samacharsecretary.com

ग्रेटर नोएडा में जाम से मिलेगी राहत, हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क और जेवर एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड

ग्रेटर नोएडा  ग्रेटर नोएडा में बढ़ते औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के बीच यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी है. ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग करने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने और मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने की योजना पर चर्चा हुई है।  ग्रेटर नोएडा की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए GNIDA ने हापुड़ बाईपास तक करीब 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने का प्रस्ताव दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, इस सड़क के निर्माण से नोएडा-ग्रेटर नोएडा और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और दोनों के बीच सफर का समय घटकर करीब 30 से 45 मिनट रह सकता है।  प्रस्ताव के तहत मौजूदा कनेक्टिविटी को करीब 15 किलोमीटर तक आगे बढ़ाकर ग्रेटर नोएडा को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और आवागमन को गति मिलने की उम्मीद है।  लॉजिस्टिक्स हब से एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड GNIDA ने मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH) से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने का भी प्रस्ताव रखा है. यह सड़क वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के समानांतर बनाई जाएगी।  इस कॉरिडोर को मुख्य रूप से मालवाहक वाहनों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल करने की योजना है. इससे लॉजिस्टिक्स हब से निकलने वाले सामान को सीधे एयरपोर्ट के एयर कार्गो टर्मिनल तक पहुंचाया जा सकेगा. इससे माल परिवहन में समय की बचत होने के साथ शहर की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।  मास्टर प्लान 2041 में बदलाव की तैयारी ये सभी प्रस्ताव ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान 2041 में संशोधन की योजना का हिस्सा हैं. इसका मुख्य उद्देश्य शहर में मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग करना है. सोमवार को लखनऊ में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा की गई. बैठक में औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार भी मौजूद रहे।  GNIDA के मुताबिक, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब ग्रेटर नोएडा की आने वाली प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं, इनके विकसित होने के बाद क्षेत्र में माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने और लॉजिस्टिक्स हब से एयरपोर्ट के बीच यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होने की उम्मीद है।  कुल मिलाकर, प्रस्तावित सड़क और एलिवेटेड कॉरिडोर ग्रेटर नोएडा में फ्रेट ट्रैफिक को यात्री यातायात से अलग करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। इससे औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक्स हब, गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी को नया बूस्ट मिल सकता है।   

प्रधानमंत्री मोदी ने किया था देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं में शामिल जेवर एयरपोर्ट का शुभारंभ

लखनऊ/नोएडा.  उत्तर प्रदेश के विकास इतिहास में 15 जून 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से वाणिज्यिक उड़ान सेवाओं की शुरुआत होने जा रही है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े एविएशन, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी हब के रूप में अपनी नई पहचान की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाएगा। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो 15 जून से एयरपोर्ट पर अपनी सेवाएं शुरू करेगी और इस एयरपोर्ट की पहली लॉन्च कैरियर बनेगी। उद्घाटन दिवस पर पहली उड़ान सुबह 7:05 बजे लखनऊ से रवाना होकर 8:05 बजे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचेगी। इसके बाद नोएडा से बेंगलुरु के लिए पहली नियमित वाणिज्यिक उड़ान संचालित की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने किया था उद्घाटन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना को केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित विकास मॉडल का भी प्रतीक माना जा रहा है। एयरपोर्ट के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत की कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक विकास के लिए ऐतिहासिक परियोजना बताया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि जेवर एयरपोर्ट विकसित भारत के संकल्प को गति देने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित यह परियोजना आज प्रदेश के तेजी से बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर परिदृश्य की पहचान बन चुकी है। योगी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल जेवर एयरपोर्ट गौतमबुद्ध नगर जिले में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में विकसित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल किया जाता है। एयरपोर्ट के लिए लगभग 1334 हेक्टेयर (करीब 3300 एकड़) भूमि का अधिग्रहण किया गया। परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर निर्धारित समय में निर्माण कार्य पूरा कराया। पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता एयरपोर्ट का पहला चरण पूरी तरह तैयार हो चुका है। पहले चरण में यह एयरपोर्ट प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा। डीजीसीए द्वारा 6 मार्च 2026 को एयरपोर्ट को एयरोड्रोम लाइसेंस भी जारी किया जा चुका है। वर्तमान चरण में एक रनवे, अत्याधुनिक टर्मिनल भवन और एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर सहित सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं।  भविष्य में बनेगा दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में से एक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। वर्ष 2031 तक इसकी क्षमता बढ़ाकर तीन करोड़ वार्षिक यात्रियों की जाएगी। वर्ष 2036 तक यह क्षमता पांच करोड़ और वर्ष 2040 तक सात करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी। अंतिम विस्तार के बाद एयरपोर्ट पर पांच रनवे होंगे और इसकी कुल क्षमता 22.5 करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करेगी। पश्चिमी यूपी और एनसीआर का नया एविएशन गेटवे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के तीसरे एयरपोर्ट के रूप में विकसित यह प्रोजेक्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के लाखों यात्रियों के लिए नया विकल्प बनेगा। इंडिगो चरणबद्ध तरीके से एयरपोर्ट को लखनऊ, बेंगलुरु, हैदराबाद, अमृतसर, चंडीगढ़, धर्मशाला, जयपुर, नवी मुंबई, पंतनगर और श्रीनगर सहित 16 से अधिक शहरों से जोड़ेगी। एक लाख रोजगार और निवेश का नया केंद्र राज्य सरकार के अनुसार एयरपोर्ट परियोजना से लगभग एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, हॉस्पिटैलिटी और सेवा क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। आने वाले वर्षों में जेवर क्षेत्र उत्तर भारत के सबसे बड़े औद्योगिक और सेवा क्षेत्र केंद्र के रूप में विकसित होगा।

