय वायुसेना ने किया सलामी के साथ विदा

चंडीगढ़   चंडीगढ़ के इंडियन एयरफोर्स स्टेशन से भारतीय वायुसेना के प्रसिद्ध जंगी विमान मिग-21 की विदाई का महत्त्वपूर्ण क्षण नजदीक आ गया है। आज 12 विंग एयरफोर्स स्टेशन में इसके अंतिम प्रस्थान से पहले फुल ड्रेस रिहर्सल का आयोजन हुआ, जिसमें मिग-21 को वाटर कैनन सैल्यूट के साथ सम्मानित किया गया। आसमान में सूर्य किरण एरोबेटिक टीम और आकाश गंगा स्काई डाइवर्स ने शानदार एरोबेटिक प्रदर्शन कर समारोह को यादगार बना दिया। जब मिग-21 ने गर्जना करते हुए उड़ान भरी, तो पूरा शहर गूंज उठा। 62 वर्षों के गौरवशाली इतिहास के साथ अब मिग-21 भारतीय वायुसेना से विदा हो रहा है। मिग-21 को पहली बार 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। मिकोयन ग्युरेविच (मिग-21) का चंडीगढ़ से करीब छह दशक पुराना गहरा नाता रहा है, और यहीं से इसकी विदाई हो रही है। यह विमान न केवल वायुसेना के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय रहा है। इसकी विदाई भावुक कर देने वाला क्षण होगा, क्योंकि इसने दशकों तक देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा की है। 26 सितंबर को मिग-21 की आखिरी उड़ान भारतीय वायुसेना ने मिग-21 को आधिकारिक तौर पर 26 सितंबर को रिटायर करने का ऐलान किया है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के आगरा से विशेष टीम भी चंडीगढ़ पहुंच रही है, ताकि इस ऐतिहासिक विदाई में हिस्सा ले सके। मिग-21 का गौरवशाली इतिहास      1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया।     भारत का पहला सुपरसोनिक लड़ाकू विमान, जिसकी गति ध्वनि की गति से भी अधिक थी।     1971 के भारत-पाक युद्ध में दुश्मन के कई विमानों को मार गिराकर निर्णायक भूमिका निभाई।     कारगिल युद्ध (1999) में भी वीरता और ताकत का परिचय दिया।     ‘वायुसेना की रीढ़’ के रूप में विख्यात, देश की हवाई सुरक्षा की आधारशिला रहा।     62 वर्षों तक भारतीय वायुसेना की ताकत बना रहा। मिग-21 की तकनीकी खूबियां     अधिकतम गति लगभग 2,200 किलोमीटर प्रति घंटा (Mach 2.05)।     उड़ान की अधिकतम ऊंचाई 17,500 मीटर।     हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस।     छोटा, परंतु अत्यंत शक्तिशाली डिजाइन, जो तेज हमलों और हवाई युद्ध के लिए उपयुक्त। मिग-21 की विदाई न केवल भारतीय वायुसेना के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक भावुक और गौरवशाली क्षण है। यह विमान वर्षों तक हमारी हवाई सीमाओं की रक्षा करता रहा और अब अपनी आखिरी उड़ान के साथ इतिहास बन जाएगा।

