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बागेश्वर बाबा को देखने लुधियाना में जुटे हजारों लोग

लुधियाना. ग्लाडा ग्राउंड में शनिवार को आरंभ होने वाली श्री हनुमंत कथा के दौरान बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री महाराज की झलक को हर शख्स उत्सुक नजर आया। कार्यक्रम शाम को लगभग चार बजे से शुरू होगा, लेकिन श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम दोपहर 12 बजे के बाद से ही शुरू हो गया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से आयोजन स्थल के पास से रूट डायवर्ट कर दिया गया है, ताकि लोगों को किसी तरह की समस्या न आए। हालांकि कार्यक्रम शुरू होने में अभी काफी समय है, लेकिन श्रद्धालु पहले से ही डटकर बैठ गए हैं। कुछ श्रद्धालुओं का कहना था कि वह हमेशा धीरेंद्र शास्त्री महाराज को टीवी या यू ट्यूब पर ही सुनते रहे हैं, लेकिन आज उन्हें साक्षात सुनने का अवसर मिला है, इसलिए उन्हें काफी उत्सुकता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई कार्यक्रम की जानकारी कार्यक्रम को लेकर जालंधर बाईपास स्थित माल्होत्रा रिसॉर्ट्स में आयोजन समिति की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान समिति के पदाधिकारियों ने पांच दिवसीय हनुमंत कथा से संबंधित तैयारियों और व्यवस्थाओं की जानकारी मीडिया के साथ साझा की। आयोजकों ने बताया कि लुधियाना की धरती पर पहली बार पंडित धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इसे लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं। हनुमान भक्ति और श्रीराम कथा का मिलेगा संदेश मंगलम वेलफेयर एंड चैरिटेबल सोसायटी के अध्यक्ष वरिंदर सहगल ने कहा कि लुधियाना में पंडित धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा करवाना संस्था के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों को हनुमान जी की भक्ति, भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों और सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक संदेशों से जोड़ना है। पांच दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं को पंडित धीरेंद्र शास्त्री के श्रीमुख से हनुमंत कथा सुनने का अवसर मिलेगा। कथा के माध्यम से भक्ति, संस्कार, सेवा, सद्भाव और सनातन संस्कृति से जुड़े संदेश श्रद्धालुओं तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। आयोजन समिति के अनुसार लुधियाना के अलावा पंजाब के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है। आयोजकों के मुताबिक कार्यक्रम के दौरान: – श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था पेयजल की सुविधा चिकित्सा सहायता पार्किंग व्यवस्था सुरक्षा प्रबंध प्रवेश व्यवस्था यातायात प्रबंधन समेत अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अलग-अलग समितियां संभालेंगी जिम्मेदारियां वरिंदर सहगल ने बताया कि आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न करवाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया जा रहा है। इसके अलावा बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। आयोजन समिति का प्रयास है कि कथा में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और पांचों दिन धार्मिक कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हों। श्रद्धालुओं से आयोजन में शामिल होने की अपील आयोजन समिति ने लुधियाना और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं से इस धार्मिक आयोजन में बढ़-चढ़कर शामिल होने की अपील की है। समिति ने कहा कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री के श्रीमुख से हनुमंत कथा सुनने का यह अवसर श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष रहेगा।