15 जून से पहले सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह सुदृढ़ करने के निर्देश

लखनऊ जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के संचालन के साथ यात्रियों को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक आवागमन के लिए प्राथमिक चरण में 110 इलेक्ट्रिक बसों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की चौथी बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र में 500 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि 15 जून से प्रस्तावित उड़ान संचालन से पहले सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह सुदृढ़ किया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के तेजी से विस्तार पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने अवगत कराया कि प्रदेश में वर्तमान में लगभग 15.5 लाख इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं तथा वर्ष 2030 तक 10 हजार चार्जिंग स्टेशन विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभी तक लगभग 2500 चार्जिंग स्टेशन संचालित हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन को नई गति देगी। उन्होंने भूमि अधिग्रहण और विनिमय संबंधी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए लगभग 55 प्रतिशत भूमि प्राप्त की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे और झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण जून माह के अंत तक पूरा कर लिया जाए। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे का एलाइनमेंट स्वीकृत हो चुका है तथा भूमि अधिग्रहण की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश संबंधी परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण और निवेशकों के साथ सतत संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब के लिए 323 हेक्टेयर में से 301 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा प्राप्त हो चुका है। डेवलपर चयन के लिए निविदा की अंतिम तिथि बढ़ाकर 6 जुलाई 2026 कर दी गई है। वहीं मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के लिए 200 हेक्टेयर में से 144 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध हो चुकी है तथा शेष भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज को निवेश अनुकूल व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि भवन स्वीकृति संबंधी प्रक्रियाओं को और अधिक सरल, पारदर्शी तथा समयबद्ध बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा करते हुए कहा कि ग्रामीण स्तर पर योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाए। बैठक में बताया गया कि राज्य स्तर पर 136 रिक्त पदों में से 40 पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तथा शेष 96 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। जिला एवं विकासखंड स्तर पर 360 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया संचालित है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में प्रस्तावित सीड पार्क और टेक्सटाइल पार्क परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं को प्रदेश के कृषि और औद्योगिक विकास से जोड़ते हुए तेजी से आगे बढ़ाया जाए। बैठक में बताया गया कि सीड पार्क परियोजना के संबंध में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और प्रमुख बीज कंपनियों के साथ विचार-विमर्श किया गया है तथा आगे की कार्यवाही पर सहमति बनी है। मुख्यमंत्री ने डिफेंस कॉरिडोर परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए निवेशकों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। बैठक में बताया गया कि आइकॉन्स हिंदुस्तान एयरोस्पेस एंड डिफेंस सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अलीगढ़ डिफेंस नोड में 125 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया गया है। तकनीकी मूल्यांकन समिति तथा भूमि आवंटन समिति द्वारा कंपनी के पक्ष में संस्तुति की जा चुकी है और आगे की प्रक्रिया प्रचलित है। मुख्यमंत्री ने जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निकट प्रस्तावित एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट हब तथा उन्नाव में एक्वा ब्रिज परियोजना की समीक्षा करते हुए कहा कि कृषि और मत्स्य आधारित उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए आधुनिक प्रोसेसिंग और निर्यात सुविधाएं विकसित की जाएं। बैठक में बताया गया कि एग्री एक्सपोर्ट हब के लिए 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में 29 एकड़ भूमि चिन्हित की जा चुकी है। वहीं उन्नाव में एक्वा ब्रिज परियोजना के लिए 60 एकड़ भूमि चिन्हित कर ली गई है, जहां फिश प्रोसेसिंग, फीड प्लांट, पैकेजिंग और निर्यात संबंधी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए आधुनिक नगरीय अवसंरचना का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता पर किया जाए। मुख्यमंत्री ने स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की बैठक में ‘सीएम समीक्षा’ में शामिल परियोजनाओं को शीर्ष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष सेल गठित कर इन परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