हरियाणा में धान की खरीद पर संकट, मांगें मानने के बाद भी कई मंडियां रहीं सूनी

कैथल  राइस मिलर्स की सरकार ने अधिकतर मांगें मान ली हैं। इसके बाद मिलर्स धान की मिलिंग के लिए राजी हो गए। मिलर्स ने पोर्टल पर पंजीकरण कराने के साथ धान की खरीद भी शुरू कर दी है। कैथल मंडी में साढ़े तीन हजार क्विंटल के करीब धान की खरीद हो चुकी है। कैथल में 108 के करीब राइस मिलर्स ने पंजीकरण करवाया है। दो तीन दिनों में धान की खरीद में तेजी आएगी। फोर्टिफाइड चावल देना होगा राइस मिलर्स को 100 किलोग्राम में एक किलो फोर्टिफाइड चावल मिलाकर देना होगा, यानि 100 दानों में एक दाना मिलाना होगा, इसके लिए टेंडर होंगे, अच्छी कंपनियों को टेंडर अलॉट किए जाएंगे। बैच नंबर नंबर सहित सभी नियम पूरे करने होंगे। देश के गरीब लोगों में इस चावल का वितरण होता है। जरूरी पोषक तत्व न मिलने से स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ता है। पीआर धान की खरीद शुरू राइस मिलर्स एवं डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि राइस मिलर्स ने पीआर धान की खरीद शुरू कर दी है। धान में नमी की मात्रा ज्यादा आ रही है, इसलिए धान को सुखाकर लाएं। मिलर्स की कुछ मांगें अधूरी रह गई थी, अब सरकार ने मान ली हैं। बैंक गारंटी पिछले साल वाली ही रहेगी, इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं होगी, पिछले साल 10 लाख रुपये थी, इस बार भी वही रहेगी। इसके अलावा चावल में जो 25 प्रतिशत टुकड़ा निकलता है, इसमें से दस प्रतिशत टुकड़े की चावल में खपत होगी। बचे 15 प्रतिशत टुकड़े की डिस्टलरी खरीद करेगी, यह सीधा राइस मिलर्स से डिस्टलरी में जाएगा। सरकारी खरीद शुरू होने के तीसरे दिन पीआर धान की खरीद में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। बुधवार तक 11 जिलों में धान पहुंचा, इनमें से छह जिलों में खरीद हुई। सबसे अधिक कुरुक्षेत्र और सबसे कम पानीपत में खरीद हुई। मंडियां धान से अटने लगी हैं। खरीद ना होने का बड़ा कारण धान में 17 प्रतिशत से अधिक नमी है। दूसरा कारण मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण का सत्यापन नहीं होना भी है। धान नहीं बिकने के कारण किसान कई दिनों से मंडियों में इंतजार कर रहे हैं। 11 जिलों में 91490 मीट्रिक टन पीआर धान की आवक हुई। इसमें से 25811 मीट्रिक टन की ही खरीद हो सकी। 65689 मीट्रक धान अभी भी मंडियों फैला है। अंबाला में तो यह सड़कों तक आ गया है। जानिये, जिलों की स्थिति अंबाला जिला की मंडियों में अब तक कुल 4100 गेट पास काटे गए हैं। जिनमें अब तक 22 हजार 640 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। इसमें से चार हजार 288 मीट्रिक टन धान की खरीद कर ली गई है। नारायणगढ की मंडी में सबसे अधिक और नन्यौला की मंडी में अब तक सबसे कम धान पहुंचा है। l यमुनानगर में 12 हजार मीट्रिक टन से अधिक पीआर धान मंडियों में पड़ा है। यहां अब 3186 गेटपास कटे हैं। अभी तक 3472 टन की खरीद हो चुकी है। कैथल में 3489 मीट्रिक टन की आवक हुई है। इसमें से 138 टन धान बिका है। इन जिलों में आवक बढ़ी, पर नहीं हुई खरीद प्रदेशभर के पांच जिलों जींद, हिसार, करनाल, फतेहाबाद और सोनीपत में धान की आवक बढ़ गई है, लेकिन यहां पर खरीद नहीं हुई। जींद में 347, हिसार में 65, करनाल में 3400, फतेहाबाद में 139 और सोनीपत में 69 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। इन पांचों जिलों में से कहीं पर धान की खरीद नहीं हुई, जिससे वहां के किसान परेशान हैं। पोर्टल पर सत्यापन नहीं होने से खरीद धीमी रोहेड़ि़या के किसान बिंटू जागलान ने बताया कि पिछले दो दिनों से पीआर धान लेकर आया हूं। नमी भी कम है, लेकिन एमएसपी पर खरीद नहीं हो रही। 2150 रुपये प्रति क्विंटल रेट दे रहे हैं। पीआर का एमएसपी 2389 रुपये है, मिलर्स नमी बताकर कम रेट लगा रहे हैं। सरकार दावा कर रही है, एमएसपी पर खरीद हो रही है, लेकिन मंडियों में खरीद एमएसपी से कम हो रही है। पीआर धान उत्पादक किसानों ने मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण किया था। अब किसान मंडियों में धान लेकर पहुंच रहे हैं। यहां पोर्टल पर सत्यापन नहीं होने के कारण गेट पास नहीं कट रहे हैं। किसान अब चक्कर काट रहे हैं। मुख्यालय की ओर से सत्यापन नहीं होने से मुसीबतें बढ़ गई हैं। कहां कितने राइस मिलर्स ने कराया रजिस्ट्रेशन जिला पंजीकरण कैथल 108 सिरसा 2 अंबाला 45 करनाल 30 फतेहाबाद 140 इन जिलों में नहीं कराया कोई भी पंजीकरण यमुनानगर में अभी तक किसी भी मिलर ने पंजीकरण नहीं कराया, जबकि पिछली बार 190 ने कराया था। जींद में भी अभी तक कोई पंजीकरण नहीं हुआ है, जबकि पिछले वर्ष 32 ने मिलिंग की थी। कुरुक्षेत्र में सबसे अधिक खरीद हो चुकी है, लेकिन किसी भी राइस मिलर ने पंजीकरण नहीं कराया है। पानीपत में भी किसी मिलर ने पंजीकरण नहीं कराया। जिलों में आवक और खरीद की स्थिति मंडी आवक खरीद अंबाला 24,186 8,476 कैथल 3,489 138 कुरुक्षेत्र 34,917 11,294 पंचकूला 4,870 2,424 पानीपत 1456 यमुनानगर15,326 3,472