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रामनामी समुदाय के प्रतिनिधियों ने पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल से की भेंट

रायपुर  पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल से आज नया रायपुर स्थित शासकीय निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत और अनूठी आस्था के प्रतीक रामनामी समुदाय के सदस्यों ने आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर मंत्री  अग्रवाल ने रामनामी समुदाय की आस्था, परंपरा, जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का प्रतिष्ठित सम्मान मिलने पर समुदाय के सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि रामनामी समुदाय छत्तीसगढ़ की विशिष्ट लोक-सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समुदाय की आस्था, परंपराएं और जीवनशैली हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत बनाए रखने का कार्य करती हैं। ‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म की उपलब्धि नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और रामनामी समाज की जीवंत विरासत का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। इस फिल्म के माध्यम से रामनामी समाज की विशिष्ट पहचान, उनकी आस्था और सांस्कृतिक जीवन को देशभर में पहचान मिली है। मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विविधता, जीवंतता और जनजीवन से गहरा जुड़ाव है। यहां की लोक परंपराएं, जनजातीय एवं लोक कलाएं, आस्था से जुड़ी परंपराएं और समुदायों की विशिष्ट जीवनशैली प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती हैं। रामनामी समाज की परंपराएं इसी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की लोक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और उसे देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। स्थानीय परंपराओं, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ना तथा उन्हें व्यापक मंच उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। मंत्री  अग्रवाल ने रामनामी समुदाय के सदस्यों से बातचीत के दौरान उनकी परंपराओं, सांस्कृतिक गतिविधियों और समाज की विशिष्ट पहचान से जुड़े विभिन्न विषयों की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में समाज और समुदायों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर रामनामी समुदाय के सदस्यों ने डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ को मिले राष्ट्रीय सम्मान के लिए प्रसन्नता व्यक्त की और मंत्री  राजेश अग्रवाल के प्रति आभार जताया। मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपराओं और विरासत को आगे बढ़ाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई।

