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एक्सप्रेस-वे पर नया नियम लागू, छोटे कमर्शियल वाहनों की आवाजाही पर रोक; कार और पैसेंजर बसों को छूट

मुंबई मुंबई से पुणे का सफर करने वालों के लिए एक जरूरी खबर है. मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के नए कनेक्टिंग लिंक पर अब हर तरह के वाहन नहीं चल सकेंगे. महाराष्ट्र हाईवे पुलिस ने इस रास्ते पर माल ढोने वाले वाहनों की आवाजाही पर स्थायी रोक लगाने का फैसला किया है. यह नियम 1 नवंबर से लागू होगा. प्रशासन ने यह फैसला टनल की बनावट और तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यात्रियों की सुरक्षा के लिए लिया है।  खास बात यह है कि इस प्रतिबंध के दायरे में छोटे कमर्शियल वाहन, पिकअप वैन और टाटा ऐस जैसे वाहन भी आएंगे. हालांकि, प्राइवेट कार और पैसेंजर बसों को इस रास्ते से चलने की अनुमति होगी. महाराष्ट्र हाईवे पुलिस की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के कनेक्टिंग लिंक पर मालवाहक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।   इस सूचना को ट्रैफिक डिपार्टमेंट के एडिशनल डायरेक्टर जनरल प्रवीण सालुंखे ने जारी किया है. यह कनेक्टिंग लिंक पहले 'मिसिंग लिंक' के नाम से जाना जाता था. नए नियम 1 नवंबर से लागू होंगे और अगले आदेश तक प्रभावी रहेंगे।  इन वाहनों को परमिशन नए नियमों के तहत प्राइवेट कार, जीप और अन्य हल्के नॉन-कमर्शियल व्हीकल इस कनेक्टिंग लिंक का इस्तेमाल कर सकेंगे. पैसेंजर बसों और दूसरे यात्री वाहनों को भी यहां से गुजरने की अनुमति दी गई है. हालांकि, माल ढोने वाले सभी वाहनों को इस रास्ते पर जाने से रोक दिया गया है. इसमें छोटे कमर्शियल वाहन, पिकअप वैन और टाटा ऐस जैसे वाहन भी शामिल हैं।  इसके अलावा, ज्वलनशील पदार्थ, विस्फोटक या अन्य खतरनाक सामग्री ले जाने वाले वाहनों को भी इस हिस्से से गुजरने की अनुमति नहीं होगी. ऐसे वाहनों को मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के पुराने मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ेगा।  स्पीड लिमिट भी हुई तय कनेक्टिंग लिंक पर चलने वाले वाहनों के लिए मैक्सिमम स्पीड लिमिट भी तय की गई है. प्राइवेट कारों और अन्य हल्के मोटर वाहनों के लिए अधिकतम रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है. वहीं, यात्री बसों और दूसरे यात्री वाहनों को अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चलने की अनुमति होगी।  प्रशासन के मुताबिक, टनल के डिजाइन और तकनीकी विशेषताओं को देखते हुए ये प्रतिबंध लगाए गए हैं. इसका उद्देश्य इस रास्ते पर सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. इसलिए 1 नवंबर से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के इस नए लिंक का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को यात्रा से पहले नए नियमों की जानकारी रखना जरूरी होगा। 

उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का होगा विस्तार, 8,200 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की तैयारी

 लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने पैसेंजर और कार्गो मोबिलिटी को रफ्तार देने के लिए तीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए लगभग 8,200 हेक्टेयर जमीन एक्वायर करने की योजना बनाई है।  इन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों में 320 किलोमीटर लंबा विंध्य एक्सप्रेसवे, 145 किलोमीटर लंबा मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे और 100 किलोमीटर लंबा विंध्य पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे शामिल है. एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, जमीन एक्वायर की पूरी प्रक्रिया में सरकारी खजाने से ₹15,000 करोड़ से अधिक खर्च किए जाएंगे।  एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मौजूदा और आने वाले एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश को 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में तेजी लाने में मदद करेंगे. वहीं, इन तीनों प्रोजेक्ट को नोडल एजेंसी, उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी डेवलप कर रही है।  एक्सप्रेसवे UP के 650 गांवों से होकर गुजरेंगे यूपी सरकार ने तीनों एक्सप्रेसवे के अलाइनमेंट को भी अंतिम रूप दे दिया है. ये एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के लगभग 650 गांवों और उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से होकर गुजरेंगे. तीनों प्रोजेक्ट में सबसे बड़े, विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए पूर्वी यूपी के 109 गांवों में लगभग 4,615 हेक्टेयर जमीन को एक्वायर करना होगा।  विंध्य एक्सप्रेसवे, 594 km लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को प्रयागराज, भदोही और मिर्ज़ापुर ज़िलों से होते हुए सोनभद्र तक बढ़ाएगा. इसी तरह, मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश के मेरठ से उत्तराखंड के हरिद्वार तक बढ़ाएगा।  इस प्रोजेक्ट के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा और बिजनौर जिलों के 184 गांवों और उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में करीब 2,020 हेक्टेयर जमीन एक्वायर करने की जरूरत होगी।  बता दें, भारत के सबसे लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को किया। 

