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श्रीधाम एक्सप्रेस में बड़ा बदलाव: एलएचबी कोच से बढ़ेगी रफ्तार और सुविधाएं

जबलपुर जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन के बीच संचालित होने वाली श्रीधाम एक्सप्रेस की यात्रा जल्द ही और आरामदायक बनेगी। ट्रेन को 30 मई से लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) रैक से दौड़ाने का निर्णय किया गया है। एलएचबी कोच पारंपरिक (आईसीएफ) कोचों की तुलना में अधिक सुविधाजनक एवं सुरक्षित होते हैं। ये वजन में भी हल्के होते हैं। उच्च गति पर संचालन की क्षमता होती है। एलएचबी कोच की नई संरचना और स्वरूप यात्रियों को अधिक सुखद और सुविधाजनक यात्रा अनुभव प्रदान करते हैं। नए रेक से ट्रेन की गति औसतन 20 किलोमीटर प्रतिघंटा तक बढ़ेगी। चाल में वृद्धि की संभावना को ध्यान में रखकर ट्रेन को दिल्ली पहुंचाने की भी मंशा है। दिल्ली पहुंचाने में लेती है सबसे ज्यादा समय जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन के बीच एक साप्ताहिक और चार ट्रेन प्रतिदिन संचालित होती हैं। इनमें दिल्ली पहुंचाने में सबसे ज्यादा समय (लगभग 18.30 घंटा) श्रीधाम एक्सप्रेस लेती है। यह ट्रेन इटारसी-भोपाल-बीना के रास्ते संचालित होने के कारण कटनी-सागर-बीना मार्ग के अपेक्षाकृत लगभग 130 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करती है। जबलपुर से दिल्ली के बीच सीधे चलने वाली अन्य ट्रेनों के अपेक्षाकृत यात्रा में औसतन साढ़े पांच से साढ़े छह घंटे का अतिरिक्त समय लगाती है। जिसके चलते ट्रेन दोपहर में दिल्ली पहुंचती है। सुपरफास्ट धीमी चाल यात्रियों को परेशान करती है। अब 22 कोच होंगे, स्लीपर के दो कोच घटेंगे श्रीधाम एक्सप्रेस (12192/91) का संचालन पश्चिम मध्य रेल करता है। वर्तमान में ट्रेन का 24 कोच का आइसीएफ रैक है। इसे एलएचबी रैक से परिवर्तित करने के साथ ही ट्रेन का कोच कांबिनेशन बदल जाएगा। थर्ड एसी के एक कोच की एसी इकोनामी कोच लेगा। दो स्लीपर कोच भी कम होंगे। 22 कोच के एलएचबी रेक में एक वातानुकूलित प्रथम श्रेणी, दो वातानुकूलित द्वितीय, पांच वातानुकूलित तृतीय, एक वातानुकूलित तृतीय इकोनॉमी, सात स्लीपर, चार सामान्य श्रेणी के कोच, एक एसएलआरडी एवं एक जनरेटर कार रहेंगे।

इचकेला की बेटियों ने क्रिकेट में रचा इतिहास, मुख्यमंत्री साय ने किया सम्मानित, किट देकर बढ़ाया हौसला