BSP कर्मचारियों के बोनस पर NJCS बैठक में होगा मंथन

भिलाई. सेल मैनेजमेंट ने बोनस के मुद्दे पर 1 अक्टूबर को एनजेसीएस कोर कमेटी की बैठक बुलाई है। हालांकि, 23 मार्च 2023 को सेल मैनेजमेंट ने बोनस के लिए जो फार्मूला तय किया था, उसके हिसाब से गणना करने पर 30,200 रुपए बोनस बनेगा। इसमें मैनेजमेंट चाहे तो कर्मियों के प्रोत्साहन के लिए दो से तीन हजार रुपए की बढ़ोतरी कर सकता है। एनुअल सेल परफार्मेस लीक्ड इंसेंटिव स्कीम (एएसपीएलआईएस) यानी बोनस के लिए सेल मैनेजमेंट ने 1 अक्टूबर को दोपहर 01 बजे से नईदिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में बैठक रखी है। इसमें केवल एनजेसीएस कोर कमेटी के ही सदस्यों को बुलाया गया है। सेल मैनेजमेंट ने 23 मार्च 2023 से बोनस का नया फार्मूला लागू किया। इसके तहत यदि बोनस की गणना की जाए तो यह राउंड फिगर में 30200 रुपए ही बनेगा। दरअसल, जिस फार्मूले के आधार पर बोनस की गणना अब तक की जाती रही है वह फार्मूला पाँच वर्षों के लिए बनाया गया था। यह पाँचवाँ व अंतिम वर्ष है। ऐसे में उस फार्मूले में बदलाव के लिए सेल मैनेजमेंट तैयार नहीं होने वाला है। बल्कि सेल मैनेजमेंट ने फार्मूले के हिसाब से बोनस की गणना कर ली है, वह यूनियन नेताओं को इस राशि की केवल जानकारी देने के लिए ही बुलाया है। यानी यूनियन नेताओं को बोनस के कागजात पर जाकर केवल हस्ताक्षर ही करना है। बोनस पर डिस्कशन करने की स्थिति में यूनियन नेता नहीं रहेंगे। हाँ, यूनियन नेता बेहतर प्रोडक्शन परफार्मेस और लाभ का हवाला देते हुए बोनस को बढ़ाने के लिए केवल अनुरोध कर सकते हैं। वे दबाव बनाने की स्थित में नहीं होंगे। यूनियन नेताओं के अनुरोध पर कर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए मैनेजमेंट 30200 रु. में दो-तीन हजार रु. की और बढ़ोतरी कर सकता है। यानी 32200 रु. से लेकर 33200 रु. तक बोनस मिलने की उम्मीद सेल कार्मिक कर सकते हैं।