बिहार के 8 जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे, 4 की जगह 6 लेन बनाने की तैयारी

पटना  बिहार के आठ जिलों से होकर गुजरने वाली गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के निर्माण पर संकट मंडराने लगा है। अगर केन्द्रीय कैबिनेट की जल्द स्वीकृति नहीं मिलती है तो भूमि अधिग्रहण कार्य प्रभावित हो सकता है। इसको लेकर पथ निर्माण विभाग ने केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से आग्रह किया है कि जन-निजी भागीदीर के तहत इसके निर्माण की जल्द मंजूरी दें। साथ ही विभाग ने इस परियोजना को चार से बढ़ाकर छह लेन के रूप में विसकित करने का अनुरोध किया है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस परियोजना को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति की मंजूरी के लिए भेजा है। इसकी मंजूरी मिलने के बाद ही इस सड़क के निर्माण की दिशा में कदम आगे बढ़ेंगे। उधर, किशनगंज को छोड़कर अन्य जिलों के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसमें बताया गया है कि कौन-कौन सी जमीन किस जिले में चिह्नित की गई है। विभाग ने कहा है कि इस साल के अंत तक अगर भूमि अधिग्रहण का अगला चरण शुरू नहीं हुआ तो नये सिरे से इसकी अधिसूचना जारी करनी पड़ेगी। इसकी वजह यह है कि भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना के सालभर के भीतर जमीन किसानों से लेने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके पूर्व किसानों को उनकी जमीन परियोजना के दायरे में आने तथा अधिग्रहण के संबंध में सूचना दी जाती है। यदि दूसरे चरण के अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू नहीं हुई तो इस एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण के कार्य में विलंब होने की आशंका है। विभाग ने कहा है कि गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को चार लेन की जगह छह लेन बनाने का आग्रह पूर्व में भी किया गया था, जिस पर अभी तक सहमति नहीं मिली है। बिहार के इन जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 568 किलोमीटर है। बिहार में इसकी लंबाई करीब 417 किलोमीटर है। यह राज्य के आठ जिलों पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से गुजरेगा। इस एक्सप्रेस-वे की शुरुआत गोरखपुर से होगी और देवरिया होते हुए बिहार में प्रवेश करेगी। इस एक्सप्रेस-वे से चार राज्यों में आवागमन बेहतर हो सकेगा। इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम शामिल हैं।। सीतामढ़ी माता सीता की जन्मभूमि है और वहां अयोध्या की तर्ज पर मां जानकी मंदिर का निर्माण हो रहा है। इस तरह से उत्तर बिहार में धार्मिक पर्यटन को भी इस एक्सप्रेस-वे से बढ़ावा मिलेगा। बिहार से सिलीगुड़ी और फिर इसके बाद असम तक एक्सप्रेस-वे से जाना आसान हो जाएगा। इस तरह इससे कामाख्या मंदिर तक की सुगम संपर्कता मिले।

Delhi-Mumbai Expressway पर सुरक्षा का नया प्लान, पुलिस सहायता केंद्र के साथ ड्रोन से रखी जाएगी नजर