यूपी सरकार का बड़ा फैसला, दिल्ली-जेवर RRTS से सफर होगा सुपरफास्ट

नोएडा  उत्तर प्रदेश सरकार ने दिल्ली को जेवर में बनने वाले आगामी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने वाले रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी दे दी है. इस हाई-स्पीड ट्रांजिट रूट से दिल्ली और एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी में काफी सुधार होने और यात्रा का समय घटकर लगभग 21 मिनट रह जाने की उम्मीद है।  राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद, अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी के लिए आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) को भेज दिया गया है. यदि इसे मंजूरी मिल जाती है, तो यह कॉरिडोर NCR के तेजी से विकसित हो रहे ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।  प्रस्तावित दिल्ली-जेवर एयरपोर्ट RRTS कॉरिडोर के वर्तमान में दिल्ली-मेरठ मार्ग पर चल रही 'नमो भारत' रैपिड रेल प्रणाली की तर्ज पर ही काम करने की उम्मीद है. इन ट्रेनों को अधिकतम 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिज़ाइन किया गया है और ये 160 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति से चल सकती हैं।  वर्तमान में, दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर भारत की एकमात्र चालू RRTS लाइन है. यह 82.15 किलोमीटर लंबा मार्ग दिल्ली के सराय काले खां को उत्तर प्रदेश के मोदीपुरम से जोड़ता है और देश में क्षेत्रीय हाई-स्पीड शहरी परिवहन  का पहला उदाहरण है।  उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता के अनुसार, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में एयरपोर्ट टर्मिनल पर एक समर्पित स्टेशन के माध्यम से दिल्ली-जेवर RRTS को आगामी दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल परियोजना से जोड़ने का भी प्रस्ताव दिया गया है. इस कदम से एक एकीकृत परिवहन नेटवर्क  तैयार हो सकता है, जो हवाई यात्रा को हाई-स्पीड रेल बुनियादी ढांचे से जोड़ेगा।  एयरपोर्ट कनेक्टिविटी यह विकास ऐसे समय में हुआ है जब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उड़ान संचालन की तैयारी कर रहा है, जिसके 15 जून से शुरू होने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल की शुरुआत में 28 मार्च को इस एयरपोर्ट परियोजना का उद्घाटन किया था।  अधिकारियों को उम्मीद है कि नया हवाई अड्डा उत्तर भारत में एक बड़े विमानन और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभरेगा, जिससे यात्रियों और व्यवसायों के लिए कुशल कनेक्टिविटी बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी. एक्स (X) पर एक पोस्ट में, गुप्ता ने कहा कि एक उच्च स्तरीय बैठक में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र के "समग्र और नियोजित विकास" की समीक्षा की गई, जिसमें जेवर एयरपोर्ट से जुड़ी कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया।  मंत्री ने अधिकारियों को विकास कार्यों को प्रभावित करने वाली कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के निर्देश भी दिए. इसके साथ ही, विभिन्न विभागों को पारदर्शिता में सुधार करने और स्थानीय निवासियों व किसानों के लिए मुआवजा तंत्र NOC की प्रक्रियाओं को सरल बनाने के निर्देश दिए गए।  जेवर एयरपोर्ट के चालू होने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में तेजी से औद्योगिक विस्तार होने की भी उम्मीद है. अधिकारियों ने बताया कि इस क्षेत्र को प्रमुख परिवहन गलियारों से जोड़ा जा रहा है, जिनमें आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे शामिल हैं. बैठक के दौरान इस क्षेत्र के लिए नियोजित कई औद्योगिक और विनिर्माण परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई, जो इस पूरे इलाके को एक लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास हब में बदलने के सरकार के व्यापक विजन को रेखांकित करती है। 

$1 ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य को गति देगा मेगा प्रोजेक्ट, रोजगार, निवेश और वैश्विक कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा बूस्ट