रायपुर.  सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने वाली जशपुर जिले के इचकेला की बेटियों ने क्रिकेट के मैदान में ऐसा प्रदर्शन किया कि आज वे जिले ही नहीं, पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनकी इसी उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को जशपुर नगर के मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम में उनसे मुलाकात कर उन्हें क्रिकेट किट प्रदान की और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।  ग्राम इचकेला के शासकीय प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास की 16 बालिका खिलाड़ियों ने क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मेहनत, अनुशासन और लगन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है और वे आगे भी इसी तरह राज्य और देश का नाम रोशन करती रहें। इचकेला एमसीसी एक क्रिकेट अकादमी के रूप में उभरकर सामने आई है, जहां से वर्तमान में 40 बालिकाएं नियमित रूप से क्रिकेट का प्रशिक्षण ले रही हैं। इनमें से 17 खिलाड़ी अंडर-17 और अंडर-19 वर्ग में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और बोर्ड मैचों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। वर्ष 2025 में सरगुजा संभाग ने 25 वर्षों बाद राज्य स्तरीय अंडर-17 क्रिकेट प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस ऐतिहासिक जीत में इचकेला एमसीसी की भूमिका निर्णायक रही। विजेता टीम के 11 खिलाड़ियों में से 9 खिलाड़ी इसी अकादमी की थीं। वहीं अंडर-19 वर्ग में भी सरगुजा संभाग ने रजत पदक जीता, जिसमें 11 में से 8 खिलाड़ी इचकेला एमसीसी से थीं। रायगढ़ में आयोजित वर्ष 2025 के इंटर-स्टेट क्रिकेट टूर्नामेंट में देशभर की टीमों के बीच इचकेला की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। अब तक इस समूह की 11 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जिले और राज्य का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इन उपलब्धियों के पीछे कोच संतोष शंकर सोनी और पंडरी बाई का समर्पण और मार्गदर्शन प्रमुख रहा है।इचकेला की बेटियों की सफलता इस बात का सबूत है कि अगर मन में जुनून हो और सही मार्गदर्शन मिले तो संसाधनों की कमी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनती।

PNG कनेक्शन में इंदौर-ग्वालियर चमके, भोपाल पिछड़ा—आपके शहर की क्या स्थिति?

भोपाल मध्य प्रदेश में पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस का कनेक्शन दो लाख घरों तक पहुंच गया है। लेकिन इसके नियमित उपभोक्ता केवल एक लाख परिवार ही हैं। कई जगहों पर उपभोक्ताओं तक कनेक्शन पहुंचने के बावजूद गैस की आपूर्ति शुरू नहीं की जा सकी है। नए आदेश आने के बाद इसमें तेजी लाने की बात कही जा रही है। पाइपलाइन और आपूर्ति में देरी के कारण राजधानी सहित प्रदेश के सभी जिलों में पिछले तीन सालों से पाइपलाइन बिछाने का काम बहुत तेजी से किया जा रहा है। जिसके तहत अधिकांश क्षेत्रों में पाइपलाइन तो बिछ गई लेकिन लोगों के घर-घर कनेक्शन देने का काम अभी धीमा है और जहां पर उपभोक्ताओं को कनेक्शन मिल गए हैं वहां पर आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसका मुख्य कारण पाइपलाइन होने के बावजूद घर तक अंतिम कनेक्शन में देरी, लोगों में जानकारी की कमी और अधिक शुरुआती खर्च बताया जा रहा है। इंदौर और ग्वालियर की बढ़त, भोपाल पिछड़ा जानकारी के अनुसार पीएनजी कनेक्शन देने में इंदौर पहले तो ग्वालियर दूसरे स्थान पर है, जबकि भोपाल में यह काम काफी पिछड़ा हुआ है। इंदौर ने 50 हजार लक्ष्य के बदले में एक लाख 23 हजार 804 घरेलू पीएनजी कनेक्शन दिए हैं, जो तय लक्ष्य से अधिक हैं। इसी तरह, ग्वालियर ने भी तय लक्ष्य 44 हजार के बदले में 63 हजार 150 कनेक्शन दिए हैं। वहीं भोपाल में पांच लाख 50 हजार 222 का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बदले में अब तक महज 40 हजार कनेक्शन ही दिए गए हैं। बता दें सरकार और कंपनियों ने बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे गैस पाइपलाइन और कनेक्शन) की योजना बनाकर उसे स्थापित तो कर दिया, लेकिन लोगों को कनेक्शन व आपूर्ति समय से शुरू नहीं होने से काम पिछड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में पीएनजी पाइपलाइन स्वीकृत हो चुकी है या फिर निर्माणाधीन है। अभी तक घरेलू कनेक्शन देने का काम धीमी गति से चल रहा था लेकिन अब इसे तेजी से पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। इन वजहों से पीएनजी से परहेज     लोग पाइप्ड गैस की निर्बाध आपूर्ति पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।     कनेक्शन की शुरुआती लागत अधिक है, इसलिए लोग एलपीजी छोड़कर पीएनजी पर शिफ्ट नहीं हो रहे हैं।     एलपीजी सिलिंडर को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में आसानी होती है, यह सुविधा स्थायी पाइप वाली पीएनजी में नहीं मिलेगी इससे भी हिचकिचाहट।     पीएनजी हल्की है और एलपीजी की अपेक्षा इसकी आंच कम तीखी है, यह धारणा भी बनी हुई है।     पाइप्ड गैस में केबल इंटरनेट और पानी की पाइपलाइन की तरह रोज की टूटफूट और लीकेज से आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी लोगों को डरा रही है। (कई क्षेत्रों में लोगों ने जैसे बातचीत में बताया) जहां पीएनजी उपलब्धता वहां एलपीजी बंद होगी केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पिछले दिनों नया आदेश जारी किया है। इसके तहत जिन क्षेत्रों में पीएनजी की उपलब्धता है, वहां के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को तीन माह के अंदर इसका कनेक्शन लेना होगा। समय सीमा में ऐसा नहीं करने पर उनके यहां एलपीजी की आपूर्ति रोक दी जाएगी।