झाबुआ देश के सबसे महत्वाकांक्षी और आधुनिक सड़क प्रोजेक्ट्स में से एक 'दिल्ली-मुंबई 8-लेन एक्सप्रेस-वे' पर सफर को सुरक्षित बनाने के लिए मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले की पुलिस ने कमर कस ली है। जिले से होकर गुजरने वाले इस हाई-स्पीड एक्सप्रेस-वे पर हाल ही में असामाजिक तत्वों द्वारा पत्थरबाजी और अनाधिकृत वाहनों के प्रवेश के कारण दुर्घटनाओं की खबरें सामने आई थीं। घटनाओं को बेहद गंभीरता से लेते हुए झाबुआ पुलिस ने एक व्यापक 'एक्शन प्लान' तैयार कर उसे धरातल पर लागू कर दिया है। पुलिस का यह प्लान न केवल तकनीकी निगरानी पर आधारित है। बल्कि इसमें स्थानीय ग्रामीणों की जनसहभागिता को भी प्रमुखता दी गई है। नया पुलिस सहायता केंद्र यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उपद्रवियों में खौफ पैदा करने के लिए कुकड़ीपाड़ा-तलावड़ा रेस्ट एरिया (विश्राम क्षेत्र) में एक नया पुलिस सहायता केन्द्र शुरू कर दिया है। इस केंद्र पर सुरक्षा की कमान उप निरीक्षक गोविंद भामदरे को सौंपी है। इनके साथ 2 पुलिस आरक्षक और विशेष सशस्त्र बल के 4 हथियारबंद जवानों को 24 घंटे तैनात किया है। ड्रोन से हाई-टेक निगरानी अंधेरे का फायदा उठाकर पत्थरबाजी करने वालों पर नजर रखने के लिए पुलिस अब हाई-टेक संसाधनों का इस्तेमाल कर रही है। सभी 22 गांवों और संवेदनशील क्षेत्रों में अब ड्रोन से आसमान से निगरानी की जा रही है। साथ ही, पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया के लिए अतिरिक्त चार पहिया वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, जो रात भर एक्सप्रेस-वे पर पेट्रोलिंग कर रहे हैं। 50 किमी के दायरे में 22 संवेदनशील गांव दिल्ली-मुंबई 8-लेन एक्सप्रेस-वे झाबुआ जिले में गुजरात सीमा से लेकर माही नदी तक लगभग 50 किलोमीटर की लंबाई में फैला है। यह महत्वपूर्ण मार्ग जिले के दो प्रमुख थाना क्षेत्रों थाना थांदला और थाना काकनवानी के अंतर्गत आने वाले लगभग 22 गांवों से होकर गुजरता है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि एक्सप्रेस-वे पर असामाजिक तत्वों द्वारा विशेष रूप से शाम 06 बजे से लेकर मध्य रात्रि 12 बजे के बीच पत्थरबाजी की घटनाएं को अंजाम दिया जाता है। इसके अलावा, एक्सप्रेस-वे पर स्थानीय लोगों द्वारा दोपहिया वाहनों, तिपहिया वाहनों और मवेशियों के अनधिकृत प्रवेश के कारण भी कई गंभीर दुर्घटनाएं होने का अंदेशा बना रहता है।

मध्य प्रदेश में एक्सप्रेसवे का बड़ा नेटवर्क, भोपाल से दिल्ली-आगरा कनेक्टिविटी होगी तेज