नगरीय विकास पर सोनमणि बोरा का जोर, बोले- शहर की जरूरत के हिसाब से तैयार हो प्लान

शहर की तासीर के अनुरूप हो विकास की योजना : सोनमणि बोरा नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव ने हुडको द्वारा नई दिल्ली में आयोजित क्षमता विकास कार्यशाला को किया संबोधित केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव तथा हुडको के अधिकारियों से भी मिले, छत्तीसगढ़ में केन्द्रीय योजनाओं के प्रभावी अमल व आगामी रणनीति पर की चर्चा रायपुर.  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने नई दिल्ली में हुडको (HUDCO) द्वारा अर्बन चैलेंज फंड (UCF) पर आयोजित क्षमता विकास कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों एवं नगरीय निकायों से कार्यशाला में हिस्सा ले रहे प्रतिभागियों से कहा कि शहरों के दीर्घकालिक विकास के लिए बेहतर नियोजन, क्षमता विकास एवं वित्तीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग के साथ विभिन्न योजनाओं के बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने शहरों की भावी जरुरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बेहतर नियोजन, संस्थागत क्षमता विकास एवं उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया। प्रमुख सचिव बोरा ने केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के सचिव सतेंद्र सिंह से नई दिल्ली में भेंट कर राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, अमृत मिशन, पीएम स्वनिधि, पीएम ई-बस और अर्बन चैलेंज फंड की प्रगति, उनके प्रभावी क्रियान्वयन तथा आगामी रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने इन योजनाओं के लक्ष्यों की प्राप्ति तथा नगरीय निकायों की क्षमताओं को और सुदृढ़ बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया। बोरा ने हुडको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) संजय कुलश्रेष्ठ और उनकी टीम के साथ बैठक कर राज्य के नगरीय निकायों के समग्र एवं आवश्यकता आधारित विकास की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में राज्य के नगरीय निकायों की स्थानीय आवश्यकताओं, संभावनाओं एवं विशिष्ट पहचान को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक विकास योजना तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। औद्योगिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, पर्यटन, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाले शहरों के लिए उनकी प्रकृति एवं विशिष्टताओं के अनुरूप विकास की रणनीति तैयार करने पर भी चर्चा की गई, जिससे नगरीय सेवाओं एवं आधारभूत संरचनाओं का विस्तार स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में शहरों की आवश्यकतानुसार फूड पार्क, रेंटल हाउसिंग, पर्यटन संवर्धन, स्लम क्षेत्र के पुनर्विकास, ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) सहित अन्य संभावित विकास के पहलुओं को शहरों की विकास योजनाओं में शामिल करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही अन्य राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाओं, उनके क्रियान्वयन अनुभवों तथा चुनौतियों का अध्ययन कर राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उपयुक्त पहलुओं को अपनाने एवं राज्य की नीतियों में आवश्यक प्रावधान किये जाने पर भी चर्चा की गई। बैठक में हुडको के सीएमडी ने परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (PPR) तैयार करने तथा राज्य स्तर पर कार्यशाला आयोजित कर राज्य व नगरीय निकायों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों का क्षमता विकास करते हुए विशिष्ट परियोजनाओं के चिन्हांकन एवं दस्तावेजीकरण के लिए सहमति प्रदान की। उन्होंने नगरीय परियोजनाओं हेतु आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन एवं वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने सहयोग प्रदान करने का भी आश्वासन दिया। बैठक में विकास परियोजनाओं के लिए उपलब्ध विभिन्न वित्तीय स्रोतों के बेहतर उपयोग तथा केंद्र एवं राज्य योजनाओं के माध्यम से वित्तीय अभिसरण (Convergence) की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

घर बैठे मिलेगी सरकारी सेवा, छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ ‘आपके द्वार’ अभियान

