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सीएम योगी के नेतृत्व में यूपी में पहली बार महिला गन्ना किसानों को मिली सर्वाधिक मजबूती

लखनऊ उत्तर प्रदेश में गन्ना की खेती के क्षेत्र में महिलाओं ने अभूतपूर्व सफलता हासिल करते हुए नया इतिहास रच दिया है। योगी सरकार में प्रदेश की 57 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं गन्ना उत्पादन से जुड़कर सफल उद्यमी बन चुकीं हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है। प्रदेश में वर्ष 2020-21 में शुरू किए गए “उन्नत गन्ना बीज वितरण कार्यक्रम” से महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। इस योजना के तहत 37 गन्ना आच्छादित जिलों में 3,163 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया। इनमें 57,322 महिलाओं को स्वरोजगार मिला है। साथ ही इस पहल से अब तक लगभग साढ़े चार लाख से अधिक कार्य दिवसों का रोजगार सृजित हुआ है। महिलाओं को मिली प्राथमिकता, बढ़ा आत्मविश्वास गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. ने बताया कि गन्ना उत्पादन के क्षेत्र में पहली बार योगी सरकार के दौरान महिला किसानों को पर्ची निर्गमन में प्राथमिकता दी गई है। इससे प्रदेश की लगभग डेढ़ लाख महिला गन्ना लघु किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। इस निर्णय ने महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाया है और उन्हें खेती में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया है। सामाजिक समावेशन का विशेष ध्यान योगी सरकार ने इस योजना में सामाजिक समावेशन का भी विशेष ध्यान रखा है। इसमें 10,270 अनुसूचित जाति और 130 अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को शामिल किया गया है, जो अब आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रहीं हैं। बीज उत्पादन से करोड़ों का कारोबार महिला स्वयं सहायता समूहों ने अब तक 60.73 करोड़ गन्ना बीज तैयार किए हैं। इसके बदले उन्हें 77.83 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया है। इससे ग्रामीण महिलाओं को बड़े स्तर पर आर्थिक लाभ मिला है और वे अब कृषि आधारित उद्यमिता की नई पहचान बना रहीं हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई दिशा गन्ना खेती में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से प्रदेश में न सिर्फ रोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि गांवों में आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिली है। योगी सरकार की इस पहल ने यह साबित किया है कि सही अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता की नई इबारत लिख सकतीं हैं। महिलाओं को ऋण एवं अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. ने बताया कि महिलाओं को सशक्त करने के लिए गन्ना विभाग ने ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ एक एमओयू किया है। जिसके तहत समितियों में प्रेरणा कैंटीन चलाई जाएंगी। इसके अंतर्गत महिलाओं को ऋण एवं अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उनके रोजगार एवं आय में वृद्धि होगी।

$1 ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य को गति देगा मेगा प्रोजेक्ट, रोजगार, निवेश और वैश्विक कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा बूस्ट