सागर  मध्य प्रदेश के रोड प्रोजेक्ट जहां देश के दूसरे राज्यों को बेहतर कनेक्टिवटी के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं. साथ ही मध्य प्रदेश के शहरों को देश के महानगरों से जोड़ने का काम कर रहे हैं. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश में बन रहे दो एक्सप्रेस वे के चलते देश की राजधानी दिल्ली मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के करीब आ रही है. दरअसल, भोपाल ग्वालियर और ग्वालियर आगरा एक्सप्रेस वे से मध्य प्रदेश से उत्तरप्रदेश, राजस्थान और दिल्ली एनसीआर तक हाईस्पीड कनेक्टिवटी मिलने जा रही है।  भोपाल से ग्वालियर तक फोरलेन एक्सेस कंट्रोल्ड कारीडोर बनेगा, तो ग्वालियर से आगरा तक 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बनेगा. इन दोनों एक्सप्रेस वे के कम्पलीट होने के बाद भोपाल से दिल्ली के बीच की दूरी में करीब 4 घंटे का फर्क आएगा. फिलहाल इस सफर में 11-12 घंटे लगते हैं. लेकिन इन दोनों प्रोजेक्ट के कम्पलीट होने पर 7-8 घंटे का समय लगेगा. फिलहाल इन प्रोजेक्ट के निर्माण के पहले की औपचारिकताएं पूरी हो रही हैं और एक अनुमान के मुताबिक, 2027 के अंत या 2028 की शुरूआत में इनका काम शुरू हो जाएगा।  भोपाल-ग्वालियर फोरलेन एक्सप्रेस वे भोपाल ग्वालियर फोरलेन एक्सप्रेस वे राजधानी भोपाल और ग्वालियर के बीच करीब 320 किमी का प्रोजेक्ट है. जो भोपाल के सूखी सेवनिया इलाके से शुरू होकर ब्यावरा, गुना, शिवपुरी होते हुए ग्वालियर तक पहुंचेगा. फिलहाल भोपाल से ग्वालियर का सफर तय करने में 425 किमी दूरी तय करना होती है, जो सीधे 100 किमी कम हो जाएगी और करीब 320 किमी का सफर तय करना होगा. फिलहाल भोपाल से ग्वालियर पहुंचने में 7-8 घंटे का समय लगता है, जो घटकर 5 से 6 घंटे रह जाएगा. मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) इस प्रोजेक्ट का DPR तैयार करने और टेंडर प्रक्रिया पर काम कर रहा है. एक अनुमान के मुताबिक 2027 के अंत या 2028 की शुरूआत में इसका काम शुरू हो जाएगा।  क्या कहते हैं जिम्मेदार पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह कहते हैं कि, ''ये दोनों प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को दिल्ली से शानदार कनेक्टिवटी देने का काम करेंगे. इन प्रोजेक्ट का काम पूरा होते ही मध्य प्रदेश के भोपाल, ग्वालियर सहित मुरैना, गुना, शिवपुरी, राजस्थान का धौलपुर और यूपी के आगरा मथुरा के साथ बेहतर कनेक्टिविटी होगी, जो दिल्ली एनसीआर को जोड़ने का काम करेगी।  इस प्रोजेक्ट के कारण भोपाल के उत्तरी इलाके की प्रापर्टी में उछाल आएगा.खासकर सागर विदिशा रोड़ पर सूखी सेवनिया से जहां रोड शुरू होगी, वहां रियल एस्टेट से जुड़े प्रोजेक्ट की कीमत बढ़ेगी. गुना और ग्वालियर बाॅयपास से गुजरने वाले इस फोरलेन पर लाजस्टिक कंपनियां अपने गोदाम, कोल्ड स्टोरेज चैन और ट्रक टर्मिनल जैसे प्रोजेक्ट आ रहे हैं. एक प्रोजेक्ट पर एमपीआरडीसी और एक पर एनएचएआई काम कर रहा है।  ग्वालियर-आगरा 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे ग्वालियर से आगरा को जोड़ने के लिए 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का प्रोजेक्ट प्रस्तावित है, जो ग्वालियर के सुसेरा बाॅयपास से शुरू होगा. जो राजस्थान के धौलपुर से आगरा, आगरा इनर रिंग रोड से मथुरा और मथुरा से दिल्ली एनसीआर को जोड़ देगा. इसकी लंबाई करीब 90 किमी होगी. इसकी प्रारंभिक लागत 4600 करोड़ आंकी गयी है. इस प्रोजेक्ट के लिए तीनों राज्यों में करीब 549 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी।  फिलहाल भोपाल से आगरा जाने में करीब 11-12 घंटे समय लगता है. इस सिक्स लेन प्रोजेक्ट के पूरा होने पर ये सफर 7 घंटे में पूरा जाएगा. फिलहाल इस प्रोजेक्ट के लिए तीनों राज्यों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. ये प्रोजेक्ट ग्वालियर से मुरैना और मुरैना से धौलपुर, धौलपुर से आगरा और आगरा मथुरा होते हुए दिल्ली एनसीआर से कनेक्ट किया जाएगा।   