​विशेष लेख ​"सेवा_संकल्प_अभियान" ​कागजी उलझनों से मुक्ति—छत्तीसगढ़ में सेवा का संकल्प पहुँचा आपके द्वार रायपुर ​छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में वर्षों से किसानों तथा भू-स्वामियों के जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा कागजी दफ्तरों के चक्कर काटने और प्रशासनिक उलझनों से जूझने में बीत जाता था। नामांतरण की एक छोटी-सी अर्जी हो, जमीन का सटीक सीमांकन, प्राकृतिक आपदा के समय फसल बीमा का क्लेम हासिल करना हो या फिर कृषि विकास के लिए बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर लोन लेना हो—हर छोटे-बड़े काम के लिए तहसील, राजस्व अनुविभागीय अधिकारी और पटवारी कार्यालयों के अनगिनत चक्कर लगाने पड़ते थे। इस पूरी जटिल प्रक्रिया के दौरान बिचौलियों का अनुचित हस्तक्षेप, अतिरिक्त आर्थिक बोझ और पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद की निरंतर बनी रहने वाली चिंता ग्रामीण जीवन की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी थी। ​प्रशासनिक पहल: आधुनिक तकनीक से आई सुशासन की नई क्रांति          ​लेकिन जब प्रदेश प्रशासन ने "सेवा का संकल्प, सेवा पहुँची आपके द्वार" के मूलमंत्र को अपनी कार्यशैली में आत्मसात किया, तो छत्तीसगढ़ के राजस्व प्रशासन के इतिहास में एक युगपरिवर्तकारी क्रांति की शुरुआत हुई। इस अभियान के तहत प्रशासनिक सोच में आमूलचूल बदलाव लाया गया। अब किसान या भूमि स्वामी को अपनी वाजिब मांगों और भूमि संबंधी सुधारों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रही, बल्कि शासन का अमला खुद आधुनिक तकनीक, अत्याधुनिक जीपीएस उपकरणों और दक्ष सर्वेयरों की समर्पित टीम लेकर ग्रामीणों के सीधे दरवाजे तक पहुँचा। इस पहल ने न केवल शासन और जनता के बीच की दूरी को मिटाया, बल्कि सुशासन और पारदर्शिता की एक नई मिसाल भी कायम की। ​डिजिटल सर्वेक्षण का विशाल दायरा और अभूतपूर्व उपलब्धियाँ           ​प्रशासन के इस दृढ संकल्प और सुनियोजित क्रियान्वयन का ही सुखद नतीजा है कि प्रदेश के सभी 33 जिलों के कुल 20,551 राजस्व ग्रामों में से 19,805 ग्रामों (लगभग 96.37%) में विस्तृत डिजिटल सर्वेक्षण का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। मैदानी क्षेत्रों के प्रमुख जिलों जैसे रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती और सूरजपुर में डिजिटल सर्वे का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।        ​दूसरी ओर, बस्तर संभाग के अत्यंत दुर्गम, वनांचल और संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे नारायणपुर, सुकमा तथा बीजापुर—में भी अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों और हाई-प्रिसिजन जीपीएस तकनीक के जरिए शेष बचे गाँवों को मानचित्र पर सटीक रूप से दर्ज करने का काम युद्ध स्तर पर निरंतर जारी है। ​भू-स्वामियों को मिले प्रमुख ऐतिहासिक लाभ         ​प्रशासनिक दक्षता और जन-कल्याण की इस अनुपम पहल से प्रदेश के लाखों भू-स्वामियों को दशकों पुरानी असुविधाओं से स्थायी मुक्ति मिल चुकी है। डिजिटल नक्शों और सटीक सीमांकन के कारण ग्रामीण अंचलों में वर्षों से चले आ रहे भूमि संबंधी आपसी विवादों तथा कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अद्यतित और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड्स से पूरी राजस्व प्रणाली विश्वसनीय बनी है, जिससे दलालों और बिचौलियों का एकाधिकार पूरी तरह समाप्त हो गया है।        ​पूर्णतः त्रुटिरहित और सुधारे गए राजस्व रिकॉर्ड्स के आधार पर अब बैंक किसानों को बिना किसी अनावश्यक देरी के कृषि ऋण स्वीकृत कर रहे हैं। इसके साथ ही, किसान न्याय योजना, आपदा राहत और फसल बीमा जैसी महत्वपूर्ण शासकीय कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी कटौती के सीधा और समय पर वास्तविक हितग्राहियों तक पहुँच रहा है। ​आत्मनिर्भरता और आदर्श राज्य की ओर सुदृढ़ कदम         ​शत-प्रतिशत डिजिटल, पारदर्शी और त्रुटिहीन राजस्व रिकॉर्ड वाला देश का आदर्श राज्य बनने की दिशा में छत्तीसगढ़ द्वारा बढ़ाया गया यह ऐतिहासिक कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व संबल प्रदान कर रहा है। "सेवा संकल्प अभियान" ने यह साबित कर दिया है कि जब दृढ इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक का मिलन होता है, तो "सेवा पहुँची आपके द्वार" का संकल्प केवल एक नारा नहीं, बल्कि धरातल पर बदलती व्यवस्था की एक जीवंत और सुखद सच्चाई बन जाता है। विष्णु प्रसाद वर्मा सहायक संचालक