निर्यात में यूपी का नया रिकॉर्ड, राष्ट्रीय औसत से साढ़े तीन गुना तेज बढ़ी रफ्तार

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति (2026-29) के सकारात्मक परिणाम प्रदेश के निर्यात आंकड़ों में तेजी से दिखाई दे रहा है। जुलाई 2026 में उत्तर प्रदेश से बोतलबंद मदिरा का निर्यात 55.2 लाख अमेरिकी डॉलर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष जुलाई के 29.1 लाख डॉलर की तुलना में 89.7 प्रतिशत अधिक है। खास बात यह है कि इसी अवधि में देश का समग्र निर्यात 25.7 प्रतिशत बढ़ा। यानी उत्तर प्रदेश की निर्यात वृद्धि राष्ट्रीय वृद्धि की तुलना में करीब साढ़े तीन गुना रही। जुलाई में राष्ट्रीय निर्यात में उत्तर प्रदेश की मासिक हिस्सेदारी 8.3 प्रतिशत से बढ़कर 12.5 प्रतिशत हो गई। इस उपलब्धि के साथ प्रदेश महाराष्ट्र और पंजाब के बाद देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया।  व्हिस्की-वोदका के निर्यात ने पकड़ी तेज रफ्तार प्रदेश के निर्यात प्रदर्शन में व्हिस्की और वोदका की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। जुलाई में व्हिस्की के निर्यात में 78.8 प्रतिशत, जबकि वोदका के निर्यात में 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। मात्रा के लिहाज से प्रदेश का निर्यात 230 प्रतिशत बढ़ा, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह वृद्धि 90 प्रतिशत रही। इससे प्रदेश की निर्यात क्षमता और बाजार विस्तार की बढ़ती गति का संकेत मिलता है। 4 माह में 183 लाख डॉलर का निर्यात, 66 लाख डॉलर अतिरिक्त विदेशी मुद्रा अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात 183 लाख डॉलर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 117 लाख डॉलर था। इस तरह चार माह में 56.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि राष्ट्रीय वृद्धि 20.4 प्रतिशत रही। प्रदेश ने इस अवधि में 66 लाख डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा अर्जित की। राष्ट्रीय निर्यात में हिस्सेदारी 9.7 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई और प्रदेश चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच गया। निर्यात लाइनें 29 से बढ़कर 39 तथा संचालित बंदरगाहों की संख्या सात से बढ़कर 10 हो गई। नई इकाइयों से निवेश और किसानों को भी लाभ नीति के सकारात्मक प्रभाव से प्रदेश में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और बंद संयंत्रों के पुनर्जीवन का सिलसिला भी तेज हुआ है। यूनाइटेड ब्रुअरीज उन्नाव और माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज हरदोई में नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने फर्रुखाबाद में इकाई स्थापित की है, जबकि एलाइड ब्लेंडर्स एण्ड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद इकाई को फिर सक्रिय किया है। गोरखपुर में कियान डिस्टिलरी ने पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए आवेदन किया है। आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि नीति का लाभ प्रदेश के किसानों तक भी पहुंच रहा है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है, वहीं ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने से अनाज की खरीद में वृद्धि हुई है। नीति में यह भी प्राविधान है कि जिस आसवनी अथवा उसके स्वामी की किसी अन्य इकाई या चीनी मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान की वसूली प्रमाण-पत्र प्रभावी है, उसे नीति की छूट नहीं दी जाएगी। कांच, पैकेजिंग से परिवहन तक बढ़े अवसर आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि देशभर में बोतलबंद मदिरा के निर्यात में जुलाई में 11.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि उत्तर प्रदेश ने इसी अवधि में 55.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। बोतलबंद निर्यात में प्रदेश की राष्ट्रीय हिस्सेदारी भी 7.9 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई। निर्यात में वृद्धि का असर केवल आसवनी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। गन्ना, शीरा और अनाज से जुड़ी पश्च संबद्धता के साथ कांच की बोतल, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। बस्ती से 25 हजार कुंतल शीरे का विदेश निर्यात भी पूरा हुआ, जिससे पांच लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित हुई। यह राशि अलग शुल्क वर्गीकरण के कारण उपरोक्त आंकड़ों के अतिरिक्त है। यूपी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान उत्तर प्रदेश की निर्यात नीति का प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से गठित टास्क फोर्स विभिन्न राज्यों के लिए आदर्श निर्यात नीति तैयार कर रही है। इसमें एपीडा समेत विभिन्न राज्यों के आबकारी विभाग शामिल हैं। टास्क फोर्स की बैठक में उत्तर प्रदेश की नीति की सराहना की गई और इसे अन्य राज्यों के लिए उपयोगी ढांचा बताया गया। राष्ट्रीय आदर्श नीति में उत्तर प्रदेश के अनुभवों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

भजनलाल ने कांग्रेस पर साधा निशाना, गहलोत बोले- मुख्य चुनाव आयुक्त को देना चाहिए इस्तीफा

जयपुर जयपुर समेत पूरे प्रदेश में रविवार के दिन भी राजनीतिक पारा अपने चरम पर रहा। आम तौर पर छुट्टी का दिन माने जाने वाले रविवार को राज्य के सियासी गलियारों में वार-पलटवार का दौर पूरे जोर-शोर से चला। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भाजपा मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी और विपक्षी दलों पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और मनगढ़ंत तथ्य फैलाने के गंभीर आरोप लगाए। वहीं, मुख्यमंत्री के इन बयानों के सामने आने के कुछ ही देर बाद, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर मोर्चा संभालते हुए जोरदार पलटवार किया, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। CM भजनलाल शर्मा का कांग्रेस पर हमला भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस पार्टी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से विपक्षी दल सोची-समझी रणनीति के तहत चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा, "जो लोग जनता द्वारा बार-बार नकारे जा चुके हैं, वे अपनी चुनावी हार को छिपाने के लिए अक्सर देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला बोलते हैं। कांग्रेस पार्टी ने एसआईआर (SIR) को लेकर पूरी तरह एक झूठा नैरेटिव गढ़ा है।" उन्होंने याद दिलाया कि 26 सितंबर को आयोग द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में यह स्पष्ट कर दिया गया था कि सभी चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिए हैं। सीएम भजनलाल ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि हार के बाद दूसरों पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय उन्हें अपनी राजनीतिक गतिविधियों और जनता के बीच काम करने पर ध्यान देना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा देना चाहिए : गहलोत मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ ही देर बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक लंबा-चौड़ा बयान जारी कर भाजपा सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। गहलोत ने अपने पोस्ट में लिखा कि पहले कभी ऐसी स्थिति आने पर सभी राजनीतिक दल मिलकर समाधान की बात करते थे, लेकिन अब ऐसा पहली बार हो रहा है कि चुनाव आयोग के भीतर से ही सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि वे पिछले दो सालों से देश को आगाह कर रहे थे और आज उनकी बातें सच साबित हो रही हैं। गहलोत ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं और भाजपा नेताओं द्वारा उनका बचाव यह साबित करता है कि दोनों के बीच मिलीभगत है। उन्होंने सीधे तौर पर मांग की कि मौजूदा हालात को देखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को खुद अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर छिड़ी जंग इस ताज़ा सियासी टकराव ने यह साफ कर दिया है कि राजस्थान की मुख्य राजनीतिक पार्टियों—भाजपा और कांग्रेस—के बीच वैचारिक और राजनीतिक संघर्ष किसी भी दिन थमने वाला नहीं है। एक तरफ सत्ताधारी पार्टी जहाँ संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बचाने और विपक्ष के दुष्प्रचार को बेनकाब करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल इन संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी गर्माहट और अधिक बढ़ने के पूरे आसार हैं।

