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पूर्व से उत्तर भारत तक नई रफ्तार: गोरखपुर–पानीपत 747 KM एक्सप्रेसवे से चमकेगा 100 से अधिक गांवों का भविष्य

गोरखपुर  पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए गोरखपुर-बस्ती मंडल के 133 गांवों में जमीन अधिग्रहित की जाएगी। यह एक्सप्रेसवे सिद्धार्थनगर के बांसी से प्रवेश करते हुए संतकबीरनगर के मेंहदावल, गोरखपुर के सदर एवं कैंपियरगंज होते हुए कुशीनगर के हाटा तक बनेगा। गोरखपुर मंडल में इस एक्सप्रेसवे की लंबाई 86.24 किमी होगी। एनएचएआई ने भूमि अधिग्रहण के लिए चारों जिलों के जिलाधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेज दिया है। जानकारी के अनुसार, एनएचएआई ने पानीपत एक्सप्रेसवे के लिए गोरखपुर-बस्ती मंडल में सर्वे शुरू कर दिया है। इसमें बांसी के 37 गांवों में 16.69 किमी, मेंहदावल के 29 गांवों में 22.5 किमी, गोरखपुर तहसील सदर के 24 एवं कैंपियरगंज के 22 गांवों में 34.22 किमी एवं हाटा के 21 गांवों में 12.8 किमी सड़क की लंबाई होगी। 747 किमी लंबी है एक्सप्रेसवे पानीपत गोरखपुर एक्सप्रेसवे की लंबाई 747 किमी है, जो सिद्धार्थनगर से आगे बलरामपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ होते हुए आगे बनेगा। संतकबीरनगर के 20.25 किमी के बाद 280 मीटर का एरिया गोरखपुर का कवर होगा, इसके बाद 1.98 किमी एरिया संतकबीरनगर का कवर होगा। फिर इसके बाद गोरखपुर में इस एक्सप्रेसवे की लंबाई 34 किलोमीटर होगी। नयनसर के पास पानीपत एक्सप्रेसवे गोरखपुर सोनौली हाईवे को पार करेगा। डीएम दीपक मीणा ने बताया कि पानीपत गोरखपुर एक्सप्रेसवे का एलाइन्मेंट तय हो गया है। गोरखपुर के 46 गांवों से होते हुए एक्सप्रेसवे आगे जाएगा। एनएचएआई के प्रस्ताव पर जल्द भूमि अधिग्रहण अधिकारी नामित कर दिया जाएगा। इन गांवों में होगा भू-अधिग्रहण कैंपियरगंज के लक्ष्मीपुर (पचवारा), लक्ष्मीपुर(भारीवैसी), मखनहा, ठकुरापार, भरोहिया, गंगापार, रामपुर कैथवलिया, बेलघाट बुजुर्ग, रमवापुर, दोनफा, भइयाराम, जरहद, नयनसर, हिरुआ, बढ़या, चकमाफी, भुइधरपुर, साखी, ताल कोमर, कानापार, नीबा, कंदरखावा। गोरखपुर सदर बढ़नी, फुलवरिया, सियारामपुर, महराजगंज, ठाकुरपुर नंबर एक, ठाकुरपुर नंबर दो, खुटहन खास, जंगल नाकिन, जंगल डुमरी नंबर एक, रामपुर खुर्द, भिस्वा, इस्मालपुर, रामपुर बुजुर्ग, मेंहदिया, जमुनिया, पोखर भिंडा उर्फ चकदहा, समस्तपुर उर्फ मुड़िला, कोटवा, खिरिया, आराजी बरवा, रामपुर थवईपार, गंभीरपुर कम्हरिया, परशुरामपुर, सोनराइच उर्फ बड़ा गांव। बांसी, सिद्धार्थनगर बंजारी, बिमौआ खुर्द तप्पा पचहर, पचमोहनी, कम्हरिया, बहादुरपुर, डोड़वार शुक्ल, जमोहनी, जमोहना, भावपुर, पिपरा भइया, भटुली, बरनवार, सोनवा माफी, सुहईरनपुरवा, मुड़िला हिर्दन, छपवा, बेलवा लगुनही, पड़िया बुजुर्ग, रोहुआ, महोखवा, बनकटा, कड़जा, बचलाखोर, अकोल्ही, परसा, ढुढ़नी, मझारिया तप्पा मजोरा, मंझरिया तप्पा हाटा, नगवा तप्पा हाटा, नगवा तप्पा कुदारन, सोनखर तप्पा कुदारन, सोनखर तप्पा चंवर, सोनवलिया तप्पा कुदारन, मिश्रौलिया तौफिर, सिरसिया तप्पा मजोरा, पिपरा शुक्ल। मेंहदावल, संतकबीरनगर बढ़या, फेउसा, परसा माफी, परसा शुक्ल, महला, पसाई, देवकली, प्रतापपुर, जसवल, रमवापुर, खजुरा खुर्द, नचनी, समोगर, गुदरिहवा, खजुराकला, सिक्टौर माफी, कुंडवा, जमुवरिया खुर्द, जमुवरिया कला, रक्सा, भरवलिया मिश्र, कुसोना कला, जमोहरा, मुड़ली, डुमरिया बाबू, इंदरपुर, कौवाठोर, पिड़ारी कला, चितरुखिया। कुशीनगर, हाटा, रामपुर, अगया, होलिया, रामपुर माफी, मगडिहा, सिंदुरिया विशुनपुर, घोड़ादेउर, खुरहुरिया, बलुआ, तुर्कडिहा, बिंदुआर, सहजौली, सेंदुआर, मुंडेरा, खोट्ठा, सिहुलिया, टिकर, छपिया, बेलवा खुर्द, महुअवा, अहिरौली।  