सब्जी-मसाले से फूलों तक खेती पर मिलेगी आर्थिक मदद, जानें किस फसल पर कितना अनुदान

 चंडीगढ़  हरियाणा में नए बाग लगाने वाले किसानों को 24 हजार 500 रुपये से लेकर 1.40 लाख रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा सब्जियों, मसालों, फूलों और खुशबूदार पौधों की खेती के लिए भी अलग-अलग दरों के आधार पर आर्थिक सहायता मिलेगी। अनुदान राशि सीधे किसान के बैंक खाते में डाली जाएगी। बागवानी विभाग की योजना का लाभ उठाने के लिए किसान का मेरी फसल-मेरा ब्योरा में पंजीकरण और होर्टनेट पर पंजीकरण जरूरी है। फूलों के नए बाग और मसालों की खेती के लिए अधिकतम पांच एकड़ तक आवेदन किया जा सकता है। सब्जियों की खेती के लिए सामान्य वर्ग के किसान पांच एकड़ तक, जबकि अनुसूचित वर्ग के किसान एक एकड़ तक आवेदन कर सकते हैं। फूलों और खुशबूदार पौधों की खेती के लिए भी अधिकतम पांच एकड़ तक पर लाभ दिया जाएगा। सब्जियों की खेती पर सामान्य वर्ग के लिए 15 हजार रुपये प्रति एकड़ और अनुसूचित वर्ग के लिए 25 हजार 500 रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाएगा। यह सहायता एकीकृत माडल के तहत मल्चिंग, लो-टनल, ड्रिप तथा बांस की स्टेकिंग जैसी व्यवस्थाएं अपनाने पर दी जाएगी। इसी तरह मसालों की खेती पर 15 हजार से 30 हजार रुपये प्रति एकड़, फूलों की खेती पर आठ हजार रुपये से 40 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा खुशबूदार पौधों की खेती पर आठ हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाएगा। अनुदान के लिए किसानों को आवेदन और व्यक्तिगत विवरण, मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण, परिवार पहचान-पत्र तथा अपने बैंक खाते का पूरा विवरण देना होगा। बैंक विवरण में खाता संख्या, बैंक का नाम, शाखा और आइएफएससी कोड शामिल हैं। जरूरत होने पर अनुसूचित वर्ग का प्रमाण-पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। अधिक जानकारी के लिए किसान जिला उद्यान अधिकारी या टोल फ्री नंबर 1800-180-2021 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

जयपुर एलायंस हैकाथॉन में स्मार्ट रोबोटिक्स का प्रदर्शन, विजेता टीम को ₹50 हजार पुरस्कार