एलिवेटेड रोड के पास सड़क धंसी, ग्वालियर में 4 मकानों में दरारें पड़ीं

ग्वालियर. ढोली बुआ के पुल वाले क्षेत्र में एलिवेटेड रोड के पिलर खुदाई के चलते स्वर्ण रेखा की दीवार के बेस में डले रैंप को तोड़ दिया गया है। इसके बाद नाले की दीवार के साथ लगी सड़क 100 फीट तक फटने के साथ ही सड़क किनारे के 4 मकानों में दरारें आ गई है। वहीं दरारों के लगातार बढ़ने से लोगों में दहशत का माहौल है। हालांकि निगम अधिकारियों ने देर रात ही मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया, लेकिन लोगों को किसी तरह की राहत नहीं मिल सकी। शुक्रवार से हुई थी सड़क फटने की शुरुआत मौके पर पहुंचे तकनीकी अधिकारियों ने बताया कि दो दिन पहले ही एलिवेटेड रोड के पिलर डालने के लिए स्वर्ण रेखा की दीवार तोड़ कर ग्राउंड बेस रैंप बनाया गया था और इसके बाद क्षेत्र में सड़क की स्थिति प्रभावित हुई । शुक्रवार को सड़क फटने की शुरुआत हो गई थी, जो शनिवार की रात तक दरारें चौड़ी होने से पुन: बढ़ती दिखी। देर शाम तक सड़क में लंबी दरारें आने के साथ ही 04 मकान भी चटकने व दरारें आने से प्रभावित हुए।  इस मामले में नगर निगम ग्वालियर के कमिश्नर संजीव झा ने कहा- सड़क फटने व मकानों में दरारें आने की सूचना पर तत्काल मौके पर आ गया हूं, अभी दरार आने के लिए मौके की स्थिति का आंकलन जारी है।  इनके मकानों आई है दरारें – गणेश शाक्य – कमरे/किचन में  लीला शाक्य – आंगन/किचन/बाथरूम में  नारायण कन्नौजिया –  आंगन/लैट-बाथ में शालिनी ढेरे – दीवार की बाउंड्री