2080 करोड़ की लागत से बनेगा उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई सफर होगा और तेज

उज्जैन  उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे कंट्रोल्ड हाइवे बनाने का टेंडर निरस्त होने के बाद मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) ने इस 102 किलोमीटर के हाईवे को बनाने के लिए एक बार फिर से 2418.46 करोड रुपए का टेंडर जारी किया था। इसको भरने के लिए अंतिम तारीख 24 जुलाई थी। नए टेडर 20 जून को जारी किए गए थे, जो सितंबर माह में अब खाले गए। एलएलसी वोल्गाडोरस्ट्रॉय कंपनी ने 2080 करोड़ में हाईवे बनाने का टेंडर लिया है। 2 साल में कार्य पूरा करना है।  सिंहस्थ 2028 तक एक्सप्रेसवे होना है तैयार इस कार्य में 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार के द्वारा दी जाएगी और 60 प्रतिशत राशि ठेकेदार को व्यय करनी है। इस हाइवे के बनने से उज्जैन की मुंबई व दिल्ली से दूरी मात्र 10 घंटे में पूरी हो जाएगी। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाइवे को सिंहस्थ 2028 से पहले बनाना है। पूर्व में 102.80 किमी लंबे उज्जैन-जावरा फोरलेन परियोजना को मंजूरी दी गई थी जो ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाइवे के इस जगह पर बना था। तब शहरी क्षेत्र में इसका विरोध भी काफी हुआ था, इसके लिए संघर्ष समिति ने लगातार तीन माह तक धरना भी दिया था। अब इसको पीपीपी मोड पर हाइब्रिड एनयूटी आधार पर बनाया जाएगा।  7 बड़े और 26 छोटे पुल बनेंगे हाईवे पर इस हाइवे पर 7 बड़े और 26 छोटे पुल सहित 270 पुलिया, पांच लाई ओवर और दो रेलवे ओवरब्रिज होंगे। यह मार्ग जावरा के पास ग्राम भूतेड़ा से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा। अब मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने एक बार फिर से इस कार्य के लिए टेंडर जारी किए हैं। दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे व उज्जैन रोड यहां मिलेगा ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे सफर 10 घंटे में पूरा इस हाइवे बनने के बाद उज्जैन से दिल्ली या मुंबई तक का सफर 10 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। सितंबर 2024 में उज्जैन के गांवों से जमीन अधिग्रहण शुरु हुआ था और मार्च 2025 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य था। मगर किसानों की तरफ से जमीन के बदले मुआवजा या रोड के डिजाइन को लेकर आए विरोध व तकनीकी कारणों के चलते काम रुक गया था। इसलिए इस मार्ग का दोबारा से टेंडर जारी किया गया है और जिस कंपनी ने इसे लिया है उसे 2 साल में यह कार्य पूरा करके भी देना है।  51 से अधिक गांवों से गुजरेगा हाइवे यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जावरा तहसील के 12 गांव से होता हुआ उज्जैन तक 51 गांवों से गुजरेगा। इनमें नागदा, खाचरौद, उन्हेंल तहसील के 30 गांव शामिल है। इसमें जावरा तहसील के डोडियाना, ललियान सहित जावरा तहसील के 12 गांव इसमें समिलित हो रहे हैं। अन्य तहसील के गांव जैसे निबोदिया खुर्द, पांसलोद, भाटीसुडा, आक्यानजीक, झिरनिया, पिपलिया डाबी, लसुडिया चुवंड, पिपलियाशीष, नवादा, कुंडला, नागझिरी, भाटखेडी, बंजारी, दुमनी, मीण, घिनौदा आदि गांव शामिल है। फैक्ट फाइल     स्थान : मध्य प्रदेश     लंबाई: 98.73 किमी परियोजना     इस प्रकार : ग्रीनफील्ड राजमार्ग चार-लेन का बनेगा     इन कपनी ने लिया टेंडर एलएलसी वोल्गाडोरस्ट्रॉय     राशि- 2080 करोड़     कार्य – 2 साल में करना है पूरा     मेंटेनेंस – कार्य पूरा होने के बाद 15 साल तक करना है मेंटेनेंस खुल गया है टेंडर- एमपीआरडीसी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का टेंडर खुल गया है जिस कंपनी ने यह टेंडर लिया है वह जल्द ही ड्राइंग डिजाइन बनाकर इस कार्य को शुरु करने के लिए काम करेगी।-विजय सिंह, एमपीआरडीसी