जयपुर जयपुर में तकनीक और नवाचार का एक अनूठा संगम देखने को मिला, जहाँ देश भर से आए युवा टेक प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी इनोवेशन और डेवलपमेंट की सबसे बड़ी ताकत बनने जा रही हैं। इसी भविष्य की दिशा को तय करने के लिए जयपुर में आयोजित प्रतिष्ठित 'एलायंस हैकाथॉन' का चौथा संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस साल इस कार्यक्रम का विशेष 'रोबोटिक्स एडिशन' आयोजित किया गया, जिसने शहर के टेक्नोलॉजी प्रेमियों और युवाओं में जबरदस्त उत्साह भर दिया। एलायंस आईटी सॉल्यूशंस, जयपुर द्वारा आयोजित इस बहुप्रतीक्षित हैकाथॉन के पिछले तीन संस्करण क्रमशः 2023, 2024 और 2025 में सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। इस वर्ष का यह आयोजन तकनीक प्रेमियों के लिए इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसमें देश भर से आए युवा प्रतिभागी अत्याधुनिक तकनीकों के जरिए व्यावहारिक समस्याओं के समाधान तलाशने के लिए जुटे थे। जयपुर के इस टेक मंच पर युवाओं का यह उत्साह यह साबित कर रहा है कि भारत के युवा आने वाले समय में ग्लोबल टेक इंडस्ट्री को नेतृत्व देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 24 घंटे का नॉन-स्टॉप चैलेंज, रियल-लाइफ प्रॉब्लम्स का समाधान इस वर्ष आयोजित किए गए 24 घंटे के नॉन-स्टॉप हैकाथॉन की सबसे बड़ी खूबी इसकी थीम और इसका व्यावहारिक स्वरूप रहा। इस पूरी प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न वास्तविक जीवन की समस्याओं पर आधारित समस्या-विवरणों पर गहन रूप से काम किया। युवाओं की इन टीमों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, कंप्यूटर विजन, सेंसर्स और आधुनिक ऑटोमेशन टूल्स का उपयोग करके ऐसे तकनीकी समाधान विकसित किए जो इंसानी जीवन को और अधिक आसान बना सकें। इन 24 घंटों के भीतर सभी प्रतिभागियों को अपने रोबोटिक प्रोटोटाइप पूरी तरह तैयार करने होते हैं और उनका लाइव प्रदर्शन करना होता है। इस लाइव डेमो में मशीनों की खुद सोचने, निर्णय लेने और जटिल कार्य करने की क्षमता का कड़ा परीक्षण किया जाता है। एआई से संचालित रोबोटिक्स, विजेता टीम को पुरस्कार इस बार के आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए एलायंस आईटी सॉल्यूशंस की सीईओ मेघा भाटिया ने बताया कि इस वर्ष की मुख्य थीम "एआई से संचालित रोबोटिक्स के नए समाधान" रखी गई थी। इस थीम का उद्देश्य छात्रों और डेवलपर्स को पारंपरिक कोडिंग से आगे बढ़कर स्मार्ट मशीनों और ऑटोनॉमस सिस्टम्स पर काम करने के लिए प्रेरित करना था। युवाओं में इस तकनीकी संस्कृति को बढ़ावा देने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए इस साल के चैलेंज में विजेता रहने वाली सर्वश्रेष्ठ टीम को 50,000 रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। 24 घंटे की इस कड़ी मेहनत, कोडिंग और रोबोट असेंबली के बाद जब इन प्रोटोटाइप्स ने लाइव परफॉर्म किया, तो यह देखना बेहद दिलचस्प रहा कि कैसे तकनीकी युवाओं ने अपनी मेहनत से इस मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।  

भावांतर योजना में बाजरे की खरीद ₹2900 प्रति क्विंटल

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार इस बार भावांतर भरपाई योजना के तहत बाजरा उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2900 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ देना सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को बाजरा और धान खरीद की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इसके लिए आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए। सरकार बाजरे की खरीद 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करेगी। वहीं, खुले बाजार में इससे अधिक भाव मिलने पर किसान अपनी उपज बाजार में बेच सकेंगे और एमएसपी 2900 रुपये तक पहुंचाने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार भावांतर की भरपाई सरकार करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को बाजरे का 2900 रुपये प्रति क्विंटल का भाव देना सुनिश्चित किया जाएगा।