1.90 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं में से 1.40 करोड़ को मिलती है सस्ते दर पर बिजली : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल.  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश के कुल एक करोड़ 90 लाख बिजली उपभोक्ताओं में से लगभग एक करोड़ 40 लाख अर्थात 74 प्रतिशत उपभोक्ताओं को सस्ते दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। उपभोक्ता श्रेणी के आधार पर यह दर अधिकतम 2.78 रुपये प्रति यूनिट तक होती है, जो कि वास्तविक दर 7.05 प्रति यूनिट से काफी कम है। इन उपभोक्ताओं को दी जा रही सब्सिडी का भार राज्य शासन द्वारा वहन किया जाता है। मंत्री तोमर ने बताया है कि राज्य शासन द्वारा अटल गृह ज्योति योजना के अंतर्गत हर माह लगभग एक करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं से प्रथम 100 यूनिट पर मात्र 100 रुपये ही लिये जा रहे हैं। इसी तरह अटल कृषि ज्योति योजना में लगभग 28 लाख कृषि उपभोक्ताओं से कुल वार्षिक देयक की मात्र 7 से 15 प्रतिशत राशि 2 किश्तों में ली जा रही है। इन दोनों योजनाओं में इनके वास्तविक बिजली बिल के अंतर की राशि राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में विद्युत वितरण कम्पनियों को दी जा रही है। राज्य शासन द्वारा एक हेक्टेयर तक की भूमि एवं 5 एचपी क्षमता तक के स्थाई पम्प कनेक्शन वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों को नि:शुल्क बिजली दी जा रही है। आवश्यकता अनुसार उपभोक्ताओं के हित को ध्यान में रखते हुए बिजली का विक्रय भी किया जाता है। पॉवर एक्सचेंज में विद्युत विक्रय केवल लाभकारी परिस्थितियों में ही किया जाता है, जब राज्य के भीतर विद्युत माँग अपेक्षाकृत कम होती है। साथ ही बाजार दर उपलब्ध अधिशेष विद्युत की लागत से अधिक होती है। इसकी निगरानी के लिये जबलपुर में 24×7 कंट्रोल रूम बनाया गया है। इसके माध्यम से पॉवर एक्सचेंज में विद्युत विक्रय/क्रय का निर्णय लिया जाता है।  

अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक – उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक है। रीवा में शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार को बेहतर बनाने के सभी प्रयास जारी हैं। हमारा प्रयास है कि गुणात्मक शिक्षा व बेहतर इलाज की सभी व्यवस्थायें रहें ताकि यहां के लोगों को उच्च शिक्षा व इलाज के लिये बाहर न जाना पड़े। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने लगभग 3 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा भवन का लोकार्पण किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपने संभाग को आदर्श संभाग बनायें। महाविद्यालय के प्राचार्यों का दायित्व है कि वह अपने महाविद्यालय में नवीन पाठ¬क्रम संचालन के लिये प्रयासरत रहें तथा प्राध्यापकों व विद्यार्थियों के साथ जीवंत संबंध बनायें रखें। उन्होंने कहा कि अच्छा प्रशासक वही है जो जमीनी फीड बैक लेकर कार्य करे। यह भवन उच्च स्तरीय सुविधाओं से युक्त है। जब कार्यालय अच्छा होता है तो कार्य करने की इच्छा भी बढ़ जाती है। इस कार्यालय भवन के द्वारा संभाग के सभी महाविद्यालयों के विकास व उच्च शिक्षा के गुणात्मक सुधार के सभी प्रयास तत्परता से होंगे। अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ. आर.पी. सिंह ने बताया कि लगभग 3 करोड़ रूपये से निर्मित भवन में सभी सुविधाएँ हैं। यहां से शासकीय, अशासकीय व अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों पर नियंत्रण होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विधि विधान से पूजन अर्चन कर भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर आयुक्त रीवा संभाग बीएस जामोद, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय सहित महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक व विद्यार्थी उपस्थित रहे। 

इंदौर: डबल डेकर फ्लाईओवर पर बड़ा अपडेट, 400 टन ‘बो स्ट्रिंग’ तैयार, जेक पुश तकनीक से होगी शिफ्टिंग

इंदौर शहर के सबसे ऊंचे डबल डेकर फ्लाईओवर के 65 मीटर लंबे स्पान पर बो स्ट्रिंग (गर्डर) को पूल प्रक्रिया से रख दिया गया है। अब एक पखवाड़े में 400 टन वजनी बो स्ट्रिंग को दूसरी भुजा पर रखा जाएगा। यह कार्य जेक पुश प्रक्रिया के माध्यम से होगा और धीरे-धीरे इसको जेक की सहायता से दूसरी भुजा पर ले जाया जाएगा। वहीं दूसरी बो स्ट्रिंग के असेंबल की प्रक्रिया भी अगले सप्ताह से शुरू होगी, जिसको एक माह में पूरा किया जाएगा। ऊपर ही किया गया बो स्ट्रिंग का असेंबल कार्य इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) द्वारा लवकुश चौराहा पर 1452 मीटर लंबा डबल डेकर फ्लाईओवर बनाया जा रहा है। इसके मुख्य चौराहे पर 65 मीटर लंबी बो स्ट्रिंग को रखा गया है। नीचे मेट्रो और एमआर-10-सुपर कॉरिडोर फ्लाईओवर होने से बो स्ट्रिंग को नीचे-ऊपर पहुंचाना आसान नहीं था, इसलिए बो स्ट्रिंग को ऊपर ही असेंबल किया गया। 12 घंटे की जटिल प्रक्रिया और यातायात सुरक्षा पूरी बो स्ट्रिंग असेंबल होने के बाद इसको पूल कर बो स्ट्रिंग्स पर रखा गया। यह गर्डर 23 मीटर ऊंचाई पर सफलतापूर्वक रखी गई। करीब 12 घंटे की प्रक्रिया के बाद बो स्ट्रिंग को स्पान पर रखा गया। गर्डर को पूल करने में पांच घंटे का समय लगा और इसके लिए तीन विंच मशीन का उपयोग किया गया। दो विंच मशीन खींचने और एक पीछे से रोकने के लिए लगाई गई थी। बो स्ट्रिंग को लांच करने के लिए नीचे से यातायात पूरी तरह से बंद किया गया, ताकि किसी तरह की परेशानी न हो। आगामी चरण और भारी क्रेन का उपयोग आइडीए सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े का कहना है कि बो स्ट्रिंग को सफलता से स्पान पर रख दिया गया है। अब शिफ्टिंग की प्रक्रिया की जाएगी। साथ ही दूसरी बो स्ट्रिंग का निर्माण भी शुरू करेंगे। 900 टन क्षमता की दो क्रेन का उपयोग बो स्ट्रिंग को ऊपर असेंबल करने के लिए किया गया। इसमें एक 600 टन और दूसरी 300 टन क्षमता की क्रेन थी। इन क्रेन की सहायता से गर्डर के एंगल और अन्य सामग्री ऊपर पहुंचाई गई। बो स्ट्रिंग को असेंबल करने के लिए ऊपर ही कंपोजिट गर्डर स्पान बनाया गया है। इसी पर दूसरी बो स्ट्रिंग असेंबल की जाएगी।   सेगमेंट और वजन का तकनीकी विवरण फ्लाईओवर पर रखे 247 सेगमेंट डबल डेकर फ्लाईओवर के पियर तैयार होने के बाद स्पान पर सेगमेंट रखे गए। एक स्पान पर 13 सेगमेंट रखे गए हैं। एक सेगमेंट की चौड़ाई 25 मीटर और वजन 120 टन है। इसके अनुसार 13 स्पान की चौड़ाई 351 मीटर और वजन 1560 टन हुआ। सभी 24 स्पान पर सीमेंट और स्टील के 30 हजार टन वजन के 247 सेगमेंट रखे गए हैं।