लखनऊ/नोएडा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होने जा रहा है। 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसके शुभारंभ के साथ ही यह मेगा प्रोजेक्ट केवल एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक मजबूत स्ट्रैटेजिक इंजन के रूप में सामने आएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप विकसित यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के लंबे समय से “लैंड-लॉक्ड” आर्थिक पोटेंशियल को अनलॉक करेगा और कृषि, एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन व उद्योगों को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ेगा। बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, निवेश आकर्षण और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के चलते यह परियोजना न केवल प्रदेश की जीडीपी को नई गति देगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर एक मजबूत पहचान भी दिलाएगी। किसानों की आय में 20–30% तक वृद्धि की संभावना पूर्व सीएफओ, एयर इंडिया सैट्स और यूपीडीएफ के चेयरमैन सीए पंकज जायसवाल के अनुसार, भारत का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनने जा रहा यह प्रोजेक्ट 7 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता और लगभग 10 लाख टन कार्गो हैंडलिंग के साथ कृषि, एमएसएमई और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई गति देगा। इसके जरिए फल, सब्जी, डेयरी और सजावटी फूल जैसे पेरिशेबल उत्पाद सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचेंगे, जिससे “फार्म-टू-ग्लोबल मार्केट” मॉडल मजबूत होगा और किसानों की आय में 20–30% तक वृद्धि की संभावना है। साथ ही, लॉजिस्टिक्स लागत घटने, निर्यात बढ़ने और वैश्विक कनेक्टिविटी बेहतर होने से उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मानचित्र पर एक सशक्त पहचान मिलेगी। जीडीपी में 1% की वृद्धि संभव उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश में व्यापार और पर्यटन के नए आयाम स्थापित करने जा रहा है। यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर, आगरा, मथुरा, वृंदावन और वाराणसी जैसे प्रमुख धार्मिक शहरों को एक वैश्विक पर्यटन सर्किट से जोड़ेगा, जिससे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों की आवाजाही में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। बेहतर कनेक्टिविटी के चलते धार्मिक पर्यटन, मेडिकल टूरिज्म और बिजनेस ट्रैवल को भी नई गति मिलेगी। जब यह एयरपोर्ट अपने पूर्ण क्षमता के साथ संचालित होगा, तो इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव से उत्तर प्रदेश की जीडीपी में 1 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि संभव है, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा। रोजगार सृजन का बनेगा बड़ा केंद्र नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का प्रमुख इंजन बनने जा रहा है। पंकज जायसवाल के अनुसार, शुरुआती 5 वर्षों में एयरपोर्ट ऑपरेशन, ग्राउंड हैंडलिंग, सिक्योरिटी, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में 20,000 से अधिक तथा एमआरओ, कार्गो, लॉजिस्टिक्स और एविएशन सर्विसेज में 30,000 से अधिक, कुल मिलाकर 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। वहीं कृषि, ट्रांसपोर्ट, सप्लाई चेन, एमएसएमई, होटल और पर्यटन जैसे सेक्टर्स में 5 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जो लंबी अवधि में 40–50 लाख तक पहुंच सकते हैं। प्रदेश में मौजूद लगभग एक करोड़ एमएसएमई को वैश्विक बाजार से जोड़कर यह एयरपोर्ट न केवल रोजगार बढ़ाएगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी व्यापक स्तर पर गति देगा। रियल एस्टेट और इंडस्ट्री को मिलेगा व्यापक बूस्ट जेवर एयरपोर्ट के विकास के साथ उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट और औद्योगिक परिदृश्य में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यीडा) तेजी से एक प्रीमियम निवेश और औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरेंगे, वहीं बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा-वृंदावन तक अर्बन एक्सपेंशन कॉरिडोर विकसित होकर नए शहरों और टाउनशिप को जन्म देगा। एयरपोर्ट के आसपास होटल, वेयरहाउस, ऑफिस स्पेस, लॉजिस्टिक्स पार्क और डेटा सेंटर में बड़े निवेश आकर्षित होंगे, जिससे रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल जैसे निर्यात-उन्मुख उद्योगों को नई गति मिलेगी, जो इस क्षेत्र को एक मजबूत इंडस्ट्रियल और एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करेगा। इंडस्ट्रियल सेक्टर को नई रफ्तार एयरपोर्ट के संचालन से उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र को उल्लेखनीय गति मिलने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी और कम लॉजिस्टिक्स लागत के चलते इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख सेक्टर तेजी से विकसित होंगे। खासकर निर्यात उन्मुख उद्योगों को वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे उत्पादन और निवेश दोनों में वृद्धि होगी। यह एयरपोर्ट इंडस्ट्री के लिए एक मजबूत सप्लाई चेन नेटवर्क तैयार करेगा, जो उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका  वैश्विक एविएशन हब बनने की क्षमता जेवर एयरपोर्ट को केवल दिल्ली-एनसीआर के सहायक एयरपोर्ट के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के एक बड़े मल्टी-मोडल इंटरनेशनल एविएशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करते हुए एयर ट्रैफिक को संतुलित करेगा। 5 रनवे की प्रस्तावित क्षमता के साथ यह देश का सबसे बड़ा एविएशन हब बनने की दिशा में अग्रसर है। इसकी रणनीतिक स्थिति इसे एशिया और यूरोप के बीच एक अहम ट्रांजिट केंद्र बना सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी में बड़ा विस्तार होगा। साथ ही, बदलते वैश्विक हालात के बीच यह दुबई, दोहा और अबु धाबी जैसे स्थापित हब के विकल्प के रूप में उभरकर भारत की एविएशन क्षमता को नई ऊंचाई देने की क्षमता रखता है। एमएसएमई और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगा मेगा बूस्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की रणनीतिक लोकेशन इसे एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर के लिए गेमचेंजर बनाती है। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के करीब होने के साथ-साथ यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अन्य प्रमुख हाईवे से इसकी मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी इस क्षेत्र को देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब बना सकती है। इसके परिणामस्वरूप वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज और ई-कॉमर्स फुलफिलमेंट सेंटर में तेजी से विस्तार होगा, जिससे सप्लाई चेन अधिक कुशल बनेगी। साथ ही, भारत में 13–14% तक रहने वाली लॉजिस्टिक लागत में कमी आने से एमएसएमई सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और निर्यात को नई गति मिलेगी। निवेश और विदेशी कंपनियों के लिए बढ़ेगा आकर्षण नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास विकसित हो रही एयरोसिटी, लॉजिस्टिक्स पार्क और इंडस्ट्रियल क्लस्टर उत्तर प्रदेश को निवेश का नया केंद्र बना रहे हैं। राज्य सरकार की एफडीआई-फ्रेंडली नीतियों और बेहतर “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” माहौल के चलते घरेलू और विदेशी निवेशकों का रुझान तेजी … Read more