लखनऊ/नोएडा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होने जा रहा है। 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसके शुभारंभ के साथ ही यह मेगा प्रोजेक्ट केवल एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक मजबूत स्ट्रैटेजिक इंजन के रूप में सामने आएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप विकसित यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के लंबे समय से “लैंड-लॉक्ड” आर्थिक पोटेंशियल को अनलॉक करेगा और कृषि, एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन व उद्योगों को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ेगा। बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, निवेश आकर्षण और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के चलते यह परियोजना न केवल प्रदेश की जीडीपी को नई गति देगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर एक मजबूत पहचान भी दिलाएगी। किसानों की आय में 20–30% तक वृद्धि की संभावना पूर्व सीएफओ, एयर इंडिया सैट्स और यूपीडीएफ के चेयरमैन सीए पंकज जायसवाल के अनुसार, भारत का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनने जा रहा यह प्रोजेक्ट 7 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता और लगभग 10 लाख टन कार्गो हैंडलिंग के साथ कृषि, एमएसएमई और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई गति देगा। इसके जरिए फल, सब्जी, डेयरी और सजावटी फूल जैसे पेरिशेबल उत्पाद सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचेंगे, जिससे “फार्म-टू-ग्लोबल मार्केट” मॉडल मजबूत होगा और किसानों की आय में 20–30% तक वृद्धि की संभावना है। साथ ही, लॉजिस्टिक्स लागत घटने, निर्यात बढ़ने और वैश्विक कनेक्टिविटी बेहतर होने से उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मानचित्र पर एक सशक्त पहचान मिलेगी। जीडीपी में 1% की वृद्धि संभव उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश में व्यापार और पर्यटन के नए आयाम स्थापित करने जा रहा है। यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर, आगरा, मथुरा, वृंदावन और वाराणसी जैसे प्रमुख धार्मिक शहरों को एक वैश्विक पर्यटन सर्किट से जोड़ेगा, जिससे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों की आवाजाही में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। बेहतर कनेक्टिविटी के चलते धार्मिक पर्यटन, मेडिकल टूरिज्म और बिजनेस ट्रैवल को भी नई गति मिलेगी। जब यह एयरपोर्ट अपने पूर्ण क्षमता के साथ संचालित होगा, तो इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव से उत्तर प्रदेश की जीडीपी में 1 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि संभव है, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा। रोजगार सृजन का बनेगा बड़ा केंद्र नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का प्रमुख इंजन बनने जा रहा है। पंकज जायसवाल के अनुसार, शुरुआती 5 वर्षों में एयरपोर्ट ऑपरेशन, ग्राउंड हैंडलिंग, सिक्योरिटी, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में 20,000 से अधिक तथा एमआरओ, कार्गो, लॉजिस्टिक्स और एविएशन सर्विसेज में 30,000 से अधिक, कुल मिलाकर 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। वहीं कृषि, ट्रांसपोर्ट, सप्लाई चेन, एमएसएमई, होटल और पर्यटन जैसे सेक्टर्स में 5 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जो लंबी अवधि में 40–50 लाख तक पहुंच सकते हैं। प्रदेश में मौजूद लगभग एक करोड़ एमएसएमई को वैश्विक बाजार से जोड़कर यह एयरपोर्ट न केवल रोजगार बढ़ाएगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी व्यापक स्तर पर गति देगा। रियल एस्टेट और इंडस्ट्री को मिलेगा व्यापक बूस्ट जेवर एयरपोर्ट के विकास के साथ उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट और औद्योगिक परिदृश्य में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यीडा) तेजी से एक प्रीमियम निवेश और औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरेंगे, वहीं बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा-वृंदावन तक अर्बन एक्सपेंशन कॉरिडोर विकसित होकर नए शहरों और टाउनशिप को जन्म देगा। एयरपोर्ट के आसपास होटल, वेयरहाउस, ऑफिस स्पेस, लॉजिस्टिक्स पार्क और डेटा सेंटर में बड़े निवेश आकर्षित होंगे, जिससे रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल जैसे निर्यात-उन्मुख उद्योगों को नई गति मिलेगी, जो इस क्षेत्र को एक मजबूत इंडस्ट्रियल और एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करेगा। इंडस्ट्रियल सेक्टर को नई रफ्तार एयरपोर्ट के संचालन से उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र को उल्लेखनीय गति मिलने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी और कम लॉजिस्टिक्स लागत के चलते इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख सेक्टर तेजी से विकसित होंगे। खासकर निर्यात उन्मुख उद्योगों को वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे उत्पादन और निवेश दोनों में वृद्धि होगी। यह एयरपोर्ट इंडस्ट्री के लिए एक मजबूत सप्लाई चेन नेटवर्क तैयार करेगा, जो उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका  वैश्विक एविएशन हब बनने की क्षमता जेवर एयरपोर्ट को केवल दिल्ली-एनसीआर के सहायक एयरपोर्ट के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के एक बड़े मल्टी-मोडल इंटरनेशनल एविएशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करते हुए एयर ट्रैफिक को संतुलित करेगा। 5 रनवे की प्रस्तावित क्षमता के साथ यह देश का सबसे बड़ा एविएशन हब बनने की दिशा में अग्रसर है। इसकी रणनीतिक स्थिति इसे एशिया और यूरोप के बीच एक अहम ट्रांजिट केंद्र बना सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी में बड़ा विस्तार होगा। साथ ही, बदलते वैश्विक हालात के बीच यह दुबई, दोहा और अबु धाबी जैसे स्थापित हब के विकल्प के रूप में उभरकर भारत की एविएशन क्षमता को नई ऊंचाई देने की क्षमता रखता है। एमएसएमई और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगा मेगा बूस्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की रणनीतिक लोकेशन इसे एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर के लिए गेमचेंजर बनाती है। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के करीब होने के साथ-साथ यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अन्य प्रमुख हाईवे से इसकी मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी इस क्षेत्र को देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब बना सकती है। इसके परिणामस्वरूप वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज और ई-कॉमर्स फुलफिलमेंट सेंटर में तेजी से विस्तार होगा, जिससे सप्लाई चेन अधिक कुशल बनेगी। साथ ही, भारत में 13–14% तक रहने वाली लॉजिस्टिक लागत में कमी आने से एमएसएमई सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और निर्यात को नई गति मिलेगी। निवेश और विदेशी कंपनियों के लिए बढ़ेगा आकर्षण नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास विकसित हो रही एयरोसिटी, लॉजिस्टिक्स पार्क और इंडस्ट्रियल क्लस्टर उत्तर प्रदेश को निवेश का नया केंद्र बना रहे हैं। राज्य सरकार की एफडीआई-फ्रेंडली नीतियों और बेहतर “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” माहौल के चलते घरेलू और विदेशी निवेशकों का रुझान तेजी … Read more