बिहार में सियासी हलचल तेज: Nitish Kumar 30 मार्च को MLC पद छोड़ेंगे, 13 अप्रैल के बाद CM कुर्सी पर संकट

पटना बिहार में राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 अप्रैल को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं, जबकि 13 अप्रैल के बाद वे कभी भी मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। मुख्यमंत्री आवास से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी। नीतीश कुमार, जो अभी बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं, ने 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में पहले ही जीत हासिल की। नियमों के अनुसार, नीतीश कुमार को संसद के लिए चुने जाने के 14 दिनों के भीतर राज्य विधानमंडल से इस्तीफा देना होता है। इस स्थिति में राज्य विधानसभा या विधान परिषद सदस्य न होने की स्थिति में नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा देना होगा। राज्यसभा की सदस्यता को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री ने अपनी 'समृद्धि यात्रा' के 5 चरणों के दौरान इस मामले पर एक भी शब्द नहीं कहा। यह यात्रा 26 मार्च को पटना में समाप्त हुई थी। समृद्धि यात्रा के दौरान, बिहार के मुख्यमंत्री ने 32 जिलों में 32 जनसभाओं को संबोधित किया, लेकिन कहीं भी राज्यसभा जाने या मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का जिक्र नहीं किया था। हालांकि, हाल में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव में उन्होंने नामांकन दाखिल किया और पहली बार उच्च सदन के सदस्य के रूप में चुने गए। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 30 अप्रैल को इस्तीफा देने की सूचना है। इसके बाद वे अपनी राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।" नीतीश कुमार के एमएलसी पद से इस्तीफे की चर्चाओं पर बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, "उनका सदन से जाना पूरे बिहार के लिए अखरेगा। समय और परिस्थितियों के साथ यह उनका (नीतीश कुमार) का निर्णय है। हम लोग नहीं चाहते हैं कि वे दिल्ली जाएं, लेकिन राजनीति में परिस्थितियों के अनुसार उन्होंने अपना फैसला लिया है। सदन का सदस्य रहना या नहीं रहना यह कोई बात नहीं, बल्कि वह व्यक्ति राज्य के लिए कितना इफेक्टिव है, यह मायने रखता है।"

सरकारी नौकरी में 24 साल बाद नया नियम लागू, कर्मचारियों के लिए क्या बदलेगा?