बाढ़ के बीच जिला प्रशासन बना जीवनरक्षक, एयरलिफ्ट से सुरक्षित लाए गए 6 कर्मचारी

रायपुर  लगातार बारिश और बाढ़ के बीच इन्द्रावती नदी पार माड़ क्षेत्र में फंसे पटवारी एवं सर्वेयर सहित 6 कर्मचारियों को जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से एयरलिफ्ट कर सुरक्षित बीजापुर लाया गया। जिला मुख्यालय पहुंचने के बाद सभी कर्मचारियों का जिला अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया, जिसमें सभी की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य पाई गई। उल्लेखनीय है कि गिरदावरी सर्वे कार्य के लिए पटवारी एवं सर्वेयर का 6 सदस्यीय दल बड़ेपल्ली और गुट्टामंगी क्षेत्र में गया था। इसी दौरान लगातार बारिश के कारण नदी-नालों में जलस्तर बढ़ गया और क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति निर्मित होने से कर्मचारी वहीं फंस गए। कर्मचारियों के फंसे होने की जानकारी मिलते ही कलेक्टर श्री विश्वदीप ने तत्काल रेस्क्यू की कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला प्रशासन ने बिना समय गंवाए एयरलिफ्ट की व्यवस्था कर सभी 6 कर्मचारियों को सुरक्षित जिला मुख्यालय पहुंचाया। जिला अस्पताल में कलेक्टर श्री विश्वदीप की उपस्थिति में कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। कलेक्टर ने सभी कर्मचारियों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली। सुरक्षित लौटे कर्मचारियों के चेहरे पर राहत और अपनों से दोबारा मिलने की खुशी साफ दिखाई दी। कलेक्टर ने कठिन परिस्थितियों में अपने दायित्व का निर्वहन करने के लिए कर्मचारियों के कार्य की सराहना की। इस अवसर पर कलेक्टर श्री विश्वदीप ने कहा कि बाढ़ और आपदा की परिस्थितियों में जिला प्रशासन पूरी सजगता और तत्परता के साथ कार्य कर रहा है। प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। राहत एवं बचाव दल लगातार परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके और जरूरतमंदों तक समय पर सहायता पहुंचाई जा सके। बाढ़ की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच जिला प्रशासन की त्वरित पहल से 6 कर्मचारियों की सुरक्षित वापसी ने यह भरोसा मजबूत किया कि आपदा की घड़ी में प्रशासन हर कदम पर अपने लोगों के साथ खड़ा है।इस दौरान आपदा प्रबंधन के नोडल अधिकारी श्री मुकेश देवांगन, तहसीलदार श्री पंचराम सलामे, जिला सेनानी श्री पी.बी. सिदार सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

शामली ने यूपी ट्रेड शो में किया जनपद के लक्ष्य को शत प्रतिशत पूरा

सहारनपुर ग्रेटर नोएडा में चल रहे यूपी ट्रेड शो में शामली से शामिल 10 वर्षों से भी अधिक समय से निर्यात कर रही करियर व्हीलस प्राइवेट लि. सहित जनपद की 10 कंपनियां भाग ले रही हैं। इन कंपनियों के उत्पादों के प्रति ट्रेड शो में विदेशी व्यापारियों का रुझान बढ़-चढ़ कर हो रहा है। जबकि रिटेल सेल की बात करें तो कैराना के साधु स्वीट्स एवं अग्रवाल स्वीट्स पर रिटेल सेल रिकॉर्ड तोड़ रही है। जनपद शामली ने ट्रेड शो के लिए निर्धारित लक्ष्य को किया शत-प्रतिशत पूरा यूपी ट्रेड शो में शामली से सम्मिलित होने वाली कंपनियों में करियर व्हीलस प्राइवेट लिमिटेड, अमर स्प्लिंट्स प्राइवेट लिमिटेड, बेजरिका प्राइवेट लिमिटेड, कैरा डाइम हेल्थ केयर, एलएलपी, आरव एग्रो फूड्स, श्री आयुर्वेदिक संस्थान, अंकित हैंडलूम तथा एक जनपद एक व्यंजन में साधु स्वीट्स अग्रवाल स्वीट्स की स्टाल लगी है। जनपद शामली ने निर्धारित किए गए लक्ष्य को शत प्रतिशत पूरा किया है। साधु स्वीट्स का पलंग तोड़ पेड़ा व बर्फी विदेशी महमानों की बन रहे पहली पसंद साधु स्वीट्स के मालिक राकेश गर्ग ने बताया कि उनके स्टाल पर ट्रेड शो के पहले दिन से ही ग्राहकों की भारी भीड़ हो रही है। हालांकि उनकी स्टॉल पर सभी प्रकार की मिठाई हैं लेकिन ग्राहकों की पहली पसंद उनकी पलंग तोड़ बर्फी ब पलंग तोड़ पेड़ा बने हुए हैं। राकेश गर्ग कहते हैं कि प्रदेश सरकार के इस अभिनव प्रयास से उनके उत्पादन का स्वाद विदेशी मेहमानों तक भी पहुंच रहा है क्योंकि ट्रेड शो में अकेले हाल नंबर 17 में वियतनाम, रूस, बेलारूस तथा ऑस्ट्रिया के विदेशी व्यापारी ठहरे हैं जो भारत के इन व्यंजनों को काफी पसंद कर रहे हैं।  