Kalyan-Latur Expressway पर बनेगी 8 किमी की टनल, सफर का समय 6 घंटे तक घटेगा

लातूर  देश के बड़े शहरों को एक-दूसरे से जोड़ने के साथ ही सरकार अन्य छोटे शहरों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दे रही है. इस कड़ी में अगला नाम है कल्याण से लातूर तक जाने वाले एक्सप्रेसवे (Kalyan-Latur Expressway)का. महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट ने इस ई-वे को मंजूरी दे दी है. यह ई-वे करीब 450 किलोमीटर लंबा होगा और इसके तैयार होने के बाद दोनों शहरों के बीच सफर में लगने वाला समय 11 घंटे से घटकर महज 5 घंटे का रह जाएगा।  यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बन रही बदलापुर टनल के उत्तर से ही शुरू होगा और महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा के पास लातूर में निकलेगा. इसकी कुल लंबाई 450 किलोमीटर के आसपास है, जिससे महज 4.5 से 5 घंटे के सफर में पूरा किया जा सकेगा. अभी इस दूरी को तय करने में करीब 11 घंटे का समय लग जाता है. आगे चलकर यह एक्सप्रेसवे मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से भी सीधे तौर पर जुड़ जाएगा, जो नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के पास रहेगा।  8 किलोमीटर की टनल भी बनेगी इस एक्सप्रेसवे के रास्ते में 8 किलोमीटर लंबी एक टनल भी बनाई जाएगी, जो मलशेज घाट के पास होगी. यह टनल बिलकुल वैसी ही होगी जैसी इगतपुरी के पास बन रही ट्विन टनल है. यह ट्विन टनल समृद्धि एक्सप्रेसवे पर बनाई गई है. इस ई-वे पर कुल मिलाकर 17 इंटरचेंज बनाए जाएंगे. इस ई-वे को तैयार करने पर 22 से 25 हजार करोड़ का खर्चा आएगा. इस ई-वे की सबसे खास बात इसकी लंबाई नहीं, बल्कि इसका दुर्गम रास्ता है।  क्यों जरूरी है 8 किलोमीटर की सड़क मलशेज घाट पर बनने वाली 8 किलोमीटर लंबी टनल काफी मायने रखती है. इस टनल से गुजरने के लिए फ्लैट हाईवे जैसा रास्ता नहीं होगा, बल्कि इसमें तीखे मोड़ और स्लोप हैं जिस पर ट्रैफिक को काफी धीमे-धीमे गुजरना होगा. यही वजह है कि ई-वे पर सबसे जरूरी सेक्शन यह टनल ही है. यह ई-वे दो और एक्सप्रेसवे के साथ कनेक्टिविटी मजबूत करेगा, जिसकी वजह से इसकी अहमियत काफी बढ़ जाती है. इसके अलावा प्रोजेक्ट को विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर के साथ भी जोड़ा जाएगा. इससे बाद में नवी मुंबई एयरपोर्ट और अटल सेतु तक जाना भी आसान हो जाएगा. यह रास्ता मराठवाड़ा में बन रहे सूरत-चेन्नई इकनॉमिक कॉरिडोर को भी जोड़ेगा।   

भोपाल-वाराणसी सफर होगा आसान, 9,850 करोड़ की लागत से बनेगा नया एक्सप्रेसवे

भोपाल  मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए नए एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जाएगा। 9,850 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाले इस नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद भोपाल से वाराणसी की दूरी तय करने में केवल आठ घंटे का समय लगेगा। यह मार्ग दोनों राज्यों के बीच परिवहन व्यवस्था को सुगम बनाएगा। नया एक्सप्रेसवे बनने से यात्रियों के समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। वर्तमान में भोपाल से वाराणसी जाने में काफी समय लगता है, लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद यह यात्रा मात्र आठ घंटे में पूरी की जा सकेगी। बुनियादी ढांचा विकास विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह परियोजना क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगी।  यात्रा के समय में होगी भारी कटौती एक्सप्रेसवे केवल भोपाल और वाराणसी को ही नहीं जोड़ेगा, बल्कि राज्य के आंतरिक शहरों के बीच भी यात्रा को बेहद आसान और तेज बनाएगा। इस एक्सप्रेसवे की मदद से सतना से सागर की दूरी केवल तीन घंटे में तय की जा सकेगी। वर्तमान मार्ग की तुलना में यह नया मार्ग वाहन चालकों को सीधा और बाधा रहित रास्ता प्रदान करेगा।, सतना और सागर के बीच यात्रा समय में तीन घंटे की यह कटौती स्थानीय व्यापार और दैनिक यात्रियों के लिए बेहद लाभदायक साबित होगी।   9,850 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत इस परियोजना के, निर्माण कार्य पर कुल 9,850 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि का उपयोग भूमि अधिग्रहण, आधुनिक सड़क निर्माण, पुलों के निर्माण और उन्नत सुरक्षा प्रणालियों की स्थापना के लिए किया जाएगा। निर्माण प्राधिकरण के अनुसार, परियोजना में उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण मानकों का पालन किया जाएगा। बजट आवंटन के साथ ही इस एक्सप्रेसवे के निर्माण को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।    आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियों को गति नया एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों को उत्तर प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से जोड़ेगा। मध्य प्रदेश के औद्योगिक और परिवहन रिकॉर्ड के अनुसार, सतना से सागर के बीच तीन घंटे में यात्रा संभव होने से विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, भोपाल, सागर, सतना और वाराणसी के बीच माल ढुलाई और यात्रियों की आवाजाही पहले से काफी तेज और सुरक्षित होगी। 