युवा उद्यमिता को मिल रही नई उड़ान, योगी सरकार के विजन को लखीमपुर के अब्दुल ने किया साकार

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा चलाई जा रहीं महत्वकांक्षी योजनाएं आज युवाओं के लिए उम्मीद की किरण बन चुकीं हैं। सरकारी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को न केवल आर्थिक सहायता मिल रही है, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी मिल रही है। लखीमपुर खीरी के ग्राम श्रीनगर के रहने वाले अब्दुल माबूद ने योगी सरकार के विजन को धरातल पर उतारा है।  अब्दुल माबूद ने अपनी मेहनत और सरकारी योजना के माध्यम से रेडीमेड गारमेंट का सफल व्यवसाय खड़ा किया है। उन्होंने साल 2021 में उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना’ के तहत 10 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया था। जिसके बाद सरकारी योजना से मिली वित्तीय सहायता ने उनके सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस आर्थिक सहायता से उन्होंने आधुनिक मशीनें खरीदीं और अपने छोटे से काम को एक संगठित उद्योग का रूप दे दिया। उनके यूनिट में हर महीने करीब 5 से 6 हजार लोअर (ट्रैक पैंट) बनते हैं। अब्दुल माबूद का यह उद्यम केवल उनके लिए कमाई का साधन ही नहीं, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी रोजगार का साधन बना है। इस उद्योग से न सिर्फ 24 लोगों को रोजगार मिला, उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। लागत और खर्चों के बाद अब्दुल की शुद्ध मासिक आय 50 हजार रुपये से अधिक है। योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन उत्तर प्रदेश में खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना’ का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी है। ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना’ का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा करना है। पारंपरिक कारीगरों और बेरोजगार युवाओं को सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए बैंक ऋण के साथ मार्जिन मनी सब्सिडी प्रदान करना है। इच्छुक युवा पूर्ण जानकारी प्राप्त करके आधिकारिक पोर्टल KVIC PMEGP e-Portal के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

मंदिर गेट पर विवादित पोस्टर से हड़कंप, दमोह में ‘एंट्री बैन’ और लव जिहाद को लेकर चेतावनी

दमोह शहर के बड़ी देवी मंदिर गेट के बाहर चैत्र नवरात्रि पर्व पर हिंदू संगठन द्वारा पोस्टर लगाए गए हैं, जिसमें विधर्मियों का प्रवेश निषेध लिखा है। इसके अलावा अंदर टीन शेड पर भी लव जिहाद जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए पोस्टर लगाए गए हैं। मंदिर के मुख्य गेट पर लगाए गए यह पोस्टर इस समय चर्चा का विषय बन गए हैं। हिंदू संगठन की ओर से लगाए गए इन पोस्टरों में महिलाओं से पारंपरिक परिधान में मंदिर आने की अपील की गई है। विशेष समुदाय के युवकों पर छेड़छाड़ के आरोप हिंदू संगठन के नित्या प्यासी ने बताया कि बड़ी देवी मंदिर धार्मिक क्षेत्र है, वह घूमने वाला क्षेत्र नहीं है। जिन लोगों की आस्था हिंदू धर्म और सनातन धर्म में नहीं है, उन्हीं को लेकर हमने यह पोस्टर लगाए हैं। उसमें स्पष्ट रूप से लिखा है कि विधर्मियों का प्रवेश निषेध है; माताएं-बहनें पारंपरिक सांस्कृतिक परिधान में ही माता की आराधना करें। उन्होंने आगे बताया कि पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि मंदिर में विशेष समुदाय के युवक यहां घूमते दिखाई दिए हैं और कई बार इन लोगों के द्वारा छेड़छाड़ जैसी घटनाएं भी की गई हैं। हमने कार्रवाई करते हुए पुलिस को इन्हें सौंपा है। 'प्रशासन बाद में पहुंचेगा, हम अपने हिसाब से कार्रवाई करेंगे' नित्या प्यासी ने आगे कहा कि जब आपकी आस्था हिंदू और सनातन धर्म में नहीं है तो बड़ी देवी मंदिर में क्यों जाना? वहां हमारी माताएं, बहनें मां की आराधना करती हैं, 9 दिन का उपवास करती हैं, तो वहां समुदाय विशेष के युवक को नहीं जाना चाहिए। यह लोग लव जिहाद की घटना के तहत ही यहाँ आते हैं और षड्यंत्र रचते हैं। लव जिहाद फैलाने के उद्देश्य से जो भी व्यक्ति हमें दोबारा मिलता है, तो अब हमारा कहना है कि प्रशासन तो बाद में पहुँचेगा, हम पहले ही अपने हिसाब से कार्रवाई करेंगे। कड़ी कार्रवाई का अल्टीमेटम, 'हाथ में डंडा है और इलाज भी जानते हैं' हमारा स्पष्ट रूप से कहना है कि यदि हमारे धार्मिक स्थान पर जाना है तो अपनी माता और बहनों को भी साथ लेकर जाइए, हम आपका फूल-मालाओं से स्वागत करेंगे। यदि आप लव जिहाद के उद्देश्य से जाएंगे तो हमारे हाथ में डंडा है और उसमें झंडा लगा रहता है। हम इसका इलाज भी जानते हैं; यदि मंदिर क्षेत्र में माता, बहनों के साथ छेड़छाड़ या लव जिहाद जैसी हरकत की गई तो इसका बहुत बड़ा नुकसान ऐसे लोगों को भुगतना होगा।  