जेवर एयरपोर्ट के लोकार्पण की तैयारियां अंतिम चरण में, व्यवस्थाएं पूरी तरह चाक-चौबंद

जेवर एयरपोर्ट के लोकार्पण की तैयारियां अंतिम चरण में, सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद सुरक्षा, ट्रैफिक, पार्किंग और निगरानी व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट 28 मार्च को पीएम मोदी करेंगे जेवर एयरपोर्ट का लोकार्पण योगी सरकार की पहल से साकार हुई परियोजना गौतमबुद्धनगर  नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 28 मार्च को होने वाले लोकार्पण कार्यक्रम को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच गईं हैं। पीएम मोदी द्वारा सम्पन्न होने वाले उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन पूरी मुस्तैदी से व्यवस्था को अमली जामा पहनने में जुट गया है। सभी विभागों को सौंपे गए दायित्वों पर तेजी से काम पूरा किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय भूमिका और लगातार प्रयासों से यह महत्वाकांक्षी परियोजना मूर्त रूप लेने जा रही है। सीएम योगी के विजन के चलते यह प्रोजेक्ट प्रदेश के विकास का बड़ा प्रतीक बनकर उभर रहा है। सभी व्यवस्थाओं को दिया जा रहा अंतिम रूप जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में की गई समीक्षा के बाद सभी विभाग अपनी जिम्मेदारियों को अंतिम रूप देने में लग गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, मार्ग संचालन, चिकित्सा सुविधा, अग्निशमन, विद्युत आपूर्ति, साफ-सफाई, पेयजल, बैरिकेडिंग, साइनेज और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम सहित सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सीसीटीवी कैमरों से हो रही निगरानी कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड, पार्किंग और आगमन-प्रस्थान मार्गों को पूरी तरह व्यवस्थित किया जा चुका है, वहीं ट्रैफिक सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी बढ़ाई गई है और कंट्रोल रूम से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। वीवीआईपी, जनप्रतिनिधियों, उद्यमियों, अधिकारियों और आमजन की संभावित बड़ी संख्या को देखते हुए साफ-सफाई, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। सीएम योगी स्वयं ले रहे पल-पल का अपडेट प्रदेश सरकार द्वारा इस प्रोजेक्ट को निवेश, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देगा। प्रशासनिक स्तर पर लगातार निगरानी के साथ यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यह ऐतिहासिक लोकार्पण कार्यक्रम पूरी तरह सुव्यवस्थित और सफलतापूर्वक संपन्न हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं पल-पल का अपडेट ले रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एयरपोर्ट का निरीक्षण कर सभी तैयारियों का जायजा लिया और अधिकारियों को उचित दिशा निर्देश भी प्रदान किए।

दिल्ली, आगरा और एनसीआर से मजबूत कनेक्टिविटी ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा

यमुना एक्सप्रेस-वे सिर्फ सड़क नहीं विकास कॉरिडोर के रूप में किया गया है विकसित लखनऊ, उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में यमुना एक्सप्रेस-वे मात्र एक सड़क नहीं बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी नीति और निर्णायक नेतृत्व का प्रतीक है। जिस मार्ग को कभी केवल दिल्ली और आगरा को जोड़ने वाले कॉरिडोर के रूप में देखा जाता था, वही आज प्रदेश के औद्योगिक पुनर्जागरण की रीढ़ बन गया है। योगी सरकार ने यमुना एक्सप्रेस-वे को ट्रैफिक सुविधा तक सीमित न रखते हुए इसे निवेश, रोजगार और नियोजित शहरीकरण के सबसे बड़े इंजन के रूप में विकसित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में इन्फ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास का ऐसा मॉडल अपनाया है, जिसने प्रदेश की छवि बदली है। एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर औद्योगिक क्लस्टर, आधुनिक अर्बन सेंटर्स और लॉजिस्टिक्स हब का विकास इस बात का प्रमाण है कि सरकार की नीति अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं बल्कि जमीन पर परिणाम देने वाली साबित हो रही है। यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र आज उस नए उत्तर प्रदेश की पहचान बन रहा है जहां निवेशकों को भरोसा, युवाओं को रोजगार और प्रदेश को आर्थिक मजबूती मिल रही है। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ़ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी का कहना है कि यमुना एक्सप्रेस-वे के आस-आस विकसित हो रहीं परियोजनाएं उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बुलंदी पर पहुँचाने का काम कर रही है। ये प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनामी की ओर ले जाएंगी। यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के माध्यम से सरकार ने नियोजित विकास का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है जो उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूती के साथ स्थापित करेगा। 3000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह औद्योगिक विकास क्षेत्र दो चरणों में विकसित किया जा रहा है। इसमें औद्योगिक, आवासीय, वाणिज्यिक और मिश्रित भूमि उपयोग की स्पष्ट योजना बनाई गई है, जिससे अनियोजित शहरीकरण पर नियंत्रण संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा स्पष्ट रही है कि विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे बल्कि उसका लाभ आसपास के जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी पहुंचे। यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे विकसित हो रहा औद्योगिक क्लस्टर इसी सोच का परिणाम हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क, बिजली जल निकासी और अन्य आधारभूत सुविधाओं के साथ यह क्षेत्र निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। दिल्ली आगरा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से मजबूत कनेक्टिविटी ने यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र को लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग के लिए आदर्श बना दिया है। इसके साथ ही जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट इस पूरे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने जा रहा है। योगी सरकार ने एयरपोर्ट को केंद्र में रखकर औद्योगिक शहरों, लॉजिस्टिक्स हब और रोजगार केंद्रों की एक पूरी श्रृंखला विकसित करने की योजना बनाई है। यमुना एक्सप्रेस-वे की प्रमुख परियोजनाएं – जेवर के पास एचसीएल फॉक्सकॉन की ओसैट यूनिट – ओसैट यूनिट को लेकर भूमि पूजन जनवरी, 2026 में संभावित – एक हजार एकड़ का सेमीकंडक्टर और ईएमसी पार्क – मेडिकल डिवाइस पार्क और डेटा सेंटर पार्क का विकास – विवो, एलजी और हावेल्स जैसी प्रमुख कंपनियों द्वारा फैक्ट्रियों की स्थापना – वाईईआईडीए को मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब को मंजूरी – एयरपोर्ट एक्सप्रेस-वे और आरआरटीएस से मजबूत कनेक्टिविटी – दो सौ से अधिक नई फैक्ट्रियां निर्माणाधीन – सेमीकंडक्टर पार्क से बड़े स्तर पर रोजगार की संभावना – लॉजिस्टिक्स और हाई टेक हब के रूप में विकसित हो रहा है – जेवर एयरपोर्ट और औद्योगिक जोन से रियल एस्टेट, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में नए अवसर