दिल्ली से गुरुग्राम का सफर होगा और तेज, द्वारका-महिपालपुर से हरियाणा बॉर्डर तक हाईस्पीड कनेक्टिविटी

गुरुग्राम गुरुग्राम में बढ़ते ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए सरकार जल्द ही एक तीन लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना बना रही है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इसके लिए प्लान तैयार कर लिया है.  इसके बनने से दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर लगने वाला जाम काफी हद तक कम हो जाएगा. इसके लिए दिल्ली की शिव मूर्ति महिपालपुर और एम्बिएंस मॉल के पास हरियाणा बॉर्डर के बीच तीन-लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा।  यह एलिवेटेड कॉरिडोर करीब 2 कलोमीटर लंबा बनाया जा सकता है. दरअसल एक्सप्रेसवे के इसी हिस्से में सबसे ज्यादा जाम लगता है. सुबह-शाम दिल्ली-गुरुग्राम के बीच सफर करने वालों को इससे काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. खासकर ऑफिस आने-जाने वाले लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं.. हर दिन वे इस जाम से जूझते हैं. लेकिन नया एलिवेटेड रोड बनने से उनको सबसे ज्यादा राहत मिलेगी।  181 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा एलिवेटेड रोड जानकारी के मुताबिक, एलिवेटेड रोड करीब 181 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा. यह रोड तीन लेन को होगा.इसके दोनों तरफ दो-दो लेन की सर्विस रोड बनाई जाएगी.सालों से इस योजना पर विचार चल रहा है. पहले सड़क चौड़ी करने और फ्लाईओवर का प्रस्ताव रखा गया. लेकिन अब एलिवेटेड रोड बनाए जाने को ट्रैफिक जाम से मुक्ति का ज्यादा बढ़िया समाधान माना गया है।  द्वारका अंडरपास के ट्रैफिक को मिलेगा नया रोड NHAI योजना बना रहा है कि तीन-लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर रंगपुरी के पास द्वारका एक्सप्रेसवे इंटरचेंज की राइट-टर्न टनल से बनाया जाए. इसे सेक्टर 10 तक बनाए जाने की प्लानिंग है. जिससे इसे द्वारका एक्सप्रेसवे और दिल्ली-जयपुर हाईवे के बीच कनेक्ट हो सके. वहीं अंडरपास से निकलने वाले ट्रैफिक को शहर की तरफ जाने वाले एलिवेटेड सेक्शन पर भेजने का प्रस्ताव है।  राजोकरी फ्लाईओवर के समानांतर चलेगा नया रोड नए एलिवेटेड रोड के बनने के बाद NH8 से गुजरने वाले वाहनों को अंडरपास से निकलते ही शानदार कॉरिडोर मिलेगा, जिससे उनको जाम में नहीं फंसना पड़ेगा. द्वारका एक्सप्रेसवे से आने वाले ट्रैफिक को मौजूदा सड़क के ही ऊपर से ले जाने की योजना है, ताकि लोग जाम में न फंसे. बता दें कि नया एलिवेटेड रोड मौजूदा राजोकरी फ्लाईओवर के समानांतर चलेगा।  शिव मूर्ति और हरियाणा बॉर्डर के बीच होगा है भारी जाम इसका प्रस्ताव इस रूट पर ट्रैफिक की पूरी स्थिति देखने के बाद तैयार किया गया है. जिससे पता चला कि शिव मूर्ति और हरियाणा बॉर्डर के बीच NH8 के पूरे हिस्से पर पीक आवर्स में खचाखच जाम रहता है. सर्विस रोड पर भी बिल्कुल जगह नहीं होती. वाहन रेंग-रेंगकर चलते हैं. महिपाल फ्लाईओवर तक गाड़ियों की लंबी लाइनें लगी रहती हैं. जब से द्वारका एक्सप्रेसवे खुला है, तब से ये परेशानी और भी बढ़ गई है।  वर्तमान में मिलेनियम सिटी में घुसते ही शिव मूर्ति पर जाम लग जाता है. सोनीपत, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद से आने वाले वाहनों को जाम से ज्यादा जूझना पड़ता है. जिसकी वजह से एम्बिएंस मॉल की ओर जाना मुश्किल हो जाता है।  हर दिन ट्रैफिक में नहीं फंसना पड़ेगा एक सर्वे से पता चला है कि NH8 के मुख्य कैरिजवे पर हर दिन एक तरफ 1.2 लाख और दूसरी तरफ 1.6 लाख गाड़ियां होकर गुजरती हैं. सर्विस रोड और अलग-अलग इंटरचेंज रास्तों से भी हजारों गाड़ियां होकर गुजरती हैं.हालांकि दिल्ली से NH-8 पर आने वाले वाहनों को प्रस्तावित एलिवेटेड रोड पर जाने की परमिशन नहीं होगी. ये वाहन  मौजूदा चार-लेन वाले कैरिजवे पर ही चलेंगे. नया एलिवेटेड कॉरिडोर मुख्य रूप से द्वारका एक्सप्रेसवे अंडरपास से निकलने वाले वाहनों के लिए बनाया जा रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा।   

भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की तैयारी शुरू, 120 KM की रफ्तार से दौड़ेंगे वाहन

जयपुर  प्रदेश में पूर्व से पश्चिमी राजस्थान के बीच तेज और सुगम आवागमन के लिए भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 277 किलोमीटर लंबा 4 लेन एक्सप्रेस-वे जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जिलों से होकर गुजरेगा। इसके लिए 210 गांवों के 10,890 खसरों की करीब 2,600 हेक्टेयर जमीन अवाप्त की जाएगी। जयपुर जिले के दूदू के ग्राम झाग से शुरू होकर एक्सप्रेस-वे एनएच-21 पर भरतपुर के ऊंचा नगला तक पहुंचेगा। फागी से राजस्थान-उत्तर प्रदेश सीमा के बीच यात्रा समय भी 7 घंटे से घटकर करीब 2.5 से 3 घंटे रहने का अनुमान है। भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे एक्सेस कंट्रोल्ड होगा और वाहनों की अधिकतम गति 120 किमी प्रति घंटा रखी जाएगी। निर्माण पर 8,656 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसमें 5,231 करोड़ रुपए सिविल कार्य और 2,640 करोड़ रुपए भूमि अवाप्ति पर खर्च होंगे। प्रति किलोमीटर लागत करीब 31.55 करोड़ रुपए होगी। 30 पुल, 4 आरओबी, 10 इंटरचेंज और 179 अंडरपास परियोजना में 30 छोटे-बड़े पुल, रेललाइन पर चार आरओबी, सात फ्लाईओवर, 10 इंटरचेंज तथा वाहनों के लिए 179 छोटे-बड़े अंडरपास बनाए जाएंगे। एक्सप्रेस-वे ब्यावर-किशनगढ़ क्षेत्र को भरतपुर से जोड़ते हुए अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे, एनएच-448 और एनएच-21 के बीच आर्थिक गलियारा मजबूत करेगा। बढ़ती औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच एनएच-48 और एनएच-21 पर यातायात का दबाव भी कम होने की उम्मीद है। करौली में 58.8 किमी लंबाई, 7,122 पेड़ कटेंगे करौली जिले में एक्सप्रेस-वे की लंबाई 58.8 किलोमीटर होगी। करौली, नादौती, हिंडौन, श्रीमहावीरजी और सूरौठ तहसीलों के 49 गांवों में 2,256 खसरों की 637.64 हेक्टेयर निजी और 35.42 हेक्टेयर सरकारी भूमि ली जाएगी। इससे 26,539 परिवारों के 1,06,156 लोग प्रभावित होंगे। करीब 7,122 पेड़ों की कटाई भी प्रस्तावित है। परियोजना को लेकर अंतिम सामाजिक समाघात निर्धारण रिपोर्ट जारी हो चुकी है। 90 मीटर चौड़ा होगा कॉरिडोर एक्सप्रेस-वे करीब 90 मीटर चौड़ा होगा और इसकी ऊंचाई 2.5 से 7 मीटर तक रहेगी। परियोजना से राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच माल एवं यात्री परिवहन को नया वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। नया एक्सप्रेस-वे बनने से सफर होगा आसान भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने से जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जैसे जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा का समय और ईंधन खर्च कम होने की उम्मीद है। एक्सप्रेस-वे से मौजूदा सड़कों और हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा। किसानों को कृषि उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। साथ ही लॉजिस्टिक्स, उद्योग, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलने से नए रोजगार और निवेश के अवसर पैदा होंगे। पूर्वी राजस्थान के शहरों और गांवों का आर्थिक विकास भी तेज हो सकता है।

रायपुर एक्सप्रेसवे से बदलेगी सफर की तस्वीर, दिल्ली-आगरा से विशाखापट्टनम तक मिलेगी तेज कनेक्टिविटी