भोपाल मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए लागू दो बच्चों की शर्त को खत्म करने की तैयारी अंतिम चरण में है। राज्य सरकार इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट के सामने रख सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इस संबंध में तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं और माना जा रहा है कि आगामी कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी मिल सकती है। प्रदेश में फिलहाल दो से अधिक बच्चों वाले अभ्यर्थियों के लिए कुछ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति पर प्रतिबंध लागू है। यह प्रावधान वर्ष 1961 के नियमों और बाद में 2001 में किए गए संशोधनों के तहत लागू किया गया था। अब सरकार इस शर्त को समाप्त करने पर विचार कर रही है। सभी विभागों में लागू होगा नियम यदि कैबिनेट से मंजूरी मिलती है तो सरकारी नौकरी के इच्छुक ऐसे अभ्यर्थियों को भी अवसर मिल सकेगा जिनके दो से अधिक बच्चे हैं। सूत्रों के अनुसार यह प्रस्ताव काफी समय से विचाराधीन था, लेकिन कुछ बिंदुओं पर स्पष्टता नहीं होने के कारण निर्णय टलता रहा। अब विभागीय स्तर पर सहमति बनने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखने की तैयारी की जा रही है। प्रस्ताव मंजूर होने के बाद इसे सभी विभागों में लागू किया जाएगा। हालांकि इस बदलाव का असर पहले से सेवा में कार्यरत कर्मचारियों पर किस तरह पड़ेगा, इस बारे में अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियम हटने के बाद भविष्य में होने वाली भर्तियों में इसका सीधा फायदा मिलेगा। साथ ही जिन अभ्यर्थियों को पहले इस नियम के कारण आवेदन से वंचित रहना पड़ता था, उन्हें भी मौका मिल सकेगा। परिवारों को कैशलेस इलाज राज्य सरकार के स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ अन्य सेवा नियमों में भी समय के अनुसार बदलाव किए जाएं। इसी क्रम में दो बच्चों की शर्त हटाने को प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इसी के साथ सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी कैबिनेट में लाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के परिवारों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार ऐसे कर्मचारियों और उनके आश्रितों को करीब 20 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका! SSB में 1060 पदों पर भर्ती, Constable और Head Constable के लिए ऐसे करें अप्लाई

भोपाल सशस्त्र सीमा बल में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। एसएसबी में कांस्टेबल एवं हेड कांस्टेबल भर्ती 2026 के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया है। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर 20 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती उन युवाओं के लिए शानदार अवसर है जो पैरामिलिट्री बल में शामिल होकर देश सेवा करना चाहते हैं। वैकेंसी डिटेल्स पद का नाम – पदों की संख्या कांस्टेबल – 827 हेड कांस्टेबल – 233 कुल पद – 1060 योग्यता उम्मीदवारों ने मान्यता प्राप्त बोर्ड से पदानुसार 10वीं उत्तीर्ण होने के साथ ड्राइविंग लाइसेंस या संबंधित ट्रेड में आईटीआई या उसमें दक्षता होनी चाहिए। हेड कांस्टेबल पदों के लिए 10वीं के साथ आईटीआई या 12वीं के साथ संबंधित क्षेत्र में डिप्लोमा होना आवश्यक है। आयु सीमा न्यूनतम आयु – 18 वर्ष अधिकतम आयु – 25 से 27 वर्ष (पद अनुसार) आरक्षित वर्ग को नियमानुसार छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया शारीरिक दक्षता परीक्षा शारीरिक मापदंड परीक्षा लिखित परीक्षा कौशल या टाइपिंग परीक्षा दस्तावेज सत्यापन विस्तृत चिकित्सीय परीक्षण वेतन चयनित उम्मीदवारों को 21,700 से 69,100 रुपये तक वेतन दिया जाएगा। इसके साथ महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और यात्रा भत्ता जैसे अन्य लाभ भी मिलेंगे। महत्वपूर्ण तिथियां आवेदन प्रारंभ – 21 मार्च 2026 अंतिम तिथि – 20 अप्रैल 2026 ऐसे करें आवेदन आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं आवेदन लिंक पर क्लिक करें नया पंजीकरण करें लागिन कर फार्म भरें दस्तावेज, फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करें शुल्क जमा करें और फार्म जमा करें प्रिंट निकालकर सुरक्षित रखें जरूरी सलाह फार्म भरते समय सही जानकारी दें। शारीरिक परीक्षा की तैयारी अभी से शुरू करें। नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें। तैयारी के टिप्स प्रतियोगी परीक्षाओं के शिक्षक एवं करियर काउंसलर मोहित शर्मा के अनुसार एसएसबी केवल नौकरी नहीं, बल्कि अनुशासन और समर्पण का प्रतीक है। पद के अनुसार अपनी क्षमता का आकलन करें। लिखित और शारीरिक तैयारी साथ-साथ करें। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र और कटऑफ का अध्ययन करें। मेडिकल फिटनेस की जांच पहले ही करा लें। हर विषय के लिए समय निर्धारित करें। नियमित मॉक टेस्ट दें और गलतियों का विश्लेषण करें। रोजाना दौड़ और व्यायाम करें। संतुलित आहार और पर्याप्त नींद लें। कमजोर विषयों पर अधिक ध्यान दें और अंतिम समय में केवल पुनरावृत्ति करें।