नेपाल में बारिश से बढ़ी चिंता, बिहार के 17 जिलों में अलर्ट; NDRF-SDRF तैयार

पटना  भारी बारिश के पूर्वानुमान और नेपाल के तराई क्षेत्र में गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश के मद्देनज़र बिहार में अलर्ट जारी किया गया है। संभावित परिस्थितियों के मद्देनजर सीमावर्ती व गंडक, बागमती तथा कोसी नदी से जुड़े संवेदनशील जिलों में प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने तथा सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने शनिवार को इस बाबत संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। इन जिलों में विशेष सतर्कता बारिश की स्थिति को देखते हुए सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सारण, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, खगड़िया तथा बेगूसराय सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन को नदी के जलस्तर एवं प्रवाह, निचले इलाकों, तटबंधों, नदी किनारे बसे गांवों, पुल-पुलियों तथा संपर्क मार्गों की लगातार निगरानी करने को कहा गया है। कोसी नदी के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद, कोसी नदी के आसपास स्थित जिलों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। एनडीआरएफ व एसडीआरएफ को सतर्क रहने के निर्देश संभावित परिस्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एनडीआरएफ व एसडीआरएफ को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। सभी संबंधित जिलों में नाव, लाइफ जैकेट, रेस्क्यू उपकरण तथा अन्य आवश्यक संसाधनों को पर्याप्त संख्या में तैयार एवं उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। समय पर सूचना एवं निकासी पर जोर प्रभावित क्षेत्रों में माइकिंग के माध्यम से अग्रिम चेतावनी का व्यापक प्रसार करने तथा आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थानों पर समय रहते पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी विभागों में समन्वय जिला प्रशासन, पुलिस, जल संसाधन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच निरंतर समन्वय एवं संचार बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी उपलब्ध संसाधनों को स्टैंडबाय व एक्टिव मोड में रखा जा रहा है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर बचाव एवं राहत कार्य तत्काल प्रारंभ किया जा सके। राज्य सरकार द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आम लोगों से अपील घबराने की आवश्यकता नहीं मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि जनप्रतिनिधियों व आमजन को नियमित रूप से जागरूक करते रहें। यह स्पष्ट करें कि वर्तमान स्थिति को लेकर किसी प्रकार की अफवाह या घबराहट की आवश्यकता नहीं है। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और आवश्यक बचाव एवं राहत संसाधनों को पहले से ही संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जा रहा है। किसी भी आपातकालीन सहायता के लिए आपदा प्रबंधन विभाग के टोल फ्री नंबर 1070 पर सम्पर्क किया जा सकता है। ये रहे मौजूद बैठक में प्रधान सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग संतोष कुमार मल्ल, सचिव, जल संसाधन विभाग, डा. चंद्रशेखर सिंह सहित सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सारण, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, खगड़िया तथा बेगूसराय जिलों के जिलाधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।  

23 SCO साइटों की दोबारा ई-नीलामी, मंडी में तैयारी

चंडीगढ़. चंडीगढ़. सेक्टर-39 स्थित नई अनाज, फल एवं सब्जी मंडी में फल-सब्जी कारोबार के लिए 23 एससीओ साइटों की दोबारा ई-नीलामी होगी। पहली नीलामी सफल नहीं होने के बाद राज्य कृषि विपणन बोर्ड, यूटी चंडीगढ़ ने अब नए सिरे से नीलामी प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है। बोर्ड की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार 28 सितंबर 2026 को विज्ञापन जारी होगा और 23 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक मुख्य ई-नीलामी चलेगी। नीलामी में साइट नंबर 24 से 46 तक कुल 23 एससीओ साइटें शामिल हैं। सभी साइटें लीजहोल्ड आधार पर फल-सब्जी व्यापार के लिए आवंटित की जाएंगी। प्रत्येक साइट का आकार करीब 5.48 मीटर गुणा 18.29 मीटर यानी 100.23 वर्ग मीटर है। 122.08 करोड़ रखी रिजर्व प्राइस चंडीगढ़ प्रशासन ने सेक्टर-39 में नई सब्जी मंडी के विकास और सेक्टर-26 मंडी की शिफ्टिंग के तहत दूसरे फेज की ऑक्शन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे पहले मार्च 2025 में हुई पहली ऑक्शन में इसी साइज की साइट का रिजर्व प्राइस 3.70 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 5.30 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। यानी 1 साल 6 महीने में प्रत्येक साइट की कीमत 1.60 करोड़ रुपए बढ़ गई है। पिछली ऑक्शन में केवल 12 साइट्स ही बिक पाई थीं। ऑक्शन का शेड्यूल- ईएमडी और डाक्यूमेंट्स जमा: 1 से 22 सितंबर अप्रूवल प्रोसेस: 25 से 26 सितंबर ऑनलाइन बिडिंग: 27 से 29 सितंबर (बोलीदाताओं के लिए प्री-बिड सेमिनार व ट्रेनिंग भी होगी) ऑक्शन का ब्योरा – प्लॉट साइज: सभी 23 एससीओ समान साइज (5.48 मी. X 18.29 मी. यानी 119.874 वर्ग गज) के हैं। रिजर्व प्राइस: प्रति वर्ग गज 4,42,800 रुपए की दर से प्रत्येक साइट की न्यूनतम कीमत 5,30,80,207 रुपए तय है। ईएमडी व अतिरिक्त चार्ज: बोली में शामिल होने के लिए 10,61,604 रुपए अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट देनी होगी। कॉर्नर प्लॉट्स (साइट नंबर 24 और 46) के लिए बोली मूल्य पर 5% अतिरिक्त चार्ज लगेगा। व्यापार की शर्त: इन साइट्स का उपयोग केवल फल और सब्जी के थोक व्यापार के लिए होगा। 120 वर्ग गज के हैं सभी एससीओ – हाल ही में पर्यावरण मंजूरी प्राप्त इस 234.55 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को 72.4 एकड़ (बिल्ट-अप एरिया 1,47,605.83 वर्ग मीटर) में विकसित किया जा रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर: 1 ऑक्शन शेड, 130 एससीओ व दुकानें, 1 वेंडर्स मार्केट, मार्केटिंग बोर्ड व कमेटी ऑफिस, बैंक, संपर्क सेंटर, सराय, 1 वेयरहाउस और राइपनिंग चैंबर। कोल्ड स्टोरेज: 2,000 मीट्रिक टन क्षमता के 2 कोल्ड स्टोरेज। वेस्ट मैनेजमेंट: मंडी में रोज निकलने वाले 10-15 टन सॉलिड वेस्ट के लिए 14 टन प्रतिदिन क्षमता का इन-हाउस इन-वेसल कंपोस्टिंग प्लांट लगेगा, जिसके चारों ओर 10 मीटर चौड़ा ग्रीन बफर जोन होगा। ट्रैफिक प्लान: 5 किमी के दायरे में सुगम आवाजाही के लिए अर्बन टाउन प्लानिंग और पीडब्ल्यूडी से सर्टिफाइड कॉम्प्रिहेंसिव ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान बनेगा।