LPG उपभोक्ताओं के लिए राहत: पंजाब में 3-4 दिन में डिलीवरी, बुकिंग के नियम तय

बठिंडा. डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान ने जिले में घरेलू गैस, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई स्थिति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए। इस दौरान तेल कंपनियों के अधिकारियों ने बताया कि जिले में घरेलू गैस, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। गैस सिलेंडर की डिलीवरी बुकिंग के 3-4 दिनों के भीतर की जा रही है और पेट्रोल पंपों व गैस एजेंसियों को सप्लाई सामान्य रूप से जारी है। अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि सरकारी निर्देशों के अनुसार अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, फार्मास्युटिकल उद्योग, बीज प्रोसेसिंग यूनिट्स, मछली पालन और एयरलाइन/रेलवे कैंटीनों को कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों को बड़ी राहत तेल कंपनियों के बिक्री अधिकारियों ने बताया कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में गैस बुकिंग का समय 45 दिन था, जिसे अब घटाकर 25 दिन कर दिया गया है। इससे उपभोक्ताओं को काफी राहत मिली है। कालाबाजारी रोकने के लिए सख्ती डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि घरेलू गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें रोजाना अलग-अलग स्थानों पर जांच कर किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि पर नजर रख रही हैं। घबराने की जरूरत नहीं: DC डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिले में गैस और ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने सलाह दी कि गैस बुकिंग 25 दिन पहले ही कराएं और सिलेंडर डिलीवरी कोड के जरिए ही लें। साथ ही उन्होंने लोगों से यह भी अपील की कि जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक अपना KYC पूरा नहीं किया है, वे संबंधित गैस एजेंसियों या ऑनलाइन माध्यम से जल्द से जल्द KYC प्रक्रिया पूरी करें।

योगी सरकार में गो-आश्रय स्थलों की निगरानी हुई हाईटेक

लखनऊ उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को तकनीक से जोड़ते हुए एक बड़ा और प्रभावी कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश भर के जनपदों में संचालित 5446 गो-आश्रय स्थलों को सीसीटीवी निगरानी से जोड़ दिया गया है, जहां अब तक कुल 7592 कैमरे स्थापित किए जा चुके हैं। यह पहल न केवल पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि गोवंश की सुरक्षा और बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने का भी मजबूत माध्यम बन रही है। पशुओं के खान-पान, स्वास्थ्य, साफ-सफाई आदि की लगातार निगरानी संभव अब इन आश्रय स्थलों की 24×7 निगरानी संभव हो गई है। सीसीटीवी कैमरों के जरिए पशुओं के खान-पान, स्वास्थ्य, साफ-सफाई और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है, जिससे किसी भी प्रकार की लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित हो रही है। यह व्यवस्था प्रशासनिक जवाबदेही को भी मजबूत कर रही है। समय पर चारा, स्वच्छ पानी और चिकित्सा उपलब्ध कराना लक्ष्य प्रदेश के इन गो-आश्रय स्थलों में बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश संरक्षित हैं, जिनकी देखभाल सरकार की प्राथमिकता में है। सीसीटीवी निगरानी के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पशुओं को समय पर चारा, स्वच्छ पानी और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। पूरे प्रदेश में एकीकृत और सुदृढ़ निगरानी तंत्र होगा विकसित पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार, यह डिजिटल निगरानी प्रणाली प्रशासनिक पारदर्शिता के साथ-साथ आम जनता के विश्वास को भी सुदृढ़ कर रही है। साथ ही, किसी भी आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने में यह तकनीक बेहद कारगर साबित हो रही है। वर्तमान में 56 जनपदों में कमांड एवं कंट्रोल रूम सक्रिय हैं, जहां से इन कैमरों की मॉनिटरिंग की जा रही है, जबकि शेष 19 जनपदों में सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड के माध्यम से जल्द ही कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। इससे पूरे प्रदेश में एकीकृत और सुदृढ़ निगरानी तंत्र विकसित होगा। नियमित मॉनिटरिंग होगी सुनिश्चित सरकार ने सभी जिलों को निर्देशित किया है कि सीसीटीवी कैमरों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए और किसी भी खराबी की स्थिति में तत्काल सुधार कराया जाए। साथ ही अधिकारियों को समय-समय पर स्थलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वयं सहायता समूह की ताकत: राजश्री शुक्ला ने बिजली बिल सेवा से जीता पूरे गांव का विश्वास