बिजली का झटका: मध्यप्रदेश में बढ़े दाम, जानिए अब कितना आएगा आपका मासिक बिल

भोपाल  मध्य प्रदेश में बिजली 4.80 फीसदी महंगी हो गई। मप्र विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया बिजली टैरिफ जारी कर दिया। यह 3 अप्रेल से प्रभावी होगा। इसका असर 10 अप्रैल के बाद आने वाले बिलों में दिखाई देगा। नए टैरिफ से अब हर माह 200 यूनिट बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को 80 रुपए और 600 यूनिट बिजली जलाने वाले उपभोक्ताओं को 236 रुपए अधिक चुकाने होंगे। इससे प्रदेश के 1.90 करोड़ उपभोक्ता प्रभावित होंगे। इनमें 1.50 करोड़ घरेलू उपभोक्ता भी हैं। हालांकि प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए छूट व प्रोत्साहन जारी रहेंगे। सरकार का दावा आयोग ने नहीं मानी कंपनियों की बात सौर ऊर्जा उपयोग करने वालों को ऊर्जा प्रभार में 20 फीसदी छूट मिलती रहेगी। हरित ऊर्जा टैरिफ में पहले जैसी कमी रहेगी। सरकार का दावा है, आयोग ने बिजली कंपनियों के उस दावे को नहीं माना, जिसमें घाटे का हवाला दे टैरिफ में 10.19 फीसदी वृद्धि की मांग की थी। रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल ने बताया, महाराष्ट्र, यूपी, आंध्रप्रदेश समेत 8 राज्यों ने भी नए टैरिफ लागू किए हैं। इनमें कई ने तो दाम कम कर दिए हैं। मेट्रो व उच्च दाब वाले उपभोक्ताओं को राहत नए टैरिफ में मेट्रो और उच्च दाब वाले मौसम उपभोक्ताओं को राहत मिली है। इनमें कोई वृद्धि नहीं की गई है। उच्च दाब वाले उपभोक्ताओं में गुड़ व शकर बनाने वाले उपभोक्ताओं को लाभ होगा। कंपनियों को हजारों करोड़ का फायदा टैरिफ में 4.80 फीसद की बढ़ोतरी से मध्य, पूर्व व पश्चिम क्षेत्र बिजली कंपनियों को फायदा होगा। आयोग के सामने इन्होंने घाटा दर्शाया था, टैरिफ बढ़ने से इन्हें हर महीने हजारों करोड़ रुपए मिलेंगे। बता दें कि महाराष्ट्र, पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश समेत करीब 8 राज्यों ने हाल में टैरिफ रिव्यू के दौरान उपभोक्ताओं को राहत दी है। कहीं दरें स्थित तो कहीं कम कुछ राज्यों में बिजली की दरों को यथावत रखा है, तो कुछ राज्यों में बिजली की दरें कम की गई हैं। कुछ राज्यों ने स्लैब के अनुसार कटौती भी की है। वहीं इंडस्ट्रियल और घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने पर फोकस रहा है।