घरेलू हिंसा मामले में पत्नी के रिश्तेदार भी आरोपी हो सकते हैं

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि घरेलू हिंसा के मामलों में केवल पति ही नहीं, बल्कि परिवार के अन्य सदस्य जैसे सास, बहू, ननद और उसके मायके पक्ष के लोग भी दायरे में आ सकते हैं. हाईकोर्ट के सिंगल बेंच ने बहू और उसके परिजनों की याचिका खारिज करते हुए कहा है कि साझा घर और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े विवादों का फैसला बिना सबूतों और गवाहों के शुरुआती स्तर पर नहीं किया जा सकता, इसके लिए ट्रायल जरूरी है. इस मामले में महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां शिकायत किसी बहू ने अपनी सास के खिलाफ नहीं बल्कि सास और ननद ने अपनी बहू और उसके मायके पक्ष के लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी. दरअसल रायपुर निवासी निर्मला अग्निवंशी और उनकी बेटी श्रुति अग्निवंशी ने रायपुर की निचली अदालत में घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 की धारा 12 के तहत एक शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत में उन्होंने अपनी बहू अनिशा अग्निवंशी और बहू के मायके पक्ष के भाई बहनों व अन्य रिश्तेदारों सुषमा सिंह, अभिषेक सिंह, अविनाश सिंह, अंजू सिंह और अलका सिंह को आरोपी बनाया था. इन पर आरोप लगाया कि बहू और उसके परिवार के लोग लगातार उसके साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं, मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं और उन्हें घर से अलग करने के लिए दवाब बना रहे हैं. बहू और उसके परिजनों ने निचली अदालत में तर्क पेश करते हुए कहा कि वे साझा घर में एक साथ नहीं रहते हैं इसलिए उनपर घरेलू हिंसा का कानून लागू नहीं होता. निचली अदालत ने उनके तर्क को खारिज कर दिया, जिसके वे निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे, जहां हाईकोर्ट ने भी याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं दी है.