लखनऊ बाराबंकी की राजश्री शुक्ला आज उस बदलाव की मिसाल हैं, जो सरकारी योजनाओं और व्यक्तिगत मेहनत के संगम से संभव हुआ है। कभी सीमित संसाधनों के साथ जीवनयापन करने वाली राजश्री आज “विद्युत सखी” के रूप में अलग पहचान बना चुकी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई इस पहल ने उन्हें न सिर्फ रोजगार दिया, बल्कि उन्हें अपने जिले में एक नई पहचान भी दी है। घर-घर जाकर बिजली बिल संग्रह करने का उनका काम आज हजारों लोगों के लिए सुविधा और भरोसे का प्रतीक बन चुका है। घर-घर सेवा, गांव को मिली सुविधा: डिजिटल भुगतान से बदली ग्रामीण व्यवस्था राजश्री का काम केवल बिल संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में एक बड़ी सुविधा लेकर आया है। उनके प्रयासों से गांव के लोगों को लंबी कतारों में खड़े होने से राहत मिली है और समय पर बिल जमा होने से बिजली विभाग के राजस्व संग्रह में भी सुधार हुआ है। अब तक वे 81,000 से अधिक बिजली बिल की राशि एकत्र कर चुकीं हैं। उनकी मेहनत का परिणाम है कि उन्होंने अभी तक कुल ₹18 करोड़ से अधिक की राशि का बिल जमा कराया है। आज उनकी वार्षिक आय ₹10 लाख से अधिक है, जो यह दर्शाती है कि सही अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त बन कर अपने पैरों पर खड़ी हो सकतीं हैं। राधा स्वयं सहायता समूह से मिली सफलता: लाख रुपये तक पहुंची आय राजश्री ‘राधा स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी हैं और उन्होंने वर्ष 2021 में मात्र ₹30,000 की बैंक सहायता से इस काम की शुरुआत की थी। शुरुआत में यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने गांव-गांव जाकर जागरूकता शिविर लगाए, लोगों को डिजिटल भुगतान, बिल सेवाओं और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। कुछ समय बाद ही उनकी मासिक आय 80 हजार रुपये से अधिक हो चुकी है। उनकी ईमानदारी और मेहनत ने धीरे-धीरे लोगों का विश्वास जीत लिया। आज स्थिति यह है कि गांव की महिलाएं खुद उन्हें फोन कर बिल भुगतान में सहायता मांगती हैं। यह विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी बन गया है। सम्मान और प्रेरणा: एक महिला से हजारों तक पहुंचा आत्मनिर्भरता का संदेश राजश्री शुक्ला की इस उपलब्धि को राज्य स्तर पर भी सराहा गया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने उन्हें सम्मानित किया। उनकी सफलता न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि महिलाएं भी हर क्षेत्र में आगे बढ़कर न केवल खुद को, बल्कि समाज को भी सशक्त बना सकती हैं।  9 नवंबर 2024 को आयोजित “आकांक्षा हाट” कार्यक्रम के अवसर पर उत्तर प्रदेश की 5 मेधावी महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिनमें विद्युत सखी राजश्री शुक्ला भी शामिल थीं। इसके अलावा उन्हें 15 अगस्त 2023 और 26 जनवरी 2024 और 15 अगस्त 2025 के बीच मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया जा चूका है। उनकी उपलब्धियों के चलते उन्हें 15 अगस्त 2024 को दिल्ली के लाल किले पर प्रधानमंत्री की ओर से आमंत्रित किया गया, जहां वे ध्वजारोहण समारोह की साक्षी बनीं। इसके साथ ही 14 अगस्त 2024 को ग्रामीण विकास मंत्रालय में आयोजित बैठक एवं भोज कार्यक्रम में भी उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।  योगी सरकार की पहल ‘विद्युत सखी’ से बदलता उत्तर प्रदेश आज उत्तर प्रदेश में विद्युत सखियां सक्रिय रूप से अच्छा काम कर रही हैं, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के बिजली बिल संग्रह कर राज्य की व्यवस्था को मजबूत किया है। यह पहल केवल एक योजना नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण, डिजिटल सशक्तीकरण और ग्रामीण विकास का एक सशक्त मॉडल बन चुकी है। राजश्री शुक्ला जैसी महिलाएं इस बात का प्रमाण हैं कि जब सरकार की योजनाएं सही दिशा में लागू होती हैं और लोग उन्हें अपनाते हैं, तो बदलाव सिर्फ संभव नहीं, बल्कि स्थायी हो जाता है।