न लाइन, न कार्ड: जेवर एयरपोर्ट पर चेहरा ही बनेगा आपका बोर्डिंग पास

नोएडा हवाई सफर करने वालों के लिए अब तक की सबसे बड़ी खुशखबरी. सोचिए, आपको एयरपोर्ट पर न बार-बार बोर्डिंग पास दिखाना पड़े, न लंबी लाइन में धक्के खाने पड़े और न ही ID दिखाने की टेंशन हो? जी हां, ये सपना अब सच होने वाला है. क्योंकि देश का सबसे नया और मॉडर्न नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) एक ऐसी टेक्नोलॉजी ला रहा है, जो आपकी एंट्री बस आपके चेहरे की पहचान से कर देगी. अब आपका चेहरा ही आपका 'एंट्री पास' होगा. इस कमाल की सुविधा को 'डिजी यात्रा' नाम दिया गया है और यह एयरपोर्ट को पूरी तरह से पेपरलेस बनाने वाला है. हाई-टेक होने जा रहा है नोएडा एयरपोर्ट जेवर में बन रहा नोएडा एयरपोर्ट अब अपने आखिरी चरण में है. यहां अंदरूनी फिनिशिंग का काम तेजी से चल रहा है. यह एयरपोर्ट सिर्फ बिल्डिंग नहीं है, बल्कि यह डिजिटल-1 (Digital-1) की सोच के साथ बनाया जा रहा है. इसका सीधा मतलब है कि यह एयरपोर्ट यात्रियों को एकदम आसान, तेज और आधुनिक सफर का अनुभव देगा. इस पूरे डिजिटल कामकाज में स्विस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, यानी टेक्नोलॉजी एकदम वर्ल्ड क्लास होगी. ऐसे काम करेगी डिजी यात्रा अगर आप नोएडा एयरपोर्ट से सफर करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपको बस एक छोटा सा काम करना होगा. ऐप डाउनलोड करने के बाद, आपको उसमें अपनी जरूरी जानकारी, खास तौर पर अपने आधार कार्ड की डिटेल और फ्लाइट टिकट की बुकिंग जानकारी डालकर अपडेट करनी होगी. यह सब करने के बाद, जब आप एयरपोर्ट पहुंचेंगे, तो आपको बार-बार किसी स्टाफ को टिकट या ID दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि एंट्री गेट पर लगी खास मशीन आपके चेहरे को स्कैन करके तुरंत पहचान लेगी. इस मशीन का नाम है 'फेस रिकग्निशन' टेक्नोलॉजी. जिसकी मदद से आप सिक्योरिटी चेक से लेकर बोर्डिंग गेट तक बिना किसी रुकावट के और तेजी से चेक-इन कर पाएंगे. यह सुविधा पहले से ही दिल्ली, बेंगलुरु, वाराणसी, रांची, पटना और मुंबई जैसे कुछ बड़े एयरपोर्ट पर है, लेकिन नोएडा एयरपोर्ट में इसे पूरे एयरपोर्ट संचालन का आधार बनाया जा रहा है. डिजिटल के साथ-साथ सुविधा भी शानदार नोएडा एयरपोर्ट सिर्फ एंट्री ही आसान नहीं कर रहा है, बल्कि पूरा सिस्टम स्मार्ट बना रहा है. यहां आपको अपने बैग जमा करने के लिए (सेल्फ-बैग ड्रॉप) और विमान में चढ़ने के लिए (सेल्फ-बोर्डिंग गेट) अत्याधुनिक मशीनें मिलेंगी. इससे वेटिंग टाइम बहुत कम हो जाएगा और काम जल्दी होगा. इतना ही नहीं एयरपोर्ट के सभी गेट 'डिजी यात्रा' से लैस होंगे. यानी हर कदम पर तेज, सुरक्षित और पेपरलेस यात्रा संभव होगी. इन सबके अलावा यात्रियों को टर्मिनल बिल्डिंग से सीधे विमान तक पहुंचाने के लिए 10 एयरोब्रिज बनाए गए हैं. इतनी ज्यादा संख्या होने से एक साथ कई विमान आने पर भी यात्रियों को भीड़ का सामना नहीं करना पड़ेगा. इस बड़े डिजिटल बदलाव का फायदा सिर्फ हवाई यात्रियों तक ही सीमित नहीं रहेगा. एयरपोर्ट पर सामान लाने-ले जाने (कार्गो ऑपरेशन), पूरी व्यवस्था (लॉजिस्टिक्स) और एयरपोर्ट का प्रबंधन जैसे सभी काम भी अब स्मार्ट हो जाएंगे. इस पहल के दम पर भारत उन गिने-चुने देशों की कतार में शामिल हो जाएगा, जहां एयरपोर्ट का पूरा अनुभव पूरी तरह से डिजिटल होगा.  सुरक्षा और स्वच्छता पर पूरा ध्यान नोएडा एयरपोर्ट के जल्द शुरू होने से पहले पूरे परिसर में सफाई, सौंदर्यीकरण और यात्री सुविधाओं को दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है. सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है. इसके लिए एयरपोर्ट क्षेत्र में दो नए पुलिस थाने बनाए जा रहे हैं और पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है. इतना ही नहीं सड़क और कनेक्टिविटी का काम भी अंतिम चरण में है ताकि यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने में कोई दिक्कत न हो.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप बना फ्यूचर-रेडी एयरपोर्ट