कन्नौज के इत्र की खुशबू से महका ट्रेड शो, पांचवीं पीढ़ी ने संभाली विरासत

लखनऊ उत्तर प्रदेश में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां रहने वाले लोगों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) निधि का योगी सरकार में व्यापक इस्तेमाल हो रहा है। वर्ष 2017 से अगस्त 2026 तक प्रदेश में इस निधि से कुल 8,397 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं पर अब तक 1548 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे से लेकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के कल्याण तक विभिन्न क्षेत्रों में इन परियोजनाओं का सुधारात्मक असर दिखाई दे रहा है। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के मुताबिक खनन से प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन निधि का उपयोग किया जा रहा है। इसके तहत अवैध खनन और परिवहन पर रोक के लिए चेकिंग रोड का निर्माण और समय-समय पर मरम्मत, वृक्षारोपण व रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे कार्य भी कराए गए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष जोर योगी सरकार के पिछले 9 वर्षों से अधिक में डीएमएफ निधि से प्रत्येक जनपद में शिक्षा से जुड़ी 3,419 परियोजनाओं के तहत प्राथमिक विद्यालयों का जीर्णोद्धार कराया गया। स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं, स्पेस लैब, कंप्यूटर सिस्टम समेत आधुनिक सुविधाएं व तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराए गए। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में 323 परियोजनाओं के तहत अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आधुनिक एवं नवीन उपकरण उपलब्ध कराकर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया गया है। गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण खनन प्रभावित क्षेत्रों में 516 भौतिक अवस्थापना परियोजनाओं के तहत सामुदायिक भवनों का निर्माण और जीर्णोद्धार कराया गया है। इसके साथ ही ग्रामीण विकास, स्वच्छता, सौर प्रकाश, पेयजल, कृषि और सिंचाई से जुड़ी परियोजनाएं भी संचालित हैं। महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए 3,070 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण, वजन मापने की मशीन, लंबाई मापने के लिए टेप जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। वहीं बुजुर्गों के लिए रात्रि केंद्र, किचन और हैंडपंप जैसी सुविधाओं पर भी काम किया गया। पैदल यात्रा के लिए फुटपाथ निर्माण जैसी योजनाएं भी जिला खनिज फाउंडेशन के माध्यम से कई जनपदों में पूरी हो गईं हैं। कौशल विकास से रोजगार के अवसर प्रदेश में खनन प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं और अन्य लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण, डेयरी फार्मिंग में रोजगार सृजन, कौशल विकास प्रशिक्षण और सिलाई प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है।

‘मन की बात’ में गूंजा छत्तीसगढ़ का ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान

रायपुर,  पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने आज नया रायपुर स्थित शासकीय निवास कार्यालय में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 138वीं कड़ी का श्रवण किया। इस दौरान प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से जुड़े विभिन्न प्रेरणादायी प्रयासों, जनभागीदारी, पोषण, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, स्थानीय उत्पादों और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सितंबर माह कुपोषण के खिलाफ जागरूकता और पोषण को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है तथा छत्तीसगढ़ में लोगों को पौष्टिक मुनगा यानी मोरिंगा को अपने खान-पान में शामिल करने के लिए प्रेरित करने की पहल की जा रही है। मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ जैसे सशक्त माध्यम से छत्तीसगढ़ की ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ पहल का उल्लेख किया जाना प्रदेशवासियों के लिए गर्व और हर्ष का विषय है। यह छत्तीसगढ़ की सकारात्मक सोच, जनभागीदारी और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से पोषण को बढ़ावा देने के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का अवसर है। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ देशभर में हो रहे जनहितकारी और प्रेरणादायी प्रयासों को देशवासियों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज के अलग-अलग वर्गों द्वारा किए जा रहे सकारात्मक कार्यों को व्यापक पहचान मिलती है और अन्य लोगों को भी ऐसे प्रयासों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।  अग्रवाल ने कहा कि मुनगा पोषण की दृष्टि से उपयोगी स्थानीय संसाधन है। ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान के माध्यम से इसे लोगों के दैनिक खान-पान का हिस्सा बनाने के लिए जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा इस पहल का उल्लेख छत्तीसगढ़ में पोषण के प्रति जनजागरूकता और जनभागीदारी को और गति देगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत से ही नहीं, बल्कि स्थानीय संसाधनों और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ी अनेक सकारात्मक पहलों से भी बन रही है। ‘मन की बात’ में इन प्रयासों की चर्चा होना प्रदेश की जमीनी पहलों को देश के व्यापक मंच से जोड़ने का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आने वाली प्रेरणादायी कहानियां हमें यह संदेश देती हैं कि जनभागीदारी से छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े सामाजिक बदलाव का माध्यम बन सकते हैं। हमें अपने आसपास हो रहे सकारात्मक प्रयासों से प्रेरणा लेते हुए विकसित भारत के संकल्प में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।  राजेश अग्रवाल ने कहा कि पोषण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में समाज की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। सामूहिक प्रयासों से ही इन अभियानों को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे स्थानीय स्तर पर होने वाली जनहितकारी पहलों से जुड़ें और जनभागीदारी की भावना को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि स्वस्थ, समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता महत्वपूर्ण है।