विकास की रफ्तार को कई गुना बढ़ा सकती है टेक्नोलॉजी: मुख्यमंत्री

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि टेक्नोलॉजी विकास की रफ्तार को कई गुना बढ़ा सकती है। हमारी गति को प्रगति में बदल सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। बजट में भी टेक्नोलॉजी पर विशेष ध्यान देने का प्रयास किया है। जब हम तकनीक नहीं अपनाते, उससे परहेज करते हैं तो प्रतिस्पर्धा में नहीं होते हैं। और, जब प्रतिस्पर्धा में नहीं होते हैं तो प्रगति की जगह दुर्गति की ओर जाते हैं। हमें प्रगति का अनुसरण करना है। सीएम योगी गुरुवार को गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के गोरखपुर सेंटर के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे युवाओं में बहुत टैलेंट है। उसके टैलेंट को जब हम टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ते हैं तो वह अपनी प्रतिभा को कई गुना तेजी के साथ आगे बढ़ाने में सफल होता है। यही कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र ने पिछले 11 वर्षों में देश में किया है। दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी भारत में है। यहां युवाओं में स्केल तो था लेकिन उसे वर्ष 2014 के पहले की सरकारों ने महत्व नहीं दिया। स्केल को स्किल में बदलने का प्रयास नहीं किया, कोई प्लेटफार्म नहीं उपलब्ध कराया। परिणाम था कि युवा हतोत्साहित होता था, पलायन करता था। युवाओं के मन में निराशा थी। लेकिन, वर्ष 2014 के बाद एक-एक कर हर क्षेत्र में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। न केवल भारत सरकार के स्तर पर, बल्कि हर जनपद स्तर पर युवाओं के स्केल को स्किल में बदलने के लिए अनेक कार्यक्रम प्रारंभ हुए। उन कार्यक्रमों की श्रृंखला में एसटीपीआई का गोरखपुर केंद्र भी अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है। इसका शुभारंभ वासन्तिक नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर होना अत्यंत शुभ लक्षण है।  एसटीपीआई से मिलेगी युवाओं के सपनों को नई उड़ान मुख्यमंत्री ने कहा कि एसटीपीआई का यह सेंटर गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के युवाओं के सपनों को नई उड़ान देगा। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि स्टार्टअप चलाने वाला व्यक्ति केवल अपना कंप्यूटर लेकर वहां जाएगा। उसे जगह, बिजली कनेक्शन और अन्य जन सुविधाओं की चिंता नहीं करनी है। देश और दुनिया में जहां कहीं भी सॉफ्टवेयर की टेक्नोलॉजी आज अपनी धमक दिखा रही है, उसके पीछे यही सफल मॉडल है। गोरखपुर में पहली बार इसे शुरू किया जा रहा है। प्लग एंड प्ले मॉडल पर यहां के युवाओं को अपने स्टार्टअप के लिए प्लेटफार्म उपलब्ध हुआ है। 15 अप्रैल को होगा पूर्वी यूपी के पहले सेंटर आफ एक्सीलेंस का शुभारंभ मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अप्रैल को गोरखपुर में पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले सेंटर आफ एक्सीलेंस का शुभारंभ भी हो जाएगा। यह सेंटर आफ एक्सीलेंस महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एमपीआईटी) में बना है। ये सभी कार्यक्रम दिखाते हैं कि अब केवल हार्डवेयर में ही नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर में भी पूर्वी उत्तर प्रदेश का युवा अपनी प्रतिभा का परिचय वैश्विक मंच पर देने में सफल हो पाएगा। पिछले 11 वर्ष के अंदर स्टार्टअप संस्कृति को आगे बढ़ाने का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश में 20 हजार से अधिक स्टार्टअप काम कर रहे हैं और इनमें से आधे महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। हर व्यक्ति के अंदर प्रतिभा है, लेकिन उसके हुनर को मंच चाहिए। एमएमएमयूटी में बनेगा ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी का सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस मुख्यमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी को भविष्य की ऊर्जा बताते हुए कहा कि सरकार गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनवा रही है। इसके लिए 50 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। एनर्जी के लिए हमें किसी अन्य देश पर निर्भर न रहना पड़े, इसके लिए ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी एक माध्यम बनने वाली है। हम लोग हाल में जापान गए थे। जापान के साथ हमारी बातचीत हुई है। जापान में ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी काफी एडवांस्ड स्टेज में है। हम उनसे मिलकर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाएंगे। टेक्नोलॉजी को आने में और इनोवेशन को रिसर्च एंड डेवलपमेंट में बदलने में थोड़ा समय लगता है। संभावनाओं के अनुरूप विकसित किए जा रहे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जिस क्षेत्र में जो संभावनाएं हैं, उसी को देखकर सेंटर आफ एक्सीलेंस विकसित किए जा रहे हैं। आईआईटी कानपुर व एसजीपीजीआई लखनऊ में मेडिटेक, कानपुर में लेदर व ड्रोन टेक्नोलॉजी और नोएडा-ग्रेटर नोएडा में रोबोटिक्स के सेंटर आफ एक्सीलेंस विकसित करने के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है। सरकार विश्व बैंक के साथ मिलकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के 28 जिलों और बुंदेलखंड के सात जिलों में एग्रीटेक पर काम कर रही है। ऐसे ही स्टार्टअप डेयरी,  मत्स्य पालन और अन्य फील्ड में भी स्थापित हो सकते हैं। नौ वर्षों में गोरखपुर में हुआ एक लाख करोड़ रुपये का निवेश मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान गोरखपुर के विकास और इसकी उपलब्धियों की भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बीते नौ वर्षों में गोरखपुर के विकास में एक लाख करोड रुपये का निवेश हुआ है। यहां एम्स, खाद कारखाना, पिपराइच चीनी मिल बनी। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक बना। आयुष विश्वविद्यालय, कई पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग संस्थान बने। स्केल डेवलपमेंट के केंद्र बने। चारों ओर हाईवे और फोरलेन की कनेक्टिविटी हुई। गोरखपुर से अंदर की सड़कों को लेकर, अन्य तमाम प्रकार की सुविधाओं को लेकर काम हुए। गोरखपुर में एक लाख करोड रुपये निवेश करने से लाखों नौजवानों के लिए नौकरी और रोजगार की संभावना आगे बढ़ी है।  गीडा में दिखती है नवनिर्माण की नई प्रगति सीएम योगी ने कहा कि गीडा ने पिछले नौ वर्ष में नव निर्माण की नई प्रगति को देश और दुनिया के सामने रखा है। एक समय था जब गीडा में दो उद्योग लगे थे। उन दो उद्योगों में केवल 29-30 करोड रुपये की पूंजी लगी थी। जबकि पिछले नौ वर्ष में यहां लगभग 350 से अधिक उद्योग लगे हैं, 17000 करोड रुपये से अधिक का निवेश हुआ है। 50000 से अधिक नौजवानों को नौकरी और रोजगार की संभावना अकेले गीडा ने विकसित की है। गीडा में प्लग एंड प्ले के जिस मॉडल पर सॉफ्टवेयर पार्क विकसित हुआ है, ऐसे ही यहां पर सरकार फ्लैटेड फैक्ट्री कार्यक्रम को लेकर आई है। गीडा में प्लास्टिक पार्क भी … Read more