लखनऊ,  जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का नया मानक स्थापित करने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप बनकर तैयार हुआ यह एयरपोर्ट जल्द ही अपनी सेवाएं शुरू कर देगा। यह न केवल देश का सबसे आधुनिक हवाई अड्डा होगा, बल्कि फ्यूचर-रेडी टेक्नोलॉजी सिस्टम से सुसज्जित डिजिटल कनेक्टिविटी का केंद्र भी बनेगा। यह एयरपोर्ट ड्यूल फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क से लैस होगा, जिससे डेटा कनेक्टिविटी पूरी तरह निर्बाध और सुरक्षित रहेगी। दो स्वतंत्र डेटा सेंटर अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किए जा रहे हैं। संपूर्ण एयरपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर एकीकृत नेटवर्क से जुड़ा होगा। एयरपोर्ट परिसर में वीडियो सर्विलांस सिस्टम लगाया जा रहा है। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब सिर्फ उड़ानों का नहीं, बल्कि डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के नए युग का प्रतीक बनने जा रहा है। सुरक्षा और सुविधा दोनों का मिलेगा लाभ यह एयरपोर्ट किसी पारंपरिक हवाई अड्डे की तरह नहीं, बल्कि एक स्मार्ट, फ्यूचर-रेडी डिजिटल नेटवर्क के रूप में आकार ले रहा है। यहां ड्यूल फाइबर ऑप्टिक कनेक्टिविटी होगी — दो स्वतंत्र नेटवर्क, जो सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी तकनीकी अड़चन के बावजूद डेटा प्रवाह कभी न रुके। दो अलग-अलग स्थानों पर बनाए जा रहे स्वतंत्र डेटा सेंटर पूरे सिस्टम का डिजिटल हृदय होंगे। इनकी मदद से टर्मिनल से लेकर रनवे, पार्किंग से लेकर सुरक्षा तंत्र सब कुछ एकीकृत नेटवर्क से जुड़ा रहेगा। हर गतिविधि, हर मूवमेंट, हर सूचना रियल टाइम में मॉनिटर और नियंत्रित होगी। एयरपोर्ट की दीवारों के पीछे एक और अदृश्य व्यवस्था होगी — वीडियो सर्विलांस सिस्टम। यह सिस्टम एयरपोर्ट के हर कोने पर नजर रखेगा। आगमन और प्रस्थान मार्गों पर लगे लाइसेंस प्लेट रिकग्निशन और ड्राइवर इमेजिंग कैमरे वाहनों की स्मार्ट ट्रैकिंग करेंगे, जिससे सुरक्षा और सुविधा दोनों बढ़ेंगी। तीन प्रमुख डिजिटल कंट्रोल हब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के डिजिटल विजन के अनुरूप, एयरपोर्ट में तीन प्रमुख डिजिटल कंट्रोल हब तैयार किए गए हैं। पहला एयरपोर्ट ऑपरेशंस सेंटर (AOC) जो पूरे एयरपोर्ट का मस्तिष्क होगा, जहां से हर गतिविधि का रियल-टाइम कंट्रोल होगा। दूसरा, सिक्योरिटी ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर (SOCC) जो एयरपोर्ट की सुरक्षा पर निरंतर नजर रखेगा। और तीसरा, एयरपोर्ट इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर (AEOC। यह किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। डिजिटल कनेक्टिविटी के स्तर पर जेवर एयरपोर्ट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वायरलेस नेटवर्क कवरेज पूरे एयरपोर्ट परिसर, रनवे और रिमोट स्टैंड्स तक विस्तृत रहेगा। यात्रियों और स्टाफ के लिए स्मार्ट डिजिटल एक्सेस और रियल-टाइम सूचना प्रणाली भी उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत इस एयरपोर्ट को टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो न केवल आज की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि भविष्य की एआई आधारित सुरक्षा और स्वचालित संचालन प्रणाली का भी समर्थन करेगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को डिजिटल एविएशन नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बनाएगी। जेवर एयरपोर्ट न केवल राज्य की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा, बल्कि तकनीकी उत्कृष्टता, सुरक्षा और दक्षता के क्षेत्र में भारत की पहचान को भी मजबूत करेगा।