सातवीं सदी की गंगा की प्रतिमा से प्रेम मंदिर तक बयां कर रहे यूपी का गौरवशाली वैभव

ग्रेटर नोएडा सातवीं सदी की गंगा की प्रतिमा से लेकर दसवीं सदी की गरुणारूढ़ लक्ष्मी नारायण और 12वीं सदी की सरस्वती की मूर्ति… उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में संस्कृति विभाग का आउटलेट प्रदेश की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को सामने ला रहा है। इंडिया एक्सपो मार्ट में सजी प्रदर्शनी में प्राचीन मूर्तियों, डिजिटल पांडुलिपियों, चित्रों और ऐतिहासिक स्थलों की प्रतिकृतियों के जरिए उत्तर प्रदेश की कला और संस्कृति के विभिन्न कालखंडों को प्रदर्शित किया गया है। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। आउटलेट का मुख्य द्वार प्रेम मंदिर के मुख्य द्वार और ब्रह्मांड द्वार की प्रतिकृति के रूप में तैयार किया गया है, जो आगंतुकों के लिए आकर्षक सेल्फी प्वाइंट बना हुआ है। सातवीं से 12वीं सदी तक की मूर्तियां बनीं आकर्षण प्रदर्शनी में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त प्राचीन प्रतिमाओं को प्रदर्शित किया गया है। मिर्जापुर से प्राप्त दसवीं सदी की गरुणारूढ़ लक्ष्मी नारायण की मूर्ति, सुल्तानपुर से मिली 11वीं सदी की भगवान विष्णु की प्रतिमा, कानपुर के रानीपुर से प्राप्त दसवीं सदी की महेश्वर की मूर्ति, अल्मोड़ा से मिली 11वीं सदी की भगवान विष्णु की प्रतिमा और गोरखपुर से प्राप्त 12वीं सदी की सरस्वती की मूर्ति लोगों का ध्यान खींच रही है। सातवीं सदी की गंगा की प्रतिमा भी विशेष आकर्षण बनी हुई है। इन प्रतिमाओं के जरिए अलग-अलग कालखंडों में विकसित भारतीय शिल्पकला, धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक जीवन की झलक दिखाई गई है। विद्यार्थियों और युवाओं में इन प्राचीन धरोहरों को लेकर विशेष जिज्ञासा देखी जा रही है। कई युवा मूर्तियों के इतिहास और उनके निर्माण काल से जुड़ी जानकारी भी ले रहे हैं। प्रेम मंदिर की प्रतिकृति पर सेल्फी का क्रेज ब्रज की सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया है। आउटलेट के प्रवेश द्वार को प्रेम मंदिर के मुख्य द्वार और ब्रह्मांड द्वार की प्रतिकृति के तौर पर तैयार किया गया है। इसकी भव्य संरचना आगंतुकों को आकर्षित कर रही है और यहां लोग तस्वीरें खींचने के साथ सेल्फी लेते नजर आ रहे हैं। इस तरह यह द्वार प्रदर्शनी के सांस्कृतिक संदेश के साथ आकर्षण का केंद्र भी बन गया है। नई दिल्ली से प्रदर्शनी देखने पहुंचीं कक्षा 11 की छात्रा आयुषी ने बताया कि उन्होंने अब तक ऐसी प्राचीन मूर्तियां पाठ्यपुस्तकों में चित्रों के रूप में ही देखी थीं। यहां उन्हें इन्हें सामने से देखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रदर्शनी से विद्यार्थियों को भारतीय और सनातन संस्कृति को करीब से समझने में मदद मिलती है। रसखान की समाधि से गोवर्धन तक दिखे सांस्कृतिक स्थल राज्य ललित कला अकादमी की ओर से विभिन्न चित्रकारों की कलाकृतियां भी प्रदर्शित की गई हैं। चित्रों में सांस्कृतिक विरासत के साथ वर्तमान समय की कला को भी स्थान दिया गया है। यहां चित्रकार मौके पर ही आगंतुकों के पोर्ट्रेट तैयार कर रहे हैं। इससे प्रदर्शनी में कला की प्रस्तुति को जीवंत रूप मिल रहा है। अलग-अलग कालखंडों की पांडुलिपियों को डिजिटल फ्रेम में प्रदर्शित किया गया है। इसके माध्यम से युवा पीढ़ी पुरानी ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक सामग्री को आधुनिक तकनीक के जरिए देख और समझ पा रही है। प्रदर्शनी में मथुरा के महावन स्थित रसखान की समाधि, गोवर्धन के कुसुंबा सरोवर और मिर्जापुर के सारनाथ मंदिर की प्रतिकृतियां भी तैयार की गई हैं। संस्कृति विभाग के प्राविधिक सहायक (संस्कृत) हरिश्चंद्र दुबे ने बताया कि प्राचीन संस्कृति से जुड़ी वस्तुओं को देखकर युवाओं में काफी उत्साह है। मूर्तियों, चित्रों और डिजिटल पांडुलिपियों को देखकर वे उनके इतिहास और सांस्कृतिक महत्व से जुड़े सवाल पूछ रहे हैं। विभाग की ओर से उन्हें जानकारी दी जा रही है, ताकि नई पीढ़ी प्रदेश और देश की सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझ सके।

उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से बदला मौसम, पूर्वी-पश्चिमी यूपी के कई जिलों में अलर्ट

 लखनऊ  भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले 24 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है। मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में बने लो प्रेशर एरिया के कारण राज्य के मौसम में बड़ा बदलाव आया है। पूर्वी यूपी में हुई मूसलाधार बारिश पिछले 24 घंटों में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में असाधारण और अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई है। फर्रुखाबाद में सबसे अधिक 32 सेमी बारिश हुई जबकि गोरखपुर में 23 सेमी, लखीमपुर खीरी में 19 सेमी और महराजगंज में 19 सेमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, कन्नौज, अयोध्या, बहराइच, लखनऊ और आजमगढ़ जैसे जिलों में भी भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी खूब बरसे बदरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। मुरादाबाद में 18 सेमी, बरेली में 17 सेमी, कासगंज में 15 सेमी, रामपुर में 15 सेमी, संभल और बिजनौर में 14 सेमी और मैनपुरी व शाहजहांपुर में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी यूपी में कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की संभावना जताई है। वाराणसी, बलिया, गोरखपुर, मीरजापुर और सोनभद्र समेत कुछ जिलों में तेज बारिश देखने को मिल सकती है। पश्चिमी यूपी में भी भारी बारिश का अनुमान मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ जिलों में भारी बारिश होने की आशंका है। इसके साथ ही तापमान में भी थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि, आने वाले कुछ घंटों के दौरान मौसम प्रणाली धीरे-धीरे कमजोर हो जाएगी और बारिश का दौर थम सकता है। किसानों के लिए एडवाइजरी बारिश और तेज हवाओं के चलते बागवानी, कटी हुई फसलों और खड़ी फसलों को नुकसान की आशंका जताई गई है। कृषि मौसम विभाग ने किसानों को धान, मक्का, गन्ना, अरहर और सब्जियों के खेतों से अतिरिक्त पानी की तत्काल जल निकासी करने की सलाह दी है।