स्कूलों की लापरवाही भारी, इंटरनल मार्क्स अपडेट नहीं—MP बोर्ड रिजल्ट में हो सकती है देरी

भोपाल मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम 15 अप्रैल को जारी करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन इस बार प्राचार्यों की लापरवाही के कारण देरी की आशंका बढ़ गई है। कई स्कूलों ने प्रायोगिक परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन के अंक अब तक ऑनलाइन दर्ज नहीं किए हैं। मंडल द्वारा पहले 12 मार्च तक अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि की समय-सीमा तय की गई थी, लेकिन कार्य पूरा नहीं होने पर इसे बढ़ाकर 29 मार्च कर दिया गया है। मंडल की सख्त चेतावनी मंडल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी विद्यालय निर्धारित समय-सीमा तक हर हाल में अंक ऑनलाइन दर्ज करें, ताकि परिणाम समय पर जारी हो सके। सचिव द्वारा जारी पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि 29 मार्च तक अंक प्रविष्ट नहीं किए गए, तो संबंधित विद्यार्थियों के आंतरिक मूल्यांकन का कॉलम रिक्त छोड़कर ही परिणाम घोषित किया जाएगा। इसके बाद किसी प्रकार का संशोधन या पुनः प्रविष्टि की अनुमति नहीं होगी। परिणाम प्रक्रिया पर असर मंडल इस वर्ष अप्रैल के दूसरे सप्ताह में परिणाम जारी करना चाहता है, क्योंकि द्वितीय बोर्ड परीक्षा 7 मई से शुरू होनी है। लेकिन आंतरिक अंकों की प्रविष्टि में देरी से परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। स्कूल स्तर पर होता है मूल्यांकन मंडल ने तीन वर्ष पहले परीक्षा पद्धति में बदलाव करते हुए लिखित परीक्षा के साथ प्रायोगिक और प्रोजेक्ट कार्य को शामिल किया था। 100 अंकों में 80 अंक लिखित परीक्षा और 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के होते हैं। ये आंतरिक अंक स्कूल स्तर पर तैयार किए जाते हैं और उनकी ऑनलाइन प्रविष्टि की जिम्मेदारी प्राचार्यों की होती है। मंडल अधिकारियों के अनुसार कई जिलों के स्कूलों ने अभी तक यह कार्य पूरा नहीं किया है।