एशिया की नई विकास राजधानी: जेवर से उड़ान भरेगा दिल्ली-NCR का भविष्य

नई दिल्ली दिल्ली-NCR क्षेत्र में अब तक लगभग 3.5 करोड़ लोग रहते हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले बीस सालों में यह क्षेत्र दक्षिण में गुड़गांव और पूर्व में नोएडा की तरफ काफी फैल चुका है। इस विस्तार के चलते दिल्ली-एनसीआर टोक्यो के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहरी इलाका बन गया है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, अगले चार सालों में यह क्षेत्र टोक्यो को भी पीछे छोड़ देगा। दिल्ली-एनसीआर के तेजी से विकास में सबसे बड़ा योगदान नोएडा के जेवर में बनने वाले नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का होगा। इस एयरपोर्ट का नाम नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (NIA) रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिसंबर से यहां से कॉमर्शियल उड़ानें शुरू होने वाली हैं। यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार और स्विस कंपनी ज्यूरिख एजी के सहयोग से विकसित किया गया है। पूर्वी क्षेत्र के लिए खुलेंगे विकास के दरवाजे मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे की तरह, नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (NIA) भी क्षेत्रीय विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। जहां इंदिरा गांधी हवाई अड्डा दक्षिणी दिल्ली के विकास का कारण बना, वहीं नोएडा एयरपोर्ट पूर्वी दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों जैसे मेरठ, गाजियाबाद, मथुरा और आगरा को जोड़कर इस क्षेत्र के विकास को नई दिशा देगा। जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शहर से लगभग 60 किलोमीटर दूर है। शुरुआत में इस एयरपोर्ट में एक रनवे और एक टर्मिनल (T1) होगा, जो सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभाल सकता है। भविष्य में इस एयरपोर्ट को बढ़ाकर सालाना 7 करोड़ यात्रियों की क्षमता तक ले जाया जाएगा। इसके साथ ही आने वाले वर्षों में यहां कार्गो हब, विमान मरम्मत केंद्र जैसी आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी, जिससे यह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन जाएगा। शुरुआती दौर में 10 शहरों से शुरू होंगी उड़ाने मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि शुरुआती दौर में कम से कम 10 शहरों से नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (NIA) के लिए सीधे उड़ानें शुरू होंगी। मंत्री ने बताया कि इससे यात्रियों को सुविधा मिलेगी और आसपास के इलाके आर्थिक रूप से मजबूत होंगे। इस पहल से दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों के विकास को भी बल मिलेगा। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पूरी तरह से आधुनिक तकनीक से लैस होगा। यात्री यहां स्पर्शरहित (contactless) सफर की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे, जिससे यात्रा और भी तेज और आरामदायक होगी। सुरक्षा जांच में 3डी स्कैनर और बॉडी स्कैनर जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, हवाई अड्डे में दो आरामदायक लाउंज और एक खास वीआईपी टर्मिनल भी मौजूद होगा, जो यात्रियों को बेहतर सुविधा और अनुभव प्रदान करेगा। यात्रियों को खास अनुभव देने के लिए तैयार मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (NIA) के सीईओ क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने बताया कि यह एयरपोर्ट स्विस दक्षता और भारतीय गर्मजोशी के मिश्रण से डिजाइन किया गया है। यह हवाई अड्डा आधुनिक वास्तुकला और क्षेत्रीय सांस्कृतिक तत्वों को जोड़कर बनाया गया है, जिससे यात्रियों को यात्रा के दौरान एक खास और यादगार अनुभव मिलेगा। जब इंदिरा गांधी हवाई अड्डा और नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (NIA) साथ मिलकर काम करेंगे, तो दिल्ली-NCR क्षेत्र में कॉमर्शियल, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल कनेक्टिविटी की गति दोगुनी हो जाएगी। इससे न केवल इस क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा, बल्कि यहां रहने वाले लोगों की जीवनशैली भी बेहतर बनेगी। यह पहल दिल्ली-एनसीआर को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी और सुलभ बनाएगी।