रायपुर   रायपुर से विशाखापट्टनम का सफर अब महज 5 घंटे में पूरा होने वाला है. क्योंकि रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130CD) का 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह 465 किलोमीटर लंबा 6-लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बेहद अहम है. क्योंकि यह छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के बीच कनेक्टिविटी को और मजबूत करने वाला है. इस प्रोजेक्ट से मध्य भारत और पूर्वी समुद्री तट के बीच सीधा कनेक्शन जुड़ जाएगा. जिससे वाहनों का आना जाना बेहद आसान हो जाएगा. यह एक्सप्रेसवे रायपुर को विजयनगरम, नबरंगपुर, कोरापुट जैसे जिलों से सीधा कनेक्ट करने वाला है. 16 हजार 482 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2026 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है. खास बात यह है कि यह एक्सप्रेसवे दूसरे बड़े एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होने की वजह से दिल्ली-आगरा जैसे बड़े शहरों से भी कनेक्ट रहेगा।  रायपुर से विशाखापट्टनम की दूरी घंटों में पूरी अभी रायपुर से विशाखापट्टनम जाने में NH-26 सड़क की दो-लेन से होकर गुजरना पड़ता है. 597 किलोमीटर की यह कुल दूरी तय करने में 12 से 14 घंटे का समय लगता है. लेकिन नए रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे से यह सफर 132 किलोमीटर कम हो जाएगा और दोनों शहरों की कुल दूरी 465 किलोमीटर रह जाएगी. पुराने हाईवे पर गाड़ियों की रफ्तार भी कम रहती थी. लेकिन इस 6 लेन एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां 100 से 120 किलोमीटर प्रतिघंटे के रफ्तार से दौड़ सकेगी. जिससे रायपुर से विशाखापट्टनम पोर्ट की दूरी महज 5 से 6 घंटे में पूरी कर ली जाएगी।  छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में कनेक्शन     छत्तीसगढ़: रायपुर से अभनपुर, धमतरी, कांकेर, और कोंडागांव का कनेक्शन मजबूत होगा.      ओडिशा: यहां से यह एक्सप्रेसवे ओडिशा के नबरंगपुर और कोरापुट को कनेक्ट करता हुआ आगे बढ़ेगा.     आंध्र प्रदेश: विजयनगरम, अराकू घाटी और सबावरम (विशाखापट्टनम) में जाकर कनेक्ट हो जाएगा.  कैसे दिल्ली-आगरा से जुड़ेगा  इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि रायपुर केवल विशाखापट्टनम तक सीमित नहीं रहेगा. बल्कि यह  नेशनल हाईवे नेटवर्क के जरिए यह सीधे तौर पर देश के उत्तर और मध्य हिस्से के बड़े महानगरों को भी जोड़ रहा है. जिसमें NH-30, NH-34, NH-539, NH-44, यमुना एक्सप्रेसवे, ग्वालियर आगरा एक्सप्रेसवे से जुड़कर रायपुर और विशाखापट्टनम को सीधे दिल्ली, आगरा, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों से जोड़ देगा.  इसके अलावा यह आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में कोलकाता से कन्याकुमारी कॉरिडोर से भी जुड़ेगा, जिससे दक्षिण और पूर्वी भारत के बीच व्यापारिक कनेक्टिविटी मजबूत हो जाएगी।  95 प्रतिशत काम पूरा  रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे का काम 19 चरणों में चल रहा है. जिसका 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. ओडिशा के कोरापुट खंड में 95 प्रतिशत से अधिक का निर्माण पूरा हो चुका है और वर्तमान में आंध्र प्रदेश व छत्तीसगढ़ के हिस्सों में अंतिम चरण की फिनिशिंग और इंटरचेंज बनाने का काम तेजी से जारी है. छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर उदंती वन्यजीव अभयारण्य और पहाड़ी क्षेत्रों के बीच बनाई जा रही 2.79 किलोमीटर लंबी जुड़वां सुरंग का काम भी तेजी से किया जा रहा है. एक तरफ की टनल बनकर तैयार हो चुकी है. जबकि दूसरी तरफ की टनल पर भी काम शुरू हो चुका है।  सितंबर 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. जिस पर तेजी से काम किया जा रहा है. यह एक्सप्रेसवे मध्य भारत और दक्षिण भारत के बीच मजबूत कनेक्शन करने वाला हाईवे साबित होने वाला है।