जटिल प्रसव के मामले भी अब संभाल रहे छोटे जिलों के अस्पताल

लखनऊ योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़े कदम उठाए हैं। आज प्रदेशवासियों को उनके ही जिले में गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा मिल रही है। योगी सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि वर्तमान में जटिल प्रसव वाले मामलों को बड़े शहरों की ओर रेफर करने की प्रवृत्ति अब प्रदेश में कम हो रही है। छोटे शहरों में ही जटिल मामले संभाले जा रहे हैं। इसके साथ ही योगी सरकार ने 76 जिला अस्पतालों के 1,791 डाक्टरों को बीते चार वर्षों में प्रशिक्षण दिया। आरआरटीसी मॉडल से जिलों में मजबूत हो रही मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करना आज भी स्वास्थ्य प्रणाली के सामने बड़ी चुनौती है। विशेषकर जिला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ सेवाओं की कमी, आपात स्थितियों में त्वरित निर्णय की क्षमता का अभाव और समय पर रेफरल की जटिलताओं के कारण कई बार ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, जिन्हें रोका जा सकता है। इन्हीं सवालों का व्यावहारिक और प्रभावी उत्तर बनकर उभरा है रीजनल रिसोर्स एंड ट्रेनिंग सेंटर (आरआरटीसी) मॉडल। प्रदेश में इस वक्त 20 मेडिकल कॉलेज आरआरटीसी के रूप में काम कर रहे हैं।  आरआरटीसी मॉडल: प्रशिक्षण से आगे, एक “सिस्टम स्ट्रेंथनिंग इंजन” आरआरटीसी ने पारंपरिक प्रशिक्षण मॉडल से आगे बढ़ते हुए हब-एंड-स्पोक आधारित मेंटरशिप मॉडल विकसित किया, जिसमें मेडिकल कॉलेज “नॉलेज हब” के रूप में कार्य करता है और जिले “स्पोक” के रूप में उससे निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। इस मॉडल के तहत ऑन-साइट मेंटरिंग, निरंतर क्षमता निर्माण, नर्सिंग स्टाफ का सशक्तीकरण व मल्टी-डिपार्टमेंट सहयोग लिया जाता है। अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज परिसर में स्थापित आरआरटीसी इस मॉडल की मिसाल है। यहां से अलीगढ़, हाथरस व कासगंज जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ की क्षमतावृद्धि की गई । आज वे जटिल से जटिल मामलों को संभाल रहे हैं। आरआरटीसी की को-ऑर्डिनेटर डॉ. तबस्सुम रहमत बताती हैं कि “हमारा लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि हर स्वास्थ्य इकाई को इस स्तर तक सक्षम बनाना है कि वह जटिल परिस्थितियों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सके।” जमीनी बदलाव: कासगंज से उभरती एक मिसाल आरआरटीसी मॉडल का प्रभाव सबसे स्पष्ट रूप से कासगंज जिला महिला अस्पताल में देखा जा सकता है। वर्ष 2017 में जहां इस अस्पताल में पहला सफल सी-सेक्शन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, वहीं आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। ऑपरेशन थिएटर पूरी तरह सुसज्जित और सक्रिय है। अधिकतर डॉक्टर और स्टाफ प्रशिक्षित हैं। जटिल प्रसव मामलों का स्थानीय स्तर पर ही प्रबंधन संभव हो रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पहले जिन मामलों को तत्काल बड़े शहरों में रेफर करना पड़ता था, अब उनमें से कई का इलाज जिले में ही हो रहा है। इससे न केवल समय की बचत हुई है, बल्कि माताओं और नवजातों के लिए जीवनरक्षक अंतर भी पैदा हुआ है। संकट के समय भी निरंतरता: कोविड-19 के दौरान अनुकूलन कोविड-19 महामारी के दौरान जब स्वास्थ्य सेवाओं पर अभूतपूर्व दबाव था, तब भी आरआरटीसी की पहल नहीं रुकी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशिक्षण जारी रखा गया, विशेष सत्र आयोजित किए गए, और यह सुनिश्चित किया गया कि संस्थागत प्रसव और नवजात देखभाल सेवाएं बाधित न हों। यह दर्शाता है कि यह मॉडल केवल स्थिर परिस्थितियों में ही नहीं, बल्कि संकट के समय भी अनुकूल और प्रभावी है। एक केस, जो बताता है क्षमता का वास्तविक अर्थ जेएन मेडिकल कालेज की डॉ. नसरीन नूर एक जटिल केस को याद करती हैं। 23 वर्षीय एक महिला तेज पेट दर्द के साथ आई। प्रारंभिक जांच में स्थिति सामान्य प्रतीत हो रही थी, लेकिन विस्तृत मूल्यांकन में हेटरोटॉपिक प्रेग्नेंसी का पता चला। एक गर्भाशय में और दूसरा ट्यूब में, जिसमें से ट्यूब वाली प्रेग्नेंसी फट चुकी थी। तत्काल सर्जरी कर मरीज की जान बचाई गई। सावधानीपूर्वक फॉलोअप के बाद उसी महिला ने नौ महीने बाद एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। यह केवल एक सफल केस नहीं, बल्कि यह संकेत है कि अब प्रणाली जटिल और जीवन-जोखिम वाली स्थितियों को पहचानने और संभालने में सक्षम हो रही है।