दिल्ली-NCR के लिए बड़ी खबर: जेवर एयरपोर्ट से दिल्ली तक बनेगा सुपरफास्ट एक्सप्रेसवे

नई दिल्ली दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा वासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक नया 30 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा, जो जेवर एयरपोर्ट से सीधे दिल्ली तक पहुंचेगा। यह नया एक्सप्रेसवे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के समानांतर बनाया जाएगा और यमुना नदी को पार करते हुए पुस्ता रोड के जरिए दिल्ली तक पहुंचेगा। यह सड़क नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ते हुए दिल्ली के यातायात को आसान बनाएगी। परियोजना को किसने बढ़ावा दिया? इस प्रोजेक्ट की शुरुआत गौतम बुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा के प्रयासों से हुई थी। अब इस योजना को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का भी समर्थन मिल गया है। हाल ही में जेवर एयरपोर्ट के दौरे पर उन्होंने फंडिंग देने का ऐलान भी किया। यात्रा का समय घटेगा अभी जेवर से दिल्ली तक पहुंचने में करीब 2 घंटे लगते हैं। नए एक्सप्रेसवे से यह दूरी सिर्फ 30 मिनट में तय की जा सकेगी, जिससे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। 1.20 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का हिस्सा नितिन गडकरी के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-NCR में चल रहे 1.20 लाख करोड़ रुपये के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का हिस्सा है। अब तक इनमें से आधा काम पूरा हो चुका है। आने वाले समय में सरकार यहां 40 से 50 हजार करोड़ रुपये और निवेश करने को तैयार है। भीड़भाड़ होगी कम नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर रोजाना लगभग 5 लाख वाहन चलते हैं। इनमें से करीब 2 लाख वाहन डीएनडी से गुजरते हैं। चिल्ला बॉर्डर, कालिंदी कुंज और सेक्टर 15, 16, 18, 37 जैसे क्षेत्रों से भी भारी ट्रैफिक आता है। पीक ऑवर में अक्सर जाम लग जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी होती है। नया एक्सप्रेसवे इन वाहनों को बायपास कराकर सीधे जेवर एयरपोर्ट तक ले जाएगा। जेवर एयरपोर्ट के लिए खास एक्सप्रेसवे यह एक्सप्रेसवे खासतौर पर जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। यूपी सरकार के अनुसार, 2025 के अंत तक एयरपोर्ट का संचालन शुरू हो जाएगा, जिसके बाद इस एक्सप्रेसवे की जरूरत और बढ़ जाएगी। कौन बनाएगा एक्सप्रेसवे? नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी से फंडिंग को लेकर चर्चा की गई है। तीनों अथॉरिटीज़ का सुझाव है कि यह प्रोजेक्ट NHAI (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) को सौंपा जाए ताकि केंद्र सरकार और अन्य स्रोतों से मिलने वाली फंडिंग का सही उपयोग हो सके।  दिल्ली-NCR के लोगों को ट्रैफिक की परेशानी से राहत देने और जेवर एयरपोर्ट से दिल्ली की कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए यह नया एक्सप्रेसवे एक गेमचेंजर साबित हो सकता है।